{i1:1} इस्राएल की गिनती की जाती है {1:1} यहोवा ने मूसा से मिलापवाले तम्बू में बात की। यह सीनै मरुभूमि में हुई। यह बात इस्राएल के लोगों द्वारा मिस्र छोड़ने के बाद दूसरे वर्ष के दूसरे महीने के पहले दिन की थी। यहोवा ने मूसा से कहा: {1:2} “इस्राएल के सभी लोगों को गिनो। हर एक व्यक्ति की सूची उसके परिवार और उसके परिवार समूह के साथ बनाओ। {1:3} तुम तथा हारून इस्राएल के सभी पुरुषों को गिनोगे। उन पुरुषों को गिनो जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं। (ये वे हैं जो इस्राएल की सेना में सेवा करते हैं।) इनकी सूची इनके समुदाय के आधार पर बनाओ। {1:4} हर एक परिवार समूह से एक व्यक्ति तुम्हारी सहायता करेगा। यह व्यक्ति अपने परिवार समूह का नेता होगा। {1:5} तुम्हारे साथ रहने और तुम्हारी सहायता करने वाले व्यक्तियों के नाम ये हैं: रूबेन परिवार समूह से शदेऊर का पुत्र एलीसूर; {1:6} शिमोन परिवार समूह से — सूरीशद्दै का पुत्र शलूमीएल; {1:7} यहूदा के परिवार समूह से — अम्मीनादाब का पुत्र नहशोन; {1:8} इस्साकार के परिवार समूह से सूआर का पुत्र नतनेल; {1:9} जवूलून के परिवार समूह से — हेलोन का पुत्र एलीआब; {1:10} यूसुफ के वंश से, एप्रैम के परिवार समूह से — अम्मीहूद का पुत्र एप्रैम; मनश्शे के परिवार समूह से — पदासूर का पुत्र गम्लीऐल; {1:11} बिन्यामीन के परिवार समूह से — गिदोनी का पुत्र अबीदान; {1:12} दान के परिवार समूह से — अम्मीशद्दै का पुत्र अहीएजेर; {1:13} आशेर के परिवार समूह से — ओक्रान का पुत्र पगीएल; {1:14} गाद के परिवार समूह से दूएल का पुत्र एल्यासाप; {1:15} नप्ताली के परिवार समूह से — एनाम का पुत्र अहीरा; {1:16} ये सभी व्यक्ति अपने लोगों द्वारा अपने परिवार समूह के नेता चुने गए। ये लोग अपने परिवार समूह के नेता हैं। {1:17} मूसा और हारून ने इन व्यक्तियों (और इस्राएल के लोगों) को एक साथ लिया जो नेता होने के लिये आये थे। {1:18} मूसा और हारून ने इस्राएल के सभी लोगों को बुलाया। तब लोगों की सूची उनके परिवार और परिवार समूह के अनुसार बनी। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों की सूची बनी। {1:19} मूसा ने ठीक वैसा ही किया जैसा यहोवा का आदेश था।मूसा ने लोगों को तब गिना जब वे सीनै की मरुभूमि में थे। {1:20} रूबेन के परिवार समूह को गिना गया। (रूबेन इस्राएल का पहलौठा पुत्र था।) उन सभी पुरुषों की सूची बनी जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे और सेना में सेवा करने योग्य थे। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:21} रूबेन के परिवार समूह से गिने गए पुरुषों की संख्या छियालीस हजार पाँच सौ थी। {1:22} शिमोन के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:23} शिमोन के परिवार समूह को गिनने पर सारे पुरुषों की संख्या उनसठ हजार तीन सौ थी। {1:24} गाद के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:25} गाद के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या पैंतालीस हजार छः सौ पचास थी। {1:26} यहूदा के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:27} यहूदा के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या चौहत्तर हजार छः सौ थी। {1:28} इस्साकार के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:29} इस्साकार के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या चौवन हजार चार सौ थी। {1:30} जबूलून के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:31} जबूलून के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या सत्तावन हजार चार सौ थी। {1:32} एप्रैम के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:33} एप्रैम के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या चालीस हजार पाँच सौ थी। {1:34} मनश्शे के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:35} मनश्शे के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या बत्तीस हजार दो सौ थी। {1:36} बिन्यामीन के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:37} बिन्यामीन के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या पैंतीस हजार चार सौ थी। {1:38} दान के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:39} दान के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या बासठ हजार सात सौ थी। {1:40} आशेर के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:41} आशेर के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या एकतालीस हजार पाँच सौ थी। {1:42} नप्ताली के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुष के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:43} नप्ताली के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या तिरपन हजार चार सौ थी। {1:44} मूसा, हारून और इस्राएल के नेताओं ने इन सभी पुरुषों को गिना। वहाँ बारह नेता थे। (हर परिवार समूह से एक नेता था।) {1:45} इस्राएल का हर एक पुरुष जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य था, गिना गया। इन पुरुषों की सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। {1:46} पुरुषों की सारी संख्या छः लाख तीन हजार पाँच सौ पचास थी। {1:47} लेवी के परिवार समूह से परिवारों की सूची इस्राएल के अन्य पुरुषों के साथ नहीं बनी। {1:48} यहोवा ने मूसा से कहा था: {1:49} “लेवी के परिवार समूह के पुरुषों को तुम्हें नहीं गिनना चाहिए। इस्राएल के अन्य पुरुषों के एक भाग के रुप में उनकी संख्या को मत जोड़ो। {1:50} लेवीवंश के पुरुषों से कहो कि वे साक्षीपत्र के पवित्र तम्बू के लिए उत्तरदायी हैं। वे उसकी और उसमें जो चीजें हैं, उनकी देखभाल करेंगे। वे मिलापवाले तम्बू और उसकी सभी चीजें लेकर चलेंगे।वे अपना डेरा उसके चारों ओर डालेंगे तथा उसकी देखभाल करेंगे। {1:51} जब कभी वह पवित्र तम्बू कहीं ले जाया जाएगा, तो लेवीवंश के पुरुषों को ही उसे उतारना होगा।जब कभी मिलापवाला तम्बू किसी स्थान पर लगाया जाएगा तो लेवीवंश के पुरुषों को ही यह करना होगा। वे ही ऐसे पुरुष हैं जो मिलापवाले तम्बू की देखभाल करते हैं। यदि कोई ऐसा अन्य पुरुष तम्बू के निकट आना चाहता है जो लेवी के परिवार समूह का नहीं है तो वह मार डाला जाएगा। {1:52} इस्राएल के लोग अपने डेरे अलग — अलग समूहों में लगाऐंगे। हर एक व्यक्ति को अपना डेरा अपने परिवार के झण्डे के पास लगाना चाहिए। {1:53} किन्तु लेवी के लोगों को अपना डेरा पवित्र तम्बू के चारों ओर डालना चाहिए। लेवीवंश के लोग साक्षीपत्र के पवित्र तम्बू की रक्षा करेंगे। वे पवित्र तम्बू की रक्षा करेंगे जिससे इस्राएल के लोगों का कुछ भी बुरा नहीं होगा।” {1:54} इसलिए इस्राएल के लोगों ने उन सभी बातों को माना जिसका आदेश यहोवा ने मूसा को दिया था। {i2:1} डेरे की व्यवस्था {2:1} यहोवा ने मूसा और हारून से कहाः {2:2} “इस्राएल के लोगों को मिलापवाले तम्बू के चारों ओर अपने डेरे लगाने चाहिए। हर एक समुदाय का अपना विशेष झण्डा होगा और हर एक व्यक्ति को अपने समूह के झण्डे के पास अपना डेरा लगाना चाहिए। {2:3} “यहूदा के डेरे का झण्डा पूर्व में होगा, जहाँ सूरज निकलता है।यहुदा के लोग वहीं डेरा लगाएंगे। यहूदा के लोगों का नेता अम्मीनादाब का पुत्र नहशोन है। {2:4} इस समूह में चौहत्तर हजार छः सौ पुरुष थे। {2:5} “इस्साकार का परिवार समूह यहूदा के लोगों के ठीक बाद में होगा। इस्साकार के लोगों का नेता सूआर का पुत्र नतनेल है। {2:6} इस समूह में चौवन हजार चार सौ पुरुष थे। {2:7} “जबूलून का परिवार समूह भी यहूदा के परिवार समूह से ठीक बाद में अपना डेरा लगाएगा। जबूलून के लोगों नेता हेलोन का पुत्र एलीआब है। {2:8} इस समूह में सत्तावन हजार चार सौ पुरुष थे। {2:9} “यहूदा के डेरे में एक लाख छियासी हजार चार सौ पुरुष थे। ये सभी अपने अलग अलग परिवार समूह में बंटे हुए हैं। यहूदा पहला समूह होगा जो उस समय आगे चलेगा जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करेंगे। {2:10} “रूबेन का झण्डा पवित्र तम्बू के दझिण में होगा। हर एक समूह अपने झण्डे के पास आपना डेरा लगाएगा। रूबेन के लोगों का नेता शदेऊर का पुत्र एलीसूर है। {2:11} इस समूह में छियालीस हजार पाँच सौ पुरुष थे। {2:12} “शिमोन का परिवार समूह रुबेन के परिवार समूह के ठीक बाद अपना डेरा लगाएगा। शिमोन के लोगों का नेता सूरीशद्दै का पुत्र शलूमीएल है। {2:13} इस समूह में उनसठ हजार तीन सौ पुरुष थे। {2:14} “गाद का परिवार समूह भी रूबेन के लोगों के ठीक बाद अपना डेरा लगाएगा। गाद के लोगों का नेता रूएल का पुत्र एल्यासाप है। {2:15} इस समूह में पैंतालीस हजार चार सौ पचास पुरुष थे। {2:16} “रूबेन के डेरे में सभी समूहों के एक लाख इकयावन हजार चार सौ पचास पुरुष थे। रूबेन का डेरा दूसरा समूह होगा जो उस समय चलेगा जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करेंगे। {2:17} “जब लोग यात्रा करेंगे तो लेवी का डेरा ठीक उसके बाद चलेगा। मिलापवाला तम्बू दूसरे अन्य डेरों के बीच उनके साथ रहेगा। लोग अपने डेरे उसी क्रम में लगाएंगे जिस क्रम में वे चलेंगे। हर एक व्यक्ति अपने परिवार के झण्डे के साथ रहेगा। {2:18} “एप्रैम का झण्डा पश्चिम की ओर रहेगा। एप्रैम के परिवार के समूह वहीं डेरा लगाएंगे। एप्रैम के लोगों का नेता अम्मीहूद का पुत्र एलीशामा है। {2:19} इस समूह में चालीस हजार पाँच सौ पुरुष थे। {2:20} “मनश्शे का परिवार समूह एप्रैम के परिवार के ठीक बाद अपना डेरा लगाएगा। मनश्शे के लोगों का नेता पदासूर का पुत्र गम्लीएल है। {2:21} इस समूह में बत्तीस हजार दो सौ पुरुष थे। {2:22} “बिन्यामीन का परिवार समूह भी एप्रैम के परिवार के ठीक बाद अपन डेरा लगाएगा। बिन्यामीन के लोगों का नेता गिदोनी का पुत्र अबीदान है। {2:23} इस समूह में पैंतीस हजार चार सौ पुरुष थे। {2:24} “एप्रैम के डेरे में एक लाख आठ हजार एक सौ पुरुष थे। यह तीसरा परिवार होगा जो तब चलेगा जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करेंगे। {2:25} “दान के डेरे का झण्डा उत्तर की ओर होगा। दान के परिवार का समूह वहीं डेरा लगाएगा। दान के लोगों का नेता अम्मीशद्दै का पुत्र अहीऐजेर है। {2:26} इस समूह में बासठ हजार सात सौ पुरुष थे। {2:27} “आशेर का परिवार समूह दान के परिवार समुह के ठीक बाद अपना डेरा लगाएगा। आशेर के लोगों का नेता ओक्रान का पुत्र पगीएल है। {2:28} इस समूह के एकतालीस हजार पाँच सौ पुरुष थे। {2:29} “नप्ताली का परिवार समूह भी दान के परिवार समूह के ठीक बाद अपने डेरे लगाएगा। नप्ताली के लोगों का नेता एनान का पुत्र अहीरा है। {2:30} इस समूह में तिरपन हजार चार सौ पुरुष थे। {2:31} “दान के डेरे में एक लाख सत्तावन हजार छः सौ पुरुष थे। जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करेंगे तो यह चलने वाला आखिरी परिवार होगा। ये अपने झण्डे के नीचे अपना डेरा लगाएंगे।” {2:32} इस प्रकार ये इस्राएल के लोग थे। वे परिवार के अनुसार गिने गये थे। सभी डेरों में अलग — अलग समूहों के सभी परिवारों के पुरुषों की समूची संख्या थी छः लाख तीन हजार पाँच सौ पचास। {2:33} मूसा ने इस्राएल के अन्य लोगों में लेवीवंश के लोगों को नहीं गिना। यह यहोवा का आदेश था। {2:34} यहोवा ने मूसा को जो कुछ करने को कहा उस सबका पालन इस्राएल के लोगों ने किया। हर एक समूहों ने अपने झण्डों के नीचे अपने डेरे लगाए और हर एक व्यक्ति अपने परिवार और अपने परिवार समूह के साथ रहा। {i3:1} हारून का याजक परिवार {3:1} जिस समय यहोवा ने सीनै पर्वत पर मूसा से बात की, उस समय हारून और मूसा के परिवार का इतिहास यह है। {3:2} हारून के चार पुत्र थे। नादाब पहलौठा पुत्र था। उसके बाद अबीहू, एलीआजार और ईतामार थे। {3:3} ये पुत्र चुने हुए याजक थे। इन्हें याजक के रूप में यहोवा की सेवा का विशेष कार्य सौंपा गया था। {3:4} किन्तु नादाब और अबीहू यहोवा की सेवा करते समय पाप करने के कारण मर गए। उन्होंने यहोवा को भेंट चढ़ाई, किन्तु उन्होंने उस आग का उपयोग किया जिसके लिए यहोवा ने आज्ञा नहीं दी थी। इस प्रकार नादाब और अबीहू वहीं सीनै की मरुभूमि में मर गए। उनके पुत्र नहीं थे, अतः एलीआज़ार और ईतामार याजक बने और यहोवा की सेवा करने लगे। वे यह उस समय तक करते रहे जब तक उनका पिता हारून जीवित था। {i3:5} लेवीवंशी—याजकों के सहायक {3:5} यहोवा ने मूसा से कहा, {3:6} “लेवी के परिवार समूह के सभी लोगों को याजक हारून के सामने लाओ। वे लोग हारून के सहायक होंगे। {3:7} लेवीवंशी हारून की उस समय सहायता करेंगे जब वह मिलाप वाले तम्बू में सेवा करेगा और लेवीवंशी इस्राएल के सभी लोगों की इस समय सहा. ता करेंगे जिस समय वे पवित्र तम्बू में उपासना करने आएंगे। {3:8} इस्राएल के लोग मिलापवाले तम्बू की हर एक चीज की रक्षा करेंगे, यह उनका कर्तव्य है। किन्तु इन चीजों की देखभाल करके ही लेवीवंश के लोग इस्राएल के लोगों की सेवा करेंगे। पवित्र तम्बू में उपासना करने की उनकी यही पद्धति होगी। {3:9} “इस्राएल के सभी लोगों में से लेवीवंशी चुने गए थे। ये लेवी, हारून और उसके पुत्रों की सहायता के लिए चुने गए थे। {3:10} “तुम हारून और उसके पुत्रों को याजक नियुक्त करोगे। वे अपना कर्तव्य पूरा करेंगे और याजक के रूप में सेवा करेंगे। कोई अन्य व्यक्ति जो पवित्र चीज़ों के समीप आने का प्रयत्न करता है, मार दिया जाना चाहिए।” {3:11} यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, {3:12} “मैंने तुमसे कहा कि इस्राएल का हर एक परिवार अपना पहलौठा पुत्र मुझ को देगा, किन्तु अब मैं लेवीवंश को अपनी सेवा के लिए चुन रहा हूँ। वे मेरे होंगे। अतः इस्राएल के सभी अन्य लोगों को अपना पहलौठा पुत्र मुझको नहीं देना पड़ेगा। जब तुम मिस्र में थे, {3:13} मैंने मिस्र के लोगों के पहलोठों को मार डाला था। उस समय मैंने इस्राएल के सभी पहलौठों को अपने लिए लिया। सकभी पहलौठे बच्चे और सभी पहलौठे जानवर मेरे हैं। किन्तु अब मैं तुम्हारे पहलौठे बच्चों को तुम्हें वापस करता हूँ और लेवीवंश को अपना बनाता हूँ। मैं यहोवा हूँ।” {3:14} यहोवा ने फिर सीनै की मरुभूमि में मूसा से बात की। यहोवा ने कहा, {3:15} “लेवीवंश के सभी परिवार समुहों और परिवारों को गिनो। प्रत्येक पुरुष या लड़कों को जो एक महीने या उससे अधिक के हैं, उनको गीनो।” {3:16} अतः मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी। उसने उन सभी को गिना। {3:17} लेवी के तीन पुत्र थेः उनके नाम थेः गेर्शोन, कहात और मरारी। {3:18} हर एक पुत्र परिवार समूहों का नेता था। गेर्शोन के परिवार समूह थेः लिब्नी और शिमी। {3:19} कहात के परिवार समूह थेः अम्राम, यिसहार, हेब्रोन, उज्जीएल। {3:20} मरारी के परिवार समूह थेः महली और मूशी। ये ही वे परिवार थे जो लेवी के परिवार समूह से सम्बन्धित थे। {3:21} लिब्नी और शिमियों के परिवार गेर्शोन के परिवार समूह से सम्बन्धित थे। वे गेर्शोनवंशी परिवार समूह थे। {3:22} इन दोनों परिवार समूहों में एक महीने से अधिक उम्र के लड़के या पुरुष सात हजार पाँच सौ थे। {3:23} गेर्शोन वंश के परिवार समूहों को पश्मि में डेरा लगाने के लिये कहा गया। उन्होंने पवित्र तम्बू के पीछे अपना डेरा लगाया। {3:24} गेर्शोन वंश के परिवार समूहों का नेता लाएल का पुत्र एल्यासाप था। {3:25} मिलापवाले तम्बू में गेर्शोन वंशी लोग पवित्र तम्बु, आच्छादन और बाहरी तम्बू की देखभाल का कार्य करने वाले थे। वे मिलापवाले तम्बू के प्रवेश द्वार के पर्दे कि भी देखभाल करते थे। {3:26} वे आँगन के पर्दे की देखभाल करते थे।वे आँगन के द्वार के पर्दो की भी देखभाल करते थे। यह आँगन पवित्र तम्बू और वेदी के चारों ओर था। वे रस्सियों और पर्दे के लिए काम में आने वाली हक एक चीज़ की देखभाल करते थे। {3:27} अम्रामियों, यिसहारियों, हेब्रोनियों और उज्जीएल के परिवार कहात के परिवार से सम्बन्धित थे। वे कहात परिवार समूह के थे। {3:28} इस परिवार समूह में एक महीने या उससे अधिक उम्र के लड़के और पुरूष आठ हजार छः सौ थे। कहात वंश के लोगों को पवित्र स्थान की देखभाल का कार्य सौंपा गया. {3:29} कहात के परिवार समूहों को “पवित्र तम्बू” के दक्षिण का क्षेत्र दिया गया। यह वह क्षेत्र था जहाँ उन्होंने डेरे लगाए। {3:30} कहात के परिवार समूह का नेता उज्जीएल का पुत्र एलीसापान था। {3:31} उनका कार्य पवित्र सन्दूक, मेज, दीपाधार, वेदियों और पवित्र स्थान के उपकरणों की देखभाल करना था। वे पर्दे और उनके साथ उपयोग में आने वाली सभी चीजों की भी देखभाल करते थे। {3:32} लेवीवंश के प्रमुखों का नेता हारून का पुत्र एलीआजार था। वह याजक था एलीआजार पवित्र चीज़ों की देखभाल करने वाले सभी लोगों का अधीक्षक था। {3:33} महली और मूशियों के परिवार समूह मरारी परिवार से सम्बन्धित थे। एक महीने या उससे {3:34} अधिक उम्र के लड़के और पुरुष महली परिवार समूह में छः हजार दो सौ थे। {3:35} मरारी समूह का नेता अबीहैल का पुत्र सूरीएल था। इस परिवार समूह को पवित्र तम्बू के उत्तर का क्षेत्र दिया गया था। यही वह क्षेत्र है जहाँ उन्होंने डेरा लगाया। {3:36} मरारी लोगों को पवित्र तम्बू के ढाँचे की देखभाल का कार्य सौंपा गया। वे सभी छड़ों, खम्बों, आधारों और पवित्र तम्बू के ढाँचे में जो कुछ लगा था, उन सब की दखभाल करते थे। {3:37} पवित्र तम्बू के चारों ओर के आँगन के सभी खम्भों की भी देखभाल किया करते थे। इनमें सभी आधार, तम्बू की खूटियाँ और रस्सियाँ शामिल थीं। {3:38} मूसा, हारून और उसके पुत्रों ने मिलापवाले तम्बू के सामने पवित्र तम्बू के पूर्व में अपने डेरे लगाए। उन्हें पवित्र स्थान की देखभाल का काम सौंपा गया। उन्होंने यह इस्राएल के सभी लोगों के लिए किया। कोई दूसरा व्यक्ति जो पवित्र स्थान के समीप आता, मार दिया जाता था। {3:39} यहोवा ने लेवी परिवार समूह के एक महीने या उससे अधिक उम्र के लड़कों और पुरुषों को गिनने का आदेश दिया। सारी संख्या बाइस हजार थी। {i3:40} लेवीवंशी पहलौठे पुत्र का स्थान लेते हैं {3:40} यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएल में सभी एक महीने या उससे अधिक उम्र के पहलौठे लड़के और पुरुषों को गिनो। उनके नामों की एक सूची बनाओ। {3:41} अब मैं इस्राएल के सभी पहलौठे लड़कों और पुरुषों को नहीं लूँगा। अब मैं अर्थात् यहोवा लेवीवंशी को ही लूँगा। इस्राएल के अन्य सभी लोगों के पहलौठे जानवरों को लेने के स्थान पर अब मैं लेवीवंशी के लोगों के पहलौठे जानवरों को ही लूँगा।” {3:42} इस प्रकार मूसा ने वह किया जो यहोवा ने आदेश दिया। मूसा ने इस्राएल के पहलौठी सारी सन्तानों को गिना। {3:43} मूसा ने सभी पहलौठे एक महीने या उससे अधिक उम्र के लड़कों और पुरुषों की सूची बनाई। उस सूची में बाइस हजार दो सौ तिहत्तर नाम थे। {3:44} यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, {3:45} “मैं अर्थात् यहोवा यह आदेश देता हुँ: इस्राएल के अन्य परिवारों के पहलौठे पुरुषों के स्थान पर लेवीवंशी के लोगों को लो और मैं अन्य लोगों के जानवरों के स्थान पर लेवीवंश के जानवरों को लूँगा। लेवीवंशी मेरे हैं। {3:46} लेवीवंश के लोग बाइस हजार हैं और अन्य परिवारों के बाइस हजार दो सौ तिहत्तर पहलौठे पुत्र हैं। इस प्रकार केवल दो सौ तिहत्तर पहलौठे पुत्र लेवीवंश के लोगों से अधिक हैं। {3:47} इसलिए पहलौठे दो सौ तिहत्तर पुत्रों में से हर एक के लिए पाँच शेकेल चाँदी दो। यह चाँदी इस्राएल के लोगों से इकट्ठा करो। {3:48} वह चाँदी हारून और उसके पुत्रों को दो। यह एस्राएल के दो सौ तिहत्तर लोगों के लिए भुगतान है।” {3:49} मूसा ने दो सौ तिहत्तर लोगों के लिए धन इकट्ठा किया। क्योंकि यहाँ इतने लेवी नहीं थे जो दूसरे परिवार समूह के दो सौ तिहत्तर पहलौठों की जगह ले सकें। {3:50} मूसा ने इस्राएल के पहलौठे लोगों से चाँदी इकट्ठा की। उसने एक हजार तीन सौ पैंसठ शेकेल चाँदी “अधिकृत भार” का उपयोग करके इकट्ठा की। {3:51} मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी। मूसा ने यहोवा के आदेश के अनुसार वह चाँदी हारून और उसके पुत्रों को दी। {i4:1} कहात परिवार के सेवा—कार्य {4:1} यहोवा ने मूसा और हारून से कहाः {4:2} “कहात परिवार समूह के पुरुषों को गिनो। (कहात परिवार समूह लेवी परिवार समूह का एक भाग है।) {4:3} अपने सेवा कर्तव्य का निर्वाह करने वाले तीस से पचास वर्ष की उम्र वाले पुरुषों को गिनो। ये व्यक्ति मिलापवाले तम्बू में कार्य करेंगे। {4:4} उनका कार्य मिलापवाले तम्बू के सर्वाधिक पवित्र स्थान की देखभाल करना है। {4:5} “जब इस्राएल के लोग नए स्थान की यात्रा करें तो हारून और उसके पुत्रों को चाहिए कि वे पवित्र तम्बू में जाएँ और पर्दे को उतारें और साक्षीपत्र के पवित्र सन्दूक को उससे ढकें। {4:6} तब वे इन सबको सुइसों के चमड़े से बने आवरण में ढकें। तब वे पवित्र सन्दूक पर बिछे चमड़े पर पूरी तरह से एक नीला वस्त्र फैलाएंगे और पवित्र सन्दूक में लगे कड़ों में डंडे डालेंगे। {4:7} “तब वे एक नीला कपड़ा पवित्र मेज के ऊपर फैलाएंगे। तब वे उस पर थाली, चम्मच, कटोरे और पेय भेंट के कलश रखेंगे। वे विशेष रोटी भी मेज पर रखेंगे। {4:8} तब तुम इन सभी चिज़ों के ऊपर एक लाल कपड़ा डालोगे।तब हर एक चीज़ को सुइसों के चमड़े से ढक दो। तब मेज के कड़ों में डंडे डालो। {4:9} “तब दीपाधार और दीपकों को नीले कपड़े से ढको। दीपक जलने के लिए उपयोग में आनेवाली सभी चीजों और दीपक के लिए उपयोग में आने वाले तेल के सभी घड़ों को ढको। {4:10} तब सभी चीजों को सुइसों के चमड़े में लेपेटो और इन्हें ले जाने के लिये उपयोग में आने वाले डंडो पर इन्हें रखो। {4:11} “सुनहरी वेदी पर एक नीला कपड़ा फैलाओ। उसे सुइसों के चमड़े से ढको। तब वेदी को ले जाने के लिए उसमें लगे हुए कड़ो में डंडे डालो। {4:12} “पवित्र स्थान में उपासना के उपयोग में आने वाली सभी विशेष चीज़ों को एक साथ इकट्ठा करो। इन्हें एक साथ इकट्ठा करो और इनको नीले कपड़े में लपेटो। तब इसे सुइसों के चमड़े से ढको। इन चीजों को ले जाने के लिए इन्हें एक ढाँचे पर रखो। {4:13} “काँसेवाली वेदी से राख को साफ कर दो और इसके ऊपर एक बैंगनी रंग का कपड़ा फैलाओ। {4:14} तब वेदी पर उपासना के लिए उपयोग में आने वाली चीजों को इकट्ठा करो। आग के तसले, माँस के लिए काँटे, बेलचे और चिलमची हैं। इन चीजों को काँसे की वेदी पर रखो। तब वेदी के ऊपर सुइसों के चमड़े का आवरण फैलाओ। वेदी में लगे कड़ों में, इसे ले जाने वाले डंडे डालो। {4:15} “जब हारून और उसके पुत्र पवित्र स्थान की सभी पवित्र चीज़ों को ढकना पुरा कर लें तब कहात परिवार के व्यक्ति अन्दर आ सकते हैं और उन चीज़ों को ले जाना आरम्भ कर सकते हैं। इस प्रकार वे इस पवित्र वस्तुओं को छुएंगे नहीं। सो वे मरेंगे नहीं। {4:16} “याजक हारून का पुत्र एलीअज़ार पवित्र तम्बू के लिए उत्तरदायी होगा। वह पवित्र स्थान और इसकी हर एक चीज़ के लिए उत्तरदायी होगा। वह दीपक के तेल, मधुर सुगन्धवाली सुगन्धि तथा दैनिक बलि और अभिषेक के तेल के लिये उत्तरदायी होगा।” {4:17} यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, {4:18} “सावधान रहो! इन कहातवंशी व्यक्तियों को नष्ट मत होने दो। {4:19} तम्हें यह इसलिए करना चाहिए ताकि कहातवंशी सर्वाधिक पवित्र स्थान तक जाएँ और मरें नहीं: हारून और उसके पुत्रों को अन्दर जाना चाहिए और हर एक कहातवंशी को बताना चाहिए कि वह क्या करे। उन्हें हर एक व्यक्ति को वह चीज़ देनी चाहिए जो उसे ले जानी है। {4:20} यदी तुम ऐसा नहीं करते हो तो कहातवंशी अन्दर जा सकते हैं और पवित्र चीज़ों को देख सकते हैं। यदि वे एक क्षण के लिए भी उन पवित्र वस्तुओं की ओर देखते हैं तो उन्हें मरना होगा।” {i4:21} गेर्शोन परिवार के सेवा—कार्य {4:21} यहोवा ने मूसा से कहा, {4:22} “गेर्शोन परिवार के सभी लोगों को गिनो। उनकी सूची परिवार और परिवार समूह के अनुसार बनाओ। {4:23} अपना सेवा कतर्व्य कर चुकने वाले तीस वर्ष से पचास वर्ष तक के पुरुषों को गिनो। ये लोग मिलापवाले तम्बू की देखभाल का सेवा — कार्य करेंगे। {4:24} “गेर्शोन परिवार को यही करना चाहिए और इन्हीं चीज़ों को ले चलना चाहिएः {4:25} इन्हें पवित्र तम्बू के पर्दे, मिलापवाले तम्बू, इसके आवरण और सुइसों के चमड़ें से बना आवरण ले चलना चाहिए। उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार के पर्दे भी ले चलना चाहिए। {4:26} उन्हें आँगन के उन पर्दों को, जो पवित्र तम्बू और वेदी के चारों ओर लगे हैं, ले चलना चाहिए। उन्हें आँगन के प्रवेश द्वार का पर्दा भी ले चलना चाहिए। उन्हें सारी रस्सियाँ और पर्दे के साथ उपयोग में आनेवाली सभी चीजें ले चलनी चाहिए। गेर्शोन वंश के लोग उस किसी भी चीज़ के लिए उत्तरदायी होंगे जो इन चीज़ों से की जानी हैं। {4:27} हारून और उसके पुत्र इन सभी किए गए कार्यों की निगरानी करेंगे। गोर्शोन वंश के लोग जो कुछ ले जाएंगे और जो दूसरे कार्य करेंगे उनकी निगरानी हारून और उसके पुत्र करेंगे। तुम्हें उनको वे सभी चीज़े बतानी चाहिए जिनके ले जाने के लिये वे उत्तरदायी हैं। {4:28} यही काम है जिसे गेर्शोन वंश के परिवार समूह के लोगों को मिलापवाले तम्बू के लिए करना है हारून का पुत्र ईतामार याजक उनके काम के लिए उत्तरदायी होगा।” {i4:29} मरारी परिवार के सेवा—कार्य {4:29} “मरारी परिवार समूह के परिवार ओर परिवार समूह के पुरुषों को गिनो। {4:30} सेवा — कर्तव्य कर चुके तीस से पचास वर्ष के सभी पुरुषों को गिनो। ये लोग मिलापवाले तम्बू के लिए विशेष कार्य करेंगे। {4:31} जब तुम यात्रा करोगे तब उनका यह कार्य है कि वे मिलापवाले तम्बू के तख्ते ले चलें। उन्हें तख्ते, खम्भों और आधारों को ले चलना चाहिए। {4:32} उन्हें आँगन के चारों ओर के खम्भों को भी ले चलना चाहिए। उन्हें उन तम्बू की खूंटियों, रस्सियों और वे सभी चीजें जिनका उपयोग आँगन के चारों ओर के खम्भों के लिए होता है, ले चलना चाहिए। नामों की सूची बनाओ और हर एक व्यक्ति को बताओ कि उसे क्या — क्या चीज़े ले जाना है। {4:33} यही बातें हैं जिसे मरारी वंश के लोग मिलापवाले तम्बू के कार्यों में सेवा करने के लिए करेंगे। हारून का पुत्र ईतामार याजक इनके कार्य के लिए उत्तरदायी होगा।” {i4:34} लेवी परिवार {4:34} मूसा, हारून और इस्राएल के लोगों के नेताओं ने कहातवंश के लोगों को गिना। उन्होंने उनको परिवार और परिवार समूह के अनुसार गिना। {4:35} उन्होंने अपना सेवा — कर्तव्य कर चुके तीस से पचास पर्ष के उम्र के लोगों को गिना। इन लोगों को मिलापवाले तम्बू के लिए विशेष कार्य करने को दिए गए। {4:36} कहात परिवार समूह में जो इस कार्य को करने की योग्यता रखते थे, दो हजार सात सौ पचास पुरुष थे। {4:37} इस प्रकार कहात परिवार के इन लोगों को मिलापवाले तम्बु के बिशेष कार्य करने के लिए दिए गए। मूसा और हारून ने इसे वैसे ही किया जैसा यहोवाने मूसा से करने को कहा था। {4:38} गेर्शोन परिवार समूह को भी गिना गया। {4:39} सभी पुरुष जो अपना कर्तव्य सेवा कर चुके थे और तीस से पचास वर्ष की उम्र के थे, गिने गए। इन लोगों को मिलापवाले तम्बू में विशेष कार्य करने का सेवा — कार्य दिया गया। {4:40} गेर्शोन परिवार समूह के परिवारों में जो योग्य थे, वे दो हजार छः सौ तीस पुरुष थे। {4:41} इस प्रकार इन पुरुषों को जो गेर्शोन परिवार समूह के थे, मिलापवाले तम्बू में विशेष कार्य करने का सेवा — कार्य सौंपा गया। मूसा और हारून ने इसे वैसे ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को करने को कहा था। {4:42} मरारी के परिवार और परिवार समूह भी गिने गए। {4:43} सभी पुरुष जो अपना सेवा — कर्तव्य कर चुके थे और तीस से पचास वर्ष की उम्र के थे, गिने गए। इन व्यक्तियों को मिलापवाले तम्बू के लिए विशेष कार्य करने का सेवा — कार्य दिया गया। {4:44} मरारी परिवार समूह के परिवारों में जो लोग योग्य थे, वे तीन हजार दो सौ व्यक्ति थे। {4:45} इस प्रकार मरारी परिवार समूह के इन लोगों को विशेष कार्य दिया गया। मूसा और हारून ने इसे वैसे ही किया जैसा यहोवा ने मूसा से करने को कहा था। {4:46} मूसा, हारून और इस्राएल के लोगों के नेताओं ने लेवीवंश परिवार समूह के सभी सदस्यों को गिना। उन्होंने प्रत्येक परिवार और प्रत्येक परिवार समूह को गिना। {4:47} सभी व्यक्ति जो अपने सेवा — कर्तव्य का निर्वाह कर चुके थे और जो तीस वर्ष से पचास वर्ष उम्र के थे, गिने गए। इन व्यक्तियों को मिलापवाले तम्बू के लिए विशेष कार्य करने का सेवा — कार्य दिया गया। उन्होंने मिलापवाले तम्बू को ले चलने का कार्य तब किया जब उन्होंने यात्रा की। {4:48} पुरुषों की सारी संख्या आठ हजार पाँच सौ अस्सी थी। {4:49} यहोवा ने यह आदेश मूसा को दिया था। हर एक पुरुष को अपना कार्य दिया गया था और हर एक पुरुष से कहा गया था कि उसे क्या — क्या ले चलना चाहिए। इसलिए यहोवा ने जो आदेश दिया था उन चीज़ों को पूरा किया गया। सभी पुरुषों को गिना गया। {i5:1} शुद्धता सम्बन्धी नियम {5:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {5:2} “मैं इस्राएल के लोगों को, उनके डेरे बीमारियों व रोगों से मुक्त रखने का आदेश देता हूँ। इस्राएल के लोगों से कहो कि हर उस व्यक्ति को जो बुरे चर्म रोगों, शरीर से निकलने वाले स्रावों या किसी शव को छूने के कारण अशुद्ध हो गये हैं, उन्हें डेरे से बाहर निकाल दो, {5:3} चाहे वे पुरुष हों चाहे स्त्री। उन्हें डेरे से बाहर निकाल दो ताकि वे जिस डेरे में मेरा निवास है उसे वे अशुद्ध न कर दें। मैं तुम्हारे डेरे में तुम लोगों के बीच रह रहा हूँ।” {5:4} अतः इस्राएल के लोगों ने परमेश्वर का आदेश माना। उन्होंने उन लोगों को डेरे के बाहर भेज दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। {i5:5} अपराध के लिए अर्थ—दण्ड {5:5} यहोवा ने मूसा से कहा, {5:6} “इस्राएल के लोगों को यह बताओः जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का कुछ बुरा करता है तो वस्तुतः वह यहोवा के विरूद्ध पाप करता है। वह व्यक्ति अपराधी है। {5:7} इसलिए वह व्यक्ति लोगों को अपने किए गए पाप को बताए। तब यह व्यक्ति अपने बुरे किए गए काम का पूरा भुगतान करे। वह भुगतान में पाँचवाँ हिस्सा जोड़े और उसका भुगतान उसे करे जिसका बुरा उसने किया है। {5:8} किन्तु जिस व्यक्ति का उसने बुरा किया है, वह मर भी सकता है और सम्भव है उस मृतक का कोई नजदीकी सम्बन्धी न हो जिसे भुगतान किया जाए। उस स्थिति में, बुरा करने वाला व्यक्ति यहोवा को भुगतान करेगा। वह व्यक्ति पूरा भूतगन याजक को करेगा।याजक को क्षमादान रुपी मेढ़े की बली देनी चाहिए। बुरा करने वाले व्यक्ति के पापों को ढकने के लिए इस मेढ़े की बलि दी जानी चाहिए किन्तु याजक बाकी बचे भुगतान को अपने पास रख सकता है। {5:9} “यदि इस्राएल का कोई व्यक्ति यहोवा को विशेष भेंट देता है तो वह याजक जो उसे स्वीकार करता है उसे अपने पास रख सकता है। यह उसकी है। {5:10} किसी व्यक्ति को ये विशेष भेंट देनी नहीं पड़ेगी। किन्तु यदि वह उनको देता है तो वह याजक की होगी।” {i5:11} शंकालु पति {5:11} तब यहोवा ने मूसा से कहाः {5:12} “इस्राएल के लोगों से यह कहो, किसी व्यक्ति की पत्नी पतिव्रता नहीं भी हो सकती है। {5:13} उस का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक सम्बन्ध हो सकता है और वह इसे अपने पति से छिपा सकती है। कोई ऐसा व्यक्ति भी नहीं होता जो कहे कि उसने यह पाप किया। उसका पति उसे कभी जान भी नहीं सकता जो बुराई उसने की है और वह स्त्री भी अपने पति से अपने पाप के बारे में नहीं कहेगी। {5:14} किन्तु पति शंका करना आरम्भ कर सकता है कि उसकी पत्नी ने उसके विरुद्ध पाप किया है। वह उसके प्रति ईर्ष्या रख सकता है। चाहे वह सच्ची हो चाहे नहीं। {5:15} यदि ऐसा होता है तो वह अपनी पत्नी को याजक के पास ले जाए। पति एक भेंट भी ले जाएगा। यह भेंट 1/10 एपा जौं का आटा होगा। यह उसे जौं के आटे पर तेल या सुगन्धित नहीं डालनी चाहिये। यह जौं का आटा यहोवा को अन्नबलि है. यह इसलिए दिया जाता कि पति ईर्ष्यालु है। यह भेंट यही संकेत करेगी कि उसे विस्वास है कि उसकी पत्नी पतिव्रता नहीं है। {5:16} “याजक स्त्री को यहोवा के सामने ले जाएगा और स्त्री यहोवा के सामने खड़ी होगी। {5:17} तब याजक कुछ विशेष पानी लेगा और उसे मिट्टी के घड़े में डालेगा। याजक पवित्र तम्बू के फर्श से कुछ मिट्टी पानी में डालेगा। {5:18} याजक स्त्री को यहोवा के सामने खड़ा रहने के लिए विवश करेगा। तब वह उसके बाल खोलेगा और उसके हाथ में अन्नबलि देगा। यह जौ का आटा होगा जिसे उसके पति ने ईर्ष्या के कारण उसे दिया था। उसी समय वह विशेष कड़वे जल वाले मिट्टी के घड़े को पकड़े रहेगा। यह विशेष कड़वा जल ही है जो स्त्री को परेशानी पैदा करता है। {5:19} “तब याजक स्त्री से कहेगा कि उसे झूठ नहीं बोलना चाहिए। उसे सत्य बोलने का वचन देना चाहिए। याजक उससे कहेगाः यदि तुम दूसरे व्यक्ति के साथ नहीं सोई हो, और तुमने अपने पति के विरुद्ध पाप नहीं किया है, जबकि तुम्हारा विवाह उसके साथ हुआ है, तो यह कड़वा जल तुमको हानि नहीं पहुँचाएगा। {5:20} किन्तु यदि तुमने अपने पति के विरुद्ध पाप किया है, यदि तुम किसी अन्य पुरुष के साथ सोई हो तो तुम शुद्ध नहीं हो। क्यों क्योंकि जो तुम्हारे साथ सोया है तुम्हारा पति नहीं है और उसने तुम्हें अशुद्ध बनाया है। {5:21} इसलिए जब तुम इस विशेष जल को पीओगी तो तुम्हें बहुत परेशानी होगी। तुम्हारा पेट फूल जाएगा और तुम कोई बच्चा उत्पन्न नहीं कर सकोगी। यदि तुम गर्भवती हो, तो तुम्हारा बच्चा मर जाएगा। तब तुम्हारे लोग तुम्हे छोड़ देंगे और वे तुम्हारे बारे में बुरी बातें कहेंगे। “तब याजक को स्त्री से यहोवा को विशेष वचन देने के लिए कहना चाहिए। स्त्री को स्वीकार करना चाहिए कि ये बुरी बातें उसे होंगी, यदि वह झूठ बोलेगी। {5:22} याजक को कहना चाहिए, तुम इस जल को लोगी जो तुम्हारे शरीर में परेशानी उत्पन्न करेगा। यदि तुमने पाप किया है तो तुम बच्चों को जन्म नहीं दे सकोगी और यदि तुम्हारा कोई बच्चा गर्भ में है तो वह जन्म लेने के पहले मर जाएगा। तब स्त्री को कहना चाहिएः मैं वह स्वीकार करती हूँ जो आप कहते हैं। {5:23} “याजक को इन चेतावनियों को चर्म — पत्र पर लिखनी चाहिए।फिर उसे इस लिखावट को पानी में धो देना चाहिए। {5:24} तब स्त्री उस पानी को पीएगी जो कड़वा है। वह पानी उसमें जाएगा और यदि वह अपराधी है, तो उसे बहुत परेशानी उत्पन्न करेगा। {5:25} “तब याजक उस अन्नबलि को उससे लेगा। (ईर्ष्या के लिए भेंट) और उसे यहोवा के सामने उठाएगा और उसे वेदी तक ले जाएगा। {5:26} तब याजक अपनी उंजली में अन्न भरेगा और उसे वेदी पर रखेगा। तब वह उसे जलाएगा। उसके बाद, वह स्त्री से पानी पीने को कहेगा। {5:27} यदि स्त्री ने पति के विरुद्ध पाप किया होगा, तो पानी उसे परेशान करेगा। पानी उसके शरीर में जाएगा और उसे बहुत कष्ट देगा और कोई बच्चा जो उसके गर्भ में होगा, पैदा होने से पहले मर जाएगा और वह कभी बच्चे को जन्म नहीं दे सकेगी। सभी लोग उसके विरुद्ध हो जायेंगे। {5:28} किन्तु यदि स्त्री ने पति के विरुद्ध पाप नहीं किया है तो वह पवित्र है, फिर याजक घोषणा करेगा कि वह अपराधी नहीं है और बच्चों को जन्म देने के योग्य हो जाएगी। {5:29} “इस प्रकार यह ईर्ष्या के विषय में नियम है। तुम्हें यही करना चाहिए यदि कोई विवाहित स्त्री अपने पति के विरूद्ध पाप करती है। {5:30} या यदि कोई व्यक्ति ईर्ष्या करता है और अपनी पत्नी के सम्बन्ध में शंका करता है कि उसने उसके विरुद्ध पाप किया है तो व्यक्ति को यही करना चाहिए। याजक को कहना चाहिए कि वह स्त्री यहोवा के सामने खड़ी हो। तब याजक इन सभी कार्यों को करेगा। यही नियम है। {5:31} पति कोई बुरा करने का अपराधी नहीं होगा। किन्तु स्त्री कष्ट उठाएगी, यदी उसने पाप किया है।” {i6:1} नाज़ीरों का वंश {6:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {6:2} “ये बातें इस्राएल के लोगों से कहोः कोई पुरुष या स्त्री कुछ समय के लिए किन्हीं अन्य लोगों से अलग रहना चाह सकता है। इस अलगाव का उद्देश्य यह हो कि वह व्यक्ति पूरी तरह अपने को उस समय के लिए यहोवा को समर्पित कर सके। वह व्यक्ति नाज़ीर कहलाएगा। {6:3} उस काल में व्यक्ति को कोई दाखमधु या कोई अधिक नशीली चीज़ नहीं पीनी चाहिए। व्यक्ति को सिरका जो दाखमधु से बना हो या किसी अधिक नशीले पेय को नहीं पीना चाहिए। उस व्यक्ति को अंगूर का रस नहीं पीना चाहिए और न ही अंगुर या किशमिश खाने चाहिए। {6:4} उस अलगाव के विशेष काल में उस व्यक्ति को अंगूर से बनी कोई चीज नहीं खानी चाहिए। उस व्यक्ति को अंगूर का बीज या छिलका भी नहीं खाना चाहिए। {6:5} “उस अलगाव के काल में उस व्यक्ति को अपने बाल नहीं काटने चाहिए। उस व्यक्ति को उस समय तक पवित्र रहना चाहिए जब तक अलगाव का समय समाप्त न हो। उसे अपने बालों को लम्बे होने देना चाहिए। उस व्यक्ति के बाल, परमेस्वर को दिए गये उसके वचन का एक विशेष भाग हैं। वह उन बालों को परमेस्वर के लिए भेंट के रुप में देगा। इसलिए वह व्यक्ति अपने बालों को तब तक लम्बा होने देगा जब तक अलगाव का समय समाप्त न होगा। {6:6} “इस अलगाव के काल में नाज़ीर को किसी शव के पास नही जाना चाहिए। क्यों क्योंकि उस व्यक्ति ने अपने को पूरी तरह यहोवा को समर्पित कर दिया है। {6:7} यदि उसके अपने पिता, अपनी माता, अपने भाई या अपनी बहन भी मरें तो भी उसे उनको छूना नहीं चाहिए। यह उसे अपवित्र करेगा। उसे यह दिखाना चाहिए कि उसे अलग किया गया है और अपने को पूरी तरह परमेस्वर को समर्पित कर चुका है। {6:8} जिस पूरे काल में वह अलग किया गया, वह पूरी तरह अपने को यहोवा को समर्पित किए हुए है। {6:9} यह संभव है कि नाजीर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ हो और वह दूसरा व्यक्ति अचानक मर जाए। यदि नाज़ीर मरे व्यक्ति को छुएगा तो वह अपवित्र हो जाएगा। यदि ऐसा होता है तो नाजीर को सिर से अपने बाल कटवा लेना चाहिए। वे बाल उसके विशेष दिए गए वचन के भाग थे। उसे अपने बालों को सातवें दिन काटना चाहिए क्योंकि उस दिन वह पवित्र किया जाता है। {6:10} तब आठवें दिन उसे दो फाख्ते या कबूतर के दो बच्चे याजक के पास लाने चाहिए। उसे याजक को उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार पर देना चाहिए। {6:11} तब याजक एक को पापबलि के रूप में भेंट करेगा। वह दूसरे को होमबलि के रूप में भेंट करेगा। यह होमबलि उस व्यक्ति द्वारा किये गये पाप के लिए भुगतान होगी। उसने पाप किया क्योंकि वह शव के पास था। उस समय वह व्यक्ति फिर वचन देगा कि सिर के बालों को परमेस्वर को भेंट करेगा। {6:12} इसका यह तात्पर्य हुआ कि उस व्यक्ति को फिर अलगाव के दूसरे समय के लिए अपने आपको यहोवा को समर्पित कर देना चाहिए। उस व्यक्ति को एक वर्ष का एक मेढ़ा लाना चाहिए। वह इसे पाप के लिए भेंट के रूप में देगा। उसके अलगाव के सभी दिन भुला दिये जाते हैं। उस व्यक्ति को नये अलगाव के समय का आरम्भ करना होगा। यह अवश्य किया जाना चाहिए क्योंकि उसने अलगाव के प्रथम काल में एक शव का स्पर्श किया। {6:13} “जब व्यक्ति के अलगाव का समय पूरा हो तो उसे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर जाना चाहिए। {6:14} वहाँ वह अपनी भेंट यहोवा को देगा। उसकी भेंट होनी चाहिएः होमबलि के लिए बिना दोष का एक वर्ष का एक मेढ़ा पापबलि के लिए बिना दोष की एक वर्ष की एक मादा भेड़, मेलबलि के लिए बिना दोष का एक नर भेड़, {6:15} अखमीरी रोटियों की एक टोकरी, (तेल से मिश्रित अच्छे आटे के फुलके इन “फुलकों” पर तेल लगाना चाहिए।) अन्य भेंट तथा पेय भेंट जो इन भेंटों का एक भाग है। {6:16} “तब याजक इन चीज़ों को यहोवा को देगा। याजक पापबलि और होमबलि चढ़ाएगा। {6:17} याजक रोटियों की टोकरी यहोवा को देगा। तब वह यहोवा की मेलबलि के रूप में नर भेड़ को मारेगा। वह यहोवा को अन्नबलि और पेय भेंट के साथ इसे देगा। {6:18} नाजीर को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर जाना चाहिए। वहाँ उसे अपने बाल कटवाने चाहिए जिन्हें उसने यहोवा के लिए बढ़ाया था। उन बालों को मेलबलि के रूप में दी गई बलि के नीचे जल रही आग में डाला जाना चाहिए। {6:19} “जब नाज़ीर अपने बालों को काट चुकेगा तो याजक उसे नर मेढ़े का एक पका हुआ कंधा और टोकरी से एक बड़ा और एक छोटा ‘फुलका’ देगा। ये दोनों अखमीरी फुलके होंगे। {6:20} तब याजक इन चीजों को यहोवा के सामने उत्तोलित करेगा। यह एक उत्तोलन भेंट हैं। ये चीजें पवित्र हैं और याजक की हैं। नर भेड़ की छाती और जांघ भी यहोवा के सामने उत्तोलित किये जाएंगे। ये चीज़ें भी याजक की हैं। इसके बाद नाज़ीर दाखमधु पी सकता है। {6:21} “यह नियम उन व्यक्तियों के लिए है जो नाजीर होने का वचन लेते हैं। उस व्यक्ति को यहोवा को ये सभी भेंट देनी चाहिए यदि कोई व्यक्ति अधिक देने का वचन देता है तो उसे अपने वचन का पालन करना चाहिए। लेकिन उसे कम से कम वह सभी चीज़े देनी चाहिए जो नाज़ीर के नियम में लिखी हैं। {i6:22} याजक का आशीर्वाद {6:22} यहोवा ने मूसा से कहा, {6:23} “हारून और उसके पुत्रों से कहो। इस्राएल के लोगों को आशीर्वाद देने का ढंग यह है। उन्हें कहना चाहिएः {6:24} ‘यहोवा तुम पर कृपा करे और तुम्हारी रक्षा करे। {6:25} यहोवा की कृपादृष्टि तुम पर प्रकाशित हो। वह तुमसे प्रेम करे। {6:26} यहोवा की दृष्टि तुम पर हो। वह तुम्हें शान्ति दे।’ {6:27} इस प्रकार हारून और उसके पुत्र इस्राएल के लोगों के सामने मेरा नाम लेंगे और मैं उन्हें आशीर्वाद दूँगा।” {i7:1} पवित्र तम्बू का समर्पण {7:1} जिस दिन मूसा ने पवित्र तम्बू का लगाना पूरा किया, उसने इसे यहोवा को समर्पित किया। मूसा ने तम्बू और इसमें उपयोग आने वाली चीजों को अभिषिक्त किया। मूसा ने वेदी और इसके साथ उपयोग में आने वाली चीजों को भी अभिषिक्त किया। ये दिखाती थी कि ये सभी वस्तुएं केवल यहोवा की उपासना के लिये प्रयोग की जानी चाहिए। {7:2} तब इस्राएल के नेताओं ने भेंटें चढ़ाईं। ये अपने — अपने परिवारों के मुखिया थे जो अपने परिवार समूह के नेता थे। इन्हीं नेताओं ने लोगों को गिना था। {7:3} ये नेता यहोवा के लिये भेंटें लाए। वे चारों ओर से ढकी छः गाड़ियाँ और बारह गायें लाए। (हर एक नेता द्वारा एक गाय दी गई थी। हर नेता ने दूसरे नेता से चारों ओर से ढकी गाड़ी को देने में साझा किया।) नेताओं ने पवित्र तम्बू पर यहोवा को ये चीज़े दीं। {7:4} यहोवा ने मूसा से कहा, {7:5} “नेताओं की इन भेंटों को स्वीकार करो। ये भेंटें मिलावाले तम्बू के काम में उपयोग की जा सकती हैं। इन चीज़ों को लेवीवंश के लोगों को दो। यह उन्हें अपने काम करने में सहायक होंगी।” {7:6} इसलिए मूसा ने चारों ओर से ढकी गाड़ियों और गायों को लिया। उसने इन चीज़ों को लेवीवंश के लोगों को दिया। {7:7} उसने दो गाड़ियाँ और चार गायें गेर्शोन वंशियों को दीं। उन्हें अपने काम के लिए उन गाड़ियों और गायों की आवश्यकता थी। {7:8} तब मूसा ने चार गाड़ियों और आठ गायें मरारी वंश को दीं। उन्हें अपने काम के लिए गाड़ियों और गायों की आवश्यकता थी। याजक हारून का पुत्र ईतामार इन सभी व्यक्तियों के कार्य के लिए उत्तरदायी था। {7:9} मूसा ने कहात वंशियों को कोई गाय या कोई गाड़ी नहीं दी। इन व्यक्तियों को पवित्र चीज़े अपने कंधों पर ले जानी थीं। यही कार्य उनको करने के लिए सौंपा गया था। {7:10} उस दिन के अभिषेक के पश्चात नेता अपनी भेंटे वेदी पर समर्पण के लिए लाए। उन्होंने अपनी भेंटे वेदी के सामने यहोवा को अर्पित कीं। {7:11} यहोवा ने पहले से ही मूसा से कह रखा था, “वेदी को समर्पण के रूप में दी जाने वाली अपनी भेंट का भाग हर एक नेता एक एक दिन लाएगा।” {7:12} बारह नेताओं में से {7:13} प्रत्येक नेता अपनी — {7:14} अपनी भेंटें लाया। वे {7:15} भेंटें ये हैं: प्रत्येक {7:16} नेता चाँदी की एक {7:17} थाली लाया जिसका वजन {7:18} था एक सौ तीस {7:19} शेकेल। प्रत्येक नेता चाँदी {7:20} का एक कटोरा लाया {7:21} जिसका वजन सत्तर शेकेल {7:22} था इन दोनों ही {7:23} उपहारों को पवित्र अधिकृत {7:24} भार से तोला गया {7:25} था हर कटोरे और {7:26} हर थाली में तेल {7:27} मिला बारीक आटा भरा {7:28} हुआ था। यह अन्नबलि {7:29} के रुप में प्रयोग {7:30} में लाया जाना था {7:31} प्रत्येक नेता सोने की {7:32} एक बड़ी करछी भी {7:33} लेकर आया जिसका भार {7:34} दस शेकेल था। इस {7:35} करछी में धूप भरी {7:36} हुई थी। प्रत्यके नेता {7:37} एक बछड़ा, एक मेढ़ा {7:38} और एक वर्ष का {7:39} एक मेमना भी लाया। {7:40} ये पशु होमबलि के {7:41} लिए थे। प्रत्येक नेता {7:42} पापबलि के रूप में {7:43} इस्तेमाल किये जाने के {7:44} लिए एक बकरा भी {7:45} लाया। प्रत्येक नेता दो {7:46} गाय, पाँच मेढ़े, पाँच {7:47} बकरे और एक एक {7:48} वर्ष के पाँच मेमने {7:49} लाया। इन सभी की {7:50} मेलबलि दी गयी। अम्मीनादाब {7:51} का पुत्र नहशोम, जो {7:52} यहूदा के परिवार समूह {7:53} से था, पहले दिन {7:54} अपनी भेंटें लाया। दूसरे {7:55} दिन सूआर का पुत्र {7:56} नतनेल जो इस्साकार का {7:57} नेता था, अपनी भेंटें {7:58} लाया। तीसरे दिन हेलोन {7:59} का पुत्र एलीआब जो {7:60} जबूलूनियों का नेता था, {7:61} अपनी भेंटें लाया। चौथे {7:62} दिन शदेऊर का पुत्र {7:63} एलीसूर जो रूबेनियों का {7:64} नेता था, अपनी भेटें {7:65} लाया। पाँचवे दिन सूरीशद्दै {7:66} का पुत्र शलूमीएल जो {7:67} शमौनियों का नेता था, {7:68} अपनी भेंटें लाया। छठे {7:69} दिन दूएल का पुत्र {7:70} एल्यासाप जो गादियों का {7:71} नेता था, अपनी भेंटें {7:72} लाया। सातवें दिन अम्मीहूद {7:73} का पुत्र एलीशामा जो {7:74} एप्रैम के लोगों का {7:75} नेता था, अपनी भेंटें {7:76} लाया। आठवें दिन पदासूर {7:77} का पुत्र गम्लीएल जो {7:78} मनश्शे के लोगों का {7:79} नेता था, अपनी भेंटे {7:80} लाया। नवें दिन गिदोनी {7:81} का पुत्र अबीदान जो {7:82} बिन्यामिन के लोगों का {7:83} नेता था, अपनी भेंटे लाया। दसवें दिन अम्मीशद्दै का पुत्र आखीआजर जो दान के लोगों का नेता था, अपनी भेंटे लाया। ग्यारहवें दिन ओक्रान का पुत्र पजीएल जो आशेर के लोगों का नेता था, अपनी भेंटे लाया। और फिर बारहवें दिन एनान का पुत्र अहीरा जो नप्ताली के लोगों का नेता था, अपनी भेंटें लेकर आया। {7:84} इस प्रकार ये सभी चीज़ें इस्राएल के लोगों के नेताओं की भेंटें थी। ये चीज़ें तब लाई गई जब मूसा ने वेदी को विशेष तेल डालकर समर्पित किया। वे बारह चाँदी की तश्तरियाँ, बारह चाँदी के कटोरे और बारह सोने के चम्मच लाए। {7:85} चाँदी की हर एक तश्तरी का वजन लगभग सवा तीन पौंड़ था और हर एक कटोरे का वजन लगभल पौने दो पौंड़ था। चाँदी की तश्तरियों और चाँदी के कटोरों का कुल अधिकृत भार साठ पौंड था। {7:86} सुगन्धि से भरे सोने के चम्मचों में से प्रत्येक का अधिकृत भार दस शेकेल था। बारह सोने के चम्मचों का कुल वजन लगभग तीन पौंड था। {7:87} होमबलि के लिए जानवरों की कुल संख्या बारह बैल, बारह मेढ़े और बारह एक बर्ष के मेमने थे। वहाँ अन्नबलि भी थी। यहोवा को पापबलि के रुप में उपयोग में आने वाले बारह बकरे भी थे। {7:88} नेताओं ने मेलबलि के रुप में उपयोग और मारे जाने के लिए भी जानवर दिए। इन जानवरों की संख्या थी चौबीस बैल, साठ मेढ़े, साठ बकरे और साठ एक वर्ष के मेमने थे। वेदी के समर्पण काल में ये चीज़ें भेंट के रुप में दी गईं। यह मूसा द्वारा अभीषेक का तेल उन पर डालने के बाद हुआ। {7:89} मूसा मीलापवाले तम्बू में यहोवा से बात करने गया। उस समय उसने अपने से बात करती हुई यहोवा की वाणी सुनी। वह वाणी साक्षीपत्र के सन्दूक के ऊपर के विशेष ढक्कन पर के दोनों करूबों के मध्य से आ रही थी। इस प्रकार परमेश्वर ने मूसा से बातें कीं। {i8:1} दीपाधार {8:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {8:2} “हारून से बात करो और उससे कहो, उन स्थानों पर सात दीपकों को रखो जिन्हें मैंने तुम्हें दिखाया था। वे दीपक दीपाधार के सामने के क्षेत्र को प्रकाशित करेंगे।” {8:3} हारून ने यह किया। हारून ने दीपकों को उचित स्थान पर रखा और उनका रुख ऐसा कर दिया कि उससे दीपाधार के सामने का क्षेत्र प्रकाशित हो सके। उसने मूसा को दिये गए यहोवा के आदेश का पालन किया। {8:4} दीपाधार सोने की पट्टियों से बना था। सोने का उपयोग आधार से आरम्भ हुआ था और ऊपर सुनहरे फूलों तक पहुँचा हुआ था। यह सब उसी प्रकार बना था जैसा कि यहोवा ने मूसा को दिखाया था। {i8:5} लेबीवंशियों का समर्पण {8:5} यहोवा ने मूसा से कहा, {8:6} “लेवीवंश के लोगों को इस्राएल के अन्य लोगों से अलग ले जाओ। उन लेवीवंशी लोगों को शुद्ध करो। {8:7} यह तुम्हें पवित्र बनाने के लिए करना होगा। पापबलि से विशेष पानी उन पर छिड़को। यह पानी उन्हें पवित्र करेगा। तब वे अपने शरीर के बाल कटवायेंगे तथा अपने कपड़ों को धोएंगे। यह उनके शरीर को शुद्ध करेगा। {8:8} “तब वे एक नया बैल और उसके साथ उपयोग में आने वाली अन्नबलि लेंगे। यह अन्नबलि, तेल मिला हुआ आटा होगा। तब अन्य बैल को पापबलि के रूप में लो। {8:9} लेवीवंश के लोगों को मिलापवाले तम्बू के सामने के क्षेत्र में लाओ। तब इस्राएल के सभी लोगों को चारों ओर से इकट्ठा करो। {8:10} तब तुम्हें लेवीवंश के लोगों को यहोवा के सामने लाना चाहिए और इस्राएल के लोग अपना हाथ उन पर रखेंगे। {8:11} तब हारून लेवीवंश के लोगों को यहोवा के सामने लाएगा वे परमेस्वर के लिए भेंट के रूप में होंगे। इस ढंग से लेवीवंश के लोग यहोवा का विशेष कार्य करने के लिए तैयार होंगे। {8:12} “लेवीवंश के लोगों से कहो कि वे अपना हाथ बैलों के सिर पर रखें। एक बैल यहोवा को पापबलि के रूप में होगा। दूसरा बैल यहोवा को होमबलि के रूप में काम आएगा। ये भेंटे लेवीवंश के लोगों को शुद्ध करेंगी। {8:13} लेवीवंश के लोगों से कहो कि वे हारून और उसके पुत्रों के सामने खड़े हों। तब यहोवा के सामने लेवीवंश के लोगों को उत्तोलन भेंट के रूप में प्रस्तुत करो। {8:14} यह लेवीवंश के लोगों को पवित्र बनायेगा। यह दिखायेगा कि वे परमेस्वर के लिये विशेष रीति से इस्तेमाल होंगे। वे इस्राएल के अन्य लोगों से भिन्न होंगे और लेवीवंश के लोग मेरे होंगे। {8:15} “इसलिए लेवीवंश के लोगों को शुद्ध करो और उन्हें यहोवा के सामने उत्तोलन भेंट के रूप में प्रस्तुत करो। जब यह पूरा हो जाए तब वे आ सकते हैं और मिलापवाले तम्बू में अपना काम कर सकते हैं। {8:16} ये लेवीवंशी इस्राएल के वे लोग हैं जो मुझको दिये गए हैं। मैंने उन्हें अपने लोगों के रूप में स्वीकार किया है। बीते समय में हर एक इस्राएल के परिवार में पहलौठा पुत्र मुझे दिया जाता था किन्तु मैंने लेवीवंशी के लोगों को इस्रएल के अन्य परिवारों के पहलौठे पुत्रों के स्थान पर स्वीकार किया है। {8:17} इस्राएल का हर पुरुष जो हर एक परिवार में पहलौठा है, मेरा है। यदि यह पुरुष या जानवर है तो भी मेरा है। मैंने मिस्र में सभी पहलौठे बच्चों और जानवरों को मार डाला था। इसलिए मैंने पहलौठे पुत्रों को अलग किया जिससे वे मेरे हो सकें। {8:18} अब मैंने लेवीवंशी लोगों को ले लिया है। मैंने इस्राएल के अन्य लोगों के परिवारों में पहलौठे बच्चों के स्थान पर इनको स्वीकार किया है। {8:19} मैंने इस्राएल के सभी लोगों में से लेवीवंश के लोगों को चुना है। मैंने उन्हें हारुन और उसके पुत्रों को इन्हें भेंट के रूप में दिया है। मैं चाहता हूँ कि वे मिलापवाले तम्बू में काम करें। वे इस्राएल के सभी लोगों के लिए सेवा करेंगे और वे उन बलिदानों को करने में सहायता करेंगे जो इस्राएल के लोगों के पापों को ढकने में सहायता करेंगी। तब कोई बड़ा रोग या कष्ट इस्राएल के लोगों को नहीं होगा जब वे पवित्र स्थान के पास आएंगे।” {8:20} इसलिए मूसा, हारून और इस्राएल के सभी लोगों ने यहोवा का आदेश माना। उन्होंने लेवीवंशियों के प्रति वैसा ही किया जैसा उन के प्रति करने का यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। {8:21} लेवीयों ने अपने को शुद्ध किया और अपने वस्त्रों को धोया। तब हारून ने उन्हें यहोवा के सामने उत्तोलन भेंट के रूप में प्रस्तुत किया। हारून ने वे भेंटें भी चढ़ाई जिन्होंने उनके पापों को नष्ट करके उन्हें शुद्ध किया था। {8:22} उसके बाद लेवीवंश के लोग अपना काम करने के लिए मिलापवाले तम्बू में आए। हारून और उसके पुत्रों ने उनकी देखभाल की। वे लेवीवंश के लोगों के कार्य के लिए उत्तरदायी थे। हारून और उसके पुत्रों ने उन आदेशों का पालन किया जिन्हें यहोवा ने मूसा को दिया था। {8:23} यहोवा ने मूसा से कहा, {8:24} “लेवीवंश के लोगों के लिए यह विशेष आदेश हैः हर एक लेवीवंशी पुरुष को, जो पच्चीस वर्ष या उससे अधिक उम्र का है, अवश्य आना चाहिए और मिलापवाले तम्बू के कामों में हाथ बटाना चाहिए। {8:25} जब कोई व्यक्ति पचास वर्ष का हो जाए तो उसे नित्य के कामों से छुट्टी लेनी चाहिए। उसे पून: काम करने की आवश्यकता नहीं है। {8:26} पचास वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग मिलापावाले तम्बू में अपने भाईयों को उनके काम में सहायता दे सकते हैं। किन्तु वे लोग स्वयं काम नहीं करेंगे।उन्हें सेवा — निवृत्त होने की स्वीकृति दी जाएगी। इसलिए उस समय लेवीवंश के लोगों से यह कहना याद रखो जब तुम उन्हें उनका सेवा — कार्य सौंपो।” {i9:1} फसह पर्व {9:1} यहोवा ने मूसा को सीनै की मरूभूमि में कहा। उस समय से एक वर्ष और एक महीना हो गया जब इस्राएल के लोग मिस्र से निकले थे। यहोवा ने मूसा से कहा, {9:2} “इस्राएल के लोगों से कहो कि वे निश्चित समय पर फसह पर्व की दावत को खाना याद रखें। {9:3} वह निश्चित समय इस महीने का चौदहवाँ दिन है। उन्हें संध्या के समय दावत खानी चाहिए और दावत के बारे में मैंने जो नियम दिए हैं उनको उन्हें याद रखना चाहिए।” {9:4} इसलिए मूसा ने इस्राएल के लोगों से फसह पर्व की दावत खाने को याद रखने के लिए कहा {9:5} और लोगों ने चौदहवें दिन संध्या के समय सीनै की मरुभूमि में वैसा ही किया। यह पहले महीने में था। इस्राएल के लोगों ने हर एक काम वैसे ही किया जैसे यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। {9:6} किन्तु कुछ लोग फसह पर्व की दावत उसी दिन नहीं खा सके। वे एक शव के कारण शुद्ध नहीं थे। इसलिए वे उस दिन मूसा और हारून के पास गए। {9:7} उन लोगों ने मूसा से कहा, “हम लोग एक शव छूने के कारण अशुद्ध हुए हैं। याजकों ने हमें निश्चित समय पर यहोवा को चढ़ाई जाने वाली भेंट देने से रोक दिया है। अतः हम फसह पर्व को अन्य इस्राएली लोगों के साथ नहीं मना सकते। हमें क्या करना चाहिए” {9:8} मूसा ने उनसे कहा, “मैं यहोवा से पूछूंगा कि वह इस सम्बन्ध में क्या कहता है।” {9:9} तब यहोवा ने मूसा से कहा, {9:10} “इस्राएल के लोगों से ये बातें कहोः यह हो सगता है कि तुम ठीक समय पर फसह पर्व न मना सको क्योंकि तुम या तुम्हारे परिवार का कोई व्यक्ति शव को स्पर्श करने के कारण अशुद्ध हो या संभव है कि तुम किसी यात्रा पर गए हुए हो। {9:11} तो भी तुम फसह पर्व मना सकते हो। तुम फसह पर्व को दूसरे महीने के चौदहवें दिन संध्या के समय मनाओगे। उस समय तुम मेमना, अखमीरी रोटी और कड़वा सागपात खाओगे। {9:12} अगली सुबह तक के लिए तुम्हें उसमें से कोई भी भोजन नहीं छोड़ना चाहिए। तुम्हें मेमने की किसी हड्डी को भी नहीं तोड़ना चाहिए। उस व्यक्ति को फसह पर्व के सभी नियमों का पालन करना चाहिए। {9:13} किन्तु कोई भी व्यक्ति जो समर्थ है, फसह पर्व की दावत को ठीक समय पर ही खाये। यदि वह शुद्ध है और किसी यात्रा पर नहीं गया है तो उसके लिए कोई बहाना नहीं है। यदि वह व्यक्ति फसह पर्व को ठीक समय पर नहीं खाता है तो उसे अपने लोगों से अलग भेज दिया जायेगा। वह अपराधी है! क्योंकि उसने यहोवा को ठीक समय पर अपनी भेंट नहीं चढ़ाई सो उसे दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए। {9:14} “तुम लोगों के साथ रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो इस्राएलि लोगों का सदस्य नहीं है, यहोवा के फसह पर्व में तुम्हारे साथ भाग लेना चाह सकता है। यह स्वीकृत है, किन्तु उस व्यक्ति को उन नियमों का पालन करना होगा। जो तुम्हें दिए गए हैं. तुम्हें अन्य लोगों के लिए भी वे ही नियम रखने होंगे जो तुम्हारे लिए हैं।” {i9:15} बादल और अग्नि {9:15} जिस दिन पवित्र साक्षीपत्र का तम्बू लगाया गया, एक बादल इसके ऊपर रूक गया। रात को बादल अग्नि की तरह दिखाई पड़ता था। {9:16} बादल तम्बू के ऊपर निरन्तर ठहरा रहा और रात को बादल अग्नि की तरह दिखाई दिया। {9:17} जब बादल तम्बू के ऊपर अपने स्थान से चलता था, इस्राएली इसका अनुसरण करते थे। जब बादल रुक जाता था तब इस्राएल के लोग वहीं अपना डेरा डालते थे। {9:18} यही ढंग था जिससे यहोवा इस्राएल के लोगों को यात्रा करने का आदेश देता था, और यही उसका उस स्थान के लिए आदेश था जहाँ उन्हें डेरा लगाना चाहिए था और जब तक बादल तम्बू के ऊपर ठहरता था।लोग उसी स्थान पर डेरा डाले रहते थे। {9:19} कभी — कभी बादल तम्बू के ऊपर लम्बे समय तक ठहरता था। इस्राएली यहोवा का आदेश मानते थे और यात्रा नहीं करते थे। {9:20} कभी — कभी बादल तम्बू के ऊपर कुछ ही दिनों के लिए रहता था और लोग यहोवा के आदेश का पालन करते थे। वे बादल का अनु शरण तब करते जब वह चलता था। {9:21} कभी — कभी बादल केवल रात में ही ठहरता था और जब बादल अगली सुबह चलता था तब लोग अपनी चीज़ें इकट्ठी करते थे और उसका अनुसरण करते थे, रात में या दिन में, यदि बादल चलता था तो लोग उसका अनुसरण करते थे। {9:22} यदि बादल तम्बू के ऊपर दो दिन या एक महीना या एक वर्ष ठहरता था तो लोग यहोवा के आदेश का पालन करते रहते थे। वे उसी डेरे में ठहरते थे और तब तक नहीं चलते थे, जबतक बादत नहीं चलता था। जब बादल अपने स्थान से उठता और चलता तब लोग भी चलते थे। {9:23} इस प्रकार लोग यहोवा के आदेश का पालन करते थे। वे वहाँ डेरा डालते थे जिस स्थान को यहोवा दिखाता था और जब यहोवा उन्हें स्थान छोड़ने के लिए आदेश देता था तब लोग बादल का अनुसरण करते हुए स्थान छोड़ते थे। लोग यहोवा के आदेश का पालन करते थे। यह आदेश था जिसे यहोवा ने मूसा के द्वारा उन्हें दिया। {i10:1} चाँदी का बिगुल {10:1} यहोवा ने मूसा से कहाः {10:2} “बिगुल बनाने के लिये चाँदी का उपयोग करो। चाँदी का पतरा बना कर उससे दो बिगुल बनाओ। ये बिगुल लोगों को एक साथ बुलाने और यह बताने के लिए होंगें कि डेरे को कब चलाना है। {10:3} जब तुम इन दोनों बिगुलों को बजाओगे, तो सभी लोगों को मिलापवाले तम्बू के सामने तुम्हारे आगे इकट्ठा हो जाना चाहिए। {10:4} यदि तुम केवल एक विगुल बजाते हो, तो नेता (इस्राएल के बारह परिवारों के मुखिया) तुम्हारे सामने इकट्ठे होंगे। {10:5} “जब तुम बिगुल को पहली बार कम बजाओ, तब पूर्व में डेरा लगाए हुए परिवारों के समूहों को चलना आरम्भ कर देना चाहिए। {10:6} जब तुम बिगुल को दूसरी बार कम बजाओगे तो दक्षिण के डेरे को चलना आरम्भ कर देना चाहिए। बिगुल की ध्वनि यह घोषणा करेगी कि लोग चलें। {10:7} जब तुम सभी लोगों को इकट्ठा करना चाहते हो तो बिगुल को दूसरे ढंग से लम्बी स्थिर ध्वनि निकालते हुए बजाओ। {10:8} केवल हारून के याजक पुत्रों को बिगुल बजाना चाहिए। यह तुम लोगों के लिए नियम है जो भविष्य में माना जाता रहेगा। {10:9} “यदि तुम अपने देश में किसी शत्रु से लड़ रहे हो तो, तुम उनके विरुद्ध जाने के पहले बिगुल को जोर से बजाओ। तब तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारी बात सुनेगा, और वह तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं से बचाएगा। {10:10} अपनी विशेष प्रसन्नता के समय में भी तुम्हें अपना बिगुल बजाना चाहिए। अपने विशेष पवित्र दिनों और नये चाँद की दावतों में बिगुल बजाओ और तुम्हारे परमेस्वर यहोवा को तुम्हें याद करने का यह विशेष तरीका होगा। मैं तुम्हें यह करने का आदेश देता हूँ, मैं तुम्हारा परमेस्वर यहोवा हूँ।” {i10:11} इस्राएल के लोग आपने डेरे को ले चलते हैं {10:11} दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में इस्राएल के लोगों द्वारा मिस्र छोड़ने के बीसवें दिन के बाद साक्षीपत्र के तम्बू के ऊपर से बादल उठा। {10:12} इसलिए इस्राएल के सभी लोगों ने सीनै की मरुभूमि से यात्रा करनी आरम्भ की वे एक स्थान से दुसरे स्थान को यात्रा तब तक करते रहे जब तक बादल पारान की मरुभूमि में नहीं रूका। {10:13} यह पहला समय था कि लोगों ने अपने डेरों को वैसे चलाया जैसा यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। {10:14} यहूदा के डेरे से तीन दल पहले गए। उन्होंने अपने झण्डे के साथ यात्रा की। पहला दल यहूदा के परिवार समूह का था। अम्मीनादाब का पुत्र नहशोन उस दल का नेता था। {10:15} उसके ठीक बाद इस्साकार का परिवार समूह आया। सूआर का पुत्र नतनेल उस दल का नेता था। {10:16} और तब जबूलून का परिवार समूह आया। हेलोन का पुत्र एलीआब उस दल का नेता था। {10:17} तब मिलापवाले तम्बू उतारे गए और गेर्शोन तथा मरारी परिवार के लोग पवित्र तम्बू को लेकर चले। इसलिए इन परिवारों के लोग पंक्ति में ठीक बाद में थे। {10:18} तब रूबेन के डेरे के तीन दल आए। उनहोंने अपने झण्डे के साथ यात्रा की। पहला दल रूबेन परिवार समूह का था। शदेऊर का पुत्र एलीआज़र इस दल का नेता था। {10:19} इसके ठीक बाद शिमोन का परिवार समूह आया। सूरीशद्दै का पुत्र शलूमीएल उस दल का नेता था। {10:20} और तब गाद का परिवार समूह आया। दूएल का पुत्र एल्यासाप उस दल का नेता था। {10:21} तब कहात परिवार के लोग आए। वे उन पवित्र चीज़ों को ले जा रहे थे जो पवित्र तम्बू में थीं। ये लोग इस समय इसलिए आए ताकि इन लोगों के पहुँचने के पहले पवित्र तम्बू लगा दिया जाए और तैयार कर दिया जाए। {10:22} इसके ठीक बाद एप्रैम के डेरे के तीन दल आए। उन्होंने अपने झण्डे के साथ यात्रा की। पहला दल एप्रैम के परिवार समूह का था। अम्मीहूद का पुत्र एलीशामा उस दल का नेता था। {10:23} ठीक उसके बाद मनश्शे का परिवार समूह आया। पदासूर का पुत्र गम्लीएल उस दल का नेता था। {10:24} तब बिन्यामीन का परिवार समूह आया। गिदोनी का पुत्र अबीदान उस दल का नेता था। {10:25} पंक्ति में आखिरी तीन परिवार समूह अन्य सभी परिवार समूहों के लिए पृष्ठ रक्षक थे। ये दल दान के डेरे मे से थे। उन्होंने अपने झण्डे के साथ यात्रा की। पहला दल दान के परिवार समूह का था। अम्मीशद्दै का पुत्र अहीएजेर उस दल का नेता था। {10:26} उसके ठीक बाद आशेर का परिवार समूह आया। ओक्रान का पुत्र पजीएल उस दल का नेता था। {10:27} तब नप्ताली का परिवार समूह आया। एनान का पुत्र अहीरा उस दल का नेता था। {10:28} जब इस्राएल के लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते थे तब उनका यही ढंग था। {10:29} रूएल का पुत्र होबाब मिद्यानी था। (रूएल मूसा का ससुर था।) मूसा ने होबाब से कहा, “हम लोग उस देश की यात्रा कर रहे हैं जिसे परमेस्वर ने हम लोगों को देने का वचन दिया है। इसलिए हम लोगों के साथा आओ, हम लोग तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार करेंगे। परमेस्वर ने इस्राएल के लोगों को अच्छी चीजें देने का वचन दिया है।” {10:30} किन्तु होबाब ने उत्तर दिया, “नहीं, मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊँगा। मैं अपने देश और अपने लोगों के पास लौटूँगा।” {10:31} तब मूसा ने कहा, “हमें छोड़ो मत। तुम रेगिस्तान के बारे में हम लोगों से अधिक जानते हो। तुम हमारे पथ पदर्शक हो सकते हो। {10:32} यदि तुम हम लोगों के साथ आते हो तो यहोवा जो कुछ अच्छी चीज़ें देगा उसमें तुम्हारे साथ हम हिस्सा बटाऐंगे।” {10:33} इसलिए होबाब मान गया और उन्होंने यहोवा के पर्वत से यात्रा आरम्भ की। याजकों ने यहोवा के साक्षीपत्र के पवित्र सन्दूक को लिया और लोगों के आगे चले। वे डेरा डालने के स्थान की खोज में तीन दिन तक पवित्र सन्दूक ढोते रहे। {10:34} यहोवा का बादल हर एक दिन उनके ऊपर था और हर एक सुबह जब वे अपने डेरे को छोड़ते थे तो उनको रास्ता दिखाने के लिए बादल वहाँ रहता था। {10:35} जब लोग पवित्र सन्दूक के साथ यात्रा आरम्भ करते थे और पवित्र सन्दूक डेरे से बाहर ले जाया जाता था, मूसा सदा कहता था, “यहोवा, उठ! तेरे शत्रु सभी दिशाओं में भागें। जो लोग तेरे विरुद्ध हों तेरे सामने से भागें।” {10:36} और जब पवित्र सन्दूक अपनी जगह पर रखा जाता था तब मूसा सदा यह कहता था, “यहोवा, वापस आ, इस्राएल के लाखों लोगों के पास।” {i11:1} लोग फिर शिकायत करते हैं {11:1} इस समय लोगों ने अपने कष्टों के लिए शिकायत की। यहोवा ने उनकी शिकायतें सुनी। जब यहोवा ने ये बातें सुनीं तो वह क्रोधित हुआ। यहोवा की तरफ से डेरे में आग लग गई। आग ने डेरे के छोर पर के कुछ हिस्से को जला दिया। {11:2} इसलिए लोगों ने मूसा को सहायता के लिये पुकारा। मूसा ने यहोवा से प्रार्थना की और आग का जलना बन्द हो गया। {11:3} इसलिए उस स्थान को तबेरा कहा गया। लोगों ने उस स्थान को यही नाम दिया क्योंकि यहोवा ने उनके बीच आग जला दी थी। {i11:4} सत्तर अग्रज नेता {11:4} इस्राएल के लोगों के साथ जो विदेशी मिल गए थे अन्य चीज़ें खाने की इच्छा करने लगे। शीघ्र ही इस्राएल के लोगों ने फिर शिकायत करनी आरम्भ की। लोगों ने कहा, “हम माँस खाना चाहते हैं! {11:5} हम लोग मिस्र में खायी गई मछलियों को याद करते हैं। उन मछलियों का कोई मुल्य नहीं देना पड़ता था। हम लोगों के पास बहुत सी सब्जियाँ थीं जैसे ककड़ियाँ, खरबूजे, गन्ने, पयाज और लहसुन। {11:6} किन्तु अब हम अपनी शक्ति खो चुके हैं हम और कुछ भी नहीं खाते, इस मन्ने के अतिरिक्त!” {11:7} (मन्ना धनियाँ के बीज के समान था, वह गूगुल के पारदर्शी पीले गोंद के समान दिखता था। {11:8} लोग इसे इकट्ठा करते थे और तब इसे पीसकर आटा बनाते थे या वे इसे कुचलने के लिए चट्टान का उपयोग करते थे। तब वे इसे बर्तन में पकाते थे अथवा इसके “फुलके” बनाते थे। फुलके का स्वाद जैतून के तेल से पकी रोटी के समान होता था। {11:9} हर रात को जब भूमि ओस से गीली होती थी तो मन्ना भूमि पर गिरता था।) {11:10} मूसा ने हर एक परिवार के लोगों को अपने खेमों के द्वारो पर खड़े शिकायत करते सुना। यहोवा बहुत क्रोधित हुआ। इससे मूसा बहुत परेशान हो गया। {11:11} मूसा ने यहोवा से पूछा, “यहोवा, तूने अपने सेवक मुझ पर यह आपत्ति क्यों डाली है मैंने क्या किया है जो बुरा है। मैंने तुझे अप्रसन्न करने के लिए क्या किया है तूने मेरे ऊपर इन सभी लोगों का उत्तरदायित्व क्यों सौंपा है? {11:12} तू जानता है कि मैं इन सभी लोगों का पिता नहीं हुँ। तू जानता है कि मैंने इनको पैदा नहीं किया है। किन्तु यह तो ऐसे हैं कि मैं इन्हें अपनी गोद में वैसे ही ले चलूँ जैले कोई धाय बच्चे को ले चलती है। तू हमें ऐसा करने को विवश क्यों करता है तू मुझे क्यों विवश करता है कि मैं इन्हें उस देश को ले जाऊँ जिसे देने का वचन तूने उनके पूर्वजों को दिया है {11:13} मेरे पास इन लोगों के लिए पर्याप्त माँस नहीं है, किन्तु वे लगातार मुझसे शिकायत कर रहे हैं। वे कहते हैं, ‘हमें खाने के लिए माँस दो!’ {11:14} मैं अकेले इन सभी लोगों की देखभाल नहीं कर सकता। यह बोझ मेरी बरदाश्त के बाहर है। {11:15} यदि तू उनके कष्ट को मुझे देकर चलाते रहना चाहता है तो तू मुझे अभी मार डाल। यदि तू मुझे अपना सेवक मानता है तो अभी मुझे मर जाने दे। तब मेरे सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे!” {11:16} यहोवा ने मूसा से कहा, “मेरे पास इस्राएल के ऐसे सत्तर अग्रजों को लाओ, जो लोगों के अग्रज और अधिकारी हों। इन्हें मिलापवाले तम्बू में लाओ। वहाँ उन्हें अपने साथ खड़ा करो। {11:17} तब मैं आऊँगा और तुमसे बातें करूँगा। अब तुम पर आत्मा आई है। किन्तु मैं उन्हें भी आत्मा का कुछ अंश दूँगा। तब वे लोगों की देखभाल करने में तुम्हारी सहायता करेंगे। इस प्रकार, तुमको अकेले इन लोगों के लिए उत्तरदायी नहीं होना पड़ेगा। {11:18} “लोगों से कहोः कल के लिए अपने को तैयार करो। कल तुम लोग माँस खाओगे। यहोवा ने सुना है जब तुम लोग रोए — चिल्लाए। यहोवा ले तुम लोगों की बातें सुनीं जब तुम लोगों ने कहा, ‘हमें खाने के लिए माँस चाहिए! हम लोगों के लिए मिस्र में अच्छा था।’ अब यहोवा तुम लोगों को माँस देगा और तुम लोग उसे खाओगे। {11:19} तुम लोग उसे केवल एक दिन नहीं, दो, पाँच, दस या बीस दिन भी खा सकोगे। {11:20} तुम लोग वह माँस, महीने भर खाओगे। तुम लोग वह माँस तब तक खाओगे जब तक उससे ऊब नहीं जाओगे। यह होगा, क्योंकि तुम लोगों ने यहोवा के विरुद्ध शिकायत की है। यहोवा तुम लोगों में घूमता है और तुम्हारी आवश्यकताओं को समझता है। किन्तु तुम लोग उसके सामने रोए — चिल्लाए और शिकायत की है! तुम लोगों ने कहा, हम लोगों ने आखिर मिस्र छोड़ा ही क्यों” {11:21} मूसा ने कहा, “यहोवा, यहाँ छः लाख पुरुष साथ चल रहे हैं और तू कहता है, ‘मैं उन्हें पूरे महीने खाने के लिए पर्याप्त माँस दूँगा!’ {11:22} यदि हमें सभी भेड़ें और मवेशी मारने पड़े तो भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों के महीने भर खाने के लिए वह पर्याप्त नहीं होगा और यदि हम समुद्र की सारी मछलियाँ पकड़ लें तो भी उनके लिए वे पर्याप्त नहीं होंगी।” {11:23} किन्तु यहोवा ने मूसा से कहा, “यहोवा की शक्ति को सीमित न करो। तुम देखोगे कि यदि मैं कहता हूँ कि मैं कुछ करूँगा तो उसे मैं कर सकता हूँ।” {11:24} इसलिए मूसा लोगों से बात करने बाहर गया। मूसा ने उन्हें वह बताया जो यहोवा ने कहा था। तब मूसा ने सत्तर अग्रज नेताओं को इकट्ठा किया। मूसा ने उनसे तम्बू के चारों ओर खड़ा रहने को कहा। {11:25} तब यहोवा एक बादल में उतरा और उसने मूसा से बातें कीं। आत्मा मूसा पर थी। यहोवा ने उसी आत्मा को सत्तर अग्रज नेताओं पर भेजा। जब उनमें आत्मा आई तो वे भविष्यवाणी करने लगे। किन्तु यह केवल उसी समय हुआ जब उन्होंने ऐसा किया। {11:26} अग्रजों में से दो एलदाद और मेदाद तम्बू में नहीं गए। उनके नाम अग्रज नेताओं की सूची में थे। किन्तु वे डेरे में रहे किन्तु आत्मा उन पर भी आई और वे भी डेरे में भविष्यावाणी करने लगे। {11:27} एक युवक दौड़ा और मूसा से बोला। उस पुरुष ने कहा, “एलदाद और मेदाद डेरे में भविष्यावाणी कर रहे हैं।” {11:28} किन्तु नून के पुत्र यहोशू ने मूसा से कहा, “मूसा, तुम्हें उन्हें रोकना चाहिए!” (यहोशू मूसा का तब से सहायक था जब वह किशोर था।) {11:29} किन्तु मूसा ने उत्तर दिया, “क्या तुम्हें डर है कि लोग सोचेंगे कि अब मैं नेता नहीं हूँ मैं चाहता हूँ कि यहोवा के सभी लोग भविष्यवाणी करने योग्य हों। मैं चाहता हूँ कि यहोवा अपनी आत्मा उन सभी पर भेजे।” {11:30} तब मूसा और इस्राएल के नेता डेरे में लौट गए। {i11:31} बटेरें आईं {11:31} तब यहोवा ने समुद्र की ओर से भारी आंधी चलाई। आंधी ने उस क्षेत्र में बटेरों को पहुँचाया। बटेरें डेरों के चारों ओर उड़ने लगीं। वहाँ इतनी बटेरें थीं कि भूमि ढक गई। भूमि पर बटेरों की तीन फीट ऊँची परत जम गई थी। कोई व्यक्ति एक दिन में जितनी दूर जा सकता था उतनी दूर तक चारों ओर बटेरें थीं। {11:32} लोग बाहर निकले और पूरे दिन और पूरी रात बटेरों को इकट्ठा किया और फिर पूरे अगले दिन भी उन्होंने बटेरें इकट्ठी कीं। हर एक आदमी ने साठ बुशेल या उससे अधिक बटेरें इकट्ठी की। तब लोगों ने बटेरों को अपने डेरे के चारों ओर फैलाया। {11:33} लोगों ने माँस खाना आरम्भ किया किन्तु यहोवा बहुत क्रोधित हुआ। जब माँस उनके मुँह में था और लोग जब तक इसको खाना खत्म करें इसके पहले ही, यहोवा ने एक बीमारी लोगों में फैला दी। {11:34} इसलिए लोगों ने उस स्थान का नाम किब्रोथत्तावा रखा। उन्होंने उस स्थान को वह नाम इसलिए दिया कि यह वही स्थान है जहाँ उन्होंने उन लोगों को दफनाया था जो स्वादिष्ट भोजन की प्रबल इच्छा रखते थे। {11:35} किब्रोथत्तावा से लोगों ने हसेरोत की यात्रा की और वे वहीं ठहरे। {i12:1} मरियम और हारून मूसा की पत्नी के विरुद्ध कहते हैं {12:1} मरियम और हारून मूसा के विरुद्ध बात करने लगे। उन्होंने उसकी आलोचना की, क्योंकि उसकी पत्नी कूशी थी। उन्होंने सोचा कि यह अच्छा नहीं कि मूसा ने कूशी लोगों में से एक के साथ विवाह किया। {12:2} उन्होंने आपस में कहा, “यहोवा ने लोगों से बात करने के लिए मूसा का उपयोग किया है। किन्तु मूसा ही एकमात्र नहीं है। यहोवा ने हम लोगों के द्वारा भी कहा है।” यहोवा ने यह सुना। {12:3} (मूसा बहुत विनम्र व्यक्ति था। वह न डींग हाँकता था, न शेखी बघारता था। वह धरती पर के किसी व्यक्ति से अधिक विनम्र था।) {12:4} इसलिए यहोवा अचानक आया और मूसा, हारून और मरियम से बोला। यहोवा ने कहा, “तुम तीनों को अब मिलापवाले तम्बू में आना चाहिए।” इसलिए मूसा, हारून और मरियम तम्बू में गए। {12:5} तब यहोवा बादल में उतरा। यहोवा तम्बू के द्वार पर खड़ा हुआ। यहोवा ने “हारून और मरियम” को अपने पास आने के लिए कहा! जब दोनों उसके समीप आए तो, {12:6} यहोवा ने कहा, “मेरी बात सुनो जब मैं तुम लोगों में नबी भेजूँगा, तब मैं अर्थात् यहोवा अपने आपको उसके दर्शन में दिखाऊँगा और मैं उससे उसके सपने में बात करूँगा। {12:7} किन्तु मैंने अपने सेवक मूसा के साथ ऐसा नहीं किया। मैंने उसे अपने सभी लोगों को ऊपर शक्ति दी है। {12:8} जब मैं उससे बात करता हूँ तो मैं उसके आमने सामने बात करता हूँ। मैं जो बात कहना चाहता हुँ उसे साफ — साफ कहता हुँ मैं छिपे अर्थ वाले विचित्र विचारों को उसके सामने नहीं रखता और मूसा यहोवा के स्वरूप को देख सकता है। इसलिए तुमने मेरे सेवक मूसा के विरुद्ध बोलने का साहस कैसे किया?” {12:9} तब यहोवा उनके पास से गया। किन्तु वह उनसे बहुत क्रोधित था। {12:10} बादल तम्बू से उठा। तब हारून मुड़ा और उसने मरियम को देखा और उसे दिखाई पड़ा कि उसे भयंकर चर्मरोग हो गया है। उसकी त्वचा बर्फ की तरह सफेद थी! {12:11} तब हारून ने मूसा से कहा, “महोदय, कृपा करके जो मूर्खता भरा पाप हम लोगों ने किया है, उसके लिए क्षमा करें। {12:12} उसकी त्वचा का रंग उस प्रकार न उड़ने दे जैसा मरे हुए उत्पन्न बच्चे का होता है।” (कभी कभी इस प्रकार का बच्चा आधी गली हुई त्वचा के साथ उत्पन्न होता है।) {12:13} इसलिए मूसा ने यहोवा से प्रार्थना की, “परमेश्वर, कृपा करके इस बीमारी से उसे स्वस्थ कर!” {12:14} यहोवा ने मूसा को उत्तर दिया, “यदि उसका पिता उसके मुँह पर थूके, तो वह सात दिन तक लज्जित रहेगी। इसलिए उसे सात दिन तक डेरे से बाहर रखो। उस समय के बाद वह ठीक हो जायेगी। तब वह डेरे में वापस आ सकती है।” {12:15} इसलिए मरियम सात दिन के लिए डेरे से बाहर ले जाई गई और तब तक वे वहाँ से नहीं चले जब तक वह फिर वापस नहीं लाई गई। {12:16} उसके बाद लोगों ने हसेरोत को छोड़ा और पारान मरुभूमि की उन्होंने यात्रा की। लोगों ने उस मरुभूमि में डेरे लगाए। {i13:1} जासूस कनान को गए {13:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {13:2} “कुछ व्यक्तियों को कनान देश का अध्ययन करने के लिए भेजो। यही वह देश है जिसे मैं इस्राएल के लोगों को दूँगा। हर एक बारह परिवार समूह से एक नेता को भेजो।” {13:3} इसलिए मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी। उसने परान के रेगिस्तान से नेताओं को भेजा। {13:4} ये उनके नाम जककूर का पुत्र शम्मू — रुबेन के परिवार के समूह से, {13:5} होरी का पूत्र शापात — शिमोन के परिवार समूह से; {13:6} यपुन्ने का पुत्र कालेब — यहूदा के परिवार समूह से; {13:7} योसेप का पुत्र यिगास — इस्साकार के परिवार समूह से; {13:8} नून का पुत्र होशे — एप्रैम के परिवार समूह से; {13:9} रापू का पुत्र पलती — बिन्यामीन के परिवार समूह से; {13:10} सोदी का पुत्र गद्दीएल — जबूलून के परिवार समूह से; {13:11} सूसी का पुत्र गद्दी — मनश्शे के परिवार समूह से; {13:12} गमल्ली का पुत्र अम्मीएल — दान के परिवार समूह से; {13:13} मीकाएल का पुत्र सतूर — आशेर के परिवार समूह से; {13:14} वोप्सी का पुत्र नहूबी — नप्ताली परिवार समूह से; {13:15} माकी का पुत्र गूएल — गाद के परिवार समूह से; {13:16} ये उन व्यक्तियों के नाम हैं जिन्हें मूसा ने प्रदेश को देखने और जाँच करने के लिए भेजा। (मूसा से नून के पुत्र होशे को दूसरे नाम से पुकारा। मूसा ने उसे यहोशू कहा।) {13:17} मूसा जब उन्हें कनान की छानबीन के लिए भेज रहा था, तब उसने कहा, “नेवेक घाटी से होकर पहाड़ी प्रदेश में जाओ। {13:18} यह देखो कि देश कैसा दिखाई देता है और उन लोगों की जानकारी प्राप्त करो जो वहाँ रहते हैं। वे शक्तिशाली हैं या कमजोर हैं? वे थोड़े हैं या अधिक संख्या में हैं? {13:19} उस प्रदेश के बारे में जानकारी करो जिसमें वे रहते हैं। क्या यह अच्छा प्रदेश है या बुरा? किस प्रकार के नगरों में वे रहते हैं? क्या उन नगरों के परकोटे हैं? क्या नगर शक्तिशाली ढगं से सुरक्षित है? {13:20} और प्रदेश के बारे में अन्य बातों की जानकारी प्राप्त करो। क्या भूमि उपज के लिए उपजाऊ है या ऊसर है? क्या जमीन पर पेड़ उगे हैं? और उस भूमि से कुछ फल लाने का प्रयत्न करो।” (यह उस समय की बात है जब अंगूर की पहली फसल पकी हो।) {13:21} तब उन्होंने प्रदेश की छानबीन की। वे जिन मरुभूमि से रहोब और लेबो हमात तक गए। {13:22} वे नेगेव से होकर तब तक यात्रा करते रहे जब तक वे हेब्रोन नगर को पहुँचे। (हेब्रोन मिस्र में सोअन नगर के बसने के सात वर्ष पहले बना था।) अहीमन, शेशै और तल्मै वहाँ रहते थे। ये लोग अनाक के वंशज थे। {13:23} तब वे लोग एश्कोल की घाटी में आये उन व्यक्तियो ने अंगूर की बेल की एक शाखा काटी। उस शाखा में अंगूर का एक गुच्छा था। लोगों में से दो व्यक्ति अपने बीच एक डंडे पर उसे रख कर लाए। वे कुछ अनार ओर अंजीर भी लाए। {13:24} उस स्थान का नाम एश्कोल की घाटी था। क्योंकि यह वही स्थान है जहाँ इस्राएल के आदमियों में ने अंगुर के गुच्छे काटे थे। {13:25} उन व्यक्तियों ने उस प्रदेश की छानबीन चालीस दिन तक की। तब वे डेरे को लौटे। {13:26} वे व्यक्ति मूसा, हारून और अन्य इस्राएल के लोगों के पास कादेश में लौटे। यह पारान मरुभूमि में था। तब उन्होंने मूसा, हारून और सभी लोगों को, जो कुछ देखा सब कुछ सुनाया और उन्होंने उन्हें उस प्रदेश के फलों को दिखाया। {13:27} उन लोगों ने मूसा से यह कहा, “हम लोग उस प्रदेश में गए जहाँ आपने हमें भजा। वह प्रदेश अत्यधिक अच्छा है यहाँ दूध और मधु की नदियाँ बह रही हैं! ये वे कुछ फल हैं जिन्हें हम लोगों ने वहाँ पाया {13:28} किन्तु वहाँ जो लोग रहते हैं, वे बहुत शक्तिशाली और मजबूत हैं। उनके नगर मजबूती के साथ सुरक्षित हैं और उनके नगर बहूत विशाल हैं। हम लोगों ने वहाँ उनके परिवार के कुछ लोगों को देखा भी। {13:29} अमालेकी लोग नेगेव की घाटी में रहते हैं। हित्ती, यबूसी और एमोरी पहाड़ी प्रदेशों में रहते हैं। कनानी लोग समुद्र के किनारे और यरदन नदी के किनारे रहते हैं।” {13:30} तब कालेब ने मूसा के समीप के लोगों को शान्त होने को कहा। कालेब ने कहा, “हम लोगों को वहाँ जाना चाहिए और उस प्रदेश को अपने लिए लेना चाहिए। हम लोग उस प्रदेश को सरलता से ले सकते हैं।” {13:31} किन्तु जो व्याक्ति उसके साथ गया था, वह बोला, “हम लोग उन लोगों के विरुद्ध लड़ नहीं सकते। वे हम लोगों की तुलना में अधिक शक्तिशाली हैं।” {13:32} और उन लोगों ने सभी इस्राएली लोगों से कहा कि उस प्रदेश के लोगों को पराजित करने के लिए वे पर्याप्त शक्तिशाली नहीं हैं उन्होंने कहा, “जिस प्रदेश को हम लोगों ने देखा, वह शक्तिशाली लोगों से भरा है। वे लोग इतने अधिक शक्तिशाली हैं कि जो कोई व्यक्ति वहाँ जाएगा उसे वे सरलता से हरा सकते हैं। {13:33} हम लोगों ने वहाँ नपीलियों को देखा! (अनाक के परिवार के लोग जो नपीलों के वंश के थे।) उनके सामने खड़े होने पर हम लोगों ने अपने आपको टिड्डा अनुभव किया। उन लोगों ने हम लोगों को ऐसे देखा मानो टिड्डे के समान छोटे हों।” {i14:1} लोग फिर शिकायत करते हैं {14:1} उस रात डेरे के सब लोगों ने जोर से रोना आरम्भ किया। {14:2} इस्राएल के सभी लोगों ने हारून और मूसा के विरुद्ध फिर शिकायत की। सभी लोग एक साथ आए और मूसा तथा हारून से उन्होंने कहा, “हम लोगों को मिस्र या मरुभूमि में मर जाना चाहिए था, अपने नए प्रदेश में तलवार से मरने की अपेक्षा यह बहुत अच्छा रहा होता। {14:3} क्या यहोवा हम लोगों को इस नये प्रदेश में मरने के लिए लाया है? हमारी पत्नियाँ और हमारे बच्चे हमसे छीन लिए जाएंगे और हम तलवार से मार डाले जाएंगे। यह हम लोगों के लिए अच्छा होगा कि हम लोग मिस्र को लौट जाएं।” {14:4} तब लोगों ने एक दूसरे से कहा, “हम लोगों को दूसरा नेता चुनना चाहिए और मिस्र लौट चलना चाहिए।” {14:5} तब मूसा और हारून वहाँ इकट्ठे सारे इस्राएल के लोगों के सामने भूमि पर झुक गए। {14:6} उस प्रदेश की छानबीन करने वाले लोगों में से दो व्यक्ति बहुत परेशान हो गए। (वे दोनो नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालेब थे।) {14:7} इन दोनों ने वहाँ इकट्ठे इस्राएल के सभी लोगों से कहा, “जिस प्रदेश को हम लोगों ने देखा है वह बहुत अच्छा है। {14:8} और यदि यहोवा हम लोगों से प्रसन्न है तो वह हम लोगों को उस प्रदेश में ले चलेगा। वह प्रदेश सम्पन्न है, ऐसा है जैसे वहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती हों और यहोवा उस प्रदेश को हम लोगों को देने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करेगा। {14:9} किन्तु हम लोगों को यहोवा के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। हम लोगों को उस प्रदेश के लोगों से डरना नहीं चाहिए। हम लोग उन्हें सरलता से हरा देंगे। उनके पास कोई सुरक्षा नहीं है, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए उनके पास कुछ नहीं है। किन्तु हम लोगों के साथ यहोवा है। इसलिए इन लोगों से डरो मत!” {14:10} तब इस्राएल के सभी लोग उन दोनों व्यक्तियों को पत्थरों से मार देने की बातें करने लगे। किन्तु यहोवा का तेज मिलापवाले तम्बू पर आया। इस्राएल के सभी लोग इसे देख सकते थे। {14:11} यहोवा ने मूसा से कहा, “ये लोग इस प्रकार मुझसे कब तक घृणा करते रहेंगे? वे प्रकट कर रहे हैं कि वे मुझ पर बिश्वास नहीं करते। वे दिखाते हैं कि उन्हें मेरी शक्ति पर बिश्वास नहीं। वे मुझ पर बिश्वास करने से तब भी इन्कार करते हैं जबकि मैंने उन्हें बहुत से शक्तिशाली चिन्ह दिखाये हैं। मैंने उनके बीच अनेक बड़ी चीजें की हैं। {14:12} मैं उन्हें नष्ट कर दूँगा और तुम्हारा उपयोग दूसरा राष्ट्र बनाने के लिए करूँगा और तुम्हारा राष्ट्र इन लोगों से अधिक बड़ा और अधिक शक्तिशाली होगा।” {14:13} तब मूसा ने यहोवा से कहा, “यदि तू ऐसा करता है तो मिस्र में लोग यह सुनेंगे कि तूने अपने सभी लोगों को मार डाला। तूने अपनी बड़ी शक्ति का उपयोग उन लोगों को मिस्र से बाहर लाने के लिए किया {14:14} और मिस्र के लोगों ने इसके बारे में कनान के लोगों को बताया है। वे पहले से ही जानते हैं कि तू यहोवा है। वे जानते हैं कि तू अपने लोगों के साथ है और वे जानते हैं कि तू प्रत्यक्ष है। इस देश में रहने वाले लोग उस बादल के बारे में जानेंगे जो लोगों के ऊपर ठहरता है तूने उस बादल का उपयोग दिन में अपने लोगों को रास्ता दिखाने के लिए किया और रात को वह बादल लोगों को रास्ता दिखाने के लिए आग बन जाता है। {14:15} इसलिए तुझे अब लोगों को मारना नहीं चाहिए। यदि तू उन्हें मारता है तो सभी राष्ट्र, जो तेरी शक्ति के बारे में सुन चुके हैं, कहेंगे, {14:16} ‘यहोवा इन लोगों को उस प्रदेश में ले जाने में समर्थ नहीं था जिस प्रदेस को उसने उन्हें देने का वचन दिया था। इसलिए यहोवा ने उन्हें मरुभूमि में मार दिया।’ {14:17} “इसलिए तुझे अपनी शक्ति दिखानी चाहिए। तुझे इसे वैसे ही दिखाना चाहिए जैसा दिखाने की घोषणा तूने की है। {14:18} तूने कहा था, ‘यहोवा क्रोधित होने में सहनशील है। यहोवा प्रेम से परिपूर्ण है। यहोवा पाप को क्षमा करता है और उन लोगों को क्षमा करता है जो उसके विरुद्ध भी हो जाते हैं। किन्तु यहोवा उन लोगों को अवश्य दण्ड देगा जो अपराधी हैं। यहोवा तो बच्चों को, उनके पितामह और प्रपितामह के पापों के लिए भी दण्ड देता है!’ {14:19} इसलिए इन लोगों को अपना महान प्रेम दिखा। उनके पाप को क्षमा कर। उनको उसी प्रकार क्षमा कर जिस, प्रकार तू उनको मिस्र छोड़ने के समय से अब तक क्षमा करता रहा है।” {14:20} यहोवा ने उत्तर दिया, “मैंने लोगों को तुम्हारे कहे अनुसार क्षमा कर दिया है। {14:21} किन्तु मैं तुमसे यह सत्य कहता हूँ, क्योंकि मैं शाशवत हूँ और मेरी शक्ति इस सारी पृथ्वी पर फैली है। अतः मैं तुमको यह वचन दूँगा। {14:22} उन लोगों में से कोई भी व्यक्ति जिसे मैं मिस्र से बाहर लाया, उस देश को कभी नहीं देखेगा। उन लोगों ने मिस्र में मेरे तेज और मेरे महान संकेतो को देखा है और उन लोगों ने उन महान कार्यों को देखा जो मैंने मरुभूमि में किए। किन्तु उन्होंने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया और दस बार मेरी परीक्षा ली। {14:23} मैंने उनके पूर्वर्जों को वचन दिया था। मैंने प्रतिज्ञा की थी कि मैं उनको एक महान देश दूँगा। किन्तु उनमें से कोई भी व्यक्ति जो मेरे विरुद्ध में हो चुका है उस देश में प्रवेश नहीं करेगा। {14:24} किन्तु मेरा सेवक कालेब इनसे भिन्न है। वह पूरी तरह मेरा अनुसरण करता है। इसलिए मैं उसे उस देश में ले जाऊँगा जिसे उसने पहले देखा है और उसके लोग प्रदेश प्राप्त करेगें। {14:25} अमालेकियों और कनानी लोग घाटी में रह रहे हैं इसलिये तुम्हारे जाने के लिए कोई जगह नही है। कल इस स्थान को छोड़ो और रेगिस्तान की ओर लालसागर से होकर लौट जाओ।” {i14:26} यहोवा लोगों को दण्ड देता है {14:26} यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, {14:27} “ये लोग कब तक मेरे विरुद्ध शिकायत करते रहेंगे मैं इन लोगों की शिकायत और पीड़ा को सुन चुका हूँ। {14:28} इसलिए इनसे कहो, ‘यहोवा कहता है कि वह निश्चय ही सभी काम करेगा जिनके बारे में तुम लोगों की शिकायत है। {14:29} तुम लोगों को यह सब होगाः तुम लोगों के शरीर इस मरुभूमि में मरे हुए गिरेंगे। हर एक व्यक्ति जो बीस वर्ष में या अधिक उम्र का था हमारे लोंगों के सदस्य के रुप गिना गया और तुम लोगों में से हर एक ने मेरे अर्थात् यहोवा के विरुद्ध शिकायत की। इसलिए तुम लोगों में से हर एक मरुभूमि में मरेगा। {14:30} तुम लोगों में से कोई भी कभी उस देश में प्रवेश नहीं करेगा जिसे मैंने तुमको देने का वचन दिया था। केवल यपुन्ने का पुत्र कालेब और नून का पुत्र यहोशू उस देश में प्रवेश करेंगे। {14:31} तुम लोग डर गए थे और तुम लोगों ने शिकायत की कि उस नये देश में तुम्हारे शत्रु तुम्हारे बच्चों को तुमसे छीन लेंगे। किन्तु मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं उन बच्चों को उस देश में ले जाऊँगा। वे उन चीज़ों का भोग करेंगे जिनका भोग करना तुमने स्वीकार नहीं किया। {14:32} जहाँ तक तुम लोगों की बात है, तुम्हारे शरीर इस मरुभूमि में गिर जाएंगे।’” {14:33} “‘तुम्हारे बच्चे यहाँ मरुभूमि में चालीस वर्ष तक गड़ेरिए रहेंगे। उनको यह कष्ट होगा क्योंकि तुम लोगों ने विश्वास नहीं किया। वे इस मरुभूमि में तब तक रहेंगे जब तक तुम सभी यहाँ मर नहीं जाओगे। तब तुम सबके शरीर इस मरुभूमि में दफन हो जाएंगे। {14:34} तुम लोग अपने पाप के लिए चालीस वर्ष तक कष्ट भोगोगे। (तुम लोगों ने इस देश की छानबीन में जो चालीस दिन लागए उसके प्रत्येक दिन के लिए एक वर्ष होगा।) तुम लोग जानोगे कि मेरा तुम लोगों के विरुद्ध होना कितना भयानक है। {14:35} “मैं यहोवा हूँ और मैंने यह कहा है। मैं वचन देता हूँ कि मैं इन सभी बुरे लोगों के लिए यह करुँगा। ये लोग मेरे विरुद्ध एक साथ आए इसलिए वे सभी यहाँ मरुभूमि में मरेंगे।” {14:36} जिन लोगों को मूसा ने नये प्रदेश की छानबीन के लिए भेजा, वे ऐसे थे जो लौट आए और जो सभी इस्राएलियों में शिकायत करते हुए फैल गए। उन लोगों ने कहा कि लोग उस प्रदेश में प्रवेश करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली नहीं हैं। {14:37} वे लोग इस्राएली लोगों में परेशानी फैलाने के लिए उत्तरदायी थे। इसलिए यहोवा ने एक बीमारी उत्पन्न करके उन सभी को मर जाने दिया। {14:38} किन्तु नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालेब उन लोगों में थे जिन्हें देश की छानबीन करने के लिए भेजा गया था और यहोवा ने उन दोनों आदमियों को बचाया। उनको वह बीमारी नहीं हुई जिसने अन्य लोगों को मार डाला। {i14:39} लोग कनान में जाने का प्रयत्न करते हैं {14:39} मूसा ने ये सभी बातें इस्राएल के लोगों से कहीं। लोग बहुत अधिक दुःखी हुए। {14:40} अगले दिन बहुत सवेरे लोगों ने ऊँचे पहाड़ी प्रदेश की ओर बढ़ना आरम्भ किया। लोगों ने कहा, “हम लोगों ने पाप किया है। हम लोगों को दुःख है कि हम लोगों ने यहोवा पर विश्वास नहीं किया। हम लोग उस स्थान पर जाएंगे जिसे यहोवा ने देने का वचन दिया है।” {14:41} किन्तु मूसा ने कहा, “तुम लोग यहोवा के आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहे हो? तूम लोग सफल नहीं हो सकोगे। {14:42} उस देश में प्रवेश न करो।यहोवा तूम लोगों के साथ नहीं है। तुम लोग सरलता से अपने शत्रुओं से हार जाओगे। {14:43} अमालेकी और कनानी लोग वहाँ तुम्हारे विरुद्ध लड़ेंगे। तुम लोग यहोवा से विमुख हुए हो। इसलिए वह तुम लोगों के साथ नहीं होगा जब तुम लोग उनसे लड़ोगे और तुम सभी उनकी तलवार से मारे जाओगे।” {14:44} किन्तु लोगों ने मूसा पर विश्वास नहीं किया। वे ऊँचे पहाड़ी प्रदेश की ओर गए। किन्तु मूसा और यहोवा का साक्षीपत्र का सन्दूक लोगों के साथ नहीं गया। {14:45} तब अमालेकी और कनानी लोग जो पहाड़ी प्रदेशों में रहते थे, आए और उन्होंने इस्राएली लोगों पर आक्रमण कर दिया। अमालेकी और कनानी लोगों ने उनको सरलता से हरा दिया और होर्मा तक उनका पीछा किया। {i15:1} बलि के नियम {15:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {15:2} “इस्राएल के लोगों से बातें करो और उनसे कहोः तुम लोग ऐसे प्रदेश में प्रवेश करोगे जिसे मैं तुम लोगों को तुम्हारे घर के रूप में दे रहा हूँ। {15:3} जब तुम उस प्रदेश में पहुँचोगे तब तुम्हें यहोवा को आग द्वारा विशेष भेंट देनी चाहिए। इसकी सुगन्ध यहोवा को प्रसन्न करेगी। तुम अपनी गायें, भेड़ें और बकरियों का इस्तेमाल होमबलि, बलिदानों, विशेष मनौतियों, मेलबलि, शान्ति भेंट या विशेष पर्वों में करोगे। {15:4} “और उस समय जो अपनी भेंट लाएगा उसे यहोवा को अन्नबलि भी देनी होगी। यह अन्नबलि एक क्वार्ट जैतून के तेल में मिली हुई दो क्वार्ट अच्छे आटे की होगी। {15:5} हर एक बार जब तुम एक मेमना होमबलि के रूप में दो तो तुम्हें एक क्वार्ट दाखमधु पेय भेंट के रूप में तैयार करनी चाहिए। {15:6} “यदि तुम एक मेढ़ा दे रहे हो तो तुम्हें अन्नबलि भी तैयार करनी चाहिए। यह अन्नबलि एक चौथाई क्वार्ट जैतून के तेल में मिली हुई चार क्वार्ट अच्छे आटे की होनी चाहीए {15:7} और तुम्हें एक चौथाई क्वार्ट दाखमधु पेय भेंट के रूप में तैयार करनी चाहिए। इसे यहोवा को भेंट करो। इसकी सुगन्ध यहोवा को प्रसन्न करेगी। {15:8} “होमबलि, शान्ति भेंट अथवा किसी मन्नौती के लिए यहोवा को भेंट के रूप में तुम एक बछड़े को तैयार कर सकते हो। {15:9} इसलिए तुम्हें बैल के साथ अन्नबलि भी लानी चाहिए। अन्नबलि दो क्वार्ट जैतून के तेल में मिली हुई छः क्वार्ट अच्छे आटे की होनी चाहिए। {15:10} दो क्वार्ट दाखमधु भी पेय भेंट के रूप में लाओ। आग में जलाई गई यह भेंट यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। {15:11} प्रत्येक बैल या मेढ़ा या मेमना या बकरी का बच्चा, जिसे तुम यहोवा को भेंट करो, उसी प्रकार तैयार होना चाहिए। {15:12} जो जानवर तुम भेंट करो उनमें से हर एक के लिए यह करो। {15:13} “इसलिए जब लोग यह होमबलि देंगे तो यहोवा को यह सुगन्ध प्रसन्न करेगी। किन्तु इस्राएल के हर एक नागरिक को इसे वैसे ही करना चाहिए जिस प्रकार मैंने बताया है। {15:14} और भविष्य के सभी दिनों में, यदि कोई व्यक्ति जो इस्राएल के परिवार में उत्पन्न नहीं है और तुम्हारे बीच रह रहा है तो उसे भी इन सब चीजों का पालन करना चाहिए। उसे ये वैसे ही करना होगा जैसा मैंने तुमको बताया है। {15:15} इस्राएल के परिवार में उत्पन्न लोगों के लिये जो नियम होगें वही नियम उन अन्य लोगों के लिये भी होंगे जो तुम्हारे बीच रहते हैं। यह नियम अब से भविष्य में लागू रहेगा। तुम और तुम्हारे बीच रहने वाले लोग यहोवा के सामने समान होंगे। {15:16} इसका यह तात्पर्य है कि तुम्हें एक ही विधि और नियम का पालन करना चाहिए। वे नियम इस्राएल के परिवार में उत्पन्न तुम्हारे लिए और अन्य लोगों के लिए भी हैं जो तुम्हारे बीच रहते हैं।” {15:17} यहोवा ने मूसा से कहा, {15:18} “इस्राएल के लोगों से यह कहोः मैं तुम्हें दूसरे देश में ले जा रहा हुँ। {15:19} जब तुम भोजन करो जो उस प्रदेश में उत्पन्न हो तो भोजन का कुछ अंश यहोवा को भेंट के रूप में दो। {15:20} तुम अन्न इकट्ठा करोगे और इसे आटे के रूप में पीसोगे और उसे रोटी बनाने के लिए गूँदोगे। फिर उस आटे की पहली रोटी को यहोवा को अर्पित करोगे। वह ऐसी अन्नबलि होगी जो खलिहान से आती है। {15:21} यह नियम सदा सर्वदा के लिए है। इसका तात्पर्य है कि जिस अन्न को तुम आटे के रूप में माढ़ते हो, उसकी पहली रोटी यहोवा को अर्पित की जानी चाहिए। {15:22} “यदि तुम यहोवा द्वारा मूसा को दिये गए आदेशों में से किसी का पालन करना भूल जाओ तो तुम क्या करोगे {15:23} ये आदेश उसी दिन से आरम्भ हो गए थे जिस दिन यहोवा ने इन्हें तुमको दिया था और ये आदेश भविष्य में भी लागू रहेंगे। {15:24} इसलिये यदि तुम कोई गलती करते हो और इन सभी आज्ञाओं का पालन करना भूल जाते हो तो तुम क्या करोगे यदि इस्राएल के सभी लोग गलती करते हैं, तो सभी लोगों को मिलकर एक बछड़ा यहोवा को भेंट चढ़ाना चाहिए। यह होमबलि होगी और इसकी यह सुगन्ध यहोवा को प्रसन्न करेगी। बैल के साथ अन्नबलि और पेय भेंट भी याद रखो और तुम्हें एक बकरा भी पापबलि के रूप में देना चाहिए। {15:25} “याजक लोगों को पापों से शुद्ध करने के लिये ऐसा करेगा। वह इस्राएल के सभी लोगों के लिए ऐसा करेगा। लोगों ने नहीं जाना था कि वे पाप कर रहे हैं। किन्तु जब उन्होंने यह जाना तब वे यहोवा के पास भेंट लाए। वे एक भेंट अपने पाप के लिए देने आए और एक होमबलि के लिये जिसे आग में जलाया जाना था।इस प्रकार लोग क्षमा किये जाएंगे। {15:26} इस्राएल के सभी लोग और उनके बीच रहने वाले सभी अन्य लोग क्षमा कर दिये जाएंगे। वे इसलिए क्षमा किये जाएंगे क्योंकि वे नहीं जानते थे कि वे बुरा कर रहे हैं। {15:27} “किन्तु यदि एक व्यक्ति आदेश का पालन करना भूल जाता है तो उसे एक वर्ष की बकरी पापबलि के रूप में लानी चाहिए। {15:28} याजक इसे उस व्यक्ति के पापों के लिए यहोवा को अर्पित करेगा और उस व्यक्ति को क्षमा कर दिया जाएगा क्योंकि याजक ने उसके लिए भुगतान कर दिया है। {15:29} यही हर उस व्यक्ति के लिए नियम है जो पाप करता है, किन्तु जानता नहीं कि बुरा किया है। यही नियम इस्राएल के परिवार में उत्पन्न लोगों के लिए है या अन्य लोगों के लिए भी जो तुम्हारे बीच में रहते हैं। {15:30} “किन्तु कोई व्यक्ति जो पाप करता है और जानता है कि वह बुरा कर रहा है, वह यहोवा का अपमान करता है। उस व्यक्ति को अपने लोगों से अलग भेज देना चाहिए। यह इस्राएल के परिवार में उत्पन्न व्यक्ति तथा किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए, जो तुम्हारे बीच रहता है, समान है। {15:31} वह व्यक्ति यहोवा के आदेश के विरुद्ध गया है। उसने यहोवा के आदेश का पालन नहीं किया है। उस व्यक्ति को तुम्हारे समूह से अलग कर दिया जाना चाहिए। वह व्यक्ति अपराधी ही रहेगा और दण्ड का भागी होगा!” {i15:32} एक व्यक्ति विश्राम के दिन काम करता है {15:32} इस समय, इस्राएल के लोग अभी तक मरुभूमि में ही थे। ऐसा हुआ कि एक व्यक्ति को जलाने के लिए कुछ लकड़ी मिलीं। इसलिए वह व्यक्ति लकड़ियाँ इकट्ठी करता रहा। किन्तु वह सब्त (विश्राम) का दिन था। कुछ अन्य लोगों ने उसे यह करते देखा। {15:33} जिन लोगों ने उसे लकड़ी इकट्ठी करते देखा, वे उसे मूसा और हारून के पास लाए और सभी लोग चारों ओर इकट्ठे हो गए। {15:34} उन्होंने उस व्यक्ति को वहाँ रखा क्योंकि वे नहीं जानते थे कि उसे कैसे दण्ड दें। {15:35} तब यहोवा ने मूसा से कहा, “इस व्यक्ति को मरना चाहिए। सभी लोग डेरे से बाहर इसे पत्थर से मारेंगे।” {15:36} इसलिए लोग उसे डेरे से बाहर ले गए और उसे पत्थरों से मार डाला। उन्होंने यह वैसे ही किया जैसा मूसा को यहोवा ने आदेश दिया था। {i15:37} परमेश्वर नियमों को याद रखने में लोगों की सहायता करता है {15:37} यहोवा ने मूसा से कहा, {15:38} “इस्राएल के लोगों से बातें करो और उनसे यह कहोः मैं तुम लोगों को कुछ अपने आदेशों को याद रखने के लिए दूँगा। धागे के कई टुकड़ों को एक साथ बांधकर उन्हें अपने वस्त्रों के कोने पर बांधो। एक नीले रंग का धागा हर एक ऐसी गुच्छियों में डालो। तुम इन्हें अब से हमेशा के लिये पहनोगे। {15:39} तुम लोग इन गुच्छियों को देखते रहोगे और यहोवा ने जो आदेश तुम्हें दिये हैं, उन्हें याद रखोगे। तब तुम आदेशों का पालन करोगे। तुम लोग आदेशों को नहीं भूलोगे और आँखों तथा शरीर की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर कोई पाप नहीं करोगे। {15:40} तुम हमारे सभी आदेशों के पालन की बात याद रखोगे। तब तुम यहोवा के विशेष लोग बनोगे। {15:41} मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। वह मैं हूँ जो तुम्हें मिस्र से बाहर लाया। मैंने यह किया अतः मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूँगा। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।” {i16:1} कोरह, दातान और अबीराम मूसा के विरुद्ध हो जाते हैं {16:1} कोरह दातान, अबीराम और ओन मूसा के विरुद्ध हो गए। (कोरह यिसहार का पुत्र था। यिसहार कहात का पुत्र था, और कहात लेवी का पुत्र था। एलीआब के पुत्र दातान और अबीराम भाई थे और ओन पेलेत का पुत्र था। दातान, अबीराम और ओन रूबेन के वंशज थे।) {16:2} इन चार व्यक्तियों ने इस्राएल के दो सौ पचास व्यक्तियो को एक साथ इकट्ठा किया और ये मूसा के विरुद्ध आए। ये दो सौ पचास इस्राएली व्यक्ति लोगों में आदरणीय नेता थे। वे समिति के सदस्य चुने गए थे। {16:3} वे एक समूह के रूप में मूसा और हारून के विरुद्ध बात करने आए। इन व्यक्तियों ने मूसा और हारून से कहा, “हम उससे सहमत नहीं जो तुमने किया है। इस्राएली समूह के सभी लोग पवित्र हैं। यहोवा उनके साथ है। तुम अपने को सभी लोगों से ऊँचे स्थान पर क्यों रख रहे हो” {16:4} जब मूसा ने यह बात सुनी तो वह भूमि पर गिर गया। {16:5} तब मूसा ने कोरह और उसके अनुयायियों से कहा, “कल सवेरे यहोवा दिखाएगा कि कौन व्यक्ति सचमुच उसका है। यहोवा दिखाएगा कि कौन व्यक्ति सचमुच पवित्र है और यहोवा उसे अपने समीप ले जाएगा। यहोवा उस व्यक्ति को चुनेगा और यहोवा उस व्यक्ति को अपने निकट लेगा। {16:6} इसलिए कोरह, तुम्हें और तुम्हारे सभी अनुयायियों को यह करना चाहिएः {16:7} किसी विशेष अग्निपात्र में आग और सुगन्धित धूप रखो। तब उन पात्रों को यहोवा के सामने लाओ। यहोवा एक पुरुष को चुनेगा जो सचमुच पवित्र होगा। किन्तु मुझे डर है कि तुमने और तुम्हारे लेवीवंशी भाईयों ने सीमा का अतिक्रमण किया है।” {16:8} मूसा ने कोरह से यह भी कहा, “लेविवंशियो! मेरी बात सुनो। {16:9} तुम लोगों को प्रसन्न होना चाहिए कि इस्राएल के परमेश्वर ने तुम लोगों को अलग और विशेष बनाया है। तुम लोग बाकी इस्राएली लोगों से भिन्न हो। यहोवा ने तुम्हें अपने समीप लिया जिससे तुम यहोवा की उपासना में इस्राएल के लोगों की सहायता के लिए यहोवा के पवित्र तम्बू में विशेष कार्य कर सको। क्या यह पर्याप्त नहीं है? {16:10} यहोवा ने तुम्हें और अन्य सभी लेवीवंश के लोगों को अपने समीप लिया है। किन्तु अब तुम याजक भी बनना चाहते हो। {16:11} तुम और तुम्हारे अनुयायी परस्पर एकत्र होकर यहोवा के विरोध में आए हो। क्या हारून ने कुछ बुरा किया है? नहीं। तो फिर उसके विरुद्ध शिकायत करने क्यों आए हो?” {16:12} तब मूसा ने एलीआब के पुत्रों दातान और अबीराम को बुलाया। किन्तु दोनों आदमियों ने कहा, “हम लोग नहीं आएंगे! {16:13} तुम हमें उस देश से बाहर निकाल लाए हो जो सम्पन्न था और जहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती थीं। तुम हम लोगों को यहाँ मरुभूमि में मारने के लिए लाए हो और अब तुम दिखाना चाहते हो कि तुम हम लोगों पर अधिक अधिकार भी रखते हो। {16:14} हम लोग तुम्हारा अनुसरण क्यों करें? तुम हम लोगों को उस नये देश में नहीं लाए हो जो सम्पन्न है और जिसमें दूध और मधु की नदियाँ बहती हैं। तुमने हम लोगों को वह देश नहीं दिया है जिसे देने का वचन यहोवा ने दिया था। तुमने हम लोगों को खेत या अंगूर के बाग नहीं दिये हैं। क्या तुम इन लोगों को अपना गुलाम बनाओगे? नहीं! हम लोग नहीं आएंगे।” {16:15} इसलिए मूसा बहुत क्रोधित हो गया। उसने यहोवा से कहा, “इनकी भेंटें स्वीकार न कर! मैंने इनसे कुछ नहीं लिया है एक गधा तक नहीं और मैंने इनमें से किसी का बुरा नहीं किया है।” {16:16} तब मूसा ने कोरह से कहा, “तुम्हें और तुम्हारे अनुयायियों को कल यहोवा के सामने खड़ा होना चाहिए। हारून तुम्हारे साथ यहोवा के सामने खड़ा होगा। {16:17} तुम में से हर एक को एक अग्निपात्र लेना चाहिए और उसमें धूप रखनी चाहिए। ये दो सौ पचास अग्निपात्र प्रमुखों के लिये होंगे। हर एक अग्निपात्र को यहोवा के सामने ले जाओ। तुम्हें और हारून को अपने अग्निपात्रों को यहोवा के सामने ले जाना चाहिए।” {16:18} इसलिए हर एक व्यक्ति ने एक अग्निपात्र लिया और उसमें जलती हुई धूप रखी। तब वे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खड़े हुए।मूसा और हारुन भी वहाँ खड़े हुए। {16:19} कोरह ने अपने सभी अनुयायियों को एक साथ इकट्ठा किया। ये वे व्यक्ति हैं जो मूसा और हारून के विरुद्ध हो गए थे। कोरह ने उन सभी को मिलावाले तम्बू के द्वार पर इकट्ठा किया। तब यहोवा का तेज वहाँ हर एक व्यक्ति पर प्रकट हुआ। {16:20} यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, {16:21} “इन पुरुषों से दूर हटो! मैं अब उन्हें नष्ट करना चाहता हूँ!” {16:22} किन्तु मूसा और हारून भूमि पर गिर पड़े और चिल्लाए, “हे परमेश्वर, तू जानता है कि लोग क्या सोच रहे हैं। कृपा करके इस पूरे समूह पर क्रोधित न हो। एक ही व्यक्ति ने सचमुच पाप किया है।” {16:23} तब यहोवा ने मूसा से कहा, {16:24} “लोगों से कहो कि वे कोरह दातान और अबीराम के डेरों से दूर हट जाएं।” {16:25} मूसा खड़ा हुआ और दातान और अबिराम के पास गया। इस्राएल के सभी अग्रज (नेता) उसके पीछे चले। {16:26} मूसा ने लोगों को चेतावनी दी, “इन बुरे आदमियों के डेरों से दूर हट जाओ। इनकी किसी चीज को नो छुओ! यदि तुम लोग छूओगे तो इनके पापों के कारण नष्ट हो जाओगे।” {16:27} इसलिए लोग कोरह, दातान और अबीराम के तम्बुओं से दूर हट गए। दातान और अबीराम अपने डेरे के बाहर अपनी पत्नी, बच्चे और छोटे शिशुओं के साथ खड़े थे। {16:28} तब मूसा ने कहा, “मैं प्रमाण प्रस्तुत करूँगा कि यहोवा ने मुझे उन चीज़ों को करने के लिए भेजा है जो मैंने तुमको कहा है। मैं दिखाऊँगा कि वे सभी मेरे विचार नहीं थे। {16:29} ये पुरुष यहाँ मरेंगे। किन्तु यदि ये सामान्य ढंग से मरते हैं अर्थात् जिस प्रकार आदमी सदा मरते हैं तो यह प्रकट करेगा कि यहोवा ने वस्तुतः मुझे नहीं भेजा है। {16:30} किन्तु यदि यहोवा इन्हें दूसरे ढंग अर्थात् कुछ नये ढंग से मरने देता है तो तुम लोग जानोगे कि इन व्यक्तियों ने सचमुच यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। पृथ्वी फटेगी और इन व्यक्तियों को निगल लेगी। वे अपनी कब्रों में जीवित ही जाएंगे और इनकी हर एक चीज इनके साथ नीचे चली जाएगी।” {16:31} जव मूसा ने इन बातों का कहना समाप्त किया, व्यक्तियों के पैरों के नीचे पृथ्वी फटी। {16:32} यह ऐसा था मानों पृथ्वी ने अपना मुँह खोला ओ इन्हें खा गई और उनके सारे परिवार और कोरह के सभी व्यक्ति तथा उनकी सभी चीजें पृथ्वी में चली गईं। {16:33} वे जीवित ही कब्र में चले गए। उनकी हर एक चीज उनके साथ गई। तब पृथ्वी उनके ऊपर से बन्द हो गई। वे नष्ट हो गए और वे उस डेरे से लुप्त गो गए। {16:34} इस्राएल के लोगों ने नष्ट किये जाते हुए लोगों का रोना चिल्लाना सुना। इसलिए वे चारों ओर दौड़ पड़े और कहने लगे, “पृथ्वी हम लोगों को भी निगल जाएगी।” {16:35} तब यहोवा से आग आई और उसने दो सौ पचास पुरुषों को, जो सुगन्धि भेंट कर रहे थे, नष्ट कर दिया। {16:36} यहोवा ने मूसा से कहा, {16:37} “हारून के पुत्र याजक एलीआजार से कहो कि वह आग में से सुगन्धि के पात्रों को एकत्र करे। डेरे से दूर के क्षेत्र में उन कोयलों को फैलाओ। सुगन्धि के बर्तन अब भी पवित्र हैं। ये वे पात्र हैं जो उन व्यक्तियों के हैं जिन्होंने मेरे विरुद्ध पाप किया था। {16:38} उनके पाप का मूल्य उनका जीवन हुआ। बर्तनों को पीट कर पत्तरों में बदलो। इन धातुओं के पत्तरों का उपयोग वेदी को ढकने के लिए करो। वे पवित्र थे क्योंकि उन्हें यहोवा के सामने प्रस्तुत किया गया था। उन चपटे बर्तनों को इस्राएल के सभी लोगों के लिए चेतावनी बनने दो।” {16:39} तब याजक एलीआजार ने काँसे के उन सभी बर्तनों को इकट्ठा किया जिन्हें वे लोग लाए थे। वे सभी व्यक्ति जल गए थे, किन्तु बर्तन तब भी वहाँ थे। तब एलीआज़ार ने कुछ व्यक्तियों को बर्तनों को, चपटी धातु के रूप में पीटने को कहा। तब उसने धातु की चपटी चादरों को वेदी पर रखा। {16:40} उसने इसे वैसे ही किया जैसा यहोवा ने मूसा के द्वारा आदेश दिया था। यह संकेत था कि जिससे इस्राएल के लोग याद रख सकें कि केवल हारून के परिवार के व्यक्ति को यहोवा के सामने सुगन्धि भेंट करने का अधिकार है। यदि कोई अन्य व्यक्ति यहोवा के सामने सुगन्धि जलाता है तो वह व्यक्ति कोरह और उसके अनुयायियों की तरह हो जाएगा। {i16:41} हारून लोगों की रक्षा करता है {16:41} अगले दिन इस्राएल के लोगों ने मूसा और हारून के विरुद्ध शिकायत की। उन्होंने कहा, “तुमने यहोवा के लोगों को मारा है।” {16:42} मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खड़े थे। लोग उस स्थान पर मूसा और हारून की शिकायत करने के लिए इकट्ठा हुए । किन्तु जब उन्होंने मिलापवाले तम्बू को देखा तो बादल ने उसे ढक लिया और वहाँ यहोवा का तेज प्रकट हुआ। {16:43} तब मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू के सामने गए। {16:44} तब यहोवा ने मूसा से कहा, {16:45} “उन लोगों से दूर हट जाओ जिससे मैं उन्हें अब नष्ट कर दूँ।” मूसा और हारुन धरती पर गिर पड़े। {16:46} तब मूसा ने हारून से कहा, “वेदी की आग और अपने काँसे के बर्तन को लो। तब इसमें सुगन्धि डालो। लोगों के समूह के पास शीघ्र जाओ और उनके पाप के लिए भुगतान करो। यहोवा उन पर क्रोधित है। परेशानी आरम्भ हो चुकी है।” {16:47} इसलिए, हारून ने मूसा के कथनानुसार काम किया। सुगन्धि और आग को लेने के बाद वह लोगों के बीच दौड़कर पहुँचा। किन्तु लोगों में बीमारी पहले ही आरम्भ हो चुकी थी। हारून ने लोगों के भुगतान के लिए सुगन्धि की भेंट दी। {16:48} हारून मरे हुए और जीवित लोगों में खड़ा हुआ और तब बीमारी रूक गई। {16:49} किन्तु इसके पहले कि हारून उनके पापों के लिए भुगतान करे, चौदह हजार सात सौ लोग उस बीमारी से मर गए। तब यहोवा ने इसे रोका। वहाँ ऐसे लोग भी थे जो कोरह के कारण मरे। {16:50} तब हारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर मूसा के पास लौटा। लोगों की भयंकर बीमारी रोक दी गई। {i17:1} परमेश्वर प्रमाणित करता है कि हारून महायाजक है {17:1} यहोवा ने मूसा से कहा, {17:2} “इस्राएल के लोगों से कहो। अपने लोगों से बारह लकड़ी की छड़ियाँ लें। बारह परिवार समूहों में हर एक के नेता से एक छड़ी लो। हर एक व्यक्ति की छड़ी पर उसका नाम लिख दो। {17:3} लेवी की छड़ी पर हारून का नाम लिखो। बारह परिवार समूहों के हर एक मुखिया की छड़ी होनी चाहिए। {17:4} इन छड़ियों को साक्षीपत्र के सन्दूक के सामने मिलापवाले तम्बू में रखो। यही वह स्थान है जहाँ मैं तुमसे मिलता हूँ। {17:5} मैं एक व्यक्ति को चुनूँगा। तुम जान जाओगे कि किस व्यक्ति को मैंने चुना है। क्योंकि उस छड़ी में नयी पत्तियाँ उगनी आरम्भ होंगी। इस प्रकार, मैं लोगों को अपने और तुम्हारे विरुद्ध सदा शिकायत करने से रोक दूँगा।” {17:6} इसलिए मूसा ने इस्राएली लोगों से बातें कीं। प्रत्येक नेता ने उसे एक छड़ी दी। सारी छड़ियों की संख्या बारह थी। हर एक परिवार समूह के नेता की एक छड़ी उसमें थी। हारून की छड़ी उनमें थी। {17:7} मूसा ने साक्षी के मिलापवाले तम्बू में यहोवा के सामने छड़ियों को रखा। {17:8} अगले दिन मूसा ने तम्बू में प्रवेश किया। उसने देखा कि हारून की वह छड़ी, जो लेवीवंश की थी, एक मात्र ऐसी थी जिससे नयी पत्तियाँ उगनी आरम्भ हुई थीं। उस छड़ी में कलियाँ, फूल और बादाम भी लग गए थे। {17:9} इसलिए मूसा यहोवा के स्थान से सभी छड़ियों को लाया। मूसा ने इस्राएल के लोगों को छड़ियाँ दिखाईं। उन सभी ने छड़ियों को देखा और हर एक पुरुष ने अपनी छड़ी वापस ली। {17:10} तब यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून की छड़ी को तम्बू में रख दो। यह उन लोगों के लिए चेतावनी होगी जो सदा मेरे विरुद्ध जाते हैं। यह उनकी मेरे विरुद्ध शिकायतों को रोकेगा। इस प्रकार वे नहीं मरेंगे।” {17:11} मूसा ने उन आदेशों का पालन किया जो यहोवा ने दिए थे। {17:12} इस्राएल के लोगों ने मूसा से कहा, “हम जानते हैं कि हम मरेंगे! हमें नष्ट होना ही है! हम सभी को नष्ट होना ही है! {17:13} कोई व्यक्ति यहोवा के पवित्र तम्बू के निकट आने पर भी मरेगा। क्या हम सभी मर जाएंगे?” {i18:1} याजकों और लेवीवंशियों के कार्य {18:1} यहोवा ने हारून से कहा, “तुम, तुम्हारे पुत्र और तुम्हारे पिता का परिवार अब किसी भी बुराई के लिए उत्तरदायी है जो पवित्र स्थान के विरुद्ध की जाएंगी। तुम और तुम्हारे पुत्र उन बुराइयों के लिए उत्तरदायी होगे जो याजकों के विरुद्ध होंगी। {18:2} अन्य लेविवंशी लोगों को अपना साथ देने के लिए अपने परिवार समूह से लाओ। वे तुम्हारी और तुम्हारे पुत्रों की सहायता साक्षी के पवित्र तम्बू के कार्यों को करने में करेंगे। {18:3} लेवी परिवार के वे लोग तुम्हारे अधीन हैं। वे उन सभी कार्यों को करेंगे जिन्हें तम्बू में किया जाना है। किन्तु उन्हें वेदी या पवित्र स्थान की चीज़ों के पास नहीं जाना चाहिए। यदि वे ऐसा करेंगे तो वे मर जायेंगे और तुम भी मर जाओगे। {18:4} वे तुम्हारे साथ होंगे और तुम्हारे साथ काम करेंगे। वे मिलापवाले तम्बू की देखभाल करने के उत्तरदायी होंगे। सभी कार्य, जिन्हें तम्बू में किया जाना चाहिए, वे करेंगे। अन्य कोई भी उस स्थान के निकट नहीं आएगा जहाँ तुम हो। {18:5} “पवित्र स्थान और वेदी की देखाभाल करने के उत्तरदायी तुम हो। मैं इस्राएल के लोगों पर फिर क्रोधित होना नहीं चाहता। {18:6} मैंने तुम्हारे लोगों अर्थात् लेवीवंश के लोगों को स्वयं इस्राएल के सभी लोगों में से चुना है। वे तुमको भेंट की तरह हैं। उनका एकमात्र उपयोग परमेश्वर की सेवा और मिलापवाले तम्बू के काम को करने में है। {18:7} किन्तु केवल तुम और तुम्हारे पुत्र याजक के रूप में सेवा कर सकते हो। एक मात्र तुम्हीं वेदी के पास जा सकते हो। केवल तुम्हीं पर्दे के भीतर अति पवित्र स्थान में जा सकते हो। मैं याजक के रूप में तुम्हारी सेवा को तुम्हें एक भेंट के रूप में दे रहा हूँ। कोई भी अन्य, जो पवित्र स्थान के पास आएगा, मार डाला जाएगा।” {18:8} तब यहोवा ने हारून से कहा, “मैंने अपने लिए चढ़ाई गई भेटों का उत्तरदायित्व तुमको दिया है। इस्राएल के लोग जो सारी भेंट मुझको देंगे, वह मैं तुमको देता हूँ। तुम और तुम्हारे पुत्र इन पवित्र भेटों को आपस में बाँट सकते हैं। यह सदा तुम्हारी होंगी। {18:9} उन सभी पवित्र भेंटों में तुम्हारा अपना भाग होगा जो जलाई नहीं जाएंगी। लोग मेरे पास भेंटें सर्वाधिक पवित्र भेंट के रूप में लाते हैं। ये अन्नबलि, या पापबलि या दोषबलि है। किन्तु ये सभी चीज़ें तुम्हारी और तुम्हारे पुत्रों की होंगी। {18:10} इन सबको सर्वाधिक पवित्र चीज़ों के रूप में खाओ। तुम्हारे परिवार का हर एक पुरुष इसे खाएगा। तुम्हें इसको पवित्र मानना चाहिए। {18:11} “और वे सभी जो इस्राएल के लोगों द्वारा उत्तोलन भेंट के रूप में दी जाएंगी, तुम्हारी ही होंगी। मैं इसे तुमको, तुम्हारे पुत्रों और तुम्हारी पुत्रियों को देता हूँ। यह तुम्हारा भाग है। तुम्हारे परिवार का हर एक व्यक्ति जो पवित्र होगा, इसे खा सकेगा। {18:12} “और मैं सारा अच्छा जैतून का तेल, सारी सर्वोतम नयी दाखमधु और अन्न तुम्हें देता हूँ। ये वे चीज़ें हैं जिन्हें इस्राएल के लोग मुझे अर्थात् अपने यहोवा को देते हैं। ये वे पहली चीज़ें हैं जिन्हें वे अपनी फसल पकने पर इकट्ठी करते हैं। {18:13} जब लोग अपनी फसलें इकट्ठी करते हैं तब लोग पहली चीज यहोवा के पास लाते हैं। अतः ये चीज़ें मैं तुमको दूँगा और हर एक व्यक्ति जो तुम्हारे परिवार में पवित्र है, इसे खा सकेगा। {18:14} “और इस्राएल में हर एक चीज जो यहोवा को दी जाती है, तुम्हारी है। {18:15} “किसी भी परिवार में पहलौठा बालक या जानवर यहोवा की भेंट होगा और वह तुम्हारा होगा। किन्तु तुम्हें प्रत्येक पहलौठे बच्चे और हर पक पहलौठे अशुध्द पशु को फिर से खरीदने के लिए स्वीकार करना चाहिए। तब पहलौठा बच्चा फिर उस परिवार का हो जाएगा। {18:16} जब वे एक महीने के हो जाए तब तुम्हें उनके लिए भुगतान ले लेना चाहिए। उसका मूल्य दो औंस चाँदी होगी। {18:17} “किन्तु तुम्हें पहलौठे गाय, भेड़ या बकरे के लिए भुगतान नहीं लेना चाहिए। वे पशु पवित्र हैं वे शुद्ध हैं। उनका खून वेदी पर छिड़को और उनकी चर्बी जलाओ। यह भेंट अग्नि द्वारा समर्पित है। इस भेंट की सुगन्ध मेरे लिए अर्थात् यहोवा के लिए मधुर सुगन्ध होगी। {18:18} किन्तु इन पशुओं का माँस तुम्हारा होगा। और उत्तोलन भेंट की छाती भी तुम्हारी होगी। अन्य भेंटों की दायी जांघ तुम्हारी होगी। {18:19} कोई भी चीज, जिसे लोग पवित्र भेंट के रूप में मुझे चढ़ाते हैं, मैं यहोवा उसे तुमको देता हूँ। यह तुम्हारा हिस्सा हैं। मै इसे तुमको और तुम्हारे पुत्रों और तुम्हारी पुत्रियों को देता हूँ। यह यहोवा के साथ की गयी वाचा है जो सदा बनी रहेगी। मैं यह वचन तुमको और तुम्हारे वंशजों को देता हूँ।” {18:20} यहोवा ने हारून से यह भी कहा, “तुम कोई भूमि नहीं प्राप्त करोगे और ऐसी कोई चीज़ नहीं रखोगे जैसी अन्य लोग रखते हैं। मैं, यहोवा, तुम्हारा रहूँगा। इस्राएल के लोग वह देश प्राप्त करेंगे जिसके लिए मैंने वचन दिया है। किन्तु तुम्हारे लिए अपना उपहार मैं स्वयं होऊँगा। {18:21} “इस्राएल के लोग उनके पास जो कुछ होगा उसका दसवाँ भाग देंगे। इस प्रकार मैं लेवीवंश के लोगों को दसवाँ भाग देता हूँ। यह उनके उस कार्य के लिए भुगतान है जो वे मिलापवाले तम्बू में सेवा करते हुए करते हैं। {18:22} किन्तु इस्राएल के अन्य लोगों को मिलापवाले तम्बू के निकट कभी नहीं जाना चाहिए। यदि वे ऐसा करते हैं तो उन्हें अपने पाप के लिए भुगतान करना पड़ेगा और वे मर जाएंगे! {18:23} जो लेवीवंश मिलापवाले तम्बू में काम कर रहे हैं वे इसके विरुद्ध किये गए पापों के लिए उत्तरदायी हैं। यह नियम भविष्य के दिनों के लिए भी रहेगा। लेवीवंशी लोग उस भूमि को नहीं लेंगे जिसे मैंने इस्राएल के अन्य लोगों को दिया है। {18:24} किन्तु इस्राएल के लोगों के पास जो कुछ होगा उसका दसवाँ हिस्सा मुझको देंगे। इस तरह मैं लेवीवंशी लोगों को दसवाँ हिस्सा दूँगा। यही कारण है कि मैंने लेविवंशीयों के लिए कहा हैः वे लोग उस भूमि को नहीं पाएंगे जिसे मैंने इस्राएल के लोगों को देने का वचन दिया है।” {18:25} यहोवा ने मूसा से कहा, {18:26} “लेवीवंशी लोगों से बातें करो और उनसे कहोः इस्राएल के लोग अपनी हर एक चीज़ का दसवाँ भाग यहोवा को देंगे। वह दसवाँ भाग लेवीवंशियों का होगा। किन्तु तुम्हें उसका दसवाँ भाग यहोवा को उनकी भेंट के रूप में देना चाहिए। {18:27} फसल कटने के बाद तुम लोग खलिहानों से अन्न और दाखमधुशाला से रस प्राप्त करोगे। तब वह भी यहोवा को तुम्हारी भेंट होगी। {18:28} इस प्रकार, तुम यहोवा को वैसे ही भेंट दोगे जिस प्रकार इस्राएल के अन्य लोग देते हैं। तुम इस्राएल के लोगों का दिया हुआ दसवाँ भाग प्राप्त करोगे और तब तुम उसका दसवाँ भाग याजक हारून को दोगे। {18:29} जब इस्राएल के लोग अपनी हर एक चीज़ का दसवाँ भाग दें तो तुम्हें उनमें से सर्वोत्तम और पवित्रतम भाग चुनना चाहिए। वही दसवाँ भाग है जिसे तुम्हें यहोवा को देना चाहिए। {18:30} “मूसा, लेवियों से यह कहोः इस्राएल के लोग तुम लोगों को अपनी फसल या अपनी दाखमधु का दसवाँ भाग देंगे। तब तुम लोग उसका सर्वोत्तम भाग यहोवा को दोगे। {18:31} जो बचेगा उसे तुम और तुम्हारे परिवार के व्यक्ति खा सकते हैं। यह तुम लोगों के उस काम के लिए भुगतान है जो तुम लोग मिलापवाले तम्बू में करते हो। {18:32} और यदि तुम सदा इसका सर्वोत्तम भाग यहोवा को देते रहोगे तो तुम कभी दोषी नहीं होगे। तुम इस्राएल के लोगों की पवित्र भेंट के प्रति पाप नहीं करोगे और तुम मरोगे नहीं।” {i19:1} लाल गाय की राख {19:1} यहोवा ने मूसा और हारून से बात की। उसने कहा, {19:2} “ये नियम और उपदेश हैं जिन्हें यहोवा इस्राएल के लोगों को देता है। उन्हें दोष से रहित एक लाल गाय लेनी चाहिए और उसे तुम्हारे पास लाना चाहिए। उस गाय को कोई खरोंच भी न लगी हो और उस गाय के कंधे पर कभी जुआ नहीं रखा गया हो। {19:3} इस गाय को याजक एलीआजार को दो। एलीआजार गाय को डेरे से बाहर ले जाएगा और वह वहाँ गाय को मारेगा। {19:4} तब याजक एलीआजार को इसका कुछ खून अपनी उंगलियों पर लागना चाहिए और उसे कुछ खून पवित्र तम्बू की दिशा में छिड़कना चाहिए। उसे यह सात बार करना चाहिए। {19:5} तब पूरी गाय को उसके सामने जलाना चाहिए। चमड़ा, माँस, खून और आतेँ सभी जला डालनी चाहिए। {19:6} तब याजक को एक देवदारु की लकड़ी, एक जूफा की शाखा और लाल रंग का कपड़ा लेना चाहिए। याजक को इन चीज़ों को उस आग में डालना चाहिए जिसमें गाय जल रही हो। {19:7} तब याजक को, अपने को तथा अपने कपड़ों को पानी से धोना चाहिए। तब उसे डेरे मे लौटना चाहिए। याजक सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। {19:8} जो व्यक्ति गाय को जलाए उसे अपने को तथा अपने वस्त्रों को पानी से धोना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। {19:9} “तब एक पुरुष जो शुद्ध होगा, गाय की राख को इकट्ठा करेगा। वह इस राख को डेरे के बाहर एक शुद्ध स्थान पर रखेगा। यह राख उस समय उपयोग में आएगी जब लोग शुद्ध होने के लिए विशेष संस्कार करेंगे। यह राख व्यक्ति के पाप को दूर करने के लिए उपयोग में आएगी। {19:10} “वह व्यक्ति, जिसने गाय की राख को इकट्ठा किया, अपने कपड़े धोएगा। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। “यह नियम सदा चलता रहेगा। यह नियम इस्राएल के नागरिकों के लिए है और यह उन विदेशियों के लिए भी है जो तुम्हारे बीच रहते हैं। {19:11} यदि कोई व्यक्ति एक मरे व्यक्ति को छूता है, तो वह सात दिन के लिए अशुद्ध हो जाएगा। {19:12} उसे अपने को तीसरे दिन तथा फिर सातवें दिन विशेष पानी से धोना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो वह अशुद्ध रह जाएगा। {19:13} यदि कोई व्यक्ति किसी शव को छूता है, तो वह व्यक्ति अशुद्ध है। यदि वह व्यक्ति अशुद्ध रहता है और तब पवित्र तम्बू में जाता है तो पवित्र तम्बू अशुद्ध हो जाता है। इसलिए उस व्यक्ति को इस्राएल के लोगों से अलग कर दिया जाना चाहिए। यदि अशुद्ध व्यक्ति पर विशेष जल नहीं डाला जाता तो वह व्यक्ति अशुद्ध रहेगा। {19:14} “यह नियम उन लोगों से सम्बन्धित है जो अपने खेमों में मरते हैं। यदि कोई व्यक्ति खेमें में मरता है तो उस खेमे का हर एक व्यक्ति अशुद्ध हो जाएगा। वे सात दिन तक अशुद्ध रहेंगे {19:15} और हर एक ढक्कन रहित बर्तन और घड़ा अशुद्ध हो जाता है। {19:16} यदि कोई शव को छूता है, तो वह व्यक्ति सात दिन तक अशुद्ध रहेगा। यह तब भी सत्य होगा जब व्यक्ति बाहर देश में मरा हो या युद्ध में मारा गया हो। यदि कोई व्यक्ति मरे व्यक्ति की हड्डी या किसी कब्र को छूता है तो वह व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है। {19:17} “इसलिए तुम्हें दुग्ध गाय की राख का उपयोग उस व्यक्ति को पुनः शुद्ध करने के लिए करना चाहिए। स्वच्छ पानी घड़े में रखी हुई राख पर डालो। {19:18} शुद्ध व्यक्ति को एक जूफा की शाखा लेनी चाहिए और इसे पानी में डुबाना चाहिए। तब उसे तम्बू, बर्तनों तथा डेरे में जो व्यक्ति हैं उन पर यह जल छिड़कना चाहिए। तुम्हें यह उन सभी व्यक्तियों के साथ करना चाहिए जो शव को छुऐंगे। तुम्हें यह उस के साथ भी करना चाहिए जो युद्ध में मरे व्यक्ति के शव को छूता है या उस किसी के साथ भी जो किसी मरे व्यक्ति की हड्डियों या क्रब को छूता है। {19:19} “तब कोई शुद्ध व्यक्ति इस जल को अशुद्ध व्यक्ति पर तीसरे दिन और फिर सातवें दिन छिड़के। सातवें दिन वह व्यक्ति शुद्ध हो जाता है। उसे अपने कपड़ों को पानी में धोना चाहिए। वह संध्या के समय पवित्र हो जाता है। {19:20} “यदि कोई व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है और शुद्ध नहीं होता तो उसे इस्राएल के लोगों से अलग कर देना चाहिए। उस व्यक्ति पर विशेष पानी नहीं छिड़का गया। वह शुद्ध नहीं हुआ। तो वह पवित्र तम्बू को अशुद्ध कर सकता है। {19:21} यह नियम तुम्हारे लिए सदा के लिए होगा। जो व्यक्ति इस विशेष जल को छिड़कता है, उसे भी अपने कपड़े अवश्य धो लेने चाहिए। कोई व्यक्ति जो इस विशेष जल को छुएगा, वह संध्या तक अशुद्ध रहेगा। {19:22} यदि कोई अशुद्ध व्यक्ति किसी अन्य को छूए, तो वह व्यक्ति भी अशुद्ध हो जाएगा। वह व्यक्ति संध्या तक अशुद्ध रहेगा।” {i20:1} मरियम मरी मूसा की गलती {20:1} इस्राएल के लोग सीन मरुभूमि में पहले महीने में पहुँचे। लोग कादेश में ठहरे। मरियम की मृत्यु हो गई और वह वहाँ दफनाई गई। {20:2} उस स्थान पर लोगों के लिए पर्याप्त पानी नहीं था। इसलिए लोग मूसा और हारून के विरुद्ध शिकायत करने के लिए इकट्ठे हुए। {20:3} लोगों ने मूसा से बहस की। उन्होंने कहा, “क्या ही अच्छा होता हम अपने भाइयों की तरह यहोवा के सामने मर गए होते। {20:4} तुम यहोवा के लोगों को इस मरुभूमि में क्यों लाए? क्या तुम चाहते हो कि हम और हमारे जानवर यहाँ मर जाए? तुम हम लोगों को मिस्र से क्यों लाएय़ {20:5} तुम हम लोगों को इस बुरे स्थान पर क्यों लाए यहाँ कोई अन्न नहीं है, कोई अंजीर, अंगूर या अनार नहीं है और यहाँ पीने के लिए पानी नहीं है।” {20:6} इसलिए मूसा और हारून ने लोगों को छोड़ा और वे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर पहुँचे। उन्होंने दण्डवत्(प्रणाम) किया और उन पर यहोवा का तेज प्रकाशित हुआ। {20:7} यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {20:8} “अपने भाई हारून और लोगों की भीड़ को साथ लो और उस चट्टान तक जाओ। अपनी छड़ी को भी लो। लोगो के सामने चट्टान से बातें करो। तब चट्टान से पानी बहेगा और तुम वह पानी अपने लोगों और जानवरों को दे सकते हो।” {20:9} छड़ी यहोवा के सामने पवित्र तुम्बू में थी। मूसा ने यहोवा के कहने के अनुसार छड़ी ली। {20:10} तब उसने तथा हारून ने लोगों को चट्टान के सामने इकट्ठा होने को कहा। तब मूसा ने कहा, “तुम लोग सदा शिकायत करते हो। अब मेरी बात सुनो। हम इस चट्टान से पानी बहायेंगे।” {20:11} मूसा ने अपनी भुजा उठाई और दो बार चट्टान पर चोट की। चट्टान से पानी बहने लगा और लोगों तथा जानवरों ने पानी पिया। {20:12} किन्तु यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “इस्राएल के सभी लोग चारों ओर इकट्ठे थे। किन्तु तुमने मुझको सम्मान नहीं दिया। तुमने लोगों को नहीं दिखाया कि पानी निकालने की शक्ति मुझसे तुममें आई। तुमने लोगों को यह नहीं बताया कि तुमने मुझ पर विश्वास किया। मैं उन लोगों को वह देश दूँगा मैने जिसे देने का वचन दिया है। लेकिन तुम उस देश में उनको पहुँचाने वाले नहीं रहोगे।” {20:13} इस स्थान को मरीबा का पानी कहा जाता था। यही वह स्थान था जहाँ इस्राएल के लोगों ने यहोवा के साथ बहस की और यह वह स्थान था जहाँ यहोवा ने यह दिखाया कि वह पवित्र था। {i20:14} एदोम ने इस्राएल को पार नहीं होने दिया {20:14} जब मूसा कादेश में था, उसने कुछ व्यक्तियों को एदोम के राजा के पास एक संदेश के साथ भेजा। संदेश यह थाः “तुम्हारे भाई इस्राएल के लोग तुमसे यह कहते हैं: तुम जानते हो कि हम लोगों ने कितनी कठिनाइयाँ सही हैं। {20:15} अनेक वर्ष पहले हमारे पूर्वज मिस्र चले गये थे और हम लोग वहाँ अनेक वर्ष रहे। मिस्र के लोग हम लोगों के प्रति क्रूर थे। {20:16} किन्तु हम लोगों ने यहोवा से सहायता के लिए प्राथना की।” यहोवा ने हम लोगों की प्रार्थना सुनी और उन्होंने हम लोगों की सहायता के लिए एक दूत भेजा। यहोवा हम लोगों को मिस्र से बाहर लाया है। “अब हम लोग यहाँ कादेश में हैं जहाँ से तुम्हारा प्रदेश आरम्भ होता है। {20:17} कृपया अपने देश से हम लोगों को यात्रा करने दें। हम लोग किसी खेत या अंगूर के बाग से यात्रा नहीं करेंगे। हम लोग तुम्हारे किसी कुएँ से पानी नहीं पीएंगे। हम लोग केवल राजपथ से यात्रा करेंगे। हम राजपथ को छोड़कर दायें या बायें नहीं बढ़ेंगे। हम लोग तब तक राजपथ पर ही ठहरेंगे जब तक तुम्हारे देश को पार नहीं कर जाते।” {20:18} किन्तु एदोम के राजा ने उत्तर दिया, “तुम हमारे देश से होकर यात्रा नहीं कर सकते। यदि तुम हमारे देश से होकर यात्रा करने का प्रयत्न करते हो तो हम लोग आएंगे और तुमसे तलवारों से लड़ेंगे।” {20:19} इस्राएल के लोगों ने उत्तर दिया, “हम लोग मुख्य सड़क से यात्रा करेंगे। यदि हमारे जानवर तुम्हारा कुछ पानी पीएंगे, तो हम लोग उसके मूल्य का भुगतान करेंगे। हम लोग तुम्हारे देश से केवल चलकर पार जाना चाहते हैं। हम लोग इसे अपने लिए लेना नहीं चाहते।” {20:20} किन्तु एदोम ने फिर उत्तर दिया, “हम अपने देश से होकर तुम्हें जाने नहीं देगे।” तब एदोम के राजा ने एक विशाल और शक्तिशाली सेना इकट्ठी की और इस्राएल के लोगों से लड़ने के लिए निकल पड़ा। {20:21} एदोम के राजा ने इस्राएल के लोगों को अपने देश से यात्रा करने से मना कर दिया और इस्राएल के लोग मुड़े और दूसरे रास्ते से चल पड़े। {i20:22} हारून मर जाता है {20:22} इस्राएल के सभी लोगों ने कादेश से होर पर्वत तक यात्रा की। {20:23} होर पर्वत एदोम की सीमा पर था। यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, {20:24} “हारून को अपने पूर्वजों के साथ जाना होगा। यह उस प्रदेश में नहीं जाएगा जिसे देने के लिए मैंने इस्राएल के लोगों को वचन दिया है। मूसा, मैं तुमसे यह कहता हूँ क्योंकि तुमने और हारून ने मरीबा के पानी के विषय में मेरे दिये आदेश का पूरी तरह पालन नहीं कया। {20:25} “हारून और उसके पुत्र एलीआज़ार को होर पर्वत पर लाओ। {20:26} हारून के विशेष वस्त्रों को उससे लो औ र उन वस्त्रो को उसके पुत्र ऐलीआज़ार को पहनाओ। हारून वहाँ पर्वत पर मरेगा और वह अपने पूर्वजों के साथ हो जाएगा।” {20:27} मूसा ने यहोवा के आदेश का पालन किया। मूसा, हारून और एलीआज़ार होर पर्वत पर गए। इस्राएल के सभी लोगों ने उन्हें जाते देखा। {20:28} मूसा ने हारून के वस्त्र उतार लिए और उन वस्रों को हारून के पुत्र एलीआजार को पहनाया। तब हारून पर्वत की चोटी पर मर गया। मूसा और एलीआज़ार पर्वत से उतर आए। {20:29} तब इस्राएल के सभी लोगों ने जाना कि हारून मर गया। इसलिए इस्राएल के हर व्यक्ति ने तीस दिन तक शोक मनाया। {i21:1} कनानियों से युद्ध {21:1} अराद का कनानी राजा नेगेव मरुभूमि में रहता था। उस ने सुना कि इस्राएल के लोग अथारीम को जाने वाली सड़क से आ रहे हैं। इसलिए राजा बाहर निकला और उसने इस्राएल के लोगों पर आक्रमण कर दिया। उसने उनमें से कुछ को पकड़ लिया और उन्हें बन्दी बनाया। {21:2} तब इस्राएल के लोगों ने यहोवा को यह वचन दियाः “हे यहोवा, इन लोगों को पराजित करने में हमारी मदद करो। उन्हें हमारे अधीन कर दो। यदि तु ऐसा करेगा, तो हम लोग उनके नगरों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे।” {21:3} यहोवा ने इस्राएल के लोगों की प्रार्थना सुनी ओर यहोवा ने इस्राएल के लोगों से कनानी लोगों को हरवा दिया। इस्राएल के लोगों ने कनानी लोगों तथा उनके नगरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसलिए उस स्थान का नाम होर्मा पड़ा। {i21:4} काँसे का साँप {21:4} इस्राएल के लोगों ने होर पर्वत को छोड़ा और लाल सागर के किनारे — किनारे चले। उन्होंने ऐसा इसलिए किया जिससे वे एदोम कहे जाने वाले स्थान के चारों ओर जा सकें। किन्तु लोगों को धीरज नहीं था। जिस समय वे चल रहे थे उसी समय उन्होनें लम्बी यात्रा के विरुद्ध शिकायत करनी आरम्भ की। {21:5} लोगों ने परमेश्वर और मूसा के विरुद्ध बातें की। लोगों ने कहा, “तुम हमें मिस्र से बाहर क्यों लाए हो? हम लोग यहाँ मरुभूमि में मर जाएंगे! यहाँ रोटी नहीं मिलती! यहाँ पानी नहीं है और हम लोग इस खराब भोजन से घृणा करते हैं।” {21:6} इसलिए यहोवा ने लोगों के बीच जहरीले साँप भेजे। साँपों ने उन लोगों को डसा और बहुत से लोग मर गए। {21:7} लोग मूसा के पास आए और उससे कहा, “हम जानते हैं कि जब हमने यहोवा और तुम्हारे विरुद्ध शिकायत की तो हमने पाप किया। यहोवा से प्रार्थना करो। उनसे कहो कि इन साँपों को दूर करे।” इसलिए मूसा ने लोगों के लिए प्रार्थना की। {21:8} यहोवा ने मूसा से कहा, “एक काँसे का साँप बनाओ और उसे एक ऊँचे डंडे पर रखो। यदि किसी व्यक्ति को साँप काटे, तो उस व्यक्ति को डंडे के ऊपर काँसे के साँप को देखना चाहिए। तब वह व्यक्ति मरेगा नहीं।” {21:9} इसलिए मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी और एक काँसे का साँप बनाया तथा उसे एक डंडे के ऊपर रखा। तब जब किसी व्यक्ति को साँप काटता था तो वह डंडे के ऊपर के साँप को देखता था और जीवित रहता था। {i21:10} होर पर्वत से मोआब घाटी को {21:10} इस्राएल के लोग यात्रा करते रहे। उन्होंने ओबोत नामक स्थान पर डेरा डाला। {21:11} तब लोगों ने ओबोत से ईय्ये अबीराम तक की यात्रा की और वहाँ डेरा डाला। यह मोआब के पूर्व में मरुभूमि में था। {21:12} तब लोगों ने उस स्थान को छोड़ा और जेरेद की यात्रा की। उन्होंने वहाँ डेरा डाला। {21:13} तब लोगों ने अर्नोन घाटी की यात्रा की। उन्होंने उस क्षेत्र के समीप डेरा डाला। यह एमोरियों के प्रदेश के पास मरुभूमि में था। अर्नोन घाटी मोआब और एमोरी लोगों के बीच की सीमा है। {21:14} यही कारण है कि यहोवा के युद्धों की पुस्तक में निम्न विवरण प्राप्त हैः “…और सूपा में वाहेब, अर्नोन की घाटी {21:15} और आर की बस्ती तक पहुँचाने वाली घाटी के किनारे की पहाड़ियाँ।ये स्थान मोआब की सीमा पर हैं।” {21:16} इस्राएल के लोगों ने उस स्थान को छोड़ा और उन्होंने बैर की यात्रा की। इस स्थान पर एक कुँआ था। यहोवा ने मूसा से कहा, “यहाँ सभी लोगों को इकट्ठा करो और मैं उन्हें पानी दूँगा।” {21:17} तब इस्राएल के लोगों ने यह गीत गायाः “कुएँ! पानी से उमड़ बहो! इसका गीत गाओ! {21:18} महापुरुषों ने इस कुएँ को खोदा। महान नेताओं ने इस कुएँ को खोदा। अपनी छड़ों और डण्डों से इसे खोदा। यह मरुभूमि में एक भेंट है।” लोग “मत्ताना” नाम के कुएँ पर थे। {21:19} तब लोगों ने मत्ताना से नहलीएल की यात्रा की। तब उन्होंने नहलीएल से बामोत की यात्रा की। {21:20} लोगों ने बामोत घाटी की यात्रा की। इस स्थान पर पिसगा पर्वत की चोटी मरुभूमि के ऊपर दिखाई पड़ती है {i21:21} सीहोन और ओग {21:21} इस्राएल के लोगों ने कुछ व्यक्तियों को एमोरी लोगों के राजा सीहोन के पास भेजा। इन लोगों ने राजा से कहा, {21:22} “अपने देश से होकर हमें यात्रा करने दो। हम लोग किसी खेत या अंगूर के बाग से होकर नहीं जाएंगे। हम तुम्हारे किसी कुएँ से पानी नहीं पीएंगे। हम लोग केवल राजपथ से यात्रा करेंगे। हम लोग तब तक उस सड़क पर ही ठहरेंगे जब तक हम लोग तुम्हारे देश से होकर यात्रा पूरी नहीं कर लेते।” {21:23} किन्तु राजा सीहोन इस्राएल के लोगों को अपने देश से होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं दी। राजा ने अपनी सेना इकट्ठी की और मरुभूमि की ओर चल पड़ा। वह इस्राएल के लोगों के विरुद्ध आक्रमण कर रहा था। यहस नाम के एक स्थान पर राजा की सेना ने इस्राएल के लोगों के साथ युद्ध किया। {21:24} किन्तु इस्राएल के लोगों ने राजा को मार डाला। तब उन्होंने अर्नोन घाटी से लेकर यब्बोक क्षेत्र तक के उसके प्रदेश पर अधिकार कर लिया। इस्राएल के लोगों ने अम्मोनी लोगों की सीमा तक के प्रदेश पर अधिकार किया। उन्होंने और अधिक क्षेत्र पर अधिकार नहीं जमाया क्योंकि वह सीमा अम्मोनी लोगों दूारा दृढ़ता से सुरक्षित थी। {21:25} किन्तु इस्रएल ने अम्मोनी लोगों के सभी नगरों पर कब्जा कर लिया। उन्होंने हेशबोन नगर तक को और उसके चारों ओर के छोटे नगरों को भी हराया। {21:26} हेशबोन वह नगर था जिसमें राजा सीहोन रहता था। इसके पहले सीहोन ने मोआब के राजा को हराया था और सीहोन से अर्नोन घाटी तक के सारे प्रदेश पर अधिकार कर लिया था। {21:27} यही कारण है कि गायक यह गीत गाते हैं: “आओ हेशबोन को, इसे फिर से बसाना है। सीहोन के नगर को फिर से बनने दो। {21:28} हेशबोन में आग लग गई थी। वह आग सीहोन के नगर में लगी थी। आग ने आर (मोआब) को नष्ट किया इसने ऊपरी अर्नोन की पहाड़ियों को जलाया। {21:29} ऐ मोआब! यह तुम्हारे लिए बुरा है, कमोश के लोग नष्ट कर दिए गए हैं। उसके पुत्र भाग खड़े हुए। उसकी पुत्रियाँ बन्दी बनीं एमोरी लोगों के राजा सीहोन द्वारा। {21:30} किन्तु हमने उन एमोरियों को हराया, हमने उनके हेशबोन से दीबोन तक नगरों को मिटाया मेदबा के निकट नशिम से नोपह तक।” {21:31} इसलिए इस्राएल के लोगों ने एमोरियों के देश में अपना डेरा लगाया। {21:32} मूसा ने गुप्तचरों को याजेर नगर पर निगरानी के लिए भेजा। मूसा के ऐसा करने के बाद, इस्राएल के लोगों ने उस नगर पर अधिकार कर लिया। उन्होंने उसके चारों ओर के छोटे नगर पर भी अधिकार जमाया। इस्राएल के लोगों ने उस स्थान पर रहने वाले एमोरियों को वह स्थान छोड़ने को विवश किया। {21:33} तब इस्राएल के लोगों ने बाशान की ओर जाने वाली सड़क पर यात्रा की। बाशान के राजा ओग ने अपनी सेना ली और इस्राएल के लोगों का सामना करने निकला। वह एद्रेई नाम के क्षेत्र में उनके विरुद्ध लड़ा। {21:34} किन्तु यहोवा ने मूसा से कहा, “उस राजा से मत डरो। मैं तुम्हें उसको हराने दूँगा। तुम उसके पूरी सेना और प्रदेश को प्राप्त करोगे। तुम उसके साथ वही करो जो तुमने एमोरी लोगों के राजा सीहोन के साथ किया।” {21:35} अतः इस्राएल के लोगों ने ओग और उसकी सारी सेना को हराया। उन्होने उसे, उसके पुत्रों और उसकी सारी सेना को हराया। तब इस्राएल के लोगों ने उसके पूरे देश पर अधिकार कर लिया। {i22:1} बिलाम और मोआब का राजा {22:1} तब इस्राएल के लोगों ने मोआब के मैदान की यात्रा की। उन्होंने यरीहो के उस पार यरदन नदी के निकट डेरा डाला। {22:2} सिप्पोर के पुत्र बालाक ने एमोरी लोगों के साथ इस्राएल के लोगों ने जो कुछ किया था, उसे देखा था {22:3} औ मोआब बहुत अधिक भयभीत था क्योंकि वहाँ इस्राएल के बहुत लोग थे। मोआब इस्राएल के लोगों से बहुत आतंकित था। {22:4} मोआब के नेताओं ने मिद्यान के अग्रजों से कहा, “लोगों का यह विशाल समूह हमारे चारों ओर की सभी चीज़ों को वैसे ही नष्ट कर देगा जैसे कोई गाय मैदान की घास चर जाती है।” इस समय सिप्पोर का पुत्र बालाक मोआब का राजा था। {22:5} उसने कुछ व्यक्तियों को बोर के पुत्र बिलाम को बुलाने के लिए भेजा। बिलाम नदी के निकट पतोर नाम के क्षेत्र में था। बालाक ने कहा, “लोगों का एक नया राष्ट्र मिस्र से आया है। वे इतने अधिक हैं कि पूरे प्रदेश में फैल सकते हैं। उन्होंने ठीक हमारे पास डेरा डाला है। {22:6} आओ और इन लोगों के साथ निपटने में मेरी सहायता करो। वे मेरी शक्ति से बहुत अधिक शक्तिशाली हैं। संभव है कि तब इनको मैं हरा सकूँ। तब मैं उन्हें अपना देश छोड़ने को विवश कर सकता हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम बड़ी शक्ति रखते हो। यदि तुम किसी व्यक्ति को आशीर्वाद देते हो तो उसका भला हो जाता है। यदि तुम किसी व्यक्ति के विरुद्ध कहते हो तो उसका बुरा हो जाता है। इसलिए आओ और इन लोगों के विरुद्ध कुछ कहो।” {22:7} मोआब और मिद्यान के अग्रज चले। वे बिलाम से बातचीत करने गए। वे उसकी सेवाओं के लिए धन देने को ले गए। तब उन्होंने, बालाक ने जो कुछ कहा था, उससे कहा। {22:8} बिलाम ने उनसे कहा, “यहाँ रात में रुको। मैं यहोवा से बातें करुँगा और जो उत्तर, वह मुझे देगा, वह तुमसे कहूँगा।” इसलिए उस रात मोआबी लोगों के नेता उसके साथ ठहरे। {22:9} परमेश्वर बिलाम के पास आया और उसने पूछा, “तुम्हारे साथ ये कौन लोग हैं?” {22:10} बिलाम ने परमेश्वर से कहा, “मोआब के राजा सिप्पोर के पुत्र बालाक ने उन्हें मुझको एक संदेश देने को भेजा है। {22:11} सन्देश यह हैः लोगों का एक नया राद्र मिस्र से आया है। वे इतने अधिक हैं कि सारे देश में फैल सकते हैं। इसलिए आओ और इन लोगों के विरुद्ध कुछ कहो। तब सम्भ्व है कि उनसे लड़ने में मैं समर्थ हो सकूँ और अपने देश को छोड़ने के लिए उन्हे विवश कर सकूँ।” {22:12} किन्तु परमेश्वर ने बिलाम से कहा, “उनके साथ मत जाओ। तुम्हें उन लोगों के विरुद्ध कुछ नहीं कहना चाहिए। उन्हें यहोवा से वरदान प्राप्त है।” {22:13} दूसरे दिन सवेरे बिलाम उठा और बालाक के नेताओं से कहा, “अपने देश को लौट जाओ। यहोवा मुझे तुम्हारे साथ जाने नहीं देगा।” {22:14} इसलिए मोआबी नेता बालाक के पास लौटे और उससे उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, “बिलाम ने हम लोगों के साथ आने से इन्कार कर दिया।” {22:15} इसलिए बालाक ने दूसरे नेताओं को बिलाम के पास भेजा। इस बार उसने पहली बार की अपेक्षा बहुत अधिक आदमी भेजे और ये नेता पहली बार के नेताओं की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण थे। {22:16} वे बिलाम के पास गए और उन्होंने उससे कहा, “सिप्पोर का पुत्र बालाक तुमसे कहता हैः कृपया अपने को यहाँ आने से किसी को रोकने न दें। {22:17} जो मैं तुमसे माँगता हूँ यदि तुम वह करोगे तो मैं तुम्हें बहुत अधिक भुगतान करूँगा। आओ और इन लोगों के विरुद्ध मेरे लिए कुछ कहो।” {22:18} किन्तु बिलाम ने उन लोगों को उत्तर दिया। उसने कहा, “मुझे यहोवा मेरे परमेश्वर की आज्ञा माननी चाहिए। मैं उसके आदेश के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकता। मैं बड़ा छोटा कुछ भी तब तक नहीं कर सकता जब तक यहोवा नहीं कहता कि मैं उसे कर सकता हूँ। यदि राजा बालाक अपने सोने चाँदी भरे सुन्दर घर को दे तो भी मैं अपने परमेश्वर यहोवा के आदेश के विरुद्ध कुछ नहीं करूँगा। {22:19} किन्तु तुम भी उन दूसरे लोगों की तरह आज की रात यहाँ ठहर सकते हो और रात में मैं जान जाऊँगा कि यहोवा मुझसे क्या कहलवाना चाहता है।” {22:20} उस रात परमेश्वर बिलाम के पास आया। परमेश्वर ने कहा, “ये लोग अपने साथ ले जाने के लिए कहने को फिर आ गए हैं। इसलिए तुम उनके साथ जा सकते हो। किन्तु केवल वही करो जो मैं तुमसे करने को कहूँ।” {i22:21} बिलाम और उसका गधा {22:21} अगली सुबह, बिलाम उठा और अपने गधे पर काठी रखी। तब वह मोआबी नेताओं के साथ गया। {22:22} बिलाम अपने गधे पर सवार था। उसके सेवकों में से दो उसके साथ थे। जब बिलाम यात्रा कर रहा था, परमेश्वर उस पर क्रोधित हो गया। इसलिए यहोवा का दूत बिलाम के सामने सड़क पर खड़ा हो गया। दूत बिलाम को रोकने जा रहा था। {22:23} बिलाम के गधे ने यहोवा के दूत को सड़क पर खड़ा देखा। दूत के हाथ में एक तलवार थी। इसलिए गधा सड़क से मुड़ा और खेत में चला गया। बिलाम दूत को नहीं देख सकता था। इसलिए वह गधे पर बहुत क्रोधित हुआ। उसने गधे को मारा और उसे सड़क पर लौटने को विवश किया। {22:24} बाद में, यहोवा का दूत ऐसी जगह पर खड़ा हुआ जहाँ सड़क सँकरी हो गई थी। यह दो अंगूर के बागों के बीच का स्थान था। वहाँ सड़क के दोनों ओर दीवारें थीं। {22:25} गधे ने यहोवा के दूत को फिर देखा। इसलिए गधा एक दीवार से सटकर निकला। इससे बिलाम का पैर दीवार से छिल गया। इसलिए बिलाम ने अपने गधे को फिर मारा। {22:26} इसके बाद, यहोवा का दूत दूसरे स्थान पर खड़ा हुआ। यह दूसरी जगह थी जहाँ सड़क सँकरी हो गई थी। वहाँ कोई ऐसी जगह नहीं थी जहाँ गधा मुड़ सके। गधा दायें या बायें नहीं मुड़ सकता था। {22:27} गधे ने यहोवा के दूत को देखा इसलिए गधा बिलाम को अपनी पीठ पर लिए हुए जमीन पर बैठ गया। बिलाम गधे पर बहुत क्रोधित था। इसलिए उसने उसे अपने डंडे से पीटा। {22:28} तब यहोवा ने गधे को बोलने वाला बनाया। गधे ने बिलाम से कहा, “तुम मुझ पर क्यों क्रोधित हो मैंने तुम्हारे साथ क्या किया है? तुमने मुझे तीन बार मारा है!” {22:29} बिलाम ने गधे को उत्तर दिया, “तुमने दूसरों की नजर में मुझे मूर्ख बनाया है यदि मेरे हाथ में तलवार होती तो मैं अभी तुम्हें मार डालता।” {22:30} किन्तु गधे ने बिलाम से कहा, “मैं तुम्हारा अपना गधा हूँ जिस पर तुम अनेक वर्ष से सवार हुए हो और तुम जानते हो कि मैंने ऐसा इसके पहले कभी नहीं किया है।” “यह सही है।” बिलाम ने कहा। {22:31} तब यहोवा ने बिलाम को सड़क पर खड़े दूत को देखने दिया। बिलाम ने दूत और उसकी तलवार को देखा। तब बिलाम ने झुक कर प्रणाम किया। {22:32} यहोवा के दूत ने बिलाम से पूछा, “तुमने अपने गधे को तीन बार क्यों मारा? तुम्हें मुझ पर क्रोध से पागल होना चाहिए। मैं तुमको रोकने के लिए यहाँ आया हूँ। तुम्हें कुछ अधिक सावधान रहना चाहिए। {22:33} गधे ने मुझे देखा और वह तीन बार मुझसे मुड़ा। यदि गधा मुड़ा न होता तो मैंने तुमको मार डाला होता। किन्तु मुझे तुम्हारे गधे को नहीं मारना था।” {22:34} तब बिलाम ने यहोवा के दूत से कहा, “मैंने पाप किया है। मैं यह नहीं जानता था कि तुम सड़क पर खड़े हो। यदि मैं बुरा कर रहा हूँ तो मैं घर लौट जाऊँगा।” {22:35} यहोवा के दूत ने बिलाम से कहा, “नहीं, तुम इन लोगों के साथ जा सकते हो। किन्तु सावधान रहो। वही बातें कहो जो मैं तुमसे कहने के लिए कहूँगा।” इसलिए बिलाम बालाक द्वारा भेजे गए नेताओं के साथ गया। {22:36} बालाक ने सुना कि बिलाम आ रहा है। इसलिए बालाक उससे मिलने के लिए अर्नोन सीमा पर मोआबी नगर को गया। यह उसके देश की छोर थी। {22:37} जब बालाक ने बिलाम को देखा तो उसने बिलाम से कहा, “मैंने इसके पहले तुमसे आने के लिए कहा था और यह भी बताया था कि यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। तुम हमारे पास क्यों नहीं आए? क्या यह सच है कि तुम मुझसे कोई भी पुरस्कार या भुगतान नहीं पाना चाहते?” {22:38} किन्तु बिलाम ने उत्तर दिया, “मैं अब तुम्हारे पास आया हूँ। लेकिन मैं, जो तुमने करने को कहा था उनमें से, शायद कुछ भी न कर सकूँ। मैं केवल वही बातें तुमसे कह सकता हूँ जो परमश्वर मुझसे कहने को कहता है।” {22:39} तब बिलाम बालाक के साथ किर्यथूसोत गया। {22:40} बालाक ने कुछ मवेशी तथा कुछ भेड़ें उसकी भेंट के रूप में मारीं। उसने कुछ माँस बिलाम तथा कुछ उसके साथ के नेताओं को दिया। {22:41} अगली सुबह बालाक को बमोथ बाल नगर को ले गया। उस नगर से वे इस्राएली लोगों के कुछ डेरों को देख सकते थे। {i23:1} बिलाम की पहली भविष्यवाणी {23:1} बिलाम ने कहा, “यहाँ सात वेदियाँ बनाओ और मेरे लिए सात बैल और सात मेढ़े तैयार करो।” {23:2} बालाक ने वह सब किया जो बिलाम ने कहा। तब बिलाम ने हर एक वेदी पर एक बैल और एक मेढ़े को मारा। {23:3} तब बिलाम ने बालाक से कहा, “इस वेदी के समीप ठहरो। मैं दूसरी जगह जाऊँगा। तब कदाचित यहोवा मेरे पास आएगा और बताएगा कि मैं क्या कहूँ।” तब बिलाम एक अधिक ऊँचे स्थान पर गया। {23:4} परमेश्वर उस स्थान पर बिलाम के पास आया और बिलाम ने कहा, “मैंने सात वेदियाँ तैयार की हैं और मैंने हर एक वेदी पर एक बैल और एक मेढ़े को मारा है।” {23:5} तब यहोवा ने बिलाम को वह बताया जो उसे कहना चाहिए। तब यहोवा ने कहा, “बालाक के पास जाओ और इन बातों को कहो जो मैंने कहने के लिए बताई हैं।” {23:6} इसलिए बिलाम बालाक के पास लौटा। बालाक तब तक वेदी के पास खड़ा था और मोआब के सभी नेता उसके साथ खड़े थे। {23:7} तब बिलाम ने ये बातें कंहीः “मोआब के राजा बालाक ने मुझे आराम से बुलाया पूर्व के पहाड़ों से। बालाक ने मुझसे कहा ‘आओ और मेरे लिए याकूब के विरुद्ध कहो, आओ और इस्राएल के लोगों के विरुद्ध कहो।’ {23:8} परमेश्वर उन लोगों के विरुद्ध नहीं है, अतः मैं भी उनके विरुद्ध नहीं कह सकता। यहोवा ने उनका बुरा होने के लिए नहीं कहा है। अतः मैं भी वैसा नहीं कर सकता। {23:9} मैं उन लोगों को पर्वत से देखता हूँ। मैं ऐसे लोगों को देखता हूँ जो अकेले रहते हैं। वो लोग किसी अन्य राष्ट्र के अंग नहीं हैं। {23:10} याकूब के लोग बालू के कण से भी अधिक हैं। इस्राएल के लोगों की चौथाई को भी कोई गिन नहीं सकता। मुझे एक अच्छे मनुष्य की तरह मरने दो, मुझे उन लोगों की तरह ही मरने दो।” {23:11} बालाक ने बिलाम से कहा, “तुमने हमारे लिए क्या किया है मैंने तुमको अपने शत्रुओं के विरुद्ध कुछ कहने को बुलाया था। किन्तु तुमने उन्हीं को आशीर्वाद दिया है।” {23:12} किन्तु बिलाम ने उत्तर दिया, “मुझे वही करना चाहिए जो यहोवा मुझे करने को कहता है।” {23:13} तब बालाक ने उससे कहा, “इसलिए मेरे साथ दूसरे स्थान पर आओ। उस स्थान पर तुम लोगों को भी देख सकते हो। किन्तु तुम उनके एक भाग को ही देख सकते हो, सभी को नहीं देख सकते और उस स्थान से तुम मेरे लिए उनके विरुद्ध कुछ कह सकते हो।” {23:14} इसलिए बालाक बिलाम को सोपीम के मैदान में ले गया। यह पिसगा पर्वत की चोटी पर था। बालाक ने उस स्थान पर सात वेदियाँ बनाईं। तब बालाक ने हर एक वेदी पर बलि के रूप में एक बैल और एक मेढ़ा मारा। {23:15} इसलिए बिलाम ने बालाक से कहा, “इस वेदी के पास खड़े रहो। मैं उस स्थान पर परमेश्वर से मिलने जाऊँगा।” {23:16} इसलिए यहोवा बिलाम के पास आया और उसने बिलाम को बताया कि वह क्या कहे। तब यहोवा ने बिलाम को बालाक के पास लौटने और उन बातों को कहने को कहा। {23:17} इसलिए बिलाम बालाक के पास गया। बालाक तब तक वेदी के पास खड़ा था। मोआब के नेता उसके साथ थे। बालाक ने उसे आते हुए देखा और उससे पूछा, “यहोवा ने क्या कहा?” {i23:18} बिलाम की दूसरी भविष्यवाणी {23:18} तब बिलाम ने ये बातें कंहीः “बालाक! खड़े हो और मेरी बात सुनो। सिप्पोर के पुत्र बालाक! मेरी बात सुनो। {23:19} परमेश्वर मनुष्य नहीं है, वह झूठ नहीं बोलेगा; परमेश्वर मनुष्य पुत्र नहीं, उसके निर्णय बदलेंगे नहीं। यदि यहोवा कहता है कि वह कुछ करेगा तो वह अवश्य उसे करेगा। यदि यहोवा वचन देता है तो अपने वचन को अवश्य पूरा करेगा। {23:20} यहोवा ने मुझे उन्हें आशीर्वाद देने का आदेश दिया। यहोवा ने उन्हें आशीर्वा दिया है, इसलिए मैं उसे बदल नहीं सकता। {23:21} याकूब के लोगों में कोई दोष नहीं था। इस्राएल के लोगों में कोई पाप नहीं था। यहोवा उनका परमेश्वर है और वह उनके साथ है। महाराजा (परमेश्वर) की वाणी उनके साथ है! {23:22} परमेश्वर उन्हें मिस्र से बाहर लाया। इस्राएल के वे लोग जंगली साँड की तरह शक्तिशाली हैं। {23:23} कोई जादुई शक्ति नहीं जो याकूब के लोगों को हरा सके। याकूब के बारे में और इस्राएल के लोगों के विषय में भी लोग यह कहेंगे: ‘परमेश्वर ने जो महान कार्य किये हैं उन पर ध्यान दो!’ {23:24} वे लोग सिंह की तरह शक्तिशाली होंगे। वे सिंह जैसे लड़ेंगे और यह सिंह कभी विश्राम नहीं करेगा, जब तक वह शत्रु को खा नहीं डालता, और वह सिंह कभी विश्राम नहीं करेगा जब तक वह उनका रक्त नहीं पीता जो उसके विरुद्ध हैं।” {23:25} तब बालाक ने बिलाम से कहा, “तुमने उन लोगों के लिए अच्छी चीज़ें होने की मांग नहीं की। किन्तु तुमने उनके लिए बुरी चीज़ें होने की भी माँग नहीं की।” {23:26} बिलाम ने उत्तर दिया, “मैंने पहले ही तुमसे कह दिया कि मैं केवल वही कहूँगा जो यहोवा मुझसे कहने के लिए कहता है।” {23:27} तब बालाक ने बिलाम से कहा, “इसलिए तुम मेरे साथ दूसरे स्थान पर चलो। सम्भव है कि परमेश्वर प्रसन्न हो जाये और तुम्हें उस स्थान से शाप देने दे।” {23:28} इसलिए बालाक बिलाम को पोर पर्वत की चोटी पर ले गया। यह पर्वत मरुभूमि के छोर पर स्थित है। {23:29} बिलाम ने कहा, “यहाँ सात वेदियाँ बनाओ। तब सात साँड़ तथा सात मेढ़े वेदियों पर बलि के लिए तैयार करो।” {23:30} बालाक ने वही किया जो बिलाम ने कहा। बालाक ने बलि के रूप में हर एक वेदी पर एक साँड़ तथा एक मेढ़ा मारा। {i24:1} बिलाम की तीसरी भविष्यवाणी {24:1} बिलाम को मालूम हुआ कि यहोवा इस्राएल को आशीर्वाद देना चाहता है। इस्रालिए बिलाम ने किसी प्रकार के जादू मन्तर का उपयोग करके उसे बदलना नहीं चाहा। किन्तु बिलाम मुड़ा और उसने मरुभूमि की ओर देखा। {24:2} बिलाम ने मरुभूमि के पार तक देखा और इस्राएल के सभी लोगों को देख लिया। वे अपने अलग — अलग परिवार समूहों के क्षेत्र में डेरा डाले हुए थे। तब परमेश्वर ने बिलाम को प्रेरित किया। {24:3} और बिलाम ने ये शब्द कहेः “बोर का पुत्र बिलाम जो सब कुछ स्पष्ट देख सकता है ये बातें कहता है। {24:4} ये शब्द कहे गए, क्योंकि मैं परमेश्वर की बात सुनता हूँ। मैं उन चीज़ों को देख सकता हूँ जिसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर चाहता है की मैं देखूँ। मैं जो कुछ स्पष्ट देख सकता हूँ वही नम्रता के साथ कहता हूँ। {24:5} “याकूब के लोगो तुम्हारे खेमे बहुत सुन्दर हैं! इस्राएल के लोगो जिनके घर सुन्दर हैं! {24:6} तुम्हारे डेरे घाटियों की तरह प्रदेश के आर — पार फैले हैं. ये नदी के किनारे उगे बाग की तरह हैं। ये यहोवा द्वारा बोयी गई फसल की तरह हैं। ये नदियों के किनारे उगे देवदार के सुन्दर पेड़ों की तरह हैं। {24:7} तुम्हें पीने के लिए सदा पर्याप्त पानी मिलेगा। तुम्हें फसलें उगाने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। तुम लोगों का राजा अगाग से महान होगा। तुम्हारा राज्य बहुत महान हो जाएगा। {24:8} “परमेश्वर उन लोगों को मिस्र से बाहर लाया। वे इतने शक्तिशाली हैं जितना कोई जंगली साँड। वे अपने सभी शत्रुओं को हरायेंगे। वे अपने शत्रुओं की हड्डियाँ चूर करेंगे। और उनके बाण उनके शत्रु को मार डालेंगे वे उस सिंह की तरह हैं जो अपने शिकार पर टूट पड़ना चाहता हो। {24:9} वे उस सिंह की तरह है जो सो रहा हों। कोई व्यक्ति इतना साहसी नहीं जो उसे जगा दे! कोई व्यक्ति जो तुम्हें आशीर्वाद देगा, आशीष पाएगा, और कोई व्यक्ति जो तुम्हारे विरुद्ध बोलेगा विपत्ति में पड़ेगा।” {24:10} तब बिलाम पर बालाक बहुत क्रोधित हुआ। बालाक ने बिलाम से कहा, “मैंने तुम्हे आने और अपने शत्रुओं के विरुद्ध कुछ कहने के लिए बुलाया। किन्तु तुमने उनको आशीर्वाद दिया है। तुमने उन्हें तीन बार आशीर्वाद दिया है। {24:11} अब विदा हो और घर जाओ। मैंने कहा था कि मैं तुम्हें बहुत अधिक सम्पन्न बनाऊँगा। किन्तु यहोवा ने तुम्हें पुरस्कार से वंचित कराया है।” {24:12} बिलाम ने बालाक से कहा, “तुमने आदमियों को मेरे पास भेजा। उन व्यक्तियों ने मुझसे आने के लिए कहा। किन्तु मैंने उनसे कहा, {24:13} ‘बालाक अपना सोने — चाँदी से भरा घर मुझको दे सकता है। परन्तु मैं तब भी केवल वही बातें कह सकता हूँ जिसे कहने के लिए यहोवा आदेश देता है। मैं अच्छा या बुरा स्वयं कुछ नहीं कर सकता। मुझे वही करना चाहिए जो यहोवा का आदेश हो।’ क्या तुम्हें याद नहीं कि मैंने ये बातें तुम्हारे लोगों से कहीं।’ {24:14} अब मैं अपने लोगों के बीच जा रहा हूँ किन्तु तुमको एक चेतावनी दूँगा। मैं तुमसे कहूँगा कि भविष्य में इस्राएल के ये लोग तुम्हारे और तुम्हारे लोगों के साथ क्या करेंगे।” {i24:15} बिलाम की अन्तिम भविष्यवाणी {24:15} तब बिलाम ने ये बातें कहीं: “बोर के पुत्र बिलाम के ये शब्द हैं: ये उस व्यक्ति के शब्द हैं जो चीज़ों को साफ — साफ देख सकता है। {24:16} ये उस व्यक्ति के शब्द हैं जो परमेश्वर की बातें सुनता है। सर्वोच्च परमेंश्वर ने मुझे ज्ञान दिया है। मैंने वह देखा है जिसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे दिखाना चाहा है। मैं जो कुछ स्पष्ट देखता हूँ वही नम्रता के साथ कहता हूँ। {24:17} “मैं देखता हूँ कि यहोवा आ रहा है, किन्तु अभी नहीं। मैं उसका आगमन देखता हूँ, किन्तु यह शीघ्र नहीं है। याकूब के परिवार से एक तारा आएगा। इस्राएल के लोगों में से एक नया शासक आएगा। वह शासक मोआबी लोगों के सिर कुचल देगा। वह शासक सेईर के सभी पुत्रों के सिर कुचल देगा। {24:18} एदोम देश पराजित होगा नये राजा का शत्रु सेईर पराजित होगा। इस्राएल के लोग शक्तिशाली हो जाएंगे। {24:19} “याकूब के परिवार से एक नया शासक आएगा। नगर में जीवित बचे लोगों को वह शासक नष्ट करेगा।” {24:20} तब बिलाम ने अपने अमालेकी लोगों को देखा और ये बातें कहीं: “सभी राष्ट्रों में अमालेक सबसे अधिक बलवान था। किन्तु अमालेक भी नष्ट किया जाएगा।” {24:21} तब बिलाम ने केनियों को देखा और उनसे ये बातें कहीं: “तुम्हें विश्वास है कि तुम्हारा देश उसी प्रकार सुरक्षित है। जैसे किसी ऊँचे खड़े पर्वत पर बना घोंसला। {24:22} किन्तु केनियों, तुम नष्ट किये जाओगे। अश्शूर तुम्हें बन्दी बनाएगा।” {24:23} तब बिलाम ने ये शब्द कहे, “कोई व्यक्ति नहीं रह सकता जब परमेश्वर यह करता है। {24:24} कित्तियों के तट से जहाज आएंगे। वे जहाज अश्शूर और एबेर को हराएंगे। किन्तु तब वे जहाज भी नष्ट कर दिए जाएंगे।” {24:25} तब बिलाम उठा और अपने घर को लौट गया और बालाक भी अपनी राह चला गया। {i25:1} पोर में इस्राएल {25:1} इस्राएल के लोग अभी तक शित्तीम के क्षेत्र मे डेरा डाले हुए थे। उस समय लोग मोआबी स्त्रियों के साथ यौन सम्बन्धी पाप करने लगे। {25:2} मोआबी स्त्रियों ने पुरुषों को आने और अपने मिथ्या देवताओं को भेंट चढ़ाने में सहायता करने के लिए आमंन्त्रित किया। इस्राएली लोगों ने वहाँ भोजन किया और मिथ्या देवताओं की पूजा की। {25:3} अतः इस्राएल के लोगों ने इसी प्रकार मिथ्या देवता पोर के बाल की पूजा आरम्भ की। यहोवा इन लोगों पर बहुत क्रोधित हुआ। {25:4} यहोवा ने मूसा से कहा, “इन लोगों के नेताओं को लाओ। तब उन्हें सभी लोगों की आँखों के सामने मार डालो। उनके शरीर को यहोवा के सामने डालो । तब यहोवा इस्राएल के लोगों पर क्रोधित नहीं होगा।” {25:5} इसलिए मूसा ने इस्राएल के न्यायाधीशों से कहा “तुम लोगों में से हर एक को अपने परिवार समूह में उन लोगों को ढूँढ निकालना है जिन्होंने लोगों को पोर के मिथ्या देवता बाल की पूजा के लिए प्रेरित किया है। तब तुम्हें उन लोगों को अवश्य मार डालना चाहिए।” {25:6} उस समय मूसा और सभी इस्राएल के अग्रज (नेता) मिलापवाले तम्बू के द्वार पर एक साथ इकट्ठे थे। एक इस्राएली व्यक्ति एक मिद्यानी स्त्री को अपने भाईयों के पास अपने घर लाया। उसने यह वहाँ किया जहाँ उसे मूसा और सारे नेता देख सकते थे। मूसा और नेता बहुत दुःखी हुए। {25:7} याजक हारून के पोते तथा एलीआज़ार के पुत्र पीनहास ने इसे देखा। इसलिए उसने बैठक छोड़ी और अपना भाला उठाया। {25:8} वह इस्राएली व्यक्ति के पीछे — पीछे उसके खेमे में गया। तब उसने इस्राएली पुरुष और मिद्यानी स्त्री को अपने भाले से मार डाला। उसने अपने भाले को दोनों के शरीरों के पार कर दिया। उस समय इस्राएल के लोगों में एक बड़ी बीमारी फैली थी। किन्तु जब पीनहास ने इन दोनों लोगों को मार डाला तो बीमारी रूक गई। {25:9} इस बीमारी से चौबीस हजार लोग मर चुके थे। {25:10} यहोवा ने मूसा से कहा, {25:11} “याजक हारून के पोते तथा एलीआजार के पुत्र पीनहास ने इस्राएल लोगों को मेरे क्रोध से बचा लिया है। उसने मुझे प्रसन्न करने के लिए कठिन प्रयत्न किया। वह वैसा ही है जैसा मैं हूँ। उसने मेरी प्रतिष्ठा को लोगों में सुरक्षित रखने का प्रयत्न किया। इसलिए मैं लोगों को वैसे ही नहीं मारूँगा जैसे मैं मारना चाहता था। {25:12} इसलिए पीनहास से कहो कि मैं उसके साथ एक शान्ति की वाचा करना चाहता हूँ। {25:13} वह और उसके बाद के वंशज मेरे साथ एक वाचा करेंगे। वे सदा याजक रहेंगे क्योंकि उसने अपने परमेश्वर की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कठिन प्रयत्न किया। इस प्रकार उसने इस्राएली लोगों के दोषों के लिए हर्जाना दिया।” {25:14} जो इस्राएली मिद्यानी स्त्री के साथ मारा गया था उसका नाम जिम्रि था वह साल का पुत्र था। वह शिमोन के परिवार समूह के परिवार का नेता था {25:15} और मारी गई मिद्यानी स्त्री का नाम कोजबी था। 15 वह सूर की पुत्री थी। वह अपने परिवार का मुखिया था और वह मिद्यानी परिवार समूह का नेता था। {25:16} यहोवा ने मूसा से कहा, {25:17} “मिद्यानी लोग तुम्हारे शत्रु हैं। तुम्हें उनको मार डालना चाहिए। {25:18} उन्होंने पहले ही तुमको अपना शत्रु बना लिया है। उन्होंने तुमको धोखा दिया और तुमसे अपने मिथ्या देवताओं की पोर में पूजा करवाई और उन्होंने तुममें से एक व्यक्ति का विवाह कोजबी के साथ लगभग करा दिया जो मिद्यानी नेता की पुत्री थी। यही स्त्री उस समय मारी गयी जब इस्राएली लोगों में बीमारी आई। बीमारी इसलिए उत्पन्न की गई कि लोग पोर में मिथ्या देवता बाल की पूजा कर रहे थे।” {i26:1} दूसरी गिनती {26:1} बड़ी बीमारी के बाद यहोवा ने मूसा और हारून के पुत्र याजक एलीआज़ार से बातें कीं। {26:2} उसने कहा, “सभी इस्राएली लोगों की संख्या गिनो। हर एक परिवार को देखो और बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के हर एक पुरुष को गिनो। ये वे पुरुष हैं जो इस्राएल की सेना में सेवा करने योग्य हैं।” {26:3} इस समय लोग मोआब के मैदान में डेरा डाले थे। यह यरीहो के पार यरदन नदी के समीप था। इसलिए मूसा और याजक एलीआज़ार ने लोगों से बातें कीं। {26:4} उन्होंने कहा, “तुम्हें बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के हर एक पुरुष को गिनना चाहिए। यही वह आदेश था जो यहोवा ने मूसा को पालन करने के लिए दिया था।” यहाँ उन इस्राएल के लोगों की सूची है जो मिस्र से आए थेः {26:5} ये रूबेन के परिवार के लोग हैं। (रूबेन इस्राएल (याकूब) का पहलौठा पुत्र था।) ये परिवार थेः हनोक — हनोकी परिवार। पल्लू — पल्लिय परिवार। {26:6} हेस्रोन — हेस्रोनी परिवार। कर्मी — कर्मी परिवार। {26:7} रूबेन के परिवार समूह में वे परिवार थे। योग में सभी तैंतालीस हजार सात सौ तीस पुरुष थे। {26:8} पल्लू का पुत्र एलीआब था। {26:9} एलीआब के तीन पुत्र थे — नमूएल, दातान और अबीराम। याद रखो कि दातान और अबीराम वे दो नेता थे जो मूसा और हारून के विरोधी हो गए थे। वे कोरह के अनुयायी थे और कोरह यहोवा का विरोधी हो गया था। {26:10} वही समय था जब पृथ्वी फटी थी और कोरह एवं उसके सभी अनुयायियों को निगल गई थी। कुल दो सौ पचास पुरुष मर गये थे। यह इस्राएल के सभी लोगों के लिए एक संकेत और चेतावनी थी। {26:11} किन्तु कोरह के परिवार के अन्य लोग नहीं मरे। {26:12} शिमोन के परिवार समूह के ये परिवार थेः नमूएल — नमूएल परिवार। यामीन — यामीन परिवार। याकीन — याकीन परिवार। {26:13} जेरह — जेराही परिवार। शाऊल — शाऊल परिवार। {26:14} शिमोन के परिवार समूह में वे परिवार थे। इसमें कुल बाइस हजार पुरुष थे। {26:15} गाद के परिवार समूह के ये परिवार हैं: सपोन — सपोन परिवार। हाग्गी — हाग्गी परिवार। शूनी — शूनी परिवार। {26:16} ओजनी — ओजनी परिवार। ऐरी — ऐरी परिवार। {26:17} अरोद — अरोद परिवार। अरेली — अरेली परिवार। {26:18} गाद के परिवार समहू के वे परिवार थे। इनमें कुल चालीस हजार पाँच सौ पुरुष थे। {26:19} यहूदा के परिवार समूह के ये परिवार हैं: शेला — शेला परिवार। पेरेस — पेरेस परिवार। {26:20} जेरह — जेरह परिवार। (यहूदा के दो पुत्र एर, ओनान — कनान में मर गए थे।) {26:21} पेरेस के ये परिवार हैं: हेस्रोन — हेस्रोनी परिवार। हामूल — हामूल परिवार। {26:22} यहूदा के परिवार समूह के वे परिवार थे। इनके कुल पुरुषों की संख्या छिहत्तर हजार पाँच सौ थी। {26:23} इस्साकार के परिवार समूह के परिवार ये थेः तोला — तोला परिवार। पुव्वा — पुव्वा परिवार। {26:24} याशूब — याशूब परिवार। शिम्रोन — शिम्रोन परिवार। {26:25} इस्साकार के परिवार समूह के वे परिवार थे। इनमें कुल पुरुषों की संख्या चौसठ हजार तीन सौ थी। {26:26} जबूलून के परिवार समूह के परिवार ये थेः सेरेद — सेरेद परिवार। एलोन — एलोन परिवार। यहलेल — यहलेल परिवार। {26:27} जबूलून के परिवार समूह के वे परिवार थे। इनमें कुल पुरुषों की संख्या साठ हजार पाँच सौ थी। {26:28} यूसुफ के दो पुत्र मनश्शे और एप्रैम थे। हर एक पुत्र अपने परिवारों के साथ परिवार समूह बन गया था। {26:29} मनश्शे के परिवार में ये थेः माकीर — माकीर परिवार, (माकीर गिलाद का पिता था।) गिलाद — गिलाद परिवार। {26:30} गिलाद के परिवार ये थेः ईएजेर — ईएजेर परिवार। हेलेक — हेलेकी परिवार। {26:31} अस्रीएल — अस्रीएल परिवार। शेकेम — शेकेमी परिवार। {26:32} शमीदा — शमीदा परिवार। हेपेर — हेपेरी परिवार। {26:33} हेपेर का पुत्र सलोफाद था। किन्तु उसका कोई पुत्र न था। केवल पुत्री थी। उसकी पुत्रियों के नाम महला, नोआ, होग्ला, मिल्का, और तिर्सा थे। {26:34} मनश्शे परिवार समूह के ये परिवार हैं। इनमें कुल पुरुष बावन हजार सात सौ थे। {26:35} एप्रैम के परिवार समूह के ये परिवार थेः शूतेलह — शूतेलही परिवार। बेकेर — बेकेरी परिवार। तहन — तहनी परिवार। {26:36} एरान शूतेलह परिवार का था। उसका परिवार एरनी था। {26:37} एप्रैम के परिवार समूह में ये परिवार थे। कुल पुरुषों की संख्या इसमें बत्तीस हजार पाँच सौ थी। वे ऐसे सभी लोग हैं जो यूसुफ के परिवार समूहों के हैं। {26:38} बिन्यामीन के परिवार समूह के परिवार ये थेः बेला — बेला परिवार। अशबेल — अश्बेली परिवार। अहीरम — अहीरमी परिवार। {26:39} शपूपाम — शपूपाम परिवार। हूपाम — हूपामी परिवार। {26:40} बेला के परिवार में ये थेः अर्द — अर्दी परिवार। नामान — नामानी परिवार। {26:41} बिन्यामीन के परिवार समूह के ये सभी परिवार थे। इसमें पुरुषों की कुल संख्या पैंतालीस हजार छः सौ थी। {26:42} दान के परिवार समूह में ये परिवार थेः शूहाम — शूहाम परिवार समूह। दान के परिवार समूह से वह परिवार समूह था। {26:43} शूहामी परिवार समूह में बहुत से परिवार थे। इनमें पुरुषों की कुल संख्या चौंसठ हजार चार सौ थी। {26:44} आशेर के परिवार समूह के ये परिवार हैं: यिम्ना — यिम्नी परिवार। यिश्री — यिश्री परिवार। बरीआ — बरीआ परिवार। {26:45} बरीआ के ये परिवार हैं हेबेर — हेबेरी परिवार। मल्कीएल — मल्कीएली परिवार। {26:46} (आशेर की एक पुत्री सेरह नाम की थी।) {26:47} आशेर के परिवार समूह में वे परिवार थे। इसमें पुरूषों की संख्या तिरपन हजार चार सौ थी। {26:48} नप्ताली के परिवार समूह के ये परिवार थेः यहसेल — यहसेली परिवार। गूनी — गूनी परिवार। {26:49} येसेर — येसेरी परिवार। शिल्लेम — शिल्लेमी परिवार। {26:50} नप्ताली के परिवार समूह के ये परिवार थे। इसमें पुरुषों की कुल संख्या पैंतालीस हजार चार सौ थी। {26:51} इस प्रकार इस्राएल के पुरुषों की कुल संख्या छः लाख एक हजार सात सौ तीस थी। {26:52} यहोवा ने मूसा से कहा, {26:53} “हर एक परिवार समूह को भूमि दी जाएगी। यह वही प्रदेश है जिसके लिए मैंने वचन दिया था। हर एक परिवार समूह उन लोगों के लिये पर्याप्त भूमि प्राप्त करेंगे जिन्हें गिना गया। {26:54} बड़ा परिवार समूह अधिक भूमि पाएगा और छोटा परिवार समूह कम भूमि पाएगा। किन्तु हर एक परिवार समूह को भूमि मिलेगी जिसके लिए मैंने वचन दिया है और जो भूमि वे पाएंगे वह उनकी गिनी गई संख्या के बराबर होगी। {26:55} हर एक परिवार समूह को पासों के आधार पर निश्चय करके धरती दी जाएगी और उस प्रदेश का वही नाम होगा जो उस परिवार समूह का होगा। {26:56} वह प्रदेश जिसे मैंने लोगों को देने का वचन दिया, उनके उत्तराधिकार में होगा। यह बड़े और छोटे परिवार समूहों को दिया जाएगा। निर्णय करने के लिए तुम्हें पासे फेंकने होंगे।” {26:57} लेवी का परिवार समूह भी गिना गया। लेवी के परिवार समूह के ये परिवार हैं गेर्शोन — गेर्शोन परिवार। कहात — कहात परिवार। मरारी — मरारी परिवार। {26:58} लेवी के परिवार समूह से ये परिवार भी थेः लिब्नि परिवार। हेब्रोनी परिवार। महली परिवार। मूशी परिवार। कहात परिवार। अम्राम कहात के परिवार समूह का था। {26:59} अम्राम की पत्नी का नाम योकेबेद था। वह भी लेवी के परिवार समूह की थी। उसका जन्म मिस्र में हुआ था। अम्राम और योकेबेद के दो पुत्र हारून और मूसा थे। उनकी एक पुत्री मरियम भी थी। {26:60} हारून, नादाब, अबीहू, एलीआज़ार तथा ईतामार का पिता था। {26:61} किन्तु नादाब और अबीहू मर गए। वे मर गए क्योंकि उन्होंने यहोवा को उस आग से भेंट चढ़ाई जो उनके लिए स्वीकृत नहीं थी। {26:62} लेवी परिवार समूह के सभी पुरुषों की संख्या तेईस हजार थी। किन्तु ये लोग इस्राएल के अन्य लोगों के साथ नहीं गिने गए थे। वे भूमि नहीं पा सके जिसे अन्य लोगों को देने का वचन यहोवा ने दिया था। {26:63} मूसा और याजक एलीआजार ने इन सभी लोगों को गिना। उन्होंने इस्राएल के लोगों को मोआब के मैदान में गिना। यह यरीहो से यरदन नदी के पार था। {26:64} बहुत समय पहले मूसा और याजक हारून ने इस्राएल के लोगों को सीनै मरुभूमि में गिना था। किन्तु वे सभी लोग मर चुके थे। मोआब के मैदान में मूसा ने जिन लोगों को गिना, वे पहले गिने गए लोगों से भिन्न थे। {26:65} यह इसलिए हुआ कि यहोवा ने इस्राएल के लोगों से यह कहा था कि वे सभी मरुभूमि मे मरेंगे। जो केवल दो जीवित बचे थे यपुन्ने का पुत्र कालेब और नून का पुत्र यहोशू थे। {i27:1} सलोफाद की पुत्रियाँ {27:1} सलोफाद हेपर का पुत्र था। हेपेर गिलाद का पुत्र था। गिलाद माकीर का पुत्र था। माकीर मनश्शे का पुत्र था और मनश्शे यूसुफ का पुत्र था। सलोफाद की पाँच पुत्रियाँ थीं। उनके नाम महला, नोवा, होग्ला, मिल्का और तिर्सा था। {27:2} ये पाँचों स्त्रियाँ मिलापवाले तम्बू में गईं और मूसा, याजक एलीआजार, नेतागण और सब इस्राएलियों के सामने खड़ी हो गईं। पाँचों पुत्रियों ने कहा, {27:3} “हमारे पिता उस समय मर गये जब हम लोग मरुभूमि से यात्रा कर रहे थे। वह उन लोगों में से नहीं था जो कोरह के दल में सम्मिलित हुए थे। (कोरह वही था जो यहोवा के विरुद्ध हो गया था।) हम लोगों के पिता की मृत्यु स्वाभाविक थी। किन्तु हमारे पिता का कोई पुत्र नहीं था। {27:4} इसका तात्पर्य यह हुआ कि हमारे पिता का नाम नहीं चलेगा। यह ठीक नहीं है कि हमारे पिता का नाम मिट जाए। इसलिए हम लोग यह माँग करते हैं कि हमें भी कुछ भूमि दी जाए जिसे हमारे पिता के भाई पाएंगे।” {27:5} इसलिए मूसा ने यहोवा से पूछा कि वह क्या करे। {27:6} यहोवा ने उससे कहा, {27:7} “सलोफाद की पुत्रियाँ ठीक कहती हैं। तुम्हें उनके चाचाओं के साथ — साथ उन्हें भी भूमि का भाग अवश्य देना चाहिए जो तुम उनके पिता को देते। {27:8} “इसलिए इस्राएल के लोगों के लिए इसे नियम बना दो। यदि किसी व्यक्ति के पुत्र न हों और वह मर जाए तो हर एक चीज़ जो उसकी है, उसकी पुत्री की होगी। {27:9} यदि उसे कोई पुत्री न हो तो, जो कुछ भी उसका है उसके भाईयों को दिया जाएगा। {27:10} यदि उसका कोई भाई न हो तो, जो कुछ उसका है उसके पिता के भाईयों को दिया जाएगा। {27:11} यदि उसके पिता का कोई भाई नहीं है तो, जो कुछ उसका हो उसे उसके परिवार के निकटतम सम्बन्धी को दिया जाएगा। इस्राएल के लोगों में यह नियम होना चाहिए। यहोवा मूसा को यह आदेश देता है।” {i27:12} यहोशू को नया नेता चुना गया {27:12} तब यहोवा ने मूसा से कहा, “उस पर्वत के ऊपर चढ़ो। जो अबारीम पर्वत श्रृंखला में से एक है। वहाँ तुम उस प्रदेश को देखोगे जिसे मैं इस्राएल के लोगों को दे रहा हूँ। {27:13} जब तुम इस प्रदेश को देख लोगे तब तुम अपने भाई हारून की तरह मर जाओगे। {27:14} उस बात को याद करो जब लोग सीन की मरुभूमि में पानी के लिए क्रोधित हुए थे। तुम और हारून दोनों ने मेरा आदेश मानना अस्वीकार किया था। तुम लोगों ने मेरा सम्मान नहीं किया था और लोगों के सामने मुझे पवित्र नहीं बनाया था।” (यह पानी सीन की मरुभूमि में कादेश के अन्तर्गत मरीबा में था।) {27:15} मूसा ने यहोवा से कहा, {27:16} “यहोवा परमेश्वर है वही जानता है कि लोग क्या सोच रहे हैं। यहोवा मेरी प्रार्थना है कि तू इन लोगों के लिए एक नेता चुन। {27:17} मैं प्रार्थना करता हूँ कि यहोवा एक ऐसा नेता चुन जो उन्हें इस प्रदेश से बाहर ले जाएगा तथा उन्हें नये प्रदेश में पहुँचायेगा। तब यहोवा के लोग गड़ेरिया रहित भेड़ के समान नहीं होंगे।” {27:18} इसलिए यहोवा ने मूसा से कहा, नून का पुत्र यहोशू नेता होगा। यहोशू बहुत बुद्धिमान है उसे नया नेता बनाओ। {27:19} उससे याजक एलीआज़ार और सभी लोगों के सामने खड़े होने को कहो। तब उसे नया नेता बनाओ। {27:20} “लोगों को यह दिखाओ कि तुम उसे नेता बना रहे हो, तब सभी उसका आदेश मानेंगे। {27:21} यदि यहोशू कोई विशेष निर्णय लेना चाहेगा तो उसे याजक एलीआज़ार के पास जाना होगा। एलीआज़ार ऊरीम का उपयोग यहोवा के उत्तर को जानने के लिए करेगा। तब यहोशू और इस्राएल के सभी लोग वह करेंगे जो परमेश्वर कहेगा। यदि परमेश्वर कहेगा, ‘युद्ध करने जाओ।’ तो वे युद्ध करने जाएंगे और यदि परमेश्वर कहे, ‘घर जाओ,’ तो घर जायेंगे।” {27:22} मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी। मूसा ने यहोशू से याजक एलीआज़ार और इस्राएल के सब लोगों के सामने खड़ा होने के लिए कहा। {27:23} तब मूसा ने अपने हाथों को उसके सिर पर यह दिखाने के लिए रखा कि वह नया नेता है। उसने यह वैसे ही किया जैसा यहोवा ने कहा था। {i28:1} नित्य—भेंट {28:1} तब यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {28:2} “इस्राएल के लोगों को यह आदेश दो। उनसे कहो कि वे ठीक समय पर निश्चयपूर्वक मुझे विशेष भेंट चढ़ाएं। उनसे कहो कि वे अन्नबलि और होमबलि चढ़ाएं। यहोवा उन होमबलियों की सुगन्ध पसन्द करता है। {28:3} इन होमबलियों को उन्हें यहोवा को चढ़ाना ही चाहिए। उन्हें दोषरहित एक वर्ष के दो मेढ़े नित्य भेंट के रूप में चढ़ाना चाहिए। {28:4} मेढ़ों में से एक को सवेरे चढ़ाओ और दूसरे मेढ़े को संध्या के समय। {28:5} इसके अतिरिक्त दो क्वार्ट अन्नबलि एक क्वार्ट जैतून के तेल के साथ मिला आटा दो।” {28:6} (उन्होंने सीनै पर्वत पर नित्य भेंट देनी आरम्भ की थी। यहोवा ने उन होमबलियों की सुगन्ध पसन्द की थी।) {28:7} लोगों को होमबलि के साथ पेय भेंट भी चढ़ानी चाहिए। उन्हें हर एक मेमने के साथ एक क्वार्ट दाखमधु देनी चाहिए। उस पेय भेंट को पवित्र स्थान में वेदी पर डालो। यह यहोवा को भेंट है। {28:8} दूसरे मेढ़े की भेंट गोधूलि के समय चढ़ाओ। इसे सवेरे की भेंट की तरह चढ़ाओ। वैसे ही पेय भेंट भी चढ़ाओ. ये आग द्वारा दी गई भेंट होगी। इस की सुगन्ध यहोवा को प्रसन्न करेगी। {i28:9} सब्त भेंट {28:9} “शनिवार को, जो छुट्टी का दिन है, एक वर्ष के दोष रहित दो मेमने जैतून के तेल के साथ मिले चार क्वार्ट अच्छे आटे की अन्नबलि और पेय भेंट चढ़ाओ। {28:10} यह छुट्टी के दिन की विशेष भेंट है। यह भेंट नियमित नित्य भेंट और पेय भेंट के अतिरिक्त है।” {i28:11} मासिक बैठकें {28:11} “हर एक महीने के प्रथम दिन तुम यहोवा को होमबलि चढ़ाओगे। यह भेंट दोष रहित दो बैलों, एक मेढ़ा और सात एक वर्ष के मेमनों की होगी। {28:12} हर एक बैल के साथ जैतून के तेल के साथ मिले छः क्वार्ट अच्छे आटे की अन्नबलि भी चढ़ाओ। हर एक मेढ़े के साथ जैतून के तेल के साथ मिले चार क्वार्ट अच्छे आटे की अन्नबलि भी चढ़ाओ। {28:13} हर एक मेमने के साथ जैतून के तेल के साथ मिले दो क्वार्ट अच्छे आटे की अन्नबलि भी चढ़ाओ। यह ऐसी होमबलि होगी जो यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। {28:14} पेय भेंट में दो क्वार्ट दाखमधु हर एक बैल के साथ, एक चौथाई क्वार्ट दाखमधु हर एक मेढ़े के साथ और एक क्वार्ट दाखमधु हर एक मेमने के साथ होगी। यह होमबलि है जो वर्ष के हर एक महीने चढ़ाई जानी चाहिए। {28:15} नित्य दैनिक होमबलि और पेय भेंट के अतिरिक्त तुम्हें यहोवा को एक बकरा देना चाहिए। वह बकरा पापबलि होगा। {i28:16} फसह पर्व {28:16} “पहले महीने के चौदहवें दिन यहोवा के सम्मान में फसह पर्व होगा। {28:17} उस महीने के पन्द्रहवें दिन अखमीरी रोटी की दावत आरम्भ होती है। यह पर्व सात दिन तक रहता है। तुम वही रोटी खा सकते हो जो अखमीरी हो। {28:18} इस पर्व के पहले दिन तुम्हें विशेष बैठक बुलानी चाहिए। उस दिन तुम कोई काम नहीं करोगे। {28:19} तुम यहोवा को होमबलि दोगे। यह होमबलि दोष रहित दो बैल, एक मेढ़ा और एक वर्ष के सात मेमनों की होगी। {28:20} हर एक बैल के साथ जैतून के तेल के साथ मिले हुए छ: क्वार्ट अच्छे आटे। मेढ़े के साथ जैतून के तेल के साथ मिले {28:21} हुए चार क्वार्ट अच्छ आटे और हर एक मेमने के साथ दो क्वार्ट जैतून के तेल के साथ मिले हुए आटे की अन्नबलि भी होगी। {28:22} तुम्हें एक बकरा भी देना चाहिए। वह बकरा तुम्हारे लिए पापबलि होगा। यह तुम्हारे पापो को ढकेगा। {28:23} तुम लोगों को वे भेंटे उन भेंटों के अतिरिक्त देनी चाहिए जो तुम हर एक सवेरे होमबलि के रूप में देते हो। {28:24} “उसी प्रकार तुम्हें सात दिन तक आग द्वारा भेंट देनी चाहिए और इसके साथ पेय भेंट भी देनी चाहिए। यह भेंट यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। तुम्हें ये भेंटें होमबलि के अतिरिक्त देनी चाहिए जो तुम प्रतिदिन देते हो। {28:25} “तब फसह पर्व के सातवें दिन तुम एक विशेष बैठक बुलाओगे और उस दिन तुम कोई काम नहीं करोगे। {i28:26} सप्ताहों का पर्व (कटनी का पर्व) {28:26} “प्रथम फल का पर्व या सप्ताहों के पर्व के समय तुम यहोवा के नये फसल की अन्नबलि दो। उस समय तुम्हें एक विशेष बैठक भी बुलानी चाहिए। तुम उस दिन कोई काम नहीं करोगे। {28:27} तुम होमबलि चढ़ाओगे। वह बलि यहोवा के लिए सुगन्ध होगी। तुम दोष रहित दो साँड, एक मेढ़ा और एक वर्ष के सात मेमनों की भेंट चढ़ाओगे। {28:28} तुम हर एक साँड के साथ जैतून के तेल के साथ मिले हुए छः क्वार्ट अच्छे आटे, हर एक मेढ़े के साथ चार क्वार्ट {28:29} और हर एक मेमने के साथ दो क्वार्ट आटे की भेंट चढ़ाओगे। {28:30} तुम्हें अपने पापों को ढकने के लिए एक बकरे की बलि चढ़ानी चाहिए। {28:31} तुम्हें यह भेंट प्रतिदिन होमबलि और इसकी अन्नबलि के अतिरिक्त चढ़ानी चाहिए। निश्चय कर लो कि जानवरों में कोई दोष न हो और यह निश्चय कर लो कि पेय भेंट ठीक है। {i29:1} बिगुल का पर्व {29:1} “सातवें महीने के प्रथम दिन एक विशेष बैठक होगी। तुम उस दिन कोई काम नहीं करोगे। वह बिगुल बजाने का दिन है। {29:2} तुम होमबलि चढ़ाओगे। ये भेंटें यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। तुम दोष रहित एक साँड, एक मेढ़ा और एक वर्ष के सात मेमनों की भेंट चढ़ाओगे। {29:3} तुम छः क्वार्ट तेल मिला अच्छा आटा भी बैल के साथ, चार क्वार्ट मेढ़े के साथ और {29:4} सात मेमनों में से हर एक के साथ दो क्वार्ट आटे की भेंट चढ़ाओगे। {29:5} इसके अतिरिक्त, पापबलि के लिए एक बकरा भी चढ़ाओगे। यह तुम्हारे पापों को ढकेगी। {29:6} ये भेंटें नवचन्द्र बलि और उसकी अन्नबलि के अतिरिक्त होगी और ये नित्य की भेंटों, इसकी अन्नबलियों तथा पेय भेंटों के अतिरिक्त होगी। ये नियम के अनुसार की जानी चाहिए। इन्हें आग में जलाना चाहिए। इसकी सुगन्धि यहोवा को प्रसन्न करेगी। {i29:7} प्रायश्चित का दिन {29:7} “सातवें महीने के दसवें दिन एक विशेष बैठक होगी। उस दिन तुम उपवास करोगे और तुम कोई काम नहीं करोगे। {29:8} तुम होमबलि दोगे। यह यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। तुम दोष रहित दो साँड, एक मेढ़ा और एक वर्ष के सात मेमनों की भेंट चढ़ाओगे। {29:9} तुम हर एक बैल के साथ जैतून के मिले हुए छ: क्वार्ट आटे, मेढ़े के साथ चार क्वार्ट आटे {29:10} और हर एक सातों मेमनों के साथ दो क्वार्ट आटे की भेंट चढ़ाओगे। {29:11} तुम एक बकरा भी पापबलि के रूप में चढ़ाओगे। यह प्रायश्चित के दिन की पापबलि के अतिरिक्त होगी। यह दैनिक बलि, अन्न और पेय भेंटों के भी अतिरिक्त होगी। {i29:12} बटोरने का पर्व {29:12} “सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन एक विशेष बैठक होगी। तुम उस दिन कोई काम नहीं करोगे। तुम यहोवा के लिए सात दिन तक छुट्टी मनाओगे। {29:13} तुम होमबलि चढ़ाओगे। यह यहोवा के लिए मधुर गन्ध होगी। तुम दोष रहित तेरह साँड, दो मेढ़े और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनें भेंट चढ़ाओगे। {29:14} तुम तेरह बैलों में से हर एक के साथ जैतून के साथ मिले हुए छः क्वार्ट आटे, दोनों मेढ़ों में से हर एक के लिए चार क्वार्ट {29:15} और चौदह मेढ़ों में से हर एक के लिए दो क्वार्ट आटे की भेंट चढ़ाओगे। {29:16} तुम्हें एक बकरा भी पापबलियों के रूप में अर्पित करना चाहिए। यह दैनिकबलि, अन्न और पेय भेंट के अतिरिक्त होगी। {29:17} “इस पर्व के दूसरे दिन तुम्हें दोष, रहित बारह साँड, दो मेढ़ें और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंटे चढ़ानी चाहिए। {29:18} तुम्हें साँड, मेढ़ों और मेमनों के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय भेंट भी चढ़ानी चाहिए। {29:19} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होगी। {29:20} “इस छुट्टी के तीसरे दिन तुम्हें दोष रहित ग्यारह साँड, दो मेढ़े और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:21} तुम्हें बैलों, मेढ़ों और मेमनों के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय की भेंट भी चढ़ानी चाहिए। {29:22} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होनी चाहिए। {29:23} “इस छुट्टी के चौथे दिन तुम्हें दोष रहित दस साँड, दो मेढ़े और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:24} तुम्हें बैलों, मेढ़ों और मेमनों के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:25} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होगी। {29:26} “इस छुट्टी के पाँचवें दिन तुम्हें दोष रहित नौ साँड, दो मेढ़े और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:27} तुम्हें बैलों, मेढ़ों और मेमनों के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न तथा पेय की भी भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:28} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होगी। {29:29} “इस छुट्टी के छठे दिन तुम्हें दोष रहित आठ साँड, दो मेढ़ें और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:30} तुम्हें बैलों, मेढ़ों और मेमनों के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय की भेंट भी चढ़ानी चाहिए। {29:31} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होगी। {29:32} “इस छुट्टी के सातवें दिन तुम्हें दोष रहित सात साँड, दो मेढ़े, और एक — एक वर्ष के चौदह मेमनों की भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:33} तुम्हें बैलो, मेढ़ों और मेमनो के साथ अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय की भी भेंट चढ़ानी चाहिए। {29:34} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होगी। {29:35} “इस छुट्टी का आठवाँ दिन तुम्हारी विशेष बैठक का दिन है। तुम्हें उस दिन कोई काम नहीं करना चाहिए। {29:36} तुम्हें होमबलि चढ़ानी चाहिए। ये आग द्वारा दी गई भेंट होगी। यह यहोवा के लिए मधुर सुगन्ध होगी। तुम्हें दोषरहित एक साँड, एक मेढ़ा और एक — एक वर्ष के सात मेमने भेंट में चढ़ाने चाहिए। {29:37} तुम्हें साँड, मेढ़ा और मेमनों के लिए अपेक्षित मात्रा में अन्न और पेय की भी भेंट देनी चाहिए। {29:38} तुम्हें पापबलि के रूप में एक बकरे की भी भेंट देनी चाहिए। यह दैनिक बलि और अन्नबलि तथा पेय भेंट के अतिरिक्त भेंट होनी चाहिए। {29:39} “वे (तुम्हारे) विशेष छुट्टियाँ यहोवा के सम्मान के लिए हैं। तुम्हें उन विशेष मनौतियों, स्वेच्छा भेंटों, होमबलियों मेलबलियों या अन्न और पेय भेंटे, जो तुम यहोवा को देना चाहते हो, उसके अतिरिक्त इन विशेष दिनों को मनाना चाहिए।” {29:40} मूसा ने इस्राएल के लोगों से उन सभी बातों को कहा जो यहोवा ने उसे आदेश दिया था। {i30:1} विशेष दिए गए वचन {30:1} मूसा ने सभी इस्राएली परिवार समूहों के नेताओं से बातें कीं। मूसा ने यहोवा के इन आदेशों के बारे में उनसे कहाः {30:2} “यदि कोई व्यक्ति परमेश्वर को विशेष वचन देता है या यदि वह व्यक्ति यहोवा को कुछ विशेष अर्पित करने का वचन देता है तो उसे वैसा ही करने दो। किन्तु उस व्यक्ति को ठीक वैसा ही करना चाहिए जैसा उसने वचन दिया है। {30:3} “सम्भव है कि कोई युवती अपने पिता के घर पर ही रहती हो और वह युवती यहोवा को कुछ चढ़ाने का विशेष वचन देती है {30:4} और उसका पिता इस वचन के विषय में सुनता है और उसे स्वीकार करत लेता है तो उस युवती को उस वचन को अवश्य ही पूरा कर देना चाहिए जिसे करने का उसने वचन दिया है। {30:5} किन्तु यदि उसका पिता उसके दिये गये वचन के बारे में सुन कर उसे स्वीकार नहीं करता तो उस युवती को वह वचन पूरा नहीं करना है। उसके पिता ने उसे रोका अतः यहोवा उसे क्षमा करेगा। {30:6} “सम्भव है कोई स्त्री अपने विवाह से पहले यहोवा को कोई वचन देती है अथवा बात ही बात में बिना सोचे विचारे कोई वचन ले लेती है और बाद में उसका विवाह हो जाता है {30:7} और पति दिये गये वचन के बारे में सुनता है और उसे स्वीकार करता है तो उस स्त्री को अपने दिये गए वचन के अनुसार काम को पूरा करना चाहिए। {30:8} किन्तु यदि पति दिये गए वचन के बारे में सुनता है और उसे स्वीकार नहीं करता तो स्त्री को अपने दिये गए वचन को पूरा नहीं करना पड़ेगा। उसके पति ने उसका वचन तोड़ दिया और उसने उसे उसकी कही बात को पूरा नहीं करने दिया, अतः यहोवा उसे क्षमा करेगा। {30:9} “कोई विधवा या तलाक दी गई स्त्री विशेष वचन दे सकती है। यदि वह ऐसा करती है तो उसे ठीक अपने वचन के अनुसार करना चाहिए। {30:10} “एक विवाहित स्त्री यहोवा को कुछ चढ़ाने का वचन दे सकती है। {30:11} यदि उसका पति दिये गए वचन के बारे में सुनता है और उसे अपने वचन को पूरा करने देता है, तो उसे ठीक अपने दिए गए वचनों के अनुसार ही वह कार्य करना चाहिए। {30:12} किन्तु यदि उसका पति उसके दिये गए वचन को सुनता है और उसे वचन पूरा करने से इन्कार करता है, तो उसे अपने दिये वचन के अनुसार वह कार्य पूरा नहीं करना पड़ेगा। इसका कोई महत्व नहीं होगा कि उसने क्या वचन दिया था, उसका पति उस वचन को भंग कर सकता है। यदि उसका पति वचन को भंग करता है, तो यहोवा उसे क्षमा करेगा। {30:13} एक विवाहित स्त्री यहोवा को कुछ चढ़ाने का वचन दे सकती है या स्वयं को किसी चीज़ से वंचित रखने का वचन दे सकती है या वह परमेश्वर को कोई विशेष वचन दे सकती है। उसका पति उन वचनों में से किसी को रोक सकता है या पति उन वचनों में से किसी को पूरा करने दे सकता है। {30:14} पति अपना पत्नी को कैसे अपने वचन पूरा करने देगा यदि वह दिये वचन के बारे में सुनता है और उन्हें रोकता नहीं है तो स्त्री को अपने दिए वचन के अनुसार कार्य को पूरा करना चाहिए। {30:15} किन्तु यदि पति दिये गए वचन के बारे में सुनता है और उन्हें रोकता है तो उसके वचन तोड़ने का उत्तरदायित्व पति पर होगा।” {30:16} ये आदेश है जिन्हें यहोवा ने मूसा को दिया। ये आदेश एक व्यक्ति और उसकी पत्नी के बारे में है तथा पिता और उसकी उस पुत्री के बारे में है जो युवती हो और अपने पिता के घर में रह रही हो। {i31:1} इस्राएल ने मिद्यानियों के विरुद्ध प्रत्याक्रमण किया {31:1} यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {31:2} “मैं इस्राएल के लोगों के साथ मिद्यानियों ने जो किया है उसके लिए उन्हें दण्ड दूँगा। उसके बाद, मूसा, तू मर जाएगा।” {31:3} इसलिए मूसा ने लोगों से बात की। उसने कहा, “अपने कुछ पुरुषों को युद्ध के लिए तैयार करो। यहोवा उन व्यक्तियों का उपयोग मिद्यानियों को दण्ड देने में करेगा। {31:4} ऐसे एक हजार पुरुषों को इस्राएल के हर एक कबीले से चुनो। {31:5} इस्राएल के सभी परिवार समूहों से बारह हजार सैनिक होंगे।” {31:6} मूसा ने उन बारह हजार पुरुषों को युद्ध के लिए भेजा। उसने याजक एलीआज़ार को उनके साथ भेजा। एलीआज़ार ने अपने साथ पवित्र वस्तुएं, सींग और बिगुल ले लिए। {31:7} इस्राएली लोगों के साथ वैसे ही लड़े जैसा यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। उन्होंने सभी मिद्यानीं पुरुषों को मार डाला। {31:8} जिन लोगों को उन्होंने मार डाला उनमें एवी, रेकेम, सूर, हूर, और रेबा ये पाँच मिद्यानी राजा थे। उन्होंने बोर के पुत्र बिलाम को भी तलवार से मार डाला। {31:9} इस्राएल के लोगों ने मिद्यानी स्त्रियों और बच्चों को बन्दी बनाया। उन्होंने उनकी सारी रेवड़ों, मवेशियों के झुण्डों और अन्य चीज़ों को ले लिया। {31:10} तब उन्होंने उनके उन सारे खेमों और नगरों में आग लगा दी जहाँ वे रहते थे। {31:11} उन्होंने सभी लोगों और जानवरों को ले लिया, {31:12} और उन्हें मूसा, याजक एलीआज़ार और इस्राएल के सभी लोगों के पास लाए। वे उन सभी चीज़ों को इस्राएल के डेरे में लाए जिन्हें उन्होंने वहाँ प्राप्त किया। इस्राएल के लोग मोआब में स्थित यरदन घाटी में डेरा डाले थे। यह यरीहो के समीप यरदन नदी के पूर्व की ओर था। {31:13} तब मूसा, याजक एलीआज़ार और लोगों के नेता सैनिकों से मिलने के लिए डेरों से बाहर गए। {31:14} मूसा सेनापतियों पर बहुत क्रोधित था। वह उन एक हजार की सेना के संचालकों और सौ की सेना के संचालकों पर क्रोधित था जो युद्ध से लौट कर आए थे। {31:15} मूसा ने उनसे कहा, “तुम लोगों ने स्त्रियों को क्यों जीवित रहने दिया {31:16} देखो यह स्त्री ही थी जिसके कारण बिलाम की घटना में इस्रालियों के लिए समस्याएं पैदा हुईं और पोर में वे यहोवा के विरुद्ध हो गये जिससे इस्राएल के लोगों को महामारी झेलनी पड़ी। {31:17} अब सभी मिद्यानी लड़कों को मार डालो और उन सभी मिद्यानी स्त्रियों को मार डालो जो किसी व्यक्ति के साथ रही हैं। उन सभी स्त्रियों को मार डालो जिनका किसी पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध था। {31:18} तुम केवल उन सभी लड़कियों को जीवित रहने दे सकते हो जिनका किसी पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध नहीं हुआ है। {31:19} तब अन्य व्यक्तियों को मारने वाले तुम लोगों को सात दिन तक डेरे के बाहर रहना पड़ेगा। तुम्हें डेरे से बाहर रहना होगा यदि तुमने किसी शव को छूआ हो। तीसरे दिन तुम्हें और तुम्हारे बन्दियों को अपने आप को शुद्ध करना होगा। तुम्हें वही कार्य सातवें दिन फिर करना होगा। {31:20} तुम्हें अपने सभी कपड़े धोने चाहिए। तुम्हें चमड़े की बनी हर वस्तु ऊनी और लकड़ी की बनी वस्तुओं को भी धोना चाहिए। तुम्हें शुद्ध हो जाना चाहिए।” {31:21} तब याजक एलीआज़ार ने सैनिकों से बात की। उसने कहा, “ये नियम वे ही हैं जिन्हें यहोवा ने मूसा को दिए थे। वे नियम युद्ध से लौटने वाले सैनिकों के लिए हैं। {31:22} किन्तु जो चीज़ें आग में डाली जा सकती हैं उनके बारे में अलग — अलग नियम हैं। तुम्हें सोना, चाँदी, काँसा, लोहा, टिन या सीसे को आग {31:23} में डालना चाहिए और जब उन्हें पानी से धोओ वे शुद्ध हो जाएंगी। यदि चीज़ें आग में न डाली जा सकें तो तुम्हें उन्हें पानी से धोना चाहिए। {31:24} सातवें दिन तुम्हें अपने सारे वस्त्र धोने चाहिए। जब तुम शुद्ध हो जाओगे।” {31:25} उसके बाद तुम डेरे में आ सकते हो। तब यहोवा ने मूसा से कहा, {31:26} “मूसा तुम्हें याजक एलीआज़ार और सभी नेताओं को चाहिए कि तुम उन बन्दियों, जानवरों और सभी चीज़ों को गिनो जिन्हें सैनिक युद्ध से लाऐ हों। {31:27} तब उन चीज़ों को युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों और शेष इस्राएल के लोगों में बाँट देना चाहिए। {31:28} जो सैनिक युद्ध में भाग लेने गये थे उनसे उन चीज़ों का आधा लो। वह हिस्सा यहोवा का होगा। हर एक पाँच सौ चीजों में से एक यहोवा का हिस्सा होगा। इसमें व्यक्ति मवेशी, गधे और भेड़ें सम्मिलित हैं। {31:29} सैनिकों ने युद्ध में जो चीज़ें प्राप्त कीं उनका आधा हर एक से लो। तब उन चीज़ों को (प्रत्येक पाँच सौ में से एक) याजक एलीआज़ार को दो। वह भाग यहोवा का होगा {31:30} और तब बाकी के लोगों के आधे में से हर एक पचास चीज़ों में से एक चीज़ लो। इसमें व्यक्ति, मवेशी, गधा, भेड़ या कोई अन्य जानवर शामिल हैं। यह हिस्सा लेविवंशी को दो। क्यों क्योंकि लेवीवंशी यहोवा के पवित्र तम्बू की देखभाल करते हैं।” {31:31} इस प्रकार मूसा और याजक एलीआज़ार ने वही किया जो मूसा को यहोवा का आदेश था। {31:32} सैनिकों ने छः लाख पचहत्तर हजार भेड़ें, {31:33} बहत्तर हजार मवेशी, {31:34} एकसठ हजार गधे, {31:35} बत्तीस हजार स्त्रियाँ लूटी थीं। (ये ऐसी स्त्रियाँ थीं जिनका किसी पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध नहीं हुआ था।) {31:36} जो सैनिक युद्ध में गए थे उन्होंने अपने हिस्से की तीन लाख सैंतीस हजार पाँच सौ भेड़ें प्राप्त कीं। {31:37} उन्होंने छः सौ पचहत्तर भेड़ें यहोवा को दीं। {31:38} सैनिकों को छत्तीस हजार मवेशी मिले। उन्होंने बहत्तर यहोवा को दिए। {31:39} सैनिकों ने साढ़े तीस हजार गधे प्राप्त किये। उन्होंने यहोवा को एकसठ गधे दिये। {31:40} सैनिकों को सोलह हजार स्त्रियाँ मिलीं। उन्होंने बत्तीस स्त्रियाँ यहोवा को दीं। {31:41} यहोवा के आदेश के अनुसार मूसा ने यहोवा के लिए दी गई उन सारी भेटों को याजक एलीआज़ार को दे दिया। {31:42} तब मूसा ने लोगों को प्राप्त आधे हिस्से को गिना। यह वह हिस्सा था जिसे मूसा ने युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों से लिया था। {31:43} लोगों ने तीन लाख सैंतीस हजार पाँच सौ भेड़ें, {31:44} छत्तीस हजार मवेशी, {31:45} तीस हजार पाँच सौ गधे {31:46} और सोलह हजार स्त्रियाँ प्राप्त कीं। {31:47} मूसा ने हर एक पचास चीज़ों पर एक चीज़ यहोवा के लिए ली। इसमें जानवर और व्यक्ति दोनों शामिल थे। तब उन चीज़ों को उसने लेवीवंशी को दे दिया। क्यों क्योंकि वे यहोवा के पवित्र तम्बू की देखभाल करते थे। मूसा ने यह यहोवा के आदेश के अनुसार किया। {31:48} तब सेना के संचालक (एक हजार सैनिकों के सेनापति तथा एक सौ सैनिकों के सेनापति) मूसा के पास गए। {31:49} उन्होंने मूसा से कहा, “तेरे सेवक हम लोगों ने अपने सभी सैनिकों को गिना है। हम लोगों में से कोई भी कम नहीं है। {31:50} इसलिए हम लोग हर एक सैनिक से यहोवा की भेंट ला रहे हैं। हम लोग सोने की चीज़ें बाजूबन्द, शुजबन्द, अंगूठी, कान की बालियाँ और हार ला रहे हैं। यहोवा को ये भेंटें हमारे पापों के भुगतान के लिए हैं।” {31:51} इसलिए मूसा ने वे सभी सोने की चीज़ें लीं और याजक एलीआज़ार को उन्हें दिया। {31:52} एक हजार सैनिकों और सौ सैनिकों के सेनापतियों ने जो सोना एकत्र किया और यहोवा को दिया उसका वजन लगभग चार सौ बीस पौंड था। {31:53} प्रत्येक सैनिक ने युद्ध में प्राप्त चीज़ों का अपना हिस्सा अपने पास रख लिया। {31:54} मूसा और एलीआज़ार ने एक हजार सैनिकों और एक सौ सैनिकों के सेनापतियों से सोना लिया। तब उन्होंने सोने को मिलापवाले तम्बू में रखा। यह भेंट एक यादगार के रूप में इस्राएल के लोगों के लिए यहोवा के सामने थी। {i32:1} यरदन नदी के पूर्व के परिवार समूह {32:1} रूबेन और गाद के परिवार समूहों के पास भारी संख्या में मवेशी थे। उन लोगों ने याजेर और गिलाद के समीप की भूमि को देखा। उन्होंने सोचा कि वह भूमि उनके मवेशियों के लिए ठीक है। {32:2} इसलिए रूबेन और गाद परिवारसमूह के लोग मूसा के पास आए। उन्होंने मूसा, याजक एलीआज़ार तथा लोगों के नेताओं से बात की। {32:3} उन्होंने कहा, “तेरे सेवक, हम लोगों के पास भारी संख्या में मवेशी हैं और वह भूमि जिसे यहोवा ने इस्राएल के लोगों को {32:4} युद्ध में दिया है, मवेशियों के लिए ठीक है। इस प्रदेश में अतारोत, दीबोन याजेर, निम्रा, हेशबोन, एलाले, सबाम नबो और बोन शामिल हैं। {32:5} यदि तेरी स्वीकृति हो तो हम लोग चाहेंगे कि यह प्रदेश हम लोगों को दिया जाए। हम लोगों को यरदन नदी की दूसरी ओर न ले जाए।” {32:6} मूसा ने रूबेन और गाद के परिवार समूह से पूछा, “क्या तुम लोग यहाँ बसोगे और अपने भाईयों को यहाँ से जाने और युद्ध करने दोगे? तुम लोग इस्राएल के लोगों को निरूत्साहित क्यों करना चाहते हो? {32:7} तुम लोग उन्हें नदी पार करने की सोचने नहीं दोगे और जो प्रदेश यहोवा ने उन्हें दिया है उसे नहीं लेने दोगे। {32:8} तुम्हारे पिताओं ने मेरे साथ ऐसा ही किया। कादेशबर्ने से मैंने जासूसों को प्रदेश की छान — बीन करने के लिए भेजा। {32:9} वे लोग एश्कोल घाटी तक गए। उन्होंने प्रदेश को देखा और उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को उस धरती पर जाने को निरूत्साहित किया। उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को उस प्रदेश में जाने की इच्छा नहीं करने दी जिसे यहोवा ने उनको दे दिया था। {32:10} यहोवा लोगों पर बहुत क्रोधित हुआ। यहोवा ने यह निर्णय सुनायाः {32:11} ‘मिस्र से आने वाले लोगों और बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति इस प्रदेश को नहीं देख पाएगा। मैंने इब्राहीम, इसहाक और याकूब को यह वचन दिया था। मैंने यह प्रदेश इन व्यक्तियों को देने का वचन दिया था। किन्तु इन्होंने मेरा अनुसरण पूरी तरह नहीं किया। इसलिए वे इस प्रदेश को नहीं पाएंगे। {32:12} केवल कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब और नून के पुत्र यहोशू ने यहोवा का पूरी तरह अनुसरण किया।’ {32:13} “यहोवा इस्राएल के लोगों के विरुद्ध बहुत क्रोधित था। इसलिए यहोवा ने लोगों को चालीस वर्ष तक मरुभूमि में रोके रखा। यहोवा ने उनको तब तक वहाँ रोके रखा जब तक वे लोग, जिन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किए थे, मर न गए {32:14} और अब तुम लोग वही कर रहे हो जो तुम्हारे पूर्वजों ने किया। अरे पापियो! क्या तुम चाहते हो कि यहोवा इस्राएल के लोगों के विरुद्ध और अधिक क्रोधित हो {32:15} यदि तुम लोग यहोवा का अनुसरण करना छोड़ोगे तो यहोवा इस्राएल को और अधिक समय तक मरुभूमि में ठहरा देगा। तब तुम इन सभी लोगों को नष्ट कर दोगे!” {32:16} किन्तु रूबेन और गाद परिवार समूहों के लोग मूसा के पास गए। उन्होंने कहा, “यहाँ हम लोग अपने बच्चों के लिए नगर और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाएंगे। {32:17} तब हमारे बच्चे उन अन्य लोगों से सुरक्षित रहेंगे जो इस प्रदेश में रहते हैं। किन्तु हम लोग प्रसन्नता से आगे बढ़कर इस्राएल के लोगों की सहायता करेंगे। हम लोग उन्हें उनके प्रदेश में ले जाएंगे। {32:18} हम लोग तब तक घर नहीं लौटेंगे जब तक हर एक व्यक्ति इस्राएल में अपनी भूमि का हिस्सा नहीं पा लेता। {32:19} हम लोग यरदन नदी के पश्चिम में कोई भूमि नहीं लेंगे। नहीं। हम लोगों की भूमि का भाग यरदन नदी के पूर्व ही है।” {32:20} मूसा ने उनसे कहा, “यदि तुम लोग यह सब करोगे तो यह भूमि तुम लोगों की होगी। किन्तु तुम्हारे सैनिक यहोवा के सामने युद्ध में जाने चाहिए। {32:21} तुम्हारे सैनिकों को यरदन नदी पार करनी चाहिए और शत्रु को उस देश को छोड़ने के लिए विवश करना चाहिए। {32:22} जब हम सभी को भूमि प्राप्त कराने में यहोवा सहायता कर चुके तब तुम घर वापस जा सकते हो। तब यहोवा और इस्राएल तुमको अपराधी नहीं मानेंगे। तब यहोवा तुमको यह प्रदेश लेने देगा। {32:23} किन्तु यदि तुम ये बातें पूरी नहीं करते हो, तो तुम लोग यहोवा के विरुद्ध पाप करोगे और यह गाँठ बांधो कि तुम अपने पाप के लिए दण्ड पाओगे। {32:24} अपने बच्चों के लिए नगर और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाओ। किन्तु उसके बाद उसे पूरा करो जिसे करने का तुमने वचन दिया है।” {32:25} तब गाद और रूबेन परिवार समूह के लोगों ने मूसा से कहा, “हम तेरे सेवक हैं। तू हमारा स्वामी है। इसलिए हम लोग वही करेंगे जो तू कहता है। {32:26} हमारी पत्नियाँ, बच्चे और हमारे जानवर गिलाद नगर में रहेंगे। {32:27} किन्तु तेरे सेवक, हम यरदन नदी को पार करेंगे। किन्तु हम लोग यहोवा के सामने अपने स्वामी के कथनानुसार युद्ध में कूद पड़ेंगे।” {32:28} मूसा ने याजक एलीआज़ार, नून के पुत्र यहोशू और इस्राएल के परिवार समूह के सभी नेताओं को उनके बारे में आज्ञा दी। {32:29} मूसा ने उनसे कहा, “गाद और रूबेन के पुरुष यरदन नदी को पार करेंगे। वे यहोवा के आगे युद्ध में धावा बोलेंगे। वे देश जीतने में तुम्हारी सहायता करेंगे और तुम लोग गिलाद का प्रदेश उनके हिस्से के रूप में उन्हें दोगे। {32:30} वे वचन देते हैं कि वे कनान देश को जीतने में तुम्हारी सहायता करेंगे।” {32:31} गाद और रूबेन के लोगों ने उत्तर दिया, “हम लोग वही करने का वचन देते हैं जो यहोवा का आदेश है। {32:32} हम लोग यरदन नदी पार करेंगे और कनान देश पर यहोवा के सामने धावा बोलेंगे और हमारे देश का भाग यरदन नदी के पूर्व की भूमि होगी।” {32:33} इस प्रकार मूसा ने उस प्रदेश को गाद, रूबेन और मनश्शे परिवार समूह के आधे लोगों को दिया। (मनश्शे यूसुफ का पुत्र था।) उस प्रदेश में एमोरियों के राजा सीहोन का राज्य और बाशान के राजा ओग का राज्य शामिल थे। उस प्रदेश में उस क्षेत्र के चारों ओर के नगर भी शामिल थे। {32:34} गाद के लोगों ने दीबोन, अतारोत, अरोएर, {32:35} अत्रौत, शोपान, याजेर, योगबहा, {32:36} बेतनिम्रा और बेथारान नगरों को बनाया। उन्होंने मजबूत चाहारदीवारों के साथ नगरों को बनाया और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाए। {32:37} रूबेन के लोगों ने हेसबोन, एलाले, किर्यातैम, {32:38} नबो, बालमोन, मूसा — बॉथ और तित्पा नगर बनाए। उन्होंने जिन नये नगरों को फिर से बनाया उनके पुराने नामों का ही उपयोग किया गया किन्तु नबो और बालमोन को नये नाम दिये गए। {32:39} मनश्शे परिवार समूह की सन्तान माकीर से उत्पन्न लोग गिलाद को गए। उन्होंने नगर को हराया। उन्होंने उन एमोरी को हराया जो वहाँ रहते थे। {32:40} इसलिए मनश्शे के परिवार समूह के माकीर को मूसा ने गिलाद दिया। इसलिए उसका परिवार वहाँ बस गया। {32:41} मनश्शे की सन्तान याईर ने वहाँ के छोटे नगरों को हराया। तब उसने उन्हें याईर के नगर नाम दिया। {32:42} नोबह ने कनात और उसके पास के छोटे नगरों को हराया। तब उसने उस स्थान का नाम अपने नाम पर नोबह रखा। {i33:1} मिस्र से इस्राएलियों की यात्रा {33:1} मूसा और हारून ने इस्राएल के लोगों को मिस्र से समूहों में निकाला ये वे स्थान हैं जिनकी उन्होंने यात्रा की। {33:2} मूसा ने उन यात्राओं के बारे में लिखा। मूसा ने वे बातें लिखीं जिन्हें यहोवा चाहता था। वे यात्रायें यहाँ हैं। {33:3} प्रथम महीने के पन्द्रहवें दिन उन्होंने रामसेस छोड़ा। फसह पर्व के बाद सवेरे, इस्राएल के लोगों ने विजय के साथ अपने अस्त्र — शस्त्रों को उठाए हुए मिस्र से बाहर प्रस्थान किया। मिस्र के सभी लोगों ने उन्हें देखा। {33:4} मिस्री उन लोगों को जला रहे थे जिन्हें यहोवा ने मार डाला था। वे अपने सभी पहलौठे पुत्रों को जला रहे थे। यहोवा ने मिस्र के देवताओं के विरुद्ध अपना निर्णय दिखाया था। {33:5} इस्राएल के लोगों ने रामसेस को छोड़ा और सुक्कोत की यात्रा की। {33:6} सुक्कोत से उन्होंने एताम की यात्रा की। वहाँ पर लोगों ने मरुभूमि के छोर पर डेरे डाले। {33:7} उन्होंने एताम को छोड़ा और पीहहीरोत को गए। यह बालसपोन के पास था। लोगों ने मिगदोल के पास डेरे डाले। {33:8} लोगों ने पीहहीरोत छोड़ा और समुद्र के बीच से चले। वे मरुभूमि की ओर चले। तब वे तीन दिन तक एताम मरुभूमि से होकर चले। लोगों ने मारा में डेरे डाले। {33:9} लोगों ने मारा को छोड़ा और एलीम गए तथा वहाँ डेरे डाले। वहाँ पर बारह पानी के सोते थे और सत्तर खजूर के पेड़ थे। {33:10} लोगों ने एलीम छोड़ा और लाल सागर के पास डेरे डाले। {33:11} लोगों ने लालसागर को छोड़ा और सीन मरुभूमि में डेरे डाले। {33:12} लोगों मे सीन मरुभूमि को छोड़ा और दोपका में डेरे डाले। {33:13} लोगों ने दोपका छोड़ा और आलूश में डेरे डाले। {33:14} लोगों ने आलूश छोड़ा और रपीदीम में डेरे डाले। वहाँ लोगों को पीने के लिए पानी नहीं था। {33:15} लोगों ने रपीदीम छोड़ा और सीनै मरुभूमि में डेरे डाले। {33:16} लोगों ने सीनै मरुभूमि को छोड़ा और किब्रोथत्तावा में डेरे डाले। {33:17} लोगों ने किब्रोथत्तावा छोड़ा और हसेरोत में डेरे डाले। {33:18} लोगों ने हसेरोत को छोड़ा और रित्मा में डेरे डाले। {33:19} लोगों ने रित्मा को छोड़ा और रिम्मोनपेरेस में डेरे डाले। {33:20} लोगों ने रिम्मोनपेरेस को छोड़ा और लिब्ना में डेरे डाले। {33:21} लोगों ने लिब्ना छोड़ा और रिस्सा में डेरे डाले। {33:22} लोगों ने रिस्सा छोड़ा और कहेलाता में डेरे डाले। {33:23} लोगों ने कहेलाता छोड़ा और शेपेर पर्वत पर डेरे डाले। {33:24} लोगों ने शेपेर पर्वत छोड़ा और हरादा में डेरे डाले। {33:25} लोगों ने हरादा छोड़ा और मखेलोत में डेरे डाले। {33:26} लोगों ने मखेलोत छोड़ा और तहत में डेरे डाले। {33:27} लोगों ने तहत छोड़ा और तेरह में डेरे डाले। {33:28} लोगों ने तेरह को छोड़ा और मित्का में डेरे डाले। {33:29} लोगों ने मित्का छोड़ा और हशमोना में डेरे डाले। {33:30} लोगों ने हशमोना को छोड़ा और मोसेरोत में डेरे डाले। {33:31} लोगों ने मोसेरोत छोड़ा और बने — याकान में डेरे डाले। {33:32} लोगों ने बने — याकान छोड़ा और होर्हग्गिदगाद में डेरे डाले। {33:33} लोगों ने होर्हग्गिदगाद छोड़ा और योतबाता में डेरे डाले। {33:34} लोगों ने योतबाता छोड़ा और अब्रोना में डेरे डाले। {33:35} लोगों ने अब्रोना छोड़ा और एस्योनगेबेर में डेरे डाले। {33:36} लोगों ने एस्योनगेबेर छोड़ा और सीन मरुभमूमि में कादेश में डेरे डाले। {33:37} लोगों ने कादेश छोड़ा और होर में डेरे डाले। यह एदोम देश की सीमा पर एक पर्वत था। {33:38} याजक हारून ने यहोवा की आज्ञा मानी और वह होर पर्वत पर चढ़ा। हारून पाँचवें महीने के प्रथम दिन मरा। वह मिस्र को इस्राएल के लोगों द्वारा छोड़ने का चालीसवाँ वर्ष था। {33:39} हारून जब होर पर्वत पर मरा तब वह एक सौ तेईस वर्ष का था। {33:40} अरात कनान के नेगेव प्रदेश में था। कनानी राजा ने वहाँ सुना कि इस्राएल के लोग आ रहे हैं। {33:41} लोगों ने होर पर्वत को छोड़ा और सलमोना में डेरे डाले। {33:42} लोगों ने सलमोना को छोड़ा और पूनोन में डेरे डाले। {33:43} लोगों ने पूनोन छोड़ा और ओबोस में डेरे डाले। {33:44} लोगों ने ओबोस छोड़ा और अबारीम में डेरे डाले। यह मोआब देश की सीमा पर था। {33:45} लोगों ने इयीम (इयीम अबारीम) को छोड़ा और दीबोन — गाद में डेरे डाले। {33:46} लोगों ने दीबोन — गाद छोड़ा और अल्मोनदिबलातैम में डेरे डाले। {33:47} लोगों ने अल्मोनदिबलातैम छोड़ा और नबो के पास अबारीम पर्वतों पर डेरे डाले। {33:48} लोगों ने अबारीम पर्वतों को छोड़ा और यरदन नदी के पास मोआब के प्रदेश में डेरे डाले। यह यरीहो के पास था। {33:49} उन्होंने यरदन के पास डेरे डाले। उनके डेरे वेत्यशीमोत से अबेलशित्तीम चरागाह तक फैले थे। यह अबारीम मोआब के मैदानों में था। {33:50} यरीहो के पार यरदन घाटी के मोआब के मैदानों में, यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {33:51} “इस्राएल के लोगों से बात करो। उनसे यह कहोः तुम लोग यरदन नदी को पार करोगे। तुम लोग कनान देश में जाओगे। {33:52} तुम लोग उन लोगों से भूमि ले लोगे जिन्हें तुम वहाँ पाओगे। तुम लोगों को उनकी उत्कीर्ण मूर्तियों और प्रतीकों को नष्ट कर देना चाहिए। तुम्हें उनके सभी उच्च स्थानों को नष्ट कर देना चाहिए। {33:53} तुम वह देश लोगे और वहाँ बसोगे। क्यों? क्योंकि यह देश मैं तुमको दे रहा हूँ। यह तुम्हारे परिवारों का होगा। {33:54} तुम्हारा हर एक परिवार भूमि का हिस्सा पाएगा। तुम इस बात के लिए गोट डालोगे कि देश का कौन सा हिस्सा किस परिवार को मिलता है। बड़े परिवार भूमि का बड़ा हिस्सा पाएंगे। छोटे परिवार देश का छोटा भाग पाएंगे। भूमि उन लोगों को दी जाएगी जिनके नाम गोट निश्चित करेगी। हर एक परिवार समूह अपनी भूमि पाएगा। {33:55} “तुम लोगों को उन अन्य लोगों से देश खाली करा लेना चाहिए। यदि तुम उन लोगों को अपने देश में ठहरने दोगे तो वे तुम्हारे लिए बहुत परेशानियाँ उत्पन्न करेंगे। वे तुम्हारी आँखों में काँटे या तुम्हारी बगल के कीलax की तरह होंगे। वे उस देश पर बहुत विपत्तियाँ लाएंगे जहाँ तुम रहोगे। {33:56} मैंने तुम लोगों को समझा दिया जो मुझे उनके साथ करना है और मैं तुम्हारे साथ वही करूँगा यदि तुम लोग उन लोगों को अपने देश में रहने दोगे।” {i34:1} कनान की सीमाएँ {34:1} यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {34:2} “इस्राएल के लोगों को यह आदेश दोः तुम लोग कनान देश में आ रहे हो। तुम लोग इस देश को हराओगे। तुम लोग पूरा कनान देश ले लोगे। {34:3} दक्षिणी ओर तुम लोग एदोम के निकट सीन मरुभूमि का भाग प्राप्त करोगे। तुम्हारी दक्षिणी सीमा मृत सागर की दक्षिणी छोर से आरम्भ होगी। {34:4} यह बिच्छूदर्रे (स्कार्पियन पास) के दक्षिण से गुजरेगी। यह सीन मरुभूमि से होकर कादेशबर्ने तक जाएगी, और तब हसरद्दार तथा तब यह अस्मोन से होकर जाएगी। {34:5} अस्मोन से सीमा मिस्र की नदी तक जाएगी और इसका अन्त भूमध्य सागर पर होगा। {34:6} तुम्हारी पश्चिमी सीमा भूमध्य सागर होगी। {34:7} तुम्हारी उत्तरी सीमा भूमध्य सागर पर आरम्भ होगी और होर पर्वत तक जाएगी। लबानोन में {34:8} होर पर्वत से यह लेबोहामात को जाएगी और तब सदाद कहो। {34:9} तब यह सीमा जिप्रोन को जाएगी और तथा यह हसेरनान पर समाप्त होगी। इस प्रकार यह तुम्हारी उत्तरी सीमा होगी। {34:10} तुम्हारी पूर्वी सीमा एनान पर आरम्भ होगी और यह शापान तक जाएगी। {34:11} शापान से सीमा ऐन के पूर्व रिबला तक जाएगी। किन्नरेत सागर गलील के सागर के साथ की पहाड़ियों के साथ सीमा चलती रहेगी। {34:12} तब सीमा यरदन नदी के साथ — साथ चलेगी। इसका अन्त मृत सागर पर होगा। तुम्हारे देश के चारों ओर की सीमा यही है।” {34:13} मूसा ने इस्राएल के लोगों को आदेश दियाः “यही वह देश है जिसे तुम प्राप्त करोगे। तुम लोग नौ परिवार समूहों और मनश्शे परिवार समूह के आधे लोगों के लिए भूमि बाँटने के लिए उनके नाम गोटें डालोगे। {34:14} रूबेन, गाद और मनश्शे के आधे परिवार के लोगों के परिवार समूहों ने पहले ही अपना प्रदेश ले लिया है। {34:15} उस ढाई परिवार समूह ने यरीहो के निकट यरदन नदी के पूर्व अपना प्रदेश ले लिया है।” {34:16} तब यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {34:17} “ये लोग हैं जो भूमि बाँटने में तुम्हारी सहायता करेंगेः याजक एलीआज़ार, नून का पुत्र यहोशू {34:18} और हर एक परिवार समूह से तुम एक नेता चुनोगे। ये लोग भूमि का बँटवारा करेंगे। {34:19} नेताओं के नाम ये हैं: यहूदा के परिवार समूह से, यपुन्ने का पुत्र कालेब; {34:20} शिमोन के परिवार समूह से, अम्मीहूद का पुत्र शमूएल। {34:21} बिन्यामीन के परिवार समूह से, किसलोन का पुत्र एलीदाद। {34:22} दान के परिवार समूह से, योग्ली का पुत्र बुक्की। {34:23} मनश्शे (यूसुफ का पुत्र) के परिवार समूह से, एपोद का पुत्र हन्नीएल। {34:24} एप्रैम (यूसुफ का पुत्र) के परिवार समूह से, शिप्तान का पुत्र कमूएल। {34:25} जबूलून के परिवार समूह से, पर्नाक का पुत्र एलीसापान। {34:26} इस्साकार के परिवार समूह से, अज्जान का पुत्र पलतीएल। {34:27} आशेर के परिवार समूह से, शलोमी का पुत्र अहीदूद। {34:28} नप्ताली के परिवार समूह से, अम्मीहूद का पुत्र पदहेल।” {34:29} यहोवा ने इन पुरुषों को इस्राएल के लोगों में कनान की भूमि बाँटने के लिये चुना। {i35:1} लेवीवंश के नगर {35:1} यहोवा ने मूसा से बात की जो यरीहो के पार यरदन नदीं के किनारे मोआब की यरदन घाटी में हुई। यहोवा ने कहा, {35:2} “इस्राएल के लोगों से कहो कि उन्हें अपने हिस्से के देश में से कुछ नगर लेवीवंशियों को देना चाहिए। इस्राएल के लोगों को नगर और उसके चारों ओर की चरागाहें लेविवंशियों को देनी चाहिए। {35:3} लेवीवंशी उन नगरों में रह सकेंगे और सभी मवेशी तथा अन्य जानवर, जो लेवीवंशियों के होंगे, नगर के चारों ओर की चरागाहों में चर सकेंगे। {35:4} तुम लेवीवंशियों को अपने देश का कितना भाग दोगे? नगरों की दीवारों से डेढ़ हजार फीट बाहर तक नापते जाओ। वह सारी भूमि लेवीवंशियों की होगी। {35:5} सारी तीन हजार फीट भूमि नगर के पूर्व तीन हजार फीट नगर के दक्षिण, तीन हजार फीट नगर के पश्चिम तथा तीन हजार फीट नगर के उत्तर, भी लेवीवंशियों की होगी उस भूमि के मध्य में नगर होगा। {35:6} उन नगरों में से छः नगर सुरक्षा नगर होंगे। यदि कोई व्यक्ति किसी को संयोगवश मार डालता है तो वह सुरक्षा के लिए उन नगरों में भाग कर जा सकता है। उन छः नगरों के अतिरिक्त तुम लेवीवंशियों को बयालीस अन्य नगर दोगे। {35:7} इस प्रकार तुम लेवीवंशियों को कुल अड़तालीस नगर दोगे। तुम उन नगरों के चारों ओर की भूमि भी दोगे। {35:8} इस्राएल के बड़े परिवार भूमि के बड़े भाग देंगे। इस्राएल के छोटे परिवार भूमि के छोटे भाग देंगे। सभी परिवार समूह लेवीवंशियों को अपने हिस्से के प्रदेश में से कुछ भाग प्रदान करेंगे।” {35:9} तब यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, {35:10} “लोगों से यह कहोः तुम लोग यरदन नदी को पार करोगे और कनान देश में जाओगे। {35:11} तुम्हें सुरक्षा नगर बनाने के लिए नगरों को चुनना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति संयोगवश किसी को मार डालता है, तो यह सुरक्षा के लिए इन नगरों में से किसी में भागकर जा सकता है। {35:12} वह उस किसी भी व्यक्ति से सुरक्षित रहेगा जो मृतक व्यक्ति के परिवार का हो और उसे पकड़ना चाहता हो। वह तब तक सुरक्षित रहेगा जब तक न्यायालय में उनके बारे में निर्णय नहीं हो जाता। {35:13} सुरक्षा नगर छः होंगे। {35:14} उन नगरों में तीन नगर यरदन नदी के पूर्व होंगे और तीन अन्य नगर कनान प्रदेश में यरदन नदी के पश्चिम में होंगे। {35:15} वे नगर इस्राएल के नागरिकों, विदेशियों और यात्रियों के लिए सुरक्षा नगर होंगे। कोई भी व्यक्ति, जो संयोगवश किसी को मार डालता है, इन किसी एक नगर में भाग कर जा सकेगा। {35:16} “यदि कोई व्यक्ति किसी को मारने के लिए लोहे का हथियार उपयोग में लाता है, तो उस व्यक्ति को मरना चाहिए {35:17} और यदि कोई व्यक्ति एक पत्थर उठाता है और किसी को मार डालता है, तो उसे भी मरना चाहिए। पत्थर उस आकार का होना चाहिए जिसे व्यक्तियों को मारने के लिए प्रायः उपयोग में लाया जाता है। {35:18} यदि कोई व्यक्ति किसी लकड़ी का उपयोग करता है और किसी को मार डालता है, तो उसे मरना चाहिए। लकड़ी एक हथियार के रूप में होनी चाहिए जिसका उपयोग प्रायः लोग मनुष्यों को मारने के लिए करते हैं। {35:19} मृतक व्यक्ति के परिवार का सदस्य उस हत्यारे का पीछा कर सकता है और उसे मार सकता है। {35:20} “कोई व्यक्ति किसी पर हाथ से प्रहार कर सकता है और उसे मार सकता है या कोई व्यक्ति किसी को धक्का दे सकता है और उसे मार सकता है या कोई व्यक्ति पर कुछ फेंक सकता है और उसे मार {35:21} सकता है। यदि उस मारने वाले ने घृणा के कारण ऐसा किया तो वह हत्यारा है। उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए। मृतक के परिवार का कोई सदस्य उस हत्यारे का पीछा कर सकता है और उसे मार सकता है। {35:22} “किन्तु कोई व्यक्ति संयोगवश किसी को मार सकता है। वह व्यक्ति उस व्यक्ति से घृणा नहीं करता था, वह घटना संयोगवश हो गई या कोई व्यक्ति कुछ फेंक सकता है और संयोगवश किसी को मार सकता है, उसने मारने का इरादा नहीं किया था। {35:23} या कोई व्यक्ति कोई बड़ा पत्थर फेंक सकता है और वह पत्थर किसी ऐसे व्यक्ति पर गिर पड़े जो उसे न देख रहा हो और वह उसे मार डाले। उस व्यक्ति ने किसी को मार डालने का इरादा नहीं किया था। उसने मृतक व्यक्ति के प्रति घृणा नहीं रखी थी, यह केवल संयोगवश हुआ। {35:24} यदि ऐसा हो, तो जाति निर्णय करेगी कि क्या किया जाए। जाति का न्यायालय यह निर्णय देगा कि मृतक व्यक्ति के परिवार का सदस्य उसे मार सकता है। {35:25} यदि न्यायालय को यह निर्णय देना है कि वह जीवित रहे तो उसे अपने “सुरक्षा नगर” में जाना चाहिए। उसे वहाँ तब तक रहना चाहिए जब तक महायाजक न मरे, यह महायाजक वही होना चाहिए जिसका अभिषेक पवित्र तेल से हुआ हो। {35:26} “उस व्यक्ति को अपने सुरक्षा नगर की सीमाओं के कभी बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि वह सीमाओं के पार जाता है {35:27} और मृतक व्यक्ति परिवार का सदस्य उसे पकड़ता है और उसको मार डालता है तो वह सदस्य हत्या का अपराधी नहीं होता। {35:28} उस व्यक्ति को, जिसने संयोगवश किसी को मार डाला है सुरक्षा नगर में तब तक रहना पड़ेगा जब तक महायाजक मर नहीं जाता। महायाजक के मरने के बाद वह व्यक्ति अपने देश को लौट सकता है। {35:29} ये नियम तुम्हारे लोगों के नगरों के लिए सदा के लिए नियम होंगे। {35:30} “हत्यारे को तभी मृत्यु दण्ड दिया जा सकेगा। जब उसके विरोध में एक से अधिक गवाहियाँ होंगी। यदि एक ही गवाह होगा तो किसी व्यक्ति को प्राणदण्ड नहीं दिया जाएगा। {35:31} “यदि कोई व्यक्ति हत्यारा है, तो उसे मार डालना चाहिए। धन के बदले उसे छोड़ नहीं दिया जाना चाहिए। उस हत्यारे को मार दिया जाना चाहिए। {35:32} “यदि किसी व्यक्ति ने किसी को मारा और वह भाग कर किसी “सुरक्षा नगर” में गया, तो घर लौटने के लिये उससे धन न लो। उस व्यक्ति को उस नगर में तब तक रहना पड़ेगा जब तक याजक न मरे। {35:33} “अपने देश को निरपराधों के खून से भ्रष्ट मत होने दो। यदि कोई व्यक्ति किसी को मारता है, तो उस अपराध का बदला केवल यही है कि उस व्यक्ति को मार दिया जाए। अन्य कोई ऐसा भुगतान नहीं है जो उस अपराध से उस देश को मुक्त कर सके। {35:34} मैं यहोवा हूँ! मैं इस्राएल के लोगों के साथ तुम्हारे देश में सदा रहता रहूँगा। मैं उस देश में रहता रहूँगा अतः निरपराध लोगों के खून से उस देश को अपवित्र न करो।” {i36:1} सलोफाद की पुत्रियों का देश {36:1} मनश्शे यूसुफ का पुत्र था। माकीर मनश्शे का पुत्र था। गिलाद माकीर का पुत्र था। गिलाद परिवार के नेता मूसा और इस्राएल के परिवार समूह के नेताओं से बात करने गए। {36:2} उन्होंने कहा, “महोदय, यहोवा ने आदेश दिया कि हम लोग अपनी भूमि गोट डालकर प्राप्त करें और महोदय, यहोवा ने आदेश दिया कि सलोफाद की भूमि उसकी पुत्रियों को मिले। सलोफाद हमारा भाई था। {36:3} यह हो सकता है कि किसी दूसरे परिवार समूह का व्यक्ति सलोफाद की किसी पुत्री से विवाह करे। क्या वह भूमि हमारे परिवार से निकल जाएगी क्या उस दूसरे परिवार समूह के व्यक्ति उस भूमि को प्राप्त करेंगे क्या हम लोग वह भूमि खो देंगे जिसे हम लोगों ने गोट डालकर प्राप्त किया था {36:4} लोग अपनी भूमि बेच सकते हैं। किन्तु जुबली के वर्ष में सारी भूमि उस परिवार समूह को लौट जाती है जो इसका असली मालिक होता है। उस समय सलोफाद की पुत्रियों की भूमि कौन पाएगा यदि वैसा होता है तो हमारा परिवार उस भूमि से सदा के लिए वंचित हो जाएगा।” {36:5} मूसा ने इस्राएल के लोगों को यह आदेश दिया। यह आदेश यहोवा का था, “यूसुफ के परिवार समूह के ये व्यक्ति ठीक कहते हैं! {36:6} सलोफाद की पुत्रियों के लिए यहोवा का यह आदेश हैः यदि तुम किसी से विवाह करना चाहती हो तो तुम्हें अपने परिवार समूह के किसी पुरुष के साथ ही विवाह करना चाहिए। {36:7} इस प्रकार, इस्राएल के लोगों में भूमि एक परिवार समूह से दूसरे परिवार समूह में नहीं जाएगी। हर एक इस्राएली अपने पूर्वजों की भूमि को ही अपने पास रखेगा। {36:8} और यदि कोई पुत्री पिता की भूमि प्राप्त करती है, तो उसे अपने परिवार समूह में से ही किसी के साथ विवाह करना चाहिए। इस प्रकार, हर एक व्यक्ति वही भूमि अपने पास रखेगा जो उसके पूर्वजों की थी। {36:9} इस प्रकार, इस्राएल के लोगों में एक परिवार समूह से दूसरे परिवार समूह में नहीं जाएगी। हर एक इस्राएली वह भूमि रखेगा जो उसके अपने पूर्वजों की थी।” {36:10} सलोफाद की पुत्रियों ने, मूसा को दिये गए यहोवा के आदेश को स्वीकार किया। {36:11} इसलिए सलोफाद की पुत्रियाँ महला, तिर्सा, होग्ला, मिल्का और नोआ ने अपने चचेरे भाइयों के साथ विवाह किया। {36:12} उनके पति यूसुफ के पुत्र मनश्शे के परिवार समूह के थे, इसलिए उनकी भूमि उनके पिता के परिवार और परिवार समूह की बनी रही। {36:13} इस प्रकार ये नियम और आदेश यरीहो के पार यरदन नदी के किनारे मोआब क्षेत्र में मूसा को दिये गए यहोवा के आदेश थे और मूसा ने उन नियमों और आदेशों को इस्राएल के लोगों को दिया।