{i1:1} अहज्याह के लिये सन्देश {1:1} अहाब के मरने के बाद मोआब इस्राएल के शासन से स्वतन्त्र हो गया। {1:2} एक दिन अहज्याह शोमरोन में अपने घर की छत पर था। अहज्याह अपने घर की छत के लकड़ी के छज्जे से गिर गया। वह बुरी तरह घायल हो गया। अहज्याह ने सन्देशवाहकों को बुलाया और उनसे कहा, “एक्रोन के देवता बालजबूब के याजकों के पास जाओ। उनसे पूछो कि क्या मैं अपनी चोटों से स्वस्थ हो सकूँगा।” {1:3} किन्तु यहोवा के दूत ने तिशबी एलिय्याह से कहा, “राजा अहज्याह ने शोमरोन से कुछ सन्देशवाहक भेजे हैं। जाओ और इन लोगों से मिलो। उनसे यह कहो, ‘इस्राएल में परमेश्वर है! तो भी तुम लोग एक्रोन के देवता बलाजबूब से प्रश्न करने क्यों जा रहे हो {1:4} राजा अहज्याह से ये बातें कहोः तुमने बालजबूब से प्रश्न करने के लिये सन्देशवाहक भेजे। क्योंकि तुमने यह किया, इस कारण यहोवा कहता हैः तुम अपने बिस्तर से उठ नहीं पाओगे। तुम मरोगे!’” तब एलिय्याह चल पड़ा और उसने अहज्याह के सेवकों से यही शब्द कहे। {1:5} सन्देशवाहक अहज्याह के पास लौट आए। अहज्याह ने सन्देशवाहकों से पूछा, “तुम लोग इतने शीघ्र क्यों लौटे।” {1:6} सन्देशवाहकों ने अहज्याह से कहा, “एक व्यक्ति हमसे मिलने आया। उसने हम लोगों से उस राजा के पास वापस जाने को कहा जिसने हमें भेजा था और उससे यहोवा ने जो कहा, वह कहने को कहा, ‘इस्राएल में एक परमेश्वर है! तो तुम ने एक्रोन के देवता बालजबूब से प्रश्न करने के लिये सन्देशवाहकों को क्यों भेजा। क्योंकि तुमने यह किया है इस कारण तुम अपने बिस्तर से नहीं उठोगे। तुम मरोगे!’” {1:7} अहज्याह ने संदेशवाहकों से पूछा, “जो व्यक्ति तुमसे मिला और जिसने तुमसे ऐसा कहा वह कैसा दिखाई पड़ता था” {1:8} सन्देशवाहकों ने अहज्याह से कहा, “वह व्यक्ति एक रोयेंदार अँगरखा पहने था और अपनी कमर में एक चमड़े की पेटी बाँधे था।” तब अहज्याह ने कहा, “यह तिशबी एलिय्याह है!” {i1:9} अहज्याह द्वारा भेजे गए सेनापतियों को आग नष्ट करती है {1:9} अहज्याह ने एक सेनापति और पचास पुरुषों को एलिय्याह के पास भेजा। सेनापति एलिय्याह के पास गया। उस समय एलिय्याह एक पहाड़ी की चोटी पर बैठा था। सेनापति ने एलिय्याह से कहा, “परमेश्वर के जन राजा का आदेश है, ‘नीचे आओ।’” {1:10} एलिय्याह ने पचास सैनिकों के सेनापति को उत्तर दिया, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ तो स्वर्ग से आग गिर पड़े और तुमको एवं पचास सैनिकों को नष्ट कर दे!” अतः स्वर्ग से आग गिर पड़ी और उसने सेनापति एवं उसके पचास व्यक्तियों को नष्ट कर दिया। {1:11} अहज्याह ने अन्य सेनापति और पचास सैनिकों को भेजा। सेनापति ने एलिय्याह से कहा, “परमेश्वर के जन, राजा का आदेश है ‘शीघ्र नीचे आओ!’” {1:12} एलिय्याह ने सेनापति और उसके पचास सैनिकों से कहा, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ तो स्वर्ग से आग गिर पड़े और वह तुमको और तुम्हारे पचास सैनिकों को नष्ट कर दे!” परमेश्वर की आग स्वर्ग से गिर पड़ी और सेनापति एवं पचास सैनिकों को नष्ट कर दिया। {1:13} अहज्याह ने तीसरे सेनापति को पचास सैनिकों के साथ भेजा। पचास सैनिकों का सेनापति एलिय्याह के पास आया। सेनापति ने अपने घुटनों के बल झुककर उसको प्रणाम किया। सेनापति ने उससे यह कहते हुए प्रार्थना की, “परमेश्वर के जन मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, कृपया मेरे जीवन और अपने इन पचास सेवकों के जीवन को अपनी दृष्टि में मूल्यवान मानें! {1:14} स्वर्ग से आग गिर पड़ी और प्रथम दो सेनापतियों और उन के पचास सैनिकों को उसने नष्ट कर दिया। किन्तु अब कृपा करें और हमें जीवित रहने दें!” {1:15} यहोवा के दूत ने एलिय्याह से कहा, “सेनापति के साथ जाओ। उससे डरो नहीं।” अतः एलिय्याह सेनापति के साथ राजा अहज्याह को देखने गया। {1:16} एलिय्याह ने अहज्याह से कहा, “इस्राएल में परमेश्वर है ही, तो भी तुमने सन्देशवाहकों को एक्रोन के देवता बालजबूब से प्रश्न करने के लिये क्यों भेजा क्योंकि तुमने यह किया है, इस कारण तुम अपने बिस्तर से नहीं उठोगे। तुम मरोगे!” {i1:17} यहोराम, अहज्याह का स्थान लेता है {1:17} अहज्याह वैसे ही मरा जैसा यहोवा ने एलिय्याह के द्वारा कहा था। अहज्याह का कोई पुत्र नहीं था। अतः अहज्याह के बाद यहोराम नया राजा हुआ। यहोराम ने यहूदा के राजा यहोशापात के पुत्र यहोराम के राज्यकाल के दूसरे वर्ष शासन करना आरम्भ किया। {1:18} अहज्याह ने जो अन्य कार्य किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गये हैं। {i2:1} एलिय्याह को अपने पास लेने की यहोवा की योजना {2:1} यह लगभग वह समय था जब यहोवा ने एक तूफान के द्वारा एलिय्याह को स्वर्ग में बुला लिया। एलिय्याह एलीशा के साथ गिलगाल गया। {2:2} एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं रुको, क्योंकि यहोवा ने मुझे बेतेल जाने को कहा है।” किन्तु एलीशा ने कहा, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी कर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोड़ूँगा।” इसलिये दोनों लोग बेतेल तक गये। {2:3} बेतेल के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उसने एलीशा से कहा, “क्या तुम जानते हो कि आज तुम्हारे स्वामी को यहोवा तुमसे अलग करके ले जाएगा” एलीशा ने कहा, “हाँ, मैं यह जानता हूँ। इस विषय में बातें न करो।” {2:4} एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरीहो जाने को कहा है।” किन्तु एलीशा ने कहा, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी करके मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोडूँगा!” इसलिये दोनों लोग यरीहो गए। {2:5} यरीहो के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उन्होंने उससे कहा, “क्या तुमको मालूम है कि यहोवा आज तुम्हारे स्वामी को तुमसे दूर ले जाएगा।” एलीशा ने कहा, “हाँ, मैं इसे जानता हूँ। इस विषय में बातें न करो।” {2:6} एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरदन नदी तक जाने को कहा है।” एलीशा ने उत्तर दिया, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी करके प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोड़ूँगा!” अतः दोनों व्यक्ति चलते चले गए। {2:7} नबियों के समूह में से पचास व्यक्तियों ने उनका अनुसरण किया। एलिय्याह और एलीशा यरदन नदी पर रुक गए। पचास व्यक्ति एलिय्याह और एलीशा से बहुत दूर खड़े रहे। {2:8} एलिय्याह ने अपना अंगरखा उतारा, उसे तह किया और उससे पानी पर चोट की। पानी दायीं और बायीं ओर को फट गया। एलिय्याह और एलीशा ने सूखी भूमि पर चलकर नदी को पार किया। {2:9} जब उन्होंने नदी को पार कर लिया तब एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “इससे पहले कि परमेश्वर मुझे तुमसे दूर ले जाए, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करुँ।” एलीशा ने कहा, “मैं आपके आत्मा का दुगना अपने ऊपर चाहता हूँ।” {2:10} एलिय्याह ने कहा, “तुमने कठिन चीज़ माँगी है। यदि तुम मुझे उस समय देखोगे जब मुझे ले जाया जाएगा तो वही होगा। किन्तु यदि तुम मुझे नहीं देख पाओगे तो वह नहीं होगा।” {i2:11} परमेश्वर एलिय्याह को स्वर्ग में ले जाता है {2:11} एलिय्याह और एलीशा एक साथ बातें करते हुए टहल रहे थे। अचानक कुछ घोड़े और एक रथ आया और उन्होंने एलिय्याह को एलीशा से अलग कर दिया। घोड़े और रथ आग के समान थे। तब एलिय्याह एक बवंडर में स्वर्ग को चला गया। {2:12} एलीशा ने इसे देखा और जोर से पुकारा, “मेरे पिता! मेरे पिता! इस्राएल के रथ और उसके अश्वारोही सैनिक!” एलीशा ने एलिय्याह को फिर कभी नहीं देखा। एलीशा ने अपने वस्त्रों को मुट्ठी में भरा, और अपना शोक प्रकट करने के लिये उन्हें फाड़ डाला। {2:13} एलिय्याह का अंगरखा भूमि पर गिर पड़ा था अतः एलीशा ने उसे उठा लिया। एलीशा ने पानी पर चोट की और कहा, “एलिय्याह का परमेश्वर यहोवा, कहाँ है” {2:14} जैसे ही एलीशा ने पानी पर चोट की, पानी दाँयी और बांयी ओर को फट गया और एलीशा ने नदी पार की। {i2:15} नबी एलिय्याह की माँग करते हैं {2:15} जब यरीहो के नबियों के समूह ने एलीशा को देखा, उन्होंने कहा, “एलिय्याह की आत्मा अब एलीशा पर है।” वे एलीशा से मिलने आए। वे एलीशा के सामने नीचे भूमि तक प्रणाम करने झुके। {2:16} उन्होंने उससे कहा, “देखो, हम अच्छे खासे पचास व्यक्ति हैं। कृपया इनको जाने दो और अपने स्वामी की खोज करने दो। सम्भव है यहोवा की शक्ति ने एलिय्याह को ऊपर ले लिया हो और उसे किसी पर्वत या घाटी में गिरा दिया हो!” किन्तु एलीशा ने उत्तर दिया, “नहीं, एलिय्याह की खोज के लिये आदमियों को मत भेजो।” {2:17} नबियों के समूह ने एलीशा से इतनी अधिक प्रार्थना की, कि वह उलझन में पड़ गया। तब एलीशा ने कहा, “ठीक है, एलिय्याह की खोज में आदमियों को भेज दो।” नबियों के समूह ने पचास आदमियों को एलिय्याह की खोज के लिये भेजा। उन्होंने तीन दिन तक खोज की किन्तु वे एलिय्याह को न पा सके। {2:18} अतः वे लोग यरीहो गए जहाँ एलीशा ठहरा था। उन्होंने उससे कहा कि वे एलिय्याह को नहीं पा सके। एलीशा ने उनसे कहा, “मैंने तुम्हें जाने को मना किया था।” {i2:19} एलीशा पानी को शुद्ध करता है {2:19} नगर के निवासियों ने एलीशा से कहा, “महोदय, आप अनुभव कर सकते हैं कि यह नगर सुन्दर स्थान में है। किन्तु यहाँ पानी बुरा है। यही कारण है कि भूमि में फसल की उपज नहीं होती।” {2:20} एलीशा ने कहा, “मेरे पास एक नया कटोरा लाओ और उसमें नमक रखो।” लोग कटोरे को एलीशा के पास ले आए। {2:21} तब एलीशा उस स्थान पर गया जहाँ पानी भूमि से निकल रहा था। एलीशा ने नमक को पानी में फेंक दिया। उसने कहा, “यहोवा कहता है, ‘मैं इस पानी को शुद्ध करता हूँ। अब, मैं इस पानी से किसी को मरने न दूँगा, और न ही भूमि को अच्छी फसल देने से रोकूँगा।’” {2:22} पानी शुद्ध हो गया और पानी अब तक भी शुद्ध है। यह वैसा ही हुआ जैसा एलीशा ने कहा था। {i2:23} कुछ लड़के एलीशा का मजाक उड़ाते हैं {2:23} उस नगर से एलीशा बेतेल गया। एलीशा नगर की ओर पहाड़ी पर चल रहा था जब कुछ लड़के नगर से नीचे आ रहे थे। वह एलीशा का मजाक उड़ाने लगे और उन्होंने कहा, “हे गन्जे, तू ऊपर चढ़ जा! हे गन्जे तू ऊपर चढ़ जा!” {2:24} एलीशा ने मुड़ कर उन्हें देखा। उसने यहोवा से बिनती की कि उन के साथ बुरा हो। उसी समय जंगल से दो रीछों ने आ कर उन लड़कों पर हमला किया, वहाँ बयालीस लड़के रीछों द्वारा फाड़ दिये गये। {2:25} वहाँ से एलीशा बेतेल होता हुआ कर्म्मेल पर्वत पर गया, उस के बाद वह शोमरोन पहुँचा। {i3:1} यहोराम इस्राएल का राजा बना {3:1} अहाब का पुत्र यहोराम इस्राएल में शोमरोन का राजा बना। यहोशापात के अट्ठारहवें वर्ष में यहोराम ने राज्य करना आरम्भ किया। यहोराम बारह वर्ष तक यहूदा का राजा रहा। {3:2} यहोराम ने वह सब किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है। परन्तु यहोराम अपने माता पिता की तरह न था क्योंकि उस ने उस स्तम्भ को दूर कर दिया जो उसके पिता ने बाल की पूजा के लिये बनवाई थी। {3:3} परन्तु वह नबात के पुत्र यारोबाम के ऐसे पापों को, जैसे उस ने इस्राएल से भी कराये, करता रहा और उन से न फिरा। {i3:4} मोआब इस्राएल से अलग होता है {3:4} मेशा मोआब का राजा था। उसके पास बहुत बकरियाँ थीं। मेशा ने एक लाख मेमने और एक लाख भेढ़ों का ऊन इस्राएल के राजा को भेंट किया। {3:5} किन्तु जब अहाब मरा तब मोआब इस्राएल के राजा के शासन से स्वतन्त्र हो गया। {3:6} तब राजा यहोराम शोमरोन के बाहर निकला और उसने इस्राएल के सभी पुरुषों को इकट्ठा किया। {3:7} यहोराम ने यहूदा के राजा यहोशापात के पास सन्देशवाहक भेजे। यहोराम ने कहा, “मोआब का राजा मेरे शासन से स्वतन्त्र हो गया है। क्या तुम मोआब के विरुद्ध युद्ध करने मेरे साथ चलोगे” यहोशापात ने कहा, “हाँ, मैं तुम्हारे साथ चलूँगा। हम दोनों एक सेना की तरह मिल जायेंगे। मेरे लोग तुम्हारे लोगों जैसे होंगे। मेरे घोड़े तुम्हारे घोड़ों जैसे होंगे।” {i3:8} एलीशा से तीन राजा सलाह माँगते हैं {3:8} यहोशापात ने यहोराम से पूछा, “हमें किस रास्ते से चलना चाहिए?” यहोराम ने उत्तर दिया, “हमें एदोम की मरुभूमि से होकर जाना चाहिए।” {3:9} इसलिये इस्राएल का राजा यहूदा और एदोम के राजाओं के साथ गया। वे लगभग सात दिन तक चारों ओर घूमते रहे। सेना व उनके पशुओं के लिये पर्याप्त पानी नहीं था। {3:10} अन्त में इस्राएल के राजा (यहोराम) ने कहा, “ओह, यहोवा ने सत्य ही हम तीनों राजाओं को एक साथ इसलिये बुलाया कि मोआबी हम लोगों को पराजित करें!” {3:11} किन्तु यहोशापात ने कहा, “निश्चय ही यहोवा के नबियों में से एक यहाँ है। हम लोग नबी से पूछें कि यहोवा हमें क्या करने के लिये कहता है।” इस्राएल के राजा के सेवकों में से एक ने कहा, “शापात का पुत्र एलीशा यहाँ है। एलीशा, एलिय्याह का सेवक था।” {3:12} यहोशापात ने कहा, “यहोवा की वाणी एलीशा के पास है।” अतः इस्राएल का राजा (यहोराम), यहोशापत और एदोम के राजा एलीशा से मिलने गए। {3:13} एलीशा ने इस्राएल के राजा (यहोराम) से कहा, “तुम मुझ से क्या चाहते हो अपने पिता और अपनी माता के नबियों के पास जाओ।” इस्राएल के राजा ने एलीशा से कहा, “नहीं, हम लोग तुमसे मिलने आए हैं, क्योंकि यहोवा ने हम तीन राजाओं को इसलिये एक साथ यहाँ बुलाया है कि मोआबी हम लोगों को हराएं। हम तुम्हारी सहायता चाहते हैं।” {3:14} एलीशा ने कहा, “मैं यहूदा के राजा यहोशापात का सम्मान करता हूँ और मैं सर्वशक्तिमान यहोवा की सेवा करता हूँ। उसकी सत्ता निश्चय ही शाश्वत है, मैं यहाँ केवल राजा यहोशापात के कारण आया हूँ। अतः मैं सत्य कहता हूँ: मैं न तो तुम पर दृष्टि डालता और न तुम्हारी परवाह करता, यदि यहूदा का राजा यहोशापात यहाँ न होता। {3:15} किन्तु अब एक ऐसे व्यक्ति को मेरे पास लाओ जो वीणा बजाता हो।” जब उस व्यक्ति ने वीणा बजाई तो यहोवा की शक्ति एलीशा पर उतरी। {3:16} तब एलीशा ने कहा, “यहोवा यह कहता हैः घाटी में गके खोदो। {3:17} यहोवा यही कहता है: तुम हवा का अनुभव नहीं करोगे, तुम वर्षा भी नहीं देखोगे। किन्तु वह घाटी जल से भर जायेगी। तुम, तुम्हारी गायें तथा अन्य जानवरों को पानी पीने को मिलेगा। {3:18} यहोवा के लिये यह करना सरल है। वह तुम्हें मोआबियों को भी पराजित करने देगा। {3:19} तुम हर एक सुदृढ़ नगर और हर एक अच्छे नगर पर आक्रमण करोगे। तुम हर एक अच्छे पेड़ को काट डालोगे। तुम सभी पानी के सोतों को रोक दोगे। तुम हरे खेत, उन पत्थरों से नष्ट करोगे जिन्हें तुम उन पर फेंकोगे।” {3:20} सवेरे प्रातः कालीन बलि के समय, एदोम से सड़क पर होकर पानी बहने लगा और घाटी भर गई। {3:21} मोआब के लोगों ने सुना कि राजा लोग उनके विरुद्ध लड़ने आए हैं। इसलिये मोआब के लोगों ने कवच धारण करने के उम्र के सभी पुरुषों को इकट्ठा किया। उन लोगों ने युद्ध के लिये तैयार होकर सीमा पर प्रतीक्षा की। {3:22} मोआब के लोग भी बहुत सवेरे उठे। उगता हुआ सूरज घाटी में जल पर चमक रहा था और मोआब के लोगों को वह खून की तरह दिखायी दे रहा था। {3:23} मोआब के लोगों ने कहा, “खून को ध्यान से देखो! राजाओं ने अवश्य ही एक दूसरे के विरुद्ध युद्ध किया होगा। उन्होंने एक दूसरे को अवश्य नष्ट कर दिया होगा। हम चलें और उनके शवों से कीमती चीज़ों ले लें।” {3:24} मोआबी लोग इस्राएली डेरे तक आए। किन्तु इस्राएली बाहर निकले और उन्होंने मोआबी सेना पर आक्रमण कर दिया। मोआबी लोग इस्राएलियों के सामने से भाग खड़े हुए। इस्राएली मोआबियों से युद्ध करने उनके प्रदेश में घुस आए। {3:25} इस्राएलियों ने नगरों को पराजित किया। उन्होंने मोआब के हर एक अच्छे खेत में अपने पत्थर फेंके। उन्होंने सभी पानी के सोतों को रोक दिया और उन्होंने सभी अच्छे पेड़ों को काट डाला। इस्राएली लगातार कीर्हरेशेत तक लड़ते गए। सैनिकों ने कीर्हरेशेत का भी घेरा डाला और उस पर भी आक्रमण किया! {3:26} मोआब के राजा ने देखा कि युद्ध उसके लिये अत्याधिक प्रबल है। इसलिये उसने तलवारधारी सात सौ पुरुषों को एदोम के राजा का वध करने के लिये सीधे सेना भेद के लिये भेज दिया। किन्तु वे एदोम के राजा तक सेना भेद नहीं कर पाए। {3:27} तब मोआब के राजा ने अपने ज्येष्ठ पुत्र को लिया जो उसके बाद राजा होता। नगर के चारों ओर की दीवार पर मोआब के राजा ने अपने पुत्र की भेंट होमबलि के रूप में दी। इससे इस्राएल के लोग बहुत घबराये। इसलिये इस्राएल के लोगों ने मोआब के राजा को छोड़ा और अपने देश को लौट गए। {i4:1} एक नबी की विधवा एलीशा से सहायता माँगती है {4:1} नबियों के समूह में से एक व्यक्ति की पत्नी थी। यह व्यक्ति मर गया। उसकी पत्नी ने एलीशा के सामने अपना दुखड़ा रोया, “मेरा पति तुम्हारे सेवक के समान था। अब मेरा पति मर गया है। तुम जानते हो कि वह यहोवा का सम्मान करता था। किन्तु उस पर एक व्यक्ति का कर्ज था और अब वह व्यक्ति मेरे दो लड़कों को अपना दास बनाने के लिये लेने आ रहा है।” {4:2} एलीशा ने पूछा, “मैं तुम्हारी सहायता कैसे कर सकता हूँ मुझे बताओ कि तुम्हारे घर में क्या है” उस स्त्री ने कहा, “मेरे घर में कुछ नहीं। मेरे पास केवल जैतून के तेल का एक घड़ा है।” {4:3} तब एलीशा ने कहा, “जाओ और अपने सब पड़ोसियों से कटोरे उधार लो। वे खाली होने चाहिये। बहुत से कटोरे उधार लो। {4:4} तब अपने घर जाओ और दरवाजे बन्द कर लो। केवल तुम और तुम्हारे पुत्र घर में रहेंगे। तब इन सब कटोरों में तेल डालो और उन कटोरों को भरो और एक अलग स्थान पर रखो।” {4:5} अतः वह स्त्री एलीशा के यहाँ से चली गई, अपने घर पहुँची और दरवाजे बन्द कर लिए। केवल वह और उसके पुत्र घर में थे। उसके पुत्र कटोरे उसके पास लाए और उसने तेल डाला। {4:6} उसने बहुत से कटोरे भरे। अन्त में उसने अपने पुत्र से कहा, “मेरे पास दूसरा कटोरा लाओ।” किन्तु सभी प्याले भर चुके थे। पुत्रों में से एक ने उस स्त्री से कहा, “अब कोई कटोरा नहीं रह गया है।” उस समय घड़े का तेल खत्म हो चुका था। {4:7} तब वह स्त्री आई और उसने परमेश्वर के जन (एलीशा) से यह घटना बताई! एलीशा ने उससे कहा, “जाओ, तेल को बेच दो और अपना कर्ज लौटा दो। जब तुम तेल को बेच चुकोगी और अपना कर्ज लौटा चुकोगी तब तुम्हारा और तुम्हारे पुत्रों का गुजारा बची रकम से होगा।” {i4:8} शूनेम में एक स्त्री एलीशा को कमरा देती है {4:8} एक दिन एलीशा शूनेम को गया। शूनेम में एक महत्वपूर्ण स्त्री रहती थी। इस स्त्री ने एलीशा से कहा कि वह ठहरे और उसके घर भोजन करे। इसलिये जब भी एलीशा उस स्थान से होकर जाता था तब भोजन करने के लिये वहाँ रूकता था। {4:9} उस स्त्री ने अपने पति से कहा, “देखो मैं समझती हूँ कि एलीशा परमेश्वर का जन है। वह सदा हमारे घर होकर जाता है। {4:10} कृपया हम लोग एक कमरा एलीशा के लिये छत पर बनाएं। इस कमरे में हम एक बिछौना लगा दें। उसमें हम लोग एक मेज, एक कुर्सी और एक दीपाधार रख दें। तब जब वह हमारे यहाँ आए तो वह इस कमरे को अपने रहने के लिये रख सकता है।” {4:11} एक दिन एलीशा उस स्त्री के घर आया। वह उस कमरे में गया और वहाँ आराम किया। {4:12} एलीशा ने अपने सेवक गेहजी से कहा, “शूनेमिन स्त्री को बुलाओ।” सेवक ने शूनेमिन स्त्री को बुलाया और वह उसके सामने आ खड़ी हूई। {4:13} एलीशा ने अपने सेवक से कहा — अब इस स्त्री से कहो, “देखो हम लोगों की देखभाल के लिये तुमने यथासम्भव अच्छा किया है। हम लोग तुम्हारे लिये क्या करें क्या तुम चाहती हो कि हम लोग तुम्हारे लिये राजा या सेना के सेनापती से बात करें” उस स्त्री ने उत्तर दिया, “मैं यहाँ बहुत अच्छी तरह अपने लोगों में रह रही हूँ।” {4:14} एलीशा ने गेहजी से कहा, “हम उसके लिये क्या कर सकते हैं” गेहजी ने कहा, “मैं जानता हूँ कि उसका पुत्र नहीं है और उसका पति बूढ़ा है।” {4:15} तब एलीशा ने कहा, “उसे बुलाओ।” अतः गेहजी ने उस स्त्री को बुलाया। वह आई और उसके दरवाजे के पास खड़ी हो गई। {4:16} एलीशा ने स्त्री से कहा, “अगले बसन्त में इस समय तुम अपने पुत्र को गले से लगा रही होगी।” उस स्त्री ने कहा, “नहीं महोदय! परमेश्वर के जन, मुझसे झूठ न बोलो।” {i4:17} शूनेम की स्त्री को पुत्र होता है {4:17} किन्तु वह स्त्री गर्भवती हुई। उसने अगले बसन्त में एक पुत्र को जन्म दिया, जैसा एलीशा ने कहा था। {4:18} लड़का बड़ा हुआ। एक दिन वह लड़का खेतों में अपने पिता और फसल काटते हुए पुरुषों को देखने गया। {4:19} लड़के ने अपने पिता से कहा, “ओह, मेरा सिर! मेरा सिर फटा जा रहा है!” पिता ने अपने सेवक से कहा, “इसे इसकी माँ के पास ले जाओ!” {4:20} सेवक उस लड़के को उसकी माँ के पास ले गया। लड़का दोपहर तक अपनी माँ की गोद मैं बैठा। तब वह मर गया। {i4:21} माँ एलीशा से मिलने जाती है {4:21} उस स्त्री ने लड़के को परमेश्वर के जन (एलीशा) के बिछौने पर लिटा दिया। तब उसने दरवाजा बन्द किया और बाहर चली गई। {4:22} उसने अपने पति को बुलाया और कहा, “कृपया मेरे पास सेवकों में से एक तथा गधों में से एक को भेजें। तब मैं परमेश्वर के जन (एलीशा) से मिलने शीघ्रता से जाऊँगी और लौट आऊँगी।” {4:23} उस स्त्री के पति ने कहा, “तुम आज परमेश्वर के जन (एलीशा) के पास क्यों जाना चाहती हो यह नवचन्द्र या सब्त का दिन नहीं है।” उसने कहा, “परेशान मत होओ। सब कुछ ठीक होगा।” {4:24} तब उसने एक गधे पर काठी रखी और अपने सेवक से कहा, “आओ चलें और शीघ्रता करें। धीरे तभी चलो जब मैं कहूँ।” {4:25} वह स्त्री परमेश्वर के जन (एलीशा) से मिलने कर्म्मेल पर्वत पर गई। परमेश्वर के जन (एलीशा) ने शूनेमिन स्त्री को दूर से आते देखा। एलीशा ने अपने सेवक गेहजी से कहा, “देखो, वह शूनेमिन स्त्री है! {4:26} कृपया अब दौड़ कर उससे मिलो। उससे पूछो, ‘क्या बुरा घटित हुआ है क्या तुम कुशल से हो क्या तुम्हारा पति कुशल से है क्या बच्चा ठीक है?’” गेहजी ने उस शूनेमिन स्त्री से यही पूछा। उसने उत्तर दिया, “सब कुशल है।” {4:27} किन्तु शूनेमिन स्त्री पर्वत पर चढ़कर परमेश्वर के जन (एलीशा) के पास पहुँची। वह प्रणाम करने झुकी और उसने एलीशा के पाँव पकड़ लिये। गेहजी शूनेमिन स्त्री को दूर खींच लेने के लिये निकट आया। किन्तु परमेश्वर के जन (एलीशा) ने गेहजी से कहा, “उसे अकेला छोड़ दो! वह बहुत परेशान है और यहोवा ने इसके बारे में मुझसे नहीं कहा। यहोवा ने यह खबर मुझसे छिपाई।” {4:28} तब शूनेमिन स्त्री ने कहा, “महोदय, मैंने आपसे पुत्र नहीं माँगा था। मैंने आपसे कहा था, ‘आप मुझे मूर्ख न बनाए!’” {4:29} तब एलीशा ने गेहजी से कहा, “जाने के लिये तैयार हो जाओ। मेरी टहलने की छड़ी ले लो और जाओ। किसी से बात करने के लिये न रुको। यदि तुम किसी व्यक्ति से मिलो तो उसे नमस्कार भी न कहो। यदि कोई व्यक्ति नमस्कार करे तो तुम उसका उत्तर भी न दो। मेरी टहलने की छड़ी को बच्चे के चेहरे पर रखो।” {4:30} किन्तु बच्चे की माँ ने कहा, “जैसा कि यहोवा शाश्वत है और आप जीवित हैं मैं इसको साक्षी कर प्रतिज्ञा करती हूँ कि मैं आपके बिना यहाँ से नहीं जाऊँगी।” अतः एलीशा उठा और शूनेमिन स्त्री के साथ चल पड़ा। {4:31} गेहजी शूनेमिन स्त्री के घर, एलीशा और शूनेमिन से पहले पहुँचा। गेहजी ने टहलने की छड़ी को बच्चे के चेहरे पर रखा। किन्तु बच्चे ने न कोई बात की और न ही कोई ऐसा संकेत दिया जिससे यह लगे कि उसने कुछ सुना है। तब गेहजी एलीशा से मिलने लौटा। गेहजी ने एलीशा से कहा, “बच्चा नहीं जागा!” {i4:32} शूनेमिन स्त्री का पुत्र पुनःजीवित होता है {4:32} एलीशा घर में आया और बच्चा अपने बिछौने पर मरा पड़ा था। {4:33} एलीशा कमरे में आया और उसने दरवाजा बन्द कर लिया। अब एलीशा और वह बच्चा कमरे में अकेले थे। तब एलीशा ने यहोवा से प्रार्थना की। {4:34} एलीशा बिछौनो पर गया और बच्चे पर लेटा। एलीशा ने अपना मुख बच्चे के मुख पर रखा। एलीशा ने अपनी आँखें बच्चे की आँखों पर रखीं। एलीशा ने अपने हाथों को बच्चे के हाथों पर रखा। एलीशा ने अपने को बच्चे के ऊपर फैलाया। तब बच्चे का शरीर गर्म हो गया। {4:35} एलीशा कमरे के बाहर आया और घर में चारों ओर घूमा। तब वह कमरे में लौटा और बच्चे के ऊपर लेट गया। तब बच्चा सात बार छींका और उसने आँखें खोलीं। {4:36} एलीशा ने गेहजी को बुलाया और कहा, “शूनेमिन स्त्री को बुलाओ!” गेहजी ने शूनेमिन स्त्री को बुलाया और वह एलीशा के पास आई। एलीशा ने कहा, “अपने पुत्र को उठा लो।” {4:37} तब शूनेमिन स्त्री कमरे में गई और एलीशा के चरणों पर झुकी। तब उसने अपने पुत्र को उठाया और वह बाहर गई। {i4:38} एलीशा और जहरीला शोरवा {4:38} एलीशा फिर गिलगाल आ गया। उस समय देश में भुखमरी का समय था। नबियों का समूह एलीशा के सामने बैठा था। एलीशा ने अपने सेवक से कहा, “बड़े बर्तन को आग पर रखो और नबियों के समूह के लिये कुछ शोरवा बानाओ।” {4:39} एक व्यक्ति खेतों में साग सब्जी इकट्ठा करने गया। उसे एक जंगली बेल मिली। उसने कुछ जंगली लौकियाँ इस बेल से तोड़ीं और उनसे अपने लबादे की जेब को भर लिया। तब वह आया और उसने जंगली लौकियों को बर्तन में डाल दिया। किन्तु नबियों का समूह नहीं जानता था कि वे कैसी लौकियाँ हैं। {4:40} तब उन्होंने कुछ शोरवा व्यक्तियों को खाने के लिये दिया। किन्तु जब उन्होंने शोरवे को खाना आरम्भ किया, तो उन्होंने एलीशा से चिल्लाकर कहा, “परमेश्वर के जन! बर्तन में जहर है!” वे उस बर्तन से कुछ नहीं खा सके क्योंकि भोजन खाना खतरे से रहित नहीं था। {4:41} किन्तु एलीशा ने कहा, “कुछ आटा लाओ।” वे एलीशा के पास आटा ले आए और उसने उसे बर्तन में डाल दिया। तब एलीशा ने कहा, “शोरवे को लोगों के लिये डालो जिससे वे खा सकें।” तब शोरवे में कोई दोष नहीं था! {i4:42} एलीशा नबियों के समूह को भोजन कराता है {4:42} एक व्यक्ति बालशालीशा से आया और पहली फसल से परमेश्वर के जन (एलीशा) के लिये रोटी लाया। यह व्यक्ति बीस जौ की रोटियाँ और नया अन्न अपनी बोरी में लाया। तब एलीशा ने कहा, “यह भोजन लोगों को दो, जिसे वे खा सकें।” {4:43} एलीशा के सेवक ने कहा, “आपने क्या कहा यहाँ तो सौ व्यक्ति हैं। उन सभी व्यक्तियों को यह भोजन मैं कैसे दे सकता हूँ” किन्तु एलीशा ने कहा, “लोगों को खाने के लिए भोजन दो। यहोवा कहता है, ‘वे भोजन कर लेंगे और भोजन बच भी जायेगा।’” {4:44} तब एलीशा के सेवक ने नबियों के समूह के सामने भोजन परोसा। नबियों के समूह के खाने के लिये भोजन पर्याप्त हुआ और उनके पास भोजन बचा भी रहा। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। {i5:1} नामान की समस्या {5:1} नामान अराम के राजा की सेना का सेनापति था। नामान अपने राजा के लिए अत्याधिक महत्वपूर्ण था। नामान इसलिये अत्याधिक महत्वपूर्ण था क्योंकि यहोवा ने उसका उपयोग अराम को विजय दिलाने के लिए किया था। नामान एक महान और शक्तिशाली व्यक्ति था, किन्तु वह विकट चर्मरोग से पीड़ित था। {5:2} अरामी सेना ने कई सेना की टुकड़ियों को इस्राएल में लड़ने भेजा। सैनिकों ने बहुत से लोगों को अपना दास बना लिया। एक बार उन्होंने एक छोटी लड़की को इस्राएल देश से लिया। यह छोटी लड़की नामान की पत्नी की सेविका हो गई। {5:3} इस लड़की ने नामान की पत्नी से कहा, “मैं चाहती हूँ कि मेरे स्वामी (नामान) उस नबी (एलीशा) से मिलें जो शोमरोन में रहता है। वह नबी नामान के विकट चर्मरोग को ठीक कर सकता है।” {5:4} नामान अपने स्वामी (अराम के राजा) के पास गया। नामान ने अराम के राजा को वह बात बताई जो इस्राएली लड़की ने कही थी। {5:5} तब अराम के राजा ने कहा, “अभी जाओ और मैं एक पत्र इस्राएल के राजा के नाम भेजूँगा।” अतः नामान इस्राएल गया। नामान अपने साथ कुछ भेंट ले गया। नामान साढ़े सात सौ पौंड चाँदी, छः हज़ार स्वर्ण मुद्राएं, और दस बार बदलने के वस्त्र ले गया। {5:6} नामान इस्राएल के राजा के लिये अराम के राजा का पत्र भी ले गया। पत्र में यह लिखा था: “यह पत्र यह जानकारी देने के लिये है कि मैं अपने सेवक नामान को तुम्हारे यहाँ भेज रहा हूँ। उसके विकट चर्मरोग को ठीक करो।” {5:7} जब इस्राएल का राजा उस पत्र को पढ़ चुका तो उसने अपनी चिन्ता और परेशानी को प्रकट करने के लिये अपने वस्त्र फाड़ डाले। इस्राएल के राजा ने कहा, “क्या मैं परमेश्वर हूँ नहीं! जीवन और मृत्यु पर मेरा कोई अधिकार नहीं। तब अराम के राजा ने मेरे पास विकट चर्मरोग के रोगी को स्वस्थ करने के लिये क्यों भेजा इसे जरा सोचो और तुम देखोगे कि यह एक चाल है। अराम का राजा युद्ध आरम्भ करना चाहता है।” {5:8} परमेश्वर के जन (एलीशा) ने सुना कि इस्राएल का राजा परेशान है और उसने अपने वस्त्र फाड़ डाले हैं। एलीशा ने अपना सन्देश राजा के पास भेजाः “तुमने अपने वस्त्र क्यों फाड़े नामान को मेरे पास आने दो। तब वह समझेगा कि इस्राएल में कोई नबी भी है।” {5:9} अतः नामान अपने घोड़ों और रथों के साथ एलीशा के घर आया और द्वार के बाहर खड़ा रहा। {5:10} एलीशा ने एक सन्देशवाहक को नामान के पास भेजा। सन्देशवाहक ने कहा, “जाओ, और यरदन नदी में सात बार नहाओ। तब तुम्हारा चर्मरोग स्वस्थ हो जाएगा और तुम पवित्र तथा शुद्ध हो जाओगे।” {5:11} नामान क्रोधित हुआ और वहाँ से चल पड़ा। उसने कहा, “मैंने समझा था कि कम से कम एलीशा बाहर आएगा, मेरे सामने खड़ा होगा और यहोवा, अपने परमेश्वर के नाम कुछ कहेगा। मैं समझ रहा था कि वह मेरे शरीर पर अपना हाथ फेरेगा और कुष्ठ को ठीक कर देगा। {5:12} दमिश्क की नदियाँ अबाना और पर्पर इस्राएल के सभी जलाशयों से अच्छी हैं! मैं दमिश्क की उन नदियों में क्यों नहीं नहाऊँ और पवित्र हो जाऊँ” इसलिये नामान वापस चला गया। वह क्रोधित था। {5:13} किन्तु नामान के सेवक उसके पास गए और उससे बातें कीं। उन्होंने कहा, “पिता यदि नबी ने आपसे कोई महान काम करने को कहा होता तो आप उसे जरुर करते। अतः आपको उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिये यदि वह कुछ सरल काम करने को भी कहता है और उसने कहा, ‘नहाओ और तुम पवित्र और शुद्ध हो जाओगे।’” {5:14} इसलिये नामान ने वह काम किया जो परमेश्वर के जन (एलीशा)ने कहा, नामान नीचे उतरा और उसने सात बार यरदन नदी में स्नान किया और नामान पवित्र और शुद्ध हो गया। नामान की त्वचा बच्चे की त्वचा की तरह कोमल हो गई। {5:15} नामान और उसका सारा समूह परमेश्वर के जन (एलीशा) के पास आया। वह एलीशा के सामने खड़ा हुआ और उससे कहा, “देखिये, अब मैं समझता हूँ कि इस्राएल के अतिरिक्त पृथ्वी पर कहीं परमेश्वर नहीं है! अब कृपया मेरी भेंट स्वीकार करें!” {5:16} किन्तु एलीशा ने कहा, “मैं यहोवा की सेवा करता हूँ। यहोवा की सत्ता शाश्वत है, उसकी साक्षी मान कर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं कोई भेंट नहीं लूँगा।” नामान ने बहुत प्रयत्न किया कि एलीशा भेंट ले किन्तु एलीशा ने इन्कार कर दिया। {5:17} तब नामान ने कहा, “यदि आप इस भेंट को स्वीकार नहीं करते तो कम से कम आप मेरे लिये इतना करें। मुझे इस्राएल की इतनी पर्याप्त धूलि लेने दें जिससे मेरे दो खच्चरों पर रखे टोकरे भर जायें। क्यों क्योंकि मैं फिर कभी होमबिल या बलि किसी अन्य देवता को नहीं चढ़ाऊँगा। मैं केवल यहोवा को ही बलि भेंट करूँगा। {5:18} और अब मैं प्रार्थना करता हूँ कि यहोवा मुझे इस बात के लिये क्षमा करेगा कि भविष्य में मेरा स्वामी (अराम का राजा) असत्य देवता की पूजा करने के लिये, रिम्मोन के मन्दिर में जाएगा। राजा सहारे के लिये मुझ पर झुकना चाहेगा, अतः मुझे रिम्मोन के मन्दिर में झुकना पड़ेगा। अब मैं यहोवा से प्रार्थना करता हूँ कि वह मुझे क्षमा करे जब वैसा हो।” {5:19} तब एलीशा ने नामान से कहा, “शान्तिपूर्वक जाओ।” अतः नामान ने एलीशा को छोड़ा और कुछ दूर गया। {5:20} किन्तु परमेश्वर के जन एलीशा का सेवक गेहजी बोला, “देखिये, मेरे स्वामी (एलीशा) ने अरामी नामान को, उसकी लाई हुई भेंट को स्वीकार किये बिना ही जाने दिया है। यहोवा शाश्वत है, इसको साक्षी मान कर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि नामान के पीछे दौड़ूँगा और उससे कुछ लाऊँगा!” {5:21} अतः गेहजी नामान की ओर दौड़ा। नामान ने अपने पीछे किसी को दौड़कर आते देखा। वह गेहजी से मिलने को अपने रथ से उतर पड़ा। नामान ने पूछा, “सब कुशल तो है” {5:22} गेहजी ने कहा, “हाँ, सब कुशल है। मेरे स्वामी एलीशा ने मुझे भेजा है। उसने कहा, ‘देखो, एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश के नबियों के समूह से दो युवक नबी मेरे पास आये हैं। कृपया उन्हें पच्हत्तर पौंड चाँदी और दो बार बदलने के वस्त्र दे दो।’” {5:23} नामान ने कहा, “कृपया डेढ़ सौ पौंड ले लो!” नामान ने गेहजी को चाँदी लेने के लिये मनाया। नामान ने डेढ़ सौ पौंड चाँदी को दो बोरियों में रखा और दो बार बदलने के वस्त्र लिये। तब नामान ने इन चीज़ों को अपने सेवकों में से दो को दिया। सेवक उन चीज़ों को गेहजी के लिये लेकर आए। {5:24} जब गेहजी पहाड़ी तक आया तो उसने उन चीज़ों को सेवकों से ले लिया। गेहजी ने सेवकों को लौटा दिया और वे लौट गए। तब गेहजी ने उन चीज़ों को घर में छिपा दिया। {5:25} गेहजी आया और अपने स्वामी एलीशा के सामने खड़ा हुआ। एलीशा ने गेहजी से पूछा, “गेहजी, तुम कहाँ गए थे” गेहजी ने कहा, “मैं कहीं भी नहीं गया था।” {5:26} एलीशा ने गेहजी से कहा, “यह सच नहीं है! मेरा हृदय तुम्हारे साथ था जब नामान अपने रथ से तुमसे मिलने को मुड़ा। यह समय पैसा, कपड़े, जैतून, अंगूर, भेड़, गायें या सेवक — सेविकायें लेने का नहीं है। {5:27} अब तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को नामान की बीमारी लग जाएगी। तुम्हें सदैव विकट चर्मरोग रहेगा!” जब गहेजी एलीशा से विदा हुआ तो गेहजी की त्वचा बर्फ की तरह सफेद हो गई थी। गेहजी को कुष्ठ हो गया था। {i6:1} एलीशा और लौह फलक {6:1} नबियों के समूह ने एलीशा से कहा, “हम लोग वहाँ उस स्थान पर रह रहे हैं। किन्तु वह हम लोगों के लिये बहुत छोटा है। {6:2} हम लोग यरदन नदी को चलें और कुछ लकड़ियाँ काटें। हम में से प्रत्येक एक लट्ठा लेगा और हम लोग अपने लिये रहने का एक स्थान वहाँ बनायें।” एलीशा ने कहा, “बहुत अच्छा, जाओ और करो।” {6:3} उनमें से एक व्यक्ति ने कहा, “कृपया हमारे साथ चलें।” एलीशा ने कहा, “बहुत अच्छा, मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।” {6:4} अतः एलीशा नबियों के समूह के साथ गया। जब वे यरदन नदी पर पहुँचे तो उन्होंने कुछ पेड़ काटने आरम्भ किये। {6:5} किन्तु जब एक व्यक्ति एक पेड़ को काट रहा था तो कुल्हाड़ी का लौह फलक कुल्हाड़ी से निकल गया और पानी में गिर पड़ा। तब वह व्यक्ति चिल्लाया, “हे स्वामी! मैंने वह कुल्हाड़ी उधार ली थी!” {6:6} परमेश्वर के जन (एलीशा) ने कहा, “वह कहाँ गिरी” उस व्यक्ति ने एलीशा को वह स्थान दिखाया जहाँ लौह फलक गिरा था। तब एलीशा ने एक डंडी काटी और उस डंडी को पानी में फेंक दिया। उस डंडी ने लौह फलक को तैरा दिया। {6:7} एलीशा ने कहा, “लौह फलक को पकड़ लो।” तब वह व्यक्ति आगे बढ़ा और उसने लौह फलक को ले लिया। {i6:8} अराम का राजा इस्राएल के राजा को फँसाने का प्रयत्न करता है {6:8} अराम का राजा इस्राएल के विरुद्ध युद्ध कर रहा था। उसने सेना के अधिकारियों के साथ परिषद बैठक बुलाई। उसने आदेश दिया, “इस स्थान पर छिप जाओ और इस्राएलियों पर तब आक्रमण करो जब यहाँ से होकर निकलें।” {6:9} किन्तु परमेश्वर के जन (एलीशा) ने इस्राएल के राजा को एक संदेश भेजा। एलीशा ने कहा, “सावधान रहो! उस स्थान से होकर मत जाओ। वहाँ अरामी सैनिक छिपे हैं!” {6:10} इस्राएल के राजा ने उस स्थान पर जिसके विषय में परमेश्वर के जन (एलीशा) ने चेतावनी दी थी, अपने व्यक्तियों को संदेश भेजा और इस्राएल के राजा ने बहुत से पुरुषों को बचा लिया। {6:11} अराम का राजा इससे बहुत घबराया। अराम के राजा ने अपने सैनिक अधिकारियों को बुलाया, और उनसे पूछा, “मुझे बताओ कि इस्राएल के राजा के लिये जासूसी कौन कर रहा है।” {6:12} अराम के राजा के सैनिक अधिकारियों में से एक ने कहा, “मेरे प्रभु और राजा, हम में से कोई भी जासूस नहीं है! एलीशा, इस्राएल का नबी इस्राएल के राजा को अनेक गुप्त सूचनाएं दे सकता है, यहाँ तक कि आप जो अपने बिस्तर में कहेंगे, उसकी भी!” {6:13} अराम के राजा ने कहा, “एलीशा का पता लगाओ और मैं उसे पकड़ने के लिये आदमियों को भेजूँगा।” सेवकों ने अराम के राजा से कहा, “एलीशा दोतान में है!” {6:14} तब अराम के राजा ने घोड़े, रथ और विशाल सेना को दोतान को भेजा। वे रात को पहुँचे और उन्होंने नगर को घेर लिया। {6:15} एलीशा के सेवक उस सुबह को जल्दी उठे। एक सेवक बाहर गया और उसने एक सेना को घोड़ों और रथों के साथ नगर के चारों ओर देखा। एलीशा के सेवक ने एलीशा से कहा, “ओह, मेरे स्वामी हम क्या कर सकते हैं” {6:16} एलीशा ने कहा, “डरो नहीं! वह सेना जो हमारे लिये युद्ध करती है, उस सेना से बड़ी है जो अराम के लिये युद्ध करती है!” {6:17} तब एलीशा ने प्रार्थना की और कहा, “यहोवा, मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ कि तू मेरे सेवक की आँखें खोल जिससे वह देख सके।” यहोवा ने युवक की आँखे खोलीं और सेवक ने देखा कि पूरा पर्वत अग्नि के घोड़ों और रथों से ढका पड़ा था। वे सभी एलीशा के चारों ओर थे! {6:18} ये आग के घोड़े और रथ एलीशा के पास आए। एलीशा ने यहोवा से प्रार्थना की और कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि तू इन लोगों को अन्धा कर दे।” तब यहोवा ने अरामी सेना को अन्धा कर दिया, जैसे एलीशा ने प्रार्थना की थी। {6:19} एलीशा ने अरामी सेना से कहा, “यह उचित मार्ग नहीं है। यह उपयुक्त नगर नहीं है। मेरे पीछे आओ। मैं उस व्यक्ति के पास तुम्हें ले जाऊँगा जिसकी खोज तुम कर रहे हो।” तब एलीशा अरामी सेना को शोमरोन ले गया। {6:20} जब वे शोमरोन पहुँचे तो एलीशा ने कहा, “यहोवा, इन लोगों की आँखे खोल दे जिससे ये देख सकें।” तब यहोवा ने उनकी आँखें खोल दीं और अरामी सेना ने देखा कि वह शोमरोन नगर में थे। {6:21} इस्राएल के राजा ने अरामी सेना को देखा। इस्राएल के राजा ने एलीशा से पूछा, “मेरे पिता, क्या मैं इन्हें मार डालूँ क्या मैं इन्हें मार डालूँ” {6:22} एलीशा ने उत्तर दिया, “नहीं, इन्हें मारो मत। तुम उन लोगों को नहीं मारते जिन्हें तुम युद्ध में अपनी तलवार और धनुष — बाण के बल से पकड़ते हो। अरामी सेना को कुछ रोटी — पानी दो। उन्हें खाने — पीने दो। तब इन्हें अपने स्वामी के पास लौट जाने दो।” {6:23} इस्राएल के राजा ने अरामी सेना के लिये बहुत सा भोजन तैयार कराया। अरामी सेना ने खाया — पीया। तब इस्राएल के राजा ने अरामी सेना को उनके घर वापस भेज दिया। अरामी सेना अपने स्वामी के पास घर लौट गई। अरामी लोगों ने इसके बाद इस्राएल पर आक्रमण करने के लिये फिर कोई सेना नहीं भेजी। {i6:24} भयंकर भुखमरी शोमरोन को कष्ट देती है {6:24} जब यह सब हो गया तो अराम के राजा बेन्हदद ने अपनी सारी सेना इकट्ठा की और वह शोमरोन नगर पर घेरा डालने और उस पर आक्रमण करने गया। {6:25} सैनिकों ने लोगों को नगर में भोजन सामग्री भी नहीं लाने दी। इसलिये शोमरोन में भयंकर भूखमरी का समय आ गया। यह शोमरोन में इतना भयंकर था कि एक गधे का सिर चाँदी के अस्सी सिक्कों में बिकने लगा और कबूतर की एक पिन्ट बीट की कीमत पाँच चाँदी के सिक्के थे। {6:26} इस्राएल का राजा नगर की प्राचीर पर घूम रहा था। एक स्त्री ने चिल्लाकर उसे पुकारा। उस स्त्री ने कहा, “मेरे प्रभु और राजा, कृपया मेरी सहायता करें!” {6:27} इस्राएल के राजा ने कहा, “यदि यहोवा तुम्हारी सहायता नहीं करता तो मैं कैसे तुमको सहायता दे सकता हूँ मेरे पास तुमको देने को कुछ भी नहीं है। खलिहानों से कोई अन्न नहीं आया, या दाखमधु के कारखाने से कोई दाखमधु नहीं आई।” {6:28} तब इस्राएल के राजा ने उस स्त्री से पूछा, “तुम्हारी परेशानी क्या है?” स्त्री ने जवाब दिया, “इस स्त्री ने मुझसे कहा, ‘अपने पुत्र को मुझे दो जिससे हम उसे मार डालें और उसे आज खा लें। तब हम अपने पुत्र को कल खायेंगे।’ {6:29} अत: हम ने अपने पुत्र को पकाया और खाया। तब दूसरे दिन मैंने इस स्त्री से कहा, ‘अपने पुत्र को दो जिससे हम उसे मार सकें और खा सकें।’ किन्तु उसने अपने पुत्र को छिपा दिया है।” {6:30} जब राजा ने उस स्त्री की बातें सुनीं तो उसने अपने वस्त्रों को अपनी परेशानी व्यक्त करने के लिये फाड़ डाला। जब राजा प्राचीर से होकर चला तो लोगों ने देखा कि वह अपने पहनावे के नीचे मोटे वस्त्र पहने था जिससे पता चलता था कि वह बहुत दुःखी और परेशान है। {6:31} राजा ने कहा, “परमेश्वर मुझे दण्डित करे यदि शापात के पुत्र एलीशा का सिर इस दिन के अन्त तक भी उसके धड़ पर रह जाये।” {6:32} राजा ने एलीशा के पास एक सन्देशवाहक भेजा। एलीशा अपने घर में बैठा था और अग्रज (प्रमुख) उसके साथ बैठे थे। सन्देशवाहक के आने से पहले एलीशा ने प्रमुखों से कहा, “देखो, वह हत्यारे का पुत्र (इस्राएल का राजा) लोगों को मेरा सिर काटने को भेज रहा है। जब सन्देशवाहक आये तो दरवाजा बन्द कर लेना। दरवाजे को बन्द रखो और उसे घुसने मत दो। मैं उसके पीछे उसके स्वामी के आने वाले कदमों की आवाज सुन रहा हूँ!” {6:33} जिस समय एलीशा अग्रजों (प्रमुखों) से बातें कर ही रहा था, सन्देशवाहक उसके पास आया। सन्देश यह थाः “यह विपत्ति यहोवा की ओर से आई है! मैं यहोवा की प्रतीक्षा आगे और क्यों करुँ” {7:1} एलीशा ने कहा, “यहोवा की ओर से सन्देश सुनो! यहोवा कहता हैः ‘लगभग इसी समय कल बहुत सी भोजन सामग्री हो जाएगी और यह फिर सस्ती भी हो जाएगी। शोमरोन के फाटक के साथ बाजार में लोग एक डलिया अच्छा आटा या दो डलिया जौ एक शेकेल में खरीद सकेंगें।’” {7:2} तब उस अधिकारी ने जो राजा का विश्वासपात्र था, परमेश्वर के जन (एलीशा) से बातें कीं। अधिकारी ने कहा, “यदि यहोवा आकाश में खिड़कियाँ भी बना दे तो भी यह नहीं होगा!” एलीशा ने कहा, “इसे तुम अपनी आँखों से देखोगे। किन्तु उस भोजन में से तुम कुछ भी नहीं खाओगे।” {i7:3} कुष्ठ रोगी, अरामी डेरे को खाली पाते हैं {7:3} नगर के द्वार के पास चार व्यक्ति कुष्ठरोग से पीड़ित थे। उन्होंने आपस में बातें कीं, “हम यहाँ मरने की प्रतीक्षा करते हुए क्यों बैठे हैं {7:4} शोमरोन में कुछ भी खाने के लिये नहीं है। यदि हम लोग नगर के भीतर जाएंगे तो वहाँ हम भी मर जाएंगे। इसलिये हम लोग अरामी डेरे की ओर चलें। यदि वे हमें जीवित रहने देते हैं तो हम जीवित रहेंगे। यदि वे हमें मार डालते हैं तो मर जायेंगे।” {7:5} इसलिए उस शाम को चारों कुष्ठ रोगी अरामी डेरे को गए। वे अरामी डेरे की छोर तक पहुँचे। वहाँ लोग थे ही नहीं। {7:6} यहोवा ने अरामी सेना को, रथों, घोड़ों और विशाल सेना का उद्घोष, सुनाया था। अतः अरामी सैनिकों ने आपस में बातें कीं, “इस्राएल के राजा ने हित्ती राजाओं और मिस्रियों को हम लोगों के विरुद्ध किराये पर बुलाया है!” {7:7} अरामी सैनिक उस सन्ध्या के आरम्भ में ही भाग गए। वे सब कुछ अपने पीछे छोड़ गए। उन्होंने अपने डेरे, घोड़े, गधे छोड़े और अपना जीवन बचाने को भाग खड़े हुए। {i7:8} कुष्ठ रोगी अरामी डेरे में {7:8} जब ये कुष्ठ रोगी उस स्थान पर आए जहाँ से अरामी डेरा आरम्भ होता था, वे एक डेरे में गए। उन्होंने खाया और मदिरा पान किया। तब चारों कुष्ठ रोगी उस डेरे से चाँदी, सोना और वस्त्र ले गए। उन्होंने चाँदी, सोना और वस्त्रों को छिपा दिया। तब वे लौटे और दूसरे डेरे में गए। उस डेरे से भी वे चीज़ें ले आए। वे बाहर गए और इन चीज़ों को छिपा दिया। {7:9} तब इन कुष्ठ रोगियों ने आपस में बातें कीं, “हम लोग बुरा कर रहे हैं। आज हम लोगों के पास शुभ सूचना है। किन्तु हम लोग चुप हैं। यदि हम लोग सूरज के निकलने तक प्रतीक्षा करेंगे तो हम लोगों को दण्ड मिलेगा। अब हम चलें और उन लोगों को शुभ सूचना दें जो राजा के महल में रहते हैं।” {i7:10} कुष्ठ रोगी शुभ सूचना देते हैं {7:10} अतः ये कुष्ठ रोगी नगर के द्वार पाल के पास गए। कुष्ठ रोगियों ने द्वारापालों से कहा, “हम अरामी डेरे में गए थे। किन्तु हम लोगों ने किसी व्यक्ति को वहाँ नहीं पाया। वहाँ कोई भी नहीं था। घोड़े और गधे तब भी बंधे थे और डेरे वैसे के वैसे लगे थे। किन्तु सभी लोग चले गए थे।” {7:11} तब नगर के द्वारपाल जोर से चीखे और राजमहल के व्यक्तियों को यह बात बताई। {7:12} रात का समय था, किन्तु राजा अपने पलंग से उठा। राजा ने अपने अधिकारियों से कहा, “मैं तुम लोगों को बताऊँगा कि अरामी सैनिक हमारे साथ क्या कर रहे हैं। वे जानते हैं कि हम भूखे हैं। वे खेतों में छिपने के लिये, डेरों को खाली कर गए हैं। वे यह सोच रहे हैं, ‘जब इस्राएली नगर के बाहर आएंगे, तब हम उन्हें जीवित पकड़ लेंगे और तब हम नगर में प्रवेश करेंगे।’” {7:13} राजा के अधिकारियों में से एक ने कहा, “कुछ व्यक्तियों को नगर में अभी तक बचे पाँच घोड़ों को लेने दें। निश्चय ही ये घोड़े भी शीघ्र ही ठीक वैसे ही मर जाएंगे, जैसे इस्राएल के वे सभी लोग जो अभी तक बचे रह गए हैं, मरेंगे। इन व्यक्तियों को यह देखने को भेजा जाये कि क्या घटित हुआ है।” {7:14} इसलिये लोगों ने घोड़ों के साथ दो रथ लिये। राजा ने इन लोगों को अरामी सेना के पीछे लगाया। राजा ने उनसे कहा, “जाओ और पता लगाओ कि क्या घटना घटी।” {7:15} वे व्यक्ति अरामी सेना के पीछे यरदन नदी तक गए। पूरी सड़क पर वस्त्र और अस्त्र — शस्त्र फैले हुये थे। अरामी लोगों ने जल्दी में भागते समय उन चीज़ों को फेंक दिया था। सन्देशवाहक शोमरोन को लौटे और राजा को बताया। {7:16} तब लोग अरामी डेरे की ओर टूट पड़े, और वहाँ से उन्होंने कीमती चीज़ें ले लीं। हर एक के लिये वहाँ अत्याधिक था। अतः वही हुआ जो यहोवा ने कहा था। कोई भी व्यक्ति एक डलिया अच्छा आटा या दो डलिया जौ केवल एक शेकेल में खरीद सकता था। {7:17} राजा ने अपने व्यक्तिगत सहायक अधिकारी को द्वार की रक्षा के लिये चुना। किन्तु लोग शत्रु के डेरे से भोजन पाने के लिये दौड़ पड़े। लोगों ने अधिकारी को धक्का देकर गिरा दिया और उसे रौंदते हुए निकल गए और वह मर गया। अतः वे सभी बातें वैसी ही ठीक घटित हुईं जैसा परमेश्वर के जन (एलीशा) ने तब कहा था जब राजा एलीशा के घर आया था। {7:18} एलीशा ने कहा था, “कोई भी व्यक्ति शोमरोन के नगरद्वार के बाजार में एक शेकेल में एक डलिया अच्छा आटा या दो डलिया जौ खरीद सकेगा।” {7:19} किन्तु परमेश्वर के जन को उस अधिकारी ने उत्तर दिया था, “यदि यहोवा स्वर्ग में खिड़कियाँ भी बना दे, तो भी वैसा नहीं हो सकेगा” और एलीशा ने उस अधिकारी से कहा था, “तुम ऐसा अपनी आँखों से देखोगे। किन्तु तुम उस भोजन का कुछ भी नहीं खा पाओगे।” {7:20} अधिकारी के साथ ठीक वैसा ही घटित हुआ। लोगों ने नगरद्वार पर उसे धक्का दे गिरा दिया, उसे रौंद डाला और वह मर गया। {i8:1} राजा और शूनेमिन स्त्री {8:1} एलीशा ने उस स्त्री से बातें कीं जिसके पुत्र को उसने जीवित किया था। एलिशा ने कहा, “तुम्हें और तुम्हारे परिवार को किसी अन्य देश में चले जाना चाहिये । क्यों क्योंकि यहोवा ने निश्चय किया है कि यहाँ भुखमरी का समय आएगा। इस देश में यह भूखमरी का समय सात वर्ष का होगा।” {8:2} अतः उस स्त्री ने वही किया जो परमेश्वर के जन ने कहा। वह अपने परिवार के साथ सात वर्ष पलिश्तियों के देश में रहने चली गई। {8:3} जब सात वर्ष पूरे हो गए तो वह स्त्री पलिश्तियों के देश से लौट आई। वह स्त्री राजा से बातें करने गई। वह चाहती थी कि वह उसके घर और उसकी भूमि को उसे लौटाने में उसकी सहायता करे। {8:4} राजा परमेश्वर के जन (एलीशा) के सेवक गेहजी से बातें कर रहा था। राजा ने गेहजी से पूछा, “कृपया वे सभी महान कार्य हमें बतायें जिन्हें एलीशा ने किए हैं।” {8:5} गेहजी राजा को एलीशा के बारे में एक मृत व्यक्ति को जीवित करने की बात बता रहा था। उसी समय वह स्त्री राजा के पास गई जिसके पुत्र को एलीशा ने जिलाया था। वह चाहती थी कि वह अपने घर और अपनी भूमि को वापस दिलाने में उससे सहायता माँगे।। गेहजी ने कहा, “मेरे प्रभु राजा, यह वही स्त्री है और यह वही पुत्र है जिसे एलीशा ने जिलाया था।” {8:6} राजा ने पूछा कि वह क्या चाहती है। उस स्त्री ने अपनी इच्छा बताई। तब राजा ने एक अधिकारी को उस स्त्री की सहायता के लिये चुना। राजा ने कहा, “इस स्त्री को वह सब कुछ दो जो इसका है और इसकी भूमि की सारी फसलें जब से इसने देश छोड़ा तब से अब तक की, इसे दो।” {i8:7} बेन्हदद हजाएल को एलीशा के पास भेजता है {8:7} एलीशा दमिश्क गया। अराम का राजा बेन्हदद बीमार था। किसी व्यक्ति ने बेन्हदद से कहा, “परमेश्वर का जन यहाँ आया है।” {8:8} तब राजा बेन्हदद ने हजाएल से कहा, “भेंट साथ में लो और परमेश्वर के जन से मिलने जाओ। उसको कहो कि वह यहोवा से पूछे कि क्या मैं अपनी बीमारी से स्वस्थ हो सकता हूँ।” {8:9} इसलिये हजाएल एलीशा से मिलने गया। हजाएल अपने साथ भेंट लाया। वह दमिश्क से हर प्रकार की अच्छी चीज़ें लाया। इन सबको लाने के लिये चालीस ऊँटों की आवश्यकता पड़ी। हजाएल एलीशा के पास गया। हजाएल ने कहा, “तुम्हारे अनुयायी अराम के राजा बेन्हदद ने मुझे आपके पास भेजा है। वह पूछता है कि क्या मैं अपनी बीमारी से स्वस्थ होऊँगा।” {8:10} तब एलीशा ने हजाएल से कहा, “जाओ और बेन्हदद से कहो, ‘तुम जीवित रहोगे।’ किन्तु यहोवा ने सचमुच मुझसे यह कहा है, ‘वह निश्चय ही मरेगा।’” {i8:11} एलीशा हजाएल के बारे में भविष्यवाणी करता है {8:11} एलीशा हजाएल को तब तक देखता रहा जब तक हजाएल संकोच का अनुभव नहीं करने लगा। तब परमेश्वर का जन चीख पड़ा। {8:12} हजाएल ने कहा, “महोदय, आप चीख क्यों रहे हैं” एलीशा ने उत्तर दिया, “मैं चीख रहा हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम इस्राएलियों के लिये क्या कुछ बुरा करोगे। तुम उनके दृढ़ नगरों को जलाओगे। तुम उनके युवकों को तलवार के घाट उतारोगे। तुम उनके बच्चों को मार डालोगे। तुम उनकी गर्भवती स्त्रियों के गर्भ को चीर निकालोगे।” {8:13} हजाएल ने कहा, “मैं कोई शक्तिशाली व्यक्ति नहीं हूँ! मैं इन बड़े कामों को नहीं कर सकता!” एलीशा ने उत्तर दिया, “यहोवा ने मुझे बताया है कि तुम अराम के राजा होगे।” {8:14} तब हजाएल एलीशा के यहाँ से चला गया और अपने राजा के पास गया। बेन्हदद ने हजाएल से पूछा, “एलीशा ने तुमसे क्या कहा” हजाएल ने उत्तर दिया, “एलीशा ने मुझसे कहा कि तुम जीवित रहोगे।” {i8:15} हजाएल बेन्हदद की हत्या करता है {8:15} किन्तु अगले दिन हजाएल ने एक मोटा कपड़ा लिया और इसे पानी से गीला कर लिया। तब उसने मोटे कपड़े को बेन्हदद के मुँह पर डाल कर उसकी साँस रोक दी। बेन्हदद मर गया। अतः हजाएल नया राजा बना। {i8:16} यहोराम अपना शासन आरम्भ करता है {8:16} यहोशापात का पुत्र यहोराम यहूदा का राजा था। यहोराम ने अहाब के पुत्र योराम के इस्राएल के राज्यकाल के पाँचवें वर्ष में शासन आरम्भ किया। {8:17} यहोराम बत्तीस वर्ष का था, जब उसने शासन करना आरम्भ किया। उसने यरूशलेम में आठ वर्ष शासन किया। {8:18} किन्तु यहोराम इस्राएल के राजाओं की तरह रहा और उन कामों को किया जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोराम अहाब के परिवार के लोगों की तरह रहता था। यहोराम इस तरह रहा क्योंकि उसकी पत्नी अहाब की पुत्री थी। {8:19} किन्तु यहोवा ने उसे नष्ट नहीं किया क्योंकि उसने अपने सेवक दाऊद से प्रतिज्ञा की थी कि उसके परिवार का कोई न कोई सदैव राजा होगा। {8:20} यहोराम के समय में एदोम यहूदा के शासन से स्वतन्त्र हो गया। एदोम के लोगों ने अपने लिये एक राजा चुन लिया। {8:21} तब यहोराम और उसके सभी रथ साईर को गए। एदोमी सेना ने उन्हें घेर लिया। यहोराम और उसके अधिकारियों ने उन पर आक्रमण किया और बच निकले और घर पहुँचे। {8:22} इस प्रकार एदोमी यहूदा के शसन से स्वतन्त्र हो गए और वे आज तक यहूदा के शासन से स्वन्त्र हैं। उसी समय लिब्ना भी यहूदा के शासन से स्वतन्त्र हो गया। {8:23} यहोराम ने जो कुछ किया वह सब यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है। {8:24} यहोराम मरा और अपने पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में दफनाया गया। यहोराम का पुत्र अहज्याह नया राजा हुआ। {i8:25} अहज्याह अपना शासन आरम्भ करता है {8:25} यहोराम का पुत्र अहज्याह, अहाब के पुत्र इस्राएल के राजा योराम के राज्यकाल के बारहवें वर्ष में यहूदा का राजा हुआ। {8:26} शासन आरम्भ करने के समय अहज्याह बाईस वर्ष का था। उसने यरूशलेम में एक वर्ष शासन किया। उसकी माँ का नाम अतल्याह था। वह इस्राएल के राजा ओम्री की पुत्री थी। {8:27} अहज्याह ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। अहज्याह ने अहाब के परिवार के लोगों की तरह बहुत से बुरे काम किये। अहज्याह उस प्रकार रहता था क्योंकि उसकी पत्नी अहाब के परिवार से थी। {i8:28} योराम हजाएल के विरुद्ध युद्ध में घायल हो जाता है {8:28} योराम अहाब के परिवार से था। अहज्याह योराम के साथ अराम के राजा हजाएल से गिलाद के रामोत में युद्ध करने गया। अरामियों ने योराम को घायल कर दिया। {8:29} राजा योराम इस्राएल को वापस इसलिये लौट गया कि उस स्थान पर लगे घावों से वह स्वस्थ हो जाये। योराम यिज्रेल के क्षेत्र में गया। यहूदा के राजा यहोराम का पुत्र अहज्याह योराम को देखने यिज्रेल गया। {i9:1} एलीशा एक युवा नबी को येहू का अभिषेक करने को कहता है {9:1} एलीशा नबी ने नबियों के समूह में से एक को बुलाया। एलीशा ने इस व्यक्ति से कहा, “तैयार हो जाओ और अपने हाथ में तेल की इस छोटी बोतल को ले लो। गिलाद के रामोत को जाओ। {9:2} जब तुम वहाँ पहुँचो तो निमशी के पौत्र अर्थात् यहोशापात के पुत्र येहू से मिलो। तब अन्दर जाओ और उसके भाईयों में से उसे उठाओ। उसे किसी भीतरी कमरे में ले जाओ। {9:3} तेल की छोटी बोतल ले जाओ और येहू के सिर पर उस तेल को डालो। यह कहो, ‘यहोवा कहता हैः मैंने तुम्हारा अभिषेक इस्राएल का नया राजा होने के लिये किया है।’ तब दरवाजा खोलो और भाग चलो। वहाँ प्रतीक्षा न करो!” {9:4} अतः यह युवा नबी गिलाद के रामोत गया। {9:5} जब युवक पहुँचा, उसने सेना के सेनापतियों को बैठे देखा। युवक ने कहा, “सेनापति, मैं आपके लिये एक सन्देश लाया हूँ।” येहु ने कहा, “हम सभी यहाँ है। हम लोगों में से किसके लिये सन्देश है” युवक ने कहा, “सेनापति, सन्देश आपके लिये है।” {9:6} येहू उठा और घर में गया। तब युवा नबी ने उस तेल को येहू के सिर पर डाल दिया। युवा नबी ने येहू से कहा, “इस्राएल का परमेश्वर, यहोवा कहता है, ‘मैं यहोवा के लोगों, इस्राएलियों पर नया राजा होने के लिये तुम्हारा अभिषेक करता हूँ। {9:7} तुम्हें अपने राजा अहाब के परिवार को नष्ट कर देना चाहिये। इस प्रकार मैं ईज़ेबेल को, अपने सेवकों, नबियों तथा यहोवा के उन सभी सेवकों की मृत्यु के लिये जिनकी हत्या कर दी गई है, दण्डित करूँगा। {9:8} इस प्रकार अहाब का सारा परिवार मर जाएगा। मैं अहाब के परिवार के किसी लड़के को जीवित नहीं रहने दूँगा। इसका कोई महत्व नहीं होगा कि वह लड़का दास है या इस्राएल का स्वतन्त्र व्यक्ति है। {9:9} मैं अहाब के परिवार को, नबात के पुत्र यारोबाम या अहिय्याह के पुत्र बाशा के परिवार जैसा कर दूँगा। {9:10} यिज्रेल के क्षेत्र में ईज़ेंबेल को कुत्ते खायेंगे। ईज़ेंबेल को दफनाया नहीं जाएगा।’” तब युवक नबी ने दरवाजा खोला और भाग गया। {i9:11} सेवक येहू को राजा घोषित करते हैं {9:11} येहू अपने राजा के अधिकारियों के पास लौटा। अधिकारियों में से एक ने येहू से कहा, “क्या सब कुशल तो है यह पागल आदमी तुम्हारे पास क्यों आया था” येहू ने सेवकों को उत्तर दिया, “तुम उस व्यक्ति को और जो पागलपन की बातें वह करता है, जानते हो।” {9:12} अधिकारियों ने कहा, “नहीं! हमें सच्ची बात बताओ। वह क्या कहता है” येहू ने अधिकारियों को वह बताया जो युवक नबी ने कहा था। येहू ने कहा, “उसने कहा ‘यहोवा यह कहता हैः मैंने इस्राएल का नया राजा होने के लिये तुम्हारा अभिषेक किया है।’” {9:13} तब हर एक अधिकारी ने शीघ्रता से अपने लबादे उतारे और येहू के सामने पैड़ियों पर उन्हें रखा। तब उन्होंने तुरही बजाई और यह घोषणा की, “येहू राजा है!” {i9:14} येहू यिज्रैल जाता है {9:14} इसलिये येहू ने, जो निमशी का पौत्र और यहोशापात का पुत्र था योराम के विरुद्ध योजनायें बनाईं। उस समय योराम और इस्राएली, अराम के राजा हजाएल से, गिलाद के रामोत की रक्षा का प्रयत्न कर रहे थे। {9:15} किन्तु राजा योराम को अरामियों द्वारा किये गये घाव से स्वस्थ होने के लिये इस्राएल आना पड़ा था। अरामियों ने योराम को तब घायल किया था जब उसने अराम के राजा हजाएल के विरुद्ध युद्ध किया था। अतः येहू ने अधिकारियों से कहा, “यदि तुम लोग स्वीकार करते हो कि मैं नया राजा हूँ तो नगर से किसी व्यक्ति को यिज्रैल में सूचना देने के लिये बचकर निकलने न दो।” {9:16} योराम यिज्रैल में आराम कर रहा था। अत: येहू रथ में सवार हुआ और यिज्रैल गया। यहूदा का राजा अहज्याह भी योराम को देखने यिज्रैल आया था। {9:17} एक रक्षक यिज्रैल में रक्षक स्तम्भ पर खड़ा था। उसने येहू के विशाल दल को आते देखा। उसने कहा, “मैं लोगों के एक विशाल दल को देख रहा हूँ!” योराम ने कहा, “किसी को उनसे मिलने घोड़े पर भेजो। इस व्यक्ति से यह कहने के लिये कहो, ‘क्या आप शान्ति की इच्छा से आए हैं?’” {9:18} अतः एक व्यक्ति येहू से मिलने के लिये घोड़े पर सवार होकर गया। घुड़सवार ने कहा, “राजा योराम पूछते हैं, ‘क्या आप शान्ति की इच्छा से आए हैं?’” येहू ने कहा, “तुम्हें शान्ति से कुछ लेना — देना नहीं। आओ और मेरो पीछे चलो।” रक्षक ने योराम से कहा, “उस दल के पास सन्देशवाहक गया, किन्तु वह लौटकर अब तक नहीं आया।” {9:19} तब योराम ने एक दूसरे व्यक्ति को घोड़े पर भेजा। वह व्यक्ति येहू के दल के पास आया और उसने कहा, “राजा योराम कहते हैं, ‘शान्ति।’” येहू ने उत्तर दिया, “तुम्हें शान्ति से कुछ भी लेना देना नहीं! आओ और मेरे पीछे चलो।” {9:20} रक्षक ने योराम से कहा, “दूसरा व्यक्ति उस दल के पास गया, किन्तु वह अभी तक लौटकर नहीं आया। रथचालक रथ को निमशी के पौत्र येहू की तरह चला रहा है। वह पागलों जैसा चला रहा है।” {9:21} योराम ने कहा, “मेरे रथ को तैयार करो!” इसलिये सेवक ने योराम के रथ को तैयार किया। इस्राएल का राजा योराम तथा यहूदा का राजा अहज्याह निकल गए। हर एक राजा अपने — अपने रथ से येहू से मिलने गए। वे येहू से यिज्रैली नाबोत की भूमि के पास मिले। {9:22} योराम ने येहू को देखा और उससे पूछा, “येहू क्या तुम शान्ति के इरादे से आए हो” येहू ने उत्तर दिया, “जब तक तुम्हारी माँ ईज़ेबेल वेश्यावृत्ति और जादू टोना करती रहेगी तब तक शान्ति नहीं हो सकेगी।” {9:23} योराम ने भाग निकलने के लिये अपने घोड़ों की बाग मोड़ी। योराम ने अहज्याह से कहा, “अहज्याह! यह एक चाल है।” {9:24} किन्तु येहू ने अपनी पूरी शक्ति से अपने धनुष को खींचा और योराम की पीठ में बाण चला दिया। बाण योराम के हृदय को बेधता हुआ पार हो गया। योराम अपने रथ में मर गया। {9:25} येहू ने अपने सारथी बिदकर से कहा, “योराम के शव को उठाओ और यिज्रेली नाबोत के खेत में फेंक दो। याद करो, जब हम और तुम योराम के पिता अहाब के साथ चले थे। तब यहोवा ने कहा था कि इसके साथ ऐसा ही होगा। {9:26} यहोवा ने कहा था, ‘कल मैंने नाबोत और उसके पुत्रों का खून देखा था। अतः मैं अहाब को इसी खेत में दण्ड दूँगा।’ यहोवा ने ऐसा कहा था। अतः जैसा यहोवा ने आदेश दिया है — योराम के शव को खेत में फेंक दो!” {9:27} यहूदा के राजा अहज्याह ने यह देखा, अतः वह भाग निकला। वह बारी के भवन के रास्ते से होकर भागा। येहू ने उसका पीछा किया। येहू ने कहा, “अहज्याह को भी उसके रथ में मार डालो।” अतः येहू के लोगों ने यिबलाम के पास गूर को जाने वाली सड़क पर अहज्याह पर प्रहार किया। अहज्याह मगिद्दो तक भागा, किन्तु वहाँ वह मर गया। {9:28} अहज्याह के सेवक अहज्याह के शव को रथ में यरूशलेम ले गए। उन्होंने अहज्याह को, उसकी कब्र में, उसके पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में दफनाया। {9:29} अहज्याह, इस्राएल पर योराम के राज्यकाल के ग्यारहवें वर्ष में यहूदा का राजा बना था। {i9:30} ईज़ेबेल की भयंकर मृत्यु {9:30} येहू यिज्रैल गया और ईज़ेबेल को यह सूचना मिली। उसने अपनी सज्जा की और अपने केशों को बाँधा। तब वह खिड़की के सहारे खड़ी हुई और बाहर को देखने लगी। {9:31} येहू ने नगर में प्रवेश किया। ईज़ेबेल ने कहा, “नमस्कार ओ जिम्री! तुमने ठीक उसकी ही तरह स्वामी को मार डाला!” {9:32} येहू ने ऊपर खिड़की की ओर देखा। उसने कहा, “मेरी तरफ कौन है कौन?” दो या तीन खोजों ने खिड़की से येहू को देखा। {9:33} येहू ने उनसे कहा, “ईज़ेबेल को नीचे फेंको!” तब खोजों ने ईज़ेबेल को नीचे फेंक दिया। ईज़ेबेल का कुछ रक्त दीवार और घोड़ों पर छिटक गया। घोड़ों ने ईज़ेबेल के शरीर को कुचल डाला। {9:34} येहू महल में घुसा और उसने खाया और दाखमधु पिया। तब उसने कहा, “अब इस अभिशापित स्त्री के बारे में यह करो। उसे दफना दो क्योंकि वह एक राजा की पुत्री है।” {9:35} कुछ लोग ईज़ेबेल को दफनाने गए। किन्तु वे उसके शव को न पा सके। वे केवल उसकी खोपड़ी, उसके पैर और उसके हाथों की हथेलियाँ पा सके। {9:36} इसलिये वे लोग लौटे और उन्होंने येहू से कहा। तब येहू ने कहा, “यहोवा ने अपने सेवक तिशबी एलिय्याह से यह सन्देश देने को कहा था। एलिय्याह ने कहा थाः ‘यिज्रैल के क्षेत्र में ईज़ेबेल के शव को कुत्ते खायेंगे। {9:37} ईज़ेबेल का शव यिज्रैल के क्षेत्र में खेत के गोबर की तरह होगा। लोग ईज़ेबेल के शव को पहचान नहीं पाएंगे।’” {i10:1} येहू शोमरोन के प्रमुखों को लिखता है {10:1} अहाब के सत्तर पुत्र शोमरोन में थे। येहू ने पत्र लिखे और उन्हें शोमरोन में यिज्रैल के शासकों और प्रमुखों को भेजा। उसने उन लोगों को भी पत्र भेजे जो अहाब के पुत्रों के अभिभावक थे। पत्र में येहू ने लिखा, {10:2} “ज्योंही तुम इस पत्र को पाओ तुम अपने स्वामी के पुत्रों में से सर्वाधिक योग्य और उत्तम व्यक्ति को चुनो। तुम्हारे पास रथ और घोड़े हैं और तुम एक दृढ़ नगर {10:3} में रह रहे हो।। तुम्हारे पास अस्त्र — शस्त्र भी है। जिस पुत्र को चुनो उसे उसके पिता के सिंहासन पर बिठाओ। तब अपने स्वामी के परिवार के लिये युद्ध करो।” {10:4} किन्तु यिज्रैल के शासक और प्रमुख बहुत भयभीत थे। उन्होंने कहा, “दोनो राजा (योराम और अहज्याह) येहू को रोक नहीं सके। अतः हम भी उसे रोक नहीं सकते!” {10:5} अहाब के महल का प्रबन्धक, नगर प्रशासक, प्रमुख वरिष्ठ — जन और अहाब के बच्चों के अभिभावकों ने येहू के पास एक सन्देश भेजा! “हम आपके सेवक हैं। हम वह सब करेंगे जो आप कहेंगे। हम किसी व्यक्ति को राजा नहीं बनाएंगे। वही करें जो आप ठीक समझते हैं।” {i10:6} शोमरोन के प्रमुख अहाब के बच्चों को मार डालते हैं {10:6} तब येहू ने एक दूसरा पत्र इन प्रमुखों को लिखा। येहू ने कहा, “यदि तुम मेरा समर्थन करते हो और मेरा आदेश मानते हो तो अहाब के पुत्रों का सिर काट डालो और लगभग इसी समय कल यिज्रैल में मेरे पास उन्हें ले आओ।” अहाब के सत्तर पुत्र थे। वे नगर के उन प्रमुखों के पास थे जो उनकी सहायता करते थे। {10:7} जब नगर के प्रमुखों ने पत्र प्राप्त किया तब उन्होंने राजा के पुत्रों को लिया और सभी सत्तर पुत्रों को मार डाला। तब प्रमुखों ने राजपुत्रों के सिर टोकरियों में रखे। उन्होंने टोकरियों को यिज्रैल में येहू के पास भेज दिया। {10:8} सन्देशवाहक येहू के पास आए और उससे कहा, “वे राजपुत्रों का सिर लेकर आए हैं।” तब येहू ने कहा, “नगर — द्वार पर, प्रातःकाल तक उन सिरों की दो ढेरें बना कर रखो।” {10:9} सुबह को येहू बाहर निकला और लोगों के सामने खड़ा हुआ। उसने लोगों से कहा, “तुम लोग निरपराध लोग हो। देखो, मैंने अपने स्वामी के विरुद्ध योजनाएं बनाई। मैंने उसे मार डाला। किन्तु अहाब के इन सब पुत्रों को किसने मारा तुमने उन्हें मारा! {10:10} तुम्हें समझना चाहिये कि यहोवा जो कुछ कहता है वह घटित होगा और यहोवा ने एलिय्याह का उपयोग अहाब के परिवार के लिये इन बातों को कहने के लिये किया था। अब यहोवा ने वह कर दिया जिसके लिये उसने कहा था कि मैं करूँगा।” {10:11} इस प्रकार येहू ने यिज्रैल में रहने वाले अहाब के पूरे परिवार को मरा डाला। येहू ने सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों, जिगरी दोस्तों और याजकों को मार डाला। उसने अहाब के एक भी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा। {i10:12} येहू अहज्याह के सम्बन्धियों को मार डालता है {10:12} येहू यिज्रैल से चला और शोमरोन पहुँचा। रास्ते में येहू “गड़रियों का डेरा” नामक स्थान पर रुका। जहाँ गड़रिये अपनी भेड़ों का ऊन कतरते थे। {10:13} येहू यहूदा के राजा अहज्याह के सन्बन्धियों से मिला। येहू ने उनसे पूछा, “तुम कौन हो” उन्होंने उत्तर दिया, “हम लोग यहूदा के राजा अहज्याह के सम्बन्धि हैं। हम लोग यहाँ राजा के बच्चों और राजमाता के बच्चों से मिलने आए हैं।” {10:14} तब येहू ने अपने लोगों से कहा, “इन्हें जीवित पकड़ लो।” येहू के लोगों ने अहज्याह के सम्बन्धियों को जीवित पकड़ लिया। वे बयालीस लोग थे। येहू ने उन्हें बेथ — एकद के पास कुँए पर मार डाला। येहू ने किसी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा। {i10:15} येहू यहोनादाब से मिलता है {10:15} येहू जब उस स्थान से चला तो रेकाब के पुत्र यहोनादाब से मिला। येहोनादाब येहू से मिलने आ रहा था। येहू ने यहोनादाब का स्वागत किया और उससे पूछा, “क्या तुम मेरे उतने ही विश्वसनीय मित्र हो जितना मैं तुम्हारा हूँ।” यहोनादाब ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं तुम्हारा विश्वासपात्र मित्र हूँ।” येहू ने कहा, “यदि तुम हो तो, तुम अपना हाथ मुझेदो।” तब येहू बाहर झुका और उसने यहोनादाब को अपने रथ में खींच लिया। {10:16} येहू ने कहा, “मेरे साथ आओ। तुम देखोगे कि यहोवा के लिये मेरी भावनायें कितनी प्रबल हैं।” इस प्रकार यहोनादाब येहू के रथ में बैठा। {10:17} येहू शोमरोन में आया और अहाब के उस सारे परिवार को मार डाला जो अभी तक शोमरोन में जीवित था। येहू ने उन सभी को मार डाला। येहू ने वही काम किये जिन्हें यहोवा ने एलिय्याह से कहा था। {i10:18} येहू बाल के उपासकों को बुलाता है {10:18} तब येहू ने सभी लोगों को एक साथ इकट्ठा किया। येहू ने उनसे कहा, “अहाब ने बाल की सेवा नहीं के बराबर की। किन्तु येहू बाल की बहुत अधिक सेवा करेगा। {10:19} अब बाल के सभी याजकों और नबियों को एक साथ बुलाओ और उन सभी लोगों को एक साथ बुलाओ जो बाल की उपासना करते हैं। किसी व्यक्ति को इस सभा में अनुपस्थित न रहने दो। मैं बाल को बहुत बड़ी बलि चढ़ाने जा रहा हूँ। मैं उस किसी भी व्यक्ति को मार डालूँगा जो इसमें उपस्थित नहीं होगा!” किन्तु येहू उनके साथ चाल चल रहा था। येहू बाल के पूजकों को नष्ट कर देना चाहता था। {10:20} येहू ने कहा, “बाल के लिये एक धर्मसभा करो” और याजकों ने धर्मसभा की घोषणा कर दी। {10:21} तब येहू ने पूरे इस्राएल देश में सन्देश भेजा। बाल के सभी उपासक आए। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो घर पर रह गया हो। बाल के उपासक बाल के मन्दिर में आए। मन्दिर लोगों से भर गया। {10:22} येहू ने लबादे रखने वाले व्यक्ति से कहा, “बाल के सभी उपासकों के लिये लबादे लाओ।” अतः वह व्यक्ति बाल पूजकों के लिये लबादे लाया। {10:23} तब येहू और रेकाब का पुत्र यहोनादाब बाल के मन्दिर के अन्दर गये। येहू ने बाल के उपासकों से कहा, “अपने चारों ओर देख लो और यह निश्चय कर लो कि तुम्हारे साथ कोई यहोवा का सेवक तो नहीं है। यह निश्चय कर लो कि केवल बालपूजक लोग ही हैं।” {10:24} बाज — पूजक बाल के मन्दिर में बलि और होमबिल चढ़ाने गए। किन्तु बाहर येहू ने अस्सी व्यक्तियों को प्रतीक्षा में तैयार रखा था। येहू ने कहा, “किसी व्यक्ति को बचकर निकलने न दो। यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को बच निकलने देगा तो उसका भुगतान उसे अपने जीवन से करना होगा।” {10:25} येहू ने ज्योंही बलि और होमबलि चढ़ाना पूरा किया त्योंही उसने रक्षकों और सेनापतियों से कहा, “अन्दर जाओ और बाल — पूजकों को मार डालो! पूजागृह से किसी जीवित व्यक्ति को बाहर न आने दो!” अतः सेनापतियों ने पतली तलवारों का उपयोग किया और बाल पूजकों को मार डाला। रक्षकों और सेनापतियों ने बाल पूजकों के शवों को बाहर फेंक दिया। तब रक्षक और सेनापति बाल के पूजागृह के के भीतरी कमरे में गए। {10:26} वे बाल के पूजागृह के स्मृति — पाषाणों को बाहर ले आए और पूजागृह को जला दिया। {10:27} तब उन्होंने बाल के स्मृति — पाषाण को नष्ट — भ्रष्ट कर दिया। उन्होंने बाल के पूजागृह को भी ध्वस्त कर दिया। उन्होंने बाल के पूजागृह को एक शौचालय में बदल दिया। आज भी उसका उपयोग शौचालय के लिये होता है। {10:28} इस प्रकार येहू ने इस्राएल में बाल — पूजा को समाप्त कर दिया। {10:29} किन्तु येहू, नबात के पुत्र यारोबाम के उन पापों से पूरी तरह अपने को दूर न रख सका, जिन्होंने इस्राएल से पाप कराया था। येहू ने दान और बेतेल में सोने के बछड़ों को नष्ट नहीं किया। {i10:30} इस्राएल पर येहू का शासन {10:30} यहोवा ने येहू से कहा, “तुमने बहुत अच्छा किया है। तुमने वह काम किया है जिसे मैंने अच्छा बाताया है। तुमने अहाब के परिवार को उस तरह नष्ट किया है जैसा तुमसे मैं उसको नष्ट कराना चाहता था। इसलिये तुम्हारे वंशज इस्राएल पर चार पीढ़ी तक शासन करेंगे।” {10:31} किन्तु येहू पूरे हृदय से यहोवा के नियमों का पालन करने में सावधान नहीं था। येहू ने यारोबाम के उन पापों को करना बन्द नहीं किया जिन्होंने इस्राएल से पाप कराए थे। {i10:32} हजाएल इस्राएल को पराजित करता है {10:32} उस समय यहोवा ने इस्राएल के हिस्सों को अलग करना आरम्भ किया। अराम के राजा हजाएल ने इस्राएलियों को इस्राएल की हर एक सीमा पर हराया। {10:33} हजाएल ने यरदन नदी के पूर्व के गिलाद प्रदेश को, गाद, रूबेन और मनश्शे के परिवार समूह के प्रदेशों सहित जीत लिया। हजाएल ने अरोएर से लेकर अर्नोन घाटी के सहारे गिलाद और बाशान तक की सारी भूमि जीत ली। {i10:34} येहू की मृत्यु {10:34} वे सभी बड़े कार्य, जो येहू ने किये, इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। {10:35} येहू मरा और उसे उसके पूर्वजों के साथ दफना दिया गया। लोगों ने येहू को शोमरोन में दफनाया। उसके बाद येहू का पुत्र यहोआहाज इस्राएल का नया राजा हुआ। {10:36} येहू ने शोमरोन में इस्राएल पर अट्ठाईस वर्ष तक शासन किया। {i11:1} अतल्याह यहूदा के सभी राजपुत्रों को नष्ट कर देती है {11:1} अहज्याह की माँ अतल्याह ने देखा कि उसका पुत्र मर गया। तब वह उठी और उसने राजा के पूरे परिवार को मार डाला। {11:2} यहोशेबा राजा योराम की पुत्री और अहज्याह की बहन थी। योआश राजा के पुत्रों में से एक था। यहोशेबा ने योआश को तब छिपा लिया जब अन्य बच्चे मारे जा रहे थे। यहोशेबा ने योआश को छिपा दिया। उसने योआश और उसकी धायी को अपने सोने के कमरे में छिपा दिया। इस प्रकार यहोशेबा और धायी ने योआश को अतल्याह से छिपा लिया। इस प्रकार योआश मारा नहीं गया। {11:3} तब योआश और यहोशेबा यहोवा के मन्दिर में जा छिपे। योआश वहाँ छः वर्ष तक छिपा रहा और अतल्याह ने यहूदा प्रदेश पर शासन किया। {11:4} सातवें वर्ष प्रमुख याजक यहोयादा ने करीतों के सेनापतियों और रक्षकों को बुलाया और वे आए। यहोयादा ने यहोवा के मन्दिर में उन्हें एक साथ बिठाया। तब यहोयादा ने उनके साथ एक वाचा की। मन्दिर में यहोयादा ने उन्हें प्रतिज्ञा करने को विवश किया। तब उसने राजा के पुत्र (योआश) को उन्हें दिखाया। {11:5} तब यहोयादा ने उनको आदेश दिया। उसने कहा, “तुम्हें यह करना होगा। प्रत्येक सब्त — दिवस के आरम्भ होने पर तुम लोगों के एक तिहाई को यहाँ आना चाहिए। तुम लोगों को राजा की रक्षा उसके घर में करनी होगी। {11:6} दूसरे एक तिहाई को सूर — द्वार पर रहना होगा और बचे एक तिहाई को रक्षकों के पीछे, द्वार पर रहना होगा। इस प्रकार तुम लोग योआश की रक्षा में दीवार की तरह रहोगे। {11:7} प्रत्येक सब्त — दिवस के अन्त में तुम लोगों के दो तिहाई यहोवा के मन्दिर की रक्षा करते हुए राजा योआश की रक्षा करेंगे। {11:8} जब कभी वह कहीं जाये तुम्हें राजा योआश के साथ ही रहना चाहिये। पूरे दल को उसे घेरे रखना चाहिये। प्रत्येक रक्षक को अपने अस्त्र — शस्त्र अपने हाथ में रखना चाहिये और तुम लोगों को उस किसी भी व्यक्ति को मार डालना चाहिये जो तुम्हारे अत्याधिक करीब पहुंचे।” {11:9} सेनापतियों ने याजक यहोयादा के दिये गए सभी आदेशों का पालन किया। हर एक सेनापति ने अपने सैनिकों को लिया। एक दल को राजा की रक्षा शनिवार को करनी थी और अन्य दलों को सप्ताह के अन्य दिनों में राजा की रक्षा करनी थी। वे सभी पुरुष याजक यहोयादा के पास गए {11:10} और याजक ने सेनापतियों को भाले और ढाले दीं। ये वे भाले और ढालें थीं जिन्हें दाऊद ने यहोवा के मन्दिर में रखा था। {11:11} ये रक्षक अपने हाथों में अपने शस्त्र लिये मन्दिर के दायें कोने से लेकर बायें कोने तक खड़े थे। वे वेदी और मन्दिर के चारों ओर और जब राजा मन्दिर में जाता तो उसके चारों ओर खड़े होते थे। {11:12} ये व्यक्ति योआश को बाहर ले आए। उन्होंने योआश के सिर पर मुकुट पहनाया और परमेश्वर तथा राजा के बीच की वाचा को उसे दिया। तब उन्होंने उसका अभिषेक किया और उसे नया राजा बनाया। उन्होंने तालियाँ बजाईं और उद्घोष किया, “राजा दीर्घायु हो!” {11:13} रानी अतल्याह ने रक्षकों और लोगों का यह उद्घोष सुना। इसलिये वह यहोवा के मन्दिर में लोगों के पास गई। {11:14} अतल्याह ने उस स्तम्भ के सहारे राजा को देखा जहाँ राजा प्रायः खड़े होते थे। उसने प्रमुखों और लोगों को राजा के लिये तुरही बजाते हुये भी देखा। उसने देखा कि सभी लोग बहुत प्रसन्न थे। उसने तुरही को बजते हुए सुना और उसने अपने वस्त्र यह प्रकट करने के लिये फाड़ डाले कि उसे बड़ी घबराहट है। तब अतल्याह चिल्ला उठी, “षडयन्त्र! षडयन्त्र!” {11:15} याजक यहोयादा ने सैनिकों की व्यवस्था के अधिकारी सेनापतियों को आदेश दिया। यहोयादा ने उनसे कहा, “अतल्याह को मन्दिर के क्षेत्र से बाहर ले जाओ। उसके किसी भी साथ देने वाले को मार डालो। किन्तु उन्हें यहोवा के मन्दिर में मत मारो।” {11:16} जैसे ही वह महल के अश्व — द्वार से गई सैनिकों ने उसे पकड़ लिया और मार डाला। सैनिकों ने अतल्याह को वहीं मार डाला। {11:17} तब यहोयादा ने यहोवा, राजा और लोगों के बीच एक सन्धि कराई। इस वाचा से यह पता चलता था कि राजा और लोग यहोवा के अपने ही हैं। यहोयादा ने राजा और लोगों के बीच भी एक वाचा कराई। इस वाचा से यह पता चलता था कि राजा लोगों कि लिये कार्य करेगा और इससे यह पता चलता था कि लोग राजा का आदेश मानेंगे और उसका अनुसरण करेंगे। {11:18} तब सभी लोग असत्य देवता बाल के पूजागृह को गए। लोगों ने बाल की मूर्ति और उसकी वेदियों को नष्ट कर दिया। उन्होंने उनके बहुत से टुकड़े कर डाले। लोगों ने बाल के याजक मत्तन को भी वेदी के सामने मार डाला। तब याजक यहोयादा ने कुछ लोगों को यहोवा के मन्दिर की व्यवस्था के लिये रखा। {11:19} याजकों, विशेष रक्षकों और सेनापतियों के अनुरक्षण में राजा यहोवा के मन्दिर से राजमहल तक गया और अन्य सभी लोग उनके पीछे — पीछे गए। वे राजा के महल के द्वार तक गए। तब राजा योआश राजसिंहासन पर बैठा। {11:20} सभी लोग प्रसन्न थे। नगर शान्त था। रानी अतल्याह, राजा के महल के पास तलवार के घाट उतार दी गई थी। {11:21} जब योआश राजा हुआ, वह सात वर्ष का था। {i12:1} योआश अपना शासन आरम्भ करता है {12:1} योआश ने इस्राएल में येहू के राज्यकाल के सातवें वर्ष में शासन करना आरम्भ किया। योआश ने चालीस वर्ष तक यरूशलेम में शासन किया। योआश की माँ सिब्या बर्शेबा की थी। {12:2} योआश ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा कहा तथा। योआश ने पूरे जीवन यहोवा की आज्ञा का पालन किया। उसने वे कार्य किये जिनकी शिक्षा याजक यहोयादा ने उसे दी थी। {12:3} किन्तु उसने उच्च स्थानों को नष्ट नहीं किया। लोग तब तक भी उन पूजा के स्थानों पर बलि भेंट करते तथा सुगन्धि जलाते थे। {i12:4} योआश ने मन्दिर की मरम्मत का आदेश दिया {12:4} योआश ने याजकों से कहा, “यहोवा के मन्दिर में बहुत धन है। लोगों ने मन्दिर में चीज़ें दी हैं। लोगों ने गणना के समय मन्दिर का कर दिया है और लोगों ने धन इसलिये दिया है कि वे स्वत: ही देना चाहते थे। याजको, आप लोग उस धन {12:5} को ले लें और यहोवा के मन्दिर की मरम्मत करवा दें। हर एक याजक उस धन का इसमें उपयोग करे जो उसे उन लोगों से मिलता है जिनकी वे सेवा करते हैं। उसे उस धन का उपयोग यहोवा के मन्दिर की टूट — फूट की मरम्मत में करना चाहिये।” {12:6} किन्तु याजकों ने मरम्मत नहीं की। योआश के राज्यकाल के तेईसवें वर्ष में भी याजकों ने तब तक मन्दिर की मरम्मत नहीं की थी। {12:7} इसलिये योआश ने याजक यहोयादा और अन्य याजकों को बुलाया। योआश ने यहोयादा और अन्य याजकों से पूछा, “आपने मन्दिर की मरम्मत क्यों नहीं की आप उन लोगों से धन लेना बन्द करें जिनकी आप सेवा करते हैं। उस धन को उपयोग में लाना बन्द करें। उस धन का उपयोग मन्दिर की मरम्मत में होना चाहिये।” {12:8} याजकों ने लोगों से धन न लेना स्वीकार किया। किन्तु उन्होंने मन्दिर की मरम्मत न करने का भी निश्चय किया। {12:9} इसलिये याजक यहोयादा ने एक सन्दूक लिया और उसके ऊपरी भाग में एक छेद कर दिया। तब यहोयादा ने सन्दूक को वेदी के दक्षिण की ओर रख दिया। यह सन्दूक उस दरवाजे के पास था जिससे लोग यहोवा के मन्दिर में आते थे। कुछ याजक मन्दिर के द्वार — पथ की रक्षा करते थे। वे याजक उस धन को, जिसे लोग यहोवा को देते थे, ले लेते थे और उस सन्दूक में डाल देते थे। {12:10} जब लोग मन्दिर को जाते थे तब वे उस सन्दूक में सिक्के डालते थे। जब भी राजा का सचिव और महायाजक यह जानते कि सन्दूक में बहुत धन है तो वे आते और सन्दूक से धन को निकाल लेते। वे धन को थैलों में रखते और उसे गिन लेते थे। {12:11} तब वे उन मजदूरों का भुगतान करते जो यहोवा के मन्दिर में काम करते थे। वे यहोवा के मन्दिर में काम करने वाले बढ़ईयों और अन्य कारीगरों का भुगतान करते थे। {12:12} वे धन का उपयोग पत्थर के कामगारों और पत्थर तराशों का भुगतान करने में करते थे और वे उस धन का उपयोग लकड़ी, कटे पत्थर, और यहोवा के मन्दिर की मरम्मत के लिये अन्य चीज़ों को खरीदने में करते थे। {12:13} लोगों ने यहोवा के मन्दिर के लिये धन दिया। किन्तु याजक उस धन का उपयोग चाँदी के बर्तन, बत्ती — झाड़नी, चिलमची, तुरही या कोई भी सोने {12:14} — चाँदी के तश्तरियों को बनाने में नहीं कर सके। वह धन मजदूरों का भुगतान करने में लगा और उन मजदूरों ने यहोवा के मन्दिर की मरम्मत की। {12:15} किसी ने सारे धन का हिसाब नहीं किया या किसी कार्यकर्ता को यह बताने के लिये विवश नहीं किया गया कि धन क्या हुआ क्यों क्योंकि उन कार्यकर्ताओं पर विश्वास किया जा सकता था। {12:16} लोगों ने उस समय धन दिया जब उन्होंने दोषबलि या पापबलि चढ़ाई। किन्तु उस धन का उपयोग मजदूर के भुगतान के लिये नहीं किया गया। वह धन याजकों का था। {i12:17} योआश हजाएल से यरूशलेम की रक्षा करता है {12:17} हजाएल अराम का राजा था। हजाएल गत नगर के विरुद्ध युद्ध करने गया। हजाएल ने गत को हराया। तब उसने यरूशलेम के विरुद्ध युद्ध करने जाने की योजना बनाई। {12:18} यहोशापात, यहोराम और अहज्याह यहूदाक के राजा रह चुके थे। वे योआश के पूर्वज थे। उन्होंने यहोवा को बहुत सी चीज़ें भेंट की थीं। वे चीज़ें मन्दिर में रखी थी। योआश ने भी बहुत सी चीज़ें यहोवा को भेंट की थी। योआश ने उन सभी विशेष चीज़ों और मन्दिर और अपने महल में रखे हुए सारे सोने को लिया। तब योआश ने उन सभी कीमती चीज़ों को अराम के राजा हजाएल के पास भेजा। इसी से हजाएल ने अपनी सेना को यरूशलेम से हटा लिया। {i12:19} योआश की मृत्यु {12:19} योआश ने जो बड़े कार्य किये वे सभी यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। {12:20} योआश के अधिकारियों ने उसके विरुद्ध योजना बनाई। उन्होंने योआश को सिल्ला तक जाने वाली सड़क पर स्थित मिल्लो के घर पर मार डाला। {12:21} शिमात का पुत्र योजाकार और शोमर का पुत्र यहोजाबाद योआश के अधिकारी थे। उन व्यक्तियों ने योआश को मार डाला। लोगों ने दाऊद नगर में योआश को उसके पूर्वजों के साथ दफनाया। योआश का पुत्र अमस्याह उसके बाद नया राजा बना। {i13:1} यहोआहाज अपना शासन आरम्भ करता है {13:1} येहू का पुत्र यहोआहाज शोमरोन में इस्राएल का राजा बना। यह अहज्याह के पुत्र योआश के यहूदा में राज्यकाल के तेईसवें वर्ष में हुआ। यहोआहाज ने सत्रह वर्ष तक राज्य किया। {13:2} यहोआहाज ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोआहाज ने नबात के पुत्र यारोबाम के पापों का अनुसरण किया जिसने इस्राएल से पाप कराया। यहोआहाज ने उन कामों को करना बन्द नहीं किया। {13:3} तब यहोवा इस्राएल पर बहुत क्रोधित हुआ। यहोवा ने इस्राएल को अराम के राजा हजाएल और हजाएल के पुत्र बेन्हदद के अधीन कर दिया। {i13:4} यहोवा ने इस्राएल के लोगों पर कृपा की {13:4} तब यहोआहाज ने यहोवा से सहायता के लिये प्रार्थना की और यहोवा ने उसकी प्रार्थना सुनी। यहोवा ने इस्राएल के लोगों के कष्टों और अराम के राजा के उत्पीड़न को देखा था। {13:5} इसलिए यहोवा ने एक व्यक्ति को इस्राएल की रक्षा के लिये भेजा। इस्राएली अरामियों से स्वतन्त्र हो गए। अतः इस्राएली, पहले की तरह अपने घर लौट गए। {13:6} किन्तु इस्राएलियों ने फिर भी, उस यारोबाम के परिवार के पापों को करना बन्द नहीं किया। यारोबाम ने इस्राएल से पाप करवाया, और इस्राएली निरन्तर पाप कर्म करते रहे। उन्होंने अशेरा के स्तम्भों को भी शोमरोन में रखा। {13:7} अराम के राजा ने यहोआहाज की सेना को पराजित किया। अराम के राजा ने सेना के अधिकांश लोगों को नष्ट कर दिया। उसने केवल पचास घुड़सवार, दस रथ, और दस हज़ार पैदल सैनिक छोड़े। यहोआहाज के सैनिक दायं चलाते समय हवा से उड़ाये गए भूसे की तरह थे। {13:8} सभी बड़े कार्य जो यहोआहाज ने किये इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {13:9} यहोआहाज मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। लोगों ने यहोआहाज को शोमरोन में दफनाया। यहोआहाज का पुत्र यहोआश उसके बाद नया राजा हुआ। {i13:10} इस्राएल पर यहोआश का शासन {13:10} यहोआहाज का पुत्र यहोआश शोमरोन में इस्राएल का राजा हुआ। यह योआश के यहूदा में राज्यकाल के सैंतीसवे वर्ष में हुआ। यहोआश ने इस्राएल पर सोलह वर्ष तक राज्य किया। {13:11} इस्राएल के राजा यहोआश ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। उसने नबात के पुत्र यारोबाम के पापों को बन्द नहीं किया जिसने इस्राएल से पाप कराये। यहोआश उन पापों को करता रहा। {13:12} सभी बड़े कार्य जो यहोआश ने किये और यहूदा के राजा अहज्याह के विरुद्ध उसने जो युद्ध किया वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास के पुस्तक में लिखे हैं। {13:13} यहोआश मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। यारोबाम नया राजा बना और यहोआश के राज सिंहासन पर बैठा। यहोआश शोमरोन में इस्राएल के राजाओं के साथ दफनाया गया। {i13:14} यहोआश एलीशा से भेंट करता है {13:14} एलीशा बीमार पड़ा। बाद में एलीशा बीमारी से मर गया। इस्राएल का राजा यहोआश एलीशा से मिलने गया। यहोआश एलीशा के लिये रोया। यहोआश ने कहा, “मेरे पिता! मेरे पिता! क्या यह इस्राएल के रथों और घोड़ों के लिये समय है?” {13:15} एलीशा ने यहोआश से कहा, “एक धनुष और कुछ बाण लो।” यहोआश ने एक धनुष और कुछ बाण लिये। {13:16} तब एलीशा ने इस्राएल के राजा से कहा, “अपना हाथ धनुष पर रखो।” यहोआश ने अपना हाथ धनुष पर रखा। तब एलीशा ने अपने हाथ राजा के हाथ पर रखे। {13:17} एलीशा ने कहा, “पूर्व की खिड़की खोलो।” यहोआश ने खिड़की खोली। तब एलीशा ने कहा, “बाण चलाओ।” यहोआश ने बाण चला दिया। तब एलीशा ने कहा, “वह यहोवा के विजय का बाण है! यह अराम पर विजय का बाण है। तुम अरामियों को अपेक में हराओगे और तुम उनको नष्ट कर दोगे।” {13:18} एलीशा ने कहा, “बाण लो।” योआश ने बाण लिये। तब एलीशा ने इस्राएल के राजा से कहा, “भूमि पर प्रहार करो।” योआश ने भूमि पर तीन बार प्रहार किया। तब वह रुक गाय। {13:19} परमेश्वर का जन(एलीशा) योआश पर क्रोधित हुआ। एलीशा ने कहा, “तुम्हें पाँच या छः बार धरती पर प्रहार करना चाहिए था। तब तुम अराम को उसे नष्ट करने तक हराते! किन्तु अब तुम अराम को केवल तीन बार हराओगे!” {i13:20} एलीशा की कब्र पर एक अद्भुत बात होती है {13:20} एलीशा मरा और लोगों ने उसे दफनाया। एक बार बसन्त में मोआबी सैनिकों का एक दल इस्राएल आया।वे युद्ध में सामग्री लेने आए। {13:21} कुछ इस्राएली एक मरे व्यक्ति को दफना रहे थे और उन्होंने सैनिकों के उस दल को देखा। इस्राएलियों ने जल्दी में शव को एलीशा की कब्र में फेंका और वे भाग खड़े हुए। ज्योंही उस मरे व्यक्ति ने एलीशा की हड्डियों का स्पर्श किया, मरा व्यक्ति जीवित हो उठा और अपने पैरों पर खड़ा हो गया। {i13:22} योआश इस्राएल के नगर वापस जीतता है {13:22} यहोआहाज के पूरे शासन काल में अराम के राजा हजाएल ने इस्राएल को परेशान किया। {13:23} किन्तु यहोवा इस्राएलियों पर दयालु था। यहोवा को दया आई और वह इस्रालियों की ओर हुआ। क्यों क्योंकि इब्राहीम, इसहाक और याकूब के साथ अपनी वाचा के कारण, यहोवा इस्राएलियों को अभी नष्ट करने के लिये तैयार नहीं था। उसने अभी तक उन्हें अपने से दूर नहीं फेंका था। {13:24} अराम का राजा हजाएल मरा और उसके बाद बेन्हदद नया राजा बना। {13:25} मरने के पहले हजाएल ने योआश के पिता यहोआहाज से युद्ध में कुछ नगर लिये थे। किन्तु अब यहोआहाज ने हजाएल के पुत्र बेन्हदद से वे नगर वापस ले लिये। योआश ने बेन्हदद को तीन बार हराया और इस्राएल के नगरों को वापस लिया। {i14:1} अमस्याह यहूदा में अपना शासन आरम्भ करता है {14:1} यहूदा के राजा योआश का पुत्र अमस्याह इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश के शासन काल के दूसरे वर्ष में राजा हुआ। {14:2} अमस्याह ने जब शासन करना आरम्भ किया, वह पच्चीस वर्ष का था। अमस्याह ने उनतीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य किया। अमस्याह की माँ यरूशलेम की निवासी यहोअद्दीन थी। {14:3} अमस्याह ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा बताया था। किन्तु उसने अपने पूर्वज दाऊद की तरह परमेश्वर का अनुसरण पूरी तरह से नहीं किया। अमस्याह ने वे सारे काम किये जो उसके पिता योआश ने किये थे। {14:4} उसने उच्च स्थानों को नष्ट नहीं किया। लोग उन पूजा के स्थानों पर तब तक बलि देते और सुगन्धि जलाते थे। {14:5} जिस समय अमस्याह का राज्य पर दृढ़ नियन्त्रण था, उसने उन अधिकारियों को मार डाला जिन्होंने उसके पिता को मारा था। {14:6} किन्तु उसने हत्यारों के बच्चों को, मूसा के व्यवस्था किताब में लिखे नियमों के कारण नहीं मारा। यहोवा ने अपना यह आदेश मूसा के व्यवस्था में दिया थाः “माता — पिता बच्चों द्वारा कुछ किये जाने के कारण मारे नहीं जा सकते और बच्चे अपने माता — पिता द्वारा कुछ किये जाने के कारण मारे नहीं जा सकते। कोई व्यक्ति केवल अपने अपने ही किये बुरे कार्य के लिये मारा जा सकता है।” {14:7} अमस्याह ने नमक घाटी में दस हज़ार एदोमियों को मार डाला। युद्ध में अमस्याह ने सेला को जीता और उसका नाम योक्तेल रखा। वह स्थान आज भी योक्तेल कहा जाता है। {i14:8} अमस्याह योआश के विरुद्ध युद्ध छेड़ना चाहता है {14:8} अमस्याह ने इस्राएल के राजा येहू के पुत्र यहोआहाज के पुत्र योआश के पास सन्देशवाहक भेजा। अमस्याह के सन्देश में कहा गया, “आओ, हम परस्पर युद्ध करें। आमने सामने होकर एक दूसरे का मुकाबला करें।” {14:9} इस्राएल के राजा योआश ने यहूदा के राजा अमस्याह को उत्तर भेजा। योआश ने कहा, “लबानोन की एक कटीली झाड़ी ने लबानोन के देवदारु पेड़ के पास एक सन्देश भेजा। सन्देश यह था, ‘अपनी पुत्री, मेरे पुत्र के साथ विवाह के लिये दो।’ किन्तु लबानोन का एक जंगली जानवर उधर से निकला और कटीली झाड़ी को कुचल गया। {14:10} यह सत्य है कि तुमने एदोम को हराया है। किन्तु तुम एदोम पर विजय के कारण घमण्डी हो गए हो। अपनी प्रसिद्धि का आनन्द उठाओ तथा घर पर रहो। अपने लिये परेशानियाँ मत मोल लो। यदि तुम ऐसा करोगे तुम गिर जाओगे और तुम्हारे साथ यहूदा भी गिरेगा!” {14:11} किन्तु अमस्याह ने योआश की चेतावनी अनसुनी कर दी। अतः इस्राएल का राजा योआश यहूदा के राजा अमस्याह के विरुद्ध उसके ही नगर बेतशेमेश में लड़ने गया। {14:12} इस्राएल ने यहूदा को पराजित किया। यहूदा का हर एक आदमी घर भाग गया। {14:13} बेतशेमेश में इस्राएल के राजा योआश ने अहज्याह के पौत्र व योआश के पुत्र यहूदा के राजा अमस्याह को बन्दी बना लिया। योआश अमस्याह को यरूशलेम ले गया। योआश ने एप्रैम द्वार से कोने के फाटक तक लगभग छः सौ फुट यरूशलेम की दीवार को गिरवाया। {14:14} तब योआश ने सारा सोना — चाँदी और जो भी बर्तन यहोवा के मन्दिर और राजमहल के खजाने में थे, उन सब को लूट लिया। योआश ने कुछ लोगों को बन्दी बना लिया। तब वह शोमरोन को वापस लौट गया। {14:15} जो सभी बड़े कार्य योआश ने किये, साथ ही साथ यहूदा के राजा अमस्याह के साथ वह कैसे लड़ा, इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। {14:16} योआश मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। योआश शोमरोन में इस्राएल के राजाओं के साथ दफनाया गया। योआश का पुत्र यारोबाम उसके बाद नया राजा हुआ। {i14:17} अमस्याह की मृत्यु {14:17} यहूदा के राजा योआश का पुत्र अमस्याह इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश की मृत्यु के बाद पन्द्रह वर्ष तक जीवित रहा। {14:18} अमस्याह ने जो बड़े काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। {14:19} लोगों ने यरूशलेम में अमस्याह के विरुद्ध एक योजना बनाई। अमस्याह लाकीश को भाग निकला। किन्तु लोगों ने अमस्याह के विरुद्ध लाकीश को अपने आदमी भेजे और उन लोगों ने लाकीश में अमस्याह को मार डाला। {14:20} लोग घोड़ों पर अमस्याह के शव को वापस ले आए। अमस्याह दाऊद नगर में अपने पूर्वजों के साथ यरूशलेम में दफनाया गया। {i14:21} अजर्याह यहूदा पर अपना शासन आरम्भ करता है {14:21} तब यहूदा के सभी लोगों ने अजर्याह को नया राजा बनाया। अजर्याह सोलह वर्ष का था। {14:22} इस प्रकार अमस्याह मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। तब अजर्याह ने एलत को फिर बनाया और इसे यहूदा को वापस दे दिया। {i14:23} यारोबाम द्वितीय इस्राएल पर शासन आरम्भ करता है {14:23} इस्राएल के राजा योआश के पुत्र यारोबाम ने शोमरोन में यहूदा के राजा योआश के पुत्र अमस्याह के राज्यकाल के पन्द्रहवें वर्ष में शासन करना आरम्भ किया। यारोबाम ने इकतालीस वर्ष तक शासन किया। {14:24} यारोबाम ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यारोबाम ने उस नबात के पुत्र यारोबाम के पापों को करना बन्द नहीं किया, जिसने इस्राएल को पाप करने के लिये विवश किया। {14:25} यारोबाम ने इस्राएल की उस भूमि को जो सिवाना हमात से अराबा सागर (मृत सागर) तक जाती थी, वापस लिया। यह वैसा ही हुआ जैसा इस्राएल के यहोवा ने अपने सेवक गथेपेर के नबी, अमित्तै के पुत्र योना से कहा था। {14:26} यहोवा ने देखा कि सभी इस्राएली, चाहे वे स्वतन्त्र हों या दास, बहुत सी परेशानियों में हैं। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं बचा था जो इस्राएल की सहायता कर सकता। {14:27} यहोवा ने यह नहीं कहा था कि वह संसार से इस्राएल का नाम उठा लेगा। इसलिये यहोवा ने योआश के पुत्र यारोबाम का उपयोग इस्राएल के लोगों की रक्षा के लिये किया। {14:28} यारोबाम ने जो बड़े काम किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। उसमें इस्राएल के लिये दमिश्क और हमात को यारोबाम द्वारा वापस जीत लेने की कथा सम्मिलित है। (पहले ये नगर यहूदा के अधिपत्य में थे।) {14:29} यारोबाम मरा और इस्राएल के राजाओं, अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। यारोबाम का पुत्र जकर्याह उसके बाद नया राजा हुआ। {i15:1} यहूदा पर अजर्याह का शासन {15:1} यहूदा के राजा अमस्याह का पुत्र अजर्याह इस्राएल के राजा यारोबाम के राज्यकाल के सत्ताईसवें, वर्ष में राजा बना। {15:2} शासन करना आरम्भ करने के समय अजर्याह सोलह वर्ष का था। उसने यरूशलेम में बावन वर्ष तक शासन किया। अजर्याह की माँ यरूशलेम की यकोल्याह नाम की थी। {15:3} अजर्याह ने ठीक अपने पिता अमस्याह की तरह वे काम किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा बताया था। अर्जयाह ने उन सभी कामों का अनुसरण किया जिन्हें उसके पिता अमस्याह ने किया था। {15:4} किन्तु उसने उच्च स्थानों को नष्ट नहीं किया। इन पूजा के स्थानों पर लोग अब भी बलि भेंट करते तथा सुगन्धि जलाते थे। {15:5} यहोवा ने राजा अजर्याह को हानिकारक कुष्ठरोग का रोगी बना दिया। वह मरने के दिन तक इसी रोग से पीड़ित रहा। अजर्याह एक अलग महल में रहता था। राजा का पुत्र योताम राज महल की देखभाल और जनता का न्याय करता था। {15:6} अजर्याह ने जो बड़े काम किये वे, यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {15:7} अजर्याह मरा और अपने पूर्वजों के साथ दाऊद के नगर में दफनाया गया। अजर्याह का पुत्र योताम उसके बाद नया राजा हुआ। {i15:8} इस्राएल पर जकर्याह का अल्पकालीन शासन {15:8} यारोबाम के पुत्र जकर्याह ने इस्राएल में शोमरोन पर छः महीने तक शासन किया। यह यहूदा के राजा अजर्याह के राज्यकाल के अड़तीसवें वर्ष में हुआ। {15:9} जकर्याह ने वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने बुरा कहा था। उसने वे ही काम किये जो उसके पूर्वजों ने किये थे। उसने नबाद के पुत्र यारोबाम के पापों का करना बन्द नहीं किया जिसने इस्राएल को पाप करने के लिये विवश किया। {15:10} याबेश के पुत्र शल्लूम ने जकर्याह के विरुद्ध षडयन्त्र रचा। शल्लूम ने जकर्याह को इब्लैम में मार डाला। उसके बाद शल्लूम नया राजा बना। {15:11} जकर्याह ने जो अन्य कार्य किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {15:12} इस प्राकर यहोवा का कथन सत्य सिद्ध हुआ। यहोवा ने येहू से कहा था कि उसके वंशजों की चार पीढ़ियाँ इस्राएल का राजा बनेंगी। {i15:13} शल्लूम का इस्राएल पर अल्पकालीन शासन {15:13} याबेश का पुत्र शल्लूम यहूदा के राजा उज्जिय्याह के राज्यकाल के उनतालीसवें वर्ष में इस्राएल का राजा बना। शल्लूम ने शोमरोन में एक महीने तक शासन किया। {15:14} गादी का मनहेम तिर्सा से शोमरोन आ पहुँचा। मनहेम ने याबेश के पुत्र शल्लूम को मार डाला। तब उसके बाद मनहेम नया राजा हुआ। {15:15} शल्लूम ने जकर्याह के विरुद्ध षडयन्त्र करने सहित जो कार्य किये, वे सभी इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। {i15:16} इस्राएल पर मनहेम का शासन {15:16} शल्लूम के मरने के बाद मनहेम ने तिप्सह और तिर्सा तक फैले हुये चारों ओर के क्षेत्रों को हरा दिया। लोगों ने उसके लिये नगर द्वार को खोलना मना कर दिया। इसलिये मनहेम ने उनको पराजित किया और नगर की सभी गर्भवतियों के गर्भ को चीर गिराया। {15:17} गादी का पुत्र मनहेम यहूदा के राजा जकर्याह के राज्यकाल के उनतालीसवें वर्ष में इस्राएल का राजा हुआ। मनहेम ने शोमरोन में दस वर्ष शासन किया। {15:18} मनहेम ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। मनहेम ने नबात के पुत्र यारोबाम के पापों को करना बन्द नहीं किया, जिसने इस्राएल को पाप करने के लिये विवश किया। {15:19} अश्शूर का राजा पूल इस्राएल के विरुद्ध युद्ध करने आया। मनहेम ने पूल को पचहत्तर हज़ार पौंड चाँदी दी। उसने यह इसलिये किया कि पूल मनहेम को बल प्रदान करेगा और जिससे राज्य पर उसका अधिकार सुदृढ़ हो जाये। {15:20} मनहेम ने सभी धनी और शक्तिशाली लोगों से करों का भुगतान करवा कर धन एकत्रित किया। मनेहम ने हर व्यक्ति पर पचास शेकेल कर लगाया। तब मनहेम ने अश्शूर के राजा को धन दिया। अतः अश्शूर का राजा चला गया और इस्राएल में नहीं ठहरा। {15:21} मनहेम ने जो बड़े कार्य किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {15:22} मनहेम मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। मनहेम का पुत्र पकह्याह उसके बाद नया राजा हुआ। {i15:23} इस्राएल पर पकह्याह का शासन {15:23} मनहेम का पुत्र पकह्याह यहूदा के राजा अजर्याह के राज्यकाल के पचासवें वर्ष में शोमरोम में इस्राएल का राजा हुआ। पकह्याह ने दो वर्ष तक राज्य किया। {15:24} पकह्याह ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा कहा था। पकह्याह ने नबात के पुत्र यारोबाम के पापों का करना बन्द नहीं किया जिसने इस्राएल को पाप करने के लिये विवश किया था। {15:25} पकह्याह की सेना का सेनापति रमल्याह का पुत्र पेकह था। पेकह ने पकह्याह को मार डाला। उसने उसे शोमरोन में राजा के महल में मारा। पेकह ने जब पकह्याह को मारा, उसके साथ गिलाद के पचास पुरुष थे। तब पेकह उसके बाद नया राजा हुआ। {15:26} पकह्याह ने जो बड़े काम किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखें हैं। {i15:27} इस्राएल पर पेकह का शासन {15:27} रमल्याह के पुत्र पेकह ने यहूदा के राजा अजर्याह के राज्यकाल के बावनवें वर्ष में, इस्राएल पर शासन करना आरम्भ किया। पेकह ने बीस वर्ष तक शासन किया। {15:28} पेकह वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा कहा था। पेकह ने इस्राएल को पाप करने के लिये विवश करने वाले नबात के पुत्र यारोबाम के पाप कर्मों को करना बन्द नहीं किया। {15:29} अश्शूर का राजा तिग्लत्पिलेसेर इस्राएल के विरुद्ध लड़ने आया। यह वही समय था जब पेकह इस्राएल का राजा था। तिग्लत्पिलेसेर ने इय्योन, अबेल्बेत्माका, यानोह, केदेश, हासोर, गिलाद गालील और नप्ताली के सारे क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। तिग्लत्पिलेसेर इन स्थानों से लोगों को बन्दी बनाकर अश्शूर ले गया। {15:30} एला का पुत्र होशे ने रमल्याह के पुत्र पेकह के विरुद्ध षडयन्त्र किया। होशे ने पेकह को मार डाला। तब होशे पेकह के बाद नया राजा बना। यह यहूदा के राजा उजिय्याह के पुत्र योताम के राज्यकाल के बीसवें वर्ष में हुआ। {15:31} पेकह ने जो सारे बड़े काम किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखें हैं। {i15:32} यहूदा पर योताम शासन करता है {15:32} उजिय्याह का पुत्र योताम यहूदा का राजा बना। यह इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह के राज्यकाल के दूसरे वर्ष में हुआ। {15:33} योताम जब राजा बना, वह पच्चीस वर्ष का था। योताम ने यरूशलेम में सोलह वर्ष तक शासन किया। योताम की माँ सादोक की पुत्री यरूशा थी। {15:34} योताम ने वे काम, जिन्हें यहोवा ने ठीक बताया था, ठीक अपने पिता उजिय्याह की तरह किये। {15:35} किन्तु उसने उच्च स्थानों को नष्ट नहीं किया। लोग उन पूजा स्थानों पर तब भी बलि चढ़ाते और सुगन्धि जलाते थे। योताम ने यहोवा के मन्दिर का ऊपरी द्वार बनवाया। {15:36} सभी बड़े काम जो योताम ने किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {15:37} उस समय यहोवा ने अराम के राजा रसीन और रमल्याह के पुत्र पेकह को यहूदा के विरुद्ध लड़ने भेजा। {15:38} योताम मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। योताम अपने पूर्वज दाऊद के नगर में दफनाया गया। योताम का पुत्र आहाज उसके बाद नया राजा हुआ। {i16:1} आहाज यूहदा का राजा बनता है {16:1} योताम का पुत्र आहाज इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह के राज्यकाल के सत्रहवें वर्ष में यहूदा का राजा बना। {16:2} आहाज जब राजा बना वह बीस वर्ष का था। आहाज ने यरूशलेम में सोलह वर्ष तक राज्य किया। आहाज ने वे काम नहीं किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा बताया था। उसने परमेश्वर की आज्ञा का पालन अपने पूर्वज दाऊद की तरह नहीं किया। {16:3} आहाज इस्राएल के राजाओं की तरह रहा। उसने अपने पुत्र तक की बलि आग में दी। उसने उन राष्ट्रों के घोर पापों की नकल की जिन्हें यहोवा ने देश छोड़ने को विवश तब किया था जब इस्राएली आए थे। {16:4} आहाज ने उच्च स्थानों, पहाड़ियों और हर एक हरे पेड़ के नीचे बलि चढ़ाई और सुगन्धि जलाई। {16:5} अराम के राजा रसीन और इस्राएल के राजा रमल्याह का पुत्र पेकह, दोनों यरूशलेम के विरुद्ध लड़ने आए। रसीन और पेकह ने आहाज को घेर लिया किन्तु वे उसे हरा नहीं सके। {16:6} उस समय अराम के राजा ने अराम के लिये एलत को वापस ले लिया। रसीन ने एलत में रहने वाले सभी यहूदा के निवासियों को जबरदस्ती निकाला। अरामी लोग एलत में बस गए और वे आज भी वहाँ रहते हैं। {16:7} अहाज ने अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर के पास सन्देशवाहक भेजे। सन्देश यह थाः “मैं आपका सेवक हूँ। मैं आपके पुत्र समान हूँ। आएँ, और मुझे अराम के राजा और इस्राएल के राजा से बचायें। वे मुझसे युद्ध करने आए हैं!” {16:8} आहाज ने यहोवा के मन्दिर और राजमहल के खजाने में जो सोना और चाँदी था उसे भी ले लिया। तब आहाज ने अश्शूर के राजा को भेंट भेजी। {16:9} अश्शूर के राजा ने उसकी बात मान ली। अश्शूर का राजा दमिश्क के विरुद्ध लड़ने गया। राजा ने उस नगर पर अधिकार कर लिया और लोगों को दमिश्क से बन्दी बनाकर फिर ले गया। उसने रसीन को भी मार डाला। {16:10} राजा आहाज अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर से मिलने दमिश्क गया। आहाज ने दमिश्क में वेदी को देखा। राजा आहाज ने इस वेदी का एक नमूना तथ उसकी व्यापक रूपरेखा, याजक ऊरिय्याह को भेजी। {16:11} तब याजक ऊरिय्याह ने राजा आहाज द्वारा दमिश्क से भेजे गए नमूने के समान ही एक वेदी बनाई। याजक ऊरिय्याह ने इस प्रकार की वेदी राजा आहाज के दमिश्क से लौटने के पहले बनाई। {16:12} जब राजा दमिश्क से लौटा तो उसने वेदी को देखा। उसने वेदी पर भेंट चढ़ाई। {16:13} वेदी पर आहाज ने होमबलि और अन्नबलि चढ़ाई। उसने अपनी पेय भेंट डाली और अपनी मेलबलि के खून को इस वेदी पर छिड़का। {16:14} आहाज ने उस काँसे की वेदी को जो यहोवा के सामने थी मन्दिर के सामने के स्थान से हटाया। यह काँसे की वेदी आहाज की वेदी और यहोवा के मन्दिर के बीच थी। आहाज ने काँसे की वेदी को अपने वेदी के उत्तर की ओर रखा। {16:15} आहाज ने याजक ऊरिय्याह को आदेश दिया। उसने कहा, “विशाल वेदी का उपयोग सवेरे की होमबलियों को जलाने के लिये, सन्ध्या की अन्नबलि के लिये और इस देश के सभी लोगों की पेय भेंट के लिये करो। होमबलि और बलियों का सारा खून विशाल वेदी पर छिड़को। किन्तु मैं काँसे की वेदी का उपयोग परमेश्वर से प्रश्न पूछने के लिये करूँगा।” {16:16} याजक ऊरिय्याह ने वह सब किया जिसे करने के लिये राजा आहाज ने आदेश दिये। {16:17} वहाँ पर काँसे के कवच वाली गाड़ियाँ और याजकों के हाथ धोने के लिये चिलमचियाँ थीं। तब राजा आहाज ने मन्दिर में प्रयुक्त काँसे की गाड़ियों को काट डाला और उनसे तख्ते निकाल लिये। उसने गाड़ियों में से चिलमचियों को ले लिया। उसने विशाल टंकी को भी काँसे के उन बैलों से हटा लिया जौ उसके नीचे खड़ी थी। उसने विशाल टंकी को एक पत्थर के चबूतरे पर रखा। {16:18} कारीगरों ने सब्त की सभा के लिये मन्दिर के अन्दर एक ढका स्थान बनाया था। आहाज ने सब्त के लिये ढके स्थान को हटा लिया। आहाज ने राजा के लिये बाहरी द्वार को भी हटा दिया। आहाज ने ये सभी चीज़ें यहोवा के मन्दिर से लीं। यह सब उसने अश्शूर के राजा को प्रसन्न करने के लिये किया। {16:19} आहाज ने जो बड़े काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {16:20} आहाज मरा और अपने पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में दफनाया गया। आहाज का पुत्र हिजकिय्याह उसके बाद नया राजा हुआ। {i17:1} होशे इस्राएल पर शासन करना आरम्भ करता है {17:1} एला का पुत्र होशे ने शोमरोन में इस्राएल पर शासन करना आरम्भ किया। यह यहूदा के राजा आहाज के राज्यकाल के बारहवें वर्ष में हुआ। होशे ने नौ वर्ष तक शासन किया। {17:2} होशे ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा कहा था। किन्तु होशे इस्राएल का उतना बुरा राजा नहीं था जितने वे राजा थे जिन्होंने उसके पहले शासन किया था। {17:3} अश्शूर का राजा शल्मनेसेर होशे के विरुद्ध युद्ध करने आया। शल्मनेसेर ने होशे को हराया और होशे शल्मनेसेर का सेवक बन गया। होशे शल्मनेसेर को अधीनस्थ कर देने लगा। {17:4} किन्तु बाद में अश्शूर के राजा को पता चला कि होशे ने उसके विरुद्ध षडयन्त्र रचा है। होशे ने मिस्र के राजा के पास सहायता माँगने के लिये राजदूत भेजे। मिस्र के राजा का नाम “सो” था। उस वर्ष होशे ने अश्शूर के राजा को अधीनस्थ कर उसी प्रकार नहीं भेजा जैसे वह हर वर्ष भेजता था। अतः अश्शूर के राजा ने होशे को बन्दी बनाया और उसे जेल में डाल दिया। {17:5} तब अश्शूर के राजा ने इस्राएल के विभिन्न प्रदेशों पर आक्रमण किया। वह शोमरोन पहुँचा। वह शोमरोन के विरुद्ध तीन वर्ष तक लड़ा। {17:6} अश्शूर के राजा ने, इस्राएल पर होशे के राज्यकाल के नवें वर्ष में, शोमरोन पर अधिकार जमाया। अश्शूर का राजा इस्राएलियों को बन्दी के रूप में अश्शूर को ले गया। उसने उन्हें हलह, हबोर नदी के तट पर गोजान और मदियों के नगरों में बसाया। {17:7} ये घटनायें घटीं क्योंकि इस्राएलियों ने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप किये थे। यहोवा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर लाया। यहोवा ने उन्हें राजा फ़िरौन के चंगुल से बाहर निकाला। किन्तु इस्राएलियों ने अन्य देवताओं को पूजना आरम्भ किया था। {17:8} इस्राएली वही सब करने लगे थे जो दूसरे राष्ट्र करते थे। यहोवा ने उन लोगों को अपना देश छोड़ने को विवश किया था जब इस्राएली आए थे। इस्राएलियों ने भी राजाओं से शासित होना पसन्द किया, परमेश्वर से शासित होना नहीं। {17:9} इस्राएलियों ने गुप्त रूप से अपने यहोवा परमेश्वर के विरुद्ध काम किया। जिसे उन्हें नहीं करना चाहिये था। इस्राएलियों ने अपने सबसे छोटे नगर से लेकर सबसे बड़े नगर तक, अपने सभी नगरों में उच्च स्थान बनाये। {17:10} इस्राएलियों ने प्रत्येक ऊँची पहाड़ी पर हरे पेड़ के नीचे स्मृति पत्थर तथा अशेरा स्तम्भ लगाये। {17:11} इस्राएलियों ने पूजा के उन सभी स्थानों पर सुगन्धि जलाई। उन्होंने ये सभी कार्य उन राष्ट्रों की तरह किया जिन्हें यहोवा ने उनके सामने देश छोड़ने को विवश किया था। इस्राएलियों ने वे काम किये जिन्होंने यहोवा को क्रोधित किया। {17:12} उन्होंने देवमूर्तियों की सेवा की, और यहोवा ने इस्राएलियों से कहा था, “तुम्हें यह नहीं करना चाहिये।” {17:13} यहोवा ने हर एक नबी और हर एक दृष्टा का उपयोग इस्राएल और यहूदा को चेतावनी देने के लिये किया। यहोवा ने कहा, “तुम बुरे कामों से दूर हटो! मेरे आदेशों और नियमों का पालन करो। उन सभी नियमों का पालन करो जिन्हें मैंने तुम्हारे पूर्वजों को दिये हैं। मैंने अपने सेवक नबियों का उपयोग यह नियम तुम्हें देने के लिये किया।” {17:14} लेकिन लोगों ने एक न सुनी। वे अपने पूर्वजों की तरह बड़े हठी रहे। उनके पूर्वज यहोवा, अपने परमेश्वर में विश्वास नहीं रखते थे। {17:15} लोगों ने, अपने पूर्वजों द्वारा यहोवा के साथ की गई वाचा और यहोवा के नियमों को मानने से इन्कार किया। उन्होंने यहोवा की चेतावनियों को सुनने से इन्कार किया। उन्होंने निकम्मे देवमूर्तियों का अनुसरण किया और स्वयं निकम्में बन गये। उन्होंने अपने चारों ओर के राष्ट्रों का अनुसरण किया। ये राष्ट्र वह करते थे जिसे न करने की चेतावनी इस्राएल के लोगों को यहोवा ने दी थी। {17:16} लोगों ने यहोवा, अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन करना बन्द कर दिया। उन्होंने बछड़ों की दो सोने की मूर्तियाँ बनाईं। उन्होंने अशेरा स्तम्भ बनाये। उन्होंने आकाश के सभी नक्षत्रों की पूजा की और बाल की सेवा की। {17:17} उन्होंने अपने पुत्र — पुत्रीयों की बलि आग में दी। उन्होंने जादू और प्रेत विद्या का उपयोग भविष्य को जानने के लिये किया। उन्होंने वह करने के लिये अपने को बेचा, जिसे यहोवा ने बताया था कि वह उसे क्रोधित करने वाली बुराई है। {17:18} इसलिये यहोवा इस्राएल पर बहुत क्रोधित हुआ और उन्हें अपनी निगाह से दूर ले गया। यहूदा के परिवार समूह के अतिरिक्त कोई इस्राएली बचा न रहा! {i17:19} यहूदा के लोग भी अपराधी हैं {17:19} किन्तु यहूदा के लोगों ने भी यहोवा, अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन नहीं किया। यहूदा के लोग भी इस्राएल के लोगों की तरह ही रहते थे। {17:20} यहोवा ने इस्राएल के सभी लोगों को अस्वीकार किया। उसने उन पर बहुत विपत्तियाँ ढाईं। उसने लोगों को उन्हें नष्ट करने दिया और अन्त में उसने उन्हें उठा फेंका और अपनी दृष्टि से ओझल कर दिया। {17:21} यहोवा ने दाऊद के परिवार से इस्राएल को अलग कर डाला और इस्राएलियों ने नबात के पुत्र यारोबाम को अपना राजा बनाया। यारोबाम ने इस्राएलियों को यहोवा का अनुसरण करने से दूर कर दिया। यारोबाम ने इस्राएलियों से एक भीषण पाप कराया। {17:22} इस प्रकार इस्राएलियों ने उन सभी पापों का अनुसरण किया जिन्हें यारोबाम ने किया। उन्होंने इन पापों का करना तब तक बन्द नहीं किया {17:23} जब तक यहोवा ने इस्राएलियों को अपनी दृष्टि से दूर नहीं हटाया और यहोवा ने कहा कि यह होगा। लोगों को बताने के लिए कि यह होगा, उसने अपने नबियों को भेजा। इसलिए इस्राएली अपने देश से बाहर अश्शूर पहुँचाये गए और वे आज तक वहीं हैं। {i17:24} शोमरोनी लोगों का आरम्भ {17:24} अश्शूर का राजा इस्राएलियों को शोमरोन से ले गया। अश्शूर का राजा बाबेल, कूता, अब्वाहमात और सपवैम से लोगों को लाया। उसने उन लोगों को शोमरोन में बसा दिया। उन लोगों ने शोमरोन पर अधिकार किया और उसके चारों ओर के नगरों में रहने लगे। {17:25} जब ये लोग शोमरोन में रहने लगे तो इन्होंने यहोवा का सम्मान नहीं किया। इसलिये यहोवा ने सिंहों को इन पर आक्रमण के लिये भेजा। इन सिंहों ने उनके कुछ लोगों को मार डाला। {17:26} कुछ लोगों ने यह बात अश्शूर के राजा से कही। “वे लोग जिन्हें आप ले गए और शोमरोन के नगरों में बसाया, उस देश के देवता के नियमों को नहीं जानते। इसलिये उस देवता ने उन लोगों पर आक्रमण करने के लिये सिंह भेजे। सिहों ने उन लोगों को मार डाला क्योंकि वे लोग उस देश के देवता के नियमों को नहीं जानते थे।” {17:27} इसलिए अश्शूर के राजा ने यह आदेश दियाः “तुमने कुछ याजकों को शोमरोन से लिया था। मैंने जिन याजकों को बन्दी बनाया था उनमें से एक को शोमरोन को वापस भेज दो। उस याजक को जाने और वहाँ रहने दो। तब वह याजक लोगों को उस देश के देवता के नियम सिखा सकता है।” {17:28} इसलिये अश्शूरियों द्वारा शोमरोन से लाये हुए याजकों में से एक बेतेल में रहने आया। उस याजक ने लोगों को सिखाया कि उन्हें यहोवा का सम्मान कैसे करना चाहिये। {17:29} किन्तु उन सभी राष्ट्रों ने निजी देवता बनाए और उन्हें शोमरोन के लोगों द्वारा बनाए गए उच्च स्थानों पर पूजास्थलों में रखा। उन राष्ट्रों ने यही किया, जहाँ कहीं भी वे बसे। {17:30} बाबेल के लोगों ने असत्य देवता सुक्कोतबनोत को बनाया। कूत के लोगों ने असत्य देवता नेर्गल को बनाया। हमात के लोगों ने असत्य देवता अशीमा को बनाया। {17:31} अव्वी लोगों ने असत्य देवत निभज और तर्त्ताक बनाए और सपवमी लोगों ने झूठे देवताओं अद्रम्मेलेक और अनम्मेलेक के सम्मान के लिये अपने बच्चों को आग में जलाया। {17:32} किन्तु उन लोगों ने यहोवा की भी उपासना की। उन्होंने अपने लोगों में से उच्च स्थानों के लिये याजक चुने। ये याजक उन पूजा के स्थानों पर लोगों के लिये बलि चढ़ाते थे। {17:33} वे यहोवा का सम्मान करते थे, किन्तु वे अपने देवताओं की भी सेवा करते थे। वे लोग अपने देवता की वैसी ही सेवा करते थे जैसी वे उन देशों में करते थे जहाँ से वे लाए गए थे। {17:34} आज भी वे लोग वैसे ही रहते हैं जैसे वे भूतकाल में रहते थे। वे यहोवा का सम्मान नहीं करते थे। वे इस्राएलियों के आदेशों और नियमों का पालन नहीं करते थे। वे उन नियमों या आदेशों का पालन नहीं करते थे जिन्हें यहोवा ने याकूब (इस्राएल) की सन्तानों को दिया था। {17:35} यहोवा ने इस्राएल के लोगों के साथ एक वाचा की थी। यहोवा ने उन्हें आदेश दिया, “तुम्हें अन्य देवताओं का सम्मान नहीं करना चाहिये। तुम्हें उनकी पूजा या सेवा नहीं करनी चाहिये या उन्हें बलि भेंट नहीं करनी चाहिये। {17:36} किन्तु तुम्हें यहोवा का अनुसरण करना चाहिये। यहोवा वही परमेश्वर है जो तुम्हें मिस्र से बाहर ले आया। यहोवा ने अपनी महान शक्ति का उपयोग तुम्हें बचाने के लिये किया। तुम्हें यहोवा की ही उपासना करनी चाहिये और उसी को बलि भेंट करनी चाहिये। {17:37} तुम्हें उसके उन नियमों, विधियों, उपदेशों और आदेशों का पालन करना चाहिये जिन्हें उसने तुम्हारे लिये लिखा। तुम्हें इनका पालन सदैव करना चाहिये। तुम्हें अन्य देवताओं का सम्मान नहीं करना चाहिये। {17:38} तुम्हें उस वाचा को नहीं भूलना चाहिये, जो मैंने तुम्हारे साथ किया। तुम्हें अन्य देवताओं का आदर नहीं करना चाहिये। {17:39} नहीं! तुम्हें केवल यहोवा, अपने परमेश्वर का ही सम्मान करना चाहिये। तब वह तुम्हें तुम्हारे सभी शत्रुओं से बचाएगा।” {17:40} किन्तु इस्राएलियों ने इसे नहीं सुना। वे वही करते रहे जो पहले करते चले आ रहे थे। {17:41} इसलिये अब तो वे अन्य राष्ट्र यहोवा का सम्मान करते हैं, किन्तु वे अपनी देवमूर्तियों की भी सेवा करते हैं। उनके पुत्र — पौत्र वही करते हैं, जो उनके पूर्वज करते थे। वे आज तक वही काम करते हैं। {i18:1} हिजकिय्याह यहूदा पर अपना शासन करना आरम्भ करता है {18:1} आहाज का पुत्र हिजकिय्याह यहूदा का राजा था। हिजकिय्याह ने इस्राएल के राजा एला के पुत्र होशे के राज्यकाल के तीसरे वर्ष में शासन करना आरम्भ किया। {18:2} हिजकिय्याह ने जब शासन करना आरम्भ किया, वह पच्चीस वर्ष का था। हिजकिय्याह ने यरूशलेम में उनतीस वर्ष तक शासन किया। उसकी माँ जकर्याह की पुत्री अबी थी। {18:3} हिजकिय्याह ने ठीक अपने पूर्वज दाऊद की तरह वे कार्य किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा बताया था। {18:4} हिजकिय्याह ने उच्चस्थानों को नष्ट किया। उसने स्मृति पत्थरों और अशेरा स्तम्भों को खंडित कर दिया। उन दिनों इस्राएल के लोग मूसा द्वारा बनाए गाए काँसे के साँप के लिये सुगन्धि जलाते थे। इस काँसे के साँप का नाम “नहुशतान” था। हिजकिय्याह ने इस काँसे के साँप के टुकड़े कर डाले क्योंकि लोग उस साँप की पूजा कर रहे थे। {18:5} हिजकिय्याह यहोवा, इस्राएल के परमेश्वर में विश्वास रखता था। यहूदा के राजाओं में से उसके पहले या उसके बाद हिजकिय्याह के समान कोई व्यक्ति नहीं था। {18:6} हिजकिय्याह यहोवा का बहुत भक्त था। उसने यहोवा का अनुसरण करना नहीं छोड़ा। उसने उन आदेशों का पालन किया जिन्हें यहोवा ने मूसा को दिये थे। {18:7} होवा हिजकिय्याह के साथ था। हिजकिय्याह ने जो कुछ किया, उसमें वह सफल रहा। हिजकिय्याह ने अश्शूर के राजा से अपने को स्वतन्त्र कर लिया। हिजकिय्याह ने अश्शूर के राजा की सेवा करना बन्द कर दिया। {18:8} हिजकिय्याह ने लगातार गाज्जा तक और उसके चारों ओर के पलिश्तियों को पराजित किया। उसने सभी छोटे से लेकर बड़े पलिश्ती नगरों को पराजित किया। {i18:9} अश्शूरी शोमरोन पर अधिकार करते हैं {18:9} अश्शूर का राजा शल्मनेसेर शोमरोन के विरुद्ध युद्ध करने गया। उसकी सेना ने नगर को घेर लिया। यह हिजकिय्याह के यहूदा पर राज्यकाल के चौथे वर्ष में हुआ। (यह इस्राएल के राजा एला के पुत्र होशे का भी सातवाँ वर्ष था।) {18:10} तीन वर्ष बाद शल्मनेसेर नेशोमरोन पर अधिकार कर लिया। उसने शोमरोन को यहूदा के राजा हिजकिय्याह के राज्यकाल के छठे वर्ष में शोमरोन को ले लिया। (यह इस्राएल के राजा होशे के राज्यकाल का नवाँ वर्ष भी था।) {18:11} अश्शूर का राजा इस्राएलियों को बन्दी के रूप में अश्शूर ले गया। उसने उन्हें हलह हाबोर पर (गोजान नदी ) और मादियों के नगरों में बसाया। {18:12} यह हुआ, क्योंकि इस्राएलियों ने यहोवा, अपने परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया। उन्होंने यहोवा की वाचा को तोड़ा। उन्होंने उन सभी नियमों को नहीं माना जिनके लिये यहोवा के सेवक मूसा ने आदेश दिये थे। इस्राएल के लोगों ने यहोवा की वाचा की अनसुनी की या उन कामों को नहीं किया जिन्हें करने की शिक्षा उसमें दी गई थी। {i18:13} अश्शूर यहूदा को लेने को तैयार होता है {18:13} हिजकिय्याह के राज्यकाल के चौदहवें वर्ष अश्शूर का राजा सन्हेरीब यहूदा के सभी सुदृढ़ नगरों के विरूद्ध युद्ध छेड़ने गया। सन्हेरीब ने उन सभी नगरों को पराजित किया। {18:14} तब यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने अश्शूर के राजा को लाकीश में एक सन्देश भेजा। हिजकिय्याह ने कहा, “मैंने बुरा किया है। मुझे शान्ति से रहने दो। तब मैं तुम्हें वह भुगतान करूँगा जो कुछ तुम चाहोगे।” तब अश्शूर के राजा ने यहूदा के राजा हिजकिय्याह से ग्यारह टन चाँदी और एक टन सोना से अधिक मांगा। {18:15} हिजकिय्याह ने सारी चाँदी जो यहोवा के मन्दिर और राजा के खजानों में थी, वह सब दे दी। {18:16} उस समय हिजकिय्याह ने उस सोने को उतार लिया जो यहोवा के मन्दिर के दरवाजों और चौखटों पर मढ़ा गया था। राजा हिजकिय्याह ने इन दरवाजों और चौखटों पर सोना मढ़वाया था। हिजकिय्याह ने यह सोना अश्शूर के राजा को दिया। {i18:17} अश्शूर का राजा अपने लोगों को यरूशलेम भेजता है {18:17} अश्शूर के राजा ने अपने तीन अत्यन्त महत्वपूर्ण सेनापतियों को एक विशाल सेना के साथ यरूशलेम में राजा हिजकिय्याह के पास भेजा। वे लोग लाकीश से चले और यरूशलेम को गये। वे ऊपरी स्रोत के पास छोटी नहर के निकट खड़े हुए। (ऊपरी स्रोत धोबी क्षेत्र तक ले जाने वाली सड़क पर है।) {18:18} इन लोगों ने राजा को बुलाया। हिलकिय्याह का पुत्र एल्याकीम (एल्याकीम राजमहल का अधीक्षक था।) शेब्ना (शास्त्री) और आसाप का पुत्र योआह (अभिलेखपाल) उनसे मिलने आए। {18:19} सेनापतियों में से एक ने उनसे कहा, “हिजकिय्याह से कहो कि महान सम्राट अश्शूर का सम्राट यह कहता हैः ‘किस पर तुम भरोसा करते हो? {18:20} तुमने केवल अर्थहीन शब्द कहे हैं। तुम कहते हो, “मेरे पास उपयुक्त सलाह और शक्ति युद्ध में मदद के लिये है।” किन्तु तुम किस पर विश्वास करते हो जो तुम मेरे शासन से स्वतन्त्र हो गए हो {18:21} तुम टूटे बेंत की छड़ी का सहारा ले रहे हो। यह छड़ी मिस्र है। यदि कोई व्यक्ति इस छड़ी का सहारा लेगा तो यह टूटेगी और उसके हाथ को बेधती हुई उसे घायल करेगी! मिस्र का राजा उन सभी लोगों के लिये वैसा ही है, जो उस पर भरोसा करतें हैं। {18:22} हो सकता है, तुम कहो, “हम यहोवा, अपने परमेश्वर पर विश्वास करते हैं।” किन्तु मैं जानता हूँ कि हिजकिय्याह ने यहोवा के उच्च स्थानों और वेदियों को हटा दिया और यहूदा और यरूशलेम से कहा, “तुम्हें केवल यरूशलेम में वेदी के सामने उपासना करनी चाहिये।” {18:23} ‘अब अश्शूर के राजा, हमारे स्वामी से यह वाचा करो। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं दो हज़ार घोड़े दूँगा, यदि आप उन पर चढ़ने वाले घुड़सवारों को प्राप्त कर सकेंगे। {18:24} मेरे स्वामी के अधिकारियों में से सबसे निचले स्तर के अधिकारी को भी तुम हरा नहीं सकते! तुमने रथ और घुड़सवार सैनिक पाने के लिये मिस्र पर विश्वास किया है। {18:25} ‘मैं यहोवा के बिना यरूशलेम को नष्ट करने नहीं आया हूँ। यहोवा ने मुझसे कहा है, “इस देश के विरुद्ध जाओ और इसे नष्ट करो!”’” {18:26} तब हिलकिय्याह का पुत्र एल्याकीम, शेब्ना और योआह ने सेनापति से कहा, “कृपया हमसे अरामी में बातें करें। हम उस भाषा को समझते हैं। यहूदा की भाषा में हम लोगों से बातें न करें क्योंकि दीवार पर के लोग हम लोगों की बातें सुन सकते हैं!” {18:27} किन्तु रबशाके ने उनसे कहा, “मेरे स्वामी ने मुझे केवल तुमसे और तुम्हारे राजा से बातें करने के लिये नहीं भेजा है। मैं उन अन्य लोगों के लिये भी कह रहा हूँ जो दीवार पर बैठते हैं। वे अपना मल और मूत्र तुम्हारे साथ खायेंगे — पीयेंगे।” {18:28} तब सेनापति हिब्रू भाषा में जोर से चिल्लाया, “महान सम्राट, अश्शूर के सम्राट का यह सन्देश सुनो। {18:29} सम्राट कहता है, ‘हिजकिय्याह को, अपने को मूर्ख मत बनाने दो! वह तुम्हें मेरी शक्ति से बचा नहीं सकता।’ {18:30} हिजकिय्याह के यहोवा के प्रति तुम आस्थावान न होना, हिजकिय्याह कहता है, “हमें यहोवा बचा लेगा! अश्शूर का सम्राट इस नगर को पराजित नहीं कर सकता है।” {18:31} किन्तु हिजकिय्याह की एक न सुनो। अश्शूर का सम्राट यह कहता हैः मेरे साथ सन्धि करो और मुझसे मिलो। तब तुम हर एक अपनी अंगूर की बेलों और अपने अंजीर के पेड़ों से खा सकते हो तथा अपने कुँए से पानी पी सकते हो। {18:32} यह तुम तब तक कर सकते हो जब तक मैं न आऊँ और तुम्हारे देश जैसे देश में तुम्हें ले न जाऊँ। यह अन्न और नयी दाखमधु, यह रोटी और अंगूर भरे खेत और जैतून एवं मधु का देश है। तब तुम जीवित रहोगे, मरोगे नहीं। किन्तु हिजकिय्याह की एक न सुनो! वह तुम्हारे इरादों को बदलना चाहता है। वह कह रहा है, “यहोवा हमें बचा लेगा।” {18:33} क्या अन्य राष्ट्रों के देवताओं ने अश्शूर के सम्राट्र से अपने देश को बचाया नहीं। {18:34} हमात और अर्पाद के देवता कहाँ हैं? सपवैम, हेना और इव्वा के देवता कहाँ हैं, क्या वे मुझसे शोमरोन को बचा सके? नहीं! {18:35} क्या किसी अन्य देश में कोई देवता अपनी भूमि को मुझसे बचा सका नहीं! क्या यहोवा मुझसे यरूशलेम को बचा लेगा नहीं! {18:36} किन्तु लोग चुप रहे। उन्होंने एक शब्द भी सेनापति को नहीं कहा क्योंकि राजा हिजकिय्याह ने उन्हें ऐसा आदेश दे रखा था। उसने कहा था, “उससे कुछ न कहो।” {18:37} (हिलकिय्याह का पुत्र एल्याकीम) एल्याकीम राजमहल का अधीक्षक था। (शेब्ना) शास्त्री और (आसाप का पुत्र योआह) अभिलेखपाल हिजकिय्याह के पास लौटे। उन्होंने हिजकिय्याह से वह सब कहा जो अश्शूर के सेनापति ने कहा था। {i19:1} हिजकिय्याह यशायाह नबी के पास अपने अधिकारियों को भेजता है {19:1} राजा हिजकिय्याह ने वह सब सुना और यह दिखाने के लिये कि वह बहुत दुःखी है और घबराया हुआ है, अपने वस्त्रों को फाड़ डाला और मोटे वस्त्र पहन लिये। तब वह यहोवा के मन्दिर में गया।। {19:2} हिजकिय्याह ने एल्याकीम (एल्याकीम राजमहल का अधीक्षक था।) शेब्ना (शास्त्री) और याजकों के अग्रजों को आमोस के पुत्र यशायाह नबी के पास भेजा। उन्होंने मोटे वस्त्र पहने जिससे पता चलता था कि वे परेशान और दुःखी हैं। {19:3} उन्होंने यशायाह से कहा, “हिजकिय्याह यह कहता है, ‘यह हमारे लिये संकट’ दण्ड और अपमान का दिन है। यह बच्चों को जन्म देने जैसा समय है, किन्तु उन्हें जन्म देने के लिये कोई शक्ति नहीं है। {19:4} सेनापति के स्वामी अश्शूर के राजा ने जीवित परमेश्वर के विषय में निन्दा करने के लिये उसे भेजा है। यह हो सकता है कि यहोवा, आपका परमेश्वर उन सभी बातों को सुन ले। यह हो सकता है कि यहोवा यह प्रमाणित कर दे कि शत्रु गलती पर है! इसलिये उन लोगों के लिये प्रार्थना करें जो अभी तक जीवित बचे हैं।” {19:5} राजा हिजकिय्याह के अधिकारी यशायाह के पास गए। {19:6} यशायाह ने उनसे कहा, “अपने स्वामी हिजकिय्याह को यह सन्देश दोः ‘यहोवा कहता हैः उन बातों से डरो नहीं जिन्हें अश्शूर के राजा के अधिकारियों ने मेरी मजाक उड़ाते हुए कही हैं। {19:7} मैं शीघ्र ही उसके मन में ऐसी भावना पैदा करूँगा जिससे वह एक अफवाह सुनकर अपने देश वापस जाने को विवश होगा और मैं उसे उसके देश में एक तलवार के घाट उतरवा दूँगा।’” {i19:8} हिजकिय्याह को अश्शूर के राजा की पुनः चेतावनी {19:8} सेनापति ने सुना कि अश्शूर का राजा लाकीश से चल पड़ा है। अतः सेनापति गया और यह पाया कि उसका सम्राट लिब्ना के विरुद्ध कर रहा है। {19:9} अश्शूर के राजा ने एक अफवाह कूश के राजा तिर्हाका के बारे में सुनी। अफवाह यह थीः “तिर्हाका तुम्हारे विरुद्ध लड़ने आया है।” अतः अश्शूर के राजा ने हिजकिय्याह के पास फिर सन्देशवाहक भेजे। अश्शूर के राजा ने इन सन्देशवाहकों को यह सन्देश दिया। {19:10} उसने इसमें यह कहाः “यहूदा के राजा हिजकिय्याह से यह कहोः ‘जिस परमेश्वर में तुम विश्वाश रखते हो उसे तुम अपने को मूर्ख बनाने मत दो। वह कहता है, अश्शूर का राजा यरूशलेम को पराजित नहीं करेगा।’ {19:11} तुमने उन घटानाओं को सुना है जो अश्शूर के राजाओं ने अन्य सभी देशों में घटित की हैं। हमने उन्हें पूरी तरह से नष्ट किया। क्या तुम बच पाओगे। नहीं। {19:12} उन राष्ट्रों के देवता अपने लोगों की रक्षा नहीं कर सके। मेरे पूर्वजों ने उन सभी को नष्ट किया। उन्होंने गोजान, हारान, रेसेप और तलस्सार में एदेन के लोगों को नष्ट किया। {19:13} हमात का राजा कहाँ है अर्पाद का राजा सपवैम नगर का राजा हेना और इव्वा का राजा ये सभी समाप्त हो गये हैं।’” {i19:14} हिजकिय्याह यहोवा से प्रार्थना करता है {19:14} हिजकिय्याह ने सन्देशवाहकों से पत्र प्राप्त किये और उन्हें पढ़ा। तब हिजकिय्याह यहोवा के मन्दिर तक गया और यहोवा के सामने पत्रों को रखा। {19:15} हिजकिय्याह ने यहोवा के सामने प्रार्थना की और कहा, “यहोवा इस्राएल का परमेश्वर! तू करूब (स्वर्गदूतों) पर सम्राट की तरह बैठता है। तू ही केवल सारी पृथ्वी के राज्यों का परमेश्वर है। तूने पृथ्वी और आकाश को बनाया। {19:16} यहोवा मेरी प्रार्थना सुन। यहोवा अपनी आँखें खोल और इस पत्र को देख। उन शब्दों को सुन जिन्हें सन्हेरीब ने शाश्वत परमेश्वर का अपमान करने को भेजा है। {19:17} यहोवा, यह सत्य है। अश्शूर के राजाओं ने इन सभी राष्ट्रों को नष्ट किया। {19:18} उन्होंने राष्ट्रों के देवताओं को आग में फेंक दिया। किन्तु वे सच्चे देवता नहीं थे। वे केवल लकड़ी और पत्थर की मूर्ति थे जिन्हें मनुष्यों ने बना रखा था। यही कारण था कि अश्शूर के राजा उन्हें नष्ट कर सके। {19:19} अतः यहोवा, हमारा परमेश्वर, अब तो अश्शूर के राजा से बचा। तब पृथ्वी के सारे राज्य समझेंगे कि यहोवा, तू ही केवल परमेश्वर है।” {19:20} आमोस के पुत्र यशायाह ने हिजकिय्याह को यह सन्देश भेजा। उसने कहा, “यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यह कहता है, ‘तुमने मुझसे अश्शूर के राजा सन्हेरीब के विरुद्ध प्रार्थना की है। मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली है।’ {19:21} “सन्हेरीब के बारे में यहोवा का सन्देश यह हैः ‘सिय्योन की कुमारी पुत्री (यरूशलेम) तुम्हें तुच्छ समझती है, वह तुम्हारा मजाक उड़ाती है! यरूशलेम की पुत्री तुम्हारे पीठ के पीछे सिर झटकती है। {19:22} तुमने किसका अपमान किया किसका मजाक उड़ाया किसके विरुद्ध तुमने बातें की तुमने ऐसे काम किये मानों तुम उससे बढ़कर हो। तुम इस्राएल के परम पावन के विरुद्ध रहे! {19:23} तुमने अपने सन्देशवाहकों को यहोवा का अपमान करने को भेजा। तुमने कहा, “मैं अपने अनेक रथों सहित ऊँचे पर्वतों तक आया। मैं लबानोन में भीतर तक आया। मैंने लबानोन के उच्चतम देवदारू के पेंड़ों, और लबानोन के उत्तम चीड़ के पेड़ों को काटा। मैं लबानोन के उच्चतम और सघनतम वन में घुसा । {19:24} मैंने कुएँ और नये स्थानों का पानी पीया। मैंने मिस्र की नदियों को सुखाया और उस देश को रौंदा” {19:25} किन्तु क्या तुमने नहीं सुना मैंने (परमेश्वर) बहुत पहले यह योजना बनाई थी, प्राचीनकाल से ही मैंने ये योजना बना दी थी, और अब मैं उसे ही पूरी होने दे रहा हूँ। मैंने तुम्हें दृढ़ नगरों को चट्टानों की ढेर बनाने दिया। {19:26} नगर में रहने वाले व्यक्ति कोई शक्ति नहीं रखते। ये लोग भयभीत और अस्त — व्यस्त कर दिये गए। लोग खेतों के जंगली पौधों की तरह हो गए, वे जो बढ़ने के पहले ही मर जाते हैं, घर के मुंडेर की घास बन गए। {19:27} तुम उठो और मेरे सामने बैठो, मैं जानता हूँ कि तुम कब युद्ध करने जाते हो और कब घर आते हो, मैं जानता हूँ कि तुम अपने को कब मेरे विरुद्ध करते हो। {19:28} तुम मेरे विरुद्ध गए मैंने तुम्हारे गर्वीले अपमान के शब्द सुने। इसलिये मैं अपना अंकुश तुम्हारी नाक में डालूँगा। और मैं अपनी लगाम तुम्हारे मूहँ में डालूँगा। तब मैं तुम्हें पीछे लौटाऊँगा और उस मार्ग लौटाऊँगा जिससे तुम आए थे।’” {i19:29} हिजकिय्याह को यहोवा का सन्देश {19:29} यहोवा कहा, “मैं तुम्हारी सहायता करूँगा, इसका संकेत यह होगाः इस वर्ष तुम वही अन्न खाओगे जो अपने आप उगेगा। अगले वर्ष तुम वह अन्न खाओगे जो उस बीज से उत्पन्न होगा। किन्तु तीसरे वर्ष तुम बीज बोआगे और अपनी बोयी फसल काटोगे। तुम अंगूर की बेल खेतों में लगाओगे और उनसे अगूंर खाओगे {19:30} और यहूदा के परिवार के जो लोग बच गए हैं वे फिर फूले फलेंगे ठीक वैसे ही जैसे पौधा अपनी जड़ें मजबूत कर लेने पर ही फल देता है। {19:31} क्यों क्योंकि कुछ लोग जीवित बचे रहेंगे। वे यरूशलेम के बाहर चले जायेंगे। जो लोग बच गये हैं वे सिय्योन पर्वत से बाहर जाएंगे। यहोवा की तीव्र भावना यह करेगी। {19:32} “अश्शूर के सम्राट के विषय में यहोवा कहता हैः ‘वह इस नगर में नहीं आएगा। वह इस नगर में एक भी बाण नहीं चलाएगा। वह इस नगर के विरुद्ध ढाल के साथ नहीं आएगा। वह इस नगर पर आक्रमण के मिट्टी के टीले नहीं बनाएगा। {19:33} वह उसी रास्ते लौटेगा जिससे आया। वह इस नगर में नहीं आएगा। यह यहोवा कहता है! {19:34} मैं इस नगर की रक्षा करूँगा और बचा लूँगा। मैं इस नगर को बचाऊँगा। मैं यह अपने लिये और अपने सेवक दाऊद के लिये करूँगा।’” {i19:35} अश्शूरी सेना नष्ट हो गई {19:35} उस रात यहोवा का दूत अश्शूरी डेरे में गया और एक लाख पचासी हज़ार लोगों को मार डाला। सुबह को जब लोग उठे तो उन्होंने सारे शव देखे। {19:36} अतः अश्शूर का राजा सन्हेरीब पीछे हटा और नीनवे वापस पहुँचा, तथा वहीं रूक गया। {19:37} एक दिन सन्हेरीब निस्रोक के मन्दिर में अपने देवता की पूजा कर रहा था। उसके पुत्रों अद्रेम्मेलेक और सरेसेर ने उसे तलवार से मार डाला। तब अद्रेम्मेलेक और सरेसेर अरारात प्रदेश में भाग निकले और सनहेरीब का पुत्र एसर्हद्दोन उसके बाद नया राजा हुआ। {i20:1} हिजकिय्याह बीमार पड़ा और मरने को हुआ {20:1} उस समय हिजकिय्याह बीमार पड़ा और लगभग मर ही गया। आमोस का पुत्र यशायाह (नबी) हिजकिय्याह से मिला। यशायाह ने हिजकिय्याह से कहा, “यहोवा कहता है, ‘अपने परिवार के लोगों को तुम अपना अन्तिम निर्देश दो। तुम जीवित नहीं रहोगे।’” {20:2} हिजकिय्याह ने अपना मुँह दीवार की ओर कर लिया। उसने यहोवा से प्रार्थना की और कहा, {20:3} “यहोवा याद रख कि मैंने पूरे हृदय के साथ सच्चाई से तेरी सेवा की है। मैंने वह किया है जिसे तूने अच्छा बतया है।” तब हिजकिय्याह फूट फूट कर रो पड़ा। {20:4} बीच के आँगन को यशायाह के छोड़ने के पहले यहोवा का सन्देश उसे मिला। यहोवा ने कहा, {20:5} “लौटो और मेरे लोगों के अगुवा हिजकिय्याह से कहो, ‘यहोवा तुम्हारे पूर्वज दाऊद का परमेश्वर यह कहता है: मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली है और मैंने तुम्हारे आँसू देखे हैं। इसलिये मैं तुम्हें स्वस्थ करूँगा। तीसरे दिन तुम यहोवा के मन्दिर में जाओगे {20:6} और मैं तुम्हारे जीवन के पन्द्रह वर्ष बढ़ा दूँगा। मैं अश्शूर के सम्राट की शक्ति से तुम्हें और इस नगर को बचाऊँगा। मैं इस नगर की रक्षा करूँगा। मैं अपने लिये औरअपने सेवक दाऊद को जो वचन दिया था, उसके लिये यह करूँगा।’” {20:7} तब यशायाह ने कहा, “अंजीर का एक मिश्रण बनाओ और इसे घाव के स्थान पर लगाओ।” इसलिए उन्होंने अंजीर का मिश्रम लिया और हिजकिय्याह के घाव के स्थान पर लगाया। तब हिजकिय्याह स्वस्थ हो गया। {20:8} हिजकिय्याह ने यशायाह से कहा, “इसका संकेत क्या होगा कि यहोवा मुझे स्वस्थ करेगा और मैं यहोवा के मन्दिर में तीसरे दिन जाऊँगा” {20:9} यशायाह ने कहा, “तुम क्या चाहते हो क्या छाया दस पैड़ी आगे जाये या दस पैड़ी पीछे जाये यही यहोवा का तुम्हारे लिये संकेत है जो यह प्रकट करेगा कि जो यहोवा ने कहा है, उसे वह करेगा।” {20:10} हिजकिय्याह ने उत्तर दिया, “छाया के लिये दस पैड़ियाँ उतर जाना सरल है। नहीं, छाया को दस पैड़ी पीछे हटने दो।” {20:11} तब यशायाह ने यहोवा से प्रार्थना की और यहोवा ने छाया को दस पैड़ियाँ पीछे चलाया। वह उन पैड़ियों पर लौटी जिन पर यह पहले थी। {i20:12} हिजकिय्याह और बाबेल के व्यक्ति {20:12} उन दिनों बलदान का पुत्र बरोदक बलदान बाबेल का राजा था। उसने पत्रों का साथ एक भेंट हिजकिय्याह को भेजी। बरोदक — बलदान ने यह इसलिये किया क्योंकि उसने सुना कि हिजकिय्याह बीमार हो गया है। {20:13} हिजकिय्याह ने बाबेल के लोगों का स्वागत किया और अपने महल की सभी कीमती चीज़ों को उन्हें दिखाया। उसने उन्हें चाँदी, सोना, मसाले, कीमती इत्र, अस्त्र — शस्त्र और अपने खजाने की हर एक चीज़ दिखायी। हिजकिय्याह के पूरे महल और राज्य में ऐसा कुछ नहीं था जिसे उसने उन्हें न दिखाया हो। {20:14} तब यशायाह नबी राजा हिजकिय्याह के पास आया और उससे पूछा, “ये लोग क्या कहते थे वे कहाँ से आये थे” हिजकिय्याह ने कहा, “वे बहुत दूर के देश बाबेल से आए थे।” {20:15} यशायाह ने पूछा, “उन्होंने तुम्हारे महल में क्या देखा है” हिजकिय्याह ने उत्तर दिया, “उन्होंने मेरे महल की सबी चीज़ें देखी हैं। मेरे खजानों में ऐसा कुछ नहीं है जिसे मैंने उन्हें न दिखाया हो।” {20:16} तब यशायाह ने हिजकिय्याह से कहा, “यहोवा के यहाँ से इस सन्देश को सुनो। {20:17} वह समय आ रहा है जब तुम्हारे महल की सभी चीज़ें और वे सभी चीज़ें जिन्हें तुम्हारे पूर्वजों ने आज तक सुरक्षित रखा है, बाबेल ले जाई जाएंगी। कुछ भी नहीं बचेगा। यहोवा यह कहता है। {20:18} बाबेल तुम्हारे पुत्रों को ले लेंगे और तुम्हारे पुत्र बाबेल के राजा के महल में खोजे बनेंगे।” {20:19} तब हिजकिय्याह ने यशायाह से कहा, “यहोवा के यहाँ से यह सन्देश अच्छा है।” (हिजकिय्याह ने यह भी कहा, “यह बहुत अच्छा है यदि मेरे जीवनकाल में सच्ची शान्ति रहे।”) {20:20} हिजकिय्याह ने जो बड़े काम किये, जिनमें जलकुण्ड पर किये गये काम और नगर में पानी लाने के लिये नहर बनाने के काम सम्मिलित हैं यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गये हैं। {20:21} हिजकिय्याह मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया और हिजकिय्याह का पुत्र मनश्शे उसके बाद नया राजा हुआ। {i21:1} मनश्शे अपना कुशासन यहूदा पर आरम्भ करता है {21:1} मनेश्शे जब शासन करने लगा तब वह बारह वर्ष का था। उसने पचपन वर्ष तक यरूशलेम में शासन किया। उसकी माँ का नाम हेप्सीबा था। {21:2} मनश्शे ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बाताया था। मनश्शे वे भयंकर काम करता था जो अन्य राष्ट्र करते थे। (और योहवा ने उन राष्ट्रों को अपना देश छोड़ने पर विवश किया था जब इस्राएली आए थे।) {21:3} मनश्शे ने फिर उन उच्च स्थानों को बनाया जिन्हें उसके पिता हिजकिय्याह ने नष्ट किया था। मनश्शे ने भी ठीक इस्राएल के राजा अहाब की तरह बाल की वेदी बनाई और अशेरा स्तम्भ बनाया। मनश्शे ने आकाश में तारों की सेवा और पूजा आरम्भ की। {21:4} मनश्शे ने यहोवा के मन्दिर में असत्य देवताओं की पूजा की वेदियाँ बनाईं। (यह वही स्थान है जिसके बारे में यहोवा बातें कर रहा था जब उसने कहा था, “मैं अपना नाम यरूशलेम में रखूँगा।”) {21:5} मनश्शे ने यहोवा के मन्दिर के दो आँगनों में आकाश के नक्षत्रों के लिये वेदियाँ बनाईं। {21:6} मनश्शे ने अपने पुत्र की बलि दी और उसे वेदी पर जलाया। मनश्शे ने भविष्य जानने के प्रयत्न में कई तरीकों का उपयोग किया। वह ओझाओं और भूत सिद्धियों से मिला। मनश्शे अधिक से अधिक वह करता गया जिसे यहोवा ने बुरा कहा था। इसने यहोवा को क्रोधित किया। {21:7} मनश्शे ने अशेरा की एक खुदी हुई मूर्ति बनाई। उसने इस मूर्ति को मन्दिर में रखा। यहोवा ने दाऊद और दाऊद के पुत्र सुलैमान से इस मन्दिर के बारे में कहा थाः “मैंने यरूशलेम को पूरे इस्राएल के नगरों में से चुना है। मैं अपना नाम यरूशलेम के मन्दिर में सदैव के लिये रखूँगा। {21:8} मैं इस्राएल के लोगों से वह भूमि जिसे मैंने उनके पूर्वजों को दी थी, छोड़ने के लिये नहीं कहूँगा। मैं लोगों को उनके देश में रहने दूँगा, यदि वे उन सब चीज़ों का पालन करेंगे जिनका आदेश मैंने दिया है और जो उपदेश मेरे सेवक मूसा ने उनको दिये हैं।” {21:9} किन्तु लोगों ने परमेश्वर की एक न सुनी। इस्राएलियों के आने के पहले कनान में रहने वाले सभी राष्ट्र जितना बुरा करते थे मनश्शे ने उससे भी अधिक बुरा किया और यहोवा ने उन राष्ट्रों को नष्ट कर दिया था जब इस्राएल के लोग अपनी भूमि लेने आए थे। {21:10} यहोवा ने अपने सेवक, नबियों का उपयोग यह कहने के लिये कियाः {21:11} “यहूदा के राजा मनश्शे ने इन घृणित कामों को किया है और अपने से पहले की गई एमोरियों की बुराई से भी बड़ी बुराई की है। मनश्शे ने अपने देवमूर्तियों के कारण यहूदा से भी पाप कराया है। {21:12} इसलिये इस्राएल का परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘देखो! मैं यरूशलेम और यहूदा पर इतनी विपत्तियाँ ढाऊँगा कि यदि कोई व्यक्ति इनके बारे में सुनेगा तो उसका हृदय बैठ जायेगा। {21:13} मैं यरूशलेम तक शोमरोन की माप पंक्ति और अहाब के परिवार की साहुल को फैलाऊँगा। कोई व्यक्ति तश्तरी को पोछता है और तब वह उसे उलट कर रख देता है। मैं यरूशलेम के ऊपर भी ऐसा ही करूँगा। {21:14} वहाँ मेरे कुछ व्यक्ति फिर भी बचे रह जायेंगे। किन्तु मैं उन व्यक्तियों को छोड़ दूँगा। मैं उन्हें उनके शत्रुओं को दे दूँगा। उनके शत्रु उन्हें बन्दी बनायेंगे, वे उन कीमती चीज़ों की तरह होंगे जिन्हें सैनिक युद्ध में प्राप्त करते हैं। {21:15} क्यों क्योंकि हमारे लोगों ने वे काम किये जिन्हें मैंने बुरा बताया। उन्होंने मुझे उस दिन से क्रोधित किया है जिस दिन से उनके पूर्वज मिस्र से बाहर आए {21:16} और मनश्शे ने अनेक निरपराध लोगों को मारा। उसने यरूशलेम को एक सिरे से दूसरे सिरे तक खून से भर दिया और वे सारे पाप उन पापों के अतिरिक्त हैं जिसे उसने यहूदा से कराया। मनश्शे ने यहूदा से वह कराया जिसे यहोवा ने बुरा बताया था।’” {21:17} उन पापों सहित और भी जो कार्य मनश्शे ने किये, वह सभी यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {21:18} मनश्शे मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। मनश्शे अपने घर के बाग में दफनाया गया। इस बाग का नाम उज्जर का बाग था। मनश्शे का पुत्र आमोन उसके बाद नया राजा हुआ। {i21:19} आमोन का अल्पकालीन शासन {21:19} आमोन ने जब शासन करना आरम्भ किया तो वह बाईस वर्ष का था। उसने यरूशलेम में दो वर्ष तक शासन किया। उसकी माँ का नाम मशुल्लेमेत था, जो योत्बा के हारूस की पुत्री थी। {21:20} आमोन ने ठीक अपने पिता मनश्शे की तरह के काम किये, जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। {21:21} आमोन ठीक अपने पिता की तरह रहता था। आमोन उन्ही देवमूर्तियों की पूजा और सेवा करता था जिनकी उसका पिता करता था। {21:22} आमोन ने अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया और उस तरह नहीं रहा जैसा यहोवा चाहता था। {21:23} आमोन के सेवकों ने उसके विरुद्ध षडयन्त्र रचा और उसे उसके महल में मार डाला। {21:24} साधारण जनता ने उन सभी अधिकारियों को मार डाला जिन्होंने आमोन के विरुद्ध षडयन्त्र रचा था। तब लोगों ने आमोन के पुत्र योशिय्याह को उसके बाद नया राजा बनाया। {21:25} जो अन्य काम आमोन ने किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {21:26} आमोन उज्जर के बाग में अपनी कब्र में दफनाया गया। आमोन का पुत्र योशिय्याह नया राजा बना। {i22:1} योशिय्याह यहूदा पर अपना शासन आरम्भ करता है {22:1} योशिय्याह ने जब शासन आरम्भ किया तो वह आठ वर्ष का था। उसने इकतीस वर्ष तक यरूशलेम में शासन किया। उसकी माँ बोस्कत के अदाया की पुत्री यदीदा थी। {22:2} योशिय्याह ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने अच्छा बताया था। योशिय्याह ने परमेश्वर का अनुसरण अपने पूर्वज दाऊद की तरह किया। योशिय्याह ने परमेश्वर की शिक्षाओं को माना, और उसने ठीक वैसा ही किया जैसा परमेश्वर चाहता था। {i22:3} योशिय्याह मन्दिर की मरम्मत के लिये आदेश देता है {22:3} योशिय्याह ने अपने राज्यकाल के अट्ठारहवें वर्ष में अपने मन्त्री, मशुल्लाम के पौत्र व असल्याह के पुत्र शापान को यहोवा के मन्दिर में भेजा। {22:4} योशिय्याह ने कहा, “महयाजक हिलकिय्याह के पास जाओ। उससे कहो कि उसे वह धन लेना चाहिये जिसे लोग यहोवा के मन्दिर में लाये हैं। द्वारपालों ने उस धन को लोगों से इकट्ठा किया था। {22:5} याजकों को यह धन उन कारीगरों को देने में उपयोग करना चाहिये जो यहोवा के मन्दिर की मरम्मत करते हैं। याजकों को इस धन को उन लोगों को देना चाहिये जो यहोवा के मन्दिर की देखभाल करते हैं। {22:6} बढ़ई, पत्थर की दीवार बनाने वाले मिस्त्री और पत्थर तराश के लिये धन का उपयोग करो। मन्दिर में लगाने के लिये इमारती लकड़ी और कटे पत्थर के खरीदने में धन का उपयोग करो। {22:7} उस धन को न गिनो जिसे तुम मजदूरों को दो। उन मजदूरों पर विश्वास किया जा सकता है।” {i22:8} व्यवस्था की पुस्तक मन्दिर में मिली {22:8} महायाजक हिलकिय्याह ने शास्त्री शापान से कहा, “देखो! मुझे व्यवस्था की पुस्तक यहोवा के मन्दिर में मिली है।” हिलकिय्याह ने इस पुस्तक को शापान को दिया और शापान ने इसे पढ़ा। {22:9} शास्त्री शापान, राजा योशिय्याह के पास आया और उसे बताया जो हुआ था। शापान ने कहा, “तुम्हारे सेवकों ने मन्दिर से मिले धन को लिया और उसे उन कारीगरों को दिया जो यहोवा के मन्दिर की देख — रेख कर रहे थे।” {22:10} तब शास्त्री शापान ने राजा से कहा, “याजक हिलकिय्याह ने मुझे यह पुस्तक भी दी है।” तब शापान ने राजा को पुस्तक पढ़ कर सुनाई। {22:11} जब राजा ने व्यवस्था की पुस्तक के शब्दों को सुना, उसने अपना दुःख और परेशानी प्रकट करने के लिये अपने वस्त्रों को फाड़ डाला। {22:12} तब राजा ने याजक हिलकिय्याह, शापान के पुत्र अहीकाम, मीकायाह के पुत्र अकबोर, शास्त्री शापान और राजसेवक असाया को आदेश दिया। {22:13} राजा योशिय्याह ने कहा, “जाओ, और यहोवा से पूछो कि हमें क्या करना चाहिये। यहोवा से मेरे लिये, लोगों के लिये और पूरे यहूदा के लिये याचना करो। इस मिली हुई पुस्तक के शब्दों के बारे में पूछो। यहोवा हम लोगों पर क्रोधित है। क्यों क्योंकि हमारे पूर्वजों ने इस पुस्तक की शिक्षा को नहीं माना। उन्होंने हम लोगों के लिये लिखी सब बातों को नहीं किया।” {i22:14} योशिय्याह और नबिया हुल्दा {22:14} अतः याजक हिलकिय्याह, अहीकाम, अकबोर, शापान और असाया, नबिया हुल्दा के पास गए। हुल्दा हर्हस के पौत्र व तिकवा के पुत्र शल्लूम की पत्नी थी। वह याजक के वस्त्रों की देखभाल करता था। हुल्दा यरूशलेम में द्वितीय खण्ड में रह रही थी। वे गए और उन्होंने हुल्दा से बातें कीं। {22:15} तब हुल्दा ने उनसे कहा, “यहोवा इस्राएल का परमेश्वर कहता हैः उस व्यक्ति से कहो जिसने तुम्हें मेरे पास भेजा हैः {22:16} ‘यहोवा यह कहता हैः मैं इस स्थान पर विपत्ति ला रहा हूँ और उन मनुष्यों पर भी जो यहाँ रहते हैं। ये विपत्तियाँ हैं जिन्हें उस पुस्तक में लिखा गया है जिसे यहूदा के राजा ने पढ़ा है। {22:17} यहूदा के लोगों ने मुझे त्याग दिया है और अन्य देवताओं के लिये सुगन्धि जलाई है। उन्होंने मुझे बहुत क्रोधित किया है। उन्होंने बहुत सी देवमूर्तियाँ बनाईं। यही कारण है कि मैं इस स्थान के विरुद्ध अपना क्रोध प्रकट करूँगा। मेरा क्रोध उस अग्नि की तरह होगा जो बुझाई न जा सकेगी।’ {22:18} “यहूदा के राजा योशिय्याह ने तुम्हें यहोवा से सलाह लेने को भेजा है। योशिय्याह से यह कहोः ‘यहोवा, इस्राएल के परमेश्वर ने जो कहा उसे तुमने सुना। तुमने वह सुना जो मैंने इस स्थान और इस स्थान पर रहने वाले लोगों के बारे में कहा। तुम्हारा हृदय कोमल है और {22:19} जब तुमने यह सुना तो तुम्हें दु: ख हुआ। मैंने कहा कि भयंकर घटनायें इस स्थान (यरूशलेम) के साथ घटित होंगी। और तुमने अपने दुःख को प्रकट करने के लिये अपने वस्त्रों को फाड़ डाला और तुम रोने लगे। यही कारण है कि मैंने तुम्हारी बात सुनी।’ यहोवा यह कहता है, {22:20} ‘मैं तुम्हें तुम्हारे पूर्वजों के साथ ले आऊँगा। तुम मरोगे और अपनी कब्र में शान्तिपूर्वक जाओगे। अतः तुम्हारी आँखें उन विपत्तियों को नहीं देखेंगी जिन्हें मैं इस स्थान (यरूशलेम) पर ढाने जा रहा हूँ।’” तब याजक हिलकिय्याह, अहीकाम, अकबोर, शापान और असाया ने राजा से यह सब कहा। {i23:1} लोग नियम को सुनते हैं {23:1} राजा योशिय्याह ने यहूदा और इस्राएल के सभी प्रमुखों से आने और उससे मिलने के लिये कहा। {23:2} तब राजा यहोवा के मन्दिर गया। सभी यहूदा के लोग और यरूशलेम में रहने वाले लोग उसके साथ गए। याजक, नबी, और सभी व्यक्ति, सबसे अधिक महत्वपूर्ण से सबसे कम महत्व के सभी उसके साथ गए। तब उसने साक्षीपत्र की पुस्तक पढ़ी। यह वही नियम की पुस्तक थी जो यहोवा के मन्दिर में मिली थी। योशिय्याह ने उस पुस्तक को इस प्रकार पढ़ा कि सभी लोग उसे सुन सकें। {23:3} राजा स्तम्भ के पास खड़ा हुआ और उसने यहोवा के साथ वाचा की। उसने यहोवा का अनुसरण करना, उसकी आज्ञा, वाचा और नियमों का पालन करना स्वीकार किया। उसने पूरी आत्मा और हृदय से यह करना स्वीकार किया। उसने उस पुस्तक में लिखी वाचा को मानना स्वीकार किया। सभी लोग यह प्रकट करने के लिये खड़े हुए कि वे राजा की वाचा का समर्थन करते हैं। {23:4} तब राजा ने महायाजक हिलकिय्याह, अन्य याजकों और द्वारपालों को बाल, अशेरा और आकाश के नक्षत्रों के सम्मान के लिये बनी सभी चीज़ों को यहोवा के मन्दिर के बाहर लाने का आदेश दिया। तब योशिय्याह ने उन सभी को यरूशलेम के बाहर किद्रोन के खेतों में जला दिया। तब राख को वे बेतेल ले गए। {23:5} यहूदा के राजाओं ने कुछ सामान्य व्यक्तियों को याजकों के रूप में सेवा के लिये चुना था। ये लोग हारून के परिवार से नहीं थे! वे बनावटी याजक यहूदा के सभी नगरों और यरूशलेम के चारों ओर के नगरों में उच्च स्थानों पर सुगन्धि जला रहे थे। वे बाल, सूर्य, चन्द्र, राशियों (नक्षत्रों के समूह) और आकाश के सभी नक्षत्रों के सम्मान में सुगन्धि जला रहे थे। किन्तु योशिय्याह ने उन बनावटी याजकों को रोक दिया। {23:6} योशिय्याह ने अशेरा स्तम्भ को यहोवा के मन्दिर से हटाया। वह अशेरा स्तम्भ को नगर के बाहर किद्रोन घाटी को ले गया और उसे वहीं जला दिया। तब उसने जले खण्ड़ों को कूटा तथा उस राख को साधारण लोगों की कब्रों पर बिखेरा। {23:7} तब राजा योशिय्याह ने यहोवा के मन्दिर में बने पुरषगामियों के कोठों को गिरवा दिया। स्त्रियाँ भी उन घरों का उपयोग करती थीं और असत्य देवी अशेरा के सम्मान के लिये डेरे के आच्छादन बनाती थीं। {23:8} उस समय याजक बलि यरूशलेम को नहीं लाते थे और उसे मन्दिर की वेदी पर नहीं चढ़ाते थे। याजक सारे यहूदा के नगरों में रहते थे और वे उन नगरों में उच्च स्थानों पर सुगन्धि जलाते तथा बलि भेंट करते थे। वे उच्च स्थान गेबा से लेकर बेर्शेबा तक हर जगह थे। याजक अपनी अखमीरी रोटी उन नगरों में साधारण {23:9} लोगों के साथ खाते थे, किन्तु यरूशलेम के मन्दिर में बने याजकों के लिये विशेष स्थान पर नहीं। परन्तु राजा योशिय्याह ने उन उच्च स्थानों को भ्रष्ट (नष्ट) कर डाला और याजकों को यरूशलेम ले गया। योशिय्याह ने उन उच्च स्थानों को भी नष्ट किया था जो यहोशू — द्वार के पास बायीं ओर थे। (यहोशू नगर का प्रशासक था।) {23:10} तोपेत “हिन्नोम के पुत्र की घाटी” में एक स्थान था जहाँ लोग अपने बच्चों को मारते थे और असत्य देवता मोलेक के सम्मान में उन्हें वेदी पर जलाते थे। योशिय्याह ने उस स्थान को इतना भ्रष्ट(नष्ट) कर डाला कि लोग उस स्थान का फिर प्रयोग न कर सकें। {23:11} बीते समय में यहूदा के राजाओं ने यहोवा के मन्दिर के द्वार के पास कुछ घोड़े और रथ रख छोड़े थे। यह नतन्मेलेख नामक महत्वपूर्ण अधिकारी के कमरे के पास था। घोड़े और रथ सूर्य देव के सम्मान के लिये थे। योशिय्याह ने घोड़ों को हटाया और रथ को जला दिया। {23:12} बीते समय में यहूदा के राजाओं ने अहाब की इमारत की छत पर वेदियाँ बना रखी थीं। राजा मनश्शे ने भी यहोवा के मन्दिर के दो आँगनों में वेदियाँ बना रखी थीं। योशिय्याह ने उन वेदियों को तोड़ डाला और उनके टूटे टुकड़ों को किद्रोन की घाटी में फेंक दिया। {23:13} बीते समय में राजा सुलैमान ने यरूशलेम के निकट विध्वंसक पहाड़ी पर कुछ उच्च स्थान बनाए थे। उच्च स्थान उस पहाड़ी की दक्षिण की ओर थे। राजा सुलैमान ने पूजा के उन स्थानों में से एक को, सीदोन के लोग जिस भयंकर चीज़ अशतोरेत की पूजा करते थे, उसके सम्मान के लिये बनाया था। सुलैमान ने मोआब लोगों द्वारा पूजित भयंकर कमोश के सम्मान के लिये भी एक वेदी बनाई थी और राजा सुलैमान ने अम्मोन लोगों द्वारा पूजित भयंकर चीज मिल्कोम के सम्मान के लिये एक उच्च स्थान बनाया था। किन्तु राजा योशिय्याह ने उन सभी पूजा स्थानों को भ्रष्ट(नष्ट) कर दिया। {23:14} राजा योशिय्याह ने सभी स्मृति पत्थरों और अशेरा स्तम्भों को तोड़ डाला। तब उसने उस स्थानों के ऊपर मृतकों की हड्डियाँ बिखेरीं। {23:15} योशिय्याह ने बेतेल की वेदी और उच्च स्थानों को भी तोड़ डाला। नबात के पुत्र यारोबाम ने इस वेदी को बनाया था। यारोबाम ने इस्राएल से पाप कराया था। योशिय्याह ने उच्च स्थानों और वेदी दोनों को तोड़ डाला। योशिय्याह ने वेदी के पत्थर के टुकड़े कर दिये। तब उसने उन्हें कूट कर धूलि बना दिया और उसने अशेरा स्तम्भ को जला दिया। {23:16} योशिय्याह ने चारों ओर नज़र दौड़ाई और पहाड़ पर कब्रों को देखा। उसने व्यक्तियों को भेजा और वे उन कब्रों से हड्डियाँ ले आए। तब उसने वेदी पर उन हड्डियों को जलाया। इस प्रकार योशिय्याह ने वेदी को भ्रष्ट(नष्ट) कर दिया। यह उसी प्रकार हुआ जैसा यहोवा के सन्देश को परमेश्वर के जन ने घोषित किया था। परमेश्वर के जन ने इसकी घोषणा तब की थी जब यारोबाम वेदी की बगल में खड़ा था। तब योशिय्याह ने चारों ओर निगाह दौड़ाई और परमेश्वर के जन की कब्र देखी। {23:17} योशिय्याह ने कहा, “जिस स्मारक को मैं देख रहा हूँ, वह क्या है” नगर के लोगों ने उससे कहा, “यह परमेश्वर के उस जन की कब्र है जो यहूदा से आया था। इस परमेश्वर के जन ने वह सब बताया था जो आपने बेतेल में वेदी के साथ किया। उसने ये बातें बहुत पहले बताई थीं।” {23:18} योशिय्याह ने कहा, “परमेश्वर के जन को अकेला छोड़ दो। उसकी हडिड्यों को मत हटाओ।” अत: उन्होंने हडिड्याँ छोड़ दीं, और साथ ही शोमरोन से आये परमेश्वर के जन की हडिड्याँ भी छोड़ दीं। {23:19} योशिय्याह ने शोमरोन नगर के सभी उच्च स्थानों के पूजागृह को भी नष्ट कर दिया। इस्राएल के राजाओं ने उन पूजागृहों को बनाया था और उसने यहोवा को बहुत क्रोधित किया था। योशिय्याह ने उन पूजागृहों को वैसे ही नष्ट किया जैसे उसने बेतेल के पूजा के स्थानों को नष्ट किया। {23:20} योशिय्याह ने शोमरोन में रहने वाले उच्च स्थानों के सभी पुरोहितों को मार डाला। उसने उन्हीं वेदियों पर पुरोहितों का वध किया। उसने मनुष्यों की हड्डियाँ वेदियों पर जलाईं। इस प्रकार उसने पूजा के उन स्थानों को भ्रष्ट किया। तब वह यरूशलेम लौट गया। {i23:21} यहूदा के लोग फसह पर्व मनाते हैं {23:21} तब राजा योशिय्याह ने सभी लोगों को आदेश दिया। उसने कहा, “यहोवा, अपने परमेश्वर का फसह पर्व मनाओ। इसे उसी प्रकार मनाओ जैसा साक्षीपत्र की पुस्तक में लिखा है।” {23:22} लोगों ने इस प्रकार फसह पर्व तब से नहीं मनाया था जब से इस्राएल पर न्यायाधीश शासन करते थे। इस्राएल के किसी राजा या यहूदा के किसी भी राजा ने कभी फसह पर्व का इतना बड़ा उत्सव नहीं मनाया था। {23:23} उन लोगों ने यहोवा के लिये यह फसह पर्व योशिय्याह के राज्यकाल के अट्ठारहवें वर्ष में यरूशलेम में मनाया। {23:24} योशिय्याह ने ओझाओं, भूतसिद्धकों, गृह — देवताओं, देवमूर्तियों और यहूदा तथा इस्राएल में जिन डरावनी चीज़ों की पूजा होती थी, सबको नष्ट कर दिया। योशिय्याह ने यह यहोवा के मन्दिर में याजक हिलकिय्याह को मिली पुस्तक में लिखे नियमों का पालन करने के लिये किया। {23:25} इसके पहले योशिय्याह के समान कभी कोई राजा नहीं हुआ था। योशिय्याह यहोवा की ओर अपने पूरे हृदय, अपनी पूरी आत्मा और अपनी पूरी शक्ति से गया। योशिय्याह की तरह किसी राजा ने मूसा के सभी नियमों का अनुसरण नहीं किया था और उस समय से योशिय्याह की तरह का कोई अन्य राजा कभी नहीं हुआ। {23:26} किन्तु यहोवा ने यहूदा के लोगों पर क्रोध करना छोड़ा नहीं। यहोवा अब भी उन पर सारे कामों के लिये क्रोधित था जिन्हें मनश्शे ने किया था। {23:27} यहोवा ने कहा, “मैंने इस्राएलियों को उनका देश छोड़ने को विवश किया। मैं यहूदा के साथ वैसा ही करूँगा मैं यहूदा को अपनी आँखों से ओझल करूँगा। मैं यरूशलेम को अस्वीकार करूँगा। हाँ, मैंने उस नगर को चुना, और यह वही स्थान है जिसके बारे में मैं (यरूशलेम के बारे में) बातें कर रहा था जब मैंने यह कहा था, ‘मेरा नाम वहाँ रहेगा।’ किन्तु मैं वहाँ के मन्दिर को नष्ट करूँगा।” {23:28} योशिय्याह ने जो अन्य काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {i23:29} योशिय्याह की मृत्यु {23:29} योशिय्याह के समय मिस्र का राजा फिरौन नको अश्शूर के राजा के विरुद्ध युद्ध करने परात नदी को गया। राजा योशिय्याह नको से मिलने मगिद्दो गया। फ़िरौन नको ने योशिय्याह को देख लिया और तब उसे मार डाला। {23:30} योशिय्याह के अधिकारियों ने उसके शरीर को एक रथ में रखा और उसे मगिद्दो से यरूशलेम ले गये। उन्होंने योशिय्याह को उसकी अपनी कब्र में दफनाया। तब साधारण लोगों ने योशिय्याह के पुत्र यहोआहाज को लिया और उसका राज्याभिषेक कर दिया। उन्होंने यहोआहाज को नया राजा बनाया। {i23:31} यहोआहाज यहूदा का नया राजा बनता है {23:31} यहोआहाज तेईस वर्ष का था, जब वह राजा बना। उसने यरूशलेम में तीन महीने शासन किया। उसकी माँ लिब्ना के यिर्मयाह की पुत्री हमूतल थी। {23:32} यहोआहाज ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोआहाज ने वे ही सब काम किये जिन्हें उसके पूर्वजों ने किये थे। {23:33} फ़िरौन नको ने यहोआहाज को हमात प्रदेश में रिबला में कैद में रखा। अतः यहोआहाज यरूशलेम में शासन नहीं कर सका। फ़िरौन नको ने यहूदा को सात हज़ार पाँच सौ पौंड चाँदी और पचहत्तर पौंड सोना देने को विवश किया। {23:34} फ़िरौन नको ने योशिय्याह के पुत्र एल्याकीम को नया राजा बनाया। एल्याकीम ने अपने पिता योशिय्याह का स्थान लिया। फ़िरौन — नको ने एल्याकीम का नाम बदलकर यहोयाकीम कर दिया और फ़िरौन — नको यहोआहाज को मिस्र ले गया। योहआहाज मिस्र में मरा। {23:35} यहोयाकीम ने फ़िरौन को सोना और चाँदी दिया। किन्तु यहोयाकीम ने साधारण जनता से कर वसूले और उस धन का उपयोग फ़िरौन — नको को देने में किया। अतः हर व्यक्ति ने चाँदी और सोने का अपने हिस्से का भुगतान किया और राजा यहोयाकीम ने फ़िरौन को वह धन दिया। {23:36} यहोयाकीम जब राजा हुआ तो वह पच्चीस वर्ष का था। उसने ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य किया। उसकी माँ रुमा के अदायाह की पुत्री जबीदा थी। {23:37} यहोयाकीम ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोयाकीम ने वे ही सब काम किये जो उसके पूर्वजों ने किये थे। {i24:1} राजा नबूकदनेस्सर यहूदा आता है {24:1} यहोयाकीम के समय में बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर यहूदा देश में आया। यहोयाकीम ने नबूकदनेस्सर की सेवा तीन वर्ष तक की। तब यहोयाकीम नबूकदनेस्सर के विरुद्ध हो गया और उसके शासन से स्वतन्त्र हो गया। {24:2} यहोवा ने कसदियों, अरामियों, मोआबियों और अम्मोनियों के दलों को यहोयाकीम के विरुद्ध लड़ने के लिये भेजा। यहोवा ने उन दलों को यहूदा को नष्ट करने के लिये भेजा। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। यहोवा ने अपने सेवक नबियों का उपयोग वह कहने के लिये किया था। {24:3} यहोवा ने उन घटनाओं को यहूदा के साथ घटित होने का आदेश दिया। इस प्रकार वह उन्हें अपनी दृष्टि से दूर करेगा। उसने यह उन पापों के कारण किया जो मनश्शे ने किये। {24:4} यहोवा ने यह इसलिये किया कि मनश्शे ने बहुत से निरपराध व्यक्तियों को मार डाला। मनश्शे ने उनके खून से यरूशलेम को भर दिया था और यहोवा उन पापों को क्षमा नहीं कर सकता था। {24:5} यहोयाकीम ने जो अन्य काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। {24:6} यहोयाकीम मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। यहोयाकीम का पुत्र यहोयाकीन उसके बाद नया राजा हुआ। {24:7} मिस्र का राजा मिस्र से और अधिक बाहर नहीं निकल सका, क्योंकि बाबेल के राजा ने मिस्र के नाले से परात नदी तक सारे देश पर जिस पर मिस्र के राजा का आधिपत्य था, अधिकार कर लिया था। {i24:8} नबूकदनेस्सर यरूशलेम पर अधिकार करता है {24:8} यहोयाकीन जब शासन करने लगा तब वह अट्ठारह वर्ष का था। उसने यरूशलेम में तीन महीने तक शासन किया। उसकी माँ यरूशलेम के एलनातान की पुत्री नहुश्ता थी। {24:9} यहोयाकीन ने उन कामों को किया जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। उसने वे ही सब काम किये जो उसके पिता ने किये थे। {24:10} उस समय बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर के अधिकारी यरूशलेम आए उसे घेर लिया। {24:11} तब बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर नगर में आया। {24:12} यहूदा का राजा यहोयाकीन बाबेल के राजा से मिलने बाहर आया। यहोयाकीन की माँ, उसके अधिकारी, प्रमुख और अन्य अधिकारी भी उसके साथ गये। तब बाबेल के राजा ने यहोयाकीन को बन्दी बना लिया। यह नबूकदनेस्सर के शासनकाल का आठवाँ वर्ष था। {24:13} नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम से यहोवा के मन्दिर का सारा खजाना और राजमहल का सारा खजाना ले लिया। नबूकदनेस्सर ने उन सभी स्वर्ण — पात्रों को टुकड़ों में काट डाला जिन्हें इस्राएल के राजा सुलैमान ने यहोवा के मन्दिर में रखा था। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। {24:14} नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम के सभी लोगों को बन्दी बनाया। उसने सभी प्रमुखों और अन्य धनी लोगों को बन्दी बना लिया। उसने दस हज़ार लोगों को पकड़ा और उन्हें बन्दी बनाया। नबूकदनेस्सर ने सभी कुशल मजदूरों और कारीगरों को ले लिया। कोई व्यक्ति, साधारण लोगों में सबसे गरीब के अतिरिक्त, नहीं छोड़ा गया। {24:15} नबूकदनेस्सर, यहोयाकीन को बन्दी के रूप में बाबेल ले गया। नबूकदनेस्सर राजा की माँ, उसकी पत्नियों, अधिकारी और देश के प्रमुख लोगों को भी ले गया। नबूकदनेस्सर उन्हें यरूशलेम से बाबेल बन्दी के रूप में ले गया। {24:16} बाबेल का राजा सारे सात हज़ार सैनिक और एक हज़ार कुशल मजदूर और कारीगर भी ले गया। ये सभी व्यक्ति प्रशिक्षित सैनिक थे और युद्ध में लड़ सकते थे। बाबेल का राजा उन्हें बन्दी के रूप में बाबेल ले गया। {i24:17} राजा सिदकिय्याह {24:17} बाबेल के राजा ने मत्तन्याह को नया राजा बनाया। मत्तन्याह यहोयाकीन का चाचा था। बाबेल के राजा ने मत्तन्याह का नाम बदलकर सिदकिय्याह रख दिया। {24:18} सिदकिय्याह ने जब शासन करना आरम्भ किया तो वह इक्कीस वर्ष का था। उसने ग्यारह वर्ष यरूशलेम में शासन किया। उसकी माँ लिब्ना के यिर्मयाह की पुत्री हमूतल थी। {24:19} सिदकिय्याह ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। सिदकिय्याह ने वे ही सारे काम किये जो यहोयाकीम ने किये थे। {24:20} यहोवा यरूशलेम और यहूदा पर इतना क्रोधित हुआ कि उसने उन्हें दूर फेंक दिया। सिदकिय्याह ने बाबेल के राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और उसकी आज्ञा मानने से इन्कार कर दिया। {i25:1} नबूकदनेस्सर, द्वारा सिदकिय्याह के शासन की समाप्ति {25:1} अतः बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर अपनी सारी सेना के साथ यरूशलेम के विरूद्ध युद्ध करने आया। सिदकिय्याह के राज्य के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन यह घटित हुआ। नबूकदेनस्सर ने यरूशलेम के चारों ओर डेरा डाला। उसने यह कार्य यरूशलेम के लोगों को बाहर से भीतर, और भीतर से बाहर आने जाने से रोकने के लिये किया। तब उन्होंने यरूशलेम के चारों ओर मिट्टी की दीवार खड़ी की। {25:2} नबूकदनेस्सर की सेना यरूशलेम के चारों ओर सिदकिय्याह के यहूदा में शासनकाल के ग्यारहवें वर्ष तक बनी रही। {25:3} नगर में भुखमरी की स्थिति बद से बदतर होती जा रही थी। चौथे महीने के नौवें दिन साधारण लोगों के लिये कुछ भी भोजन नहीं रह गया था। {25:4} नबूकदनेस्सर की सेना ने नगर प्राचीर में एक छेद बनाया। उस रात को राजा सिदकिय्याह और उसके सारे सैनिक भाग गए। वे राजा के बाग के सहारे दो दीवारों के द्वार से बच निकले। बाबेल की सेना नगर के चारों ओर थी। किन्तु सिदकिय्याह और उसकी सेना मरूभूमि की ओर की सड़क पर भाग निकले। {25:5} बाबेल की सेना ने सिदकिय्याह का पीछा किया और उसे यरीहो के पास पकड़ लिया। सदिकिय्याह की सारी सेना भाग गई और उसे अकेला छोड़ दिया। {25:6} बाबेल सिदकिय्याह को रिबला में बाबेल के राजा के पास ले गये। बाबेल के राजा ने सिदकिय्याह को दण्ड देने का निर्णय किया। {25:7} उन्होंने सिदकिय्याह के सामने उसके पुत्रों को मार डाला। तब उन्होंने सिदकिय्याह की आँखें निकाल लीं। उन्होंने उसे जंजीर में जकड़ा और उसे बाबेल ले गए। {i25:8} यरूशलेम नष्ट कर दिया गया {25:8} नबूकदनेस्सर के बाबेल के शाशनकाल के उन्नीसवें वर्ष के पाँचवें महीने के सातवें दिन नबूजरदान यरूशलेम आया। नबूकदनेसर के अंगरक्षकों का नायक नबूजरदान था। {25:9} नबूजरदान ने यहोवा का मन्दिर और राजमहल जला डाला। नबूजरदान ने यरूशलेम के सभी घरों को भी जला डाला। उसने बड़ी से बड़ी इमारतों को भी नष्ट किया। {25:10} तब नबूजरदान के साथ जो बाबेल की सेना थी उसने यरूशलेम के चारों ओर की दीवारों को गिरा दिया {25:11} और नबूजरदान ने उन सभी लोगों को पकड़ा जो तब तक नगर में बचे रह गए थे। नबूजरदान ने सभी लोगों को बन्दी बना लिया और उन्हें भी जिन्होंने आत्मसमपर्ण करने की कोशिश की। {25:12} नबूजरदान ने केवल साधारण व्यक्तियों में सबसे गरीब लोगों को वहाँ रहने दिया। उसने उन गरीब लोगों को वहाँ अंगूर और अन्य फसलों की देखभाल के लिये रहने दिया। {25:13} बाबल के सैनिकों ने यहोवा के मन्दिर के काँसे की वस्तुओं के टुकड़े कर डाले। उन्होंने काँसे के स्तम्भों, काँसे की गाड़ी को और काँसे के विशाल सरोवर के भी टुकड़े कर डाले, तब बाबेल के सैनिक उन काँसे के टुकड़ों को बाबेल ले गए। {25:14} कसदियों ने बर्तन, बेलचे, दीप — झारु चम्मच और काँसे के बर्तन जो यहोवा के मन्दिर में काम आती थी, को भी ले लिया। {25:15} नबूजरदान ने सभी कढ़ाहियों और प्यालों को ले लिया। उसने जो सोने के बने थे उन्हें सोने के लिये और चाँदी के बने थे उन्हें चाँदी के लिये लिया। {25:16} जो चीज़ें उसने लीं उनकी सूची यह है: दो काँसे के स्तम्भ, एक हौज और वह गाड़ी जिसे सुलैमान ने यहोवा के मन्दिर के लिये बनाया था। इन चीज़ों में लगा काँसा इतना भारी था कि उसे तोला नहीं जा सकता था। (हर एक स्तम्भ लगभग {25:17} सत्ताईस फुट ऊँचा था। स्तम्भों के शीर्ष काँसे के बने थे। हर एक शीर्ष साढ़े चार फुट ऊँचा था। हर एक शीर्ष पर जाल और अनार का नमूना बना था। इसका सब कुछ काँसे का बना था। दोनों स्तम्भों पर एक ही प्रकार की आकृतियाँ थीं। {i25:18} बन्दी बनाए गए यहूदा के लोग {25:18} तब नबूजरदान ने मन्दिर से महायाजक सरायाह, द्वितीय याजक सपन्याह और तीन द्वार रक्षकों को लिया। {25:19} नगर में नबूजरदान ने एक अधिकारी को लिया। वह सेना का सेनापति था। नबूजरदान ने राजा के पाँच सलाहकारों को भी लिया जो नगर में पाए गए और उसने सेनापति के सचिव को लिया। सेनापति का सचिव वह व्यक्ति था जो साधारण लोगों की गणना करता था और उनमें से कुछ को सैनिक के रूप में चुनता था। नबूजरदान ने साठ अन्य लोगों को भी लिया जो नगर में पाए गए। {25:20} तब नबूजरदान इन सभी लोगों को रिबला में बाबेल के राजा के पास ले गया। बाबेल के राजा ने हमात देश {25:21} के रिबला में इन्हें मार डाला। इस प्रकार यहूदा के लोगों को कैदी बनाकर उन्हें, उनके देश से निर्वासित किया गया। {i25:22} नबूकदनेस्सर गदल्याह को यहूदा का शासक बनाता है {25:22} बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा देश में कुछ लोगों को छोड़ा। उसने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को यहूदा के उन लोगों का शासक बनाया। अहीकाम शापान का पुत्र था। {25:23} जब सेना के सभी सेनापतियों और आदमियों ने सुना की बाबेल के राजा ने गदल्याह को शासक बनाया है तो वे गदल्याह के पास मिस्पा में आए। ये सेना के सेनापति नतन्याह का पुत्र इश्माएल, कारेहू का पुत्र योहानान, नतोपाई तन्हू मेत का पुत्र सरायाह तथा माकाई का पुत्र याजन्याह थे। {25:24} तब गदल्याह ने इन सेना के सेनापतियों और उनके आदमियों को वचन दिया। गदल्याह ने उनसे कहा, “बाबेल के अधिकारियों से डरो नहीं। इस देश में रहो और बाबेल के राजा की सेवा करो। तब तुम्हारे साथ सब कुछ ठीक रहेगा।” {25:25} किन्तु सातवें महीने राजा के परिवार का एलीशामा का पौत्र व नतन्याह का पुत्र इश्माएल दस पुरुषों के साथ आया और गदल्याह को मार डाला। इश्माएल और उसके दस आदमियों ने मिस्पा में गदल्याह के साथ जो यहूदी और कसदी थे, उन्हें भी मार डाला। {25:26} तब सभी लोग सबसे कम महत्वपूर्ण और सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथा सेना के नायक मिस्र को भाग गए। वे इसलिये भागे कि वे कसदियों से भयभीत थे। {25:27} बाद में राजा एवील्मरोदक यहूदा का राजा बना। उसने यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकलने दिया। यह यहूदा के राजा यहोयाकीन के बन्दी बनाये जाने के सैंतीसवे वर्ष में हुआ। यह एवील्मरोदक के शासन आरम्भ करने के बारहवें महीने के सत्ताईसवें दिन हुआ। {25:28} एवील्मरोदक ने यहोयाकीन से दयापूर्वक बातें कीं। एवील्मरोदक ने यहोयाकीन को बाबेल में रहने वाले उसके सभी साथी राजाओं से अधिक उच्च स्थान प्रदान किया। {25:29} एवील्मरोदक ने यहोयाकीन के बन्दीगृह के वस्त्रों को पहनना बन्द करवाया। यहोयाकीन ने एवील्मरोदक के साथ एक ही मेज पर खाना खाया। उसने अपने शेष जीवन में हर एक दिन ऐसा ही किया। {25:30} इस प्रकार राजा एवील्मरोदक ने यहोयाकीन को जीवन पर्यन्त नियमित रूप से प्रतिदिन का भोजन प्रदान किया।