{i1:1} एल्काना और उसका परिवार शीलो में आराधना करता है {1:1} एल्काना नामक एक व्यक्ति था। वह एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश के रामातैमसोपीम का निवासी था। एल्काना सूप परिवार का था। एलकाना यरोहाम का पुत्र था। यरोहाम एलीहू का पुत्र था। एलीहू तोहू का पुत्र था और तोहू सूप का पुत्र था, जो एप्रैम के परिवार समूह से था। {1:2} एल्काना की दो पत्नियाँ थीं। एक का नाम हन्ना था और दूसरी का नाम पनिन्ना था। पनिन्ना के बच्चे थे, किन्तु हन्ना के कोई बच्चा नहीं था। {1:3} एल्काना हर वर्ष अपने नगर रामातैमसोपीम को छोड़ देता था और शीलो नगर जाता था। एल्काना सर्वशक्तिमान यहोवा की उपासना शीलो में करता था और वहाँ यहोवा को बलि भेंट करता था। शीलो वह स्थान था, जहाँ होप्नी और पीनहास यहोवा के याजक के रूप में सेवा करते थे। होप्नी और पीनहास एली के पुत्र थे। {1:4} जब कभी एल्काना अपनी बलि भेंट करता था, वह भेंट का एक अंश अपनी पत्नी पनिन्ना को देता था। एल्काना भेंट का एक अंश पनिन्ना के बच्चों को भी देता था। {1:5} एल्काना भेंट का एक बराबर का अंश हन्ना को भी सदा दिया करता था। एल्काना यह तब भी करता रहा जब यहोवा ने हन्ना को कोई सन्तान नहीं दी थी। एल्काना यह इसलिये करता था कि हन्ना उसकी वह पत्नी थी जिससे वह सच्चा प्रेम करता था। {i1:6} पनिन्ना हन्ना को परेशान करती है {1:6} पनिन्ना हन्ना को सदा खिन्नता और परेशानी का अनुभव कराती थी। पनिन्ना यह इसलिये करती थी क्योंकि हन्ना कोई बच्चा पैदा नहीं कर सकती थी। {1:7} हर वर्ष जब उनका परिवार शीलो में यहोवा के आराधनालय में जाता, पनिन्ना, हन्ना को परेशानी में डाल देती थी। एक दिन जब एल्काना बलि भेंट अर्पित कर रहा था। हन्ना परेशानी का अनुभव करने लगी और रोने लगी। हन्ना ने कुछ भी खाने से इन्कार कर दिया। {1:8} उसके पति एलकाना ने उस से कहा, “हन्ना, तुम रो क्यों रही हो? तुम खाना क्यों नहीं खाती? तुम दुःखी क्यों हो? मैं, तुम्हारा पति, तुम्हारा हूँ। तुम्हें सोचना चाहिए कि मैं तुम्हारे लिए तुम्हारे दस पुत्रों से अच्छा हूँ।” {i1:9} हन्ना की प्रार्थना {1:9} खाने और पीने के बाद हन्ना चुपचाप उठी और यहोवा से प्रार्थना करने गई। यहोवा के पवित्र आराधनालय के द्वार के निकट कुर्सी पर याजक एली बैठा था। {1:10} हन्ना बहुत दुःखी थी। वह बहुत रोई जब उसने यहोवा से प्रार्थना की। {1:11} उसने परमेश्वर से विशेष प्रतिज्ञा की। उसने कहा, “सर्वशक्तिमान यहोवा, देखो मैं कितनी अधिक दु: खी हूँ। मुझे याद रखो! मुझे भूलो नहीं। यदि तुम मुझे एक पुत्र दोगे तो मैं पूरे जीवन के लिये उसे तुमको अर्पित कर दूँगी। यह नाजीर पुत्र होगा: वह दाखमधु या तेज मदिरा नहीं पीएगा और कोई उसके बाल नहीं काटेगा।” {1:12} हन्ना ने बहुत देर तक प्रार्थना की। जिस समय हन्ना प्रार्थना कर रही थी, एली ने उसका मुख देखा। {1:13} हन्ना अपने हृदय में प्रार्थना कर रही थी। उसके होंठ हिल रहे थे, किन्तु कोई आवाज नहीं निकल रही थी। {1:14} एली ने समझा कि हन्ना दाखमधु से मत्त है। एली ने हन्ना से कहा, “तुम्हारे पास पीने को अत्याधिक था! अब समय है कि दाखमधु को दूर करो।” {1:15} हन्ना ने उत्तर दिया, “मैंने दाखमधु या दाखरस नहीं पिया है। मैं बहुत अधिक परेशान हूँ। मैं यहोवा से प्रार्थना करके अपनी समस्याओं का निवेदन कर रही थी। {1:16} मत सोचो कि मैं बुरी स्त्री हूँ। मैं इतनी देर तक इसलिए प्रार्थना कर रही थी कि मुझे अनेक परेशानियाँ हैं और में बहुत दुःखी हूँ।” {1:17} एली ने उत्तर दिया, “शान्तिपूर्वक जाओ। इस्राएल का परमेश्वर तुम्हें वह दे, जो तुमने मांगा है।” {1:18} हन्ना ने कहा, “मुझे आशा है कि आप मुझसे प्रसन्न हैं।” तब हन्ना गई और उसने कुछ खाया। वह अब दु: खी नहीं थी। {1:19} दूसरे दिन सवेरे एल्काना का परिवार उठा। उन्होंने परमेस्वर की उपासना की और वे अपने घर रामा को लौट गए। एल्काना ने अपनी पत्नी हन्ना के साथ शारीरिक सम्बन्ध किया, यहोवा ने हन्ना की प्रार्थना को याद रखा। {i1:20} शमूएल का जन्म {1:20} हन्ना गर्भवती हुई और उसे एक पुत्र हुआ। हन्ना ने उसका नाम शमूएल रखा। उसने कहा, “इसका नाम शमूएल है क्योंकि मैंने इसे यहोवा से माँगा है।” {1:21} उस वर्ष एल्काना बलि — भेंट देने और परमेश्वर के सामने की गई प्रतिज्ञा को पूरा करने शीलो गया। वह अपने परिवार को अपने साथ ले गया। {1:22} किन्तु हन्ना नहीं गई। उसने एल्काना से कहा, “जब लड़का ठोस भोजन करने योग्य हो जायेगा, तब मैं इसे शीलो ले जाऊँगी। तब मैं उसे यहोवा को दूँगी। वह एक नाजीर बनेगा और वह शीलो में रहेगा।” {1:23} हन्ना के पति एल्काना ने उससे कहा, “वही करो जिसे तुम उत्तम समझती हो। तुम तब तक घर में रह सकती हो जब तक लड़का ठोस भोजन करने योग्य बड़ा नहीं हो जाता। यहोवा वही करे जो तुमने कहा है।” इसलिए हन्ना अपने बच्चे का पालन पोषण तब तक करने के लिये घर पर ही रह गई जब तक वह ठोस भोजन करने योग्य बड़ा नहीं हो जाता। {i1:24} हन्ना शमूएल को शीलो में एली के पास ले जाती है {1:24} जब लड़का ठोस भोजन करने योग्य बड़ा हो गया, तब हन्ना उसे शीलो में यहोवा के आराधनालय पर ले गई। हन्ना अपने साथ तीन वर्ष का एक बैल, बीस पौंड आटा और एक मशक दाखमधु भी ले गई। {1:25} वे यहोवा के सामने गए। एल्काना ने यहोवा के लिए बलि के रूप में बैल को मारा जैसा वह प्राय: करता था तब हन्ना लड़के को एली के पास ले आई। {1:26} हन्ना ने एली से कहा, “महोदय, क्षमा करें। मैं वही स्त्री हूँ जो यहोवा से प्रार्थना करते हुए आप के पास खड़ी थी। मैं वचन देती हूँ कि मैं सत्य कह रही हूँ। {1:27} मैंने इस बच्चे के लिये प्रार्थना की थी। यहोवा ने मुझे यह बच्चा दिया {1:28} और अब मैं इस बच्चे को यहोवा को दे रही हूँ। यह पूरे जीवन यहोवा का रहेगा।” तब हन्ना ने बच्चे को वहीं छोड़ा और यहोवा की उपासना की। {i2:1} हन्ना धन्यवाद देती है {2:1} हन्ना ने कहा: “यहोवा, में, मेरा हृदय प्रसन्न है! मैं अपने परमेश्वर में शक्तिमती अनुभव करती हूँ! मैं अपनी विजय से पूर्ण प्रसन्न हूँ! और अपने शत्रुओं की हँसी उड़ाई हूँ। {2:2} यहोवा के सदृश कोई पवित्र परमेश्वर नहीं। तेरे अतिरिक्त कोई परमेश्वर नहीं! परमेश्वर के अतिरिक्त कोई आश्रय शिला नहीं। {2:3} बन्द करो डींगों का हाँकना! घमण्ड भरी बातें न करो! क्यों? क्योंकि यहोवा परमेश्वर सब कुछ जानता है, परमेश्वर लोगों को राह दिखाता है और उनका न्याय करता है। {2:4} शक्तिशाली योद्धाओं के धनुष टूटते हैं! और दुर्बल शक्तिशाली बनते हैं! {2:5} जो लोग बीते समय में बहुत भोजन वाले थे, उन्हें अब भोजन पाने के लिये काम करना होगा। किन्तु जो बीते समय में भूखे थे, वे अब भोजन पाकर मोटे हो रहे हैं! जो स्त्री बच्चा उत्पन्न नहीं कर सकती थी अब सात ब्च्चों वाली है! किन्तु जो बहुत बच्चों वाली थी, दु: खी है क्योंकि उसके बच्चे चले गये। {2:6} यहोवा लोगों को मृत्यु देता है, और वह उन्हें जीवित रहने देता है। यहोवा लोगों को मृत्युस्थल व अधोलोक को पहुँचाता है, और पुन: वह उन्हें जीवन देकर उठाता है। {2:7} यहोवा लोगों को दीन बनाता है, और यहोवा ही लोगों को धनी बनाता है। यहोवा लोगों को नीचा करता है, और वह लोगों को ऊँचा उठाता है। {2:8} यहोवा कंगालों को धूलि से उठाता है। यहोवा उनके दुःख को दूर करता है। यहोवा कंगालों को राजाओं के साथ बिठाता है। यहोवा कंगालों को प्रतिष्ठित सिंहासन पर बिठाता है। पूरा जगत अपनी नींव तक यहोवा का है! यहोवा जगत को उन खम्भों पर टिकाया है! {2:9} यहोवा अपने पवित्र लोगों की रक्षा करता है। वह उन्हें ठोकर खाकर गिरने से बचाता है। किन्तु पापी लोग नष्ट किये जाएंगे। वे घोर अंधेरे में गिरेंगे। उनकी शक्ति उन्हें विजय प्राप्त करने में सहायक नहीं होगी। {2:10} यहोवा अपने शत्रुओं को नष्ट करता है। सर्वोच्च परमेश्वर लोगों के विरुद्ध गगन में गरजेगा। यहोवा सारी पृथ्वी का न्याय करेगा। यहोवा अपने राजा को शक्ति देगा। वह अपने अभीषिक्त राजा को शक्तिशाली बनायेगा।” {2:11} एल्काना और उसका परिवार अपने घर रामा को गया। लड़का शीलो में रह गया और याजक एली के अधीन यहोवा की सेवा करता रहा। {i2:12} एली के बुरे पुत्र {2:12} एली के पुत्र बुरे व्यक्ति थे। वे यहोवा की परवाह नहीं करते थे। {2:13} वे इसकी परवाह नहीं करते थे कि याजकों से लोगों के प्रति कैसे व्यवहार की आशा की जाती है। याजकों को लोगों के लिये यह करना चाहिए: जब कभी कोई व्यक्ति बलि — भेंट लाये, तो याजक को एक बर्तन में माँस को उबालना चाहिये। याजक के सेवक को अपने हाथ में विशेष काँटा जिसके तीन नोंक हैं, लेकर आना चाहिए। {2:14} याजक के सेवक को काँटे को बर्तन या पतीले में डालना चाहिए। काँटें से जो कुछ बर्तन के बाहर लाये वह माँस याजक का होगा। यह याजकों द्वारा उन इस्राएलियों के लिये किया जाना चाहिये जो शीलो में बलि भेंट करने आयें। {2:15} किन्तु एली के पुत्रों ने यह नहीं किया। चर्बी को वेदी पर जलाये जाने के पहले ही उनके सेवक लोगों के पास बलि — भेंट करते जाते थे। याजक के सेवक कहा करते थे, “याजक को कुछ माँस भूनने के लिये दो। याजक तुमसे उबला हुआ माँस नहीं लेंगे।” {2:16} बलि — भेंट करने वाला व्यक्ति यह कह सकता था, “पहले चर्बी जलाओ, तब तुम जो चाहो ले सकते हो।” यदि ऐसा होता तो याजक का सेवक उत्तर देता: “नहीं, मुझे अभी माँस दो, यदि तुम मुझे यह नहीं देते हो तो मैं इसे तुमसे ले ही लूँगा।” {2:17} इस प्रकार, होप्नी और पीनहास यह दिखाते थे कि वे यहोवा को भेंट की गई बलि के प्रति श्रद्धा नहीं रखते थे। यह यहोवा के विरुद्ध बहुत बुरा पाप था! {2:18} किन्तु शमूएल यहोवा की सेवा करता था। शमूएल सन का बना एक विशेष एपोद पहनता था। {2:19} हर वर्ष शमूएल की माँ एक छोटा चोंगा शमूएल के लिये बनाती थी। वह हर वर्ष जब अपने पति के साथ बलि — भेंट करने शीलो जाती थी तो वह छोटा चोंगा शमूएल के लिये ले जाती थी। {2:20} एली, एल्काना और उसकी पत्नी को आशीर्वाद देता था। एली ने कहा, “यहोवा तुम्हें हन्ना द्वारा सन्तान देकर बदला दे। ये बच्चे उस लड़के का स्थान लेंगे जिसके लिये हन्ना ने प्रार्थना की थी और यहोवा को दिया था।” तब एल्काना और हन्ना घर लौटे, और {2:21} यहोवा ने हन्ना पर दया की। उसके तीन पुत्र और दो पुत्रियाँ हुईं और लड़का शमूएल यहोवा के पास बड़ा हुआ। {i2:22} एली अपने पापी पुत्रों पर नियन्त्रण करने में असफल {2:22} एली बहुत बूढ़ा था। वह बार बार उन बुरे कामों के बारे में सुनता था जो उसके पुत्र शीलो में सभी इस्राएलियों के साथ कर रहे थे। एली ने यह भी सुना कि जो स्त्रियाँ मिलापवाले तुम्बू के द्वार पर सेवा करती थीं, उनके साथ वे सोते थे। {2:23} एली ने अपने पुत्रों से कहा, “तुमने जो कुछ बुरा किया है उसके बारे में लोगों ने यहाँ मुझे बताया है। तुम लोग ये बुरे काम क्यों करते हो? {2:24} पुत्रो, इन बुरे कामों को मत करो। यहोवा के लोग तुम्हारे विषय में बुरी बातें कह रहे हैं। {2:25} यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध पाप करता है, तो परमेश्वर उसकी मध्यस्थता कर सकता है। किन्तु यदि कोई व्यक्ति यहोवा के ही विरुद्ध पाप करता है तो उस व्यक्ति की मध्यस्थता कौन कर सकता है?” किन्तु एली के पुत्रों ने एली की बात सुनने से इन्कार कर दिया। इसलिए यहोवा ने एली के पुत्रों को मार डालने का निश्चय किया। {2:26} बालक शमूएल बढ़ता रहा। उसने परमेश्वर और लोगों को प्रसन्न किया। {i2:27} एली के पिरवार के विषय में भंयकर भविष्यवाणी {2:27} परमेश्वर का एक व्यक्ति एली के पास आया। उसने कहा, “यहोवा यह बात कहता है, ‘तुम्हारे पूर्वज फिरौन के परिवार के गुलाम थे। किन्तु मैं तुम्हारे पूर्वजों के सामने उस समय प्रकट हुआ। {2:28} मैंने तुम्हारे परिवार समूह को इस्राएल के सभी परिवार समूहों में से चुना। मैंने तुम्हारे परिवार समूह को अपना याजक बनने के लिये चुना। मैंने उन्हें अपनी वेदी पर बलि — भेंट करने के लिये चुना। मैंने उन्हें सुगन्ध जलाने और एपोद पहनने के लिये चुना। मैंने तुम्हारे परिवार समूह को बलि — भेंट से वह माँस भी लेने दिया जो इस्राएल के लोग मुझको चढ़ाते हैं। {2:29} इसलिए तुम उन बलि — भेंटों और अन्नबलियों का सम्मान क्यों नहीं करते। तुम अपने पुत्रों को मुझसे अधिक सम्मान देते हो। तुम माँस के उस सर्वोत्तम भाग से मोटे हुए हो जिसे इस्राएल के लोग मेरे लिये लाते हैं।’ {2:30} “इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने यह वचन दिया था कि तुम्हारे पिता का परिवार ही सदा उसकी सेवा करेगा। किन्तु अब यहोवा यह कहता है, ‘वैसा कभी नहीं होगा! मैं उन लोगों का सम्मान करूँगा जो मेरा सम्मान करेंगे। किन्तु उनका बुरा होगा जो मेरा सम्मान करने से इनकार करते हैं। {2:31} वह समय आ रहा है जब मैं तुम्हारे सारे वंशजों को नष्ट कर दूँगा। तुम्हारे परिवार में कोई बूढ़ा होने के लिये नहीं बचेगा। {2:32} इस्राएल के लिये अच्छी चीजें होंगी, किन्तु तुम घर में बुरी घटनाऐं होती देखोगे। तुम्हारे परिवार में कोई भी बूढ़ा होने के लिये नहीं बचेगा। {2:33} केवल एक व्यक्ति को मैं अपनी वेदी पर याजक के रुप में सेवा के लिये बचाऊँगा। वह बहुत अधिक बुढ़ापे तक रहेगा। वह तब तक जीवित रहेगा जब तक उसकी आँखे और उसकी शक्ति बची रहेगी। तुम्हारे शेष वंशज तलवार के घाट उतारे जाएंगे। {2:34} मैं तुम्हें एक संकेत दूँगा जिससे यह ज्ञात होगा कि ये बातें सच होंगी। तुम्हारे दोनों पुत्र होप्नी और पीनहास एक ही दिन मरेंगे। {2:35} मैं अपने लिये एक विश्वसनीय याजक ठहराऊँगा। वह याजक मेरी बात मानेगा और जो मैं चाहता हूँ, करेगा। मैं इस याजक के परिवार को शक्तिशाली बनाऊँगा। वह सदा मेरे अभिषिक्त राजा के सामने सेवा करेगा। {2:36} तब सभी लोग जो तुम्हारे परिवार में बचे रहेंगे, आएंगे और इस याजक के आगे झुकेंगे। ये लोग थोड़े धन या रोटी के टुकड़े के लिए भीख मागेंगे। वे कहेंगे, “कृपया याजक का सेवा कार्य हमें दे दो जिससे हम भोजन पा सकें।”’” {i3:1} शमूएल को परमेश्वर का बुलावा {3:1} बालक शमूएल एली के अधीन यहोवा की सेवा करता रहा। उन दिनों, यहोवा प्राय: लोगों से सीधे बातें नहीं करता था। बहुत कम ही दर्शन हुआ करता था। {3:2} एली की दृष्टि इतनी कमजोर थी कि वह लगभग अन्धा था। एक रात वह बिस्तर पर सोया हुआ था। {3:3} शमूएल यहोवा के पवित्र आराधनालय में बिस्तर पर सो रहा था। उस पवित्र आराधनालय में परमेश्वर का पवित्र सन्दूक था। यहोवा का दीपक अब भी जल रहा था। {3:4} यहोवा ने शमूएल को बुलाया। शमूएल ने उत्तर दिया, “मैं यहाँ उपस्थित हूँ।” {3:5} शमूएल को लगा कि उसे एली बुला रहा है। इसलिए शमूएल दौड़कर एली के पास गया। शमूएल ने एली से कहा, “मैं यहाँ हूँ। आपने मुझे बुलाया।” किन्तु एली ने कहा, “मैंने तुम्हें नहीं बुलाया। अपने बिस्तर में जाओ।” शमूएल अपने बिस्तर पर लौट गया। {3:6} यहोवा ने फिर बुलाया, “शमूएल!” शमूएल फिर दौड़कर एली के पास गया। शमूएल ने कहा, “मैं यहाँ हूँ। आपने मुझे बुलाया।” एली ने कहा, “मैंने तुम्हें नहीं बुलाया, अपने बिस्तर में जाओ।” {3:7} शमूएल अभी तक यहोवा को नहीं जानता था। यहोवा ने अभी तक उससे सीधे बात नहीं की थी। {3:8} यहोवा ने शमूएल को तीसरी बार बुलाया। शमूएल फिर उठा और एली के पास गया। शमूएल ने कहा, “मैं आ गया। आपने मुझे बुलाया।” तब एली ने समझा कि यहोवा लड़के को बुला रहा है। {3:9} एली ने शमूएल से कहा, “बिस्तर में जाओ। यदि वह तुम्हें फिर बुलाता है तो कहो, ‘यहोवा बोल! मैं तेरा सेवक हूँ और सुन रहा हूँ।’” सो शमूएल बिस्तर में चला गया। {3:10} यहोवा आया और और वहाँ खड़ा हो गया। उसने पहले की तरह बुलाया। उसने कहा, “शमूएल, शमूएल!” शमूएल ने कहा, “बोल! मैं तेरा सेवक हूँ और सुन रहा हूँ।” {3:11} यहोवा ने शमूएल से कहा, “मैं शीघ्र ही इस्राएल में कुछ करुँगा। जो लोग इसे सुनेंगे उनके कान झन्ना उठेंगे। {3:12} मैं वह सब कुछ करूँगा जो मैंने एली और उसके परिवार के विरूद्ध करने को कहा है।मैं आरम्भ से अन्त तक सब कुछ करूँगा। {3:13} मैंने एली से कहा है कि मैं उसके परिवार को सदा के लिये दण्ड दूँगा। मैं यह इसलिए करूँगा कि एली जानता है उस के पुत्रों ने परमेश्वर के विरुद्ध बुरा कहा है, और किया है, और एली उन पर नियन्त्रन करने में असफल रहा है। {3:14} यही कारण है कि मैंने एली के परिवार को शाप दिया है कि बलि — भेंट और अन्नबलि उनके पापों को दूर नहीं कर सकती।” {3:15} शमूएल सवेरा होने तक बिस्तर में पड़ा रहा। वह तड़के उठा और उसने यहोवा के मन्दिर के द्वार को खोला। शमूएल अपने दर्शन की बात एली से कहने में डरता था। {3:16} किन्तु एली ने शमूएल से कहा, “मेरे पुत्र, शमूएल!” शमूएल ने उत्तर दिया, “हाँ, महोदय।” {3:17} एली ने पूछा, “यहोवा ने तुनसे क्या कहा? उसे मुझसे मत छिपाओ। परमेश्वर तुम्हें दण्ड देगा, यदि परमेश्वर ने जो सन्देश तुमको दिया है उसमें से कुछ भी छिपाओगे।” {3:18} इसलिए शमूएल ने एली को वह हर एक बात बताई। शमूएल ने एली से कुछ भी नहीं छिपाया। एली ने कहा, “वह यहोवा है। उसे वैसा ही करने दो जैसा उसे अच्छा लगता है।” {3:19} शमूएल बड़ा होता रहा और यहोवा उसके साथ रहा। यहोवा ने शमूएल के किसी सन्देश को असत्य नहीं होने दिया। {3:20} तब सारा इस्राएल, दान से लेकर बेर्शबा तक, समझ गया कि शमूएल यहोवा का सच्चा नबी है। {3:21} शीलो में यहोवा शमूएल के सामने प्रकट होता रहा। यहोवा ने शमूएल के आगे अपने आपको वचन के द्वारा प्रकट किया। {i4:1} पलिश्तियों ने इस्राएलियों को हराया {4:1} शमूएल के विषय में समाचार पूरे इस्राएल में फैल गया। एली बहुत बूढ़ा हो गया था। उसके पुत्र यहोवा के सामने बुरा काम करते रहे। उस समय, पलिश्ती इस्राएल के विरुद्ध युद्ध करने के लिये तैयार हुए। इस्राएली पलिश्तियों के विरुद्ध लड़ने गए। इस्राएलियों ने अपना डेरा एबेनेजेर में डाला। पलिश्तियों ने अपना डेरा अपेक में डाला। {4:2} पलिश्तियों ने इस्राएल पर आक्रमण करने की तैयारी की। युद्ध आरम्भ हो गया। पलिश्तियों ने इस्राएलियों को हरा दिया। पलिश्तियों ने इस्राएल की सेना के लगभग चार हजार सैनिकों को मार डाला। {4:3} इस्राएलियों के बाकी सैनिक अपने डेरे में लौट गए। इस्राएल के अग्रजों (प्रमुखों) ने पूछा, “यहोवा ने पलिश्तियों को हमें क्यों पराजित करने दिया? हम लोग शीलो से वाचा के सन्दूक को ले आयें। इस प्रकार, परमेश्वर हम लोगों के साथ युद्ध में जायेगा। वह हमें हमारे शत्रुओं से बचा देगा।” {4:4} इसलिये लोगों ने वयक्तियों को शीलो में भेजा। वे लोग सर्वशक्तिमान यहोवा के वाचा के सन्दूक को ले आए। सन्दूक के ऊपर करूब(स्वर्गदूत) हैं और वे उस आसन की तरह हैं जिस पर यहोवा बैठता है। एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पीनहास सन्दूक के साथ आए। {4:5} जब यहोवा के वाचा का सन्दूक डेरे के भीतर आया, तो इस्राएलियों ने प्रचण्ड उद्घोष किया। उस उद्घोष से धरती काँप उठी। {4:6} पलिश्तियों ने इस्राएलियों के उद्घोष को सुना। उन्होंने पूछा, “हिब्रू लोगों के डेरे में ऐसा उद्घोष क्यों है?” तब पलिश्तियों को ज्ञात हुआ कि इस्राएल के डेरे में वाचा का सन्दूक आया है। {4:7} पलिश्ती डर गए। पलिश्तियों ने कहा, “परमेश्वर उनके डेरे में आ गया है! हम लोग मुसीबत में हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। {4:8} हमें चिन्ता है! इस शक्तिशाली परमेश्वर से हमें कौन बचा सकता है? ये वही परमेश्वर है जिसने मिस्रियों को वे बीमारियाँ और महामारियाँ दी थीं। {4:9} पलिश्तियों साहस करो! वीर पुरूषों की तरह लड़ो! बीते समय में हिब्रू लोग हमारे दास थे। इसलिए वीरों की तरह लड़ो नहीं तो तुम उनके दास हो जाओगे।” {4:10} पलिश्ती वीरता से लड़े औ उन्होंने इस्राएलियों को हरा दिया। हर एक इस्राएली योद्धा अपने डेरे में भाग गया। इस्राएल के लिये यह भयानक पराजय थी। तीस हजार इस्राएली सैनिक मारे गए। {4:11} पलिश्तियों ने उनसे परमेश्वर का पवित्र सन्दूक छीन लिया और उन्होंने एली के दोनों पुत्रों, होप्नी और पीनहास को मार डाला। {4:12} उस दिन बिन्यामीन परिवार का एक व्यक्ति युद्ध से भागा। उसने अपने शोक को प्रकट करने के लिये अपने वस्त्रों को फाड़ डाला और अपने सिर पर धूलि डाल ली। {4:13} जब यह व्यक्ति शीलो पहुँचा तो एली अपनी कुर्सी पर नगर द्वार के पास बैठा था। उसे पमेश्वर के पवित्र सन्दूक के लिये चिंता थी, इसीलिए वह प्रतीक्षा में बैठा हुआ था। तभी विन्यामीन परिवार समूह का वह व्यक्ति शीलो में आया और उसने दुःख भरी सूचना दी। नगर के सभी लोग जोर से रो पड़े। {4:14} एली अट्ठानवे वर्ष का बूढ़ा और अन्धा था, एली ने रोने की आवाज सुनी तो एली ने पूछा, “यह जोर {4:15} का शोर क्या है?” वह बिन्यामीन व्यक्ति एली के पास दौड़ कर गया और जो कुछ हुआ था उसे बताया। {4:16} बिन्यामीनी व्यक्ति ने कहा कि “मैं आज युद्ध से भाग आया हूँ!” एली ने पूछा, “पुत्र, क्या हुआ?” {4:17} बिन्यामीनी व्यक्ति ने उत्तर दिया, “इस्राएली पलिश्तियों के मुकाबले भाग खड़े हुए हैं। इस्राएली सेना ने अनेक योद्धाओं को खो दिया है। तुम्हारे दोनों पुत्र मारे गए हैं और पलिश्ती परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को छीन ले गये हैं।” {4:18} जब बिन्यामीनी व्यक्ति ने परमेश्वर के पवित्र सन्दूक की बात कही, तो एली द्वार के निकट अपनी कुर्सी से पीछे गिर पड़ा और उसकी गर्दन टूट गई। एली बूढ़ा और मोटा था, इसलिये वह वहीं मर गया। एली बीस वर्ष तक इस्राएल का अगुवा रहा। {i4:19} गौरव समाप्त हो गया {4:19} एली की पुत्रवधू, पीनहास की पत्नी, उन दिनों गर्भवती थी। यह लगभग उसके बच्चे के उत्पन्न होने का समय था। उसने यह समाचार सुना कि परमेश्वर का पवित्र सन्दूक छीन लिया गया है। उसने यह भी सुना कि उसके ससुर एली की मृत्यु हो गई है और सका पति पीनहास मारा गया है।। ज्यों ही उसने यह सामचार सुना, उसको प्रसव पीड़ा आरम्भ हो गई और उसने अपने बच्चे को जन्म देना आरम्भ किया। {4:20} उसके मरने से पहले जो स्त्रियाँ उसकी सहायता कर रही थीं उन्होने कहा, “दुःखी मत हो! तुम्हें एक पुत्र उत्पन्न हुआ है।” किन्तु एली की पुत्रवधू ने न तो उत्तर ही दिया, न ही उस पर ध्यान दिया। {4:21} एली की पुत्रवधू ने कहा, “इस्राएल का गौरव अस्त हो गया!” इसलिए उसने बच्चे का नाम ईकाबोद रखा और बस वह तभी मर गई। उसने अपने बच्चे का नाम ईकाबोद रखा क्योंकि परमेश्वर का पवित्र सन्दूक चला गया था और उसके ससुर एवं पति मर गए थे। {4:22} उसने कहा, “इस्राएल का गौरव अस्त हुआ।” उसने यह कहा, क्योंकि पलिश्ती परमेश्वर का सन्दूक ले गये। {i5:1} पवित्र सन्दूक पलिश्तियों को परेशान करता है {5:1} पलिश्तियों ने परमेश्वर का पवित्र सन्दूक एबनेजेर से उसे असदोद ले गए। {5:2} पलिश्ती परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को दागोन के मन्दिर में ले गए। उन्होंने परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को दागोन की मूर्ति के बगल में रखा। {5:3} अशदोदी के लोग अगली सुबह उठे। उन्होंने देखा कि दागोन मुँह के बल पड़ा है। दागोन यहोवा की सन्दूक के सामने गिरा पड़ा था। अशदोद के लोगों ने दागोन की मूर्ति को उसके पूर्व — स्थान पर रखा। {5:4} किन्तु अगली सुबह जब अशदोद के लोग उठे तो उन्होंने दागोन को फिर जमीन पर पाया। दागोन फिर यहोवा के पवित्र सन्दूक के सामने गिरा पड़ा था। दागोन के हाथ और पैर टूट गए थे और डेवढ़ी पर पड़े थे। केवल दागोन का शरीर एक खण्ड के रूप में था। {5:5} यही कारण है, कि आज भी दागोन के याजक या अशदोद में दागोन के मन्दिर में घुसने वाले अन्य व्यक्ति डेवढ़ी पर चलने से इन्कार करते हैं। {5:6} यहोवा ने अशदोद के लोगों तथा उनके पड़ोसियों के जीवन को कष्टपूर्ण कर दिया। यहोवा ने उनको कठिनाईयों में डाला। उसने उनमें फोड़े उठाए। यहोवा ने उनके पास चूहे भेजे। चूहे उनके सभी जहाजों और भूमि पर दौड़ते थे। नगर में सभी लोग बहुत डर गए थे। {5:7} अशदोद के लोगों ने देखा कि क्या हो रहा है। उनहोंने कहा, “इस्राएल के परमेश्वर का सन्दूक यहाँ नहीं रह सकता! परमेश्वर हमें और हमारे देवता, दागोन को भी दण्ड दे रहा है।” {5:8} अशदोद के लोगों ने पाँच पलिश्ती शासकों को एक साथ बुलाया। अशदोद के लोगों ने शासकों से पूछा, “हम लोग इस्राएल के परमेश्वर के पवित्र सन्दूक का क्या करें?” शासकों ने उत्तर दिया, “इस्राएल के परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को गत नगर ले जाओ।” अत: पलिश्तियों ने परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को हटा दिया। {5:9} किन्तु जब पलिश्तियों ने परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को गत को भेज दिया था, तब यहोवा ने उस नगर को दण्ड दिया। लोग बहुत भयभीत हो गए। परमेश्वर ने सभी बच्चों व बूढ़ों के लिये अनेक कष्ट उत्पन्न किये। परमेश्वर ने गत के लोगों के शरीर में फोड़े उत्पन्न किये। {5:10} इसलिए पलिश्तियों ने परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को एक्रोन भेज दिया। किन्तु जब परमेश्वर का पवित्र सन्दूक एक्रोन आया, एक्रोन के लोगों ने शिकायत की। उन्होंने कहा, “तुम लोग इस्राएल के परमेश्वर का सन्दूक हमारे नगर एक्रोन में क्यों ला रहे हो? क्या तुम लोग हमें और हमारे लोगों को मारना चाहते हो?” {5:11} एक्रोन के लोगों ने सभी पलिश्ती सेनापतियों को एक साथ बुलाया। एक्रोन के लोगों ने सेनापतियों से कहा, “इस्राएल के परमेश्वर के सन्दूक को, उसके पहले कि वह हमें और हमारे लोगों को मार डाले। इसके पहले के स्थान पर भेज दो!” एक्रोन के लोग बहुत भयभीत थे। परमेश्वर ने उस स्थान पर उनके जीवन को बहुत कष्टमय बना दिया। {5:12} बहुत से लोग मर गए और जो लोग नहीं मरे उनको फोड़े निकले। एक्रोन के लोगों ने जोर से रोकर स्वर्ग को पुकारा। {i6:1} परमेश्वर का पवित्र सन्दूक अपने घर लौटाया गया {6:1} पलिश्तियों ने पवित्र सन्दूक को अपने देश में सात महीने रखा। {6:2} पलिश्तियों ने अपने याजक और जादूगरों को बुलाया। पलिश्तियों ने कहा, “हम यहोवा के सन्दूक का क्या करें? बताओ कि हम कैसे सन्दूक को वापस इसके घर भेजें?” {6:3} याजकों और जादूगरों ने उत्तर दिया, “यदि तुम इस्राएल के परमेश्वर के पवित्र सन्दूक को भेजते हो तो, इसे बिना किसी भेंट के न भेजो। तुम्हें इस्राएल के परमेश्वर को भेंटें चढ़ानी चाहिये। जिससे इस्राएल का परमेश्वर तुम्हारे पापों को दूर करेगा। तब तुम स्वस्थ हो जाओगे। तुम पवित्र हो जाओगे। तुम्हें यह इसलिए करना चाहिए जिससे कि परमेश्वर तुम लोगों को दण्ड देना बन्द करे।” {6:4} पलिश्तयों ने पूछा, “हम लोगों को कौन सी भेंट, अपने को क्षमा कराने के लिये इस्राएल के परमेश्वर को भेजनी चाहिये?” याजकों और जादूगरों ने कहा, “यहाँ पाँच पलिश्ती प्रमुख हैं। हर एक नगर के लिये एक प्रमुख है। तुम सभी लोगों और तुम्हारे प्रमुखों की एक ही समस्या है। इसलिए तुम्हे पाँच सोने के ऐसे नमूने जो पाँच फोड़ों के रुप में दिखने वाले बनाने चाहिये और पाँच नमूने पाँच चूहों के रूप में दिखने वाले बनाने चाहिए। {6:5} इस प्रकार फोड़ों के नमूने बनाओ और चूहों के नमूने बनाओ जो देश को बरबाद कर रहे हैं। इस्राएल के परमेश्वर को इन सोने के नमूनों को भुगतान के रूप में दो। तब यह संभव है कि इस्राएल का परमेश्वर तुमको, तुम्हारे देवताओं को, और तुम्हारे देश को दण्ड देना रोक दे। {6:6} फ़िरौन और मिस्रियों की तरह हठी न बनो। परमेश्वर ने मिस्रियों को दण्ड दिया। यही कारण था कि मिस्रियों ने इस्राएलियों को मिस्र छोड़ने दिया। {6:7} “तुम्हें एक नई बन्द गाड़ी बनानी चाहिए और दो गायें जिन्होंने अभी बछड़े दिये हों लानी चाहिए। ये गायें ऐसी होनी चाहिये जिन्होंने खेतों में काम न किया हो। गायों को बन्द गाड़ी में जोड़ो और बछड़ों को घर लौटा ले जाओ। बछड़ों को गौशाला में रखो। उन्हें अपनी माताओं के पीछे न जाने दो। {6:8} यहोवा के पवित्र सन्दूक को बन्द गाड़ी में रखो। तुम्हें सोने के नमूनों को थैले में सन्दूक के बगल में रखना चाहिये। तुम्हारे पापों को क्षमा करने के लिये सोने के नमूने परमेश्वर के लिये तुम्हारी भेंट हैं। बन्द गाड़ी को सीधे इसके रास्ते पर भेजो। {6:9} बन्द गाड़ी को देखते रहो। यदि बन्द गाड़ी बेतशेमेश की ओर इस्राएल की भूमि में जाती है, तो यह संकेत है कि यहोवा ने हमें यह बड़ा रोग दिया है। किन्तु यदि गायें बेतशेमेश को नहीं जातीं, तो हम समझेंगे कि इस्राएल के परमेश्वर ने हमें दण्ड नहीं दिया है। हम समझ जायेंगे कि हमारी बीमारी स्वतः ही हो गई।” {6:10} पलिश्तियों ने वही किया जो याजकों और जादूगरों ने कहा। पलिश्तियों ने वैसी दो गायें लीं जिनहोने शीघ्र ही बछड़े दिये थे। पलिश्तिययों ने गायों को बन्द गाड़ी से जोड़ दिया। पलिश्तियों ने बछडों को घर पर गौशाला में रखा। {6:11} तब पलिश्तियों ने यहोवा के पवित्र सन्दूक को बन्द गाड़ी में रखा। {6:12} गायें सीधे बेतशेमेश को गईं। गायें लगातार रंभाती हुई सड़क पर टिकी रहीं। गायें दायें या बायें नहीं मुड़ीं। पलिश्ती शासक गायों के पीछे बेतशेमेश की नगर सीमा तक गए। {6:13} बेतशेमेश के लोग घाटी में अपनी गेहूँ की फसल काट रहे थे। उन्होंने निगाह उठाई और पवित्र सन्दूक को देखा। वे सन्दूक को फिर देखकर बहुत प्रसन्न हुए। वे उसे लेने के लिये दौड़े। {6:14} बन्द गाड़ी उस खेत में आई जो बेतशेमेश के यहोशू का था। इस खेत में बन्द गाड़ी एक विशाल चट्टान के सामने रूकी। बेतशेमेश के लोगों ने बन्द गाड़ी को काट दिया। तब उन्होंने गायों को मार डाला। उन्होंने गायों की बलि यहोवा {6:15} को दी। लेवीवंशियों ने यहोवा के पवित्र सन्दूक को उतारा। उन्होंने उस थैले को भी उतारा जिसमें सोने के नमूने रखे थे। लेवीवंशियों ने यहोवा के सन्दूक और थैले को विशाल चट्टान पर रखा। उस दिन बेतशेमेश के लोगों ने यहोवा को होमबलि चढ़ाई। {6:16} पाँचों पलिश्ती शासकों ने बेतशेमेश के लोगों को यह सब करते देखा। तब वे पाँचों पलिश्ती शासक उसी दिन एक्रोन लौट गए। {6:17} इस प्रकार, पलिश्तियों ने यहोवा को अपने पापों के लिये, अपने फोड़ों के सोने के नमूने भेंट के रूप में भेजे। उन्होंने हर एक पलिश्ती नगर के लिये फोड़े का एक सोने का नमूना भेजा। ये पलिश्ती नगर अशदोद, अज्जा, अश्कलोन, गत और एक्रोन थे। {6:18} पलिश्तियों ने चूहों के सोने के नमूने भी भेजे। सोने के चूहे की संख्या उतनी ही थी जितनी संख्या पाँचों पलिश्ती शासकों के नगरों की थी। इन नगरों के चारों ओर चहारदीवारी थी और हर नगर के चारों ओर गाँव थे। बेतशेमेश के लोगों ने यहोवा के पवित्र सन्दूक को एक चट्टान पर रखा। वह चट्टान अब भी बेतशेमेश के यहोशू के खेत में है। {6:19} किन्तु जिस समय बेतशेमेश के लोगों ने यहोवा के पवित्र सन्दूक को देखा उस समय वहाँ कोई याजक न था। इसलिये परमेश्वर ने बेतशेमेश के सत्तर व्यक्तियों को मार डाला। बेतशेमेश के लोग विलाप करने लगे क्योंकि यहोवा ने उन्हें इतना कठोर दण्ड दिया। {6:20} इसलिये बेतशेमेश के लोगों ने कहा, “याजक कहाँ है जो इस पवित्र सन्दूक की देखभाल कर सके? यहाँ से सन्दूक कहाँ जाएगा?” {6:21} किर्यत्यारीम में एक याजक था। बेतशेमेश के लोगों ने किर्यत्यारीम के लोगों के पास दूत भेजे। दूतों ने कहा, “पलिश्तियों ने यहोवा का पवित्र सन्दूक लौटा दिया है। आओ और इसे अपने नगर में ले जाओ।” {7:1} किर्यत्यारीम के लोग आए और यहोवा के पवित्र सन्दूक को ले गए। वे यहोवा के सन्दूक को पहाड़ी पर अबीनादाब के घर ले गए। उन्होंने अबीनादाब के पुत्र एलीआजार को यहोवा के सन्दूक की रक्षा करने के लिये तैयार करने हेतु एक विशेष उपासना की। {7:2} सन्दूक किर्यत्यारीम में बहुत समय तक रखा रहा। यह वहाँ बीस वर्ष तक रहा। इस्राएल के लोग फिर यहोवा का अनुसरण करने लगे। {i7:3} यहोवा इस्राएलियों की रक्षा करता है: {7:3} शमूएल ने इस्राएल के लोगों से कहा, “यदि तुम सचमुच यहोवा के पास सच्चे हृदय से लौट रहे हो तो तुम्हें विदेशी देवताओं को फेंक देना चाहिये। तुम्हें अश्तोरेत की मूर्तियों को फेंक देना चाहिये और तुम्हें पूरी तरह यहोवा को अपना समर्पण करना चाहिये! तुम्हें केवल यहोवा की ही सेवा करनी चाहिये। तब यहोवा तुम्हें पलिश्तियों से बचायेगा।” {7:4} इसलिये इस्राएलियों ने अपने बाल और अश्तोरेत की मूर्तियों को फेंक दिया। इस्राएली केवल यहोवा की सेवा करने लगे। {7:5} शमूएल ने कहा, “सभी इस्राएली मिस्पा में इकट्ठे हों। मैं तुम्हारे लिये यहोवा से प्रार्थना करूँगा।” {7:6} इस्राएली मिस्पा में एक साथ इकट्ठे हुए। वे जल लाये और यहोवा के सामने वह जल चढ़ाया। इस प्रकार उन्होंने उपवास का समय आरम्भ किया। उन्होने उस दिन भोजन नहीं किया और उन्होंने अपने पापों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने यहोवा के विरूद्ध पाप किया है।” इस प्रकार शमूएल ने मिस्पा में इस्राएल के न्यायाधीश के रूप में काम किया। {7:7} पलिश्तियों ने यह सुना कि इस्राएली मिस्पा में इकट्ठा हो रहे हैं। पलिश्ती शासक इस्राएलियों के विरूद्ध आक्रमण करने गये। इस्राएलियों ने सुना कि पलिश्ती आ रहे हैं, और वे डर गए। {7:8} इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, “हमारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना हमारे लिये करना बन्द मत करो। यहोवा से माँगो कि वह पलिश्तियों से हमारी रक्षा करे!” {7:9} शमूएल ने एक मेमना लिया। उसने यहोवा की होमबलि के रुप में मेमने को जलाया। शमूएल ने यहोवा से इस्राएल के लिये प्रार्थना की । यहोवा ने शमूएल की प्रार्थना का उत्तर दिया। {7:10} जिस समय शमूएल बलि जला रहा था, पलिश्ती इस्राएल से लड़ने आये। किन्तु यहोवा ने पलिश्तियों के समीप प्रचण्ड गर्जना उत्पन्न की। इसने पलिश्तियों को अस्त व्यस्त कर दिया। गर्जना ने पलिश्तियों को भयभीत कर दिया और वे अस्त व्यस्त हो गये। उनके प्रमुख उन पर नयन्त्रण न रख सके। इस प्रकार पलिश्तियों को इस्राएलियों ने युद्ध में पराजित कर दिया। {7:11} इस्राएल के लोग मिस्पा से बाहर दौड़े और पलिश्तियों का पीछा किया। उन्होंने लगातार बेत कर तक उनका पीछा किया। उन्होंने पूरे रास्ते पलिश्ती सैनिकों को मारा। {i7:12} इस्राएल में शान्ति स्थापित हुई {7:12} इसके बाद, शमूएल ने एक विशेष पत्थर स्थापित किया। उसने यह इसलिऐ किया कि लोग याद रखें कि परमेश्वर ने क्या किया। शमूएल ने पत्थर को मिस्पा और शेन के बीच रखा। शमूएल ने पत्थर का नाम “सहायता का पत्थर” रखा। शमूएल ने कहा, “यहोवा ने लगातार पूरे रास्ते इस स्थान तक हमारी सहायता की।” {7:13} पलिश्ती पराजित हुए। वे इस्राएल देश में फिर नहीं घुसे। शमूएल के शेष जीवन में, यहोवा पलिश्तियों के विरुद्ध रहा। {7:14} पलिश्तियों ने इस्राएल के नगर ले लिये थे। पलिश्तियों ने एक्रोन से गत तक के क्षेत्र के नगरों को ले लिया था। किन्तु इस्राएलियों ने इन्हें जीत कर वापस ले लिया और इस्राएल ने इन नगरों के चारों ओर की भूमि को भी वापस ले लिया। और इस्राएलियों और एमोरियों के बीच भी शान्ति हो गई। {7:15} शमूएल ने अपने पूरे जीवन भर इस्राएल का मार्ग दर्शन किया। {7:16} शमूएल एक स्थान से दूसरे स्थान तक इस्राएल के लोगों का न्याय करता हुआ गया। हर वर्ष उसने देश के चारों ओर यात्रा की। वह गिलगाल, बेतेल और मिस्पा को गया। अत: उसने इन सभी स्थानों पर इस्राएली लोगों का न्याय और उन पर शासन किया। {7:17} किन्तु शमूएल का घर रामा में था। इसलिए शमूएल सदा रामा को लौट जाता था। शमूएल ने उसी नगर से इस्राएल का न्याय और शासन किया और शमूएल ने रामा में यहोवा के लिये एक वेदी बनाई। {i8:1} इस्राएल एक राजा की माँग करता है {8:1} जब शमूएल बूढ़ा हो गया तो उसने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश बनाया। {8:2} शमूएल के प्रथम पुत्र का नाम योएल रखा गया। उसके दूसरे पुत्र का नाम अबिय्याह रखा गया था। योएल और अबिय्याह बेर्शेबा में न्यायाधीश थे। {8:3} किन्तु शमूएल के पुत्र वैसे नहीं रहते थे जैसे वह रहता था। योएल और अबिय्याह घूस लेते थे। वे गुप्त रूप से धन लेते थे और न्यायालय में अपना निर्णय बदल देते थे। वे न्यायालय में लोगों को ठगते थे। {8:4} इसलिये इस्राएल के सभी अग्रज (प्रमुख) एक साथ इकट्ठे हुए। वे शमूएल से मिलने रामा गये। {8:5} अग्रजों (प्रमुखों) ने शमूएल से कहा, “तुम बूढ़े हो गए और तुम्हारे पुत्र ठीक से नहीं रहते। वे तुम्हारी तरह नहीं हैं। अब, तुम अन्य राष्ट्रों की तरह हम पर शासन करने के लिये एक राजा दो।” {8:6} इस प्रकार, अग्रजों (प्रमुखों) ने अपने मार्ग दर्शन के लिये एक राजा माँगा। शमूएल ने सोचा कि यह विचार बुरा है। इसलिए शमूएल ने यहोवा से प्रार्थना की । {8:7} यहोवा ने शमूएल से कहा, “वही करो जो लोग तुमसे करने को कहते हैं। उन्होंने तुमको अस्वीकार नहीं किया है। उन्होंने मुझे अस्वीकार किया है! वे मुझको अपना राजा बनाना नहीं चाहते! {8:8} वे वही कर रहे हैं जो सदा करते रहे। मैंने उनको मिस्र से बाहर निकाला । किन्तु उन्होंने मुझको छोड़ा, तथा अन्य देवताओं की पूजा की। वे तुम्हारे साथ भी वैसा ही कर रहे हैं। {8:9} इसलिए लोगों की सुनों और जो वे कहें, करो। किन्तु उन्हें चेतावनी दो। उन्हें बता दो कि राजा उनके साथ क्या करेगा। उनको बता दो कि एक राजा लोगों पर कैसे शासन करता है।” {8:10} उन लोगों ने एक राजा के लिये माँग की। इसलिये शमूएल ने लोगों से वे सारी बातें कहीं जो यहोवा ने कही थी। {8:11} शमूएल ने कहा, “यदि तुम अपने ऊपर शासन करने वाला राजा रखते हो तो वह यह करेगा: वह तुम्हारे पुत्रों को ले लेगा। वह तुम्हारे पुत्रों को अपनी सेवा के लिये विवश करेगा। वह उन्हें सैनिक बनने के लिये विवश करेगा, उन्हें उसके रथों पर से लड़ना पड़ेगा और वे उसकी सेना के घुड़सवार होंगे। तुम्हारे पुत्र राजा के रथ के आगे दौड़ने वाले रक्षक बनेंगे। {8:12} “राजा तुम्हारे पुत्रों को सैनिक बनने के लिये विवश करेगा। उनमें से कुछ हजार व्यक्तियों के ऊपर अधिकारी होंगे और अन्य पचास व्यक्तियों के ऊपर अधिकारी होंगे। “राजा तुम्हारे पुत्रों में से कुछ को अपने खेत को जोतने और फसल काटने को विवश करेगा। वह तुम्हारे पुत्रों में से कुछ को अस्त्र — शस्त्र बनाने को विवश करेगा। वह उन्हें अपने रथ के लिये चीजें बनाने के लिये विवश करेगा। {8:13} “राजा तुम्हारी पुत्रियों को लेगा। वह तुम्हारी पुत्रियों में से कुछ को अपने लिये सुगन्धद्रव्य चीजें बनाने को विवश करेगा और वह तुम्हारी पुत्रियों में से कुछ को रसोई बनाने और रोटी पकाने को विवश करेगा। {8:14} “राजा तुम्हारे सर्वोत्तम खेत, अगूंर के बाग और जैतून के बागों को ले लेगा। वह उन चीजों को तुमसे ले लेगा और अपने अधिकारियों को देगा। {8:15} वह तुम्हारे अन्न और अगूंर का दसवाँ भाग ले लेगा। वह इन चीजों को अपने सेवकों और अधिकारियों को देगा। {8:16} “यह राजा तुम्हारे दास — दासियों को ले लेगा। वह तुम्हारे सर्वोत्तम पशु और गधों को लेगा। वह उनका उपयोग अपने कामों के लिये करेगा {8:17} और वह तुम्हारी रेवड़ों का दसवाँ भाग लेगा। “और तुम स्वयं इस राजा के दास हो जाओगे। {8:18} जब वह समय आयेगा तब तुम राजा को चुन्ने के कारण रोओगे। किन्तु उस समय यहोवा तुमको उत्तर नहीं देगा।” {8:19} किन्तु लोगों ने शमूएल की एक न सुनी। उन्होने कहा, “नहीं! हम लोग अपने ऊपर शासन करने के लिये एक राजा चाहते हैं। {8:20} तब हम वैसे ही हो जायेंगे जैसे अन्य राष्ट्र। हमारा राजा हम लोगों का मार्ग — दर्शन करेगा। वह हम लोगों के साथ जायेगा और हमारे युद्धों को लड़ेगा।” {8:21} शमूएल ने जब लोगों का सारा कहा हुआ सुना तब उसने यहोवा के सामने उनके कथनों को दुहराया। {8:22} यहोवा ने उत्तर दिया, “उनकी बात सुनो! उनको एक राजा दो।” तब शमूएल ने इस्राएल के लोगों से कहा, “ठीक है! तुम्हारा एक नया राजा होगा। अब, आप सभी लोग घर को जायें।” {i9:1} शाऊल अपने पिता के गधों की तलास करता है। {9:1} कीश बिन्यामीन परिवार समूह का एक महत्वपूर्ण व्यक्ति था। कीश अबीएल का पुत्र था। अबीएल सरोर का पुत्र था। सरोर बकोरत का पुत्र था। बकोरत बिन्यामीन के एक व्यक्ति अपीह का पुत्र था। {9:2} कीश का एक पुत्र शाऊल नाम का था। शाऊल एक सुन्दर युवक था। वहाँ शाऊल से अधिक सुन्दर कोई न था। खड़ा होने पर शाऊल का सिर इस्राएल के किसी भी व्यक्ति से ऊँचा रहता था। {9:3} एक दिन, कीश के गधे खो गए। इसलिए कीश ने अपने पुत्र शाऊल से कहा, “सेवकों में से एक को साथ लो और गधों की खोज में जाओ।” {9:4} शाऊल ने गधों की खोज आरम्भ की। शाऊल एप्रैम की पहाड़ियों में होकर घूमा। तब शाऊल शलीशा के चारों ओर के क्षेत्र में घूमा। किन्तु शाऊल और उसका सेवक, कीश के गधों को नहीं पा सके। इसलिए शाऊल और सेवक शालीम के चारों ओर के क्षेत्र में गये। किन्तु गधे वहाँ नहीं मिले।। इसलिए शाऊल ने बिन्यामीन के प्रदेश में होकर यात्रा की। किन्तु वह और उसका सेवक गधों को तब भी न पा सके। {9:5} अन्त में, शाऊल और उसका सेवक सूफ नामक नगर में आए। शाऊल ने अपने सेवक से कहा, “चलो, हम लौटें। मेरे पिता गधों के बारे में सोचना बन्द कर देंगे और हम लोगों के बारे में चिन्तित होने लगेंगे।” {9:6} किन्तु सेवक ने उत्तर दिया, “इस नगर में परमेश्वर का एक व्यक्ति है। लोग उसका सम्मान करते हैं। वह जो कहता है सत्य होता है। इसलिये हम इस नगर में चलें। संभव है कि परमेश्वर का यह व्यक्ति हमें बताये कि इसके बाद हम लोग कहाँ जायें।” {9:7} शाऊल ने अपने सेवक से कहा, “हम नगर में चल सकते हैं। किन्तु हम लोग उस व्यक्ति को क्या दे सकते हैं? हम लोगों के थैले का भोजन समाप्त हो चुका है। हम लोगों के पास कोई भी भेंट परमेश्वर के व्यक्ति को देने के लिये नहीं है। हमारे पास उसे देने को क्या है?” {9:8} सेवक ने शाऊल को फिर उत्तर दिया “देखो, मेरे पास थोड़ा सा धन है। हम परमेश्वर के व्यक्ति को यही दें। तब वह बतायेगा कि हम लोग कहाँ जायें।” {9:9} शाऊल ने अपने सेवक से कहा, “अच्छा सुझाव है! हम चलें!” वे नगर में वहाँ गए जहाँ परमेश्वर का व्यक्ति था। शाऊल और उसका सेवक पहाड़ी पर चढ़ते हुए नगर {9:10} को जा रहे थे। रास्ते में वे कुछ युवतियों से मिले। युवतियाँ बाहर से पानी लेने जा रही थीं। शाऊल और उसके सेवक ने युवतियों से पूछा, “क्या भविष्यवक्ता यहाँ {9:11} है?” (प्राचीन काल में इस्राएल के निवासी नबियों को “भविष्यवक्ता” कहते थे। इसलिए यदि वे परमेश्वर से कुछ माँगना चाहते थे तो वे कहते थे, “हम लोग भविष्यवक्ता के पास चलें।”) {9:12} युवतियों ने उत्तर दिया, “हाँ, भविष्यवक्ता यहीं है। वह ठीक इसी सड़क पर आगे है। वह आज ही नगर में आया है। कुछ लोग वहाँ एक साथ इसलिये इकट्ठे हो रहे हैं कि आराधनालय पर मेलबलि में भाग ले सकें। {9:13} आप लोग नगर में जाएँ, और आप उनसे मिल लेंगे। यदि आप लोग शीघ्रता करेंगे तो आप उनसे आराधनालय पर भोजन के लिये जाने के पहले मिल लेंगे। भविष्यवक्ता बलि — भेंट को आशीर्वाद देते हैं। इसलिये लोग तब तक भोजन करना आरम्भ नहीं करेंगे जब तक वे वहाँ न पहुँचें। इसलिये यदि आप लोग शीघ्रता करें, तो आप भविष्यवक्ता को पा सकते हैं।” {9:14} शाऊल और सेवक ने ऊपर पहाड़ी पर नगर की ओर बढ़ना आरम्भ किया। जैसे ही वे नगर में घुसे उन्होंने शमूएल को अपनी ओर आते देखा। शमूएल नगर के बाहर उपासना के स्थान पर जाने के लिये अभी आ ही रहा था। {9:15} एक दिन पहले यहोवा ने शमूएल से कहा था, {9:16} “कल मैं इसी समय तुम्हारे पास एक व्यक्ति को भेजूँगा। वह बिन्यामीन के परिवार समूह का होगा। तुम्हें उसका अभिषेक कर देना चाहिये। तब वह हमारे लोग इस्राएलियों का नया प्रमुख होगा। यह व्यक्ति हमारे लोगों को पलिश्तियों से बचाएगा। मैंने अपने लोगों के कष्टों को देखा है। मैंने अपने लोगों का रोना सुना है।” {9:17} शमूएल ने शाऊल को देखा और यहोवा ने उससे कहा, “यही वह व्यक्ति है जिसके बारे में मैंने तुमसे कहा था। यह मेरे लोगों पर शासन करेगा।” {9:18} शाऊल द्वार के पास शमूएल के निकट आया। शाऊल ने शमूएल से पूछा, “कृपया बतायें भविष्यवक्ता का घर कहाँ है।” {9:19} शमूएल ने उत्तर दिया, “मैं ही भविष्यवक्ता हूँ। मेरे आगे उपासना के स्थान पर पहुँचो। तुम और तुम्हारा सेवक आज हमारे साथ भोजन करोगे। मैं कल सवेरे तुम्हें घर जाने दूँगा मैं तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर दूँगा। {9:20} उन गधों की चिन्ता न करो जिन्हें तुमने तीन दिन पहले खो दिया। वे मिल गये हैं। अब, तुम्हें सारा इस्राएल चाहता है। वे तुम्हें और तुम्हारे पिता के परिवार के सभी लोगों को चाहते हैं।” {9:21} शाऊल ने उत्तर दिया, “किन्तु मैं बिन्यामीन परिवार समूह का एक सदस्य हूँ। यह इस्राएल में सबसे छोटा परिवार समूह है और मेरा परिवार बिन्यामीन परिवार समूह में सबसे छोटा है। आप क्यों कहते हैं कि इस्राएल मुझको चाहता है?” {9:22} तब शमूएल, शाऊल और उसके सेवक को भोजन के क्षेत्र में ले गया। लगभग तीस व्यक्ति एक साथ भोजन के लिये और बलि — भेंट में भाग लेने के लिये आमन्त्रित थे। शमूएल ने शाऊल और उसके सेवक को मेज पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया। {9:23} शमूएल ने रसोइये से कहा, “वह माँस लाओ जो मैंने तुम्हें दिया था। यह वह भाग है जिसे मैंने तुमसे सुरक्षित रखने के लिये कहा था।” {9:24} रसोइये ने जांघ ली और शाऊल के सामने मेज पर रखी। शमूएल ने कहा, “यही वह माँस है जिसे मैंने तुम्हारे लिये सुरक्षित रखा था। यह खाओ क्योंकि यह इस विशेष समय के लिये तुम्हारे लिये सुरक्षित था।” इस प्रकार उस दिन शाऊल ने शमूएल के साथ भोजन किया। {9:25} जब उन्होंने भोजन समाप्त कर लिया, वे आराधनालय से उतरे और नगर को लौटे। शमूएल ने छत पर शाऊल के लिये बिस्तर लागाया और शाऊल सो गया। {9:26} अगली सुबह सवेरे, शमूएल ने शाऊल को छत पर जोर से पुकारा। शमूएल ने कहा, “उठो। मैं तुम्हें तुम्हारे रास्ते पर भेजूँगा।” शाऊल उठा, और शमूएल के साथ घर से बाहर चल पड़ा। {9:27} शाऊल, उसका सेवक और शमूएल एक साथ नगर के सिरे पर चल रहे थे। शमूएल ने शाऊल से कहा, “अपने सेवक से हम लोगों से कुछ आगे चलने को कहो। मेरे पास तुम्हारे लिये परमेश्वर का एक सन्देश है।” इसलिये दास उनसे कुछ आगे चलने लगा। {i10:1} शमूएल शाऊल का अभिषेक करता है {10:1} शमूएल ने विशेष तेल की एक कुप्पी ली। शमूएल ने तेल को शाऊल के सिर पर डाला। शमूएल ने शाऊल को चुम्बन किया और कहा, “यहोवा ने तुम्हारा अभिषेक अपने लोगों का प्रमुख बनाने के लिये किया है। तुम यहोवा के लोगों पर नियन्त्रण करोगे। तुम उन्हें उन शत्रुओं से बचाओगे जो उनको चारों ओर से घेरे हैं। यहोवा ने तुम्हारा अभिषेक (चुनाव) अपने लोगों का शासक होने के लिये किया है। एक चिन्ह प्रकट होगा जो प्रमाणित करेगा कि यह सत्य है। {10:2} जब तुम मुझसे अलग होगे, तो तुम राहेल के कब्र के पास दो व्यक्तियों से, बिन्यामीन की धरती के सिवाने पर, सेलसह में मिलोगे। वे दोनों व्यक्ति तुमसे कहेंगे, ‘जिन गधों की खोज तुम कर रहे थे उन्हें किसी व्यक्ति ने प्राप्त कर लिया है। तुम्हारे पिता ने गधों के सम्बन्ध में चिन्ता करना छोड़ दिया है। अब उसे तुम्हारी चिन्ता है। वह कह रहा है: मैं अपने पुत्र के विषय में क्या करूँ?’” {10:3} शमूएल ने कहा, “अब तुम तब तक चलते रहोगे जब तक तुम ताबोर में बांज के विशाल पेड़ तक पहुँच नहीं जाते। वहाँ तुमसे तीन व्यक्ति मिलेंगे। वे तीनों व्यक्ति बेतेल में परमेश्वर की उपासना के लिये यात्रा पर होंगे। एक व्यक्ति बकरियों के तीन बच्चों को लिये होगा। दूसरा व्यक्ति तीन रोटियाँ लिये हुए होगा और तीसरा व्यक्ति एक मश्क दाखमधु लिये हुए होगा। {10:4} ये तीनों व्यक्ति कहेंगे, ‘आपका स्वागत है।’ वे तुम्हें दो रोटियाँ देंगे। तुम उनसे उन दो रोटियों को स्वीकार करोगे। {10:5} तब तुम गिबियथ — एलोहिम जाओगे। उस स्थान पर पिलिश्तियों का एक किला है। जब तुम उस नगर में पहुँचोगे तो कई नबी निकल आयेंगे। ये नबी आराधनास्थल से नीचे उपासना के लिये आयेंगे। वे भविष्यवाणी करेंगे। वे वीणा, खंजड़ी, और तम्बूरा बजा रहे होंगे। {10:6} तब तत्काल तुम पर यहोवा की आत्मा उतरेगी। तुम बदल जाओगे। तुम एक भिन्न ही पुरुष हो जाओगे। तुम इन भविष्यवक्ताओं के साथ भविष्यवाणी करने लगोगे। {10:7} इन बातों के घटित होने के बाद, तुम जो चाहोगे, करोगे। परमेश्वर तुम्हारे साथ होगा। {10:8} “मुझसे पहले गिलगाल जाओ। मैं तुम्हारे पास उस स्थान पर आऊँगा। तब मैं होमबलि और मेलबलि चढ़ाऊँगा। किन्तु तुम्हें सात दिन प्रतीक्षा करनी होगी। तब मैं आऊँगा और बताऊँगा कि तुम्हें क्या करना है।” {i10:9} शाऊल का नबी जैसा होना {10:9} जैसे ही शाऊल शमूएल को छोड़ने के लिये मुड़ा, परमेश्वर ने शाऊल का जीवन बदल दिया। ये सभी घटनायें उस दिन घटीं। {10:10} शाऊल और उसका सेवक गिबियथ — एलोहिम गए।उस स्थान पर शाऊल नबियों के एक समूह से मिला। परमेश्वर की आत्मा शाऊल पर तीव्रता से उतरी और शाऊल ने नबियों के साथ भविष्यवाणी की। {10:11} जो लोग शाऊल को पहले से जानते थे उन्होंने नबियों के साथ उसे भविष्यवाणी करते देखा। वे लोग आपस में पूछ ताछ करने लगे, “कीश के पुत्र को क्या हो गया है? क्या शाऊल नबियों में से एक है?” {10:12} एक व्यक्ति ने जो गिबियथ — एलोहिम में रहता था, कहा, “हाँ! और ऐसा लगता है कि यह उनका मुखिया है।” यही कारण है कि यह प्रसिद्ध कहावत बनी: “क्या शाऊल नबियों में से कोई एक है?” {i10:13} शाऊल घर पहुँचता है {10:13} अन्तत: उसने नबियों की तरह बोलना बन्द किया और एक उच्च स्थान पर चला गया। {10:14} बाद में शाऊल के चाचा ने उससे और उसके सेवक से कहा, “तुम कहाँ गए थे?” उसने उत्तर दिया, “हम गधों को देखने गए थे और उनकी खोज में चले ही जा रहे थे, किन्तु वे कहीं नहीं मिले. इसलिए हम लोग शमूएल के पास गए।” {10:15} यह सुनकर शाऊल के चाचा ने कहा, “कृपया तुम लोग मुझे बताओ कि शमूएल ने तुम दोनों से क्या कहा?” {10:16} शाऊल ने अपने चाचा को उत्तर दिया, “उसने पूरी सच्चाई से बताया कि गधे मिल गये हैं।” और उसने राज्य के बारे में जो शमूएल से सुना था उसे नहीं बताया। {i10:17} शमूएल, शाऊल को राजा घोषित करता है {10:17} शमूएल ने इस्राएल के सभी लोगों से मिस्पा में यहोवा से मिलने के लिये एक साथ इकट्ठा होने को कहा। {10:18} शमूएल ने कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘मैंने इस्राएल को मिस्र से बाहर निकाला। मैंने तुम्हें मिस्र की अधीनता से और उन अन्य राष्ट्रों से भी बचाया जो तुम्हें चोट पहुँचाना चाहते थे।’ {10:19} किन्तु आज तुमने अपने परमेश्वर को अस्वीकार कर दिया है। तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें तुम्हारे सभी कष्टों और समस्याओं से बचाता है। किन्तु तुमने कहा, ‘नहीं हम अपने ऊपर शासन करने के लिये एक राजा चाहते हैं।’ अब आओ और यहोवा के सामने अपने परिवारों और अपने परिवार समूहों में खड़े हो जाओ।” {10:20} शमूएल इस्राएल के सभी परिवार समूहों को निकट लाया। तब शमूएल ने नया राजा चुनना आरम्भ किया। प्रथम बिन्यामीन का परिवार समूह चुना गया। {10:21} शमूएल ने बिन्यामीन के परिवार समूह के हर एक परिवार को एक एक करके आगे से निकलने को कहा। मत्री का परिवार चुना गया। तब शमूएल ने मत्री के परिवार के हर एक व्यक्ति को एक एक करके उसके आगे से निकलने को कहा। इस प्रकार कीश का पुत्र शाऊल चुना गया। किन्तु जब लोगों ने शाऊल की खोज की, तो वे उसे पा नहीं सके। {10:22} तब उन्होंने यहोवा से पूछा, “क्या शाऊल अभी तक यहाँ नहीं आया है?” यहोवा ने कहा, “शाऊल भेंट सामग्री के पीछे छिपा है।” {10:23} लोग दौड़ पड़े और शाऊल को भेंट सामग्री के पीछे से ले आये। शाऊल लोगों के बीच खड़ा हुआ। शाऊल इतना लम्बा था कि सभी लोग बस उस के कंधे तक आ रहे थे। {10:24} शमूएल ने सभी लोगों से कहा, “उस व्यक्ति को देखो जिसे यहोवा ने चुना है। लोगों में कोई व्यक्ति शाऊल के समान नहीं है।” तब लोगों ने नारा लगाया, “राजा दीर्घायु हो!” {10:25} शमूएल ने राज्य के नियमों को लोगों को समझाया। उसने उन नियमों को एक पुस्तक में लिखा। उसने पुस्तक को यहोवा के सामने रखा। तब शमूएल ने लोगों को अपने — अपने घर जाने के लिये कहा। {10:26} शाऊल भी गिबा में अपने घर चला गया। परमेश्वर ने वीर पुरुषों के हृदय का स्पर्श किया और ये वीर व्यक्ति शाऊल का अनुसरण करने लगे। {10:27} किन्तु कुछ उत्पातियों ने कहा, “यह व्यक्ति हम लोगों की रक्षा कैसे कर सकता है।?” उन्होंने शाऊल की निन्दा की और उसे उपहार देने से इन्कार किया। किन्तु शाऊल ने कुछ नहीं कहा। अम्मोनियों का राजा नाहाश गिलाद और याबेश के परिवार समूह को कष्ट दे रहा था। नाहाश ने उनके हर एक पुरुष की दायीं आँख निकलवा डाली थी। नाहाश किसी को उनकी सहायता नहीं करने देता था। अम्मोनियों के राजा नाहाश ने यरदन नदी के पूर्व रहने वाले हर एक इस्राएली पुरुष की दायीं आँख निकलवा ली थी। किन्तु सत्तर हजार इस्राएली पुरुष अम्मोनियों के यहाँ से भाग निकले और याबेश गिलाद में आ गये। {i11:1} अम्मोनियों का राजा नाहाश {11:1} लगभग एक महीने बाद अम्मोनी नाहाश और उसकी सेना ने याबेश गिलाद को घेरे लिया। याबेश के सभी लोगों ने नाहाश से कहा, “यदि तुम हमारे साथ सन्धि करोगे तो हम तुम्हारी प्रजा बनेंगे।” {11:2} किन्तु अम्मोनी नाहाश ने उत्तर दिया, “मैं तुम लोगों के साथ तब सन्धि करूँगा जब मैं हर एक व्यक्ति की दायीं आँख निकाल लूँगा। तब सारे इस्राएली लज्जित होंगे!” {11:3} याबेश के प्रमुखों ने नाहाश से कहा, “हम लोग सात दिन का समय लेंगे। हम पूरे इस्राएल में दूत भेजेंगे। यदि कोई सहायता के लिये नहीं आएगा, तो हम लोग तुम्हारे पास आएंगे और अपने को समर्पित कर देंगे।” {i11:4} शाऊल याबेश गिलाद की रक्षा करता है: {11:4} सो वे दूत गिबा में आये जहाँ शाऊल रहता था। उन्होंने लोगों को समाचार दिया। लोग जोर से रो पड़े। {11:5} शाऊल अपने बैलों के साथ खेतों में गया हुआ था। शाऊल खेत से लौटा और उसने लोगों का रोना सुना। शाऊल ने पूछा, “लोगों को क्या कष्ट है? वे रो क्यों रहे हैं?” तब लोगों ने याबेश के दूतों ने जो कहा था शाऊल को बातया। {11:6} शाऊल ने उनकी बातें सुनीं। तब परमेश्वर की आत्मा शाऊल पर जल्दी से उतरी। शाऊल अत्यन क्रोधित हुआ। {11:7} शाऊल ने बैलों की जोड़ी ली और उसके टुकड़े कर डाले। तब उसने उन बैलों के टुकड़ों को उन दूतों को दिया। उसने दूतों को आदेश दिया कि वे इस्राएल के पूरे देश में उन टुकड़ों को ले जायें। उसने उनसे इस्राएल के लोगों को यह सन्देश देने को कहा, “आओ शाऊल और शमूएल का अनुसरण करो। यदि कोई व्यक्ति नहीं आता और उसकी सहायता नहीं करता तो उसके बैलों के साथ यही होगा।” यहोवा की ओर से लोगों में बड़ा भय छा गया। वे एक इकाई के रूप में एक साथ इकट्ठे हो गए। {11:8} शाऊल ने सभी पुरुषों को बेजेक में एक साथ इकट्ठा किया। वहाँ इस्राएल के तीन लाख पुरुष और यहूदा के तीस हजार पुरुष थे। {11:9} शाऊल और उसकी सेना ने याबेश के दूतों से कहा, “गिलाद में याबेश के लोगों से कहो कि कल दोपहर तक तुम लोगों की रक्षा हो जायेगी।” दूतों ने शाऊल का सन्देश याबेश के लोगों को दिया। याबेश के लोग बड़े प्रसन्न हुए। {11:10} तब याबेश के लोगों ने अम्मोनी नाहाश से कहा, “हम लोग कल तुम्हारे पास आएंगे। तब तुम हम लोगों के साथ जो चाहो कर सकते हो।” {11:11} अगली सुबह शाऊल ने अपनी सेना को तीन टुकड़ियों में बाँटा। सूरज निकलते ही शाऊल और उसके सैनिक अम्मोनियों के डेरे में जा घुसे। जब वे उस सुबह रक्षकों को बदल रहे थे, शाऊल ने आक्रमण किया। शाऊल और उसके सैनिकों ने अम्मोनियों को दोपहर से पहले पराजित कर दिया। सभी अम्मोनी सैनिक विभिन्न दिशाओं में भागे — दो सैनिक भी एक साथ नहीं रहे। {11:12} तब लोगों ने शमूएल से कहा, “वे लोग कहाँ हैं जो कहते थे कि हम शाऊल को राजा के रूप में शासन करने देना नहीं चाहते? उन लोगों को लाओ! हम उन्हें मार डालेंगे!” {11:13} किन्तु शाऊल ने कहा, “नहीं! आज किसी को मत मारो! आज यहोवा ने इस्राएल की रक्षा की!” {11:14} तब शमूएल ने लोगों से कहा, “आओ हम लोग गिलगाल चलें। गिलगाल में हम शाऊल को फिर राजा बनायेंगे।” {11:15} सो सभी लोग गिलगाल चले गये। वहाँ यहोवा के सामने लोगों ने शाऊल को राजा बनाया। उन्होंने यहोवा को मेलबलि दी। शाऊल और सभी इस्राएलियों ने खुशियाँ मनायीं। {i12:1} शमूएल का इस्राएलियों से बात करना {12:1} शमूएल ने सारे इस्राएलियों से कहा: “मैंने वह सब कुछ कर दिया है जो तुम लोग मुझ से चाहते थे। मैंने तुम लोगों के ऊपर एक राजा रखा है। {12:2} अब तुम्हारे मार्गदर्शन के लिये एक राजा है। मैं श्वेतकेशी बूढ़ा हूँ। मेरे पुत्र तुम्हारे साथ हैं। जब मैं एक छोटा बालक था तब से मैं तुम्हारा मार्ग दर्शक रहा हूँ। {12:3} मैं यहाँ हूँ। यदि मैंने कोई बुरा काम किया है तो तुम्हें उसके बारे में यहोवा से और उनके चुने हुए राजा से कहना चाहिये। क्या मैंने कभी किसी का बैल या गधा चुराया है? क्या मैंने किसी को कभी धोखा दिया है या हानि पहुँचाई है? क्या मैंने किसी का कुछ बुरा करने के लिये कभी किसी से धन या एक जोड़ा जूता भी लिया है? यदि मैंने इनमें से कोई बुरा काम किया है तो में उसको ठीक करूँगा।” {12:4} इस्राएलियों ने उत्तर दिया, “नहीं! तुमने हम लोगों के लिये कभी बुरा नहीं किया। तुमने न हम लोगों को ठगा, न ही तुमने हम लोगों से कभी कुछ लिया।” {12:5} शमूएल ने इस्राएलियों से कहा, “जो तुमने कहा, यहोवा उसका गवाह है। यहोवा का चुना राजा भी आज गवाह है। वे दोनों गवाह हैं कि तुमने मुझमें कोई दोष नहीं पाया।” लोगों ने कहा, “हाँ! यहोवा गवाह है।” {12:6} तब समूएल ने लोगों से कहा, “यहोवा गवाह है। उसने मूसा और हारून को चुना। वह तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र से बाहर ले आया। {12:7} अब चुपचाप खड़े रहो अब मैं तुम्हें उन अच्छे कामों को बताऊँगा जो यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों और तुम्हारे लिये किये थे। {12:8} “याकूब मिस्र गया। बाद में, मिस्रियों ने उसके वंशजों का जीवन कष्टमय बना दिया। इसलिए वे सहायता के लिये यहोवा के सामने रोये। यहोवा ने मूसा और हारून को भेजा। मूसा और हारून तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र से बाहर निकाल ले आए और इस स्थान में रहने के लिये उनका मार्ग दर्शन किया। {12:9} “किन्तु तुम्हारे पूर्वज, अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गये। इसलिए यहोवा ने उन्हें सीसरा का दास होने दिया। सीसरा, हासोर की सेना का सेनापति था। तब यहोवा ने उन्हें पलिश्तियों और मोआब के राजा का दास बनाया। वे सभी तुम्हारे पूर्वजों के विरूद्ध लड़े। {12:10} किन्तु तुम्हारे पूर्वज सहायता के लिये यहोवा के सामने गिड़गिड़ाए। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों ने पाप किया है। हम लोगों ने यहोवा को छोड़ा है और झूठे देवताओं बाल और अश्तोरेत की सेवा की है। किन्तु अब आप हमें हमारे शत्रुओं से बचायें, हम आपकी सेवा करेंगे।’ {12:11} “इसलिए यहोवा ने यरुब्बाल (गिदोन), बदान, बरक, यिप्तह और शमूएल को वहाँ भेजा। यहोवा ने तुम्हारे चारों ओर के शत्रुओं से तुम्हारी रक्षा की और तुम सुरक्षित रहे। {12:12} किन्तु तब तुमने अम्मोनियों के राजा नाहाश को अपने विरूद्ध लड़ने के लिये आते देखा। तुमने कहा, ‘नहीं! हम अपने ऊपर शासन करने के लिये एक राजा चाहते हैं।’ तुमने यही कहा, यद्यपि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा राजा पहले से ही था। {12:13} अब, तुम्हारा चुना राजा यहाँ है। यहोवा ने इस राजा को तुम्हारे ऊपर नियुक्त किया है। {12:14} परमेश्वर यहोवा तुम्हारी रक्षा करता रहेगा। किन्तु परमेश्वर तुम्हारी रक्षा तभी करेगा जब तुम ये करोगे तुम्हें यहोवा का सम्मान और उसकी सेवा करनी चाहिए। तुम्हें उसके आदेशों के विरूद्ध लडना नहीं चाहिए और तुम्हें तथा तुम्हारे ऊपर शासन करने वाले राजा को, अपने परमेश्वर यहोवा का अनुसरण करना चाहिये। यदि तुम इन्हें करते रहोगे तो परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करेगा। {12:15} किन्तु यदि तुम यहोवा की आज्ञा पालन नहीं करते हो और उसके आदेशों के विरूद्ध लड़ते हो, तो वह तुम्हारे विरुद्ध होगा। यहोवा तुम्हें और तुम्हारे राजा को नष्ट कर देगा! {12:16} “अब चुपचाप खड़े रहो और उस अद्भुत काम को देखो जिसे यहोवा तुम्हारी आँखों के सामने करेगा। {12:17} यह गेहूँ की फसल कटने का समय है। मैं यहोवा से प्रार्थना करूँगा। मैं उन से बिजली की कड़क और वर्षा की याचना करुँगा। तब तुम समझोगे कि तुमने उस समय यहोवा के विरूद्ध बुरा किया था जब तुमने एक राजा की माँग की थी।” {12:18} अत: शमूएल ने यहोवा से प्रार्थना की। उसी दिन यहोवा ने बिजली की कड़क और वर्षा भेजी। इससे लोग यहोवा तथा शमूएल से बहुत डर गये। {12:19} सभी लोगों ने शमूएल से कहा, “अपने परमेश्वर यहोवा से तुम अपने सेवक, हम लोगों के लिये प्रार्थना करो। हम लोगों को मरने मत दो! हम लोगों ने बहुत पाप किये हैं और अब एक राजा के लिए माँग करके हम लोगों ने उन पापों को और बढ़ाया है।” {12:20} शमूएल ने उत्तर दिया, “डरो नहीं। यह सत्य है! तुमने वे सब बुरे काम किये। किन्तु यहोवा का अनुसरण करना बन्द मत करो। अपने सच्चे हृदय से यहोवा की सेवा करो। {12:21} देवमूर्तियाँ मात्र मूर्तियाँ हैं, वे तुम्हारी सहायता नहीं करेंगी। इसलिए उनकी पूजा मत करो। देवमूर्तियाँ न तुम्हारी सहयता कर सकती हैं, न ही रक्षा कर सकती हैं। वे कुछ भी नहीं हैं! {12:22} “किन्तु यहोवा अपने लोगों को छोड़ेगा नहीं। यहोवा तुम्हें अपने लोग बनाकर प्रसन्न हुआ था। अतः अपने अच्छे नाम की रक्षा के लिये वह तुमको छोड़ेगा नहीं। {12:23} यदि मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करना बन्द कर देता हूँ तो यह मेरे लिए अपमानजनक होगा। यदि मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करना बन्द करता हूँ तो यह यहोवा के विरुद्ध पाप करना होगा। मैं तुम्हें वह शिक्षा दूँगा जो तुम्हारे लिये अच्छी व उचित है। {12:24} किन्तु तुम्हें भी यहोवा का सम्मान करते रहना चाहिये। तुम्हें पूरे हृदय से यहोवा की सेवा सच्चाई के साथ करनी चाहिये। उन अद्भुत कामों को याद रखो जिन्हें उसने तुम्हारे लिये किये। {12:25} किन्तु यदि तुम हठी हो, और बुरा करते हो तो परमेश्वर तुम्हें और तुम्हारे राजा को ऐसे झाड़ फेकेंगा जैसे झाड़ू से कूड़े को फेंका जाता है।” {i13:1} शाऊल अपनी पहली गलती करता है {13:1} अब तक, शाऊल एक वर्ष तक राज्य कर चुका था और फिर जब शाऊल इस्राएल पर दो वर्ष शासन कर चुका, {13:2} उसने इस्राएल से तीन हजार व्यक्ति चुने। उनमें दो हजार वे व्यक्ति थे जो बेतेल के पहाड़ी प्रदेश के मिकमाश में उसके साथ ठहरे थे और एक हजार वे व्यक्ति थे जो बिन्यामीन के अंतर्गत गिबा में योनातान के साथ ठहरे थे। शाऊल ने सेना के अन्य सैनिकों को उनके अपने घर भेज दिया। {13:3} योनातान ने गिबा में जाकार पलिश्तियों को उनके डेरे में हराया। पलिश्तियों ने इसके बारे में सुना। उन्होंने कहा, “हिब्रुओं ने विद्रोह किया है।” शाऊल ने कहा, “जो कुछ हुआ है उसे हिब्रू लोगों को सुनाओ।” अत: शाऊल ने लोगों से कहा कि वे पूरे इस्राएल देश में तुरही बजायें। {13:4} सभी इस्राएलियों ने वह समाचार सुना। उन्होने कहा, “शाऊल ने पलिश्ती सेना प्रमुख को मार डाला है। अब पलिश्ती सचमुच इस्राएलियों से घृणा करते हैं!” इस्राएली लोगों को शाऊल से जुड़ने के लिये गिलगाल में बुलाया गया। {13:5} पलिश्ती इस्राएल से लड़ने के लिए इकट्ठे हुए। पलिश्तियों के पास छ: हजार रथ और तीन हजार घुड़सवार थे। वहाँ इतने अधिक पलिश्तिी सैनिक थे जितने सागर तट पर बालू के कण। पलिश्तियों ने मिकमाश में डेरा डाला। (मिकमाश बेतावेन के पूर्व है।) {13:6} इस्राएलियों ने देखा कि वे मुसीबत में हैं। उन्होंने अपने को जाल में फँसा अनुभव किया। वे गुफाओं और चट्टानों, के अन्तरालों में छिपने के लिए भाग गये। वे चट्टानों, कुँओं और जमीन के अन्य गढ्ढों में छिप गये। {13:7} कुछ हिब्रू यरदन नदी पार कर गाद और गिलाद प्रदेश में भी भाग गए। शाऊल तब तक गिलगाल में था। उसकी सेना के सभी सैनिक भय से काँप रहे थे। {13:8} शमूएल ने कहा कि वह शाऊल से गिलगाल में मिलेगा। शाऊल ने वहाँ सात दिन तक प्रतीक्षा की। किन्तु शमूएल तब भी गिलगाल नहीं पहुँचा था और सैनिक शाऊल को छोड़ने लगे। {13:9} इसलिए शाऊल ने कहा, “मेरे लिए होमबलि और मेलबलि लाओ।” तब शाऊल ने होमबलि चढ़ायी। {13:10} ज्योंही शाऊल ने बलि भेंट चढ़ानी समाप्त की, शमूएल आ गया। शाऊल उससे मिलने गया। {13:11} शमूएल ने पूछा, “यह तुमने क्या कर दिया?” शाऊल ने उत्तर दिया, “मैंने सैनिकों को अपने को छोड़ते देखा और तुम तब तक यहाँ नहीं थे, और पलिश्ती मिकमाश में इकट्ठा हो रहे थे।” {13:12} मैंने अपने मन में सोचा, “पलिश्ती यहाँ गिलगाल में आकर मुझ पर आक्रमण करेंगे और मैंने अब तक यहोवा से हमारी सहायता करने के लिये याचना नहीं की है। अत: मैंने अपने को विवश किया और मैंने होमबलि चढ़ाई।” {13:13} शमूएल ने कहा, “तुमने मूर्खता का काम किया! तुमने अपने परमेश्वर यहोवा के आदेश का पालन नहीं किया। यदि तुमने परमेश्वर के आदेश का पालन किया होता तो परमेश्वर ने तुम्हारे परिवार को सदा के लिये इस्राएल पर शासन करने दिया होता। {13:14} किन्तु अब तुम्हारा राज्य आगे नहीं चलेगा। यहोवा ऐसे व्यक्ति की खोज में था जो उसकी आज्ञा का पालन करना चाहता हो। यहोवा ने उस व्यक्ति को पा लिया है और यहोवा उसे अपने लोगों का नया प्रमुख होने के लिये चुनेगा। तुमने यहोवा के आदेश का पालन नहीं किया इसलिए यहोवा नया प्रमुख चुनेगा।” {13:15} तब शमूएल उठा और उसने गिलगाल को छोड़ दिया। शाऊल और उसकी बची सेना ने गिलगाल को छोड़ दिया। वे बिन्यामीन में गिबा को गये। शाऊल ने उन व्यक्तियों को गिना जो आब तक उसके साथ थे। वहाँ लगभग छः सौ पुरुष थे। {i13:16} मिकमाश का युद्ध {13:16} शाऊल, उसका पुत्र योनातान और सैनिक बिन्यामीन में गिबा को गए। पलिश्तियों ने मिकमाश में डेरा डाला था। {13:17} पलिश्तियों ने उस क्षेत्र में रहने वाले इस्राएलियों को दण्ड देने का निश्चय किया। अत: उनकी शक्तिशाली सेना ने आक्रमण करने के लिए अपना स्थान छोड़ दिया। पलिश्ती सेना तीन टुकड़ियों में बँटी थी। एक टुकड़ी उत्तर को ओप्रा को जाने वाली सड़क से शुआल के क्षेत्र में गई। {13:18} दूसरी टुकड़ी दक्षिण — पूर्व बेथोरोन को जाने वाली सड़क पर गई और तीसरी टुकड़ी पूर्व में सीमा तक जाने वाली सड़क से गई। यह सड़क सबोईम की घाटी में मरुभूमि की ओर खुलती थी। {13:19} इस्राएली लोगों में से कोई भी लोहे की चीजें नहीं बना सकता था। उन दिनों इस्राएल में लोहार नहीं थे। पलिश्ती इस्राएलियों को लोहे की चीज़ें बनाना नहीं सिखाते थे क्योंकि पलिश्ती डरते कि इस्राएली कहीं लोहे की तलवारें और भाले न बनाने लग जायें। {13:20} केवल पलिश्ती ही लोहे के औजारों पर धार चढ़ा सकते थे। अत: यदि इस्राएली अपने हल की फली, कुदाली, कुल्हाड़ी या दँराती पर धार चढ़ाना चाहते तो उन्हें पलिश्तियों के पास जाना पड़ता था। {13:21} पलिश्ती लोहार एक तिहाई औंस चाँदी हल की फली और कुदाली पर धार चढ़ाने के लिये लेते थे और एक छटाई औंस चाँदी फावड़ी, कुल्हाड़ी और बैलों को चलाने की साँटी के लोहे के सिरे पर धार चढ़ाने के लिये लेते थे। {13:22} इसलिए युद्ध के दिन शाऊल के इस्राएली सैनिकों में से किसी के पास लोहे की तलवार या भाले नहीं थे। केवल शाऊल और उसके पुत्र योनातान के पास लोहे के शस्त्र थे। {13:23} पलिश्ती सैनिकों की एक टुकड़ी मिकमाश के दर्रे की रक्षा कर रही थी। {i14:1} योनातान पलिश्तियों पर आक्रमण करता है {14:1} उस दिन, शाऊल का पुत्र योनातान उस युवक से बात कर रहा था, जो उसके शस्त्रों को ले कर चलता था। योनातान ने कहा, “हम लोग घाटी की दूसरी ओर पलिश्तियों के डेरे पर चलें।” किन्तु योनातान ने अपने पिता को नहीं बताया। {14:2} शाऊल एक अनार के पेड़ के नीचे पहाड़ी के सिरे पर मिग्रोन में बैठा था। यह उस स्थान पर खलिहान के निकट था। शाऊल के साथ उस समय लगभग छः सौ योद्धा थे। एक व्यक्ति का नाम अहिय्याह था। {14:3} एली शीलो में यहोवा का याजक रह चुका था। अब वह अहिय्याह याजक था। अहिय्याह अब एपोद पहनता था। अहिय्याह ईकाबोद के भाई अहीतूब का पुत्र था। ईकाबोद पीनहास का पूत्र था। पीनहास एली का पुत्र था। {14:4} दर्रे के दोनों ओर एक विशाल चट्टान थी। योनातान ने पलिश्ती डेरे में उस दर्रे से जाने की योजना बनाई। विशाल चट्टान के एक तरफ बोसेस था और उस विशाल चट्टान के दूसरी तरफ सेने था। {14:5} एक विशाल चट्टान उत्तर की मिकमाश को देखती सी खड़ी थी। दूसरी विशाल चट्टान दक्षिण की तरफ गिबा की ओर देखती सी खड़ी थी। {14:6} योनातान ने अपने उस युवक सहायक से कहा जो उस के शस्त्र को ले चलता था, “आओ, हम उन विदेशियों के डेरे में चले। संभव है यहोवा हम लोगों का उपयोग इन लोगों को पराजित करने में करे। यहोवा को कोई नहीं रोक सकता इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता है कि हमारे पास बहुत से सैनिक हैं या थोड़े से सैनिक।” {14:7} योनातान के शस्त्र वाहक युवक ने उससे कहा, “जैसा तुम सर्वोत्तम समझो करो। मैं सब तरह से तुम्हारे साथ हूँ।” {14:8} योनातान ने कहा, “हम चलें! हम लोग घाटी को पार करेंगे और उन पलिश्ती रक्षकों तक जायेंगे। हम लोग उन्हें अपने को देखने देंगे। {14:9} यदि वे हमसे कहते हैं ‘तुम वहीं रुको जब तक हम तुम्हारे पास आते हैं,’ तो हम लोग वहीं ठहरेंगे, जहाँ हम होंगे। हम उनके पास नहीं जायेंगे। {14:10} किन्तु यदि पलिश्ती लोग यह कहते हैं, ‘हमारे पास आओ’ तो हम उनके पास तक चढ़ जायेंगे। क्यों? क्योंकि यह परमेश्वर की ओर से एक संकेत होगा। उसका अर्थ यह होगा कि यहोवा हम लोगों को उन्हें हराने देगा।” {14:11} इसलिये योनातान और उसके सहायक ने अपने को पलिश्ती द्वारा देखने दिया। पलिश्ती रक्षकों ने कहा, “देखो! हिब्रू उन गकों से निकल कर आ रहे हैं जिनमें वे छिपे थे।” {14:12} किले के पलिश्ती योनातान और उसके सहायक के लिये चिल्लाये “हमारे पास आओ। हम तुम्हें अभी पाठ पढ़ाते हैं!” योनातान ने अपने सहायक से कहा, “पहाड़ी के ऊपर तक मेरा अनुसरण करो। यहोवा ने इस्राएल के लिये पलिश्तियों को दे दिया है!” {14:13} इसलिये योनातान ने अपने हाथ और पैरों का उपयोग पहाड़ी पर चढ़ने के लिये किया। उसका सहायक ठीक उसके पीछे चढ़ा। योनातान और उसके सहायक ने उन पलिश्तियों को पराजित किया। पहले आक्रमण में उन्होंने लगभग आधे एकड़ {14:14} क्षेत्र में बीस पलिश्तियों को मारा। योनातान उन लोगों से लड़ा जो सामने से आक्रमण कर रहे थे और योनातान का सहायक उसके पीछे से आया और उन व्यक्तियों को मारता चला गया जो अभी केवल घायल थे। {14:15} सभी पलिश्ती सैनिक, रणक्षेत्र के सैनिक, डेरे के सैनिक और किले के सैनिक आतंकित हो गये। यहाँ तक की सर्वाधिक वीर योद्धा भी आतंकित हो गये। धरती हिलने लगी और पलिश्ती सैनिक भयानक ढंग से डर गये! {14:16} शाऊल के रक्षकों ने बिन्यामीन देश में गिबा के पलिश्ती सैनिकों को विभिन्न दिशाओं में भागते देखा। {14:17} शाऊल ने अपने साथ की सेना से कहा, “सैनिकों को गिनो। मैं यह जानना चाहता हूँ कि डेरे को किसने छोड़ा।” उन्होंने सैनिकों को गिना। योनातान और उसका सहायक चले गये थे। {14:18} शाऊल ने अहिय्याह से कहा, “परमेश्वर का पवित्र सन्दूक लाओ!” (उस समय परमेश्वर का पवित्र सन्दूक इस्राएलियों के साथ था।) {14:19} शाऊल याजक अहिय्याह से बातें कर रहा था। शाऊल परमेश्वर के मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहा था। किन्तु पलिश्ती डेरे में शोर और अव्यवस्था लगातार बढ़ती जा ही थी। शाऊल धैर्य खो रहा था। अन्त में शाऊल ने याजक अहिय्याह से कहा, “काफी हो चुका! अपने हाथ को नीचे करो और प्रार्थना करना बन्द करो!” {14:20} शाऊल ने अपनी सेना इकट्ठी की और युद्ध में चला गया। पलिश्ती सैनिक सचमुच घबरा रहे थे! वे अपनी तलवारों से आपस में ही एक दूसरे से युद्ध कर रहे थे। {14:21} वहाँ हिब्रू भी थे जो इसके पूर्व पलिश्तियों की सेवा में थे और जो पलिश्ती डेरे में रुके थे। किन्तु अब उन हिब्रुओं ने शाऊल और योनातान के साथ के इस्राएलियों का साथ दिया। {14:22} उन इस्राएलियों ने जो एप्रैम के पहाड़ी क्षेत्र में छिपे थे, पलिश्ती सैनिकों के भागने की बात सुनी। सो इन इस्राएलियों ने भी युद्ध में साथ दिया और पलिश्तियों का पीछा करना आरम्भ किया। {14:23} इस प्रकार यहोवा ने उस दिन इस्राएलियों की रक्षा की। युद्ध बेतावेन के परे पहुँच गया। सारी सेना शाऊल के साथ थी, उसके पास लगभग दस हजार पुरुष थे। एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश के हर नगर में युद्ध का विस्तार हो गया था। {i14:24} शाऊल दूसरी गलती करता है {14:24} किन्तु शाऊल ने उस दिन एक बड़ी गलती की। इस्राएली भूखे और थके थे। यह इसलिए हुआ कि शाऊल ने लोगों को यह प्रतिज्ञा करने को विवश कियाः शाऊल ने कहा, “यदि कोई व्यक्ति सन्ध्या होने से पहले भोजन करता है अथवा मेरे द्वारा शत्रु को पराजित करने के पहले भोजन करता है तो वह व्यक्ति दण्डित किया जाएगा!” इसलिए किसी भी इस्राएली सैनिक ने भोजन नहीं किया। {14:25} युद्ध के कारण लोग जंगलों में चले गए। उन्होंने वहाँ भूमि पर पड़ा एक शहद का छत्ता देखा। इस्राएली उस स्थान पर आए {14:26} जहाँ शहद का छत्ता था। लोग भूखे थे, किन्तु उन्होंने तनिक भी शहद नहीं पिया। वे उस प्रतिज्ञा को तोड़ने से भयभीत थे। {14:27} किन्तु योनातान उस प्रतिज्ञा के बारे में नहीं जानता था। योनातान ने यह नहीं सुना था कि उसके पिता ने उस प्रतिज्ञा को करने के लिये लोगों को विवश किया है। योनातान के हाथ में एक छड़ी थी। उसने शहद के छत्ते में उसके सिरे को धंसाया। उसने कुछ शहद निकाला और उसे चाटा और उसने अपने को स्वस्थ अनुभव किया। {14:28} सैनिकों में से एक ने योनातान से कहा, “तुम्हारे पिता ने एक विशेष प्रतिज्ञा करने के लिये सैनिकों को विवश किया है। तुम्हारे पिता ने कहा है कि जो कोई आज खायेगा, दण्डित होगा। यही कारण है कि पुरुषों ने कुछ भी खाया नहीं। यही कारण है कि पुरुष कमजोर हैं।” {14:29} योनातान ने कहा, “मेरे पिता ने लोगों के लिये परेशानी उत्पन्न की है! देखो इस जरा से शहद को चाटने से मैं कितना स्वस्थ अनुभव कर रहा हूँ! {14:30} बहुत अच्छा होता कि लोग वह भोजन करते जो उन्होंने आज शत्रुओं से लिया था। हम बहुत अधिक पलिश्तियों को मार सकते थे!” {14:31} उस दिन इस्राएलियों ने पलिश्तियों को हराया। वे उनसे मिकमाश से अय्यालोन तक के पूरे मार्ग पर लड़े। क्योंकि लोग बहुत भूके और थके हुए थे। {14:32} उन्होंने पलिश्तियों से भेड़ें, गायें और बछड़े लिये थे। उस समय इस्राएल के लोग इतने भूखे थे कि उन्होंने उन जानवरों को जमीन पर ही मारा और उन्हें खाया। जानवरों में तब तक खून था! {14:33} एक व्यक्ति ने शाऊल से कहा, “देखो! लोग यहोवा के विरुद्ध पाप कर रहे हैं। वे ऐसा माँस खा रहे हैं जिसमें खून है!” शाऊल ने कहा, “तुम लोगों ने पाप किया है! यहाँ एक विशान पत्थर लुढ़काकर लाओ।” {14:34} तब शाऊल ने कहा, “लोगों के पास जाओ और कहो कि हर एक व्यक्ति अपना बैल और भेड़ें मेरे पास यहाँ लाये। तब लोगों को अपने बैल और भेड़ें यहाँ मारनी चाहिये। यहोवा के विरुद्ध पाप मत करो। वह माँस न खाओ जिसमें खून हो।” उस रात हर एक व्यक्ति अपने जानवरों को लाया और उन्हें वहाँ मारा। {14:35} तब शाऊल ने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई। शाऊल ने यहोवा के लिये स्वयं वह वेदी बनानी आरम्भ की! {14:36} शाऊल ने कहा, “हम लोग आज रात को पलिश्तियों का पीछा करें। हम लोग हर वस्तु ले लेंगे। हम उन सभी को मार डालेंगे।” सेना ने उत्तर दिया, “वैसे ही करो जैसे तुम ठीक समझते हो।” किन्तु याजक ने कहा, “हमें परमेश्वर से पूछने दो।” {14:37} अत: शाऊल ने परमेश्वर से पूछा, “क्या मुझे पलिश्तियों का पीछा करने जाना चाहिए? क्या तू हमें पलिश्तियों को हराने देगा?” किन्तु परमेश्वर ने शाऊल को उस दिन उत्तर नहीं दिया। {14:38} इसलिए शाऊल ने कहा, “मेरे पास सभी प्रमुखों को लाओ। हम लोग मालूम करें कि आज किसने पाप किया है। {14:39} मैं इस्राएल की रक्षा करने वाले यहोवा की शपथ खा कर यह प्रतिज्ञा करता हूँ। यदि मेरे अपने पुत्र योनातान ने भी पाप किया हो तो वह अवश्य मरेगा।” सेना में किसी ने भी कुछ नहीं कहा। {14:40} तब शाऊल ने सभी इस्राएलियों से कहा, “तुम लोग इस ओर खड़े हो। मैं और मेरा पुत्र योनातान दूसरी ओर खड़े होगें।” सैनिकों ने उत्तर दिया, “महाराज! आप जैसा चाहें।” {14:41} तब शाऊल ने प्रार्थना की, “इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, मैं तेरा सेवक हूँ आज तू मुझे उत्तर क्यों नहीं दे रहा है? यदि मैंने या मेरे पुत्र योनातान ने पाप किया है तो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा तू उरीम दे और यदि तेरे लोग इस्राएलियों ने पाप किया है तो तुम्मिम दे।” शाऊल और योनातान धर लिए गए और लोग छूट गए। {14:42} शाऊल ने कहा, “उन्हें फिर से फेंको कि कौन पाप करने वाला है मैं या मेरा पुत्र योनातान।” योनातान चुन लिया गया। {14:43} शाऊल ने योनातान से कहा, “मुझे बताओ कि तुमने क्या किया है?” योनातान ने शाऊल से कहा, “मैंने अपनी छड़ी के सिरे से केवल थोड़ा सा शहद चाटा था। क्या मुझे वह करने के कारण मरना चाहिये?” {14:44} शाऊल ने कहा, “यदि मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरा नहीं करता हूँ तो परमेश्वर मेरे लिये बहुत बुरा करे। योनातान को मरना चाहिये!” {14:45} किन्तु सैनिकों ने शाऊल से कहा, “योनातान ने आज इस्राएल को बड़ी विजय तक पहुँचाया। क्या योनातान को मरना ही चाहिए? कभी नहीं! हम लोग परमेश्वर की शपथ खाकर वचन देते हैं कि योनातान का एक बाल भी बाँका नहीं होगा। परमेश्वर ने आज पलिश्तियों के विरुद्ध लड़ने में योनातान की सहायता की है!” इस प्रकार लोगों ने योनातान को बचाया। उसे मृत्यदणड नहीं दिया गया। {14:46} शाऊल ने पलिश्तियों का पीछा नहीं किया। पलिश्ती अपने स्थान को लौट गये। {i14:47} शाऊल का इस्राएल के शत्रुओं से युद्ध {14:47} शाऊल ने इस्राएल पर पूरा अधिकार जमा लिया और दिखा दिया कि वह राजा है। शाऊल इस्राएल के चारों ओर रहने वाले शत्रुओं से लड़ा। शाऊल, अम्मोनी, मोआबी, सोबा के राजा एदोम और पलिश्तियों से लड़ा। जहाँ कहीं शाऊल गया, उसने इस्राएल के शत्रुओं को पराजित किया। {14:48} शाऊल बहुत वीर था। उसने अमालेकियों को हराया। शाऊल ने इस्राएल को उसके उन शत्रुओं से बचाया जो इस्राएल के लोगों से उनकी सम्पत्ति छीन लेना चाहते थे। {14:49} शाऊल के पुत्र थे योनातान, यिशवी और मलकीश। शाऊल की बड़ी पुत्री का नाम मेरब था। शाऊल की छोटी पुत्री का नाम मीकल था। {14:50} शाऊल की पत्नी का नाम अहीनोअम था। अहीनोअम अहीमास की पुत्री थी। शाऊल की सेना के सेनापति का नाम अब्नेर था, जो नेर का पुत्र था। नेर शाऊल का चाचा था। {14:51} शाऊल का पिता कीश और अब्नेर का पिता नेर, अबीएल के पुत्र थे। {14:52} शाऊल अपने जीवन भर वीर रहा और पलिश्तियों के विरुद्ध दृढ़ता से लड़ा। शाऊल जब भी कभी किसी व्यक्ति को ऐसा वीर देखता जो शक्तिशाली होता तो वह उसे ले लेता और उसे उन सैनिकों की टुकड़ी में रखता जो उसके समीप रहते और उसकी रक्षा करते थे। {i15:1} शाऊल का अमालेकियों को नष्ट करना {15:1} शमूएल ने शाऊल से कहा, “यहोवा ने मुझे अपने इस्राएली लोगों पर राजा के रूप में तुम्हारा अभिषेक करने के लिये भेजा था। अब यहोवा का सन्देश सुनो। {15:2} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है: ‘जब इस्राएली मिस्र से बाहर आये तब अमालेकियों ने उन्हें कनान पहुँचाने से रोकने का प्रयत्न किया। मैंने देखा कि अमालेकियों ने उन्हें क्या किया। {15:3} अब जाओ और अमालेकियों से युद्ध करो। तुम्हें अमालेकियों और उनकी सभी चीज़ों को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिये। कुछ भी जीवित न रहने दो, तुम्हें सभी पुरुषों और स्त्रियों को मार डालना चाहिये। तुम्हें सभी बच्चों और शिशुओं को मार डालना चाहिए। तुम्हें उनकी सभी गायों, भेड़ों, ऊँटों और गधों को मार डालना चाहिये।’” {15:4} शाऊल ने तलाईम में सेना एकत्रित की। उसमें दो लाख पैदल सैनिक और दस हजार अन्य सैन्य पुरुष थे। इनमें यहूदा के लोग भी सम्मिलित थे। {15:5} तब शाऊल अमालेक नगर को गया और वहाँ उसने घाटी में उनकी प्रतीक्षा की। {15:6} शाऊल ने केनियों से कहा, “चले जाओ, अमालेकियों को छोड़ दो। तब मैं तुम लोगों को अमालेकियों के साथ नष्ट नहीं करूँगा। तुम लोगों ने इस्राएलियों के प्रति दया दिखाई थी जब वे मिस्र से आये थे।” इसलिए केनी लोगों ने अमालेकियों को छोड़ दिया। {15:7} शाऊल ने अमालेकियों को हराया। उसने उनसे हवीला से मिस्र की सीमा शूर तक निरन्तर युद्ध किया। {15:8} शाऊल ने अगाग को जीवित पकड़ लिया। अगाग अमालेकियों का राजा था। अगाग की सेना के सभी व्यक्तियों को शाऊल ने मार डाला। {15:9} किन्तु शाऊल और इस्राएल के सैनिकों ने अगाग को जीवित रहने दिया। उन्होंने सर्वोत्तम भेड़ों, मोटी तगड़ी गायों और मेमनों को भी रख लिया। उन्होंने रखने योग्य सभी चीज़ों को रख लिया और उन्होंने उन सभी चीज़ों को नष्ट कर दिया जो किसी काम की न थीं। {i15:10} शमूएल का शाऊल को उसके पाप के बारे में बताना {15:10} शमूएल को यहोवा का सन्देश आया। {15:11} यहोवा ने कहा, “शाऊल ने मेरा अनुसरण करना छोड़ दिया है। इसलिए मुझे इसका अफसोस है कि मैंने उसे राजा बनाया। वह उन कामों को नहीं कर रहा है जिन्हें करने का आदेश मैं उसे देता हूँ।” शमूएल भड़क उठा और फिर उसने रात भर यहोवा की प्रार्थना की। {15:12} शमूएल अगले सवेरे उठा और शाऊल से मिलने गया। किन्तु लोगों ने बताया, “शाऊल यहूदा में कर्मेल नामक नगर को गया है। शाऊल वहाँ अपने सम्मान में एक पत्थर की यादगार बनाने गया था। तब शाऊल ने कई स्थानों की यात्रा की और अन्त में गिलगाल को चला गया” इसलिये शमूएल वहाँ गया जहाँ शाऊल था। शाऊल ने अमालेकियों से ली गई चीज़ों का पहला भाग ही भेंट में चढ़ाया था। शाऊल उन्हें होम बलि के रूप में यहोवा को भेंट चढ़ा रहा था। {15:13} शमूएल शाऊल के पास पुहँचा। शाऊल ने कहा, स्वागत, “यहोवा आपको आशीर्वाद दे! मैंने यहोवा के आदेशों का पालन किया है।” {15:14} किन्तु शमूएल ने कहा, “तो मैं ये आवाजें क्या सुन रहा हूँ? मैं भेड़ और पशुओं की आवाज क्यों सुन रहा हूँ?” {15:15} शाऊल ने उत्तर दिया, “सैनिकों ने उन्हें अमालेकियों से लिया। सैनिकों ने सर्वोत्तम भेड़ों और पशुओं को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा को बलि के रूप में जलाने के लिए बचा लिया है। किन्तु हम लोगों ने अन्य सभी चीज़ों को नष्ट कर दिया है।” {15:16} शमूएल ने शाऊल से कहा, “रुको! मुझे तुमसे वही कहने दो जिसे पिछली रात यहोवा ने मुझसे कहा है।” शाऊल ने उत्तर दिया, “मुझे बताओ।” {15:17} शमूएल ने कहा, “बीते समय में, तुमने यही सोचा था की तुम महत्वपूर्ण नहीं हो। किन्तु तब भी तुम इस्राएल के परिवार समूहों के प्रमुख बन गए। यहोवा ने तुम्हें इस्राएल का राजा चुना। {15:18} यहोवा ने तुम्हें एक विशेष सेवाकार्य के लिये भेजा। यहोवा ने कहा, ‘जाओ और उन सभी बुरे अमालेकियों को नष्ट करो! उनसे तब तक लड़ते रहो जब तक वे नष्ट न हो जायें!’ {15:19} किन्तु तुमने यहोवा की नहीं सुनी। तुम उन चीज़ों को रखना चाहते थे। इसलिये तुमने वह किया जिसे यहोवा ने बुरा कहा!” {15:20} शाऊल ने कहा, “किन्तु मैंने तो यहोवा की आज्ञा का पालन किया। मैं वहाँ गया जहाँ यहोवा ने मुझे भेजा। मैंने सभी अमालेकियों को नष्ट किया। मैं केवल उनके राजा अगाग को वापस लाया। {15:21} सैनिकों ने सर्वोतम भेड़ें और पशु गिलगाल में तुम्हारे परमेश्वर यहोवा को बलि देने के लिये चुने।” {15:22} किन्तु शमूएल ने उत्तर दिया, “यहोवा को इन दो में से कौन अधिक प्रसन्न करता है: होमबलियाँ और बलियाँ या यहोवा की आज्ञा का पालन करना? यह अधिक अच्छा है कि परमेश्वर की आज्ञा का पालन किया जाये इसकी अपेक्षा कि उसे बलि भेंट की जाये। यह अधिक अच्छा है कि परमेश्वर की बातें सुनी जायें इसकी अपेक्षा कि मेढ़ों से चर्बी — भेंट की जाये। {15:23} आज्ञा के पालन से इनकार करना जादूगरी करने के पाप जैसा है। हठी होना और मनमानी करना मूर्तियों की पूजा करने जैसा पाप है। तुमने यहोवा की आज्ञा मानने से इन्कार किया। इसी करण यहोवा अब तुम्हें राजा के रूप में स्वीकार करने से इन्कार करता है।” {15:24} तब शाऊल ने शमूएल से कहा, “मैंने पाप किया है। मैंने यहोवा के आदेशों को नहीं माना है और मैंने वह नहीं किया है जो तुमने करने को कहा। मैं लोगों से डरता था इसलिए मैंने वह किया जो उन्होंने कहा। {15:25} अब मैं प्रार्थना करता हूँ कि मेरे पाप को क्षमा करो। मेरे साथ लौटो जिससे मैं यहोवा की उपासना कर सकूँ।” {15:26} किन्तु शमूएल ने शाऊल से कहा, “मैं तुम्हारे साथ नहीं लौटूँगा। तुमने यहोवा के आदेश को नकारा है और अब यहोवा तुम्हें इस्राएल के राजा के रूप में नकार रहा है।” {15:27} जब शमूएल उसे छोड़ने के लिये मुड़ा, शाऊल ने शमूएल के लबादे को पकड़ लिया। लबादा फट गया। {15:28} शमूएल ने शाऊल से कहा, “तुमने मेरे लबादे को फाड़ दिया। इसी प्रकार यहोवा ने आज इस्राएल के राज्य को तुमसे फाड़ दिया है। यहोवा ने राज्य तुम्हारे मित्रों में से एक को दे दिया है। वह व्यक्ति तुमसे अच्छा है। {15:29} यहोवा इस्राएल का परमेश्वर है। यहोवा शाश्वत है। योहवा न तो झूठ बोलता है, न ही अपना मन बदलता है। यहोवा मनुष्य की तरह नहीं है जो अपने इरादे बदलते हैं।” {15:30} शाऊल ने उत्तर दिया, “ठीक है, मैंने पाप किया! किन्तु कृपया मेरे साथ लौटो। इस्राएल के लोगों और प्रमुखों के सामने मुझे कुछ सम्मान दो। मेरे साथ लौटो जिससे मैं तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की उपासना कर सकूँ।” {15:31} शमूएल शाऊल के साथ लौट गया और शाऊल ने यहोवा की उपासना की। {15:32} शमूएल ने कहा, “अमालेकियों के राजा अगाग, को मेरे पास लाओ।” अगाग शमूएल के सामने आया। अगाग जंजीरों में बंधा था। अगाग ने सोचा, “निश्चय ही यह मुझे मारेगा नहीं।” {15:33} किन्तु शमूएल ने अगाग से कहा, “तुम्हारी तलवारों ने बच्चों को उनकी माताओं से छीना। अतः अब तुम्हारी माँ का कोई बच्चा नहीं रहेगा।” और शमूएल ने गिलगाल में यहोवा के सामने अगाग के टुकड़े टुकड़े कर डाले। {15:34} तब शमूएल वहाँ से चला और रामा पहुँचा और शाऊल अपने घर गिबा को गया। {15:35} उसके बाद शमूएल ने अपने पूरे जीवन में शाऊल को नहीं देखा। शमूएल शाऊल के लिये बहुत दुःखी रहा और यहोवा को बड़ा दुःख था कि उसने शाऊल को इस्राएल का राजा बनाया। {i16:1} शमूएल का बेतलेहेम को जाना {16:1} यहोवा ने शमूएल से कहा, “तुम शाऊल के लिये कब तक दुःखी रहोगे? मैंने शाऊल को इस्राएल का राजा होना अस्वीकार कर दिया है! अपनी सींग तेल से भरो और चल पड़ो। मैं तुम्हें यिशै नाम के एक व्यक्ति के पास भेज रहा हूँ। यिशै बेतलेहेम में रहता है। मैंने उसके पुत्रों में से एक को नया राजा चुना हैं।” {16:2} किन्तु शमूएल ने कहा, “यदि मैं जाऊँ, तो शाऊल इस समाचार को सुनेगा। तब वह मुझे मार डालने का प्रयत्न करेगा।” यहोवा ने कहा, “बेतलेहेम जाओ। एक बछड़ा अपने साथ ले जाओ। यह कहो, ‘मैं यहोवा को बलि चढ़ाने आया हूँ।’ {16:3} यिशै को बलि के समय आमंत्रित करो। तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम्हें क्या करना है। तुम्हें उस व्यक्ति का अभिषेक करना चाहिये जिसे मैं दिखाऊँ।” {16:4} शमूएल ने वही किया जो यहोवा ने उसे करने को कहा था। शमूएल बेतलेहेम गया। बेतलेहेम के बुजुर्ग भय से काँप उठे। वे शमूएल से मिले और उन्होंने उससे पूछा, “क्या आप शान्तिपूर्वक आए हैं?” {16:5} शमूएल ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं शान्तिपूर्वक आया हूँ। मैं यहोवा को बलि — भेंट करने आया हूँ। अपने को तैयार करो और मेरे साथ बलि — भेंट में आओ।” शमूएल ने यिशै और उसके पुत्रों को तैयार किया। तब शमूएल ने उन्हें आने और बलि — भेंट में भाग लेने के लिये आमन्त्रित किया। {16:6} जब यिशै और उसके पुत्र आए, तो शमूएल ने एलीआब को देखा। शमूएल ने सोचा, “निश्चय ही यही वह व्यक्ति है जिसे यहोवा ने चुना है।” {16:7} किन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, “एलीआब लम्बा और सुन्दर है किन्तु उसके बारे में मत सोचो। एलीआब लम्बा है किन्तु उसके बारे में मत सोचो। परमेश्वर उस चीज़ को नहीं देखता जिसे साधारण व्यक्ति देखते हैं। लोग व्यक्ति के बाहरी रूप को देखते हैं, किन्तु यहोवा व्यक्ति के हृदय को देखता है। एलीआब उचित व्यक्ति नहीं है।” {16:8} तब यिशै ने अपने दूसरे पुत्र अबीनादाब को बुलाया। अबीनादाब शमूएल के पास से गुजरा। किन्तु शमूएल ने कहा, “नहीं, यह भी वह व्यक्ति नहीं है कि जिसे यहोवा ने चुना है।” {16:9} तब यिशै ने शम्मा को शमूएल के पास से गुजरने को कहा। किन्तु शमूएल ने कहा, “नहीं, यहोवा ने इस व्यक्ति को भी नहीं चुना है।” {16:10} यिशै ने अपने सात पुत्रों को शमूएल को दिखाया। किन्तु शमूएल ने यिशै को कहा, “यहोवा ने इन व्यक्तियों में से किसी को भी नहीं चुना है।” {16:11} तब शमूएल ने यिशै से पूछा, “क्या तुम्हारे सभी पुत्र ये ही हैं?” यिशै ने उत्तर दिया, “नहीं, मेरा सबसे छोटा एक और पुत्र है, किन्तु वह भेड़ों की रखवाली कर रहा है।” शमूएल ने कहा, “उसे बुलाओ। उसे यहाँ लाओ। हम लोग तब तक खाने नहीं बैठेंगे जब तक वह आ नहीं जाता।” {16:12} यिशै ने किसी को अपने सबसे छोटे पुत्र को लाने के लिये भेजा। यह पुत्र सुन्दर और सुनहरे बालों वाला युवक था। यह बहुत सुन्दर था। यहोवा ने समूएल से कहा, “उठो, इसका अभिषेक करो। यही है वह।” {16:13} शमूएल ने तेल से भरा सींग उठाया और उस विशेष तेल को यिशै के सबसे छोटे पुत्र के सिर पर उसके भाईयों के सामने डाल दिया। उस दिन से यहोवा की आत्मा दाऊद पर तीव्रता से आती रही। तब शमूएल रामा को लौट गया। {i16:14} दुष्टात्मा का शाऊल को परेशान करना {16:14} यहोवा की आत्मा ने शाऊल को त्याग दिया। तब यहोवा ने शाऊल पर एक दुष्टात्मा भेजी। उसने उसे बहुत परेशान किया। {16:15} सेवकों ने शाऊल से कहा, “परमेश्वर के द्वारा भेजी एक दुष्टात्मा तुमको परेशान कर रही है। {16:16} हम लोगों को आदेश दो कि हम लोग किसी की खोज करें जो वीणा बजायेगा। यदि दुष्टात्मा यहोवा के यहाँ से तुम्हारे ऊपर आई है तो जब वह व्यक्ति वीणा बजायेगा तब वह दुष्टआत्मा तुमको अकेला छोड़ देगी और तुम स्वस्थ अनुभव करोगे।” {16:17} अत: शाऊल ने अपने सेवकों से कहा, “ऐसे व्यक्ति की खोज करो जो वीणा अच्छी बजाता है और उसे मेरे पास लाओ।” {16:18} सेवकों में से एक ने कहा, “बेतलेहेम में रहने वाला यिशै नाम का एक व्यक्ति है। मैंने यिशै के पुत्र को देखा है। वह जानता है कि वीणा कैसे बजाई जाती है। वह एक वीर व्यक्ति भी है और अच्छी प्रकार लड़ता है। वह जागरूक है। वह सुन्दार है और यहोवा उसके साथ है।” {16:19} इसलिये शाऊल ने यीशै के पास दूत भेजा। उन्होंने यिशै से वह कहा जो शाऊल ने कहा था। “तुम्हारा पुत्र दाऊद नाम का है। वह तुम्हारी भेड़ों की रखवाली करता है। उसे मेरे पास भेजो।” {16:20} फिर यिशै ने शाऊल को भेंट करने के लिये कुछ चीजें तैयार कीं। यिशै ने एक गधा, कुछ रोटियाँ और एक मशक दाखमधु और एक बकरी का बच्चा लिया। यिशै ने वे चीज़ें दाऊद को दीं, और उसे शाऊल के पास भेज दिया। {16:21} इस प्रकार दाऊद शाऊल के पास गया और उसके सामने खड़ा हुआ। शाऊल ने दाऊद से बहुत स्नेह किया। फिर दाऊद ने शाऊल को अपना शस्त्रवाहक बना लिया। {16:22} शाऊल ने यिशै के पास सूचना भेजी, “दाऊद को मेरे पास रहने और मेरी सेवा करने दो। वह मुझे बहुत पसन्द करता है।” {16:23} जब कभी परमेश्वर की ओर से आत्मा शाऊल पर आती, तो दाऊद अपनी वीणा उठाता और उसे बजाने लगता। दुष्ट आत्मा शाऊल को छोड़ देती और वह स्वस्थ अनुभव करने लगता। {i17:1} गोलियत का इस्राएल को चुनौती देना {17:1} पलिश्तियों ने अपनी सेना युद्ध के लिये इकट्ठी की। वे यहूदा स्थित सोको में युद्ध के लिये एकत्र हुए। उनका डेरा सोको और अजेका के बीच एपेसदम्मीम नामक नगर में था। {17:2} शाऊल और इस्राएली सैनिक भी वहाँ एक साथ एकत्रित हुए। उनका डेरा एला की घाटी में था। शाऊल के सैनिक मोर्चा लगाये पलिश्तियों से युद्ध करने के लिये तैयार थे। {17:3} पलिश्ती एक पहाड़ी पर थे और इस्राएली दूसरी पर । घाटी इन दोनों पहाड़ियों के बीच में थी। {17:4} पलिश्तियों में एक गोलियत नाम का अजेय योद्धा था। गोलियत गत का था। गोलियत लगभग नौ फीट ऊँचा था। गोलियत पलिश्ती डेरे से बाहर आया। {17:5} उसके सिर पर काँसे का टोप था। उसने पट्टीदार कवच का कोट पहन रखा था। यह कवच काँसे का बना था और इसका तौल लगभग एक सौ पच्चीस पौंड था। {17:6} गोलियत ने अपने पैरों में काँसे के रक्षा कवच पहने थे। उसके पास काँसे का भाला था जो उसकी पीठ पर बंधा था। {17:7} गोलियत के भाले का फल जुलाहे की छड़ की तरह था। भाले की फल की तोल पन्द्रह पौंड थी। गोलियत का सहायक गोलियत की ढाल को लिये हुए उसके आगे आगे चल रहा था। {17:8} गोलियत बाहर निकला और उसने इस्राएली सैनिकों को जोर से पुकार कर कहा, “तुम्हारे सभी सैनिक युद्ध के लिये मोर्चा क्यों लगाये हुए हैं? तुम शाऊल के सेवक हो। मैं एक पलिश्ती हूँ। इसलिये किसी एक व्यक्ति को चुनो और उसे मुझसे लड़ने को भेजो। {17:9} यदि वह व्यक्ति मुझे मार डालता है तो हम पलिश्ती तुम्हारे दास हो जाएंगे। किन्तु यदि मैं उसे जीत लूँ और तुम्हारे व्यक्ति को मार डालूँ तो तुम हमारे दास हो जाना। तब तुम हमारी सेवा करोगे!” {17:10} पलिश्ती ने यह भी कहा, “आज मैं खड़ा हूँ और इस्राएल की सेना का मजाक उड़ा रहा हूँ! मुझे अपने में से एक के साथ लड़ने दो!” {17:11} शाऊल और इस्राएली सैनिकों ने जो गोलियत कहा था, उसे सुना और वे बहुत भयभीत हो उठे। {i17:12} दाऊद का युद्ध क्षेत्र को जाना {17:12} दाऊद यिशै का पुत्र था। यिशै एप्राती परिवार के यहूदा बेतलेहेम से था। यिशै के आठ पुत्र थे। शाऊल के समय में यिशै एक बूढ़ा आदमी था। {17:13} यिशै के तीन बड़े पुत्र शाऊल के साथ युद्ध में गये थे। प्रथम पुत्र एलीआब था। दूसरा पुत्र अबीनादाब था और तीसरा पुत्र शम्मा था। {17:14} दाऊद सबसे छोटा पुत्र था। तीनों पुत्र शाऊल की सेना में थे। {17:15} किन्तु दाऊद कभी — कभी बेतलेहेम में अपने पिता की भेड़ों की रखवाली के लिये शाऊल के पास से चला जाता था। {17:16} पलिश्ती गोलियत हर एक प्रात: एवं सन्ध्या को बाहर आता था और इस्राएल की सेना के सामने खड़ा हो जाता था। गोलियत ने चालीस दिन तक इस प्रकार इस्राएल का मजाक उड़ाया। {17:17} एक दिन यिशै ने अपने पुत्र दाऊद से कहा, “पके अन्न की टोकरी और इन दस रोटियों को डेरे में अपने भाईयों के पास ले जाओ। {17:18} पनीर की इन दस पिंडियों को भी एक हजार सैनिकों वाली अपने भाई की टुकड़ी के संचालक अधिकारी के लिये ले जाओ। देखो कि तुम्हारे भाई कैसे हैं। कुछ ऐसा लाओ जिससे मुझे पता चले कि तुम्हारे भाई ठीक — ठाक हैं। {17:19} तुम्हारे भाई शाऊल के साथ हैं और इस्राएल के सारे सैनिक एला घाटी में हैं। वे पलिश्तियों के विरुद्ध लड़ रहे हैं।” {17:20} सवेरे तड़के ही दाऊद, ने भेड़ों की रखवाली दूसरे गड़रिये को सौंपी। दाऊद ने भोजन लिया और वहाँ के लिये चल पड़ा जहाँ के लिये यिशै ने कहा था। दाऊद अपनी गाड़ी को डेरे में ले गया। उस समय सैनिक लड़ाई में अपने मोर्चे संभालने जा रहे थे जब दाऊद वहाँ पहुँचा। सैनिक अपना युद्ध उद्घोष करने लगे। {17:21} इस्राएली और पलिश्ती अपने पुरुषों को युद्ध में एक — दूसरे से भिड़ने के लिये इकट्ठा कर रहे थे। {17:22} दाऊद ने भोजन और चीजों को उस व्यक्ति के पास छोड़ा जो सामग्री का वितरण करता था। दाऊद दौड़ कर उस स्थान पर पहुँचा जहाँ इस्राएली सैनिक थे। दाऊद ने अपने भाईयों के विषय में पूछा। {17:23} दाऊद ने अपने भाईयों के साथ बात करनी आरम्भ की। उसी समय वह पलिश्ती वीर योद्धा जिसका नाम गोलियत था और जो गत का निवासी था, पलिश्ती सेना से बाहर आया। पहले की तरह गोलियत ने इस्राएल के विरुद्ध वही बातें चिल्लाकर कहीं। {17:24} इस्राएली सैनिकों ने गोलियत को देखा और वे भाग खड़े हुए। वे सभी उससे भयभीत थे। {17:25} इस्राएली व्यक्तियों में से एक ने कहा, “अरे लोगों, तुममें से किसी ने उस देखा है! उसे देखो! वह गोलियत आ रहा है जो बार — बार इस्राएल का मजाक उड़ाता है। जो कोई उस व्यक्ति को मार देगा, धनी हो जायेगा! राजा शाऊल उसे बहुत धन देगा। शाऊल अपनी पुत्री का विवाह भी उस व्यक्ति से कर देगा, जो गोलियत को मारेगा और शाऊल उस व्यक्ति के परिवार को इस्राएल में स्वतन्त्र कर देगा।” {17:26} दाऊद ने समीप खड़े आदमी से पूछा, “उसने क्या कहा? इस पलिश्ती को मारने और इस्राएल के इस अपमान को दूर करने का पुरस्कार क्या है? अन्तत: यह गोलियत है ही क्या? यह बस एक विदेशी मात्र है। गोलियत एक पलिश्ती से अधिक कुछ नहीं। वह क्यों सोचता है कि वह साक्षात् परमेश्वर की सेना के विरुद्ध बोल सकता है?” {17:27} इसलिए इस्राएलियों ने गोलियत को मारने के लिये पुरस्कार के बारे में बताया। {17:28} दाऊद के बड़े भाई एलीआब ने दाऊद को सैनिकों से बातें करते सुना। एलीआब ने दाऊद पर क्रोधित हुआ। एलीआब दाऊद से पूछा, “तुम यहाँ क्यों आये? मरुभूमि में उन थोड़ी सी भेड़ों को किस के पास छोड़कर आये हो? मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ क्यों आये हो! तुम वह करना नहीं चाहते जो तुमसे करने को कहा गया था। तुम केवल यहाँ युद्ध देखने के लिये आना चाहते थे!” {17:29} दाऊद ने कहा, “ऐसा मैंने क्या किया है? मैंने कोई गलती नहीं की! मैं केवल बातें कर रहा था।” {17:30} दाऊद दूसरे लोगों की तरफ मुड़ा और उनसे वे ही प्रश्न किये। उन्होने दाऊद को वे ही पहले जैसे उत्तर दिये। {17:31} कुछ व्यक्तियों ने दाऊद को बातें करते सुना। उन्होंने दाऊद के बारे में शाऊल से कहा। शाऊल ने आदेश दिया कि वे दाऊद को उसके पास लाएं। {17:32} दाऊद ने शाऊल से कहा, “किसी व्यक्ति को उसके कारण हतोत्साहित मत होने दो। मैं आपका सेवक हूँ। मैं इस पलिश्ती से लड़ने जाऊँगा।” {17:33} शाऊल ने उत्तर दिया, “तुम नहीं जा सकते और इस पलिश्ती गोलियत से नहीं लड़ सकते। तुम सैनिक भी नहीं हो! तुम अभी बच्चे हो और गोलियत जब बच्चा था, तभी से युद्धों में लड़ रहा है।” {17:34} किन्तु दाऊद ने शाऊल से कहा, “मैं आपका सेवक हूँ और मैं अपने पिता की भेड़ों की रखवाली भी करता रहा हूँ। यदि कोई शेर या रीछ आता और झुंड से किसी भेड़ को उठा ले जाता। {17:35} तो मैं उसका पीछा करता था। मैं उस जंगली जानवर पर आक्रमण करता था और उसके मुँह से भेड़ को बचा लेता था और उससे युद्ध करता था तथा उसे मार डालता था। {17:36} मैंने एक शेर और एक रीछ को मार डाला है! मैं उस विदेशी गोलियत को वैसे ही मार डालूँगा। गोलियत मरेगा, क्योंकि उसने साक्षात परमेश्वर की सेना का मजाक उड़ाया है। {17:37} यहोवा ने मुझे शेर और रीछ से बचाया है। यहोवा इस पलिश्ती गोलियत से भी मेरी रक्षा करेगा।” शाऊल ने दाऊद से कहा, “जाओ यहोवा तुम्हारे साथ हो।” {17:38} शाऊल ने अपने वस्त्र दाऊद को पहनाये। शाऊल ने एक काँसे का टोप दाऊद के सिर पर रखा और उसके शरीर पर कवच पहनाया। {17:39} दाऊद ने तलवार ली और चारों ओर चलने का प्रयत्न किया। इस प्रकार दाऊद ने शाऊल की वर्दी को पहनने का प्रयत्न किया। किन्तु दाऊद को उन भारी चीज़ों को पहनने का अभ्यास नहीं था। दाऊद ने शाऊल से कहा, “मैं इन चीज़ों के साथ नहीं लड़ सकता। मेरा अभ्यास इनके लिये नहीं है।” इसलिये दाऊद ने उन सब को उतार दिया। {17:40} दाऊद ने अपनी छड़ी अपने हाथों में ली। घाटी से दाऊद ने पाँच चिकने पत्थर चुने। उसने पाँचों पत्थरों को अपने गड़रिये वाले थैले में रखा। उसने अपना गोफन (गुलेल) अपने हाथों में लिया और वह पलिश्ती (गोलियत) से मिलने चल पड़ा। {i17:41} दाऊद, गोलियत को मार डालाता है {17:41} पलिश्ती (गोलियत) धीरे — धीरे दाऊद के समीप और समीपतर होता गया। गोलियत का सहायक उसकी ढाल लेकर उसके आगे चल रहा था। {17:42} गोलियत ने दाऊद को देखा और हँसा। गोलियत ने देखा कि दाऊद सैनिक नहीं है। वह तो केवल सुनहरे बालों वाला युवक है। {17:43} गोलियत ने दाऊद से कहा, “यह छड़ी किस लिये है? क्या तुम कुत्ते की तरह मेरा पीछा करके मुझे भगाने आये हो?” तब गोलियत ने अपने देवताओं का नाम लेकर दाऊद के विरुद्ध अपशब्द कहे। {17:44} गोलियत ने दाऊद से कहा, “यहाँ आओ, मैं तुम्हरे शरीर को पक्षियों और पशूओं को खिला दूँगा!” {17:45} दाऊद ने पलिश्ती (गोलियत) से कहा, “तुम मेरे पास तलवार, बर्छा और भाला चलाने आये हो। किन्तु मैं तुम्हारे पास इस्राएल की सेना के परमेश्वर सर्वशक्तिमान यहोवा के नाम पर आया हूँ। तुमने उसके विरुद्ध बुरी बातें कहीं हैं। {17:46} आज यहोवा तुमको मेरे द्वारा पराजित कराएगा। मैं तुमको मार डालूँगा। आज मैं तुम्हारा सिर काट डालूँगा और तुम्हारे शरीर को पक्षियों और जंगली जानवरों को खिला दूँगा। हम लोग अन्य पलिश्तियों के साथ भी यही करेंगे। तब सारा संसार जानेगा कि इस्राएल में परमेश्वर है! {17:47} यहाँ इकट्ठे सभी लोग जानेंगे कि लोगों की रक्षा के लिये यहोवा को तलवार और भाले की आवश्यकता नहीं। युद्ध यहोवा का है और यहोवा तुम सभी पलिश्तियों को हराने में हमारी सहायता करेगा।” {17:48} पलिश्ती (गोलियत) दाऊद पर आक्रमण करने उसके पास आया। दाऊद गोलियत से भिड़ने के लिये तेजी से दौड़ा {17:49} दाऊद ने एक पत्थर अपने थैले से निकाला। उसने उसे अपने गोफन (गुलेल) पर चढ़ाया और उसे चला दिया। पत्थर गुलेल से उड़ा और उसने गोलियत के माथे पर चोट की। पत्थर उसके सिर में गहरा घुस गया और गोलियत मुँह के बल गिर पड़ा। {17:50} इस प्रकार दाऊद ने एक गोफन और एक पत्थर से पलिश्ती को हरा दिया। उसने पलिश्ती पर चोट की और उसे मार डाला। दाऊद के पास कोई तलवार नहीं थी। {17:51} इसलिए दाऊद दौड़ा और पलिश्ती की बगल में खड़ा हो गया। दाऊद ने गोलियत की तलवार उसकी म्यान से निकाली और उससे गोलियत का सिर काट डाला और इस तरह दाऊद ने पलिश्ती को मार डाला। जब अन्य पलिश्तियों ने देखा कि उनका वीर मारा गया तो वे मुड़े और भाग गए। {17:52} इस्राएल और यहूदा के सैनिकों ने जयघोष किया और पलिश्तियों का पीछा करने लगे। इस्राएलियों ने लगातार गत की सीमा और एक्रोन के द्वार तक पलिश्तियों का पीछा किया। उन्होंने अनेकों पलिश्ती मार गिराए। उनके शव शारैंम सड़क पर गत और एक्रोन तक लगातार बिछ गए। {17:53} पलिश्तियों का पीछा करने के बाद इस्राएली पलिश्तियों के डेरे में लौटे। इस्राएली उस डेरे से बहुत सी चीज़ें ले गये। {17:54} दाऊद पलिश्ती का सिर यरूशलेम ले गया। दाऊद ने पलिश्तियों के शस्त्रों को अपने पास अपने डेरे में रखा। {i17:55} शाऊल दाऊद से डरने लगता है। {17:55} शाऊल ने दाऊद को गोलियत से लड़ने के लिये जाते देखा था। शाऊल ने सेनापति अब्नेर से बातें कीं, “अब्नेर, उस युवक का पिता कौन है?” अब्नेर ने उत्तर दिया, “महाराज, मैं शपथ खाकर कहता हूँ — मैं नहीं जानता।” {17:56} राजा शाऊल ने कहा, “पता लगाओ कि उस युवक का पिता कौन है?” {17:57} जब दाऊद गोलियत को मारने के बाद लौटा तो अब्नेर उसे शाऊल के पास लाया। दाऊद तब भी पलिश्ती का सिर हाथ में पकड़े हुआ था। {17:58} शाऊल ने पुछा, “युवक तुम्हारा पिता कौन है?” दाऊद ने उत्तर दिया, “मैं आपके सेवक बेतलेहेम के यिशै का पुत्र हूँ।” {i18:1} दाऊद और योनातान की घनिष्ट मित्रता {18:1} दाऊद ने जब शाऊल से बात पूरी कर ली तब योनातान दाऊद का बहुत अभिन्न मित्र बन गया। योनातान दाऊद से उतना ही प्रेम करने लगा जितना अपने से। {18:2} शाऊल ने उस दिन के बाद से दाऊद को अपने पास रखा। शाऊल ने दाऊद को उसके घर पिता के पास नहीं जाने दिया। {18:3} योनातान दाऊद से बहुत प्रेम करता था। योनातान ने दाऊद से एक सन्धि की। {18:4} योनातान ने जो अंगरखा पहना हुआ था उसे उतारा और दाऊद को दे दिया। योनातान ने अपनी सारी वर्दी भी दाऊद को दे दी। योनातान ने अपना धनुष, अपनी तलवार और अपनी पेटी भी दाऊद को दी। {i18:5} शाऊल का दाऊद की सफलता पर ध्यान देना {18:5} शाऊल ने दाऊद को विभिन्न युद्धों में लड़ने भेजा। दाऊद बहुत सफल रहा। तब शाऊल ने उसे सैनिकों के ऊपर रख दिया। इससे सभी प्रसन्न हुये, यहाँ तक कि शाऊल के सभी अधिकारी भी इससे प्रसन्न हुए। {18:6} दाऊद पलिश्तियों के विरुद्ध लड़ने जाया करता था। युद्ध के बाद वह घर लौटता था। इस्राएल के सभी नगरों में स्त्रियाँ दाऊद के स्वागत में उससे मिलने आती थीं। वे हँसती नाचतीं और ढोलक एवं सितार बजाती थीं। वे शाऊल के सामने ही ऐसा किया करती थीं! {18:7} स्त्रियाँ गाती थीं, “शाऊल ने हजारों शत्रओं को मारा। दाऊद ने दसियों हजार शत्रुओं को मारा!” {18:8} स्त्रियों के इस गीत ने शाऊल को खिन्न कर दिया, वह बहुत क्रोधित हो गया। शाऊल ने सोचा, “स्त्रियाँ कहती हैं कि दाऊद ने दासियों हजार शत्रु मारे हैं और वे कहती हैं कि मैंने केवल हजार शत्रु ही मारे।” {18:9} इसलिये उस समय से आगे शाऊल दाऊद पर निगाह रखने लगा। {i18:10} शाऊल दाऊद से भयभीत हुआ {18:10} अगले दिन, परमेश्वर के द्वारा भेजी एक दुष्टात्मा शाऊल पर बलपूर्वक हावी हो गई। शाऊल अपने घर में वहशी हो गया। दाऊद ने पहले की तरह वीणा बजाई। {18:11} किन्तु शाऊल के हाथ में भाला था। शाऊल ने सोचा, “मैं दाऊद को दीवार में टाँक दूँगा।” शाऊल ने दो बार भाला चलाया, किन्तु दाऊद बच गया। {18:12} यहोवा दाऊद के साथ था और यहोवा ने शाऊल को त्याग दिया था। इसलिए शाऊल दाऊद से भयभीत था। {18:13} शाऊल ने दाऊद को अपने से दूर भेज दिया। शाऊल ने दाऊद को एक हजार सैनिकों का सेनापति बना दिया। दाऊद ने युद्ध में सैनिकों का नेतृत्व किया। {18:14} यहोवा दाऊद के साथ था। अत: दाऊद सर्वत्र सफल रहता था। {18:15} शाऊल ने देखा कि दाऊद को बहुत अधिक सफलता मिल रही है तो शाऊल दाऊद से और भी अधिक भयभीत रहने लगा। {18:16} किन्तु इस्राएल और यहूदा के सभी लोग दाऊद से प्रेम करते थे। वे उससे प्रेम इसलिये करते थे क्योंकि वह युद्ध में उनका संचालन करता था और उनके लिये लड़ता था। {i18:17} शाऊल की अपनी बेटी से दाऊद के विवाह की योजना {18:17} शाऊल दाऊद को मार डालना चाहता था। शाऊल ने दाऊद को धोखा देने का एक उपाय सोचा। शाऊल ने दाऊद से कहा, “यह मेरी सबसे बड़ी पुत्री मेरब है। मैं तुम्हें इससे विवाह करने दूँगा। तब तुम शक्तिशाली योद्धा हो जाओगे। तुम हमारे पुत्र के समान होओगे। तब तुम जाना और यहोवा के युद्धों को लड़ना।” यह एक चाल थी। शाऊल सचमुच अब यह सोच रहा थ, “इस प्रकार दाऊद को मुझे मारना नहीं पड़ेगा। मैं पलिश्तियों से उसे अपने लिए मरवा दूँगा!” {18:18} किन्तु दाऊद ने कहा, “मैं किसी महत्वपूर्ण परिवार से नहीं हूँ और मेरी हस्ती ही क्या है? मैं एक राजा की पुत्री के साथ विवाह नहीं कर सकता हूँ!” {18:19} फिर जब शाऊल की पुत्री मेरब का दाऊद के साथ विवाह का समय आया तब शाऊल ने महोलाई अद्रीएल से उसका विवाह कर दिया। {18:20} शाऊल की दूसरी पुत्री मीकल दाऊद से प्रेम करती थी। लोगों ने शाऊल से कहा कि मीकल दाऊद से प्रेम करती है। इससे शाऊल को प्रसन्नता हुई। {18:21} शाऊल ने सोचा, “मैं मीकल का उपयोग दाऊद को फँसाने के लिये करूँगा। मैं मीकल को दाऊद से विवाह करने दूँगा और तब मैं पलिश्तियों को इसे मार डालने दूँगा।” अत: शाऊल ने दाऊद से दूसरी बार कहा, “आज तुम मेरी पुत्री से विवाह कर सकते हो।” {18:22} शाऊल ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया। उसने उनसे कहा, “दाऊद से अकेले में बातें करो। कहो, ‘देखो, राजा तुमको पसन्द करता है। उसके अधिकारी तुमको पसन्द करते हैं। तुम्हें उसकी पुत्री से विवाह कर लेना चाहिये।’” {18:23} शाऊल के अधिकारियों ने वे बाते दाऊद से कहीं। किन्तु दाऊद ने उत्तर दिया, “क्या तुम लोग समझते हो कि राजा का दामाद बनना सरल है? मेरे पास इतना धन नहीं कि राजा की पुत्री के लिये दे सकूँ। मैं तो एक साधारण गरीब व्यक्ति हूँ।” {18:24} शाऊल के अधिकारियों ने शाऊल को वह सब बताया जो दाऊद ने कहा था। {18:25} शाऊल ने उनसे कहा, “दाऊद से यह कहो, ‘दाऊद, राजा यह नहीं चाहता कि तुम उसकी पुत्री के लिये धन दो! शाऊल अपने शत्रुओं से बदला लेना चाहता है। इसलिए विवाह करने के लिये कीमत के रूप में केवल सौ पलिश्तियों की खलडियाँ हैं।’” यह शाऊल की गुप्त योजना थी। शाऊल ने सोचा कि पलिश्ती इस प्रकार दाऊद को मार डालेंगे। {18:26} शाऊल के अधिकारियों ने दाऊद से ये बातें कहीं। दाऊद राजा का दामाद बनना चाहता था, इसलिए उसने तुरन्त ही कुछ कर दिखाया। {18:27} दाऊद और उसके व्यक्ति पलिश्तियों से लड़ने गये। उन्होंने दो सौ पलिश्ती मार डाले। दाऊद ने उनके खलड़ियों को लिया और शाऊल को दे दिये। दाऊद ने यह इसलिए किया क्योंकि वह राजा का दामाद बनना चाहता था। शाऊल ने दाऊद को अपनी पुत्री मीकल से विवाह करने दिया। {18:28} शाऊल ने देखा कि यहोवा दाऊद के साथ था। किन्तु शाऊल ने यह भी ध्यान में रखा कि उसकी पुत्री मीकल दाऊद को प्यार करती है। {18:29} इसलिये शऊल दाऊद से और भी अधिक भयभीत हुआ। शाऊल उस पूरे समय दाऊद के विरुद्ध रहा। {18:30} इस्राएलियों के विरूद्ध लड़ने के लिये पलिश्ती सेनापति बाहर निकलते रहे। किन्तु हर बार दाऊद ने उनको हराया। दाऊद शाऊल के सभी अधिकारियों में सबसे अधिक सफल था सो दाऊद प्रसिद्ध हो गया। {i19:1} योनातान का दाऊद की सहायता करना {19:1} शाऊल ने अपने पुत्र योनातान और अपने अधिकारियों से दाऊद को मार डालने के लिये कहा। किन्तु योनातान दाऊद को बहुत चाहता था। {19:2} योनातान ने दाऊद को सावधान किया, “सावधान रहो! शाऊल तुमको मार डालने के अवसर की तलाश में है। सवेरे मैदान में जाकर छिप जाओ। मैं अपने पिता के साथ {19:3} मैदान में जाऊँगा। हम मैदान में वहाँ खड़े रहेंगे जहाँ तुम छिपे होगे। मैं तुम्हारे बारे में अपने पिता से बातें करूँगा। तब जो मुझे ज्ञात होगा मैं तुमको बताऊँगा।” {19:4} योनातान ने अपने पिता शाऊल से बातें कीं। योनातान ने दाऊद के बारे में अच्छी बातें कहीं। योनातान ने कहा, “आप राजा हैं। दाऊद आपका सेवक है। दाऊद ने आपको कोई हानि नहीं पहुँचाई है। इसलिए उसके साथ कुछ बुरा न करें। दाऊद सदा आपके प्रति अच्छा रहा है। {19:5} दाऊद अपने जीवन पर खेला था जब उसने पलिश्ती (गोलियत) को मारा था। यहोवा ने सारे इस्राएल के लिये एक बड़ी विजय प्राप्त की थी। आपने उसे देखा और आप उस पर बड़े प्रसन्न थे। आप दाऊद को हानि क्यों पहुँचाना चाहते हैं? वह निरपराध है। उसे मार डालने का कोई कारण नहीं है!” {19:6} शाऊल ने योनातान की बात सुनी। शाऊल ने प्रतिज्ञा की। शाऊल ने कहा, “यहोवा के अस्तित्व के अटल सत्य की तरह, दाऊद भी मारा नहीं जाएगा।” {19:7} अत: योनातान ने दाऊद को बुलाया। तब उसने दाऊद से वह सब कहा जो कहा गया था। तब योनातान, दाऊद को शाऊल के पास लाया। इस प्रकार शाऊल के साथ दाऊद पहले की तरह हो गया। {i19:8} शाऊल, दाऊद को मारने का फिर प्रयत्न करता है {19:8} युद्ध फिर आरम्भ हुआ और दाऊद पलिश्तियों से युद्ध करने गया। उसने पलिश्तियों को हराया और वे उसके आगे भाग खड़े हुए। {19:9} किन्तु यहोवा द्वारा शाऊल पर भेजी दुष्टात्मा उतरी। शाऊल अपने घर में बैठा था। शाऊल के हाथ में उसका भाला था। दाऊद वीणा बजा रहा था। {19:10} शाऊल ने अपने भाले को दाऊद के शरीर पर चला कर उसे दीवार पर टाँक देने का प्रयत्न किया। दाऊद भाले के रास्त से कूद कर बच निकला और भाला दीवार से टकरा कर रह गया। अतः उसी रात दाऊद वहाँ से भाग निकला। {19:11} शाऊल ने लोगों को दाऊद के घर भेजा। लोगों ने दाऊद के घर पर निगरानी रखी। वे रात भर वहीं ठहरे। वे सवेरे दाऊद को मार डालने की प्रतीक्षा कर रहे थे। किन्तु उसकी पत्नी मीकल ने उसे सावधान कर दिया। उसने कहा, “तुम्हें आज की रात भाग निकलना चाहिये और अपने जीवन की रक्षा करनी चाहिए। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे, तो कल मार दिये जाओगे।” {19:12} तब मीकल ने एक खिड़की से उसे नीचे उतार दिया। दाऊद बच गया और वहाँ से भाग निकला। {19:13} मीकल ने अपने पारिवारिक देवता की मूर्ति को लिया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। मीकल ने उस मूर्ति पर कपड़े डाल दिये। उसने उसके सिर पर बकरी के बाल भी लगा दिये। {19:14} शाऊल ने दाऊद को बन्दी बनाने के लिये दूत भेजे। किन्तु मीकल ने कहा, “दाऊद बीमार है।” {19:15} सो वे लोग वहाँ से चले गये और उन्होंने शाऊल से जाकर यह बता दिया, किन्तु उसने दूतों को दाऊद को देखने के लिये वापस भेजा। शाऊल ने इन लोगों से कहा, “दाऊद को मेरे पास लाओ। यदि आवश्यकता पड़े तो उसे अपने बिस्तर पर लेटे हुये ही उठा लाओ। मैं उसे मार डालूँगा।” {19:16} सो दूत फिर दाऊद के घर गये। वे दाऊद को पकड़ने भीतर गये, किन्तु वहाँ उन्होंने देखा कि बिस्तर पर केवल एक मूर्ति थी। उन्होंने देखा कि उसके बाल तो बस बकरी के बाल थे। {19:17} शाऊल ने मीकल से कहा, “तुमने मुझे इस प्रकार धोखा क्यों दिया? तुमने मेरे शत्रु को भाग जाने दिया। दाऊद भाग गया है!” मीकल ने शाऊल को उत्तर दिया, “दाऊद ने मुझसे कहा था कि वह मुझे मार डालेगा यदि मैं भाग जाने में उसकी सहायता नहीं करुँगी।” {i19:18} दाऊद का रामा के डेरों में जाना {19:18} दाऊद बच निकला। दाऊद शमूएल के पास रामा में भागकर पहुँचा। दाऊद ने शमूएल से वह सब बताया जो शाऊल ने उसके साथ किया था। तब दाऊद और शमूएल उन डेरों में गये जहाँ भविष्यवक्ता रहते थे। दाऊद वहीं रुका। {19:19} शाऊल को पता चला कि दाऊद रामा के निकट डेरों में था। {19:20} शाऊल ने दाऊद को बन्दी बनाने के लिये लोगों को भेजा। किन्तु जब वे डेरों में आए तो उस समय नबियों का एक समूह भविष्यवाणी कर रहा था। शमूएल समूह का मार्ग दर्शन करता हुआ वहाँ खड़ा था। परमेश्वर की आत्मा शाऊल के दूतों पर उतरी और वे भविष्यवाणी करने लगे। {19:21} शाऊल ने इस बारे में सुना, अत: उसने वहाँ अन्य दूत भेजे। किन्तु वे भी भविष्यवाणी करने लगे। इसलिये शाऊल ने तीसरी बार दूत भेजे और वे भी भविष्यवाणी करने लगे। {19:22} अन्तत:, शाऊल स्वयं रामा पहुँचा। शाऊल सेकू में खलिहान के समीप एक बड़े कुँए के पास आया। शाऊल ने पूछा, “शमूएल और दाऊद कहाँ हैं?” लोगों ने उत्तर दिया, “रामा के निकट डेरे में।” {19:23} तब शाऊल रामा के निकट डेरे में गया। परमेश्वर की आत्मा शाऊल पर भी उतरी और शाऊल ने भविष्यवाणी करनी आरम्भ की। शाऊल रामा के डेरे तक अधिकाधिक भविष्यवाणियाँ लगातार करता गया। {19:24} तब शाऊल ने अपने वस्त्र उतारे। इस प्रकार शाऊल भी शमूएल के सामने भविष्यवाणी कर रहा था। शाऊल वहाँ सारे दिन और सारी रात नंगा लेटा रहा। यही कारण है कि लोग कहते हैं, “क्या शाऊल नबियों में से कोई एक है?” {i20:1} दाऊद और योनातान एक सन्धि करते हैं {20:1} दाऊद रामा के निकट के डेरे से भाग गया। दाऊद योनातान के पास पहुँचा और उससे पूछा, “मैंने कौन सी गलती की है? मेरा अपराध क्या है? तुम्हारा पिता मुझे मारने का प्रयत्न क्यों कर रहा है?” {20:2} योनातान ने उत्तर दिया, “मेरे पिता तुमको मारने का प्रयत्न नहीं कर रहे हैं! मेरे पिता मुझसे पहले कहे बिना कुछ नहीं करते। यह महत्वपूर्ण नहीं कि वह बात बहुत महत्वपूर्ण हो या तुच्छ, मेरे पिता सदा मुझे बताते हैं। मेरे पिता मुझसे यह बताने से क्यों इन्कार करेंगे कि वे तुमको मार डालना चाहते हैं? नहीं, यह सत्य नहीं है!” {20:3} किन्तु दाऊद ने उत्तर दिया, “तुम्हारे पिता अच्छी तरह जानते हैं कि मैं तुम्हारा मित्र हूँ। तुम्हारे पिता ने अपने मन में यह सोचा है, ‘योनातान को इस विषय में जानकारी नहीं होनी चाहिये। यदि वह जानेगा तो दाऊद से कह देगा।’ किन्तु जैसे यहोवा का होना सत्य है और तुम जीवित हो, उसी प्रकार यह भी सत्य है कि मैं मृत्यु के बहुत निकट हूँ!” {20:4} योनातान ने दाऊद से कहा, “मैं वह सब कुछ करूँगा जो तुम मुझसे करवाना चाहो।” {20:5} तब दाऊद ने कहा, “देखो, कल नया चाँद का महोत्सव है और मुझे राजा के साथ भोजन करना है। किन्तु मुझे सन्ध्या तक मैदान में छिपे रहने दो। {20:6} यदि तुम्हारे पिता को यह दिखाई दे कि मैं चला गया हूँ, तो उनसे कहो कि, ‘दाऊद अपने घर बेतलेहेम जाना चाहता था। उसका परिवार इस मासिक बलि के लिए स्वयं ही दावत कर रहा है। दाऊद ने मुझसे पूछा कि मैं उसे बेतलेहेम जाने और उसके परिवार से उसे मिलने दूँ,’ {20:7} यदि तुम्हारे पिता कहते हैं, ‘बहुत अच्छा हुआ,’ तो मैं सुरक्षित हूँ। किन्तु यदि तुम्हारे पिता क्रोधित होते हैं तो समझो कि मेरा बुरा करना चाहते हैं। {20:8} योनातान मुझ पर दया करो। मैं तुम्हारा सेवक हूँ। तुमने यहोवा के सामने मेरे साथ सन्धि की है। यदि मैं अपराधी हूँ तो तुम स्वयं मुझे मार सकते हो! किन्तु मुझे अपने पिता के पास मत ले जाओ।” {20:9} योनातान ने उत्तर दिया, “नहीं, कभी नहीं! यदि मैं जान जाऊँगा कि मेरे पिता तुम्हारा बुरा करना चाहते हैं तो तुम्हें सावधान कर दूँगा।” {20:10} दाऊद ने कहा, “यदि तुम्हारे पिता तुम्हें कठोरता से उत्तर देते हैं तो उसके बारे में मुझे कौन बताएगा?” {20:11} तब योनातान ने कहा, “आओ, हम लोग मैदान मे चलें।” सो योनातान और दाऊद एक साथ एक मैदान में चले गए। {20:12} योनातान ने दाऊद से कहा, “मैं इस्राएल का परमेश्वर यहोवा के सामने यह प्रतिज्ञा करता हूँ। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं पता लागाऊँगा कि मेरे पिता तुम्हारे प्रति कैसा भाव रखते हैं। मैं पता लगाऊँगा कि वे तुम्हारे बारे में अच्छा भाव रखते हैं या नहीं। तब तीन दिन में, मैं तुम्हें मैदान में सूचना भेजूँगा। {20:13} यदि मेरे पिता तुम पर चोट करना चाहते हैं तो मैं तुम्हें जानकारी दूँगा। मैं तुमको यहाँ से सुरक्षित जाने दूँगा। यहोवा मुझे दण्ड दे यदि मैं ऐसा न करूँ। यहोवा तुम्हारे साथ रहे जैसे वह मेरे पिता के साथ रहा है। {20:14} जब तक मैं जीवित रहूँ मेरे ऊपर दया रखना और जब मैं मर जाऊँ तो {20:15} मेरे परिवार पर दया करना बन्द न करना। यहोवा तुम्हारे सभी शत्रुओं को पृथ्वी पर से नष्ट कर देगा। {20:16} यदि उस समय योनातान का परिवार दाऊद के परिवार से पृथक किया जाना ही हो, तो उसे हो जाने देना। दाऊद के शत्रुओं को यहोवा दण्ड दे।” {20:17} तब योनातान ने दाऊद से कहा कि वह उसके प्रति प्रेम की प्रतिज्ञा को दुहराये। योनातान ने यह इसलिए किया क्योंकि वह दाऊद से उतना ही प्रेम करता था जितना अपने आप से। {20:18} योनातान ने दाऊद से कहा, “कल नया चाँद का उत्सव है। तुम्हारा आसन खाली रहेगा। इसलिए मेरे पिता समझ जाएंगे कि तुम चले गये हो। {20:19} तीसरे दिन उसी स्थान पर जाओ जहाँ तुम इस परेशानी के प्रारम्भ होने के समय छिपे थे। उस पहाड़ी की बगल में प्रतीक्षा करो। {20:20} तीसरे दिन, मैं उस पहाड़ी पर ऐसे जाऊँगा जैसे मैं किसी लक्ष्य को बेध रहा हूँ। मैं कुछ बाणों को छोड़ूँगा। {20:21} तब मैं, बाणों का पता लगाने के लिये, अपने शस्त्रवाहक लड़के से जाने के लिये कहूँगा। यदि सब कुछ ठीक होगा तो मैं लड़के से कहूँगा, ‘तुम बहुत दूर निकल गए हो! बाण मेरे करीब ही है। लौटो और उन्हें उठा लाओ।’ यदि मैं ऐसा कहूँ तो तुम छिपने के स्थान से बाहर आ सकते हो। मैं वचन देता हूँ कि जैसे यहोवा शाश्वत है वैसे ही तुम सुरक्षित हो। कोई भी खतरा नहीं है। {20:22} किन्तु यदि खतरा होगा तो मैं लड़के से कहूँगा। ‘बाण बहुत दूर है, जाओ और उन्हें लाओ।’ यदि मैं ऐसा कहूँ तो तुम्हें चले जाना चाहिये। यहोवा तुम्हें दूर भेज रहा है। {20:23} तुम्हारे और मेरे बीच की इस सन्धि को याद रखो। यहोवा सदैव के लिये हमारा साक्षी है!” {20:24} तब दाऊद मैदान में जा छिपा। नया चाँद के उत्सव का समय आया और राजा भोजन करने बैठा। {i20:25} उत्सव में शाऊल के इरादे {20:25} राजा दीवार के निकट वहीं बैठा जहाँ वह प्राय: बैठा करता था। योनातान शाऊल के दूसरी ओर सामने बैठा। अब्नेर शाऊल के बाद बैठा। किन्तु दाऊद का स्थान खाली था। {20:26} उस दिन शाऊल ने कुछ नहीं कहा। उसने सोचा, “सम्भव है दाऊद को कुछ हुआ हो और वह शुद्ध न हो।” {20:27} अगले दिन, महीने के दूसरे दिन, दाऊद का स्थान फिर खाली था। तब शाऊल ने अपने पुत्र योनातान से पूछा, “यिशै का पुत्र नया चाँद के उत्सव में कल या आज क्यों नहीं आया?” {20:28} योनातान ने उत्तर दिया, “दाऊद ने मुझसे बेतलेहेम जाने देने के लिये कहा था। {20:29} उसने कहा, ‘मुझे जाने दो। मेरा परिवार बेतलेहेम में एक बलि — भेंट कर रहा है। मेरे भाई ने वहाँ रहने का आदेश दिया है। अब यदि मैं तुम्हारा मित्र हूँ तो मुझे जाने दो और भाईयों से मिलने दो।’ यही कारण है कि दाऊद राजा की मेज पर नहीं आया है।” {20:30} शाऊल योनातान पर बहुत क्रोधित हुआ। उसने योनातान से कहा, “तुम उस एक दासी के पुत्र हो, जो आज्ञा पालन करने से इन्कार करती है और तुम ठीक उसी तरह के हो। मैं जानता हूँ कि तुम दाऊद के पक्ष में हो। तुम अपनी माँ और अपने लिये लज्जा का कारण हो। {20:31} जब तक यिशै का पुत्र जीवित रहेगा तब तक तुम कभी राजा नहीं बनोगे, न तुम्हारा राज्य होगा। अब दाऊद को हमारे पास लाओ। वह एक मरा व्यक्ति है!” {20:32} योनातान ने अपने पिता से पूछा, “दाऊद को क्यों मार डाला जाना चाहिये? उसने क्या अपराध किया है?” {20:33} किन्तु शाऊल ने अपना भाला योनातान पर चलाया और उसे मार डालने का प्रयन्त किया। अत: योनातान ने समझ लिया कि मेरा पिता दाऊद को निश्चित रूप से मार डालने का इच्चुक है। {20:34} योनातान क्रोधित हुआ और उसने मेज छोड़ दी। योनातान इतना घबरा गया और अपने पिता पर इतना क्रोधित हुआ कि उसने दावत के दूसरे दिन कुछ भी भोजन करना अस्वीकार कर दिया। योनातान इसलिये क्रोधित हुआ क्योंकि शाऊल ने उसे अपमानित किया था और शाऊल दाऊद को मार डालना चाहता था। {i20:35} दाऊद और योनातान का विदा लेना {20:35} अगली सुबह योनातान मैदान में गया। वह दाऊद से मिलने गया, जैसा उन्होंने तय किया था। योनातान एक शस्त्रवाहक लड़के को अपने साथ लाया। {20:36} योनातान ने लडके से कहा, “दौड़ो, और जो बाण मैं चलाता हूँ, उनहें लाओ।” लड़के ने दौड़ना आरम्भ किया और योनातान ने उसके सिर के ऊपर से बाण चलाए। {20:37} लड़का उस स्थान को दौड़ा, जहाँ बाण गिरा था। किन्तु योनातान ने पुकारा, “बाण बहुत दूर है!” {20:38} तब योनातान जोर से चिल्लाया “जल्दी कारो! उन्हें लाओ! वहीं पर खड़े न रहो!” लड़के ने बाणों को उठाया और अपने स्वामी के पास वापस लाया। {20:39} लड़के को कुछ पता न चला कि हुआ क्या। केवल योनातान और दाऊद जान सके। {20:40} योनातान ने अपना धनुष बाण लड़के को दिया। तब योनातान ने लड़के से कहा, “नगर को लौट जाओ।” {20:41} लड़का चल पड़ा, और दाऊद अपने उस छिपने के स्थान से बाहर आया जो पहाड़ी के दूसरी ओर था। दाऊद ने भूमि तक अपने सिर को झुकाकर योनातान के सामने प्रणाम किया। दाऊद तीन बार झुका। तब दाऊद और योनातान ने एक दूसरे का चुम्बन लिया। वे दोनों एक साथ रोये, किन्तु दाऊद योनातान से अधिक रोया। {20:42} योनातान ने दाऊद से कहा, “शान्तिपूर्वक जाओ। हम लोगों ने यहोवा का नाम लेकर मित्र होने की प्रतिज्ञा की थी। हम लोगों ने कहा था कि यहोवा हम लोगों और हमारे वंशजों के बीच सदा साक्षी रहेगा।” {i21:1} दाऊद का याजक अहीमेलेक से मिलने जाना {21:1} तब दाऊद चला गया और योनातान नगर को लौट गया। दाऊद नोब नामक नगर में याजक अहीमेलेक से मिलने गया। अहीमेलेक दाऊद से मिलने बाहर गया। अहीमेलेक भय से काँप रहा था। अहीमेलेक ने दाऊद से पूछा, “तुम अकेले क्यों हो? तुम्हारे साथ कोई व्यक्ति क्यों नहीं है?” {21:2} दाऊद ने अहीमेलेक को उत्तर दिया, “राजा ने मुझको विशेष आदेश दिया है। उसने मुझसे कहा है, ‘इस उद्देश्य को किसी को न जानने दो। कोई भी व्यक्ति उसे न जाने जिसे मैंने तुम्हें करने को कहा है।’ मैंने अपने व्यक्तियों से कह दिया है कि वे कहाँ मिलें। {21:3} अब यह बताओ कि तुम्हारे पास भोजन के लिये क्या है? मुझे पाँच रोटियाँ या जो कुछ खाने को है, दो।” {21:4} याजक ने दाऊद से कहा, “मेरे पास यहाँ सामान्य रोटियाँ नहीं हैं। किन्तु मेरे पास कुछ पवित्र रोटी तो है। तुम्हारे अधिकारी उसे खा सकते हैं, यदि उन्होंने किसी स्त्री के साथ इन दिनों शारीरिक सम्बन्ध न किया हो।” {21:5} दाऊद ने याजक को उत्तर दिया “हम लोग इन दिनों किसी स्त्री के साथ नहीं रहे हैं। हमारे व्यक्ति अपने शरीर को पवित्र रखते हैं जब कभी हम युद्ध करने जाते हैं, यहाँ तक कि सामान्य उद्देश्य के लिये जाने पर भी और आज के लिए तो यह विशेष रूप से सच है क्योंकि हमारा काम अति विशिष्ट है।” {21:6} वहाँ पवित्र रोटी के अतिरिक्त कोई रोटी नहीं थी। अत: याजक ने दाऊद को वही रोटी दी। यह वह रोटी थी जिसे याजक यहोवा के सामने पवित्र मेज पर रखते थे। वे हर एक दिन इस रोटी को हटा लेते थे और उसकी जगह ताजी रोटी रखते थे। {21:7} उस दिन शाऊल के अधिकारियों में से एक वहाँ था। वह एदोमी दोएग था। दोएग को वहाँ यहोवा के सामने रखा गया था। दोएग शाऊल के गड़ेरियों का मुखिया था। {21:8} दाऊद ने अहीमेलेक से पूछा, “क्या तुम्हारे पास यहाँ कोई भाला या तलवार है? राजा का कार्य बहुत जरूरी है। मुझे शीघ्रता से जाना है और मैं अपनी तलवार या अन्य कोई शस्त्र नहीं ला सका हूँ।” {21:9} याजक ने उत्तर दिया, “एक मात्र तलवार जो यहाँ है वह पलिश्ती (गोलियत) की है। यह वही तलवार है जिसे तुमने उससे तब लिया था जब तुमने उसे एला की घाटी में मारा था। वह तलवार एक कपड़े में लिपटी हुई एपोद के पीछे रखी है। यदि तुम चाहो तो उसे ले सकते हो।” दाऊद ने कहा, “इसे मुझे दो। गोलियत की तलवार के समान कोई तलवार नहीं है।” {i21:10} दाऊद का गत को जाना {21:10} उस दिन दाऊद शाऊल के यहाँ से भाग गया। दाऊद गत के राजा आकीश के पास गया। {21:11} आकीश के अधिकारियों को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा, “यह इस्राएल प्रदेश का राजा दाऊद है। यही वह व्यक्ति है जिसका गीत इस्राएली गाते हैं। वे नाचते हैं और यह गीत गाते है: “शाऊल ने हजारों शत्रुओं को मारा दाऊद ने दसियों हजार शत्रुओं को मारा!” {21:12} दाऊद को ये बातें याद थीं। दाऊद गत के राजा आकीश से बहुत भयभीत था। {21:13} इसलिए दाऊद ने आकीश और उसके अधिकारियों के सामने अपने को विक्षिप्त दिखाने का बहाना किया। जब तक दाऊद उनके साथ रहा उसने विक्षिप्तों जैसा व्यवहार किया। वह द्वार के दरवाजों पर थूक देता था। वह अपने थूक को अपनी दाढ़ी पर गिरने देता था। {21:14} आकीश ने अपने अधिकारियों से कहा, “इस व्यक्ति को देखो। यह तो विक्षिप्त है! तुम लोग इसे मेरे पास क्यों लाए हो? {21:15} मेरे पास तो वैसे ही बहुत से विक्षिप्त हैं। मैं तुम लोगों से यह नहीं चाहता कि तुम इस व्यक्ति को मेरे घर पर विक्षिप्त जैसा काम करने को लाओ। इस व्यक्ति को मेरे घर मैं फिर न आने देना।” {i22:1} दाऊद का विभिन्न स्थानों पर जाना {22:1} दाऊद ने गत को छोड़ दिया। दाऊद अदुल्लाम की गुफा में भाग गया। दाऊद के भाईयों और सम्बन्धियों ने सुना कि दाऊद अदुल्लाम में था। वे दाऊद को देखने वहाँ गए। {22:2} बहुत से लोग दाऊद के साथ हो लिये। वे सभी लोग, जो किसी विपत्ति में थे या कर्ज में थे या असंतुष्ट थे, दाऊद के साथ हो लिए। दाऊद उनका मुखिया बन गया। दाऊद के पास लगभग चार सौ पुरुष थे। {22:3} दाऊद ने अदुल्लाम को छोड़ दिया और वह मोआब में स्थित मिस्पा को चला गया। दाऊद ने मोआब के राजा से कहा, “कृपया मेरे माता पिता को आने दें और अपने पास तब तक रहने दें जब तक मैं यह न समझ सकूँ कि परमेश्वर मेरे साथ क्या करने जा रहा है।” {22:4} दाऊद ने अपने माता — पिता को मोआब के राजा के पास छोड़ा। दाऊद के माता — पिता मोआब के राजा के पास तब तक ठहरे जब तक दाऊद किले में रहा। {22:5} किन्तु नबी गाद ने दाऊद से कहा, “गढ़ी में मत ठहरो। यहूदा प्रदेश में जाओ।” इसलिये दाऊद वहाँ से चल पड़ा और हेरेत के जंगल में गया। {i22:6} शाऊल का अहीमेलेक के परिवार को नष्ट करना {22:6} शाऊल ने सुना कि लोग दाऊद और उसके लोगों के बारे में जान गए हैं। शाऊल गिबा में पहाड़ी पर एक पेड़ के नीचे बैठा था। शाऊल के हाथ में उसका भाला था। शाऊल के सभी अधिकारी उसके चारों ओर खड़े थे। {22:7} शाऊल ने अपने उन अधिकारियों से कहा, जो उसके चारों ओर खड़े थे, “बिन्यामीन के लोगो सुनो! क्या तुम लोग समझते हो कि यिशै का पुत्र(दाऊद) तुम्हें खेत और अंगूरों के बाग देगा? क्या तुम समझते हो कि वह तुमको उन्नति देगा और तुम्हें एक हजार व्यक्तियों और एक सौ व्यक्तियों के ऊपर अधिकारी बनाएगा। {22:8} तुम लोग मेरे विरुद्ध षडयन्त्र रच रहे हो। तुमने गुप्त योजनायें बनाई हैं। तुम में से किसी ने भी मेरे पुत्र योनातान के बारे में नहीं बताया है। तुममें से किसी ने भी यह नहीं बताया है कि उसने यिशै के पुत्र के साथ क्या सन्धि की है। तुममें से कोई भी मेरी परवाह नहीं करता। तुममें से किसी ने यह नहीं बताया कि मेरे पुत्र योनातान ने दाऊद को उकसाया है। योनातान ने मेरे सेवक दाऊद से कहा कि वह छिप जाए और मुझ पर आक्रमण करे और यह वही है जो दाऊद अब कर रहा है।” {22:9} एदोमी दोएग शाऊल के अधिकारियों के साथ खड़ा था। दोएग ने कहा, “मैंने यिशै के पुत्र दाऊद को नोब में देखा है। दाऊद अहितूब के पुत्र अहीमेलेक से मिलने आया। {22:10} अहीमेलेक ने यहोवा से दाऊद के लिये प्रार्थना की। अहीमेलेक ने दाऊद को भोजन भी दिया और अहीमेलेक ने दाऊद को पलिश्ती (गोलियत) की तलवार भी दी।” {22:11} तब राजा शाऊल ने कुछ लोगों को आज्ञा दी कि वे याजक को उसके पास लेकर आएं। शाऊल ने उनसे अहीतूब के पुत्र अहीमेलेक और उसके सभी सम्बन्धियों को लाने को कहा। अहीमेलेक के सम्बन्धी नोब में याजक थे। वे सभी राजा के पास आए। {22:12} शाऊल ने अहीमेलेक से कहा, “अहीतूब के पुत्र, अब सुन लो।” अहीमेलेक ने उत्तर दिया, “हाँ, महाराज।” {22:13} शाऊल ने अहीमेलेक से कहा, “तुमने और यिशै के पुत्र (दाऊद) ने मेरे विरुद्ध गुप्त योजना क्यों बनाई? तुमने दाऊद को रोटी और तलवार दी! तुमने परमेश्वर से उसके लिये प्रार्थना की और अब सीधे, दाऊद मुझ पर आक्रमण करने की प्रतीक्षा कर रहा है!” {22:14} अहीमेलेक ने उत्तर दिया, “दाऊद तुम्हारा बड़ा विश्वास पात्र है। तुम्हारे अधिकारियों में कोई उतना विश्वस्त नहीं है जितना दाऊद है। दाऊद तुम्हारा अपना दामाद है और दाऊद तुम्हारे अंगरक्षकों का नायक है। तुम्हारा अपना परिवार दाऊद का सम्मान करता है। {22:15} वह पहली बार नहीं था, कि मैंने दाऊद के लिये परमेश्वर से प्रार्थना की। ऐसी बात बिल्कुल नहीं है। मुझे या मेरे किसी सम्बन्धी को दोष मत लगाओ। हम तुम्हारे सेवक हैं। मुझे कुछ भी ज्ञात नहीं है कि यह सब हो क्या रहा है?” {22:16} किन्तु राजा ने कहा, “अहीमेलेक, तुम्हें और तुम्हारे सभी सम्बन्धियों को मरना है।” {22:17} तब राजा ने अपने बगल में खड़े रक्षकों से कहा, “जाओ और यहोवा के याजकों को मार डालो। यह इसलिए करो क्योंकि वे भी दाऊद के पक्ष में हैं। वे जानते थे कि दाऊद भागा है, किन्तु उन्होंने मुझे बताया नहीं।” किन्तु राजा के अधिकारियों ने यहोवा के याजकों को मारने से इन्कार कर दिया। {22:18} अत: राजा ने दोएग को आदेश दिया। शाऊल ने कहा, “दोएग, तुम जाओ और याजकों को मार डालो।” इसलिए एदोमी दोएग गया और उसने याजकों को मार डाला। उस दिन दोएग ने पचासी, सन के एपोद धारण करने वालों को मार डाला। {22:19} नोब याजकों का नगर था। दोएग ने नोब के सभी लोगों को मार डाला। दोएग ने अपनी तलवार का उपयोग किया और उसने सभी पुरुषों, स्त्रियों, बच्चों और छोटे शिशुओं को भी मार डाला। दोएग ने उनकी गायों, खच्चरों और भेड़ों तक को मार डाला। {22:20} किन्तु एब्यातार वहाँ से बच निकला। एब्यातार अहीमेलेक का पुत्र था। अहीमेलेक अहीतूब का पुत्र था। एब्यातार बच निकला और दाऊद से मिल गया। {22:21} एब्यातार ने दाऊद से कहा कि शाऊल ने यहोवा के याजकों को मार डाला है। {22:22} तब दाऊद ने एब्यातार से कहा, “मैंने एदोमी दोएग को उस दिन नोब में देखा था और मैं जानता था की वह शाऊल से कहेगा। मैं तुम्हारे पिता के परिवार की मृत्यु के लिये उत्तरदायी हूँ। {22:23} जो व्यक्ति (शाऊल) तुमको मारना चाहता है वह मुझको भी मारना चाहता है। मेरे साथ ठहरो। डरो नहीं। तुम मेरे साथ सुरक्षित रहोगे।” {i23:1} दाऊद कीला में {23:1} लोगों ने दाऊद से कहा, “देखो, पलिश्ती कीला के विरुद्ध युद्ध कर रहे हैं। वे खलिहानों से अन्न लूट रहे हैं।” {23:2} दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं जाऊँ और इन पलिश्तियों से लड़ूँ?” यहोवा ने दाऊद को उत्तर दिया, “जाओ और पलिश्तियों पर आक्रमण करो। कीला को बचाओ।” {23:3} किन्तु दाऊद के लोगों ने उससे कहा, “देखो, हम यहाँ यहूदा में हैं और हम भयभीत हैं। तनिक सोचो तो सही कि हम तब कितने भयभीत होंगे जब वहाँ जाएंगे जहाँ पलिश्ती सेना है।” {23:4} दाऊद ने फिर यहोवा से पूछा। यहोवा ने दाऊद को उत्तर दिया, “कीला को जाओ। मैं तुम्हारी सहायता पलिश्तियों को हराने में करूँगा।” {23:5} इसलिये दाऊद और उसके लोग कीला को गये। दाऊद के लोग पलिश्तियों से लड़े। दाऊद के लोगों ने पलिश्तियों को हराया और उनकी गायें ले लीं। इस प्रकार दाऊद ने कीला के लोगों को बचाया। {23:6} (जब एब्यातार दाऊद के पास भाग कर गया था तब एब्यातार अपने साथ एक एपोद ले गया था।) {23:7} लोगों ने शाऊल से कहा कि अब दाऊद कीला में है। शाऊल ने कहा, “परमेश्वर ने दाऊद को मुझे दे दिया है। दाऊद स्वयं जाल में फँस गया है। वह ऐसे नगर में गया है जिसके द्वार को बन्द करने के लिये दरवाजे और छड़ें हैं।” {23:8} शाऊल ने युद्ध के लिये अपनी सारी सेना को एक साथ बुलाया। उन्होंने अपनी तैयारी कीला जाने और दाऊद तथा उसके लोगों पर आक्रमण के लिये की। {23:9} दाऊद को पता लगा कि शाऊल उसके विरुद्ध योजना बना रहा है। दाऊद ने तब याजक एब्यातार से कहा, “एपोद लाओ।” {23:10} दाऊद ने प्रार्थना की, “यहोवा इस्राएल के परमेश्वर, मैंने सुना है कि शाऊल कीला में आने और मेरे कारण इसे नष्ट करने की योजना बना रहा है। {23:11} क्या शाऊल कीला में आएगा? क्या कीला के लोग मुझे शाऊल को दे देंगे? यहोवा इस्राएल के परमेश्वर, मैं तेरा सेवक हूँ! कृपया मुझे बता!” यहोवा ने उत्तर दिया, “शाऊल आएगा।” {23:12} दाऊद ने फिर पूछा, “क्या कीला के लोग मुझे और मेरे लोगों को शाऊल को दे देंगे।” यहोवा ने उत्तर दिया, “वे ऐसा करेंगे।” {23:13} इसलिए दाऊद और उसके लोगों ने कीला को छोड़ दिया। वहाँ लगभग छः सौ पुरुष थे जो दाऊद के साथ गए। दाऊद और उसके लोग एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते रहे। शाऊल को पता लग गया कि दाऊद कीला से बच निकला। इसलिए शाऊल उस नगर को नहीं गया। {i23:14} शाऊल दाऊद का पीछा करता है {23:14} दाऊद मरूभूमि में चला गया और वहाँ किलों में ठहर गया। दाऊद जीप की मरूभूमि के पहाड़ी देश में भी गया। शाऊल प्रतिदिन दाऊद की खोज करता था, किन्तु यहोवा शाऊल को दाऊद को पकड़ने नहीं देता था। {23:15} दाऊद जीप की मरुभूमि में होरेश में था। वह भयभीत था क्योंकि शाऊल उसे मारने आ रहा था। {23:16} किन्तु शाऊल का पुत्र योनातान होरेश में दाऊद से मिलने गया। योनातान ने परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास रखने में दाऊद की सहायता की। {23:17} योनातान ने दाऊद से कहा, “डरो नहीं। मेरे पिता शाऊल तुम्हें चोट नहीं पहुँचा सकते। तुम इस्राएल के राजा बनोगे। मैं तुम्हारे बाद दूसरे स्थान पर रहूँगा। मेरे पिता भी यह जानते हैं।” {23:18} योनातान और दाऊद दोनों ने यहोवा के सामने सन्धि की। तब योनातान घर चला गया और दाऊद होरेश में टिका रहा। {i23:19} जीप के लोग शाऊल को दाऊद के बारे में बताते हैं {23:19} जीप के लोग गिबा में शाऊल के पास आए। उन्होंने शाऊल से कहा, “दाऊद हम लोगों के क्षेत्र में छिपा है। वह होरेश के किले में है। वह हकीला पहाड़ी पर यशीमोन के दक्षिण में है। {23:20} महाराज आप जब चाहें आएँ। यह हम लोगों का कर्तव्य है कि हम आपको दाऊद को दें।” {23:21} शाऊल ने उत्तर दिया, “यहोवा आप लोगों को मेरी सहायता के लिये आशीर्वाद दे। {23:22} जाओ और उसके बारे में और अधिक पता लगाओ। पता लगाओ कि दाऊद कहाँ ठहरा है। पता लगाओ कि दाऊद को वहाँ किसने देखा है। शाऊल ने सोचा, ‘दाऊद चतुर है। वह मुझे धोखा देने की कोशिश कर रहा है।’ {23:23} छिपने के जिन स्थानों का उपयोग दाऊद कर रहा है, उन सभी का पता लगाओ और मेरे पास वापस लौटो तथा मुझे सब कुछ बताओ। तब मैं तुम्हारे साथ चलूँगा। यदि दाऊद उस क्षेत्र में होगा तो मैं उसका पता लगाऊँगा। मैं उसका पता तब लगा लूँगा यदि मुझे यहूदा के सभी परिवारों की तलाशी लेनी पड़े।” {23:24} तब जीपी निवासी जीप को लौट गए। शाऊल वहाँ बाद में गया। दाऊद और उसके लोग माओन की मरुभूमि में थे। वे यशीमोन के दक्षिण में मरुभूमि क्षेत्र में थे। {23:25} शाऊल और उसके लोग दाऊद की खोज करने गये। किन्तु लोगों ने दाऊद को सावधान कर दिया। उन्होंने बताया कि शाऊल उसकी तलाश कर रहा है। दाऊद तब माओन की मरुभूमि में नीचे की ओर चट्टान पर गया। शाऊल ने सुना कि दाऊद माओन की मरुभूमि में गया है। इसलिये शाऊल उस स्थान पर दाऊद को पकड़ने गया। {23:26} शाऊल पर्वत की एक ओर था। दाऊद और उसके लोग उसी पर्वत की दूसरी ओर थे। दाऊद शाऊल से दूर निकल जाने के लिये शीघ्रता कर रहा था। शाऊल और उसके सैनिक पर्वत के चारों ओर दाऊद और उसके लोगों को पकड़ने जा रहे थे। {23:27} तभी शाऊल के पास एक दूत आया। दूत ने कहा, “शीघ्रता करो! पलिश्ती हम पर आक्रमण कर रहें है!” {23:28} इसलिये शाऊल ने दाऊद का पीछा करना छोड़ दिया और पलिश्तियों से लड़ने निकल गया। यही कारण है कि लोग उस स्थान को “फिसलनी चट्टान” कहते हैं। {23:29} दाऊद ने माओन की मरूभूमि को छोड़ा और एनगदी के समीप के किले में गया। {i24:1} दाऊद शाऊल को लज्जित करता है {24:1} जब शाऊल ने पलिश्तियों को पीछा करके भगा दिया तब लोगों ने शाऊल से कहा, “दाऊद एनगदी के पास के मरुभूमि क्षेत्र में है।” {24:2} इसलिये शाऊल ने पूरे इस्राएल में से तीन हजार लोगों को चुना। शाऊल ने इन व्यक्तियों को साथ लिया और दाऊद तथा उसके लोगों की खोज आरम्भ की। उन्होंने “जंगली बकरियों की चट्टान” के समीप खोजा। {24:3} शाऊल सड़क के किनारे भेड़ों के बाड़े के समीप आया। वहाँ समीप ही एक गुफा थी। शाऊल स्वयं गुफा में शौच करने गया। दाऊद और उसके लोग बहुत पीछे उस गुफा में छिपे थे। {24:4} लोगों ने दाऊद से कहा, “आज वह दिन है जिसके विषय में यहोवा ने बातें की थीं। यहोवा ने तुमसे कहा था, ‘मैं तुम्हारे शत्रु को तुम्हें दूँगा, तब तुम जो चाहो अपने शत्रु के साथ कर सकोगे।’” तब दाऊद रेंगकर शाऊल के पास आया। दाऊद ने शाऊल के लबादे का एक कोना काट लिया। शाऊल ने दाऊद को नहीं देखा। {24:5} बाद में, दाऊद को शाऊल के लबादे के एक कोने के काटने का अफसोस हुआ। {24:6} दाऊद ने अपने लोगों से कहा, “यहोवा मुझे अपने स्वामी के साथ कुछ भी ऐसा करने से रोके। शाऊल यहोवा का चुना हुआ राजा है। मुझे शाऊल के विरुद्ध कुछ नहीं करना चाहिए वह यहोवा का चुना हुआ राजा है।” {24:7} दाऊद ने ये बातें अपने लोगों को रोकने के लिये कहीं। दाऊद ने अपने लोगों को शाऊल पर आक्रमण करने नहीं दिया। शाऊल ने गुफा छोड़ी और अपने मार्ग पर चल पड़ा। {24:8} दाऊद गुफा से निकला। दाऊद ने शाऊल को जोर से पुकारा, “मेरे प्रभु महाराज!” शाऊल ने पीछे मुड़ कर देखा। दाऊद ने अपना सिर भूमि पर रखकर प्रणाम किया। {24:9} दाऊद ने शाऊल से कहा, “आप क्यों सुनते हैं जब लोग यह कहते हैं, ‘दाऊद आप पर चोट करने की योजना बना रहा है?’ {24:10} मैं आपको चोट पहुँचाना नहीं चाहता! आप इसे अपनी आँखों से देख सकते हैं! यहोवा ने आज आपको गुफा में मेरे हाथों में दे दिया था। किन्तु मैंने आपको मार डालने से इन्कार किया। मैंने आप पर दया की। मैंने कहा, ‘मैं अपने स्वामी को चोट नहीं पहुँचाऊँगा। शाऊल यहोवा का चुना हुआ राजा है!’ {24:11} मेरे हाथ में इस कपड़े के टुकड़े को देखें। मैंने आपके लबादे का टुकड़ा काट लिया। मैं आपको मार सकता था, किन्तु मैंने यह नहीं किया। अब मैं चाहता हूँ कि आप इसे समझें। मैं चाहता हूँ कि आप यह समझें कि मैं आपके विरुद्ध कोई योजना नहीं बना रहा हूँ। मैंने आपका कोई बुरा नहीं किया। किन्तु आप मेरा पीछा कर रहे हैं और मुझे मार डालना चाहते हैं। {24:12} यहोवा को न्याय करने दो। यहोवा आपको उस अन्याय के लिये दण्ड देगा जो आपने मेरे साथ किया। किन्तु मैं अपने आप आपसे युद्ध नहीं करूँगा। {24:13} पुरानी कहावत है: ‘बुरी चीजें बुरे लोगों से आती हैं।’ “मैंने कुछ भी बुरा नहीं किया है! मैं बुरा व्यक्ति नहीं हूँ! अत: मैं आप पर चोट नहीं करुँगा। {24:14} आप किसका पीछा कर रहे हैं? इस्राएल का राजा किसके विरुद्ध लड़ने आ रहा है? आप ऐसे किसी का पीछा नहीं कर रहे हैं जो आपको चोट पहुँचाएगा। यह ऐसा ही है जैसे आप एक मृत कुत्ते या मच्छर का पीछा कर रहे हैं। {24:15} यहोवा को न्याय करने दो। उसको मेरे और अपने बीच निर्णय देने दो। यहोवा मेरा समर्थन करेगा और दिखायेगा कि मैं सच्चाई पर हूँ। यहोवा आपसे मेरी रक्षा करेगा।” {24:16} दाऊद ने अपना यह कथन समाप्त किया और शाऊल ने पूछा, “मेरे पुत्र दाऊद, क्या यह तुम्हारी आवाज है?” तब शाऊल रोने लगा। शाऊल बहुत रोया। {24:17} शाऊल ने कहा, “तुम सही हो और मैं गलती पर हूँ। तुम हमारे प्रति अच्छे रहे। किन्तु मैं तुम्हारे प्रति बुरा रहा। {24:18} तुमने उन अच्छी बातों को बताया जिन्हें तुमने मेरे प्रति किया। यहोवा मुझे तुम्हारे पास लाया, किन्तु तुम ने मुझे नहीं मार डाला। {24:19} यदि कोई अपने शत्रु को पकड़ता है तो वह उसे बच निकलने नहीं देता। वह अपने शत्रु के लिये अच्छे काम नहीं करता। यहोवा तुमको इसका पुरस्कार दे क्योंकि तुम आज मेरे प्रति अच्छे रहे। {24:20} मैं जानता हूँ कि तुम नये राजा होगे। तुम इस्राएल के राज्य पर शासन करोगे। {24:21} अब मुझसे एक प्रतिज्ञा करो। यहोवा का नाम लेकर यह प्रतिज्ञा करो कि तुम मेरे वंशजों को मारोगे नहीं। प्रतिज्ञा करो कि तुम मेरे पिता के परिवार से मेरा नाम मिटाओगे नहीं।” {24:22} इसलिये दाऊद ने शाऊल से प्रतिज्ञा की। दाऊद ने प्रतिज्ञा की कि वह शाऊल के परिवार को नहीं मारेगा। तब शाऊल लौट गया। दाऊद और उसके लोग किले में चले गये। {i25:1} दाऊद और नाबाल {25:1} शमूएल मर गया। इस्राएल के सभी लोग इकट्ठे हुए और उन्होंने शमूएल की मृत्यु पर शोक प्रकट किया। उन्होंने शमूएल को उसके घर रामा में दफनाया। तब दाऊद पारान की मरुभूमि में चला गया। {25:2} एक व्यक्ति था जो माओन में रहता था। वह व्यक्ति बहुत सम्पन्न था। उसके पास तीन हजार भेड़ें और एक हजार बकरियाँ थीं। वह कर्मेल में अपने धंधे की देखभाल करता था। वह कर्मेल में अपनी भेड़ों की ऊन काटता था। {25:3} उस व्यक्ति का नाम नाबाल था। उसकी पत्नी का नाम अबीगैल था। अबीगैल बुद्धिमती और सुन्दर स्त्री थी। किन्तु नाबल क्रूर और नीच था। नाबाल कालेब के परिवार से था। {25:4} दाऊद मरुभूमि में था और उसने सुना कि नाबाल अपनी भेड़ों की ऊन काट रहा है। {25:5} इसलिये दाऊद ने दस युवकों को नाबाल से बातें करने के लिये भेजा। दाऊद ने कहा, “कर्मेल जाओ। नाबाल से मिलो और उसको मेरी ओर से ‘नमस्ते’ कहो।” {25:6} दाऊद ने उन्हें नाबाल के लिये यह सन्देश दिया, “मुझे आशा है कि तुम और तुम्हारा परिवार सुखी है। मैं आशा करता हूँ कि जो कुछ तुम्हारा है, ठीक — ठाक है। {25:7} मैंने सुना है कि तुम अपनी भेड़ों से ऊन काट रहे हो। तुम्हारे गड़रिये कुछ समय तक हम लोगों के साथ रहे थे और हम लोगों ने उन्हें कोई कष्ट नहीं दिया। जब तक तुम्हारे गड़रिये कर्मेल में रहे हमने उनसे कुछ भी नहीं लिया। {25:8} अपने सेवकों से पूछो और वे बता देंगे कि यह सब सच है। कृपया मेरे युवकों पर दया करो। इस प्रसन्नता के अवसर पर हम तुम्हारे पास पहुँच रहे हैं। कृपया इन युवकों को तुम जो कुछ चाहो, दो। कृपया यह मेरे लिये, अपने मित्र दाऊद के लिये करो।” {25:9} दाऊद के व्यक्ति नाबाल के पास गए। उन्होंने दाऊद का सन्देश नाबाल को दिया। {25:10} किन्तु नाबाल उनके प्रति नीचता से पेश आया। नाबाल ने कहा, “दाऊद है कौन? यह यिशै का पुत्र कौन होता है? इन दिनों बहुत से दास हैं जो अपने स्वामियों के यहाँ से भाग गये हैं! {25:11} मेरे पास रोटी और पानी है और मेरे पास वह माँस भी है जिसे मैंने भेड़ों से ऊन काटने वाले सेवकों के लिये मारा है। किन्तु मैं उसे उन व्यक्तियों को नहीं दे सकता जिन्हें मैं जानता भी नहीं!” {25:12} दाऊद के व्यक्ति लौट गये और नाबाल ने जो कुछ कहा था दाऊद को बता दिया। {25:13} तब दाऊद ने अपने लोगों से कहा, “अपनी तलवार उठाओ!” अत: दाऊद और उसके लोगों ने तलवारें कस लीं। लगभग चार सौ व्यक्ति दाऊद के साथ गये और दो सौ व्यक्ति साज़ो सामान के साथ रुके रहे। {i25:14} अबीगैल आपत्ति को टालती है {25:14} नाबाल के सेवकों में से एक ने नाबाल की पत्नी अबीगैल से बातें कीं। सेवक ने कहा, “दाऊद ने मरुभूमि से अपने दूतों को हमारे स्वामी (नाबाल) के पास भेजा। किन्तु नाबाल दाऊद के दूतों के साथ नीचता से पेश आया। {25:15} ये लोग हम लोगों के प्रति बहुत अच्छे थे। हम लोग भेड़ों के साथ मैदानों में जाते थे। दाऊद के लोग हमारे साथ लगातार रहे और उन्होंने हमारे साथ कुछ भी बुरा नहीं किया। उन्होंने पूरे समय हमारा कुछ भी नहीं चुराया। {25:16} दाऊद के लोगों ने दिन रात हमारी रक्षा की। वे हम लोगों के लिये रक्षक चहारदीवारी की तरह थे, उन्होंने हमारी रक्षा तब की जब हम भेड़ों की रखवाली करते हुए उनके साथ थे। {25:17} अब इस विषय में सोचो और निर्णय करो कि तुम क्या कर सकती हो। नाबाल ने जो कुछ कहा वह मूर्खतापूर्ण था। हमारे स्वामी (नाबाल) और उनके सारे परिवार के लिये भयंकर आपत्ति आ रही है।” {25:18} अबीगैल ने शीघ्रता की और दो सौ रोटियाँ, दाखमधु की दो भरी मशकें, पाँच पकी भेड़ें, लगभग एक बुशल पका अन्न, दो र्क्वाट मुनक्‌के और दो सौ सूखे अंजीर की टिकियाँ लीं। उसने उन्हें गधों पर लादा। {25:19} तब अबीगैल ने अपने सेवकों से कहा, “आगे चलते रहो मैं तुम्हारे पीछे आ रही हूँ।” किन्तु उसने अपने पति से कुछ न कहा। {25:20} अबीगैल अपने गधे पर बैठी और पर्वत की दूसरी ओर पहुँची। वह दूसरी ओर से आते हुए दाऊद और उसके आदमियों से मिली। {25:21} अबीगैल से मिलने के पहले दाऊद कह रहा था, “मैंने नाबाल की सम्पत्ति की रक्षा मरुभूमि में की। मैंने यह व्यवस्था की कि उसकी कोई भेड़ खोए नहीं। मैंने यह सब कुछ बिना लिये किया। मैंने उसके लिये अच्छा किया। किन्तु मेरे प्रति वह बुरा रहा। {25:22} परमेश्वर मुझे दण्डित करे यदि मैं नाबाल के परिवार के किसी व्यक्ति को कल सवेरे तक जीवित रहने दूँ।” {25:23} किन्तु जब अबीगैल ने दाऊद को देखा वह शीघ्रता से अपने गधे पर से उतर पड़ी। वह दाऊद के सामने प्रणाम करने को झुकी। उसने अपना माथा धरती पर टिकाया। {25:24} अबीगैल दाऊद के चरणों पर पड़ गई। उसने कहा, “मान्यवर, कृपा कर मुझे कुछ कहने दें। जो मैं कहूँ उसे सुनें। जो कुछ हुआ उसके लिये मुझे दोष दें। {25:25} मैंने उन व्यक्तियों को नहीं देखा जिन्हें आपने भेजा। मान्यवर, उस नालायक आदमी (नाबाल) पर ध्यान न दें। वह ठीक वही है जैसा उसका नाम है। उसके नाम का अर्थ ‘मूर्ख’ है और वह सचमुच मूर्ख ही है। {25:26} यहोवा ने आपको निरपराध व्यक्तियों को मारने से रोका है। यहोवा शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसकी शपथ खाकर मैं आशा करती हूँ कि आपके शत्रु और जो आपको हानि पहुँचाना चाहते हैं, वे नाबाल की स्थिति में होंगे। {25:27} अब, मैं आपको यह भेंट लाई हूँ। कृपया इन चीज़ों को उन लोगों को दें जो आपका अनुसरण करते हैं। {25:28} अपराध करने के लिये मुझे क्षमा करें। मैं जानती हूँ कि यहोवा आपके परिवार को शक्तिशाली बनायेगा, आपके परिवार से अनेक राजा होंगे। यहोवा यह करेगा क्योंकि आप उसके लिये युद्ध लड़ते हैं। लोग तब आप में कभी बुराई नहीं पाएंगे जब तक आप जीवित रहेंगे। {25:29} यदि कोई व्यक्ति आपको मार डालने के लिये आपका पीछा करता है तो यहोवा आपका परमेश्वर आपके जीवन की रक्षा करेगा। किन्तु यहोवा आपके शत्रुओं के जीवन को ऐसे दूर फेंकेगा जैसे गुलेल से पत्थर फेंका जाता है। {25:30} यहोवा ने आपके लिये बहुत सी अच्छी चीजों को करने का वचन दिया है और यहोवा अपने सभी वचनों को पूरा करेगा। परमेश्वर आपको इस्राएल का शासक बनाएगा। {25:31} और आप इस जाल में नहीं फँसेंगे। आप बुरा काम करने के अपराधी नहीं होंगे। आप निरपराध लोगों को मारने का अपराध नहीं करेंगे। कृपया मुझे उस समय याद रखें जब यहोवा आपको सफलता प्रदान करे।” {25:32} दाऊद ने अबीगैल को उत्तर दिया, “इस्राएल के परमेश्वर, यहोवा की स्तुति करो। परमेश्वर ने तुम्हें मुझसे मिलने भेजा है। {25:33} तुम्हारे अच्छे निर्णय के लिये परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे। तुमने आज मुझे निरपराध लोगों को मारने से बचाया। {25:34} निश्चय ही, जैसे ईस्राएल का परमेश्वर, यहोवा शाश्वत है, यदि तुम शीघ्रता से मुझसे मिलने न आई होती तो कल सवेरे तक नाबाल के परिवार का कोई भी पुरूष जीवित नहीं बच पाता।” {25:35} तब दाऊद ने अबीगैल की भेंट को स्वीकार किया। दाऊद ने उससे कहा, “शान्ति से घर जाओ। मैंने तुम्हारी बातें सुनी हैं और मैं वही करूँगा जो तुमने करने को कहा है।” {i25:36} नाबाल की मृत्यु {25:36} अबीगैल नाबाल के पास लौटी। नाबाल घर में था। नाबाल एक राजा की तरह खा रहा था। नाबाल ने छक कर दाखमधु पी रखी थी और वह प्रसन्न था। इसलिये अबीगैल ने नाबाल को अगले सवेरे तक कुछ भी नहीं बताया। {25:37} अगली सुबह नाबाल का नशा उतरा। अतः उसकी पत्नी ने हर बात बता दी और नाबाल को दिल का दौरा पड़ गया। वह चट्टान की तरह कड़ा हो गया। {25:38} करीब दस दिन बाद यहोवा ने नाबाल को मर जाने दिया। {25:39} दाऊद ने सुना कि नाबाल मर गया है। दाऊद ने कहा, “यहोवा की स्तुति करो! नाबाल ने मेरे विरुद्ध बुरी बातें कीं, किन्तु यहोवा ने मेरा समर्थन किया। यहोवा ने मुझे पाप करने से बचाया और यहोवा ने नाबाल को मर जाने दिया क्योंकि उसने अपराध किया था।” तब दाऊद ने अबीगैल को एक सन्देश भेजा। दाऊद ने उसे अपनी पत्नी होने के लिये कहा। {25:40} दाऊद के सेवक कर्मेल गए और अबीगैल से कहा, “दाऊद ने हम लोगों को तुम्हें लाने के लिये भेजा है। दाऊद चाहता है कि तुम उसकी पत्नी बनो।” {25:41} अबीगैल ने धरती तक अपना माथा झुकाया। उसने कहा, “मैं आपकी दासी हूँ। मैं आपकी सेवा करने के लिये तैयार हूँ। मैं अपने स्वामी (दाऊद) के सेवकों के पैरों को धोने को तैयार हूँ।” {25:42} अबीगेल शीघ्रता से गधे पर बैठी और दाऊद के दूतों के साथ चल दी। अबीगैल अपने साथ पाँच दासियाँ ले गई। वह दाऊद की पत्नी बनी। {25:43} दाऊद ने यिज्रेल की अहिनोअम से भी विवाह किया था। अहिनोअम और अबीगैल दोनों दाऊद की पत्नियाँ थीं। {25:44} शाऊल की पुत्री मीकल भी दाऊद की पत्नी थी। किन्तु शाऊल ने उसे गल्लीम के निवासी लैश के पुत्र पलती को दे दिया था। {i26:1} दाऊद और अबीशै शाऊल के डेरे में प्रवेश करते हैं {26:1} जीप के लोग शाऊल से मिलने गिबा गये। उन्होंने शाऊल से कहा, “दाऊद हकीला की पहाड़ी में छिपा है। यह पहाड़ी यशीमोन के उस पार है।” {26:2} शाऊल जीप की मरुभूमि में गया। शाऊल ने पूरे इस्राएल से अपने द्वारा चुने गए तीन हजार सैनिकों को लिया। शाऊल और ये लोग जीप की मरुभूमि में दाऊद को खोज रहे थे। {26:3} शाऊल ने अपना डेरा हकीला की पहाड़ी पर डाला। डेरा सड़क के किनारे यशीमोन के पार था। दाऊद मरुभूमि में रह रहा था। दाऊद को पता लगा कि शाऊल ने उसका वहाँ पीछा किया है। {26:4} तब दाऊद ने अपने जासूसों को भेजा और दाऊद को पता लगा कि शाऊल हकीला आ गया है। {26:5} तब दाऊद उस स्थान पर गया जहाँ शाऊल ने अपना डेरा डाला था। दाऊद ने देखा कि शाऊल और अब्नेर वहाँ सो रहे थे। (नेर का पुत्र अब्नेर शाऊल की सेना का सेनापति था।) शाऊल डेरे के बीच सो रहा था। सारी सेना शाऊल के चारों ओर थी। {26:6} दाऊद ने हित्ती अहीमेलेक और यरूयाह के पुत्र अबीशै से बातें कीं। (अबीशै योआब का भाई था।) उसने उनसे कहा, “मेरे साथ शाऊल के पास उसके डेरे में कौन चलेगा?” अबीशै ने उत्तर दिया, “मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।” {26:7} रात हुई। दाऊद और अबीशे शाऊल के डेरे में गए। शाऊल डेरे के बीच में सोया हुआ था। उसका भाला उसके सिर के पास जमीन में गड़ा था। अब्नेर और दूसरे सैनिक शाऊल के चारों ओर सोए थे। {26:8} अबीशै ने दाऊद से कहा, “आज परमेश्वर ने तुम्हारे शत्रु को पराजित करने दिया है। मुझे शाऊल को उसके भाले से ही जमीन में टाँक देने दो। मैं इसे एक ही बार में कर दूँगा!” {26:9} किन्तु दाऊद ने अबीशै से कहा, “शाऊल को न मारो! जो कोई यहोवा के चुने राजा को मारता है वह अवश्य दण्डित होता है! {26:10} यहोवा शाश्वत है, अत: वह शाऊल को स्वयं दण्ड देगा। संभव है शाऊल स्वाभाविक मृत्यु प्राप्त करे या संभव है शाऊल युद्ध में मारा जाये। {26:11} किन्तु मैं प्रार्थना करता हूँ कि यहोवा मुझे अपने चुने हुए राजा को मुझसे चोट न पहुँचवाये। अब पानी के घड़े और भाले को उठाओ जो शाऊल के सिर के पास है। तब हम लोग चलें।” {26:12} इसलिए दाऊद ने भाले और पानी के घड़े को लिया जो शाऊल के सिर के पास थे। तब दाऊद और अबीशै ने शाऊल के डेरे को छोड़ दिया। किसी ने यह होते नहीं देखा। कोई व्यक्ति इसके बारे में न जान सका। कोई भी व्यक्ति जागा भी नहीं। शाऊल और उसके सैनिक सोते रहे क्योंकि यहोवा ने उन्हें गहरी नींद में डाल दिया था। {i26:13} दाऊद शाऊल को फिर लज्जित करता है {26:13} दाऊद दूसरी ओर पार निकल गया। शाऊल के डेरे से घाटी के पार दाऊद पर्वत की चोटी पर खड़ा था। दाऊद और शाऊल के डेरे बहुत दूरी पर थे। {26:14} दाऊद ने सेना को और नेर के पुत्र अब्नेर को जोर से पुकारा, “अब्नेर मुझे उत्तर दो!” अब्नेर ने पूछा, “तुम कौन हो? तुम राजा को क्यों बुला रहे हो?” {26:15} दाऊद ने उत्तर दिया, “तुम पुरुष हो। क्यों क्या तुम नहीं हो? और तुम इस्राएल में किसी भी अन्य व्यक्ति से बेहतर हो। क्यों यह ठीक है? तब तुमने अपने स्वामी राजा की रक्षा क्यों नहीं की? एक साधारण व्यक्ति तुम्हारे डेरे में तुम्हारे स्वामी राजा को मारने आया। {26:16} तुमने भयंकर भूल की। यहोवा शाश्वत है! अत: तुम्हें और तुम्हारे सैनिकों को मर जाना चाहिये। क्यों? क्योंकि तुमने अपने स्वामी यहोवा के चुने राजा की रक्षा नहीं की। शाऊल के सिर के पास भाले और पानी के घड़े की खोज करो। वे कहाँ हैं?” {26:17} शाऊल दाऊद की आवाज पहचानता था। शाऊल ने कहा, “मेरे पुत्र दाऊद, क्या यह तुम्हारी आवाज है?” दाऊद ने उत्तर दिया, “मेरे स्वामी और राजा, हाँ, यह मेरी आवाज है?” {26:18} दाऊद ने यह भी पूछा, “महाराज, आप मेरा पीछा क्यों कर रहे हैं? मैंने कौन सी गलती की है? मैं क्या करने का अपराधी हूँ? {26:19} मेरे स्वामी और राजा, मेरी बात सुनें! यदि यहोवा ने आपको मेरे विरुद्ध क्रोधित किया है तो उसे एक भेंट स्वीकार करने दें। किन्तु यदि लोगों ने मेरे विरुद्ध आपको क्रोधित किया है तो यहोवा द्वारा उनके लिये कुछ बुरी आपत्ति आने दें। लोगों ने मुझे इस देश को छोड़ने पर विवश किया, जिसे यहोवा ने मुझे दिया है। लोगों ने मुझसे कहा, ‘जाओ विदेशियों के साथ रहो। जाओ अन्य देवताओं की पूजा करो।’ {26:20} मुझे अब यहोवा की उपस्थिति से दुर न मरने दो। इस्राएल का राजा एक मच्छर की खोज में निकला है। आप उस व्यक्ति की तरह हैं जो पहाड़ों में तीतर का शिकार करने निकला हो।” {26:21} तब शाऊल ने कहा, “मैंने पाप किया है। मेरे पुत्र दाऊद लौट आओ। आज तुमने दिखा दिया कि मेरा जीवन तुम्हारे लिये महत्व रखता है। इसलिये मैै तुम्हें चोट पहुँचाने का प्रयत्न नहीं करूँगा। मैंने मूर्खतापूर्ण काम किया है। मैंने एक भंयकर भूल की है।” {26:22} दाऊद ने उत्तर दिया, “राजा का भाला यह है। अपने किसी युवक को यहाँ आने दो और वह ले जाए। {26:23} यहोवा मनुष्यों के कर्म का फल देता है, यदि वह अच्छा करता है तो उसे पुरस्कार देता है, और वह उसे दण्ड देता है जो बुरा करता है। यहोवा ने आज मुझे आपको पराजित करने दिया, किन्तु मैं यहोवा के चुने हुए राजा पर चोट नहीं करूँगा। {26:24} आज मैंने आपको दिखा दिया कि आपका जीवन मेरे लिये महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार यहोवा दिखायेगा कि मेरा जीवन उसके लिये महत्वपूर्ण है। यहोवा मेरी रक्षा हर एक आपत्ति से करेगा।” {26:25} शाऊल ने दाऊद से कहा, “मेरे पुत्र दाऊद, परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे। तुम महान कार्य करोगे और सफल होओगे।” दाऊद अपनी राह गया, और शाऊल घर लौट गया। {i27:1} दाऊद पलिश्तियों के साथ रहता है: {27:1} किन्तु दाऊद ने अपने मन में सोचा, “शाऊल मुझे किसी दिन पकड़ लेगा। सर्वोत्तम बात मैं यही कर सकता हूँ कि पलिश्तियों के देश में बच निकलूँ। तब शाऊल मेरी खोज इस्राएल में बन्द कर देगा। इस प्रकार मैं शाऊल से बच निकलूँगा।” {27:2} इसलिए दाऊद और उसके छ: सौ लोगों ने इस्राएल छोड़ दिया। वे माओक के पुत्र आकीश के पास गए। आकीश गत का राजा था। {27:3} दाऊद, उसके लोग और उनके परिवार आकीश के साथ गत में रहने लगे। दाऊद के साथ उसकी दो पत्नियाँ थीं। वे यिज्रेली की अहीनोअम और कर्मेल की अबीगैल थी। अबीगैल नाबाल की विधवा थी। {27:4} लोगों ने शाऊल से कहा कि दाऊद गत को भाग गया है और शाऊल ने उसकी खोज बन्द कर दी। {27:5} दाऊद ने आकीश से कहा, “यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे अपने देश के नगरों में से एक में स्थान दे दें। मैं आपका केवल सेवक मात्र हूँ। मुझे वहाँ रहना चाहिये, आपके साथ यहाँ राजधानी नगर में नहीं।” {27:6} उस दिन आकीश ने दाऊद को सिकलग नगर दिया और तब से सिकलग सदा यहूदा के राजाओं का रहा है। {27:7} दाऊद पलिश्तियों के साथ एक वर्ष और चार महीने रहा। {i27:8} दाऊद का आकीश राजा को बहकाना {27:8} दाऊद और उसके लोग अमालेकी तथा गशूर में रहने वाले लोगों के साथ युद्ध करने गये। दाऊद के लोगों ने उनको हराया और उनकी सम्पत्ति ले ली। लोग उस क्षेत्र में शूर के निकट तेलम से लेकर लगातार मिस्र तक रहते थे। {27:9} दाऊद उस क्षेत्र में लोगों से लड़ा। दाऊद ने किसी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा। दाऊद ने उनकी सभी भेड़ें, पशु, गधे, ऊँट और कपड़े लिये। तब वह इसे वापस आकीश के पास लाया। {27:10} दाऊद ने यह कई बार किया। हर बार आकीश पूछता कि वह कहाँ लड़ा और उन चीज़ों को कहाँ से लाया। दाऊद ने कहा, “मैं यहूदा के दक्षिणी भाग में लड़ा।” या “मैं यरहमेलियों के दक्षिणी भाग में लड़ा या मैं केनियों के दक्षिणी भाग में लड़ा।” {27:11} दाऊद गत में कभी जीवित स्त्री या पुरुष नहीं लाया। दाऊद ने सोचा, “यदि हम किसी व्यक्ति को जीवित रहने देते हैं तो वह आकीश से कह सकता है कि वस्तुतः मैंने क्या किया है।” दाऊद ने पूरे समय, जब तक पलिश्तियों के देश में रहा, यही किया। {27:12} आकीश ने दाऊद पर विश्वास करना आरम्भ कर दिया। आकीश ने अपने आप सोचा, “अब दाऊद के अपने लोग ही उससे घृणा करते हैं। इस्राएली दाऊद से बहुत अधिक घृणा करते हैं। अब दाऊद मेरी सेवा करता रहेगा।” {i28:1} पलिश्ती युद्ध की तैयारी करते हैं: {28:1} बाद में पलिश्तियों ने अपनी सेना को इस्राएल के विरुद्ध लड़ने के लिये इकट्ठा किया। आकीश ने दाऊद से कहा, “क्या तुम समझते हो कि तुम्हें और तुम्हारे व्यक्तियों को इस्राएलियों के विरुद्ध मेरे साथ लड़ने जाना चाहिये?” {28:2} दाऊद ने उत्तर दिया, “निश्चय ही! तब आप स्वयं ही देखें कि मैं क्या कर सकता हूँ!” आकीश ने कहा, “बहुत अच्छा, मैं तुम्हें अपना अंगरक्षक बनाऊँगा। तुम सदा मेरी रक्षा करोगे।” {i28:3} शाऊल और स्त्री एन्दोर में {28:3} शमूएल मर गया था। सभी इस्राएलियों ने शमूएल की मृत्यु पर शोक मनाया था। उन्होंने शमूएल के निवास स्थान रामा में उसे दफनाया था। इसके पहले शाऊल ने ओझाओं और भाग्यफल बताने वालों को इस्राएल छोड़ने को विवश किया था। {28:4} पलिश्तियों ने युद्ध की तैयारी की। वे शूनेम आए और उस स्थान पर उन्होंने अपना डेरा डाला। शाऊल ने सभी इस्राएलियों को इकट्ठा किया और अपना डेरा गिलबो में डाला। {28:5} शाऊल ने पलिश्ती सेना को देखा और वह भयभीत हो गया। उसका हृदय भय से धड़कने लगा। {28:6} शाऊल ने यहोवा से प्रार्थना की, किन्तु यहोवा ने उसे उत्तर नहीं दिया। परमेश्वर ने शाऊल से स्वप्न में बातें नहीं की। परमेश्वर ने उसे उत्तर देने के लिये ऊरीम का उपयोग भी नहीं किया और परमेश्वर ने शाऊल से बात करने के लिये भविष्यवक्ताओं का उपयोग नहीं किया। {28:7} अन्त में शाऊल ने अपने अधिकारियों से कहा, “मेरे लिये ऐसी स्त्री का पता लगाओ जो ओझा हो। तब मैं उससे पूछने जा सकता हूँ कि इस युद्ध में क्या होगा।” उसके अधिकारियों ने उत्तर दिया, “एन्दोर में एक ओझा है।” {28:8} शाऊल ने भिन्न प्रकार के वस्त्र पहने। शाऊल ने यह इसलिये किया कि कोई व्यक्ति यह न जान सके कि वह कौन है। रात को वह अपने दो व्यक्तियों के साथ उस स्त्री से मिलने गया। शाऊल ने उस स्त्री से कहा, “प्रेत के द्वारा मुझे मेरा भविष्य बताओ। उस व्यक्ति को बुलाओ जिसका मैं नाम लूँ।” {28:9} किन्तु उस स्त्री ने शाऊल से कहा, “तुम जानते ही हो कि शाउल ने क्या किया है! उसने ओझाओं और भाग्यफल बताने वालों को इस्राएल देश छोड्ने को विवश किया है। तुम मुझे जाल में फँसाना और मार डालना चाहते हो।” {28:10} शाऊल ने यहोवा का नाम लिया और उस स्त्री से प्रतिज्ञा की, “निश्चय ही यहोवा शाश्वत है, अत: तुमको यह करने के लिये दण्ड नहीं मिलेगा।” {28:11} स्त्री ने पूछा, “तुम किसे चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये यहाँ बुलाऊँ?” शाऊल ने उत्तर दिया, “शमूएल को बुलाओ” {28:12} और यह हुआ! स्त्री ने शमूएल को देखा और जोर से चीख उठी। उसने शाऊल से कहा “तुमने मुझे धोखा दिया! तुम शाऊल हो!” {28:13} राजा ने स्त्री से कहा, “तुम डरो नहीं! तुम क्या देख रही हो?” उस स्त्री ने कहा, “मैं एक आत्मा को जमीन से निकल कर आती देख रही हूँ।” {28:14} शाऊल ने पूछा, “वह कैसा दिखाई पड़ता है?” स्त्री ने उत्तर दिया, “वह लबादा पहने एक बूढ़े की तरह दिखाई पड़ता है।” शाऊल ने समझ लिया कि वह शमूएल था। शाऊल ने प्रणाम किया। उसका माथा जमीन से जा लगा। {28:15} शमूएल ने शाऊल से कहा, “तुमने मुझे क्यों परेशान किया? तुमने मुझे ऊपर क्यों बुलाया?” शाऊल ने उत्तर दिया, “मैं मुसीबत में हूँ! पलिश्ती मेरे विरुद्ध लड़ने आए हैं और परमेश्वर ने मुझे छोड़ दिया है। परमेश्वर अब मुझको उत्तर नहीं देगा। वह मुझे उत्तर देने के लिये नबी या स्वप्न का उपयोग नहीं करेगा। यही कारण है कि मैंने तुमको बुलाया। मैं चाहता हूँ कि तुम बताओ कि मैं क्या करूँ!” {28:16} शमूएल ने कहा, “यहोवा ने तुमको छोड़ दिया। अब वह तुम्हारे पड़ोसी (दाऊद) के साथ है। इसलिये तुम मुझको तंग क्यों करते हो? {28:17} यहोवा ने वही किया जो उसने करने को कहा था। उसने मेरा उपयोग तुम्हें इन चीजों को बताने के लिये किया। यहोवा तुम से राज्य छीन रहा है और उसने वह तुम्हारा राज्य तुम्हारे पड़ोसियों को दे रहा है। वह पड़ोसी दाऊद है। {28:18} तुमने यहोवा की आज्ञा का पालन नहीं किया। तुमने अमालेकियों को नष्ट नहीं किया और उन्हें नहीं दिखाया कि यहोवा उन पर कितना क्रोधित है। यही कारण है कि यहोवा ने तुम्हारे साथ आज यह किया है। {28:19} यहोवा तुम्हें और इस्राएल को पलिश्तियों को देगा। यहोवा इस्राएल की सेना को पलिश्तियों से पराजित करायेगा और कल तुम और तुम्हारे पुत्र यहाँ मेरे साथ होंगे!” {28:20} शाऊल तेजी से भूमि पर गिर पड़ा और वहाँ पड़ा रहा। शाऊल शमूएल द्वारा कही गई बातों से डरा हुआ था। शाऊल बहुत कमजोर भी था क्योंकि उसने उस पूरे दिन रात भोजन नहीं किया था। {28:21} स्त्री शाऊल के पास आई। उसने देखा कि शाऊल सचमुच भयभीत था। उसने कहा, “देखो, मैं आपकी दासी हूँ। मैंने आपकी आज्ञा का पालन किया है। मैंने अपने जीवन को ख़तरे में डाला और जो आपने कहा, किया। {28:22} अब कृपया मेरी सुनें। मुझे आपको कुछ भोजन देने दें। आपको अवश्य खाना चाहिये। तब आप में इतनी शक्ति आयेगी कि आप अपने रास्ते जा सकें।” {28:23} लेकिन शाऊल ने इन्कार किया। उसने कहा, “मैं खाऊँगा नहीं।” शाऊल के अधिकारियों ने उस स्त्री का साथ दिया और उससे खाने के लिये प्रार्थना की। शाऊल ने उनकी बात सुनी। वह भूमि से उठा और बिस्तर पर बैठ गया। {28:24} उस स्त्री के घर में एक मोटा बछड़ा था। उसने शीघ्रता से बछड़े को मारा। उसने कुछ आटा लिया और उसे अपने हाथों से गूँदा। तब उसने बिना खमीर की कुछ रोटियाँ बनाईं। {28:25} स्त्री ने भोजन शाऊल और उसके अधिकारियों के सामने रखा। शाऊल और उसके अधिकारियों ने खाया। तब वे उसी रात को उठे और चल पड़े। {i29:1} “दाऊद हमारे साथ नहीं आ सकता है!” {29:1} पलिश्तियों ने अपने सभी सैनिकों को आपे में इकट्ठा किया। इस्राएलियों ने चश्मे के पास यिज्रेल में डेरा डाला। {29:2} पलिश्ती शासक अपनी सौ एवं हजार पुरुषों की टुकड़ियों के साथ कदम बढ़ा रहे थे। दाऊद और उसके लोग आकीश के साथ कदम बढ़ाते हुए चल रहे थे। {29:3} पलिश्ती अधिकारियों ने पूछा, “ये हिब्रू यहाँ क्या कर रहे हैं?” आकीश ने पलिश्ती अधिकारियों से कहा, “यह दाऊद है। दाऊद शाऊल के अधिकारियों में से एक था। दाऊद मेरे पास बहुत समय से है। मैं दाऊद में कोई दोष तब से नहीं देखता जब से इसने शाऊल को छोड़ा और मेरे पास आया।” {29:4} किन्तु पलिश्ती अधिकारी आकीश पर क्रोधित हुए। उन्होंने कहा, “दाऊद को वापस भेजो! दाऊद को उस नगर में वापस जाना चाहिये जिसे तुमने उसको दिया है। वह हम लोगों के साथ युद्ध में नहीं जा सकता। यदि वह यहाँ है तो हम अपने डेरे में अपने एक शत्रु को रखे हुए हैं। वह हमारे अपने आदमियों को मार कर अपने राजा (शाऊल) को प्रसन्न करेगा। {29:5} दाऊद वही व्यक्ति है जिसके लिये इस गाने में इस्राएली गाते और नाचते हैं: “शाऊल ने हजारों शत्रुओं को मारा। किन्तु दाऊद ने दसियों हजार शत्रुओं को मार!” {29:6} इसलिये आकीश ने दाऊद को बुलाया। आकीश ने कहा, “यहोवा शाश्वत है, तुम हमारे भक्त हो। मैं प्रसन्न होता कि तुम मेरी सेना में सेवा करते। जिस दिन से तुम मेरे पास आए हो, मैंने तुममें कोई दोष नहीं पाया है। पलिश्ती शासक भी समझते हैं कि तुम अच्छे व्यक्ति हो {29:7} शान्ति से लौट जाओ। पलिश्ती शासकों के विरुद्ध कुछ न करो।” {29:8} दाऊद ने पुछा, “मैंने क्या गलती की है? तुमने मेरे भीतर जब से मैं तुम्हारे पास आया तब से आज तक कौन सी बुराई देखी? मेरे प्रभु, राजा के शत्रुओं के विरुद्ध तुम मुझे क्यों नहीं लड़ने देते?” {29:9} आकीश ने उत्तर दिया, “मैं जानता हूँ कि मैं तुम्हें पसन्द करता हूँ। तुम परमेश्वर के यहाँ से स्वर्गदूत के समान हो। किन्तु पलिश्ती अधिकारी अब भी कहते हैं, ‘दाऊद हम लोगों के साथ युद्ध में नहीं जा सकता।’ {29:10} सवेरे भोर होते ही तुम और तुम्हारे लोग वापस जायेंगे। उस नगर को लौट जाओ जिसे मैंने तुम्हें दिया है। उन पर ध्यान न दो जो बुरी बातें अधिकारी लोग तुम्हारे बारे में कहते हैं। अत: ज्योंही सूर्य निकले तुम चल पड़ो।” {29:11} इसलिए दाऊद और उसके लोग सवेरे तड़के उठे। वे पलिश्तियों के देश में लौट गए और पलिश्ती यिज्रेल को गये। {i30:1} अमालेकी सिकलग पर आक्रमण करते हैं {30:1} तीसरे दिन, दाऊद और उसके लोग सिकलग पहुँच गए। उन्होंने देखा कि अमालेकियों ने सिकलग पर आक्रमण कर रखा है। अमालेकियों ने नेगव क्षेत्र पर आक्रमण कर रखा था। उन्होंने सिकलग पर आक्रमण किया था और नगर को जला दिया था। {30:2} वे सिकलग की स्त्रियों को बन्दी बना कर ले गए थे। वे जवान और बूढ़े सभी लोगों को ले गए थे। उन्होंने किसी व्यक्ति को मारा नहीं। वे केवल उनको लेकर चले गए थे। {30:3} दाऊद और उसके लोग सिकलग आए और उन्होंने नगर को जलते पाया। उनकी पत्नियाँ, पुत्र और पुत्रियाँ जा चुके थे। अमालेकी उन्हें ले गए थे। {30:4} दाऊद और उसकी सेना के अन्य लोग जोर से तब तक रोते रहे जब तक वे कमजोरी के कारण रोने के लायक नहीं रह गये। {30:5} आमालेकी दाऊद की दो पत्नियाँ यिज्रेल की अहीनोअम तथा कर्मेल के नाबाल की विधवा अबीगैल को ले गए थे। {30:6} सेना के सभी लोग दु: खी और क्रोधित थे क्योंकी उनकि पुत्र — पुत्रियाँ बन्दी बना ली गई थीं। वे पुरुष दाऊद को पत्थरों से मार डालने की बात कर रहे थे। इससे दाऊद बहुत घबरा गया। किन्तु दाऊद ने अपने यहोवा परमश्वर में शक्ति पाई। {30:7} दाऊद ने याजक एब्यातार से कहा, “एपोद लाओ।” {30:8} तब दाऊद ने यहोवा से प्रार्थना की, “क्या मुझे उन लोगों का पीछा करना चाहिए जो हमारे परिवारों को ले गये हैं? क्या मैं उन्हें पकड़ लूँगा।” यहोवा ने अत्तर दिया, “उनका पीछा करो। तुम उन्हें पकड़ लोगे। तुम अपने परिवारों को बचा लोगे।” {i30:9} दाऊद और उसके व्यक्ति मिस्री दासों को पकड़ते हैं {30:9} दाऊद ने अपने छ: सौ व्यक्तियों को साथ लिया और बसोर की घाटियों में गया। उनमें से कुछ लोग उसी स्थान पर ठहर गये। {30:10} लगभग दो सौ व्यक्ति ठहर गये क्योंकि वे अत्याधिक थके और कमजोर होने से जा नहीं सकते थे। इसलिए दाऊद और चार सौ व्यक्तियों ने अमालेकी का पीछा किया। {30:11} दाऊद के व्यक्तियों ने एक मिस्री को खेत में देखा। वे मिस्री को दाऊद के पास ले गये। उन्होंने पीने के लिये थोड़ा पानी और खाने के लिये भोजन दिया। {30:12} उन्होंने मिस्री को अंजीर की टिकिया और सूखे अगूँर के दो गुच्छे दिये। भोजन के बाद वह कुछ स्वस्थ हुआ। उसने तीन दिन और तीन रात से न कुछ खाया था, न ही पानी पीया था। {30:13} दाऊद ने मिस्री से पूछा, “तुम्हारा स्वामी कौन है? तुम कहाँ से आये हो?” मिस्री ने उत्तर दिया, “मैं मिस्री हूँ। मैं एक अमालेकी का दास हूँ। तीन दिन पहले मैं बीमार पड़ गया और मेरे स्वामी ने मुझे छोड़ दिया। {30:14} हम लोगों ने नेगव पर आक्रमण किया जहाँ करेती रहते हैं। हम लोगों ने यहूदा प्रदेश पर आक्रमण किया और नेगव क्षेत्र पर भी जहाँ कालेब लोग रहते हैं। हम लोगों ने सिकलग को भी जलाया।” {30:15} दाऊद ने मिस्री से पूछा, “क्या तुम उन लोगों के पास हमें पहुँचाओगे जो हमारे परिवारों को ले गए हैं?” मिस्री ने उत्तर दिया, “तुम परमेश्वर के सामने प्रतिज्ञा करो कि तुम मुझे न मारोगे, न ही मुझे मेरे स्वामी को दोगे। यदि तुम ऐसा करोगे तो मैं उनको पकड़वाने में तुम्हारी सहायता करूँगा।” {i30:16} दाऊद अमालेकी को हराता है {30:16} मिस्री ने दाऊद को अमालेकियों के यहाँ पहुँचाया। वे चारों ओर जमीन पर मदिरा पीते और भोजन करते हुए पड़े थे। वे पलिश्तियों और यहूदा के प्रदेश से जो बहुत सी चीजें लाए थे, उसी से उत्सव मना रहे थे। {30:17} दाऊद ने उन्हें हराया और उनको मार डाला। वे सूरज निकलने के अगले दिन की शाम तक लड़े। अमालेकियों में से चार सौ युवकों के अतिरिक्त जो ऊँटों पर चढ कर भाग निकले, कोई बच न सका। {30:18} दाऊद को अपनी दोनों पत्नियाँ वापस मिल गईं। दाऊद ने वे सभी चीज़ें वापस पाईं जिन्हें अमालेकी ले आए थे। {30:19} कोई चीज नहीं खोई। उन्होंने सभी बच्चे और बूढ़ों को पा लिया। उन्होंने अपने सभी पुत्रों और पुत्रियों को प्राप्त किया। उन्हें अपनी कीमती चीज़ें भी मिल गईं। उन्होंने अपनी हर एक चीज वापस पाई जो अमालेकी ले गए थे। दाऊद हर चीज लौटा लाया। {30:20} दाऊद ने सारी भेड़ें और पशु ले लिये। दाऊद के व्यक्तियों ने इन जानवरों को आगे चलाया। दाऊद के लोगो ने कहा, “ये दाऊद के पुरस्कार हैं।” {i30:21} सभी लोगों का भाग बराबर होगा {30:21} दाऊद वहाँ आया जहाँ दो सौ व्यक्ति बसोर की घाटियों में ठहरे थे। ये वे व्यक्ति थे जो अत्याधिक थके और कमजोर थे। अत: दाऊद के साथ नहीं जा सके थे। वे लोग दाऊद और उन सैनिकों का स्वागत: करने बाहर आये जो उसके साथ गये थे। बसोर की घाटियों में ठहरे व्यक्तियों ने दाऊद और उसकी सेना को बधाई दी जैसे ही वे निकट आए। {30:22} किन्तु जो टुकड़ी दाऊद के साथ गई थी उसमें कुछ बुरे और परेशानी उत्पन्न करने वाले व्यक्ति भी थे। उन परेशानी उत्पन्न करने वालों ने कहा, “ये दो सौ व्यक्ति हम लोगों के साथ नहीं गये। इसलिये जो चीजें हम लाये हैं उनमें से कुछ भी हम इन्हें नहीं देंगे। ये व्यक्ति केवल अपनी पत्नियाँ और बच्चों को ले सकते हैं।” {30:23} दाऊद ने उत्तर दिया, “नहीं, मेरे भाईयो ऐसा मत करो! इस विषय में सोचो कि यहोवा ने हमें क्या दिया है! यहोवा ने हम लोगों को उस शत्रु को पराजित करने दिया है जिसने हम पर आक्रमण किया। {30:24} जो तुम कहते हो उसे कोई नहीं सुनेगा। उन व्यक्तियों का हिस्सा भी, जो वितरण सामग्री के साथ ठहरे, उतना ही होगा जितना उनका जो युद्ध में गए। सभी का हिस्सा एक समान होगा।” {30:25} दाऊद ने इसे इस्राएल के लिये आदेश और नियम बना दिया। यह नियम अब तक लागू है और चला आ रहा है। {30:26} दाऊद सिकलग में आया। तब उसने उन चीजों में से, जो अमालेकियों से ली थीं, कुछ को अपने मित्रों यहूदा नगर के प्रमुखों के लिये भेजा। दाऊद ने कहा, “ये भेटें आप लोगों के लिये उन चीज़ों में से हैं जिन्हें हम लोगों ने यहोवा के शत्रुओं से प्राप्त कीं।” {30:27} दाऊद ने उन चीजों में से जो अमालेकियों से प्राप्त हुई थीं। कुछ को बेतेल के प्रमुखों, नेगेव के रामोत यत्तीर, {30:28} अरोएर, सिपमोत, एश्तमो, {30:29} राकाल, यरहमेलियों और केनियों के नगरों, {30:30} होर्मा, बोराशान, अताक, {30:31} और हेब्रोन को भेजा। दाऊद ने उन चीज़ों में से कुछ को उन सभी स्थानों के प्रमुखों को भेजा जहाँ दाऊद और उसके लोग रहे थे। {i31:1} शाऊल की मृत्यु {31:1} पलिश्ती इस्राएल के विरुद्ध लड़े, और इस्राएली पलिश्तियों के सामने से भाग खड़े हुए। बहुत से इस्राएली गिलबो पर्वत पर मारे गये। {31:2} पलिश्ती शाऊल और उसके पुत्रों से बड़ी वीरता से लड़े। पलिश्तियों ने शाऊल के पुत्रों योनातान, अबीनादाब और मल्कीश को मार डाला। {31:3} युद्ध शाऊल के विरुद्ध बहुत बुरा रहा। धनुर्धारियों ने शाऊल पर बाण बरसाये और शाऊल बुरी तरह घायल हो गया। {31:4} शाऊल ने अपने उस नौकर से, जो कवच ले कर चल रहा था, कहा, “अपनी तलवार निकालो और मुझे मार डालो। तब वे विदेशी मुझे चोट पहुँचाने और मेरा मजाक उड़ाने नहीं आएंगे।” किन्तु शाऊल के कवचवाहक ने ऐसा करना अस्वीकार कर दिया। शाऊल का सहायक बहुत भयभित था। इसलिये शाऊल ने अपनी तलवार ली और अपने को मार डाला। {31:5} कवचवाहक ने देखा कि शाऊल मर गया। इसलिये उसने भी अपनी तलवार से अपने को मार डाला। वह वहीं शाऊल के साथ मर गया। {31:6} इस प्रकार शाऊल, उसके तीन पुत्र और उसका कवचवाहक सभी एक साथ उस दिन मरे। {i31:7} पलिश्ती शाऊल की मृत्यु से प्रसन्न हैं {31:7} इस्राएलियों ने जो घाटी की दूसरी ओर रहते थे, देखा, कि इस्राएली सेना भाग रही थी। उन्होंने देखा कि शाऊल और उसके पुत्र मर गए हैं। इसलिये उन इस्राएलियों ने अपने नगर छोड़े और भाग निकले। तब पलिश्ती आए और उन्होंने उन नगरों को ले लिया। {31:8} अगले दिन, पलिश्ती शवों से चीज़ें लेने आए। उन्होंने शाऊल और उसके तीनों पुत्रों को गिलबो पर्वत पर मरा पाया। {31:9} पलिश्तियों ने शाऊल का सिर काट लिया और उसका कवच ले लिया। वे इस समाचार को पलिश्ती लोगों और अपनी देवमूर्तियों के पूजास्थल तक ले गये। {31:10} उन्होंने शाऊल के कवच को आश्तोरेत के पूजास्थल में रखा। पलिश्तियों ने शाऊल का शव बेतशान की दीवार पर लटका दिया। {31:11} याबेश गिलाद के लोगों ने उन सभी कारनामों को सुना जो पलिश्तियों ने शाऊल के साथ किये। {31:12} इसलिये याबेश के सभी सैनिक बेतशान पहुँचे। वे सारी रात चलते रहे! तब उन्होंने शाऊल के शव को बेतशान की दीवार से उतारा। उन्होंने शाऊल के पुत्रों के शवों को भी उतारा। तब वे इन शवों को याबेश ले आए। वहाँ याबेश के लोगों ने शाऊल और उसके तीनों पुत्रों के शवों को जलाया। {31:13} तब इन लोगों ने शाऊल और उसके पुत्रों की अस्थियाँ लीं और याबेश में पेड़ के नीचे दफनायीं। तब याबेश के लोगों ने शोक मनाया। याबेश के लोगों ने सात दिन तक खाना नहीं खाया।