{i1:1} मूसा इस्राएल के लोगों से बातचीत करता है {1:1} मूसा द्वारा इस्राएल के लोगों को दिया गया सन्देश यह है। उसने उन्हें यह सन्देश तब दिया जब वे यरदन की घाटी में, यरदन नदी की पूर्व के मरुभूमि में थे। यह सूप के उस पार एक तरफ पारान मरुभूमि और दूसरी तरफ तोपेल, लाबान, हसेरोत और दीजाहाब नगरों के बीच में था। {1:2} होरेब (सीनै) पर्वत से सेईर पर्वत से होकर कादेशबर्ने की यात्रा केवल ग्यारह दिन की है। {1:3} किन्तु जब मूसा ने इस्राएल के लोगों को इस स्थान पर सन्देश दिया तब इस्राएल के लोगों को मिस्र छोड़े चालीस वर्ष हो चुके थे। यह चालीस वर्ष के ग्यारहवें महीने का पहला दिन था, जब मूसा ने लोगों से बातें कीं तब उसने उनसे वही बातें कहीं जो यहोवा ने उसे कहने का आदेश दिया था। {1:4} यह यहोवा की सहायता से उनके द्वारा एमोरी लोगों के राजा सीहोन और बाशान के राजा ओग को पराजित किए जाने के बाद हुआ। (सीहोन हेशबोन और ओग अशतारोत एवं एद्रेई में रहते थे।) {1:5} उस समय वे यरदन नदी के पूर्व की ओर मोआब के प्रदेश में थे और मूसा ने परमेश्वर के आदेशों की व्याख्या की। मूसा ने कहाः {1:6} “यहोवा, हमारे परमेश्वर ने होरेब (सीनै) पर्वत पर हमसे कहा। उसने कहा, ‘तुम लोग काफी समय तक इस पर्वत पर ठहर चुके हो। {1:7} यहाँ से चलने के लिए हर एक चीज तैयार कर लो। एमोरी लोगों के यरदन घाटी, पहाड़ी क्षेत्र, पश्चिमी ढाल — अराबा का पहाड़ी प्रदेश, नीची भूमी, नेगेव और समुद्र से लगे क्षेत्रों में जाओ। कनानी लोगों के देश में तथा लबानोन में परात नामक बड़ी नदी तक जाओ। {1:8} देखो, मैंने यह सारा देश तुम्हें दिया है। अन्दर जाओ, और स्वयं उस पर अधिकार करो। यह वही देश है जिसे देने का वचन मैंने तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम, इसहाक और याकूब को दिया था। मैंने यह प्रदेश उन्हें तथा उनके वंशजों को देने का वजन दिया था।’” {i1:9} मूसा प्रमुखों की नियुक्ति करता है {1:9} मूसा ने कहा, “उस समय जब मैंने तुमसे बात की थी तब कहा था, मैं अकेले तुम लोगों का नेतृत्व करने और देखभाल करने में समर्थ नहीं हूँ। {1:10} यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने क्रमशः लोगों को इतना बढ़ाया है कि तुम लोग अब उतने हो गए हो जितने आकाश में तारे हैं! {1:11} तुम्हें यहोवा, तुम्हारे पूर्वजों का परमेश्वर, आज तुम जितने हो, उससे हजार गुना अधिक करे! वह तुम्हें वह आशीर्वाद दे जो उसने तुम्हें देने का वचन दिया है! {1:12} किन्तु मैं अकेले तुम्हारी देखभाल नहीं कर सकता और न तो तुम्हारी सारी समस्याओं और वाद — विवाद का समाधान कर सकता हूँ। {1:13} ‘इसलिए हर एक परिवार समूह से कुछ व्यक्तियो को चुनो और मैं उन्हें तुम्हारा नेता बनाऊँगा। उन बुद्धिमान लोगों को चुनो जो समझदार और अनुभवी हों।’ {1:14} “और तुम लोगों ने कहा, ‘हम लोग समझते हैं ऐसा करना अच्छा है।’ {1:15} “इसलिए मैंने, तुम लोगों द्वारा अपने परिवार समूह से चुने गए बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्तियों को लिया और उन्हें तुम्हार प्रमुख बनाया। मैंने उनमें से कुछ को हजार का, कुछ को सौ का, कुछ को पचास का और कुछ को दस का प्रमुख बनाया है। उनको मैंने तुम्हारे परिवार समूहों के लिए अधिकारी नियुक्त किया है। {1:16} “उस समय, मैंने तुम्हारे इन प्रमुखों को तुम्हारा न्यायाधीश बनाया था। मैंने उनसे कहा, ‘अपने लोगों के बीच के वाद — प्रतिवाद को सुनो। हर एक मुकदमे का फैसला सही — सही करो। इसका कोई महत्व नहीं कि मुकदमा दो इस्राएली लोगों के बीच है या इस्राएली और विदेशी के बीच। तुम्हें हर एक मुकदमे का फैसला सही करना चाहिए। {1:17} जब तुम फैसला करो तब यह न सोचो कि कोई व्यक्ति दूसरे की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है। तुम्हें हर एक व्यक्ति का फैसला एक समान समझकर करना चाहिए। किसी से डरो नहीं क्योंकि तुम्हारा फैसला परमेश्वर से आया है। किन्तु यदि कोई मुकदमा इतना जटिल हो कि तुम फैसला ही न कर सको तो उसे मेरे पास लाओ और इसका फैसला मैं करूँगा।’ {1:18} उसी समय, मैंने वे सभी दूसरी बातें बताईं जिन्हें तुम्हें करना है। {i1:19} जासूस कनान देश में गए {1:19} “तब हम लोगों ने वह किया जो हमारे परमेश्वर यहोवा ने हमें आदेश दिया। हम लोगों ने होरेब पर्वत को छोड़ा और एमोरी लोगों के पहाड़ी प्रदेश की यात्रा की। हम लोग उन बड़ी और सारी भयंकर मरुभूमि से होकर गुजरे जिन्हें तुमने भी देखा। हम लोग कादेशबर्ने पहुँचे। {1:20} तब मैंने तुमसे कहा, ‘तुम लोग एमोरी लोगों के पहाड़ी प्रदेश में आ चुके हो। यहोवा हामारा परमेश्वर यह देश हमको देगा। {1:21} देखो, यह देश वहाँ है! आगे बढ़ो और भूमि को अपना बना लो! तुम्हारे पूर्वजों के यहोवा परमेश्वर ने तुम लोगों को ऐसा करने को कहा है। इसलिए डरो नहीं, किसी प्रकार की चिन्ता न करो!’ {1:22} “तब तुम सभी मेरे पास आए और बोले, ‘हम लोगों के पहले उस देश को देखने के लिए व्यक्तियों को भेजो। वे वहाँ के सभी कमजोर और शक्तिशाली स्थानों को देख सकते हैं। वे तब वापस आ सकते हैं और हम लोगों को उन रास्तों को बता सकते हैं जिनसे हमें जाना है तथा उन नगरों को बता सकते हैं जिन तक हमें पहुँचना है।’ {1:23} “मैंने सोचा कि यह अच्छा विचार है। इसलिए मैंने तुम लोगों में से हर परिवार समूह के लिए एक व्यक्ति के हिसाब से बारह व्यक्तियों को चुना। {1:24} तब वे व्यक्ति हमें छोड़कर पहाड़ी प्रदेश में गए। वे एशकोल की घाटी में गए और उन्होंने उसकी छान — बीन की। {1:25} उन्होंने उस प्रदेश के कुछ फल लिए और उन्हें हमारे पास लाए। उन्होंने हम लोगों को विवरण दिया और कहा, ‘यह अच्छा देश है जिसे यहोवा हमारा परमेश्वर हमें दे रहा है!’ {1:26} “किन्तु तुमने उसमें जाने से इन्कार किया। तुम लोगों ने अपने यहोवा परमेश्वर के आदेश को मानने से इन्कार किया। {1:27} तुम लोगों ने अपने खेमों में शिकायत की। तुम लोगों ने कहा, ‘यहोवा हमसे घृणा करता है! वह हमें मिस्र से बाहर एमोरी लोगों को देने के लिए ले आया। जिससे वे हमें नष्ट कर सकें! {1:28} अब हम लोग कहाँ जायें? हमारे बारह जासूस भाईयों ने अपने विवरण से हम लोगों को डराया। उन्होंने कहा: वहाँ के लोग हम लोगों से बड़े और लम्बे हैं, नगर बड़े हैं और उनकी दीवारें आकाश को छूती हैं और हम लोगों ने दानव लोगों को वहाँ देखा।’ {1:29} “तब मैंने तुमसे कहा, ‘घबराओ नहीं! उन लोगों से डरो नहीं! {1:30} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे सामने जायेगा और तुम्हारे लिए लड़ेगा। वह यह वैसे ही करेगा जैसे उसने मिस्र में किया। तुम लोगों ने वहाँ अपने सामने उसको {1:31} मरुभूमि में जाते देखा। तुमने देखा कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें वैसे ले आया जैसे कोई व्यक्ति अपने पुत्र को लाता है। यहोवा न पूरे रास्ते तुम लोगों की रक्षा करते हुए तुम्हें यहाँ पहुँचाया है।’ {1:32} “किन्तु तब भी तुमने यहोवा अपने परमेश्वर पर विश्वास नहीं किया। {1:33} जब तुम यात्रा कर रहे थे तब वह तुम्हारे आगे तुम्हारे डेरे डालने के लिए जगह खोजने गया। तुम्हें यह बताने के लिए कि तुम्हें किस राह जाना है वह रात को आग में और दिन को बादल में चला। {i1:34} लोगों के कनान जाने पर प्रतिबन्ध {1:34} “यहोवा ने तुम्हारा कहना सुना, वह क्रोधित हुआ। उसने प्रतिज्ञा की। उसने कहा, {1:35} ‘आज तुम जीवित बुरे लोगों में से कोई भी व्यक्ति उस अच्छे देश में नहीं जाएगा जिसे देने का वचन मैंने तुम्हारे पूर्वजों को दिया है। {1:36} यपुन्ने का पुत्र कालेब ही केवल उस देश को देखेगा। मैं कालेब को वह देश दूँगा जिस पर वह चला और मैं उस देश को कालेब के वंशजों को दूँगा। क्यों? क्यो कि कालेब ने वह सब किया जो मेरा आदेश था।’ {1:37} “यहोवा तुम लोगों के कारण मुझसे भी अप्रसन्न था। उसने मुझसे कहा, ‘तुम भी उस देश में नहीं जा सकते। {1:38} किन्तु तुम्हारा सहायक, नून का पुत्र यहोशू उस देश में जाएगा। यहोशू को उत्साहित करो, क्योंकि वही इस्राएल के लोगों को भूमि पर अपना अधिकार जामाने के लिए ले जाएगा।’ {1:39} और यहोवा ने हमसे कहा, ‘तुमने कहा, कि तुम्हारे छोटे बच्चे शत्रु द्वारा ले लिए जायेंगे। किन्तु वे बच्चे उस देश में जायेंगे। मैं तुम्हारी गलतियों के लिए तुम्हारे बच्चों को दोषी नहीं मानता। क्योंकि वे अभी इतने छोटे हैं कि वे यह जान नहीं सकते कि क्या सही है और क्या गलत। इसलिए मैं उन्हें वह देश दूँगा। तुम्हारे बच्चे अपने देश के रूप में उसे प्राप्त करेंगे। {1:40} लेकिन तुम्हें, पीछे मुड़ना चाहिए और लाल सागर जाने वाले मार्ग से मरुभूमि को जाना चाहिए।’ {1:41} “तब तुमने कहा, ‘मूसा, हम लोगों ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। किन्तु अब हम आगे बढ़ेंगे और जैसे पहले यहोवा हमारे परमेश्वर ने आदेश दिया था वैसे ही लड़ेंगे।’ “तब तुम में से हर एक ने युद्ध के लिए शस्त्र धारण किये। तुम लोगों ने सोचा कि पहाड़ में जाना सरस होगा। {1:42} किन्तु यहोवा ने मुझसे कहा, ‘लोगों से कहो कि वे वहाँ न जायें और न लड़ें। क्यों? क्योंकि मैं उनका साथ नहीं दूँगा और उनके शत्रु उनको हरा देंगे।’ {1:43} “इसलिए मैंने तुम लोगों को समझाने की कोशिश की, किन्तु तुम लोगों ने मेरी एक न सुनी। तुम लोगों ने यहोवा का आदेश मानने से इन्कार कर दिया। तुम लोगों ने अपनी शक्ति का उपयोग करने की बात सोची। इसलिए तुम लोग पहाड़ी प्रदेश में गए। {1:44} तब एमोरी लोग तुम्हारे विरुद्ध आए। वे उस पहाड़ी प्रदेश में रहते हैं। उन्होंने तुम्हारा वैसे पीछा किया जैसे मधुमक्खियाँ लोगों का पीछा करती हैं। उन्होंने तुम्हारा सेईर से लेकर होर्मा तक पूरे रास्ते पीछा किया और तुम्हें वहाँ हराया। {1:45} तुम सब लौटे और यहोवा के सामने सहायता के लिए रोए चिल्लाए। किन्तु यहोवा ने तुम्हारी बात कुछ न सुनी। उसने तुम्हारी बात सुनने से इन्कार कर दिया। {1:46} इसलिए तुम लोग कादेश में बहुत समय तक ठहरे। {i2:1} इस्राएल के लोग मरुभूमि में भटकते हैं {2:1} “तब हम लोग मुड़े और लालसागर के सड़क पर मरुभूमि की यात्रा की। यह वह काम है जिसे यहोवा ने कहा कि हमें करना चाहिए। हम लोग सेईर के पहाड़ी प्रदेश से होकर कई दिन चले। {2:2} तब यहोवा ने मुझसे कहा, {2:3} ‘तुम इस पहाड़ी प्रदेश से होकर काफी समय चल चुके हो। उत्तर की ओर मुड़ो। {2:4} और उसने मुझे तुमसे यह कहने को कहाः तुम सेईर प्रदेश से होकर गुजरोगे। यह प्रदेश तुम लोगों के सम्बन्धी एसाव के वंशजों का है। वे तुमसे डरेंगे। बहुत सावधान रहो। {2:5} उनसे लड़ो मत। मैं उनकी कोई भी भूमि एक फुट भी तुमको नहीं दूँगा। क्यों? क्योंकि मैंने एसाव को सेईर का पहाड़ी प्रदेश उसके अधिकार में दे दिया। {2:6} तुम्हें एसाव के लोगों को वहाँ पर भोजन करने या पानी पीने का मूल्य चुकाना चाहिए। {2:7} यह याद रखो कि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर, ने तुमको तुमने जो कुछ भी किया उन सभी के लिए आशीर्वाद दिया। वह इस विस्तृत मरुभूमि से तुम्हारा गुजरना जानता है। यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर इन चालीस वर्षों में तुम्हारे साथ रहा है। तुम्हें वे सभी चीजें मिली हैं जिनकी तुम्हें आवश्यकता थी।’ {2:8} “इसलिए हम लोग सेईर में रहने वाले अपने सम्बन्धी एसाव के लोगों के पास से आगे बढ़ गए। यरदन घाटी से एलत और एस्योनगेबेर नगरों को जाने वाली सड़क को पीछे छोड़ दिया। तब हम उस मरुभूमि की तरफ जाने वाली सड़क पर मुड़े जो मोआब में है। {i2:9} आर—प्रदेश में इस्राएल {2:9} “यहोवा ने मुझसे कहा, ‘मोआब के लोगों को परेशान न करो। उनके खिलाफ लड़ाई न छेड़ो। मैं उनकी कोई भूमि तुमको नहीं दुँगा। वे लूत के वंशज हैं, और मैंने उन्हें आर प्रदेश दिया है।’” {2:10} (पहले, आर में एमी लोग रहते थे। वे शक्तिशाली लोग थे और वहाँ उनमें से बहुत से थे। वे अनाकी लोगों की तरह बहुत लम्बे थे। {2:11} अनाकी लोगो की तरह, एमी रपाई लोगों के एक भाग समझे जाते थे। किन्तु मोआबी लोग उन्हें एमी कहते थे। {2:12} पहले होरी लोग भी सेईर में रहते थे, किन्तु एसाव के लोगों ने उनकी भुमि ले ली। एसाव के लोगों ने होरीतों को नष्ट कर दिया। तब एसाव के लोग वहाँ रहने लगे जहाँ पहले होरीत रहते थे। यह वैसा ही काम था जैसा इस्राएल के लोगों द्वारा उन लोगों के प्रति किया गया जो यहोवा द्वारा इस्राएली अधिकार में भूमि को देने के पहले वहाँ रहते थे।) {2:13} “यहोवा ने मुझसे कहा, ‘अब तैयार हो जाओ और जेरेद घाटी के पार जाओ।’ इसलिए हमने जेरेद घाटी को पार किया। {2:14} कादेशबर्ने को छोड़ने और जेरेदे घाटी को पार करने में अड़तीस वर्ष का समय बीता था। उस पीढ़ी के सभी योद्धा मर चुके थे। यहोवा ने कहा था कि ऐसा ही होगा। {2:15} यहोवा उन लोगों के विरुद्ध तब तक रहा जब तक वे सभी नष्ट न हो गए। {2:16} “जब सभी योद्धा मर गए और लोगों के बीच से सदा के लिए समाप्त हो गए। {2:17} तब यहोवा ने मुझसे कहा, {2:18} ‘आज तुम्हें आर नगर की सीमा से होकर जाना चाहिए। {2:19} जब तुम अम्मोनी लोगों के पास पहुँचो तो उन्हें तंग मत करना। उनसे लड़ना नहीं क्योंकि मैं तुम्हें उनकी भूमि नहीं दूँगा। क्यों? क्योंकि मैंने वह भूमि लूत के वंशजों को अपने पास रखने के लिए दी है।’” {2:20} (वह प्रदेश रपाई लोगों का देश भी कहा जाता है। वे ही लोग पहले वहाँ रहते थे। अम्मोनी के लोग उन्हें जमजुम्मी लोग कहते थे। {2:21} जमजुम्मी लोग बहुत शक्तिशाली थे और उनमें से बहुत से वहाँ थे। वे अनाकी लोगों की तरह लम्बे थे। किन्तु यहोवा ने जमजुम्मी लोगों को अम्मोनी लोगों के लिए नष्ट किया। अम्मोनी लोगों ने जमजुम्मी लोगों का प्रदेश ले लिया और अब वे वहाँ रहते थे। {2:22} परमेश्वर ने यही काम एसावी लोगों के लिए किया जो सेईर में रहते थे। उन्होंने वहाँ रहने वाले होरी लोगों को नष्ट किया। अब एसाव के लोग वहाँ रहते हैं जहाँ पहले होरी लोग रहते थे। {2:23} और कुछ लोग कप्तोर से आए और अव्वियों को उन्होंने नष्ट किया। अव्वी लोग अज्जा तक, नगरों में रहते थे किन्तु यहोवा ने अव्वियों को कप्तोरी लोगों के लिए नष्ट किया।) {i2:24} एमोरी लोगों के विरुद्ध युद्ध करने का आदेश {2:24} “यहोवा ने मुझसे कहा, ‘यात्रा के लिए तैयार हो जाओ। अर्नोन नदी की घाटी से होकर जाओ। मैं तुम्हें हेशबोन के राजा एमोरी सीहोन पर विजय की शक्ति दे रहा हूँ। मैं तुम्हें उसका देश जीतने की शक्ति दे रहा हूँ। इसलिए उसके विरुद्ध लड़ो और उसके देश पर अधिकार करना आरम्भ करो। {2:25} आज मैं तुम्हें सारे संसार के लोगों को भयभीत करने वाला बनाना आरम्भ कर रहा हूँ। वे तुम्हारे बारे में सूचनाएँ पाएंगे और वे भय से काँप उठेंगे। जब वे तुम्हारे बारे में सोचेंगे तब वे घबरा जाएंगें।’ {2:26} “कदेमोत की मरुभूमि से मैंने हेशबोन के राजा सिहोन के पास एक दूत को भेजा। दूत ने सीहोन के सामने शान्ति सन्धि रखी। उन्होंने कहा, {2:27} ‘अपने देश से होकर हमें जाने दो। हम लोग सड़क पर ठहरेंगे। हम लोग सड़क से दायें। या बाएं नहीं मुड़ेंगे। {2:28} हम जो भोजन करेंगे या जो पानी पीएंगे उसका मूल्य चाँदी मे चुकाएंगे। हम केवल तुम्हारे देश से यात्रा करना चाहते हैं। {2:29} अपने देश से होकर तुम हमें तब तक जाने दो जब तक हम यरदन नदी को पार कर उस देश में न पहुँचें जिसे यहोवा, हमारा परमेशवर, हमें दे रहा है। अन्य लोगों में सेईर में रहने वाले एसाव तथा आर में रहने वाले मोआबी लोगों ने अपने देश से हमें गुजरने दिया है।’ {2:30} “किन्तु हेशबोन के राजा सीहोन ने, अपने देश से हमें गुजरने नहीं दिया। यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने, उसे बहुत हठी बना दिया था। यहोवा ने यह इसलिए किया कि वह सीहोन को तुम्हारे अधिकार में दे सके और उसने अब यह कर दिया है। {2:31} “यहोवा ने मुझसे कहा, ‘मैं राजा सीहोन और उसके देश को तुम्हें दे रहा हूँ। भूमि लेना आरम्भ करो। यह तब तुम्हारी होगी।’ {2:32} “तब राजा सीहोन और उसके सब लोग हमसे यहस में युद्ध करने बाहर निकले। {2:33} किन्तु हमारे परमेश्वर ने उसे हमें दे दिया। हमने उसे, उसके नगरों और उसके सभी लोगों को हराया। {2:34} हम लोगों ने उन सभी नगरों पर अधिकार कर लिया जो सीहोन के अधिकार में उस समय थे। हम लोगों ने हर एक नगर में लोगों — पुरूष, स्त्री तथा बच्चों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। हम लोगों ने किसी को जीवित नहीं छोड़ा। {2:35} हम लोगों ने जिन नगरों को जीता उनसे केवल पशु और कीमती चीजें लीं। {2:36} हमने अरोएर नगर को जो अर्नोन की घाटी में है तथा उस घाटी के मध्य के अन्य नगर को भी हराया। यहोवा हमारे परमेश्वर ने हमें अर्नोन की घाटी और गिलाद के बीच के सभी नगरों को पराजित करने दिया। कोई नगर हम लोगों के लिए हमारी शक्ति से बाहर दृढ़ नहीं था। {2:37} किन्तु उस प्रदेश के निकट नहीं गए जो अम्मोनी लोगों का था। तुम यब्बोक नदी के तटों या पहाड़ी प्रदेश के नगरों के निकट नहीं गए। तुम ऐसी किसी जगह के निकट नहीं गए जिसे यहोवा, हमारा परमेश्वर हमें लेने देना नहीं चाहता था। {i3:1} बाशान के लोगों के साथ युद्ध {3:1} “हम मुड़े और बाशान को जानेवाली सड़क पर चलते रहे। बाशान का राजा ओग और उसके सभी लोग प्रदेश में हम लोगों से लड़ने आए। {3:2} यहोवा ने मुझसे कहा, ‘ओग से डरो मत, क्योंकि मैंने इसे तुम्हारे हाथ में देने का निश्चय किया है। मैं इसके सभी लोगों और भूमि को तुम्हें दूँगा। तुम इसे वैसे ही हराओगे जैसे तुमने हेशबोन के शासक एमोरी राजा सीहोन को हराया।’ {3:3} “इस प्रकार यहोवा, हमारे परमेश्वर ने बाशान के राजा ओग और उसके सभी लोगों को हमारे हाथ में दिया। हमने उसे इस तरह हराया कि उसका कोई आदमी नहीं बचा। {3:4} तब हम लोगों ने उन नगरों पर अधिकार किया जो उस समय ओग के थे। हमने ओग के लोगों से, बाशान में ओग के राज्य अर्गोब क्षेत्र के सारे साठ नगर लिए। {3:5} ये सभी नगर ऊँची दीवारों, द्वारों और द्वारों में मजबूत छड़ों के साथ बहुत शक्तिशाली थे। कुछ दूसरे नगर बिना दीवारों के थे। {3:6} हम लोगों ने उन्हें वैसे नष्ट किया जैसे हेशबोन के राजा सीहोन के नगरों को नष्ट किया था। हमने हर एक नगर को उनके लोगों के साथ, स्त्रियों और बच्चों को भी, नष्ट किया। {3:7} किन्तु हमने नगरों से सभी पशुओं और कीमती चीजों को अपने लिए रखा। {3:8} “उस समय, हमने एमोरी लोगों के दो राजाओं से भूमि ली। यह भूमि यरदन नदी की दूसरी ओर है। यह भूमि अर्नोन घाटी से लेकर हेर्मोन पर्वत तक है। {3:9} (सिदोनी हेर्मोन पर्वत को ‘सिर्योन’ कहते हैं, किन्तु एमोरी इसे ‘सनीर’ कहते हैं।) {3:10} हमने समतल मैदान के नगर और गिलाद और सारे बाशान में सल्का और एद्रेई तक के नगर पर आधिपत्य स्थापित किया। सल्का और एद्रेई बाशान में ओग के राज्य के नगर थे।” {3:11} (बाशान का राजा ओग अकेला व्यक्ति था जो रपाई लोगों में जीवित छोड़ा गया था। ओग की चारपाई लोहे की थी। यह लगभग नौ हाथ लम्बी और चार हाथ चौड़ी थी। रब्बा नगर में यह चारपाई अभी तक है, जहाँ एमोरी लोग रहते है।) {i3:12} यरदन नदी के पूर्व की भूमि {3:12} “उस समय उस भूमि को हम लोगों ने जीता था। मैंने रूबेन परिवार समूह को और गादी परिवार समूह को अर्नोन घाटी के सहारे अरोएर से लेकर गिलाद के आधे पहाड़ी भाग तक उसके नगरों के साथ का प्रदेश दिया है। {3:13} मनश्शे के आधे परिवार समूह को मैंने गिलाद का दूसरा आधा भाग और पूरा बाशान दिया अर्थात् अर्गोब का पूरा क्षेत्र बाशान ओग का राज्य था।” (बाशान का क्षेत्र रपाईयों का प्रदेश कहा जाता था। {3:14} मनश्शे के एक वंशज याईर ने अर्गोब के पूरे क्षेत्र अर्थात् बाशान, गशूरी और माका लोगों की सीमा तक के पूरे प्रदेश पर आधिपत्य स्थापित किया। याईर ने बाशान के इन शहरों को अपने नाम पर रखा। इसी से आज भी याईर नगर के नाम से पुकारा जाता है।) {3:15} “मैंने गिलाद माकीर को दिया। {3:16} और रूबेन परिवार समूह को तथा गाद परिवार समूह को मैंने वह प्रदेश दिया जो अर्नोन घाटी से यब्बोक नदी तक जाता है। घाटी के मध्य एक सीमा है। यब्बोक नदी अम्मोनी लोगों की सीमा है। {3:17} यरदन घाटी में यरदन नदी पश्चिम सीमा निर्मित करती है। इस क्षेत्र के उत्तर में किन्नेरेत झील और दक्षिण में अराबा सागर है (जिसे लवण सागर कहते हैं।) यह पूर्व में पिसगा की चोटी के तलहटी में स्थित है। {3:18} “उस समय, मैंने उन परिवार समूहों को यह आदेश दिया था: ‘यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने तुमको रहने के लिए यरदन नदी के इस तरफ का प्रदेश दिया है। किन्तु अब तुम्हारे योद्धाओं को अपने हथियार उठाने चाहिए और अन्य इस्राएली परिवार समूहों को नदी के पार ले जाने की अगुवाई करना चाहिए। {3:19} तुम्हारी पत्नियाँ, तुम्हारे छोटे बच्चे और तुम्हारे पशु (मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पास बहुत से पशु हैं।) यहाँ उन शहरों में रहेंगे जिन्हें मैंने तुम्हें दिया है। {3:20} किन्तु तुम्हें अपने इस्राएली सम्बन्धियों की सहायता तब तक करनी चाहिए जब तक वे यरदन नदी के दूसरे किनारे पर उस प्रदेश को पा नहीं लेते जो यहोवा ने दिया है। उनकी तब तक सहायता करो जब तक वे ऐसी शान्ति पा लें जैसी तुमने यहाँ पा ली है। तब तुम यहाँ अपने देश में लौट सकते हो जिसे मैंने तुम्हें दिया है।’ {3:21} “तब मैंने यहोशू से कहा, ‘तुमने वह सब देखा है। जो यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने इन दो राजाओं के साथ किया है। यहोवा ऐसा ही उन सभी राजाओं के साथ करेगा जिनके राज्य में तुम प्रवेश करोगे। {3:22} इन देशों के राजाओं से डरो मत, क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर, तुम्हारे लिए लड़ेगा।’ {i3:23} मूसा को कनान में प्रवेश करने से मना {3:23} “मैंने उस समय यहोवा से विशेष कृपा की प्रार्थना की। {3:24} मैंने यहोवा से कहा, ‘मेरे स्वामी, यहोवा, मैं तेरा सेवक हूँ। मैं जानता हूँ कि तूने उन शक्तिशाली और अद्भुत चीजों का एक छोटा भाग ही मुझे दिखाया है जो तू कर सकता है। स्वर्ग या पृथ्वी पर कोई ऐसा दूसरा ईश्वर नहीं है, जो तूने किया है तेरे समान महान और शक्तिशाली कार्य कर सके! {3:25} मैं तुमसे निवेदन करता हूँ कि तू मुझे पार जाने दे और यरदन नदी के दूसरी ओर के अच्छे प्रदेश, सुन्दर पहड़ी प्रदेश लबानोन को देखने दे।’ {3:26} “किन्तु यहोवा तुम्हारे कारण मुझ पर अप्रसन्न था। उसने मेरी बात सुनने से इन्कार कर दिया। उसने मुझसे कहा, ‘तुम अपनी बात यहीं खत्म करो! इसके बारे में एक शब्द भी न कहो। {3:27} पिसगा पर्वत की चोटी पर जाओ। पश्चिम की ओर, उत्तर की ओर, दक्षिण की ओर, पूर्व की ओर देखो। सारे प्रदेश को तुम अपनी आँखों से ही देखो क्योंकि तुम यरदन नदी को पार नहीं करोगे। {3:28} तुम्हें यहोशू को निर्देश देना चाहिए। उसे दृढ़ और साहसी बनाओ! क्यों? क्योंकि यहोशू लोगों को यरदन नदी के पार ले जाएगा। यहोशू उन्हें प्रदेश को लेने और उसमें रहने के लिए ले जाएगा। यही वह प्रदेश है जिसे तुम देखोगे।’ {3:29} “इसलिए हम बेतपोर की दूसरी ओर घाटी में ठहर गये।” {i4:1} मूसा लोगों को परमेश्वर के नियमों पर ध्यान देने के लिए चेतावनी देता है {4:1} “इस्राएल, अब उन नियमों और आदेशों को सुनो जिनका उपदेश मैं दे रहा हूँ। उनका पालन करो। तब तुम जीवित रहोगे और जा सकोगे तथा उस प्रदेश को ले सकोगे जिसे यहोवा तुम्हारे पूर्वजों का परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। {4:2} जो मैं आदेश देता हूँ उसमें और कुछ जोड़ना नहीं। तुम्हें उसमें से कुछ घटाना भी नहीं चाहिए। तुम्हें अपने यहोवा परमेश्वर के उन आदेशों का पालन करना चाहिए जिन्हें मैंने तुम्हें दिये हैं। {4:3} “तुमने देखा है कि बालपोर में यहोवा ने क्या किया। तुम्हारे यहोवा परमेश्वर ने तुम्हारे उन सभी लोगों को नष्ट कर दिया जो पोर में बाल के अनुयायी थे। {4:4} किन्तु तुम लोग सभी जो यहोवा अपने परमेश्वर के साथ रहे आज जीवित हो। {4:5} “ध्यान दो, मेरे परमेश्वर यहोवा ने जो मुझे आदेश दिये उन्ही नियमों, विधियों की मैंने तुमको शिक्षा दी है। मैंने यहोवा के इन नियमों की शिक्षा इसलिए दी कि जिस देश में प्रवेश करने और जिसे अपना बनाने के लिए तैयार हो उसमें उनका पालन कर सको। {4:6} इन नियमों का सावधानी से पालन करो। यह अन्य राष्ट्रों को सूचित करेगा कि तुम बुद्धि और समझ रखते हो। जब उन देशों के लोग इन नियमों के बारे में सुनेंगे तो वे कहेंगे कि, ‘सचमुच इस महान राष्ट्र (इस्राएल) के लोग बुद्धिमान और समझदार हैं।’ {4:7} “किसी राष्ट्र का कोई देवता उनके साथ उतना निकट नहीं रहता जिस तरह हमारा परमेश्वर यहोवा जो हम लोगों के पास रहता है, जब हम उसे पुकारते हैं {4:8} और कोई दूसरा राष्ट्र इतना महान नहीं कि उसके पास वे अच्छे विधि और नियम हों जिनका उपदेश मैं आज कर रहा हूँ। {4:9} किन्तु तुम्हें सावधान रहना है। निश्चय कर लो कि जब तक तुम जीवित रहोगे, तब तक तुम देखी गई चीजों को नहीं भूलोगे। तुम्हें इन उपदेशों को अपने पुत्रों और पौत्रों को देना चाहिए। {4:10} उस दिन को याद रखो जब तुम होरेव (सीनै) पर्वत पर अपने यहोवा परमेश्वर के सामने खड़े थे। यहोवा ने मुझसे कहा, मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे सुनने के लिए लोगों को इकट्ठा करो। तब वे मेरा सम्मान सदा करना सीखेंगे जब तक वे घरती पर रहेंगे। और वे ये उपदेश अपने बच्चों को भी देंगे। {4:11} तुम समीप आए और पर्वत के तले खड़े हुए। पर्वत में आग लग गई और वह आकाश छूने लगी। घने काले बादल और अंधकार उठे। {4:12} तब यहोवा ने आग में से तुम लोगों से बातें कीं। तुमने किसी बोलने वाले की आवाज सुनी। किन्तु तुमने कोई रुप नहीं देखा। केवल आवाज सुनाई पड़ रही थी। {4:13} यहोवा ने तुम्हें यह साक्षी पत्र दिया। उसने दस आदेश दिए और उन्हें पालन करने का आदेश दिया। यहोवा ने साक्षीपत्र के नियमों को दो पत्थर की शिलाओं पर लिखा। {4:14} उस समय यहोवा ने मुझे भी आदेश दिया कि मैं तुम्हें इन विधियों और नियमों का उपदेश दूँ। ये वे नियम व विधि हैं जिनका पालन तुम्हें उस देश में करना चाहिए जिसे तुम लेने और जिसमें रहने तुम जा रहे हो। {4:15} “उस दिन यहोवा ने होरेब पर्वत की आग से तुमसे बातें कीं। तुमने उसको किसी शारीरिक रूप में नहीं देखा। {4:16} इसलिए सावधान रहो! पाप मत करो और किसी जीवित के रूप में किसी का प्रतीक या उसकी मूर्ति बनाकर अपने जीवन को चौपट न करो। ऐसी मूर्ति न बनाओ जो किसी पुरुष या स्त्री के सदृश हो। {4:17} ऐसी मूर्ति न बनाओ जो धरती के किसी जानवर या आकाश के किसी पक्षी की तरह दिखाई देती हो। {4:18} और ऐसी मूर्ति न बनाओ जो थरती पर रेंगने वाले या समुद्र की मछली की तरह दिखाई देती है। {4:19} जब तुम आकाश की ओर दृष्टि डालो और सूरज, चाँद, तारे और बहुत कुछ तुम जो कभी आकाश में देखो, उससे सावधान रहो कि तुम में उनकी पूजा या सेवा के लिए प्रलोभन न उत्पन्न हो। यहोवा तुम्हारे परमेशवर ने इन सभी चीजों को संसार के दूसरे लोगों को दिया है। {4:20} किन्तु यहोवा तुम्हें मिस्र से बाहर लाया है जो तुम्हारे लिए लोहे की भट्टी थी। वह तुम्हें इसलिए लाया कि तुम उसके निज लोग वैसे ही बन सको जैसे तुम आज हो। {4:21} “यहोवा तुम्हारे कारण मुझ से क्रोधित था। उसने एक विशेष वचन दिया: उसने कहा कि मैं यरदन नदी के उस पार नहीं जा सकता। उसने कहा कि मैं उस सुन्दर प्रदेश में प्रवेश नहीं पा सकता जिसे तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हें दे रहा है। {4:22} इसलिए मुझे इस देश में मरना चाहिए। मैं यरदन नदी के पार नहीं जा सकता। किन्तु तुम तुरन्त उसके पार जाओगे और उस देश को रहने के लिए प्राप्त करोगे। {4:23} उस नये देश में तुम्हें सावधान रहना चाहिए कि तुम उस वाचा को न भूल जाओ जो यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने तुमसे की है। तुम्हें किसी भी प्रकार की मूर्ति नहीं बनानी चाहिए। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें उन्हें न बनाने की आज्ञा दी है। {4:24} क्यों? क्योंकि यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर अपने लोगों द्वारा किसी दूसरे देवता की पूजा से घृणा करता है और यहोवा नष्ट करने वाली आग की तरह प्रलयंकर हो सकता है! {4:25} “जब तुम उस देश में बहुत समय रह लो और तुम्हारे पुत्र, पौत्र हों तब अपने को नष्ट न करो, बुराई न करो। किसी भी रूप में कोई मूर्ति न बनाओ। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है कि यह बुरा है! इससे वह क्रोधित होगा! {4:26} यदी तुम उस बुराई को करोगे तो मैं धरती और आकाश को तुम्हारे विरुद्ध साक्षी के लिए बुलाता हूँ कि यह होगा। तुम शीघ्र ही नष्ट हो जाओगे। तुम यरदन नदी को उस देश को लेने के लिए पार कर रहे हो, किन्तु तुम वहाँ बहुत समय तक नहीं रहोगे। नहीं, तुम पूरी तरह नष्ट हो जाओगे! {4:27} यहोवा तुमको राष्ट्रों में तितर — बितर कर देगा और तुम लोगों में से उस देश में कुछ ही जीवित रहेंगे जिसमें यहोवा तुम्हें भेजेगा। {4:28} तुम लोग वहाँ मनुष्यों के बनाए देवताओं की पूजा करोगे, उन चीजों की जो लकड़ी और पत्थर की होंगी जो देख नहीं सकतीं, सुन नहीं सकतीं, खा नहीं सकतीं, सूँघ नहीं सकतीं। {4:29} किन्तु इन दूसरे देशों में तुम यहोवा अपने परमेश्वर की खोज करोगे। यदि तुम अपने हृदय और पूरी आत्मा से उसकी खोज करोगे तो उसे पाओगे। {4:30} जब तुम विपत्ति में पड़ोगे और वे सभी बातें तुम पर घटेंगी तो तुम यहोवा अपने परमेश्वर के पास लौटोगे और उसकी आज्ञा का पालन करोगे। {4:31} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर कृपालु है, वह तुम्हारा परित्याग नहीं करेगा। वह तुम्हें नष्ट नहीं करेगा। वह उस वाचा को नहीं भूलेगा जो उसने तुम्हारे पूर्वजों को वचन के रूप में दी। {i4:32} उन महान कर्मों को सोचो जो यहोवा ने तुम्हारे लिये किये {4:32} “क्या इतनी महान घटनाओं में से कोई इसके पहले हुई? कभी नहीं! बीते समय को देखो। तुम्हारे जन्म के पहले जो महान घटनाएँ घटीं उन्हें याद करो। उस समय तक पीछे जाओ जब परमेश्वर ने धरती पर आदमी को बनाया। उन सभी घटनाओं को देखो जो संसार में कभी कहीं भी घटी हैं। क्या इस महान घटना जैसी घटना किसी ने कभी पहले सुनी है? नहीं! {4:33} तुम लोगों ने परमेश्वर को तुमसे आग में से बोलते सुना और तुम लोग अभी भी जीवित हो। {4:34} क्या ऐसी घटना किसी के साथ घटित हुई है? नहीं! और क्या किसी दूसरे ईश्वर ने कभी किसी दूसरे राष्ट्रों के भीतर जाकर स्वयं वहाँ से लोगों को बाहर लाने का प्रयत्न किया है? नहीं! किन्तु तुमने स्वयं यहोवा अपने परमेश्वर को, इन अद्भुत कार्यों को करते देखा है। उसने अपनी शक्ति और दृढ़ता को दिखाया। तुमने उन विपत्तियों को देखा जो लोगों के लिए परीक्षा थीं। तुम लोगों ने चमत्कार और आश्चर्य देखे। तुम लोगों ने युद्ध और जो भंयकर घटनाएँ हुईं, उन्हें देखा। {4:35} उसने तुम्हें ये सब दिखाए जिससे तुम जान सको कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसके समान कोई अन्य देवता नहीं है। {4:36} यहोवा आकाश से अपनी बात इसलिए सुनने देता था जिससे वह तुम्हें शिक्षा दे सके। धरती पर उसने अपनी महान आग दिखायी और वह उसमें से बोला। {4:37} “यहोवा तुम्हारे पूर्वजों से प्यार करता था। यही कारण था कि उसने उनके वंशजों अर्थात् तुमको चुना और यही कारण है कि यहोवा तुम्हें मिस्र से बाहर लाया। वह तुम्हारे साथ था और अपनी बड़ी शक्ति से तुम्हें बाहर लाया। {4:38} जब तुम आगे बढ़े तो यहोवा ने तुम्हारे सामने से राष्ट्रों को बाहर जाने के लिए विवश किया। ये राष्ट्र तुमसे बड़े और अधिक शक्तिशाली थे। किन्तु यहोवा तुम्हें उनके देश में ले आया। उसने उनका देश तुमको रहने को दिया और यह देश आज भी तुम्हारा है। {4:39} “इसलिए आज तुम्हें याद रखना चाहिए और स्वीकार करना चाहिए कि यहोवा परमेश्वर है। वहाँ ऊपर स्वर्ग में तथा यहाँ धरती का परमेश्वर है। यहाँ और कोई दूसरा परमेशवर नहीं है! {4:40} और तुम्हें उसके उन नियमों और आदेशों का पालन करना चाहिए जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। तब हर एक बात तुम्हारे और तुम्हारे उन बच्चों के लिए ठीक रहेगी जो तुम्हारे बाद होंगे और तुम लम्बे समय तक उस देश में रहोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें सदा के लिए दे रहा है।” {i4:41} मूसा सुरक्षा के नगरों को चुनता है {4:41} तब मूसा ने तीन नगरों को यरदन नदी की पूर्व की ओर चुना । {4:42} यदि कोई व्यक्ति किसी वयक्ति को संयोगवश मार डाले तो वह इन नगरों में से किसी में भागकर जा सकता था और सुरक्षित रह सकता था। यदि वह मारे गए व्यक्ति से घृणा नहीं करता था और उसे मार डालने का इरादा नहीं रखता था तो वह उन नगरों में से किसी एक में जा सकता था और उसे प्राण — दण्ड नहीं दिया जा सकता था। {4:43} मूसा ने जिन तीन नगरों को चुना, वे ये थे: रुबेनी लोगों के लिए मरुभूमि की मैदानी भूमि में बेसेर; गादी लोगों के लिए गिलाद में रामोत और मनश्शे लोगों के लिए बाशान में गोलान। {i4:44} मूसा के नियमों का परिचय {4:44} इस्राएली लोगों के लिए जो नियम मूसा ने दिया वह यह है। {4:45} ये उपदेश, विधि और नियम मूसा ने लोगों को तब दिये जब वे मिस्र से बाहर आए। {4:46} मूसा ने इन नियमों को तब दिया जब लोग यरदन नदी के पूर्वी किनारे पर बेतपोर के पार घाटी में थे। वे एमोरी राजा सीहोन के देश में थे, जो हेशबोन में रहता था। (मूसा और इस्राएल के लोगों ने सीहोन को तब हराया था जब वे मिस्र से आए थे। {4:47} उन्होंने सीहोन के देश को अपने पास रखने के लिए ले लिया था। ये दोनों एमोरी राजा यरदन नदी के पूर्व में रहते थे। {4:48} यह प्रदेश अर्नोन घाटी के सिरे पर स्थित अरोएर से लेकर सीओन पर्वत तक फैला था, (अर्थात् हेर्मोन पर्वत तक।) {4:49} इस प्रदेश में यरदन नदी के पूर्व का पूरा अराबा सम्मिलित था। दक्षिण में यह अराबा सागर तक पहुँचता था और पूर्व में पिसगा पर्वत के चरण तक पहुँचता था।) {i5:1} दस आदेश {5:1} मूसा ने इस्राएल के सभी लोगों को एक साथ बुलाया और उनसे कहा, “इस्राएल के लोगो, आज जिन नियम व विधियों को मैं बता रहा हूँ उन्हें सुनो। इन नियमों को सीखो और दृढ़ता से उनका पालन करो। {5:2} यहोवा, हम लोगों के परमेश्वर ने होरेब (सीनै) पर्वत पर हमारे साथ वाचा की थी। {5:3} यहोवा ने यह वाचा हम लोगों के पू्र्वजों के साथ नहीं की थी, अपितु हम लोगों के साथ की थी। हाँ, हम लोगों के साथ जो यहाँ आज जीवित हैं। {5:4} यहोवा ने पर्वत पर तुमसे आमने — सामने बातें कीं। उसने तुम से आग में से बातें कीं। {5:5} उस समय तुमको यह बताने के लिए कि यहोवा ने क्या कहा, मैं तुम लोगों और यहोवा के बीच खड़ा था। क्यों? क्योंकि तुम आग से डर गए थे और तुमने पर्वत पर जाने से इन्कार कर दिया था। यहोवा ने कहाः {5:6} ‘मैं यहोवा तुम्हारा वह परमेश्वर हूँ जो तुम्हें मिस्र से बाहर लाया जहाँ तुम दास की तरह रहते थे। {5:7} ‘मेरे अतिरिक्त किसी अन्य देवता की पूजा न करो। {5:8} ‘किसी की मूर्तियाँ या किसी के चित्र जो आकाश में ऊपर, पृथ्वी पर या नीचे समुद्र में हों, न बनाओ। {5:9} किसी प्रकार के प्रतीक की पूजा या सेवा न करो। क्यों? क्योंकि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मैं अपने लोगों द्वारा किसी अन्य देवता की पूजा से घृणा करता हूँ। ऐसे लोग जो मेरे विरुद्ध पाप करते हैं, मेरे शत्रु हो जाते हैं। मैं उन लोगों को दण्ड दूँगा और मैं उनके पुत्रों, पौत्रों और प्रपौत्रों को दण्ड दूँगा। {5:10} किन्तु मैं उन लोगों पर बहुत दयालु रहूँगा जो मुझसे प्रेम करते हैं. और मेरे आदेशों को मानते हैं। मैं उनकी सहस्र पीढ़ी तक उन पर दयालु रहूँगा! {5:11} ‘यहोवा, अपने परमेश्वर के नाम का उपयोग गलत ढ़ंग से न करो। यदि कोई व्यक्ति उसके नाम का उपयोग गलत ढ़ंग से करता हो तो वह दोषी है और यहोवा उसे निर्दोष नहीं बनाएगा। {5:12} ‘सब्त के दिन को विशेष महत्व देना याद रखो। यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने आदेश दिया है कि तुम सब्त के दिन को सप्ताह के अन्य दिनों से भिन्न करो। {5:13} पहले छ: दिन तुम्हारे काम करने के लिए हैं। {5:14} किन्तु सातवाँ दिन यहोवा तुम्हारे परमेश्वर के सम्मान में आराम का दिन है। इसलिए सब्त के दिन कोई व्यक्ति काम न करे, अर्थात् तुम, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारी पुत्रियाँ, तुम्हारे सेवक, दास स्त्रियाँ, तुम्हारी गायें, तुम्हारे गधे, अन्य जानवर, और तुम्हारे ही नगरों में रहने वाले विदेशी, कोई भी नहीं! तुम्हारे दास तुम्हारी ही तरह आराम करने की स्थिति में होने चाहिए। {5:15} यह मत भूलो कि तुम मिस्र में दास थे। यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर महान शक्ति से तुम्हें मिस्र से बाहर लाया। उसने तुम्हें स्वतन्त्र किया। यही कारण है कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर आदेश देता है कि तुम सब्त के दिन को हमेशा विशेष दिन मानो। {5:16} ‘अपने माता — पिता का सम्मान करो। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें यह करने का आदेश दिया है। यदि तुम इस आदेश का पालन करते हो तो तुम्हारी उम्र लम्बी होगी और उस देश में जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको दे रहा है तुम्हारे साथ सब कुछ अच्छा होगा। {5:17} ‘किसी की हत्या न करो। {5:18} ‘व्यभिचार का पाप न करो। {5:19} ‘कोई चीज मत चुराओ। {5:20} ‘दूसरों ने जो कुछ किया है उसके बारे में झूठ मत बोलो। {5:21} ‘तुम दूसरों की चीजों को अपना बनाने की इच्छा न करो। दूसरे व्यक्ति की पत्नी, घर, खेत, पुरुष या स्त्री सेवक, गाये और गधे को लेने की इच्छा तुम्हें नहीं करनी चाहिए।’” {i5:22} लोगों का भय {5:22} मूसा ने कहा, “यहोवा ने ये आदेश तुम सभी को दिये जब तुम एक साथ पर्वत पर थे। यहोवा ने स्पष्ट शब्दों में बातें कीं और उसकी तेज आवाज आग, बादल और घने अन्धकार से सुनाई दे रही थी। जब उसने यह आदेश दे दिये तब और कुछ नहीं कहा। उसने अपने शब्दों को दो पत्थर की शिलाओं पर लिखा और उन्हें मुझे दे दिया। {5:23} “तुमने आवाज को अंधेरे में तब सुना जब पर्वत आग से जल रहा था। तब तुम मेरे पास आए, तुम्हारे परिवार समूह के सभी नेता और तुम्हारे सभी बुजुर्ग। {5:24} उन्होंने कहा, ‘यहोवा हमारे परमशेवर ने अपना गौरव और महानता दिखाई है। हमने उसे आग में से बोलते सुना है! आज हम लोगों ने देख लिया है कि किसी व्यक्ति का परमेश्वर से बात करने के बाद भी जीवित रह सकना, सम्भव है। {5:25} किन्तु यदि हमने यहोवा अपने परमेश्वर को दुबारा बात करते सुना तो हम जरूर मर जाएंगे! वह भयानक आग हमें नष्ट कर देगी। किन्तु हम मरना नहीं चाहते। {5:26} कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जिसने हम लोगों की तरह कभी जीवित परमेश्वर को आग में से बात करते सुना हो और जीवित हो! {5:27} मूसा, तुम समीप जाओ और यहोवा हम लोगों का परमेश्वर, जो कहता है सुनो। तब वह सब बातें हमें बताओ जो यहोवा तुमसे कहता है, और हम लोग वह सब करेंगे जो तुम कहोगे।’ {i5:28} यहोवा मूसा से बात करता है {5:28} “यहोवा ने वे बातें सुने जो तुमने मुझसे कहीं। तब यहोवा न मुझसे कहा, ‘मैंने वे बातें सुनीं जो इन लोगों ने कहीं। जो कुछ उन्होंने कहा है, ठीक है। {5:29} मैं केवल यह चाहता हूँ कि वे हृदय से मेरा सम्मान करें और मेरे आदेशों को मानें। तब हर एक चीज उनके तथा उनके वंशजों के लिए सदैव अच्छी रहेगी। {5:30} “‘जाओ और लोगों से कहो कि अपने डेरों में लौट जायें। {5:31} किन्तु मूसा, तुम मेरे निकट खड़े रहो। मैं तुम्हें सारे आदेश, विधि और नियम दूँगा जिसकी शिक्षा तुम उन्हें दोगे। उन्हें ये सभी बातें उस देश में करनी चाहिए जिसे मैं उन्हें रहने के लिए दे रहा हूँ।’ {5:32} “इसलिए तुम सभी लोगों को वह सब कुछ करने के लिए सावाधान रहना चाहिए जिसके लिए यहोवा का तुम्हें आदेश है। तुम्हें न दाहिने हाथ मुड़ना चाहिये और न ही बायें हाथ। सदैव उसकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिये! {5:33} तुम्हें उसी तरह रहना चाहिए, जिस प्रकार रहने का आदेश यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुमको दिया है। तब तुम सदा जीवित रह सकते हो और हर चीज तुम्हारे लिए अच्छी होगी। उस देश में, जो तुम्हारा होगा, तुम्हारी आयु लम्बी हो जायेगी। {i6:1} सदैव परमेश्वर से प्रेम करो तथा आज्ञा मानो! {6:1} “जिन आदेशों, विधियों और नियमों को यहोवा, तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें सिखाने को मुझे कहा है, वे ये हैं। इनका पालन उस देश में करो जिसमे रहने के लिए तुम प्रवेश कर रहे हो। {6:2} तुम और तुम्हारे वंशजों को जब तक जीवित रहो, यहोवा अपने परमेश्वर का सम्मान करना चाहिए । तुम्हें उन सभी नियमों और आदेशों का पालन करना चाहिए जिन्हें मैं तुम्हें दे रहा हूँ। यदि तुम ऐसा करोगे तो उस नये देश में लम्बी उम्र पाओगे। {6:3} इस्राएल के लोगो, इसे ध्यान से सुनो और इन नियमों का पालन करो। तब सब कुछ तुम्हारे साथ अच्छा होगा और तुम एक महान राष्ट्र बनोगे। यहोवा, तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर ने, इन सबके लिए वचन दिया है कि तुम बहुत सी अच्छी वस्तुओं से युक्त धरती को, जहाँ दूध और शहद बहता है, प्राप्त करोगे। {6:4} “इस्राएल के लोगो, ध्यान से सुनो! यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक है! {6:5} और तुम्हें यहोवा, अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय, आत्मा और शक्ति से प्रेम करना चाहिए। {6:6} इन आदेशों को सदा याद रखो जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। {6:7} इनकी शिक्षा अपने बच्चों को देने के लिए सावधान रहो। इन आदेशों के बारे में तुम अपने घर में बैठे और सड़क पर घूमते बातें करो। जब तुम लेटो और जब जागो तब इनके बारे में बातें करो। {6:8} इन आदेशों को लिखो और मेरे उपदेशों को याद रखने में सहायता के लिए अपने हाथों पर इसे बांधो तथा प्रतीक रूप मे अपने ललाट पर धारण करो। {6:9} अपने घरों के दरवाजों, खम्भों और फाटकों पर इसे लिखो। {6:10} “यहोवा तुम्हरा परमेश्वर तुम्हें उस देश में ले जाएगा जिसके लिए उसने तुम्हारे पूर्वजों — इब्राहीम, इसहाक और याकूब को देने का वचन दिया था। तब वह तुम्हें बड़े और सम्पन्न नगर देगा जिनहें तुमने नहीं बनाया। {6:11} यहोवा तुम्हें अच्छी चीजों से भरे घर देगा जिन्हें तुमने वहाँ नहीं रखा। यहोवा तुम्हें कुएँ देगा जिन्हें तुमने नहीं खोदा है। यहोवा तुम्हें अंगूर और जैतून के बाग देगा जिन्हें तुमने नहीं लगाया। तुम्हारे खाने के लिए भरपूर होगा। {6:12} “किन्तु सावधान रहो। यहोवा को मत भूलो जो तुम्हें मिस्र से लाया, जहाँ तुम दास थे। {6:13} यहोवा अपने परमेश्वर का सम्मान करो और केवल उसी की सेवा करो। वचन देने के लिए तुम केवल उसी के नाम का उपयोग करोगे। {6:14} तुम्हें अन्य देवताओं का अनुसरण नहीं करना चाहिए। तुम्हें अपने चारों ओर रहने वाले लोगों के देवताओं का अनुसरण नहीं करना चाहिए। {6:15} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सदा तुम्हारे साथ है और यदि तुम दूसरे देवताओं का अनुसरण करोगे तो वह तुम पर बहुत क्रोधित होगा! वह धरती से तुम्हारा सफाया कर देगा। यहोवा अपने लोगों द्वारा अन्य देवताओं की पूजा से घृणा करता है। {6:16} “तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर का परीक्षण उस प्रकार नहीं करना चाहिए जिस प्रकार तुमने मस्सा में किया। {6:17} तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर के आदेशों के पालन के लिए दृढ़ निश्चय रखना चाहिए। तुम्हें उसके सभी उन उपदेशों और नियमों का पालन करना चाहिए जिन्हें उसने तुमको दिया है। {6:18} तुम्हें वे बातें करनी चाहिए जो ठीक और अच्छी अर्थात् यहोवा को प्रसन्न करने वाली हों। तब तुम्हारे लिये हर एक बात ठीक होगी और तुम उस अच्छे देश में जा सकते हो जिसके लिए यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों को वचन दिया था {6:19} और तुम अपने सभी शत्रुओं को बलपूर्वक बाहर निकाल सकोगे, जैसा यहोवा ने कहा है। {i6:20} अपने बच्चों को परमेश्वर के कार्यों की शिक्षा दो {6:20} “भविष्य में, तुम्हारा पुत्र तुमसे यह पूछ सकता हे कि ‘यहोवा हमारे परमेश्वर ने हमें जो उपदेश, विधि और नियम दिये, उनका अर्थ क्या है?’ {6:21} तब तुम अपने पुत्र से कहोगे, ‘हम मिस्र में फिरौन के दास थे, किन्तु यहोवा हमें बड़ी शक्ति से मिस्र से बाहर लाया। {6:22} यहोवा ने हमें महान, भयंकर चिन्ह और चमत्कार दिखाए। हम लोगों ने उनके द्वारा इन घटनाओं को मिस्र के लोगों, फिरौन और फिरौन के महल के लोगों के साथ होते देखा {6:23} और यहोवा हम लोगों को मिस्र से इसलिए लाया कि वह वो देश हमें दे सके जिसके लिए उसने हमारे पूर्वजों को वचन दिया था। {6:24} यहोवा ने हमें इन सभी उपदेशों के पालन का आदेश दिया। इस प्रकार हम लोग यहोवा, अपने परमेश्वर का सम्मान करते हैं। तब यहोवा सदा हम लोगों को जीवित रखेगा और हम अच्छा जीवन बिताएंगे जैसा इस समय है। {6:25} यदि हम इन सारे नियमों का पालन परमेश्वर के निर्देशों के आधार पर करते हैं तो परमेश्वर हमें अच्छाईयों से भर देगा।’ {i7:1} इस्राएल, परमेश्वर के विशेष लोग {7:1} “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें उस देश में ले जायेगा जिसे अपना बनाने के लिए तुम उसमें जा रहे हो। यहोवा तुम्हारे लिए बहुत से राष्ट्रों को बलपूर्वक हटाएगा — हित्ती, गिर्गाशी, एमोरी, कनानी, परिज्जी, हिब्बी और यबूसी, सात तुमसे बड़े और अधिक शक्तिशाली राष्ट्रों को । {7:2} यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर इन राष्ट्रों को तुम्हारे अधीन करेगा और तुम उन्हें हराओगे। तुम्हें उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। उनके साथ कोई सन्धि न करो। उन पर दया न करो। {7:3} उन लोगों में से किसी के साथ विवाह न करो, और उन राष्ट्रों के किसी व्यक्ति के साथ अपने पुत्र और पुत्रियों का विवाह न करो। {7:4} क्यों? क्योंकि वे लोग तुम्हें परमेश्वर से दूर ले जायेगें, इसलिये तुम्हारे बच्चे दूसरे देवताओं की सेवा करेंगे और यहोवा तुम पर बहुत क्रोधित होगा। वह शीघ्रता से तुम्हें नष्ट कर देगा। {i7:5} बनावटी देवताओं को नष्ट करने का आदेश {7:5} “तुम्हें इन राष्ट्रों के साथ यह करना चाहिएः तुम्हें उनकी वेदियाँ नष्ट करनी चाहिए और विशेष पत्थरों को टुकड़ों मे तोड़ डालना चाहिए। उनके अशेरा स्तम्भों को काट डालो और उनकी मूतिर्यों को जला दो! {7:6} क्यों? क्योंकि तुम यहोवा के अपने लोग हो। तुम योहवा की निज सम्पत्ति हो। संसार के सभी लोगों में से योहवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें विशेष लोग, ऐसे लोग जो उसके अपने हैं, चुना। {7:7} यहोवा तुमसे क्यों प्रेम करता है और तुम्हें उसने क्यों चुना? इसलिए नहीं कि अन्य लोगों की तुलना में तुम्हारी संख्या बहुत अधिक है। तुम सभी लोगों में सबसे कम थे। {7:8} किन्तु यहोवा तुमको अपनी बड़ी शक्ति के द्वारा मिस्र के बाहर लाया। उसने तुम्हें दासता से मुक्त किया। उसने मिस्र के सम्राट फिरौन की अधीनता से तुम्हें स्वतन्त्र किया। क्यों? क्योंकि यहोवा तुमसे प्रेम करता है और तुम्हारे पूर्वजों को दिए गए वचन को पूरा करना चाहता था। {7:9} “इसलिए याद रखो कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर ही एकमात्र परमेश्वर है, और वही विश्वसनीय है! वह अपनी वाचा को पूरा करता है। वह उन सभी लोगों से प्रेम करता तथा उन पर दया करता है जो उससे प्रेम करते और उसके आदेशों का पालन करते हैं। वह हजारों पीढ़ीयों तक प्रेम और दया करता रहता है। {7:10} किन्तु यहोवा उन लोगों को दण्ड देता है जो उससे घृणा करते हैं। वह उनको नष्ट करेगा। वह उस व्यक्ति को दण्ड देने में देर नहीं करेगा जो उससे घृणा करता है। {7:11} इसलिए तुम्हें उन आदेशों, विधियों और नियमों के पालन में सावधान रहना चाहिए जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। {7:12} “यदि तुम मेरे इन नियमों पर ध्यान दोगे और उनके पालन में सावधान रहोगे तो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमसे प्रेम की वाचा का पालन करेगा। उसने यह वचन तुम्हारे पूर्वजों को दिया था। {7:13} वह तुमसे प्रेम करेगा और तुम्हें आशीर्वाद देगा। तुम्हारे राष्ट्र में लोग बराबर बढ़ते जाएंगे। वह तुम्हें बच्चे होने का आशीर्वाद देगा। वह तुम्हारे खेतों में अच्छी फसल का आशीर्वाद देगा वह तुम्हें अन्न, नई दाखमधु और तेल देगा। वह तुम्हारी गायों को बछड़े और तुम्हारी भेड़ों को मेमने पैदा करने का आशीर्वाद देगा। तुम वे सभी आशीर्वाद उस देश में पाओगे जिसे तुम्हें देने का वचन यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों को दिया था। {7:14} “तुम अन्य लोगों से अधिक आशीर्वाद पाओगे। हर एक पति — पत्नी बच्चे उत्पन्न करने योग्य होंगे। तुम्हारे पशु बछड़े उत्पन्न करने योग्य होंगे। {7:15} और यहोवा तुमसे सभी बीमारियों को दूर करेगा। यहोवा तुमको उन भयंकर बीमारियों से बचायेगा तथा उन भयंकर बीमारियों को उन सभी लोगों को देगा जो तुमसे घृणा करते हैं। {7:16} तुम्हें उन सभी लोगों को नष्ट करना चाहिए जिन्हें हराने में यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सहायता करता है। उन पर दया न करो। उनके देवताओं की सेवा न करो! क्यों? क्योंकि यदि तुम उनके देवताओं की सेवा करोगे तो तुम्हें दण्ड भुगतना होगा। {i7:17} यहोवा अपने लोगों को सहायता का वचन देता है {7:17} “अपने मन में यह न सोचो, ‘ये राष्ट्र हम लोगों से अधिक शक्तिशाली हैं। हम उन्हें बलपूर्वक कैसे भगा सकते हैं?’ {7:18} तुम्हें उनसे डरना नहीं चाहिए। तुम्हें वह याद रखना चाहिए जो परमेशवर, तुम्हारे यहोवा ने फिरौन और मिस्र के लोगों के साथ किया। {7:19} जो बड़ी विपत्तियाँ उसने दीं तुमने उन्हें देखा। तुमने उसके किये चमत्कार और आश्चर्यों को देखा। तुमने यहोवा की बड़ी शक्ति और दृढ़ता को, तुम्हें बाहर लाने में उपयोग करते देखा। यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर उसी शक्ति का उपयोग उन लोगों के विरुद्ध करेगा जिनसे तुम डरते हो। {7:20} “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर, बड़ी बर्रो को उन सभी लोगों का पता लगाने के लिए भेजेगा जो तुमसे भागे हैं और अपने को छिपाया है। यहोवा उन सभी लोगों को नष्ट करेगा। {7:21} तुम उनसे डरो नहीं क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे साथ है। वह महान और विस्मयकारी परमेश्वर है। {7:22} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन राष्ट्रों को तुम्हारा देश थोड़ा — थोड़ा करके छोड़ने को विवश करेगा। तुम उन्हें एक ही बार में सभी को नष्ट नहीं कर पाओगे। यदि तुम ऐसा करोगे तो जंगली जानवरों की संख्या तुम्हारी तुलना में अधिक हो जाएगी। {7:23} किन्तु यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन राष्ट्रों को तुमको देगा। यहोवा उनको युद्ध में भ्रमित कर देगा, जब तक वे नष्ट नहीं होते। {7:24} यहोवा तुम्हें उनके राजाओं को हराने में सहायता करेगा। तुम उन्हें मार डालोगे और संसार भूल जाएगा कि वे कभी थे। कोई भी तुम लोगों को रोक नहीं सकेगा। तुम उन सभी को नष्ट करोगे! {7:25} “तुम्हें उनके देवताओं की मूर्तियों को जला देना चाहिए। तुम्हें उन मूर्तियों पर मढ़े सोने या चाँदी को लेने की इच्छा नहीं रखनी चाहीए। तुम्हें उस सोने और चाँदी को अपने लिए नहीं लेना चाहिए। यदि तुम उसे लोगे तो दण्ड पाओगे। क्यो? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन मूर्तियों से घृणा करता है {7:26} और तुम्हें अपने घर मे उन मूर्तियों में से कोई लानी नहीं चाहिए जिनसे यहोवा घृणा करता है। यदि तुम उन मूर्तियों को अपने घर में लाते हो तो तुम मूर्तियों की तरह नष्ट हो जाओगे। तुम्हें उन मूर्तियों से घृणा करनी चाहिए। तुम्हें उनसे तीव्र घृणा करनी चाहिए! यहोवा ने उन मूर्तियों को नष्ट करने की प्रतिज्ञा की है! {i8:1} यहोवा को याद रखो {8:1} “तुम्हें आज जो आदेश दे रहा हूँ उसे ध्यान से सुनना और उनका पालन करना चाहिए। क्योंकि तब तुम जीवित रहोगे। तुम्हारी संख्या अधिक से अधिक होती जाएगी। तुम उस देश में जाओगे और उसमें रहोगे जिसे यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों को देने का वचन दिया है {8:2} और तुम्हें उस लम्बी यात्रा को याद रखना है जिसे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने मरुभूमि में चालीस वर्ष तक काराई है। यहोवा तुम्हारी परीक्षा ले रहा था। वह तुम्हें विनम्र बनाना चाहता था। वह चाहता था कि वह तुम्हारे हृदय की बात जाने कि तुम उसके आदेशों का पालन करोगे या नहीं। {8:3} यहोवा ने तुमको विनम्र बनाया और तुम्हें भूखा रहने दिया। तब उसने तुम्हें मन्ना खिलाया, जिसे तुम पहले से नहीं जानते थे, जिसे तुम्हारे पूर्वजों ने कभी नहीं देखा था। यहोवा ने यह क्यों किया? क्योंकि वह चाहता था कि तुम जानो कि केवल रोटी ही ऐसी नहीं है जो लोगों को जीवित रखती है। लोगों का जीवन यहोवा के वचन पर आधारित है। {8:4} इन पिछले चालीस वर्षों में तुम्हारे वस्त्र फटे नहीं और यहोवा ने तुम्हारे पैरों की रक्षा सूजन से भी की। {8:5} इसलिए तुम्हें जानना चाहिए कि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें शिक्षित करने और सुधारने के लिए वह सब वैसे ही किया जैसे कोई पिता अपने पुत्र की शिक्षा के लिए करता है। {8:6} “तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन करना चाहिए। उसके बताए मार्ग पर जीवन बिताओ और उसका सम्मान करो। {8:7} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें एक अच्छे देश में ले जा रहा है, ऐसे देश में जिसमें नदियाँ और पानी के ऐसे सोते हैं जिनसे जमीन से पानी घाटियों और पहाड़ियों में बहता है। {8:8} यह ऐसा देश है जिसमें गेहूँ, जौ, अंगूर की बेलें, अंजीर के पेड़ और अनार होते हैं। यह ऐसा देश है जिसमें जैतून का तेल और शहद होता है। {8:9} वहाँ तुम्हें बहुत अधिक भोजन मिलेगा। तुम्हें वहाँ किसी चीज की कमी नहीं होगी। यह ऐसा देश है जहाँ लोहे की चट्टाने हैं। तुम पहाड़ियों से तांबा खोद सकते हो। {8:10} तुम्हारे खाने के लिए पर्याप्त होगा और तुम संतुष्ट होगे। तब तुम यहोवा अपने परमेश्वर की प्रशंसा करोगे कि उसने तुम्हें ऐसा अच्छा देश दिया। {i8:11} यहोवा के कार्यों को मत भूलो {8:11} “सावधान रहो, यहोवा अपने परमेश्वर को न भूलो। सावधान रहो कि आज मैं जिन आदेशों, विधियों और नियमों को दे रहा हूँ उनका पालन हो। {8:12} तुम्हारे खाने के लिए बहुत अधिक होगा और तुम अच्छे मकान बनाओगे और उनमें रहोगे। {8:13} तुम्हारे गाय, मवेशी और भेड़ों के झुण्ड बहुत बड़े होंगे, तुम अधिक से अधिक सोना और चाँदी पाओगे और तुम्हारे पास बहुत सी चीजें होंगी। {8:14} जब ऐसा होगा तो तुम्हें सावधान रहना चाहिए कि तुम्हें घमण्ड न हो। तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर को नहीं भूलना चाहिए। वह तुमको मिस्र से लाया, जहाँ तुम दास थे। {8:15} यहोवा तुम्हें विशाल और भयंकर मरुभूमि से लाया। जहरीले साँप और बिच्छु उस मरुभूमि में थे। जमीन शुष्क थी और कहीं पानी नहीं था। किन्तु यहोवा ने चट्टान के नीचे से पानी दिया। {8:16} मरुभूमि में यहोवा ने तुम्हें मन्ना खिलाया, ऐसी चीज जिसे तुम्हारे पूर्वज कभी नहीं जान सके। यहोवा ने तुम्हारी परिक्षा ली। क्यों? क्योंकि यहोवा तुमको विनम्र बनाना चाहता था। वह चाहता था कि अन्ततः तुम्हारा भला हो। {8:17} अपने मन में कभी ऐसा न सोचो, ‘मैंने यह सारी सम्पत्ति अपनी शक्ति और योग्यता से पाई है।’ {8:18} यहोवा अपने परमेश्वर को याद रखो। याद रखो कि वह ही एक है जो तुम्हें ये कार्य करने की शक्ति देता है। यहोवा ऐसा क्यों करता है? क्योंकि इन दिनों वह तुम्हारे पूर्वजों के साथ की गई वाचा को पूरा कर रहा है। {8:19} “यहोवा अपने परमेश्वर को कभी न भूलो। तुम किसी दूसरे देवता की पूजा या सेवा के लिए उसका अनुसरण न करो! यदि तुम ऐसा करोगे तो मैं तुम्हें आज चेतावनी देता हूँ तुम निश्चय ही नष्ट कर दिये जाओगे! {8:20} यहोवा तुम्हारे लिए अन्य राष्ट्रों को नष्ट कर रहा है। तुम भी उन्हीं राष्ट्रों की तरह नष्ट हो जाओगे जिन्हें यहोवा तुम्हारे सामने नष्ट कर रहा है। यह होगा क्योंकि तुमने यहोवा अपने परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया। {i9:1} यहोवा इस्राएल के लोगों का साथ देगा! {9:1} “ध्यान दो, इस्राएल के लोगो! आज तुम यरदन नदी को पार करोगे। तुम उस देश में अपने से बड़े और शक्तिशाली राष्ट्रों को बलपूर्वक हटाने के लिए जाओगे। उनके नगर बड़े और उनकी दीवारें आकाश को छूती हैं। {9:2} वहाँ के लोग लम्बे और बलवान हैं। वे अनाकी लोग हैं। तुम इन लोगों के बारे में जानते हो। तुम लोगों ने अपने गुप्तचरों को यह कहते हुए सुना, ‘कोई व्यक्ति अनाकी लोगों को नहीं हरा सकता।’ {9:3} किन्तु तुम पूरा विश्वास कर सकते हो कि यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर भस्म करने वाली आग की तरह तुम्हारे आगे नदी के पार जा रहा है। यहोवा उन राष्ट्रों को नष्ट करेगा। वह उन्हें तुम्हारे सामने पराजित करायेगा। तुम उन राष्ट्रों को बलपूर्वक निकाल बाहर करोगे। तुम शीघ्र ही उन्हें नष्ट करोगे। यहोवा ने यह प्रतिज्ञा की है कि ऐसा होगा। {9:4} “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जब उन राष्ट्रों को बलपूर्वक तुमसे दूर हटा दे तो अपने मन में यह न कहना कि, ‘यहोवा हम लोगों को इस देश में रहने के लिए इसलिए लाया कि हम लोगों के रहने का ढंग उचित है।’ यहोवा ने उन राष्ट्रों को तुम लोगों से दूर बलपूर्वक क्यों हटाया? क्योंकि वे बुरे ढंग से रहते थे। {9:5} तुम उनका देश लेने के लिए जा रहे हो, किन्तु इसलिए नहीं कि तुम अच्छे हो और उचित ढंग से रहते थे। तुम उस देश में जा रहे हो और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चाहता है कि जो वचन उसने तुम्हारे पूर्वजों — इब्राहीम, इसहाक और याकूब को दिया वह पूरा हो। {9:6} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उस अच्छे देश को तुम्हें रहने के लिए दे रहा है, किन्तु तुम्हें यह जानना चाहिए कि ऐसा तुम्हारी जिन्दगी के अच्छे ढंग के होने के कारण नहीं हो रहा है। सच्चाई यही है कि तुम अड़ियल लोग हो! {i9:7} यहोवा का क्रोध याद रखो {9:7} “यह मत भूलो कि तुमने यहोवा अपने परमेश्वर को मरुभूमि में क्रोधित किया! तुमने उसी दिन से जिस दिन से मिस्र से बाहर निकले और इस स्थान पर आने के दिन तक यहोवा के आदेश को मानने से इन्कार किया है। {9:8} तुमने यहोवा को होरेब (सीनै) पर्वत पर भी क्रोधित किया। यहोवा तुम्हें नष्ट कर देने की सीमा तक क्रोधित था! {9:9} मैं पत्थर की शिलाओं को लेने के लिए पर्वत के ऊपर गया, जो वाचा यहोवा ने तुम्हारे साथ किया, उन शिलाओं में लिखे थे। मैं वहाँ पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात ठहरा। मैंने न रोटी खाई, न ही पानी पिया। {9:10} तब यहोवा ने मुझे पत्थर की शिलाएँ दीं। यहोवा ने उन शिलाओं पर अपनी उंगलियों से लिखा है। उसने उस हर एक बात को लिखा है जिन्हें उसने आग में से कहा था। जब तुम पर्वत के चारों ओर इकट्ठे थे। {9:11} “इसलिए, चालीस दिन और चालीस रात के अन्त में यहोवा ने मुझे साक्षीपत्र की दो शिलाएँ दीं। {9:12} तब यहोवा ने मुझसे कहा, ‘उठो और शीघ्रता से यहाँ से नीचे जाओ। जिन लोगों को तुम मिस्र से बाहर लाए हो उन लोगों ने अपने को बरबाद कर लिया है। वे उन बातों से शीघ्रता से हट गए हैं, जिनके लिए मैंने आदेश दिया था। उन्हो ने सोने को पिघला कर अपने लिए एक मूर्ति बना ली है।’ {9:13} “यहोवा ने मुझसे यह भी कहा, ‘मैंने इन लोगों पर अपनी निगाह रखी है। वे बहुत अड़ियल हैं! {9:14} मुझे इन लोगों को पूरी तरह नष्ट कर देने दो, कोई व्यक्ति उनका नाम कभी याद नहीं करेगा। तब मैं तुमसे दूसरा राष्ट्र बनाऊँगा जो उन के राष्ट्र से बड़ा और अधिक शक्तिशाली होगा।’ {i9:15} सोने का बछड़ा {9:15} “तब मैं मुड़ा और पर्वत से नीचे आया। पर्वत आग से जल रहा था। साक्षीपत्र की दोनों शिलाएँ मेरे हाथ में थीं। {9:16} जब मैंने नजर डाली तो देखा कि तुमने यहोवा अपने परमेश्वर के विरूद्ध पाप किया है, तुमने अपने लिए पिघले सोने से एक बछड़ा बनाया है। यहोवा ने जो आदेश दिया है उससे तुम शीघ्रता से दूर हट गए हो। {9:17} इसलिए मैंने दोनों शिलाएँ लीं और उन्हें नीचे डाल दिया। वहाँ तुम्हारी आँखों के सामने शिलाओं के टुकड़े कर दिए। {9:18} तब मैं यहोवा के सामने झुका और अपने चेहरे को जमीन पर करके चालीस दिन और चालीस रात वैसे ही रहा। मैंने न रोटी खाई, न पानी पिया। मैंने यह इसलिए किया कि तुमने इतना बुरा पाप किया था। तुमने वह किया जो यहोवा के लिए बुरा है और तुमने उसे क्रोधित किया। {9:19} मैं यहोवा के भयंकर क्रोध से डरा हुआ था। वह तुम्हारे विरुद्ध इतना क्रोधित था कि तुम्हें नष्ट कर देता। किन्तु यहोवा ने मेरी बात फिर सुनी। {9:20} यहोवा हारून पर बहुत क्रोधित था, उसे नष्ट करने के लिए उतना क्रोध काफी था! इसलिए उस समय मैंने हारून के लिए भी प्रार्थना की। {9:21} मैंने उस पापपूर्ण तुम्हारे बनाए सोने के बछड़े को लिया और उसे आग मे जला दिया। मैंने उसे छोटे — छोटे टुकड़ों में तोड़ा और मैंने बछड़े के टुकड़ों को तब तक कुचला जब तक वे धूलि नहीं बन गए और तब मैंने उस धूलि को पर्वत से नीचे बहने वाली नदी में फेंका। {i9:22} मूसा यहोवा से इस्राएल के लिये क्षमा माँगता है {9:22} “मस्सा में तबेरा और किब्रोतहतावा पर तुमने फिर यहोवा को क्रोधित किया {9:23} और जब यहोवा ने तुमसे कादेशबर्ने छोड़ने को कहा तब तुमने उसकी आज्ञा का पालन नहीं किया। उसने कहा, ‘आगे बढ़ो और उस देश में रहो जिसे मैंने तुम्हें दिया है।’ किन्तु तुमने उस पर विश्वास नहीं किया। तुमने उसके आदेश की अनसुनी की। {9:24} पूरे समय जब से मैं तुमहें जानता हूँ तुम लोगों ने यहोवा की आज्ञा पालन करने से इन्कार किया है। {9:25} “इसलिए मैं चालीस दिन और चालीस रात यहोवा के सामने झुका रहा। क्यों? क्योंकि यहोवा ने कहा कि वह तुम्हें नष्ट करेगा। {9:26} मैंने यहोवा से प्रार्थना की। मैंने कहाः यहोवा मेरे स्वामी, अपने लोगों को नष्ट न कर। वे तेरे अपने हैं। तूने अपनी बडी शक्ति और दृढ़ता से उन्हें स्वतन्त्र किया और मिस्र से लाया। {9:27} तू अपने सेवक इब्राहीम, इसहाक और याकूब को दी गई अपनी प्रतिज्ञा को याद कर। तू यह भूल जा कि ये लोग कितने हठीले हैं। तू उनके बुरे ढंग और पाप को न देख। {9:28} यदि तू अपने लोगों को दण्ड देगा तो मिस्री कह सकते हैं, ‘यहोवा अपने लोगों को उस देश में ले जाने में समर्थ नहीं था जिसमें ले जाने का उसने वचन दिया था और वह उनसे घृणा करता था। इसलिए वह उन्हें मारने के लिए मरुभूमि में ले गया।’ {9:29} किन्तु वे लोग तेरे लोग हैं, यहोवा वे तेरे अपने हैं। तू अपनी बड़ी शक्ति और दृढ़ता से उन्हें मिस्र से बाहर लाया। {i10:1} नई पत्थर की शिलाएँ {10:1} “उस समय, यहोवा ने मुझसे कहा, ‘तुम पहली शिलाओं की तरह पत्थर काटकर दो शिलाएँ बनाओ। तब तुम मेरे पास पर्वत पर आना। अपने लिए एक लकड़ी का सनदूक भी बनाओ। {10:2} मैं पत्थर की शिलाओं पर वे ही शब्द लिखूँगा जो तुम्हारे द्वारा तोड़ी गई पहली शिलाओं पर थे। तब तुम्हें इन नयी शिलाओं को सन्दूक में रखना चाहिए।’ {10:3} “इसलिए मैंने देवदार का एक सन्दूक बनाया। मैंने पहली शिलाओं की तरह पत्थर काटकर दो शिलाएँ बनाईं। तब मैं पर्वत पर गया। मेरे हाथ में दोनों शिलाएँ थीं {10:4} और यहोवा ने उन्हीं शब्दों को लिखा जिन्हें उसने तब लिखा था जब दस आदेशों को उसने आग में से तुम्हें दिया था और तुम पर्वत के चारों ओर इकट्ठे थे। तब यहोवा ने पत्थर की शिलाएँ मुझे दीं। {10:5} मैं मुड़ा और पर्वत के नीचे आया। मैंने अपने बनाएँ सन्दूक में शिलाओं को रखा। यहोवा ने मुझे उसमें रखने को कहा और शिलाएँ अब भी उसी सन्दूक में हैं।” {10:6} (इस्राएल के लोगों ने याकान के लोगों के कुँए से मोसेरा की यात्रा की। वहाँ हारून मरा और दफनाया गया। हारून के पुत्र एलीआजर ने हारून के स्थान पर याजक के रूप में सेवा आरम्भ की। {10:7} तब इस्राएल के लोग मोसेरा से गुदगोदा गए और वे गुदगोदा से नदियों के प्रदेश योतबाता को गए। {10:8} उस समय यहोवा ने लेवी के परिवार समूह को अपने विशेष काम के लिए अन्य परिवार समूहों से अलग किया। उन्हें यहोवा के साक्षीपत्र के सन्दूक को ले चलने का कार्य करना था। वे याजक की सहायता भी यहोवा के मन्दिर में करते थे और यहोवा के नाम पर, वे लोगों को आशीर्वाद देने का काम भी करते थे। वे अब भी यह विशेष काम करते हैं। {10:9} यही कारण है कि लेवीवंश के लोगों को भूमि का कोई भाग अन्य परिवार समूहों की भांति नहीं मिला। लेविवंशियों के हिस्से में यहोवा पड़ा। यही योहवा तुम्हारे परमेश्वर ने उन्हें दिया।) {10:10} “मैं पर्वत पर पहली बार की तरह चालीस दिन और चालीस रात रुका रहा। यहोवा ने उस समय भी मेरी बातें सुनीं। यहोवा ने तुम लोगों को नष्ट न करने का निश्चय किया। {10:11} योहवा ने मुझसे कहा, ‘जाओ और लोगों को यात्रा पर ले जाओ। वे उस देश में जाएंगे और उसमें रहेंगे जिसे मैंने उनके पूर्वजों को देने का वचन दिया है।’ {i10:12} यहोवा वास्तव में क्या चाहता है {10:12} “इस्राएल के लोगो, अब सुनो! यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चाहता है कि तुम ऐसा करोः यहोवा अपने परमेश्वर का सम्मान करो और वह जो कुछ तुमसे कहे, करो। यहोवा अपने परमेश्वर से प्रेम करो और उसकी सेवा हृदय और आत्मा से करो। {10:13} आज मैं जिस यहोवा के नियमों और आदेशों को बता रहा हूँ, उसका पालन करो। ये आदेश और नियम तुम्हारी अपनी भलाई के लिए हैं। {10:14} “हर एक चीज, यहोवा तुम्हारे परमेश्वर की है। स्वर्ग, सबसे ऊँचा भी उसी का है। पृथ्वी और उस पर की सार चीजें यहोवा तुम्हारे परमेश्वर की हैं। {10:15} यहोवा तुम्हारे पूर्वजों से बहुत प्रेम करता था। वह उनसे इतना प्रेम करता था कि उनके वंशज, तुमको, उसने अपने लोग बनाया। उसने किसी अन्य राष्ट्र के स्थान पर तुम्हें चुना और आज भी तुम उसके चुने हुये लोग हो। {i10:16} इस्राएलियों को यहोवा को याद रखना चाहिए {10:16} “तुम्हें अड़ियल होना छोड़ देना चाहिए और अपने हृदय को यहोवा पर लगाना चाहिए। {10:17} क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर है। वह देवताओं का परमेश्वर, और ईश्वरों का ईश्वर है। वह महान परमेश्वर है। वह आश्यर्जनक और शक्तिशाली योद्धा है। यहोवा की दृष्टि में सभी मनुष्य बराबर हैं। यहोवा अपने इरादे को बदलने के लए धन नहीं लेता। {10:18} वह अनाथ बच्चों की सहायता करता है। वह विधवाओं की सहायता करता है। वह हमारे देश में अजनबियों से भी प्रेम करता है। वह उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। {10:19} इसलिए तुम्हें भी इन अजनबियों से प्रेम करना चाहिए। क्यों? क्योंकि तुम स्वयं भी मिस्र में अजनबी थे। {10:20} “तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर का सम्मान करना चाहिए और केवल उसी की उपासना करनी चाहिए। उसे कभी न छोड़ो। जब तुम वचन दो तो केवल उसके नाम का उपयोग करो। {10:21} तुम्हें एकमात्र यहोवा की प्रशंसा करनी चाहिए। उसने तुम्हारे लिए महान और आश्चर्यजनक काम किया है। इन कामों को तुमने अपनी आँखों से देखा है। {10:22} जब तुम्हारे पूर्वज मिस्र गए थे तो केवल सत्तर थे। अब यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें बहुत अधिक लोगों के रूप में इतना बढ़ा दिया है जितने आकाश में तारे हैं। {i11:1} यहोवा का स्मरण रखो {11:1} “इसलिए तुम्हें अपने परमेश्वर यहोवा से प्यार करना चाहिए। तुम्हें वही करना चाहिए जो वह करने के लिए तुमसे कहता है। तुम्हें उसके विधियों, नियमों और आदेशों का सदैव पालन करना चाहिए। {11:2} उन बड़े चमत्कारों को आज तुम याद करो जिन्हें यहोवा ने तुम्हें शिक्षा देने के लिए दिखाया। वे तुम लोग थे तुम्हारे बच्चे नहीं, जिन्होंने उन घटनाओं को होते देखा और उनके बीच जीवन बिताया। तुमने देखा है कि यहोवा कितना महान है। तुमने देखा है कि वह कितना शक्तिशाली है और तुमने उसके पराक्रमपूर्ण किये गए कार्यों को देखा है। {11:3} तुम्हारे बच्चों ने नहीं, तुमने उसके चमत्कार देखे हैं। तुमने वह सब देखा जो उसने मिस्र के सम्राट फिरौन और उसके पूरे देश के साथ किया। {11:4} तुम्हारे बच्चों ने नहीं, तुमने मिस्र की सेना, उनके घोड़ों और रथों के साथ यहोवा ने जो किया, देखा। वे तुम्हारा पीछा कर रहे थे, किन्तु तुमने देखा यहोवा ने उन्हें लालसागर के जल में डुबा दिया। तुमने देखा कि यहोवा ने उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया। {11:5} वे तुम थे, तुम्हारे बच्चे नहीं, जिन्होंने यहोवा अपने परमेश्वर को अपने लिए मरुभूमि में सब कुछ तब तक करते देखा जब तक तुम इस स्थान पर आ न गए। {11:6} तुमने देखा कि यहोवा ने रूबेन के परिवार के एलिआब के पुत्रों दातान और अबीराम के साथ क्या किया। इस्राएल के सभी लोगों ने पृथ्वी को मुँह की तरह खुलते और उन आदमियों को निगलते देखा और पृथ्वी ने उनके परिवार, खेमे, सारे सेवकों और उनके सभी जानवरों को निगल लिया। {11:7} वे तुम थे तुम्हारे बच्चे नहीं, जिन्होंने यहोवा द्वारा किये गए इन बड़े चम्तकारों को देखा। {11:8} “इसलिए तुम्हें आज जो आदेश मैं दे रहा हूँ, उन सबका पालन करना चाहिए। तब तुम शक्तिशाली बनोगे और तुम नदी को पार करने योग्य होगे और उस देश को लोगे जिसमें प्रवेश करने के लिए तुम तैयार हो। {11:9} उस देश में तुम्हारी उम्र लम्बी होगी। यह वही देश है जिसे यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों और उनके वंशजों को देने का वचन दिया था। इस देश में दूध तथा शहद बहता है। {11:10} जो देश तुम पाओगे वह मिस्र की तरह नहीं है जहाँ से तुम आए। मिस्र में तुम बीज बोते थे और अपने पौधों को सींचने के लिए नहरों से अपने पैरों का उपयोग कर पानी निकालते थे। तुम अपने खेतों को वैसे ही सींचते थे जैसे तुम सब्जियों के बागों की सिंचाई करते थे। {11:11} लेकिन जो प्रदेश तुम शीघ्र ही पाओगे, वैसा नहीं है। इस्राएल में पर्वत और घाटियाँ हैं। यहाँ की भूमि वर्षा से जल प्राप्त करती है जो आकाश से गिरती है। {11:12} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उस देश की देख — रेख करता है! यहोवा तुम्हारा परमेश्वर वर्ष के आरम्भ से अन्त तक उसकी गेख — रेख करता है। {11:13} “तुम्हें जो आदेश मैं आज दे रहा हूँ, उसे तुम्हें सावधानी से सुनना चाहिएः यहोवा से प्रेम और उसकी सेवा पूरे हृदय और आत्मा से करनी चाहिए। यदि तुम वैसा करोगे {11:14} तो मैं ठीक समय पर तुम्हारी भूमि के लिए वर्षा भेजूँगा। मैं पतझड़ और बसंत के समय की भी वर्षा भेजूँगा। तब तुम अपना अन्न, नया दाखमधु और तेल इकट्ठा करोगे {11:15} और मैं तुम्हारे खेतों में तुम्हारे मवेशियों के लिए घास उगाऊंगा। तुम्हारे भोजन के लिए बहुत अधिक होगा।” {11:16} “किन्तु सावधान रहो कि मूर्ख न बनाए जाओ! दूसरे देवताओं की पूजा और सेवा के लिए उनकी ओर न मुड़ो। {11:17} यदि तुम ऐसा करोगे तो यहोवा तुम पर बहुत क्रोधित होगा। वह आकाश को बन्द कर देगा और वर्षा नहीं होगी। भूमि से फसल नहीं उगेगी और तुम उस अच्छे देश में शीघ्र मर जाओगे जिसे यहोवा तुम्हें दे रहा है। {11:18} “जिन आदेशों को मैं दे रहा हूँ, याद रखो, उन्हें हृदय और आत्मा में धारण करो। इन आदेशों को लिखो और याद दिलाने वाले चिन्ह के रूप में इन्हें अपने हाथों पर बांधों तथा ललाट पर धारण करो। {11:19} इन नियमों की शिक्षा अपने बच्चों को दो। इनके बारे में अपने घर में बैठे, सड़क पर टहलते, लेटते और जागते हुए बताया करो। {11:20} इन आदेशों को अपने घर के द्वार स्तम्भों और फाटकों पर लिखो। {11:21} तब तुम और तुम्हारे बच्चे उस देश में लम्बे समय तक रहेंगे जिसे यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों को देने का वचन दिया है। तुम तब तक रहोगे जब तक धरती के ऊपर आकाश रहेगा। {11:22} “सावधान रहो कि तुम उस हर एक आदेश का पालन करते रहो जिसे पालन करने के लिए मैने तुमसे कहा है: अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, उसके बताये सभी मार्गों पर चलो और उसके ऊपर विश्वास रखने वाले बनो। {11:23} जब, तुम उस देश में जाओगे तब यहोवा उन सभी दूसरे राष्ट्रों को बलपूर्वक बाहर करेगा। तुम उन राष्ट्रों से भूमि लोगे जो तुम से बड़े और शक्तिशाली हैं। {11:24} वह सारा प्रदेश जिस पर तुम चलोगे, तुम्हारा होगा। तुम्हारा देश दक्षिण में मरुभूमि से लेकर लगातार उत्तर में लबानोन तक होगा। यह पूर्व में फरात नदी से लेकर लगातार भूमध्य सागर तक होगा। {11:25} कोई व्यक्ति तुम्हारे विरुद्ध खड़ा नहीं होगा। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन लोगों को तुमसे भयभीत करेगा जहाँ कहीं तुम उस देश में जाओगे। यह वही है जिसके लिए यहोवा ने पहले तुमको वचन दिया था। {i11:26} इस्राएलियों के लिए चुनावः आशीर्वाद या अभिशाप {11:26} “आज मैं तुम्हें आशीर्वाद या अभिशाप में से एक को चुनने दे रहा हूँ। {11:27} तुम आशीर्वाद पाओगे, यदि तुम योहवा अपने परमेश्वर के उन आदेशों पर ध्यान दोगे और उनका पालन करोगे। {11:28} किन्तु तुम उस समय अभिशाप पाओगे जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर के आदेशों के पालन से इन्कार करोगे, अर्थात् जिस मार्ग पर चलने का आदेश मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ, उससे मुड़ोगे और उन देवताओं का अनुसरण करोगे जिन्हें तुम जानते नहीं। {11:29} “जब यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें उस देश में पहुँचा देगा जहाँ तुम रहोगे, तब तुम्हें गरीज्जीम पर्वत की चोटी पर जाना चाहिए और वहाँ से आशीर्वादों को पढ़कर लोगों को सुनाना चाहिए। तुम्हें एबाल पर्वत की चोटी पर भी जाना चाहिए और वहाँ से अभिशापों को लोगों को सुनाना चाहिए। {11:30} ये पर्वत यरदन नदी की दूसरी ओर कनानी लोगों के प्रदेश में है जो यरदन घाटी में रहते हैं। ये पर्वत गिल्गाल नगर के समीप मोरे के बांज के पेड़ों के निकट पश्चिम की ओर है। {11:31} तुम यरदन नदी को पार करके जाओगे। तुम उस प्रदेश को लोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको दे रहा है, यह देश तुम्हारा होगा। जब तुम इस देश में रहने लगो तो {11:32} उन सभी विधियों और नियमों का पालन सावधानी से करो जिन्हें आज मैं तुम्हें दे रहा हूँ। {i12:1} परमेश्वर की उपासना का स्थान {12:1} “ये विधियाँ और नियम हैं जिनका जीवन भर पालन करने के लिए तुम्हें सावधान रहना चाहिए। तुम्हें इन नियमों का पालन तब तक करना चाहिए जब तक तुम उस देश में रहो जिसे यहोवा तुम्हारे पूर्वजों का परमेश्वर, तुमको दे रहा है। {12:2} तुम उस प्रदेश को उन राष्ट्रों से लोगे जो अब वहाँ रह रहे हैं। तुम्हें उन सभी जगहों को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए जहाँ ये राष्ट्र अपने देवताओं की पूजा करते हैं। ये स्थान ऊँचे पहाड़ों, पहाड़ियों और हरे वृक्षों के नीचे हैं। {12:3} तुम्हें उनकी वेदियों को नष्ट करना चाहिए और उनके विशेष पत्थरों को टुकड़े — टुकड़े कर देना चाहिए। तुन्हें उनके अशेरा स्तम्भों को जलाना चाहिए। उनके देवताओं की मूर्तियों को काट डालना चाहिए और उनके नाम वहाँ से मिटा देना चाहिये। {12:4} “किन्तु तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर की उपासना उस प्रकार नहीं करनी चाहिए जिस प्रकार वे लोग अपने देवताओं की पूजा करते हैं। {12:5} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर अपने मन्दिर के लिए तुम्हारे परिवार समूह से विशेष स्थान चुनेगा। वह वहाँ अपना नाम प्रतिष्ठिट करेगा। तुम्हें उसकी उपासना करने के लिए उस स्थान पर जाना चाहिए। {12:6} वहाँ तुम्हें अपनी होमबलि, अपनी बलियाँ, दशमांश, अपनी विशेष भेंट, यहोवा को वचन दी गई कोई भेंट, अपनी स्वेच्छा भेंट और अपने मवेशियों के झुण्ड एवं रेवड़ के पहलौठे बच्चे लाने चाहिए। {12:7} तुम और तुम्हारे परिवार वहाँ भोजन करेंगे और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर वहाँ तुम्हारे साथ होगा। जिन अच्छी चीजों के लिये तुमने काम किया है उसका भोग तुम करोगे, क्योंकि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुमको आशीर्वाद दिया है। {12:8} “उस समय तुम्हें उसी प्रकार उपासना करते नहीं रहना चाहिए जिस प्रकार हम उपासना करते आ रहे हैं। अभी तक हममें से हर एक जैसा चाहे परमेश्वर की उपासना कर रहा था। {12:9} क्यों? क्योंकि अभी तक हम उस शान्त देश में नहीं पहुँचे थे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। {12:10} लेकिन तुम यरदन नदी को पार करोगे और उस देश में रहोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। वहाँ यहोवा तुम्हें सभी शत्रुओं से चैन से रहने देगा और तुम सुरक्षित रहोगे। {12:11} तब यहोवा अपने लिये विशेष स्थान चुनेगा वह वहाँ अपना नाम प्रतिष्ठित करेगा और तुम उन सभी चीजों को वहीं लाओगे जिनके लिए मैं आदेश दे रहा हूँ। वहीं तुम अपनी होमबलि, अपनी बलियाँ, दशमांश, अपनी विशेष भेंट, यहोवा को वचन दी गई भेंट, अपनी स्वेच्छा भेंट और अपने मवेशियों के झुण्ड एवं रेवड़ का पहलौठा बच्चा लाओ। {12:12} उस स्थान पर तुम अपने सभी लोगों, अपने बच्चों, सभी सेवकों और अपने नगर में रहने वाले सभी लेवीवंशियों के साथ इकट्ठे होओ। (ये लेवीवंशी अपने लिए भूमि का कोई भाग नहीं पाएंगे।) यहोवा अपने परमेश्वर के साथ वहाँ आनन्द मनाओ। {12:13} सावधानी बरतो कि तुम अपनी होमबलियों को जहाँ देखो वहाँ न चढ़ा दो। {12:14} तुम्हारे परिवार समूहों में से किसी एक के क्षेत्र में यहोवा अपना विशेष स्थान चुनेगा। वहाँ अपनी होमबलि चढ़ाओ और तुम्हें बताए गए सभी अन्य काम वहीं करो। {12:15} “जिस किसी जगह तुम रहो तुम नीलगाय या हिरन जैसे अच्छे जानवरों को मारकर खा सकते हो। तुम उतना माँस खा सकते हो जितना तुम चाहो, जितना यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तम्हें दे। कोई भी व्यक्ति इस माँस को खा सकता है, चाहे वह पवित्र हो या अपवित्र। {12:16} लेकिन तुम्हें खून नहीं खाना चाहिए। तुम्हें खून को पानी की तरह जमीन पर बहा देना चाहिए। {12:17} “कुछ ऐसी चीजें है जिन्हें तुम्हें उन जगहों पर नहीं खाना चाहिए जहाँ तुम रहते हो। वे चीजें ये हैः परमेश्वर के हिस्से के तुम्हारे अन्न का कोई भाग, उसके हिस्से की नई दाखमधु और तेल का कोई भाग, तुम्हारे मवेशियों के झुण्ड या रेवड़ का पहलौठा बच्चा, परमेश्वर को वचन दी गई कोई भेंट, कोई स्वेच्छा भेंट या कोई भी परमेश्वर की अन्य भेंट। {12:18} तुम्हें उन भेंटों को केवल उसी स्थान पर खाना चाहिए जहाँ यहोवा तुम्हारा पमेश्वर तुम्हारे साथ हो। अर्थात् यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जिस स्थान को चुने। तुम्हें वहीं जाना चाहिए और अपने पुत्रों, पुत्रियों, सभी सेवकों और तुम्हारे नगर में रहने वाले लेवीवंशियों के साथ मिलकर खाना चाहिए। यहोवा अपने परमेश्वर के साथ वहाँ आनन्द मनाओ। जिन चीज़ों के लिए काम किया है उनका आनन्द लो। {12:19} ध्यान रखो कि इन भोजनों को लेवीवंशियों के साथ बाँटकर खाओ। यह तब तक करो जब तक अपने देश में रहो। {12:20} “यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने यह वचन दिया है कि वह तुम्हारे देश की सीमा को और बढ़ाएगा। जब यहोवा ऐसा करेगा तो तुम उसके चुने हुए विशेष निवास से दूर रह सकते हो। यदि यह अत्यधिक दूर हो और तुम्हें माँस की भूख है तो तुम किसी भी {12:21} प्रकार के माँस को, जो तुम्हारे पास है खा सकते हो। तुम यहोवा के दिये झुण्ड और रेवड़ में से किसी भी जानवर को मार सकते हो। यह वैसे ही करो जैसा करने का आदेश मैने दिया है। यह माँस, तुम जब चाहो जहाँ भी रहो, खा सकते हौ। {12:22} तुम इस माँस को वैसे ही खा सकते हो जैसे नीलगाय और हिरन का माँस खाते हो। कोई भी व्यक्ति यह कर सकता है चाहे वे लोग पवित्र हों या अपवित्र हों। {12:23} किन्तु निश्चय ही खून न खाओ। क्यों? क्योंकि खून में जीवन है और तुम्हें वह माँस नहीं खाना चाहिए जिसमें अभी जीवन हो। {12:24} खून मत खाओ। तुम्हें खून को पानी की तरह जमीन पर डाल देना चाहिए। {12:25} तुम्हें वह सब कुछ करना चाहिए जिसे परमेश्वर उचित ठहराता है। इसलिए खून मत खाओ। तब तुम्हारा और तुम्हारे वंशजों का भला होगा। {12:26} “जिन चीज़ों को तुमने अर्पित किया है और जो तुम्हारी वचन दी गई भेंटें हैं उन्हें उस विशेष स्थान पर ले जाना जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चुनेगा। {12:27} तुम्हें अपनी होमबलि वहीं चढ़ानी चाहिए। अपनी होमबलि का मांस और रक्त यहोवा अपने परमेश्वर की वेदी पर चढ़ाओ। तब तुम माँस खा सकते हो। {12:28} जो आदेश मैं दे रहा हूँ उनके पालन में सावधान रहो। जब तुम वह सब कुछ करते हो जो अच्छा है और ठीक है, जो यहोवा तुम्हारे परमेश्वर को प्रसन्न करता है तब हर चीज तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे वंशजों के लिए सदा भली रहेगी। {12:29} “जब तुम दूसरे राष्ट्रों के पास अपनी धरती को लेने जाओगे तो, यहोवा उन्हें हटने के लिए विवश करेगा तथा उन्हें नष्ट करेगा। तुम वहाँ जाओगे और उनसे भूमि लोगे। तुम उनकी भूमि पर रहोगे। {12:30} किन्तु ऐसा हो जाने के बाद सावधान रहो! वे राष्ट्र जिन देवताओं की पूजा करते हैं उन देवताओं के पास सहायता के लिए मत जाओ! यह सीखने की कोशिश न करो कि वे अपने देवताओं की पूजा कैसे करते हैं? वे जैसे पूजा करते हैं वैसे पूजा करने के बारे में न सोचो। {12:31} तुम यहोवा अपने परमेश्वर की वैसे उपासना नहीं करोगे जैसे वे अपने देवताओं की करते हैं। क्यों? क्योंकि वे अपनी पूजा में सब तरह की बुरी चीजें करते हैं जिनसे यहोवा घृणा करता है। वे अपने देवताओं की बलि के लिए अपने बच्चों को भी जला देते हैं। {12:32} “तुम्हें उन सभी कामों को करने के लिए सावधान रहना चाहिए जिनके लिए मैं आदेश देता हूँ। जो मैं तुमसे कह रहा हूँ उसमें न तो कुछ जोड़ो, न ही उसमें से कुछ कम करो। {i13:1} झूठे नबियों का क्या किया जाए {13:1} “कोई नबी या स्वप्न फल ज्ञाता तुम्हारे पास आ सकता है। वह यह कह सकता है कि वह कोई दैवी चिन्ह या आश्चर्यकर्म दिखाएगा। {13:2} वह दैवी चिन्ह या आश्चर्यकर्म, जिसके बारे में उसने तुम्हें बताया है, वह सही हो सकता है। तब वह तुमसे कह सकता है कि तुम उन देवताओं का अनुसरण करो (जिन्हें तुम नहीं जानते।) वह तुमसे कह सकता है, ‘आओ हम उन देवताओं की सेवा करें!’ {13:3} उस व्यक्ति की बातों पर ध्यान मत दो। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारी परीक्षा ले रहा है। वह यह जानना चाहता है कि तुम पूरे हृदय और आत्मा से उस से प्रेम करते हो अथवा नहीं। {13:4} तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर का अनुसरण करना चाहिए। तुम्हें उसका सम्मान करना चाहिए। यहोवा के आदेशों का पालन करो और वह करो जो वह कहता है। यहोवा की सेवा करो और उसे कभी न छोड़ो! {13:5} वह नबी या स्वप्न फल ज्ञाता मार दिया जाना चाहिए। क्यों? क्योंकि वह ही है जो तुमसे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर की आज्ञा मानने से रोक रहा है। यहोवा एक ही है जो तुमको मिस्र से बाहर लाया। उसने तुमको वहाँ की दासता के जीवन से स्वतन्त्र किया। वह व्यक्ति यह कोशिश कर रहा है कि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के आदेश के अनुसार जीवन मत बिताओ। इसलिए अपने लोगों से बुराई को दूर करने के लिए उस व्यक्ति को अवश्य मार डालना चाहिए। {13:6} “कोई तुम्हारे निकट का व्यक्ति गुप्त रूप से दूसरे देवताओं की पूजा के लिए तुम्हें सहमत कर सकता है। यह तुम्हारा अपना भाई, पुत्र, पुत्री, तुम्हारी प्रिय पत्नी या तुम्हारा प्रिय दोस्त हो सकता है। वह व्यक्ति कह सकता है, ‘आओ चलें, दूसरे देवताओं की सेवा करें।’ (ये वैसे देवता हैं जिन्हें तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने कभी नहीं जाना। {13:7} वे उन लोगों के देवता हैं जो तुम्हारे चारों ओर अन्य देशों में रहते हैं, कुछ समीप और कुछ बहुत दूर।) {13:8} तुम्हें उस व्यक्ति के साथ सहमत नहीं होना चाहिए। उसकी बात मत सुनो। उस पर दया न दिखाओ। उसे छोड़ना नहीं। उसकी रक्षा मत करो। {13:9} तुम्हें उसे मार डालना चाहिए। तुम्हें उसे पत्थरों से मार डालना चाहिए! पत्थर उठाने वालों में तुम्हें पहला होना चाहिए और उसे मारना चाहिए। तब सभी लोगों को उसे मार देने के लिए {13:10} उस पर पत्थर फेंकना चाहिए। क्यों? क्योंकि उस व्यक्ति ने तुम्हें यहोवा तुम्हारे परमेश्वर से दूर हटाने का प्रयास किया। यहोवा केवल एक है जो तुम्हें मिस्र से लाया, जहाँ तुम दास थे। {13:11} तब इस्राएल के सभी लोग सुनेंगे और भयभीत होंगे और वे तुम्हारे बीच और अधिक इस प्रकार के बुरे काम नहीं करेंगे। {13:12} “यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुमको रहने के लिए नगर दिये हैं। कभी — कभी तुम नगरों में से किसी के बारे में बुरी खबर सुन सकते हो। तुम सुन सकते हो कि {13:13} तुम्हारे अपने राष्ट्रों में ही कुछ बुरे लोग अपने नगर के लोगों को बुरी बातों के लिए तैयार कर रहे हैं। वे अपने नगर के लोगों से कह सकते हैं, ‘आओ चलें, दूसरे देवताओं की सेवा करें।’ (ये ऐसे देवता होंगे जिन्हें तुमने पहले नहीं जाना होगा।) {13:14} यदि तुम ऐसी सूचना सुनो तो तुम्हें जहाँ तक हो सके यह जानने का प्रयत्न करना चाहिए कि यह सत्य है अथवा नहीं। यदि तुम्हें मालूम होता है कि यह सत्य है, यदि प्रमाणित कर सको कि सचमुच ऐसी भयंकर बात हुई, {13:15} तब तुम्हें उस नगर के लोगों को अवश्य दण्ड देना चाहिए वे सभी जान से मार डाले जाने चाहिए और उनके सभी मवेशियों को भी मार डालो। तुम्हें उस नगर के लोगों को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। {13:16} तब तुम्हें सभी कीमती चिजों को इकट्ठा करना चाहिए और उसे नगर के बीच ले जाना चाहिए और सब चीजों को नगर के साथ जला देना चाहिए। यह तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के लिए होमबलि होगी। नगर को सदा के लिए राख का ढेर हो जाना चाहिए यह दुबारा नहीं बनाया जाना चाहिए। {13:17} उस नगर की हर एक चीज़ परमेश्वर को, नष्ट करने के लिए दी जानी चाहिए। इसलिए तुम्हें कोई चीज अपने लिए नहीं रखनी चाहिए। यदि तुम इस आदेश का पालन करते हो तो यहोवा तुम पर उतना अधिक क्रोधित होने से अपने को रोक लेगा। यहोवा तुम पर दया करेगा और तरस खायेगा। वह तुम्हारे राष्ट्र को वैसा बड़ा बनाएगा जैसा उसने तुम्हारे पूर्वजों को वचन दिया था। {13:18} यह तब होगा जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर की बात सुनोगे अर्थात् यदि तुम उन आदेशों का पालन करोगे जिन्हें मैं तुम्हें आज दे रहा हूँ। तुम्हें वही करना चाहिए जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उचित बताता है। {i14:1} इस्राएली, यहोवा के विशेष लोग {14:1} “तुम यहोवा अपने परमेश्वर के बच्चे हो। यदी कोई मरे तो तुम्हें अपने को शोक में पड़ा दिखाने के लिए स्वयं को काटना नहीं चाहिए। तुम्हें अपने सिर के अगले भाग के बाल नहीं कटवाने चाहिए। {14:2} क्यों? क्योंकि तुम अन्य लोगों से भिन्न हो। तुम यहोवा अपने परमेश्वर के विशेष लोग हो। उसने संसार के सभी लोगों में से, तुम्हें अपने विशेष लोगों के रूप मे चुना है। {i14:3} इस्राएलियों का भोजन, जिसे खाने की अनुमति थी {14:3} “ऐसी कोई चीज न खाओ, यहोवा जिसे खाना बुरा कहता है। {14:4} तुम इन जानवरों को खा सकते होः गाय, भेड़, बकरी, {14:5} हिरन, नीलगाय, मृग, जंगली भेड़, जंगली बकरी, चीतल और पहाड़ी भेड़। {14:6} तुम ऐसे किसी जानवर को खा सकते हो जिसके खुर दो भागों मे बंटे हों और जो जुगाली करते हों। {14:7} किन्तु ऊँटों, खरगोशर या चहानी बिज्जू को न खाओ। ये जानवर जुगाली करते हैं किन्तु इनके खुर फटे नहीं होते। इसलिए ये जानवर तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं। {14:8} तुम्हें सूअर नहीं खाना चाहिए। उनके खुर फटे होते हैं, किन्तु वे जुगाली नहीं करते। इसलिए सूअर तुम्हारे लिए स्वछ भोजन नहीं है। सूअर का कोई माँस न खाओ और न ही मरे हुए सूअर को छुओ। {14:9} “तुम ऐसी कोई मछली खा सकते हो जिसके डैने और चोइटें हों। {14:10} किन्तु जल में रहने वाले किसी ऐसे प्राणी को न खाओ जिसके डैने और चोइटें न हों। ये तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं। {14:11} “तुम किसी शुद्ध पक्षी को खा सकते हो। {14:12} किन्तु इन पक्षियों में से {14:13} किसी को न खाओ: चील, {14:14} किसी भी तरह के गिद्ध, {14:15} बज्जर्द, किसी प्रकार का बाज, {14:16} कौवे, तीतर, समुद्री बत्तख, किसी {14:17} प्रकार का उल्लू, पेलिकन, काँरमारँन्त {14:18} सारस, किसी प्रकार का बगुला, नौवा या चमगादड़। {14:19} “पंख वाले कीड़े तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं। तुम्हें उनको नहीं खाना चाहिए। {14:20} किन्तु तुम किसी शुद्ध पक्षी को खा सकते हो। {14:21} “अपने आप मरे जानवर को न खाओ। तुम मरे जानवर को अपने नगर के विदेशी को दे सकते हो और वह उसे खा सकता है अथवा तुम मरे जानवर के विदेशी के हाथ बेच सकते हो। किन्तु तुम्हें मरे जानवर को स्वयं नहीं खाना चाहिए। क्यों? क्योंकि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के हो। तुम उसके विशेष लोग हो। “बकरी के बच्चे को उसकी माँ के दूध में न पकाओ। {i14:22} मन्दिर को दिया जानेवाला दशमांश {14:22} “तुम्हें हर वर्ष अपने खेतों में उगाई गई फसल का दसवाँ भाग निश्चयपूर्वक बचाना चाहिए। {14:23} तब तुम्हें उस स्थान पर जाना चाहिए जिसे यहोवा अपना विशेष निवास चुनता है। वहाँ यहोवा अपने परमेश्वर के साथ अपनी फसल का दशमांश, अन्न का दसवाँ भाग, तुम्हारा नया दाखमधु, तुम्हारा तेल, झुण्ड और रेवड़ में उत्पन्न पहला बच्चा, खाना चाहिए। तब तुम यहोवा अपने परमेश्वर का सदा सम्मान करना सीखोगे। {14:24} किन्तु वह स्थान इतना दूर हो सकता है कि तुम वहाँ तक की यात्रा न कर सको। यह सम्भव है कि यहोवा ने फसल का जो वरदान दिया है उसका दसवाँ भाग तुम वहाँ न पहुँचा सको। यदि ऐसा होता है तो यह करोः {14:25} अपनी फसल का वह भाग बेच दो। तब उस धन को लेकर यहोवा द्वारा चुने गए विशेष स्थान पर जाओ। {14:26} उस धन का उपयोग जो कुछ तुम चाहो उसके खरीदने में करो — गाय, भेड़, दाखमधु या अन्य स्वादिष्ट पेय या कोई अन्य चीज़ जो तुम चाहते हो। तब तुम्हें और तुम्हारे परिवार को खाना चाहिए और योहवा अपने परमेश्वर के साथ वहाँ उस स्थान पर आनन्द मनाना चाहिए। {14:27} किन्तु अपने नगर में रहने वाले लेवीवंशियों की उपेक्षा न करो, क्यों कि उनके पास तुम्हारी तरह भूमि का हिस्सा नहीं है। {14:28} “हर तीन वर्ष के अन्त में अपनी उस साल की फसल का दशमांश एक जगह इकट्ठा करो। इस भोजन को अपने नगर में उस स्थान पर जमा करो जहाँ दूसरे लोग उसका उपयोग कर सकें। {14:29} यह भोजन लेवीवंशियों के लिए है, क्योंकि उनके पास अपनी कोई भूमि नहीं है। यह भोजन तुम्हारे नगर में उन लोगों के लिये भी है जिन्हें इसकी आवश्यकता है — विदेशी, अनाथ बच्चे और विधवायें। यदि तुम यह करते हो तो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सभी काम तुम जो कुछ करोगे उसके लिए आशीर्वाद देगा। {i15:1} कर्ज को समाप्त करने के विशेष वर्ष {15:1} “हर सात वर्ष के अन्त में, तुम्हें ऋण को खत्म कर देना चाहिए। {15:2} ऋण को तुम्हें इस प्रकार खत्म करना चाहिएः हर एक व्यक्ति जिसने किसी इस्राएली को ऋण दिया है अपना ऋण खत्म कर दे। उसे अपने भाई(इस्राएली) से ऋण लौटाने को नहीं कहना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा ने कहा है कि उस वर्ष ऋण खत्म कर दिये जाते हैं। {15:3} तुम विदेशी से अपना ऋण वापस ले सकते हो। किन्तु उस ऋण को खत्म कर दोगे जो किसी दूसरे इस्राएली पर है। {15:4} किन्तु तुम्हारे बीच कोई गरीब व्यक्ति नहीं रहना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुहें सभी चीजों का वरदान उस देश में देगा जिसे वह तुम्हें रहने को दे रहा है। {15:5} यही होगा, यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर की आज्ञा का पालन पूरी तरह करोगे। तुम्हें उस हर एक आदेश का पालन करने में सावधान रहना चाहिए जिसे आज मैंने तुम्हें दिया है। {15:6} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद देगा, जैसा कि उसने वचन दिया है और तुम्हारे पास बहुत से राष्ट्रों को ऋण देने के लिए पर्याप्त धन होगा। किन्तु तुम्हें किसी से ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। तुम बहुत से राष्ट्रों पर शासन करोगे। किन्तु उन राष्ट्रों में से कोई राष्ट्र तुम पर शासन नहीं करेगा। {15:7} “जब तुम उस देश में रहोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है तब तुम्हारे लोगों में कोई भी गरीब हो सकता है। तुम्हें स्वार्थी नहीं होना चाहिए। तुम्हें उस गरीब व्यक्ति को सहायता देने से इन्कार नहीं करना चाहिए। {15:8} तुम्हें उसका हाथ बँटाने की इच्छा रखनी चाहिए। तुम्हें उस व्यक्ति को जितने ऋण की आवश्यकता हो, देना चाहिए। {15:9} “किसी को सहायता देने से इसलिए इन्कार न करो, क्योंकि ऋण को खत्म करने का सातवाँ वर्ष समीप है। इस प्रकार का बुरा विचार अपने मन में न अने दो। तुम्हें उस व्यक्ति के प्रति बुरे विचार नहीं रखने चाहिए जिसे सहायता की आवश्यकता है। तुम्हें उसकी सहायता करने से इन्कार नहीं करना चाहिए। यदि तुम उस गरीब व्यक्ति को कुछ नहीं देते तो वह यहोवा से तुम्हारे विरुद्ध शिकायत करेगा और यहोवा तुम्हें पाप करने का उत्तरदायी पाएगा। {15:10} “गरीब को तुम जितना दे सको, दो और उसे देने का बुरा न मानो। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परम्मेश्वर इस अच्छे काम के लिए तुम्हें आशीष देगा। वह तुम्हारे सभी कामों और जो कुछ तुम करोगे उसमें तुम्हारी सहायता करेगा। {15:11} देश मे सदा गरीब लोग भी होंगे। यही कारण है कि मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि तुम अपने लोगों, जो लोग तुम्हारे देश में गरीब और सहायता चाहते हैं, उन को सहायता देने के लिए दैयार रहो। {i15:12} सातवें वर्ष में दासों को स्वतन्त्र करने के नियम {15:12} “यदि तुम्हारे लोगों में से कोई, हिब्रू स्त्री व पुरुष, तुम्हारे हाथ बेचा जाए तो उस व्यक्ति को तुम्हारी सेवा छः वर्ष करनी चाहिए। तब सातवें वर्ष तुम्हें उसे अपने से स्वतन्त्र कर देना चाहीए। {15:13} किन्तु जब तुम अपने दास को स्वतन्त्र करो तो उसे बिना कुछ लिए मत जाने दो। {15:14} तुम्हें उस व्यक्ति को अपने रेवड़ों का एक बड़ा भाग, खलिहान से एक बड़ा भाग और दाखमधु से एक बड़ा भाग देना चाहिए। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें बहुत अच्छी चीज़ों की प्राप्ति का आशीर्वाद दिया है। उसी तरह तुम्हें भी अपने दास को बहुत सारी अच्छी चीज़ें देनी चाहिए। {15:15} तुम्हें याद रखना चाहिए कि तुम मिस्र में दास थे। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें मुक्त किया है। यही कारण है कि मैं तुमसे आज यह करने को कह रहा हूँ। {15:16} “किन्तु तुम्हारे दासों में से कोई कह सकता है, ‘मैं आपको नहीं छोडूँगा।’ वह ऐसा इसलिए कह सकता है कि वह तुमसे, तुम्हारे परिवार से प्रेम करता है और उसने तुम्हारे साथ अच्छा जीवन बिताया है। {15:17} इस सेवक को अपने द्वार से कान लगाने दो और एक सूए का उपयोग उसके कान में छेद करने के लिए करो। तब वह सदा के लिए तुम्हारा दास हो जाएगा। तुम दासियों के लिए भी यही करो जो तुम्हारे यहाँ रहना चाहती हैं। {15:18} “तुम अपने दास को मुक्त करते समय दुःख का अनुभव मत करो। याद रखो, छः वर्ष तक तुम्हारी सेवा, उससे आधी रकम पर उसने की जितनी मजदूरी पर रखे गए व्यक्ति को देनी पड़ती है। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम जो करोगे उसके लिए आशीष देगा। {i15:19} पहलौठे जानवर के सम्बन्ध में नियम {15:19} “तुम अपने झुण्ड या रेवड़ में सभी पहलौठे बच्चों को यहोवा का विशेष जानवर बना देना। उनमें से किसी जानवर का उपयोग तुम अपने काम के लिए न करो। इन भेड़ों में से किसी का ऊन न काटो। {15:20} हर वर्ष मवेशियों के झुण्ड या रेवड़ में पहलौठे जानवर को लेकर उस स्थान पर आओ जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चुने। वहाँ तुम और तुम्हारे परिवार के लोग उन जानवरों को खायेंगे। {15:21} “किन्तु यदि जानवर में कोई दोष हो, या लंगड़ा, अन्धा हो या इसमें कोई अन्य दोष हो, तो तुम्हें उसे यहोवा अपने परमेश्वर को भेंट नहीं चढ़ानी चाहिए। {15:22} किन्तु तुम उसका माँस वहाँ खा सकते हो जहाँ तुम रहते हो। इसे कोई व्यक्ति खा सकता है, चाहे वह पवित्र हो चाहे अपवित्र हो। नीलगाय या हिरन का माँस खाने पर वही नियम लागू होगा, जो इस माँस पर लागू होता है। {15:23} किन्तु तुम्हें जानवर का खून नहीं खाना चाहिए। तुम्हें खून को पानी की तरह जमीन पर बहा देना चाहिए। {i16:1} फसह पर्व {16:1} “यहोवा अपने परमेश्वर का फसह पर्व आबीब के महीने में मनाओ। क्यों? क्योंकि आबीब के महीने में तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रात में मिस्र से बाहर ले आया था। {16:2} तुम्हें उस स्थान पर जाना चाहिए जिसे यहोवा अपना विशेष निवास बनाएगा। वहाँ तुम्हें एक गाय या बकरी को यहोवा अपने परमेश्वर के सम्मान में, फसह पर्व के लिए भेंट के रूप में चढ़ाना चाहिए। {16:3} इस भेंट के साथ खमीर वाली रोटी मत खाओ। तुम्हें सात दिन तक अखमीरी रोटी खानी चाहिए। इस रोटी को ‘विपत्ति की रोटी’ कहते हैं। यह तुम्हें मिस्र में जो विपत्तियाँ तुम पर पड़ी उसे याद दिलाने में सहायता करेंगे। याद करो कि कितनी शीघ्रता से तुम्हें वह देश छोड़ना पड़ा। तुम्हें उस दिन को तब तक याद रखना चाहिए जब तक तुम जीवित रहो। {16:4} सात दिन तक देश में किसी के घर में कहीं खमीर नहीं होनी चाहिए। जो माँस पहले दिन की शाम को भेंट में चढ़ाओ उसे सवेरा होने के पहले खा लेना चाहिए। {16:5} “तुम्हें फसह पर्व के जानवरों की बलि उन नगरों में से किसी में नहीं चढ़ानी चाहिए जिन्हें यहोवा तुम्हारा परमेश्वर ने तुमको दिए हैं। {16:6} तुम्हें फसह पर्व के जानवर की बलि केवल उस स्थान पर चढ़ानी चाहिए जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर अपने लिए विशेष निवास के रूप में चुने। वहाँ तुम फसह पर्व के जानवर को जब सूर्य डूबे तब शाम को बलि चढ़ानी चाहिए। तुम इसे साल के उसी समय करोगे जिस समय तुम मिस्र से बाहर निकले थे। {16:7} और तुम्हें फसह पर्व का माँस यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जिस स्थान को चुनेगा वहीं पकाओगे और खाओगे। तब सवेरे तुम्हें अपने खेमों में चले जाना चाहिए। {16:8} तुम्हें अखमीरी रोटी छ: दिन तक खानी चाहिए। सातवें दिन तुम्हें कोई भी काम नहीं करना चाहिए। उस दिन यहोवा अपने परमेश्वर के लिए विशेष सभा में सभी एकत्रित होंगे। {i16:9} सप्ताहों का पर्व (पिन्तेकुस्त) {16:9} “जब तुम फसल काटना आरम्भ करो तब से तुम्हें सात हफ्ते गिनने चाहिए। {16:10} तब यहोवा अपने परमेश्वर के लिए सप्ताहों का पर्व करो। इसे एक स्वेच्छा बलि उसे लाकर करो। तुम्हें कितना देना है, इसका निश्चय यह सोचकर करो कि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें कितना आशीर्वाद दिया है। {16:11} उस स्थान पर जाओ जिसे यहोवा अपने विशेष निवास के रूप में चुनेगा। वहाँ तुम और तुम्हारे लोग, यहोवा अपने परमेश्वर के साथ आनन्द का समय बिताएंगे। अपने सभी लोगों, अपने पुत्रों, अपनी पुत्रियों और अपने सभी सेवकों को वहाँ ले जाओ और अपने नगर में रहने वाले लेवीवंशियों, विदेशियों, अनाथों और विधवाओं को भी साथ में ले जाओ। {16:12} यह मत भूलो, कि तुम मिस्र में दास थे। तुम्हें निश्चय करना चाहिए कि तुम इन नियमों का पालन करोगे। {i16:13} खेमों का पर्व {16:13} “जब तुम अपने खलिहान और दाखमधुशाला से सात दिन तक अपनी फसलें एकत्रित कर लो तब खेमों का पर्व करो। {16:14} तुम, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारी पुत्रियाँ, तुम्हारे सभी सेवक तथा तुम्हारे नगर में रहने वाले लेवीवंशी, विदेशी, अनाथ बालक और विधवाऐं सभी इस दावत में आनन्द मनायें। {16:15} तुम्हें इस दावत को सात दिन तक उस विशेष स्थान पर मनाना चाहिए जिसे यहोवा चुनेगा। यह तुम यहोवा अपने परमेश्वर के सम्मान में करो। आनन्द मनाओ! क्योंकि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें तुम्हारी फसल के लिए तथा तुमने जो कुछ भी किया है उसके लिए आशीष दी है। {16:16} “तुम्हारे सभी लोग वर्ष में तीन बार यहोवा अपने परमेश्वर से मिलने के लिए उस विशेष स्थान पर आएंगे जिसे वह चुनेगा। यह अखमीरी रोटी के पर्व के समय, सप्ताहों के पर्व के समय तथा खेमों के पर्व के समय होगा। हर एक व्यक्ति जो यहोवा से मिलने जाएगा कोई भेंट लाएगा। {16:17} हर एक व्यक्ति उतना देगा जितना वह दे सकेगा। कितना देना है, उसका निश्चय वह यह सोचकर करेगा कि उसे यहोवा ने कितना दिया है। {i16:18} लोगों के लिए न्यायाधीश और अधिकारी {16:18} “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जिन नगरों को तुम्हें दे रहा है उनमें से हर एक नगर में तुम्हें अपने परिवार समूह के लिए न्यायाधीश और अधिकारी बनाना चाहिए। इन न्यायाधीशों और अधिकारियों को जनता के साथ सही और ठीक न्याय करना चाहिए। {16:19} तुम्हें ठीक न्याय को बदलना नहीं चाहिए। तुम्हें किसी के सम्बन्ध में अपने इरादे को बदलने के लिए धन नहीं लेना चाहिए। धन बुद्धिमान लोगों को अन्धा करता है और उसे बदलता है जो भला आदमी कहेगा। {16:20} तुम्हें हर समय निष्पक्ष तथा न्याय संगत होने का पूरा प्रयास करना चाहिए। तब तुम जीवित रहोगे और तुम उस देश को पाओगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है और तुम उसमें रहोगे। {i16:21} परमेश्वर मूर्तियों से घृणा करता है {16:21} “जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर के लिए वेदी बनाओ तो तुम वेदी के सहारे कोई लकड़ी का स्तम्भ न बनाओ जो अशेरा देवी के सम्मान में बनाए जाते हैं। {16:22} और तुम्हें विशेष पत्थर झूठे देवाताओं की पूजा के लिए नहीं खड़े करने चाहिए। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर इनसे घृणा करता है! {i17:1} बलियों के लिए जानवर निर्दोष होने चाहिए मूर्ति पूजक को दण्ड {17:1} “तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर को कोई ऐसी गाय, भेड़, बलि में नहीं चढ़ानी चाहिए जिसमें कोई दोष या बुराई हो। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर इससे घृणा करता है! {17:2} “तुम उन नगरों में कोई बुरी बात होने की सूचना पा सकते हो जिन्हें यहोवा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। तुम यह सुन सकते हो कि तुम में से किसी स्त्री या पुरुष ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। तुम यह सुन सकते हो कि उन्होंने यहोवा से वाचा तोड़ी है {17:3} अर्थात् उन्होंने दूसरे देवताओं की पूजा की है। या यह हो सकता है कि उन्होंने सूर्य, चन्द्रमा या तारों की पूजा की हो। यह यहोवा के आदेश के विरुद्ध है जिसे मैंने तुम्हें दिया है। {17:4} यदि तुम ऐसी बुरी खबर सुनते हो तो तुम्हें उसकी जाँच सावधानी से करनी चाहिए। तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि क्या यह सत्य है कि यह भयंकर काम सचमुच इस्राएल में हो चुका है। यदि तुम इसे प्रमाणित कर सको कि यह सत्य है, {17:5} तब तुम्हें उस व्यक्ति को अवश्य दण्ड देना चाहिए जिसने यह बुरा काम किया है। तुम्हें उस पुरुष या स्त्री को नगर के द्वार के पास सार्वजनिक स्थान पर ले जाना चाहिए और उसे पत्थरों से मार डालना चाहिए। {17:6} किन्तु यदि एक ही गवाह यह कहता है कि उसने बुरा काम किया है तो उसे मृत्यु दण्ड नहीं दिया जाएगा। किन्तु यदि दो या तीन गवाह यह कहते हैं की यह सत्य है तो उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए। {17:7} गवाह को पहला पत्थर उस व्यक्ति को मारने के लिए फेंकना चाहिए। तब अन्य लोगों को उसकी मृत्यु पूरी करने के लिए पत्थर फेंकना चाहिए। इस प्रकार तुम्हें उस बुराई को अपने मध्य से दूर करना चाहिए। {i17:8} जटिल मुकदमें {17:8} “कभी ऐसी समस्या आ सकती है जो तुम्हारे न्यायालयों के लिए निर्णय देने में इतनी कठिन हो कि वे निर्णय ही न दे सकें। यह हत्या का मुकदमा या दो लोगों के बीच का विवाद हो सकता है अथवा यह झगड़ा हो सकता है जिसमें किसी को चोट आई हो। जब इन मुकदमों पर तुम्हारे नगरों में बहस होती है तो तुम्हारे न्यायाधीश सम्भव है, निर्णय न कर सकें कि ठीक क्या है? तब तुम्हें उस विशेष स्थान पर जाना चाहिए जो यहोवा तुम्हारे परमेश्वर द्वारा चुना गया हो। {17:9} तुम्हें लेवी परिवार समूह के याजकों और उस समय के न्यायाधीश के पास जाना चाहिए। वे लोग उस मुकदमें का फैसला करेंगे। {17:10} यहोवा के विशेष स्थान पर वे अपना निर्णय तुम्हें सुनाएंगे। जो भी वे कहें उसे तुम्हें करना चाहिए। {17:11} तुम्हें उनके फैसले स्वीकार करने चाहिए और उनके निर्देश का ठीक — ठीक पालन करना चाहिए। तुम्हें उससे भिन्न कुछ भी नहीं करना चाहिए जो वे तुम्हें करने को कहते हैं। {17:12} “तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर की सेवा करने वाले उस समय के याजक और न्यायाधीश की आज्ञा का पालन करने से इन्कार करने वाले किसी व्यक्ति को भी दण्ड देना चाहिए। उस व्यक्ति को मरना चाहिए। तुम्हें इस्राएल से इस बुरे व्यक्ति को हटाना चाहिए। {17:13} सभी लोग इस दण्ड के विषय में सुनेंगे और डरेंगे और वे इस कुकर्म को नहीं करेंगे। {i17:14} राजा कैसे चुनें {17:14} “तुम उस प्रदेश में जाओगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। तुम उस देश पर अधिकार करोगे और उसमें रहोगे। तब तुम कहोगे, ‘हम लोग अपने ऊपर एक राजा वैसा ही प्रतिष्ठित करेंगे जैसा हमारे चारों ओर के राष्ट्रों में है।’ {17:15} जब ऐसा हो तब तुम्हें यह पक्का निश्चय होना चाहिए कि तुमने उसे ही राजा चुना है जिसे यहोवा चुनता है। तुम्हरा राजा तुम्हीं लोगों में से होना चाहिए। तुम्हें विदेशी को अपना राजा नहीं बनाना चाहिए। {17:16} राजा को अत्यधिक घोड़े अपने लिए नहीं रखने चाहिए और उसे लोगों को अधिक घोड़े लाने के लिए मिस्र नहीं भेजना चाहिए। क्यों? क्योंकि तुमसे यहोवा ने कहा है, ‘तुम्हें उस रास्ते पर कभी नहीं लौटना है।’ {17:17} राजा को बहुत पत्नियाँ भी नहीं रखनी चाहिए। क्यों? क्योंकि यह काम उसे यहोवा से दूर हटायेगा और राजा को सोने, चाँदी से अपने को सम्पन्न नहीं बनाना चाहिए। {17:18} “और जब राजा शासन करने लगे तो उसे एक पुस्तक में अपने लिए नियमों की नकल कर लेनी चाहिए। उसे याजकों और लेवीवंशियों की पुस्तकों से नकल करनी चाहिए। {17:19} राजा को उस पुस्तक को अपने साथ रखना चाहिए। उस पुस्तक को जीवन भर पढ़ना चाहिए। क्योंकि तब राजा यहोवा अपने परमेश्वर का सम्मान करना सीखेगा और वह नियम के आदेशों का पूरा पालन करना सीखेगा। {17:20} तब राजा यह नहीं सोचेगा कि वह अपने लोगों में से किसी से भी अधिक अच्छा है। वह नियम के विरुद्ध नहीं जाएगा बल्कि इसका ठीक — ठीक पालन करेगा। तब वह राजा और उसके वंशज इस्राएल के राज्य पर लम्बे समय तक शासन करेंगे। {i18:1} याजकों तथा लेवीवंशियों की सहायता {18:1} “लेवी का परिवार समूह इस्राएल में कोई भूमि का भाग नहीं पाएगा। वे लोग याजक के रूप में सेवा करेंगे। वे अपना जीवन यापन उस भेंट को खाकर करेंगे जो आग पर पकेगी और यहोवा को चढ़ाई जाएगी। लेवी के परिवार समूह के हिस्से में वही है। {18:2} वे लेवीवंशी लोग भूमि का कोई हिस्सा अन्य परिवार समूहों की तरह नहीं पाएंगे। लेवीवंशियों के हिस्से में स्वयं यहोवा है। यहोवा ने इसके लिए उनको वचन दिया है। {18:3} “जब तुम कोई बैल, या भेड़ बली के लिए मारो तो तुम्हें याजकों को ये भाग देने चाहिएः कंधा, दोनों गाल और पेट। {18:4} तुन्हें याजकों को अपना अन्न, अपनी नयी दाखमधु और अपनी पहली फसल का तेल देना चाहिए। तुम्हें लेवीवंशियों को अपनी भेड़ों का पहला कटा ऊन देना चाहिए। {18:5} क्यो? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे सभी परिवार समूहों की देखभाल करता था और उसने लेवी और उनके वंशजों को सदा के लिए याजक के रूप में सेवा करने के लिये चुना है। {18:6} “लेवीवंशी जो इस्राएल में तुम्हारे नगरों में से किसी में रहता है, अपना घर छोड़ सकता है और यहोवा के विशेष स्थान पर जा सकता है। {18:7} तब यह लेवीवंशी यहोवा अपने परमेश्वर के नाम पर सेवा कर सकता है। उसे परमेश्वर के विशेष स्थान में वैसे ही सेवा करनी चाहिए जैसे उसके भाई अन्य लेवीवंशी करते हैं। {18:8} वह लेवीवंशी, अपने परिवार को सामान्य रूप से मिलने वाले हिस्से के अतिरिक्त अन्य लेवीवंशियों के साथ बराबर का हिस्सेदार होगा। {i18:9} इस्राएलियों को अन्य राष्ट्रों की नकल नहीं करनी चाहिए {18:9} “जब तुम उस राष्ट्र में पहुँचो, जो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको दे रहा है, तब उस राष्ट्र के लोग जो भयंकर काम वहाँ कर रहें हों उन्हें मत सीखो। {18:10} अपने पुत्रों और पुत्रियों की बलि अपनी वेदी पर आग में न दो। किसी ज्योतिषी से बात करके या किसी जादूगर, डायन या सयाने के पास जाकर यह न सीखो कि भविष्य में क्या होगा? {18:11} किसी भी व्यक्ति को किसी पर जादू — टोना चलाने का प्रयत्न न करने दो और तुम में से कोई व्यक्ति ओझा या भूतसिद्धक नहीं बनेगा। और कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति से बात करने का प्रयत्न न करेगा जो मर चुका है। {18:12} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन लोगों से घृणा करता है जो ऐसा करते हैं। यही कारण है कि वह तुम्हारे सामने इन लोगों को देश छोड़ने को विवश करेगा। {18:13} तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए और उसके प्रति निष्ठावान होना चाहिए। {i18:14} यहोवा का विशेष नबी: {18:14} “तुम्हें उन राष्ट्रों के लोगों को बलपूर्वक अपने देश से हटा देना चाहिए। उन राष्ट्रों के लोग ज्योतिषियों और जादूगरों की बात मानते हैं। किन्तु यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें वैसा नहीं करने देगा। {18:15} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे पास अपना नबी भेजेगा। यह नबी तुम्हारे अपने ही लोगों में से आएगा। वह मेरी तरह ही होगा। तुम्हें इस नबी की बात माननी चाहिए। {18:16} यहोवा तुम्हारे पास इस नबी को भेजेगा क्योंकि तुमने ऐसा करने के लिए उससे कहा है। उस समय जब तुम होरेब (सीनै) पर्वत के चारों ओर इकट्ठे हुए थे, तुम यहोवा की आवाज और पहाड़ पर भीषण आग को देखकर भयभीत थे। इसलिए तुमने कहा था, हम लोग यहोवा अपने परमेश्वर की आवाज फिर न सुनें। ‘हम लोग उस भीषण आग को फिर न देखें। हम मर जाएंगे!’ {18:17} “यहोवा ने मुझसे कहा, ‘वे जो चाहते हैं, वह ठीक है। {18:18} मैं तुम्हारी तरह का एक नबी उनके लिए भेज दूँगा। यह नबी उन्हीं लोगों में से कोई एक होगा। मैं उसे वह सब बताऊँगा जो उसे कहना होगा और वह लोगों से वही कहेगा जो मेरा आदेश होगा। {18:19} यह नबी मेरे नाम पर बोलेगा और जब वह कुछ कहेगा तब यदि कोई व्यक्ति मेरे आदेशों को सुनने से इन्कार करेगा तो मैं उस व्यक्ति को दण्ड दूँगा।’ {i18:20} झूठे नबियों को कैसे जाना जाये {18:20} “किन्तु कोई नबी कुछ ऐसा कह सकता है जिसे करने के लिए मैंने उसे नहीं कहा है और वह लोगों से कह सकता है कि वह मेरे स्थान पर बोल रहा है। यदि ऐसा होता है तो उस नबी को मार डालना चाहिए या कोई ऐसा नबी हो सकता है जो दूसरे देवताओं के नाम पर बोलता है। उस नबी को भी मार डालना चाहिए। {18:21} तुम सोच सकते हो, ‘हम कैसे जान सकते हैं कि नबी का कथन, यहोवा का नहीं है?’ {18:22} यदि कोई नबी कहता है कि वह यहोवा की ओर से कुछ कह रहा है, किन्तु उसका कथन सत्य घटित नहीं होता, तो तुम्हें जान लेना चाहिए कि यहोवा ने वैसा नहीं कहा। तुम समझ जाओगे कि यह नबी अपने ही विचार प्रकट कर रहा था। तुम्हें उससे डरने की आवश्यकता नहीं। {i19:1} सुरक्षा के लिए तीन नगर {19:1} “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको वह देश दे रहा है जो दूसरे राष्ट्रों का है। यहोवा उन राष्ट्रों को नष्ट करेगा। तुम वहाँ रहोगे जहाँ वे लोग रहते हैं। तुम उनके नगर और घरों को लोगे। जब ऐसा हो, {19:2} तब तुम्हें भूमि को तीन भागों में बाँटना चाहिए। तब तुम्हें हर एक भाग में सभी लोगों के समीप पड़ने वाला नगर उस क्षेत्र में {19:3} चुनना चाहिए और तुम्हें उन नगरों तक सड़कें बनानी चाहिए तब कोई भी व्यक्ति जो किसी दूसरे व्यक्ति को मारता है वहाँ भागकर जा सकता है। {19:4} “जो व्यक्ति किसी को मारता है और सुरक्षा के लिए इन तीन नगरों में से कहीं भागकर पहुँचता है उस व्यक्ति के लिए नियम यह हैः यह व्यक्ति वही हो जो संयोगवश किसी व्यक्ति को मार डाले। यह वही व्यक्ति हो जो मारे गए व्यक्ति से घृणा न करता हो। {19:5} एक उदाहरण हैः कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के साथ जंगल में लकड़ी काटने जाता है। उस में से एक व्यक्ति लकड़ी काटने के लिए कुल्हाड़ी को एक पेड़ पर चलाता है, किन्तु कुल्हाड़ी दस्ते से निकल जाती है। कुल्हाड़ी दूसरे व्यक्ति को लग जाती है और उसे मार डालती है। वह व्यक्ति, जिसने कुल्हाड़ी चलाई, उन नगरों में भाग सकता है और अपने को सुरक्षित कर सकता है। {19:6} किन्तु यदि नगर बहुत दूर होगा तो वह काफी तेज भाग नहीं सकेगा। मारे गए व्यक्ति का कोई सम्बन्धी उसका पीछा कर सकता है और नगर में उसके पहुँचने से पहले ही उसे पकड़ सकता है। सम्बन्धी बहुत क्रोधित हो सकता है और उस व्यक्ति की हत्या कर सकता है। किन्तु उस व्यक्ति को प्राण — दण्ड उचित नहीं है। वह उस व्यक्ति से घृणा नहीं करता था जो उसके हाथों मारा गया। {19:7} इसलिए मैं आदेश देता हूँ कि तीन विशेष नगरों को चुनो। यह नगर सबके लिए बन्द रहेंगे। {19:8} “यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हारे पूर्वजों को यह वचन दिया कि मैं तुम लोगों की सीमा का विस्तार करूँगा। वह तुम लोगों को सारा देश देगा जिसे देने का वचन उसने तुम्हारे पूर्वजों को दिया। {19:9} वह यह करेगा, यदि तुम उन आदेशों का पालन पूरी तरह करोगे, जिन्हें मैं तुम्हें आज दे रहा हूँ अर्थात् यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर से प्रेम करोगे और उसके मार्ग पर चलते रहोगे। तब यदि यहोवा तुम्हारे देश को बड़ा बनाता है तो तुम्हें तीन अन्य नगर सुरक्षा के लिए चुनने चाहिए। वे प्रथम तीन नगरों के साथ जोड़े जाने चाहिए। {19:10} तब निर्दोष लोग उस देश में नहीं मारे जाएंगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें अपना बनाने के लिये दे रहा है और तुम किसी भी मृत्यु के लिये अपराधी नहीं होगे। {19:11} “किन्तु एक व्यक्ति किसी व्यक्ति से घृणा कर सकता है। वह व्यक्ति उस व्यक्ति को मारने के लिए प्रतीक्षा में छिपा रह सकता है जिसे वह घृणा करता है। वह उस व्यक्ति को मार सकता है और सुरक्षा के लिए चुने इन नगरों में भागकर पहुँच सकता है। {19:12} यदि ऐसा होता है तो उस व्यक्ति के नगर के बुजुर्ग किसी को उसे पकड़ने और सुरक्षा के नगर से बाहर लाने के लिए भेज सकते हैं। नगर के मुखिया तथा वरिष्ठ व्यक्ति उसे उस सम्बन्धी को देंगे जिसका कर्तव्य उसको दण्ड देना है। हत्यारा अवश्य मारा जाना चाहिए। {19:13} उसके लिए तुम्हें दुःखी नहीं होना चाहिए। तुम्हें निर्दोष लोगों को मारने के अपराध से इस्राएल को स्वच्छ रखना चाहिए। तब सब कुछ तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा। {i19:14} सीमा चिन्ह {19:14} “तुम्हें अपने पड़ोसी के सीमा — चिन्हों को नहीं हटाना चाहिए। बीते समय में लोग यह सीमा — चिन्ह उस भूमि पर बनाते थे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रहने के लिए देगा और जो तुम्हारी होगी। {i19:15} गवाह {19:15} “यदि किसी व्यक्ति पर नियम के खिलाफ कुछ करने का मुकदमा हो तो एक गवाह इसे प्रमाण करने के लिए काफी नहीं होगा कि वह दोषी है। उसने निश्चय ही बुरा किया है इसे प्रमाणित करने के लिए दो या तीन गवाह होने चाहिए। {19:16} “कोई गवाह किसी व्यक्ति को झूठ बोलकर और यह कहकर कि उसने अपराध किया है उसे हानि पहुँचाने की कोशिश कर सकता है। {19:17} यदि ऐसा होता है तो आपस में वाद करने वाले व्यक्तियों को यहोवा के आवास पर जाना चाहिए और उनके मुकदमे का निर्णय याजकों एवं उस समय के मुख्य न्यायाधीशों द्वारा होना चाहिए। {19:18} न्यायाधीशों को सावधानी के साथ प्रश्न पूछने चाहिए। वे पता लगा सकते हैं कि गवाह ने दूसरे व्यक्ति के खिलाफ झूठ बोला है। यदि गवाह ने झूठ बोला है तो, {19:19} तुम्हें उसे दण्ड देना चाहिए। तुम्हें उसे वही हानि पहुँचानी चाहिए जो वह दूसरे व्यक्ति को पहुँचाना चाहता था। इस प्रकार तुम अपने बीच से कोई भी बुरी बात निकाल बाहर कर सकते हो। {19:20} दूसरे सभी लोग इसे सुनेंगे और भयभीत होंगे और कोई भी फिर वैसी बुरी बात नहीं करेगा। {19:21} “तुम उस पर दया — दृष्टि न करना जिसे बुराई के लिए तुम दण्ड देते हो। जीवन के लिये जीवन, आँख के लिये आँख, दाँत के लिये दाँत, हाथ के लिये हाथ और पैर के लिये पैर लिया जाना चाहिए। {i20:1} युद्ध के लिये नियम {20:1} “जब तुम अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध में जाओ, और अपनी सेना से अधिक घोड़े, रथ, व्यक्तियों को देखो, तो तुम्हें भयभीत नहीं होना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे साथ है और वही एक है जो तुम्हें मिस्र से बाहर निकाल लाया। {20:2} “जब तुम युद्ध के निकट पहुँचो, तब याजक को सैनिकों के पास जाना चाहिए और उनसे बात करनी चाहिए। {20:3} याजक कहेगा, ‘इस्राएल के लोगो, मेरी बात सुनो! आज तुम लोग अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध में जा रहे हो। अपना साहस न छोड़ो! परेशान न हो या घबराहट में न पड़ो! शत्रु से डरो नहीं! {20:4} क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर शत्रुओं के विरुद्ध लड़ने के लिये तुम्हारे साथ जा रहा है। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करेगा!’ {20:5} “वे लेवीवंशी अधिकारी सैनिकों से यह कहेंगे, ‘क्या यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने अपना नया घर बना लिया है, किन्तु अब तक उसे अर्पित नहीं किया है? उस व्यक्ति को अपने घर लौट जाना चाहिए। वह युद्ध में मारा जा सकता है और तब दूसरा व्यक्ति उसके घर को अर्पित करेगा। {20:6} क्या कोई व्यक्ति यहाँ ऐसा है जिसने अंगूर के बाग लगाये हैं, किन्तु अभी तक उससे कोई अंगूर नहीं लिया है? उस व्यक्ति को घर लौट जाना चाहिए। यदि वह व्यक्ति युद्ध में मारा जाता है तो दूसरा व्यक्ति उसके बाग के फल का भोग करेगा। {20:7} क्या यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति है जिसके विवाह की बात पक्की हो चुकी है। उस व्यक्ति को घर लौट जाना चाहिए। यदि वह युद्ध में मारा जाता है तो दूसरा व्यक्ति उस स्त्री से विवाह करेगा जिसके साथ उसके विवाह की बात पक्की हो चुकी है।’ {20:8} “वे लेवीवंशी अधिकारी, लोगों से यह भी कहेंगे, ‘क्या यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति है जो साहस खो चुका है और भयभीत है। उसे घर लौट जाना चाहिए। तब वह दूसरे सैनिकों को भी साहस खोने में सहायक नहीं होगा।’ {20:9} जब अधिकारी सैनिकों से बात करना समाप्त कर ले तब वे सैनिकों को युद्ध में ले जाने वाले नायकों को चुनें। {20:10} “जब तुम नगर पर आक्रमण करने जाओ तो वहाँ के लोगों के सामने शान्ति का प्रस्ताव रखो। {20:11} यदि वे तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार करते हैं और अपने फाटक खोल देते हैं तब उस नगर में रहने वाले सभी लोग तुम्हारे दास हो जाएँगे और तुम्हारा काम करने के लिए विवश किये जाएँगे। {20:12} किन्तु यदि नगर शान्ति प्रस्ताव स्वीकार करने से इन्कार करता और तुमसे लड़ता है तो तुम्हें नगर को घेर लेना चाहिए {20:13} और जब यहोवा तुम्हारा परमेश्वर नगर पर तुम्हारा अधिकार कराता है तब तुम्हें सभी पुरुषों को मार डालना चाहिए। {20:14} तुम अपने लिए स्त्रियाँ, बच्चे, पशु तथा नगर की हर एक चीज ले सकते हो। तुम इन सभी चीजों का उपयोग कर सकते हो। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने ये चीज़ें तुमको दी हैं। {20:15} जो नगर तुम्हारे प्रदेश में नहीं हैं और बहुत दूर हैं, उन सभी के साथ तुम ऐसा व्यवहार करोगे। {20:16} “किन्तु जब तुम वह नगर उस प्रदेश में लेते हो जिसे योहवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है तब तुम्हें हर एक को मार डालना चाहिए। {20:17} तुम्हें हित्ती, एमोरी, कनानी, परिज्जी, हिब्बी और यबूसी सभी लोगों को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने, यह करने का तुम्हें आदेश दिया है। {20:18} क्यों? क्योंकि तब वे तुम्हें यहोवा तुम्हारे परमेश्वर के विरुद्ध पाप करने की शिक्षा नहीं दे सकते। वे उन भयंकर बातों में से किसी की शिक्षा तुमको नहीं दे सकते जो वे अपने देवाताओं की पूजा के समय करते हैं। {20:19} “जब तुम किसी नगर के विरुद्ध युद्ध कर रहे होगे तो तुम लम्बे समय तक उसका घेरा डाले रह सकते हो। तुम्हें नगर के चारों ओर के फलदार पेड़ों को नहीं काटना चाहिए। तुम्हें इनसे फल खाना चाहिए किन्तु काटकर गिराना नहीं चाहिए। ये पेड़ शत्रु नहीं हैं अत: उनके विरुद्ध युद्ध मत छेड़ो! {20:20} किन्तु उन पेड़ों को काट सकते हो जिन्हें तुम जानते हो कि ये फलदार नहीं हैं। तुम इनका उपयोग उस नगर के विरुद्ध घेराबन्दी में कर सकते हो, जब तक कि उसका पतन न हो जाए। {i21:1} यदि कोई व्यक्ति मारा हुआ पाया जाए {21:1} “उस देश में जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रहने के लिए दे रहा है, कोई व्यक्ति मैदान में मरा हुआ पाया जा सकता है। किन्तु किसी को यह पता नहीं चल सकता कि उसे किसने मारा। {21:2} तब तुम्हारे मुखिया और न्यायाधिशों को मारे गए व्यक्ति के चारों ओर से नगरों की दूरी को नापना चाहिए। {21:3} जब तुम यह जान जाओ कि मरे व्यक्ति के समीपतम कौन सा नगर है तब उस नगर के मुखिया अपने झुण्डों में से एक गाय लेंगे। यह ऐसी गाय हो जिसने कभी बछड़े को जन्म न दिया हो। जिसका उपयोग कभी भी किसी काम करने में न किया गया हो। {21:4} उस नगर के मुखिया उस गाय को बहुत जल वाली घाटी में लाएंगे। यह ऐसी घाटी होनी चाहिए जिसे कभी जोता न गया हो और न उसमें पेड़ पौधे रोपे गये हों। तब मुखियाओं को उस घाटी में वहीं उस गाय की गर्दन तोड़ देनी चाहिए। {21:5} लेवीवंशी याजकों को वहाँ जाना चाहिए। (यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने इन याजकों को अपनी सेवा के लिए और अपने नाम पर आशीर्वाद देने के लिए चुना है। याजक यह निश्चित करेंगे कि झगड़े के विषय में कौन सच्चा है।) {21:6} मारे गये व्यक्ति के समीपतम नगर के मुखिया अपने हाथों को उस गाय के ऊपर धोएंगे जिसकी गर्दन घाटी में तोड़ दी गई है। {21:7} ये मुखिया अवश्य कहेंगे, ‘हमने इस व्यक्ति को नहीं मारा और हमने इसका मारा जाना नहीं देखा। {21:8} यहोवा, इस्राएल के लोगों को क्षमा कर, जिनका तूने उद्धार किया है। अपने लोगों में से किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी न ठहराने दे।’ तब वे हत्या के लिये दोषी नहीं ठहराए जाएंगे। {21:9} इन मामलों में वह करना ही तुम्हारे लिये ठीक है। ऐसा करके तुम किसी निर्दोष की हत्या करने के दोषी नहीं रहोगे। {i21:10} युद्ध में प्राप्त स्त्रियाँ {21:10} “तुम अपने शत्रुओं से युद्ध करोगे और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उन्हें तुमसे पराजित करायेगा। तब तुम शत्रुओं को बन्दी के रूप में लाओगे। {21:11} और तुम युद्ध में बन्दी किसी सुन्दर स्त्री को देख सकते हो। तुम उसे पाना चाह सकते हो और अपनी पत्नी के रूप में रखने की इच्छा कर सकते हो। {21:12} तुम्हें उसे अपने परिवार में अपने घर लाना चाहिए। उसे अपने बाल मुड़वाना चाहिए और अपने नाखून काटने चाहिए। {21:13} उसे अपने पहने हुए कपड़ों को उतारना चाहिए। उसे तुम्हारे घर में रहना चाहिए और एक महीने तक अपने माता — पिता के लिए रोना चाहिए। उसके बाद तुम उसके साथ यौन सम्बन्ध स्थापित कर सकते हो और उसके पति हो सकते हो। और वह तुम्हारी पत्नी बन जाएगी। {21:14} किन्तु यदि तुम उससे प्रसन्न नहीं हो तो तुम उसे जहाँ वह चाहे जाने दे सकते हो। किन्तु तुम उसे बेच नहीं सकते । तुम उसके प्रति दासी की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि तुम्हारा उसके साथ यौन सम्बन्धथा। {i21:15} एक व्यक्ति की दो पत्नियों के बच्चे {21:15} “एक व्यक्ति की दो पत्नियाँ हो सकती हैं और वह एक पत्नी से दूसरी पत्नी की अपेक्षा अधिक प्रेम कर सकता है। दोनों पत्नियों से उसके बच्चे हो सकते हैं और पहला बच्चा उस पत्नी का हो सकता है जिससे वह प्रेम न करता हो। {21:16} जब वह अपनी सम्पत्ति अपने बच्चों में बाँटेगा तो अधिक प्रिय पत्नी के बच्चे को वह विशेष वस्तु नहीं दे सकता जो पहलौठे बच्चे की होती है। {21:17} उस व्यक्ति को तिरस्कृत पत्नी के बच्चे को ही पहलौठा बच्चा स्वीकार करना चाहिए। उस व्यक्ति को अपनी चीजों के दो भाग पहलौठा पुत्र को देना चाहिए। क्यों? क्योंकि वह पहलौठा बच्चा है। {i21:18} आज्ञा न मानने वाले पुत्र {21:18} “किसी व्यक्ति का ऐसा पुत्र हो सकता है जो हठी और आज्ञापालन न करने वाला हो। यह पुत्र अपने माता — पिता की आज्ञा नहीं मानेगा। माता — पिता उसे दण्ड देते हैं किन्तु पुत्र फिर भी उनकी कुछ नहीं सुनता। {21:19} उसके माता — पिता को उसे नगर की बैठक वाली जगह पर नगर के मुखियों के पास ले जाना चाहिए। {21:20} उन्हें नगर के मुखियों से कहना चाहिए: ‘हमारा पुत्र हठी है और आज्ञा नहीं मानता। वह कोई काम नहीं करता जिसे हम करने के लिये कहते हैं। वह आवश्यकता से अधिक खाता और शराब पीता है।’ {21:21} तब नगर के लोगों को उस पुत्र को पत्थरों से मार डालना चाहिए। ऐसा करके तुम अपने में से इस बुराई को खत्म करोगे। इस्राएल के सभी लोग इसे सुनेंगे और भयभीत होंगे। {i21:22} अपराधी मारे और पेड़ पर लटकाये जाते हैं {21:22} “कोई व्यक्ति ऐसे पाप करने का अपराधी हो सकता है जिसे मृत्यु का दण्ड दिया जाए। जब वह मार डाला जाए तब उसका शरीर पेड़ पर लटकाया जा सकता है। {21:23} जब ऐसा होता है तो उसका शरीर पूरी रात पेड़ पर नहीं रहना चाहिए। तुम्हें उसे उसी दिन निश्चय ही दफना देना चाहिए। क्यों? क्योंकि जो व्यक्ति पेड़ पर लटकाया जाता है वह परमेश्वर से अभिशाप पाया हुआ होता है। तुम्हें उस देश को अपवित्र नहीं करना चाहिए जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रहने के लिए दे रहा है। {i22:1} विभिन्न नियम {22:1} “यदि तुम देखो कि तुम्हारे पड़ोसी की गाय या भेड़ खुली है, तो तुम्हें इससे लापरवाह नहीं होना चाहिए। तुम्हें निश्चय ही इसे मालिक के पास पहुँचा देना चाहिए। {22:2} यदि इसका मालिक तुम्हारे पास न रहता हो या तुम उसे नहीं जानते कि वह कौन है तो तुम उस गाय या भेड़ को अपने घर ले जा सकते हो और तुम इसे तब तक रख सकते हो जब तक मालिक इसे ढूँढता हुआ न आए। तब तुम्हें उसे उसको लौटा देना चाहिए। {22:3} तुम्हें यही तब भी करना चाहिए जब तुम्हें पड़ोसी का गधा मिले, उसके कपड़े मिलें या कोई चीज जो पड़ोसी खो देता है। तुम्हें अपने पड़ोसी की सहायता करनी चाहिए। {22:4} “यदि तुम्हारे पड़ोसी का गधा या उसकी गाय सड़क पर पड़ी हो तो उससे आँख नहीं फेरनी चाहिए। तुम्हें उसे फिर उठाने में उसकी सहायता करनी चाहिए। {22:5} “किसी स्त्री को किसी पुरुष के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए और किसी पुरुष को किसी स्त्री के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उससे घृणा करता है जो ऐसा करता है। {22:6} “किसी रास्ते से टहलते समय तुम पेड़ पर या जमीन पर चिड़ियों का घोंसला पा सकते हो। यदि मादा पक्षी अपने बच्चों के साथ बैठी हो या अपने अण्डों पर बैठी हो तो तुम्हें मादा पक्षी को बच्चों के साथ नहीं पकड़ना चाहिए। {22:7} तुम बच्चों को अपने लिए ले सकते हो। किन्तु तुम्हें माँ को छोड़ देना चाहिए। यदि तुम इन नियमों का पालन करते हो तो तुम्हारे लिए सब कुछ अच्छा रहेगा और तुम लम्बे समय तक जीवित रहोगे। {22:8} “जब तुम कोई नया घर बनाओ तो तुम्हें अपनी छत के चारों ओर दीवार खड़ी करनी चाहिए। तब तुम किसी व्यक्ति की मृत्यु के आपराधी नहीं होओगे यदि वह उस छत पर से गिरता है। {i22:9} कुछ चीजें जिन्हें एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए {22:9} “तुम्हें अपने अंगूर के बाग मे अनाज के बीजों को नहीं बोना चाहिए। क्यों? क्योंकि बोये गए बीज और तुम्हारे बाग के अंगूर दोनों फसलें उपयोग में नहीं आ सकतीं। {22:10} “तुम्हें बैल और गधे को एक साथ हल चलाने में नहीं जोतना चाहिए। {22:11} “तुम्हें उस कपड़े को नहीं पहनना चाहिए जिसे ऊन और सूत से एक साथ बुना गया हो। {22:12} “तुम्हें अपने पहने जाने वाले चोगे के चारों कोनों पर फुंदने लगाने चाहिए। {i22:13} विवाह के नियम {22:13} “कोई व्यक्ति किसी लड़की से विवाह करे और उससे शारीरिक सम्बन्ध करे। तब वह निर्णय करता है कि वह उसे पसन्द नहीं है। {22:14} वह झूठ बोल सकता है और कह सकता है, ‘मैंने उस स्त्री से विवाह किया, किन्तु जब हमने शारीरिक सम्बम्ध किया तो मुझे मालूम हुआ कि वह कुवाँरी नहीं है।’ उसके विरुद्ध ऐसा कहने पर लोग उस स्त्री के सम्बन्ध में बुरा विचार रख सकते हैं। {22:15} यदि ऐसा होता है तो लड़की के माता — पिता को इस बात का प्रमाण नगर की बैठकवाली जगह पर नगर प्रमुखों के सामने लाना चाहिए कि लड़की कुवाँरी थी। {22:16} लड़की के पिता को नगर प्रमुखों से कहना चाहिए, ‘मैंने अपनी पुत्री को उस व्यक्ति की पत्नी होने के लिए दिया, किन्तु वह अब उसे नहीं चाहता। {22:17} इस व्यक्ति ने मेरी पुत्री के विरुद्ध झूठ बोला है। उसने कहा, “मुझे इसका प्रमाण नहीं मिला कि तुम्हारी पुत्री कुवाँरी है।” किन्तु यहाँ यह प्रमाण है कि मेरी पुत्री कुवाँरी थी।’ तब वे उस कपड़े को नगर — प्रमुखो को दिखाएंगे। {22:18} तब वहाँ के नगर — प्रमुख उस व्यक्ति को पकड़ेंगे और उसे दण्ड देंगे। {22:19} वे उस पर चालीस चाँदी के सिक्के जुर्माना करेंगे। वे उस रुपये को लड़की के पिता को देंगे क्योंकि उसके पति ने एक इस्राएली लड़की को कलंकित किया है और लड़की उस व्यक्ति की पत्नी बनी रहेगी। वह अपनी पूरी जिन्दगी उसे तलाक नहीं दे सकता। {22:20} “किन्तु जो बातें पति ने अपनी पत्नी के विषय में कहीं वे सत्य हो सकती हैं। पत्नी के माता — पिता के पास यह प्रमाण नहीं हो सकता कि लड़की कुवाँरी थी। यदि ऐसा होता है तो {22:21} नगर — प्रमुख उस लड़की को उसके पिता के द्वार पर लाएँगे। तब नगर — प्रमुख उसे पत्थर से मार डालेंगे। क्यों? क्योंकि उसने इस्राएल में लज्जाजनक बात की। उसने अपने पिता के घर में वेश्या जैसा व्यवहार किया है। तुम्हें अपने लोगों में से हर बुराई को दूर करना चाहिए। {i22:22} व्यभिचार का पाप दण्डित होना चाहिए {22:22} “यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बनध करता हुआ पाया जाता है तो दोनों शारीरिक सम्बन्ध करने वाले स्त्री — पुरुष को मारा जाना चाहिए। तुम्हें इस्राएल से यह बुराई दूर करनी चाहिए। {22:23} “कोई व्यक्ति किसी उस कुवाँरी लड़की से मिल सकता है जिसका विवाह दूसरे से पक्का हो चुका है। वह उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध भी कर सकता है। यदि नगर में ऐसा होता है तो {22:24} तुम्हें उन दोनों को उस नगर के बाहर फाटक पर लाना चाहिए और तुम्हें उन दोनों को पत्थरों से मार डालना चाहिए। तुम्हें पुरुष को इसलिए मार देना चाहिए कि उसने दूसरे की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध किया और तुम्हें लड़की को इसलिए मार डालना चाहिए कि वह नगर में थी और उसने सहायता के लिये पुकार नहीं की। तुम्हें अपने लोगों में से यह बुराई भी दूर करनी चाहिए। {22:25} “किन्तु यदि कोई व्यक्ति मैदानों में, विवाह पक्की की हुई लड़की को पकड़ता है और उससे बलपूर्वक शारीरिक सम्बन्ध करता है तो पुरुष को ही मारना चाहिए। {22:26} तुम्हें लड़की के साथ कुछ भी नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया जो उसे प्राण — दण्ड का भागी बनाता है। यह मामला वैसा ही है जैसा किसी व्यक्ति का निर्दोष व्यक्ति पर आक्रमण और उसकी हत्या करना। {22:27} उस व्यक्ति ने विवाह पक्की की हुई लड़की को मैदान में पकड़ा। लड़की ने सहायता के लिए पुकारा, किन्तु उसकी कोई सहायता करने वाला नहीं था। {22:28} “कोई व्यक्ति किसी कुवाँरी लड़की जिसकी सगाई नहीं हुई है, को पकड़ सकता है और उसे अपने साथ बलपूर्वक शारीरिक सम्बनध करने को विवश कर सकता है। यदि लोग ऐसा होता देखते हैं तो {22:29} उसे लड़की के पिता को बीस औंस चाँदी देनी चाहिए और लड़की उसकी पत्नी हो जाएगी। क्यों? क्योंकि उसने उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध किया वह उसे पूरी जिन्दगी तलाक नहीं दे सकता। {22:30} “किसी व्यक्ति को अपने पिता की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध करके अपने पिता को कलंक नहीं लगाना चाहिए। {i23:1} वे लोग जो उपासना में सम्मलित हो सकते हैं {23:1} “ये लोग इस्राएल के लोगों के साथ यहोवा की उपासना करने के लिये नहीं आ सकतेः वह व्यक्ति जिसने अपने को बधिया कर लिया है, वह व्यक्ति जिसने अपना यौन अंग कटवा लिया है {23:2} या वह व्यक्ति जो अविवाहित माता — पिता की सन्तान हो। इस व्यक्ति के परिवार का कोई व्यक्ति दसवीं पीढ़ी तक भी यहोवा के लोगों में यहोवा की उपासना करने के लिये नहीं गिना जा सकता। {23:3} “कोई अम्मोनी या मोआबी यहोवा के लोगों से सम्बन्धित नहीं हो सकता और दस पीढ़ीयों तक उनका कोई वंशज भी यहोवा के लोगों का भाग यहोवा की उपासना करने के लिए नहीं बन सकता। {23:4} क्यों? क्योंकि अम्मोनी और मोआबी लोगों ने मिस्र से बाहर आने की यात्रा के समय तुम लोगों को रोटी और पानी देने से इन्कार किया था। वे यहोवा के लोगों के भाग इसलिए भी नहीं हो सकते क्योंकि उन्होंने बिलाम को तुम्हें अभिशाप देने के लिए नियुक्त किया था। (बिलाम अरपम्नहरैम में पतोर नगर के बोर का पुत्र था।) {23:5} किन्तु यहोवा परमेश्वर ने बिलाम की एक न सुनी। यहोवा ने अभिशाप को तुम्हारे लिये वरदान में बदल दिया। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमसे प्रेम करता है। {23:6} तुम्हें अम्मोनी और मोआबी लोगों के साथ शान्ति रखने का प्रयत्न कभी नहीं करना चाहिए। जब तक तुम लोग रहो, उनसे मित्रता न रखो। {i23:7} ये लोग जिन्हें इस्राएलियों को अपने में मिलाना चाहिए {23:7} “तुम्हें एदोमी से घृणा नहीं करनी चाहिए। क्यों? क्योंकि वह तुम्हारा सम्बन्धी है। तुम्हें किसी मिस्री से घृणा नहीं करनी चाहिए। क्यों? क्योंकि उनके देश में तुम अजनबी थे। {23:8} एदोमी और मिस्री लोगों से उत्पन्न तीसरी पीढ़ी के बच्चे यहोवा के लोगों के भाग बन सकते हैं। {i23:9} सेना के डेरे को स्वच्छ रखना {23:9} “जब तुम्हारी सेना शत्रु के विरुद्ध जाए, तब तुम उन सभी चीज़ों से दूर रहो जो तुम्हें अपवित्र बनाती हैं। {23:10} यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस कारण अपवित्र है कि उसे रात में स्वप्नदोष हो गया हो तो उसे डेरे के बाहर चले जाना चाहिए। उसे डेरे से दूर रहना चाहिए {23:11} किन्तु जब शाम हो तब उस व्यक्ति को पानी से नहाना चाहिए और जब सूरज डूबे तो उसे डेरे में जाना चाहिए। {23:12} “तुम्हें डेरे के बाहर शौच के लिए जगह बनानी चाहिए {23:13} और तुम्हें अपने हथियार के साथ खोदने के लिए एक खन्ती रखनी चाहिए। इसलिए जब तुम मलत्याग करो तब तुम एक गका खोदो और उसे ढक दो। {23:14} क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे डेरे में शत्रुओं को हराने में तुम्हारी सहायता करने के लिए तुम्हारे साथ है। इसलिए डेरा पवित्र रहना चाहिए। तब यहोवा तुम में कुछ भी घृणित नहीं देखेगा और तुम से आँखें नहीं फेरेगा। {i23:15} विभिन्न नियम {23:15} “यदि कोई दास अपने मालिक के यहाँ से भागकर तुम्हारे पास आता है तो तुम्हें उस दास को उसके मालिक को नहीं लौटाना चाहिए। {23:16} यह दास तुम्हारे साथ जहाँ चाहे वहाँ रह सकता है। वह जिस भी नगर को चुने उसमें रह सकता है। तुम्हें उसे परेशान नहीं करना चाहिए। {23:17} “कोई इस्राएली स्त्री या पुरुष को कभी देवदासी या देवदास नहीं बनना चाहिए। {23:18} देवादस या देवदासी का कमाया हुआ धन यहोवा तुम्हारे परमेश्वर के मन्दिर में नहीं लाया जाना चाहिए। कोई व्यक्ति दिये गए वचन के कारण यहोवा को दी जाने वाली चीज के लिए इस धन का उपयोग नहीं कर सकता। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सभी मन्दिरों के देवदास — देवदासियों से घृणा करता है। {23:19} “यदि तुम किसी इस्राएली को कुछ उधार दो तो तुम उस पर ब्याज न लो। तुम सिक्कों, भोजन या कोई ऐसी चीज जिस पर ब्याज न लिया जा सेक व्याज न लो। {23:20} तुम विदेशी से ब्याज ले सकते हो। किन्तु तुम्हें दूसरे इस्राएली से ब्याज नहीं लेना चाहिए। यदि तुम इन नियमों का पालन करोगे तो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उस देश में, जहाँ तुम रहने जा रहे हो, जो कुछ तुम करोगे उसमें आशीष देगा। {23:21} “जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर को वचन दो, तो जो तुम देने को कहो उन सबको देने में ढीले न पड़ो। यदि तुम वचन दी गई चिज़ों को नहीं दोगे तो पाप करोगे। {23:22} यदि तुम वचन नहीं देते हो तो तुम पाप नहीं कर रहे हो। {23:23} किन्तु तुम्हें वह चीज़ें करनी चाहिए जिसे करने के लिए तुमने कहा है कि तुम करोगे। जब तुम स्वतन्त्रता से यहोवा अपने परमेश्वर को वचन दो तो, तुम्हें वचन दी गई बात पूरी करनी चाहिए! {23:24} “यदि तुम दूसरे व्यक्ति के अंगूर के बाग से होकर जाते हो, तो तुम जितने चाहो उतने अंगूर खा सकते हो। किन्तु तुम कोई अंगूर अपनी टोकरी में नहीं रख सकते। {23:25} जब तुम दूसरे की पकी अन्न की फसल के खेत से होकर जा रहे हो तो तुम अपने हाथ से जितना उखाड़ा, खा सकते हो। किन्तु तुम हँसिये का उपयोग दूसरे के अन्न को काटने और लेने के लिए नहीं कर सकते। {24:1} “कोई व्यक्ति किसी स्त्री से विवाह करता है, और वह कुछ ऐसी गुप्त चीज उसके बारे में जान सकता है जिसे वह पसन्द नहीं करता। यदि वह व्यक्ति प्रसन्न नहीं है तो वह तलाक पत्रों को लिख सकता है और उन्हें स्त्री को दे सकता है। तब उसे अपने घर से उसको भेज देना चाहिए। {24:2} जब उसने उसका घर छोड़ दिया है तो वह दूसरे व्यक्ति के पास जाकर उसकी पत्नी हो सकती है। {24:3} किन्तु मान लो कि नया पति भी उसे पसन्द नहीं करता और उसे विदा कर देता है। यदि वह व्यक्ति उसे तलाक देता है तो पहला पति उसे पत्नी के रूप में नहीं रख सकता या यदि नया पति मर जाता है तो पहला पति उसे फिर {24:4} पत्नी के रूप में नहीं रख सकता। वह अपवित्र हो चुकी है। यदि वह फिर उससे विवाह करता है तो वह ऐसा काम करेगा जिससे यहोवा घृणा करता है। तुम्हें उस देश में ऐसा नहीं करना चाहिए जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रहने के लिए दे रहा है। {24:5} “नवविवाहितों को सेना में नहीं भेजना चाहिए और उसे कोई अन्य विशेष काम भी नहीं देना चाहिए। क्योंकि एक वर्ष तक उसे घर पर रहने को स्वतन्त्र होना चाहिए और अपनी नयी पत्नी को सुखी बनाना चाहिए। {24:6} “यदि किसी व्यक्ति को तुम कर्ज दो तो गिरवी के रूप में उसकी आटा पीसने की चक्की का कोई पाट न रखो। क्यों? क्योंकि ऐसा करना उसे भोजन से वंचित करना होगा। {24:7} “यदि कोई व्यक्ति अपने लोगों (इस्राएलियों) में से किसी का अपहरण करता हुआ पाया जाये और वह उसका उपयोग दास के रूप में करता हो या उसे बेचता हो तो वह अपहरण करने वाला अवश्य मारा जाना चाहिए। इस प्रकार तुम अपने बीच से इस बुराई को दूर करोगे। {24:8} “यदि तुम्हें कुष्ठ जैसी बीमारी हो जाये तो तुम्हें लेवीवंशी याजकों की दी हुई सारी शिक्षा स्वीकार करने में सावधान रहना चाहिए। तुम्हें सावधानी से उन सब आदेशों का पालन करना चाहिए जिन्हें देने के लिये मैंने याजकों से कहा है। {24:9} यह याद रखो कि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने मरियम के साथ क्या किया जब तुम मिस्र से बाहर निकलने की यात्रा पर थे। {24:10} “जब तुम किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का कर्ज दो तो उसके घर में गिरवी रखी गई चीज़ लेने के लिए मत जाओ। {24:11} तुम्हें बाहर ही खड़ा रहना चाहिए। तब वह व्यक्ति, जिसे तुमने कर्ज दिया है, तुम्हारे पास गिरवी रखी गई चीज़ लाएगा। {24:12} यदि वह गरीब है तो वह अपने कपड़े को दे दे, जिससे वह अपने को गर्म रख सकता है। तुम्हें उसकी गिरवी रखी गई चीज़ रात को नहीं रखनी चाहिये। {24:13} तुम्हें प्रत्येक शाम को उसकी गिरवी रखी गई चीज़ लौटा देनी चाहिए। तब वह अपने वस्त्रों में सो सकेगा। वह तुम्हारा आभारी होगा और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर यह देखेगा कि तुमने यह अच्छा काम किया। {24:14} “तुम्हें किसी मजदूरी पर रखे गए गरीब और जरूरतमन्द सेवक को धोखा नहीं देना चाहिए। इसका कोई महत्व नहीं कि वह तुम्हारा साथी इस्राएली है या वह कोई विदेशी है जो तुम्हारे नगरों में से किसी एक में रह रहा है। {24:15} सूरज डूबने से पहले प्रतिदिन उसकी मजदूरी दे दो। क्यों क्योंकि वह गरीब है और उसी धन पर आश्रित है। यदि तुम उसका भुगतान नहीं करते तो वह यहोवा से तुम्हारे विरुद्ध शिकायत करेगा और तुम पाप करने के अपराधी होगे। {24:16} “बच्चों द्वारा किये गए किसी अपराध के लिए पिता को मृत्यु दण्ड नहीं दिया जा सकता और बच्चे को पिता द्वारा किये गए अपराध के लिए मृत्यु दण्ड नहीं दिया जा सकता। किसी व्यक्ति को उसके स्वयं के अपराध के लिये ही मृत्यु दण्ड दिया जा सकता है। {24:17} “तुम्हें यह अच्छी तरह से देख लेना चाहिए कि विदेशियों और अनाथों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए। तुम्हें विधवा से उसके वस्त्र कभी गिरवी रखने के लिए नहीं लेने चाहिए। {24:18} तुम्हें सदा याद रखना चाहिए कि तुम मिस्र में दास थे। यह मत भूलो कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें वहाँ से बाहर लाया। यही कारण है कि मैं तुम्हें यह करने का आदेश देता हूँ। {24:19} “तुम अपने खेत की फसल इकट्ठी करते रह सकते हो और तुम कोई पूली भूल से वहाँ छोड़ सकते हो। तुम्हें उसे लेने नहीं जाना चाहिए। यह विदेशियों, अनाथों और विधवाओं के लिए होगा। यदि तुम उनके लिए कुछ अन्न छोड़ते हो तो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें उन सभी कामों में आशीष देगा जो तुम करोगे। {24:20} जब तुम अपने जैतून के पेड़ों से फली झाड़ोगे तब तुम्हें शाखाओं की जाँच करने फिर नहीं जाना चाहिए। जो जैतून तुम उसमें छोड़ दोगे वह विदेशियों, अनाथों और विधवाओं के लिये होगा। {24:21} जब तुम अपने अंगूर के बागों से अंगूर इकट्ठा करो तब तुम्हें उन अंगूरों को लेने नहीं जाना चाहिए जिन्हें तुमने छोड़ दिया था। वे अंगूर विदेशियों, अनाथों और विधवाओं के लिये होंगे। {24:22} याद रखो कि तुम मिस्र में दास थे। यही कारण है कि मैं तुम्हें यह करने का आदेश दे रहा हूँ। {25:1} “यदि दो व्यक्तियों में झगड़ा हो तो उन्हें अदालत में जाना चाहिये। न्यायाधीश उनके मुकदमें का निर्णय करेंगे और बताएंगे कि कौन व्यक्ति सच्चा है तथा कौन अपराधी। {25:2} यदि अपराधी व्यक्ति पीटे जाने योग्य है तो न्यायाधीश उसे मुँह के बल लेटाएगा। कोई व्यक्ति उसे न्यायाधीश की आँखों के सामने पीटेगा। वह व्यक्ति उतनी बार पीटा जाएगा जितनी बार के लिए उसका अपराध उपयुक्त होगा। {25:3} कोई व्यक्ति चालीस बार तक पीटा जा सकता है, किन्तु उससे अधिक नहीं। यदि वह उससे अधिक बार पीटा जाता है तो इससे यह पता चलेगा कि उस व्यक्ति का जीवन तुम्हारे लिये महत्वपूर्ण नहीं। {25:4} “जब तुम अन्न को अलग करने के लिये पशुओं का उपयोग करो तब उन्हें खाने से रोकने के लिए उनके मुँह को न बाँधो। {25:5} “यदि दो भाई एक साथ रह रहे हों और उनमें एक पुत्रहीन मर जाए तो मृत भाई की पत्नी का विवाह परिवार के बाहर के किसी अजनबी के साथ नहीं होना चाहिए। उसके पति के भाई को उसके प्रति पति के भाई का कर्तव्य पूरा करना चाहिए। {25:6} तब जो पहलौठा पुत्र उससे उत्पन्न होगा वह व्यक्ति के मृत भाई का स्थान लेगा। तब मृत — भाई का नाम इस्राएल से बाहर नहीं किया जाएगा। {25:7} यदि वह व्यक्ति अपने भाई की पत्नी को ग्रहण करना नहीं चाहता, तब भाई की पत्नी को बैठकवाली जगह पर नगर — प्रमुखों के पास जाना चाहिए। उसके भाई की पत्नी को नगर प्रमुखों से कहना चाहिए, ‘मेरे पति का भाई इस्राएल में अपने भाई का नाम बनाए रखने से इन्कार करता है। वह मेरे प्रति अपने भाई के कर्तव्य को पूरा नहीं करेगा।’ {25:8} तब नगर — प्रमुखों को उस व्यक्ति को बुलाना और उससे बात करनी चाहिए। यदि वह व्यक्ति हठी है और कहता है, ‘मैं उसे नहीं ग्रहण करना चाहता।’ {25:9} तब उसके भाई की पत्नी नगर प्रमुखों के सामने उसके पास आए। वह उसके पैर से उसके जूते निकाल ले और उसके मुँह पर थूके। उसे कहना चाहिए, ‘यह उस व्यक्ति के साथ किया जाता है जो अपने भाई का परिवार नहीं बसाएगा।’ {25:10} तब उस भाई का परिवार, इस्राएल में, ‘उस व्यक्ति का परिवार कहा जाएगा जिसने अपने जूते उतार दिये।’ {25:11} “दो व्यक्ति परस्पर झगड़ा कर सकते हैं। उनमें एक की पत्नी अपने पति की सहायता करने आ सकती है। किन्तु उसे दूसरे व्यक्ति के गुप्त अंगों को नहीं पकड़ना चाहिए। {25:12} यदि वह ऐसा करती है तो उसके हाथ काट डालो, उसके लिये दु: खी मत होओ। {25:13} “लोगों को धोखा देने के लिये जाली बाट न रखो। उन बाटों का उपयोग न करो जो असली वजन से बहुत कम या बहुत ज्यादा हो। {25:14} अपने घर में उन मापों को न रखो जो सही माप से बहुत बड़े या बहुत छोटे हों। {25:15} तुम्हें उन बाटों और मापों का उपयोग करना चाहिए जो सही और ईमानदारी के परिचायक हैं। तुम उस देश में लम्बी आयु वाले होगे जिसे यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर तुमको दे रहा है। {25:16} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उनसे घृणा करता है जो जाली बाट और माप का उपयोग करके धोखा देते हैं। हाँ, वह उन सभी लोगों से घृणा करता है जो बेईमानी करते हैं। {i25:17} अमालेक के लोगों को नष्ट कर देना चाहिए {25:17} “याद रखो कि जब तुम मिस्र से आ रहे थे तब अमालेक के लोगों ने तुम्हारे साथ क्या किया। {25:18} अमालेक के लोगों ने परमेश्वर का सम्मान नहीं किया था। उन्होंने तुम पर तब आक्रमण किया जब तुम थके हुए और कमजोर थे। उन्होंने तुम्हारे उन सब लोगों को मार डाला जो पीछे चल रहे थे। {25:19} इसलिए तुम लोगों को अमालेक के लोगों की याद को संसार से मिटा देना चाहिए। यह तुम लोग तब करोगे जब उस देश में जाओगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। वहाँ वह तुम्हें तुम्हारे चारों ओर के शत्रुओं से छुटकारा दिलाएगा। किन्तु अमालेकियों को नष्ट करना मत भूलो! {i26:1} प्रथम फसल के बारे में नियम {26:1} “तुम शीघ्र ही उस देश में प्रवेश करोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रहने के लिये दे रहा है। जब तुम वहाँ अपने घर बना लो {26:2} तब तुम्हें अपनी थोड़ी सी प्रथम फसल लेनी चाहिए और उसे एक टोकरी में रखना चाहिये। वह प्रथम फसल होगी जिसे तुम उस देश से पाओगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। थोड़ी प्रथम फसल वाली टोकरी को लो और उस स्थान पर जाओ जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चुनेगा। {26:3} उस समय सेवा करने वाले याजक के पास तुम जाओगे। तुम्हें उससे कहना चाहिए, ‘आज मैं यहोवा अपने परमेश्वर के सामने यह घोषित करता हूँ कि हम उस देश में आ गए हैं जिसे यहोवा ने हम लोगों को देने के लिये हमारे पूर्वजों को वचन दिया था।’ {26:4} “तब याजक टोकरी को तुम्हारे हाथ से लेगा। वह इसे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर की वेदी के सामने रखेगा। {26:5} तब तुम यहोवा अपने परमेश्वर के सामने यह कहोगे: मेरा पूर्वज घुमक्कड़ अरामी था। वह मिस्र पहुँचा और वहाँ रहा। जब वह वहाँ गया तब उसके परिवार में बहुत कम लोग थे। किन्तु मिस्र में वह एक शक्तिशाली बहुत से व्यक्तियों वाला महान राष्ट्र बन गया। {26:6} मिस्रियों ने हम लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया। {26:7} तब हम लोगों ने यहोवा अपने पूर्वजों के परमेश्वर से प्रार्थना की और उसके बारे में शिकायत की। यहोवा ने हमारी सुनी उसने हम लोगों की परेशानियाँ, हमारे कठोर कार्य और कष्ट देखे। {26:8} तब यहोवा हम लोगों को अपनी प्रबल शक्ति और दृढ़ता से मिस्र से बाहर लाया। उसने महान चमत्कारों और आश्चर्यों का उपयोग किया। उसने भंयकर घटनाएँ घटित होने दीं। {26:9} इस प्रकार वह हम लोगों को इस स्थान पर लाया। उसने अच्छी चीजों से भरा — पुरा देश हमें दिया। {26:10} यहोवा, अब मैं उस देश की प्रथम फसल तेरे पास लाया हूँ जिसे तूने हमें दिया है। “तब तुम्हें फसल को यहोवा अपने परमेश्वर के सामने रखना चाहिए और तुम्हें उसकी उपासना करनी चाहिए। {26:11} तब तुम उन सभी चीज़ों का आनन्द से उपभोग कर सकते हो जिसे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें और तुम्हारे परिवार को दिया है। लेवीवंशी और वे विदेशी जो तुम्हारे बीच रहते हैं तुम्हारे साथ इन चीजों का आनन्द ले सकते हैं। {26:12} “जब तुम सारा दशमांश जो तीसरे वर्ष (दशमांश का वर्ष) तुम्हारी फ़सल का दिया जाना है, दे चुको तब तुम्हें लेवीवंशियों, विदेशियों, अनाथों और विधवाओं को इसे देना चाहिए। तब हर एक नगर में वे खा सकते हैं और सन्तुष्ट किये जा सकते हैं। {26:13} तुम यहोवा अपने परमेश्वर से कहोगे, ‘मैंने अपने घर से अपनी फसल का पवित्र भाग दशमांश बाहर निकाल दिया है। मैंने इसे उन सभी लेवीवंशियों, विदेशियों, अनाथों और विधवाओं को दे दिया है। मैंने उन सभी आदेशों का पालन करने से इन्कार नहीं किया है। मैं उन्हें भूला नहीं हूँ। {26:14} मैंने यह भोजन तब नहीं किया जब मैं शोक मना रहा था। मैंने इस अन्न को तब अलग नहीं किया जब मैं अपवित्र था। मैंने इस अन्न में से कोई भाग मरे व्यक्ति के लिये नहीं दिया है। मैंने यहोवा, मेरे परमेश्वर, तेरी आज्ञाओं का पालन किया है। मैंने वह सब कुछ किया है जिसके लिये तूने आदेश दिया है। {26:15} तू अपने पवित्र आवास स्वर्ग से नीचे निगाह डाल और अपने लोगों, इस्राएलियों को आशीर्वाद दे और तू उस देश को आशीर्वाद दे जिसे तूने हम लोगों को वैसा ही दिया है जैसा तूने हमारे पूर्वजों को अच्छी चीज़ों से भरा — पुरा देश देने का वचन दिया था।’ {i26:16} यहोवा के आदेशों पर चलो {26:16} “आज यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमको आदेश देता है कि तुम इन सभी विधियों और नियमों का पालन करो। अपने पूरे हृदय और अपनी पूरी आत्मा से इनका पालन करने के लिये सावधान रहो। {26:17} आज तुमने यह कहा है कि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर है। तुम लोगों ने वचन दिया है तुम उसके मार्ग पर चलोगे, उसके उपदेशों को मानोगे, और उसके नियमों और आदेशों को मानोगे। तुमने कहा है कि तुम वह सब कुछ करोगे जिसे करने के लिये वह कहता है। {26:18} आज योहवा ने तुम्हें अपने लोग चुन लिया और अपना मूल्यवान आश्रय प्रदान करने का वचन भी दिया है। यहोवा ने यह कहा है कि तुम्हें उसके सभी आदेशों का पालन करना चाहिए। {26:19} यहोवा तुम्हें उन सभी राष्ट्रों से महान बनाएगा जिन्हें उसने बनाया है। वह तुमको प्रशंसा, यश और गौरव देगा और तुम उसके विशेष लोग होगे, जैसा उसने वचन दिया है।” {i27:1} नियम पत्थरों पर लिखे जाने चाहिए {27:1} मूसा ने इस्राएल के प्रमुखों के साथ लोगों को आदेश दिया। उसने कहा, “उन सभी आदेशों का पालन करो जिन्हें मैं तुम्हें आज दे रहा हूँ। {27:2} जिस दिन तुम यरदन नदी पार करके उस देश में प्रवेश करो जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है उस दिन, विशाल शिलायें तैयार करो। इन शिलाओं को चूने के लेप से ढक दो। {27:3} तब इन नियमों की सारी बातें इन पत्थरों पर लिख दो। तुम्हें यह तब करना चाहिये जब तुम यरदन नदी के पार पहुँच जाओ। तब तुम उस देश में जा सकोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें अच्छी चीजों से भरा — पूरा दे रहा है। यहोवा तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर ने इसे देकर अपने वचन को पूरा किया है। {27:4} “यरदन नदी के पार जाने के बाद तुम्हें इन शिलाओं को एबाल पर्वत पर आज के मेरे आदेश के अनुसार स्थापित करना चाहिए। तुम्हें इन पत्थरों को चूने के लेप से ढक देना चाहिए। {27:5} वहाँ पर यहोवा अपने परमेश्वर की वेदी बनाने के लिये भी कुछ शिलाओं का उपयोग करो। पत्थरों को काटने के लिये लोहे के औजारों का उपयोग मत करो। {27:6} जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर के लिये वेदी पर होमबलि चढ़ाओ। {27:7} और तुम्हें वहाँ मेलबलि के रूप में बलि देनी चाहिए और उन्हें खाना चाहिए। खाओ और यहोवा अपने परमेश्वर के साथ उल्लास का समय बिताओ। {27:8} तुम्हें इन सारे नियमों को अपनी स्थापित की गई शिलाओं पर साफ — साफ लिखवाना चाहिए।” {i27:9} नियम के अभिशाप {27:9} मूसा ने लेवीवंशी याजकों के साथ इस्राएल के सभी लोगों से बात की। उसने कहा, “इस्राएलियों, शान्त रहो और सुनो! आज तुम लोग, यहोवा अपने परमेश्वर के लोग हो गए हो। {27:10} इसलिए तुमहें वह सब कुछ करना चाहिए जो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर कहता है। तुम्हें उसके उन आदेशों और नियमों का पालन करना चाहिए जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ।” {27:11} उसी दिन, मूसा ने लोगों से कहा, {27:12} “जब तुम यरदन नदी के पार जाओगे उसके बाद ये परिवार समूह गिरिज्जीम पर्वत पर खडे होकर लोगों को आशीर्वाद देंगे शिमोन, लेवी, यहुदा, इस्साकार, यूसुफ और विन्यामीन। {27:13} और ये परिवार समूह एबाल पर्वत पर से अभिशाप पढ़ेंगेः रूबेन, गाद, आशेर, जबूलून, दान और नप्ताली। {27:14} “और लेवीवंशी इस्राएल के सभी लोगों से तेज स्वर में कहेंगेः {27:15} “‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो असत्य देवता बनाता है और उसे अपने गुप्त स्थान में रखता है। असत्य देवता केवल वे मूर्तियाँ हैं जिसे कोई कारीगर लकड़ी, पत्थर या धातु की बनाता है। यहोवा उन चीजों से घृणा करता है!’ “तब सभी लोग उत्तर देंगे, ‘आमीन!’ {27:16} “लेवीवंशी कहेंगे, ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो ऐसा कार्य करता है जिससे पता चलता है कि वह अपने माता — पिता का अपमान करता है!’ “तब सभी लोग उत्तर देंगे, ‘आमीन!’ {27:17} “लेवीवंशी कहेंगे, ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो अपने पड़ोसी के सीमा चिन्ह को हटाता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:18} “लेवीवंशी कहेंगे, ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो अन्धे को कुमार्ग पर चलाता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:19} “लेवीवंशी कहेंगे, ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो विदेशियों, अनाथों और विधवाओं के साथ न्याय नहीं करता!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:20} “लेवीवंशी कहेंगेः ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो अपने पिता की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखता है क्योंकि वह अपने पिता को नंगा सा करता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:21} “लेवीवंशी कहेंगे: ‘वह व्यक्ति अभिश्प्त है जो किसी प्रकार के जानवर के साथ शारीरिक सम्पर्क करता है!’ “तब सभी लगो कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:22} “लेवीवंशी कहेंगे: ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो अपनी माता या अपने पिता की पुत्री, अपनी बहन के साथ शारीरिक सम्पर्क रखता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:23} “लेवीवंशी कहेंगेः ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो अपनी सास के साथ शारिरिक सम्पर्क रखता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:24} “लेवीवंशी कहेंगे: ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो दूसरे व्यक्ति की गुप्त रूप से हत्या करता है!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:25} “लेवीवंशी कहेंगे: ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो निर्दोष की हत्या के लिये धन लेता है!’ “तब सभी कहेंगे, ‘आमीन!’ {27:26} “लेवीवंशी कहेंगे: ‘वह व्यक्ति अभिशप्त है जो इन नियमों का समर्थन नहीं करता और पालन करना स्वीकार नहीं करता!’ “तब सभी लोग कहेंगे, ‘आमीन!’ {i28:1} आशीर्वाद {28:1} “यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के इन आदेशों के पालन में सावधान रहोगे जिन्हें मैं आज तुम्हें बता रहा हूँ तो योहवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें पृथ्वी के सभी राष्ट्रों के ऊपर श्रेष्ठ करेगा। {28:2} यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन करोगे तो ये वरदान तुम्हारे पास आएंगे और तुम्हारे होंगे: {28:3} “यहोवा तुम्हारे नगरों और खेतों को आशीष प्रदान करेगा। {28:4} यहोवा तुम्हारे बच्चों को आशीर्वाद देगा। वह तुम्हारी भूमि को अच्छी फसल का वरदानदेगा और वह तुम्हारे जानवरों को बच्चे देने का वरदान देगा। तुम्हारे पास बहुत से मवेशी और भेड़ें होंगी। {28:5} यहोवा तुम्हें अच्छे अन्न की फसल और बहुत अधिक भोजन पाने का आशीर्वाद देगा। {28:6} यहोवा तुम्हें तुम्हारे आगमन और प्रस्थान पर आशीर्वाद देगा। {28:7} “यहोवा तुम्हें उन शत्रुओं पर विजयी बनाएगा जो तुम्हारे विरुद्ध होंगे। तुम्हारे शत्रु तुम्हारे विरुद्ध एक रास्ते से आएंगे किन्तु वे तुम्हारे सामने सात मार्गों में भाग खड़ें होंगे। {28:8} “यहोवा तुम्हें भरे कृषि — भंडार का आशीर्वाद देगा। तुम जो कुछ करोगे वह उसके लिये आशीर्वाद देगा जिसे वह तुमको दे रहा है। {28:9} यहोवा तुम्हें अपने विशेष लोग बनाएगा। यहोवा ने तुम्हें यह वचन दिया है बशर्ते कि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन करो और उसके मार्ग पर चलो। {28:10} तब पृथ्वी के सभी लोग देखेंगे कि तुम यहोवा के नाम से जाने जाते हो और वे तुमसे भयभीत होंगे। {28:11} “और यहोवा तुम्हें बहुत सी अच्छी चीजें देगा। वह तुम्हें बहुत से बच्चे देगा। वह तुम्हें मवेशी और बहुत से बछड़े देगा। वह उस देश में तुम्हें बहुत अच्छी फसल देगा जिसे उन्होंने तुम्हारे पूर्वजों को देने का वचन दिया था। {28:12} “यहोवा अपने भण्डार खोल देगा जिनमें वह अपना कीमती वरदान रखता है तथा तुम्हारी भूमि के लिये ठीक समय पर वर्षा देगा। यहोवा जो कुछ भी तुम करोगे उसके लिए आशीर्वाद देगा और बहुत से राष्ट्रों को कर्ज देने के लिए तुम्हारे पास धन होगा। किन्तु तुम्हें उनसे कुछ उधार लेने की आवश्यकता नहीं होगी। {28:13} यहोवा तुम्हें सिर बनाएगा, पूँछ नहीं। तुम चोटी पर होगे, तलहटी पर नहीं। यह तब होगा जह तुम यहोवा अपने परमेश्वर के उन आदेशों पर ध्यान दोगे जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। {28:14} तुम्हें उन शिक्षाओं में से किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिये जिन्हें मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। तुम्हें इनसे दाँयी या बाँयी ओर नहीं जाना चाहिए। तुम्हें उपासना के लिये अन्य देवताओं का अनुसरण नहीं करना चाहिए। {i28:15} अभिशाप {28:15} “किन्तु यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर द्वारा कही गई बातों पर ध्यान नहीं देते और आज मैं जिन आदेशों और नियमों को बता रहा हूँ, पालन नहीं करते तो ये सभी अभिशाप तुम पर आयेंगेः {28:16} “यहोवा तुम्हारे नगरों और गाँवों को अभिशाप देगा। {28:17} यहोवा तुम्हारी टोकरियों व बर्तनों को अभिशाप देगा और तुम्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलेगा। {28:18} तुम्हारे बच्चे अभिशप्त होंगे। तुम्हारी भूमि की फसलें तुम्हारे मवेशियों के बछड़े और तुम्हारी रेवड़ों के मेमनें अभिशप्त होंगे। {28:19} तुम्हारा आगमन और प्रस्थान अभिशप्त होगा। {28:20} “यदि तुम बुरे काम करोगे और अपने यहोवा से मुँह फेरोगे, तो तुम अभिशप्त होगे। तुम जो कुछ करोगे उसमें तुम्हें अव्यवस्था और फटकार का समाना करना होगा। वह यह तब तक करेगा जब तक तुम शीघ्रता से और पूरी तरह से नष्ट नहीं हो जाते। {28:21} यदि तुम यहोवा की आज्ञा नहीं मानते तो वह तुम्हें तब तक महामारी से पीड़ित करत रहेगा जब तक तुम उस देश में पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाते जिसमें तुम रहने के लिये प्रवेश कर रहे हो। {28:22} यहोवा तुम्हें रोग से पीड़ित और दुर्बल होने का दण्ड देगा। तुम्हें ज्वर और सूजन होगी। यहोवा तुम्हारे पास भंयकर गर्मी भेजेगा और तुम्हारे यहाँ वर्षा नहीं होगी। तुम्हारी फसलें गर्मी या रोग से नष्ट हो जाएंगी। तुम पर ये आपत्तियाँ तब तक आएंगी जब तक तुम मर नहीं जाते! {28:23} आकाश में कोई बादल नहीं रहेगा और आकाश काँसा जैसा होगा। और तुम्हारे नीचे पृथ्वी लोहे की तरह होगी। {28:24} वर्षा के बदले यहोवा तुम्हारे पास आकाश से रेत और धूलि भेजेगा। यह तुम पर तब तक आयेगी जब तक तुम नष्ट नहीं हो जाते। {28:25} “यहोवा तुम्हारे शत्रुओं द्वारा तुम्हें पराजित करायेगा। तुम अपने शत्रुओं के विरुद्ध एक रास्ते से जाओगे और उनके सामने से सात मार्ग से भागोगे। तुम्हारे ऊपर जो आपत्तियाँ आएँगी वे सारी पृथ्वी के लोगों को भयभीत करेंगी। {28:26} तुम्हारे शव सभी जंगली जानवरों और पक्षियों का भोजन बनेंगे। कोई व्यक्ति उन्हें डराकर तुम्हारी लाशों से भगाने वाला न होगा। {28:27} “यदि तुम यहोवा की आज्ञा का पालन नहीं करते तो वह तुम्हें वैसे फोड़े होने का दण्ड देगा जैसे फोड़े उसने मिस्रियों पर भेजे थे। वह तुम्हें भयंकर फोड़ों और खुजली से पीड़ित करेगा। {28:28} यहोवा तुम्हें पागल बना कर दण्ड देगा। वह तुम्हें अन्धा और कुण्ठित बनाएगा। {28:29} तुम्हें दिन के प्रकाश में अन्धे की तरह अपना रास्ता टटोलना पड़ेगा। तुम जो कुछ करोगे उसमें तुम असफल रहोगे। लोग तुम पर बार — बार प्रहार करेंगे और तुम्हारी चीजें चुराएंगे। तुम्हें बचाने वाला वहाँ कोई भी न होगा। {28:30} “तुम्हारा विवाह किसी स्त्री के साथ पक्का हो सकता है, किन्तु दूसरा व्यक्ति उसके साथ सोयेगा। तुम कोई घर बना सकते हो, किन्तु तुम उसमें रहोगे नहीं। तुम अंगूर का बाग लगा सकते हो, किन्तु इससे कुछ भी इकट्ठा नहीं कर सकते। {28:31} तुम्हारा बैल तुम्हारी आँखों के सामने मारा जाएगा किन्तु तुम उसका कुछ भी माँस नहीं खा सकते। तुम्हारा गधा तुमसे बलपूर्वक छीन कर ले जाया जाएगा यह तुम्हें लौटाया नहीं जाएगा। तुम्हारी भेड़ें तुम्हारे शत्रुओं को दे दी जाएँगी। तुम्हारा रक्षक कोई व्यक्ति नहीं होगा। {28:32} “तुम्हारे पुत्र और तुम्हारी पुत्रियाँ दूसरी जाति के लोगों को दे दी जाएँगी। तुम्हारी आँखे सारे दिन बच्चों को देखने के लिये टकटकी लगाए रहेंगी क्योंकि तुम बच्चों को देखना चाहोगे। किन्तु तुम प्रतीक्षा करते — करते कमजोर हो जाओगे, तुम असहाय हो जाओगे। {28:33} “वह राष्ट्र जिसे तुम नहीं जानते, तुम्हारे पसीने की कमाई की सारी फसल खाएगा। तुम सदैव परेशान रहोगे। तुम सदैव छिन्न — भिन्न होगे। {28:34} तुम्हारी आँखें वह देखेंगी जिससे तुम पागल हो जाओगे। {28:35} यहोवा तुम्हें दर्द वाले फोड़ों का दण्ड देगा। ये फोड़े तुम्हारे घुटनों और पैरों पर होंगे। वे तुम्हारे तलवे से लेकर सिर के ऊपर तक फैल जाएंगे और तुम्हारे ये फोड़े भरेंगे नहीं। {28:36} “यहोवा तुम्हें और तुम्हारे राजा को ऐसे राष्ट्र में भेजेगा जिसे तुम नहीं जानते होगे। तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने उस राष्ट्र को कभी नहीं देखा होगा। वहाँ तुम लकड़ी और पत्थर के बने अन्य देवताओं को पूजोगे। {28:37} जिन देशों में यहोवा तुम्हें भेजेगा उन देशों के लोग तुम लोगों पर आई विपत्तियों को सुनकर स्तब्ध रह जाएंगे। वे तुम्हारी हँसी उड़ायेंगे और तुम्हारी निन्दा करेंगे। {i28:38} असफलता का अभिशाप {28:38} “तुम अपने खेतों में बोने के लिये आवश्यकता से बहुत अधिक बीज ले जाओगे। किन्तु तुम्हारी उपज कम होगी। क्यों? क्योंकि टिड्डयाँ तुम्हारी फसलें खा जाएंगी। {28:39} तुम अंगूर के बाग लगाओगे और उनमें कड़ा परिश्रम करोगे। किन्तु तुम उनमें से अंगूर इकट्ठे नहीं करोगे और न ही उन से दाखमधु पीओगे। क्यों? क्योंकि उन्हें कीड़े खा जाएंगे। {28:40} तुम्हारी सारी भूमि में जैतून के पेड़ होंगे। किन्तु तुम उसके कुछ भी तेल का उपयोग नहीं कर सकोगे। क्यों? क्योंकि तुम्हारे जैतून के पेड़ अपने फलों को नष्ट होने के लिये गिरा देंगे। {28:41} तुम्हारे पुत्र और तुम्हारी पुत्रियाँ होंगी, किन्तु तुम उन्हें अपने पास नहीं रख सकोगे। क्यों? क्योंकि वे पकड़कर दूर ले जाए जाएंगे। {28:42} टिड्डियाँ तुम्हारे पेड़ों और खेतों की फसलों को नष्ट कर देंगी। {28:43} तुम्हारे बीच रहने वाले विदेशी अधिक से अधिक शक्ति बढ़ाते जाएँगे और तुममें जों भी तुम्हारी शक्ति है उसे खोते जाओगे। {28:44} विदेशियों के पास तुम्हें उधार देने योग्य धन होगा लेकिन तुम्हारे पास उन्हें उधार देने योग धन नहीं होगा। वे तुम्हारा वैसा ही नियन्त्रण करेंगे जैसा मस्तिष्क शरीर का करता है। तुम पूँछ के समान बन जाओगे। {28:45} “ये सारे अभिशाप तुम पर पड़ेंगे। वे तुम्हारा पीछा तब तक करते रहेंगे और तुमको ग्रसित करते रहेंगे जब तक तुम नष्ट हो जाते। क्यों? क्योंकि तुमने यहोवा अपने परमेश्वर की कही हुई बातों की परवाह नहीं की। तुमने उसके उन आदेशों और नियमों का पालन नहीं किया जिसे उसने तुम्हें दिया। {28:46} ये अभिशाप लोगों को बताएंगे कि परमेश्वर ने तुम्हारे वंशजों के साथ सदैव न्याय किया है। ये अभिशाप संकेत और चेतावनी के रूप में तुम्हें और तुम्हारे वंशजों को हमेशा याद रहेंगे। {28:47} “यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें बहुत से वरदान दिये। किन्तु तुमने उसकी सेवा प्रसन्नता और उल्लास भरे हृदय से नहीं की। {28:48} इसलिए तुम अपने उन शत्रुओं की सेवा करोगे जिन्हें यहोवा, तुम्हारे विरुद्ध भेजेगा। तुम भूखे, प्यासे और नंगे रहोगे। तुम्हारे पास कुछ भी न होगा। यहोवा तुम्हारी गर्दन पर एक लोहे का जुवा तब तक रखेगा जब तक वह तुम्हें नष्ट नहीं कर देता। {i28:49} शत्रु राष्ट्र का अभिशाप {28:49} “यहोवा तुम्हारे विरुद्ध बहुत दूर से एक राष्ट्र को लाएगा। यह राष्ट्र पृथ्वी की दूसरी ओर से आएगा। यह राष्ट्र तुम्हारे ऊपर आकाश से उतरते उकाब की तरह शीघ्रता से आक्रमण करेगा। तुम इस राष्ट्र की भाषा नहीं समझोगे। {28:50} इस राष्ट्र के लोगों के चेहरे कठोर होंगे। वे बूढ़े लोगों की भी परवाह नहीं करेंगे। वे छोटे बच्चों पर भी दयालु नहीं होंगे। {28:51} वे तुम्हारे मवेशियों के बछड़े और तुम्हारी भूमि की फसल तब तक खायेंगे जब तक तुम नष्ट नहीं हो जाओगे। वे तुम्हारे लिये अन्न, नयी दाखमधु, तेल तुम्हारे मवेशियों के बछड़े अथवा तुम्हारे रेवड़ों के मेमने नहीं छोड़ेंगे। वे यह तब तक करते रहेंगे जब तक तुम नष्ट नहीं हो जाओगे। {28:52} “यह राष्ट्र तुम्हारे सभी नगरों को घेर लेगा। तुम अपने नगरों के चारों ओर ऊँची और दृढ़ दीवारों पर भरोसा रखते हो। किन्तु तुम्हारे देश में ये दीवारें सर्वत्र गिर जाएंगी। हाँ, वह राष्ट्र तुम्हारे उस देश के सभी नगरों पर आक्रमण करेगा जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है। {28:53} जब तक तुम्हारा शत्रु तुम्हारे नगर का घेरा डाले रहेगा तब तक तुम्हारी बड़ी हानि होगी। तुम इतने भूखे होगे कि अपने बच्चों को भी खा जाओगे। तुम अपने पुत्र और पुत्रियों का माँस खाओगे जिन्हें यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हे दिया है। {28:54} “तुम्हारा बहुत विनम्र सज्जन पुरुष भी अपने बच्चों, भाईयों, अपनी प्रिय पत्नी तथा बचे हुए बच्चों के साथ बहुत क्रूरता का बर्ताव करेगा। {28:55} उसके पास कुछ भी खाने को नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे नगरों के विरूद्ध आने वाले शत्रु इतनी अधिक हानि पहुँचा देंगे। इसलिए वह अपने बच्चों को खायेगा। किन्तु वह अपने परिवार के शेष लोगों को कुछ भी नहीं देगा! {28:56} “तुम्हारे बीच सबसे अधिक विनम्र और कोमल स्त्री भी वही करेगी। ऐसी सम्पन्न और कोमल स्त्री भी जिसने कहीं जाने के लिये जमीन पर कभी पैर भी न रखा हो। वह अपने प्रिय पति या अपने पुत्र — पुत्रियों के साथ हिस्सा बँटाने से इन्कार करेगी। {28:57} वह अपने ही गर्भ की झिल्ली को खायेगी और उस बच्चे को भी जिसे वह जन्म देगी। वह उन्हें गुप्त रूप से खायेगी। क्यों? क्योंकि वहाँ कोई भी भोजन नहीं बचा है। यह तब होगा जब तुम्हारा शत्रु तुम्हारे नगरों के विरुद्ध आयेगा और बहुत अधिक कष्ट पहुँचायेगा। {28:58} “इस पुस्तक में जितने आदेश और नियम लिखे गए हैं उन सबका पालन तुम्हें करना चाहिए और तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर के आश्चर्य और आतंक उत्पन्न करने वाले नाम का सम्मान करना चाहिए। यदि तुम इनका पालन नहीं करते {28:59} तो यहोवा तुम्हें भयंकर आपत्ति में डालेगा और तुम्हारे वंशज बड़ी परेशानियाँ उठायेंगे और उन्हें भयंकर रोग होंगे जो लम्बे समय तक रहेंगे {28:60} और यहोवा मिस्र से वे सभी बीमारियाँ लाएगा जिनसे तुम डरते हो। ये बीमारियाँ तुम लोगों में रहेंगी। {28:61} यहोवा उन बीमारियों और परेशानियों को भी तुम्हारे बीच लाएगा जो इस व्यवस्था की किताब में नहीं लिखी गई हैं। वह यह तब तक करता रहेगा जब तक तुम नष्ट नहीं हो जाते। {28:62} तुम इतने अधिक हो सकते हो जितने आकाश में तारे हैं। किन्तु तुममें से कुछ ही बचे रहेंगे। तुम्हारे साथ यह क्यों होगा? क्योंकि तुमने यहोवा अपने परमेश्वर की बात नहीं मानी। {28:63} “पहले यहोवा तुम्हारी भलाई करने और तुम्हारे राष्ट्र को बढ़ाने में प्रसन्न था। उसी तरह यहोवा तुम्हें नष्ट और बरबाद करने में प्रसन्न होगा। तुम उस देश से बाहर ले जाए जाओगे जिसे तुम अपना बनाने के लिये उसमें प्रवेश कर रहे हो। {28:64} यहोवा तुम्हें पृथ्वी के एक छोर से दूसरी छोर तक संसार के सभी लोगों मे बिखेर देगा। वहाँ तुम दूसरे लकड़ी और पत्थर के देवताओं को पूजोगे जिन्हें तुमने या तुम्हारे पूर्वजों ने कभी नहीं पूजा। {28:65} “तुम्हें इन राष्ट्रों के बीच तनिक भी शान्ति नहीं मिलेगी। तुम्हें आराम की कोई जगह नहीं मिलेगी। यहोवा तुम्हारे मस्तिष्क को चिन्ताओं से भर देगा। तुम्हारी आँखें पथरा जाएंगी। तुम अपने को ऊखड़ा हुआ अनुभव करोगे। {28:66} तुम संकट में रहोगे। तुम दिन — रात भयभीत रहोगे। सदैव सन्देह में पड़े रहोगे। तुम अपने जीवन के बारे में कभी निश्चिन्त नहीं रहोगे। {28:67} सवेरे तुम कहोगे, ‘अच्छा होता, यह शाम होती!’ शाम को तुम कहोगे, ‘अच्छा होता, यह सवेरा होता!’ क्यों? क्योंकि उस भय के कारण जो तुम्हारे हृदय में होगा और उन आपत्तियों के कारण जो तुम देखोगे। {28:68} यहोवा तुम्हें जहाजों में मिस्र वापस भेजेगा। मैंने यह कहा कि तुम उस स्थान पर दुबारा कभी नहीं जाओगे। किन्तु यहोवा तुम्हें वहाँ भेजेगा। और वहाँ तुम अपने को अपने शत्रुओं के हाथ दास के रूप में बेचने की कोशिश करोगे, किन्तु कोई व्यक्ति तुम्हें खरीदेगा नहीं।” {i29:1} मोआब में वाचा {29:1} ये बातें उस वाचा का अंग हैं जिस वाचा को यहोवा ने मोआब प्रदेश मे इस्राएल के लोगों के साथ मूसा से करने को कहा। यहोवा ने इस वाचा को उस साक्षीपत्र से अतिरिक्त किया जिसे उसने इस्राएल के लोगों के साथ होरेब (सीनै) पर्वत पर किया था। {29:2} मूसा ने सभी इस्राएली लोगों को इकट्ठा बुलाया। उसने उनसे कहा, “तुमने वह सब कुछ देखा जो याहोवा ने मिस्र देश में किया। तुमने वह सब भी देखा जो उसने फिरौन, फिरौन के प्रमुखों और उसके पूरे देश के साथ किया। {29:3} तुमने उन बड़ी मुसीबतों को देखा जो उसने उन्हें दीं। तुमने उसके उन चमत्कारों और बड़े आश्चर्यों को देखा जो उसने किये। {29:4} किन्तु आज भी तुम नहीं समझते कि क्या हुआ। यहोवा ने सचमुच तुमको नहीं समझाया जो तुमने देखा और सुना। {29:5} यहोवा तुम्हें चालीस वर्ष तक मरुभूमि से होकर ले जाता रहा और उस लम्बे समय के बीच तुम्हारे वस्त्र और जूते फटकर खत्म नहीं हुए। {29:6} तुम्हारे पास कुछ भी भोजन नहीं था। तुम्हारे पास कुछ भी दाखमधु या कोई अन्य पीने की चीज़ नहीं थी। किन्तु यहोवा ने तुम्हारी देखभाल की उसने यह इसलिए किया कि तुम समझोगे कि वह यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर है। {29:7} “जब तुम इस स्थान पर आए तब हेशबोन का राजा सीहोन और बाशान का राजा ओग हम लोगों के विरुद्ध लड़ने आए। किन्तु हम लोगों ने उन्हें हराया। {29:8} तब हम लोगों ने ये प्रदेश रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे लोगों को उनके कब्जे में दे दिया। {29:9} इसलिए, इस वाचा के आदेशों का पालन पूरी तरह करो। तब जो कुछ तुम करोगे उसमे सफल होगे। {29:10} “आज तुम सभी यहोवा अपने परमेश्वर के सामने खड़े हो। तुम्हारे प्रमुख, तुम्हारे अधिकारी, तुम्हारे बुजुर्ग (प्रमुख) और सभी अन्य लोग यहाँ हैं। {29:11} तुम्हारी पत्नियाँ और बच्चे यहाँ हैं तथा वे विदेशी भी यहाँ हैं जो तुम्हारे बीच रहते हैं एवं तुम्हारी लकड़ियाँ काटते और पानी भरते हैं। {29:12} तुम सभी यहाँ यहोवा अपने परमेश्वर के साथ एक वाचा करने वाले हो। यहोवा तुम लोगों के साथ यह वाचा आज कर रहा है। {29:13} इस वाचा द्वारा यहोवा तुम्हें अपने विशेष लोग बना रहा है और वह स्वंय तुम्हारा परमेश्वर होगा। उसने यह तुमसे कहा है। उसने तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम, इसहाक और याकूब को यह वचन दिया था। {29:14} यहोवा अपना वचन देकर केवल तुम लोगों के साथ ही वाचा नहीं कर रहा है। {29:15} वह यह वाचा हम सभी के साथ कर रहा है जो यहाँ आज यहोवा अपने परमेश्वर के सामने खड़े हैं। किन्तु यह वाचा हमारे उन वंशजों के लिये भी है जो यहाँ आज हम लोगों के साथ नहीं हैं। {29:16} तुम्हें याद है कि हम मिस्र में कैसे रहे और तुम्हें याद है कि हमने उन देशों से होकर कैसे यात्रा की जो यहाँ तक आने वाले हमारे रास्ते पर थे। {29:17} तुमने उनकी घृणित चीज़ें अर्थात् लकड़ी, पत्थर, चाँदी, और सोने की बनी देवमूर्तियाँ देखीं। {29:18} निश्चय कर लो कि आज यहाँ हम लोगों में कोई ऐसा पुरुष, स्त्री, परिवार या परिवार समूह नहीं है जो यहोवा, अपने परमेश्वर के विपरीत जाता हो। कोई भी व्यक्ति उन राष्ट्रों के देवताओं की सेवा करने नहीं जाना चाहिए। जो लोग ऐसा करते हैं वे उस पौधे की तरह हैं जो कड़वा, जहरीला फसल पैदा करता है। {29:19} “कोई व्यक्ति इन अभिशापों को सुन सकता है और अपने को संतोष देता हुआ कह सकता है, ‘मैं जो चाहता हूँ करता रहूँगा। मेरा कुछ भी बुरा नहीं होगा।’ वह व्यक्ति अपने ऊपर ही आपत्ति नहीं बुलाएगा अपितु वह सबके ऊपर अच्छे लोगों पर भी बुलाएगा। {29:20} यहोवा उस व्यक्ति को क्षमा नहीं करेगा। नहीं, यहोवा उस व्यक्ति पर क्रोधित होगा और बौखला उठेगा। इस पुस्तक में लिखे सभी अभिशाप उस पर पड़ेंगे। यहोवा उसे इस्रएल के सभी परिवार समूहों से निकाल {29:21} बाहर करेगा। यहोवा उसको पूरी तरह नष्ट करेगा। सभी आपत्तियाँ जो इस पुस्तक में लिखी गई हैं, उस पर आयेंगी। वे सभी बातें उस वाचा का अंश हैं जो व्यवस्था की पुस्तक में लिखी गई हैं। {29:22} “भविष्य में, तुम्हारे वंशज और बहुत दूर के देशों से आने वाले विदेशी लोग देखेंगे कि देश कैसे बरबाद हो गया है। वे उन लोगों को देखेंगे जिन्हें यहोवा उनमें लायेगा। {29:23} सारा देश जलते गन्धक और नमक से ढका हुआ बेकार हो जाएगा। भूमि में कुछ भी बोया हुआ नहीं रहेगा। कुछ भी, यहाँ तक कि खर — पतवार भी यहाँ नहीं उगेंगे। यह देश उन नगरों — सदोम, अमोरा, अदमा और सबोयीम, की तरह नष्ट कर दिया जाएगा। जिन्हें यहोवा, ने तब नष्ट किया था जब वह बहुत क्रोधित था। {29:24} “सभी दूसरे राष्ट्र पूछेंगे, ‘यहोवा ने इस देश के साथ ऐसा क्यों किया? वह इतना क्रोधित क्यों हुआ?’ {29:25} उत्तर होगा: ‘यहोवा इसलिए क्रोधित हुआ कि इस्राएल के लोगों ने यहोवा, अपने पूर्वजों के परमेश्वर की वाचा तोड़ी। उन्होंने उस वाचा का पालन करना बन्द कर दिया जिसे योहवा ने उनके साथ तब किया था जब वह उन्हें मिस्र देश से बाहर लाया था। {29:26} इस्राएल के लोगों ने ऐसे अन्य देवाताओं की सेवा करनी आरम्भ की जिनकी पूजा का ज्ञान उन्हें पहले कभी नहीं था। यहोवा ने अपने लोगों से उन देवताओं की पूजा करना मना किया था। {29:27} यही कारण है कि यहोवा इस देश के लोगों के विरुद्ध बहुत क्रोधित हो गया। इसलिए उसने इस पुस्तक में लिखे गए सभी अभिशापों को इन पर लागू किया। {29:28} यहोवा उन पर बहुत क्रोधित हुआ और उन पर बौखला उठा। इसलिए उसने उनके देश से उन्हें बाहर किया। उसने उन्हें दूसरे देश में पहुँचाया जहाँ वे आज हैं।’ {29:29} “कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें यहोवा हमारे परमेश्वर ने गुप्त रखा है। उन बातों को केवल वह ही जानता है। किन्तु यहोवा ने हमें अपने नियमों की जानकारी दी है! वह व्यवस्था हमारे लिये और हमारे वंशजों के लिये है। हमें इसका पालन सदैव करना चाहिए! {i30:1} इस्राएलियों की वापसी का वचन {30:1} “जो मैंने कहा है वह तुम पर घटित होगा। तुम आशीर्वाद से अच्छी चीजें पाओगे और अभिशाप से बुरी चीज़ें पाओगे। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दूसरे राष्ट्रों में भेजेगा। तब तुम इनके बारे में सोचोगे। {30:2} उस समय तुम और तुम्हारे वंशज यहोवा, अपने परमेश्वर के पास लौटेंगे। तुम पूरे हृदय और आत्मा से उन आदेशों का पालन करोगे जो आज हम ने दिये हैं उनका पूरा पालन करोगे। {30:3} तब यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम पर दयालु होगा। यहोवा तुम्हें फिर स्वतन्त्र करेगा। वह उन राष्ट्रों से तुम्हें लौटाएगा जहाँ उसने तुम्हें भेजा था। {30:4} चाहे तुम पृथ्वी के दूरतम स्थान पर भेज दिये गये हो, यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर तुमको इकट्ठा करेगा और तुम्हें वहाँ से वापस लाएगा। {30:5} यहोवा तुम्हें उस देश में लाएगा जो तुम्हारे पूर्वजों का था और वह देश तुम्हारा होगा। यहोवा तुम्हारा भला करेगा और तुम्हारे पास उससे अधिक होगा, जितना तुम्हारे पूर्वजों के पास था और तुम्हारे राष्ट्र में उससे अधिक लोग होंगे जितने उनके पास कभी थे। {30:6} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर, तुम्हें और तुम्हारे वंशजों को परिशुद्ध करेगा कि वे उसकी आज्ञा का पालन करना चाहेंगे। तब तुम यहोवा को सम्पूर्ण हृदय से प्रम करोगे और तुम जीवित रहोगे! {30:7} “और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर इन अभिशापों को तुम्हारे उन शत्रुओं पर उतारेगा जो तुमसे घृणा करते हैं तथा तुम्हें परेशान करते हैं {30:8} और तुम फिर यहोवा की आज्ञा का पालन करोगे। तुम उन सभी आदेशों का पालन करोगे जिन्हें मैंने आज तुम्हें दिये है। {30:9} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें उन सब में सफल बनाएगा जो तुम करोगे। वह तुम्हें बहुत से बच्चों के लिये, तुम्हारे मवेशियों को बहुत बछड़े और तुम्हारे खेतों को अच्छी फ़सल होने का वरदान देगा। यहोवा तुम्हारे लिए भला होगा। यहोवा तुम्हारा भला करने में वैसा ही आनन्दित होगा जैसा आनन्दित वह तुम्हारे पूर्वजों का भला करने में होता था। {30:10} किन्तु तुम्हें वह सब कुछ करना चाहिए जो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुमसे करने को कहता है। तुम्हें उसके आदेशों को मानना और व्यवस्था की पुस्तक में लिखे गए नियमों का पालन करना चाहिए। तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर की ओर अपने पूरे हृदय और आत्मा से हो जाना चाहिए। तब ये सभी अच्छी बातें तुम्हारे लिये होंगी। {i30:11} जीवन या मरण {30:11} “आज जो आदेश मैं तुम्हें दे रहा हूँ, वह तुम्हारे लिये बहुत कठिन नहीं है। यह तुम्हारी पहुँच के बाहर नहीं है। {30:12} यह आदेश स्वर्ग में नहीं है जिससे तुम्हें कहना पड़े, ‘हम लोगों के लिये स्वर्ग में कौन जाएगा और उसे हम लोगों के पास लाएगा जिससे हम उसे सुन सकें और उसका अनुसरण कर सकें?’ {30:13} यह आदेश समुद्र के दूसरे पार नहीं है जिससे तुम यह कहो कि ‘हमारे लिये समुद्र कौन पार करेगा और इसे लाएगा जिससे हम इसे सुन सकें और कर सकें?’ {30:14} नहीं, यहोवा का वचन तुम्हारे पास है। यह तुम्हारे मूँह और तुम्हारे हृदय में है जिससे तुम इसे कर सको। {30:15} “मैंने आज तुम्हारे सम्मुख जीवन और मृत्यु, समृद्धि और विनाश रख दिया है। {30:16} मैं आज तुम्हें आदेश देता हूँ कि यहोवा अपने परमेश्वर से प्रेम करो, उसके मार्ग पर चलो और उसके आदेशों, विधियों और नियमों का पालन करो। तब तुम जीवित रहोगे और तुम्हारा राष्ट्र अधिक बड़ा होगा। और यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें उस देश में आशीर्वाद देगा जिसे अपना बनाने के लिए तुम वहाँ जा रहे हो। {30:17} किन्तु यदि तुम यहोवा से मुँह फेरते हो और उसकी अनसुनी करते हो तथा दूसरे देवताओं की सेवा और पूजा में बहकाये जाते हो {30:18} तब तुम नष्ट कर दिये जाओगे। मैं चेतावनी दे रहा हूँ, तुम यरदन नदी के पार के उस देश में लम्बे समय तक नहीं रहोगे जिसमें जाने के लिये तुम तैयार हो और जिसे तुम अपना बनाओगे। {30:19} “आज मैं तुम्हें दो मार्ग को चुनने की छूट दे रहा हूँ। मैं धरती — आकाश को तुम्हारे चुनाव का साक्षी बना रहा हूँ। तुम जीवन को चुन सकते हो, या तुम मृत्यु को चुन सकते हो। जीवन का चुनना वरदान लाएगा और मृत्यु को चुनना अभिशाप। इसलिए जीवन को चुनो। तब तुम और तुम्हारे बच्चे जीवित रहेंगे। {30:20} तुम्हें यहोवा अपने परमेश्वर को प्रेम करना चाहिए और उसकी आज्ञा माननी चाहिए। उससे कभी विमुख न हो। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा जीवन है, और यहोवा तुम्हें उस देश में लम्बा जीवन देगा जिसे उसने तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम, इसहाक और याकूब को देने का वचन दिया था।” {i31:1} यहोशू नया नेता होगा {31:1} तब मूसा आगे बढ़ा और इस्राएलियों से ये बात कही। {31:2} मूसा ने उनसे कहा, “अब मैं एक सौ बीस वर्ष का हूँ। मैं अब आगे तुम्हारा नेतृत्व नहीं कर सकता। यहोवा ने मुझसे कहा है: ‘तुम यरदन नदी के पार नहीं जाओगे।’ {31:3} यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे आगे चलेगा! वह इन राष्ट्रों को तुम्हारे लिए नष्ट करेगा। तुम उनका देश उससे छीन लोगे। यहोशू उस पार तुम लोगों के आगे चलेगा। योहवा ने यह कहा है। {31:4} “यहोवा इन राष्ट्रों के लोगों के साथ वही करेगा जो उसने एमोरियों के राजाओं सीहोन और ओग के साथ किया। उन राजाओं के देश के साथ उसने जो किया वही यहाँ करेगा। यहोवा ने उनके प्रदेशों को नष्ट किया! {31:5} और यहोवा तुम्हें उन राष्ट्रों को पराजित करने देगा और तुम उनके साथ वह सब करोगे जिसे करने के लिये मैंने कहा है। {31:6} दृढ़ और साहसी बनो। इन राष्ट्रों से डरो नहीं। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे साथ जा रहा है। वह तुम्हें न छोड़ेगा और न त्यागेगा।” {31:7} तब मूसा ने यहोशू को बुलाया। जिस समय मूसा यहोशू से बातें कर रहा था उस समय इस्राएल के सभी लोग देख रहे थे। जब मूसा ने यहोशू से कहा, “दृढ़ और साहसी बनो। तुम इन लोगों को उस देश में ले जाओगे जिसे यहोवा ने इनके पूर्वजों को देने का वचन दिया था। तुम इस्राएल के लोगों की सहायता उस देश को लेने और अपना बनाने में करोगे। {31:8} यहोवा आगे चलेगा। वह स्वयं तुम्हारे साथ है। वह तुम्हें न सहायता देना बन्द करेगा, न ही तुम्हें छोड़ेगा। तुम न ही भयभीत न ही चिंतित हो!” {i31:9} मूसा व्यवस्था लिखाता है {31:9} तब मूसा ने इन नियमों को लिखा और लेवी के वंशज याजकों को दे दिया। उनका काम यहोवा के साक्षीपत्र के सन्दूक को ले चलना था। मूसा ने इस्राएल के सभी प्रमुखों को नियम दिए। {31:10} तब मूसा ने प्रमुखों को आदेश दिया। उसने कहा, “हर एक सात वर्ष बाद, स्वतन्त्रता के वर्ष में डेरों के पर्व में इन नियमों को पढ़ो। {31:11} उस समय इस्राएल के सभी लोग यहोवा, अपने परमेश्वर से मिलने के लिए उस विशेष स्थान पर आएंगे जिसे वे चुनेंगे। तब तुम लोगों में इन नियमों को ऐसे पढ़ना जिससे वे इसे सुन सकें। {31:12} सभी लोगों, पुरुषों, स्त्री, छोटे बच्चों और अपने नगरों में रहने वाले सभी विदेशियों को इकट्ठा करो। वे नियम को सुनेंगे, और वे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर का आदर करना सीखेंगे और वे इस नियम व आदेशों के पालन में सावधान रहेंगे {31:13} और तब उनके वंशज जो नियम नहीं जानते, इसे सुनेंगे और वे यहोवा तुम्हारे परमेश्वर का सम्मान करना सीखेंगे। वे तब तक सम्मान करेंगे जब तक तुम उस देश में रहोगे जिसे तुम यरदन नदी के उस पार लेने के लिये तैयार हो।” {i31:14} यहोवा मूसा और यहोशू को बुलाता है {31:14} यहोवा ने मूसा से कहा, “अब तुम्हारे मरने का समय निकट है। यहोशू को लो और मिलापवाले तम्बू में जाओ। मैं यहोशू को बताऊँगा कि वह क्या करे।” इसलिए मूसा और यहोशू मिलापवाले तम्बू में गए। {31:15} यहोवा बादलों के एक स्तम्भ के रूप में प्रकट हुआ। बादल का स्तम्भ तम्बू के द्वार पर खड़ा था। {31:16} यहोवा ने मूसा से कहा, “तुम शीघ्र ही मरोगे और जब तुम अपने पूर्वजों के साथ चले जाओगे तो ये लोग मुझ पर विश्वास करने वाले नहीं रह जायेंगे। वे उस वाचा को तोड़ देंगे जो मैंने इनके साथ की है। वे मुझे छोड़ देंगे और अन्य देवताओं की पूजा करना आरम्भ करेंगे, उन प्रदेशों के बनावटी देवताओं की जिनमें वे जायेंगे। {31:17} उस समय, मैं इन पर पहुत क्रोधित होऊँगा और इन्हें छोड़ दूँगा। मैं उनकी सहायता करना बन्द करुँगा और वे नष्ट हो जाएँगे। उनके साथ भयंकर घटनायें होंगी और वे विपत्ति में पड़ेंगे। तब वे कहेंगे, ‘ये बुरी घटनायें हम लोगों के साथ इसलिए हो रही हैं कि हमारा परमेश्वर हमारे साथ नहीं है।’ {31:18} तब मैं उनसे अपना मुँह छिपाऊँगा क्योंकि वे बुरा करेंगे और दूसरे देवताओं की पूजा करेंगे। {31:19} “इसलिए इस गीत को लिखो और इस्राएली लोगों को सिखाओ। उन्हें इसे गाना सिखाओ। तब इस्राएल के लोगों के विरूद्ध मेरे लिये यह गीत साक्षी रहेगा। {31:20} मैं उन्हें उस देश में जो अच्छी चीज़ों से भरा — पूरा है तथा जिसे देने का वचन मैंने उनके पूर्वजों को दिया है, ले जाऊँगा और वे जो खाना चाहेंगे, सब पाएंगे। वे सम्पन्नता से भरा जीवन बिताएंगे। किन्तु तब वे दूसरे देवताओं की ओर जाएंगे और उनकी सेवा करेंगे, वे मुझसे मुँह फेर लेंगे तथा मेरी वाचा को तोड़ेंगे, {31:21} तब उन पर भयंकर आपत्तियाँ आएंगी और वे बड़ी मुसीबत में होंगे। उस समय उनके लोग इस गीत को तब भी जानेंगे और यह उन्हें बताएगा कि वे कितनी बड़ी गलती पर हैं। मैंने अभी तक उनको उस देश में नहीं पहुँचाया है जिसे उन्हें देने का वचन मैंने दिया है। किन्तु मैं पहले से ही जानता हूँ कि वे वहाँ क्या करने वाले हैं, क्योंकि मैं उनकी प्रकृति से परिचित हूँ।” {31:22} इसलिए मूसा ने उसी दिन गीत लिखा और उसने गीत को इस्राएल के लोगों को सिखाया। {31:23} तब यहोवा ने नून के पुत्र यहोशू से बातें कीं। यहोवा ने कहा, “दृढ़ और साहसी बनो। तुम इस्राएल के लोगों को उस देश में ले चलोगे जिसे उन्हें देने का मैंने वचन दिया है और मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।” {i31:24} मूसा इस्राएल के लोगों को चेतावनी देता है {31:24} मूसा ने ये सारे नियम एक पुस्तक में लिखे। जब उसने इसे पूरा कर लिया तब {31:25} उसने लेवीवंशियों को आदेश दिया (ये लोग यहोवा के साक्षीपत्र के सन्दूक की देखभाल करते थे) मूसा ने कहा, {31:26} “इस व्यवस्था की किताब को लो और योहवा, अपने परमेश्वर के साक्षीपत्र के सन्दूक की बगल में रखो। तब यह वहाँ तुम्हारे विरुद्ध साक्षी होगी। {31:27} मैं जानता हूँ कि तुम बहुत अड़ियल हो। मैं जानता हूँ तुम मनमानी करना चाहते हो। ध्यान दो, आज जब मैं तुम्हारे साथ हूँ तब भी तुमने यहोवा की आज्ञा मानने से इन्कार किया है। मेरे मरने के बाद तुम योहवा की आज्ञा मानने से और अधिक इन्कार करोगे। {31:28} अपने सभी परिवार समूहों के प्रमुखों और अधिकारियों को एक साथ बुलाओ। मैं उन्हें यह सब कुछ बताऊँगा और मैं पृथ्वी और आकाश को उनके विरुद्ध साक्षी होने के लिए बुलाऊँगा। {31:29} मैं जानता हूँ कि मेरी मृत्यु के बाद तुम लोग कुकर्म करोगे। तुम उस मार्ग से हट जाओगे जिस पर चलने का आदेश मैंने दिया है। तब भविष्य में तुम पर आपत्तियाँ आएंगी। क्यों? क्योंकि तुम वह करना चाहते हो जिसे यहोवा बुरा बताता है। तुम उसे उन कामों को करने के कारण क्रोधित करोगे।” {i31:30} मूसा का गीत {31:30} तब मूसा ने इस्राएल के सभी लोगों को यह गीत सुनाया। वह तब तक नहीं रुका जब तक उसने इसे पूरा न कर लिया: {32:1} “हे गगन, सुन मैं बोलूँगा, पृथ्वी मेरे मुख से सुन बात। {32:2} बरहसेंगे वर्षा सम मेरे उपदेश, हिम — बिन्दु सम बहेगी पृथ्वी पर वाणी मेरी, कोमल घासों पर वर्षा की मन्द झड़ी सी, हरे पौधों पर वर्षा सी। {32:3} परमेश्वर का नाम सुनाएगी मैं कहूँगा, कहो यहोवा महान है। {32:4} “वह (यहोवा) हमारी चट्टान है — उसके सभी कार्य पूर्ण हैं! क्यों? क्योंकि उसके सभी मार्ग सत्य हैं! वह विश्वसनीय निष्पाप परमेश्वर, करता जो उचित और न्याय है। {32:5} तुम लोगों ने दुर्व्यवहार किया उससे अतः नहीं उसके जन तुम सच्चे। आज्ञा भंजक बच्चों से तुम हो, तुम एक दुष्ट और भ्रष्ट पीढ़ी हो। {32:6} चाहिए न वह व्यवहार तुम्हारा यहोवा को, तुम मूर्ख और बुद्धिहीन जन हो। योहवा परम पिता तुम्हारा है, उसने तुमको बनाया, उसने निज जन के दृढ़ बनाया तुमको। {32:7} “याद करो बीते हुए दिनों को सोचो बीती पीढ़ीयों के वर्षों को, पूछो वृद्ध पिता से, वही कहेंगे पूछो अपने प्रमुखों से; वही कहेंगे। {32:8} सर्वोच्च परमेश्वर ने राष्ट्रों को अपने देश दिए, निश्चित यह किया कहाँ ये लोग रहेंगे, तब अन्यों का देश दिया इस्राएल — जन को। {32:9} योहवा की विरासत है उसके लोग; याकूब (इस्राएल) यहोवा का अपना है {32:10} “यहोवा ने याकूब (इस्राएल) को पाया मरू में, सप्त, झंझा — स्वरित उजड़ मरुभूमि में योहवा ने याकूब को लिया अंक में, रक्षा की उसकी, यहोवा ने रक्षा की, मानों वह आँखों की पुतली हो। {32:11} यहोवा ने फैलाए पर, उठा लिया इस्राएलियों को, उस उकाब — सा जो जागा हो अपनी नीड़ में, और उड़ता हो अपने बच्चे के ऊपर, उनको लाया यहोवा अपने पंखों पर। {32:12} अकेले यहोवा ले आया याकूब को, कोई देवता विदेशी उसके पास न थे। {32:13} यहोवा ने चढ़ाया याकूब को पृथ्वी के ऊंचे स्थानों पर, याकूब ने खेतों की फसलें खायीं, यहोवा ने याकूब को पुष्ट किया चट्टानों के मधु से, दिया तेल उसको वज्र — चट्टानों से, {32:14} मक्खन दिया झुण्डों से, दूध दिया रेवड़ों से, माँस दिया मेमनों का, मेढ़ों का और बाशान जाति के बकरों का अच्छे — से — अच्छा गेहूँ, लाल अंगूरी पीने को दी अंगूरों की मादकता। {32:15} “किन्तु यशूरून मोटा हो, सांड सा लात मारता, (वह बड़ा हुआ और भारी भी वह था।) अभिजात, सुपोषित छोड़ा उसने अपने कर्ता यहोवा को अस्वीकार किया अपने रक्षक शिला परमेश्वर को, {32:16} ईर्ष्यालु बनाया यहोवा को, अन्य देव पूजा कर! उसके जन ने; क्रुद्ध किया परमेश्वर को निज मूर्तियों से जो घृणित थीं परमेश्वर को, {32:17} बलि दी दानवों को जो सच्चे देव नही उन देवों को बलि दी उसने जिसका उनको ज्ञान नहीं। नये — नये थे देवता वे जिन्हें न पूजा कभी तुम्हारे पूर्वजों ने, {32:18} तुमने छोड़ा अपने शैल यहोवा को भुलाया तुमने अपने परमेश्वर को, दी जिसने जिन्दगी। {32:19} “यहोवा ने देखा यह, इन्कार किया जन को अपना कहने से, क्रोधित किया उसे उसके पुत्रों और पुत्रियों ने! {32:20} तब यहोवा ने कहा, ‘मैं इनसे मुँह मोडूँगा! मैं देख सकूँगा — अन्त होगा क्या उनका। क्यों? क्योंकि भ्रष्ट सभी उनकी पीढ़ियाँ हैं। वे हैं ऐसी सन्तान जिन्हें विश्वास नहीं है! {32:21} मूर्तियों की पूजा करके उन्होंने मुझमें ईर्ष्या उत्पन्न की वे मूर्तियाँ ईश्वर नहीं हैं। तुच्छ मूर्तियों को पूज कर उन्होंने मुझे क्रुद्ध किया है! अब मैं इस्राएल को बनाऊँगा ईर्ष्यालु। मैं उन लोगों का उपयोग करूँगा, जो गठित नहीं हुये हैं राष्ट्र में। मैं करूगाँ प्रयोग मूर्ख राष्ट्र का और लोगों से उन पर क्रोध बरसाऊँगा। {32:22} क्रोध हमारा सुलगा चुका आग कहीं, मेरा क्रोध जल रहा निम्नतम शेओल तक, मेरा क्रोध नष्ट करता फसल सहित भूमि को, मेरा क्रोध लगाता आग पर्वतों की जड़ों में! {32:23} “‘मैं इस्राएलियों पर विपत्ति लाऊँगा, मैं अपने बाण इन पर चलाऊँगा। {32:24} वे भूखे, क्षीण और दुर्बल होंगे, जल जायेंगे जलती गर्मी में वे और होगा भंयकर विनाश भेजूँगा मैं वन — पशुओं को भक्षण करने उनका धूलि रेंगते विषधर भी उनके संग होंगे, {32:25} तलवारें सड़कों पर उनको सन्तति मिटा देगी, घर के भीतर रहेगा आतंक का राज्य, सैनिक मारेंगे युवकों और कुमारियों को ये शिशुओं और श्वेतकेशी वृद्धों को मारेंगे, {32:26} “‘मैं कहूँगा, इस्राएलयों को दूर उड़ाऊँगा। विस्मृत करवा दूँगा इस्राएलियों को लोगोंसे! {32:27} मुझे भय था कि, शत्रु कहेंगे उनके क्या इस्राएल के शत्रु कह सकते हैं: समझ फेर से हमने जीता है, “अपनी शक्ति से, यहोवा ने किया नहीं इसको।’” {32:28} “इस्राएल के शत्रु मूर्ख राष्ट्र हैं वे समझ न पाते कुछ भी। {32:29} यदि शत्रु समझदार होत तो इसे समझ पाते, और देखते अपना अन्त भविष्य में {32:30} एक कैसे पीछा करता सहस्र को? कैसे दो भगा देते दस सहस्र को? यह तब होता जब शैल यहोवा देता उनको, उनके शत्रुओं को, और परमेश्वर उन्हें बेचता गुलामों सा। {32:31} शैल शत्रुओं को नहीं हमारे शैल यहोवा सदृश हमारे शत्रु स्वयं देख सकते इस सत्य को। {32:32} सदोम और अमोरा की दाखलताओं के समान कड़वे हैं उनके गुच्छे अंगूर के। उनके अंगूर विषैले होते हैं उनके अंगूरों के गुच्छे कडवे होते। {32:33} उनकी दाखमधु साँपों के विष जैसी है और क्रूर कालकूट अस्प नाम का। {32:34} यहोवा ने कहा, “मैं उस दण्ड से रक्षा करता हूँ। मैं अपने वस्तु भण्डार में बन्द किया!’ {32:35} केवल मैं हूँ देने वाला दण्ड मैं ही देता लोगों को अपराधों का बदला, जब उनका पग फिसल पड़ेगा अपराधों में, क्यों? क्योंकि विपत्ति समय उनका समीप है और दण्ड समय उनका दौड़ा आएगा।’ {32:36} “यहोवा न्याय करेगा अपने जन का। वे उसके सेवक हैं, वह दयालु होगा। वह उसके बल को मिटा देगा वह उन सभी स्वतन्त्र और दासों को होता देखेगा असहाय। {32:37} पूछेगा वह तब, ‘लोगों के देवता कहाँ हैं? वह है चट्टान कहाँ, जिसकी शरण गए वे? {32:38} लोगों के ये देव, बलि की चर्बी खाते थे, और पीते थे मदिरा, मदिरा की भेंट की। अतः उठें ये देव, मदद करें तेरी करें तुम्हारी ये रक्षा! {32:39} देखो, अब केवल मैं ही परमेश्वर हूँ। नहीं अन्य कोई भी परमेश्वर मैं ही निश्चय करता लोगों को जीवित रखूँ या मारूँ। मैं लोगों को दे सकता हूँ चोट और ठीक भी रख सकत हूँ। और न बचा सकता कोई किसी को मेरी शक्ति के बाहर। {32:40} आकाश को हाथ उठा मैं वचन देता हूँ। यदि यह सत्य है कि मैं शाश्वत हूँ। तो यह भी सत्य कि सब कुछ होगा यही! {32:41} मैं तेज करूँगा अपनी बिजली की तलवार। उपयोग करूँगा इसका मैं शत्रुओं को दण्डित करने को। मैं दूँगा वह दण्ड उन्हें जिसके वे पात्र हैं। {32:42} मेरे शत्रु मारे जाऐंगे, बन्दी होंगे। रंग जाएंगे बाण हमारे उनके रक्त से। तलवार मेरी पार करेगी उनके सैनिक सिर को।’ {32:43} “होगा हर्षित सब संसार परमेश्वर के लोगों से क्यों? क्योंकि वह उनकी करता है सहायता सेवकों के हत्यारों को वह दण्ड दिया करता है। देगा वह दण्ड शत्रु को जिसके वे पात्र हैं। और वह पवित्र करेगा अपने धरती जन को।” {i32:44} मूसा लोगों को अपना गीत सिखाता है {32:44} मूसा आया और इस्राएल के सभी लोगों को सुनने के लिये यह गीत पूरा गाया। नून का पुत्र यहोशू मूसा के साथ था। {32:45} जब मूसा ने लोगों को यह उपदेश देना समाप्त किया {32:46} तब उसने उनसे कहा, “तुम्हें निश्चय करना चाहिए कि तुम उन सभी आदेशों को याद रखोगे जिसे मैं आज तुम्हें बता रहा हूँ और तुम्हें अपने बच्चों को यह बताना चाहिए कि इन व्यवस्था के आदेशों का वे पूरी तरह पालन करें। {32:47} यह मत समझो कि ये उपदेश महत्वपूर्ण नहीं हैं! ये तुम्हारा जीवन है! इन उपदेशों से तुम उस यरदन नदी के पार के देश में लम्बे समय तक रहोगे जिसे लेने के लिये तुम तैयार हो।” {i32:48} मूसा नबो पर्वत पर {32:48} यहोवा ने उसी दिन मूसा से बातें कीं। यहोवा ने कहा, {32:49} “अबारीम पर्वत पर जाओ। यरीहो नगर से होकर मोआब प्रदेश में नबो पर्वत पर जाओ। तब तुम उस कनान प्रदेश को देख सकते हो जिसे मैं इस्राएल के लोगों को रहने के लिए दे रहा हूँ। {32:50} तुम उस पर्वत पर मरोगे। तुम वैसे ही अपने उन लोगों से मिलोगे जो मर गए हैं जैसे तुम्हारे भाई हारून होर पर्वत पर मरा और अपने लोगों में मिला। {32:51} क्यों? क्योंकि जब तुम सीन की मरुभूमि में कादेश के निकट मरीबा के जलाशयों के पास थे तब मेरे विरुद्ध पाप किया था और इस्राएल के लोगों ने उसे वहाँ देखा था। तुमने मेरा सम्मान नहीं किया और तुमने यह लोगों को नहीं दिखाया कि मैं पवित्र हूँ। {32:52} इसलिए अब तुम अपने सामने उस देश को देख सकते हो किन्तु तुम उस देश में जा नहीं सकते जिसे मैं इस्राएल के लोगों को दे रहा हूँ।” {i33:1} मूसा इस्राएल के लोगों को आशीर्वाद देता है {33:1} मरने के पहले परमेश्वर के व्यक्ति मूसा ने इस्राएल के लोगों को यह आशीर्वाद दिया। {33:2} मूसा ने कहा: “यहोवा सीनै से आया, यहोवा सेईर पर प्रातःकालीन प्रकाश सा था। वह पारान पर्वत से ज्योतित प्रकाश — सम था। यहोवा दस सहस्त्र पवित्र लोगों (स्वर्गदूतों) के साथ आया। उसकी दांयी ओर बलिष्ठ सैनिक थे। {33:3} हाँ, यहोवा प्रेम करता है लोगों से सभी पवित्र जन उसके हाथों में हैं और चलते हैं वह उसके पदचिन्हों पर हर एक व्यक्ति स्वीकारता उपदेश उसका! {33:4} मूसा ने दिये नियम हमें वे — जो हैं याकूब के सभी लोगों के। {33:5} यशूरुन ने राजा पाया, जब लोग और प्रमुख इकट्ठे थे। यहोवा ही उसका राजा था! {i33:6} रूबेन को आशीर्वाद {33:6} “रूबेन जीवित रहे, न मरे वह। उसके परिवार समूह में जन अनेक हों!” {i33:7} यहूदा को आशीर्वाद {33:7} मूसा ने यहूदा के परिवार समूह के लिए ये बातें कहीं “यहोवा, सुने यहूदा के प्रमुख कि जब वह मांगे सहायता लाए उसे अपने जनों में शक्तिशाली बनाए उसे, करे सहायता उसकी शत्रु को हराने मे!” {i33:8} लेवी को आशीर्वाद {33:8} मूसा ने लेवी के बारे में कहाः “तेरा अनुयायी सच्चा लेवी धारण करता ऊरीम — तुम्मीम, मस्सा पर तूने लेवी की परीक्षा की, तेरा विशेष व्यक्ति रखता उन्हें। लड़ा तू था उसके लिये मरीबा के जलाशयों पर। {33:9} लेवी ने बताया निज, माता — पिता के विषय में: मैं न करता उनकी परवाह, स्वीकार न किया उसने अपने भाई को, या जाना ही अपने बच्चों को; लेवीवंशियों ने पाला आदेश तेरा, और निभायी वाचा तुझसे जो। {33:10} वे सिखायेंगे याकूब को नियम तेरे। और इस्राएल को व्यवस्था जो तेरे। वे रखेंगे सुगन्धि सम्मुख तेरे सारी होमबलि वेदी के ऊपर, {33:11} “यहोवा, लेवीवंशियों का जो कुछ हो, आशीर्वाद दे उसे, जो कुछ करे वह स्वीकार करे उसको। नष्ट करे उसको जो आक्रमण करे उन पर।” {i33:12} बिन्यामीन को आशीर्वाद {33:12} बिन्यामीन के विषय में मूसा ने कहाः “यहोवा का प्यारा उसके साथ सुरक्षित होगा। यहोवा अपने प्रिय की रक्षा करता सारे दिन, और बिन्यामीन की भूमि पर यहोवा रहता।” {i33:13} यूसुफ को आशीर्वाद {33:13} मूसा ने यूसुफ के बारे में कहा: “यहोवा दे आशीर्वाद उसके देश को स्वर्ग की उत्तम वस्तुऐं जहाँ हों; वह सम्पत्ति वहाँ हो जो धरती कर रही प्रतीक्षा। {33:14} सूरज का दिया उत्तम फल उसका हो महीनों की उत्तम फ़सने उसकी हों। {33:15} प्राचीन पर्वतों की उतलेंम उपज उसकी हो — शाश्वत पहाड़ियों की उत्तम चीज़ें भी। {33:16} आशीर्वाद सहित धरती की उत्तम भेंटें उसकी हों। जलती झाड़ी का यहोवा उसका पक्षधर हो यूसुफ के सिर पर वरदानों की वर्षा हो यूसुफ के सिर के ऊपर भी जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण उसके भ्राताओं में। {33:17} यूसुफ के झुण्ड का प्रथम साँड गौरव पाएगा। इसकी सींगें सांड सी लम्बी होंगी। यूसुफ का झुण्ड भगाएगा लोगों को। पृथ्वी की अन्तिम छोर जहाँ तक जाती है। हाँ, वे हैं दस सहस्त्र एप्रैम से हाँ, वे हैं एक सहस्त्र मनश्शे से।” {i33:18} जबूलून को आशीर्वाद {33:18} जबूलून के बारे में मूसा ने कहाः “जबूलून, खुश होओ, जाओ जब बाहर, और इस्साकार रहे तुम्हारे डेरों में। {33:19} वे लोगों का आहवान करेंगे अपने गिरि पर, वहाँ करेंगे भेंट सभी सच्ची बलि क्यों? क्योंकि वे लोग सागर से निकालते हैं धन और पाएंगे बालू में छिपा हुआ जो धन है।” {i33:20} गाद को आशीर्वाद {33:20} मूसा ने गाद के बारे में कहा: “स्तुति करो परमेश्वर की जो बढ़ाता है गाद को! गाद लेटा करता सिंह सदृश, वह उखाड़ता भुजा, भंग करता खोपड़ियाँ। {33:21} अपने लिए चुनता है वह सबसे प्रमुख हिस्सा और आता वह लोगों के प्रमुखों के संग करता वह इस्राएल के संग जो यहोवा की इच्छा होती है और यहोवा के लिए न्याय करता है।” {i33:22} दान को आशीर्वाद {33:22} दान के बारे में मूसा ने कहा: “दान सिंह का बच्चा है जो बाशान में उछला करता।” {i33:23} नप्ताली को आशीर्वाद {33:23} नप्ताली के बारे में मूसा ने कहाः “नप्ताली, तुम लोगे बहुत सी अच्छी चीज़ों को, यहोवा का आशीर्वाद तुम्हें पूरा है, ले लो पश्चिम और दक्षिण प्रदेश।” {i33:24} आशेर को आशीर्वाद {33:24} मूसा ने आशेर के बारे में कहाः “आशेर को पुत्रों में सर्वाधिक है आशीर्वाद, उसे निज भ्राताओं में प्रिय होने दो और उसे अपने चरण तेल से धोने दो। {33:25} तुम्हारी अर्गलाएँ लोहे — काँसे होंगे शक्ति तुम्हारी आजीवन रहेगी बनी।” {i33:26} मूसा परमेश्वर की स्तुति करता है {33:26} “यशूरुन, परमेश्वर सम नहीं दूसरा कोई परमेश्वर अपने गौरव मे चलता है चढ़ बादल पर, आसमान से होकर आता करने मदद तुम्हें। {33:27} शाश्वत परमेश्वर तुम्हारी शरण सुरक्षित है। और तुम्हारे नीचे शाश्वत भुजाऐं हैं परमेश्वर जो बल से दूर हटाता शत्रु तुम्हारे, कहता है वह ‘नष्ट करो शत्रु को!’ {33:28} ऐसे इस्राएल रक्षित रहता है जो केवल याकूब का जलस्रोत धरती में सुरिक्षत है। अन्न और दाखमधु की सुभूमि में हाँ उसका स्वर्ग वहाँ हिम — बिन्दु भेजता। {33:29} इस्राएलियो, तुम आशीषित हो यहोवा रक्षित राष्ट्र तुम, न कोई तुम सम अन्य राष्ट्र। यहोवा है तलवार विजय तुम्हारी करने वाली। तेरे शत्रु सभी तुझसे डरेगें, और तुम रौंद दोगे उनके झूठे देवों की जगहों को।” {i34:1} मूसा की मृत्यु {34:1} मूसा मोआब के निचले प्रदेश से नबो पर्वत पर गया जो यरीहो के पार पिसगा की चोटी पर था। यहोवा ने उसे गिलाद से दान तक का सारा प्रदेश दिखलाया। {34:2} यहोवा ने उसे सारा नप्ताली, जो एप्रैम और मनश्शे का था, दिखाया। उसने भूमध्य सागर तक यहूदा के प्रदेश को दिखाया। {34:3} यहोवा ने मूसा को खजूर के पेड़ों के नगर सोअर से यरीहो तक फैली घाटी और नेगेव दिखाया। {34:4} यहोवा ने मूसा से कहा, “यह वह देश है जिसे मैंने इब्राहिम, इसहाक, और याकूब को वचन दिया था कि, ‘मैं इस देश को तुम्हारे वंशजों को दूँगा।’ मैंने तुम्हें इस देश को दिखाया। किन्तु तुम वहाँ जा नहीं सकते।” {34:5} तब यहोवा का सेवक मूसा मोआब देश में वहीं मरा। यहोवा ने मूसा से कहा था कि ऐसा होगा। {34:6} यहोवा ने बेतपोर के पार मोआब प्रदेश की घाटी में मूसा को दफनाया। किन्तु आज भी कोई नहीं जानता कि मूसा की कब्र कहाँ है। {34:7} मूसा जब मरा वह एक सौ बीस वर्ष का था। उसकी आँखें कमजोर नहीं थीं। वह तब भी बलवान था। {34:8} इस्राएल के लोग मूसा के लिए मोआब के निचले प्रदेश में तीस दिन तक रोते चिल्लाते रहे। यह शोक मनाने का पूरा समय था। {i34:9} यहोशू मूसा का स्थान लेता है {34:9} तब नून का पुत्र यहोशू बुद्धिमानी की आत्मा से भरपूर था क्योंकि मूसा ने उस पर अपना हाथ रख दिया था। इस्राएल के लोगों ने यहोशू की बात मानी। उन्होंने वैसा ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। {34:10} किन्तु उस समय के बाद, मूसा की तरह कोई नबी नहीं हुआ। यहोवा परमेश्वर मूसा को प्रत्यक्ष जानता था। {34:11} किसी दूसरे नबी ने वे सारे चमत्कार और आश्चर्य नहीं दिखाए जिन्हें दिखाने के लिये यहोवा परमेश्वर ने मूसा को मिस्र में भेजा था। वे चमत्कार और आश्चर्य, फिरौन, उसके सभी सेवकों और मिस्र के सभी लोगों को दिखाए गए थे। {34:12} किसी दूसरे नबी ने कभी उतने शक्तिशाली और आश्चर्यजनक चमत्कार नहीं किए जो मूसा ने किए और जिन्हें इस्राएल के सभी लोगों ने देखा।