{i1:1} पहिला भाग (भजनसंहिता 1—41) {1:1} सचमुच वह जन धन्य होगा यदि वह दुष्टों की सलाह को न मानें, और यदि वह किसी पापी के जैसा जीवन न जीए और यदि वह उन लोगों की संगति न करे जो परमेश्वर की राह पर नहीं चलते। {1:2} वह नेक मनुष्य है जो यहोवा के उपदेशों से प्रीति रखता है। वह तो रात दिन उन उपदेशों का मनन करता है। {1:3} इससे वह मनुष्य उस वृक्ष जैसा सुदृढ़ बनता है जिसको जलधार के किनारे रोपा गया है। वह उस वृक्ष समान है, जो उचित समय में फलता और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। वह जो भी करता है सफल ही होता है। {1:4} किन्तु दुष्ट जन ऐसे नहीं होते। दुष्ट जन उस भूसे के समान होते हैं जिन्हें पवन का झोका उड़ा ले जाता है। {1:5} इसलिए दुष्ट जन न्याय का सामना नहीं कर पायेंगे। सज्जनों की सभा में वे दोषी ठहरेंगे और उन पापियों को छोड़ा नहीं जायेगा। {1:6} ऐसा भला क्यों होगा? क्योंकि यहोवा सज्जनों की रक्षा करता है और वह दुर्जनों का विनाश करता है। {2:1} दूसरे देशों के लोग क्यों इतनी हुल्लड़ मचाते हैं और लोग व्यर्थ ही क्यों षड़यन्त्र रचते हैं? {2:2} ऐसे दशों के राजा और नेता यहोवा और उसके चुने हुए राजा के विरुद्ध होने को आपस में एक हो जाते हैं। {2:3} वे नेता कहते हैं, “आओ परमेश्वर से और उस राजा से जिसको उसने चुना है, हम सब विद्रोह करें। आओ उनके बन्धनों को हम उतार फेंके।” {2:4} किन्तु मेरा स्वामी, स्वर्ग का राजा, उन लोगों पर हँसता है। {2:5} परमेश्वर क्रोधित है और, यही उन नेताओं को भयभीत करता है। {2:6} वह उन से कहता है,“मैंने इस पुरुष को राजा बनने के लिये चुना है, वह सिय्योन पर्वत पर राज करेगा, सिय्योन मेरा विशेष पर्वत है।” {2:7} अब मै यहोवा की वाचा के बारे में तुझे बताता हूँ। यहोवा ने मुझसे कहा था, “आज मैं तेरा पिता बनता हूँ और तू आज मेरा पुत्र बन गया है। {2:8} यदि तू मुझसे माँगे, तो इन देशों को मैं तुझे दे दूँगा और इस धरती के सभी जन तेरे हो जायेंगे। {2:9} तेरे पास उन देशों को नष्ट करने की वैसी ही शक्ति होगी जैसे किसी मिट्टी के पात्र को कोई लौह दण्ड से चूर चूर कर दे।” {2:10} इसलिए, हे राजाओं, तुम बुद्धिमान बनो। हे शासकों, तुम इस पाठ को सीखो। {2:11} तुम अति भय से यहोवा की आज्ञा मानों। {2:12} स्वयं को परमेश्वर के पुत्र का विश्वासपात्र दिखओ। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो वह क्रोधित होगा और तुम्हें नष्ट कर देगा। जो लोग यहोवा में आस्था रखते हैं वे आनन्दित रहते हैं, किन्तु अन्य लोगों को सावधान रहना चाहिए। यहोवा अपना क्रोध बस दिखाने ही वाला है। {i3:1} दाऊद का उस समय का गीत जब वह अपने पुत्र अबशालोम से दूर भागा था। {3:1} हे यहोवा, मेरे कितने ही शुत्र मेरे विरुद्ध खड़े हो गये हैं। {3:2} कितने ही मेरी चर्चाएं करते हैं, कितने ही मेरे विषय में कह रहे कि परमेश्वर इसकी रक्षा नहीं करेगा। {3:3} किन्तु यहोवा, तू मेरी ढाल है। तू ही मेरी महिमा है। हे यहोवा, तू ही मेरा सिर ऊँचा करता है। {3:4} मैं यहोवा को ऊँचे स्वर में पुकारुँगा। वह अपने पवित्र पर्वत से मुझे उत्तर देगा। {3:5} मैं आराम करने को लेट सकता हूँ। मैं जानता हूँ कि मैं जाग जाऊँगा, क्योंकि यहोवा मुझको बचाता और मेरी रक्षा करता है। {3:6} चाहे मैं सैनिकों के बीच घिर जाऊँ किन्तु उन शत्रुओं से भयभीत नहीं होऊँगा। {3:7} हे यहोवा, जाग! मेरे परमेश्वर आ, मेरी रक्षा कर! तू बहुत शक्तिशाली है। यदि मेरे दुष्ट शत्रुओं के मुख पर तू प्रहार करे, तो उनके सभी दाँतों को तो उखाड़ डालेगा। {3:8} यहोवा अपने लोगों की रक्षा कर सकता है। हे यहोवा, तेरे लोगों पर तेरी आशीष रहे। {i4:1} तारवाद्यों वाले संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक गीत। {4:1} मेरे उत्तम परमेश्वर, जब मैं तुझे पुकारुँ, मुझे उत्तर दे। मेरी विनती को सुन और मुझ पर कृपा कर। जब कभी विपत्तियाँ मुझको घेरें तू मुझ को छुड़ा ले। {4:2} अरे लोगों, कब तक तुम मेरे बारे में अपशब्द कहोगे? तुम लोग मेरे बारे में कहने के लिये नये झूठ ढूँढते रहते हो। उन झूठों को कहने से तुम लोग प्रीति रखते हो। {4:3} तुम जानते हो कि अपने नेक जनों की यहोवा सुनता है! जब भी मैं यहोवा को पुकारता हूँ, वह मेरी पुकार को सुनता है। {4:4} यदि कोई वस्तु तुझे झमेले में डाले, तू क्रोध कर सकता है, किन्तु पाप कभी मत करना। जब तू अपने बिस्तर में जाये तो सोने से पहले उन बातों पर विचार कर और चुप रह। {4:5} समुचित बलियाँ परमेश्वर को अर्पित कर और तू यहोवा पर भरोसा बनाये रख। {4:6} बहुत से लोग कहते हैं, “परमेश्वर की नेकी हमें कौन दिखायेगा? हे यहोवा, अपने प्रकाशमान मुख का प्रकाश मुझ पर चमका।” {4:7} हे यहोवा, तुने मुझे बहुत प्रसन्न बना दिया। कटनी के समय भरपूर फसल और दाखमधु पाकर जब हम आन्नद और उल्लास मनाते हैं उससे भी कहीं अधिक प्रसन्न मैं अब हूँ। {4:8} मैं बिस्तर में जाता हूँ और शांति से सोता हूँ। क्योंकि यहोवा, तू ही मुझको सुरक्षित सोने को लिटाता है। {i5:1} बाँसुरी वादकों के निर्देशक के लिये दाऊद का गीत। {5:1} हे यहोवा, मेरे शब्द सुन और तू उसकी सुधि ले जिसको तुझसे कहने का मैं यत्न कर रहा हूँ। {5:2} मेरे राजा, मेरे परमेश्वर मेरी प्रार्थना सुन। {5:3} हे यहोवा, हर सुबह तुझको, मैं अपनी भेंटे अर्पित करता हूँ। तू ही मेरा सहायक है। मेरी दृष्टि तुझ पर लगी है और तू ही मेरी प्रार्थनाएँ हर सुबह सुनता है। {5:4} हे यहोवा, तुझ को बुरे लोगों की निकटता नहीं भाती है। तू नहीं चाहता कि तेरे मन्दिर में कोई भी पापी जन आये। {5:5} तेरे निकट अविश्वासी नहीं आ सकते। ऐसे मनुष्यों को तूने दूर भेज दिया जो सदा ही बुरे कर्म करते रहते हैं। {5:6} जो झूठ बोलते हैं उन्हें तू नष्ट करता है। यहोवा ऐसे मनुष्यों से घृणा करता है, जो दूसरों को हानि पहुँचाने का षड़यन्त्र रचते हैं। {5:7} किन्तु हे यहोवा, तेरी महा करुणा से मैं तेरे मन्दिर में आऊँगा। हे यहोवा, मुझ को तेरा डर है, मैं सम्मान तुझे देता हूँ। इसलिए मैं तेरे मन्दिर की ओर झुककर तुझे दण्डवत करुँगा। {5:8} हे यहोवा, तू मुझको अपनी नेकी का मार्ग दिखा। तू अपनी राह को मेरे सामने सीधी कर क्योंकि मैं शत्रुओं से घिरा हुआ हूँ। {5:9} वे लोग सत्य नहीं बोलते। वे झूठे हैं, जो सत्य को तोड़ते मरोड़ते रहते हैं। उनके मुख खुली कब्र के समान हैं। वे औरों से उत्तम चिकनी — चुपड़ी बातें करते किन्तु वे उन्हें बस जाल में फँसाना चाहते हैं। {5:10} हे परमेश्वर, उन्हें दण्ड दे। उनके अपने ही जालों में उनको उलझने दे। ये लोग तेरे विरुद्ध हो गये हैं, उन्हें उनके अपने ही बहुत से पापों का दण्ड दे। {5:11} किन्तु जो परमेश्वर के आस्थावान होते हैं, वे सभी प्रसन्न हों और वे सदा सर्वदा को आनन्दित रहें। हे परमेश्वर, तू उनकी रक्षा कर और उन्हें तू शक्ति दे जो जन तेरे नाम से प्रीति रखते हैं। {5:12} हे यहोवा, तू निश्चय ही धर्मी को वरदान देता है। अपनी कृपा से तू उनको एक बड़ी ढाल बन कर फिर ढक लेता है। {i6:1} शौमिनिथ शैली के तारवाद्यों के निर्देशक के लिये दाऊद का एक गीत। {6:1} हे यहोवा, तू मुझ पर क्रोधित होकर मेरा सुधार मत कर। मुझ पर कुपित मत हो और मुझे दण्ड मत दे। {6:2} हे यहोवा, मुझ पर दया कर। मै रोगी और दुर्बल हूँ। मेरे रोगों को हर ले। मेरी हड्डियाँ काँप — काँप उठती हैं। {6:3} मेरी समूची देह थर — थर काँप रही है। हे यहोवा, मेरा भारी दु: ख तू कब तक रखेगा। {6:4} हे यहोवा, मुझ को फिर से बलवान कर। तू महा दयावाने है मेरी रक्षा कर। {6:5} मरे हुए लोग तुझे अपनी कब्रों के बीच याद नहीं करते हैं। मृत्यु के देश में वे तेरी प्रशंसा नहीं करते हैं। अतःमुझको चँगा कर। {6:6} हे यहोवा, सारी रात मैं तुझको पुकारता रहता हूँ। मेरा बिछौना मेरे आँसुओं से भीग गया है। मेरे बिछौने से आँसु टपक रहे हैं। तेरे लिये रोते हुए मैं क्षीण हो गया हूँ। {6:7} मेरे शत्रुओं ने मुझे बहुतेरे दु: ख दिये। इसने मुझे शोकाकुल और बहुत दु: खी कर डाला और अब मेरी आँखें रोने बिलखने से थकी हारी, दुर्बल हैं। {6:8} अरे ओ दुर्जनों, तुम मुझ से दूर हटो। क्योंकि यहोवा ने मुझे रोते हुए सुन लिया है। {6:9} मेरी विनती यहोवा के कान तक पहुँच चुकी है और मेरी प्रार्थनाओं को यहोवा ने सुनकर उत्तर दे दिया है। {6:10} मेरे सभी शत्रु व्याकुल और आशाहीन होंगे। कुछ अचानक ही घटित होगा और वे सभी लज्जित होंगे। वे मुझको छोड़ कर लौट जायेंगे। {i7:1} दाऊद का एक भाव गीत: जिसे उसने यहोवा के लिये गाया। यह भाव गीत बिन्यामीन परिवार समूह के कीश के पुत्र शाऊल के विषय मे है। {7:1} हे मेरे यहोवा परमेश्वर, मुझे तुझ पर भरोसा है। उन व्यक्तियों से तू मेरी रक्षा कर, जो मेरे पीछे पड़े हैं। मुझको तू बचा ले। {7:2} यदि तू मुझे नहीं बचाता तो मेरी दशा उस निरीह पशु की सी होगी, जिसे किसी सिंह ने पकड़ लिया है। वह मुझे घसीट कर दूर ले जायेगा, कोई भी व्यक्ति मुझे नहीं बचा पायेगा। {7:3} हे मेरे यहोवा परमेश्वर, कोई पाप करने का मैं दोषी नहीं हूँ। मैंने तो कोई भी पाप नहीं किया। {7:4} मैंने अपने मित्रों के साथ बुरा नहीं किया और अपने मित्र के शत्रुओं की भी मैंने सहायता नहीं किया। {7:5} किन्तु एक शत्रु मेरे पीछे पड़ा हुआ है। वह मेरी हत्या करना चाहता है। वह शत्रु चाहता है कि मेरे जीवन को धरती पर रौंद डाले और मेरी आत्मा को धूल में मिला दे। {7:6} यहोवा उठ, तू अपना क्रोध प्रकट कर। मेरा शत्रु क्रोधित है, सो खड़ा हो जा और उसके विरुद्ध युद्ध कर। खड़ा हो जा और निष्यक्षता की माँग कर। {7:7} हे यहोवा, लोगों का न्याय कर। अपने चारों ओर राष्ट्रों को एकत्र कर और लोगों का न्याय कर। {7:8} हे यहोवा, न्याय कर मेरा, और सिद्ध कर कि मैं न्याय संगत हूँ। ये प्रमाणित कर दे कि मैं निर्दोष हूँ। {7:9} दुर्जन को दण्ड दे और सज्जन की सहायता कर। हे परमेश्वर, तू उत्तम है। तू अन्तर्यामी है। तू तो लोगों के ह्रदय में झाँक सकता है। {7:10} जिन के मन सच्चे हैं, परमेश्वर उन व्यक्तियों की सहायता करता है। इसलिए वह मेरी भी सहायता करेगा। {7:11} परमेश्वर उत्तम न्यायकर्ता है। वह कभी भी अपना क्रोध प्रकट कर देगा। {7:12} परमेश्वर जब कोई निर्णय ले लेता है, तो फिर वह अपना मन नहीं बदलता है। {7:13} उसमें लोगों को दण्डित करने की क्षमता है। उसने मृत्यु के सब सामान साथ रखे हैं। {7:14} कुछ ऐसे लोग होते हैं जो सदा कुकर्मों की योजना बनाते रहते हैं। ऐसे ही लोग गुप्त षड़यन्त्र रचते हैं, और मिथ्या बोलते हैं। {7:15} वे दूसरे लोगों को जाल में फँसाने और हानि पहुँचाने का यत्न करते हैं। किन्तु अपने ही जाल में फँस कर वे हानि उठायेंगे। {7:16} वे अपने कर्मों का उचित दण्ड पायेंगे। वे अन्य लोगों के साथ क्रूर रहे। किन्तु जैसा उन्हें चाहिए वैसा ही फल पायेंगे। {7:17} मैं यहोवा का यश गाता हूँ, क्योंकि वह उत्तम है। मैं यहोवा के सर्वोच्च नाम की स्तुति करता हूँ। {i8:1} गित्तीथ की संगत पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {8:1} हे यहोवा, मेरे स्वामी, तेरा नाम सारी धरती पर अति अद्भुत है। तेरा नाम स्वर्ग में हर कहीं तुझे प्रशंसा देता है। {8:2} बालकों और छोटे शिशुओं के मुख से, तेरे प्रशंसा के गीत उच्चरित होते हैं। तू अपने शत्रुओं को चुप करवाने के लिये ऐसा करता है। {8:3} हे यहोवा, जब मेरी दृष्टि गगन पर पड़ती है, जिसको तूने अपने हाथों से रचा है और जब मैं चाँद तारों को देखता हूँ जो तेरी रचना है, तो मैं अचरज से भर उठता हूँ। {8:4} लोग तेरे लिये क्यों इतने महत्वपूर्ण हो गये? तू उनको याद भी किस लिये करता है? मनुष्य का पुत्र तेरे लिये क्यों महत्वपूर्ण है? क्यों तू उन पर ध्यान तक देता है? {8:5} किन्तु तेरे लिये मनुष्य महत्वपूर्ण है! तूने मनुष्य को ईश्वर का प्रतिरुप बनाया है, और उनके सिर पर महिमा और सम्मान का मुकुट रखा है। {8:6} तूने अपनी सृष्टि का जो कुछ भी तूने रचा लोगों को उसका अधिकारी बनाया। {8:7} मनुष्य भेड़ों पर, पशु धन पर और जंगल के सभी हिसक जन्तुओं पर शासन करता है। {8:8} वह आकाश में पक्षियों पर और सागर में तैरते जलचरों पर शासन करता है। {8:9} हे यहोवा, हमारे स्वामी, सारी धरती पर तेरा नाम अति अद्भुत है। {i9:1} अलामौथ बैन राग पर आधारित दाऊद का पद: संगीत निर्देशक के लिये। {9:1} मैं अपने सम्पूर्ण मन से यहोवा की स्तुति करता हूँ। हे यहोवा, तूने जो अद्भुत कर्म किये हैं, मैं उन सब का वर्णन करुँगा। {9:2} तूने ही मुझे इतना आनन्दित बनाया है। हे परम परमेश्वर, मैं तेरे नाम के प्रशंसा गीत गाता हूँ। {9:3} जब मेरे शत्रु मुझसे पलट कर मेरे विमुख होते हैं, तब परमेश्वर उनका पतन करता और वे नष्ट हो जाते हैं। {9:4} तू सच्चा न्यायकर्ता है। तू अपने सिंहासन पर न्यायकर्ता के रुप में विराजा। तूने मेरे अभियोग की सुनवाई की और मेरा न्याय किया। {9:5} हे यहोवा, तूने उन शत्रुओं को कठोर झिड़की दी और हे यहोवा, तूने उन दुष्टों को नष्ट किया। उनके नाम तूने जीवितों की सूची से सदा सर्वदा के लिये मिटा दिये। {9:6} शत्रु नष्ट हो गया है! हे यहोवा, तूने उनके नगर मिटा दिये हैं! उनके भवन अब खण्डहर मात्र रह गये हैं। उन बुरे व्यक्तियों की हमें याद तक दिलाने को कुछ भी नहीं बचा है। {9:7} किन्तु यहोवा, तेरा शासन अविनाशी है। यहोवा ने अपने राज्य को शक्तिशाली बनाया। उसने जग में न्याय लाने के लिये यह किया। {9:8} यहोवा धरती के सब मनुष्यों का निष्पक्ष होकर न्याय करता है। यहोवा सभी जातियों का पक्षपात रहित न्याय करता है। {9:9} यहोवा दलितों और शोषितों का शरणस्थल है। विपदा के समय वह एक सुदृढ़ गढ़ है। {9:10} जो तुझ पर भरोसा रखते, तेरा नाम जानते हैं। हे यहोवा, यदि कोई जन तेरे द्वार पर आ जाये तो बिना सहायता पाये कोई नहीं लौटता। {9:11} अरे ओ सिय्योन के निवासियों, यहोवा के गीत गाओ जो सिय्योन में विराजता है। सभी जातियों को उन बातों के विषय में बताओ जो बड़ी बातें यहोवा ने की हैं। {9:12} जो लोग यहोवा से न्याय माँगने गये, उसने उनकी सुधि ली। जिन दीनों ने उसे सहायता के लिये पुकारा, उनको यहोवा ने कभी भी नहीं बिसारा। {9:13} यहोवा की स्तुति मैंने गायी है: “हे यहोवा, मुझ पर दया कर। देख, किस प्रकार मेरे शत्रु मुझे दु: ख देते हैं। ‘मृत्यु के द्वार’ से तू मुझको बचा ले। {9:14} जिससे यहोवा यरूशलेम के फाटक पर मैं तेरी स्तुति गीत गा सकूँ। मैं अति प्रसन्न होऊँगा क्योंकि तूने मुझको बचा लिया।” {9:15} अन्य जातियों ने गड्ढे खोदे ताकि लोग उनमें गिर जायें, किन्तु वे अपने ही खोदे गड्ढे में स्वयं समा जायेंगे। दुष्ट जन ने जाल छिपा छिपा कर बिछाया, ताकि वे उसमें दूसरे लोगों को फँसा ले। किन्तु उनमें उनके ही पाँव फँस गये। {9:16} यहोवा ने जो न्याय किया वह उससे जाना गया कि जो बुरे कर्म करते हैं, वे अपने ही हाथों के किये हुए कामों से जाल में फँस गये। {9:17} वे दुर्जन होते हैं, जो परमेश्वर को भूलते हैं। ऐसे मनुष्य मृत्यु के देश को जायेंगे। {9:18} कभी — कभी लगता है जैसे परमेश्वर दुखियों को पीड़ा में भूल जाता है। यह ऐसा लगता जैसे दीन जन आशाहीन हैं। किन्तु परमेश्वर दीनों को सदा — सर्वदा के लिये कभी नहीं भूलता। {9:19} हे यहोवा, उठ और राष्ट्रों का न्याय कर। कहीं वे न सोच बैठें वे प्रबल शक्तिशाली हैं। {9:20} लोगों को पाठ सिखा दे, ताकि वे जान जायें कि वे बस मानव मात्र है। {10:1} हे यहोवा, तू इतनी दूर क्यों खड़ा रहता है? कि संकट में पड़े लोग तुझे नहीं देख पाते। {10:2} अहंकारी दुष्ट जन दुर्बल को दु: ख देते हैं। वे अपने षड़यन्त्रों को रचने रहते हैं। {10:3} दुष्ट जन उन वस्तुओं पर गर्व करते हैं, जिनकी उन्हें अभिलाषा है और लालची जन परमेश्वर को कोसते हैं। इस प्रकार दुष्ट दर्शाते हैं कि वे यहोवा से घृणा करते हैं। {10:4} दुष्ट जन इतने अभिमानी होते हैं कि वे परमेश्वर का अनुसरण नहीं कर सकते। वे बुरी — बुरी योजनाएँ रचते हैं। वे ऐसे कर्म करते हैं, जैसे परमेश्वर का कोई अस्तित्व ही नहीं। {10:5} दुष्ट जन सदा ही कुटिल कर्म करते हैं। वे परमेश्वर की विवेकपूर्ण व्यवस्था और शिक्षाओं पर ध्यान नहीं देते। हे परमेश्वर, तेरे सभी शत्रु तेरे उपदेशों की उपेक्षा करते हैं। {10:6} वे सोचते हैं, जैसे कोई बुरी बात उनके साथ नहीं घटेगी। वे कहा करते हैं, “हम मौज से रहेंगे और कभी भी दण्डित नहीं होंगे।” {10:7} ऐसे दुष्ट का मुख सदा शाप देता रहता है। वे दूसरे जनों की निन्दा करते हैं और काम में लाने को सदैव बुरी — बुरी योजनाएँ रचते रहते हैं। {10:8} ऐसे लोग गुप्त स्थानों में छिपे रहते हैं, और लोगों को फँसाने की प्रतीक्षा करते हैं। वे लोगों को हानि पहुँचाने के लिये छिपे रहते हैं और निरपराधी लोगों की हत्या करते हैं। {10:9} दुष्ट जन सिंह के समान होते हैं जो उन पशुओं को पकड़ने की घात में रहते हैं। जिन्हें वे खा जायेंगे। दुष्ट जन दीन जनों पर प्रहार करते हैं। उनके बनाये गये जाल में असहाय दीन फँस जाते हैं। {10:10} दुष्ट जन बार — बार दीन पर घात करता और उन्हें दु: ख देता है। {10:11} अत: दीन जन सोचने लगते हैं, “परमेश्वर ने हमको भुला ही दिया है! हमसे तो परमेश्वर सदा — सदा के लिये दूर हो गया है। जो कुछ भी हमारे साथ घट रहा, उससे परमेश्वर ने दृष्टि फिरा ली है!” {10:12} हे यहोवा, उठ और कुछ तो कर! हे परमेश्वर, ऐसे दुष्ट जनों को दण्ड दे! और इन दीन दुखियों को मत बिसरा! {10:13} दुष्ट जन क्यों परमेश्वर के विरुद्ध होते हैं? क्योंकि वे सोचते हैं कि परमेश्वर उन्हें कभी नहीं दण्डित करेगा। {10:14} हे यहोवा, तू निश्चय ही उन बातों को देखता है, जो क्रूर और बुरी हैं। जिनको दुर्जन किया करते हैं। इन बातों को देख और कुछ तो कर! दु: खों से घिरे लोग सहायता माँगने तेरे पास आते हैं। हे यहोवा, केवल तू ही अनाथ बच्चों का सहायक है, अत: उन की रक्षा कर! {10:15} हे यहोवा, दुष्ट जनों को तू नष्ट कर दे। {10:16} तू उन्हें अपनी धरती से ढकेल बाहर कर {10:17} हे यहोवा, दीन दु: खी लोग जो चाहते हैं वह तूने सुन ली। उनकी प्रार्थनाएँ सुन और उन्हें पूरा कर जिनको वे माँगते हैं! {10:18} हे यहोवा, अनाथ बच्चों की तू रक्षा कर। दु: खी जनों को और अधिक दु: ख मत पाने दे। दुष्ट जनों को तू इतना भयभीत कर दे कि वे यहाँ न टिक पायें। {i11:1} संगित निर्देशक के लिये दाऊद का पद। {11:1} मैं यहोवा पर भरोसा करता हूँ। फिर तू मुझसे क्यों कहता है कि मैं भाग कर कहीं जाऊँ? तू कहता है मुझसे कि, “पक्षी की भाँति अपने पहाड़ पर उड़ जा!” {11:2} दुष्ट जन शिकारी के समान हैं। वे अन्धकार में छिपते हैं। वे धनुष की डोर को पीछे खींचते हैं। वे अपने बाणों को साधते हैं और वे अच्छे, नेक लोगों के ह्रदय में सीधे बाण छोड़ते हैं। {11:3} क्या होगा यदि वे समाज की नींव को उखाड़ फेंके? फिर तो ये अच्छे लोग कर ही क्या पायेंगे? {11:4} यहोवा अपने विशाल पवित्र मन्दिर में विराजा है। यहोवा स्वर्ग में अपने सिंहासन पर बैठता है। यहोवा सब कुछ देखता है, जो भी घटित होता है। यहोवा की आँखें लोगों की सज्जनता व दुर्जनता को परखने में लगी रहती हैं। {11:5} यहोवा भले व बुरे लोगों को परखता है, और वह उन लोगों से घृणा करता है, जो हिसा से प्रीति रखते हैं। {11:6} वह गर्म कोयले और जलती हुई गन्धक को वर्षा की भाँति उन बुरे लोगों पर गिरायेगा। उन बुरे लोगों के भाग में बस झुलसाती पवन आयेगी {11:7} किन्तु यहोवा, तू उत्तम है। तुझे उत्तम जन भाते हैं। उत्तम मनुष्य यहोवा के साथ रहेंगे और उसके मुख का दर्शन पायेंगे। {i12:1} शौमिनिथ की संगत पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {12:1} हे यहोवा, मेरी रक्षा कर! खरे जन सभी चले गये हैं। मनुष्यों की धरती में अब कोई भी सच्चा भक्त नहीं बचा है। {12:2} लोग अपने ही साथियों से झूठ बोलते हैं। हर कोई अपने पड़ोसियों को झूठ बोलकर चापलूसी किया करता है। {12:3} यहोवा उन ओंठों को सी दे जो झूठ बोलते हैं। हे यहोवा, उन जीभों को काट जो अपने ही विषय में डींग हाँकते हैं। {12:4} ऐसे जन सोचते है, “हमारी झूठें हमें बड़ा व्यक्ति बनायेंगी। कोई भी व्यक्ति हमारी जीभ के कारण हमें जीत नहीं पायेगा।” {12:5} किन्तु यहोवा कहता है: “बुरे मनुष्यों ने दीन दुर्बलों से वस्तुएँ चुरा ली हैं। उन्होंने असहाय दीन जन से उनकी वस्तुएँ ले लीं। किन्तु अब मैं उन हारे थके लोगों की रक्षा खड़ा होकर करुँगा।” {12:6} यहोवा के वचन सत्य हैं और इतने शुद्ध जैसे आग में पिघलाई हुई श्वेत चाँदी। वे वचन उस चाँदी की तरह शुद्ध हैं, जिसे पिघला पिघला कर सात बार शुद्ध बनाया गया है। {12:7} हे यहोवा, असहाय जन की सुधि ले। उनकी रक्षा अब और सदा सर्वदा कर! {12:8} ये दुर्जन अकड़े और बने ठने घूमते हैं। किन्तु वे ऐसे होते हैं जैसे कोई नकली आभूषण धारण करता है जो देखने में मूल्यवान लगते हैं, किन्तु वास्तव में बहुत ही सस्ते होते हैं। {i13:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {13:1} हे यहोवा, तू कब तक मुझ को भूला रहेगा? क्या तू मुझे सदा सदा के लिये बिसरा देगा कब तक तू मुझको नहीं स्वीकारेगा? {13:2} तू मुझे भूल गया यह कब तक मैं सोचूँ? अपने ह्रदय में कब तक यह दु: ख भोगूँ? कब तक मेरे शत्रु मुझे जीतते रहेंगे? {13:3} हे यहोवा, मेरे परमेश्वर, मेरी सुधि ले! और तू मेरे प्रश्न का उत्तर दे! मुझको उत्तर दे नहीं तो मैं मर जाऊँगा! {13:4} कदाचित् तब मेरे शत्रु यों कहने लगें, “मैंने उसे पीट दिया!” मेरे शत्रु प्रसन्न होंगे कि मेरा अंत हो गया है। {13:5} हे यहोवा, मैंने तेरी करुणा पर सहायता पाने के लिये भरोसा रखा। तूने मुझे बचा लिया और मुझको सुखी किया! {13:6} मैं यहोवा के लिये प्रसन्नता के गीत गाता हूँ, क्योंकि उसने मेरे लिये बहुत सी अच्छी बातें की हैं। {i14:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का पद। {14:1} मूर्ख अपने मनमें कहता है, “परमेश्वर नहीं है।” मूर्ख जन तो ऐसे कार्य करते हैं जो भ्रष्ट और घृणित होते हैं। उनमें से कोई भी भले काम नहीं करता है। {14:2} यहोवा आकाश से नीचे लोगों को देखता है, कि कोई विवेकी जन उसे मिल जाये। विवेकी मनुष्य परमेश्वर की ओर सहायता पाने के लिये मुड़ता है। {14:3} किन्तु परमेश्वर से मुड़ कर सभी दूर हो गये हैं। आपस में मिल कर सभी लोग पापी हो गये हैं। कोई भी जन अच्छे कर्म नहीं कर रहा है! {14:4} मेरे लोगों को दुष्टों ने नष्ट कर दिया है। वे दुर्जन परमेश्वर को नहीं जानते हैं। दुष्टों के पास खाने के लिये भरपूर भोजन है। ये जन यहोवा की उपासना नहीं करते। {14:5} ये दुष्ट मनुष्य निर्धन की सम्मति सुनना नहीं चाहते। ऐसा क्यों है? क्योंकि दीन जन तो परमेश्वर पर निर्भर है। {14:6} किन्तु दुष्ट लोगों पर भय छा गया है। क्यों? क्योंकि परमेश्वर खरे लोगों के साथ है। {14:7} सिय्योन पर कौन जो इस्राएल को बचाता है? वह तो यहोवा है, जो इस्राएल की रक्षा करता है! यहोवा के लोगों को दूर ले जाया गया और उन्हें बलपूर्वक बन्दी बनाया गया। किन्तु यहोवा अपने भक्तों को वापस छुड़ा लायेगा। तब याकूब (इस्राएल) अति प्रसन्न होगा। {i15:1} दाऊद का एक पद। {15:1} हे यहोवा, तेरे पवित्र तम्बू में कौन रह सकता है? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन रह सकता है? {15:2} केवल वह व्यक्ति जो खरा जीवन जीता है, और जो उत्तम कर्मों को करता है, और जो ह्रदय से सत्य बोलता है। वही तेरे पर्वत पर रह सकता है। {15:3} ऐसा व्यक्ति औरों के विषय में कभी बुरा नहीं बोलता है। ऐसा व्यक्ति अपने पड़ोसियों का बुरा नहीं करता। वह अपने घराने की निन्दा नहीं करता है। {15:4} वह उन लोगों का आदर नहीं करता जो परमेश्वर से घृणा रखते हैं। और वह उन सभी का सम्मान करता है, जो यहोवा के सेवक हैं। ऐसा मनुष्य यदि कोई वचन देता है तो वह उस वचन को पूरा भी करता है, जो उसने दिया था। {15:5} वह मनुष्य यदि किसी को धन उधार देता है तो वह उस पर ब्याज नहीं लेता, और वह मनुष्य किसी निरपराध जन को हानि पहुँचाने के लिये घूस नहीं लेता। यदि कोई मनुष्य उस खरे जन सा जीवन जीता है तो वह मनुष्य परमेश्वर के निकट सदा सर्वदा रहेगा। {i16:1} दाऊद का एक गीत। {16:1} हे परमेश्वर, मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तुझ पर निर्भर हूँ। {16:2} मेरा यहोवा से निवेदन है, “यहोवा, तू मेरा स्वामी है। मेरे पास जो कुछ उत्तम है वह सब तुझसे ही है।” {16:3} यहोवा अपने लोगों की धरती पर अद्भुत काम करता है। यहोवा यह दिखाता है कि वह सचमुच उनसे प्रेम करता है। {16:4} किन्तु जो अन्य देवताओं के पीछे उन की पूजा के लिये भागते हैं, वे दु: ख उठायेंगे। उन मूर्तियों को जो रक्त अर्पित किया गया, उनकी उन बलियों में मैं भाग नहीं लूँगा। मैं उन मूर्तियों का नाम तक न लूँगा। {16:5} नहीं, बस मेरा भाग यहोवा में है। बस यहोवा से ही मेरा अंश और मेरा पात्र आता है। हे यहोवा, मुझे सहारा दे और मेरा भाग दे। {16:6} मेरा भाग अति अद्भुत है। मेरा क्षय अति सुन्दर है। {16:7} मैं यहोवा के गुण गात हूँ क्योंकि उसने मुझे ज्ञान दिया। मेरे अन्तर्मन से रात में शिक्षाएं निकल कर आती हैं। {16:8} मैं यहोवा को सदैव अपने सम्मुख रखता हूँ, और मैं उसका दक्षिण पक्ष कभी नहीं छोडूँगा। {16:9} इसी से मेरा मन और मेरी आत्मा अति आनन्दित होगी और मेरी देह तक सुरक्षित रहेगी। {16:10} क्योंकि, यहोवा, तू मेरा प्राण कभी भी मृत्यु के लोक में न तजेगा। तू कभी भी अपने भक्त लोगों का क्षय होता नहीं देखेगा। {16:11} तू मुझे जीवन की नेक राह दिखायेगा। हे यहोवा, तेरा साथ भर मुझे पूर्ण प्रसन्नता देगा। तेरे दाहिने ओर होना सदा सर्वदा को आन्नद देगा। {i17:1} दाऊद का प्रार्थना गीत। {17:1} हे यहोवा, मेरी प्रार्थना न्याय के निमित्त सुन। मैं तुझे ऊँचे स्वर से पुकार रहा हूँ। मैं अपनी बात ईमानदारी से कह रहा हूँ। सो कृपा करके मेरी प्रार्थना सुन। {17:2} यहोवा तू ही मेरा उचित न्याय करेगा। तू ही सत्य को देख सकता है। {17:3} मेरा मन परखने को तूने उसके बीच गहरा झाँक लिया है। तू मेरे संग रात भर रहा, तूने मुझे जाँचा, और तुझे मुझ में कोई खोट न मिला। मैंने कोई बुरी योजना नहीं रची थी। {17:4} तेरे आदेशों को पालने में मैंने कठिन यत्न किया जितना कि कोई मनुष्य कर सकता है। {17:5} मैं तेरी राहों पर चलता रहा हूँ। मेरे पाँव तेरे जीवन की रीति से नहीं डिगे। {17:6} हे परमेश्वर, मैंने हर किसी अवसर पर तुझको पुकारा है और तूने मुझे उत्तर दिया है। सो अब भी तू मेरी सुन। {17:7} हे परमेश्वर, तू अपने भक्तों की सहायता करता है। उनकी जो तेरे दाहिने रहते हैं। तू अपने एक भक्त की यह प्रार्थना सुन। {17:8} मेरी रक्षा तू निज आँख की पुतली समान कर। मुझको अपने पंखों की छाया तले तू छुपा ले। {17:9} हे यहोवा, मेरी रक्षा उन दुष्ट जनों से कर जो मुझे नष्ट करने का यत्न कर रहे हैं। वे मुझे घेरे हैं और मुझे हानि पहुँचाने को प्रयत्नशील हैं। {17:10} दुष्ट जन अभिमान के कारण परमेश्वर की बात पर कान नहीं लगाते हैं। ये अपनी ही ढींग हाँकते रहते हैं। {17:11} वे लोग मेरे पीछे पड़े हुए हैं, और मैं अब उनके बीच में घिर गया हूँ। वे मुझ पर वार करने को तैयार खड़े हैं। {17:12} वे दुष्ट जन ऐसे हैं जैसे कोई सिंह घात में अन्य पशु को मारने को बैठा हो। वे सिंह की तरह झपटने को छिपे रहते हैं। {17:13} हे यहोवा, उठ! शत्रु के पास जा, और उन्हें अस्त्र शस्त्र डालने को विवश कर। निज तलवार उठा और इन दुष्ट जनों से मेरी रक्षा कर। {17:14} हे यहोवा, जो व्यक्ति सजीव हैं उनकी धरती से दुष्टों को अपनी शक्ति से दूर कर। हे यहोवा, बहुतेरे तेरे पास शरण माँगने आते हैं। तू उनको बहुतायत से भोजन दे। उनकी संतानों को परिपूर्ण कर दे। उनके पास निज बच्चों को देने के लिये बहुतायत से धन हो। {17:15} मेरी विनय न्याय के लिये है। सो मैं यहोवा के मुख का दर्शन करुँगा। हे यहोवा, तेरा दर्शन करते ही, मैं पूरी तरह सन्तुष्ट हो जाऊँगा। {i18:1} यहोवा के दास दाऊद का एक पद: संगीत निर्देशक के लिये। दाऊद ने यह पद उस अवसर पर गाया था जब यहोवा ने शाऊल तथा अन्य शत्रुओं से उसकी रक्षा की थी। {18:1} उसने कहा, “यहोवा मेरी शक्ति है, मैं तुझ पर अपनी करुणा दिखाऊँगा! {18:2} यहोवा मेरी चट्टान, मेरा गढ़, मेरा शरणस्थल है।” मेरा परमेश्वर मेरी चट्टान है। मैं तेरी शरण मे आया हूँ। उसकी शक्ति मुझको बचाती है। यहोवा ऊँचे पहाड़ों पर मेरा शरणस्थल है। {18:3} यहोवा को जो स्तुति के योग्य है, मैं पुकारुँगा और मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊँगा। {18:4} मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का यत्न किया। मैं चारों ओर मृत्यु की रस्सियों से घिरा हूँ! मुझ को अधर्म की बाढ़ ने भयभीत कर दिया। {18:5} मेरे चारों ओर पाताल की रस्सियाँ थी। और मुझ पर मृत्यु के फँदे थे। {18:6} मैं घिरा हुआ था और यहोवा को सहायता के लिये पुकारा। मैंने अपने परमेश्वर को पुकारा। परमेश्वर पवित्र निज मन्दिर में विराजा। उसने मेरी पुकार सुनी और सहायता की। {18:7} तब पृथ्वी हिल गई और काँप उठी; और पहाड़ों की नींव कंपित हो कर हिल गई क्योंकि यहोवा अति क्रोधित हुआ था! {18:8} परमेश्वर के नथनों से धुँआ निकल पड़ा। परमेश्वर के मुख से ज्वालायें फूट निकली, और उससे चिंगारियाँ छिटकी। {18:9} यहोवा स्वर्ग को चीर कर नीचे उतरा! सघन काले मेघ उसके पाँव तले थे। {18:10} उसने उड़ते करुब स्वर्गदूतों पर सवारी की वायु पर सवार हो वह ऊँचे उड़ चला। {18:11} यहोवा ने स्वयं को अँधेरे में छिपा लिया, उसको अम्बर का चँदोबा घिरा था। वह गरजते बादलों के सघन घटा — टोप में छिपा हुआ था। {18:12} परमेश्वर का तेज बादल चीर कर निकला। बरसा और बिजलियाँ कौंधी। {18:13} यहोवा का उद्घोष नाद अम्बर में गूँजा! परम परमेश्वर ने निज वाणी को सुनने दिया! फिर ओले बरसे और बिजलियाँ कौंध उठी। {18:14} यहोवा ने बाण छोड़े और शत्रु बिखर गये। उसके अनेक तड़ित बज्रों ने उनको पराजित किया। {18:15} हे यहोवा, तूने गर्जना की और मुख से आँधी प्रवाहित की। जल पीछे हट कर दबा और समुद्र का जल अतल दिखने लगा, और धरती की नींव तक उधड़ी। {18:16} यहोवा ऊपर अम्बर से नीचे उतरा और मेरी रक्षा की। मुझको मेरे कष्टों से उबार लिया। {18:17} मेरे शत्रु मुझसे कहीं अधिक सशक्त थे। वे मुझसे कहीं अधिक बलशाली थे, और मुझसे बैर रखते थे। सो परमेश्वर ने मेरी रक्षा की। {18:18} जब मैं विपत्ति में था, मेरे शत्रुओं ने मुझ पर प्रहार किया किन्तु तब यहोवा ने मुझ को संभाला! {18:19} यहोवा को मुझसे प्रेम था, सो उसने मुझे बचाया और मुझे सुरक्षित ठौर पर ले गया। {18:20} मैं अबोध हूँ, सो यहोवा मुझे बचायेगा। मैंने कुछ बुरा नहीं किया। वह मेरे लिये उत्तम चीजें करेगा। {18:21} क्योंकि मैंने यहोवा की आज्ञा पालन किया! अपने परमेश्वर यहोवा के प्रति मैंने कोई भी बुरा काम नहीं किया। {18:22} मैं तो यहोवा के व्यवस्था विधानों को और आदेशों को हमेशा ध्यान में रखता हूँ! {18:23} स्वयं को मैं उसके सामने पवित्र रखता हूँ और अबोध बना रहता हूँ। {18:24} क्योंकि मैं अबोध हूँ! इसलिये मुझे मेरा पुरस्कार देगा! जैसा परमेश्वर देखता है कि मैंने कोई बुरा नहीं किया, अतःवह मेरे लिये उत्तम चीज़ें करेगा। {18:25} हे यहोवा, तू विश्वसनीय लोगों के साथ विश्वसनीय और खरे लोगों के साथ तू खरा है। {18:26} हे यहोवा शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता है, और टेढ़ों के साथ तू तिछर बनता है। किन्तु, तू नीच और कुटिल जनों से भी चतुर है। {18:27} हे यहोवा, तू नम्र जनों के लिये सहाय है, किन्तु जिनमें अहंकार भरा है उन मनुष्यों को तू बड़ा नहीं बनने देता। {18:28} हे यहोवा, तू मेरा जलता दीप है। हे मेरे परमेश्वर तू मेरे अधंकार को ज्योति में बदलता है! {18:29} हे यहोवा, तेरी सहायता से, मैं सैनिकों के साथ दौड़ सकता हूँ। तेरी ही सहायता से, मैं शत्रुओं के प्राचीर लाँघ सकता हूँ। {18:30} परमेश्वर के विधान पवित्र और उत्तम हैं और यहोवा के शब्द सत्यपूर्ण होते हैं। वह उसको बचाता है जो उसके भरोसे हैं। {18:31} यहोवा को छोड़ बस और कौन परमेश्वर है? मात्र हमारे परमेश्वर के और कौन चट्टान है? {18:32} मुझको परमेश्वर शक्ति देता है। मेरे जीवन को वह पवित्र बनाता है। {18:33} परमेश्वर मेरे चरणों को हिरण की सी तीव्र गति देता है। वह मुझे स्थिर बनाता और मुझे चट्टानी शिखरों से गिरने से बचाता है। {18:34} हे यहोवा, मुझको सिखा कि युद्ध मैं कैसे लडूँ? वह मेरी भुजाओं को शक्ति देता है जिससे मैं काँसे के धनुष की डोरी खींच सकूँ। {18:35} हे परमेश्वर, अपनी ढाल से मेरी रक्षा कर। तू मुझको अपनी दाहिनी भुजा से अपनी महान शक्ति प्रदान करके सहारा दे। {18:36} हे परमेश्वर, तू मेरे पाँवों को और टखनों को दृढ़ बना ताकि मैं तेजी से बिना लड़खड़ाहट के बढ़ चलूँ। {18:37} फिर अपने शत्रुओं का पीछा करुँ, और उन्हें पकड़ सकूँ। उनमें से एक को भी नहीं बच पाने दूँगा। {18:38} मैं अपने शत्रुओं को पराजित करुँगा। उनमें से एक भी फिर खड़ा नहीं. होगा। मेरे सभी शत्रु मेरे पाँवों पर गिरेंगे। {18:39} हे परमेश्वर, तूने मुझे युद्ध में शक्ति दी, और मेरे सब शत्रुओं को मेरे सामने झुका दिया। {18:40} तूने मेरे शत्रुओं की पीठ मेरी ओर फेर दी, ताकि मैं उनको काट डालूँ जो मुझ से द्वेष रखते हैं! {18:41} जब मेरे बैरियों ने सहायता को पुकारा, उन्हें सहायता देने आगे कोई नहीं आया। यहाँ तक कि उन्होंने यहोवा तक को पुकारा, किन्तु यहोवा से उनको उत्तर न मिला। {18:42} मैं अपने शत्रुओं को कूट कूट कर धूल में मिला दूँगा, जिसे पवन उड़ा देती है। मैंने उनको कुचल दिया और मिट्टी में मिला दिया। {18:43} मुझे उनसे बचा ले जो मुझसे युद्ध करते हैं। मुझे उन जातियों का मुखिया बना दे, जिनको मैं जानता तक नहीं हूँ ताकि वे मेरी सेवा करेंगे। {18:44} फिर वे लोग मेरी सुनेंगे और मेरे आदेशों को पालेंगे, अन्य राष्टों के जन मुझसे डरेंगे। {18:45} वे विदेशी लोग मेरे सामने झुकेंगे क्योंकि वे मुझसे भयभीत होंगे। वे भय से काँपते हुए अपने छिपे स्थानों से बाहर निकल आयेंगे। {18:46} यहोवा सजीव है! मैं अपनी चट्टान के यश गीत गाता हूँ। मेरा महान परमेश्वर मेरी रक्षा करता है। {18:47} धन्य है, मेरा पलटा लेने वाला परमेश्वर जिसने देश — देश के लोगों को मेरे बस में कर दिया है। {18:48} यहोवा, तूने मुझे शत्रुओं से छुड़ाया है। तूने मेरी सहायता की ताकि मैं उन लोगों को हरा सकूँ जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए। तूने मुझे कठोर व्यक्तियों से बचाया है। {18:49} हे यहोवा, इसी कारण मैं देशों के बीच तेरी स्तुति करता हूँ। इसी कारण मैं तेरे नाम का भजन गाता हूँ। {18:50} यहोवा अपने राजा की सहायता बहुत से युद्धों को जीतने में करता है! वह अपना सच्चा प्रेम, अपने चुने हुए राजा पर दिखाता है। वह दाऊद और उसके वंशजों के लिये सदा विश्वास योग्य रहेगा! {i19:1} संगीत निर्देशक को दाऊद का एक पद। {19:1} अम्बर परमेश्वर की महिमा बखानतें हैं, और आकाश परमेश्वर की उत्तम रचनाओं का प्रदर्शन करते हैं। {19:2} हर नया दिन उसकी नयी कथा कहता है, और हर रात परमेश्वर की नयी — नयी शक्तियों को प्रकट करता हैं। {19:3} न तो कोई बोली है, और न तो कोई भाषा, जहाँ उसका शब्द नहीं सुनाई पड़ता। {19:4} उसकी “वाणी” भूमण्डल में व्यापती है और उसके “शब्द” धरती के छोर तक पहुँचते हैं। उनमें उसने सूर्य के लिये एक घर सा तैयार किया है। {19:5} सूर्य प्रफुल्ल हुए दुल्हे सा अपने शयनकक्षा से निकलता है। सूर्य अपनी राह पर आकाश को पार करने निकल पड़ता है, जैसे कोई खिलाड़ी अपनी दौड़ पूरी करने को तत्पर हो। {19:6} अम्बर के एक छोर से सूर्य चल पड़ता है और उस पार पहुँचने को, वह सारी राह दौड़ता ही रहता है। ऐसी कोई वस्तु नहीं जो अपने को उसकी गर्मी से छुपा ले। यहोवा के उपदेश भी ऐसे ही होते है। {19:7} यहोवा की शिक्षायें सम्पूर्ण होती हैं, ये भक्त जन को शक्ति देती हैं। यहोवा की वाचा पर भरोसा किया जा सकता हैं। जिनके पास बुद्धि नहीं है यह उन्हैं सुबुद्धि देता है। {19:8} यहोवा के नियम न्यायपूर्ण होते हैं, वे लोगों को प्रसन्नता से भर देते हैं। यहोवा के आदेश उत्तम हैं, वे मनुष्यों को जीने की नयी राह दिखाते हैं। {19:9} यहोवा की आराधना प्रकाश जैसी होती है, यह तो सदा सर्वदा ज्योतिमय रहेगी। यहोवा के न्याय निष्पक्ष होते हैं, वे पूरी तरह न्यायपूर्ण होते हैं। {19:10} यहोवा के उपदेश उत्तम स्वर्ण और कुन्दन से भी बढ़ कर मनोहर है। वे उत्तम शहद से भी अधिक मधुर हैं, जो सीधे शहद के छते से टपक आता है। {19:11} हे यहोवा, तेरे उपदेश तेरे सेवक को आगाह करते है, और जो उनका पालन करते हैं उन्हें तो वरदान मिलते हैं। {19:12} हे यहोवा, अपने सभी दोषों को कोई नहीं देख पाता है। इसलिए तू मुझे उन पापों से बचा जो एकांत में छुप कर किये जाते हैं। {19:13} हे यहोवा, मुझे उन पापों को करने से बचा जिन्हें मैं करना चाहता हूँ। उन पापों को मुझ पर शासन न करने दे। यदि तू मुझे बचाये तो मैं पवित्र और अपने पापों से मुक्त हो सकता हूँ। {19:14} मुझको आशा है कि, मेरे वचन और चिंतन तुझको प्रसन्न करेंगे। हे यहोवा, तू मेरी चट्टान, और मेरा बचाने वाला है! {i20:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {20:1} तेरी पुकार का यहोवा उत्तर दे, और जब तू विपति में हो तो याकूब का परमेश्वर तेरे नाम को बढ़ायें। {20:2} परमेश्वर अपने पवित्रस्थान से तेरी सहायता करे। वह तुझको सिय्योन से सहारा देवे। {20:3} परमेश्वर तेरी सब भेंटों को याद रखे, और तेरे सब बलिदानों को स्वीकार करें। {20:4} परमेश्वर तुझे उन सभी वस्तुओं को देवे जिन्हें तू सचमुच चाहे। वह तेरी सभी योजनाएँ पूरी करें। {20:5} परमेश्वर जब तेरी सहायता करे हम अति प्रसन्न हों और हम परमेश्वर की बढ़ाई के गीत गायें। जो कुछ भी तुम माँगों यहोवा तुम्हें उसे दे। {20:6} मैं अब जानता हूँ कि यहोवा सहायता करता है अपने उस राजा की जिसको उसने चुना। परमेश्वर तो अपने पवित्र स्वर्ग में विराजा है और उसने अपने चुने हुए राजा को, उत्तर दिया उस राजा की रक्षा करने के लिये परमेश्वर अपनी महाशक्ति को प्रयोग में लाता है। {20:7} कुछ को भरोसा अपने रथों पर है, और कुछ को निज सैनिकों पर भरोसा है किन्तु हम तो अपने यहोवा परमेश्वर को स्मरण करते हैं। {20:8} किन्तु वे लोग तो पराजित और युद्ध में मारे गये किन्तु हम जीते और हम विजयी रहे। {20:9} ऐसा कैसा हुआ? क्योंकि यहोवा ने अपने चुने हुए राजा की रक्षा की उसने परमेश्वर को पुकारा था और परमेश्वर ने उसकी सुनी। {i21:1} संगीत निर्देशक को दाऊद का एक पद। {21:1} हे यहोवा, तेरी महिमा राजा को प्रसन्न करती है, जब तू उसे बचाता है। वह अति आनन्दित होता है। {21:2} तूने राजा को वे सब वस्तुएँ दी जो उसने चाहा, राजा ने जो भी पाने की विनती की हे यहोवा, तूने मन वांछित उसे दे दिया। {21:3} हे यहोवा, सचमुच तूने बहुत आशीष राजा को दी। उसके सिर पर तूने स्वर्ण मुकुट रख दिया। {21:4} उसने तुझ से जीवन की याचना की और तूने उसे यह दे दिया। परमेश्वर, तूने सदा सर्वदा के लिये राजा को अमर जीवन दिया। {21:5} तूने रक्षा की तो राजा को महा वैभव मिला। तूने उसे आदर और प्रशंसा दी। {21:6} हे परमेश्वर, सचमुच तूने राजा को सदा सर्वदा के लिये, आशिर्वाद दिये। जब राजा को तेरा दर्शन मिलता है, तो वह अति प्रसन्न होता है। {21:7} राजा को सचमुच यहोवा पर भरोसा है, सो परम परमेश्वर उसे निराश नहीं करेगा। {21:8} हे परमेश्वर! तू दिखा देगा अपने सभी शत्रुओं को कि तू सुदृढ़ शक्तिवान है। जो तुझ से घृणा करते हैं तेरी शक्ति उन्हें पराजित करेगी। {21:9} हे यहोवा, जब तू राजा के साथ होता है तो वह उस भभकते भाड़ सा बन जाता है, जो सब कुछ भस्म करता है। उसकी क्रोधाग्नि अपने सभी बैरियों को भस्म कर देती है। {21:10} परमेश्वर के बैरियों के वंश नष्ट हो जायेंगे, धरती के ऊपर से वह सब मिटेंगे। {21:11} ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि यहोवा, तेरे विरुद्ध उन लोगों ने षड़यन्त्र रचा था? उन्होंने बुरा करने को योजनाएँ रची थी, किन्तु वे उसमें सफल नहीं हुए। {21:12} किन्तु यहोवा तूने ऐसे लोगों को अपने अधीन किया, तूने उन्हें एक साथ रस्से से बाँध दिया, और रस्सियों का फँदा उनके गलों में डाला। तूने उन्हें उनके मुँह के बल दासों सा गिराया। {21:13} यहोवा के और उसकी शक्ति के गुण गाओ आओ हम गायें और उसके गीतों को बजायें जो उसकी गरिमा से जुड़े हुए हैं। {i22:1} प्रभात की हरिणी नामक राग पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक भजन। {22:1} हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर! तूने मुझे क्यों त्याग दिया है? मुझे बचाने के लिये तू क्यों बहुत दूर है? मेरी सहायता की पुकार को सुनने के लिये तू बहुत दूर है। {22:2} हे मेरे परमेश्वर, मैंने तुझे दिन में पुकारा किन्तु तूने उत्तर नहीं दिया, और मैं रात भर तुझे पुकाराता रहा। {22:3} हे परमेश्वर, तू पवित्र है। तू राजा के जैसे विराजमान है। इस्राएल की स्तुतियाँ तेरा सिंहासन हैं। {22:4} हमारे पूर्वजों ने तुझ पर विश्वस किया। हाँ! हे परमेश्वर, वे तेरे भरोसे थे! और तूने उनको बचाया। {22:5} हे परमेश्वर, हमारे पूर्वजों ने तुझे सहायता को पुकारा और वे अपने शत्रुओं से बच निकले। उन्होंने तुझ पर विश्वास किया और वे निराश नहीं हुए। {22:6} तो क्या मैं सचमुच ही कोई कीड़ा हूँ, जो लोग मुझसे लज्जित हुआ करते हैं और मुझसे घृणा करते हैं {22:7} जो भी मुझे देखता है मेरी हँसी उड़ाता है, वे अपना सिर हिलाते और अपने होठ बिचकाते हैं। {22:8} वे मुझसे कहते हैं कि, “अपनी रक्षा के लिये तू यहोवा को पुकार ही सकता है। वह तुझ को बचा लोगा। यदि तू उसको इतना भाता है तो निश्चय ही वह तुझ को बचा लोगा।” {22:9} हे परमेश्वर, सच तो यह है कि केवल तू ही है जिसके भरोसा मैं हूँ। तूने मुझे उस दिन से ही सम्भाला है, जब से मेरा जन्म हुआ। तूने मुझे आश्वस्त किया और चैन दिया, जब मैं अभी अपनी माता का दूध पीता था। {22:10} ठीक उसी दिन से जब से मैं जन्मा हूँ, तू मेरा परमेश्वर रहा है। जैसे ही मैं अपनी माता की कोख से बाहर आया था, मुझे तेरी देखभाल में रख दिया गया था। {22:11} सो हे, परमेश्वर! मुझको मत बिसरा, संकट निकट है, और कोई भी व्यक्ति मेरी सहायता को नहीं है। {22:12} मैं उन लोगों से घिरा हूँ, जो शक्तिशाली साँड़ों जैसे मुझे घेरे हुए हैं। {22:13} वे उन सिंहो जैसे हैं, जो किसी जन्तु को चीर रहे हों और दहाड़ते हो और उनके मुख विकराल खुले हुए हो। {22:14} मेरी शक्ति धरती पर बिखरे जल सी लुप्त हो गई। मेरी हड्डियाँ अलग हो गई हैं। मेरा साहस खत्म हो चुका है। {22:15} मेरा मुख सूखे ठीकर सा है। मेरी जीभ मेरे अपने ही तालू से चिपक रही है। तूने मुझे मृत्यु की धूल में मिला दिया है। {22:16} मैं चारों तरफ कुतों से घिर हूँ, दुष्ट जनों के उस समूह ने मुझे फँसाया है। उन्होंने मेरे मेरे हाथों और पैरों को सिंह के समान भेदा है। {22:17} मुझको अपनी हड्डियाँ दिखाई देती हैं। ये लोग मुझे घूर रहे हैं। ये मुझको हानि पहुँचाने को ताकते रहते हैं। {22:18} वे मेरे कपड़े आपस में बाँट रहे हैं। मेरे वस्त्रों के लिये वे पासे फेंक रहे हैं। {22:19} हे यहोवा, तू मुझको मत त्याग। तू मेरा बल हैं, मेरी सहायता कर। अब तू देर मत लगा। {22:20} हे यहोवा, मेरे प्राण तलवार से बचा ले। उन कुत्तों से तू मेरे मूल्यवान जीवन की रक्षा कर। {22:21} मुझे सिंह के मुँह से बचा ले और साँड़ के सींगो से मेरी रक्षा कर। {22:22} हे यहोवा, मैं अपने भाईयों में तेरा प्रचार करुँगा। मैं तेरी प्रशंसा तेरे भक्तों की सभा बीच करुँगा। {22:23} ओ यहोवा के उपासकों, यहोवा की प्रशंसा करो। इस्राएल के वंशजों यहोवा का आदर करो। ओ इस्राएल के सभी लोगों, यहोवा का भय मानों और आदर करो। {22:24} क्योंकि यहोवा ऐसे मनुष्यों की सहायता करता है जो विपति में होते हैं। यहोवा उन से घृणा नहीं करता है। यदि लोग सहायता के लिये यहोवा को पुकारे तो वह स्वयं को उनसे न छिपायेगा। {22:25} हे यहोवा, मेरा स्तुति गान महासभा के बीच तुझसे ही आता है। उन सबके सामने जो तेरी उपासना करते हैं। मैं उन बातों को पूरा करुँगा जिनको करने की मैंने प्रतिज्ञा की है। {22:26} दीन जन भोजन पायेंगे और सन्तुष्ट होंगे। तुम लोग जो उसे खोजते हुए आते हो उसकी स्तुति करो। मन तुम्हारे सदा सदा को आनन्द से भर जायें। {22:27} काश सभी दूर देशों के लोग यहोवा को याद करें और उसकी ओर लौट आयें। काश विदेशों के सब लोग यहोवा की आराधना करें। {22:28} क्योंकि यहोवा राजा है। वह प्रत्येक राष्ट्र पर शासन करता है। {22:29} लोग असहाय घास के तिनकों की भाँति धरती पर बिछे हुए हैं। हम सभी अपना भोजन खायेंगे और हम सभी कब्रों में लेट जायेंगे। हम स्वयं को मरने से नहीं रोक सकते हैं। हम सभी भूमि में गाड़ दिये जायेंगे। हममें से हर किसी को यहोवा के सामने दण्डवत करना चाहिए। {22:30} और भविष्य में हमारे वंशज यहोवा की सेवा करेंगे। लोग सदा सर्वदा उस के बारे में बखानेंगे। {22:31} वे लोग आयेंगे और परमेश्वर की भलाई का प्रचार करेंगे जिनका अभी जन्म ही नहीं हुआ। {i23:1} दाऊद का एक पद। {23:1} यहोवा मेरा गडेरिया है। जो कुछ भी मुझको अपेक्षित होगा, सदा मेरे पास रहेगा। {23:2} हरी भरी चरागाहों में मुझे सुख से वह रखता है। वह मुझको शांत झीलों पर ले जाता है। {23:3} वह अपने नाम के निमित्त मेरी आत्मा को नयी शक्ति देता है। वह मुझको अगुवाई करता है कि वह सचमुच उत्तम है। {23:4} मैं मृत्यु की अंधेरी घाटी से गुजरते भी नहीं डरुँगा, क्योंकि यहोवा तू मेरे साथ है। तेरी छड़ी, तेरा दण्ड मुझको सुख देते हैं। {23:5} हे यहोवा, तूने मेरे शत्रुओं के समक्ष मेरी खाने की मेज सजाई है। तूने मेरे शीश पर तेल उँडेला है। मेरा कटोरा भरा है और छलक रहा है। {23:6} नेकी और करुणा मेरे शेष जीवन तक मेरे साथ रहेंगी। मैं यहोवा के मन्दिर में बहुत बहुत समय तक बैठा रहूँगा। {i24:1} दाऊद का एक पद। {24:1} यह धरती और उस पर की सब वस्तुएँ यहोवा की है। यह जगत और इसके सब व्यक्ति उसी के हैं। {24:2} यहोवा ने इस धरती को जल पर रचा है। उसने इसको जल — धारों पर बनाया। {24:3} यहोवा के पर्वत पर कौन जा सकता है? कौन यहोवा के पवित्र मन्दिर में खड़ा हो सकता है और आराधना कर सकता है? {24:4} ऐसा जन जिसने पाप नहीं किया है, ऐसा जन जिसका मन पवित्र है, ऐसा जन जिसने मेरे नाम का प्रयोग झूठ को सत्य प्रतीत करने में न किया हो, और ऐसा जन जिसने न झूठ बोला और न ही झूठे वचन दिए हैं। बस ऐसे व्यक्ति ही वहाँ आराधना कर सकते हैं। {24:5} सज्जन तो चाहते हैं यहोवा सब का भला करे। वे सज्जन परमेश्वर से जो उनका उद्धारक है, नेक चाहते हैं। {24:6} वे सज्जन परमेश्वर के अनुसरण का जतन करते हैं। वे याकूब के परमेश्वर के पास सहायता पाने जाते हैं। {24:7} फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो! सनातन द्वारों, खुल जाओ! प्रतापी राजा भीतर आएगा। {24:8} यह प्रतापी राजा कौन है? यहोवा ही वह राजा है, वही सबल सैनिक है, यहोवा ही वह राजा है, वही युद्धनायक है। {24:9} फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो! सनातन द्वारों, खुल जाओ! प्रतापी राजा भीतर आएगा। {24:10} वह प्रतापी राजा कौन है? यहोवा सर्वशक्तिमान ही वह राजा है। वह प्रतापी राजा वही है। {i25:1} दाऊद को समर्पित। {25:1} हे यहोवा, मैं स्वयं को तुझे समर्पित करता हूँ। {25:2} मेरे परमेश्वर, मेरा विश्वस तुझ पर है। मैं तुझसे निराश नहीं होऊँगा। मेरे शत्रु मेरी हँसी नहीं उड़ा पायेंगे। {25:3} ऐसा व्यक्ति, जो तुझमें विश्वास रखता है, वह निराश नहीं होगा। किन्तु विश्वासघाती निराश होंगे और, वे कभी भी कुछ नहीं प्राप्त करेंगे। {25:4} हे यहोवा, मेरी सहायता कर कि मैं तेरी राहों को सीखूँ। तू अपने मार्गों की मुझको शिक्षा दे। {25:5} अपनी सच्ची राह तू मुझको दिखा और उसका उपदेश मुझे दे। तू मेरा परमेश्वर मेरा उद्धारकर्ता है। मुझको हर दिन तेरा भरोसा है। {25:6} हे यहोवा, मुझ पर अपनी दया रख और उस ममता को मुझ पर प्रकट कर, जिसे तू हरदम रखता है। {25:7} अपने युवाकाल में जो पाप और कुकर्म मैंने किए, उनको याद मत रख। हे यहोवा, अपने निज नाम निमित, मुझको अपनी करुणा से याद कर। {25:8} यहोवा सचमुच उत्तम है, वह पापियों को जीवन का नेक राह सिखाता है। {25:9} वह दीनजनों को अपनी राहों की शिक्षा देता है। बिना पक्षपात के वह उनको मार्ग दर्शाता है। {25:10} यहोवा की राहें उन लोगों के लिए क्षमापूर्ण और सत्य है, जो उसके वाचा और प्रतिज्ञाओं का अनुसरण करते हैं। {25:11} हे यहोवा, मैंने बहुतेरे पाप किये हैं, किन्तु तूने अपनी दया प्रकट करने को, मेरे हर पाप को क्षमा कर दिया। {25:12} यदि कोई व्यक्ति यहोवा का अनुसरण करना चाहे, तो उसे परमेश्वर जीवन का उत्तम राह दिखाएगा। {25:13} वह व्यक्ति उत्तम वस्तुओं का सुख भोगेगा, और उस व्यक्ति की सन्ताने उस धरती की जिसे परमेश्वर ने वचन दिया था स्थायी रहेंगे। {25:14} यहोवा अपने भक्तों पर अपने भेद खोलता है। वह अपने निज भक्तों को अपने वाचा की शिक्षा देता है। {25:15} मेरी आँखें सहायता पाने को यहोवा पर सदा टिकी रहती हैं। मुझे मेरी विपति से वह सदा छुड़ाता है। {25:16} हे यहोवा, मैं पीड़ित और अकेला हूँ। मेरी ओर मुड़ और मुझ पर दया दिखा। {25:17} मेरी विपतियों से मुझको मुक्त कर। मेरी समस्या सुलझाने की सहायता कर। {25:18} हे योहवा, मुझे परख और मेरी विपत्तियों पर दृष्टि डाल। मुझको जो पाप मैंने किए हैं, उन सभी के लिए क्षमा कर। {25:19} जो भी मेरे शत्रु हैं, सभी को देख ले। मेरे शत्रु मुझसे बैर रखते हैं, और मुझ को दु: ख पहुँचाना चाहते हैं। {25:20} हे परमेश्वर, मेरी रक्षा कर और मुझको बचा ले। मैं तेरा भरोसा रखता हूँ। सो मुझे निराश मत कर। {25:21} हे परमेश्वर, तू सचमुच उत्तम है। मुझको तेरा भरोसा है, सो मेरी रक्षा कर। {25:22} हे परमेश्वर, इस्राएल के जनों की उनके सभी शत्रुओं से रक्षा कर। {i26:1} दाऊद को समर्पित। {26:1} हे यहोवा, मेरा न्याय कर, प्रमाणित कर कि मैंने पवित्र जीवन बिताया है। मैंने यहोवा पर कभी विश्वस करना नहीं छोड़ा। {26:2} हे यहोवा, मुझे परख और मेरी जाँच कर, मेरे हृदय में और बुद्धि को निकटता से देख। {26:3} मैं तेरे प्रेम को सदा ही देखता हूँ, मैं तेरे सत्य के सहारे जिया करता हूँ। {26:4} मैं उन व्यर्थ लोगो में से नहीं हूँ। {26:5} उन पापी टोलियों से मुझको घृणा है, मैं उन धूर्तो के टोलों में सम्मिलित नहीं होता हूँ। {26:6} हे यहोवा, मैं हाथ धोकर तेरी वेदी पर आता हूँ। {26:7} हे यहोवा, मैं तेरे प्रशंसा गीत गाता हूँ, और जो आश्चर्य कर्म तूने किये हैं, उनके विषय में मैं गीत गाता हूँ। {26:8} हे यहोवा, मुझको तेरा मन्दिर प्रिय है। मैं तेरे पवित्र तम्बू से प्रेम करता हूँ। {26:9} हे यहोवा, तू मुझे उन पापियों के दल में मत मिला, जब तू उन हत्यारों का प्राण लेगा तब मुझे मत मार। {26:10} वे लोग सम्भव है, छलने लग जाये। सम्भव है, वे लोग बुरे काम करने को रिश्वत ले लें। {26:11} लेकिन मैं निश्चल हूँ, सो हे परमेश्वर, मुझ पर दयालु हो और मेरी रक्षा कर। {26:12} मैं नेक जीवन जीता रहा हूँ। मैं तेरे प्रशंसा गीत, हे यहोवा, जब भी तेरी भक्त मण्डली साथ मिली, गाता रहा हूँ। {i27:1} दाऊद को समर्पित। {27:1} हे यहोवा, तू मेरी ज्योति और मेरा उद्धारकर्ता है। मुझे तो किसी से भी नहीं डरना चाहिए! यहोवा मेरे जीवन के लिए सुरक्षित स्थान है। सो मैं किसी भी व्यक्ति से नहीं डरुँगा। {27:2} सम्भव है, दुष्ट जन मुझ पर चढ़ाई करें। सम्भव है, वे मेरे शरीर को नष्ट करने का यत्न करे। सम्भव है मेरे शत्रु मुझे नष्ट करने को मुझ पर आक्रमण का यत्न करें। {27:3} पर चाहे पूरी सेना मुझको घेर ले, मैं नहीं डरुँगा। चाहे युद्धक्षेत्र में मुझ पर लोग प्रहार करे, मैं नहीं डरुँगा। क्योंकि मैं यहोवा पर भरोसा करता हूँ। {27:4} मैं यहोवा से केवल एक वर माँगना चाहता हूँ, “मैं अपने जीवन भर यहोवा के मन्दिर में बैठा रहूँ, ताकि मैं यहोवा की सुन्दरता को देखूँ, और उसके मन्दिर में ध्यान करुँ।” {27:5} जब कभी कोई विपत्ति मुझे घेरेगी, यहोवा मेरी रक्षा करेगा। वह मुझे अपने तम्बू मैं छिपा लेगा। वह मुझे अपने सुरक्षित स्थान पर ऊपर उठा लेगा। {27:6} मुझे मेरे शत्रुओं ने घेर रखा है। किन्तु अब उन्हें पराजित करने में यहोवा मेरा सहायक होगा। मैं उसके तम्बू में फिर भेंट चढ़ाऊँगा। जय जयकार करके बलियाँ अर्पित करुँगा। मैं यहोवा की अभिवंदना में गीतों को गाऊँगा और बजाऊँगा। {27:7} हे यहोवा, मेरी पुकार सुन, मुझको उत्तर दे। मुझ पर दयालु रह। {27:8} हे योहवा, मैं चाहता हूँ अपने हृदय से तुझसे बात करुँ। हे यहोवा, मैं तुझसे बात करने तेरे सामने आया हूँ। {27:9} हे यहोवा, अपना मुख अपने सेवक से मत मोड़। मेरी सहायता कर! मुझे तू मत ठुकरा! मेरा त्याग मत कर! मेरे परमेश्वर, तू मेरा उद्धारकर्ता है। {27:10} मेरी माता और मेरे पिता ने मुझको त्याग दिया, पर यहोवा ने मुझे स्वीकारा और अपना बना लिया। {27:11} हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण, मुझे अपना मार्ग सिखा। मुझे अच्छे कामों की शिक्षा दे। {27:12} मुझ पर मेरे शत्रुओं ने आक्रमण किया है। उन्होंने मेरे लिए झूठ बोले हैं। वे मुझे हानि पहुँचाने के लिए झूठ बोले। {27:13} मुझे भरोसा है कि मरने से पहले मैं सचमुच यहोवा की धार्मिकता देखूँगा। {27:14} यहोवा से सहायता की बाट जोहते रहो! साहसी और सुदृढ़ बने रहो और यहोवा की सहायता की प्रतीक्षा करते रहो। {28:1} हे यहोवा, तू मेरी चट्टान है, मैं तुझको सहायता पाने को पुकार रहा हूँ। मेरी प्रार्थनाओं से अपने कान मत मूँद, यदि तू मेरी सहायता की पुकार का उत्तर नहीं देगा, तो लोग मुझे कब्र में मरा हुआ जैसा समझेंगे। {28:2} हे यहोवा, तेरे पवित्र तम्बू की ओर मैं अपने हाथ उठाकर प्रार्थना करता हूँ। जब मैं तुझे पुकारुँ, तू मेरी सुन और तू मुझ पर अपनी करुणा दिखा। {28:3} हे यहोवा, मुझे उन बुरे व्याक्तियों की तरह मत सोच जो बुरे काम करते हैं। जो अपने पड़ोसियों से “सलाम” (शांति) करते हैं, किन्तु अपने हृदय में अपने पड़ोसियों के बारे में कुचक्र सोचते हैं। {28:4} हे यहोवा, वे व्यक्ति अन्य लोगों का बुरा करते हैं। सो तू उनके साथ बुरी घटनाएँ घटा। उन दुर्जनों को तू वैसे दण्ड दे जैसे उन्हें देना चाहिए। {28:5} दुर्जन उन उत्तम बातों को जो यहोवा करता नहीं समझते। वे परमेश्वर के उत्तम कर्मो को नहीं देखते। वे उसकी भलाई को नहीं समझते। वे तो केवल किसी का नाश करने का यत्न करते हैं। {28:6} यहोवा की स्तुति करो! उसने मुझ पर करुणा करने की विनती सुनी। {28:7} यहोवा मेरी शक्ति है, वह मेरी ढाल है। मुझे उसका भरोसा था। उसने मेरी सहायता की। मैं अति प्रसन्न हूँ, और उसके प्रशंसा के गीत गाता हूँ। {28:8} यहोवा अपने चुने राजा की रक्षा करता है। वह उसे हर पल बचाता है। यहोवा ही उसका बल है। {28:9} हे परमेश्वर, अपने लोगों की रक्षा कर। जो तेरे हैं उनको आशीष दे। उनको मार्ग दिखा और सदा सर्वदा उनका उत्थान कर। {i29:1} दाऊद का एक गीत। {29:1} परमेश्वर के पुत्रों, यहोवा की स्तुति करो! उसकी महिमा और शक्ति के प्रशंसा गीत गाओ। {29:2} यहोवा की प्रशंसा करो और उसके नाम को आदर प्रकट करो। विशेष वस्त्र पहनकर उसकी आराधना करो। {29:3} समुद्र के ऊपर यहोवा की वाणी निज गरजती है। परमेश्वर की वाणी महासागर के ऊपर मेघ के गरजन की तरह गरजता है। {29:4} यहोवा की वाणी उसकी शक्ति को दिखाती है। उसकी ध्वनि उसके महिमा को प्रकट करती है। {29:5} यहोवा की वाणी देवदार वृक्षों को तोड़ कर चकनाचूर कर देता है। यहोवा लबानोन के विशाल देवदार वृक्षों को तोड़ देता है। {29:6} यहोवा लबानोन के पहाड़ों को कँपा देता है। वे नाचते बछड़े की तरह दिखने लगता है। हेर्मोन का पहाड़ काँप उठता है और उछलती जवान बकरी की तरह दिखता है। {29:7} यहोवा की वाणी बिजली की कौधो से टकराती है। {29:8} यहोवा की वाणी मरुस्थलों को कँपा देती है। यहोवा के स्वर से कादेश का मरुस्थल काँप उठता है। {29:9} यहोवा की वाणी से हरिण भयभीत होते हैं। यहोवा दुर्गम वनों को नष्ट कर देता है। किन्तु उसके मन्दिर में लोग उसकी प्रशंसा के गीत गाते हैं। {29:10} जलप्रलय के समय यहोवा राजा था। वह सदा के लिये राजा रहेगा। {29:11} यहोवा अपने भक्तों की रक्षा सदा करे, और अपने जनों को शांति का आशीष दे। {i30:1} मन्दिर के समर्पण के लिए दाऊद का एक पद। {30:1} हे यहोवा, तूने मेरी विपत्तियों से मेरा उद्धार किया है। तूने मेरे शत्रुओं को मुझको हराने और मेरी हँसी उड़ाने नहीं दी। सो मैं तेरे प्रति आदर प्रकट करुँगा। {30:2} हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैंने तुझसे प्रार्थना की। तूने मुझको चँगा कर दिया। {30:3} कब्र से तूने मेरा उद्धार किया, और मुझे जीने दिया। मुझे मुर्दों के साथ मुर्दों के गर्त में पड़े हुए नहीं रहना पड़ा। {30:4} परमेश्वर के भक्तों, यहोवा की स्तुति करो! उसके शुभ नाम की प्रशंसा करो। {30:5} यहोवा क्रोधित हुआ, सो निर्णय हुआ “मृत्यु।” किन्तु उसने अपना प्रेम प्रकट किया और मुझे “जीवन” दिया। मैं रात को रोते बिलखाते सोया। अगली सुबह मैं गाता हुआ प्रसन्न था। {30:6} मैं अब यह कह सकता हूँ, और मैं जानता हूँ यह निश्चय सत्य है, “मैं कभी नहीं हारुँगा!” {30:7} हे यहोवा, तू मुझ पर दयालु हुआ और मुझे फिर अपने पवित्र पर्वत पर खड़े होने दिया। तूने थोड़े समय के लिए अपना मुख मुझसे फेरा और मैं बहुत घबरा गया। {30:8} हे परमेश्वर, मैं तेरी ओर लौटा और विनती की। मैंने मुझ पर दया दिखाने की विनती की। {30:9} मैंने कहा, “परमेश्वर क्या यह अच्छा है कि मैं मर जाऊँ और कब्र के भीतर नीचे चला जाऊँ मरे हुए जन तो मिट्टी में लेटे रहते हैं, वे तेरे नेक की स्तुति जो सदा सदा बनी रहती है नहीं करते। {30:10} हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन और मुझ पर करुणा कर! हे यहोवा, मेरी सहायता कर!” {30:11} मैंने प्रार्थना की और तूने सहायता की! तूने मेरे रोने को नृत्य में बदल दिया। मेरे शोक वस्त्र को तूने उतार फेंका, और मुझे आनन्द में सराबोर कर दिया। {30:12} हे यहोवा, मैं तेरा सदा यशगान करुँगा। मैं ऐसा करुँगा जिससे कभी नीरवता न व्यापे। तेरी प्रशंसा सदा कोई गाता रहेगा। {i31:1} संगीत निर्देशक को दाऊद का एक पद। {31:1} हे यहोवा, मैं तेरे भरोसे हूँ, मुझे निराश मत कर। मुझ पर कृपालु हो और मेरी रक्षा कर। {31:2} हे यहोवा, मेरी सुन, और तू शीघ्र आकर मुझको बचा ले। मेरी चट्टान बन जा, मेरा सुरक्षा बन। मेरा गढ़ बन जा, मेरी रक्षा कर! {31:3} हे परमेश्वर, तू मेरी चट्टान है, सो अपने निज नाम हेतु मुझको राह दिखा और मेरी अगुवाई कर। {31:4} मेरे लिए मेरे शत्रुओं ने जाल फैलाया है। उनके फँदे से तू मुझको बचा ले, क्योंकि तू मेरा सुरक्षास्थल है। {31:5} हे परमेश्वर यहोवा, मैं तो तुझ पर भरोसा कर सकता हूँ। मैं मेरा जीवन तेरे हाथ में सौपता हूँ। मेरी रक्षा कर! {31:6} जो मिथ्या देवों को पूजते रहते हैं, उन लोगों से मुझे घृणा है। मैं तो बस यहोवा में विश्वास रखता हूँ। {31:7} हे यहोवा, तेरी करुणा मुझको अति आनन्दित करती है। तूने मेरे दु: खों को देख लिया और तू मेरे पीड़ाओं के विषय में जानता है। {31:8} तू मेरे शत्रुओं को मुझ पर भारी पड़ने नहीं देगा। तू मुझे उनके फँदों से छुडाएगा। {31:9} हे यहोवा, मुझ पर अनेक संकट हैं। सो मुझ पर कृपा कर। मैं इतना व्याकुल हूँ कि मेरी आँखें दु: ख रही हैं। मेरे गला और पेट पीड़ित हो रहे हैं। {31:10} मेरा जीवन का अंत दु: ख में हो रहा है। मेरे वर्ष आहों में बीतते जाते हैं। मेरी वेदनाएँ मेरी शक्ति को निचोड़ रही हैं। मेरा बल मेरा साथ छोड़ता जा रहा है। {31:11} मेरे शत्रु मुझसे घृणा रखते हैं। मेरे पड़ोसी मेरे बैरी बने हैं। मेरे सभी सम्बन्धी मुझे राह में देख कर मुझसे डर जाते हैं और मुझसे वे सब कतराते हैं। {31:12} मुझको लोग पूरी तरह से भूल चुके हैं। मैं तो किसी खोये औजार सा हो गया हूँ। {31:13} मैं उन भयंकर बातों को सुनता हूँ जो लोग मेरे विषय में करते हैं। वे सभी लोग मेरे विरुद्ध हो गए हैं। वे मुझे मार डालने की योजनाएँ रचते हैं। {31:14} हे यहोवा, मेरा भरोसा तुझ पर है। तू मेरा परमेश्वर है। {31:15} मेरा जीवन तेरे हाथों में है। मेरे शत्रुओं से मुझको बचा ले। उन लोगों से मेरी रक्षा कर, जो मेरे पीछे पड़े हैं। {31:16} कृपा करके अपने दास को अपना ले। मुझ पर दया कर और मेरी रक्षा कर! {31:17} हे यहोवा, मैंने तेरी विनती की। इसलिए मैं निराश नहीं होऊँगा। बुरे मनुष्य तो निराश हो जाएँगे। और वे कब्र में नीरव चले जाएँगे। {31:18} दुर्जन डींग हाँकते हैं और सज्जनों के विषय में झूठ बोलते हैं। वे दुर्जन बहुत ही अभिमानी होते हैं। किन्तु उनके होंठ जो झूठ बोलते रहते हैं, शब्द हीन होंगे। {31:19} हे परमेश्वर, तूने अपने भक्तों के लिए बहुत सी अदूभुत वस्तुएँ छिपा कर रखी हैं। तू सबके सामने ऐसे मनुष्यों के लिए जो तेरे विश्वासी हैं, भले काम करता है। {31:20} दुर्जन सज्जनों को हानि पहुँचाने के लिए जुट जाते हैं। वे दुर्जन लड़ाई भड़काने का जतन करते हैं। किन्तु तू सज्जनों को उनसे छिपा लेता है, और उन्हें बचा लेता है। तू सज्जनों की रक्षा अपनी शरण में करता है। {31:21} यहोवा कि स्तुति करो! जब नगर को शत्रुओं ने घेर रखा था, तब उसने अपना सच्चा प्रेम अद्भुत रीति से दिखाया। {31:22} मैं भयभीत था, और मैंने कहा था, “मैं तो ऐसे स्थान पर हूँ जहाँ मुझे परमेश्वर नहीं देख सकता है।” किन्तु हे परमेश्वर, मैंने तुझसे विनती की और तूने मेरी सहायता की पुकार सुन ली। {31:23} परमेश्वर के भक्तों, तुम को यहोवा से प्रेम करना चाहिए! यहोवा उन लोगों को जो उसके प्रति सच्चे हैं, रक्षा करता है। किन्तु यहोवा उनको जो अपनी ताकत की ढोल पीटते है। उनको वह वैसा दण्ड देता है, जैसा दण्ड उनको मिलना चाहिए। {31:24} अरे ओ मनुष्यों जो यहोवा की सहायता की प्रतीक्षा करते हो, सुदृढ़ और साहसी बनो! {i32:1} दाऊद का एक गीत। {32:1} धन्य है वह जन जिसके पाप क्षमा हुए। धन्य है वह जन जिसके पाप धुल गए। {32:2} धन्य है वह जन जिसे यहोवा दोषी न कहे, धन्य है वह जन जो अपने गुप्त पापों को छिपाने का जतन न करे। {32:3} हे परमेश्वर, मैंने तुझसे बार बार विनती की, किन्तु अपने छिपे पाप तुझको नहीं बताए। जितनी बार मैंने तेरी विनती की, मैं तो और अधिक दुर्बल होता चला गया। {32:4} हे परमेश्वर, तूने मेरा जीवन दिन रात कठिन से कठिनतर बना दिया। मैं उस धरती सा सूख गया हूँ जो ग्रीष्म ताप से सूख गई है। {32:5} किन्तु फिर मैंने यहोवा के समक्ष अपने सभी पापों को मानने का निश्चय कर लिया है। हे यहोवा, मैंने तुझे अपने पाप बता दिये। मैंने अपना कोई अपराध तुझसे नहीं छुपाया। और तूने मुझे मेरे पापों के लिए क्षमा कर दिया! {32:6} इसलिए, परमेश्वर, तेरे भक्तों को तेरी विनती करनी चाहिए। वहाँ तक कि जब विपत्ति जल प्रलय सी उमड़े तब भी तेरे भक्तों को तेरी विनती करनीचाहिए। {32:7} हे परमेश्वर, तू मेरा रक्षास्थल है। तू मुझको मेरी विपत्तियों से उबारता है। तू मुझे अपनी ओट में लेकर विपत्तियों से बचाता है। सो इसलिए मैं, जैसे तूने रक्षा की है, उन्हीं बातों के गीत गाया करता हूँ। {32:8} यहोवा कहता है, “मैं तुझे जैसे चलना चाहिए सिखाऊँगा और तुझे वह राह दिखाऊँगा। मैं तेरी रक्षा करुँगा और मैं तेरा अगुवा बनूँगा। {32:9} सो तू घोड़े या गधे सा बुद्धिहीन मत बन। उन पशुओं को तो मुखरी और लगाम से चलाया जाता है। यदि तू उनको लगाम या रास नहीं लगाएगा, तो वे पशु निकट नहीं आयेंगे।” {32:10} दुर्जनों को बहुत सी पीड़ाएँ घेरेंगी। किन्तु उन लोगों को जिन्हें यहोवा पर भरोसा है, यहोवा का सच्चा प्रेम ढक लेगा। {32:11} सज्जन तो यहोवा में सदा मगन और आनन्दित रहते हैं। अरे ओ लोगों, तुम सब पवित्र मन के साथ आनन्द मनाओ। {33:1} हे सज्जन लोगों, यहोवा में आनन्द मनाओ! सज्जनो सत पुरुषों, उसकी स्तुति करो! {33:2} वीणा बजाओ और उसकी स्तुति करो! यहोवा के लिए दस तार वाले सांरगी बजाओ। {33:3} अब उसके लिये नया गीत गाओ। खुशी की धुन सुन्दरता से बजाओ! {33:4} परमेश्वर का वचन सत्य है। जो भी वह करता है उसका तुम भरोसा कर सकते हो। {33:5} नेकी और निष्पक्षता परमेश्वर को भाती है। यहोवा ने अपने निज करुणा से इस धरती को भर दिया है। {33:6} यहोवा ने आदेश दिया और सृष्टि तुरंत अस्तित्व में आई। परमेश्वर के श्वास ने धरती पर हर वस्तु रची। {33:7} परमेश्वर ने सागर में एक ही स्थान पर जल समेटा। वह सागर को अपने स्थान पर रखता है। {33:8} धरती के हर मनुष्य को यहोवा का आदर करना और डरना चाहिए। इस विश्व में जो भी मनुष्य बसे हैं, उनको चाहिए कि वे उससे डरें। {33:9} क्योंकि परमेश्वर को केवल बात भर कहनी है, और वह बात तुरंत घट जाती है। यदि वह किसी को रुकने का आदेश दे, तो वह तुरंत थम दाती है। {33:10} परमेश्वर चाहे तो सभी सुझाव व्यर्थ करे। वह किसी भी जन के सब कुचक्रों को व्यर्थ कर सकता है। {33:11} किन्तु यहोवा के उपदेश सदा ही खरे होते है। उसकी योजनाएँ पीढी पर पीढी खरी होती हैं। {33:12} धन्य हैं वे मनुष्य जिनका परमेश्वर यहोवा है। परमेश्वर ने उन्हें अपने ही मनुष्य होने को चुना है। {33:13} यहोवा स्वर्ग से नीचे देखता रहता है। वह सभी लोगों को देखता रहता है। {33:14} वह ऊपर ऊँचे पर संस्थापित आसन से धरती पर रहने वाले सब मनुष्यों को देखता रहता है। {33:15} परमेश्वर ने हर किसी का मन रचा है। सो कोई क्या सोच रहा है वह समझता है। {33:16} राजा की रक्षा उसके महाबल से नहीं होती है, और कोई सैनिक अपने निज शक्ति से सुरक्षित नहीं रहता। {33:17} युद्ध में सचमुच अश्वबल विजय नहीं देता। सचमुच तुम उनकी शक्ति से बच नहीं सकते। {33:18} जो जन यहोवा का अनुसरण करते हैं, उन्हें यहोवा देखता है और रखवाली करता है। जो मनुष्य उसकी आराधना करते हैं, उनको उसका महान प्रेम बचाता है। {33:19} उन लोगों को मृत्यु से बचाता है। वे जब भूखे होते तब वह उन्हें शक्ति देता है। {33:20} इसलिए हम यहोवा की बाट जोहेंगे। वह हमारी सहायता और हमारी ढाल है। {33:21} परमेश्वर मुझको आनन्दित करता है। मुझे सचमुच उसके पवित्र नाम पर भरोसा है। {33:22} हे यहोवा, हम सचमुच तेरी आराधना करते हैं! सो तू हम पर अपना महान प्रेम दिखा। {i34:1} जब दाऊद ने अबीमेलेक के सामने पागलपन का आचरण किया। जिससे अबीमेलेक उसे भगा दे, इस प्रकार दाऊद उसे छोड़कर चला गया।उसी अवसर का दाऊद का एक पद। {34:1} मैं यहोवा को सदा धन्य कहूँगा। मेरे होठों पर सदा उसकी स्तुति रहती है। {34:2} हे नम्र लोगों, सुनो और प्रसन्न होओ। मेरी आत्मा यहोवा पर गर्व करती है। {34:3} मेरे साथ यहोवा की गरिमा का गुणगान करो। आओ, हम उसके नाम का अभिनन्दन करें। {34:4} मैं परमेश्वर के पास सहायता माँगने गया। उसने मेरी सुनी। उसने मुझे उन सभी बातों से बचाया जिनसे मैं डरता हूँ। {34:5} परमेश्वर की शरण में जाओ। तुम स्वीकारे जाओगे। तुम लज्जा मत करो। {34:6} इस दीन जन ने यहोवा को सहायता के लिए पुकारा, और यहोवा ने मेरी सुन ली। और उसने सब विपत्तियों से मेरी रक्षा की। {34:7} यहोवा का दूत उसके भक्त जनों के चारों ओर डेरा डाले रहता है। और यहोवा का दूत उन लोगों की रक्षा करता है। {34:8} चखो और समझो कि यहोवा कितना भला है। वह व्यक्ति जो यहोवा के भरोसे है सचमुच प्रसन्न रहेगा। {34:9} यहोवा के पवित्र जन को उसकी आराधना करनी चाहिए। यहोवा केभक्तों के लिए कोई अन्य सुरक्षित स्थान नहीं है। {34:10} आज जो बलवान हैं दुर्बल और भूखे हो जाएंगे। किन्तु जो परमेश्वर के शरण आते हैं वे लोग हर उत्तम वस्तु पाएंगे। {34:11} हे बालकों, मेरी सुनो, और मैं तुम्हें सिखाऊँगा कि यहोवा की सेवा कैसे करें। {34:12} यदि कोई व्यक्ति जीवन से प्रेम करता है, और अच्छा और दीर्घायु जीवन चाहता है, {34:13} तो उस व्यक्ति को बुरा नहीं बोलना चाहिए, उस व्यक्ति को झूठ नहीं बोलना चाहिए। {34:14} बुरे काम मत करो। नेक काम करते रहो। शांति के कार्य करो। शांति के प्रयासों में जुटे रहो जब तक उसे पा न लो। {34:15} यहोवा सज्जनों की रक्षा करता है। उनकी प्रार्थनाओं पर वह कान देता है। {34:16} किन्तु यहोवा, जो बुरे काम करते हैं, ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध होता है। वह उनको पूरी तरह नष्ट करता है। {34:17} यहोवा से विनती करो, वह तुम्हारी सुनेगा। वह तुम्हें तुम्हारी सब विपत्तियों से बचा लेगा। {34:18} लोगों को विपत्तियाँ आ सकती है और वे अभिमानी होना छोड़ते हैं। यहोवा उन लोगों के निकट रहता है। जिनके टूटे मन हैं उनको वह बचा लेगा। {34:19} सम्भव है सज्जन भी विपत्तियों में घिर जाए। किन्तु यहोवा उन सज्जनों की उनकी हर समस्या से रक्षा करेगा। {34:20} यहोवा उनकी सब हड्डियों की रक्षा करेगा। उनकी एक भी हड्डी नहीं टूटेगी। {34:21} किन्तु दुष्ट की दुष्टता उनको ले डूबेगी। सज्जन के विरोधी नष्ट हो जायेंगे। {34:22} यहोवा अपने हर दास की आत्मा बचाता है। जो लोग उस पर निर्भर रहते हैं, वह उन लोगों को नष्ट नहीं होने देगा। {i35:1} दाऊद को समर्पित। {35:1} हे यहोवा, मेरे मुकद्दमों को लड़। मेरे युद्धों को लड़! {35:2} हे यहोवा, कवच और ढाल धारण कर, खड़ा हो और मेरी रक्षा कर। {35:3} बरछी और भाला उठा, और जो मेरे पीछे पड़े हैं उनसे युद्ध कर। हे यहोवा, मेरी आत्मा से कह, “मैं तेरा उद्धार करुँगा।” {35:4} कुछ लोग मुझे मारने पीछे पड़े हैं। उन्हें निराश और लज्जित कर। उनको मोड़ दे और उन्हें भगा दे। मुझे क्षति पहुँचाने का कुचक्र जो रचा रहे हैं उन्हें असमंजस में डाल दे। {35:5} तू उनको ऐसा भूसे सा बना दे, जिसको पवन उड़ा ले जाती है। उनके साथ ऐसा होने दे कि, उनके पीछे यहोवा के दूत पड़ें। {35:6} हे यहोवा, उनकी राह अन्धेरे और फिसलनी हो जाए। यहोवा का दूत उनके पीछे पड़े। {35:7} मैंने तो कुछ भी बुरा नहीं किया है। किन्तु वे मनुष्य मुझे बिना किसी कारण के, फँसाना चाहते हैं। वे मुझे फँसाना चाहते हैं। {35:8} सो, हे यहोवा, ऐसे लोगों को उनके अपने ही जाल में गिरने दे। उनको अपने ही फंदो में पड़ने दे, और कोई अज्ञात खतरा उन पर पड़ने दे। {35:9} फिर तो यहोवा मैं तुझ में आनन्द मनाऊँगा। यहोवा के संरक्षण में मैं प्रसन्न होऊँगा। {35:10} मैं अपने सम्पूर्ण मन से कहूँगा, हे “यहोवा, तेरे समान कोई नहीं है। तू सबलों से दुर्बलों को बचाता है। जो जन शक्तिशाली होते हैं, उनसे तू वस्तुओं को छीन लेता है और दीन और असहाय लोगों को देता है।” {35:11} एक झूठा साक्षी दल मुझको दु: ख देने को कुचक्र रच रहा है। ये लोग मुझसे अनेक प्रश्न पूछेंगे। मैं नहीं जानता कि वे क्या बात कर रहे हैं। {35:12} मैंने तो बस भलाई ही भलाई की है। किन्तु वे मुझसे बुराई करेंगे। हे यहोवा, मुझे वह उत्तम फल दे जो मुझे मिलना चाहिए। {35:13} उन पर जब दु: ख पड़ा, उनके लिए मैं दु: खी हुआ। मैंने भोजन को त्याग कर अपना दु: ख व्यक्त किया। जो मैंने उनके लिए प्रार्थना की, क्या मुझे यही मिलना चाहिए? {35:14} उन लोगों के लिए मैंने शोक वस्त्र धारण किये। मैंने उन लोगों के साथ मित्र वरन भाई जैसा व्यवहार किया। मैं उस रोते मनुष्य सा दु: खी हुआ, जिसकी माता मर गई हो। ऐसे लोगों से शोक प्रकट करने के लिए मैंने काले वस्त्र पहन लिए। मैं दु: ख में डूबा और सिर झुका कर चला। {35:15} पर जब मुझसे कोई एक चूक हो गई, उन लोगों ने मेरी हँसी उड़ाई। वे लोग सचमुच मेरे मित्र नहीं थे। मैं उन लोगोंको जानता तक नहीं। उन्होंने मुझको घेर लिया और मुझ पर प्रहार किया। {35:16} उन्होंने मुझको गालियाँ दीं और हँसी उड़ायी। अपने दाँत पीसकर उन लोगों ने दर्शाया कि वे मुझ पर क्रुद्ध हैं। {35:17} मेरे स्वामी, तू कब तक यह सब बुरा होते हुए देखेगा ये लोग मुझे नाश करने का प्रयत्न कर रहे हैं। हे यहोवा, मेरे प्राण बचा ले। मेरे प्रिय जीवन की रक्षा कर। वे सिंह जैसे बन गए हैं। {35:18} हे यहोवा, मैं महासभा में तेरी स्तुति करुँगा। मैं बलशाली लोगों के संग रहते तेरा यश बखानूँगा। {35:19} मेरे मिथ्यावादी शत्रु हँसते नहीं रहेंगे। सचमुच मेरे शत्रु अपनी छुपी योजनाओं के लिए दण्ड पाएँगे। {35:20} मेरे शत्रु सचमुच शांति की योजनाएँ नहीं रचते हैं। वे इस देश के शांतिप्रिय लोगों के विरोध में छिपे छिपे बुरा करने का कुचक्र रच रहे हैं। {35:21} मेरे शत्रु मेरे लिए बुरी बातें कह रहे हैं। वे झूठ बोलते हुए कह रहे हैं, “अहा! हम सब जानते हैं तुम क्या कर रहे हो!” {35:22} हे यहोवा, तू सचमुच देखता है कि क्या कुछ घट रहा है। सो तू छुपा मत रह, मुझको मत छोड़। {35:23} हे यहोवा, जाग! उठ खड़ा हो जा! मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी लड़ाई लड़, और मेरा न्याय कर। {35:24} हे मेरे परमेश्वर यहोवा, अपनी निष्पक्षता से मेरा न्याय कर, तू उन लोगों को मुझ पर हँसने मत दे। {35:25} उन लोगों को ऐसे मत कहने दे, “अहा! हमें जो चाहिए था उसे पा लिया!” हे यहोवा, उन्हें मत कहने दे, “हमने उसको नष्ट कर दिया।” {35:26} मैं आशा करता हूँ कि मेरे शत्रु निराश और लज्जित होंगे। वे जन प्रसन्न थे जब मेरे साथ बुरी बातें घट रही थीं। वे सोचा करते कि वे मुझसे श्रेष्ठ हैं! सो ऐसे लोगों को लाज में डूबने दे। {35:27} कुछ लोग मेरा नेक चाहते हैं। मैं आशा करता हूँ कि वे बहुत आनन्दित होंगे! वे हमेशा कहते हैं, “यहोवा महान है! वह अपने सेवक की अच्छाई चाहता है।” {35:28} सो, हे यहोवा, मैं लोगों को तेरी अच्छाई बताऊँगा। हर दिन, मैं तेरी स्तुति करुँगा। {i36:1} संगीत निर्देशक के लिए यहोवा के दास दाऊद का एक पद। {36:1} बुरा व्यक्ति बहुत बुरा करता है जब वह स्वयं से कहता है, “मैं परमेश्वर का आदर नहीं करता और न ही डरता हूँ।” {36:2} वह मनुष्य स्वयं से झूठ बोलता है। वह मनुष्य स्वयं अपने खोट को नहीं देखता। इसलिए वह क्षमा नहीं माँगता। {36:3} उसके वचन बस व्यर्थ और झूठे होते हैं। वह विवेकी नहीं होता और न ही अच्छे काम सीखता है। {36:4} रात को वह अपने बिस्तर में कुचक्र रचता है। वह जाग कर कोई भी अच्छा काम नहीं करता। वह कुकर्म को छोड़ना नहीं चाहता। {36:5} हे यहोवा, तेरा सच्चा प्रेम आकाश से भी ऊँचा है। हे यहोवा, तेरी सच्चाई मेघों से भी ऊँची है। {36:6} हे यहोवा, तेरी धार्मिकता सर्वोच्च पर्वत से भी ऊँची है। तेरी शोभा गहरे सागर से गहरी है। हे यहोवा, तू मनुष्यों और पशुओ का रक्षक है। {36:7} तेरी करुणा से अधिक मूल्यवान कुछ भी नहीं हैं। मनुष्य और दूत तेरे शरणागत हैं। {36:8} हे यहोवा, तेरे मन्दिर की उत्तम बातों से वे नयी शक्ति पाते हैं। तू उन्हें अपने अद्भुत नदी के जल को पीने देता है। {36:9} हे यहोवा, तुझसे जीवन का झरना फूटता है! तेरी ज्योति ही हमें प्रकाश दिखाती है। {36:10} हे यहोवा, जो तुझे सच्चाई से जानते हैं, उनसे प्रेम करता रह। उन लोगों पर तू अपनी निज नेकी बरसा जो तेरे प्रति सच्चे हैं। {36:11} हे यहोवा, तू मुझे अभिमानियों के जाल में मत फँसने दे। दुष्ट जन मुझको कभी न पकड़ पायें। {36:12} उनके कब्रों के पत्थरो पर यह लिख दे: “दुष्ट लोग यहाँ पर गिरे हैं। वे कुचले गए। वे फिर कभी खड़े नहीं हो पायेंगे।” {i37:1} दाऊद को समर्पित। {37:1} दुर्जनों से मत घबरा, जो बुरा करते हैं ऐसे मनुष्यों से ईर्ष्या मत रख। {37:2} दुर्जन मनुष्य घास और हरे पौधों की तरह शीघ्र पीले पड़ जाते हैं और मर जाते हैं। {37:3} यदि तू यहोवा पर भरोसा रखेगा और भले काम करेगा तो तू जीवित रहेगा और उन वस्तुओं का भोग करेगा जो धरती देती है। {37:4} यहोवा की सेवा में आनन्द लेता रह, और यहोवा तुझे तेरा मन चाहा देगा। {37:5} यहोवा के भरोसे रह। उसका विश्वास कर। वह वैसा करेगा जैसे करना चाहिए। {37:6} दोपहर के सूर्य सा, यहोवा तेरी नेकी और खरेपन को चमकाए। {37:7} यहोवा पर भरोसा रख और उसके सहारे की बाट जोह। तू दुष्टों की सफलता देखकर घबराया मत कर। तू दुष्टों की दुष्ट योजनाओं को सफल होते देख कर मत घबरा। {37:8} तू क्रोध मत कर! तू उन्मादी मत बन! उतना मत घबरा जा कि तू बुरे काम करना चाहे। {37:9} क्योंकि बुरे लोगों को तो नष्ट किया जायेगा। किन्तु वे लोग जो यहोवा पर भरोसे हैं, उस धरती को पायेंगे जिसे देने का परमेश्वर ने वचन दिया। {37:10} थोड़े ही समय बाद कोई दुर्जन नहीं बचेगा। ढूँढने से भी तुमको कोई दुष्ट नहीं मिलेगा! {37:11} नम्र लोग वह धरती पाएंगे जिसे परमेश्वर ने देने का वचन दिया है। वे शांति का आनन्द लेंगे। {37:12} दुष्ट लोग सज्जनों के लिये कुचक्र रचते हैं। दुष्ट जन सज्जनों के ऊपर दाँत पीसकर दिखाते हैं कि वे क्रोधित हैं। {37:13} किन्तु हमारा स्वामी उन दुर्जनों पर हँसता है। वह उन बातों को देखता है जो उन पर पड़ने को है। {37:14} दुर्जन तो अपनी तलवारें उठाते हैं और धनुष साधते हैं। वे दीनों, असहायों को मारना चाहते हैं। वे सच्चे, सज्जनों को मारना चाहते हैं। {37:15} किन्तु उनके धनुष चूर चूर हो जायेंगे। और उनकी तलवारें उनके अपने ही हृदयों में उतरेंगी। {37:16} थोड़े से भले लोग, दुर्जनों की भीड़ से भी उत्तम है। {37:17} क्योंकि दुर्जनों को तो नष्ट किया जायेगा। किन्तु भले लोगों का यहोवा ध्यान रखता है। {37:18} शुद्ध सज्जनों को यहोवा उनके जीवन भर बचाता है। उनका प्रतिफल सदा बना रहेगा। {37:19} जब संकट होगा, सज्जन नष्ट नहीं होंगे। जब अकाल पड़ेगा, सज्जनों के पास खाने को भरपूर होगा। {37:20} किन्तु बुरे लोग यहोवा के शत्रु हुआ करते हैं। सो उन बुरे जनों को नष्ट किया जाएगा, उनकी घाटियाँ सूख जाएंगी और जल जाएंगी। उनको तो पूरी तरह से मिटा दिया जायेगा। {37:21} दुष्ट तो तुरंत ही धन उधार माँग लेता है, और उसको फिर कभी नहीं चुकाता। किन्तु एक सज्जन औरों को प्रसन्नता से देता रहता है। {37:22} यदि कोई सज्जन किसी को आशीर्वाद दे, तो वे मनुष्य उस धरती को जिसे परमेश्वर ने देने का वचन दिया है, पाएंगे। किन्तु यदि वह शाप दे मनुष्यों को, तो वे मनुष्य नाश हो जाएंगे। {37:23} यहोवा, सैनिक की सावधानी से चलने में सहायता करता है। और वह उसको पतन से बचाता है। {37:24} सैनिक यदि दौड़ कर शत्रु पर प्रहार करें, तो उसके हाथ को यहोवा सहारा देता है, और उसको गिरने से बचाता है। {37:25} मैं युवक हुआ करता था पर अब मैं बूढा हूँ। मैंने कभी यहोवा को सज्जनों को असहाय छोड़ते नहीं देखा। मैंने कभी सज्जनों की संतानों को भीख माँगते नहीं देखा। {37:26} सज्जन सदा मुक्त भाव से दान देता है। सज्जनों के बालक वरदान हुआ करते हैं। {37:27} यदि तू कुकर्मो से अपना मुख मोड़े, और यदि तू अच्छे कामों को करता रहे, तो फिर तू सदा सर्वदा जीवित रहेगा। {37:28} यहोवा खरेपन से प्रेम करता है, वह अपने निज भक्त को असहाय नहीं छोड़ता। यहोवा अपने निज भक्तों की सदा रक्षा करता है, और वह दुष्ट जन को नष्ट कर देता है। {37:29} सज्जन उस धरती को पायेंगे जिसे देने का परमेश्वर ने वचन दिया है, वे उस में सदा सर्वदा निवास करेंगे। {37:30} भला मनुष्य तो खरी सलाह देता है। उसका न्याय सबके लिये निष्पक्ष होता है। {37:31} सज्जन के हृदय (मन) में यहोवा के उपदेश बसे हैं। वह सीधे मार्ग पर चलना नहीं छोड़ता। {37:32} किन्तु दुर्जन सज्जन को दु: ख पहुँचाने का रास्ता ढूँढता रहता है, और दुर्जन सज्जन को मारने का यत्न करते हैं। {37:33} किन्तु यहोवा दुर्जनों को मुक्त नहीं छोड़ेगा। वह सज्जन को अपराधी नहीं ठहरने देगा। {37:34} यहोवा की सहायता की बाट जोहते रहो। यहोवा का अनुसरण करते रहो। दुर्जन नष्ट होंगे। यहोवा तुझको महत्वपूर्ण बनायेगा। तू वह धरती पाएगा जिसे देने का यहोवा ने वचन दिया है। {37:35} मैंने दुष्ट को बलशाली देखा है। मैंने उसे मजबूत और स्वस्थ वृक्ष की तरह शक्तिशाली देखा। {37:36} किन्तु वे फिर मिट गए। मेरे ढूँढने पर उनका पता तक नहीं मिला। {37:37} सच्चे और खरे बनो, क्योंकि इसी से शांति मिलती है। {37:38} जो लोग व्यवस्था नियम तोड़ते हैं नष्ट किये जायेंगे। {37:39} यहोवा नेक मनुष्यों की रक्षा करता है। सज्जनों पर जब विपत्ति पड़ती है तब यहोवा उनकी शक्ति बन जाता है। {37:40} यहोवा नेक जनों को सहारा देता है, और उनकी रक्षा करता है। सज्जन यहोवा की शरण में आते हैं और यहोवा उनको दुर्जनों से बचा लेता है। {38:1} हे यहोवा, क्रोध में मेरी आलोचना मत कर। मुझको अनुशासित करते समय मुझ पर क्रोधित मत हो। {38:2} हे यहोवा, तूने मुझे चोट दिया है। तेरे बाण मुझमें गहरे उतरे हैं। {38:3} तूने मुझे दण्डित किया और मेरी सम्पूर्ण काया दु: ख रही है, मैंने पाप किये और तूने मुझे दण्ड दिया। इसलिए मेरी हड्डी दु: ख रही है। {38:4} मैं बुरे काम करने का अपराधी हूँ, और वह अपराध एक बड़े बोझे सा मेरे कन्धे पर चढ़ा है। {38:5} मैं बना रहा मूर्ख, अब मेरे घाव दुर्गन्धपूर्ण रिसते हैं और वे सड़ रहे हैं। {38:6} मैं झुका और दबा हुआ हूँ। मैं सारे दिन उदास रहता हूँ। {38:7} मुझको ज्वर चढ़ा है, और समूचे शरीर में वेदना भर गई है। {38:8} मैं पूरी तरह से दुर्बल हो गया हूँ। मैं कष्ट में हूँ इसलिए मैं कराहता और विलाप करता हूँ। {38:9} हे यहोवा, तूने मेरा कराहना सुन लिया। मेरी आहें तो तुझसे छुपी नहीं। {38:10} मुझको ताप चढ़ा है। मेरी शक्ति निचुड़ गयी है। मेरी आँखों की ज्योति लगभग जाती रही। {38:11} क्योंकि मैं रोगी हूँ, इसलिए मेरे मित्र और मेरे पड़ोसी मुझसे मिलने नहीं आते। मेरे परिवार के लोग तो मेरे पास तक नहीं फटकते। {38:12} मेरे शत्रु मेरी निन्दा करते हैं। वे झूठी बातों और प्रतिवादों को फैलाते रहते हैं। मेरे ही विषय में वे हरदम बात चीत करते रहते हैं। {38:13} किन्तु मैं बहरा बना कुछ नहीं सुनता हूँ। मैं गूँगा हो गया, जो कुछ नहीं बोल सकता। {38:14} मैं उस व्यक्ति सा बना हूँ, जो कुछ नहीं सुन सकता कि लोग उसके विषय क्या कह रहे हैं। और मैं यह तर्क नहीं दे सकता और सिद्ध नहीं कर सकता की मेरे शत्रु अपराधी हैं। {38:15} सो, हे यहोवा, मुझे तू ही बचा सकता है। मेरे परमेश्वर और मेरे स्वामी मेरे शत्रुओं को तू ही सत्य बता दे। {38:16} यदि मैं कुछ भी न कहूँ, तो मेरे शत्रु मुझ पर हँसेंगे। मुझे खिन्न देखकर वे कहने लगेंगे कि मैं अपने कुकर्मो का फल भोग रहा हूँ। {38:17} मैं जानता हूँ कि मैं अपने कुकर्मो के लिए पापी हूँ। मैं अपनी पीड़ा को भूल नहीं सकता हूँ। {38:18} हे यहोवा, मैंने तुझको अपने कुकर्म बता दिये। मैं अपने पापों के लिए दु: खी हूँ। {38:19} मेरे शत्रु जीवित और पूर्ण स्वस्थ हैं। उन्होंने बहुत — बहुत झूठी बातें बोली हैं। {38:20} मेरे शत्रु मेरे साथ बुरा व्यवहार करते हैं, जबकि मैंने उनके लिये भला ही किया है। मैं बस भला करने का जतन करता रहा, किन्तु वे सब लोग मेरे विरद्ध हो गये हैं। {38:21} हे यहोवा, मुझको मत बिसरा! मेरे परमेश्वर, मुझसे तू दूर मत रह! {38:22} देर मत कर, आ और मेरी सुधि ले! हे मेरे परमेश्वर, मुझको तू बचा ले! {i39:1} संगीत निर्देशक को यदूतून के लिये दाऊद का एक पद। {39:1} मैंने कहा, “जब तक ये दुष्ट मेरे सामने रहेंगे, तब तक मैं अपने कथन के प्रति सचेत रहूँगा। मैं अपनी वाणी को पाप से दूर रखूँगा। और मैं अपने मुँह को बंद कर लूँगा।” {39:2} सो इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा। मैंने भला भी नहीं कहा! किन्तु मैं बहुत परेशान हुआ। {39:3} मैं बहुत क्रोधित था। इस विषय में मैं जितना सोचता चला गया, उतना ही मेरा क्रोध बढ़ता चला गया। सो मैंने अपना मुख तनिक नहीं खोला। {39:4} हे यहोवा, मुझको बता कि मेरे साथ क्या कुछ घटित होने वाला है? मुझे बता, मैं कब तक जीवित रहूँगा? मुझको जानने दे सचमुच मेरा जीवन कितना छोटा है। {39:5} हे यहोवा, तूने मुझको बस एक क्षणिक जीवन दिया। तेरे लिये मेरा जीवन कुछ भी नहीं है। हर किसी का जीवन एक बादल सा है। कोई भी सदा नहीं जीता! {39:6} वह जीवन जिसको हम लोग जीते हैं, वह झूठी छाया भर होता है। जीवन की सारी भाग दौड़ निरर्थक होती है। हम तो बस व्यर्थ ही चिन्ताएँ पालते हैं। धन दौलत, वस्तुएँ हम जोड़ते रहते हैं, किन्तु नहीं जानते उन्हें कौन भोगेगा। {39:7} सो, मेरे यहोवा, मैं क्या आशा रखूँ? तू ही बस मेरी आशा है! {39:8} हे यहोवा, जो कुकर्म मैंने किये हैं, उनसे तू ही मुझको बचाएगा। तू मेरे संग किसी को भी किसी अविवेकी जन के संग जैसा व्यवहार नहीं करने देगा। {39:9} मैं अपना मुँह नहीं खोलूँगा। मैं कुछ भी नहीं कहूँगा। यहोवा तूने वैसे किया जैसे करना चाहिए था। {39:10} किन्तुपरमेश्वर, मुझको दण्ड देना छोड़ दे। यदि तूने मुझको दण्ड देना नहीं छोड़ा, तो तू मेरा नाश करेगा! {39:11} हे यहोवा, तू लोगों को उनके कुकर्मो का दण्ड देता है। और इस प्रकार जीवन की खरी राह लोगों को सिखाता है। हमारी काया जीर्ण शीर्ण हो जाती है। ऐसे उस कपड़े सी जिसे कीड़ा लगा हो। हमारा जीवन एक छोटे बादल जैसे देखते देखते विलीन हो जाती है। {39:12} हे यहोवा, मेरी विनती सुन! मेरे शब्दों को सुन जो मैं तुझसे पुकार कर कहता हूँ। मेरे आँसुओं को देख। मैं बस राहगीर हूँ, तुझको साथ लिये इस जीवन के मार्ग से गुजरता हूँ। इस जीवन मार्ग पर मैं अपने पूर्वजों की तरह कुछ समय मात्र टिकता हूँ। {39:13} हे यहोवा, मुझको अकेला छोड़ दे, मरने से पहले मुझे आनन्दित होने दे, थोड़े से समय बाद मैं जा चुका होऊँगा। {i40:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद पुकारा मैंने यहोवा को। {40:1} यहोवा को मैंने पुकारा। उसने मेरी सुनी। उसने मेरे रुदन को सुन लिया। {40:2} यहोवा ने मुझे विनाश के गर्त से उबारा। उसने मुझे दलदली गर्त से उठाया, और उसने मुझे चट्टान पर बैठाया। उसने ही मेरे कदमों को टिकाया। {40:3} यहोवा ने मेरे मुँह में एक नया गीत बसाया। परमेश्वर का एक स्तुति गीत। बहुतेरे लोग देखेंगे जो मेरे साथ घटा है। और फिर परमेश्वर की आराधना करेंगे। वे यहोवा का विश्वास करेंगे। {40:4} यदि कोई जन यहोवा के भरोसे रहता है, तो वह मनुष्य सचमुच प्रसन्न होगा। और यदि कोई जन मूर्तियों और मिथ्या देवों की शरण में नहीं जायेगा, तो वह मनुष्य सचमुच प्रसन्न होगा। {40:5} हमारे परमेश्वर यहोवा, तूने बहुतेरे अद्भुत कर्म किये हैं। हमारे लिये तेरे पास अद्भुत योजनाएँ हैं। कोई मनुष्य नहीं जो उसे गिन सके! मैं तेरे किये हुए कामों को बार बार बखानूँगा। {40:6} हे यहोवा, तूने मुझको यह समझाया है: तू सचमुच कोई अन्नबलि और पशुबलि नहीं चाहता था। कोई होमबलि और पापबलि तुझे नहीं चाहिए। {40:7} सो मैंने कहा, “देख मैं आ रहा हूँ! पुस्तक में मेरे विषय में यही लिखा है।” {40:8} हे मेरे परमेश्वर, मैं वही करना चाहता हूँ जो तू चाहता है। मैंने मन में तेरी शिक्षओं को बसा लिया। {40:9} महासभा के मध्य मैं तेरी धार्मिकता का सुसन्देश सुनाऊँगा। यहोवा तू जानता है कि मैं अपने मुँह को बंद नहीं रखूँगा। {40:10} यहोवा, मैं तेरे भले कर्मो को बखानूँगा। उन भले कर्मो को मैं रहस्य बनाकर मन में नहीं छिपाए रखूँगा। हे यहोवा, मैं लोगों को रक्षा के लिए तुझ पर आश्रित होने को कहूँगा। मैं महासभा में तेरी करुणा और तेरी सत्यता नहीं छिपाऊँगा। {40:11} इसलिए हे यहोवा, तूअपनी दया मुझसे मत छिपा! तू अपनी करुणा और सच्चाई से मेरी रक्षा कर। {40:12} मुझको दुष्ट लोगों ने घेर लिया, वे इतने अधिक हैं कि गिने नहीं जाते। मुझे मेरे पापों ने घेर लिया है, और मैं उनसे बच कर भाग नहीं पाता हूँ। मेरे पाप मेरे सिर के बालों से अधिक हैं। मेरा साहस मुझसे खो चुका है। {40:13} हे यहोवा, मेरी ओर दौड़ और मेरी रक्षा कर! आ, देर मत कर, मुझे बचा ले! {40:14} वे दुष्ट मनुष्य मुझे मारने का जतन करते हैं। हे यहोवा, उन्हें लज्जित कर और उनको निराश कर दे। वे मनुष्य मुझे दु: ख पहुँचाना चाहते हैं। तू उन्हें अपमानित होकर भागने दे! {40:15} वे दुष्ट जन मेरी हँसी उड़ाते हैं। उन्हें इतना लज्जित कर कि वे बोल तक न पायें! {40:16} किन्तु वे मनुष्य जो तुझे खोजते हैं, आनन्दित हो। वे मनुष्य सदा यह कहते रहें, “यहोवा के गुण गाओ!” उन लोगों को तुझ ही से रक्षित होना भाता है। {40:17} हे मेरे स्वामी, मैं तो बस दीन, असहाय व्यक्ति हूँ। मेरी रक्षा कर, तू मुझको बचा ले। हे मेरे परमेश्वर, अब अधिक देर मत कर! {i41:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {41:1} दीन का सहायक बहुत पायेगा। ऐसे मनुष्य पर जब विपत्ति आती है, तब यहोवा उस को बचा लेगा। {41:2} यहोवा उस जन की रक्षा करेगा और उसका जीवन बचायेगा। वह मनुष्य धरती पर बहुत वरदान पायेगा। परमेश्वर उसके शत्रुओं द्वारा उसका नाश नहीं होने देगा। {41:3} जब मनुष्य रोगी होगा और बिस्तर में पड़ा होगा, उसे यहोवा शक्ति देगा। वह मनुष्य बिस्तर में चाहे रोगी पड़ा हो किन्तु यहोवा उसको चँगा कर देगा! {41:4} मैंने कहा, “यहोवा, मुझ पर दया कर। मैंने तेरे विरद्ध पाप किये हैं, किन्तु मुझे और अच्छा कर।” {41:5} मेरे शत्रु मेरे लिये अपशब्द कह रहे हैं, वे कहा रहे हैं, “यह कब मरेगा और कब भुला दिया जायेगा?” {41:6} कुछ लोग मेरे पास मिलने आते हैं। पर वे नहीं कहते जो सचमुच सोच रहे हैं। वे लोग मेरे विषय में कुछ पता लगाने आते और जब वे लौटते अफवाह फैलाते। {41:7} मेरे शत्रु छिपे छिपे मेरी निन्दायें कर रहे हैं। वे मेरे विरद्ध कुचक्र रच रहे हैं। {41:8} वे कहा करते हैं, “उसने कोई बुरा कर्म किया है, इसी से उसको कोई बुरा रोग लगा है। मुझको आशा है वह कभी स्वस्थ नहीं होगा।” {41:9} मेरा परम मित्र मेरे संग खाता था। उस पर मुझको भरोसा था। किन्तु अब मेरा परम मित्र भी मेरे विरुद्ध हो गया है। {41:10} सो हे यहोवा, मुझ पर कृपा कर और मुझ पर कृपालु हो। मुझको खड़ा कर कि मैं प्रतिशोध ले लूँ। {41:11} हे यहोवा, यदि तू मेरे शत्रुओं को बुरा नहीं करने देगा, तो मैं समझूँगा कि तूने मुझे अपना लिया है। {41:12} मैं निर्दोष था और तूने मेरी सहायता की। तूने मुझे खड़ा किया और मुझे तेरी सेवा करने दिया। {41:13} इस्राएल का परमेश्वर, यहोवा धन्य है! वह सदा था, और वह सदा रहेगा। आमीन, आमीन! {i42:1} दूसरा भाग (भजनसंहिता 42-72) {42:1} संगीत निर्देशक के लिये कोरह परिवार का एक भक्ति गीत। जैसे एक हिरण शीतल सरिता का जल पीने को प्यासा है। वैसे ही, हे परमेश्वर, मेरा प्राण तेरे लिये प्यासा है। {42:2} मेरा प्राण जीवित परमेश्वर का प्यासा है। मै उससे मिलने के लिये कब आ सकता हुँ? {42:3} रात दिन मेरे आँसू ही मेरा खाना और पीना है! हर समय मेरे शत्रु कहते हैं, “तेरा परमेश्वर कहाँ है?” {42:4} सो मुझे इन सब बातों को याद करने दे। मुझे अपना हृदय बाहर ऊँडेलने दे। मुझे याद है मैं परमेश्वर के मन्दिर में चला और भीड़ की अगुवाई करता था। मुझे याद है वह लोगों के साथ आनन्द भरे प्रशंसा गीत गाना और वह उत्सव मनाना। {42:5} मैं इतना दुखी क्यों हूँ? मैं इतना व्याकुल क्यों हूँ? मुझे परमेश्वर के सहारे की बाट जोहनी चाहिए। मुझे अब भी उसकी स्तुति का अवसर मिलेगा। वह {42:6} मुझे बचाएगा। हे मेरे परमेश्वर, मैं अति दुखी हूँ। इसलिए मैंने तुझे यरदन की घाटी में, हेर्मोन की पहाड़ी पर और मिसगार के पर्वत पर से पुकारा। {42:7} जैसे सागर से लहरे उठ उठ कर आती हैं। मैं सागर तंरगों का कोलाहल करता शब्द सुनता हूँ, वैसे ही मुझको विपतियाँ बारम्बार घेरी रहीं। हे यहोवा, तेरी लहरों ने मुझको दबोच रखा है। तेरी तरंगों ने मुझको ढाप लिया है। {42:8} यदि हर दिन यहोवा सच्चा प्रेम दिखएगा, फिर तो मैं रात में उसका गीत गा पाऊँगा। मैं अपने सजीव परमेश्वर की प्रार्थना कर सकूँगा। {42:9} मैं अपने परमेश्वर, अपनी चट्टान से बातें करता हूँ। मैं कहा करता हूँ, “हे यहोवा, तूने मूझको क्यों बिसरा दिया हे यहोवा, तूने मुझको यह क्यों नहीं दिखाया कि मैं अपने शत्रुऔं से बच कैसे निकलूँ?” {42:10} मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का जतन किया। वे मुझ पर निज घृणा दिखाते हैं जब वे कहते हैं, “तेरा परमेश्वर कहाँ है?” {42:11} मैं इतना दुखी क्यों हूँ? मैं क्यों इतना व्याकुल हूँ? मुझे परमेश्वर के सहारे की बाट जोहनी चाहिए। मुझे अब भी उसकी स्तुति करने का अवसर मिलगा। वह मुझे बचाएगा। {43:1} हे परमेस्वर, एक मनुष्य है जो तेरी अनुसरण नहीं करता वह मनुष्य दुष्ट है और झूठ बोलता है। हे परमेश्वर, मेरा मुकदमा लड़ और यह निर्णय कर कि कोन सत्य है। मुझे उस मनुष्य से बच ले। {43:2} हे परमेस्वर, तू ही मेरा शरणस्थल है! मुझको तूने क्यों बिसरा दिय तूने मुझको यह क्यों नहीं दिखाया कि मै अपने श्त्रुओं से कैसे बच निकलूँ? {43:3} हे परमेश्वर, तू अपनी ज्योति और अपने सत्य को मुझ पर प्रकाशित होने दे। मुझको तेरी ज्योति और सत्य राह दिखायेंगे। वे मुझे तेरे पवित्र पर्वत और अपने घर को ले चलेंगे। {43:4} मैं तो परमेस्वर की वेदी के पास जाऊँगा। परमेश्वर मैं तेरे पास आऊँगा। वह मुझे आनन्दित करता है। हे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, मैं वीणा पर तेरी स्तुति करँगा। {43:5} मैं इतना दु: खी क्यों हुँ? मैं क्यों इतना व्यकुल हूँ? मुझे परमेश्वर के सहारे की बाट जोहनी चाहिए। मुझे अब भी उसकी स्तुती का अवसर मिलेगा। वह मुझे बचाएगा। {i44:1} संगीत निर्देशक के लिए कोरह परिवर का एक भक्ति गीत। {44:1} हे परमेश्वर, हमने तेरे विषय में सुना है। हमारे पूर्वजों ने उनके दिनों में जो काम तूने किये थे उनके बारे में हमें बताया। उन्होंने पुरातन काल में जो तूने किये हैं, उन्हें हमें बाताया। {44:2} हे परमेस्वर, तूने यह धरती अपनी महाशक्ति से पराए लोगों से ली और हमको दिया। उन विदेशी लोगों को तूने कुचल दिय, और उनको यह धरती छोड़ देने का दबाव डाला। {44:3} हमारे पूर्वजों ने यह धरती अपने तलवारों के बल नहीं ली थी। अपने भुजदण्डों के बल पर विजयी नहीं हुए। यह इसलिए हुआ था क्योंकि तू हमारे पूर्वजों के साथ था। हे परमेश्वर, तेरी महान शक्ति ने हमारे पूर्वजों की रक्षा की। क्योंकि तू उनसे प्रेम किया करता था! {44:4} हे मेरे परमेश्वर, तू मेरा राजा है। तेरे आदेशों से याकूब के लोगों को विजय मिली। {44:5} हे मेरे परमेश्वर, तेरी सहायता से, हमने तेरा नाम लेकर अपने शत्रुओं को धकेल दिया और हमने अपने शत्रु को कुचल दिया। {44:6} मुझे अपने धनुष और बाणों पर भरोसा नहीं। मेरी तलवार मुझे बचा नहीं सकती। {44:7} हे परमेश्वर, तूने ही हमें मिस्र से बचाया। तूने हमारे शत्रुओं को लज्जित किया। {44:8} हर दिन हम परमेश्वर के गुण गाएंगे। हम तेरे नाम की स्तुति सदा करेंगे। {44:9} किन्तु, हे यहोवा, तूने हमें क्यों बिसरा दिया? तूने हमको गहन लज्जा में डाला। हमारे साथ तू युद्ध में नहीं आया। {44:10} तूने हमें हमारे शत्रुओं को पीछे धकेलने दिया। हमारे शत्रु हमारे धन वैभव छीन ले गये। {44:11} तूने हमें उस भेड़ की तरह छोड़ा जो भोजन के समान खाने को होती है। तूने हमें राष्ट्रो के बीच बिखराया। {44:12} हे परमेश्वर, तूने अपने जनों को यूँ ही बेच दिया, और उनके मूल्य पर भाव ताव भी नहीं किया। {44:13} तूने हमें हमारे पड़ोसियों में हँसी का पात्र बनाया। हमारे पड़ोसी हमारा उपहास करते हैं, और हमारी मजाक बनाते हैं। {44:14} लोग हमारी भी काथा उपहास कथाओं में कहते हैं। यहाँ तक कि वे लोग जिनका आपना कोई राष्ट्र नहीं है, अपना सिर हिला कर हमारा उपहास करते हैं। {44:15} मैं लज्जा में डूबा हूँ। मैं सारे दिन भर निज लज्जा देखता रहता हूँ। {44:16} मेरे शत्रु ने मुझे लज्जित किया है। मेरी हँसी उड़ाते हुए मेरा शत्रु, अपना प्रतिशोध चाहता हैं। {44:17} हे परमेश्वर, हमने तुझको बिसराया नहीं। फिर भी तू हमारे साथ ऐसा करता है। हमने जब अपने वाचा पर तेरे साथ हस्तक्षर की थी, झूठ नहीं बोला था! {44:18} हे परमेश्वर, हमने तो तुझसे मुख नहीं मोड़ा। और न ही तेरा अनुसरण करना छोड़ा है। {44:19} किन्तु, हे यहोवा, तूने हमें इस स्थान पर ऐसे ठूँस दिया है जहाँ गीदड़ रहते हैं। तूने हमें इस स्थान में जो मृत्थु की तरह अंधेरा है मूँद दिया है। {44:20} क्या हम अपने परमेश्वर का नाम भूले? क्या हम विदेशी देवों के आगे झुके? नहीं! {44:21} निश्चय ही, परमेश्वर इन बातों को जानता है। वह तो हमारे गहरे रहस्य तक जानता है। {44:22} हे परमेश्वर, हम तेरे लिये प्रतिदिन मारे जा रहे हैं। हम उन भेड़ों जैसे बने हैं जो वध के लिये ले जायी जा रहीं हैं। {44:23} मेरे स्वामी, उठ! नींद में क्यों पड़े हो? उठो! हमें सदा के लिए मत त्याग! {44:24} हे परमेश्वर, तू हमसे क्यों छिपता है? क्या तू हमारे दु: ख और वेदनाओं को भूल गया है? {44:25} हमको धूल में पटक दिया गया है। हम औंधे मुँह धरती पर पड़े हुए हैं। {44:26} हे परमेस्वर, उठ और हमको बचा ले! अपने नित्य प्रेम के कारण हमारी रक्षा कर! {i45:1} संगीत निर्देशक के लिए शोकन्नीभ की संगत पर कोरह परिवार का एक कलात्मक प्रेम प्रगीत। {45:1} सुन्दर शब्द मेरे मन में भर जाते हैं, जब मैं राजा के लिये बातें लिखता हूँ। मेरे जीभ पर शष्द ऐसे आने लगते हैं जैसे वे किसी कुशल लेखक की लेखनी से निकल रहे हैं। {45:2} तू किसी भी और से सुन्दर है! तू अति उत्तम वक्ता है। सो तुझे परमेश्वर आशीष देगा! {45:3} तू तलवा धारण कर। तू महिमित वस्त्र धारण कर। {45:4} तू अद्भुत दिखता है! जा, धर्म ओर न्याय का युद्ध जीत। अद्भुत कर्म करने के लिये शक्तिपूर्ण दाहिनी भुजा का प्रयोग कर। {45:5} तेरे तीर तत्पर हैं। तू बहुतेरों को पराजित करेगा। तू अपने शत्रुओं पर शासन करेगा। {45:6} हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन अमर है! तेरा धर्म राजदण्ड है। {45:7} तू नेकी से प्यार और बैर से द्वेष करता है। सो परमेश्वर तेरे परमेश्वर ने तेरे साथियों के ऊपर तुझे राजा चुना है। {45:8} तेरे वस्त्र महक रहे है जैसे गंध रास, अगर और तेज पात से मधुर गंध आ रही। हाथी दाँत जड़ित राज महलों से तुझे आनन्दित करने को मधुर संगीत की झँकारे बिखरती हैं। {45:9} तेरी माहिलायें राजाओं की कन्याएँ है। तेरी महारानी ओपीर के सोने से बने मुकुट पहने तेरे दाहिनी ओर विराजती हैं। {45:10} हे राजपुत्री, मेरी बात को सुन। ध्यानपूर्वक सुन, तब तू मेरी बात को समझेगी। तू अपने निज लोगों और अपने पिता के घराने को भूल जा। {45:11} राजा तेरे सौन्दर्य पर मोहित है। यह तेरा नया स्वामी होगा। तुझको इसका सम्मान करना है। {45:12} सूर नगर के लोग तेरे लिये उपहार लायेंगे। और धनी मानी तुझसे मिलना चाहेंगे। {45:13} वह राजकन्या उस मूल्यवान रत्न सी है जिसे सुन्दर मूल्यवान सुवर्ण में जड़ा गया हो। {45:14} उसे रमणीय वस्त्र धारण किये लाया गया है। उसकी सखियों को भी जो उसके पिछे हैं राजा के सामने लाया गया। {45:15} वे यहाँ उल्लास में आयी हैं। वे आनन्द में मगन होकर राजमहल में प्रवेश करेंगी। {45:16} राजा, तेरे बाद तेरे पुत्र शासक होंगे। तू उन्हें समूचे धरती का राजा बनाएगा। {45:17} तेरे नाम का प्रचार युग युग तक करुँगा। तू प्रसिद्ध होगा, तेरे यश गीतों को लोग सदा सर्वदा गाते रहेंगे। {i46:1} अलामोथ की संगत पर संगीत निर्देशक के लिये कोरह परिवार का एक पद। {46:1} परमेश्वर हमारे पराक्रम का भण्डार है। संकट के समय हम उससे शरण पा सकते हैं। {46:2} इसलिए जब धरती काँपती है और जब पर्वत समुद्र में गिरने लगता है, हमको भय नही लगता। {46:3} हम नहीं डरते जब सागर उफनते और काले हो जाते हैं, और धरती और पर्वत काँपने लगते हैं। {46:4} वहाँ एक नदी है, जो परम परमेश्वर के नगरी को अपनी धाराओं से प्रसन्नता से भर देती है। {46:5} उस नगर में परमेश्वर है, इसी से उसका कभी पतन नही होगा। परमेश्वर उसकी सहायता भोर से पहले ही करेगा। {46:6} यहोवा के गरजते ही, राष्ट्र भय से काँप उठेंगे। उनकी राजधानियों का पतन हो जाता है और धरती चरमरा उठती हैं। {46:7} सर्वशक्तिमान यहोवा हमारे साथ है। याकूब का परमेश्वर हमारा शरणस्थल है। {46:8} आओ उन शक्तिपूर्ण कर्मो को देखो जिन्हें यहोवा करता है। वे काम ही धरती पर यहोवा को प्रसिद्ध करते हैं। {46:9} यहोवा धरती पर कहीं भी हो रहे युद्धों को रोक सकता है। वे सैनिक के धनुषों को तोड़ सकता है। और उनके भालों को चकनाचूर कर सकता है। रथों को वह जलाकर भस्म कर सकता है। {46:10} परमेश्वर कहता है, “शांत बनो और जानो कि मैं ही परमेश्वर हूँ! राष्ट्रों के बीच मेरी प्रशंसा होगी। धरती पर मेरी महिमा फैल जायेगी!” {46:11} यहोवा सर्वशाक्तिमान हमारे साथ है। याकूब का परमेश्वर हमारा शरणस्थल है। {i47:1} संगीत निर्देशक के लिए कोरह परिवार का एक भक्ति गीत। {47:1} हे सभी लोगों. तालियाँ बजाओ। और आनन्द में भर कर परमेश्वर का जय जयकार करो। {47:2} महिमा महिम यहोव भय और विस्मय से भरा है। सरी धरती का वही सम्राट है। {47:3} उसने अदेश दिया और हमने राष्ट्रों को पराजित किया और उन्हें जीत लिया। {47:4} हमारी धरती उसने हमारे लिये चुनी है। उसने याकूब के लिये अद्भुत धरती चुनी। याकूब वह व्यक्ति है जिसे उसने प्रेम किया। {47:5} यहोवा परमेश्वर तुरही की ध्वनि और युद्ध की नरसिंगे के स्वर के साथ ऊपर उठता है। {47:6} परमेश्वर के गुणगान करते हुए गुण गाओ। हमारे राजा के प्रशंसा गीत गाओ। और उसके यशगीत गाओ। {47:7} परमेश्वर सारी धरती का राजा है। उसके प्रशंसा गीत गाओ। {47:8} परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजता है। परमेश्वर सभी राष्ट्रों पर शासन करता है। {47:9} राष्ट्रों के नेता, इब्राहीम के परमेश्वर के लोगों के साथ मिलते हैं। सभी राष्ट्रों के नेता, परमेश्वर के हैं। परमेश्वर उन सब के ऊपर है। {i48:1} एक भक्ति गीत; कोरह परीवार का एक पद। {48:1} यहोवा महान है! वह परमेश्वर के नगर, उसके पवित्र नगर में प्रशंसनीय है। {48:2} परमेश्वर का पवित्र नगर एक सुन्दर नगर है। धरती पर वह नगर सर्वाधिक प्रसन्न है। सिय्योन पर्वत सबसे अधिक ऊँचा और सर्वाधिक पवित्र है। यह नगर महा सम्राट का है। {48:3} उस नगर के महलों में परमेश्वर को सुरक्षास्थल कहा जाता है। {48:4} एकबार कुछ राजा आपस में आ मिले और उन्हेंने इस नगर पर आक्रमण करने का कुचक्र रचा। सभी साथ मिलकर चढ़ाई के लिये आगे बढ़े। {48:5} राजा को देखकर वे सभी चकित हुए। उनमें भगदड़ मची और वे सभी भाग गए। {48:6} उन्हें भय ने दबोचा, वे भय से काँप उठे! {48:7} प्रचण्ड पूर्वी पवन ने उनके जलयानों को चकनाचूर कर दिया। {48:8} हाँ, हमने उन राजाओं की कहानी सुनी है और हमने तो इसको सर्वशक्तिमान यहोवा के नगर में हमारे परमेश्वर के नगर में घटते हुए भी देखा। यहोवा उस नगर को सुदृढ़ बनाएगा। {48:9} हे परमेश्वर, हम तेरे मन्दिर में तेरी प्रेमपूर्ण करूणा पर मनन करते हैं। {48:10} हे परमेश्वर, तू प्रसिद्ध है. लोग धरती पर हर कहीं तेरी स्तुति करते हैं। हर मनुष्य जानता है कि तू कितना भला है। {48:11} हे परमेश्वर, तेरे उचित न्याय के कारण सिय्योन पर्वत हर्षित है। और यहूदा की नगरियाँ आनन्द मना रही हैं। {48:12} सिय्योन की परिक्रमा करो। नगरी के दर्शन करो। तुम बुर्जो (मीनारों) को गिनो। {48:13} ऊँचे प्राचीरों को देखो। सिय्योन के महलों को सराहो। तभी तुम आने वाली पीढ़ी से इसका बखान कर सकोगे। {48:14} सचमुच हमारा परमेश्वर सदा सर्वदा परमेश्वर रहेगा। वह हमको सदा ही राह दिखाएगा। उसका कभी भी अंत नहीं होगा। {i49:1} कोरह की संतानो का संगीत निर्देशक के लिए एक पद। {49:1} विभिन्न देशों के निवासियों, यह सुनो। धरती के वासियों यह सुनो। {49:2} सुनो अरे दीन जनो, अरे धनिकों सुनो। {49:3} मैं तुम्हें ज्ञान और विवेक की बातें बताता हूँ। {49:4} मैंने कथाएँ सुनी हैं, मैं अब वे कथाएँ तुमको निज वीणा पर सुनाऊँगा। {49:5} ऐसा कोई कारण नहीं जो मैं किसी भी विनाश से डर जाऊँ। यदि लोग मुझे घेरे और फँदा फैलाये. मुझे डरने का कोई कारण नहीं। {49:6} वे लोग मूर्ख हैं जिन्हें अपने निज बल और अपने धन पर भरोसा है। {49:7} तुझे कोई मनुष्य मित्र नहीं बचा सकता। जो घटा है उसे तू परमेश्वर को देकर बदलवा नहीं सकता। {49:8} किसी मनुष्य के पास इतना धन नहीं होगा कि जिससे वह स्वयं अपना निज जीवन मोल ले सके। {49:9} किसी मनुष्य के पास इतना धन नहीं हो सकता कि वह अपना शरीर कब्र में सड़ने से बचा सके। {49:10} देखो, बुद्धिमान जन, बुद्धिहीन जन और जड़मति जन एक जैसे मर जाते हैं, और उनका सारा धन दूसरों के हाथ में चला जाता है। {49:11} कब्र सदा सर्वदा के लिए हर किसी का घर बनेगा, इसका कोई अर्थ नहीं कि वे कितनी धरती के स्वामी रहे थे। {49:12} धनी पुरूष मूर्ख जनों से भिन्न नहीं होते। सभी लोग पशुओं कि तरह मर जाते हैं। {49:13} लोगों कि वास्तविक मुर्खता यह हाती है कि वे अपनी भूख को निर्णायक बनाते हैं, कि उनको क्या करना चाहिए। {49:14} सभी लोग भेड़ जैसे हैं। कब्र उनके लिये बाडा बन जायेगी। मृत्यु उनका चरवाहा बनेगी। उनकी काया क्षीण हो जायेंगी और वे कब्र में सड़ गल जायेंगे। {49:15} किन्तु परमेश्वर मेरा मूल्य चुकाएगा और मेरा जीवन कब्र की शक्ति से बचाएगा। वह मुझको बचाएगा। {49:16} धनवानों से मत डरो कि वे धनी हैं। लोगों से उनके वैभवपूर्ण घरों को देखकर मत डरना। {49:17} वे लोग जब मरेंगे कुछ भी साथ न ले जाएंगे। उन सुन्दर वस्तुओं में से कुछ भी न ले जा पाएंगे। {49:18} लोगों को चाहिए कि वे जब तक जीवित रहें परमेश्वर की स्तुति करें। जब परमेश्वर उनके संग भलाई करे, तो लोगों को उसकी स्तुति करनी चाहिए। {49:19} मनुष्यों के लिए एक ऐसा समय आएगा जब वे अपने पूर्वजों के संग मिल जायेंगे। फिर वे कभी दिन का प्रकाश नहीं देख पाएंगे। {49:20} धनी पुरूष मूर्ख जनों से भिन्न नहीं होते। सभी लोग पशु समान मरते हैं। {i50:1} आसाप के भक्ति गीतों में से एक पद। {50:1} ईश्वरों के परमेश्वर यहोवा ने कहा है, पूर्व से पश्चिम तक धरती के सब मनुष्यों को उसने बुलाया। {50:2} सिय्योन से परमेश्वर की सुन्दरता प्रकाशित हो रही है। {50:3} हमारा परमेश्वर आ रहा है, और वह चुप नही रहेगा। उसके सामने जलती ज्वाला है, उसको एक बड़ा तूफान घेरे हुए है। {50:4} हमारा परमेश्वर आकाश और धरती को पुकार कर अपने निज लोगों को न्याय करने बुलाता है। {50:5} “मेरे अनुयायियों, मेरे पास जुटों। मेरे उपासकों आओ हमने आपस में एक वाचा किया है।” {50:6} परमेश्वर न्यायाधीश है, आकाश उसकी धार्मिकता को घोषित करता है। {50:7} परमेश्वर कहता है, “सुनों मेरे भक्तों! इस्राएल के लोगों, मैं तुम्हारे विरूद्ध साक्षी दूँगा। मैं परमेश्वर हूँ, तुम्हारा परमेश्वर। {50:8} मुझको तुम्हारी बलियों से शिकायत नहीं। इस्राएल के लोगों, तुम सदा होमबलियाँ मुझे चढ़ाते रहो। तुम मुझे हर दिन अर्पित करो। {50:9} मैं तेरे घर से कोई बैल नहीं लूँगा। मैं तेरे पशु गृहों से बकरें नहीं लूँगा। {50:10} मुझे तुम्हारे उन पशुओं की आवश्यकता नहीं। मैं ही तो वन के सभी पशुओं का स्वामी हूँ। हजारों पहाड़ों पर जो पशु विचरते हैं, उन सब का मैं स्वामी हूँ। {50:11} जिन पक्षियों का बसेरा उच्चतम पहाड़ पर है. उन सब को मैं जानता हूँ। अचलों पर जो भी सचल है वे सब मेरे ही हैं। {50:12} मैं भूखा नहीं हूँ! यदि मैं भूखा होता, तो भी तुमसे मुझे भोजन नहीं माँगना पड़ता। मैं जगत का स्वामी हूँ और उसका भी हर वस्तु जो इस जगत में है। {50:13} मैं बैलों का माँस खाया नहीं करता हूँ। बकरों का रक्त नहीं पीता।” {50:14} सचमुच जिस बलि की परमेश्वर को अपेक्षा है, वह तुम्हारी स्तुति है। तुम्हारी मनौतियाँ उसकी सेवा की हैं। सो परमेश्वर को निज धन्यवाद की भेटें चढ़ाओ। उस सर्वोच्च से जो मनौतियाँ की हैं उसे पूरा करो। {50:15} “इस्रएल के लोगों, जब तुम पर विपदा पड़े, मेरी प्रार्थना करो, मैं तुम्हें सहारा दूँगा। तब तुम मेरा मान कर सकोगे।” {50:16} दुष्ट लोगों से परमेश्वर कहता है, “तुम मेरी व्यवस्था की बातें करते हो, तुम मेरे वाचा की भी बातें करते हो। {50:17} फिर जब मैं तुमको सुधारता हूँ, तब भला तुम मुझसे बैर क्यों रखते हो। तुम उन बातों की उपेक्षा क्यों करते हो जिन्हें मैं तुम्हें बताता हूँ? {50:18} तुम चोर को देखकर उससे मिलने के लिए दौड़ जाते हो, तुम उनके साथ बिस्तर में कूद पड़ते हो जो व्यभिचार कर रहे हैं। {50:19} तुम बुरे वचन और झूठ बोलते हो। {50:20} तुम दूसरे लोगों की यहाँ तक की अपने भाईयों की निन्दा करते हो। {50:21} तुम बुरे कर्म करते हो, और तुम सोचते हो मुझे चुप रहना चाहिए। तुम कुछ नहीं कहते हो और सोचते हो कि मुझे चुप रहना चहिए। देखो, मैं चुप नहीं रहूँगा, तुझे स्पष्ट कर दूँगा। तेरे ही मुख पर तेरे दोष बताऊँगा। {50:22} तुम लोग परमेश्वर को भूल गये हो। इसके पहले कि मैं तुम्हे चीर दूँ, अच्छी तरह समझ लो। जब वैसा होगा कोई भी व्यक्ति तुम्हें बचा नहीं पाएगा! {50:23} यदि कोई व्यक्ति मेरी स्तुति और धन्यवादों की बलि चढ़ाये, तो वह सचमुच मेरा मान करेगा। यदि कोई व्यक्ति अपना जीवन बदल डाले तो उसे मैं परमेश्वर की शक्ति दिखाऊँगा जो बचाती है।” {i51:1} संगीत निर्देशक के लिए दाऊद का एक पद: यह पद उस समय का है जब बतशेबा के साथ दाऊद द्वारा पाप करने के बाद नातान नबी दाऊद के पास गया था। {51:1} हे परमेश्वर, अपनी विशाल प्रेमपूर्ण अपनी करूण से मुझ पर दया कर। मेरे सभी पापों को तू मिटा दे। {51:2} हे परमेश्वर, मेरे अपराध मुझसे दूर कर। मेरे पाप धो डाल, और फिर से तू मुझको स्वच्छ बना दे। {51:3} मैं जानता हूँ, जो पाप मैंने किया है। मैं अपने पापों को सदा अपने सामने देखता हूँ। {51:4} है परमेश्वर, मैंने वही काम किये जिनको तूने बुरा कहा। तू वही है, जिसके विरूद्ध मैंने पाप किये। मैं स्वीकार करता हूँ इन बातों को, ताकि लोग जान जाये कि मैं पापी हूँ और तू न्यायपूर्ण है, तथा तेरे निर्णय निष्पक्ष होते हैं। {51:5} मैं पाप से जन्मा, मेरी माता ने मुझको पाप से गर्भ में धारण किया। {51:6} हे परमेश्वर, तू चाहता है, हम विश्वासी बनें। और मैं निर्भय हो जाऊँ। इसलिए तू मुझको सच्चे विवेक से रहस्यों की शिक्षा दे। {51:7} तू मुझे विधि विधान के साथ, जूफा के पौधे का प्रयोग कर के पवित्र कर। तब तक मुझे तू धो, जब तक मैं हिम से अधिक उज्जवल न हो जाऊँ। {51:8} मुझे प्रसन्न बना दे। बता दे मुझे कि कैसे प्रसन्न बनूँ? मेरी वे हडिडयाँ जो तूने तोड़ी, फिर आनन्द से भर जायें। {51:9} मेरे पापों को मत देख। उन सबको धो डाल। {51:10} परमेश्वर, तू मेरा मन पवित्र कर दे। मेरी आत्मा को फिर सुदृढ कर दे। {51:11} अपनी पवित्र आत्मा को मुझसे मत दूर हटा, और मुझसे मत छीन। {51:12} वह उल्लास जो तुझसे आता है, मुझमें भर जायें। मेरा चित अडिग और तत्पर कर सुरक्षित होने को और तेरा आदेश मानने को। {51:13} मैं पापियों को तेरी जीवन विधि सिखाऊँगा, जिससे वे लौट कर तेरे पास आयेंगे। {51:14} हे परमेश्वर, तू मुझे हत्या का दोषी कभी मत बनने दें। मेरे परमेश्वर, मेरे उद्धारकर्ता, मुझे गाने दे कि तू कितना उत्तम है {51:15} हे मेरे स्वामी, मुझे मेरा मुँह खोलने दे कि मैं तेरे प्रसंसा का गीत गाऊँ। {51:16} जो बलियाँ तुझे नहीं भाती सो मुझे चढ़ानी नहीं है। वे बलियाँ तुझे वाँछित तक नहीं हैं। {51:17} हे परमेश्वर, मेरी टूटी आत्मा ही तेरे लिए मेरी बलि हैं। हे परमेश्वर, तू एक कुचले और टूटे हृदय से कभी मुख नहीं मोड़ेगा। {51:18} हे परमेश्वर, सिय्योन के प्रति दयालु होकर, उत्तम बन। तू यरूशलेम के नगर के परकोटे का निर्माण कर। {51:19} तू उत्तम बलियों का और सम्पूर्ण होमबलियों का आनन्द लेगा। लोग फिर से तेरी वेदी पर बैलों की बलियाँ चढ़ायेंगे। {i52:1} संगीत निर्देशक के लिये उस समय का एक भक्ति गीत जब एदोमी दोएग ने शाऊल के पास आकर कहा था, दाऊद अबीमेलेक के घर में है। {52:1} अरे ओ, बड़े व्यक्ति। तू क्यों शेखी बघारता है जिन बुरे कामों को तू करता है? तू परमेश्वर का अपमान करता है। तू बुरे काम करने को दिन भर षड़यन्त्र रचता है। {52:2} तू मूढ़ता भरी कुचक्र रचता रहता है। तेरी जीभ वैसी ही भयानक है, जैसा तेज उस्तरा होता है। क्यों? क्योंकि तेरी जीभ झूठ बोलती रहती है! {52:3} तुझको नेकी से अधिक बदी भाती है। तुझको झूठ का बोलना. सत्य के बोलने से अधिक भाता है। {52:4} तुझको और तेरी झूठी जीभ को, लोगों को हानि पहुँचाना अच्छा लगता है। {52:5} तुझे परमेश्वर सदा के लिए नष्ट कर देगा। वह तुझ पर झपटेगा और तुझे पकड़कर घर से बाहर करेगा। वह तुझे मारेगा और तेरा कोई भी वंशज नहीं रहेगा। {52:6} सज्जन इसे देखेंगे और परमेश्वर से डरना और उसका आदर करना सीखेंगे। वे तुझ पर, जो घटा उस पर हँसेंगे और कहेंगे, {52:7} “देखो उस व्यक्ति के साथ क्या हुआ जो यहोवा पर निर्भर नहीं था। उस व्यक्ति ने सोचा कि उसका धन और झूठ इसकी रक्षा करेंगे।” {52:8} किन्तु मैं परमेश्वर के मन्दिर में एक हरे जैतून के वूक्ष सा हूँ। परमेश्वर की करूणा का मुझको सदा — सदा के लिए भरोसा है। {52:9} हे परमेश्वर, मैं उन कामों के लिए जिनको तूने किया, स्तुति करता हूँ। मैं तेरे अन्य भक्तों के साथ, तेरे भले नाम पर भरोसा करूँगा! {i53:1} महलत राग पर संगीत निर्देशक के लिए दाऊद का एक भक्ति गीत। {53:1} बस एक मूर्ख ही ऐसे सोचता है कि परमेश्वर नहीं होता। ऐसे मनुष्य भ्रष्ट, दुष्ट, द्वेषपूर्ण होते हैं। वे कोई अच्छा काम नहीं करते। {53:2} सचमुच, आकाश में एक ऐसा परमेश्वर है जो हमें देखता और झाँकता रहता है। यह देखने को कि क्या यहाँ पर कोई विवेकपूर्ण व्यक्ति और विवेकपूर्ण जन परमेश्वर को खोजते रहते हैं? {53:3} किन्तु सभी लोग परमेश्वर से भटके हैं। हर व्यक्ति बुरा है। कोई भी व्यक्ति कोई अच्छा कर्म नहीं करता, एक भी नहीं। {53:4} परमेश्वर कहता है, “निश्चय ही, वे दुष्ट सत्य को जानते हैं। किन्तु वे मेरी प्रार्थना नहीं करते। वे दुष्ट लोग मेरे भक्तों को ऐसे नष्ट करने को तत्पर हैं, जैसे वे निज खाना खाने को तत्पर रहते हैं। {53:5} किन्तु वे दुष्ट लोग इतने भयभीत होंगे, जितने वे दुष्ट लोग पहले कभी भयभीत नहीं हुए! इसलिए परमेश्वर ने इस्राएल के उन दुष्ट शत्रु लोगों को त्यागा है। परमेश्वर के भक्त उनको हरायेंगे और परमेश्वर उन दुष्टो की हड्डियों को बिखेर देगा। {53:6} इस्राएल को, सिय्योन में कौन विजयी बनायेगा? हाँ, परमेश्वर उनकी विजय को पाने में सहायता करेगा। परमेश्वर अपने लोगों को बन्धुआई से वापस लायेगा, याकूब आनन्द मनायेगा। इस्राएल अति प्रसन्न होगा। {i54:1} तार वाले वाद्यों पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का समय का एक भक्ति गीत जब जीपियों में जाकर शाऊल से कहा था, हम सोचते हैं दाऊद हमारे लोगों के बीच छिपा है। {54:1} हे परमेश्वर, तू अपनी निज शक्ति को प्रयोग कर के काम में ले और मुझे मुक्त करने को बचा ले। {54:2} हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुन। मैं जो कहता हूँ सुन। {54:3} अजनबी लोग मेरे विरूद्ध उठ खड़े हुए और बलशाली लोग मुझे मारने का जतन कर रहे हैं। हे परमेश्वर, ऐसे ये लोग तेरे विषय में सोचते भी नहीं। {54:4} देखो, मेरा परमेश्वर मेरी सहायता करेगा। मेरा स्वामी मुझको सहारा देगा। {54:5} मेरा परमेश्वर उन लोगों को दण्ड देगा, जो मेरे विरूद्ध उठ खड़े हुए हैं। परमेश्वर मेरे प्रति सच्चा सिद्ध होगा, और वह उन लोगों को नष्ट कर देगा। {54:6} हे परमेश्वर मैं स्वेच्छा से तुझे बलियाँ अर्पित करुँगा। हे परमेश्वर, मैं तेरे नेक भजन की प्रशंसा करुँगा। {54:7} किन्तु, मैं तुझसे विनय करता हूँ, कि मुझको तू मेरे दू; खों से बचा ले। तू मुझको मेरे शत्रुओं को हारा हुआ दिखा दे। {i55:1} वाद्यों की संगीत पर संगीत निर्देशक के लिए दाऊद का एक भक्ति गीत। {55:1} हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुन। कृपा करके मुझसे तू दूर मत हो। {55:2} हे परमेश्वर, कृपा करके मेरी सुन और मुझे उत्तर दे। तू मुझको अपनी व्यथा तुझसे कहने दे। {55:3} मेरे शत्रु ने मुझसे दुर्वचन बोले हैं। दुष्ट जनों ने मुझ पर चीखा। मेरे शत्रु क्रोध कर मुझ पर टूट पड़े हैं। वे मुझे नाश करने विपति ढाते हैं। {55:4} मेरा मन भीतर से चूर — चूर हो रहा है, और मुझको मृत्यु से बहुत डर लग रहा है। {55:5} मैं बहुत डरा हुआ हूँ। मैं थरथर काँप रहा हूँ। मैं भयभीत हूँ। {55:6} ओह, यदि कपोत के समान मेरे पंख होते, यदि मैं पंख पाता तो दूर कोई चैन पाने के स्थान को उड़ जाता। {55:7} मैं उड़कर दूर निर्जन में जाता। {55:8} मैं दूर चला जाऊँगा और इस विपत्ति की आँधी से बचकर दूर भाग जाऊँगा। {55:9} हे मेरे स्वमी, इस नगर में हिँसा और बहुत दंगे और उनके झूठों को रोक जो मुझको दिख रही है। {55:10} इस नगर में, हर कहीं मुझे रात — दिन विपत्ति घेरे है। इस नगर में भयंकर घटनायें घट रही हैं। {55:11} गलियों में बहुत अधिक अपराध फैला है। हर कहीं लोग झूठ बोल बोल कर छलते हैं। {55:12} यदि यह मेरा शत्रु होता और मुझे नीचा दिखाता तो मैं इसे सह लेता। यदि ये मेरे शत्रु होते, और मुझ पर वार करते तो मैं छिप सकता था। {55:13} ओ! मेरे साथी, मेरे सहचर, मेरे मित्र, यह किन्तु तू है और तू ही मुझे कष्ट पहूँचाता है। {55:14} हमने आपस में राज की बातें बाँटी थी। हमने परमेश्वर के मन्दिर में साथ — साथ उपासना की। {55:15} काश मेरे शत्रु अपने समय से पहले ही मर जायें। काश उन्हें जीवित ही गाड़ दिया जायें, क्योंकि वे अपने घरों में ऐसे भयानक कुचक्र रचा करते हैं। {55:16} मैं तो सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारुँगा। यहोवा उसका उत्तर मुझे देगा। {55:17} मैं तो अपने दु; ख को परमेश्वर से प्रात, दोपहर और रात में कहूँगा। वह मेरी सुनेगा। {55:18} मैंने कितने ही युद्धों में लड़ायी लड़ी है। किन्तु परमेश्वर मेरे साथ है, और हर युद्ध से मुझे सुरक्षित लौटायेगा। {55:19} वह शाश्वत सम्राट परमेश्वर मेरी सुनेगा और उन्हें नीचा दिखायेगा। {55:20} मेरे शत्रु अपने जीवन को नहीं बदलेंगे। वे परमेश्वर से नहीं डरते, और न ही उसका आदर करते। {55:21} मेरे शत्रु अपने ही मित्रों पर वार करते। वे उन बातों को नहीं करते, जिनके करने को वे सहमत हो गये थे। {55:22} मेरे शत्रु सचमुच मीठा बोलते हैं, और सुशांति की बातें करते रहते हैं। किन्तु वास्तव में, वे युद्ध का कुचक्र रचते हैं। उनके शब्द काट करते छुरी की सी और फिसलन भरे हैं जैसे तेल होता है। {55:23} अपनी चिंताये तुम यहोवा को सौंप दो। फिर वह तुम्हारी रखवाली करेगा। यहोव सज्जन को कभी हारने नहीं देगा।इससे पहले कि उनकी आधी आयु बीते। हे परमेश्वर उन हत्यारों को और उन झूठों को कब्रों में भेज! जहाँ तक मेरा है, मैं तो तुझ पर ही भरोसा रखूँगा। {i56:1} संगीत निर्देशक के लिए सुदूर बाँझ वृक्ष का कपोत नामक धुन पर दाऊद का उस समय का एक प्रगीत जब नगर में उसे पलिश्तियों ने पकड़ लिया था। {56:1} हे परमेश्वर, मुझ पर करूणा कर क्योंकि लोगों ने मुझ पर वार किया है। वे रात दिन मेरा पीछा कर रहे हैं, और मेरे साथ इगड़ा कर रहे हैं। {56:2} मेरे शत्रु सारे दिन मुझ पर वार करते रहे। वहाँ पर डटे हुए अनगिनत योद्धा हैं। {56:3} जब भी डरता हूँ, तो मैं तेरा ही भरोसा करता हूँ। {56:4} मैं परमेश्वर के भरोसे हूँ, सो मैं भयभीत नहीं हूँ। लोग मुझको हानि नहीं पहुँचा सकते! मैं परमेश्वर के वचनों के लिए उसकी प्रशंसा करता हूँ जो उसने मुझे दिये। {56:5} मेरे शत्रु सदा मेरे शब्दों को तोड़ते मरोड़ते रहते हैं। मेरे विरूद्ध वे सदा कुचक्र रचते रहते हैं। {56:6} वे आपस में मिलकर और लुक छिपकर मेरी हर बात की टोह लेते हैं। मेरे प्राण हरने की कोई राह सोचते हैं। {56:7} हे परमेश्वर, उन्हें बचकर निकलने मत दे। उनके बुरे कामों का दण्ड उन्हें दे। {56:8} तू यह जानता है कि मैं बहुत व्याकुल हूँ। तू यह जानता है कि मैंने तुझे कितना पुकारा है तूने निश्चय ही मेरे सब आँसुओं का लेखा जोखा रखा हुआ है। {56:9} सो अब मैं तुझे सहायता पाने को पुकारुँगा। मेरे शत्रुओं को तू पराजित कर दे। मैं यह जानता हूँ कि तू यह कर सकता है। क्योंकि तू परमेश्वर है! {56:10} मैं परमेश्वर का गुण उसके वचनों के लिए गाता हूँ। मैं परमेश्वर के गुणों को उसके उस वचन के लिये गाता हूँ जो उसने मुझे दिया है। {56:11} मुझको परमेश्वर पर भरोसा है, इसलिए मैं नहीं डरता हूँ। लोग मेरा बुरा नहीं कर सकते! {56:12} हे परमेश्वर, मैंने जो तेरी मन्नतें मानी है, मैं उनको पूरा करुँगा। मैं तुझको धन्यवाद की भेंट चढ़ाऊँगा। {56:13} क्योंकि तूने मुझको मृत्यु से बचाया है। तूने मुझको हार से बचाया है। सो मैं परमेश्वर की आराधना करूँगा, जिसे केवल जीवित व्यक्ति देख सकते हैं। {i57:1} संगीत निर्देशक के लिये ‘नाश मत कर’ नामक धुन पर उस समय का दाऊद का एक भक्ति गीत जब वह शाऊल से भाग कर गुफा में जा छिपा था। {57:1} हे परमेश्वर, मुझ पर करूणा कर। मुझ पर दयालु हो क्योंकि मेरे मन की आस्था तुझमें है। मैं तेरे पास तेरी ओट पाने को आया हूँ। जब तक संकट दूर न हो। {57:2} हे परमेश्वर, मैं सहायता पाने के लिये विनती करता हूँ। परमेश्वर मेरी पूरी तरह ध्यान रखता है। {57:3} वह मेरी सहायता स्वर्ग से करता है, और वह मुझको बचा लेता है। जो लोग मुझको सताया करते हैं, वह उनको हराता है। परमेश्वर मुझ पर निज सच्चा प्रेम दर्शाता है। {57:4} मेरे शत्रुओं ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है। मेरे प्राण संकट में है। वे ऐसे हैं, जैसे नरभक्षी सिंह और उनके तेज दाँत भालों और तीरों से और उनकी जीभ तेज तलवार की सी है। {57:5} हे परमेश्वर, तू महान है। तेरी महिमा धरती पर छायी है, जो आकाश से ऊँची है। {57:6} मेरे शत्रुओं ने मेरे लिए जाल फैलाया है। मुझको फँसाने का वे जतन कर रहे हैं। उन्होंने मेरे लिए गहरा गड्ढा खोदा है, कि मैं उसमें गिर जाऊँ। {57:7} किन्तु परमेश्वर मेरी रक्षा करेगा। मेरा भरोसा है, कि वह मेरे साहस को बनाये रखेगा। मैं उसके यश गाथा को गाया करूँगा। {57:8} मेरे मन खड़े हो! ओ सितारों और वीणाओं! बजना प्रारम्भ करो। आओ, हम मिलकर प्रभात को जगायें। {57:9} हे मेरे स्वमी, हर किसी के लिए, मैं तेरा यश गाता हूँ। मैं तेरी यश गाथा हर किसी राष्ट्र को सुनाता हूँ। {57:10} तेरा सच्चा प्रेम अम्बर के सर्वोच्च मेघों से भी ऊँचा है। {57:11} परमेश्वर महान है, आकाश से ऊँची, उसकी महिमा धरती पर छा जाये। {i58:1} ‘नाश मत कर’ धुन पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक भक्ति गीत। {58:1} न्यायाधीशों, तुम पक्षपात रहित नहीं रहे। तुम लोगों का न्याय निज निर्णयों में निष्पक्ष नहीं करते हो। {58:2} नहीं, तुम तो केवल बुरी बातें ही सोचते हो। इस देश में तुम हिंसापुर्ण अपराध करते हो। {58:3} वे दुष्ट लोग जैसे ही पैदा होते हैं, बुरे कामों को करने लग जाते हैं। वे पैदा होते ही झूठ बोलने लग जाते हैं। {58:4} वे उस भयानक साँप और नाग जैसे होते हैं जो सुन नहीं सकता। वे दुष्ट जन भी अपने कान सत्य से मूंद लेते हैं। {58:5} बुरे लोगवैसे ही होते हैं जैसे सपेरों के गीतों को या उनके संगीतों को काला नाग नहीं सुन सकता। {58:6} हे यहोवा! वे लोग ऐसे होते हैं जैसे सिंह। इसलिए हे यहोवा, उनके दाँत तोड़। {58:7} जैसे बहता जल विलुप्त हो जाता है, वैसे ही वे लोग लुप्त हो जायें। और जैसे राह की उगी दूब कुचल जाती है, वैसे वे भी कुचल जायें। {58:8} वे घोंघे के समान हो जो चलने में गल जाते। वे उस शिशु से हो जो मरा ही पैदा हुआ, जिसने दिन का प्रकाश कभी नहीं देखा। {58:9} वे उस बाड़ के काँटों की तरह शीघ्र ही नष्ट हो, जो आग पर चढ़ी हाँड़ी गर्माने के लिए शीघ्र जल जाते हैं। {58:10} जब सज्जन उन लोगों को दण्ड पाते देखता है जिन्होंने उसके साथ बुर किया है, वह हर्षित होता है। वह अपना पाँव उन दुष्टों के खून में धोयेगा। {58:11} जब ऐसा होता है, तो लोग कहने लगते है, “सज्जनों को उनका फल निश्चय मिलता है। सचमुच परमेश्वर जगत का न्यायकर्ता है!” {i59:1} संगीत निर्देशक के लिये ‘नाश मत कर’ धुन पर दाऊद का उस समय का एक भक्ति गीत जब शाऊल ने लोगों को दाऊद के घर पर निगरानी रखते हुए उसे मार डालने की जुगत करने के लिये भेजा था। {59:1} हे परमेश्वर, तू मुझको मेरे शत्रुओं से बचा ले। मेरी सहायता उनसे विजयी बनने में कर जो मेरे विरूद्ध में युद्ध करने आये हैं। {59:2} ऐसे उन लोगों से, तू मुझको बचा ले। तू उन हत्यारों से मुझको बचा ले जो बुरे कामों को करते रहते हैं। {59:3} देख! मेरी घात में बलवान लोग हैं। वे मुझे मार डालने की बाट जोह रहे हैं। इसलिए नहीं कि मैंने कोई पाप किया अथवा मुझसे कोई अपराध बन पड़ा है। {59:4} वे मेरे पीछे पड़े हैं, किन्तु मैंने कोई भी बुरा काम नहीं किया है। हे यहोवा, आ! तू स्वयं अपने आप देख ले! {59:5} हे परमेश्वर! इस्राएल के परमेश्वर! तू सर्वशक्ति शाली है। तू उठ और उन लोगों को दण्डित कर। उन विश्वासघातियों उन दुर्जनों पर किंचित भी दया मत दिखा। {59:6} वे दुर्जन साँझ के होते ही नगर में घुस आते हैं। वे लोग गुरर्ते कुत्तों से नगर के बीच में घूमते रहते हैं। {59:7} तू उनकी धमकियों और अपमानों को सुन। वे ऐसी क्रूर बातें कहा करते हैं। वे इस बात की चिंता तक नहीं करते कि उनकी कौन सुनता है। {59:8} हे यहोवा, तू उनका उपहास करके उन सभी लोगों को मजाक बना दे। {59:9} हे परमेश्वर, तू मेरी शक्ति है। मैं तेरी बाट जोह रहा हूँ। हे परमेश्वर, तू ऊँचे पहाड़ों पर मेरा सुरक्षा स्थान है। {59:10} परमेश्वर, मुझसे प्रेम करता है, और वह जीतने में मेरा सहाय होगा। वह मेरे शत्रुओं को पराजित करने में मेरी सहायता करेगा। {59:11} हे परमेश्वर, बस उनको मत मार डाल। नहीं तो सम्भव है मेरे लोग भूल जायें। हे मेरे स्वमी और संरक्षक, तू अपनी शक्ति से उनको बिखेर दे और हरा दे। {59:12} वे बुरे लोग कोसते और झूठ बोलते रहते हैं। उन बुरी बातों का दण्ड उनको दे, जो उन्होंने कही हैं। उनको अपने अभिमान में फँसने दे। {59:13} तू अपने क्रोध से उनको नष्ट कर। उन्हें पूरी तरह नष्ट कर! लोग तभी जानेंगे कि परमेश्वर, याकूब के लोगों का और वह सारे संसर का राजा है। {59:14} फिर यदि वे लोग शाम को इधर — उधर घूमते गुरर्तें कुत्तों से नगर में आवें, {59:15} तो वे खाने को कोई वस्तु ढूँढते फिरेंगे, और खाने को कुछ भी नहीं पायेंगे और न ही सोने का कोई ठौर पायेंगे। {59:16} किन्तु मैं तेरी प्रशंसा के गीत गाऊँगा। हर सुबह मैं तेरे प्रेम में आनन्दित होऊँगा। क्यों क्योंकि तू पर्वतों के ऊपर मेरा शरणस्थल है। मैं तेरे पास आ सकता हूँ, जब मुझे विपत्तियाँ घेरेंगी। {59:17} मैं अपने गीतों को तेरी प्रशंसा में गाऊँगा क्योंकि पर्वतों के ऊपर मेरा शरणस्थल है। तू परमेश्वर है, जो मुझको प्रेम करता है! {i60:1} संगीत निर्देशक के लिये ‘वाचा की कुमुदिनी धुन पर उस समय का दाऊद का एक उपदेश गीत जब दाऊद ने अरमहरैन और अरमसोबा से युद्ध किया तथा जब योआब लौटा और उसने नमक की घाटी में बारह हजार स्वामी सैनिकों को मार डाला। {60:1} हे परमेश्वर, तूने हमको बिसरा दिया। तूने हमको विनष्ट कर दिया। तू हम पर कुपित हुआ। तू कृपा करके वापस आ। {60:2} तूने धरती कँपाई और उसे फाड़ दिया। हमारा जगत बिखर रहा, कृपया तू इसे जोड़। {60:3} तूने अपने लोगों को बहुत यातनाएँ दी है। हम दाखमधु पिये जन जैसे लड़खड़ा रहे और गिर रहे हैं। {60:4} तूने उन लोगों को ऐसे चिताया, जो तुझको पूजते हैं। वे अब अपने शत्रु से बच निकल सकते हैं। {60:5} तू अपने महाशक्ति का प्रयोग करके हमको बचा ले! मेरी प्रार्थना का उतर दे और उस जन को बचा जो तुझको प्यारा है! {60:6} परमेश्वर ने अपने मन्दिर में कहा: “मेरी विजय होगी और मैं विजय पर हर्षित होऊँगा। मैं इस धरती को अपने लोगों के बीच बाँटूंगा। मैं शकेम और सुक्कोत घाटी का बँटवारा करूँगा। {60:7} गिलाद और मनश्शे मेरे बनेंगे। एप्रेम मेरे सिर का कवच बनेगा। यहूदा मेरा राजदण्ड बनेगा। {60:8} मैं मोआब को ऐसा बनाऊँगा, जैसा कोई मेरे चरण धोने का पात्र। एदोम एक दास सा जो मेरी जूतियाँ उठता है। मैं पलिश्ती लोगों को पराजित करूँगा और विजय का उद्धोष करूँगा।” {60:9} कौन मुझे उसके विरूद्ध युद्ध करने को सुरक्षित दृढ़ नगर में ले जायेगा मुझे कौन एदोम तक ले जायेगा हे परमेश्वर, बस तू ही यह करने {60:10} में मेरी सहायता कर सकता है। किन्तु तूने तो हमको बिसरा दिया! परमेश्वर हमारे साथ में नहीं जायेगा! और वह हमारी सेना के साथ नहीं जायेगा। {60:11} हे परमेश्वर, तू ही हमको इस संकट की भूमि से उबार सकता है! मनुष्य हमारी रक्षा नहीं कर सकते! {60:12} किन्तु हमें परमेश्वर ही मजबूत बना सकता है। परमेश्वर हमारे शत्रुओं को परजित कर सकता है! {i61:1} तार के वाद्यों के संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {61:1} हे परमेश्वर, मेरा प्रार्थना गीत सुन। मेरी विनती सुन। {61:2} जहाँ भी मैं कितनी ही निर्बलता में होऊँ, मैं सहायता पाने को तुझको पुकारूँगा! जब मेरा मन भारी हो और बहुत दु: खी हो, तू मुझको बहुत ऊँचे सुरक्षित स्थान पर ले चल। {61:3} तू ही मेरा शरणस्थल है! तू ही मेरा सुदृढ़ गढ़ है, जो मुझे मेरे शत्रुओं से बचाता है। {61:4} तेरे डेरे में, मैं सदा सदा के लिए निवास करूँगा। मैं वहाँ छिपूँगा जहाँ तू मुझे बचा सके। {61:5} हे परमेश्वर, तूने मेरी वह मन्नत सुनी है, जिसे तुझ पर चढ़ाऊँगा, किन्तु तेरे भक्तों के पास हर वस्तु उन्हें तुझसे ही मिली है। {61:6} राजा को लम्बी आयु दे। उसको चिरकाल तक जीने दे! {61:7} उसको सदा परमेश्वर के साथ में बना रहने दे! तू उसकी रक्षा निज सच्चे प्रेम से कर। {61:8} मैं तेरे नाम का गुण सदा गाऊँगा। उन बातों को करूँगा जिनके करने का वचन मैंने दिया है। {i62:1} ‘यदूतून’ राग पर संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {62:1} मैं धीरज के साथ अपने उद्धार के लिए यहोवा का बाट जोहता हूँ। {62:2} परमेश्वर मेरा गढ़ है। परमेश्वर मुझको बचाता है। ऊँचे पर्वत पर, परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थान है। मुझको महा सेनायें भी पराजित नहीं कर सकतीं। {62:3} तू मुझ पर कब तक वार करता रहेगा मैं एक झूकी दीवार सा हो गया हूँ, और एक बाड़े सा जो गिरने ही वाला है। {62:4} वे लोग मेरे नाश का कुचक्र रच रहें हैं। मेरे विषय में वे झूठी बातें बनाते हैं। लोगों के बीच में, वे मेरी बढाई करते, किन्तु वे मुझको लुके — छिपे कोसते हैं। {62:5} मैं यहोवा की बाट धीरज के साथ जोहता हूँ। बस परमेश्वर ही अपने उद्धार के लिए मेरी आशा है। {62:6} परमेश्वर मेरा गढ़ है। परमेश्वर मुझको बचाता है। ऊँचे पर्वत में परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थान है। {62:7} महिमा और विजय, मुझे परमेश्वर से मिलती है। वह मेरा सुदृढ़ गढ़ है। परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थल है। {62:8} लोगों, परमेश्वर पर हर घड़ी भरोसा रखो! अपनी सब समस्यायें परमेश्वर से कहो। परमेश्वर हमारा सुरक्षा स्थल है। {62:9} सचमुच लोग कोई मदद नहीं कर सकते। सचमुच तुम उनके भरोसे सहायता पाने को नहीं रह सकते! परमेश्वर की तुलना में वे हवा के झोंके के समान हैं। {62:10} तुम बल पर भरोसा मत रखो की तुम शक्ति के साथ वस्तुओं को छीन लोगे। मत सोचो तुम्हें चोरी करने से कोई लाभ होगा। और यदि धनवान भी हो जाये तो कभी दौलत पर भरोसा मत करो, कि वह तुमको बचा लेगी। {62:11} एक बात ऐसी है जो परमेश्वर कहता है, जिसके भरोसे तुम सचमुच रह सकते हो: “शक्ति परमेश्वर से आती है!” {62:12} मेरे स्वामी, तेरा प्रेम सच्चा है। तू किसी जन को उसके उन कामों का प्रतिफल अथवा दण्ड देता है, जिन्हें वह करता है। {i63:1} दाऊद का उस समय का एक पद जब वह यहूदा की मरूभूमि में था। {63:1} हे परमेश्वर, तू मेरा परमेश्वर है। वैसे कितना मैं तुझको चाहता हूँ। जैसे उस प्यासी क्षीण धरती जिस पर जल न हो वैसे मेरी देह और मन तेरे लिए प्यासा है। {63:2} हाँ, तेरे मन्दिर में मैंने तेरे दर्शन किये। तेरी शक्ति और तेरी महिमा देख ली है। {63:3} तेरी भक्ति जीवन से बढ़कर उत्तम है। मेरे होंठ तेरी बढाई करते हैं। {63:4} हाँ, मैं निज जीवन में तेरे गुण गाऊँगा। मैं हाथ उपर उठाकर तेरे नाम पर तेरी प्रार्थना करूँगा। {63:5} मैं तृप्त होऊँगा मानों मैंने उत्तम पदार्थ खा लिए हों। मेरे होंठ तेरे गुण सदैव गायेंगे। {63:6} मैं आधी रात में बिस्तर पर लेटा हुआ तुझको याद करूँगा। {63:7} सचमुच तूने मेरी सहायता की है! मैं प्रसन्न हूँ कि तूने मुझको बचाया है! {63:8} मेरा मन तुझमें समता है। तू मेरा हाथ थामे हुए रहता है। {63:9} कुछ लोग मुझे मारने का जतन कर रहे हैं। किन्तु उनको नष्ट कर दिया जायेगा। वे अपनी कब्रों में समा जायेंगे। {63:10} उनको तलवारों से मार दिया जायेगा। उनके शवों को जंगली कुत्ते खायेंगे। {63:11} किन्तु राजा तो अपने परमेश्वर के साथ प्रसन्न होगा। वे लोग जो उसके आज्ञा मानने के वचन बद्ध हैं, उसकी स्तुति करेंगे। क्योंकि उसने सभी झूठों को पराजित किया। {i64:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद। {64:1} हे परमेश्वर, मेरी सुन! मैं अपने शत्रुओं से भयभीत हूँ। मैं अपने जीवन के लिए डरा हुआ हूँ। {64:2} तू मुझको मेरे शत्रुओं के गहरे षड़यन्त्रों से बचा ले। मुझको तू उन दुष्ट लोगों से छिपा ले। {64:3} मेरे विषय में उन्होंने बहुत बुरा झूठ बोला है। उनकी जीभे तेज तलवार सी और उनके कटुशब्द बाणों से हैं। {64:4} वे छिप जाते हैं, और अपने बाणों का प्रहार सरल सच्चे जन पर फिर करते हैं। इसके पहले कि उसको पता चले, वह घायल हो जाता है। {64:5} उसको हराने को बुरे काम करते हैं। वे झूठ बोलते और अपने जाल फैलाते हैं। और वे सुनिश्चित हैं कि उन्हें कोई नहीं पकड़ेगा। {64:6} लोग बहुत कुटिल हो सकते हैं। वे लोग क्या सोच रहे हैं इसका समझ पाना कठिन है। {64:7} किन्तु परमेश्वर निज “बाण” मार सकता है! और इसके पहले कि उनको पता चले, वे दुष्ट लोग घायल हो जाते हैं। {64:8} दुष्ट जन दूसरों के साथ बुरा करने की योजना बनाते हैं। किन्तु परमेश्वर उनके कुचक्रों को चौपट कर सकता है। वह उन बुरी बातों कों स्वयं उनके ऊपर घटा देता है। फिर हर कोई जो उन्हें देखता अचरज से भरकर अपना सिर हिलाता है। {64:9} जो परमेश्वर ने किया है, लोग उन बातों को देखेंगे और वे उन बातों का वर्णन दूसरो से करेंगे, फिर तो हर कोई परमेश्वर के विषय में और अधिक जानेगा। वे उसका आदर करना और डरना सीखेंगे। {64:10} सज्जनों को चाहिए कि वे यहोवा में प्रसन्न हो। वे उस पर भरोसा रखे। अरे! ओ सज्जनों! तुम सभी यहोवा के गुण गाओ। {65:1} हे सिय्योन के परमेश्वर, मैं तेरी स्तुती करता हूँ। मैंने जो मन्नत मानी, तुझ पर चढ़ाता हूँ। {65:2} मैं तेरे उन कामों का बखान करता हूँ, जो तूने किये हैं। हमारी प्रार्थनायें तू सुनता रहता हैं। तू हर किसी व्यक्ति की प्रार्थनायें सुनता है, जो तेरी शरण में आता है। {65:3} जब हमारे पाप हम पर भारी पड़ते हैं, हमसे सहन नहीं हो पाते, तो तू हमारे उन पापों को हर कर ले जाता है। {65:4} हे परमेश्वर, तूने अपने भक्त चुने हैं। तूने हमको चुना है कि हम तेरे मन्दिर में आयें और तेरी उपासना करें। हम तेरे मन्दिर में बहुत प्रसन्न हैं। सभी अद्भुत वस्तुएं हमारे पास है। {65:5} हे परमेश्वर, तू हमारी रक्षा करता है। सज्जन तेरी प्रार्थना करते, और तू उनकी विनतियों का उत्तर देता है। उनके लिए तू अचरज भरे काम करता है। सारे संसार के लोग तेरे भरोसे हैं। {65:6} परमेश्वर ने अपनी महाशक्ति का प्रयोग किया और पर्वत रच डाले। उसकी शक्ति हम अपने चारों तरफ देखते हैं। {65:7} परमेश्वर ने उफनते हुए सागर शांत किया। परमेश्वर ने जगत के सभी असंख्य लोगों को बनाया है। {65:8} जिन अद्भुत बातों को परमेश्वर करता है, उनसे धरती का हर व्यक्ति डरता है। परमेश्वर तू ही हर कहीं सूर्य को उगाता और छिपाता है। लोग तेरा गुणगान करते हैं। {65:9} पृथ्वी की सारी रखवाली तू करता है। तू ही इसे सींचता और तू ही इससे बहुत सारी वस्तुएं उपजाता है। हे परमेश्वर, नदियों को पानी से तू ही भरता है। तू ही फसलों की बढ़वार करता है। तू यह इस विधि से करता है। {65:10} जुते हुए खेतों पर वर्षा कराता है। तू खेतों को जल से सराबोर कर देता, और धरती को वर्षा से नरम बनाता है, और तू फिर पौधों की बढ़वार करता है। {65:11} तू नये साल का आरम्भ उत्तम फसलों से करता है। तू भरपूर फसलों से गाड़ियाँ भर देता है। {65:12} वन औक पर्वत दूब घास से ढक जाते हैं। {65:13} भेड़ों से चरागाहें भर गयी। फसलों से घाटियाँ भरपूर हो रही हैं। हर कोई गा रहा और आनन्द में ऊँचा पुकार रहा है। {66:1} हे धरती की हर वस्तु, आनन्द के साथ परमेश्वर की जय बोलो। {66:2} उसके माहिमामय नाम की स्तुति करों! उसका आदर उसके स्तुति गीतों से करों! {66:3} उसके अति अद्भुत कामों से परमेश्वर को बखानों! हे परमेश्वर, तेरी शक्ति बहुत बड़ी है। तेरे शत्रु झुक जाते और वे तुझसे डरते हैं। {66:4} जगत के सभी लोग तेरी उपासना करें और तेरे नाम का हर कोई गुण गायें। {66:5} तुम उनको देखो जो आश्चर्यपूर्ण काम परमेश्वर ने किये! वे वस्तुएँ हमको अचरज से भर देती है। {66:6} परमेश्वर ने धरती सूखी होने को सागर को विवश किया और उसके आनन्दित जन पैदल महानद को पार कर गये। {66:7} परमेश्वर अपनी महाशक्ति से इस संसार का शासन करता है। परमेश्वर हर कहीं लोगों पर दृष्टि रखता है। कोई भी व्यक्ति उसके विरूद्ध नहीं हो सकता। {66:8} लोगों, हमारे परमेश्वर का गुणगान तुम ऊँचे स्वर में करो। {66:9} परमेश्वर ने हमको यह जीवन दिया है। वह हमारी रक्षा करता है। {66:10} परमेश्वर ने हमारी परीक्षा ली है। परमेश्वर ने हमें वैसे ही परखा, जैसे लोग आग में डालकर चाँदी परखते हैं। {66:11} है परमेश्वर, तूने हमें फँदों में फँसने दिया। तूने हम पर भारी बोझ लाद दिया। {66:12} तूने हमें शत्रुओं से पैरों तले रौदंवाया। तूने हमको आग और पानी में से घसीटा। किन्तु तू फिर भी हमें सुरक्षित स्थान पर ले आया। {66:13} इसलिए में तेरे मन्दिर में बलियाँ चढ़ाने लाऊँगा। जब मैं विपति में था, मैंने तेरी शरण माँगी {66:14} और मैंने तेरी बहुतेरी मन्नत मानी। अब उन सब वस्तुओं को जिनकी मैंने मन्नत मानी, अर्पित करता हूँ। {66:15} तुझको पापबलि अर्पित कर रहा हूँ, और मेढ़ों के साथ सुगन्ध अर्पित करता हूँ। तुझको बैलों और बकरों की बलि अर्पित करता हूँ। {66:16} ओ सभी लोगों, परमेश्वर के आराधकों। आओ, मैं तुम्हें बताऊँगा कि परमेश्वर ने मेरे लिए क्या किया है। {66:17} मैंने उसकी विनती की। मैंने उसका गुणगान किया। मेरा {66:18} मन पवित्र था, मेरे स्वामी ने मेरी बात सुनी। {66:19} परमेश्वर ने मेरी सुनी। परमेश्वर ने मेरी विनती सुन ली। {66:20} परमेश्वर के गुण गाओ। परमेश्वर ने मुझसे मुँह नहीं मोड़ा। उसने मेरी प्रार्थना को सुन लिया। परमेश्वर ने निज करूणा मुझपर दर्शायी। {i67:1} तार वाद्यों के संगीत निर्देशक के लिए एक स्तुति गीत। {67:1} हे परमेश्वर, मुझ पर करूणा कर, और मुझे आशीष दे। कृपा कर के, हमको स्वीकार कर। {67:2} हे परमेश्वर, धरती पर हर व्यक्ति तेरे विषय में जाने। हर राष्ट्र यह जान जाये कि लोगों की तू कैसे रक्षा करता है। {67:3} हे परमेश्वर, लोग तेरे गुण गायें! सभी लोग तेरी प्रशंसा करें। {67:4} सभी राष्ट्र आनन्द मनावें और आनन्दिन हो! क्योंकि तू लोगों का न्याय निष्पक्ष करता। और हर राष्ट्र पर तेरा शासन है। {67:5} हे परमेश्वर, लोग तेरे गुण गायें! सभी लोग तेरी प्रशंसा करें। {67:6} हे परमेश्वर, हे हमारे परमेश्वर, हमको आशीष दे। हमारी धरती हमको भरपूर फसल दें। {67:7} हे परमेश्वर, हमको आशीष दे। पृथ्वी के सभी लोग परमेश्वर से डरे, उसका आदर करे। {i68:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक स्तुति गीत। {68:1} हे परमेश्वर, उठ, अपने शत्रु को तितर बितर कर। उसके सभी शत्रु उसके पास से भाग जायें। {68:2} जैसे वायु से उड़ाया हुआ धुँआ बिखर जाता है, वैसे ही तेरे शत्रु बिखर जायें। जैसे अग्नि में मोम पिघल जाती है, वैसे ही तेरे शत्रुओं का नाश हो जाये। {68:3} परमेश्वर के साथ सज्जन सुखी होते हैं, और सज्जन सुखद पल बिताते। सज्जन अपने आप आनन्द मनाते और स्वयं अति प्रसन्न रहते हैं। {68:4} परमेश्वर के गीत गाओ। उसके नाम का गुणगान करों। परमेश्वर के निमित राह तैयार करों। निज रथ पर सवार होकर, वह मरूभूमि पार करता। याह के नाम का गुण गाओ! {68:5} परमेश्वर अपने पवित्र मन्दिर में, पिता के समान अनाथों का और विधवाओं का ध्यान रखता है। {68:6} जिसका कोई घर नहीं होता, ऐसे अकेले जन को परमेश्वर घर देता है। निज भक्तों को परमेश्वर बंधन मुक्त करता है। वे अति प्रसन्न रहते हैं। किन्तु जो परमेश्वर के विरूद्ध होते, उनको तपती हुयी धरती पर रहना होगा। {68:7} हे परमेश्वर, तूने निज भक्तों को मिस्र से निकाला और मरूभूमि से पैदल ही पार निकाला। {68:8} इस्राएल का परमेश्वर जब सिय्योन पर्वत पर आया था, धरती काँप उठी थी, और आकाश पिघला था। {68:9} हे परमेश्वर, वर्षा को तूने भेजा था, और पुरानी तथा दुर्बल पड़ी धरती को तूने फिर सशक्त किया। {68:10} उसी धरती पर तेरे पशु वापस आ गये। हे परमेश्वर, वहाँ के दीन लोगों को तूने उत्तम वस्तुएँ दी। {68:11} परमेश्वर ने आदेश दिया और बहुत जन सुसन्देश को सुनाने गये; {68:12} “बलशाली राजाओं की सेनाएं इधर — उधर भाग गयी! युद्ध से जिन वस्तुओं को सैनिक लातें हैं, उनको घर पर रूकी स्त्रियाँ बाँट लेंगी। जो लोग घर में रूके हैं, वे उस धन को बाँट लेंगे। {68:13} वे चाँदी से मढ़े हुए कबुतर के पंख पायेंगे। वे सोने से चमकते हुए पंखों को पायेंगे।” {68:14} परमेश्वर ने जब सल्मूल पर्वत पर शत्रु राजाओं को बिखेरा, तो वे ऐसे छितराये जैसे हिम गिरता है। {68:15} बाशान पर्वत, महान पर्वत है, जिसकी चोटियाँ बहुत सी हैं। {68:16} बाशान पर्वत, तुम क्यों सिय्योन पर्वत को छोटा समझते हो परमेश्वर उससे प्रेम करता है। परमेश्वर ने उसे वहाँ सदा रहने के लिए चुना है। {68:17} यहोवा पवित्र पर्वत सिय्योन पर आ रहा है। और उसके पीछे उसके लाखों ही रथ हैं {68:18} वह ऊँचे पर चढ़ गया। उसने बंदियों कि अगुवाई की; उसने मनुष्यों से यहाँ तक कि अपने विरोधियों से भी भेंटे ली। यहोवा परमेश्वर वाहाँ रहने गया। {68:19} यहोवा के गुण गाओ! वह प्रति दिन हमारी, हमारे संग भार उठाने में सहायता करता है। परमेश्वर हमारी रक्षा करता है! {68:20} वह हमारा परमेश्वर है। वह वही परमेश्वर है जो हमको बचाता है। हमारा यहोवा परमेश्वर मृत्यु से हमारी रक्षा करता है! {68:21} परमेश्वर दिखा देगा कि अपने शत्रुओं को उसने हरा दिया है। ऐसे उन व्यक्तियों को जो उसके विरूद्ध लड़े, वह दण्ड देगा। {68:22} मेरे स्वमी ने कहा, “मैं बाशान से शत्रु को वापस लाऊँगा, मैं शत्रु को समुद्र की गहराई से वापस लाऊँगा, {68:23} ताकि तुम उनके रक्त में विचर सको, तुम्हारे कुत्ते उनका रक्त चाट जायें।” {68:24} लोग देखते हैं, परमेश्वर को विजय अभियान की अगुवाई करते हुए। लोग मेरे पवित्र परमेश्वर, मेरे राजा को विजय अभियान का अगुवाई करते देखते हैं। {68:25} आग — आगे गायकों की मण्डली चलती है, पीछे — पीछे वादकों की मण्डली आ रही हैं, और बीच में कुमारियाँ तम्बूरें बजा रही है। {68:26} परमेश्वर की प्रशंसा महासभा के बीच करो! इस्राएल के लोगों, तुम यहोवा के गुण गाओ! {68:27} छोटा बिन्यामीन उनकी अगुवायी कर रहा है। यहूदा का बड़ा परीवार वहाँ है। जबूलून तथा नपताली के नेता वहाँ पर हैं। {68:28} हे परमेश्वर, हमें निज शक्ति दिखा। हमें वह निज शक्ति दिखा जिसका उपयोग तूने हमारे लिए बीते हुए काल में किया था। {68:29} राजा लोग, यरूशलेम में तेरे मन्दिर के लिए निज सम्पति लायेंगे। {68:30} उन “पशुओं” से काम वांछित कराने के लिये निज छड़ी का प्रयोग कर। उन जातियों के “बैलो” और “गायों” को आज्ञा मानने वालें बना। तूने जिन राष्ट्रों को युद्ध में हराया अब तू उनसे चाँदी मंगवा ले। {68:31} तू उनसे मिस्र से धन मँगवा ले। हे परमेश्वर, तू अपने धन कूश से मँगवा ले। {68:32} धरती के राजाओं, परमेश्वर के लिए गाओं! हमारे स्वामी के लिए तुम यशगान गाओ! {68:33} परमेश्वर के लिए गाओ! वह रथ पर चढ़कर सनातन आकाशों से निकलता है। तुम उसके शक्तिशाली स्वर को सुनों! {68:34} इस्राएल का परमेश्वर तुम्हारे किसी भी देवों से अधिक बलशाली है। वह जो निज भक्तों को सुदृढ़ बनाता। {68:35} परमेश्वर अपने मन्दिर में अदृभुत है। इस्राएल का परमेश्वर भक्तों को शक्ति और सामर्थ्य देता है। परमेश्वर के गुण गाओ! {i69:1} ‘कुमुदिनी’ नामक धुन पर संगीत निर्देशक के लिए दाऊद का एक भजन। {69:1} हे परमेश्वर, मुझको मेरी सब विपतियों से बचा! मेरे मुँह तक पानी चढ़ आया है। {69:2} कुछ भी नहीं है जिस पर मैं खड़ा हो जाऊँ। मैं दलदल के बीच नीचे धँसता ही चला जा रहा हूँ। मैं नीचे धंस रहा हूँ। मैं अगाध जल में हूँ और मेरे चारों तरफ लहरें पछाड़ खा रही है। बस, मैं डूबने को हूँ। {69:3} सहायता को पुकारते मैं दुर्बल होता जा रहा हूँ। मेरा गला दु; ख रहा है। मैं बाट जोह रहा हूँ तुझसे सहायता पाने और देखते — देखते मेरी आँखें दु; ख रही है। {69:4} मेरे शत्रु! मेरे सिर के बालों से भी अधिक हैं। वे मुझसे व्यर्थ बैर रखते हैं। वे मेरे विनाश की जुगत बहुत करते हैं। मेरे शत्रु मेरे विषय में झूठी बातें बनातें हैं। उन्होंने मुझको झूठे ही चोर बताया। और उन वस्तुओं की भरपायी करने को मुझे विवश किया, जिनको मैंने चुराया नहीं था। {69:5} हे परमेश्वर, तू तो जानता है कि मैंने कुछ अनुचित नहीं किया। मैं अपने पाप तुझसे नहीं छिपा सकता। {69:6} हे मेरे स्वमी, हे सर्वशक्तिमान यहोवा, तू अपने भक्तों को मेरे कारण लज्जित मत होने दें। हे इस्राएल के परमेश्वर, ऐसे उन लोगों को मेरे लिए असमंजस में मत डाल जो तेरी उपासना करते हैं। {69:7} मेरा मुख लाज से झुक गया। यह लाज मैं तेरे लिए ढोता हूँ। {69:8} मेरे ही भाई, मेरे साथ यूँ ही बर्ताव करते हैं। जैसे बर्ताव किसी अजनबी से करते हों। मेरे ही सहोदर, मुझे पराया समझते है। {69:9} तेरे मन्दिर के प्रति मेरी तीव्र लगन ही मुझे जलाये डाल रही है। वे जो तेरा उपहास करते हैं वह मुझ पर आन पडा है। {69:10} मैं तो पुकारता हूँ और उपवास करता हूँ, इसलिए वे मेरी हँसी उड़ाते हैं। {69:11} मैं निज शोक दर्शाने के लिए मोटे वस्रों को पहनता हूँ, और लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं। {69:12} वे जनता के बीच मेरी चर्चायें करतें, और पियक्कड़ मेरे गीत रचा करते हैं। {69:13} हे यहोवा, जहाँ तक मेरी बात है, मेरी तुझसे यह विनती है कि मैं चाहता हूँ; तू मुझे अपना ले! हे परमेश्वर, मैं चाहता हूँ कि तू मुझको प्रेम भरा उत्तर दे। मैं जानता हूँ कि मैं तुझ पर सुरक्षा का भरोसा कर सकता हूँ। {69:14} मुझको दलदल से उबार ले। मुझको दलदल के बीच मत डूबने दे। मुझको मेरे बैरी लोगों से तू बचा ले। तू मुझको इस गहरे पानी से बचा ले। {69:15} बाढ की लहरों को मुझे डुबाने न दे। गहराई को मुझे निगलने न दे। कब्र को मेरे ऊपर अपना मुँह बन्द न करने दे। {69:16} हे यहोवा, तेरी करूण खरी है। तू मुझको निज सम्पूर्ण प्रेम से उत्तर दे। मेरी सहायता के लिए अपनी सम्पूर्ण कृपा के साथ मेरी ओर मुख कर! {69:17} अपने दास से मत मुख मोड़। मैं संकट में पड़ा हूँ! मुझको शीघ्र सहारा दे। {69:18} आ, मेरे प्राण बचा ले। तू मुझको मेरे शत्रुओं से छुड़ा ले। {69:19} तू मेरा निरादर जानता है। तू जानता है कि मेरे शत्रुओं ने मुझे लज्जित किया है। उन्हें मेरे संग ऐसा करते तूने देखा है। {69:20} निन्दा ने मुझको चकनाचूर कर दिया है! बस निन्दा के कारण मैं मरने पर हूँ। मैं सहानुभूति की बाट जोहता रहा, मैं सान्त्वना की बाट जोहता रहा, किन्तु मुझको तो कोई भी नहीं मिला। {69:21} उन्होंने मुझे विष दिया, भोजन नहीं दिया। सिरका मुझे दे दिया, दाखमधु नहीं दिया। {69:22} उनकी मेज खानों से भरी है वे इतना विशाल सहभागिता भोज कर रहे हैं। मैं आशा करता हूँ कि वे खाना उन्हें नष्ट करें। {69:23} वे अंधे हो जायें और उनकी कमर झुक कर दोहरी हो जाये। {69:24} ऐसे लगे कि उन पर तेरा भरपूर क्रोध टूट पड़ा है। {69:25} उनके घरों को तू खाली बना दे। वहाँ कोई जीवित न रहे। {69:26} उनको दण्ड दे, और वे दूर भाग जायें। फिर उनके पास, उनकी बातों के विषय में उनके दर्द और घाव हो। {69:27} उनके बुरे कर्मों का उनको दण्ड दे, जो उन्होंने किये हैं। उनको मत दिखला कि तू और कितना भला हो सकता है। {69:28} जीवन की पुस्तक से उनके नाम मिटा दे। सज्जनों के नामों के साथ तू उनके नाम उस पुस्तक में मत लिख। {69:29} मैं दु: खी हूँ और दर्द में हूँ। हे परमेश्वर, मुझको उबार ले। मेरी रक्षा कर! {69:30} मैं परमेश्वर के नाम का गुण गीतों में गाऊँगा। मैं उसका यश धन्यवाद के गीतों से गाऊँगा। {69:31} परमेश्वर इससे प्रसन्न हो जायेगा। ऐसा करना एक बैल की बलि या पूरे पशु की ही बलि चढ़ाने से अधिक उत्तम है। {69:32} अरे दीन जनों, तुम परमेश्वर की आराधना करने आये हो। अरे दीन लोगों! इन बातों को जानकर तुम प्रसन्न हो जाओगे। {69:33} यहोवा, दीनों और असहायों की सुना करता है। यहोवा उन्हें अब भी चाहता है, जो लोग बंधन में पड़े हैं। {69:34} हे स्वर्ग और हे धरती, हे सागर और इसके बीच जो भी समाया है। परमेश्वर की स्तुती करो! {69:35} यहोवा सिय्योन की रक्षा करेगा! यहोवा यहूदा के नगर का फिर निर्माण करेगा। वे लोग जो इस धरती के स्वामी हैं, फिर वहाँ रहेंगे! {69:36} उसके सेवकों की संताने उस धरती को पायेगी। और ऐसे वे लोग निवास करेंगे जिन्हें उसका नाम प्यारा है। {i70:1} लोगों को याद दिलाने के लिये संगीत निर्देशक को दाऊद का एक पद। {70:1} हे परमेश्वर, मेरी रक्षा कर! हे परमेश्वर, जल्दी कर और मुझको सहारा दे! {70:2} लोग मुझे मार डालने का जतन कर रहे हैं। उन्हें निराश और अपमानित कर दे! ऐसा चाहते हैं कि लोग मेरा बुरा कर डाले। उनका पतन ऐसा हो जाये कि वे लज्जित हो। {70:3} लोगों ने मुझको हँसी ठट्टों में उड़ाया। मैं उनकी पराजय की आस करता हूँ और इस बात की कि उन्हें लज्जा अनुभव हो। {70:4} मुझको यह आस है कि ऐसे वे सभी लोग जो तेरी आराधना करते हैं, वह अति प्रसन्न हों। वे सभी लोग तेरी सहायता की आस रहते हैं वे तेरी सदा स्तुती करते रहें। {70:5} हे परमेश्वर, मैं दीन और असहाय हूँ। जल्दी कर! आ, और मुझको सहारा दे! हे परमेश्वर, तू ही बस ऐसा है जो मुझको बचा सकता है, अधिक देर मत कर! {71:1} हे यहोवा, मुझको तेरा भरोसा है, इसलिए मैं कभी निराश नहीं होऊँगा। {71:2} अपनी नेकी से तू मुझको बचायेगा। तू मुझको छुड़ा लेगा। मेरी सुन। मेरा उद्धार कर। {71:3} तू मेरा गढ़ बन। सुरक्षा के लिए ऐसा गढ़ जिसमें मैं दौड़ जाऊँ। मेरी सुरक्षा के लिए तू आदेश दे, क्योंकि तू ही तो मेरी चट्टान है; मेरा शरणस्थल है। {71:4} मेरे परमेश्वर, तू मुझको दुष्ट जनों से बचा ले। तू मुझको क्रूरों कुटिल जनों से छुड़ा ले। {71:5} मेरे स्वामी, तू मेरी आशा है। मैं अपने बचपन से ही तेरे भरोसे हूँ। {71:6} जब मैं अपनी माता के गर्भ में था, तभी से तेरे भरोसे था। जिस दिन से मैंने जन्म धारण किया, मैं तेरे भरोसे हूँ। मैं तेरी प्रर्थना सदा करता हूँ। {71:7} मैं दूसरे लोगों के लिए एक उदाहरण रहा हूँ। क्योंकि तू मेरा शक्ति स्रोत रहा है। {71:8} उन अद्भुत कर्मो को सदा गाता रहा हूँ, जिनको तू करता है। {71:9} केवल इस कारण की मैं बूढ़ा हो गया हूँ मुझे निकाल कर मत फेंक। मैं कमजोर हो गया हूँ मुझे मत छोड़। {71:10} सचमुच, मेरे शत्रुओं ने मेरे विरूद्ध कुचक्र रच डाले हैं। सचमुच वे सब इकटठे हो गये हैं, और उनकी योजना मुझको मार डालने की है। {71:11} मेरे शत्रु कहते हैं, “परमेश्वर, ने उसको त्याग दिया है। जा, उसको पकड़ ला! कोई भी व्यक्ति उसे सहायता न देगा।” {71:12} हे परमेश्वर, तू मुझको मत बिसरा! हे परमेश्वर, जल्दी कर! मुझको सहारा दे! {71:13} मेरे शत्रुओं को तू पूरी तरह से पराजित कर दे! तू उनका नाश कर दे! मुझे कष्ट देने का वे यत्न कर रहे हैं। वे लज्जा अनुभव करें ओर अपमान भोगें। {71:14} फिर मैं तो तेरे ही भरोसे, सदा रहूँगा। और तेरे गुण मैं अधिक और अधिक गाऊँगा। {71:15} सभी लोगों से, मैं तेरा बखान करूंगा कि तू कितना उत्तम है। उस समय की बातें मैं उनको बताऊँगा, जब तूने ऐसे मुझको एक नहीं अनगिनित अवसर पर बचाया था। {71:16} हे यहोवा, मेरे स्वामी। मैं तेरी महानता का वर्णन करूँगा। बस केवल मैं तेरी और तेरी ही अच्छाई की चर्चा करूँगा। {71:17} हे परमेश्वर, तूने मुझको बचपन से ही शिक्षा दी। मैं आज तक बखानता रहा हूँ, उन अद्भुत कर्मो को जिनको तू करता है! {71:18} मैं अब बूढा हो गया हूँ और मेरे केश श्वेत है। किन्तु मैं जानता हूँ कि तू मुझको नहीं तजेगा। हर नयी पीढ़ी से, मैं तेरी शक्ति का और तेरी महानता का वर्णन करूँगा। {71:19} हे परमेश्वर, तेरी धार्मिकता आकाशों से ऊँची है। हे परमेश्वर, तेरे समान अन्य कोई नहीं। तूने अदभुत आश्चर्यपूर्ण काम किये हैं। {71:20} तूने मुझे बुरे समय और कष्ट देखने दिये। किन्तु तूने ही मुझे उन सब से बचा लिया और जीवित रखा है। इसका कोई अर्थ नहीं, मैं कितना ही गहरा डूबा तूने मुझको मेरे संकटों से उबार लिया। {71:21} तू ऐसे काम करने की मुझको सहायता दे जो पहले से भी बड़े हो। मुझको सुख चैन देता रह। {71:22} वीणा के संग, मैं तेरे गुण गाऊँगा। हे मेरे परमेश्वर, मैं यह गाऊँगा कि तुझ पर भरोसा रखा जा सकता है। मैं उसके लिए गीत अपनी सितार पर बजाया करूँगा जो इस्रएल का पवित्र यहोवा है। {71:23} मेरे प्राणों की तूने रक्षा की है। मेरा मन मगन होगा और अपने होंठों से, मैं प्रशंसा का गीत गाऊँगा। {71:24} मेरी जीभ हर घड़ी तेरी धार्मिकता के गीत गाया करेगी। ऐसे वे लोग जो मुझको मारना चाहते हैं, वे पराजित हो जायेंगे और अपमानित होंगे। {i72:1} दाऊद के लिये। {72:1} हे परमेश्वर, राजा की सहायता कर ताकि वह भी तेरी तरह से विवेकपूर्ण न्याय करे। राजपुत्र की सहायता कर ताकि वह तेरी धार्मिकता जान सके। {72:2} राजा की सहायता कर कि तेरे भक्तों का वह निष्पक्ष न्याय करें। सहायता कर उसकी कि वह दीन जनों के साथ उचित व्यवहार करे। {72:3} धरती पर हर कहीं शांती और न्याय रहे। {72:4} राजा, निर्धन लोगों के प्रति न्यायपूर्ण रहे। वह असहाय लोगों की सहायता करे। वे लोग दण्डित हो जो उनको सताते हो। {72:5} मेरी यह कामना है कि जब तक सूर्य आकाश में चमकता है, और चन्द्रमा आकाश में है। लोग राजा का भय मानें। मेरी आशा है कि लोग उसका भय सदा मानेंगे। {72:6} राजा की सहायता, धरती पर पड़ने वाली बरसात बनने में कर। उसकी सहायता कर कि वह खेतों में पड़ने वाली बौछार बने। {72:7} जब तक वह राजा है, भलाई फूले — फले। जब तक चन्द्रमा है, शांति बनी रहे। {72:8} उसका राज्य सागर से सागर तक तथा परात नदी से लेकर सुदूर धरती तक फैल जाये। {72:9} मरूभूमि के लोग उसके आगे झुके। और उसके सब शत्रु उसके आगे औधे मुँह गिरे हुए धरती पर झुकें। {72:10} तर्शीश का राजा और दूर देशों के राजा उसके लिए उपहार लायें। शेबा के राजा और सबा के राजा उसको उपहार दे। {72:11} सभी राजा हमारे राजा के आगे झुके। सभी राष्ट्र उसकी सेवा करते रहें। {72:12} हमारा राजा असहायों का सहायक है। हमारा राजा दीनों और असहाय लोगों को सहारा देता है। {72:13} दीन, असहाय जन उसके सहारे हैं। यह राजा उनको जीवित रखता है। {72:14} यह राजा उनको उन लोगों से बचाता है, जो क्रूर हैं और जो उनको दु: ख देना चाहते हैं। राजा के लिये उन दीनों का जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। {72:15} राजा दीर्घायु हो! और शेबा से सोना प्राप्त करें। राजा के लिए सदा प्रार्थना करते रहो, और तुम हर दिन उसको आशीष दो। {72:16} खेत भरपूर फसल दे। पहाड़ियाँ फसलों से ढक जायें। ये खेत लबानोन के खेतों से उपजाऊँ हो जायें। नगर लोगों की भीड़ से भर जाये, जैसे खेत घनि घास से भर जाते हैं। {72:17} राजा का यश सदा बना रहे। लोग उसके नाम का स्मरण तब तक करते रहें, जब तक सूर्य चमकता है। उसके कारण सारी प्रजा धन्य हो जाये और वे सभी उसको आशीष दे। {72:18} यहोवा परमेश्वर के गुण गाओं, जो इस्राएल का परमेश्वर है! वही परमेश्वर ऐसे आश्चर्यकर्म कर सकता है। {72:19} उसके महिमामय नाम की प्रशंस सदा करों! उसकी महिमा समस्त संसार में भर जाये! आमीन और आमीन! {72:20} (यिशै के पुत्र दाऊद की प्रार्थनाएं समाप्त हुई।) {i73:1} तीसरा भाग (भजनसंहिता 73-89) {73:1} आसाप का स्तुति गीत। सचमुच, इस्राएल के प्रति परमेश्वर भला है। परमेश्वर उन लोगों के लिए भला होता है जिनके हृदय स्वच्छ है। {73:2} मैं तो लगभग फिसल गया था और पाप करने लगा। {73:3} जब मैंने देखा कि पापी सफल हो रहे हैं और शांति से रह रहे हैं, तो उन अभिमानी लोगों से मुझको जलन हुयी। {73:4} वे लोग स्वस्थ हैं उन्हें जीवन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। {73:5} वे अभिमानी लोग पीड़ायें नहीं उठाते है। जैसे हम लोग दु; ख झेलते हैं, वैसे उनको औरों की तरह यातनाएँ नहीं होती। {73:6} इसलिए वे अहंकार से भरे रहते हैं। और वे घृणा से भरे हुए रहते हैं। ये वैसा ही साफ दिखता है, जैसे रत्न और वे सुन्दर वस्त्र जिनको वे पहने हैं। {73:7} वे लोग ऐसे है कि यदि कोई वस्तु देखते हैं और उनको पसन्द आ जाती है, तो उसे बढ़कर झपट लेते हैं। वे वैसे ही करते हैं, जैसे उन्हें भाता है। {73:8} वे दूसरों के बारें में क्रूर बातें और बुरी बुरी बातें कहते है। वे अहंकारी और हठी है। वे दूसरे लोगों से लाभ उठाने का रास्ता बनाते है। {73:9} अभिमानी मनुष्य सोचते हैं वे देवता हैं! वे अपने आप को धरती का शासक समझते हैं। {73:10} यहाँ तक कि परमेश्वर के जन, उन दुष्टों की ओर मुड़ते और जैसा वे कहते है, वैसा विश्वास कर लेते हैं। {73:11} वे दुष्ट जन कहते हैं, “हमारे उन कर्मो को परमेश्वर नहीं जानता! जिनकों हम कर रहे हैं!” {73:12} वे मनुष्य अभिमान और कुटिल हैं, किन्तु वे निरन्तर धनी और अधिक धनी होते जा रहे हैं। {73:13} सो मैं अपना मन पवित्र क्यों बनाता रहूँ? अपने हाथों को सदा निर्मल क्यों करता रहूँ? {73:14} हे परमेश्वर, मैं सारे ही दिन दु: ख भोगा करता हूँ। तू हर सुबह मुझको दण्ड देता है। {73:15} हे परमेश्वर, मैं ये बातें दूसरो को बताना चाहता था। किन्तु मैं जानता था और मैं ऐसे ही तेरे भक्तों के विरूद्ध हो जाता था। {73:16} इन बातों को समझने का, मैंने जतन किया किन्तु इनका समझना मेरे लिए बहुत कठिन था, {73:17} जब तक मैं तेरे मन्दिर में नहीं गया। मैं परमेश्वर के मन्दिर में गया और तब मैं समझा। {73:18} हे परमेश्वर, सचमुच तूने उन लोगों को भयंकर परिस्थिति में रखा है। उनका गिर जाना बहुत ही सरल है। उनका नष्ट हो जाना बहुत ही सरल है। {73:19} सहसा उन पर विपत्ति पड़ सकती है, और वे अहंकारी जन नष्ट हो जाते हैं। उनके साथ भयंकर घटनाएँ घट सकती हैं, और फिर उनका अंत हो जाता है। {73:20} हे यहोवा, वे मनुष्य ऐसे होंगे जैसे स्वप्न जिसको हम जागते ही भुल जाते हैं। तू ऐसे लोगों को हमारे स्वप्न के भयानक जन्तु की तरह अदृश्य कर दे। {73:21} मैं अज्ञान था। मैंने धनिकों और दुष्ट लोगों पर विचारा, और मैं व्याकुल हो {73:22} गया। हे परमेश्वर, मैं तुझ पर क्रोधित हुआ! मैं निर्बुद्धि जानवर सा व्यवहार किया। {73:23} वह सब कुछ मेरे पास है, जिसकी मुझे अपेक्षा है। मैं तेरे साथ हरदम हूँ। हे परमेश्वर, तू मेरा हाथ थामें है। {73:24} हे परमेश्वर, तू मुझे मार्ग दिखलाता, और मुझे सम्मति देता है। अंत में तू अपनी महिमा में मेरा नेतृत्व करेगा। {73:25} हे परमेश्वर, स्वर्ग में बस तू ही मेरा है, और धरती पर मुझे क्या चाहिए, जब तू मेरे साथ है {73:26} चाहे मेरा मन टूट जाये और मेरी काया नष्ट हो जाये किन्तु वह चट्टान मेरे पास है, जिसे मैं प्रेम करता हूँ। परमेश्वर मेरे पास सदा है! {73:27} परमेश्वर, जो लोग तुझको त्यागते हैं, वे नष्ट हो जाते है। जिनका विश्वास तुझमें नहीं तू उन लोगों को नष्ट कर देगा। {73:28} किन्तु, मैं परमेश्वर के निकट आया। मेरे साथ परमेश्वर भला है, मैंने अपना सुरक्षास्थान अपने स्वामी यहोवा को बनाया है। हे परमेश्वर, मैं उन सभी बातों का बखान करूँगा जिनको तूने किया है। {i74:1} आसाप का एक प्रगीत। {74:1} हे परमेश्वर, क्या तूने हमें सदा के लिये बिसराया है? क्योंकि तू अभी तक अपने निज जनों से क्रोधित है? {74:2} उन लोगों को स्मरण कर जिनको तूने बहुत पहले मोल लिया था। हमको तूने बचा लिया था। हम तेरे अपने हैं। याद कर तेरा निवास सिय्योन के पहाड़ पर था। {74:3} हे परमेश्वर, आ और इन अति प्राचीन खण्डहरों से हो कर चल। तू उस पवित्र स्थान पर लौट कर आजा जिसको शत्रु ने नष्ट कर दिया है। {74:4} मन्दिर में शत्रुओं ने विजय उद्घोष किया। उन्होंने मन्दिर में निज झंडों को यह प्रकट करने के लिये गाड़ दिया है कि उन्होंने युद्ध जीता है। {74:5} शत्रुओं के सैनिक ऐसे लग रहे थे, जैसे कोई खुरपी खरपतवार पर चलाती हो। {74:6} हे परमेश्वर, इन शत्रु सैनिकों ने निज कुल्हाडे और फरसों का प्रयोग किया, और तेरे मन्दिर की नक्काशी फाड़ फेंकी। {74:7} परमेश्वर इन सैनिकों ने तेरा पवित्र स्थान जला दिया। तेरे मन्दिर को धूल में मिला दिया, जो तेरे नाम को मान देने हेतु बनाया गया था। {74:8} उस शत्रु ने हमको पूरी तरह नष्ट करने की ठान ली थी। सो उन्होंने देश के हर पवित्र स्थल को फूँक दिया। {74:9} कोई संकेत हम देख नहीं पाये। कोई भी नबी बच नहीं पाया था। कोई भी जानता नहीं था क्या किया जाये। {74:10} हे परमेश्वर, ये शत्रु कब तक हमारी हँसी उड़ायेंगे? क्या तू इन शत्रुओं को तेरे नाम का अपमान सदा सर्वदा करने देगा? {74:11} हे परमेश्वर, तूने इतना कठिन दण्ड हमकों क्यों दिया? तूने अपनी महाशक्ति का प्रयोग किया और हमें पूरी तरह नष्ट किया! {74:12} हे परमेश्वर, बहुत दिनों से तू ही हमारा शासक रहा। इस देश में तूने अनेक युद्ध जीतने में हमारी सहायता की। {74:13} हे परमेश्वर, तूने अपनी महाशक्ति से लाल सागर के दो भाग कर दिये। {74:14} तूने विशालकाय समुद्री दानवों को पराजित किया! तूने लिव्यातान के सिर कुचल दिये, और उसके शरीर को जंगली पशुओं को खाने के लिये छोड़ दिया। {74:15} तूने नदी, झरने रचे, फोड़कर जल बहाया। तूने उफनती हुई नदियों को सुखा दिया। {74:16} हे परमेश्वर, तू दिन का शासक है, और रात का भी शासक तू ही है। तूने ही चाँद और सूरज को बनाया। {74:17} तू धरती पर सब की सीमाएं बाँधता है। तूने ही गर्मी और सर्दी को बनाया। {74:18} हे परमेश्वर, इन बातों को याद कर। और याद कर कि शत्रु ने तेरा अपमान किया है। वे मूर्ख लोग तेरे नाम से बैर रखते हैं! {74:19} हे परमेश्वर, उन जंगली पशुओं को निज कपोत मत लेने दे! अपने दीन जनों को तू सदा मत बिसरा। {74:20} हमने जो आपस में वाचा की है उसको याद कर, इस देश में हर किसी अँधेरे स्थान पर हिंसा है। {74:21} हे परमेश्वर, तेरे भक्तों के साथ अत्याचार किये गये, अब उनको और अधिक मत सताया जाने दे। तेरे असहाय दीन जन, तेरे गुण गाते है। {74:22} हे परमेश्वर, उठ और प्रतिकार कर! स्मरण कर की उन मूर्ख लोगों ने सदा ही तेरा अपमान किया है। {74:23} वे बुरी बातें मत भूल जिन्हें तेरे शत्रुओं ने प्रतिदिन तेरे लिये कही। भूल मत कि वे किस तरह से युद्ध करते समय गुर्राये। {i75:1} ‘नष्ट मत कर’ नामक धुन पर संगीत निर्देशक के लिये आसाप का एक स्तुति गीत। {75:1} हे परमेश्वर, हम तेरी प्रशंसा करते हैं! हम तेरे नाम का गुणगान करते हैं! तू समीप है और लोग तेरे उन अद्भत कर्मो का जिनको तू करता है, बखान करते हैं। {75:2} परमेश्वर, कहता है, “मैंने न्याय का समय चुन लिया, मैं निष्पक्ष होकर के न्याय करूँगा। {75:3} धरती और धरती की हर वस्तु डगमगा सकती है और गिरने को तैयार हो सकती है, किन्तु मैं ही उसे स्थिर रखता हूँ। {75:4} “कुछ लोग बहुत ही अभिमानी होते हैं, वे सोचते रहते है कि वे बहुत शाक्तिशाली और महत्वपूर्ण है। {75:5} लेकिन उन लोगों को बता दो, ‘डींग मत हाँकों!’ ‘इतने अभिमानी मत बने रह!’” {75:6} इस धरती पर सचुमच, कोई भी मनुष्य नीच को महान नहीं बना सकता। {75:7} परमेश्वर न्याय करता है। परमेश्वर इसका निर्णय करता है कि कौन व्यक्ति महान होगा। परमेश्वर ही किसी व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर बिठाता है। और किसी दूसरे को निची दशा में पहुँचाता है। {75:8} परमेश्वर दुष्टों को दण्ड देने को तत्पर है। परमेश्वर के पास विष मिला हुआ मधु पात्र है। परमेश्वर इस दाखमधु (दण्ड) को उण्डेलता है और दुष्ट जन उसे अंतिम बूँद तक पीते हैं। {75:9} मैं लोगों से इन बातों का सदा बखान करूँगा। मैं इस्राएल के परमेश्वर के गुण गाऊँगा। {75:10} मैं दुष्ट लोगों की शक्ति को छीन लूँगा, और मैं सज्जनों को शक्ति दूँगा। {i76:1} तार वाद्यों के संगीत निर्देशक के लिये आसाप का एक गीत। {76:1} यहूदा के लोग परमेश्वर को जानते हैं। इस्राएल जानता है कि सचमुच परमेश्वर का नाम बड़ा है। {76:2} परमेश्वर का मन्दिर शालेम में स्थित है। परमेश्वर का घर सिय्योन के पर्वत पर है। {76:3} उस जगह पर परमेश्वर ने धनुष — बाण, ढाल, तलवारे और युद्ध के दूसरे शस्त्रों को तोड़ दिया। {76:4} हे परमेश्वर, जब तू उन पर्वतों से लौटता है, जहाँ तूने अपने शत्रुओं को हरा दिया था, तू महिमा से मण्डित रहता है। {76:5} उन सैनिकों ने सोचा की वे बलशाली है। किन्तु वे अब रणक्षेत्रों में मरे पड़े हैं। उनके शव जो कुछ भी उनके साथ था, उस सब कुछ के रहित पड़े हैं। उन बलशाली सैनिकों में कोई ऐसा नहीं था, जो आप स्वयं की रक्षा कर पाता। {76:6} याकूब का परमेश्वर उन सैनिकों पर गरजा और वह सेना रथों और अश्वों सहित गिरकर मर गयी। {76:7} हे परमेश्वर, तू भय विस्मयपूर्ण है! जब तू कुपित होता है तेरे सामने कोई व्यक्ति टिक नहीं सकता। {76:8} न्यायकर्ता के रूप में यहोवा ने खड़े होकर अपना निर्णय सुना दिया। परमेश्वर ने धरती के नम्र {76:9} लोगों को बचाया। स्वर्ग से उसने अपना निर्णय दिया और सम्पूर्ण धरती शब्द रहित और भयभीत हो गई। {76:10} हे परमेश्वर, जब तू दुष्टों को दण्ड देता है। लोग तेरा गुण गाते हैं। तू अपना क्रोध प्रकट करता है और शेष बचे लोग बलशाली हो जाते हैं। {76:11} लोग परमेश्वर की मन्नतें मानेंगे और वे उन वस्तुओं को जिनकी मन्नतें उन्होंने मानीं हैं, यहोवा को अर्पण करेंगे। लोग हर किसी स्थान से उस परमेश्वर को उपहार लायेंगे। {76:12} परमेश्वर बड़े बड़े सम्राटों को हराता है। धरती के सभी शासकों उसका भय मानों। {i77:1} यदूतून राग पर संगीत निर्देशक के लिये आसाप का एक पद। {77:1} मैं सहायता पाने के लिये परमेश्वर को पुकारूँगा। हे परमेश्वर, मैं तेरी विनती करता हूँ, तू मेरी सुन ले! {77:2} हे मेरे स्वामी, मुझ पर जब दु: ख पड़ता है, मैं तेरी शरण में आता हूँ। मैं सारी रात तुझ तक पहुँचने में जुझा हूँ। मेरा मन चैन पाने को नहीं माना। {77:3} मैं परमेश्वर का मनन करता हूँ, और मैं जतन करता रहता हूँ कि मैं उससे बात करूँ और बता दूँ कि मुझे कैसा लग रहा है। किन्तु हाय मैं ऐसा नहीं कर पाता। {77:4} तू मुझे सोने नहीं देगा। मैंने जतन किया है कि मैं कुछ कह डालूँ, किन्तु मैं बहुत घबराया था। {77:5} मैं अतीत की बातें सोचते रहा। बहुत दिनों पहले जो बातें घटित हुई थी उनके विषय में मैं सोचता ही रहा। {77:6} रात में, मैं निज गीतों के विषय़ में सोचता हूँ। मैं अपने आप से बातें करता हूँ, और मैं समझने का यत्न करता हूँ। {77:7} मुझको यह हैरानी है, “क्या हमारे स्वमी ने हमे सदा के लिये त्यागा है क्या वह हमको फिर नहीं चाहेगा {77:8} क्या परमेश्वर का प्रेम सदा को जाता रहा क्या वह हमसे फिर कभी बात करेगा {77:9} क्या परमेश्वर भूल गया है कि दया क्या होती है क्या उसकी करूणा क्रोध में बदल गयी है” {77:10} फिर यह सोचा करता हूँ, “वह बात जो मुझे खाये डाल रही है: ‘क्या परम परमेश्वर आपना निज शाक्ति खो बैठा है’?” {77:11} याद करो वे शाक्ति भरे काम जिनको यहोवा ने किये। हे परमेश्वर, जो काम तूने बहुत समय पहले किये मुझको याद है। {77:12} मैंने उन सभी कामों को जिनको तूने किये है मनन किया। जिन कामों को तूने किया मैंने सोचा है। {77:13} हे परमेश्वर, तेरी राहें पवित्र हैं। हे परमेश्वर, कोई भी महान नहीं है, जैसा तू महान है। {77:14} तू ही वह परमेश्वर है जिसने अद्भुत कार्य किये। तू ने लोगों को अपनी निज महाशक्ति दर्शायी। {77:15} तूने निज शक्ति का प्रयोग किया और भक्तों को बचा लिया। तूने याकूब और यूसुफ की संताने बचा ली। {77:16} हे परमेश्वर, तुझे सागर ने देखा और वह डर गया। गहरा समुद्र भय से थर थर काँप उठा। {77:17} सघन मेघों से उनका जल छूट पड़ा था। ऊँचे मेघों से तीव्र गर्जन लोगों ने सुना। फिर उन बादलों से बिजली के तेरे बाण सारे बादलों में कौंध गये। {77:18} कौंधती बिजली में झँझावान ने तालियाँ बजायी जगत चमक — चमक उठा। धरती हिल उठी और थर थर काँप उठी। {77:19} हे परमेश्वर, तू गहरे समुद्र में ही पैदल चला। तूने चलकर ही सागर पार किया। किन्तु तूने कोई पद चिन्ह नहीं छोड़ा। {77:20} तूने मुसा और हारून का उपयोग निज भक्तों की अगुवाई भेड़ों के झुण्ड की तरह करने में किया। {i78:1} आसाप का एक गीत। {78:1} मेरे भक्तों, तुम मेरे उपदेशों को सुनो। उन बातों पर कान दो जिन्हें मैं बताना हूँ। {78:2} मैं तुम्हें यह कथा सुनाऊँगा। मैं तुम्हें पुरानी कथा सुनाऊँगा। {78:3} हमने यह कहानी सुनी है, और इसे भली भाँति जानते हैं। यह कहानी हमारे पूर्वजों ने कही। {78:4} इस कहानी को हम नहीं भूलेंगे। हमारे लोग इस कथा को अगली पीढ़ी को सुनाते रहेंगे। हम सभी यहोवा के गुण गायेंगे। हम उन के अद्भुत कर्मो का जिनको उसने किया है बखान करेंगे। {78:5} यहोवा ने याकूब से वाचा किया। परमेश्वर ने इस्राएल को व्यवस्था का विधान दिया, और परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों को आदेश दिया। उसने हमारे पूर्वजों को व्यवस्था का विधान अपने संतानों को सिखाने को कहा। {78:6} इस तरह लोग व्यवस्था के विधान को जानेंगे। यहाँ तक कि अन्तिम पीढ़ी तक इसे जानेगी। नयी पीढ़ी जन्म लेगी और पल भर में बढ़ कर बड़े होंगे, और फिर वे इस कहानी को अपनी संतानों को सुनायेंगे। {78:7} अत: वे सभी लोग यहोवा पर भरोसा करेंगे। वे उन शाक्तिपूर्ण कामों को नहीं भूलेंगे जिनको परमेश्वर ने किया था। वे ध्यान से रखवाली करेंगे और परमेश्वर के आदेशों का अनुसरण करेंगे। {78:8} अत: लोग अपनी संतानों को परमेश्वर के आदेशों को सिखायेंगे, तो फिर वे संतानें उनके पूर्वजों जैसे नहीं होंगे। उनके पूर्वजों ने परमेश्वर से अपना मुख मोड़ा और उसका अनुसरण करने से इन्कार किया, वे लोग हठी थे। वे परमेश्वर की आत्मा के भक्त नहीं थे। {78:9} एप्रैम के लोगे शस्त्र धारी थे, किन्तु वे युद्ध से पीठ दिखा गये। {78:10} उन्होंने जो यहोवा से वाचा किया था पाला नहीं। वे परमेश्वर के सीखों को मानने से मुकर गये। {78:11} एप्रैम के वे लोग उन बड़ी बातों को भूल गए जिन्हें परमेश्वर ने किया था। वे उन अद्भुत बातों को भूल गए जिन्हें उसने उन्हें दिखायी थी। {78:12} परमेश्वर ने उनके पूर्वजों को मिस्र के सोअन में निज महाशक्ति दिखायी। {78:13} परमेश्वर ने लाल सागर को चीर कर लोगों को पार उतार दिया। पानी पक्की दीवार सा दोनों ओर खड़ा रहा। {78:14} हर दिन उन लोगों को परमेश्वर ने महा बादल के साथ अगुवाई की। हर रात परमेश्वर ने आग के लाट के प्रकाश से राहा दिखाया। {78:15} परमेश्वर ने मरूस्थल में चट्टान को फाड़ कर गहरे धरती के निचे से जल दिया। {78:16} परमेश्वर चट्टान से जलधारा वैसे लाया जैसे कोई नदी हो! {78:17} किन्तु लोग परमेश्वर के विरोध में पाप करते रहे। वे मरूस्थल तक में, परमपरमेश्वर के विरूद्ध हो गए। {78:18} फिर उन लोगों ने परमेश्वर को परखने का निश्चय किया। उन्होंने बस अपनी भूख मिटाने के लिये परमेश्वर से भोजन माँगा। {78:19} परमेश्वर के विरूद्ध वे बतियाने लगे, वे कहने लगे, “कया मरुभूमि में परमेश्वर हमें खाने को दे सकता है {78:20} परमेश्वर ने चट्टान पर चोट की और जल का एक रेला बाहर फूट पड़ा। निश्चय ही वह हमको कुछ रोटी और माँस दे सकता है।” {78:21} यहोवा ने सुन लिया जो लोगों ने कहा था। याकूब से परमेश्वर बहुत ही कुपित था। इस्राएल से परमेश्वर बहुत ही कुपित था। {78:22} क्यों? क्योंकि लोगों ने उस पर भरोसा नहीं रखा था, उन्हें भरोसा नहीं था, कि परमेश्वर उन्हें बचा सकता है। {78:23} किन्तु तब भी परमेश्वर ने उन पर बादल को उघाड़ दिया, उऩके खाने के लिय़े नीचे मन्ना बरसा दिया। {78:24} यह ठीक वैसे ही हुआ जैसे अम्बर के द्वार खुल जाये और आकाश के कोठे से बाहर अन्न उँडेला हो। {78:25} लोगों ने वह स्वर्गदूत का भोजन खाया। उन लोगों को तृप्त करने के लिये परमेश्वर ने भरपूर भोजन भेजा। {78:26} फिर परमेश्वर ने पूर्व से तीव्र पवन चलाई और उन पर बटेरे वर्षा जैसे गिरने लगी। {78:27} तिमान की दिशा से परमेश्वर की महाशक्ति ने एक आँधी उठायी और नीला आकाश काला हो गया क्योंकि वहाँ अनगिनत पक्षी छाए थे। {78:28} वे पक्षी ठीक डेरे के बीच में गिरे थे। वे पक्षी उन लोगों के डेरों के चारों तरफ गिरे थे। {78:29} उनके पास खाने को भरपूर हो गया, किन्तु उनकी भूख ने उनसे पाप करवाये। {78:30} उन्होंने अपनी भूख पर लगाम नहीं लगायी। सो उन्होंने उन पक्षियों को बिना ही रक्त निकाले, बटेरो को खा लिया। {78:31} सो उन लोगों पर परमेश्वर अति कुपीत हुआ और उनमें से बहुतों को मार दिया। उसने बलशाली युवकों तो मृत्यु का ग्रास बना दिया। {78:32} फिर भी लोग पाप करते रहे! वे उन अदूभुत कर्मो के भरोसा नहीं रहे, जिनको परमेश्वर कर सकता है। {78:33} सो परमेश्वर ने उनके व्यर्थ जीवन को किसी विनाश से अंत किया। {78:34} जब कभी परमेश्वर ने उनमें से किसी को मारा, वे बाकि परमेश्वर की ओर लौटने लगे। वे दौड़कर परमेश्वर की ओर लौट गये। {78:35} वे लोग याद करेंगे कि परमेश्वर उनकी चट्टान रहा था। वे याद करेंगे कि परम परमेश्वर ने उनकी रक्षा की। {78:36} वैसे तो उन्होंने कहा था कि वे उससे प्रेम रखते हैं। उन्हेंने झूठ बोला था। ऐसा कहने में वे सच्चे नहीं थे। {78:37} वे सचमुच मन से परमेश्वर के साथ नहीं थे। वे वाचा के लिये सच्चे नहीं थे। {78:38} किन्तु परमेश्वर करूणापूर्ण था। उसने उन्हें उनके पापों के लिये क्षमा किया, और उसने उनका विनाश नहीं किया। परमेश्वर ने अनेकों अवसर पर अपना क्रोध रोका। परमेश्वर ने अपने को अति कुपित होने नहीं दिया। {78:39} परमेश्वर को याद रहा कि वे मात्र मनुष्य हैं। मनुष्य केवल हवा जैसे है जो बह कर चली जाती है और लौटती नहीं। {78:40} हाय, उन लोगों ने मरूभूमि में परमेश्वर को कष्ट दिया! उन्होंने उसको बहुत दु: खी किया था! {78:41} परमेश्वर के धैर्य को उन लोगों ने फिर परखा, सचमुच इस्राएल के उस पवित्र को उन्होंने कष्ट दिया। {78:42} वे लोग परमेश्वर की शक्ति को भूल गये। वे लोग भुल गये कि परमेश्वर ने उनको कितनी ही बार शत्रुओं से बचाया। {78:43} वे लोग मिस्र की अद्भुत बातों को और सोअन के क्षेत्रों के चमत्कारों को भूल गये। {78:44} उनकी नदियों को परमेश्वर ने खून में बदल दिया था! जिनका जल मिस्र के लोग पी नहीं सकते थे। {78:45} परमेश्वर ने भिड़ों के झुण्ड भेजे थे जिन्होंने मिस्र के लोगों को डसा। परमेश्वर ने उन मेढकों को भेजा जिन्होंने मिस्त्रियों के जीवन को उजाड़ दिया। {78:46} परमेश्वर ने उनके फसलों को टिड्डों को दे डाला। उनके दूसरे पौधे टिड्डियो को दे दिये। {78:47} परमेश्वर ने मिस्त्रियों के अंगूर के बाग ओलों से नष्ट किये, और पाला गिरा कर के उनके वृक्ष नष्ट कर दिये। {78:48} परमेश्वर ने उनके पशु ओलों से मार दिये और बिजलियाँ गिरा कर पशु धन नष्ट किये। {78:49} परमेश्वर ने मिस्र के लोगों को अपना प्रचण्ड क्रोध दिखाया। उनके विरोध में उसने अपने विनाश के दूत भेजे। {78:50} परमेश्वर ने क्रोध प्रकट करने के लिये एक राह पायी। उनमें से किसी को जीवित रहने नहीं दिया। हिंसक महामारी से उसने सारे ही पशुओं को मर जाने दिया। {78:51} परमेश्वर ने मिस्र के हर पहले पुत्र को मार डाला। हाम के घराने के हर पहले पुत्र को उसने मार डाला। {78:52} फिर उसने इस्राएल की चरवाहे के समान अगुवाई की। परमेश्वर ने अपने लोगों को ऐसे राह दिखाई जैसे जंगल में भेड़ों कि अगुवाई की है। {78:53} वह अपनेनिज लोगों को सुरक्षा के साथ ले चला। परमेश्वर के भक्तों को किसी से डर नहीं था। परमेश्वर ने उनके शत्रुओं को लाल सागर में हुबाया। {78:54} परमेश्वर अपने निज भक्तों को अपनी पवित्र धरती पर ले आया। उसने उन्हें उस पर्वत पर लाया जिसे उसने अपनी ही शक्ति से पाया। {78:55} परमेश्वर ने दूसरी जातियों को वह भूमि छोड़ने को विवश किया। परमेश्वर ने प्रत्येक घराने को उनका भाग उस भूमि में दिया। इस तरह इस्राएल के घराने अपने ही घरों में बस गये। {78:56} इतना होने पर भी इस्राएल के लोगों ने परम परमेश्वर को परखा और उसको बहुत दु: खी किया। वे लोग परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं करते थे। {78:57} इस्राएल के लोग परमेश्वर से भटक कर विमुख हो गये थे। वे उसके विरोध में ऐसे ही थे, जैसे उनके पूर्वज थे। वे इतने बुरे थे जैसे मुड़ा धनुष। {78:58} इस्राएल के लोगों ने ऊँचे पूजा स्थल बनाये और परमेश्वर को कुपित किया। उन्होंने देवताओं की मूर्तियाँ बनाई और परमेश्वर को ईर्ष्यालु बनाया। {78:59} परमेश्वर ने यह सुना और बहुत कुपित हुआ। उसने इस्राएल को पूरी तरह नकारा! {78:60} परमेश्वर ने शिलोह के पवित्र तम्बू को त्याग दिया। यह वही तम्बू था जहाँ परमेश्वर लोगों के बीच में रहता था। {78:61} फिर परमेश्वर ने उसके निज लोगों को दूसरी जातियों को बंदी बनाने दिया। परमेश्वर के “सुन्दर रत्न” को शत्रुओं ने छीन लिया। {78:62} परमेश्वर ने अपने ही लोगों (इस्राएली) पर निज क्रोध प्रकट किया। उसने उनको युद्ध में मार दिया। {78:63} उनके युवक जलकर राख हुए, और वे कन्याएँ जो विवाह योग्य थीं, उनके विवाह गीत नहीं गाये गए। {78:64} याजक मार डाले गए, किन्तु उनकी विधवाएँ उनके लिए नहीं रोई। {78:65} अंत में, हमारा स्वामी उठ बैठा जैसे कोई नींद से जागकर उठ बैठता हो। या कोई योद्धा दाखमधु के नशे से होश में आया हो। {78:66} फिर तो परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को मारकर भगा दिया और उन्हें पराजित किया। परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को हरा दिया और सदा के लिये अपमानित किया। {78:67} किन्तु परमेश्वर ने यूसुफ के घराने को त्याग दिया। परमेश्वर ने इब्राहीम परिवार को नहीं चुना। {78:68} परमेश्वर ने यहूदा के गोत्र को नहीं चुना और परमेश्वर ने सिय्योन के पहाड़ को चुना जो उसको प्रिय है। {78:69} उस ऊँचे पर्वत पर परमेश्वर ने अपना पवित्र मन्दिर बनाया। जैसे धरती अडिग है वैसे ही परमेश्वर ने निज पवित्र मन्दिर को सदा बने रहने दिया। {78:70} परमेश्वर ने दाऊद को अपना विशेष सेवक बनाने में चुना। दाऊद तो भेड़ों की देखभाल करता था, किन्तु परमेश्वर उसे उस काम से ले आया। {78:71} परमेश्वर दाऊद को भेड़ों को रखवाली से ले आया और उसने उसे अपने लोगों कि रखवाली का काम सौंपा, याकूब के लोग, यानी इस्राएल के लोग जो परमेश्वर की सम्पती थे। {78:72} और फिर पवित्र मन से दाऊद ने इस्राएल के लोगों की अगुवाई की। उसने उन्हें पूरे विवेक से राह दिखाई। {i79:1} आसाप का एक स्तुति गीत। {79:1} हे परमेश्वर, कुछ लोग तेरे भक्तों के साथ लड़ने आये हैं। उन लोगों ने तेरे पवित्र मन्दिर को ध्वस्त किया, और यरूशलेम को उन्होंने खण्डहर बना दिया। {79:2} तेरे भक्तों के शवों को उन्होंने गिद्धों को खाने के लिये डाल दिया। तेरे अनुयायिओं के शव उन्होंने पशुओं के खाने के लिये डाल दिया। {79:3} हे परमेश्वर, शत्रुओं ने तेरे भक्तों को तब तक मारा जब तक उनका रक्त पानी सा नहीं फैल गया। उनके शव दफनाने को कोई भी नहीं बचा। {79:4} हमारे पड़ोसी देशों ने हमें अपमानित किया है। हमारे आस पास के लोग सभी हँसते हैं, और हमारी हँसी उड़ाते हैं। {79:5} हे परमेश्वर, क्या तू सदा के लिये हम पर कुपित रहेगा? क्या तेरे तीव्र भाव अग्नि के समान धधकते रहेंगे? {79:6} हे परमेश्वर, अपने क्रोध को उन राष्ट्रों के विरोध में जो तुझको नहीं पहचानते मोड़, अपने क्रोध को उन राष्ट्रों के विरोध में मोड़ जो तेरे नाम की आराधना नहीं करते। {79:7} क्योंकि उन राष्ट्रों ने याकूब को नाश किया। उन्होंने याकूब के देश को नाश किया। {79:8} हे परमेश्वर, तू हमारे पूर्वजों के पापों के लिये कृपा करके हमको दण्ड मत दे। जल्दी कर, तू हम पर निज करूणा दर्शा! हम को तेरी बहुत उपेक्षा है! {79:9} हमारे परमेश्वर, हमारे उद्धारकर्ता, हमको सहारा दे! अपने ही नाम की महिमा के लिये हमारी सहायता कर! हमको बचा ले! निज नाम के गौरव निमित्त हमारे पाप मिटा। {79:10} दूसरी जाति के लोगों को तू यह मत कहने दे, “तुम्हारा परमेश्वर कहाँ है? क्या वह तुझको सहारा नहीं दे सकता है?” हे परमेश्वर, उन लोगों को दण्ड दे ताकि उस दण्ड को हम भी देख सकें। उन लोगों को तेरे भक्तों को मारने का दण्ड दे। {79:11} बंदी गृह में पड़े हुओं कि कृपया तू कराह सुन ले! हे परमेश्वर, तू निज महाशक्ति प्रयोग में ला और उन लोगों को बचा ले जिनको मरने के लिये ही चुना गया है। {79:12} हे परमेश्वर, हम जिन लोगों से घिरे हैं, उनको उन अत्यचारों का दण्ड सात गुणा दे। हे परमेश्वर, उन लोगों को इतनी बार दण्ड दे जितनी बार वे तेरा अपमान किये है। {79:13} हम तो तेरे भक्त हैं। हम तेरे रेवड़ की भेड़ हैं। हम तेरा गुणगान सदा करेंगे। हे परमेश्वर अंत काल तक तेरा गुण गायेंगे। {i80:1} वाचा की कुमुदिनी धुन पर संगीत निर्देशक के लिये आसाप का एक स्तुति गीता। {80:1} हे इस्राएल के चरवाहे, तू मेरी सुन ले। तूने यूसुफ के भेड़ों (लोगों) की अगुवाई की। तू राजा सा करूब पर विराजता है। हमको निज दर्शन दे। {80:2} हे इस्राएल के चरवाहे, एप्रैम, बिन्यामीन और मनश्शे के सामने तू अपनी महिमा दिखा, और हमको बचा ले। {80:3} हे परमेश्वर, हमको स्वीकार कर। हमको स्वीकार कर और हमारी रक्षा कर! {80:4} सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा, क्या तू सदा के लिये हम पर कुपित रहेगा हमरी प्रार्थनाओं को तू कब सुनेगा {80:5} अपने भक्तों को तूने बस खाने को आँसू दिये है। तूने अपने भक्तों को पीने के लिये आँसुओं से लबालब प्याले दिये। {80:6} तूने हमें हमारे पड़ोसियों के लिये कोई ऐसी वस्तु बनने दिया जिस पर वे झगड़ा करे। हमारे शत्रु हमारी हँसी उड़ाते हैं। {80:7} हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर, फिर हमको स्वीकार कर। हमको स्वीकार कर और हमारी रक्षा कर। {80:8} प्रचीन काल में, तूने हमें एक अति महत्वपूर्ण पौधे सा समझा। तू अपनी दाखलता मिस्र से बाहर लाया। तूने दूसरे लोगों को यह धरती छोड़ने को विवश किया और यहाँ तूने अपनी निज दाखलता रोप दी। {80:9} तूने दाखलता रोपने को धरती को तैयार किया, उसकी जड़ों को पक्की करने के लिये तूने सहारा दिया और फिर शीघ्र ही दाखलता धरती पर हर कहीं फैल गई। {80:10} उसने पहाड़ ढक लिया। यहाँ तक कि उसके पतों ने विशाल देवदार वृक्ष को भी ढक लिया। {80:11} इसकी दाखलताएँ भूमध्य सागर तक फैल गई। इसकी जड़ परात नदी तक फैल गई। {80:12} हे परमेश्वर, तूने वे दीवारें क्यों गिरा दी, जो तेरी दाखलता की रक्षा करती थी। अब वह हर कोई जो वहाँ से गुजरता है, वहाँ से अंगूर को तोड़ लेते हैं। {80:13} बनैले सूअर आते हैं, और तेरी दाखलता को रौदते हुए गुजर जाते हैं। जंगली पशु आते हैं, और उसकी पत्तियाँ चर जाते हैं। {80:14} सर्वशक्तिमान परमेश्वर, वापस आ। अपनी दाखलता पर स्वर्ग से नीचे देख, और इसकी रक्षा कर। {80:15} हे परमेश्वर, अपनी उस दाखलता को देख जिसको तूने स्वयं निज हाथों से रोपा था। इस बच्चे पौधे को देख जिसे तूने बढ़ाया। {80:16} तेरी दाखलता को सूखे हुए उपलों सा आग में जलाया गया। तू इससे क्रोधित था और तूने उजाड़ दिया। {80:17} हे परमेश्वर, तू अपना हाथ उस पुत्र पर रख जो तेरे दाहिनी ओर खड़ा है। उस पुत्र पर हाथ रख जिसे तूने उठाया। {80:18} फिर वह कभी तुझको नहीं त्यागेगा। तू उसको जीवित रख, और वह तेरे नाम की आराधना करेगा। {80:19} सर्वशक्तिमान यहोवा परमेश्वर, हमारे पास लौट आ हमको अपना ले, और हमारी रक्षा कर। {i81:1} गित्तीथ के संगत पर संगीत निर्देशक के लिये आसाप का एक पद। {81:1} परमेश्वर जो हमारी शक्ति है आनन्द के साथ तुम उसके गीत गाओ, तुम उसका जो इस्राएल का परमेश्वर है, जय जयकार जोर से बोलो। {81:2} संगीत आरम्भ करो। तम्बूरे बजाओ। वीणा सारंगी से मधुर धुन निकालो। {81:3} नये चाँद के समय में तुम नरसिंगा फूँको। पूर्णमासी के अवसर पर तुम नरसिंगा फूँको। यह वह काल है जब हमारे विश्र्राम के दिन शुरू होते हैं। {81:4} इस्राएल के लोगों के लिये ऐसा ही नियम है। यह आदेश परमेश्वर ने याकुब को दिये है। {81:5} परमेश्वर ने यह वाचा यूसुफ़ के साथ तब किया था, जब परमेश्वर उसे मिस्र से दूर ले गया। मिस्र में हमने वह भाषा सुनी थी जिसे हम लोग समझ नहीं पाये थे। {81:6} परमेश्वर कहता है, “तुम्हारे कन्धों का बोझ मैंने ले लिया है। मजदूर की टोकरी मैं उतार फेंकने देता हूँ। {81:7} जब तुम विपति में थे तुमने सहायता को पुकारा और मैंने तुम्हें छुड़ाया। मैं तुफानी बादलों में छिपा हुआ था और मैंने तुमको उत्तर दिया। मैंने तुम्हें मरिबा के जल के पास परखा।” {81:8} “मेरे लोगों, तुम मेरी बात सुनों। और मैं तुमको अपना वाचा दूँगा। इस्राएल, तू मुझ पर अवश्य कान दे। {81:9} तू किसी मिथ्या देव जिनको विदेशी लोग पूजते हैं, पूजा मत कर। {81:10} मैं, यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मैं वही परमेश्वर जो तुम्हें मिस्र से बाहर लाया था। हे इस्राएल, तू अपना मुख खोल, मैं तुझको निवाला दूँगा। {81:11} “किन्तु मेरे लोगों ने मेरी नहीं सुनी। इस्राएल ने मेरी आज्ञा नहीं मानी। {81:12} इसलिए मैंने उन्हें वैसा ही करने दिया, जैसा वे करना चाहते थे। इस्राएल ने वो सब किया जो उन्हें भाता था। {81:13} भला होता मेरे लोग मेरी बात सुनते, और काश! इस्राएल वैसा ही जीवन जीता जैसा मैं उससे चाहता था। {81:14} तब मैं फिर इस्राएल के शत्रुओं को हरा देता। मैं उन लोगों को दण्ड देता जो इस्राएल को दु: ख देते। {81:15} यहोवा के शत्रु डर से थर थर काँपते हैं। वे सदा सर्वदा को दण्डित होंगे। {81:16} परमेश्वर निज भक्तों को उत्तम गेहूँ देगा। चट्टान उन्हें शहद तब तक देगी जब तक तृप्त नहीं होंगे।” {i82:1} आसाप का एक स्तुति गीत। {82:1} परमेश्वर देवों की सभा के बीच विराजता है। उन देवों की सभा का परमेश्वर न्यायाधीश है। {82:2} परमेश्वर कहता है, “कब तक तुम लोग अन्यायपूर्ण न्याय करोगे? कब तक तुम लोग दुराचारी लोगों को यूँ ही बिना दण्ड दिए छोड़ते रहोगे?” {82:3} अनाथों और दीन लोगों की रक्षा कर, जिन्हें उचित व्यवहार नहीं मिलता तू उनके अधिकारों कि रक्षा कर। {82:4} दीन और असहाय जन की रक्षा कर। दुष्टों के चंगुल से उनको बचा ले। {82:5} “इस्राएल के लोग नहीं जानते क्या कुछ घट रहा है। वे समझते नहीं! वे जानते नहीं वे क्या कर रहे हैं। उनका जगत उनके चारों ओर गिर रहा है।” {82:6} मैंने (परमेश्वर) कहा, “तुम लोग ईश्वर हो, तुम परम परमेश्वर के पुत्र हो। {82:7} किन्तु तुम भी वैसे ही मर जाओगे जैसे निश्चय ही सब लोग मर जाते हैं। तुम वैसे मरोगे जैसे अन्य नेता मर जाते हैं।” {82:8} हे परमेश्वर, खड़ा हो! तू न्यायाधीश बन जा! हे परमेश्वर, तू सारे ही राष्ट्रों का नेता बन जा! {i83:1} आसाप का एक स्तुति गीत। {83:1} हे परमेश्वर, तू मौन मत रह! अपने कानों को बंद मत कर! हे परमेश्वर, कृपा करके कुछ बोल। {83:2} हे परमेश्वर, तेरे शत्रु तेरे विरोध में कुचक्र रच रहे हैं। तेरे शत्रु शीघ्र ही वार करेंगे। {83:3} वे तेरे भक्तों के विरूद्ध षड़यन्त्र रचते हैं। तेरे शत्रु उन लोगों के विरोध में जो तुझको प्यारे हैं योजनाएँ बना रहे हैं। {83:4} वे शत्रु कह रहे हैं, “आओ, हम उन लोगों को पूरी तरह मिटा डाले, फिर कोई भी व्यक्ति ‘इस्राएल’ का नाम याद नहीं करेगा।” {83:5} हे परमेश्वर, वे सभी लोग तेरे विरोध में और तेरे उस वाचा के विरोध में जो तूने हमसे किया है, युद्ध करने के लिये एक जुट हो गए। {83:6} ये शत्रु हमसे युद्ध करने के लिये एक जुट हुए हैं: एदोमी, इश्माएली, मोआबी और हाजिरा की संताने, गबाली {83:7} और अम्मोनि, अमालेकी और पलिश्ती के लोग, और सूर के निवासी लोग। ये सभी लोग हमसे युद्ध करने जुट आये। {83:8} यहाँ तक कि अश्शूरी भी उन लोगों से मिल गये। उन्होंने लूत के वंशजों को अति बलशाली बनाया। {83:9} हे परमेश्वर, तू शत्रु वैसे हरा जैसे तूने मिद्यानी लोगों, सिसरा, याबीन को किशोन नदी के पास हराया। {83:10} तूने उन्हें एन्दोर में हराया। उनकी लाशें धरती पर पड़ी सड़ती रहीं। {83:11} हे परमेश्वर, तू शत्रुओं के सेनापति को वैसे पराजित कर जैसे तूने ओरेब और जायेब के साथ किया था, कर जैसे तूने जेबह और सलमुन्ना के साथ किया। {83:12} हे परमेश्वर, वे लोग हमको धरती छोड़ने के लिये दबाना चाहते थे! {83:13} उन लोगों को तू उखड़े हुए पौधा सा बना जिसको पवन उड़ा ले जाती है। उन लोगों को ऐसे बिखेर दे जैसे भूसे को आँधी बिखेर देती है। {83:14} शत्रु को ऐसे नष्ट कर जैसे वन को आग नष्ट कर देती है, और जंगली आग पहाड़ों को जला डालती है। {83:15} हे परमेश्वर, उन लोगों का पीछा कर भगा दे, जैसे आँधी से धूल उड़ जाती है। उनको कँपा और फूँक में उड़ा दे जैसे चक्रवात करता है। {83:16} हे परमेश्वर, उनको ऐसा पाठ पढ़ा दे, कि उनको अहसास हो जाये कि वे सचमुच दुर्बल हैं। तभी वे तेरे काम को पूजना चाहेंगे! {83:17} हे परमेश्वर, उन लोगों को भयभीत कर दे और सदा के लिये अपमानित करके उन्हें नष्ट कर दे। {83:18} वे लोग तभी जानेंगे कि तू परमेश्वर है। तभी वे जानेंगे तेरा नाम यहोवा है। तभी वे जानेंगे तू ही सारे जगत का परम परमेश्वर है! {i84:1} मित्तिथ की संगत पर संगीत निर्देशक के लिये कोरह वंशियों का एक स्तुति गीत। {84:1} सर्वशक्तिमान यहोवा, सचमुच तेरा मन्दिर कितना मनोहर है। {84:2} हे यहोवा, मैं तेरे मन्दिर में रहना चाहता हूँ। मैं तेरी बाट जोहते थक गया हूँ! मेरा अंग अंग जीवित यहोवा के संग होना चाहता है। {84:3} सर्वशक्तिमान यहोवा, मेरे राजा, मेरे परमेश्वर, गौरेया और शूपाबेनी तक के अपने घोंसले होते हैं। ये पक्षी तेरी वेदी के पास घोंसले बनाते हैं और उन्हीं घोंसलों में उनके बच्चे होते हैं। {84:4} जो लोग तेरे मन्दिर में रहते हैं, अति प्रसन्न रहते हैं। वे तो सदा ही तेरा गुण गाते हैं। {84:5} वे लोग अपने हृदय में गीतों के साथ जो तेरे मन्दिर मे आते हैं, बहुत आनन्दित हैं। {84:6} वे प्रसन्न लोग बाका घाटी जिसे परमेश्वर ने झरने सा बनाया है गुजरते हैं। गर्मो की गिरती हुई वर्षा की बूँदे जल के सरोवर बनाती है। {84:7} लोग नगर नगर होते हुए सिय्योन पर्वत की यात्रा करते हैं जहाँ वे अपने परमेश्वर से मिलेंगे। {84:8} सर्वशक्तिमान यहोवा परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुन! याकूब के परमेश्वर तू मेरी सुन ले। {84:9} हे परमेश्वर, हमारे संरक्षक की रक्षा कर। अपने चुने हुए राजा पर दयालु हो। {84:10} हे परमेश्वर, कहीं और हजार दिन ठहरने से तेरे मन्दिर में एक दिन ठहरना उत्तम है। दुष्ट लोगों के बीच वास करने से, अपने परमेश्वर के मन्दिर के द्वार के पास खड़ा रहूँ यही उत्तम है। {84:11} यहोवा हमारा संरक्षक और हमारा तेजस्वी राजा है। परमेश्वर हमें करूणा और महिमा के साथ आशीर्वद देता है। जो लोग यहोवा का अनुसरण करते हैं और उसकी आज्ञा का पालन करते हैं, उनको वह हर उत्तम वस्तु देता है। {84:12} सर्वशक्तिमान यहोवा, जो लोग तेरे भरोसे हैं वे सचमुच प्रसन्न हैं! {i85:1} संगीत निर्देशक के लिये कोरह वंशियों का एक स्तुति गीत। {85:1} हे यहोवा, तू अपने देश पर कृपालु हो। विदेश में याकूब के लोग कैदी बने हैं। उन बंदियों को छुड़ाकर उनके देश में वापस ला। {85:2} हे यहोवा, अपने भक्तों के पापों को क्षमा कर। तू उनके पाप मिटा दे। {85:3} हे यहोवा, कुपित होना त्याग। आवेश से उन्मत मत हो। {85:4} हमारे परमेश्वर, हमारे संरक्षक, हम पर तू कुपित होना छोड़ दे और फिर हमको स्वीकार कर ले। {85:5} क्या तू सदा के लिये हमसे कुपित रहेगा? {85:6} कृपा करके हमको फिर जिला दे! अपने भक्तों को तू प्रसन्न कर दे। {85:7} हे यहोवा, तू हमें दिखा दे कि तू हमसे प्रेम करता है। हमारी रक्षा कर। {85:8} जो परमेश्वर ने कहा, मैंने उस पर कान दिया। यहोवा ने कहा कि उसके भक्तों के लिये वहाँ शांति होगी। यदि वे अपने जीवन की मूर्खता की राह पर नहीं लौटेंगे तो वे शांति को पायेंगे। {85:9} परमेश्वर शीघ्र अपने अनुयायियों को बचाएगा। अपने स्वदेश में हम शीघ्र ही आदर के साथ वास करेंगे। {85:10} परमेश्वर का सच्चा प्रेम उनके अनुयायियों को मिलेगा। नेकी और शांति चुम्बन के साथ उनका स्वागत करेगी। {85:11} धरती पर बसे लोग परमेश्वर पर विश्वास करेंगे, और स्वर्ग का परमेश्वर उनके लिये भला होगा। {85:12} यहोवा हमें बहुत सी उत्तम वस्तुएँ देगा। धरती अनेक उत्तम फल उपजायेगी। {85:13} परमेश्वर के आगे आगे नेकी चलेगी, और वह उसके लिये राह बनायेगी। {i86:1} दाऊद की प्रार्थना। {86:1} मैं एक दीन, असहाय जन हूँ। हे यहोवा, तू कृपा करके मेरी सुन ले, और तू मेरी विनती का उत्तर दे। {86:2} हे यहोवा, मैं तेरा भक्त हूँ। कृपा करके मुझको बचा ले। मैं तेरा दास हूँ। तू मेरा परमेश्वर है। मुझको तेरा भरोसा है, सो मेरी रक्षा कर। {86:3} मेरे स्वामी, मुझ पर दया कर। मैं सारे दिन तेरी विनती करता रहा हूँ। {86:4} हे स्वामी, मैं अपना जीवन तेरे हाथ सौंपता हूँ। मुझको तू सुखी बना मैं तेरा दास हूँ। {86:5} हे स्वामी, तू दयालु और खरा है। तू सचमुच अपने उन भक्तों को प्रेम करता है, जो सहारा पाने को तुझको पुकारते हैं। {86:6} हे यहोवा, मेरी विनती सुन। मैं दया के लिये जो प्रार्थना करता हूँ, उस पर तू कान दे। {86:7} हे यहोवा, अपने संकट की घड़ी में मैं तेरी विनती कर रहा हूँ। मैं जानता हूँ तू मुझको उत्तर देगा। {86:8} हे परमेश्वर, तेरे समान कोई नहीं। जैसे काम तूने किये हैं वैसा काम कोई भी नहीं कर सकता। {86:9} हे स्वामी, तूने ही सब लोगों को रचा है। मेरी कामना यह है कि वे सभी लोग आयें और तेरी आराधना करें! वे सभी तेरे नाम का आदर करें! {86:10} हे परमेश्वर, तू महान है! तु अद्भुत कर्म करता है! बस तू ही परमेश्वर है! {86:11} हे यहोवा, अपनी राहों की शिक्षा मुझको दे,। मैं जीऊँगा और तेरे सत्य पर चलूँगा। मेरी सहायता कर। मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण यही है, कि मैं तेरे नाम की उपासना करूँ। {86:12} हे परमेश्वर, मेरे स्वमी, मैं सम्पूर्ण मन से तेरे गुण गाता हूँ। मैं तेरे नाम का आदर सदा सर्वदा करूँगा। {86:13} हे परमेश्वर, तू मुझसे कितना अधिक प्रेम करता है। तूने मुझे मृत्यु के गर्त से बचाया। {86:14} हे परमेश्वर, मुझ पर अभिमानी वार कर रहे हैं। क्रूर जनों का दल मुझे मार डालने का यत्न कर रहे हैं, और वे मनुष्य तेरा आदर नहीं करते हैं। {86:15} हे स्वामी, तू दयालु और कृपापूर्ण परमेश्वर है। तू धैर्यपूर्ण, विश्वासी और प्रेम से भरा हुआ हैं। {86:16} हे परमेश्वर, दिखा दे कि तू मेरी सुनता है, और मुझ पर कृपालु बन। मैं तेरा दास हूँ। तू मुझको शक्ति दे। मैं तेरा सेवक हूँ, मेरी रक्षा कर। {86:17} हे परमेश्वर, कुछ ऐसा कर जिससे यह प्रमाणित हो कि तू मेरी सहायता करेगा। फिर इससे मेरे शत्रु निराश हो जायेंगे। क्योंकि यहोवा इससे यह प्रकट होगा तेरी दया मुझ पर है और तूने मुझे सहारा दिया। {i87:1} कोरह वंशियों का एक स्तुति गीत। {87:1} परमेश्वर ने यरूशलेम के पवित्र पहाड़ियों पर अपना मन्दिर बनाया। {87:2} यहोवा को इस्राएल के किसी भी स्थान से सिय्योन के द्वार अधिक भाते हैं। {87:3} हे परमेश्वर के नगर, तेरे विषय में लोग अद्भुत बातें बताते है। {87:4} परमेश्वर अपने लोगों की सूची रखता है। परमेश्वर के कुछ भक्त मिस्र और बाबेल में रहते है। कुछ लोग पलिश्ती, सोर और कूश तक में रहते हैं। {87:5} परमेश्वर हर एक जन को जो सिय्योन में पैदा हुए जानता है। इस नगर को परम परमेश्वर ने बनाया है। {87:6} परमेश्वर अपने भक्तों की सूची रखता है। परमेश्वर जानता है कौन कहाँ पैदा हुआ। {87:7} परमेश्वर के भक्त उत्सवों को मनाने यरूशलेम जाते हैं। परमेश्वर के भक्त गाते, नाचते और अति प्रसन्न रहते हैं। वे कहा करते हैं, “सभी उत्तम वस्तुएं यरूशलेम से आई?” {i88:1} कोरह वंशियों के ओर से संगीत निर्देशक के लिये यातना पूर्ण व्याधि के विषय में एज्रा वंशी हेमान का एक कलापूर्ण स्तुति गीत। {88:1} हे परमेश्वर यहोवा, तू मेरा उद्धारकर्ता है। मैं तेरी रात दिन विनती करता रहा हूँ। {88:2} कृपा करके मेरी प्रार्थनाओं पर ध्यान दे। मुझ पर दया करने को मेरी प्रार्थनाएँ सुन। {88:3} मैं अपनी पीड़ाओं से तंग आ चुका हूँ। बस मैं जल्दी ही मर जाऊँगा। {88:4} लोग मेरे साथ मुर्दे सा व्यवहार करने लगे हैं। उस व्यक्ति की तरह जो जीवित रहने के लिये अति बलहीन हैं। {88:5} मेरे लिये मरे व्यक्तियों में ढूँढ़। मैं उस मुर्दे सा हूँ जो कब्र में लेटा है, और लोग उसके बारे में सब कुछ ही भूल गए। {88:6} हे यहोवा, तूने मुझे धरती के नीचे कब्र में सुला दिया। तूने मुझे उस अँधेरी जगह में रख दिया। {88:7} हे परमेश्वर, तुझे मुझ पर क्रोध था, और तूने मुझे दण्डित किया। {88:8} मुझको मेरे मित्रों ने त्याग दिया है। वे मुझसे बचते फिरते हैं जैसे मैं कोई ऐसा व्यक्ति हूँ जिसको कोई भी छूना नहीं चाहता। घर के ही भीतर बंदी बन गया हूँ। मैं बाहर तो जा ही नहीं सकता। {88:9} मेरे दु: खों के लिये रोते रोते मेरी आँखे सूज गई हैं। हे यहोवा, मैं तुझसे निरतंर प्रार्थना करता हूँ। तेरी ओर मैं अपने हाथ फैला रहा हूँ। {88:10} हे यहोवा, क्या तू अद्भुत कर्म केवल मृतकों के लिये करता है? क्या भूत (मृत आत्माएँ) जी उठा करते हैं और तेरी स्तुति करते हैं? नहीं। {88:11} मरे हुए लोग अपनी कब्रों के बीच तेरे प्रेम की बातें नहीं कर सकते। मरे हुए व्यक्ति मृत्युलोक के भीतर तेरी भक्ति की बातें नहीं कर सकते। {88:12} अंधकार में सोये हुए मरे व्यक्ति उन अद्भुत बातों को जिनको तू करता है, नहीं देख सकते हैं। मरे हुए व्यक्ति भूले बिसरों के जगत में तेरे खरेपन की बातें नहीं कर सकते। {88:13} हे यहोवा, मेरी विनती है, मुझको सहारा दे! हर अलख सुबह मैं तेरी प्रार्थना करता हूँ। {88:14} हे यहोवा, क्या तूने मुझको त्याग दिया? तूने मुझ पर कान देना क्यों छोड़ दिया? {88:15} मैं दुर्बल और रोगी रहा हूँ। मैंने बचपन से ही तेरे क्रोध को भोगा है। मेरा सहारा कोई भी नहीं रहा। {88:16} हे यहोवा, तू मुझ पर क्रोधित है और तेरा दण्ड मुझको मार रहा है। {88:17} मुझे ऐसा लगता है, जैसे पीड़ा और यातनाएँ सदा मेरे संग रहती हैं। मैं अपनी पीड़ाओं और यातनाओं में डूबा जा रहा हूँ। {88:18} हे यहोवा, तूने मेरे मित्रों और प्रिय लोगों को मुझे छोड़ चले जाने को विवश कर दिया। मेरे संग बस केवल अंधकार रहता है। {i89:1} एज्रा वंश के एतान का एक भक्ति गीत। {89:1} मैं यहोवा, की करूणा के गीत सदा गाऊँगा। मैं उसके भक्ति के गीत सदा अनन्त काल तक गाता रहूँगा। {89:2} हे यहोवा, मुझे सचमुच विश्वास है, तेरा प्रेम अमर है। तेरी भक्ति फैले हुए अम्बर से भी विस्तृत है। {89:3} परमेश्वर ने कहा था, “मैंने अपने चुने हुए राजा के साथ एक वाचा कीया है। अपने सेवक दाऊद को मैंने वचन दिया है। {89:4} ‘दाऊद तेरे वंश को मैं सतत् अमर बनाऊँगा। मैं तेरे राज्य को सदा सर्वदा के लिये अटल बनाऊँगा।’” {89:5} हे यहोवा, तेरे उन अद्भुत कर्मो की अम्बर स्तुति करते हैं। स्वर्गदूतों की सभा तेरी निष्ठा के गीत गाते हैं। {89:6} स्वर्ग में कोई व्यक्ति यहोवा का विरोध नहीं कर सकता। कोई भी देवता यहोवा के समान नहीं। {89:7} परमेश्वर पवित्र लोगों के साथ एकत्रित होता है। वे स्वर्गदूत उसके चारो ओर रहते हैं। वे उसका भय और आदर करते हैं। वे उसके सम्मान में खड़े होते हैं। {89:8} सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा, जितना तू समर्थ है कोई नहीं है। तेरे भरोसे हम पूरी तरह रह सकते हैं। {89:9} तू गरजते समुद्र पर शासन करता है। तू उसकी कुपित तरंगों को शांत करता है। {89:10} हे परमेश्वर, तूने ही राहाब को हराया था। तूने अपने महाशक्ति से अपने शत्रु बिखरा दिये। {89:11} हे परमेश्वर, जो कुछ भी स्वर्ग और धरती पर जन्मी है तेरी ही है। तूने ही जगत और जगत में की हर वस्तु रची है। {89:12} तूने ही सब कुछ उत्तर दक्षिण रचा है। ताबोर और हर्मोन पर्वत तेरे गुण गाते हैं। {89:13} हे परमेश्वर, तू समर्थ है। तेरी शक्ति महान है। तेरी ही विजय है। {89:14} तेरा राज्य सत्य और न्याय पर आधारित है। प्रेम और भक्ति तेरे सिंहासन के सैनिक हैं। {89:15} हे परमेश्वर, तेरे भक्त सचमुच प्रसन्न है। वे तेरी करूणा के प्रकाश में जीवित रहते हैं। {89:16} तेरा नाम उनको सदा प्रसन्न करता है। वे तेरे खरेपन की प्रशंसा करते हैं। {89:17} तू उनकी अद्भुत शक्ति है। उनको तुमसे बल मिलता है। {89:18} हे यहोवा, तू हमारा रक्षक है। इस्राएल का वह पवित्र हमारा राजा है। {89:19} इस्राएल तूने निज सच्चे भक्तों को दर्शन दिये और कहा, “फिर मैंने लोगों के बीच से एक युवक को चुना, और मैंने उस युवक को महत्वपूर्ण बना दिया, और मैंने उस युवक को बलशाली बना दिया। {89:20} मैंने निज सेवक दाऊद को पा लिया, और मैंने उसका अभिषेक अपने निज विशेष तेल से किया। {89:21} मैंने निज दाहिने हाथ से दाऊद को सहारा दिया, और मैंने उसे अपने शक्ति से बलवान बनाया। {89:22} शत्रु चुने हुए राजा को नहीं हरा सका। दुष्ट जन उसको पराजित नहीं कर सके। {89:23} मैंने उसके शत्रुओं को समाप्त कर दिया। जो लोग चुने हुए राजा से बैर रखते थे, मैंने उन्हें हरा दिया। {89:24} मैं अपने चुने हुए राजा को सदा प्रेम करूँगा और उसे समर्थन दूँगा। मैं उसे सदा ही शक्तिशाली बनाऊँगा। {89:25} मैं अपने चुने हुए राजा को सागर का अधिकारी नियुक्त करूँगा। नदियों पर उसका ही नियन्त्रण होगा। {89:26} वह मुझसे कहेगा, ‘तू मेरा पिता है। तू मेरा परमेश्वर, मेरी चट्टान मेरा उद्धारकर्ता है।’ {89:27} मैं उसको अपना पहलौठा पुत्र बनाऊँगा। वह धरती पर महानतम राजा बनेगा। {89:28} मेरा प्रेम चुने हुए राजा की सदा सर्वदा रक्षा करेगा। मेरी वाचा उसके साथ कभी नहीं मिटेगी। {89:29} उसका वंश सदा अमर बना रहेगा। उसका राज्य जब तक स्वर्ग टिका है, तब तक टिका रहेगा। {89:30} यदि उसके वंशजों ने मेरी व्यवस्था का पालन छोड़ दिया है और यदि उन्होंने मेरे आदेशों को मानना छोड़ दिया है, तो मैं उन्हें दण्ड दूँगा। {89:31} यदि मेरे चुने हुए राजा के वंशजों ने मेरे विधान को तोड़ा और यदि मेरे आदेशो की उपेक्षा की, {89:32} तो मैं उन्हें दण्ड दूंगा, जो बहुत बड़ा होगा। {89:33} किन्तु मैं उन लोगों से अपना निज प्रेम दूर नहीं करूँगा। मैं सदा ही उनके प्रति सच्चा रहूँगा। {89:34} जो वाचा मेरी दाऊद के साथ है, मैं उसको नहीं तोड़ूँगा। मैं अपनी वाचा को नहीं बदलूँगा। {89:35} अपनी पवित्रता को साक्षी कर मैंने दाऊद से एक विशेष प्रतिज्ञा की थी, सो मैं दाऊद से झूठ नहीं बोलूँगा! {89:36} दाऊद का वंश सदा बना रहेगा, जब तक सूर्य अटल है उसका राज्य भी अटल रहेगा। {89:37} यह सदा चन्द्रमा के समान चलता रहेगा। आकाश साक्षी है कि यह वाचा सच्ची है। इस प्रमाण पर भरोसा कर सकता है।” {89:38} किन्तु हे परमेश्वर, तू अपने चुने हुए राजा पर क्रोधित हो गया। तूने उसे एक दम अकेला छोड़ दिया। {89:39} तूने अपनी वाचा को रद्द कर दिया। तूने राजा का मुकुट धूल में फेंक दिया। {89:40} तूने राजा के नगर का परकोटा ध्वस्त कर दिया, तूने उसके सभी दुर्गों को तहस नहस कर दिया। {89:41} राजा के पड़ोसी उस पर हँस रहे हैं, और वे लोग जो पास से गुजरते हैं, उसकी वस्तुओं को चुरा ले जाते हैं। {89:42} तूने राजा के शत्रुओं को प्रसन्न किया। तूने उसके शत्रुओं को युद्ध में जिता दिया। {89:43} हे परमेश्वर, तूने उन्हें स्वयं को बचाने का सहारा दिया, तूने अपने राजा की युद्ध को जीतने में सहायता नहीं की। {89:44} तूने उसे जीतने नहीं दिया, उसका पवित्र सिंहासन तूने धरती पर पटक दिया। {89:45} तूने उसके जीवन को कम कर दिया, और उसे लज्जित किया। {89:46} हे यहोवा, तू हमसे क्या सदा छिपा रहेगा क्या तेरा क्रोध सदा आग सा धधकेगा {89:47} याद कर मेरा जीवन कितना छोटा है। तूने ही हमें छोटा जीवन जीने और फिर मर जाने को रचा है। {89:48} ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो सदा जीवित रहेगा और कभी मरेगा नहीं। कब्र से कोई व्यक्ति बच नहीं पाया। {89:49} हे परमेश्वर, वह प्रेम कहाँ है जो तूने अतीत में दिखाया था तूने दाऊद को वचन दिया था कि तू उसके वंश पर सदा अनुग्रह करेगा। {89:50} हे स्वामी, कृपा करके याद कर कि लोगों ने तेरे सेवकों को कैसे अपमानित किया। {89:51} हे यहोवा, मुझको सारे अपमान सुनने पड़े हैं। तेरे चुने हुए राजा को उन्होंने अपमानित किया। {89:52} यहोवा, सदा ही धन्य है! आमीन, आमीन! {i90:1} चौथा भाग (भजनसंहिता 90-106) {90:1} परमेश्वर के भक्त मूसा की प्रार्थना। हे स्वामी, तू अनादि काल से हमारा घर (सुरक्षास्थल) रहा है। {90:2} हे परमेश्वर, तू पर्वतों से पहले, धरती से पहले था, कि इस जगत के पहले ही परमेश्वर था। तू सर्वदा ही परमेश्वर रहेगा। {90:3} तू ही इस जगत में लोगों को लाता है। फिर से तू ही उनको धूल में बदल देता है। {90:4} तेरे लिये हजार वर्ष बीते हुए कल जैसे है, व पिछली रात जैसे है। {90:5} तू हमारा जीवन सपने जैसा बुहार देता है और सुबह होते ही हम चले जाते है। हम ऐसे घास जैसे है, {90:6} जो सुबह उगती है और वह शाम को सूख कर मुरझा जाती है। {90:7} हे परमेश्वर, जब तू कुपित होता है हम नष्ट हो जाते हैं। हम तेरे प्रकोप से घबरा गये हैं। {90:8} तू हमारे सब पापों को जानता है। हे परमेश्वर, तू हमारे हर छिपे पाप को देखा करता है। {90:9} तेरा क्रोध हमारे जीवन को खत्म कर सकता है। हमारे प्राण फुसफुसाहट की तरह विलीन हो जाते है। {90:10} हम सत्तर साल तक जीवित रह सकते हैं। यदि हम शक्तिशाली हैं तो अस्सी साल। हमारा जीवन परिश्रम और पीड़ा से भरा है। अचानक हमारा जीवन समाप्त हो जाता है! हम उड़कर कहीं दूर चले जाते हैं। {90:11} हे परमेश्वर, सचमुच कोई भी व्यक्ति तेरे क्रोध की पूरी शक्ति नहीं जानता। किन्तु हे परमेश्वर, हमारा भय और सम्मान तेरे लिये उतना ही महान है, जितना क्रोध। {90:12} तू हमको सिखा दे कि हम सचमुच यह जाने कि हमारा जीवन कितना छोटा है। ताकि हम बुद्धिमान बन सकें। {90:13} हे यहोवा, तू सदा हमारे पास लौट आ। अपने सेवकों पर दया कर। {90:14} प्रति दिन सुबह हमें अपने प्रेम से परिपूर्ण कर, आओ हम प्रसन्न हो और अपने जीवन का रस लें। {90:15} तूने हमारे जीवनों में हमें बहुत पीड़ा और यातना दी है, अब हमें प्रसन्न कर दे। {90:16} तेरे दासों को उन अद्भुत बातों को देखने दे जिनको तू उनके लिये कर सकता है, और अपनी सन्तानों को अपनी महिमा दिखा। {90:17} हमारे परमेश्वर, हमारे स्वमी, हम पर कृपालु हो। जो कुछ हम करते हैं तू उसमें सफलता दे। {91:1} तुम परम परमेश्वर की शरण में छिपने के लिये जा सकते हो। तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर की शरण में संरक्षण पाने को जा सकते हो। {91:2} मैं यहोवा से विनती करता हूँ, “तू मेरा सुरक्षा स्थल है मेरा गढ़, हे परमेश्वर, मैं तेरे भरोसे हूँ।” {91:3} परमेश्वर तुझको सभी छिपे खतरों से बचाएगा। परमेश्वर तुझको सब भयानक व्याधियों से बचाएगा। {91:4} तुम परमेश्वर की शरण में संरक्षण पाने को जा सकते हो। और वह तुम्हारी ऐसे रक्षा करेगा जैसे एक पक्षी अपने पंख फैला कर अपने बच्चों की रक्षा करता है। परमेश्वर तुम्हारे लिये ढाल और दीवार सा तुम्हारी रक्षा करेगा। {91:5} रात में तुमको किसी का भय नहीं होगा, और शत्रु के बाणों से तू दिन में भयभीत नहीं होगा। {91:6} तुझको अंधेरे में आने वाले रोगों और उस भयानक रोग से जो दोपहर में आता है भय नहीं होगा। {91:7} तू हजार शत्रुओं को पराजित कर देगा। तेरा स्वयं दाहिना हाथ दस हजार शत्रुओं को हरायेगा। और तेरे शत्रु तुझको छू तक नहीं पायेंगे। {91:8} जरा देख, और तुझको दिखाई देगा कि वे कुटिल व्यक्ति दण्डित हो चुके हैं। {91:9} क्यों? क्योंकि तू यहोवा के भरोसे है। तूने परम परमेश्वर को अपना शरणस्थल बनाया है। {91:10} तेरे साथ कोई भी बुरी बात नहीं घटेगी। कोई भी रोग तेरे घर में नहीं होगा। {91:11} क्योंकि परमेश्वर स्वर्गदूतों को तेरी रक्षा करने का आदेश देगा। तू जहाँ भी जाएगा वे तेरी रक्षा करेंगे। {91:12} परमेश्वर के दूत तुझको अपने हाथों पर ऊपर उठायेंगे। ताकि तेरा पैर चट्टान से न टकराए। {91:13} तुझमें वह शक्ति होगी जिससे तू सिंहों को पछाडेगा और विष नागों को कुचल देगा। {91:14} यहोवा कहता है, “यदि कोई जन मुझ में भरोसा रखता है तो मैं उसकी रक्षा करूँगा। मैं उन भक्तों को जो मेरे नाम की आराधना करते हैं, संरक्षण दूँगा।” {91:15} मेरे भक्त मुझको सहारा पाने को पुकरेंगे और मैं उनकी सुनूँगा। वे जब कष्ट में होंगे मैं उनके साथ रहूँगा। मैं उनका उद्धार करूँगा और उन्हें आदर दूँगा। {91:16} मैं अपने अनुयायियों को एक लम्बी आयु दूँगा और मैं उनकीरक्षा करूँगा। {i92:1} सब्त के दिन के लिये एक स्तुति गीत। {92:1} यहोवा का गुण गाना उत्तम है। हे परम परमेश्वर, तेरे नाम का गुणगान उत्तम है। {92:2} भोर में तेरे प्रेम के गीत गाना और रात में तेरे भक्ति के गीत गाना उत्तम है। {92:3} हे परमेश्वर, तेरे लिये वीणा, दस तार वाद्य और सांरगी पर संगीत बजाना उत्तम है। {92:4} हे यहोवा, तू सचमुच हमको अपने किये कर्मो से आनन्दित करता है। हम आनन्द से भर कर उन गीतों को गाते हैं, जो कार्य तूने किये हैं। {92:5} हे यहोवा, तूने महान कार्य किये, तेरे विचार हमारे लिये समझ पाने में गंभीर हैं। {92:6} तेरी तुलना में मनुष्य पशुओं जैसे हैं। हम तो मूर्ख जैसे कुछ भी नहीं समझ पाते। {92:7} दुष्ट जन घास की तरह जीते और मरते हैं। वे जो भी कुछ व्यर्थ कार्य करते हैं, उन्हें सदा सर्वदा के लिये मिटाया जायेगा। {92:8} किन्तु हे यहोवा, अनन्त काल तक तेरा आदर रहेगा। {92:9} हे यहोवा, तेरे सभी शत्रु मिटा दिये जायेंगे। वे सभी व्यक्ति जो बुरा काम करते हैं, नष्ट किये जायेंगे। {92:10} किन्तु तू मुझको बलशाली बनाएगा। मैं शक्तिशाली मेंढ़े सा बन जाऊँगा जिसके कड़े सिंग होते हैं। तूने मुझे विशेष काम के लिए चुना है। तूने मुझ पर अपना तेल ऊँडेला है जो शीतलता देता है। {92:11} मैं अपने चारों ओर शत्रु देख रहा हूँ। वे ऐसे हैं जैसे विशालकाय सांड़ मुझ पर प्रहार करने को तत्पर है। वे जो मेरे विषय में बाते करते हैं उनको मैं सुनता हूँ। {92:12} सज्जन लोग तो लबानोन के विशाल देवदार वृक्ष की तरह है जो यहोवा के मन्दिर में रोपे गए हैं। {92:13} सज्जन लोग बढ़ते हुए ताड़ के पेड़ की तरह हैं, जो यहोवा के मन्दिर के आँगन में फलवन्त हो रहे हैं। {92:14} वे जब तक बूढ़े होंगे तब तक वे फल देते रहेंगे। वे हरे भरे स्वस्थ वृक्षों जैसे होंगे। {92:15} वे हर किसी को यह दिखाने के लिये वहाँ है कि यहोवा उत्तम है। वह मेरी चट्टान है! वह कभी बुरा नहीं करता। {93:1} यहोवा राजा है। वह सामर्थ्य और महिमा का वस्त्र पहने है। वह तैयार है, सो संसार स्थिर है। वह नहीं टलेगा। {93:2} हे परमेश्वर, तेरा साम्राज्य अनादि काल से टिका हुआ है। तू सदा जीवित है। {93:3} हे यहोवा, नदियों का गर्जन बहुत तीव्र है। पछाड़ खाती लहरों का शब्द घनघोर है। {93:4} समुद्र की पछाड़ खाती लहरे गरजती हैं, और वे शक्तिशाली हैं। किन्तु ऊपर वाला यहोवा अधिक शक्तिशाली है। {93:5} हे यहोवा, तेरा विधान सदा बना रहेगा। तेरा पवित्र मन्दिर चिरस्थायी होगा। {94:1} हे यहोवा, तू ही एक परमेश्वर है जो लोगों को दण्ड देता है। तू ही एक परमेश्वर है जो आता है और लोगों के लिये दण्ड लाता है। {94:2} तू ही समूची धरती का न्यायकर्ता है। तू अभिमानी को वह दण्ड देता है जो उसे मिलना चाहिए। {94:3} हे यहोवा, दुष्ट जन कब तक मजे मारते रहेंगे उन बुरे कर्मो की जो उन्होंने किये हैं। {94:4} वे अपराधी कब तक डींग मारते रहेंगे उन बुरे कर्मो को जो उन्होंने किये हैं। {94:5} हे यहोवा, वे लोग तेरे भक्तों को दु: ख देते हैं। वे तेरे भक्तों को सताया करते हैं। {94:6} वे दुष्ट लोग विधवाओं और उन अतिथियों की जो उनके देश में ठहरे हैं, हत्या करते हैं। वे उन अनाथ बालकों की जिनके माता पिता नहीं हैं हत्या करते हैं। {94:7} वे कहा करते हैं, यहोवा उनको बुरे काम करते हुए देख नहीं सकता। और कहते हैं, इस्राएल का परमेश्वर उन बातों को नहीं समझता है, जो घट रही हैं। {94:8} अरे ओ दुष्ट जनों तुम बुद्धिहीन हो। तुम कब अपना पाठ सीखोगे? अरे ओ दुर्जनों तुम कितने मूर्ख हो! तुम्हें समझने का जतन करना चाहिए। {94:9} परमेश्वर ने हमारे कान बनाएँ हैं, और निश्चय ही उसके भी कान होंगे। सो वह उन बातों को सुन सकता है, जो घटिन हो रहीं हैं। परमेश्वर ने हमारी आँखें बनाई हैं, सो निश्चय ही उसकी भी आँख होंगी। सो वह उन बातों को देख सकता है, जो घटित हो रही है। {94:10} परमेश्वर उन लोगों को अनुशासित करेगा। परमेश्वर उन लोगों को उन सभी बातों की शिक्षा देगा जो उन्हें करनी चाहिए। {94:11} सो जिन बातों को लोग सोच रहे हैं, परमेश्वर जानता है, और परमेश्वर यह जानता है कि लोग हवा की झोंके हैं। {94:12} वह मनुष्य जिसको यहोवा सुधारता, अति प्रसन्न होगा। परमेश्वर उस व्यक्ति को खरी राह सिखायेगा। {94:13} हे परमेश्वर, जब उस जन पर दु: ख आयेंगे तब तू उस जन को शांत होने में सहायक होगा। तू उसको शांत रहने में सहायता देगा जब तक दुष्ट लोग कब्र में नहीं रख दिये जायेंगे। {94:14} यहोवा निज भक्तों को कभी नहीं त्यागेगा। वह बिन सहारे उसे रहने नहीं देगा। {94:15} न्याय लौटेगा और अपने साथ निष्पक्षता लायेगा, और फिर लोग सच्चे होंगे और खरे बनेंगे। {94:16} मुझको दुष्टों के विरूद्ध युद्ध करने में किसी व्यक्ति ने सहारा नहीं दिया। कुकर्मियों के विरूद्ध युद्ध करने में किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। {94:17} यदि यहोवा मेरा सहायक नहीं होता, तो मुझे शब्द हीन (चुपचुप) होना पड़ता। {94:18} मुझको पता है मैं गिरने को था, किन्तु यहोवा ने भक्तों को सहारा दिया। {94:19} मैं बहुत चिंतित और व्याकुल था, किन्तु यहोवा तूने मुझको चैन दिया और मुझको आनन्दित किया। {94:20} हे यहोवा, तू कुटिल न्यायाधीशों की सहायता नहीं करता। वे बुरे न्यायाधीश नियम का उपयोग लोगों का जीवन कठिन बनाने में करते हैं। {94:21} वे न्यायाधीश सज्जनों पर प्रहार करते हैं। वे कहते हैं कि निर्दोष जन अपराधी हैं। और वे उनको मार डालते हैं। {94:22} किन्तु यहोवा ऊँचे पर्वत पर मेरा सुरक्षास्थल है, परमेश्वर मेरी चट्टान और मेरा शरणस्थल है। {94:23} परमेश्वर उन न्यायाधीशों को उनके बुरे कामों का दण्ड देगा। परमेश्वर उनको नष्ट कर देगा। क्योंकि उन्होंने पाप किया है। हमारा परमेश्वर यहोवा उन दुष्ट न्यायाधीशों को नष्ट कर देगा। {95:1} आओ हम यहोवा के गुण गाएं! आओ हम उस चट्टान का जय जयकार करें जो हमारी रक्षा करता है। {95:2} आओ हम यहोवा के लिये धन्यवाद के गीत गाएं। आओ हम उसके प्रशंसा के गीत आनन्दपूर्वक गायें। {95:3} क्यों? क्योंकि यहोवा महान परमेश्वर है। वह महान राजा सभी अन्य “देवताओं”पर शासन करता है। {95:4} गहरी गुफाएँ और ऊँचे पर्वत यहोवा के हैं। {95:5} सागर उसका है, उसने उसे बनाया है। परमेश्वर ने स्वयं अपने हाथों से धरती को बनाया है। {95:6} आओ, हम उसको प्रणाम करें और उसकी उपासना करें। आओ हम परमेश्वर के गुण गाये जिसने हमें बनाया है। {95:7} वह हमारा परमेश्वर और हम उसके भक्त हैं। यदि हम उसकी सुने तो हम आज उसकी भेड़ हैं। {95:8} परमेश्वर कहता है, “तुम जैसे मरिबा और मरूस्थल के मस्सा में कठोर थे वैसे कठोर मत बनो। {95:9} तेरे पूर्वजों ने मुझको परखा था। उन्होंने मुझे परखा, पर तब उन्होंने देखा कि मैं क्या कर सकता हूँ। {95:10} मैं उन लोगों के साथ चालीस वर्ष तक धीरज बनाये रखा। मैं यह भी जानता था कि वे सच्चे नहीं हैं। उन लोगों ने मेरी सीख पर चलने से नकारा। {95:11} सो मैं क्रोधित हुआ और मैंने प्रतिज्ञा की वे मेरे विशाल कि धरती पर कभी प्रवेश नहीं कर पायेंगे।” {96:1} उन नये कामों के लिये जिन्हें यहोवा ने किया है नया गीत गाओ। अरे ओ समूचे जगत यहोवा के लिये गीत गा। {96:2} यहोवा के लिये गाओ! उसके नाम को धन्य कहो! उसके सुसमाचार को सुनाओ! उन अद्भुत बातों का बखान करो जिन्हें परमेश्वर ने किया है। {96:3} अन्य लोगों को बताओ कि परमेश्वर सचमुच ही अद्भुत है। सब कहीं के लोगों में उन अद्भुत बातों का जिन्हें परमेश्वर करता है बखान करो। {96:4} यहोवा महान है और प्रशंसा योग्य है। वह किसी भी अधिक “देवताओं” से डरने योग्य है। {96:5} अन्य जातियों के सभी “देवता” केवल मूर्तियाँ हैं, किन्तु यहोवा ने आकाशों को बनाया। {96:6} उसके सम्मुख सुन्दर महिमा दीप्त है। परमेश्वर के पवित्र मन्दिर सामर्थ्य और सौन्दर्य हैं। {96:7} अरे! ओ वंशों, और हे जातियों यहोवा के लिये महिमा और प्रशंसा के गीत गाओ। {96:8} यहोवा के नाम के गुणगान करो। अपनी भेटे उठाओ और मन्दिर में जाओ। {96:9} यहोवा का उसके भव्य, मन्दिर में उपासना करो। अरे ओ पृथ्वी के मनुष्यों, यहोवा की उपासना करो। {96:10} राष्ट्रों को बता दो कि यहोवा राजा है! सो इससे जगत का नाश नहीं होगा। यहोवा मनुष्यों पर न्याय से शासन करेगा। {96:11} अरे आकाश, प्रसन्न हो! हे धरती, आनन्द मना! हे सागर, और उसमें कि सब वस्तुओं आनन्द से ललकारो। {96:12} अरे ओ खेतों और उसमें उगने वाली हर वस्तु आनन्दित हो जाओ! हे वन के वृक्षो गाओ और आनन्द मनाओ! {96:13} आनन्दित हो जाओ क्योंकि यहोवा आ रहा है, यहोवा जगत का शासन (न्याय) करने आ रहा है, वह खरेपन से न्याय करेगा। {97:1} यहोवा शासनकरता है, और धरती प्रसन्न हैं। और सभी दूर के देश प्रसन्न हैं {97:2} यहोवा को काले गहरे बादल घेरे हुए हैं। नेकी और न्याय उसके राज्य को दूढ़ किये हैं। {97:3} यहोवा के सामने आग चला करती है, और वह उसके बैरियों का नाश करती है। {97:4} उसकी बिजली गगन में काँधा करती है। लोग उसे देखते हैं और भयभीत रहते हैं। {97:5} यहोवा के सामने पहाड़ ऐसे पिघल जाते हैं, जैसे मोम पिघल जाती है। वे धरती के स्वामी के सामने पिघल जाते हैं। {97:6} अम्बर उसकी नेकी का बखान करते हैं। हर कोई परमेश्वर की महिमा देख ले। {97:7} लोग उनकी मूर्तियों की पूजा करते हैं। वे अपने “देवताओं” की डींग हाँकते हैं। लेकिन वे लोग लज्जित होंगे। उनके “देवता” यहोवा के सामने झुकेंगे और उपासना करेंगे। {97:8} हे सिय्योन, सुन और प्रसन्न हो! यहूदा के नगरों, प्रसन्न हो! क्यों? क्योंकि यहोवा विवेकपूर्ण न्याय करता है। {97:9} हे सर्वोच्च यहोवा, सचमुच तू ही धरती पर शासन करता हैं। तू दूसरे “देवताओं” से अधिक उत्तम है। {97:10} जो लोग यहोवा से प्रेम रखते हैं, वे पाप से घृणा करते हैं। इसलिए परमेश्वर अपने अनुयायियों की रक्षा करता है। परमेश्वर अपने अनुयायियों को दुष्ट लोगों से बचाता है। {97:11} ज्योति और आनन्द सज्जनों पर चमकते हैं। {97:12} हे सज्जनों परमेश्वर में प्रसन्न रहो! उसके पवित्र नाम का आदर करते रहो! {i98:1} एक स्तुति गीत। {98:1} यहोवा के लिये एक नया गीत गाओं, क्योंकि उसने नयी और अद्भुत बातों को किया है। {98:2} उसकी पवित्र दाहिनी भुजा उसके लिये फिर विजय लाई। {98:3} यहोवा ने राष्ट्रों के सामने अपनी वह शक्ति प्रकटायी है जो रक्षा करती है। यहोवा ने उनको अपनी धार्मिकता दिखाई है। {98:4} परमेश्वर के भक्तों ने परमेश्वर का अनुराग याद किया, जो उसने इस्राएल के लोगों से दिखाये थे। सुदूर देशो के लोगों ने हमारे परमेश्वर की महाशक्ति देखी। {98:5} हे धरती के हर व्यक्ति, प्रसन्नता से यहोवा की जय जयकार कर। स्तुति गीत गाना शिघ्र आरम्भ करो। {98:6} हे वीणाओं, यहोवा की स्तुति करो! हे वीणा, के मधुर संगीत उसके गुण गाओ! {98:7} बाँसुरी बजाओ और नरसिंगों को फूँको। आनन्द से यहोवा, हमारे राजा की जय जयकार करो। {98:8} हे सागर और धरती, और उनमें की सब वस्तुओं ऊँचे स्वर में गाओ। {98:9} हे नदियों, ताली बजाओ! हे पर्वतो, अब सब साथ मिलकर गाओ! तुम यहोवा के सामने गाओ, क्योंकि वह जगत का शासन (न्याय) करने जा रहा है, वह जगत का न्याय नेकी और सच्चाई से करेगा। {99:1} यहोवा राजा है। सो हे राष्ट्र, भय से काँप उठो। परमेश्वर राजा के रूप में करूब दूतों पर विराजता है। सो हे विश्व भय से काँप उठो। {99:2} यहोवा सिय्योन में महान है। सारे मनुष्यों का वही महान राजा है। {99:3} सभी मनुष्य तेरे नाम का गुण गाएँ। परमेश्वर का नाम भय विस्मय है। परमेश्वर पवित्र है। {99:4} शक्तिशाली राजा को न्याय भाता है। परमेश्वर तूने ही नेकी बनाया है। तू ही याकूब (इस्राएल) के लिये खरापन और नेकी लाया। {99:5} यहोवा हमारे परमेश्वर का गुणगान करो, और उसके पवित्र चरण चौकी की आराधना करो। {99:6} मूसा और हारुन परमेश्वर के याजक थे। शमूएल परमेश्वर का नाम लेकर प्रार्थना करने वाला था। उन्होंने यहोवा से विनती की और यहोवा ने उनको उसका उत्तर दिया। {99:7} परमेश्वर ने ऊँचे उठे बादल में से बातें कीं। उन्होंने उसके आदेशों को माना। परमेश्वर ने उनको व्यवस्था का विधान दिया। {99:8} हमारे परमेश्वर यहोवा, तूने उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया। तूने उन्हें यह दर्शाया कि तू क्षमा करने वाला परमेश्वर है, और तू लोगों को उनके बुरे कर्मो के लिये दण्ड देता है। {99:9} हमारे परमेश्वर यहोवा के गुण गाओ। उसके पवित्र पर्वत की ओर झुककर उसकी उपासना करो। हमारा परमेश्वर यहोवा सचमुच पवित्र है। {i100:1} धन्यवाद का एक गीत। {100:1} हे धरती, तुम यहोवा के लिये गाओ। {100:2} आनन्दित रहो जब तुम यहोवा की सेवा करो। प्रसन्न गीतों के साथ यहोवा के सामने आओ। {100:3} तुम जान लो कि वह यहोवा ही परमेश्वर है। उसने हमें रचा है और हम उसके भक्त हैं। हम उसकी भेड़ हैं। {100:4} धन्यवाद के गीत संग लिये यहोवा के नगर में आओ, गुणगान के गीत संग लिये यहोवा के मन्दिर में आओ। उसका आदर करो और नाम धन्य करो। {100:5} यहोवा उत्तम है। उसका प्रेम सदा सर्वदा है। हम उस पर सदा सर्वदा के लिये भरोसा कर सकते हैं! {i101:1} दाऊद का एक गीत। {101:1} मैं प्रेम और खरेपन के गीत गाऊँगा। यहोवा मैं तेरे लिये गाऊँगा। {101:2} मैं पूरी सावधानी से शुद्ध जीवन जीऊँगा। मैं अपने घर में शुद्ध जीवन जीऊँगा। हे यहोवा तू मेरे पास कब आयेगा {101:3} मैं कोई भी प्रतिमा सामने नहीं रखूँगा। जो लोग इस प्रकार तेरे विमुख होते हैं, मुझो उनसे घृणा है। मैं कभी भी ऐसा नहीं करूँगा। {101:4} मैं सच्चा रहूँगा। मैं बुरे काम नहीं करूँगा। {101:5} यदि कोई व्यक्ति छिपे छिपे अपने पड़ोसी के लिये दुर्वचन कहे, मैं उस व्यक्ति को ऐसा करने से रोकूँगा। मैं लोगों को अभिमानी बनने नहीं दूँगा और मैं उन्हें सोचने नहीं दूँगा, कि वे दूसरे लोगों से उत्तम हैं। {101:6} मैं सारे ही देश में उन लोगों पर दृष्टि रखूँगा। जिन पर भरोसा किया जा सकता और मैं केवल उन्हीं लोगों को अपने लिये काम करने दूँगा। बस केवल ऐसे लोग मेरे सेवक हो सकते जो शुद्ध जीवन जीते हैं। {101:7} मैं अपने घर में ऐसे लोगों को रहने नहीं दूँगा जो झूठ बोलते हैं। मैं झूठों को अपने पास भी फटकने नहीं दूँगा। {101:8} मैं उन दुष्टों को सदा ही नष्ट करूँगा, जो इस देश में रहते है। मै उन दुष्ट लोगों को विवश करूँगा, कि वे यहोवा के नगर को छोड़े। {i102:1} एक पीड़ित व्यक्ति की उस समय की प्रार्थना। जब वह अपने को टूटा हुआ अनुभव करता है और अपनी वेदनाओं कष्ट यहोवा से कह डालना चाहता है। {102:1} यहोवा मेरी प्रार्थना सुन! तू मेरी सहायता के लिये मेरी पुकार सुन। {102:2} यहोवा जब मैं विपत्ति में होऊँ मुझ से मुख मत मोड़। जब मैं सहायता पाने को पुकारूँ तू मेरी सुन ले, मुझे शीघ्र उत्तर दे। {102:3} मेरा जीवन वैसे बीत रहा जैसा उड़ जाता धुँआ। मेरा जीवन ऐसे है जैसे धीरे धीरे बुझती आग। {102:4} मेरी शक्ति क्षीण हो चुकी है। मैं वैसा ही हूँ जैसा सूखी मुरझाती घास। अपनी वेदनाओं में मुझे भूख नहीं लगती। {102:5} निज दु: ख के कारण मेरा भार घट रहा है। {102:6} मैं अकेला हूँ जैसे कोई एकान्त निर्जन में उल्लू रहता हो। मैं अकेला हूँ जैसे कोई पुराने खण्डर भवनों में उल्लू रहता हो। {102:7} मैं सो नहीं पाता मैं उस अकेले पक्षी सा हो गया हूँ, जो धत पर हो। {102:8} मेरे शत्रु सदा मेरा अपमान करते है, और लोग मेरा नाम लेकर मेरी हँसी उड़ाते हैं। {102:9} मेरा गहरा दु: ख बस मेरा भोजन है। मेरे पेयों में मेरे आँसू गिर रहे हैं। {102:10} क्यों क्योंकि यहोवा तू मुझसे रूठ गया है। तूने ही मुझे ऊपर उठाया था, और तूने ही मुझको फेंक दिया। {102:11} मेरे जीवन का लगभग अंत हो चुका है। वैसे ही जैसे शाम को लम्बी छायाएँ खो जाती है। मैं वैसा ही हूँ जैसे सूखी और मुरझाती घास। {102:12} किन्तु हे यहोवा, तू तो सदा ही अमर रहेगा। तेरा नाम सदा और सर्वदा बना ही रहेगा। {102:13} तेरा उत्थान होगा और तू सिय्योन को चैन देगा। वह समय आ रहा है, जब तू सिय्योन पर कृपालु होगा। {102:14} तेरे भक्त, उसके (यरूशलेम के) पत्यरों से प्रेम करते हैं। वह नगर उनको भाता है। {102:15} लोग यहोवा के नाम कि आराधना करेंगे। हे परमेश्वर, धरती के सभी राजा तेरा आदर करेंगे। {102:16} क्यों? क्योंकि यहोवा फिर से सिय्योन को बनायेगा। लोग फिर उसके (यरूशलेम के) वैभव को देखेंगे। {102:17} जिन लोगों को उसने जीवित छोड़ा है, परमेश्वर उनकी प्रार्थनाएँ सुनेगा। परमेश्वर उनकी विनतियों का उत्तर देगा। {102:18} उन बातों को लिखो ताकि भविष्य के पीढ़ी पढ़े। और वे लोग आने वाले समय में यहोवा के गुण गायेंगे। {102:19} यहोवा अपने ऊँचे पवित्र स्थान से नीचे झाँकेगा। यहोवा स्वर्ग से नीचे धरती पर झाँकेगा। {102:20} वह बंदी की प्रार्थनाएँ सुनेगा। वह उन व्यक्तियों को मुक्त करेगा जिनको मृत्युदण्ड दिया गया। {102:21} फिर सिय्योन में लोग यहोवा का बखान करेंगे। यरूशलेम में लोग यहोवा का गुण गायेंगे। {102:22} ऐसा तब होगा जब यहोवा लोगों को फिर एकत्र करेगा, ऐसा तब होगा जब राज्य यहोवा की सेवा करेंगे। {102:23} मेरी शक्ति ने मुझको बिसार दिया है। यहोवा ने मेरा जीवन घटा दिया है। {102:24} इसलिए मैंने कहा, “मेरे प्राण छोटी उम्र में मत हरा। हे परमेश्वर, तू सदा और सर्वदा अमर रहेगा। {102:25} बहुत समय पहले तूने संसार रचा! तूने स्वयं अपने हाथों से आकाश रचा। {102:26} यह जगत और आकाश नष्ट हो जायेंगे, किन्तु तू सदा ही जीवित रहेगा! वे वस्त्रों के समान जीर्ण हो जायेंगे। वस्त्रों के समान ही तू उन्हें बदलेगा। वे सभी बदल दिये जायेंगे। {102:27} हे परमेश्वर, किन्तु तू कभी नहीं बदलता: तू सदा के लिये अमर रहेगा। {102:28} आज हम तेरे दास है, हमारी संतान भविष्य में यही रहेंगी और उनकी संताने यहीं तेरी उपासना करेंगी।” {i103:1} दाऊद का एक गीत। {103:1} हे मेरी आत्मा, तू यहोवा के गुण गा! हे मेरी अंग — प्रत्यंग, उसके पवित्र नाम की प्रशंसा कर। {103:2} हे मेरी आत्मा, यहोवा को धन्य कह और मत भूल की वह सचमुच कृपालु है! {103:3} उन सब पापों के लिये परमेश्वर हमको क्षमा करता है जिनको हम करते हैं। हमारी सब व्याधि को वह ठीक करता है। {103:4} परमेश्वर हमारे प्राण को कब्र से बचाता है, और वह हमे प्रेम और करुणा देता है। {103:5} परमेश्वर हमें भरपूर उत्तम वस्तुएँ देता है। वह हमें फिर उकाब सा युवा करता है। {103:6} यहोवा खरा है। परमेश्वर उन लोगों को न्याय देता है, जिन पर दूसरे लोगों ने अत्याचार किये। {103:7} परमेश्वर ने मूसा को व्यवस्था का विधान सिखाया। परमेश्वर जो शक्तिशाली काम करता है, वह इस्राएलियों के लिये प्रकट किये। {103:8} यहोवा करुणापूर्ण और दयालु है। परमेश्वर सहनशील और प्रेम से भरा है। {103:9} यहोवा सदैव ही आलोचना नहीं करता। यहोवा हम पर सदा को कुपित नहीं रहता है। {103:10} हम ने परमेश्वर के विरुद्ध पाप किये, किन्तु परमेश्वर हमें दण्ड नहीं देता जो हमें मिलना चाहिए। {103:11} अपने भक्तों पर परमेश्वर का प्रेम वैसे महान है जैसे धरती पर है ऊँचा उठा आकाश। {103:12} परमेश्वर ने हमारे पापों को हमसे इतनी ही दूर हटाया जितनी पूरब कि दूरी पश्चिम से है। {103:13} अपने भक्तों पर यहोवा वैसे ही दयालु है, जैसे पिता अपने पुत्रों पर दया करता है। {103:14} परमेश्वर हमारा सब कुछ जानता है। परमेश्वर जानता है कि हम मिट्टी से बने हैं। {103:15} परमेश्वर जानता है कि हमारा जीवन छोटा सा है। वह जानता है हमारा जीवन घास जैसा है। {103:16} परमेश्वर जानता है कि हम एक तुच्छ बनफूल से हैं। वह फूल जल्दी ही उगता है। फिर गर्म हवा चलती है और वह फूल मुरझाता है। औप फिर शीघ्र ही तुम देख नहीं पातेकि वह फूल कैसे स्थान पर उग रहा था। {103:17} किन्तु यहोवा का प्रेम सदा बना रहता है। परमेश्वर सदा — सर्वदा निज भक्तों से प्रेम करता है परमेश्वर की दया उसके बच्चों से बच्चों तक बनी रहती है। {103:18} परमेश्वर ऐसे उन लोगों पर दयालु है, जो उसकी वाचा को मानते हैं। परमेश्वर ऐसे उन लोगों पर दयालु है जो उसके आदेशों का पालन करते हैं। {103:19} परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में संस्थापित है। हर वस्तु पर उसका ही शासन है। {103:20} हे स्वर्गदूत, यहोवा के गुण गाओ। हे स्वर्गदूतों, तुम वह शक्तिशाली सैनिक हो जो परमेश्वर के आदेशों पर चलते हो। परमेश्वर की आज्ञाएँ सुनते और पालते हो। {103:21} हे सब उसके सैनिकों, यहोवा के गुण गाओ, तुम उसके सेवक हो। तुम वही करते हो जो परमेश्वर चाहता है। {103:22} हर कहीं हर वस्तु यहोवा ने रची है। परमेश्वर का शासन हर कहीं वस्तु पर है। सो हे समूची सृष्टि, यहोवा को तू धन्य कह। ओ मेरे मन यहोवा की प्रशंसा कर। {104:1} हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह! हे यहोवा, हे मेरे परमेश्वर, तू है अतिमहान! तूने महिमा और आदर के वस्त्र पहने हैं। {104:2} तू प्रकाश से मण्डित है जैसे कोई व्यक्ति चोंगा पहने। तूने व्योम जैसे फैलाये चंदोबा हो। {104:3} हे परमेश्वर, तूने उनके ऊपर अपना घर बनाया, गहरे बादलों को तू अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चढ़ कर आकाश पार करता है। {104:4} हे परमेश्वर, तूने निज दूतों को वैसे बनाया जैसे पवन होता है। तूने निज दासों को अग्नि के समान बनाया। {104:5} हे परमेश्वर, तूने ही धरती का उसकी नीवों पर निमार्ण किया। इसलिए उसका नाश कभी नहीं होगा। {104:6} तूने जल की चादर से धरती को ढका। जल ने पहाड़ों को ढक लिया। {104:7} तूने आदेश दिया और जल दूर हट गया। हे परमेश्वर, तू जल पर गरजा और जल दूर भागा। {104:8} पर्वतों से निचे घाटियों में जल बहने लगा, और फिर उन सभी स्थानों पर जल बहा जो उसके लिये तूने रचा था। {104:9} तूने सागरों की सीमाएँ बाँध दी और जल फिर कभी धरता को ढकने नहीं जाएगा। {104:10} हे परमेश्वर, तूने ही जल बहाया। सोतों से नदियों से नीचे पहाड़ी नदियों से पानी बह चला। {104:11} सभी वन्य पशुओं को धाराएँ जल देती हैं, जिनमें जंगली गधे तक आकर के प्यास बुझाते हैं। {104:12} वन के परिंदे तालाबों के किनारे रहने को आते हैं और पास खड़े पेड़ों की डालियों में गाते हैं। {104:13} परमेश्वर पहाड़ों के ऊपर नीचे वर्षा भेजता है। परमेश्वर ने जो कुछ रचा है, धरती को वह सब देता है जो उसे चाहिए। {104:14} परमेश्वर, पशुओं को खाने के लिये घास उपजाई, हम श्रम करते हैं और वह हमें पौधे देता है। ये पौधे वह भोजन है जिसे हम धरती से पाते हैं। {104:15} परमेश्वर, हमें दाखमधु देता है, जो हमको प्रसन्न करती है। हमारा चर्म नर्म रखने को तू हमें तेल देता है। हमें पुष्ट करने को वह हमें खाना देता है। {104:16} लबानोन के जो विशाल वृक्ष हैं वह परमेश्वर के हैं। उन विशाल वृक्षों हेतु उनकी बढ़वार को बहुत जल रहता है। {104:17} पक्षी उन वृक्षों पर निज घोंसले बनाते। सनोवर के वृक्षों पर सारस का बसेरा है। {104:18} बनैले बकरों के घर ऊँचे पहाड़ में बने हैं। बिच्छुओं के छिपने के स्थान बड़ी चट्टान है। {104:19} हे परमेश्वर, तूने हमें चाँद दिया जिससे हम जान पायें कि छुट्टियाँ कब है। सूरज सदा जानता है कि उसको कहाँ छिपना है। {104:20} तूने अंधेरा बनाया जिससे रात हो जाये और देखो रात में बनैले पशु बाहर आ जाते और इधर — उधर घूमते हैं। {104:21} वे झपटते सिंह जब दहाड़ते हैं तब ऐसा लगता जैसे वे यहोवा को पुकारते हों, जिसे माँगने से वह उनको आहार देता। {104:22} और पौ फटने पर जीवजन्तु वापस घरों को लौटते और आराम करते हैं। {104:23} फिर लोग अपना काम करने को बाहर निकलते हैं। साँझ तक वे काम में लगे रहते हैं। {104:24} हे यहोवा, तूने अचरज भरे बहुतेरे काम किये। धरती तेरी वस्तुओं से भरी पड़ी है। तू जो कुछ करता है, उसमें निज विवेक दर्शाता है। {104:25} यह सागर देखे! यह कितना विशाल है! बहुतेरे वस्तुएँ सागर में रहती हैं! उनमें कुछ विशाल है और कुछ छोटी हैं! सागर में जो जीवजन्तु रहते हैं, वे अगणित असंख्य हैं। {104:26} सागर के ऊपर जलयान तैरते हैं, और सागर के भीतर महामत्स्य जो सागर के जीव को तूने रचा था, क्रीड़ा करता है। {104:27} यहोवा, यह सब कुछ तुझ पर निर्भर है। हे परमेश्वर, उन सभी जीवों को खाना तू उचित समय पर देता है। {104:28} हे परमेश्वर, खाना जिसे वे खाते है, वह तू सभी जीवों को देता है। तू अच्छे खाने से भरे अपने हाथ खोलता है, और वे तृप्त हो जाने तक खाते हैं। {104:29} फिर जब तू उनसे मुख मोड़ लेता तब वे भयभीत हो जाते हैं। उनकी आत्मा उनको छोड़ चली जाती है। वे दुर्बल हो जाते और मर जाते हैं और उनकी देह फिर धूल हो जाती है। {104:30} हे यहोवा, निज आत्मा का अंश तू उन्हें दे। और वह फिर से स्वस्थ हो जोयेंगे। तू फिर धरती को नयी सी बना दे। {104:31} यहोवा की महिमा सदा सदा बनी रहे! यहोवा अपनी सृष्टि से सदा आनन्दित रहे! {104:32} यहोवा की दृष्टि से यह धरती काँप उठेगी। पर्वतों से धुआँ उठने लग जायेगा। {104:33} मैं जीवन भर यहोवा के लिये गाऊँगा। मैं जब तक जीता हूँ यहोवा के गुण गाता रहूँगा। {104:34} मुझको यह आज्ञा है कि जो कुछ मैंने कहा है वह उसे प्रसन्न करेगा। मैं तो यहोवा के संग में प्रसन्न हूँ! {104:35} धरती से पाप का लोप हो जाये और दुष्ट लोग सदा के लिये मिट जाये। ओ मेरे मन यहोवा कि प्रशंसा कर। यहोवा के गुणगान कर! {105:1} यहोवा का धन्यवाद करो! तुम उसके नाम की उपासना करो। लोगों से उनका बखान करो जिन अद्भुत कामों को वह किया करता है। {105:2} यहोवा के लिये तुम गाओ। तुम उसके प्रशंसा गीत गाओ। उन सभी आश्चर्यपूर्ण बातों का वर्णन करो जिनको वह करता है। {105:3} यहोवा के पवित्र नाम पर गर्व करो। ओ सभी लोगों जो यहोवा के उपासक हो, तुम प्रसन्न हो जाओ। {105:4} सामर्थ्य पाने को तुम यहोवा के पास जाओ। सहारा पाने को सदा उसके पास जाओ। {105:5} उन अद्भुत बातों को स्मरण करो जिनको यहोवा करता है। उसके आश्चर्य कर्म और उसके विवेकपूर्ण निर्णयों को याद रखो। {105:6} तुम परमेश्वर के सेवक इब्राहीम के वंशज हो। तुम याकूब के संतान हो, वह व्यक्ति जिसे परमेश्वर ने चुना था। {105:7} यहोवा ही हमारा परमेश्वर है। सारे संसार पर यहोवा का शासन है। {105:8} परमेश्वर की वाचा सदा याद रखो। हजार पीढ़ियों तक उसके आदेश याद रखो। {105:9} इब्राहीम के साथ परमेश्वर ने वाचा बाँधा था! परमेश्वर ने इसहाक को वचन दिया था। {105:10} परमेश्वर ने याकूब (इस्राएल) को व्यवस्था विधान दिया। परमेश्वर ने इस्राएल के साथ वाचा किया। यह सदा सर्वदा बना रहेगा। {105:11} परमेश्वर ने कहा था, “कनान की भूमि मैं तुमको दूँगा। वह धरती तुम्हारी हो जायेगी।” {105:12} परमेश्वर ने वह वचन दिया था, जब इब्राहीम का परिवार छोटा था और वे बस यात्री थे जब कनान में रह रहे थे। {105:13} वे राष्ट्र से राष्ट्र में, एक राज्य से दूसरे राज्य में घूमते रहे। {105:14} किन्तु परमेश्वर ने उस घराने को दूसरे लोगों से हानि नहीं पहुँचने दी। परमेश्वर ने राजाओं को सावधान किया कि वे उनको हानि न पहुँचाये। {105:15} परमेश्वर ने कहा था, “मेरे चुने हुए लोगों को तुम हानि मत पहूँचाओ। तुम मेरे कोई नबियों का बुरा मत करो।” {105:16} परमेश्वर ने उस देश में अकाल भेजा। और लोगों के पास खाने को पर्याप्त खाना नहीं रहा। {105:17} किन्तु परमेश्वर ने एक व्यक्ति को उनके आगे जाने को भेजा जिसका नाम यूसुफ था। यूसुफ को एक दास के समान बेचा गया था। {105:18} उन्होंने यूसुफ के पाँव में रस्सी बाँधी। उन्होंने उसकी गर्दन में एक लोहे का कड़ा डाल दिया। {105:19} यूसुफ को तब तक बंदी बनाये रखा जब तक वे बातें जो उसने कहीं थी सचमुच घट न गयी। यहोवा ने सुसन्देश से प्रमाणित कर दिया कि यूसुफ उचित था। {105:20} मिस्र के राजा ने इस तरह आज्ञा दी कि यूसुफ के बंधनों से मुक्त कर दिया जाये। उस राष्ट्र के नेता ने कारागार से उसको मुक्त कर दिया। {105:21} यूसुफ को अपने घर बार का अधिकारी बना दिया। यूसुफ राज्य में हर वस्तु का ध्यान रखने लगा। {105:22} यूसुफ अन्य प्रमुखों को निर्देश दिया करता था। यूसुफ ने वृद्ध लोगों को शिक्षा दी। {105:23} फिर जब इस्राएल मिस्र में आया। याकूब हाम के देश में रहने लगा। {105:24} याकूब के वंशज बहुत से हो गये। वे मिस्र के लोगों से अधिक बलशाली बन गये। {105:25} इसलिए मिस्री लोग याकूब के घराने से घृणा करने लगे। मिस्र के लोग अपने दासों के विरुद्ध कुचक्र रचने लगे। {105:26} इसलिए परमेश्वर ने निज दास मूसा और हारुन जो नबी चुना हुआ था, भेजा। {105:27} परमेश्वर ने हाम के देश में मूसा और हारुन से अनेक आश्चर्य कर्म कराये। {105:28} परमेश्वर ने गहन अधंकार भेजा था, किन्तु मिस्त्रियों ने उनकी नहीं सुनी थी। {105:29} सो फिर परमेश्वर ने पानी को खून में बदल दिया, और उनकी सब मछलियाँ मर गयी। {105:30} और फिर बाद में मिस्त्रियों का देश मेढ़कों से भर गया। यहाँ तक की मेढ़क राजा के शयन कक्ष तक भरे। {105:31} परमेश्वर ने आज्ञा दी मक्खियाँ और पिस्सू आये। वे हर कहीं फैल गये। {105:32} परमेश्वर ने वर्षा को ओलों में बदल दिया। मिस्त्रियों के देश में हर कहीं आग और बिजली गिरने लगी। {105:33} परमेश्वर ने मिस्त्रियों की अंगूर की बाड़ी और अंजीर के पेड़ नष्ट कर दिये। परमेश्वर ने उनके देश के हर पेड़ को तहस नहस किया। {105:34} परमेश्वर ने आज्ञा दी और टिड्डी दल आ गये। टिड्डे आ गये और उनकी संखया अनगिनत थी। {105:35} टिड्डी दल और टिड्डे उस देश के सभी पौधे चट कर गये। उन्होंने धरती पर जो भी फसलें खड़ी थी, सभी को खा डाली। {105:36} फिर परमेश्वर ने मिस्त्रियों के पहलौठी सन्तान को मार डाला। परमेश्वर ने उनके सबसे बड़े पुत्रों को मारा। {105:37} फिर परमेश्वर निज भक्तों को मिस्र से निकाल लाया। वे अपने साथ सोना और चाँदी ले आये। परमेश्वर का कोई भी भक्त गिरा नहीं न ही लड़खड़ाया। {105:38} परमेश्वर के लोगों को जाते हुए देख कर मिस्र आनन्दित था, क्योंकि परमेश्वर के लोगों से वे डरे हुए थे। {105:39} परमेश्वर ने कम्बल जैसा एक मेघ फैलाया। रात में निज भक्तों को प्रकाश देने के लिये परमेश्वर ने अपने आग के स्तम्भ को काम में लाया। {105:40} लोगों ने खाने की माँग की और परमेश्वर उनके लिये बटेरों को ले आया। परमेश्वर ने आकाश से उनको भरपूर भोजन दिया। {105:41} परमेश्वर ने चट्टान को फाड़ा और जल उछलता हुआ बाहर फूट पड़ा। उस मरुभूमि के बीच एक नदी बहने लगी। {105:42} परमेश्वर ने अपना पवित्र वचन याद किया। परमेश्वर ने वह वचन याद किया जो उसने अपने दास इब्राहीम को दिया था। {105:43} परमेश्वर अपने विशेष को मिस्र से बाहर निकाल लाया। लोग प्रसन्न गीत गाते हुए और खुशियाँ मनाते हुए बाहर आ गये! {105:44} फिर परमेश्वर ने निज भक्तों को वह देश दिया जहाँ और लोग रह रहे थे। परमेश्वर के भक्तों ने वे सभी वस्तु पा ली जिनके लिये औरों ने श्रम किया था। {105:45} परमेश्वर ने ऐसा इसलिए किया ताकि लोग उसकी व्यवस्था माने। परमेश्वर ने ऐसा इसलिए किया ताकि वे उसकी शिक्षाओं पर चलें। यहोवा के गुण गाओ! {106:1} यहोवा की प्रशंसा करो! यहोवा का धन्यवाद करो क्योंकि वह उत्तम है! परमेश्वर का प्रेम सदा ही रहता है! {106:2} सचमुच यहोवा कितना महान है, इसका बखान कोई व्यक्ति कर नहीं सकता। परमेश्वर की पूरी प्रशंसा कोई नहीं कर सकता। {106:3} जो लोग परमेश्वर का आदेश पालते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं। वे व्यक्ति हर समय उत्तम कर्म करते हैं। {106:4} यहोवा, जब तू निज भक्तों पर कृपा करे। मुझको याद कर। मुझको भी उद्धार करने को याद कर। {106:5} यहोवा, मुझको भी उन भली बातों में हिस्सा बँटाने दे जिन को तू अपने लोगों के लिये करता है। तू अपने भक्तों के साथ मुझको भी प्रसन्न होने दे। तुझ पर तेरे भक्तों के साथ मुझको भी गर्व करने दे। {106:6} हमने वैसे ही पाप किये हैं जैसे हमारे पूर्वजों ने किये। हम अधर्मी हैं, हमने बुरे काम किये है! {106:7} हे यहोवा, मिस्र में हमारे पूर्वजों ने आश्चर्य कर्मो से कुछ भी नहीं सीखा। उन्होंने तेरे प्रेम को और तेरी करूणा को याद नहीं रखा। हमारे पूर्वज वहाँ लाल सागर के किनारे तेरे विरूद्ध हुए। {106:8} किन्तु परमेश्वर ने निज नाम के हेतु हमारे पूर्वजों को बचाया था। परमेश्वर ने अपनी महान शक्ति दिखाने को उनको बचाया था। {106:9} परमेश्वर ने आदेश दिया और लाल सागर सूखा। परमेश्वर हमारे पूर्वजों को उस गहरे समुद्र से इतनी सूखी धरती से निकाल ले आया जैसे मरूभूमि हो। {106:10} परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों को उनके शत्रुओं से बचाया! परमेश्वर उनको उनके शत्रुओं से बचा कर निकाल लाया। {106:11} और फिर उनके शत्रुओं को उसी सागर के बीच ढ़ाँप कर डुबा दिया। उनका एक भी शत्रु बच निकल नहीं पाया। {106:12} फिर हमारे पूर्वजों ने परमेश्वर पर विश्वास किया। उन्होंने उसके गुण गाये। {106:13} किन्तु हमारे पूर्वज उन बातों को शीघ्र भूले जो परमेश्वर ने की थी। उन्होंने परमेश्वर की सम्मति पर कान नहीं दिया। {106:14} हमारे पूर्वजों को जंगल में भूख लगी थी। उस मरूभूमि में उन्होंने परमेश्वर को परखा। {106:15} किन्तु हमारे पूर्वजों ने जो कुछ भी माँगा परमेश्वर ने उनको दिया। किन्तु परमेश्वर ने उनको एक महामारी भी दे दी थी। {106:16} लोग मूसा से डाह रखने लगे और हारून से वे डाह रखने लगे जो यहोवा का पवित्र याजक था। {106:17} सो परमेश्वर ने उन ईर्ष्यालु लोगों को दण्ड दिया। धरती फट गयी और दातान को निगला और फिर धरती बन्द हो गयी। उसने अविराम के समूह को निगल लिया। {106:18} फिर आग ने उन लोगों की भीड़ को भस्म किया। उन दुष्ट लोगों को आग ने जाला दिया। {106:19} उन लोगों ने होरब के पहाड़ पर सोने का एक बछड़ा बनाया और वे उस मूर्ति की पूजा करने लगे! {106:20} उन लोगों ने अपने महिमावान परमेश्वर को एक बहुत जो घास खाने वाले बछड़े का था उससे बेच दिया! {106:21} हमारे पूर्वज परमेश्वर को भूले जिसने उन्हें बचाया था। वे परमेशवर के विषय में भूले जिसने मिस्र में आश्चर्य कर्म किये थे। {106:22} परमेश्वर ने हाम के देश में आश्चर्य कर्म किये थे। परमेश्वर ने लाल सागर के पास भय विस्मय भरे काम किये थे। {106:23} परमेश्वर उन लोगों को नष्ट करना चाहता था, किन्तु परमेश्वर के चुने दास मूसा ने उनको रोक दिया। परमेश्वर बहुत कुपित था किन्तु मूसा आड़े आया कि परमेश्वर उन लोगों का कहीं नाश न करे। {106:24} फिर उन लोगों ने उस अद्भुत देश कनान में जाने से मना कर दिया। लोगों को विश्वास नहीं था कि परमेश्वर उन लोगों को हराने में सहायता करेगा जो उस देश में रह रहे थे। {106:25} अपने तम्बुओं में वे शिकायत करते रहे! हमारे पूर्वजों ने परमेश्वर की बात मानने से नकारा। {106:26} सो परमेश्वर ने शपथ खाई कि वे मरूभुमि में मर जायेंगे। {106:27} परमेश्वर ने कसम खाई कि उनकी सन्तानों को अन्य लोगों को हराने देगा। परमेश्वर ने कसम उठाई कि वह हमारे पूर्वजों को देशों में छितरायेगा। {106:28} फिर परमेश्वर के लोग बालपोर में बाल के पूजने में सम्मिलित हो गये। परमेश्वर के लोग वह माँस खाने लगे जिस को निर्जीव देवताओं पर चढ़ाया गया था। {106:29} परमेश्वर अपने जनों पर अति कुपित हुआ। और परमेश्वर ने उनको अति दुर्बल कर दिया। {106:30} किन्तु पीनहास ने विनती की और परमेश्वर ने उस व्याधि को रोका। {106:31} किन्तु परमेश्वर जानता था कि पीनहास ने अति उत्तम कर्म किया है। और परमेश्वर उसे सदा सदा याद रखेगा। {106:32} मरीब में लोग भड़क उठे और उन्होंने मूसा से बुरा काम कराया। {106:33} उन लोगों ने मूसा को अति व्याकुल किया। सो मूसा बिना ही विचारे बोल उठा। {106:34} यहोवा ने लोगों से कहा कि कनान में रह रहे अन्य लोगों को वे नष्ट करें। किन्तु इस्राएली लोगों ने परमेश्वर की नहीं मानी। {106:35} इस्राएल के लोग अन्य लोगों से हिल मिल गये, और वे भी वैसे काम करने लगे जैसे अन्य लोग किया करते थे। {106:36} वे अन्य लोग परमेश्वर के जनों के लिये फँदा बन गये। परमेश्वर के लोग उन देवों को पूजने लगेजिनकी वे अन्य लोग पूजा किया करते थे। {106:37} यहाँ तक कि परमेश्वर के जन अपने ही बालकों की हत्या करने लगे। और वे उन बच्चों को उन दानवों की प्रतिमा को अर्पित करने लगे। {106:38} परमेश्वर के लोगों ने अबोध भोले जनों की हत्या की। उन्होंने अपने ही बच्चों को मार डाला और उन झूठे देवों को उन्हें अर्पित किया। {106:39} इस तरह परमेश्वर के जन उन पापों से अशुद्ध हुए जो अन्य लोगों के थे। वे लोग अपने परमेश्वर के अविश्वासपात्र हुए। और वे लोग वैसे काम करने लगे जैसे अन्य लोग करते थे। {106:40} परमेश्वर अपने उन लोगों पर कुपित हुआ। परमेश्वर उनसे तंग आ चुका था! {106:41} फिर परमेश्वर ने अपने उन लोगों को अन्य जातियों को दे दिया। परमेश्वर ने उन पर उनके शत्रुओं का शासन करा दिया। {106:42} परमेश्वर के जनों के शत्रुओं ने उन पर अधिकार किया और उनका जीना बहुत कठिन कर दिया। {106:43} परमेश्वर ने निज भक्तों को बहुत बार बचाया, किन्तु उन्होंने परमेश्वर से मुख मोड़ लिया। और वे ऐसी बातें करने लगे जिन्हें वे करना चाहते थे। परमेश्वर के लोगों ने बहुत बहुत बुरी बातें की। {106:44} किन्तु जब कभी परमेश्वर के जनों पर विपद पड़ी उन्होंने सदा ही सहायाता पाने को परमेश्वर को पुकारा। परमेश्वर ने हर बार उनकी प्रार्थनाएँ सुनी। {106:45} परमेश्वर ने सदा अपनी वाचा को याद रखा। परमेश्वर ने अपने महा प्रेम से उनको सदा ही सुख चैन दिया। {106:46} परमेश्वर के भक्तों को उन अन्य लोगों ने बंदी बना लिया, किन्तु परमेश्वर ने उनके मन में उनके लिये दया उपजाई। {106:47} यहोवा हमारे परमेश्वर, ने हमारी रक्षा की। परमेश्वर उन अन्य देशों से हमको एकत्र करके ले आया, ताकि हम उसके पवित्र नाम का गुण गान कर सके: ताकि हम उसके प्रशंसा गीत गा सकें। {106:48} इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को धन्य कहो। परमेश्वर सदा ही जीवित रहता आया है। वह सदा ही जीवित रहेगा। और सब जन बोले, “आमीन।” यहोवा के गुण गाओ। {i107:1} पाँचवाँ भाग (भजनसंहिता 107-150) {107:1} यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह उत्तम है। उसका प्रेम अमर है। {107:2} हर कोई ऐसा व्यक्ति जिसे यहोवा ने बचाया है, इन राष्ट्रों को कहे। हर कोई ऐसा व्यक्ति जिसे यहोवा ने अपने शत्रुओं से छुड़ाया उसके गुण गाओ। {107:3} यहोवा ने निज भक्तों को बहुत से अलग अलग देशों से इकट्ठा किया है। उसने उन्हें पूर्व और पश्चिम से, उत्तर और दक्षिण से जुटाया है। {107:4} कुछ लोग निर्जन मरूभूमि में भटकते रहे। वे लोग ऐसे एक नगर की खोज में थे जहाँ वे रह सकें। किन्तु उन्हें कोई ऐसा नगर नहीं मिला। {107:5} वे लोग भूखे थे और प्यासे थे और वे दुर्बल होते जा रहे थे। {107:6} ऐसे उस संकट में सहारा पाने को उन्होंने यहोवा को पुकारा। यहोवा ने उन सभी लोगों को उनके संकट से बचा लिया। {107:7} परमेश्वर उन्हें सीधा उन नगरों में ले गया जहाँ वे बसेंगे। {107:8} परमेश्वर का धन्यवाद करो उसके प्रेम के लिये और उन अद्भुत कर्मों के लिये जिन्हें वह अपने लोगों के लिये करता है। {107:9} प्यासी आत्मा को परमेश्वर सन्तुष्ट करता है। परमेश्वर उत्तम वस्तुओं से भूखी आत्मा का पेट भरता है। {107:10} परमेश्वर के कुछ भक्त बन्दी बने ऐसे बन्दीगृह में, वे तालों में बंद थे, जिसमें घना अंधकार था। {107:11} क्यों? क्योंकि उन लोगों ने उन बातों के विरूद्ध लड़ाईयाँ की थी जो परमेश्वर ने कहीं थी, परम परमेश्वर की सम्मति को उन्होंने सुनने से नकारा था। {107:12} परमेश्वर ने उनके कर्मो के लिये जो उन्होंने किये थे उन लोगों के जीवन को कठिन बनाया। उन्होंने ठोकर खाई और वे गिर पड़े, और उन्हें सहारा देने कोई भी नहीं मिला। {107:13} वे व्यक्ति संकट में थे, इसलिए सहारा पाने को यहोवा को पुकारा। यहोवा ने उनके संकटों से उनकी रक्षा की। {107:14} परमेश्वर ने उनको उनके अंधेरे कारागारों से उबार लिया। परमेश्वर ने वे रस्से काटे जिनसे उनको बाँधा गया था। {107:15} यहोवा का धन्यवाद करो। उसके प्रेम के लिये और उन अद्भुत कामों के लिये जिन्हें वह लोगों के लिये करता है उसका धन्यवाद करो। {107:16} परमेश्वर हमारे शत्रुओं को हराने में हमें सहायता देता है। उनके काँसें के द्वारों को परमेश्वर तोड़ गिरा सकता है। परमेश्वर उनके द्वारों पर लगी लोहे कि आगलें छिन्न — भिन्न कर सकता है। {107:17} कुछ लोग अपने अपराधों और अपने पापों से जड़मति बने। {107:18} उन लोगों ने खाना छोड़ दिया और वे मरे हुए से हो गये। {107:19} वे संकट में थे सो उन्होंने सहायता पाने को यहोवा को पुकारा। यहोवा ने उन्हें उनके संकटों से बचा लिया। {107:20} परमेश्वर ने आदेश दिया और लोगों को चँगा किया। इस प्रकार वे व्यक्ति कब्रों से बचाये गये। {107:21} उसके प्रेम के लिये यहोवा का धन्यवाद करो उसके वे अद्भुत कामों के लिये उसका धन्यवाद करो जिन्हें वह लोगों के लिये करता है। {107:22} यहोवा को धन्यवाद देने बलि अर्पित करो, सभी कार्मो को जो उसने किये हैं। यहोवा ने जिनको किया है, उन बातों को आनन्द के साथ बखानो। {107:23} कुछ लोग अपने काम करने को अपनी नावों से समुद्र पार कर गये। {107:24} उन लोगों ने ऐसी बातों को देखा है जिनको यहोवा कर सकता है। उन्होंने उन अद्भुत बातों को देखा है जिन्हें यहोवा ने सागर पर किया है। {107:25} परमेश्वर ने आदेश दिया, फिर एक तीव्र पवन तभी चलने लगी। बड़ी से बड़ी लहरे आकार लेने लगी। {107:26} लहरे इतनी ऊपर उठीं जितना आकाश हो तूफान इतना भयानक था कि लोग भयभीत हो गये। {107:27} लोग लड़खड़ा रहे थे, गिरे जा रहे थे जैसे नशे में धुत हो। खिवैया उनकी बुद्धि जैसे व्यर्थ हो गयी हो। {107:28} वे संकट में थे सो उन्होंने सहायता पाने को यहोवा को पुकारा। तब यहोवा ने उनको संकटों से बचा लिया। {107:29} परमेश्वर ने तूफान को रोका और लहरें शांत हो गयी। {107:30} खिवैया प्रसन्न थे कि सागर शांत हुआ था। परमेश्वर उनको उसी सुरक्षित स्थान पर ले गया जहाँ वे जाना चाहते थे। {107:31} यहोवा का धन्यवाद करो उसके प्रेम के लिये धन्यवाद करो उन अद्भुत कामों के लिये जिन्हें वह लोगों के लिये करता है। {107:32} महासभा के बीच उसका गुणगान करो। जब बुजुर्ग नेता आपस में मिलते हों उसकी प्रशंसा करों। {107:33} परमेश्वर ने नदियाँ मरूभूमि में बदल दीं। परमेश्वर ने झरनों के प्रवाह को रोका। {107:34} परमेश्वर ने उपजाऊँ भूमि को व्यर्थ की रेही भूमि में बदल दिया। क्यों क्योंकि वहाँ बसे दुष्ट लोगों ने बुरे कर्म किये थे। {107:35} और परमेश्वर ने मरूभूमि को झीलों की धरती में बदला। उसने सूखी धरती से जल के स्रोत बहा दिये। {107:36} परमेश्वर भूखे जनों को उस अच्छी धरती पर ले गया और उन लोगों ने अपने रहने को वहाँ एक नगर बसाया। {107:37} फिर उन लोगों ने अपने खेतों में बीजों को रोप दिया। उन्होंने बगीचों में अंगूर रोप दिये, और उन्होंने एक उत्तम फसल पा ली। {107:38} परमेश्वर ने उन लोगों को आशिर्वाद दिया। उनके परिवार फलने फूलने लगे। उनके पास बहुत सारे पशु हुए। {107:39} उनके परिवार विनाश और संकट के कारण छोटे थे और वे दुर्बल थे। {107:40} परमेश्वर ने उनके प्रमुखों को कुचला और अपमानित किया था। परमेश्वर ने उनको पथहीन मरूभूमि में भटकाया। {107:41} किन्तु परमेश्वर ने तभी उन दीन लोगों को उनकी याचना से बचा कर निकाल लिया। अब तो उनके घराने बड़े हैं, उतने बड़े जितनी भेड़ों के झुण्ड। {107:42} भले लोग इसको देखते हैं और आनन्दित होते हैं, किन्तु कुटिल इसको देखते हैं और नहीं जानते कि वे क्या कहें। {107:43} यदि कोई व्यक्ति विवेकी है तो वह इन बातों को याद रखेगा। यदि कोई व्यक्ति विवेकी है तो वह समझेगा कि सचमुच परमेश्वर का प्रेम कैसा है। {i108:1} दाऊद का एक स्तुति गीत। {108:1} हे परमेश्वर, मैं तैयार हूँ। मैं तेरे स्तुति गीतों को गाने बजाने को तैयार हूँ। {108:2} हे वीणाओं, और हे सारंगियों! आओ हम सूरज को जगाये। {108:3} हे यहोवा, हम तेरे यश को राष्ट्रों के बीच गायेंगे और दूसरे लोगों के बीच तेरी स्तुति करेंगे। {108:4} हे परमेश्वर, तेरा प्रेम आकाश से बढ़कर ऊँचा है, तेरा सच्चा प्रेम ऊँचा, सबसे ऊँचे बादलों से बढ़कर है। {108:5} हे परमेश्वर, आकाशों से ऊपर उठ! ताकि सारा जगत तेरी महिमा का दर्शन करे। {108:6} हे परमेश्वर, निज प्रियों को बचाने ऐसा कर मेरी विनती का उत्तर दे, और हमको बचाने को निज महाशक्ति का प्रयोग कर। {108:7} यहोवा अपने मन्दिर से बोला और उसने कहा, “मैं युद्ध जीतूँगा। मैं अपने भक्तों को शोकेम प्रदान करूँगा। मैं उनको सुक्कोत की घाटी दूँगा। {108:8} गिलाद और मनश्शे मेरे हो जायेंगे। एप्रैम मेरा शिरबाण होगा और यहूदा मेरा राजदण्ड बनेगा। {108:9} मोआब मेरा चरण धोने का पात्र बनेगा। एदोम वह दास होगा जो मेरा पादूका लेकर चलेगा, मैं पलिश्तियों को पराजित करके विजय का जयघोष करूँगा।” {108:10} मुझे शत्रु के दुर्ग में कौन ले जायेगा एदोम को हराने कौन मेरी सहायता करेगा हे परमेश्वर, {108:11} क्या यह सत्य है कि तूने हमें बिसारा है और तू हमारी सेना के साथ नहीं चलेगा! {108:12} हे परमेश्वर, कृपा कर, हमारे शत्रु को हराने में हमको सहायता दे! मनुष्य तो हमको सहारा नहीं दे सकते। {108:13} बस केवल परमेश्वर हमको सुदृढ़ कर सकता है। बस केवल परमेश्वर हमारे शत्रुओं को पराजित कर सकता है! {i109:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक स्तुति गीत। {109:1} हे परमेश्वर, मेरी विनती की ओर से अपने कान तू मत मूँद! {109:2} दुष्ट जन मेरे विषय में झूठी बातें कर रहे हैं। वे दुष्ट लोग ऐसा कह रहें जो सच नहीं है। {109:3} लोग मेरे विषय में घिनौनी बातें कह रहे हैं। लोग मुझ पर व्यर्थ ही बात कर रहे हैं। {109:4} मैंने उन्हें प्रेम किया, वे मुझसे बैर करते हैं। इसलिए, परमेश्वर अब मैं तुझ से प्रार्थना कर रहा हूँ। {109:5} मैंने उन व्यक्तियों के साथ भला किया था। किन्तु वे मेरे लिये बुरा कर रहे हैं। मैंने उन्हें प्रेम किया, किन्तु वे मुझसे बैर रखते हैं। {109:6} मेरे उस शत्रु ने जो बुरे काम किये हैं उसको दण्ड दे। ऐसा कोई व्यक्ति ढूँढ जो प्रमाणित करे कि वह सही नहीं है। {109:7} न्यायाधीश न्याय करे कि शत्रु ने मेरा बुरा किया है, और मेरे शत्रु जो भी कहे वह अपराधी है और उसकी बातें उसके ही लिये बिगड़ जायें। {109:8} मेरे शत्रु को शीघ्र मर जाने दे। मेरे शत्रु का काम किसी और को लेने दे। {109:9} मेरे शत्रु की सन्तानों को अनाथ कर दे और उसकी पत्नी को तू विधवा कर दे। {109:10} उनका घर उनसे छूट जायें और वे भिखारी हो जायें। {109:11} कुछ मेरे शत्रु का हो उसका लेनदार छीन कर ले जायें। उसके मेहनत का फल अनजाने लोग लूट कर ले जायें। {109:12} मेरी यही कामना है, मेरे शत्रु पर कोई दया न दिखाये, और उसके सन्तानों पर कोई भी व्यक्ति दया नहीं दिखलाये। {109:13} पूरी तरह नष्ट कर दे मेरे शत्रु को। आने वाली पीढ़ी को हर किसी वस्तु से उसका नाम मिटने दे। {109:14} मेरी कामना यह है कि मेरे शत्रु के पिता और माता के पापों को यहोवा सदा ही याद रखे। {109:15} यहोवा सदा ही उन पापों को याद रखे और मुझे आशा है कि वह मेरे शत्रु की याद मिटाने को लोगों को विवश करेगा। {109:16} क्यों? क्योंकि उस दुष्ट ने कोई भी अच्छा कर्म कभी भी नहीं किया। उसने किसी को कभी भी प्रेम नहीं किया। उसने दीनों असहायों का जीना कठिन कर दिया। {109:17} उस दुष्ट लोगों को शाप देना भाता था। सो वही शाप उस पर लौट कर गिर जाये। उस बुरे व्यक्ति ने कभी आशीष न दी कि लोगों के लिये कोई भी अच्छी बात घटे। सो उसके साथ कोई भी भली बात मत होने दे। {109:18} वह शाप को वस्त्रों सा ओढ़ लें। शाप ही उसके लिये पानी बन जाये वह जिसको पीता रहे। शाप ही उसके शरीर पर तेल बनें। {109:19} शाप ही उस दुष्ट जन का वस्त्र बने जिनको वह लपेटे, और शाप ही उसके लिये कमर बन्द बने। {109:20} मुझको यह आशा है कि यहोवा मेरे शत्रु के साथ इन सभी बातों को करेगा। मुझको यह आशा है कि यहोवा इन सभी बातों को उनके साथ करेगा जो मेरी हत्या का जतन कर रहे है। {109:21} यहोवा तू मेरा स्वामी है। सो मेरे संग वैसा बर्ताव कर जिससे तेरे नाम का यश बढ़े। तेरी करूणा महान है, सो मेरी रक्षा कर। {109:22} मैं बस एक दीन, असहाय जन हूँ। मैं सचमुच दु: खी हूँ। मेरा मन टूट चुका है। {109:23} मुझे ऐसा लग रहा जैसे मेरा जीवन साँझ के समय की लम्बी छाया की भाँति बीत चुका है। मुझे ऐसा लग रहा जैसे किसी खटमल को किसी ने बाहर किया। {109:24} क्योंकि मैं भूखा हूँ इसलिए मेरे घुटने दुर्बल हो गये हैं। मेरा भार घटता ही जा रहा है, और मैं सूखता जा रहा हूँ। {109:25} बुरे लोग मुझको अपमानित करते। वे मुझको घूरते और अपना सिर मटकाते हैं।। {109:26} यहोवा मेरा परमेश्वर, मुझको सहारा दे! अपना सच्चा प्रेम दिखा और मुझको बचा ले! {109:27} फिर वे लोग जान जायेंगे कि तूने ही मुझे बचाया है। उनको पता चल जायेगा कि वह तेरी शक्ति थी जिसने मुझको सहारा दिया। {109:28} वे लोग मुझे शाप देते रहे। किन्तु यहोवा मुझको आशीर्वाद दे सकता है। उन्होंने मुझ पर वार किया, सो उनको हरा दे। तब मैं, तेरा दास, प्रसन्न हो जाऊँगा। {109:29} मेरे शत्रुओं को अपमानित कर! वे अपने लाज से ऐसे ढक जायें जैसे परिधान का आवरण ढक लेता। {109:30} मैं यहोवा का धन्यवाद करता हूँ। बहुत लोगों के सामने मैं उसके गुण गाता हूँ। {109:31} क्यों? क्योंकि यहोवा असहाय लोगों का साथ देता है। परमेश्वर उनको दूसरे लोगों से बचाता है, जो प्राणदण्ड दिलवाकर उनके प्राण हरने का यत्न करते हैं। {i110:1} दाऊद का एक स्तुति गीत। {110:1} यहोवा ने मेरे स्वामी से कहा, “तू मेरे दाहिने बैठ जा, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पाँव की चौकी नहीं कर दूँ।” {110:2} तेरे राज्य के विकास में यहोवा सहारा देगा। तेरे राज्य का आरम्भ सिय्योन पर होगा, और उसका विकास तब तक होता रहेगा, जब तक तू अपने शत्रुओं पर उनके अपने ही देश में राज करेगा। {110:3} तेरे पराक्रम के दिन तेरी प्रजा के लोग स्वेच्छा वलि बनेंगे। तेरे जवान पवित्रता से सुशोभित भोर के गर्भ से जन्मी ओस के समान तेरे पास है। {110:4} यहोवा ने एक वचन दिया, और यहोवा अपना मन नहीं बदलेगा: “तू नित्य याजक है। किन्तु हारून के परिवार समूह से नहीं। तेरी याजकी भिन्न है। तू मेल्कीसेदेक के समूह की रीति का याजक है।” {110:5} मेरे स्वामी, तूने उस दिन अपना क्रोध प्रकट किया था। अपने महाशक्ति को काम में लिया था और दूसरे राजाओं को तूने हरा दिया था। {110:6} परमेश्वर राष्ट्रों का न्याय करेगा। परमेश्वर ने उस महान धरती पर शत्रुओं को हरा दिया। उनकी मृत देहों से धरती फट गयी थी। {110:7} राह के झरने से जल पी के ही राजा अपना सिर उठायेगा और सचमुच बलशाली होगा! {111:1} यहोवा के गुण गाओ! यहोवा का अपने सम्पूर्ण मन से ऐसी उस सभा में धन्यवाद करता हूँ जहाँ सज्जन मिला करते हैं। {111:2} यहोवा ऐसे कर्म करता है, जो आश्चर्यपूर्ण होते हैं। लोग हर उत्तम वस्तु चाहते हैं, वही जो परमेश्वर से आती है। {111:3} परमेश्वर ऐसे कर्म करता है जो सचमुच महिमावान और आश्चर्यपूर्ण होते हैं। उसका खरापन सदा — सदा बना रहता है। {111:4} परमेश्वर अद्भुत कर्म करता है ताकि हम याद रखें कि यहोवा करूणापूर्ण और दया से भरा है। {111:5} परमेश्वर निज भक्तों को भोजन देता है। परमेश्वर अपनी वाचा को याद रखता है। {111:6} परमेश्वर के महान कार्य उसके प्रजा को यह दिखाया कि वह उनकी भूमि उन्हें दे रहा है। {111:7} परमेश्वर जो कुछ करता है वह उत्तम और पक्षपात रहित है। उसके सभी आदेश पूरे विश्वास योग्य हैं। {111:8} परमेश्वर के आदेश सदा ही बने रहेंगे। परमेश्वर के उन आदेशों को देने के प्रयोजन सच्चे थे और वे पवित्र थे। {111:9} परमेश्वर निज भक्तों को बचाता है। परमेश्वर ने अपनी वाचा को सदा अटल रहने को रचा है, परमेश्वर का नाम आश्चर्यपूर्ण है और वह पवित्र है। {111:10} विवेक भय और यहोवा के आदर से उपजता है। वे लोग बुद्धिमान होतेहैं जो यहोवा का आदर करते हैं। यहोवा की स्तुति सदा गायी जायेगी। {112:1} यहोवा की प्रशंसा करो! ऐसा व्यक्ति जो यहोवा से डरता है। और उसका आदर करता है। वह अति प्रसन्न रहेगा। परमेश्वर के आदेश ऐसे व्यक्ति को भाते हैं। {112:2} धरती पर ऐसे व्यक्ति की संतानें महान होंगी। अच्छे व्यक्तियों कि संताने सचमुच धन्य होंगी। {112:3} ऐसे व्यक्ति का घराना बहुत धनवान होगा और उसकी धार्मिकता सदा सदा बनी रहेगी। {112:4} सज्जनों के लिये परमेश्वर ऐसा होता है जैसे अंधेरे में चमकता प्रकाश हो। परमेश्वर खरा है, और करूणापूर्ण है और दया से भरा है। {112:5} मनुष्य को अच्छा है कि वह दयालु और उदार हो। मनुष्य को यह उत्तम है कि वह अपने व्यापार में खरा रहे। {112:6} ऐसा व्यक्ति का पतन कभी नहीं होगा। एक अच्छे व्यक्ति को सदा याद किया जायेगा। {112:7} सज्जन को विपद से डरने की जरूरत नहीं। ऐसा व्यक्ति यहोवा के भरोसे है आश्वस्त रहता है। {112:8} ऐसा व्यक्ति आश्वस्त रहता है। वह भयभीत नहीं होगा। वह अपने शत्रुओं को हरा देगा। {112:9} ऐसा व्यक्ति दीन जनों को मुक्त दान देता है। उसके पुण्य कर्म जिन्हें वह करता रहता है वह सदा सदा बने रहेंगे। {112:10} कुटिल जन उसको देखेंगे और कुपित होंगे। वे क्रोध में अपने दाँतों को पीसेंगे और फिर लुप्त हो जायेंगे। दुष्ट लोग उसको कभी नहीं पायेंगे जिसे वह सब से अधिक पाना चाहते हैं। {113:1} यहोवा की प्रशंसा करो! हे यहोवा के सेवकों यहोवा की स्तुति करो, उसका गुणगान करो! यहोवा के नाम की प्रशंसा करो! {113:2} यहोवा का नाम आज और सदा सदा के लिये और अधिक धन्य हो। यह मेरी कामना है। {113:3} मेरी यह कामना है, यहोवा के नाम का गुण पूरब से जहाँ सूरज उगता है, पश्चिम तक उस स्थान में जहाँ सूरज डूबता है गाया जाये। {113:4} यहोवा सभी राष्ट्रों से महान है। उसकी महिमा आकाशों तक उठती है। {113:5} हमारे परमेश्वर के समान कोई भी व्यक्ति नहीं है। परमेश्वर ऊँचे अम्बर में विराजता है। {113:6} ताकि परमेश्वर अम्बर और नीचे धरती को देख पाये। {113:7} परमेश्वर दीनों को धूल से उठाता है। परमेश्वर भिखारियों को कूड़े के घूरे से उठाता है। {113:8} परमेश्वर उन्हें महत्वपूर्ण बनाता है। परमेश्वर उन लोगों को महत्वपूर्ण मुखिया बनाता है। {113:9} चाहै कोई निपूती बाँझ स्त्री हो, परमेश्वर उसे बच्चे दे देगा और उसको प्रसन्न करेगा। यहोवा का गुणगान करो! {114:1} इस्राएल ने मिस्र छोड़ा। याकूब (इस्राएल) ने उस अनजान देश को छोड़ा। {114:2} उस समय यहूदा परमेश्वर का विशेष व्यक्ति बना, इस्राएल उसका राज्य बन गया। {114:3} इसे लाल सागर देखा, वह भाग खड़ा हुआ। यरदन नदी उलट कर बह चली। {114:4} पर्वत मेंढ़े के समान नाच उठे! पहाड़ियाँ मेमनों जैसी नाची। {114:5} हे लाल सागर, तू क्यों भाग उठा हे यरदन नदी, तू क्यों उलटी बही {114:6} पर्वतों, क्यों तुम मेंढ़े के जैसे नाचे और पहाड़ियों, तुम क्यों मेमनों जैसी नाची {114:7} यकूब के परमेश्वर, स्वामी यहोवा के सामने धरती काँप उठी। {114:8} परमेश्वर ने ही चट्टानों को चीर के जल को बाहर बहाया। परमेश्वर ने पक्की चट्टान से जल का झरना बहाया था। {115:1} यहोवा! हमको कोई गौरव ग्रहण नहीं करना चाहिये। गौरव तो तेरा है। तेरे प्रेम और निष्ठा के कारण गौरव तेरा है। {115:2} राष्ट्रों को क्यों अचरज हो कि हमारा परमेश्वर कहाँ है? {115:3} परमेश्वर स्वर्ग में है। जो कुछ वह चाहता है वही करता रहता है। {115:4} उन जातियों के “देवता” बस केवल पुतले हैं जो सोने चाँदी के बने है। वह बस केवल पुतले हैं जो किसी मानव ने बनाये। {115:5} उन पुतलों के मुख है, पर वे बोल नहीं पाते। उनकी आँखे हैं, पर वे देख नहीं पाते। {115:6} उनके कान हैं, पर वे सुन नहीं सकते। उनकी पास नाक है, किन्तु वे सूँघ नहीं पाते। {115:7} उनके हाथ हैं, पर वे किसी वस्तु को छू नहीं सकते, उनके पास पैर हैं, पर वे चल नहीं सकते। उनके कंठो से स्वर फूटते नहीं हैं। {115:8} जो व्यक्ति इस पुतले को रखते और उनमें विश्वास रखते हैं बिल्कुल इन पुतलों से बन जायेंगे! {115:9} ओ इस्राएल के लोगों, यहोवा में भरोसा रखो! यहोवा इस्राएल को सहायता देता है और उसकी रक्षा करता है {115:10} ओ हारुन के घराने, यहोवा में भरोसा रखो! हारुन के घराने को यहोवा सहारा देता है, और उसकी रक्षा करता है। {115:11} यहोवा की अनुयायिओं, यहोवा में भरोसा रखे! यहोवा सहारा देता है और अपने अनुयायिओं की रक्षा करता है। {115:12} यहोवा हमें याद रखता है। यहोवा हमें वरदान देगा, यहोवा इस्राएल को धन्य करेगा। यहोवा हारून के घराने को धन्य करेगा। {115:13} यहोवा अपने अनुयायिओं को, बड़ोंको और छोटों को धन्य करेगा। {115:14} मुझे आशा है यहोवा तुम्हारी बढ़ोतरी करेगा और मुझे आशा है, वह तुम्हारी संतानों को भी अधिकाधिक देगा। {115:15} यहोवा तुझको वरदान दिया करता है! यहोवा ने ही स्वर्ग और धरती बनाये हैं! {115:16} स्वर्ग यहोवा का है। किन्तु धरती उसने मनुष्यों को दे दिया। {115:17} मरे हुए लोग यहोवा का गुण नहीं गाते। कब्र में पड़े लोग यहोवा का गुणगान नहीं करते। {115:18} किन्तु हम यहोवा का धन्यवाद करते हैं, और हम उसका धन्यवाद सदा सदा करेंगे! यहोवा के गुण गाओ! {116:1} जब यहोवा मेरी प्रार्थनाएँ सुनता है यह मुझे भाता है। {116:2} जब मै सहायता पाने उसको पुकारता हूँ वह मेरी सुनता है: यह मुझे भाता है। {116:3} मैं लगभग मर चुका था। मेरे चारों तरफ मौत के रस्से बंध चुके थे। कब्र मुझको निगल रही थी। मैं भयभीत था और मैं चिंतित था। {116:4} तब मैंने यहोवा के नाम को पुकारा, मैंने कहा, “यहोवा, मुझको बचा ले।” {116:5} यहोवा खरा है और दयापूर्ण है। परमेश्वर करूणापूर्ण है। {116:6} यहोवा असहाय लोगों की सुध लेता है। मैं असहाय था और यहोवा ने मुझे बचाया। {116:7} हे मेरे प्राण, शांत रह। यहोवा तेरी सुधि रखता है। {116:8} हे परमेश्वर, तूने मेरे प्राण मृत्यु से बचाये। मेरे आँसुओं को तूने रोका और गिरने से मुझको तूने थाम लिया। {116:9} जीवितों की धरती में मैं यहोवा की सेवा करता रहूँगा। {116:10} यहाँ तक मैंने विश्वास बनाये रखा जब मैंने कह दिया था, “मैं बर्बाद हो गया!” {116:11} मैंने यहाँ तक विश्वास सम्भाले रखा जब कि मैं भयभीत था और मैंने कहा, “सभी लोग झूठे हैं!” {116:12} मैं भला यहोवा को क्या अर्पित कर सकता हूँ मेरे पास जो कुछ है वह सब यहोवा का दिया है! {116:13} मैं उसे पेय भेंट दूँगा क्योंकि उसने मुझे बचाया है। मैं यहोवा के नाम को पुकारूँगा। {116:14} जो कुछ मन्नतें मैंने मागी हैं वे सभी मैं यहोवा को अर्पित करूँगा, और उसके सभी भक्तों के सामने अब जाऊँगा। {116:15} किसी एक की भी मृत्यु जो यहोवा का अनुयायी है, यहोवा के लिये अति महत्वपूर्ण है। हे यहोवा, मैं तो तेरा एक सेवक हूँ! {116:16} मैं तेरा सेवक हूँ। मैं तेरी किसी एक दासी का सन्तान हूँ। यहोवा, तूने ही मुझको मेरे बंधनों से मुक्त किया! {116:17} मैं तुझको धन्यवाद बलि अर्पित करूँगा। मैं यहोवा के नाम को पुकारूँगा। {116:18} मैं यहोवा को जो कुछ भी मन्नतें मानी है वे सभी अर्पित करूँगा, और उसके सभी भक्तों के सामने अब जाऊँगा। {116:19} मैं मन्दिर में जाऊँगा जो यरूशलेम में है। यहोवा के गुण गाओ! {117:1} अरे ओ सब राष्ट्रों यहोवा कि प्रशंसा करो। अरे ओ सब लोगों यहोवा के गुण गाओ। {117:2} परमेश्वर हमें बहुत प्रेम करता है! परमेश्वर हमारे प्रति सदा सच्चा रहेगा! यहोवा के गुण गाओ! {118:1} यहोवा का मान करो क्योंकि वह परमेश्वर है। उसका सच्चा प्रेम सदा ही अटल रहता है! {118:2} इस्राएल यह कहता है, “उसका सच्चा प्रेम सदा ही अटल रहता है!” {118:3} याजक ऐसा कहते हैं, “उसका सच्चा प्रेम सदा ही अटल रहता है!” {118:4} तुम लोग जो यहोवा की उपासना करते हो, कहा करते हो, “उसका सच्चा प्रेम सदा ही अटल रहता है!” {118:5} मैं संकट में था सो सहारा पाने को मैंने यहोवा को पुकारा। यहोवा ने मुझको उत्तर दिया और यहोवा ने मुझको मुक्त किया। {118:6} यहोवा मेरे साथ है सो मैं कभी नहीं डरूँगा। लोग मुझको हानि पहुँचाने कुछ नहीं कर सकते। {118:7} यहोवा मेरा सहायक है। मैं अपने शत्रुओं को पराजित देखूँगा। {118:8} मनुष्यों पर भरोसा रखने से यहोवा पर भरोसा रखना उत्तम है। {118:9} अपने मुखियाओं पर भरोसा रखने से यहोवा पर भरोसा रखना उत्तम है। {118:10} मुझको अनेक शत्रुओं ने घेर लिया है। यहोवा की शक्ति से मैंने अपने बैरियों को हरा दिया। {118:11} शत्रुओं ने मुझको फिर घेर लिया। यहोवा की शक्ति से मैंने उनको हराया। {118:12} शत्रुओं ने मुझे मधु मक्खियों के झुण्ड सा घेरा। किन्तु, वे एक शीघ्र जलती हुई झाड़ी के समान नष्ट हुआ। यहोवा की शक्ति से मैंने उनको हराया। {118:13} मेरे शत्रुओं ने मुझ पर प्रहार किया और मुझे लगभग बर्बाद कर दिया किन्तु यहोवा ने मुझको सहारा दिया। {118:14} यहोवा मेरी शक्ति और मेरा विजय गीत है। यहोवा मेरी रक्षा करता है। {118:15} सज्जनों के घर में जो विजय पर्व मन रहा तुम उसको सुन सकते हो। देखो, यहोवा ने अपनी महाशक्ति फिर दिखाई है। {118:16} यहोवा की भुजाये विजय में उठी हुई हैं। देखो यहोवा ने अपनी महाशक्ति फिर से दिखाई। {118:17} मैं जीवित रहूँगा, मैं मरूँगा नहीं, और जो कर्म यहोवा ने किये हैं, मैं उनका बखान करूँगा। {118:18} यहोवा ने मुझे दण्ड दिया किन्तु मरने नहीं दिया। {118:19} हे पुण्य के द्वारों तुम मेरे लिये खुल जाओ ताकि मैं भीतर आ पाऊँ और यहोवा की आराधना करूँ। {118:20} वे यहोवा के द्वार है। बस केवल सज्जन ही उन द्वारों से होकर जा सकते हैं। {118:21} हे यहोवा, मेरी विनती का उत्तर देने के लिये तेरा धन्यवाद। मेरी रक्षा के लिये मैं तुझे धन्यवाद देता हूँ। {118:22} जिसको राज मिस्त्रियों ने नकार दिया था वही पत्थर कोने का पत्थर बन गया। {118:23} यहोवा ने इसे घटित किया और हम तो सोचते हैं यह अद्भुत है! {118:24} यहोवा ने आज के दिन को बनाया है। आओ हम हर्ष का अनुभव करें और आज आनन्दित हो जाये! {118:25} लोग बोले, “यहोवा के गुण गाओ! यहोवा ने हमारी रक्षा की है! {118:26} उस सब का स्वागत करो जो यहोवा के नाम में आ रहे हैं।” याजकों ने उत्तर दिया, “यहोवा के घर में हम तुम्हारा स्वागत करते हैं! {118:27} यहोवा परमेश्वर है, और वह हमें अपनाता है। बलि के लिये मेमने को बाँधों और वेदी के कंगूरों पर मेमने को ले जाओ।” {118:28} हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है, और मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ। मैं तेरे गुण गाता हूँ! {118:29} यहोवा की प्रशंसा करो क्योंकि वह उत्तम है। उसकी सत्य करूणा सदा बनी रहती है। {119:1} जो लोग पवित्र जीवन जीते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं। ऐसे लोग यहोवा की शिक्षाओं पर चलते हैं। {119:2} लोग जो यहोवा की विधान पर चलते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं। अपने समग्र मन से वे यहोवा की मानते हैं। {119:3} वे लोग बुरे काम नहीं करते। वे यहोवा की आज्ञा मानते हैं। {119:4} हे यहोवा, तूने हमें अपने आदेश दिये, और तूने कहा कि हम उन आदेशों का पूरी तरह पालन करें। {119:5} हे यहोवा, यादि मैं सदा तेरे नियमों पर चलूँ, {119:6} जब मैं तेरे आदेशों को विचारूँगा तो मुझे कभी भी लज्जित नहीं होना होगा। {119:7} जब मैं तेरे खरेपन और तेरी नेकी को विचारता हूँ तब सचमुच तुझको मान दे सकता हूँ। {119:8} हे यहोवा, मैं तेरे आदेशों का पालन करूँगा। सो कृपा करके मुझको मत बिसरा! {i119:9} वेथ् {119:9} एक युवा व्यक्ति कैसे अपना जीवन पवित्र रख पाये तेरे निर्देशों पर चलने से। {119:10} मैं अपने पूर्ण मन से परमेश्वर कि सेवा का जतन करता हूँ। परमेश्वर, तेरे आदेशों पर चलने में मेरी सहायता कर। {119:11} मैं बड़े ध्यान से तेरे आदेशों का मनन किया करता हूँ। क्यों ताकि मैं तेरे विरूद्ध पाप पर न चलूँ। {119:12} हे यहोवा, तेरा धन्यवाद! तू अपने विधानों की शिक्षा मुझको दे। {119:13} तेरे सभी निर्णय जो विवेकपूर्ण हैं। मैं उनका बखान करूँगा। {119:14} तेरे नियमों पर मनन करना, मुझको अन्य किसी भी वस्तु से अधिक भाता है। {119:15} मैं तेरे नियमों की चर्चा करता हूँ, और मैं तेरे समान जीवन जीता हूँ। {119:16} मैं तेरे नियमों में आनन्द लेता हूँ। मैं तेरे वचनों को नहीं भूलूँगा। {i119:17} गिमेल् {119:17} तेरे दास को योग्यता दे और मैं तेरे नियमों पर चलूँगा। {119:18} हे यहोवा, मेरी आँख खोल दे और मैं तेरी शिक्षाओं के भीतर देखूँगा। मैं उन अद्भुत बातों का अध्ययन करूँगा जिन्हें तूने किया है। {119:19} मैं इस धरती पर एक अनजाना परदेशी हूँ। हे यहोवा, अपनी शिक्षाओं को मुझसे मत छिपा। {119:20} मैं हर समय तेरे निर्णयों का पाठ करना चाहता हूँ। {119:21} हे यहोवा, तू अहंकारी जन की आलोचना करता है। उन अहंकारी लोगों पर बुरी बातें घटित होंगी। वे तेरे आदेशों पर चलना नकारते हैं। {119:22} मुझे लज्जित मत होने दे, और मुझको असमंजस में मत डाल। मैंने तेरी वाचा का पालन किया है। {119:23} यहाँ तक कि प्रमुखों ने भी मेरे लिये बुरी बातें की हैं। किन्तु मैं तो तेरा दास हूँ। मैं तेरे विधान का पाठ किया करता हूँ। {119:24} तेरी वाचा मेरा सर्वोत्तम मिस्र है। यह मुझको अच्छी सलाह दिया करता है। {i119:25} दालथ् {119:25} मैं शीघ्र मर जाऊँगा। हे यहोवा, तू आदेश दे और मुझे जीने दे। {119:26} मैंने तुझे अपने जीवन के बारे में बताया है, तूने मुझे उत्तर दिया है। अब तू मुझको अपना विधान सिखा। {119:27} हे यहोवा, मेरी सहायता कर ताकि मैं तेरी व्यवस्था का विधान समझूँ। मुझे उन अद्भुत कर्मो का चिंतन करने दे जिन्हें तूने किया है। {119:28} मैं दु: खी और थका हूँ। मुझको आदेश दे और अपने वचन के अनुसार मुझको तू फिर सुदृढ़ बना दे। {119:29} हे यहोवा, मुझे कोई झूठ मत जीने दे। अपनी शिक्षाओं से मुझे राह दिखा दे। {119:30} हे यहोवा, मैंने चुना है कि तेरे प्रति निष्ठावान रहूँ। मैं तेरे विवेकपूर्ण निर्णयों का सावधानी से पाठ किया करता हूँ। {119:31} हे यहोवा, तेरी वाचा के संग मेरी लगन लगी है। तू मुझको निराश मत कर। {119:32} मैं तेरे आदेशों का पालन प्रसन्नता के संग किया करूँगा। हे यहोवा, तेरे आदेश मुझे अति प्रसन्न करते हैं। {i119:33} हेथ् {119:33} हे यहोवा, तू मुझे अपनी व्यवस्था सिखा तब मैं उनका अनुसरण करूँगा। {119:34} मुझको सहारा दे कि मैं उनको समझूँ और मैं तेरी शिक्षाओं का पालन करुँगा। मैं पूरी तरह उनका पालन करूँगा। {119:35} हे यहोवा, तू मुझको अपने आदेशों की राह पर ले चल। मुझे सचमुच तेरे आदेशों से प्रेम है। मेरा भला कर और मुझे जीने दे। {119:36} मेरी सहायता कर कि मैं तेरे वाचा का मनन करूँ, बजाय उसके कि यह सोचता रहूँ कि कैसे धनवान बनूँ। {119:37} हे यहोवा, मुझे अद्भुत वस्तुओं पाने को कठिन जतन मत करने दे। {119:38} हे यहोवा, मैं तेरा दास हूँ। सो उन बातों को कर जिनका वचन तूने दिये है। तूने उन लोगों को जो पूर्वज हैं उन बातों को वचन दिया था। {119:39} हे यहोवा, जिस लाज से मुझको भय उसको तू दूर कर दे। तेरे विवेकपूर्ण निर्णय अच्छे होते हैं। {119:40} देख मुझको तेरे आदेशोंसे प्रेम है। मेरा भला कर और मुझे जीने दे। {i119:41} वाव् {119:41} हे यहोवा, तू सच्चा निज प्रेम मुझ पर प्रकट कर। मेरी रक्षा वैसे ही कर जैसे तूने वचन दिया। {119:42} तब मेरे पास एक उत्तर होगा। उनके लिये जो लोग मेरा अपमान करते हैं। हे यहोवा, मैं सचमुच तेरी उन बातों के भरोसे हूँ जिनको तू कहता है। {119:43} तू अपनी शिक्षाएँ जो भरोसे योग्य है, मुझसे मत छीन। हे यहोवा, तेरे विवेकपूर्ण निर्णयों का मुझे भरोसा है। {119:44} हे यहोवा, मैं तेरी शिक्षाओं का पालन सदा और सदा के लिये करूँगा। {119:45} सो मैं सुरक्षित जीवन जीऊँगा। क्यों मैं तेरी व्यवस्था को पालने का कठिन जतन करता हूँ। {119:46} यहोवा के वाचा की चर्चा मैं राजाओं के साथ करूँगा और वे मुझे संकट में कभी न डालेंगे। {119:47} हे यहोवा, मुझे तेरी व्यवस्थाओं का मनन भाता है। तेरी व्यवस्थाओं से मुझको प्रेम है। {119:48} हे यहोवा, मैं तेरी व्यवस्थाओं के गुण गाता हूँ, वे मुझे प्यारी हैं और मैं उनका पाठ करूँगा। {i119:49} जाइन् {119:49} हे यहोवा, अपना वचन याद कर जो तूने मुझको दिया। वही वचन मुझको आज्ञा दिया करता है। {119:50} मैं संकट में पड़ा था, और तूने मुझे चैन दिया। तेरे वचनो ने फिर से मुझे जीने दिया। {119:51} लोग जो स्वयं को मुझसे उत्तम सोचते हैं, निरन्तर मेरा अपमान कर रहे हैं, किन्तु हे यहोवा मैंने तेरी शिक्षाओं पर चलना नहीं छोड़ा। {119:52} मैं सदा तेरे विवेकपूर्ण निर्णयों का ध्यान करता हूँ। हे यहोवा तेरे विवेकपूर्ण निर्णय से मुझे चैन है। {119:53} जब मैं ऐसे दुष्ट लोगों को देखता हूँ, जिन्होंने तेरी शिक्षाओं पर चलना छोड़ा है, तो मुझे क्रोध आता है। {119:54} तेरी व्यवस्थायें मुझे ऐसी लगती है, जैसे मेरे घर के गीत। {119:55} हे यहोवा, रात में मैं तेरे नाम का ध्यान और तेरी शिक्षाएँ याद रखता हूँ। {119:56} इसलिए यह होता है कि मैं सावधानी से तेरे आदेशों को पालता हूँ। {i119:57} हेथ् {119:57} हे यहोवा, मैंने तेरे उपदेशों पर चलना निश्चित किया यह मेरा कर्तव्य है। {119:58} हे यहोवा, मैं पूरी तरह से तुझ पर निर्भर हूँ, जैसा वचन तूने दिया मुझ पर दयालु हो। {119:59} मैंने ध्यान से अपनी राह पर मनन किया और मैं तेरी वाचा पर चलने को लौट आया। {119:60} मैंने बिना देर लगाये तेरे आदेशों पर चलने कि शीघ्रता की। {119:61} बुरे लोगों के एक दल ने मेरे विषय में बुरी बातें कहीं। किन्तु यहोवा मैं तेरी शिक्षाओं को भूला नहीं। {119:62} तेरे सत निर्णयों का तुझे धन्यवाद देने मैं आधी रात के बीच उठ बैठता हूँ। {119:63} जो कोई व्यक्ति तेरी उपासना करता मैं उसका मित्र हूँ। जो कोई व्यक्ति तेरे आदेशों पर चलता है, मैं उसका मित्र हूँ। {119:64} हे यहोवा, यह धरती तेरी सत्य करूणा से भरी हुई है। मुझको तू अपने विधान की शिक्षा दे। {i119:65} तेथ् {119:65} हे यहोवा, तूने अपने दास पर भलाईयाँ की है। तूने ठीक वैसा ही किया जैसा तूने करने का वचन दिया था। {119:66} हे यहोवा, मुझे ज्ञान दे कि मैं विवेकपूर्ण निर्णय लूँ, तेरे आदेशों पर मुझको भरोसा है। {119:67} संकट में पड़ने से पहले, मैंने बहुत से बुरे काम किये थे। किन्तु अब, सावधानी के साथ मैं तेरे आदेशों पर चलता हूँ। {119:68} हे परमेश्वर, तू खरा है, और तू खरे काम करता है, तू अपनी विधान की शिक्षा मुझको दे। {119:69} कुछ लोग जो सोचते हैं कि वे मुझ से उत्तम हैं, मेरे विषय में बुरी बातें बनाते हैं। किन्तु यहोवा मैं अपने पूर्ण मन के साथ तेरे आदेशों को निरन्तर पालता हूँ। {119:70} वे लोग महा मूर्ख हैं। किन्तु मैं तेरी शिक्षाओं को पढ़ने में रस लेता हूँ। {119:71} मेरे लिये संकट अच्छ बन गया था। मैंने तेरी शिक्षाओं को सीख लिया। {119:72} हे यहोवा, तेरी शिक्षाएँ मेरे लिए भली है। तेरी शिक्षाएँ हजार चाँदी के टुकड़ों और सोने के टुकड़ों से उत्तम हैं। {i119:73} योद् {119:73} हे यहोवा, तूने मुझे रचा है और निज हाथों से तू मुझे सहारा देता है। अपने आदेशों को पढ़ने समझने में तू मेरी सहायता कर। {119:74} हे यहोवा, तेरे भक्त मुझे आदर देते हैं और वे प्रसन्न हैं क्योंकि मुझे उन सभी बातों का भरोसा है जिन्हें तू कहता है। {119:75} हे यहोवा, मैं यह जानता हूँ कि तेरे निर्णय खरे हुआ करते हैं। यह मेरे लिये उचित था कि तू मुझको दण्ड दे। {119:76} अब, अपने सत्य प्रेम से तू मुझ को चैन दे। तेरी शिक्षाएँ मुझे सचमुच भाती हैं। {119:77} हे यहोवा, तू मुझे सुख चैन दे और जीवन दे। मैं तेरी शिक्षाओं में सचमुच आनन्दित हूँ। {119:78} उन लोगों को जो सोचा करते है कि वे मुझसे उत्तम हैं, उनको निराश कर दे। क्योंकि उन्होंने मेरे विषय में झूठी बातें कही है। हे यहोवा, मैं तेरे आदेशों का पाठ किया करूँगा। {119:79} अपने भक्तों को मेरे पास लौट आने दे। ऐसे उन लोगों को मेरे पास लौट आने दे जिनको तेरी वाचा का ज्ञान है। {119:80} हे यहोवा, तू मुझको पूरी तरह अपने आदेशों को पालने दे ताकि मैं कभी लज्जित न होऊँ। {i119:81} काफ् {119:81} मैं तेरी प्रतिज्ञा में मरने को तत्पर हूँ कि तू मुझको बचायेगा। किन्तु यहोवा, मुझको उसका भरोसा है, जो तू कहा करता था। {119:82} जिन बातों का तूने वचन दिया था, मैं उनकी बाँट जोहता रहता हूँ। किन्तु मेरी आँखे थकने लगी है। हे यहोवा, मुझे कब तू आराम देगा {119:83} यहाँ तक जब मैं कूड़े के ढेर पर दाखमधु की सूखी मशक सा हूँ, तब भी मैं तेरे विधान को नहीं भूलूँगा। {119:84} मैं कब तक जीऊँगा हे यहोवा, कब दण्ड देगा तू ऐसे उन लोगों को जो मुझ पर अत्याचार किया करते हैं {119:85} कुछ अहंकारी लोग ने अपनी झूठों से मुझ पर प्रहार किया था। यह तेरी शिक्षाओं के विरूद्ध है। {119:86} हे यहोवा, सब लोग तेरी शिक्षाओं के भरोसे रह सकते हैं। झूठे लोग मुझको सता रहे है। मेरी सहायता कर! {119:87} उन झूठे लोगों ने मुझको लगभग नष्ट कर दिया है। किन्तु मैंने तेरे आदेशों को नहीं छोड़ा। {119:88} हे यहोवा, अपनी सत्य करूणा को मुझ पर प्रकट कर। तू मुझको जीवन दे मैं तो वही करूँगा जो कुछ तू कहता है। {i119:89} लामेद् {119:89} हे यहोवा, तेरे वचन सदा अचल रहते हैं। स्वर्ग में तेरे वचन सदा अटल रहते हैं। {119:90} सदा सर्वदा के लिये तू ही सच्चा है। हे यहोवा, तूने धरती रची, और यह अब तक टिकी है। {119:91} तेरे आदेश से ही अब तक सभी वस्तु स्थिर हैं, क्योंकि वे सभी वस्तुएँ तेरी दास हैं। {119:92} यदि तेरी शिक्षाएँ मेरी मित्र जैसी नहीं होती, तो मेरे संकट मुझे नष्ट कर डालते। {119:93} हे यहोवा, तेरे आदेशों को मैं कभी नहीं भूलूँगा। क्योंकि वे ही मुझे जीवित रखते हैं। {119:94} हे यहोवा, मैं तो तेरा हूँ, मेरी रक्षा कर। क्यों क्योंकि तेरे आदेशों पर चलने का मैं कठिन जतन करता हूँ। {119:95} दुष्ट जन मेरे विनाश का यतन किया करते हैं, किन्तु तेरी वाचा ने मुझे बुद्धिमान बनाया। {119:96} सब कुछ की सीमा है, तेरी व्यवस्था की सीमा नहीं। {i119:97} मेम् {119:97} आ हा, यहोवा तेरी शिक्षाओं से मुझे प्रेम है। हर घड़ी मैं उनका ही बखान किया करता हूँ। {119:98} हे यहोवा, तेरे आदेशों ने मुझे मेरे शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बनाया। तेरा विधान सदा मेरे साथ रहता है। {119:99} मैं अपने सब शिक्षाओं से अधिक बुद्धिमान हूँ क्योंकि मैं तेरी वाचा का पाठ किया करता हूँ। {119:100} बुजुर्ग प्रमुखों से भी अधिक समझता हूँ। क्योंकि मैं तेरे आदेशों को पालता हूँ। {119:101} हे यहोवा, तू मुझे राह में हर कदम बुरे मार्ग से बचाता है, ताकि जो तू मुझे बताता है वह मैं कर सकूँ। {119:102} यहोवा, तू मेरा शिक्षक है। सो मैं तेरे विधान पर चलना नहीं छोड़ूँगा। {119:103} तेरे वचन मेरे मुख के भीतर शहद से भी अधिक मीठे हैं। {119:104} तेरी शिक्षाएँ मुझे बुद्धिमान बनाती है। सो मैं झूठी शिक्षाओं से घृणा करता हूँ। {i119:105} नुन् {119:105} हे यहोवा, तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक और मार्ग के लिये उजियाला है। {119:106} तेरे नियम उत्तम हैं। मैं उन पर चलने का वचन देता हूँ, और मैं अपने वचन का पालन करूँगा। {119:107} हे यहोवा, बहुत समय तक मैंने दु: ख झेले हैं, कृपया मुझे अपना आदेश दे और तू मुझे फिर से जीवित रहने दे! {119:108} हे यहोवा, मेरी विनती को तू स्वीकार कर, और मुझ को अपनी विधान कि शिक्षा दे। {119:109} मेरा जीवन सदा जोखिम से भरा हुआ है। किन्तु यहोवा मैं तेरे उपदेश भूला नहीं हूँ। {119:110} दुष्ट जन मुझको फँसाने का यत्न करते हैं किन्तु तेरे आदेशों को मैंने कभी नहीं नकारा है। {119:111} हे यहोवा, मैं सदा तेरी वाचा का पालन करूँगा। यह मुझे अति प्रसन्न किया करता है। {119:112} मैं सदा तेरे विधान पर चलने का अति कठोर यत्न करूँगा। {i119:113} समेख् {119:113} हे यहोवा, मुझको ऐसे उन लोगों से घृणा है, जो पूरी तरह से तेरे प्रति सच्चे नहीं हैं। मुझको तो तेरी शिक्षाएँ भाति हैं। {119:114} मुझको ओट दे और मेरी रक्षा कर। हे यहोवा, मुझको उस बात का सहारा है जिसको तू कहता है। {119:115} हे यहोवा, दुष्ट मनुष्यों को मेरे पास मत आने दे। मैं अपने परमेश्वर के आदेशों का पालन करूँगा। {119:116} हे यहोवा, मुझको ऐसे ही सहारा दे जैसे तूने वचन दिया, और मैं जीवित रहूँगा। मुझको तुझमें विश्वास है, मुझको निराश मत कर। {119:117} हे यहोवा, मुझको सहारा दे कि मेरा उद्धार हो। मैं सदा तेरी आदेशों का पाठ किया करूँगा। {119:118} हे यहोवा, तू हर ऐसे व्यक्ति से विमुख हो जाता है, जो तेरे नियम तोड़ता है। क्यों क्योंकि उन लोगों ने झूठ बोले जब वे तेरे अनुसरण करने को सहमत हुए। {119:119} हे यहोवा, तू इस धरती पर दुष्टों के साथ ऐसा बर्ताव करता है जैसे वे कूड़ा हो। सो मैं तेरी वाचा से सदा प्रेम करूँगा। {119:120} हे यहोवा, मैं तुझ से भयभीत हूँ, मैं डरता हूँ, और तेरे विधान का आदर करता हूँ। {i119:121} ऐन् {119:121} मैंने वे बातें की हैं जो खरी और भली हैं। हे यहोवा, तू मुझको ऐसे उन लोगों को मत सौंप जो मुझको हानि पहुँचाना चाहते हैं। {119:122} मुझे वचन दे कि तू मुझे सहारा देगा। मैं तेरा दास हूँ। हे यहोवा, उन अहंकारी लोगों को मुझको हानि मत पहुँचाने दे। {119:123} हे यहोवा, तूने मेरे उद्धार का एक उत्तम वचन दिया था, किन्तु अपने उद्धार को मेरी आँख तेरी राह देखते हुए थक गई। {119:124} तू अपना सच्चा प्रेम मुझ पर प्रकट कर। मैं तेरा दास हूँ। तू मुझे अपने विधान की शिक्षा दे। {119:125} मैं तेरा दास हूँ। अपनी वाचा को पढ़ने समझने में तू मेरी सहायता कर। {119:126} हे यहोवा, यही समय है तेरे लिये कि तू कुछ कर डाले। लोगों ने तेरे विधान को तोड़ा है। {119:127} हे यहोवा, उत्तम सुवर्ण से भी अधिक मुझे तेरे आदेश भाते हैं। {119:128} तेरे सब आदेशों का बहुत सावधानी से मैं पालन करता हूँ। मैं झूठे उपदेशों से घृणा करता हूँ। {i119:129} पे {119:129} हे यहोवा, तेरी वाचा बहुत अद्भुत है। इसलिए मैं उसका अनुसरण करता हूँ। {119:130} कब शुरू करेंगे लोग तेरा वचन समझना यह एक ऐसे प्रकाश सा है जो उन्हें जीवन की खरी राह दिखाया करता है। तेरा वचन मूर्ख तक को बुद्धिमान बनाता है। {119:131} हे यहोवा, मैं सचमुच तेरे आदेशों का पाठ करना चाहता हूँ। मैं उस व्यक्ति जैसा हूँ जिस की साँस उखड़ी हो और जो बड़ी तीव्रता से बाट जोह रहो हो। {119:132} हे परमेश्वर, मेरी ओर दृष्टि कर और मुझ पर दयालु हो। तू उन जनों के लिये ऐसे उचित काम कर जो तेरे नाम से प्रेम किया करते हैं {119:133} तेरे वचन के अनुसार मेरी अगुवाई कर, मुझे कोई हानी न होने दे। {119:134} हे यहोवा, मुझको उन लोगों से बचा ले जो मुझको दु: ख देते हैं। और मैं तेरे आदेशों का पालन करूँगा। {119:135} हे यहोवा, अपने दास को तू अपना ले और अपना विधान तू मुझे सिखा। {119:136} रो — रो कर आँसुओं की एक नदी मैं बहा चुका हूँ। क्योंकि लोग तेरी शिक्षाओं का पालन नहीं करते हैं। {i119:137} त्साधे {119:137} हे यहोवा, तू भला है और तेरे नियम खरे हैं। {119:138} वे नियम उत्तम है जो तूने हमें वाचा में दिये। हम सचमुच तेरे विधान के भरोसे रह सकते हैं। {119:139} मेरी तीव्र भावनाएँ मुझे शीघ्र ही नष्ट कर देंगी। मैं बहुत बेचैन हूँ, क्योंकि मेरे शत्रुओं ने तेरे आदेशों को भूला दिया। {119:140} हे यहोवा, हमारे पास प्रमाण है, कि हम तेरे वचन के भरोसे रह सकते हैं, और मुझे इससे प्रेम है। {119:141} मैं एक तुच्छ व्यक्ति हूँ और लोग मेरा आदर नहीं करते हैं। किन्तु मैं तेरे आदेशों को भूलता नहीं हूँ। {119:142} हे यहोवा, तेरी धार्मिकता अनन्त है। तेरे उपदेशों के भरोसे में रहा जा सकता है। {119:143} मैं संकट में था, और कठिन समय में था। किन्तु तेरे आदेश मेरे लिये मित्र से थे। {119:144} तेरी वाचा नित्य ही उत्तम है। अपनी वाचा को समझने में मेरी सहायता कर ताकि मैं जी सकूँ। {i119:145} क्योफ़ {119:145} सम्पूर्ण मन से यहोवा मैं तुझको पुकारता हूँ, मुझको उत्तर दे। मैं तेरे आदेशों का पालन करता हूँ। {119:146} हे यहोवा, मेरी तुझसे विनती है। मुझको बचा ले! मैं तेरी वाचा का पालन करूँगा। {119:147} यहोवा, मैं तेरी प्रार्थना करने को भोर के तड़के उठा करता हूँ। मुझको उन बातों पर भरोसा है, जिनको तू कहता है। {119:148} देर रात तक तेरे वचनों का मनन करते हुए बैठा रहता हूँ। {119:149} हे यहोवा, तू अपने पूर्ण प्रेम से मुझ पर कान दे। तू वैसा ही कर जिसे तू ठीक कहता है, और मेरा जीवन बनाये रख। {119:150} लोग मेरे विरूद्ध कुचक्र रच रहे हैं। हे यहोवा, ऐसे ये लोग तेरी शिक्षाओं पर चला नहीं करते हैं। {119:151} हे यहोवा, तू मेरे पास है। तेरे आदेशों पर विश्वास किया जा सकता है। {119:152} तेरी वाचा से बहुत दिनों पहले ही मैं जान गया था कि तेरी शिक्षाएँ सदा ही अटल रहेंगी। {i119:153} रेश् {119:153} हे यहोवा, मेरी यातना देख और मुझको बचा ले, मैं तेरे उपदेशों को भूला नहीं हूँ। {119:154} हे यहोवा, मेरे लिये मेरी लड़ाई लड़ और मेरी रक्षा कर। मुझको वैसे जीने दे जैसे तूने वचन दिया। {119:155} दुष्ट विजयी नहीं होंगे। क्यों क्योंकि वे तेरे विधान पर नहीं चलते हैं। {119:156} हे यहोवा, तू बहुत दयालु है। तू वैसा ही कर जिसे तू अच्छा कहे, और मेरा जीवन बनाये रख। {119:157} मेरे बहुत से शत्रु है जो मुझे हानि पहुँचाने का जतन करते: किन्तु मैंने तेरी वाचा का अनुसरण नहीं छोड़ा। {119:158} मैं उन कृतघ्नों को देख रहा हूँ। हे यहोवा, तेरे वचन का पालन वे नहीं करते। मुझको उनसे घृणा है। {119:159} देख, तेरे आदेशों का पालन करने का मैं कठिन जतन करता हूँ। हे यहोवा, तेरे सम्पूर्ण प्रेम से मेरा जीवन बनाये रख। {119:160} हे यहोवा, सनातन काल से तेरे सभी वचन विश्वास योग्य रहे हैं। तेरा उत्तम विधान सदा ही अमर रहेगा। {i119:161} शाईन् {119:161} शक्तिशाली नेता मुझ पर व्यर्थ ही वार करते हैं, किन्तु मैं डरता हूँ और तेरे विधान का बस मैं आदर करता हूँ। {119:162} हे यहोवा, तेरे वचन मुझ को वैसे आनन्दित करते हैं, जैसा वह व्यक्ति आनन्दित होता है, जिसे अभी — अभी कोई महाकोश मिल गया हो। {119:163} मुझे झूठ से बैर है! मैं उससे घृणा करता हूँ! हे यहोवा, मैं तेरी शिक्षाओं से प्रेम करता हूँ। {119:164} मैं दिन में सात बार तेरे उत्तम विधान के कारण तेरी स्तुति करता हूँ। {119:165} वे व्यक्ति सच्ची शांती पायेंगे, जिन्हें तेरी शिक्षाएँ भाती हैं। उसको कुछ भी गिरा नहीं पायेगा। {119:166} हे यहोवा, मैं तेरी प्रतीक्षा में हूँ कि तू मेरा उद्धार करे। मैंने तेरे आदेशों का पालन किया है। {119:167} मैं तेरी वाचा पर चलता रहा हूँ। हे यहोवा, मुझको तेरे विधान से गहन प्रेम है। {119:168} मैंने तेरी वाचा का और तेरे आदेशों का पालन किया है। हे यहोवा, तू सब कुछ जानता है जो मैंने किया है। {i119:169} ताव् {119:169} हे यहोवा, सुन तू मेरा प्रसन्न गीत है। मुझे बुद्धिमान बना जैसा तूने वचन दिया है। {119:170} हे यहोवा, मेरी विनती सुन। तूने जैसा वचन दिया मेरा उद्धार कर। {119:171} मेरे अन्दर से स्तुति गीत फूट पड़े क्योंकि तूने मुझको अपना विधान सिखाया है। {119:172} मुझको सहायता दे कि मैं तेरे वचनों के अनुसार कार्य कर सकूँ, और मुझे तू अपना गीत गाने दे। हे यहोवा, तेरे सभी नियम उत्तम हैं। {119:173} तू मेरे पास आ, और मुझको सहारा दे क्योंकि मैंने तेरे आदेशों पर चलना चुन लिया है। {119:174} हे यहोवा, मैं यह चाहता हूँ कि तू मेरा उद्धार करे, तेरी शिक्षाएँ मुझे प्रसन्न करती है। {119:175} हे यहोवा, मेरा जीवन बना रहे और मैं तेरी स्तुति करूँ। अपने विधान से तू मुझे सहारा मिलने दे। {119:176} एक भटकी हुई भेड़ सा, मैं इधर-उधर भटका हूँ। हे यहोवा, मुझे ढूँढते आ। मैं तेरा दास हूँ, और मैं तेरे आदेशों को भूला नहीं हूँ। {i120:1} मन्दिर का आरोहण गीत। {120:1} मैं संकट में पड़ा था, सहारा पाने के लिए मैंने यहोवा को पुकारा और उसने मुझे बचा लिया। {120:2} हे यहोवा, मुझे तू उन ऐसे लोगों से बचा ले जिन्होंने मेरे विषय में झूठ बोला है। {120:3} अरे ओ झूठों, क्या तुम यह जानते हो कि परमेश्वर तुमको कैसे दण्ड देगा {120:4} तुम्हें दण्ड देने के लिए परमेश्वर योद्धा के नुकीले तीर और धधकते हुए अंगारे काम में लाएगा। {120:5} झूठों, तुम्हारे निकट रहना ऐसा है, जैसे कि मेशेक के देश में रहना। यह रहना ऐसा है जैसे केवार के खेतों में रहना है। {120:6} जो शांति के बैरी है ऐसे लोगों के संग मैं बहुत दिन रहा हूँ। {120:7} मैंने यह कहा था मुझे शांति चाहिए क्यों वे लोग युद्ध को चाहते हैं। {i121:1} मन्दिर का आरोहण गीत। {121:1} मैं ऊपर पर्वतों को देखता हूँ। किन्तु सचमुच मेरी सहायता कहाँ से आएगी {121:2} मुझको तो सहारा यहोवा से मिलेगा जो स्वर्ग और धरती का बनाने वाला है। {121:3} परमेश्वर तुझको गिरने नहीं देगा। तेरा बचानेवाला कभी भी नहीं सोएगा। {121:4} इस्राएल का रक्षक कभी भी ऊँघता नहीं है। यहोवा कभी सोता नहीं है। {121:5} यहोवा तेरा रक्षक है। यहोवा अपनी महाशक्ति से तुझको बचाता है। {121:6} दिन के समय सूरज तुझे हानि नहीं पहुँचा सकता। रात में चाँद तेरी हानि नहीं कर सकता। {121:7} यहोवा तुझे हर संकट से बचाएगा। यहोवा तेरी आत्मा की रक्षा करेगा। {121:8} आते और जाते हुए यहोवा तेरी रक्षा करेगा। यहोवा तेरी सदा सर्वदा रक्षा करेगा! {i122:1} दाऊद का एक आरोहणगीत। {122:1} जब लोगों ने मुझसे कहा, “आओ, यहोवा के मन्दिर में चलें तब मैं बहुत प्रसन्न हुआ।” {122:2} यहाँ हम यरूशलेम के द्वारों पर खड़े हैं। {122:3} यह नया यरूशलेम है। जिसको एक संगठित नगर के रूप में बनाया गया। {122:4} ये परिवार समूह थे जो परमेश्वर के वहाँ पर जाते हैं। इस्राएल के लोग वहाँ पर यहोवा का गुणगान करने जाते हैं। वे वह परिवार समूह थे जो यहोवा से सम्बन्धित थे। {122:5} यही वह स्थान है जहाँ दाऊद के घराने के राजाओं ने अपने सिंहासन स्थापित किये। उन्होंने अपना सिंहासन लोगों का न्याय करने के लिये स्थापित किया। {122:6} तुम यरूशलेम में शांति हेतू विनती करो। “ऐसे लोग जो तुझसे प्रेम रखते हैं, वहाँ शांति पावें यह मेरी कामना है। {122:7} तुम्हारे परकोटों के भीतर शांति का वास है। यह मेरी कामना है। तुम्हारे विशाल भवनों में सुरक्षा बनी रहे यह मेरी कामना है।” {122:8} मैं प्रार्थना करता हूँ अपने पड़ोसियों के और अन्य इस्राएलवासियों के लिये वहाँ शांति का वास हो। {122:9} हे यहोवा, हमारे परमेश्वर के मन्दिर के भले हेतू मैं प्रार्थना करता हूँ, कि इस नगर में भली बाते घटित हों। {i123:1} आरोहण गीत। {123:1} हे परमेश्वर, मैं ऊपर आँख उठाकर तेरी प्रार्थना करता हूँ। तू स्वर्ग में राजा के रूप में विराजता है। {123:2} दास अपने स्वामियों के ऊपर उन वस्तुओं के लिए निर्भर रहा करते हैं। जिसकी उनको आवश्यकता है। दासियाँ अपनी स्वामिनियों के ऊपर निर्भर रहा करती हैं। इसी तरह हमको यहोवा का, हमारे परमेश्वर का भरोसा है। ताकि वह हम पर दया दिखाए, हम परमेश्वर की बाट जोहते हैं। {123:3} हे यहोवा, हम पर कृपालु है। दयालु हो क्योंकि बहुत दिनों से हमारा अपमान होता रहा है। {123:4} अहंकारी लोग बहुत दिनों से हमें अपमानित कर चुके हैं। ऐसे लोग सोचा करते हैं कि वे दूसरे लोगों से उत्तम हैं। {i124:1} दाऊद का एक मन्दिर का आरोहण गीत। {124:1} यदि बीते दिनों में यहोवा हमारे साथ नहीं होता तो हमारे साथ क्या घट गया होता इस्राएल तू मुझको उत्तर दे {124:2} यदि बीते दिनों में यहोवा हमारे साथ नहीं होता तो हमारे साथ क्या घट गया होता जब हम पर लोगों ने हमला किया था तब हमारे साथ क्या बीतती। {124:3} जब कभी हमारे शत्रु ने हम पर क्रोध किया, तब वे हमें जीवित ही निगल लिये होते। {124:4} तब हमारे शत्रुओं की सेनाएँ बाढ़ सी हमको बहाती हुई उस नदी के जैसी हो जाती जो हमें डूबा रहीं हो। {124:5} तब वे अभिमानी लोग उस जल जैसे हो जाते जो हमको डुबाता हुआ हमारे मुँह तक चढ़ रहा हो। {124:6} यहोवा के गुण गाओ। यहोवा ने हमारे शत्रुओं को हमको पकड़ने नहीं दिया और न ही मारने दिया। {124:7} हम जाल में फँसे उस पक्षी के जैसे थे जो फिर बच निकला हो। जाल छिन्न भिन्न हुआ और हम बच निकले। {124:8} हमारी सहायता यहोवा से आयी थी। यहोवा ने स्वर्ग और धरती को बनाया है। {i125:1} आरोहण गीत। {125:1} जो लोग यहोवा के भरोसे रहते हैं, वे सिय्योन पर्वत के जैसे होंगे। उनको कभी कोई भी डिगा नहीं पाएगा। वे सदा ही अटल रहेंगे। {125:2} यहोवा ने निज भक्तों को वैसे ही अपनी ओट में लिया है, जैसे यरूशलेम चारों ओर पहाड़ों से घिरा है। यहोवा सदा और सर्वदा निज भक्तों की रक्षा करेगा। {125:3} बुरे लोग सदा धरती पर भलों के ऊपर शासन नहीं करेंगे, यदी बुरे लोग ऐसा करने लग जायें तो संभव है सज्जन भी बुरे काम करने लगें। {125:4} हे यहोवा, तू भले लोगों के संग, जिनके मन पवित्र हैं तू भला हो। {125:5} हे यहोवा, दुर्जनों को दण्ड दे, जिन लोगों ने तेरा अनुसरण छोड़ा तू उनको दण्ड दे। इस्राएल में शांति हो। {i126:1} आरोहण गीत। {126:1} जब यहोवा हमें पुन: मुक्त करेगा तो यह ऐसा होगा जैसे कोई सपना हो! {126:2} हम हँस रहे होंगे और खुशी के गीत गा रहे होंगे! तब अन्य राष्ट्र के लोग कहेंगे, “यहोवा ने इनके लिए महान कार्य किये हैं।” {126:3} दूसरे देशों के लोग ये बातें करेंगे इस्राएल के लोगों के लिए यहोवा ने एक अद्भुत काम किया है। अगर यहोवा ने हमारे लिए वह अद्भुत काम किया तो हम प्रसन्न होंगे। {126:4} हे यहोवा, हमें तू स्वतंत्र कर दे, अब तू हमें मरुस्थल के जल से भरे हुए जलधारा जैसा बना दे। {126:5} जब हमने बीज बोये, हम रो रहे थे, किन्तु कटनी के समय हम खुशी के गीत गायेंगे! {126:6} हम बीज लेकर रोते हुए खेतों में गये। सो आनन्द मनाने आओ क्योंकि हम उपज के लिए हुए आ रहे हैं। {i127:1} सुलैमान का मन्दिर का आरोहण गीत। {127:1} यदि घर का निर्माता स्वयं यहोवा नहीं है, तो घर को बनाने वाला व्यर्थ समय खोता है। यदि नगर का रखवाला स्वयं यहोवा नहीं है, तो रखवाले व्यर्थ समय खोते हैं। {127:2} यदि सुबह उठ कर तुम देर रात गए तक काम करो। इसलिए कि तुम्हें बस खाने के लिए कमाना है, तो तुम व्यर्थ समय खोते हो। परमेश्वर अपने भक्तों का उनके सोते तक में ध्यान रखता है। {127:3} बच्चे यहोवा का उपहार है, वे माता के शरीर से मिलने वाले फल हैं। {127:4} जवान के पुत्र ऐसे होते हैं जैसे योद्धा के तरकस के बाण। {127:5} जो व्यक्ति बाण रुपी पुत्रों से तरकस को भरता है वह अति प्रसन्न होगा। वह मनुष्य कभी हारेगा नहीं। उसके पुत्र उसके शत्रुओं से सर्वजनिक स्थानों पर उसकी रक्षा करेंगे। {i128:1} आरोहण गीत। {128:1} यहोवा के सभी भक्त आनन्दित रहते हैं। वे लोग परमेश्वर जैसा चाहता, वैसा गाते हैं। {128:2} तूने जिनके लिये काम किया है, उन वस्तुओं का तू आनन्द लेगा। उन ऐसी वस्तुओं को कोई भी व्यक्ति तुझसे नहीं छिनेगा। तू प्रसन्न रहेगा और तेरे साथ भली बातें घटेंगी। {128:3} घर पर तेरी घरवाली अंगूर की बेल सी फलवती होगी। मेज के चारों तरफ तेरी संतानें ऐसी होंगी, जैसे जैतून के वे पेड़ जिन्हें तूने रोपा है। {128:4} इस प्रकार यहोवा अपने अनुयायिओं को सचमुच आशीष देगा। {128:5} यहोवा सिय्योन से तुझ को आशीर्वाद दे यह मेरी कामना है। जीवन भर यरूशलेम में तुझको वरदानों का आनन्द मिले। {128:6} तू अपने नाती पोतों को देखने के लिये जीता रहे यह मेरी कामना है। इस्राएल में शांति रहे। {i129:1} मन्दिर का आरोहण गीत। {129:1} पूरे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं। इस्राएल हमें उन शत्रुओं के बारे में बता। {129:2} सारे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं। किन्तु वे कभी नहीं जीते। {129:3} उन्होंने मुझे तब तक पीटा जब तक मेरी पीठ पर गहरे घाव नहीं बने। मेरे बड़े — बड़े और गहरे घाव हो गए थे। {129:4} किन्तु भले यहोवा ने रस्से काट दिये और मुझको उन दुष्टों से मुक्त किया। {129:5} जो सिय्योन से बैर रखते थे, वे लोग पराजित हुए। उन्होंने लड़ना छोड़ दिया और कहीं भाग गये। {129:6} वे लोग ऐसे थे, जैसे किसी घर की छत पर की घास जो उगने से पहले ही मुरझा जाती है। {129:7} उस घास से कोई श्रमिक अपनी मुट्ठी तक नहीं भर पाता और वह पूली भर अनाज भी पर्याप्त नहीं होती। {129:8} ऐसे उन दुष्टों के पास से जो लोग गुजरते हैं। वे नहीं कहेंगे, “यहोवा तेरा भला करे।” लोग उनका स्वागत नहीं करेंगे और हम भी नहीं कहेंगे, “तुम्हें यहोवा के नाम पर आशीष देते हैं।” {i130:1} आरोहण गीत। {130:1} हे यहोवा, मैं गहन कष्ट में हूँ सो सहारा पाने को मैं तुम्हें पुकारता हूँ। {130:2} मेरे स्वामी, तू मेरी सुन ले। मेरी सहायता की पुकार पर कान दे। {130:3} हे यहोवा, यदि तू लोगों को उनके सभी पापों का सचमुच दण्ड दे तो फिर कोई भी बच नहीं पायेगा। {130:4} हे यहोवा, निज भक्तों को क्षमा कर। फिर तेरी अराधना करने को वहाँ लोग होंगे। {130:5} मैं यहोवा की बाट जोह रहा हूँ कि वह मुझको सहायता दे। मेरी आत्मा उसकी प्रतीक्षा में है। यहोवा जो कहता है उस पर मेरा भरोसा है। {130:6} मैं अपने स्वामी की बाट जोहता हूँ। मैं उस रक्षक सा हूँ जो उषा के आने की प्रतीक्षा में लगा रहता है। {130:7} इस्राएल, यहोवा पर विश्वास कर। केवल यहोवा के साथ सच्चा प्रेम मिलता है। यहोवा हमारी बार — बार रक्षा किया करता है। {130:8} यहोवा इस्राएल को उनके सारे पापों के लिए क्षमा करेगा। {i131:1} आरोहण गीत। {131:1} हे यहोवा, मैं अभिमानी नहीं हूँ। मैं महत्वपूर्ण होने का जतन नहीं करता हूँ। मैं वो काम करने का जतन नहीं करता हूँ जो मेरे लिये बहुत कठिन हैं। ऐसी उन बातों की मुझे चिंता नहीं है। {131:2} मैं निश्चल हूँ, मेरी आत्मा शांत है। मेरी आत्मा शांत और अचल है, जैसे कोई शिशु अपनी माता की गोद में तृप्त होता है। {131:3} इस्राएल, यहोवा पर भरोसा रखो। उसका भरोसा रखो, अब और सदा सदा ही उसका भरोसा रखो! {i132:1} मन्दिर का आरोहण गीत। {132:1} हे यहोवा, जैसे दाऊद ने यातनाएँ भोगी थी, उसको याद कर। {132:2} किन्तु दाऊद ने यहोवा की एक मन्नत मानी थी। दाऊद ने इस्राएल के पराक्रमी परमेश्वर की एक मन्नत मानी थी। {132:3} दाऊद ने कहा था: “मैं अपने घर में तब तक न जाऊँगा, अपने बिस्तर पर न ही लेटूँगा, {132:4} न ही सोऊँगा। अपनी आँखों को मैं विश्राम तक न दूँगा। {132:5} इसमें से मैं कोई बात भी नहीं करूँगा जब तक मैं यहोवा के लिए एक भवन न प्राप्त कर लूँ। मैं इस्राएल के शक्तिशाली परमेश्वर के लिए एक मन्दिर पा कर रहूँगा!” {132:6} एप्राता में हमने इसके विषय में सुना, हमें किरीयथ योरीम के वन में वाचा की सन्दूक मिली थी। {132:7} आओ, पवित्र तम्बू में चलो। आओ, हम उस चौकी पर आराधना करें, जहाँ पर परमेश्वर अपने चरण रखता है। {132:8} हे यहोवा, तू अपनी विश्राम की जगह से उठ बैठ, तू और तेरी सामर्थ्यवान सन्दूक उठ बैठ। {132:9} हे यहोवा, तेरे याजक धार्मिकता धारण किये रहते हैं। तेरे जन बहुत प्रसन्न रहते हैं। {132:10} तू अपने चुने हुये राजा को अपने सेवक दाऊद के भले के लिए नकार मत। {132:11} यहोवा ने दाऊद को एक वचन दिया है कि दाऊद के प्रति वह सच्चा रहेगा। यहोवा ने वचन दिया है कि दाऊद के वंश से राजा आयेंगे। {132:12} यहोवा ने कहा था, “यदि तेरी संतानें मेरी वाचा पर और मैंने उन्हें जो शिक्षाएं सिखाई उन पर चलेंगे तो फिर तेरे परिवार का कोई न कोई सदा ही राजा रहेगा।” {132:13} अपने मन्दिर की जगह के लिए यहोवा ने सिय्योन को चुना था। यह वह जगह है जिसे वह अपने भवन के लिये चाहता था। {132:14} यहोवा ने कहा था, “यह मेरा स्थान सदा सदा के लिये होगा। मैंने इसे चुना है ऐसा स्थान बनने को जहाँ पर मैं रहूँगा। {132:15} भरपूर भोजन से मैं इस नगर को आशीर्वाद दूँगा, यहाँ तक कि दीनों के पास खाने को भर — पूर होगा। {132:16} याजकोंको मैं उद्धार का वस्त्र पहनाऊँगा, और यहाँ मेरे भक्त बहुत प्रसन्न रहेंगे। {132:17} इस स्थान पर मैं दाऊद को सुदृढ करुँगा। मैं अपने चुने राजा को एक दीपक दूँगा। {132:18} मैं दाऊद के शत्रुओं को लज्जा से ढक दूँगा और दाऊद का राज्य बढाऊँगा।” {i133:1} दाऊद का आरोहण गीत। {133:1} परमेश्वर के भक्त मिल जुलकर शांति से रहे। यह सचमुच भला है, और सुखदायी है। {133:2} यह वैसा सुगंधित तेल जैसा होता है जिसे हारून के सिर पर उँडेला गया है। यह, हारून की दाढ़ी से नीचे जो बह रहा हो उस तेल सा होता है। यह, उस तेल जैसा है जो हारून के विशेष वस्त्रों पर ढुलक बह रहा। {133:3} यह वैसा है जैसे धुंध भरी ओस हेर्मोन की पहाड़ी से आती हुई सिय्योन के पहाड पर उतर रही हो। यहोवा ने अपने आशीर्वाद सिय्योन के पहाड़ पर ही दिये थे। यहोवा ने अमर जीवन की आशीष दी थी। {i134:1} आरोहण का गीत। {134:1} ओ, उसके सब सेवकों, यहोवा का गुण गान करो। सेवकों सारी रात मन्दिर में तुमने सेवा की। {134:2} सेवकों, अपने हाथ उठाओ और यहोवा को धन्य कहो। {134:3} और सिय्योन से यहोवा तुम्हें धन्य कहे। यहोवा ने स्वर्ग और धरती रचे हैं। {135:1} यहोवा की प्रशंसा करो। यहोवा के सेवकों यहोवा के नाम का गुणगान करो। {135:2} तुम लोग यहोवा के मन्दिर में खड़े हो। उसके नाम की प्रशंसा करो। तुम लोग मन्दिर के आँगन में खडे हो। उसके नाम के गुण गाओ। {135:3} यहोवा की प्रशंसा करो क्योंकि वह खरा है। उसके नाम के गुण गाओ क्योंकि वह मधुर है। {135:4} यहोवा ने याकूब को चुना था। इस्राएल परमेश्वर का है। {135:5} मैं जानता हूँ, यहोवा महान है। अन्य भी देवों से हमारा स्वामी महान है। {135:6} यहोवा जो कुछ वह चाहता है स्वर्ग में, और धरती पर, समुद में अथवा गहरे महासागरों में, करता है। {135:7} परमेश्वर धरती पर सब कहीं मेघों को रचता है। परमेश्वर बिजली और वर्षा को रचता है। परमेश्वर हवा को रचता है। {135:8} परमेश्वर मिस्र में मनुष्यों और पशुओं के सभी पहलौठों को नष्ट किया था। {135:9} परमेश्वर ने मिस्र में बहुत से अद्भुत और अचरज भरे काम किये थे। उसने फिरौन और उसके सब कर्मचारियों के बीच चिन्ह और अद्भुत कार्य दिखाये। {135:10} परमेश्वर ने बहुत से देशों को हराया। परमेश्वर ने बलशाली राजा मारे। {135:11} उसने एमोरियों के राजा सीहोन को पराजित किया। परमेश्वर ने बाशान के राजा ओग को हराया। परमेश्वर ने कनान की सारी प्रजा को हराया। {135:12} परमेश्वर ने उनकी धरती इस्राएल को दे दी। परमेश्वर ने अपने भक्तों को धरती दी। {135:13} हे यहोवा, तू सदा के लिये प्रसिद्ध होगा। हे यहोवा, लोग तुझे सदा सर्वदा याद करते रहेंगे। {135:14} यहोवा ने राष्ट्रों को दण्ड दिया किन्तु यहोवा अपने निज सेवकों पर दयालु रहा। {135:15} दूसरे लोगों के देवता बस सोना और चाँदी के देवता थे। उनके देवता मात्र लोगों द्वारा बनाये पुतले थे। {135:16} पुतलों के मुँह है, पर बोल नहीं सकते। पुतलों की आँख है, पर देख नहीं सकते। {135:17} पुतलों के कान हैं, पर उन्हें सुनाई नहीं देता। पुतलों की नाक है, पर वे सूँघ नहीं सकते। {135:18} वे लोग जिन्होंने इन पुतलों को बनाया, उन पुतलों के समान हो जायेंगे। क्यों? क्योंकि वे लोग मानते हैं कि वे पुतले उनकी रक्षा करेंगे। {135:19} इस्राएल की संतानों, यहोवा को धन्य कहो! हारून की संतानों, यहोवा को धन्य कहो! {135:20} लेवी की संतानों, यहोवा को धन्य कहो! यहोवा के अनुयायियों, यहोवा को धन्य कहो! {135:21} सिय्योन का यहोवा धन्य है। यरूशलेम में जिसका घर है। यहोवा का गुणगान करो। {136:1} यहोवा की प्रशंसा करो, क्योंकि वह उत्तम है। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:2} ईश्वरों के परमेश्वर की प्रशंसा करो! उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:3} प्रभुओं के प्रभु की प्रशंसा करो। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:4} परमेश्वर के गुण गाओ। बस वही एक है जो अद्भुत कर्म करता है। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:5} परमेश्वर के गुण गाओ जिसने अपनी बुद्धि से आकाश को रचा है। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:6} परमेश्वर ने सागर के बीच में सूखी धरती को स्थापित किया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:7} परमेश्वर ने महान ज्योतियाँ रची। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है।। {136:8} परमेश्वर ने सूर्य को दिन पर शासन करने के लिये बनाया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:9} परमेश्वर ने चाँद तारों को बनाया कि वे रात पर शासन करें। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:10} परमेश्वर ने मिस्र में मनुष्यों और पशुओं के पहलौठों को मारा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:11} परमेश्वर इस्राएल को मिस्र से बाहर ले आया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:12} परमेश्वर ने अपना सामर्थ्य और अपनी महाशक्ति को प्रकटाया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:13} परमेश्वर ने लाल सागर को दो भागों में फाड़ा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:14} परमेश्वर ने इस्राएल को सागर के बीच से पार उतारा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:15} परमेश्वर ने फ़िरौन और उसकी सेना को लाल सागर में डूबा दिया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:16} परमेश्वर ने अपने निज भक्तों को मरुस्थल में राह दिखाई। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:17} परमेश्वर ने बलशाली राजा हराए। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:18} परमेश्वर ने सुदृढ़ राजाओं को मारा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:19} परमेश्वर ने एमोरियों के राजा सीहोन को मारा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:20} परमेश्वर ने बाशान के राजा ओग को मारा। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:21} परमेश्वर ने इस्राएल को उसकी धरती दे दी। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:22} परमेश्वर ने उस धरती को इस्राएल को उपहार के रूप में दिया। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:23} परमेश्वर ने हमको याद रखा, जब हम पराजित थे। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:24} परमेश्वर ने हमको हमारे शत्रुओं से बचाया था। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:25} परमेश्वर हर एक को खाने को देता है। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {136:26} स्वर्ग के परमेश्वर का गुण गाओ। उसका सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। {137:1} बाबुल की नदियों के किनारे बैठकर हम सिय्योन को याद करके रो पड़े। {137:2} हमने पास खड़े बेंत के पेड़ों पर निज वीणाएँ टाँगी। {137:3} बाबुल में जिन लोगों ने हमें बन्दी बनाया था, उन्होंने हमसे गाने को कहा। उन्होंने हमसे प्रसन्नता के गीत गाने को कहा। उन्होंने हमसे सिय्योन के गीत गाने को कहा। {137:4} किन्तु हम यहोवा के गीतों को किसी दूसरे देश में कैसे गा सकते हैं! {137:5} हे यरूशलेम, यदि मैं तुझे कभी भूलूँ। तो मेरी कामना है कि मैं फिर कभी कोई गीत न बजा पाऊँ। {137:6} हे यरूशलेम, यदि मैं तुझे कभी भूलूँ। तो मेरी कामना है कि मैं फिर कभी कोई गीत न गा पाऊँ। मैं तुझको कभी नहीं भूलूँगा। {137:7} हे यहोवा, याद कर एदोमियों ने उस दिन जो किया था। जब यरूशलेम पराजित हुआ था, वे चीख कर बोले थे, इसे चीर डालो और नींव तक इसे विध्वस्त करो। {137:8} अरी ओ बाबुल, तुझे उजाड़ दिया जायेगा। उस व्यक्ति को धन्य कहो, जो तुझे वह दण्ड देगा, जो तुझे मिलना चाहिए। {137:9} उस व्यक्ति को धन्य कहो जो तुझे वह क्लेश देगा जो तूने हमको दिये। उस व्यक्ति को धन्य कहो जो तेरे बच्चों को चट्टान पर झपट कर पछाड़ेगा। {i138:1} दाऊद का एक पद। {138:1} हे परमेश्वर, मैं अपने पूर्ण मन से तेरे गीत गाता हूँ। मैं सभी देवों के सामने मैं तेरे पद गाऊँगा। {138:2} हे परमेश्वर, मैं तेरे पवित्र मन्दिर की और दण्डवत करुँगा। मैं तेरे नाम, तेरा सत्य प्रेम, और तेरी भक्ति बखानूँगा। तू अपने वचन की शक्ति के लिये प्रसिद्ध है। अब तो उसे तूने और भी महान बना दिया। {138:3} हे परमेश्वर, मैंने तुझे सहायता पाने को पुकारा। तूने मुझे उत्तर दिया! तूने मुझे बल दिया। {138:4} हे यहोवा, मेरी यह इच्छा है कि धरती के सभी राजा तेरा गुण गायें। जो बातें तूने कहीं हैं उन्होंने सुनीं हैं। {138:5} मैं तो यह चाहता हूँ, कि वे सभी राजा यहोवा की महान महिमा का न करें। {138:6} परमेश्वर महान है, किन्तु वह दीन जन का ध्यान रखता है। परमेश्वर को अहंकारी लोगों के कामों का पता है किन्तु वह उनसे दूर रहता है। {138:7} हे परमेश्वर, यदि मैं संकट में पडूँ तो मुझको जीवित रख। यदि मेरे शत्रु मुझ पर कभी क्रोध करे तो उन से मुझे बचा ले। {138:8} हे यहोवा, वे वस्तुएँ जिनको मुझे देने का वचन दिया है मुझे दे। हे यहोवा, तेरा सच्चा प्रेम सदा ही बना रहता है। हे यहोवा, तूने हमको रचा है सो तू हमको मत बिसरा। {i139:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का स्तुति गीत। {139:1} हे यहोवा, तूने मुझे परखा है। मेरे बारे में तू सब कुछ जानता है। {139:2} तू जानता है कि मैं कब बैठता और कब खड़ा होता हूँ। तू दूर रहते हुए भी मेरी मन की बात जानता है। {139:3} हे यहोवा, तुझको ज्ञान है कि मैं कहाँ जाता और कब लेटता हूँ। मैं जो कुछ करता हूँ सब को तू जानता है। {139:4} हे यहोवा. इससे पहले की शब्द मेरे मुख से निकले तुझको पता होता है कि मैं क्या कहना चाहता हूँ। {139:5} हे यहोवा, तू मेरे चारों ओर छाया है। मेरे आगे और पीछे भी तू अपना निज हाथ मेरे ऊपर हौले से रखता है। {139:6} मुझे अचरज है उन बातों पर जिनको तू जानता है। जिनका मेरे लिये समझना बहुत कठिन है। {139:7} हर जगह जहाँ भी मैं जाता हूँ, वहाँ तेरी आत्मा रची है। हे यहोवा, मैं तुझसे बचकर नहीं जा सकता। {139:8} हे यहोवा, यदि मैं आकाश पर जाऊँ वहाँ पर तू ही है। यदि मैं मृत्यु के देश पाताल में जाऊँ वहाँ पर भी तू है। {139:9} हे यहोवा, यदि मैं पूर्व में जहाँ सूर्य निकलता है जाऊँ वहाँ पर भी तू है। {139:10} वहाँ तक भी तेरा दायाँ हाथ पहुँचाता है। और हाथ पकड़ कर मुझको ले चलता है। {139:11} हे यहोवा, सम्भव है, मैं तुझसे छिपने का जतन करुँ और कहने लगूँ, “दिन रात में बदल गया है तो निश्चय ही अंधकार मुझको ढक लेगा।” {139:12} किन्तु यहोवा अन्धेरा भी तेरे लिये अंधकार नहीं है। तेरे लिये रात भी दिन जैसी उजली है। {139:13} हे यहोवा, तूने मेरी समूची देह को बनाया। तू मेरे विषय में सबकुछ जानता था जब मैं अभी माता की कोख ही में था। {139:14} हे यहोवा, तुझको उन सभी अचरज भरे कामों के लिये मेरा धन्यवाद, और मैं सचमुच जानता हूँ कि तू जो कुछ करता है वह आश्चर्यपूर्ण है। {139:15} मेरे विषय में तू सब कुछ जानता है। जब मैं अपनी माता की कोख में छिपा था, जब मेरी देह रूप ले रही थी तभी तूने मेरी हड्डियों को देखा। {139:16} हे यहोवा, तूने मेरी देह को मेरी माता के गर्भ में विकसते देखा। ये सभी बातें तेरी पुस्तक में लिखीं हैं। हर दिन तूने मुझ पर दृष्टी की। एक दिन भी तुझसे नहीं छूटा। {139:17} हे परमेश्वर, तेरे विचार मेरे लिये कितने महत्वपूर्ण हैं। तेरा ज्ञान अपरंपार है। {139:18} तू जो कुछ जानता है, उन सब को यदि मैं गिन सकूँ तो वे सभी धरती के रेत के कणों से अधिक होंगे। किन्तु यदि मैं उनको गिन पाऊँ तो भी मैं तेरे साथ में रहूँगा। {139:19} हे परमेश्वर, दुर्जन को नष्ट कर। उन हत्यारों को मुझसे दूर रख। {139:20} वे बुरे लोग तेरे लिये बुरी बातें कहते हैं। वे तेरे नाम की निन्दा करते हैं। {139:21} हे यहोवा, मुझको उन लोगों से घृणा है! जो तुझ से घृणा करते हैं मुझको उन लोगों से बैर है जो तुझसे मुड़ जाते हैं। {139:22} मुझको उनसे पूरी तरह घृणा है! तेरे शत्रु मेरे भी शत्रु हैं। {139:23} हे यहोवा, मुझ पर दृष्टि कर और मेरा मन जान ले। मुझ को परख ले और मेरा इरादा जान ले। {139:24} मुझ पर दृष्टि कर और देख कि मेरे विचार बुरे नहीं है। तू मुझको उस पथ पर ले चल जो सदा बना रहता है। {i140:1} संगीत निर्देशक के लिये दाऊद की एक स्तुति। {140:1} हे यहोवा, दुष्ट लोगों से मेरी रक्षा कर। मुझको क्रूर लोगों से बचा ले। {140:2} वे लोग बुरा करने को कुचक्र रचते हैं। वे लोग सदा ही लड़ने लग जाते हैं। {140:3} उन लोगों की जीभें विष भरे नागों सी है। जैसे उनकी जीभों के नीचे सर्प विष हो। {140:4} हे यहोवा, तू मुझको दुष्ट लोगों से बचा ले। मुझको क्रूर लोगों से बचा ले। वे लोग मेरे पीछे पड़े हैं और दु: ख पहुँचाने का जतन कर रहे हैं। {140:5} उन अहंकारी लोगों ने मेरे लिये जाल बिछाया। मुझको फँसाने को उन्होंने जाल फैलाया है। मेरी राह में उन्होंने फँदा फैलाया है। {140:6} हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है। हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन। {140:7} हे यहोवा, तू मेरा बलशाली स्वामी है। तू मेरा उद्धारकर्ता है। तू मेरा सिर का कवच जैसा है। जो मेरा सिर युद्ध में बचाता है। {140:8} हे यहोवा, वे लोग दुष्ट हैं। उन की मनोकामना पूरी मत होने दे। उनकी योजनाओं को परवान मत चढने दे। {140:9} हे यहोवा, मेरे बैरियों को विजयी मत होने दे। वे बुरे लोग कुचक्र रच रहे हैं। उनके कुचक्रों को तू उन्ही पर चला दे। {140:10} उनके सिर पर धधकते अंगारों को ऊँडेल दे। मेरे शत्रुओं को आग में धकेल दे। उनको गक़े (कब्रों) में फेंक दे। वे उससे कभी बाहर न निकल पाये। {140:11} हे यहोवा, उन मिथ्यावादियों को तू जीने मत दे। बुरे लोगों के साथ बुरी बातें घटा दे। {140:12} मैं जानता हूँ यहोवा कंगालों का न्याय खराई से करेगा। परमेश्वर असहायों की सहायता करेगा। {140:13} हे यहोवा, भले लोग तेरे नाम की स्तुति करेंगे। भले लोग तेरी अराधना करेंगे। {i141:1} दाऊद का एक स्तुति पद। {141:1} हे यहोवा, मैं तुझको सहायता पाने के लिये पुकारता हूँ। जब मैं विनती करुँ तब तू मेरी सुन ले। जल्दी कर और मुझको सहारा दे। {141:2} हे यहोवा, मेरी विनती तेरे लिये जलती धूप के उपहार सी हो मेरी विनती तेरे लिये दी गयी साँझ कि बलि सी हो। {141:3} हे यहोवा, मेरी वाणी पर मेरा काबू हो। अपनी वाणी पर मैं ध्यान रख सकूँ, इसमें मेरा सहायक हो। {141:4} मुझको बुरी बात मत करने दे। मुझको रोके रह बुरों की संगती से उनके सरस भोजन से और बुरे कामों से। मुझे भाग मत लेने दे ऐसे उन कामों में जिन को करने में बुरे लोग रख लेते हैं। {141:5} सज्जन मेरा सुधार कर सकता है। तेरे भक्त जन मेरे दोष कहे, यह मेरे लिये भला होगा। मैं दुर्जनों कि प्रशंसा ग्रहण नहीं करुँगा। क्यों क्योंकि मैं सदा प्रार्थना किया करता हूँ। उन कुकर्मो के विरुद्ध जिनको बुरे लोग किया करते हैं। {141:6} उनके राजाओं को दण्डित होने दे और तब लोग जान जायेंगे कि मैंने सत्य कहा था। {141:7} लोग खेत को खोद कर जोता करते हैं और मिट्टी को इधर — उधर बिखेर देते हैं। उन दुष्टों कि हड्डियाँ इसी तरह कब्रों में इधर — उधर बिखरेंगी। {141:8} हे यहोवा, मेरे स्वामी, सहारा पाने को मेरी दृष्टि तुझ पर लगी है। मुझको तेरा भरोसा है। कृपा कर मुझको मत मरने दे। {141:9} मुझको दुष्टों के फँदों में मत पड़ने दे। उन दुष्टों के द्वारा मुझ को मत बंध जाने दे। {141:10} वे दुष्ट स्वयं अपने जालों में फँस जायें जब मैं बचकर निकल जाऊँ। बिना हानि उठाये। {142:1} दाऊद का एक कला गीत। मैं सहायता पाने के लिये यहोवा को पुकारुँगा। मै यहोवा से प्रार्थना करुँगा। {142:2} मैं यहोवा के सामने अपना दु: ख रोऊँगा। मैं यहोवा से अपनी कठिनाईयाँ कहूँगा। {142:3} मेरे शत्रुओं ने मेरे लिये जाल बिछाया है। मेरी आशा छूट रही है किन्तु यहोवा जानता है। कि मेरे साथ क्या घट रहा है। {142:4} मैं चारों ओर देखता हूँ और कोई अपना मिस्र मुझको दिख नहीं रहा मेरे पास जाने को कोई जगह नहीं है। कोई व्यक्ति मुझको बचाने का जतन नहीं करता है। {142:5} इसलिये मैंने यहोवा को सहारा पाने को पुकारा है। हे यहोवा, तू मेरी ओट है। हे यहोवा, तू ही मुझे जिलाये रख सकता है। {142:6} हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन। मुझे तेरी बहुत अपेक्षा है। तू मुझको ऐसे लोगों से बचा ले जो मेरे लिये मेरे पीछे पड़े हैं। {142:7} मुझको सहारा दे कि इस जाल से बच भागूँ। फिर यहोवा, मैं तेरे नाम का गुणगान करुँगा। मैं वचन देता हूँ। भले लोग आपस में मिलेंगे और तेरा गुणगान करेंगे क्योकि तूने मेरी रक्षा की है। {i143:1} दाऊद का एक स्तुति गीत। {143:1} हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन। मेरी विनती को सुन और फिर तू मेरी प्रार्थना का उत्तर दे। मुझको दिखा दे कि तू सचमुच भला और खरा है। {143:2} तू मुझ पर अपने दास पर मुकदमा मत चला। क्योंकि कोई भी जीवित व्यक्ति तेरे सामने नेक नहीं ठहर सकता। {143:3} किन्तु मेरे शत्रु मेरे पीछे पड़े हैं। उन्होंने मेरा जीवन चकनाचूर कर धूल में मिलाया। वे मुझे अंधेरी कब्र में ढकेल रहे हैं। उन व्यक्तियों की तरह जो बहुत पहले मर चुके हैं। {143:4} मैं निराश हो रहा हूँ। मेरा साहस छूट रहा है। {143:5} किन्तु मुझे वे बातें याद हैं, जो बहुत पहले घटी थी। हे यहोवा, मैं उन अनेक अद्भुत कामों का बखान कर रहा हूँ। जिनको तूने किया था। {143:6} हे यहोवा, मैं अपना हाथ उठाकर के तेरी विनती करता हूँ। मैं तेरी सहायता कि बाट जोह रहा हूँ जैसे सूखी वर्षा कि बाट जोहती है। {143:7} हे यहोवा, मुझे शीघ्र उत्तर दे। मेरा साहस छूट गया: मुझसे मुख मत मोड़। मुझको मरने मत दे और वैसा मत होने दे, जैसा कोई मरा व्यक्ति कब्र में लेटा हो। {143:8} हे यहोवा, इस भोर के फूटते ही मुझे अपना सच्चा प्रेम दिखा। मैं तेरे भरोसे हूँ। मुझको वे बाते दिखा जिनको मुझे करना चाहिये। {143:9} हे यहोवा, मेरे शत्रुओं से रक्षा पाने को मैं तेरे शरण में आता हूँ। तू मुझको बचा ले। {143:10} दिखा मुझे जो तू मुझसे करवाना चाहता है। तू मेरा परमेश्वर है। {143:11} हे यहोवा, मुझे जीवित रहने दे, ताकि लोग तेरे नाम का गुण गायें। मुझे दिखा कि सचमुच तू भला है, और मुझे मेरे शत्रुओं से बचा ले। {143:12} हे यहोवा, मुझ पर अपना प्रेम प्रकट कर। और उन शत्रुओं को हरा दे, जो मेरी हत्या का यत्न कर रहे हैं। क्योंकि मैं तेरा सेवक हूँ। {i144:1} दाऊद को समर्पित। {144:1} यहोवा मेरी चट्टान है। यहोवा को धन्य कहो! यहोवा मुझको लड़ाई के लिये प्रशिक्षित करता है। यहोवा मुझको युद्ध के लिये प्रशिक्षित करता है। {144:2} यहोवा मुझसे प्रेम रखता है और मेरी रक्षा करता है। यहोवा पर्वत के ऊपर, मेरा ऊँचा सुरक्षा स्थान है। यहोवा मुझको बचा लाता है। यहोवा मेरी ढाल है। मैं उसके भरोसे हूँ। यहोवा मेरे लोगों का शासन करने में मेरा सहायक है। {144:3} हे यहोवा, तेरे लिये लोग क्यों महत्वपूर्ण बने हैं तू हम पर क्यों ध्यान देता है? {144:4} मनुष्य का जीवन एक फूँक के समान होता है। मनुष्य का जीवन ढलती हुई छाया सा होता है। {144:5} हे यहोवा, तू अम्बर को चीर कर नीचे उतर आ। तू पर्वतो को छू ले कि उनसे धुँआ उठने लगे। {144:6} हे यहोवा, बिजलियाँ भेज दे और मेरे शत्रुओं को कही दूर भगा दे। अपने बाणों को चला और उन्हें विवश कर कि वे कहीं भाग जायें। {144:7} हे यहोवा, अम्बर से नीचे उतर आ और मुझ को उबार ले। इन, शत्रुओं के सागर में मुझे मत डूबने दे। मुझको इन परायों से बचा ले। {144:8} ये शत्रु झूठे हैं। ये बात ऐसी बनाते हैं जो सच नहीं होती है। {144:9} हे यहोवा, मैं नया गीत गाऊँगा तेरे उन अद्भुत कर्मो का तू जिन्हें करता है। मैं तेरा यश दस तार वाली वीणा पर गाऊँगा। {144:10} हे यहोवा, राजाओं की सहायता उनके युद्ध जीतने में करता है। यहोवा वे अपने सेवक दाऊद को उसके शत्रुओं के तलवारों से बचाया। {144:11} मुझको इन परदेशियों से बचा ले। ये शत्रु झूठे हैं, ये बातें बनाते हैं जो सच नहीं होती। {144:12} यह मेरी कामना है: पुत्र जवान हो कर विशाल पेड़ों जैसे मजबूत हों। और मेरी यह कामनाहै हमारी पुत्रियाँ महल की सुन्दर सजावटों सी हों। {144:13} यह मेरी कामना है कि हमारे खेत हर प्रकार की फसलों से भरपूर रहें। यह मेरी कामना है कि हमारी भेड़े चारागाहों में हजारों हजार मेमने जनती रहे। {144:14} मेरी यह कामना है कि हमारे पशुओं के बहुत से बच्चे हों। यह मेरी कामना है कि हम पर आक्रमण करने कोई शत्रु नहीं आए। यह मेरी कामना है कभी हम युद्ध को नहीं आए। और मेरी यह कामना है कि हमारी गलियों में भय की चीखें नहीं उठें। {144:15} जब ऐसा होगा लोग अति प्रसन्न होंगे। जिनका परमेश्वर यहोवा है, वे लोग अति प्रसन्न रहते हैं। {i145:1} दाऊद की एक प्रार्थना। {145:1} हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे राजा, मैं तेरा गुण गाता हूँ! मैं सदा-सदा तेरे नाम को धन्य कहता हूँ। {145:2} मैं हर दिन तुझको सराहता हूँ। मैं तेरे नाम की सदा-सदा प्रशंसा करता हूँ। {145:3} यहोवा महान है। लोग उसका बहुत गुणगान करते हैं। वे अनगिनत महाकार्य जिनको वह करता है हम उनको नहीं गिन सकते। {145:4} हे यहोवा, लोग उन बातों की गरिमा बखानेंगे जिनको तू सदा और सर्वदा करता हैं। दूसरे लोग, लोगों से उन अद्भुत कर्मो का बखान करेंगे जिनको तू करता है। {145:5} तेरे लोग अचरज भरे गौरव और महिमा को बखानेंगे। मैं तेरे आश्चर्यपूर्ण कर्मों को बखानूँगा। {145:6} हे यहोवा, लोग उन अचरज भरी बातों को कहा करेंगे जिनको तू करता है। मैं उन महान कर्मो को बखानूँगा जिनको तू करता है। {145:7} लोग उन भली बातों के विषय में कहेंगे जिनको तू करता है। लोग तेरी धार्मिकता का गान किया करेंगे। {145:8} यहोवा दयालु है और करुणापूर्ण है। यहोवा तू धैर्य और प्रेम से पूर्ण है। {145:9} यहोवा सब के लिये भला है। परमेश्वर जो कुछ भी करता है उसी में निजकरुणा प्रकट करता है। {145:10} हे यहोवा, तेरे कर्मो से तुझे प्रशंसा मिलती है। तुझको तेरे भक्त धन्य कहा करते हैं। {145:11} वे लोग तेरे महिमामय राज्य का बखान किया करते हैं। तेरी महानता को वे बताया करते हैं। {145:12} ताकि अन्य लोग उन महान बातों को जाने जिनको तू करता है। वे लोग तेरे महिमामय राज्य का मनन किया करते हैं। {145:13} हे यहोवा, तेरा राज्य सदा — सदा बना रहेगा तू सर्वदा शासन करेगा। {145:14} यहोवा गिरे हुए लोगों को ऊपर उठाता है। यहोवा विपदा में पड़े लोगों को सहारा देता है। {145:15} हे यहोवा, सभी प्राणी तेरी ओर खाना पाने को देखते हैं। तू उनको ठीक समय पर उनका भोजन दिया करता है। {145:16} हे यहोवा, तू निज मुट्ठी खोलता है, और तू सभी प्राणियों को वह हर एक वस्तु जिसकी उन्हें आवश्यकता देता है। {145:17} यहोवा जो भी करता है, अच्छा ही करता है। यहोवा जो भी करता, उसमें निज सच्चा प्रेम प्रकट करता है। {145:18} जो लोग यहोवा की उपासना करते हैं, यहोवा उनके निकट रहता है। सचमुच जो उसकी उपासना करते है, यहोवा हर उस व्यक्ति के निकट रहता है। {145:19} यहोवा के भक्त जो उससे करवाना चाहते हैं, वह उन बातों को करता है। यहोवा अपने भक्तों की सुनता है। वह उनकी प्रार्थनाओ का उत्तर देता है और उनकी रक्षा करता है। {145:20} जिसका भी यहोवा से प्रेम है, यहोवा हर उस व्यक्ति को बचाता है, किन्तु यहोवा दुष्ट को नष्ट करता है। {145:21} मैं यहोवा के गुण गाऊँगा! मेरी यह इच्छा है कि हर कोई उसके पवित्र नाम के गुण सदा और सर्वदा गाये। {146:1} यहोवा का गुण गान कर! मेरे मन, यहोवा की प्रशंसा कर। {146:2} मैं अपने जीवन भर यहोवा के गुण गाऊँगा। मैं अपने जीवन भर उसके लिये यश गीत गाऊँगा। {146:3} अपने प्रमुखों के भरोसे मत रहो। सहायता पाने को व्यक्ति के भरोसे मत रहो, क्योंकि तुमको व्यक्ति बचा नहीं सकता है। {146:4} लोग मर जाते हैं और गाड़ दिये जाते है। फिर उनकी सहायता देने की सभी योजनाएँ यूँ ही चली जाती है। {146:5} जो लोग, याकूब के परमेश्वर से अति सहायता माँगते, वे अति प्रसन्न रहते हैं। वे लोग अपने परमेश्वर यहोवा के भरोसे रहा करते हैं। {146:6} यहोवा ने स्वर्ग और धरती को बनाया है। यहोवा ने सागर और उसमें की हर वस्तु बनाई है। यहोवा उनको सदा रक्षा करेगा। {146:7} जिन्हें दु: ख दिया गया, यहोवा ऐसे लोगों के संग उचित बात करता है। यहोवा भूखे लोगों को भोजन देता है। यहोवा बन्दी लोगों को छुड़ा दिया करता है। {146:8} यहोवा के प्रताप से अंधे फिर देखने लग जाते हैं। यहोवा उन लोगों को सहारा देता जो विपदा में पड़े हैं। यहोवा सज्जन लोगों से प्रेम करता है। {146:9} यहोवा उन परदेशियों की रक्षा किया करता है जो हमारे देश में बसे हैं। यहोवा अनाथों और विधवाओं का ध्यान रखता है किन्तु यहोवा दुर्जनों के कुचक्र को नष्ट करता हैं। {146:10} यहोवा सदा राज करता रहे! सिय्योन तुम्हारा परमेश्वर पर सदा राज करता रहे! यहोवा का गुणगान करो! {147:1} यहोवा की प्रशंसा करो क्योंकि वह उत्तम है। हमारे परमेश्वर के प्रशंसा गीत गाओ। उसका गुणगान भला और सुखदायी है। {147:2} यहोवा ने यरूशलेम को बनाया है। परमेश्वर इस्राएली लोगों को वापस छुड़ाकर ले आया जिन्हें बंदी बनाया गया था। {147:3} परमेश्वर उनके टूटे मनों को चँगा किया करता और उनके घावों पर पट्टी बांधता है। {147:4} परमेश्वर सितारों को गिनता है और हर एक तारे का नाम जानता है। {147:5} हमारा स्वामी अति महान है। वह बहुत ही शक्तिशाली है। वे सीमाहीन बातें है जिनको वह जानता है। {147:6} यहोवा दीन जन को सहारा देता है। किन्तु वह दुष्ट को लज्जित किया करता है। {147:7} यहोवा को धन्यवाद करो। हमारे परमेश्वर का गुणगान वीणा के संग करो। {147:8} परमेश्वर मेघों से अम्बर को भरता है। परमेश्वर धरती के लिये वर्षा करता है। परमेश्वर पहाड़ों पर घास उगाता है। {147:9} परमेश्वर पशुओं को चारा देता है, छोटी चिड़ियों को चुग्गा देता है। {147:10} उनको युद्ध के घोड़े और शक्तिशाली सैनिक नहीं भाते हैं। {147:11} यहोवा उन लोगों से प्रसन्न रहता है। जो उसकी आराधना करते हैं। यहोवा प्रसन्न हैं, ऐसे उन लोगों से जिनकी आस्था उसके सच्चे प्रेम में है। {147:12} हे यरूशलेम, यहोवा के गुण गाओ! सिय्योन, अपने परमेश्वर की प्रशंसा करो! {147:13} हे यरूशलेम, तेरे फाटको को परमेश्वर सुदृढ़ करता है। तेरे नगर के लोगों को परमेश्वर आशीष देता है। {147:14} परमेश्वर तेरे देश में शांति को लाया है। सो युद्ध में शत्रुओं ने तेरा अन्न नहीं लूटा। तेरे पास खाने को बहुत अन्न है। {147:15} परमेश्वर धरती को आदेश देता है, और वह तत्काल पालन करती है। {147:16} परमेश्वर पाला गिराता जब तक धरातल वैसा श्वेत नहीं होता जाता जैसा उजला ऊन होता है। परमेश्वर तुषार की वर्षा करता है, जो हवा के साथ धूल सी उड़ती है। {147:17} परमेश्वर हिम शिलाएँ गगन से गिराता है। कोई व्यक्ति उस शीत को सह नहीं पाता है। {147:18} फिर परमेश्वर दूसरी आज्ञा देता है, और गर्म हवाएँ फिर बहने लग जाती हैं। बर्फ पिघलने लगती, और जल बहने लग जाता है। {147:19} परमेश्वर ने निज आदेश याकूब को (इस्राएल को) दिये थे। परमेश्वर ने इस्राएल को निज विधी का विधान और नियमों को दिया। {147:20} यहोवा ने किसी अन्य राष्ट्र के हेतु ऐसा नहीं किया। परमेश्वर ने अपने नियमों को, किसी अन्य जाति को नहीं सिखाया। यहोवा का यश गाओ। {148:1} यहोवा के गुण गाओ! स्वर्ग के स्वर्गदूतों, यहोवा की प्रशंसा स्वर्ग से करो! {148:2} हे सभी स्वर्गदूतों, यहोवा का यश गाओ! ग्रहों और नक्षत्रों, उसका गुण गान करो! {148:3} सूर्य और चाँद, तुम यहोवा के गुण गाओ! अम्बर के तारों और ज्योतियों, उसकी प्रशंसा करो! {148:4} यहोवा के गुण सर्वोच्च अम्बर में गाओ। हे जल आकाश के ऊपर, उसका यशगान कर! {148:5} यहोवा के नाम का बखान करो। क्यों? क्योंकि परमेश्वर ने आदेश दिया, और हम सब उसके रचे थे। {148:6} परमेश्वर ने इन सबको बनाया कि सदा — सदा बने रहें। परमेश्वर ने विधान के विधि को बनाया, जिसका अंत नहीं होगा। {148:7} ओ हर वस्तु धरती की यहोवा का गुण गान करो! ओ विशालकाय जल जन्तुओं, सागर के यहोवा के गुण गाओ। {148:8} परमेश्वर ने अग्नि और ओले को बनाया, बर्फ और धुआँ तथा सभी तूफानी पवन उसने रचे। {148:9} परमेश्वर ने पर्वतों और पहाड़ों को बनाया, फलदार पेड़ और देवदार के वृक्ष उसी ने रचे हैं। {148:10} परमेश्वर ने सारे बनैले पशु और सब मवेशी रचे हैं। रेंगने वाले जीव और पक्षियों को उसने बनाया। {148:11} परमेश्वर ने राजा और राष्ट्रों की रचना धरती पर की। परमेश्वर ने प्रमुखों और न्यायधीशों को बनाया। {148:12} परमेश्वर ने युवक और युवतियों को बनाया। परमेश्वर ने बूढ़ों और बच्चों को रचा है। {148:13} यहोवा के नाम का गुण गाओ! सदा उसके नाम का आदर करो! हर वस्तु ओर धरती और व्योम, उसका गुणगान करो! {148:14} परमेश्वर अपने भक्तों को दृढ़ करेगा। लोग परमेश्वर के भक्तों की प्रशंसा करेंगे। लोग इस्राएल के गुण गायेंगे, वे लोग है जिनके लिये परमेश्वर युद्ध करता है, यहोवा की प्रशंसा करो। {149:1} यहोवा के गुण गाओ। उन नयी बातों के विषय में एक नया गीत गाओ जिनको यहोवा ने किया है। उसके भक्तों की मण्डली में उसका गुण गान करो। {149:2} परमेश्वर ने इस्राएल को बनाया। यहोवा के संग इस्राएल हर्ष मनाए। सिय्योन के लोग अपने राजा के संग में आनन्द मनाएँ। {149:3} वे लोग परमेश्वर का यशगान नाचते बजाते अपने तम्बुरों, वीणाओ से करें। {149:4} यहोवा निज भक्तों से प्रसन्न है। परमेश्वर ने एक अद्भुत कर्म अपने विनीत जन के लिये किया। उसने उनका उद्धार किया। {149:5} परमेश्वर के भक्तों, तुम निज विजय मनाओं! यहाँ तक कि बिस्तर पर जाने के बाद भी तुम आनन्दित रहो। {149:6} लोग परमेश्वर का जयजयकार करें और लोग निज तलवारें अपने हाथों में धारण करें। {149:7} वे अपने शत्रुओं को दण्ड देने जायें। और दूसरे लोगों को वे दण्ड देने को जायें, {149:8} परमेश्वर के भक्त उन शासकों और उन प्रमुखों को जंजीरो से बांधे। {149:9} परमेश्वर के भक्त अपने शत्रुओं को उसी तरह दण्ड देंगे, जैसा परमेश्वर ने उनको आदेश दिया। परमेश्वर के भक्तो यहोवा का आदरपूर्ण गुणगान करो। {150:1} यहोवा की प्रशंसा करो! परमेश्वर के मन्दिर में उसका गुणगान करो! उसकी जो शक्ति स्वर्ग में है, उसके यशगीत गाओ! {150:2} उन बड़े कामों के लिये परमेश्वर की प्रशंसा करो, जिनको वह करता है! उसकी गरिमा समूची के लिये उसका गुणगान करो! {150:3} तुरही फूँकते और नरसिंगे बजाते हुए उसकी स्तुति करो! उसका गुणगान वीणा और सारंगी बजाते हुए करो! {150:4} परमेश्वर की स्तुति तम्बूरों और नृत्य से करो! उसका यश उन पर जो तार से बजाते हैं और बांसुरी बजाते हुए गाओ! {150:5} तुम परमेश्वर का यश झंकारते झाँझे बजाते हुए गाओ! उसकी प्रशंसा करो! {150:6} हे जीवों! यहोवा की स्तुति करो! यहोवा की प्रशंसा करो!