{i1:1} प्रस्तावना यहोवा का रथ और उसका सिंहासन {1:1} मैं बूजी का पुत्र याजक यहेजकेल हूँ। मैं देश निष्कासित था। मैं उस समय बाबुल में कबार नदी पर था जब मेरे लिए स्वर्ग खुला और मैंने परमेश्वर का दर्शन किया। यह तीसवें वर्ष के चौथे महीने जुलाई का पाँचवां दिन था। (राजा यहोयाकीम के देश निष्कासन के पाँचवें वर्ष और महीने के पाँचवें दिन यहेजकेल को यहोवा का सन्देश मिला। उस स्थान पर उसके ऊपर यहोवा की शक्ति आई।) {1:2} -- {1:3} -- {1:4} मैंने (यहेजकेल) एक धूल भरी आंधी उत्तर से आती देखी। यह एक विशाल बादल था और उसमें से आग चमक रही थी। इसके चारों ओर प्रकाश जगमगा रहा था। यह आग में चमकते तप्त धातु सा दिखता था। {1:5} बादल के भीतर चार प्राणी थे। वे मनुष्यों की तरह दिखते थे। {1:6} किन्तु हर एक प्राणी के चार मुख और चार पंख थे। {1:7} उनके पैर सीधे थे। उनके पैर बछड़े के पैर जैसे दिखते थे और वे झलकाये हुए पीतल की तरह चमकते थे। {1:8} उनके पंखों के नीचे मानवी हाथ थे। वहाँ चार प्राणी थे और हर एक प्राणी के चार मुख और चार पंख थे। {1:9} उनके पंख एक दूसरे को छूते थे। जब वे चलते थे, मुड़ते नहीं थे। वे उसी दिशा में चलते थे जिसे देख रहे थे। {1:10} हर एक प्राणी के चार मुख थे। सामने की ओर उनका चेहरा मनुष्य का था। दायीं ओर सिंह का चेहरा था। बांयी ओर बैल का चेहरा था और पीछे की ओर उकाब का चेहरा था। {1:11} प्राणियों के पंख उनके ऊपर फैले हुये थे। वे दो पंखों से अपने पास के प्राणी के दो पंखों को स्पर्श किये थे तथा दो को अपने शरीर को ढकने के लिये उपयोग में लिया था। {1:12} वे प्राणी जब चलते थे तो मुड़ते नहीं थे। वे उसी दिशा में चलते थे जिसे वे देख रहे थे। वे वहीं जाते थे जहाँ आत्मा उन्हें ले जाती थी। {1:13} हर एक प्राणी इस प्रकार दिखता था। उन प्राणियों के बीच के स्थान में जलती हुई कोयले की आग सी दिख रही थी। यह आग छोटे — छोटे मशालों की तरह उन प्राणियों के बीच चल रही थी। आग बड़े प्रकाश के साथ चमक रही थी और बिजली की तरह कौंध रही थी! {1:14} वे प्राणी बिजली की तरह तेजी से पीछे को और आगे को दौड़ते थे! {1:15} जब मैंने प्राणियों को देखा तो चार चक्र देखे! हर एक प्राणी के लिये एक चक्र था। चक्र भूमि को छू रहे थे और एक {1:16} समान थे। चक्र ऐसे दिख रहे थे मानों पीली शुद्ध मणि के बने हों। वे ऐसे दिखते थे मानों एक चक्र के भीतर दूसरा चक्र हो। {1:17} वे चक्र किसी भी दिशा में घूम सकते थे। किन्तु वे प्राणी जब चलते थे तो घूम नहीं सकते थे। {1:18} उन चक्रों के घेरे ऊँचे और डरावने थे! उन चारों चक्रों के घेरे में आँखें ही आँखें थी। {1:19} चक्र सदा प्राणियों के साथ चलते थे। यदि प्राणी ऊपर हवा में जाते तो चक्र भी उनके साथ जाते। {1:20} वे वहीं जाते, जहाँ “आत्मा” उन्हें ले जाना चाहती और चक्र उनके साथ जाते थे। क्यों क्योंकि प्राणियों की “आत्मा” (शक्ति) चक्र में थी। {1:21} इसलिये यदि प्राणी चलते थे तो चक्र भी चलते थे। यदि प्राणी रूक जाते थे तो चक्र भी रूक जाते थे। यदि चक्र हवा में ऊपर जाते तो प्राणी उनके साथ जाते थे। क्यों क्योंकि आत्मा चक्र में थी। {1:22} प्राणियों के सिर के ऊपर एक आश्चर्यजनक चीज थी। यह एक उल्टे कटोरे की सी थी। कटोरा बर्फ की तरह स्वच्छ था! {1:23} इस कटोरे के नीचे हर एक प्राणी के सीधे पंख थे जो दूसरे प्राणी तक पहुँच रहे थे। दो पंख उसके शरीर के एक भाग को ढकते थे और अन्य दो दूसरे भाग को। {1:24} जब कभी वे प्राणी चलते थे, उनके पंख बड़ी तेज ध्वनि करते थे। वह ध्वनि समुद्र के गर्जन जैसी उत्पन्न होती थी। वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के समीप से निकलने के वाणी के समान थी। वह किसी सेना के जन — समूह के शोर की तरह थी। जब वे प्राणी चलना बन्द करते थे तो वे अपने पंखो को अपनी बगल में समेट लेते थे। {1:25} उन प्राणियों ने चलना बन्द किया और अपने पंखों को समेटा और वहाँ फिर भीषण आवाज हुआ। वह आवाज उस कटोरे से हुआ जो उनके सिर के ऊपर था। {1:26} उस कटोरे के ऊपर वहाँ कुछ था जो एक सिंहासन की तरह दिखता था। यह नीलमणि की तरह नीला था। वहाँ कोई था जो उस सिंहासन पर बैठा एक मनुष्य की तरह दिख रहा था! {1:27} मैंने उसे उसकी कमर से ऊपर देखा। वह तप्त — धातु कि तरह दिखा। उसके चारों ओर ज्वाला सी फूट रही थी! मैंने उसे उसकी कमर के नीचे देखा। यह आग की तरह दिखा जो उसके चारों ओर जगमगा रही थी। {1:28} उसके चारों ओर चमकता प्रकाश बादलों में मेघ धनुष सा था। यह यहोवा की महिमा सा दिख रहा था। जैसे ही मैने वह देखा, मैं धरती पर गिर गया। मैंने धरती पर अपना माथा टेका। तब मैंने एक आवाज सम्बोधित करते हुए सुनी। {2:1} उस वाणी ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, खड़े हो जाओ और मैं तुमसे वातें करूँगा।” {2:2} तब आत्मा मुझे मेरे पैरों पर सीधे खड़ा कर दिया और मैंने उस को सुना जो मुझसे बातें कर रहा था। {2:3} उसने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, मैं तुम्हें इस्राएल के परिवार से कुछ कहने के लिये भेज रहा हूँ।” वे लोग कई बार मेरे विरूद्ध हुए। उनके पूर्वज भी मेरे विरुद्ध हुए। उन्होंने मेरे विरुद्ध अनेक बार पाप किये और वे आज तक मेरे विरुद्ध अब भी पाप कर रहे हैं। {2:4} मैं तुम्हें उन लोगों से कुछ कहने के लिये भेज रहा हूँ। किन्तु वे बहुत हठी हैं। वे वड़े कठोर चित्त वाले हैं। किन्तु तुम्हें उन लोगों से बातें करनी हैं। तुम्हें कहना चाहिए, “हमारा स्वामी यहोवा ये बातें बताता है।” {2:5} किन्तु वे लोग तुम्हारी सुनेंगे नहीं। वे मेरे विरुद्ध पाप करना बन्द नहीं करेंगे। क्यों क्योंकि वे बहुत विद्रोही लोग हैं, वे सदा मेरे विरुद्ध हो जाते हैं! किन्तु तुम्हें वे बातें उनसे कहनी चाहिये जिससे वे समझ सकें कि उनके बीच में कोई नबी रह रहा है। {2:6} “मनुष्य के पुत्र उन लोगों से डरो नहीं। जो वे कहें उससे डरो मत। यह सत्य है कि वे तुम्हारे विरुद्ध हो जायेंगे और तुमको चोट पहुँचाना चाहेंगे। वे काँटे के समान होंगे। तुम ऐसा सोचोगे कि तुम बिच्छुओं के बीच रह रहे हो। किन्तु वे जो कुछ कहें उनसे डरो नहीं। वे विद्रोही लोग हैं। किन्तु उनसे डरो नहीं। {2:7} तुम्हें उनसे वे बातें कहनी चाहिए जो मैं कह रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि वे तुम्हारी नहीं सुनेंगे और वे मेरे विरुद्ध पाप करना बन्द नहीं करेंगे! क्यों क्योंकि वे विद्रोही लोग हैं। {2:8} “मनुष्य के पुत्र, तुम्हें उन बातों को सुनना चाहिये जिन्हें मैं तुमसे कहता हूँ। उन विद्रोही लोगों की तरह मेरे विरुद्ध न जाओ। अपना मुँह खोलो जो बात मैं तुमसे कहता हूँ, स्वीकार करो और उन वचनों को लोगों से कहो। इन वचनों को खा लो।” {2:9} तब मैंने (यहेजकेल) एक भुजा को अपनी ओर बढ़ते देखा। वह एक गोल किया हुआ लम्बा पत्र जिस पर वचन लिखे थे, पकड़े हुए थे। {2:10} मैंने उस गोल किये हुए पत्र को खोला और उस पर सामने और पीछे वचन लिखे थे। उसमें सभी प्रकार के करूण गीत, कथायें और चेतावनियाँ थीं। {3:1} परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, जो तुम देखते हो उसे खा जाओ। इस गोल किये पत्र कोखा जाओ और तब जाकर इस्राएल के लोगों से ये बाते कहो।” {3:2} इसलिये मैंने अपना मुँह खोला और उसने गोल किये पत्र को मेरे मुँह में रखा। {3:3} तब परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, मैं तुम्हें इस गोल किये पत्र को दे रहा हूँ। इसे निगल जाओ! इस गोल किये पत्र को अपने शरीर में भर जाने दो।” इसलिये मैं गोल किये पत्र को खा गया। यह मेरे मुँह में शहद की तरह मीठा था। {3:4} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के परिवार में जाओ। मेरे कहे हुए वचन उनसे कहो। {3:5} मैं तुम्हें किन्हीं विदेशियों में नहीं भेज रहा हूँ जिनकी बातें तुम समझ न सको। तुम्हें दूसरी भाषा सीखनी नहीं पड़ेगी। मैं तुम्हें इस्राएल के परिवार में भेज रहा हूँ। {3:6} मैं तुम्हें कोई भिन्न देशों में नहीं भेज रहा हूँ जहाँ लोग ऐसी भाषा बोलते हैं कि तुम समझ नहीं सकते। यदि तुम उन लोगों के पास जाओगे और उनसे बातें करोगे तो वे तुम्हारी सुनेंगे। किन्तु तुम्हें उन कठिन भाषाओं को नहीं समझना है। {3:7} नहीं! मैं तो तुम्हें इस्राएल के परिवार में भेज रहा हूँ। केवल वे लोग ही कठोर चित्त वाले हैं — वे बहुत ही हठी है और इस्राएल के लोग तुम्हारी सुनने से इन्कार कर देंगे। वे मेरी सुनना नहीं चाहते! {3:8} किन्तु मैं तुमको उतना ही हठी बनाऊँगा जितने वे हैं। तुम्हारा चित्त ठीक उतना ही कठोर होगा जितना उनका! {3:9} हीरा अग्नि — चट्टान से भी अधिक कठोर होता है। उसी प्रकार तुम्हारा चित्त उनके चित्त से अधिक कठोर होगा। तुम उनसे अधिक हठी होगे अत: तुम उन लोगों से नहीं डरोगे। तुम उन लोगों से नहीं डरोगे जो सदा मेरे विरुद्ध जाते हैं।” {3:10} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, तुम्हें मेरी हर एक बात, जो मैं तुमसे कहता हूँ, सुनना होगा और तुम्हें उन बातों को याद रखना होगा। {3:11} तब तुम अपने उन सभी लोगों के बीच जाओ जो देश — निष्कासित हैं। उनके पास जाओ और कहो, ‘हमारा स्वामी यहोवा ये बातें कहता है,’ वे मेरी नहीं सुनेंगे और वे पाप करना बन्द नहीं करेंगे। किन्तु तुम्हें ये बातें कहनी हैं।” {3:12} तब आत्मा ने मुझे ऊपर उठाया। तब मैंने अपने पीछे एक आवाज सुनी। यह बिजली की कड़क की तरह बहुत तेज थी। उसने कहा, “यहोवा की महिमा धन्य है!” {3:13} तब प्राणियों के पंख हिलने आरम्भ हुए। पंखों ने, जब एक दूसरे को छुआ, तो उन्होंने बड़ी तेज आवाज की और उनके सामने के चक्र बिजली की कड़क की तरह प्रचण्ड घोष करने लगे! {3:14} आत्मा ने मुझे उठाया और दूर ले गई। मैंने वह स्थान छोड़ा। मैं बहुत दुःखी था और मेरी आत्मा बहुत अशान्त थी किन्तु यहोवा की शक्ति मेरे भीतर बहुत प्रबल थी! {3:15} मैं इस्राएल के उन लोगों के पास गया जो तेलाबीब में रहने को विवश किये गए थे। ये लोग कबार नदी के सहारे रहते थे। मैंने वहाँ के निवासियों को अभिवादन किया। मैं वहाँ सात दिन ठहरा और उन्हें यहोवा की कही गई बातों को बताया। {3:16} सात दिन बाद यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, {3:17} “मनुष्य के पुत्र, मैं तुम्हें इस्राएल का सन्तरी बना रहा हूँ। मैं उन बुरी घटनाओं को बताऊँगा जो उनके साथ घटित होंगी और तुम्हें इस्राएल को उन घटनाओं के बारे में चेतावनी देनी चाहिए। {3:18} यदि मैं कहता हूँ, ‘यह बुरा व्यक्ति मरेगा!’ तो तुम्हें यह चेतावनी उने देनी चाहिए! तुम्हें उससे कहना चाहिए कि वह अपनी जिन्दगी बदले और बुरे काम करना बन्द करे। यदि तुम उस व्यक्ति को चेतावनी नहीं दोगे तो वह मर जायेगा। वह मरेगा क्योंकि उसने पाप किया। किन्तु मैं तुमको भी उसकी मृत्यु के लिये उत्तरदायी बनाऊँगा! क्यों क्योंकि तुम उसके पास नहीं गए और उसके जीवन को नहीं बचाया। {3:19} “यह हो सकता है कि तुम किसी व्यक्ति को चेतावनी दोगे, उसे उसके जीवन को बदलने के लिये समझाओगे और बुरा काम न करने को कहोगे। यदि वह व्यक्ति तुम्हारी अनसुनी करता है तो मर जायेगा। वह मरेगा क्योंकि उसने पाप किया था। किन्तु तुमने उसे चेतावनी दी, अत: तुमने अपना जीवन बचा लिया। {3:20} “या यह हो सकता है कि कोई अच्छा व्यक्ति अच्छा बने रहना छोड़ दे। मैं उसके सामने कुछ ऐसा लाकर रख दूँ कि वह उसका पतन (पाप) करे। वह बुरे काम करना आरम्भ करेगा। इसलिये वह मरेगा। वह मरेगा, क्योंकि वह पाप कर रहा है और तुमने उसे चेतावनी नहीं दी। मैं तुम्हें उसकी मृत्यु के लिये उत्तरदायी बनाऊँगा, और लोग उसके द्वारा किये गए सभी अच्छे कार्यों को याद नहीं करेंगे। {3:21} “किन्तु यदि तुम उस अच्छे व्यक्ति को चेतावनी देते हो और उससे पाप करना बन्द करने को कहते हो, और यदि वह पाप करना बन्द कर देता है, तब वह नहीं मरेगा। क्यों क्योंकि तुमने उसे चेतावनी दी और उसने तुम्हारी सुनी। इस प्रकार तुमने अपना जीवन बचाया।” {3:22} तब यहोवा की शक्ति मेरे ऊपर आई। उसने मुझसे कहा, “उठो, और घाटी में जाओ। मैं तुमसे उस स्थान पर बात करूँगा।” {3:23} इसलिये मैं खड़ा हुआ और बाहर घाटी में गया। यहोवा की महिमा वहाँ प्रकट हुआ ठीक वैसा ही, जैसा मैंने उसे कबार नदी के सहारे देखा था। इसलिए मैंने धरती पर अपना सिर झुकाया। {3:24} किन्तु “आत्मा” आयी और उसने मुझे उठाकर मेरे पैरों पर खड़ा कर दिया। उसने मुझसे कहा, “घर जाओ और अपने को अपने घर में ताले की भीतर बंद कर लो। {3:25} मनुष्य के पुत्र, लोग रस्सी के साथ आएंगे और तुमको बांध देंगे। वे तुमको लोगों के बीच बाहर जाने नहीं देंगे। {3:26} मैं तुम्हारी जीभ को तुम्हारे तालू से चिपका दूँगा, तुम बात करने योग्य नहीं रहोगे। इसलिये कोई भी व्यक्ति उन लोगों को ऐसा नहीं मिलेगा जो उन्हें शिक्षा दे सके कि वे पाप कर रहे हैं। क्यों क्योंकि वे लोग सदा मेरे विरुद्ध जा रहे हैं। {3:27} किन्तु मैं तुमसे बातचीत करूँगा तब मैं तुम्हें बोलने दूँगा। किन्तु तुम्हें उनसे कहना चाहिए, ‘हमारा स्वामी यहोवा ये बातें कहता है।’ यदि कोई व्यक्ति सुनना चाहता है तो यह बहुत अच्छा है। यदि कोई व्यक्ति इसे नहीं सुनना चाहता, तो न सुने। किन्तु वे लोग सदा मेरे विरुद्ध जाते रहे। {4:1} “मनुष्य के पुत्र, एक ईंट लो। इस पर एक चित्र खींचो। एक नगर का, अर्थात यरूशलेम का एक चित्र बनाओ। {4:2} और तब उस प्रकार कार्य करो मानो तुम उस नगर का घेरा डाले हुए सेना हो। नगर के चारों ओर एक मिट्टी की दीवार इस पर आक्रमण करने में सहायता के लिये बनाओ। नगर की दीवार तक पहुँचने वाली एक कच्ची सड़क बनाओ। तोड़ फोड़ करने वाले लट्ठे लाओ और नगर के चारों ओर सैनिक डेरे खड़े करो {4:3} और तब तुम एक लोहे की कड़ाही लो और इसे अपने और नगर के बीच रखो। यह एक लोहे की दीवार की तरह होगी, जो तुम्हें और नगर को अलग करेगी। इस प्रकार तुम यह प्रदर्शित करोगे कि तुम उस नगर के विरुद्ध हो। तुम उस नगर को घेरोगे और उस पर आक्रमण करोगे। क्यों क्योंकि यह इस्राएल के परिवार के लिये एक उदाहरण होगा। यह प्रदर्शित करेगा कि मैं (परमेश्वर) यरूशलेम को नष्ट करुँगा। {4:4} “तब तुम्हें अपने बायीं करवट लेटना चाहिए। तुम्हें वह करना चाहिए जो प्रदर्शित करे कि तुम इस्राएल के लोगों के पापों को अपने ऊपर ले रहे हो। तुम उस पाप को उतने ही दिनों तक ढोओगे जितने दिन तक तुम अपनी बायीं करवट लेटोगे। {4:5} तुम इस तरह इस्राएल के पाप को तीन सौ नब्बे दिनो तक सहोगे। इस प्रकार मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि इस्राएल, एक दिन एक वर्ष के बराबर के, कितने लम्बे समय तक दण्डित होगा।” {4:6} “उस समय के बाद तुम अपनी दायीं करवट चालीस दिन तक लेटोगे। इस समय यहूदा के पापों को चालीस दिन तक सहन करोगे। एक दिन एक वर्ष का होगा। मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि यहूदा कितने लम्बे समय के लिये दण्डित होगा।” {4:7} परमेश्वर फिर बोला। उसने कहा, “अब, अपनी आस्तीनों को मोड़ लो और अपने हाथों को ईंट के ऊपर उठाओ। ऐसा दिखाओ मानो तुम यरूशलेम नगर पर आक्रमण कर रहे हो। इसे यह दिखाने के लिये करो कि तुम मेरे नबी के रूप में लोगों से बातें कर रहे हो। {4:8} इस पर ध्यान रखो, मैं तुम्हें रस्सियों से बाँध रहा हूँ। तुम तब तक बगल से दूसरी बगल करवट नहीं ले सकते जब तक तुम्हारा नगर पर आक्रमण समाप्त नहीं होता।” {4:9} परमेश्वर ने यह भी कहा, “तुम्हें होटी बनाने के लिये कुछ अन्न लाना चाहिए। कुछ गेहूँ, जौ, सेम, मसूर, तिल, बाजरा और कठिया गेहूँ लाओ। इस सभी को एक कटोरे में मिलाओ और उन्हें पीसकर आटा बनाओ। तुम्हें इस आटे का उपयोग रोटी बनाने के लिये करना होगा। तुम केवल इसी रोटी को तीन सौ नब्बे दिनों तक अपनी बगल के सहारे लेटे हुये खाओगे। {4:10} तुम्हें केवल एक प्याला वह आटा रोटी बनाने के लिये प्रतिदिन उपयोग करना होगा। तुम उस रोटी को पूरे दिन में समय समय पर खाओगे। {4:11} और तुम केवल तीन प्याले पानी प्रतिदिन पी सकते हो। {4:12} तुम्हें प्रतिदिन अपनी रोटी बनानी चाहिए। तुम्हें आदमी का सूखा मल लाकर उसे जलाना चाहिए। तब तुम्हें उस जलते मल पर अपनी रोटी पकानी चाहिए। तुम्हें इस रोटी को लोगों के सामने खाना चाहिए।” {4:13} तब यहोवा ने कहा, “यह प्रदर्शित करेगा कि इस्राएल का परिवार विदेशों में अपवित्र रोटियाँ खाएगा और मैंने उन्हें इस्राएल को छोड़ने और उन देशों में जाने को विवश किया था!” {4:14} तब मैंने (यहेजकेल) आश्चर्य से कहा, “किन्तु मेरे स्वामी यहोवा, मैंने अपवित्र भोजन कभी नहीं खाया। मैंने कभी उस जानवर का माँस नहीं खाया, जो किसी रोग से मरा हो या जिसे जंगली जानवर ने मार डाला हो। मैंने बाल्यावस्था से लेकर अब तक कभी अपवित्र माँस नहीं खाया है। मेरे मुँह में कोई भी वैसा बुरा माँस कभी नहीं गया है।” {4:15} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “ठीक है! मैं तुम्हें रोटी पकाने के लिये गाय का सूखा गोबर उपयोग में लाने दूँगा। तुम्हें आदमी के सूखे मल का उपयोग नहीं करना होगा।” {4:16} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, मैं यरूशलेम की रोटी की आपूर्ति को नष्ट कर रहा हूँ। लोगों के पास खाने के लिये रोटियाँ नहीं के बराबर होंगी। वे अपनी भोजन — आपूर्ति के लिये बहुत परेशान होंगे और उनके लिये पीने का पानी नहीं के बराबर है। वे उस पानी को पीते समय बहुत भयभीत रहेंगे। {4:17} क्यों क्योंकि लोगों के लिये पर्याप्त भोजन और पानी नहीं होगा। लोग एक दूसरे को देखकर भयभीत होंगे क्योंकि वे अपने पापों के कारण एक दूसरे को नष्ट होता हुआ देखेंगे।” {5:1} “मनुष्य के पुत्र अपने उपवास के समय के बाद तुम्हें ये काम करने चाहिए। तुम्हें एक तेज तलवार लेनी चाहिए। उस तलवार का उपयोग नाई के उस्तरे की तरह करो। तुम अपने बाल और दाढ़ी उससे काट लो। बालों को तराजू में रखो और तौलो। अपने बालों को तीन बराबर भागों में बाँटों। अपने बालों का एक तिहाई भाग उस ईंट पर रखो जिस पर नगर का चित्र बना है। उस नगर में उन बालों को जलाओ। यह प्रदर्शित करता है कि कुछ लोग नगर के अन्दर मरेंगे। तब तलवार का उपयोग करो और अपने बालों के एक तिहाई को छोटे — छोटे टुकड़ों में काट डालो। उन बालों को उस नगर (ईंट) के चारों ओर रखो। यह प्रदर्शित करेगा कि कुछ लोग नगर के बाहर मरेंगे। तब अपने बालों के एक तिहाई को हवा में उड़ा दो। इन्हें हवा को दूर उड़ा ले जाने दो। यह प्रदर्शित करेगा कि मैं अपनी तलवार निकालूँगा और कुछ लोगों का पीछा करके उन्हें दूर देशों में भगा दूँगा। {5:2} -- {5:3} किन्तु तब तुम्हें जाना चाहिए और उन बालों में से कुछ को लाना चाहिए। उन बालों को लाओ, उन्हें ढको और उनकी रक्षा करो। यह प्रदर्शित करेगा कि मैं अपने लोगों में से कुछ को बचाऊँगा {5:4} और तब उन उड़े हुए बालों में से कुछ और अधिक बालों को लाओ। उन बालों को आग में फेंक दो। यह प्रदर्शित करता है कि आग वहाँ शुरु होगी और इस्राएल के पूरे खानदानको जलाकर नष्ट कर देगी।” {5:5} तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “वह ईंट यरूशलेम है, मैंने इस यरूशलेम नगर को अन्य राष्ट्रों के बीच रखा है, इस समय इस्राएल के चारों ओर अन्य देश हैं। {5:6} यरूशलेम के लोगों ने मेरे आदेशों के प्रति विद्रोह किया। वे अन्य किसी भी राष्ट्र से अधिक बुरे थे! उन्होंने मेरे नियमों को उससे भी अधिक तोड़ा जितना उनके चारों ओर के किसी भी देश के लोगों ने तोड़ा। उन्होंने मेरे आदेशों को सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने मेरी व्यवस्था का पालन नहीं किया!” {5:7} इसलिये मेरे स्वामी यहोवा, ने कहा, “मैं तुम लोगों पर भयंकर विपत्ति लाऊँगा। क्यों क्योंकि तुमने मेरे आदेशों का पालन नहीं किया। तुम लोगों ने मेरे नियमों को अपने चारों ओर रहने वाले लोगों से भी अधिक तोड़ा! तुम लोगों ने वे काम भी किये जिन्हें वे लोग भी गलत कहते हैं!” {5:8} इसलिये मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “इसलिये मैं भी तुम्हारे विरुद्ध हूँ, मैं तुम्हें इस प्रकार दण्ड दूँगा जिससे दूसरे लोग भी देख सकें। {5:9} मैं तुम लोगों के साथ वह करुँगा जिसे मैंने पहले कभी नहीं किया। मैं उन भयानक कामों को फिर कभी नहीं करुँगा। क्यों क्योंकि तुमने इतने अधिक भयंकर काम किये। {5:10} यरूशलेम में लोग भूख से इतने तड़पेंगे कि माता — पिता अपने बच्चों को खा जाएंगें और बच्चे अपने माता — पिता को खा जाएंगे। मैं तुम्हें कई प्रकार से दण्ड दूँगा और जो लोग जीवित बचे हैं, उन्हें मैं हवा में बिखेर दूँगा।” {5:11} मेरे स्वामी यहोवा कहता है, “यरूशलेम, मैं अपने जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हें दण्ड दूँगा! मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। क्यों क्योंकि तुमने मेरे ‘पवित्र स्थान’ के विरुद्ध भयंकर पाप किया! तुमने वे भयानक काम किये जिन्होंने इसे गन्दा बना दिया! मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम पर दया नहीं करुँगा! मैं तुम्हारे लिए दुःख का अनुभव नहीं करुँगा! {5:12} तुम्हारे एक तिहाई लोग नगर के भीतर रोग और भूख से मरेंगे। तुम्हारे एक तिहाई लोग युद्ध में नगर के बाहर मरेंगे और तुम्हारे लोगों के एक तिहाई को मैं अपनी तलवार निकाल कर उन का पीछा कर के उन्हें दूर देशों में खदेड़ दूँगा। {5:13} केवल तब मैं तुम्हारे लोगो पर क्रोधित होना बन्द करुँगा। मैं समझ लूँगा कि वे उन बुरे कामों के लिए दण्डित हुए हैं जो उन्होंने मेरे साथ किये थे और वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ और मैंने उनसे बातें उनके प्रति गहरा प्रेम होने के कारण की!” {5:14} परमेश्वर ने कहा, “यरूशलेम मैं तुझे नष्ट करूँगा तुम पत्थरों के ढेर के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं रह जाओगे। तुम्हारे चारों ओर के लोग तुम्हारी हँसी उड़ाएंगे। हर एक व्यक्ति जो तुम्हारे पास से गुजरेगा, तुम्हारी हँसी उड़ाएगा। {5:15} तुम्हारे चारों ओर के लोग तुम्हारी हँसी उड़ाएंगे, किन्तु उनके लिए तुम एक सबक भी बनोगे। वे देखेंगे कि मैं क्रोधित था और मैंने तुमको दण्ड दिया। मैं बहुत क्रोधित था। मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी। मुझ, यहोवा ने तुमसे कहा था कि मैं क्या करूँगा! {5:16} मैंने कहा था कि मैं तुम्हारे पास भयंकर भुखमरी का समय भेजूँगा। मैंने तुमसे कहा था, मैं उन चीजों को भेजूँगा जो तुमको नष्ट करेंगी और तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारी भोजन की आपूर्ति छीन लूँगा, और वह भूखमरी का वह समय बार — बार आया। {5:17} मैंने तुमसे कहा था कि मैं तुझ पर भूख तथा जंगली पशु भेजूँगा, जो तुम्हारे बच्चों को मार डालेंगे। मैंने तुमसे कहा था कि पूरे नगर में रोग और मृत्यु का राज्य होगा और मैं उन शत्रु — सैनिकों को तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये लाऊँगा। मुझ यहोवा ने यह कहा था, ये सभी बातें घटित होंगी और सभी घटित हुई!” {6:1} तब यहोवा का वचन मेरे पास फिर आया। {6:2} उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र इस्राएल के पर्वतों की ओर मुड़ो। उनके विरुद्ध मेरे पक्ष में कहो। {6:3} उन पर्वतों से यह कहो: ‘इस्राएल के पर्वतों, मेरे स्वामी यहोवा की ओर से यह सन्देश सुनो! मेरे स्वामी यहोवा पहाड़ियों, पर्वतों, घाटियों और खार — खड्डों से यह कहता है। ध्यान दो! मैं (परमेश्वर) शत्रु को तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये ला रहा हूँ। मैं तुम्हारे उच्च — स्थानों को नष्ट कर दूँगा। {6:4} तुम्हारी वेदियों को तोड़ कर टुकड़े — टुकड़े कर दिया जायेगा। तुम्हारी सुगन्धि चढ़ाने की वेदियाँ ध्वस्त कर दी जाएंगी! और मैं तुम्हारे शवों को तुम्हारी गन्दी मूर्तियों के सामने फेकूँगा। {6:5} मैं इस्राएल के लोगों के शवों को उनके देवताओं की गन्दी मूर्तियों के सामने फेंकूँगा। मैं तुम्हारी हड्डियों को तुम्हारी वेदियों के चारों ओर बिखेरूँगा। {6:6} जहाँ कहीं तुम्हारे लोग रहेंगे उन पर विपत्तियाँ आएंगी। उनके नगर पत्थरों के ढेर बनेंगे। उनके उच्च स्थान नष्ट किये जाएंगे। क्यों इसलिये कि उन पूजा स्थानों का उपयोग दुबारा न हो सके। वे सभी वेदियाँ नष्ट कर दी जायेंगी। लोग फिर कभी उन गन्दी मूर्तियों को नहीं पूजेंगे। उन सुगन्धि — वेदियों को ध्वस्त किया जाएगा। जो चीजें तुम बनाते हो वे पूरी तरह नष्ट की जाएंगी। {6:7} तुम्हारे लोग मारे जाएंगे और तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ!’” {6:8} परमेश्वर ने कहा, “किन्तु मैं तुम्हारे कुछ लोगों को बच निकलने दूँगा। वे थोड़े समय तक विदेशों में रहेंगे। मैं उन्हें बिखेरूँगा और अन्य देशों में रहने के लिये विवश करूँगा। {6:9} तब वे बचे हुए लोग बन्दी बनाए जाएंगे। वे विदेशों में रहने को विवश किये जाएंगे। किन्तु वे बचे हुए लोग मुझे याद रखेंगे। मैंने उनकी आत्मा (हृदय) को खण्डित किया। जिन पापों को उन्होंने किया, उसके लिये वे स्वयं ही घृणा करेंगे। बीते समय में वे मुझसे विमुख हुए थे और दूर हो गए थे। वे अपनी गन्दी मूर्तियों के पीछे लगे हुए थे। वे उस स्त्री के समान थे जो अपने पति को छोड़कर, किसी दूसरे पुरुष के पीछे दौड़ने लगी। उन्होंने बड़े भयंकर पाप किये। {6:10} किन्तु वे समझ जाएंगे कि मैं यहोवा हूँ और वे यह जानेंगे कि यदि मैं कुछ करने के लिये कहूँगा तो मैं उसे करुँगा। वे समझ जायेंगे कि वे सब विपत्तियाँ जो उन पर आई हैं, मैंने डाली हैं।” {6:11} तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “हाथों से ताली बजाओं और अपने पैर पीटो। उन सभी भयंकर चीजों के विरुद्ध कहो जिन्हें इस्राएल के लोगों ने किया है। उन्हें चेतावनी दो कि वे रोग और भूख से मारे जाएंगे। उन्हें बताओ कि वे युद्ध में मारे जाएंगे। {6:12} दूर के लोग रोग से मरेंगे। समीप के लोग तलवार से मारे जाएंगे। जो लोग नगर में बचे रहेंगे, वे भूख से मरेंगे। मैं तभी क्रोध करना छोड़ूँगा, {6:13} और केवल तभी तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। तुम यह तब समझोगे जब तुम अपने शवों को गन्दी मूर्तियों के सामने और वेदियों के चारों ओर देखोगे। तुम्हारे पूजा के उन हर स्थानों के निकट, हर एक ऊँची पहाड़ी, पर्वत तथा हर एक हरे वृक्ष और पत्ते वाले हर एक बांज वृक्ष के नीचे, वे शव होंगे। उन सभी स्थानों पर तुमने अपनी बलि — भेंट की है। वे तुम्हारी गन्दी मूर्तियों के लिए मधुर गन्ध थी। {6:14} किन्तु मैं अपना हाथ तुम लोगों पर उठाऊँगा और तुम्हें और तुम्हारे लोगों को जहाँ कही वे रहे, दण्ड दूँगा! मैं तुम्हारे देश को नष्ट करूँगा! यह दिबला मरूभूमि से भी अधिक सूनी होगी। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!” {7:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। {7:2} उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, अब मेरे स्वामी यहोवा का यह सन्देश है। यह सन्देश इस्राएल देश के लिये है: “अन्त! अन्त आ गया है। पूरा देश नष्ट हो जायेगा। {7:3} अब तुम्हारा अन्त आ गया है! मैं दिखाऊँगा कि मैं तुम पर कितना क्रोधित हूँ। मैं तुम्हें उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये। जो भयंकर काम तुमने किये उनके लिए मैं तुमसे भुगतान कराऊँगा। {7:4} मैं तुम्हारे ऊपर तनिक भी दया नहीं करूँगा। मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा। मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ। तुमने भयानक काम किये हैं। अब तुम समझ जाओगे कि मैं यहोवा हूँ।” {7:5} मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। “एक के बाद एक विपत्तियाँ आयेंगी! {7:6} अन्त आ रहा है और यह बहुत जल्दी आयेगा! {7:7} इस्राएल के तुम लोगों, क्या तुमने सीटी सुनी है शत्रु आ रहा है। वह दण्ड का समय शीघ्र आ रहा है! शत्रुओं का शोरगुल पर्वतों पर अधिकाधिक बढ़ता जा रहा है। {7:8} मैं शीघ्र ही दिखा दूँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। मैं तुम्हारे विरुद्ध अपने पूरे क्रोध को प्रकट करुँगा। मैं उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये। मैं उन सभी भयानक कामों के लिये तुमसे भुगतान कराऊँगा जो तुमने किये। {7:9} मैं तुम पर तनिक भी दया नहीं करूँगा मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा। मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ। तुमने जो भयानक काम किये है, अब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और मैं दण्ड भी देता हूँ। {7:10} “दण्ड का वह समय आ गया। क्या तुम सीटी सुन रहे हो परमेश्वर ने संकेत दिया है। दण्ड आरम्भ हो रहा है। डाली अंकुरित होने लगी है। घमण्डी राजा (नबूकदनेस्सर) पहले से अधिक शक्तिशाली होता जा रहा था। {7:11} वह हिसंक व्यक्ति उन बुरे लोगों को दण्ड देने के लिये तैयार है। इस्राएल में लोगों की संख्या बहुत है, किन्तु वह उनमें से नहीं है। वह उस भीड़ का व्यक्ति नहीं है। वह उन लोगों में से कोई महत्वपूर्ण प्रमुख नहीं है। {7:12} “वह दण्ड का समय आ गया है। वह दिन आ पहुँचा। जो लोग चीजें खरीदते हैं, प्रसन्न नहीं होंगे और जो लोग चीजें बेचते हैं, वे उन्हें बेचने में बुरा नहीं मानेंगे। क्यों क्योंकि वह भयंकर दण्ड हर एक व्यक्ति के लिये होगा। {7:13} जो लोग अपनी स्थायी सम्पत्ति बेचेंगे वे उसे कभी नहीं पाएंगे। यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बचा रहेगा तो भी वह अपनी स्थायी सम्पत्ति वापस नहीं पा सकता। क्यों क्योंकि यह दर्शन लोगों के पूरे समूह के लिये है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बच निकलता है, तो भी लोग इससे अधिक संतुष्ट नहीं होंगे। {7:14} “वे लोगों को चेतावनी देने के लिये तुरही बजाएंगे। लोग युद्ध के लिये तैयार होंगे। किन्तु वे युद्ध करने के लिये नहीं निकलेंगे। क्यों क्योंकि मैं पूरे जन — समूह को दिखाऊँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। {7:15} तलवार लिये हुए शत्रु नगर के बाहर हैं। रोग और भूख नगर के भीतर हैं। यदि कोई युद्ध के मैदान में जाएगा तो शत्रु के सैनिक उसे मार डालेंगे। यदि वह नगर में रहता हैं तो भूख और रोग उसे नष्ट करेंगे। {7:16} “किन्तु कुछ लोग बच निकलेंगे। वे बचे लोग भाग कर पहाड़ों में चल जाएंगे। किन्तु वे लोग सुखी नहीं होंगे। वे अपने पापों के कारण दुःखी होंगे। वे चिल्लायेंगे और कबूतरों की तरह दुःख — भरी आवाज़ निकालेंगे। {7:17} लोग इतने थके और खिन्न होंगे कि बाहें भी नहीं उठा पाएंगे। उनके पैर पानी की तरह ढीले होंगे। {7:18} वे शोक — वस्त्र पहनेंगे और भयभीत रहेंगे। तुम हर मुख पर ग्लानि पाओगे। वे (शोक प्रदर्शन के लिये) अपने बाल मुड़वा लेंगे। {7:19} वे अपनी चाँदी की देव मूर्तियों को सड़कों पर फेक देंगे। वे अपने सोने की देवमूर्तियों को गन्दे चीथड़ो की तरह समझेंगे! क्यों क्योंकि जब यहोवा ने अपना क्रोध प्रकट किया वे मूर्तियाँ उन्हें बचा न सकीं। वे मूर्तियाँ लोगों के लिए पतन (पाप) के जाल के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं थी। वे मूर्तियाँ लोगों को भोजन नहीं देंगी वे मूर्तियाँ उनके पेट में अन्न नहीं पहुँचायेंगी। {7:20} “उन लोगों ने अपने सुन्दर आभूषण का उपयोग किया और मूर्ति बनाई। उन्हें अपनी मूर्ति पर गर्व था। उन्होंने अपनी भयानक मूर्तियाँ बनाई। उन लोगों ने उन गन्दी चीजों को बनाया। इसलिये मैं (परमेश्वर) उन्हें गन्दें चिथड़े की तरह फेंक दूँगा। {7:21} मैं उन्हें अजनबियों को लेने दूँगा। वे अजनबी उनका मजाक उड़ाएंगे। वे अजनबी, उन लोगों में से कुछ को मारेंगे और कुछ को बन्दी बनाकर ले जाएंगे। {7:22} मैं उनसे अपना मुँह फेर लूँगा, मैं उनकी ओर नहीं देखूँगा। वे अजनबी मेरे मन्दिर को नष्ट करेंगे, वे उस पवित्र भवन के गोपनीय भागों में जाएंगे और उसे अपवित्र करेंगे। {7:23} “बन्दियों के लिये जंजीरें बनाओ! क्यों क्योंकि बहुत से लोग दूसरे लोगों को मारने के कारण दण्डित होंगे। नगर के हर स्थान पर हिंसा भड़केगी। {7:24} मैं अन्य राष्ट्रों से बुरे लोगों को लाऊँगा और वे लोग इस्राएल के लोगों के सभी घरों को ले लेंगे। मैं तुम शक्तिशाली लोगों को गर्वीला होने से रोक दूँगा। दूसरे राष्ट्रों के वे लोग तुम्हारे पूजा — स्थानों को ले लेंगे। {7:25} “तुम लोग भय से काँप उठोगे। तुम लोग शान्ति चाहोगे, किन्तु शान्ति नहीं मिलेगी। {7:26} तुम एक के बाद दूसरी दःख — कथा सुनोगे। तुम बुरी खबरों के अलावा कुछ नहीं सुनोगे। तुम नबी की खोज करोगे और उससे दर्शन पूछोगे। किन्तु कोई मिलेगा नहीं। याजक के पास तुम्हें शिक्षा देने को कुछ भी नहीं होगा और अग्रजों (प्रमुखों) के पास तुम्हें देने को कोई अच्छी सलाह नहीं होगी। {7:27} तुम्हारा राजा उन लोगों के लिये रोएगा, जो मर गए। प्रमुख शोक — वस्त्र पहनेंगे। साधारण लोग बहुत डर जाएंगे। क्यों क्योंकि मैं उसका बदला दूँगा जो उन्होंने किया। मैं उनका दण्ड निश्चित करूँगा। और मैं उन्हें दण्ड दूँगा। तब वे लोग समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {8:1} एक दिन मैं (यहेजकेल) अपने घर में बैठा था और यहूदा के अग्रज (प्रमुख) वहाँ मेरे सामने बैठे थे। यह देश — निकाले के छठे वर्ष के छठे महीने (सितम्बर) के पाँचवें दिन हुआ। अचानक मेरे स्वामी यहोवा की शक्ति मुझमें उतरी। {8:2} मैंने कुछ देखा जो आग की तरह था। यह एक मनुष्य शरीर जैसा दिखाई पड़ता था। कमर से नीचे वह आग — सा था। कमर से ऊपर वह आग में तप्त — धातु की तरह चमकीला और कान्तिवाला था। {8:3} तब मैंने कुछ ऐसा देखा जो बाहु की तरह था। वह बाहु बाहर बढ़ी और उसने मेरे सिर के बालों से मुझे पकड़ लिया। तब आत्मा ने मुझे हवा में उठा लिया और परमेश्वर के दर्शन में वह मुझे यरूशलेम को ले गई। वह मुझे उत्तर की ओर के भीतर फाटक पर ले गई। वह देवमूर्ति, जिससे परमेश्वर को ईर्ष्या होती है, उस फाटक के सहारे है। {8:4} किन्तु इस्राएल के परमेश्वर का तेज वहाँ था। वह तेज वैसा ही दिखता था जैसा दर्शन मैंने घाटी के किनारे कबार नहर के पास देखा था। {8:5} परमेश्वर ने मुझसे कहा। उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, उत्तर की ओर देखो!” इसलिये मैंने उत्तर की ओर देखा। और वहाँ प्रवेश मार्ग के सहारे वेदी — द्वार के उत्तर में वह देवमूर्ति थी जिसके प्रति परमेश्वर की ईर्ष्या होती थी। {8:6} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के लोग कैसा भयंकर काम कर रहे हैं यहाँ उन्होंने उस चीज को मेरे मन्दिर के ठीक बगल में बनाया है। यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम और भी अधिक भयंकर चीजें देखोगे!” {8:7} इसलिये मैं आंगन के प्रवेश — द्वार पर गया और मैंने दीवार में एक छेद देखा। {8:8} परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र! उस दीवार के छेद में से घुसो।” इसलिये मैं दीवार के उस छेद में से होकर गया और वहाँ मैंने एक दरवाजा देखा। {8:9} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “अन्दर जाओ, और उन भयानक दुष्ट चीजों को देखो जिन्हें लोग यहाँ कर रहे हैं।” {8:10} इसलिये मैं अन्दर गया और मैंने देखा। मैंने हर एक प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु और जानवरों की देवमूर्तियों को देखा जिनके बारे में सोचने से तुम्हें घृणा होती है। वे देवमूर्तियाँ गन्दी मूर्तियाँ थीं जिन्हें इस्राएल के लोग पूजते थे। वहाँ उन जानवरों के चित्र हर दीवार पर चारों ओर खुदे हुए थे! {8:11} तब मैंने इस पर ध्यान दिया कि शापान का पुत्र याजन्याह और इस्राएल के सत्तर अग्रज (प्रमुख) उस स्थान पर पूजा करने वालों के साथ थे। वहाँ पर वे, लोगों के ठीक सामने थे, और हर एक प्रभुख के हाथ में अपनी सुगन्धि का थाल था। जलती सुगन्धि का धुँआ हवा में उठ रहा था। {8:12} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के प्रमुख अंधेरे में क्या करते हैं हर एक व्यक्ति के पास अपने असत्य देवता के लिये एक विशेष कमरा है! वे लोग आपस में बातें करते हैं, ‘यहोवा हमें देख नहीं सकता। यहोवा ने इस देश को छोड़ दिया है।’” {8:13} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम उन लोगों को और भी अधिक भयानक काम करते देखोगे!” {8:14} तब वह मुझे यहोवा के मन्दिर के प्रवेशद्वार पर ले गया। यह द्वार उत्तर की ओर था। वहाँ मैंने स्त्रियों को बैठे और रोते देखा। वे असत्य देवता तम्मूज के विषय में शोक मना रहीं थीं! {8:15} परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इन भयंकर चीजों को देखते हो मेरे साथ आओ और तुम इनसे भी बुरे काम देखोगे!” {8:16} तब वह मुझे मन्दिर के भीतरी आँगन में ले गया। उस स्थान पर मैंने पच्चीस व्यक्तियों को नीचे झुके हुए और पूजा करते देखा। वे बरामदे और वेदी के बीच थे, किन्तु वे गलत दिशा में मुँह किये खड़े थे! उनकी पीठ पवित्र स्थान की ओर थी! वे सूर्य की पूजा करने के लिये नीचे झुके थे! {8:17} तब परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इसे देखते हो यहूदा के लोग मेरे मन्दिर को इतना महत्वहीन समझते हैं कि वे मेरे मन्दिर में यह भयंकर काम करते हैं। यह देश हिंसा से भरा हुआ है। वे लगातार मुझको पागल करने वाला काम करते हैं! देखो, उन्होंने अपने नाकों में असत्य देवता की तरह चन्द्रमा का सम्मान करने के लिये बालियाँ पहन रखी हैं। {8:18} मैं उन पर अपना क्रोध प्रकट करूँगा। मैं उन पर कोई दया नहीं करूँगा। मैं उनके लिये दुःख का अनुभव नहीं करूँगा। वे मुझे जोर से पुकारेंगे, किन्तु मैं उनको सुनने से इन्कार कर दूँगा!” {9:1} तब परमेश्वर ने नगर को दण्ड देने के लिये उत्तरदायी प्रमुखों को जोर से पुकारा। हर एक प्रमुख के हाथ में उसका अपना विध्वंसक शस्त्र था। {9:2} तब मैंने ऊपरी द्वार से छ: व्यक्तियों को सड़क पर आते देखा। यह द्वार उत्तर की ओर है। हर एक व्यक्ति अपने घातक शस्त्र को अपने हाथ में लिये था। उन व्यक्तियों में से एक ने सूती वस्त्र पहन रखा था। उसके पास कमर में लिपिक की एक कलम और स्याही थी। वे लोग मन्दिर से काँसे की वेदी के पास गए और वहाँ खड़े हुए। {9:3} तब इस्राएल के परमेश्वर का तेज करुब (स्वर्गदूतों) के ऊपर से, जहाँ वह था, उठा। तब वह तेज मन्दिर के द्वार पर गया। जब वह डयोढ़ी पर पहुँचा तो वह रूक गया। तब उस तेज ने उस व्यक्ति को बुलाया जो सूती वस्त्र, कलम और स्याही धारण किये हुए था। {9:4} तब यहोवा ने उससे कहा, “यरूशलेम नगर से होकर निकलो। जो लोग उस नगर में लोगों द्वारा की गई भयंकर चीजों के विषय में दुःखी हैं और घबरायें हुए हैं, उन हर एक के ललाट पर एक चिन्ह अंकित करो।” {9:5} तब मैंने परमेश्वर को अन्य लोगों से कहते सुना, “मैं चाहता हूँ कि तुम लोग प्रथम व्यक्ति का अनुसरण करो। तुन उन सभी व्यक्तियों को मार डालो। जिनके ललाट पर चिन्ह नहीं है। तुम इस पर ध्यान नहीं देना कि वे अग्रज (प्रमुख) युवक, युवतियाँ, बच्चे, या मातायें {9:6} हैं। तुम्हें अपने शस्त्रों का उपयोग करना है, उन हर एक को मार डालना है जिनके ललाट पर चिन्ह नहीं है। कोई दया न दिखाओ। किसी व्यक्ति के लिये अफसोस न करो। यहाँ मेरे मन्दिर से आरम्भ करो।” इसलिये उन्होंने मन्दिर के सामने के अग्रजों (प्रमुखों) से आरम्भ किया। {9:7} परमेश्वर ने उनसे कहा, “इस स्थान को अपवित्र बना दो! इस आंगन को शवों से भर दो!” इसलिये वे गए और उन्होंने नगर में लोगों को मार डाला। {9:8} जब वे लोग, लोगों को मारने गए, तो मैं वहीं रूका रहा। मैंने भूमि पर अपना माथा टेकते हुए कहा, “हे मेरे स्वामी यहोवा, यरूशलेम के विरुद्ध अपना क्रोध प्रकट करने के लिये, क्या तू इस्राएल में बचे हुये सभी लोगों को मार रहा है” {9:9} परमेश्वर ने कहा, “इस्राएल और यहूदा के परिवार ने अत्याधिक बुरे पाप किये हैं। इस देश में सर्वत्र लोगों की हत्यायें हो रही हैं और यह नगर अपराध से भरा पड़ा है। क्यों क्योंकि लोग स्वयं कहते हैं, ‘यहोवा ने इस देश को छोड़ दिया। वे उन कामों को नहीं देख सकता जिन्हें हम कर रहे हैं।’ {9:10} और मैं दया नहीं दिखाऊँगा। मैं उन लोगों के लिये अफसोस अनुभव नहीं करूँगा। उन्होंने स्वयं इसे बुलाया है, मैं इन लोगों को केवल दण्ड दे रहा हूँ जिसके ये पात्र हैं!” {9:11} तब सूती वस्त्र, लिपिक की कलम और स्याही धारण करने वाला व्यक्ति बोला। उसने कहा, “मैंने वह कर दिया जो तेरा आदेश था।” {10:1} तब मैंने उस कटोरे को देखा जो करुब (स्वर्गदूत) के सिरों के ऊपर था। कटोरा नीलमणि की तरह स्वच्छ नीला दिख रहा था। वहाँ कटोरे के ऊपर कुछ सिंहासन की तरह दिख रहा था। {10:2} तब उस व्यक्ति ने जो सिंहासन पर बैठा था, सन के वस्त्र पहने हुए व्यक्ति से कहा, “तुफानी — बादल में आओ। करुब (स्वर्गदूत) के क्षेत्र में आओ। करुब (स्वर्गदूतों) के बीच से कुछ अंगारे अपने हाथ में लो। अपने हाथ में उन कोयलों को ले जाओ और जाकर उन्हें यरूशलेम नगर पर फेंक दो।” वह व्यक्ति मेरे पीछे चला। {10:3} करुब (स्वर्गदूत) उस समय मन्दिर के दक्षिण के क्षेत्र में खड़े थे, जब वह व्यक्ति बादल में घुसा। बादल भीतरी आँगन में भर गया। {10:4} तब यहोवा का तेज करुब (स्वर्गदूत) से अलग होकर मन्दिर के द्वार पर चला गया। तब बादल मन्दिर में भर गया और यहोवा के तेज की प्रखर ज्योति पूरे आँगन में भर गई। {10:5} तब मैंने करूब (स्वर्गदूतों) के पंखों की फड़फड़ाहट पूरे बाहरी आँगन में सुनी जा सकती थी। बाहरी आँगन में फड़फड़ाहट बड़ी प्रचण्ड थी, वैसी ही जैसी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की गरजती वाणी होती है, जब वह बातें करता है। {10:6} परमेश्वर ने सन के वस्त्र पहने हुए व्यक्ति को आदेश दिया था। परमेश्वर ने उसे “तूफानी — बादल” में घुसने के लिये कहा और करुब (स्वर्गदूतों) के बीच से कुछ अंगारे लेने को कहा। इसलिये वह व्यक्ति तूफानी — बादल में घुस गया और गोल चक्रों में से एक के सहारे खड़ा हो गया। {10:7} करुब (स्वर्गदूतों) में से एक ने अपना हाथ बढ़ाया और करुब (स्वर्गदूतों) के क्षेत्र के बीच से कुछ अंगारे लिये। उसने अंगारों को उस व्यक्ति के हाथों में रख दिया और वह व्यक्ति वहाँ से चला गया। {10:8} (करुब स्वर्गदूतों के पंखों के नीचे कुछ ऐसा था जो मनुष्य की भुजाओं की तरह दिखता था।) {10:9} तब मैंने देखा कि वहाँ चार गोल चक्र थे। हर एक करुब (स्वर्गदूत) की बगल में एक चक्र था, और चक्र स्वच्छ पीले रत्न की तरह दिखते थे। {10:10} वे चार चक्र थे और सब चक्र एक से प्रतीत होते थे। वे ऐसे दिखते थे मानों एक चक्र दूसरे चक्र में हो। {10:11} जब वे चलते थे तो किसी भी दिशा में जा सकते थे। जब कभी वे चलते थे वे चारों एक साथ चलते थे। किन्तु उनके चलने के साथ करुब (स्वर्गदूत) साथ — साथ चक्कर नहीं लगाते थे। वे उस दिशा में चलते थे, जिधर उनका मुख होता था। जब वे चलते थे तो वे इधर — उधर नहीं मुड़ते थे। {10:12} उनके पूरे शरीर पर आँखे थीं। उनकी पीठ, उनकी भुजा, उनके पंख और उनके चक्र में आँखे थीं। हाँ, चारों चक्रों में आँखे थीं! {10:13} मेरे सुनते हुए इन पहियों को चक्कर कहा गया, अर्थात् घुमने वाले पहिए। {10:14} हर एक करुब (स्वर्गदूत) चार मुखों वाला था। पहला मुख करुब का था। दूसरा मुख मनुष्य का था। तीसरा सिंह का मुख था और चौथा उकाब का {10:15} मुख था। तब मैंने जाना कि (ये करुब स्वर्गदूत वे जानवर थे जिन्हें मैंने कबार नदी के दर्शन में देखा था!) तब करुब (स्वर्गदूत) हवा में उठे। {10:16} उनके साथ चक्र उठे। चक्रों ने अपनी दिशा उस समय नहीं बदली जब करुब (स्वर्गदूत) ने पंख खोले और वे हवा में उड़े। {10:17} यदि करुब (स्वर्गदूत) हवा में उड़ते थे तो चक्र उनके साथ जाते थे। यदि करुब (स्वर्गदूत) शान्त खड़े रहते थे तो चक्र भी वैसा ही करते थे। क्यों क्योंकि उनमें प्राणियों की आत्मा की शक्ति थी। {10:18} तब यहोवा का तेज मन्दिर की देहली से उठा, करुब (स्वर्गदूतों) के स्थान के ऊपर गया और वहाँ ठहर गया। {10:19} तब करुब (स्वर्गदूतों) ने अपने पंख खोले और हवा में उड़ गए। मैंने उन्हें मन्दिर को छोड़ते देखा! चक्र उनके साथ चले। तब वे यहोवा के मन्दिर के पूर्वी द्वार पर ठहरे। इस्राएल के परमेश्वर का तेज हवा में उनके ऊपर था। {10:20} तब मैंने इस्राएल के परमेश्वर के तेज के नीचे प्राणियों को कबार नदी के दर्शन में याद किया और मैंने अनुभव किया कि वे प्राणी करुब (स्वर्गदूत) थे। {10:21} हर एक प्राणी के चार मुख थे, चार पंख थे और पंखों के नीचे कुछ ऐसा था जो मनुष्य की भुजाओं की तरह दिखता था। {10:22} करुब (स्वर्गदूतों) के वही चार मुख थे जो कबार नदी के दर्शन के प्राणियों के थे और वे सीधे आगे उस दिशा में देखते थे, जिधर वे जा रहे थे। {11:1} तब आत्मा मुझे यहोवा के मन्दिर के पूर्वी द्वार पर ले गया। इस द्वार का मुख पूर्व को है जहाँ सूरज निकलता है। मैंने इस फाटक के प्रवेश द्वार पर पच्चीस व्यक्ति देखे। अज्जूर का पुत्र याजन्याह उन लोगों के साथ था और बनायाह का पुत्र पलत्याह वहाँ था। पलत्याह लोगों का प्रमुख था। {11:2} तब परमेश्वर ने मुझसे कहा। उसने बताया, “मनुष्य के पुत्र, ये वे व्यक्ति हैं जो इस नगर में बुरी योजना बनाते हैं। ये सदा लोगों के बुरे काम करने को कहते हैं। {11:3} वे लोग कहते हैं, ‘हम लोग शीघ्र ही फिर से अपने मकान बनाने लगेंगे। हम लोग पात्र में रखे माँस की तरह इस नगर में सुरक्षित हैं!’ {11:4} वे यह झूठ फैला रहे हैं। इसलिये तुम्हें मेरे लिये लोगों से बात करनी चाहिए। मनुष्य के पुत्र! जाओ और लोगों के बीच भविष्यवाणी करो।” {11:5} तब यहोवा की आत्मा मुझमें आई। उसने मुझसे कहा, “उनसे कहो कि यहोवा ने यह सब कहा है: इस्राएल के परिवार, तुम बड़ी योजना बना रहे हो। किन्तु मैं जानता हूँ कि तुम क्या सोच रहे हो! {11:6} तुमने इस नगर में बहुत से लोगों को मार डाला है। तुमने सड़कों को शवों से पाट दिया है। {11:7} अब हमारा स्वामी यहोवा, यह कहता है, ‘वे शव माँस हैं और यह नगर पात्र है। किन्तु वह (नबूकदनेस्सर) आएगा और तुम्हें इस सुरक्षित पात्र से निकाल ले जाएगा! {11:8} तुम तलवार से भयभीत हो। किन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध तलवार ला रहा हूँ।’” हमारे स्वामी यहोवा ने यह सब कहा है। इसलिये ये घटित होंगी! {11:9} परमेश्वर ने यह भी कहा, “मैं तुम लोगों को इस नगर से बाहर ले जाऊँगा और मैं तुम्हें अजनबियों को सौंप दूँगा। मैं तुम लोगों को दण्ड दूँगा! {11:10} तुम तलवार के घाट उतरोगे। मैं तुम्हें यहाँ इस्राएल में दण्ड दूँगा जिससे तुम समझोगे कि वह मैं हूँ जो तुम्हें दण्ड दे रहा हूँ। मैं यहोवा हूँ। {11:11} हाँ, यह स्थान खौलती कड़ाही बनेगा और तुम इसमें के माँस होंगे, जो भूना जाता है! मैं तुम्हें यहाँ इस्राएल में दण्ड दूँगा। {11:12} तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। वह मेरा नियम था जिसे तुमने तोड़ा है! तुमने मेरे आदेशों का पालन नहीं किया। तुमने अपने चारों ओर के राष्ट्रों की तरह रहने का निर्णय किया।” {11:13} जैसे ही मैंने परमेश्वर के लिये बोलना समाप्त किया, बनायाह का पुत्र पलत्याह मर गया! मैं धरती पर गिर पड़ा। मैंने धरती पर माथा टेका और कहा, “हे मेरे स्वामी यहोवा, तू क्या इस्राएल के सभी बचे हुओं को पूरी तरह नष्ट करने पर तुला हुआ है!” {11:14} किन्तु तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {11:15} “मनुष्य के पुत्र, तुम इस्राएल के परिवार के अपने उन भाईयों को याद करो जिन्हें अपने देश को छोड़ने के लिये विवश किया गया था। लेकिन मैं उन्हें वापस लाऊँगा। किन्तु यहाँ यरूशलेम में रहने वाले लोग कह रहे है, यहोवा हम से दूर रह। यह भूमि हमें दी गई — यह हमारी है!” {11:16} इसलिये उन लोगों से यह सब कहो: हमारा स्वामी यहोवा, कहता है, “यह सत्य है कि मैंने अपने लोगों को बहुत दूर के देशों में जाने को विवश किया। मैंने ही उनको बहुत से देशों में बिखेरा और मैं अन्य देशों में उन के लिये थोड़े समय का पवित्र स्थान ठहरुँगा। {11:17} इसलिये तुम्हें उन लोगों के कहना चाहिए कि उनका स्वामी यहोवा, उन्हें वापस लाएगा। मैंने तुम्हें, बहुत से देशों में बिखेर दिया है। किन्तु मैं तुम लोगों को एक साथ इकट्ठा करुँगा और उन राष्ट्रों से तुम्हें वापस लाऊँगा। मैं इस्राएल का प्रदेश तुम्हें वापस दूँगा {11:18} और जब हमारे लोग लौटेंगे तो वे उन सभी भंयकर गन्दी देवमूर्तियों को, जो अब यहाँ है, नष्ट कर देंगे। {11:19} मैं उन्हें एक साथ लाऊँगा और उन्हें एक व्यक्ति सा बनाऊँगा। मैं उनमें नयी आत्मा भरूँगा। मैं उनके पत्थर के हृदय को दूर करुँगा और उसके स्थान पर सच्चा हृदय दूँगा। {11:20} तब वे मेरे नियमों का पालन करेंगे। वे मेरे आदेशों का पालन करेंगे, वे वह कार्य करेंगे जिन्हें मैं करने को कहूँगा। वे सचमुच मेरे लोग होंगे और मैं उनका परमेश्वर होऊँगा।” {11:21} तब परमेश्वर ने कहा, “किन्तु इस समय उनका हृदय भयंकर गन्दी देवमूर्तियों का हो चुका है। मुझे उन लोगों को उन बुरे कर्मों के लिये दण्ड देना चाहिए जो उन्होंने किया है।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा है। {11:22} तब करुब (स्वर्गदूत) ने अपने पंख खोले और हवा में उड़ गये। चक्र उनके साथ गए। इस्राएल के परमेश्वर का तेज उनके ऊपर था। {11:23} यहोवा का तेज ऊपर हवा में उठा और उसने यरूशलेम को छोड़ दिया। वह क्षण भर के लिये यरूशलेम के पूर्व की पहाड़ी पर ठहरा। {11:24} तब आत्मा ने मुझे हवा में उठाया और वापस बाबुल में पहुँचा दिया। उसने मुझे उन लोगों के पास लौटाया, जो इस्राएल छोड़ने के लिये विवश किये गये थे। तब दर्शन में परमेश्वर की आत्मा हवा में उठी और मुझे छोड़ दिया। मैंने उन सभी चीजों को परमेश्वर के दर्शन में देखा। {11:25} तब मैंने निर्वासित लोगों से बातें की। मैंने वे सभी बातें बताई जो यहोवा ने मुझे दिखाई थीं। {12:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {12:2} “मनुष्य के पुत्र, तुम विद्रोही लोगों के साथ रहते हो। वे सदैव मेरे विरुद्ध गये हैं। देखने के लिये उनकी आँखें हैं जो कुछ मैंने उनके लिये किया है। किन्तु वे उन चीजों को नहीं देखते। सुनने के लिये उनके कान हैं, उन चीजों को जो मैंने उन्हें करने को कहा है। किन्तु वे मेरे आदेश नहीं सुनते। क्यों क्योंकि वे विद्रोही लोग हैं। {12:3} इसलिए, मनुष्य के पुत्र अपना सामान बांध लो। ऐसा व्यवहार करो मानों तुम किसी दूर देश को जा रहे हो। यह इस प्रकार करो कि लोग तुम्हें देखते रहें। संभव है, कि वे लोग तुम पर ध्यान दें, किन्तु वे लोग बड़े विद्रोही लोग हैं। {12:4} “दिन के समय तुम अपना सामान इस प्रकार बाहर ले जाओ कि लोग तुम्हें देखते रहें। तब शाम को ऐसा दिखावा करो, कि तुम दूर देश में एक बन्दी की तरह जा रहे हो। {12:5} लोगों की आँखों के सामने दीवार में एक छेद बनाओ और उस दीवार के छेद से बाहर जाओ। {12:6} रात को अपना सामान कन्धे पर रखो और उस स्थान को छोड़ दो। अपने मुँह को ढक लो जिससे तुम यह न देख सको कि तुम कहाँ जा रहे हो। इन कामों को तुम्हें इस प्रकार करना चाहिये, कि लोग तुम्हें देख सकें। क्यों क्योंकि मैं तुम्हें इस्राएल के परिवार के लिये एक उदाहरण के रूप में उपयोग कर रहा हूँ।” {12:7} इसलिये मैंने (यहेजकेल ने) आदेश के अनुसार किया। दिन के समय मैंने अपना सामान उठाया और ऐसा दिखावा किया मानों मैं किसी दूर देश को जा रहा हूँ। उस शाम मैंने अपने हाथों का उपयोग किया और दीवार में एक छेद बनाया। रात को मैंने अपना सामान कन्धे पर रखा और चल पड़ा। मैंने यह सब इस प्रकार किया कि सभी लोग मुझे देख सकें। {12:8} अगली सुबह मुझे यहोवा का वचन मिला। उसने कहा, {12:9} “मनुष्य के पुत्र, क्या इस्राएल के उन विद्रोही लोगों ने तुमसे पूछा कि तुम क्या कर रहे हो {12:10} उनसे कहो कि उनके स्वामी यहोवा ने ये बातें बताई है। यह दुःखद वचन यरूशलेम के प्रमुखों और वहाँ रहने वाले इस्राएल के सभी लोगों के बारे में है। {12:11} उनसे कहो, ‘मैं (यहेजकेल) तुम सभी लोगों के लिये एक उदाहरण हूँ। जो कुछ मैंने किया है वह तुम लोगों के लिये सत्य होगा।’ तुम सचमुच बन्दी के रूप में दूर देश में जाने के लिये विवश किये जाओगे। {12:12} तुम्हारा प्रमुख दीवार में छेद करेगा और रात को गुप्त रूप से निकल भागेगा। वह अपने मुख को ढक लेगा जिससे लोग उसे पहचानेंगे नहीं। उसकी आँखे, यह देखने के लायक नहीं होंगी कि वह कहाँ जा रहा है। {12:13} वह भाग निकलने का प्रयत्न करेगा। किन्तु मैं (परमेश्वर) उसे पकड़ लूँगा! वह मेरे जाल में फँस जाएगा और मैं उसे बाबुल लाऊँगा जो कसदियों के लोगों का देश है। किन्तु वह देख नहीं पाएगा कि वह कहाँ जा रहा है। शत्रु उसकी आँखे निकाल लेगा और उसे अन्धा कर देगा। {12:14} मैं राजा के लोगों को विवश करुँगा कि वे इस्राएल के चारों ओर विदेशों में रहें। मैं उसकी सेना को तितर — बितर कर दूँगा और शत्रु के सैनिक उनका पीछा करेंगे। {12:15} तब वे लोग समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ। वे समझेंगे कि मैंने उन्हें राष्ट्रों में बिखेरा। वे समझ जाएंगे कि मैंने उन्हें अन्य देशों में जाने के लिये विवश किया। {12:16} “किन्तु मैं कुछ लोगों को जीवित रखूँगा। वे रोग, भूख और युद्ध से नहीं मरेंगे। मैं उन लोगों को इसलिए जीवित रहने दूँगा, कि वे अन्य लोगों से उन भयंकर कामों के बारे में कह सकेंगे, जो उन्होंने मेरे विरुद्ध किये। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {12:17} तब यहोवा का वचन मेरे पास आया। उसने कहा, {12:18} “मनुष्य के पुत्र! तुम्हें ऐसा करना चाहिये मानों तुम बहुत भयभीत हो। जब तुम खाना खाओ तब तुम्हें काँपना चाहिए। तुम्हें पानी पीते समय चिन्तित और भयभीत होने का दिखावा करना चाहिये। {12:19} तुम्हें यह साधारण जनता से कहना चाहिये। तुम्हें कहना चाहिये, ‘हमारा स्वामी यहोवा यरूशलेम के निवासियों और इस्राएल के अन्य भागों के लोगों से यह कहता है। लोगों, तुम भोजन करते समय बहुत परेशान होगे। तुम पानी पीते समय भयभीत होगे। क्यों क्योंकि तुम्हारे देश में सभी कुछ नष्ट हो जाएगा। वहाँ रहने वाले सभी लोगों के प्रति शत्रु बहुत क्रूर होगा। {12:20} तुम्हारे नगरों में इस समय बहुत लोग रहते हैं, किन्तु वे नगर नष्ट हो जाएंगे। तुम्हारा पूरा देश नष्ट हो जाएगा। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ।’” {12:21} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {12:22} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के प्रदेश के बारे में लोग यह कहावत क्यों सुनाते हैं: ‘विपत्ति शीघ्र न आएगी, दर्शन कभी न होंगे?’ {12:23} “उन लोगों से कहो कि तुम्हारा स्वामी यहोवा तुम्हारी इस कहावत का पढ़ना बन्द कर देगा। वे इस्राएल के बारे में वे बातें कभी भी नहीं कहेंगे। अब वे यह कहावत सुनाएंगे: ‘विपत्ति शीघ्र आएगी। दर्शन घटित होंगे।’ {12:24} “यह सत्य है कि इस्राएल मे कभी भी झूठे दर्शन घटित नहीं होंगे। अब ऐसे जादूगर भविष्य में नहीं होंगे जो ऐसी भविष्यवाणी करेंगे जो सच्ची नहीं होगी। {12:25} क्यों क्योंकि मैं यहोवा हूँ। मैं वही कहूँगा, जो मैं कहना चाहूँगा और वह चीज घटित होगी और मैं घटना — काल को लम्बा खींचने नहीं दूँगा। वे विपत्तियाँ शीघ्र आ रही हैं। तुम्हारे अपने जीवनकाल में ही। विद्रोही लोगों! जब मैं कुछ कहता हूँ तो मैं उसे घटित करता हूँ।” मेरे स्वामी यहोवा ने उन बातों को कहा। {12:26} तब यहोवा का वचन मुझे मिल। उसने कहा, {12:27} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के लोग समझते हैं कि जो दर्शन मैं तुझे देता हूँ, वे बहुत दूर के भविष्य में घटित होंगे। वे समझते हैं, कि जिन विपत्तियों के बारे में तुम बातें करते हो, वे आज से वहुत वर्षों बाद घटित होंगी। {12:28} अत: तुम्हें उनसे यह कहना चाहिये, ‘मेरा स्वामी यहोवा कहता है: मैं और अधिक विलम्ब नहीं कर सकता। यदि मैं कहता हूँ, कि कुछ घटित होगा तो वह घटित होगा।’” मेरे स्वामी यहोवा ने उन बातों को कहा। {13:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। {13:2} “मनुष्य के पुत्र, तुम्हें इस्राएल के नबियों से मेरे लिये बातें करनी चाहिये। वे नबी वास्तव में मेरे लिये बातें नहीं कर रहे हैं। वे नबी वही कुछ कह रहे हैं जो वे कहना चाहतें हैं।” इसलिये तुम्हें उनसे बातें करनी चाहियें। उनसे ये बातें कहो, यहोवा के यहाँ से मिले इस वचन को सुनो! {13:3} मेरा स्वामी यहोवा यह वचन देता है। मूर्ख नबियों! तुम लोगों पर विपत्तियाँ आएंगी। तुम लोग अपनी आत्मा का अनुसरण कर रहे हो। तुम लोगों से वह नहीं कह रहे हो जो तुम सचमुच दर्शन में देखते हो। {13:4} “‘इस्राएलियों, तुम्हारे नबी शून्य खण्डहरों में दौड़ लगाने वाली लोमड़ियों जैसे होंगे। {13:5} तुमने नगर की टूटी दीवारों के निकट सैनिक को नहीं रखा है। तुमने इस्राएल के परिवार की रक्षा के लिये दीवारें नहीं बनाई हैं। इसलिये यहोवा के लिये, जब तुम्हें दण्ड देने का समय आएगा तो तुम युद्ध में हार जाओगे! {13:6} “‘झूठे नबियों ने कहा, कि उन्होंने दर्शन देखा है। उन्होंने अपना जादू किया और कहा कि घटनाएँ होंगी, किन्तु उन्होंने झूठ बोला। उन्होंने कहा कि यहोवा ने उन्हें भेजा किन्तु उन्होंने झूठ बोला। वे अपने झूठ के सत्य होने की प्रतीक्षा अब तक कर रहे हैं। {13:7} “‘झूठे नबियों, जो दर्शन तुमने देखे, वे सत्य नहीं थे। तुमने अपने जादू किये और कहा कि कुछ घटित होगा, किन्तु तुम लोगों ने झूठ बोला। तुम कहते हो कि यह यहोवा का कथन है, किन्तु मैंने तुम लोगों से बातें नहीं की!” {13:8} अत: मेरा स्वामी यहोवा अब सचमुच कुछ कहेगा, वह कहता है, “तुमने झूठ बोला। तुमने वे दर्शन देखे जो सच्चे नहीं थे। इसलिये मैं (परमेश्वर) अब तुम्हारे विरुद्ध हूँ!” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {13:9} यहोवा ने कहा, “मैं उन नबियों को दण्ड दूँगा जिन्होंने असत्य दर्शन देखे और जिन्होंने झूठ बोला। मैं उन्हें अपने लोगों से अलग करूँगा। उनके नाम इस्राएल के परिवार की सूची में नहीं रहेंगे। वे फिर इस्राएल प्रदेश में कभी नहीं आएंगे। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा और स्वामी हूँ! {13:10} “उन झूठे नबियों ने बार — बार मेरे लोगों से झूठ बोला। नबियों ने कहा कि शान्ति रहेगी और वहाँ कोई शान्ति नहीं है। लोगों को दीवारें दृढ़ करनी है और युद्ध की तैयारी करनी हैं। किन्तु वे टूटी दीवारों पर लेप की एक पतली तह चढ़ा रहे हैं। {13:11} उन लोगों से कहो कि मैं ओले और मूसलाधार वर्षा (शत्रु — सेना) भेजूँगा। प्रचण्ड आँधी चलेगी और चक्रवात आएगा। तब दीवार गिर जाएगी। {13:12} दीवार नीचे गिर जाएगी। लोग नबियों से पूछेंगे, ‘उस लेप का क्या हुआ, जिसे तुमने दीवार पर चढ़ाया था?’” {13:13} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं क्रोधित हूँ और मैं तुम लोगों के विरुद्ध एक तूफान भेजूँगा। मैं क्रोधित हूँ और मैं घनघोर वर्षा भेजूँगा। मैं क्रोधित हूँ और मैं आकाश से ओले बरसाऊँगा और तुम्हें पूरी तरह से नष्ट करूँगा! {13:14} तुम लेप दीवार पर चढ़ाते हो। किन्तु मैं पूरी दीवार को नष्ट कर दूँगा। मैं इसे धराशायी कर दूँगा। दीवार तुम पर गिरेगी और तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। {13:15} मैं, दीवार और उस पर लेप चढ़ाने वालों के विरुद्ध अपना क्रोध दिखाना समाप्त कर दूँगा। तब मैं कहूँगा, ‘अब कोई दीवार नहीं है और अब कोई मज़दूर इस पर लेप चढ़ाने वाला नहीं हैं।’ {13:16} “ये सब कुछ इस्राएल के झूठे नबियों के लिये होगा। वे नबी यरूशलेम के लोगों से बातचीत करते हैं। वे नबी कहते हैं कि शान्ति होगी, किन्तु कोई शान्ति नहीं हैं।” मेरे स्वामी यहोवा ने उन बातों को कहा। {13:17} परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल में स्त्री नबियों को ढूँढो। वे स्त्री नबी मेरे लिये नहीं बोलतीं। वे वही कहती हैं जो वे कहना चाहती हैं। अत: तुम्हें मेरे लिये उनके विरुद्ध कहना चाहिये। तुम्हें उनसे यह कहना चाहिये। {13:18} ‘मेरा स्वामी यहोवा कहता है: स्त्रियों, तुम पर विपत्ति आएगी। तुम लोगों की भुजाओं पर पहनने के लिये कपड़े का बाजूबन्द सीती हो। तुम लोगों के सिर पर बांधने के लिये विशेष “दुपट्टा” बनाती हो। तुम कहती हो कि वे चीजें लोगों के जीवन को नियन्त्रित करने की जादूई शक्ति रखती हैं। तुम केवल अपने को जीवित रखने के लिये उन लोगों को जाल में फँसाती हो! {13:19} तुम लोगों को ऐसा समझाती हो कि मैं महत्वपूर्ण नहीं हूँ। तुम्हें उन्हें मुट्ठी भर जौ और रोटी के कुछ टुकड़ों के लिये मेरे विरुद्ध करती हो। तुम मेरे लोगों से झूठ बोलती हो। वे लोग झूठ सुनना पसन्द करते हैं। तुम उन व्यक्तियों को मार डालती हो जिन्हें जीवित रहना चाहिये और तुम ऐसे लोगों को जीवित रहने देना चाहती हो जिन्हें मर जाना चाहिये! {13:20} इसलिए यहोवा और स्वामी तुमसे यह कहता है: तुम उन कपड़े के “बाजूबन्दो” को लोगों को जाल में फँसाने के लिये बनाती हो — किन्तु मैं उन लोगों को स्वतन्त्र करूँगा। मैं तुम्हारी भुजाओं से उन “बाजूबन्दों” को फाड़ फेंकूँगा और लोग तुमसे स्वतन्त्र हो जाएंगे। वे जाल से मुक्त पक्षियों की तरह होंगे! {13:21} मैं उन “बाजूबन्दों” को फाड़ डालूँगा और अपने लोगों को तुम्हारी शक्ति से बचाऊँगा। वे लोग तुम्हारे जाल से भाग निकलेंगे और तुम समझ जाओगी कि मैं यहोवा हूँ। {13:22} “‘स्त्री नबियों तुम झूठ बोलती हो। तुम्हारा झूठ अच्छे लोगों को कष्ट पहुँचाता है, मैं उन अच्छे लोगों को कष्ट पहुँचाना नहीं चाहता। तुम बुरे लोगों की सहायता करती हो और उन्हें उत्साहित करती हो। तुम उन्हें अपना जीवन बदलने के लिये नहीं कहतीं। तुम उनके जीवन की रक्षा नहीं करना चाहती! {13:23} तुम अब भविष्य में व्यर्थ दर्शन नहीं देखोगी। तुम भविष्य में जादू नहीं करोगी। मैं अपने लोगों को तुम्हारी शक्ति से बचाऊँगा और तुम जान जाओगी कि मैं यहोवा हूँ।’” {14:1} इस्राएल के कुछ अग्रज (प्रमुख) मेरे पास आए। वे मुझसे बात करने के लिये बैठ गये। {14:2} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {14:3} “मनुष्य के पुत्र, ये व्यक्ति तुमसे बातें करने आए हैं। वे चाहते थे कि तुम मुझसे राय लो। किन्तु वे व्यक्ति अब तक अपनी गन्दी देवमूर्तियों को रखे हैं। वे उन चीजों को रखते हैं जो उनसे पाप कराती हैं। वे अब तक उन मूर्तियों की पूजा करते हैं। इसलिये वे मेरे पास राय लेने क्यों आते हैं क्या मुझे उनके प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए नहीं! {14:4} किन्तु मैं उन्हें उत्तर दूँगा। मैं उन्हें दण्ड दूँगा! तुम्हें उन लोगों से यह कह देना चाहिये, ‘मेरा स्वामी यहोवा कहता हैं: यदि कोई इस्राएली व्यक्ति नबी के पास आता है और मुझसे राय पाने के लिये कहता है तो वह नबी उस व्यक्ति को उत्तर नहीं देगा। उस व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर मैं स्वयं दूँगा। मैं उसे तब भी उत्तर दूँगा यदि उसने गन्दी देवमूर्तियाँ रखी हैं, यदि वह उन चीजों को रखता है जो उससे पाप कराती हैं, और यदि वह तब तक उन मूर्तियों की पूजा करता है। उसकी सारी गन्दी देवमूर्तियों के होते हुए भी मैं उससे बात करुँगा। {14:5} क्यों क्योंकि मैं उनके हृदय को छूना चाहता हूँ। मैं दिखाना चाहता हूँ कि मैं उनसे प्रेम करता हूँ, यद्यपि उन्होंने मुझे अपनी गन्दी देवमूर्तियों के लिये छोड़ा।’ {14:6} “इसलिए इस्राएल के परिवार से यह सब कहो। उनसे कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा कहता है। मेरे पास वापस आओ और अपनी गन्दी देवमूर्तियों को छोड़ दो। उन भयंकर असत्य देवताओं से मुख मोड़ लो। {14:7} यदि कोई इस्राएली या इस्राएल में रहने वाला विदेशी मेरे पास राय के लिये आता है, तो मैं उसे उत्तर दूँगा। मैं उसे तब भी उत्तर दूँगा यदि उसने गन्दी देवमूर्तियाँ रखी हैं, यदि वह उन चीजों को रखता है जो उससे पाप कराती हैं और यदि वह तब तक उन मूर्तियों की पूजा करता है और यह उत्तर है जिसे मैं उसे दूँगा। {14:8} मैं उस व्यक्ति के विरुद्ध होऊँगा। मैं उसे नष्ट करूँगा। वह अन्य लोगों के लिये एक उदाहरण बनेगा। लोग उसकी हँसी उड़ाएंगे। मैं उसे अपने लोगों से निकाल बाहर करुँगा। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ! {14:9} यदि नबी इतना अधिक मूर्ख है कि वह अपना उत्तर देता है तो मैं उसे दिखा दूँगा कि वह कितना बड़ा मूर्ख है, मैं उसके विरुद्ध अपनी शक्ति का उपयोग करूँगा। मैं उसे नष्ट करुँगा और अपने लोगों, इस्राएल से उसे निकाल बाहर करुँगा। {14:10} इस प्रकार वह व्यक्ति जो राय के लिये आया और नबी जिसने उत्तर दिया दोनों एक ही दण्ड पाएंगे। {14:11} क्यों क्योंकि इस प्रकार वे नबी मेरे लोगों को मुझसे दूर ले जाना बन्द कर देंगे। इस प्रकार मेरे लोग अपने पापों से गन्दा होना बन्द कर देंगे। तब वे मेरे विशेष लोग होंगे और मैं उनका परमेश्वर होऊँगा।’” मेरे स्वामी यहोवा ने वह सब बातें कहीं। {14:12} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {14:13} “मनुष्य के पुत्र, मैं अपने उस राष्ट्र को दण्ड दूँगा जो मुझे छोड़ता है और मेरे विरुद्ध पाप करता है। मैं उनकी भोजन आपूर्ति बन्द कर दूँगा। मैं अकाल का समय उत्पन्न कर सकता हूँ और उस देश से मनुष्यों और पशुओं को बाहर कर सकता हूँ। {14:14} मैं उस देश को दण्ड दूँगा चाहे वहाँ नूह, दानिय्येल और अय्यूब रहते हों। वे लोग अपना जीवन अपनी अच्छाईयों से बचा सकते हैं, किन्तु वे पूरे देश को नहीं बचा सकते।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह सब कहा। {14:15} परमेश्वर ने कहा, “या, मैं उस पूरे प्रदेश में जंगली जानवरों को भेज सकता हूँ और वे जानवर सभी लोगों को मार सकते हैं। जंगली जानवरों के कारण उस देश से होकर कोई व्यक्ति यात्रा नहीं करेगा। {14:16} यदि नूह, दानिय्येल और अय्यूब वहाँ रहे होते तो मैं उन तीनों अच्छे व्यक्तियों को बचा लेता। वे तीनों व्यक्ति स्वयं अपना जीवन बचा सकते हैं। किन्तु मैं अपने जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि वे अन्य लोगों का जीवन नहीं बचा सकते यहाँ तक कि अपने पुत्र — पुत्रियों का जीवन भी नहीं। वह बुरा देश नष्ट कर दिया जाएगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह सब कहा। {14:17} परमेश्वर ने कहा, “या, उस देश के विरुद्ध लड़ने के लिये मैं शत्रु की सेना को भेज सकता हूँ। वे सैनिक उस देश को नष्ट कर देंगे। मैं उस देश से सभी लोगों और जानवरों को निकाल बाहर करुँगा। {14:18} यदि नूह, दानिय्येल और अय्यूब वहाँ रहते तो मैं उन तीनों अच्छे लोगों को बचा लेता। वे तीनों व्यक्ति स्वयं अपना जीवन बचा सकते हैं। किन्तु मैं अपने जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि अन्य लोगों का जीवन वे नहीं बचा सकते यहाँ तक कि अपने पुत्र — पुत्रियों का जीवन भी नहीं। वह बुरा देश नष्ट कर दिया जाएगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह सब कहा। {14:19} परमेश्वर ने कहा, “या, मैं उस देश के विरुद्ध महामारी भेज सकता हूँ। मैं उन लोगों पर अपने क्रोध की वर्षा करूँगा। मैं सभी मनुष्यों और जानवरों को उस देश से हटा दूँगा। {14:20} यदि नूह, दानिय्येल और अय्यूब वहाँ रहते तो मैं उन तीन अच्छे लोगों को बचा लेता क्योंकि वे अच्छे व्यक्ति हैं, वे तीनों व्यक्ति स्वयं अपना जीवन बचा सकते हैं। किन्तु मैं अपने जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि अन्य लोगों का जीवन वे नहीं बचा सकते थे यहाँ तक कि अपने पुत्र — पुत्रियों का जीवन भी नहीं!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह सब कहा। {14:21} तब मेरे स्वामी यहोवा ने कहा, “इसलिये सोचो कि यरूशलेम के लिये यह कितना बुरा होगा, मैं उस नगर के विरुद्ध उन चारों दण्डों को भेजूँगा! मैं शत्रु — सेना, भूखमरी, महामारी और जंगली उस नगर के विरुद्ध भेजूँगा। मैं उस देश से सभी लोगों और जानवरों को निकाल बाहर करूँगा! {14:22} उस देश से कुछ लोग बच निकलेंगे। वे अपने पुत्र — पुत्रियों को लाएंगे और तुम्हारे पास सहायता के लिये आएंगे। तब तुम जानोगे कि वे लोग सचमुच कितने बुरे हैं। तुम उन विपत्तियों के सम्बन्ध में उचित होने की धारणा बनाओगे जिन्हें मैं यरूशलेम पर लाऊँगा। {14:23} तुम उनके रहने के ढंग और जो बुरे कार्य वे करते हैं, उन्हें देखोगे। तब तुम समझोगे कि उन लोगों को दण्ड देने का उचित कारण मेरे लिए था।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {15:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {15:2} “मनुष्य के पुत्र, क्या अंगूर की बेल की लकड़ी जंगल के किसी पेड़ की कटी छोटी शाखा से अधिक अच्छी होती है नहीं! {15:3} क्या तुम अंगूर की बेल की लकड़ी को किसी उपयोग में ला सकते हो नहीं! क्या तुम उससे तश्तरियाँ लटकाने के लिये खूंटियाँ बना सकते हो नहीं! {15:4} लोग उस लकड़ी को केवल आग में डालते हैं। कुछ सूखी लकड़ियाँ सिरों से जलना आरम्भ करती है, बीच का भाग आग से काला पड़ जाता है। किन्तु लकड़ी पूरी तरह नहीं जलती। क्या तुम उस जली लकड़ी से कोई चीज बना सकते हो {15:5} यदि जलने के पहले तुम उस लकड़ी से कोई चीज नहीं बना सकते हो, तो निश्चय ही, उसके जल जाने के बाद उससे कोई चीज नहीं बना सकते! {15:6} इसलिये अंगूर की बेल की लकड़ी के टुकड़े जंगल के किसी पेड़ की लकड़ी के टुकड़ों के समान ही है। लोग उन लकड़ी के टुकड़ों को आग में डालते हैं, और आग उन्हें जलाती है। उसी प्रकार मैं यरूशलेम के निवासियों को आग में फेंकूँगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही। {15:7} मैं उन लोगों को दण्ड दूँगा। किन्तु कुछ लोग उन लकड़ियों की तरह होंगे जो पूरी तरह नहीं जलतीं, उन्हें दण्ड दिया जाएगा, किन्तु वे पूरी तरह नष्ट नहीं किये जाएंगे। तुम देखोगे कि मैं इन लोगों को दण्ड दूँगा और तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ! {15:8} मैं उस देश को नष्ट करुँगा क्योंकि लोगों ने मुझको असत्य देवताओं की पूजा के लिये छोड़ा।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {16:2} “मनुष्य के पुत्र, यरूशलेम के लोगों को उन भयंकर बुरे कामों को समझाओ जिन्हें उन्होंने किया है। {16:3} तुम्हें कहना चाहिए, ‘मेरा स्वामी यहोवा यरूशलेम के लोगों को यह सन्देश देता है: अपना इतिहास देखो। तुम कनान में उत्पन्न हुए थे। तुम्हारा पिता एमोरी था। तुम्हारी माँ हित्ती थी। {16:4} यरूशलेम, जिस दिन तुम उत्पन्न हुए थे, तुम्हारे नाभि — नाल को काटने वाला कोई नहीं था। किसी ने तुम पर नमक नहीं डाला और तुम्हें स्वच्छ करने के लिये नहलाया नहीं। किसी ने तुम्हें वस्त्र में नहीं लपेटा। {16:5} यरूशलेम, तुम सब तरह से अकेले थे। कोई न तुम्हारे प्रति खेद प्रकट करता था, न ही ध्यान देता था। यरूशलेम, जिन दिन तुम उत्पन्न हुए, तुम्हारे माता — पिता ने तुम्हें मैदान में डाल दिया। तुम तब तक रक्त और झिल्ली में लिपटे थे। {16:6} “‘तब मैं (परमेश्वर) उधर से गुजरा। मैंने तुम्हें वहाँ खून से लथपथ पड़ा पाया। तुम खून में सनी थीं, किन्तु मैंने कहा, ‘जीवित रहो!’ हाँ, तुम रक्त में सनी थीं, किन्तु मैंने कहा, ‘जीवित रहो!’ {16:7} मैंने तुम्हारी सहायता खेत में पौधे की तरह बढ़ने में की। तुम बढ़ती ही गई। तुम एक युवती बनी, तुम्हारा ऋतु — धर्म आरम्भ हुआ, तुम्हारे वक्ष — स्थल बढ़े, तुम्हारे केश बढ़ने आरम्भ हुए। किन्तु तुम तब तक वस्त्रहीन और नंगी थीं। {16:8} मैंने तुम पर दृष्टि डाली। मैंने देखा कि तुम प्रेम के लिये तैयार थीं। इसलिये मैंने तुम्हारे ऊपर अपने वस्त्र डाले और तुम्हारी नग्नता को ढका। मैंने तुमसे विवाह करने का वचन दिया। मैंने तुम्हारे साथ वाचा की और तुम मेरी बनीं।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:9} “‘मैंने तुम्हें पानी से नहलाया। मैंने तुम्हारे रक्त को धोया और मैंने तुम्हारी त्वचा पर तेल मला। {16:10} मैंने तुम्हें एक सुन्दर पहनावा और कोमल चमड़े के जूते दिये। मैंने तुम्हें एक महीन मलमल और एक रेशमी वस्त्र दिया। {16:11} तब मैंने तुम्हें कुछ आभूषण दिये। मैंने तुम्हारी भुजाओं में बाजूबन्द पहनाए और तुम्हारे गले में हार पहनाया। {16:12} मैंने तुम्हें एक नथ, कुछ कान की बालियाँ और सुन्दर मुकुट पहनने के लिये दिया। {16:13} तुम अपने सोने चाँदी के आभूषणों, अपने मलमल और रेशमी वस्त्रों और कढ़ाई किये पहनावे में सुन्दर दिखती थीं! तुमने उत्तम भोजन किया। तुम अत्याधिक सुन्दर थी और तुम रानी बनीं! {16:14} तुम अपनी सुन्दरता के लिये विख्यात हुई। यह सब कुछ इसलिये हुआ क्योंकि मैंने तुम्हें इतना अधिक सुन्दर बनाया!’” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:15} परमेश्वर ने कहा, “किन्तु तुमने अपनी सुन्दरता पर विश्वास करना आरम्भ किया। तुमने अपने यश का उपयोग किया और मुझसे विश्वासघात किया। तुमने एक वेश्या की तरह काम किया जो हर गुजरने वाले की हो। तुमने उन सभी को अपने को अर्पित किया! {16:16} तुमने अपने सुन्दर वस्त्र लिये और उनका उपयोग अपनी पूजा के स्थानों को सजाने के लिये किया। तुमने उन स्थानों पर एक वेश्या की तरह काम किया। तुमने अपने को उस हर व्यक्ति को अर्पित किया जो वहाँ आया! {16:17} तब मेरा दिया हुआ सुन्दर आभूषण तुमने लिया और तुमने उस सोने — चाँदी का उपयोग मनुष्यों की मूर्तियाँ बनाने के लिये किया। तुमने उनके साथ भी यौन — सम्बन्ध किया! {16:18} तब तुमने सुन्दर वस्त्र लिये और उन मूर्तियों के लिये पहनावा बनाया। तुमने यह सुगन्धि और धूप — बत्ती को लिया जो मैंने तुम्हें दी थी तथा उसे उन देवमूर्तियों के सामने चढ़ाया! {16:19} मैंने तुम्हें रोटी, मधु और तेल दिये। किन्तु तुमने वह भोजन अपनी देवमूर्तियों को दिया। तुमने उसे अपने असत्य देवताओं को प्रसन्न करने के लिये सुगन्धि के रूप में भेंट किया। तुमने उन असत्य देवताओं के साथ वेश्या जैसा व्यवहार किया!” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:20} परमेश्वर ने कहा, “तुमने अपने पुत्र — पुत्रियाँ लेकर जिन्हें तूने मेरे लिए जन्म दिया, उन मूर्तियों को बलि चढ़ायी। किन्तु ये वे पाप हैं जो तुमने तब किये जब मुझे धोखा दिया और उन असत्य देवताओं के पास चली गई। {16:21} तुमने मेरे पुत्रों की हत्या की और उन्हें आग के द्वारा उन असत्य देवताओं पर चढ़ाया। {16:22} तुमने मुझे छोड़ा और वे भयानक काम किये और तुमने अपना वह समय कभी याद नहीं किया जब तुम बच्ची थीं। तुमने याद नहीं किया कि जब मैंने तुम्हें पाया तब तुम नंगी थीं और रक्त में छटपटा रही थीं। {16:23} “उन सभी बुरी चीजों के बाद, ओह यरूशलेम, यह तुम्हारे लिये बहुत बुरा होगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह सब बातें कहीं। {16:24} “उन सब बातों के बाद तुमने उस असत्य देवता की पूजा के लिये वह टीला बनाया। तुमने हर एक सड़क के मोड़ पर असत्य देवताओं की पूजा के लिये उन स्थानों को बनाया। {16:25} तुमने अपने टीले हर एक सड़क की छोर पर बनाए। तब तुमने अपने सौन्दर्य का मान घटाया। तुमने इसका उपयोग हर पास से गुजरने वाले को फँसाने के लिये किया। तुमने अपने अधोवस्त्र को ऊपर उठाया जिससे वे तुम्हारी टांगे देख सकें और तब तुम उन लोगों के साथ एक वेश्या के समान हो गई। {16:26} तब तुम उस पड़ोसी मिस्र के पास गई जिसका यौन अंग विशाल था। तुमने मुझे क्रोधित करने के लिये उसके साथ कई बार यौन — सम्बन्ध स्थापित किया। {16:27} इसलिये मैंने तुम्हें दण्ड दिया। मैंने तुम्हें अनुमोदित की गई भूमि का एक भाग ले लिया। मैंने तुम्हारे शत्रु पलिश्तियों की पुत्रियों (नगरों) को वह करने दिया जो वे तुम्हारा करना चाहती थीं। जो पाप तुमने किये उससे उनके भी मर्म पर चोट पहुँची। {16:28} तब तुम अश्शूर के साथ शारीरिक सम्बंध करने गई। किन्तु तुम्हें पर्याप्त न मिल सका। तुम कभी तृप्त न हुई। {16:29} इसलिए तुम कनान की ओर मुड़ी और उसके बाद बाबुल की ओर और तब भी तुम तृप्त न हुई। {16:30} तुम इतनी कमजोर हो। तुमने उन सभी व्यक्तियों (देशों) को पाप करने में लगने दिया। तुमने ठीक एक वेश्या की तरह काम किया।” वे बातें मेरे स्वामी यहोवा ने कहीं। {16:31} “तुमने अपने टीले हर एक सड़क के छोर पर बनाए और तुमने अपनी पूजा के स्थान हर सड़क की मोड़ पर बनाए। और कमाई को तुच्छ जाना। इसलिए तू वेश्या भी न रही। {16:32} तुम व्यभिचारिणी स्त्री। तुमने अपने पति की तुलना में अजनबियों के साथ शारीरिक सम्बंध करना अधिक अच्छा माना। {16:33} अधिकांश वेश्यायें शारीरिक सम्बंध के लिये व्यक्ति को भुगतान करने के लिये विवश करती हैं। किन्तु तुम अपने प्रेमियों को लुभाने के लिये स्वयं भेंट देती हो और उन्हें शारीरिक सम्बधं के लिये आमंत्रित करती हो। तुमने अपने चारों ओर के सभी लोगों को अपने साथ शारीरिक सम्बंध के लिये आमंत्रित किया। {16:34} तुम अधिकांश वेश्यायों के ठीक विपरीत हो। अधिकांश वेश्यायें पुरुषों को अपने भुगतान के लिये विवश करती हैं। किन्तु तुम पुरुषों को अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध का भुगतान करती हो।” {16:35} हे वेश्या, यहोवा से आये वचन को सुनो। {16:36} मेरा स्वामी यहोवा ये बातें कहता है: “तुमने अपनी मुद्रा व्यय कर दी है और अपने प्रेमियों तथा गन्दें देवताओं को अपना नंगा शरीर देखने दिया है तथा अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध करने दिया है। तुमने अपने बच्चों को मारा है और उनका खून बहाया है। वह उन असत्य देवताओं को तुम्हारी भेंट थीं। {16:37} इसलिये मैं तुम्हारे सभी प्रेमियों को एक साथ इकट्ठा कर रहा हूँ। मैं उन सभी को लाऊँगा जिनसे तुमने प्रेम किया तथा जिन मनुष्यों से घृणा की। मैं सभी को एक साथ ले आऊँगा और उन्हें तुम्हें नग्न देखने दूँगा। वे तुम्हें पूरी तरह नग्न देखेंगे। {16:38} तब मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम्हें किसी हत्यारिन और उस स्त्री की तरह दण्ड दूँगा जिसने व्यभिचार का पाप किया हो। तुम वैसे ही दण्डित होगी मानों कोई क्रोधित और ईष्यालु पति दण्ड दे रहा हो। {16:39} मैं उन सभी प्रेमियों को तुम्हें प्राप्त कर लेने दूँगा। वे तुम्हारे टीलों को नष्ट कर देंगे। वे तुम्हारे पूजा — स्थानों को जला डालेंगे। वे तुम्हारे वस्त्र फाड़ डालेंगे तथा तुम्हारे सुन्दर आभूषण ले लेंगे। वे तुम्हें वैसे वस्त्रहीन और नंगी छोड़े देंगे जैसी तुम तब थीं जब मैंने तुम्हें पाया था। {16:40} वे अपने साथ विशाल जन — समूह लाएंगे और तुमको मार डालने के लिये तुम्हारे ऊपर पत्थर फेकेंगे। तब अपनी तलवार से वे तुम्हें टुकड़े — टुकड़े कर डालेंगे। {16:41} वे तुम्हारा घर (मन्दिर) जला देंगे। वे तुम्हें इस तरह दण्ड देंगे कि सभी अन्य स्त्रियाँ देख सकें। मैं तुम्हारा वेश्या की तरह रहना बन्द कर दूँगा। मैं तुम्हें अपने प्रेमियों को धन देने से रोक दूँगा। {16:42} तब मैं क्रोधित और ईष्यालु होना छोड़ दूँगा। मैं शान्त हो जाऊँगा। मैं फिर कभी क्रोधित नहीं होऊँगा। {16:43} ये सारी बातें क्यों होंगी क्योंकि तुमने वह याद नहीं रखा कि तुम्हारे साथ बचपन में क्या घटित हुआ था। तुमने वे सभी बुरे पाप किये और मुझे क्रोधित किया। इसलिये उन बुरे पापों के लिये मुझे तुमको दण्ड देना पड़ा। किन्तु तुमने और भी अधिक भयंकर योजनाएँ बनाई।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:44} “तुम्हारे बारे में बात करने वाले सब लोगों के पास एक और बात भी कहने के लिये होगी। वे कहेंगे, ‘माँ की तरह ही पुत्री भी है।’ {16:45} तुम अपनी माँ की पुत्री हो। तुम अपने पति या बच्चों का ध्यान नहीं रखती हो। तुम ठीक अपनी बहन के समान हो। तुम दोनों ने अपने पतियों तथा बच्चों से घृणा की। तुम ठीक अपने माता — पिता की तरह हो। तुम्हारी माँ हित्ती थी और तुम्हारा पिता एमोरी था। {16:46} तुम्हारी बड़ी बहन शोमरोन थी। वह तुम्हारे उत्तर में अपने पुत्रियों (नगरों) के साथ रहती थी और तुम्हारी छोटी बहन सदोम की थी। वह अपनी पुत्रियों (नगरों) के साथ तुम्हारे दक्षिण में रहती थी! {16:47} तुमने वे सभी भयंकर पाप किये जो उन्होंने किये। किन्तु तुमने वे काम भी किये जो उनसे भी बुरे थे! {16:48} मैं यहोवा और स्वामी हूँ। मैं सदा जीवित हूँ और अपनी जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि तुम्हारी बहन सदोम और उसकी पुत्रियों ने कभी उतने बुरे काम नहीं किये जितने तुमने और तुम्हारी पुत्रियों ने किये।” {16:49} परमेश्वर ने कहा, “तुम्हारी बहन सदोम और उसकी पुत्रियाँ घमण्डी थीं। उनके पास आवश्यकता से अधिक खाने को था और उनके पास बहुत अधिक समय था। वे दीन — असहाय लोगों की सहायता नहीं करती थीं। {16:50} सदोम और उसकी पुत्रियाँ बहुत अधिक घमण्डी हो गई और मेरे सामने भयंकर पाप करने लगीं। जब मैंने उन्हें उन कामों को करते देखा तो मैंने दण्ड दिया।” {16:51} परमेश्वर ने कहा, “शोमरोन ने उन पापों का आधा किया जो तुमने किये। तुमने शोमरोन की अपेक्षा बहुत अधिक भयंकर पाप किये! तुमने अपनी बहनों की अपेक्षा अत्याधिक भयंकर पाप किये हैं! सदोम और शोमरोन की तुलना करने पर, वे तुमसे अच्छी लगती हैं। {16:52} इसलिए तुम्हें लज्जित होना चाहिए। तुमने अपनी बहनों की, तुलना में, अपने से अच्छी लगनेवाली बनाया है। तुमने भयंकर पाप किये हैं अत: तुम्हें लज्जित होना चाहिए। {16:53} परमेश्वर ने कहा, “मैंने सदोम और उसके चारों ओर के नगरों को नष्ट किया। मैंने शोमरोन और इसके चारों ओर के नगरों को नष्ट किया। यरूशलेम, मैं तुम्हें नष्ट करूँगा। किन्तु मैं उन नगरों को फिर से बनाऊँगा। यरूशलेम, मैं तुमको भी फिर से बनाऊँगा {16:54} मैं तुम्हें आराम दूँगा। तब तुम उन भयंकर पापों को याद करोगे जो तुमने किये तथा तुम लज्जित होगे। {16:55} इस प्रकार तुम और तुम्हारी बहनें फिर से बनाई जाएंगी। सदोम और उसके चारों ओर के नगर, शोमरोन और उसके चारों ओर के नगर तथा तुम और तुम्हारे चारों ओर के नगर फिर से बनाए जाएंगे।” {16:56} परमेश्वर ने कहा, “अतीत काल में तुम घमण्डी थीं और अपनी बहन सदोम की हँसी उड़ाती थीं। किन्तु तुम वैसा फिर नहीं कर सकोगी। {16:57} तुमने यह दण्डित होने से पहले अपने पड़ोसियों द्वारा हँसी उड़ाना आरम्भ किये जाने के पहले, किया था। एदोम की पुत्रियाँ (नगर) तथा पलिश्ती अब तुम्हारी हँसी उड़ा रही हैं। {16:58} अब तुम्हें उन भयंकर पापों के लिये कष्ट उठाना पड़ेगा जो तुमने किये।” यहोवा ने ये बातें कहीं। {16:59} मेरे स्वामी यहोवा ने ये सब चीजें कहीं, “तुमने अपने विवाह की प्रतिज्ञा भंग की। तुमने हमारी वाचा का आदर नहीं किया। {16:60} किन्तु मुझे वह वाचा याद है जो उस समय की गई थी जब तुम बच्ची थीं। मैंने तुम्हारे साथ वाचा की थी जो सदैव चलती रहने वाली थी। {16:61} मैं तुम्हारी बहनों को तुम्हारे पास लाऊँगा और मैं उन्हें तुम्हारी पुत्रियाँ बनाऊँगा। यह हमारी वाचा में नहीं था, किन्तु मैं यह तुम्हारे लिये करुँगा। तब तुम उन भयंकर पापों को याद करोगी, जिन्हें तुमने किया और तुम लज्जित होगी। {16:62} अत: मैं तुम्हारे साथ वाचा करूँगा, और तुम जानोगी कि मैं यहोवा हूँ। {16:63} मैं तुम्हारे प्रति अच्छा रहूँगा जिससे तुम मुझे याद करोगी और उन पापों के लिये लज्जित होगी जो तुमने किये। मैं तुम्हें शुद्ध करुँगा और तुम्हें फिर कभी लज्जित नहीं होना पड़ेगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {17:1} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {17:2} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के परिवार को यह कहानी सुनाओ। उनसे पूछो कि इसका तात्पर्य क्या है {17:3} उनसे कहो: “‘एक विशाल उकाब (नबूकदनेस्सर) विशाल पंख सहित लबानोन में आया। उकाब के चितकबरे लम्बें पंख थे। {17:4} उस उकाब ने उस विशाल देवदार वृक्ष (लबानोन) के माथे को तोड़ डालाऔर उसे कनान ले गया। उकाब ने व्यापारियों के नगर में उस शाखा को रखा। {17:5} तब उकाब ने बीजों (लोगों) में से कुछ को कनान से लिया। उसने उन्हें अच्छी भूमि में बोया। उसने एक अच्छी नदी के सहारे उन्हें बोया। {17:6} बीज उगे और वे अंगूर की बेल बने। यह बेल अच्छी थी। बेल ऊँची नहीं थी। किन्तु यह एक बड़े क्षेत्र को ढकने के लिये फैल गई। बेल के तने बने और छोटी बेलें बहुत लम्बी हो गई। {17:7} तब दूसरे बड़े पंखों वाले उकाब ने अंगूर की बेल को देखा। उकाब के लम्बें पंख थे। अंगूर की बेल चाहती थी कि यह नया उकाब उसकी देख — भाल करे। इसलिये इसने अपनी जड़ों को इस उकाब की ओर फैलाया। इसकी शाखायें इस उकाब की ओर फैलीं। इसकी शाखायें इस उकाब की ओर फलीं। इसकी शाखायें उस खेत से दूर फैली जहाँ यह बोई गई थी। अगूंर की बेल चाहती थी कि नया उकाब इसे पानी दे। {17:8} अगूंर की बेल अच्छे खेत में बोई गई थी। यह प्रभूत जल के पास बोई गई थी। यह शाखायें और फल उत्पन्न कर सकती थी। यह एक बहुत अच्छी अगूंर की बेल हो सकती थी।’” {17:9} मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही, “क्या तुम समझते हो कि बेल सफल होगी? नहीं! नया उकाब बेल को जमीन से उखाड़ देगा। और पक्षी बेल की जड़ों को तोड़ देगा। वह सारे अंगूर खा जाएगा। तब नयी पत्तियाँ सूखेंगी और मर जाएंगी। वह बेल बहुत कमजोर होगी। इस बेल को जड़ से उखाड़ने के लिये शक्तिशाली अस्त्र — शस्त्र या शक्तिशाली राष्ट्र की जरूरत नहीं होगी। {17:10} क्या यह बेल वहाँ बढ़ेगी जहाँ बोई गई हैं नहीं, गर्म पुरवाई चलेगी और बेल सूखेगी और मर जाएगी। यह वहीं मरेगी जहाँ यह बोई गई थी।” {17:11} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {17:12} “इस कहानी की व्याख्या इस्राएल के लोगों के बीच करो, वे सदा मेरे विरुद्ध जाते हैं। उनसे यह कहो: पहला उकाब (नबूकदनेस्सर) बाबुल का राजा है। वह यरूशलेम आया और राजा तथा अन्य प्रमुखों को ले गया। वह उन्हें बाबुल लाया। {17:13} तब नबूकदनेस्सर ने राजा के परिवार के एक व्यक्ति से साथ सन्धि की। नबूकदनेस्सर ने उस व्यक्ति को प्रतिज्ञा करने के लिये विवश किया। इस प्रकार इस व्यक्ति ने नबूकदनेस्सर के प्रति राजभक्त रहने की प्रतिज्ञा की। नबूकदनेस्सर ने इस व्यक्ति को यहूदा का नया राजा बनाया। तब उसने सभी शक्तिशाली व्यक्तियों को यहूदा से बाहर निकाला। {17:14} इस प्रकार यहूदा एक दुर्बल राज्य बन गया, जो राजा नबूकदनेस्सर के विरुद्ध नहीं उठ सकता था। यहूदा के नये राजा के साथ नबूकदनेस्सर ने जो सन्धि की थी उसका पालन करने के लिये लोग विवश किये गये। {17:15} किन्तु इस नये राजा ने किसी भी प्रकार नबूकदनेस्सर के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयत्न किया। उसने सहायता माँगने के लिये मिस्र को दूत भेजे। नये राजा ने बहुत से घोड़े और सैनिक मांगे। इस दशा में, क्या तुम समझते हो कि यहूदा का राजा सफल होगा क्या तुम समझते हो कि नये राजा के पास पर्याप्त शक्ति होगी कि वह सन्धि को तोड़कर दण्ड से बच सकेगा” {17:16} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर वचन देता हूँ कि यह नया राजा बाबुल में मरेगा! नबूकदनेस्सर ने इस व्यक्ति को यहूदा का नया राजा बनाया। किन्तु इस व्यक्ति ने नबूकदनेस्सर के साथ की हुई अपनी प्रतिज्ञा तोड़ी। इस नये राजा ने सन्धि की उपेक्षा की। {17:17} मिस्र का राजा यहूदा के राजा की रक्षा करने में समर्थ नहीं होगा। वह बड़ी संख्या में सैनिक भेज सकता है किन्तु मिस्र की महान शक्ति यहूदा की रक्षी नहीं कर सकेगी। नबूकदनेस्सर की सेनायें नगर पर अधिकार के लिये कच्ची सड़कें और मिट्टी की दीवारें बनाएंगी। बड़ी संख्या में लोग मरेंगे। {17:18} किन्तु यहूदा का राजा बचकर निकल नहीं सकेगा। क्यों क्योंकि उसने अपने सन्धि की उपेक्षा की। उसने नबूकदनेस्सर को दिये अपने वचन को तोड़ा।” {17:19} मेरा स्वामी यहोवा यह वचन देता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं यहूदा के राजा को दण्ड दूँगा। क्यों क्योंकि उसने मेरी चेतावनियों की उपेक्षा की। उसने हमारी सन्धि को तोड़ा। {17:20} मैं अपना जाल फैलाऊँगा और वह इसमें फंसेगा। मैं उस बाबुल लाऊँगा तथा मैं उसे उस स्थान में दण्ड दूँगा। मैं उसे दण्ड दूँगा क्योंकि वह मेरे विरुद्ध उठा। {17:21} मैं उसकी सेना को नष्ट करूँगा। मैं उसके सर्वोत्तम सैनिकों को नष्ट करूँगा और बचे हुए लोगों को हवा में उड़ा दूँगा। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और मैंने ये बातें तुमसे कही थीं।” {17:22} मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही थीं: “मैं लम्बें देवदार के वृक्ष से एक शाखा लूँगा। मैं वृक्ष की चोटी से एक छोटी शाखा लूँगा। और मैं स्वयं उसे बहुत ऊँचे पर्वत पर बोऊँगा। {17:23} मैं स्वयं इसे इस्राएल में ऊँचे पर्वत पर लगाऊँगा। यह शाखा एक वृक्ष बन जाएगी। इसकी शाखायें निकलेंगी और इसमें फल लगेंगे। यह एक सुन्दर देवदार का वृक्ष बन जाएगा। अनेक पक्षी इसकी शाखाओं पर बैठा करेंगे। अनेक पक्षी इसकी शाखाओं के नीचे छाया में रहेंगे। {17:24} तब अन्य वृक्ष उसे जानेंगे कि मैं ऊँचे वृक्षों को भूमि पर गिराता हूँ। और मैं छोटे वृक्षों को बढ़ाता और उन्हें लम्बा बनाता हूँ। मैं हरे वृक्षों को सुखा देता हूँ। और मैं सूखे वृक्षों को हरा करता हूँ। मैं यहोवा हूँ। यदि मैं कहूँगा कि मैं कुछ करुँगा तो मैं उसे अवश्य करूँगा!” {18:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {18:2} “तुम लोग इस कहावत को दुहराते रहते हो। क्यों तुम कहते हो: ‘पूर्वजों ने खट्टे अंगूर खाये, किन्तु बच्चों को खट्टा स्वाद मिला। तुम सोचते हो कि तुम पाप कर सकते हो और भविष्य में कुछ व्यक्ति इसके लिये दण्डित होंगे।’” {18:3} किन्तु मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि इस्राएल में लोग अब भविष्य में इस कहावत को कभी सत्य नहीं समझेंगे! {18:4} मैं सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करुँगा। यह महत्वपूर्ण नहीं होगा कि वह व्यक्ति माता — पिता है अथवा सन्तान। जो व्यक्ति पाप करेगा वह व्यक्ति मरेगा! {18:5} “यदि कोई व्यक्ति भला है, तो वह जीवित रहेगा। वह भला व्यक्ति लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करता है। {18:6} वह भला व्यक्ति पहाड़ों पर नहीं जाता और असत्य देवताओं को चढ़ाए गए भोजन में कोई हिस्सा नहीं बंटाता। वह इस्राएल में उन गन्दें देवताओं की मूर्तियों की स्तुति नहीं करता। वह अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ व्यभिचार का पाप नहीं करता। वह अपनी पत्नी के साथ, उसके मासिक धर्म के समय, शारीरिक सम्बंध नहीं करता। {18:7} वह भला व्यक्ति लोगों से अनुचित लाभ नहीं उठाता। यदि कोई व्यक्ति उससे मुद्रा ऋण लेता है तो वह भला व्यक्ति गिरवी रखकर दूसरे व्यक्ति को मुद्रा देता है और जब वह व्यक्ति उसे भुगतान कर देता है तो भला व्यक्ति उसे गिरवी वस्तु वापिस कर देता है। भला व्यक्ति भूखे लोगों को भोजन देता है और वह उन लोगों को वस्त्र देता है जिन्हें उनकी आवश्यकता है। {18:8} यदि कोई मुद्रा ऋण लेना चाहता है तो भला व्यक्ति उसे ऋण देता है। वह उस ऋण का ब्याज नहीं लेता। भला व्यक्ति कुटिल होने से इन्कार करता है। वह हर व्यक्ति के प्रति सदा भला रहता है। लोग उस पर विश्वास कर सकते हैं। {18:9} वह मेरे नियमों का पालन करता है। वह मेरे निर्णयों को समझता है और भला एवं विश्वसनीय होना सीखता है। क्योंकि वह भला व्यक्ति है, अतः वह जीवित रहेगा। {18:10} “किन्तु उस व्यक्ति का कोई ऐसा पुत्र हो सकता है, जो उन अच्छे कामों में से कुछ भी न करता हो। पुत्र चीज़ें चुरा सकता है तथा लोगों की हत्या कर सकता है। {18:11} पुत्र इन बुरे कामों में से कोई भी काम कर सकता है। वह पहाड़ों पर जा सकता है और असत्य देवताओं को चढ़ाए गए भोजन में हिस्सा बटा सकता है। वह पापी पुत्र अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ व्यभिचार करने का पाप कर सकता है। {18:12} वह गरीब और असहाय लोगों के साथ बुरा व्यवहार कर सकता है। वह लोगों से अनुचित लाभ उठा सकता है। वह गिरवी चीज़ को तब भी न लौटाये जब कोई व्यक्ति अपने ऋण का भुगतान कर चुका हो। वह पापी पुत्र उन गन्दी देवमूर्तियों की प्रार्थना कर सकता है एवं अन्य भयंकर पाप भी कर सकता हैं। {18:13} किसी व्यक्ति को उस पापी पुत्र से ऋण लेने की आवश्यकता हो सकती है। वह पुत्र उसे मुद्रा ऋण दे सकता है, किन्तु वह उस व्यक्ति को उस ऋण पर ब्याज देने के लिये विवश करेगा। अत: वह पापी पुत्र जीवित नहीं रहेगा। उसने भयंकर पाप किये अत: मार दिया जाएगा और अपनी मृत्यु के लिये वह स्वयं ही उत्तरदायी है। {18:14} “संभवत: उस पापी पुत्र का भी एक पुत्र हो। किन्तु यह पुत्र अपने पिता द्वारा किये गए पाप — कर्मों को देख सकता है और वह अपने पिता की तरह रहने से इन्कार कर सकता है। वह भला व्यक्ति लोगों के साथ भला व्यवहार करता है। {18:15} वह व्यक्ति पहाड़ों पर नहीं जाता, न ही असत्य देवताओं को चढ़ाए गए भोजन में हिस्सा बटाता है। वह इस्राएल में उन गन्दी देवमूर्तियों की प्रार्थना नहीं करता। वह अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ व्यभिचार का पाप नहीं करता। {18:16} वह भला पुत्र लोगों से अनुचित लाभ नहीं उठाता। यदि कोई व्यक्ति उससे ऋ ण लेता है तब भला पुत्र चीज गिरवी रखता है और उस व्यक्ति को मुद्रा दे देता है और जब वह व्यक्ति वापस भुगतान करता है तो भला व्यक्ति गिरवी चीज़ वापस कर देता है। भला व्यक्ति भूखों को भोजन देता है और वह उन लोगों को वस्त्र देता है जिन्हें उसकी आवश्यकता है। {18:17} वह गरीबों की सहायता करता है यदि कोई व्यक्ति ऋण लेना चाहता है तो भला पुत्र उसे मुद्रा उधार दे देता है और वह उस ऋण पर ब्याज नहीं लेता। भला पुत्र मेरे नियमों का पालन करता है और मेरे नियम के अनुसार चलता है! वह भला पुत्र अपने पिता के पापों के कारण मारा नहीं जायेगा! वह भला पुत्र जीवित रहेगा। {18:18} पिता लोगों को चोट पहुँचा सकता है और चीज़ें चुरा सकता है! वह मेरे लोगों के लिये कभी कुछ अच्छा कार्य नहीं कर सकता। वह पिता अपने पापों के कारण मरेगा। किन्तु पुत्र अपने पिता के पापों के लिये दण्डित नहीं होगा। {18:19} “तुम पूछ सकते हो, ‘पिता के पाप के लिये पुत्र दण्डित क्यों नहीं होगा’ इसका कारण यह है कि पुत्र भला रहा और उसने अच्छे काम किये! उसने बहुत सावधानी से मेरे नियमों का पालन किया! अत: वह जीवित रहेगा। {18:20} जो व्यक्ति पाप करता है वही व्यक्ति मार डाला जाता है। एक पुत्र अपने पिता के पापों के लिये दण्डित नहीं होगा और एक पिता अपने पुत्र के पापों के लिये दण्डित नहीं होगा। एक भले व्यक्ति की भलाई केवल उसकी निजी होती है और बुरे व्यक्ति की बुराई केवल उसी की होती है। {18:21} “इस स्थिति में यदि कोई बुरा व्यक्ति अपना जीवन — क्रम परिवर्तित करता है तो वह जीवित रहेगा, मरेगा नहीं वह व्यक्ति अपने किये पापों को फिर करना छोड़ सकता है। वह बहुत सावधानी से मेरे सभी नियमों का पालन करना आरम्भ कर सकता है। वह न्यायशील और भला हो सकता है। {18:22} परमेश्वर उसके उन सभी पापों को याद नहीं रखेगा जिन्हें उसने किये। परमेश्वर केवल उसकी भलाई को याद करेगा, अत: वह व्यक्ति जीवित रहेगा।” {18:23} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं बुरे लोगों को मरने देना नहीं चाहता। मैं चाहता हूँ कि वे अपने जीवन को बदलें, जिससे वे जीवित रह सकें! {18:24} “ऐसा भी हो सकता है, कि भला व्यक्ति भला न रह जाय। वह अपने जीवन को बदल सकता है और उन भयंकर पापों का करना आरम्भ कर सकता है जिन्हें बुरे लोगों ने भूतकाल में किया था। (वह बुरा व्यक्ति बदल गया अत: वह जीवित रह सकता है।) अत: यदि वह भला व्यक्ति बदलता है और बुरा बन जाता है तो परमेश्वर उस व्यक्ति के किये अच्छे कामों को याद नहीं रखेगा। परमेश्वर यही याद रखेगा कि वह व्यक्ति उसके विरुद्ध हो गया और उसने पाप करना आरम्भ किया। इसलिये वह व्यक्ति अपने पापों के कारण मरेगा।” {18:25} परमेश्वर ने कहा, “तुम लोग कह सकते हो, ‘परमेश्वर हमारा स्वामी न्यायपूर्ण नहीं है!’ किन्तु इस्राएल के परिवारों, सुनो। मैं उसी प्रकार का हूँ। तुम लोग ऐसे हो कि जरुर बदलोगे! {18:26} यदि एक भला व्यक्ति बदलता है और पापी बनता है तो उसे अपने किये गये बुरे कामों के कारण मरना ही चाहिए। {18:27} यदि कोई पापी व्यक्ति बदलता है और भला तथा न्याय प्रिय बनता है तो वह अपने जीवन को बचाएगा। वह जीवित रहेगा! {18:28} उस व्यक्ति ने देखा कि वह कितना बुरा था और मेरे पास लौटा। उसने उन बुरे पापों को करना छोड़ दिया जो उसने भूतकाल में किये थे। अत: वह जीवित रहेगा! वह मरेगा नहीं!” {18:29} इस्राएल के लोगों ने कहा, “यह न्यायपूर्ण नहीं है! मेरा स्वामी यहोवा न्यायपूर्ण नहीं है!” परमेश्वर ने कहा, “मैं उसी प्रकार का हूँ। तुम ऐसे लोग हो जो बदलोगे ही! {18:30} क्यों क्योंकि इस्राएल के परिवार, मैं हर एक व्यक्ति के साथ न्याय केवल उसके उन कर्मों के लिये करुँगा जिन्हें वह व्यक्ति करता है!” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं: “इसलिये मेरे पास लौटो! पाप करना छोड़ो! उन भयंकर चीजों (मूर्तियों) को अपने द्वारा पाप मत करने दो! {18:31} उन सभी भयंकर चीज़ों (मूर्तियों) को फेंक दो जिन्हें तुमने बनाया, वे तुमसे केवल पाप करवाते हैं! अपने हृदय और आत्मा को बदलो! इस्राएल के लोगों, तुम अपने को क्यों मर जाने देना चाहते हो {18:32} मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता! तुम हमारे पास आओ और रहो!” वे बातें मेरे स्वामी यहोवा ने कहीं। {19:1} यहोवा ने मुझसे कहा, “तुम्हें इस्राएल के प्रमुखों के विषय में इस करुण — गीत को गाना चाहिये। {19:2} “‘कैसी सिंहनी है तुम्हारी माँ वह सिहों के बीच एक सिंहनी थी। वह जवान सिंहों से घिरी रहती थी और अपने बच्चों का लालन पालन करती थी। {19:3} उन सिंह — शावकों में से एक उठता है वह एक शक्तिशाली युवा सिंह हो गया है। उसने अपना भोजन पाना सीख लिया है। उसने एक व्यक्ति को मारा और खा गया। {19:4} “‘लोगों ने उसे गरजते सुना और उन्होंने उसे अपने जाल में फँसा लिया! उन्होंने उसके मुँह में नकेल डालीं और युवा सिंह को मिस्र ले गये। {19:5} “‘सिंह माता को आशा थी कि सिंह — शावक प्रमुख बनेगा। किन्तु अब उसकी सारी आशायें लुप्त हो गई। इसलिये अपने शावकों में से उसने एक अन्य को लिया। उसे उसने सिंह होने का प्रशिक्षण दिया। {19:6} वह युवा सिंहों के साथ शिकार को निकला। वह एक बलवान युवा सिंह बना। उसने अपने भोजन को पकड़ना सीखा। उसने एक आदमी को मारा और उसे खाया। {19:7} उसने महलों पर आक्रमण किया। उसने नगरों को नष्ट किया। उस देश का हर एक व्यक्ति तब भय से अवाक होता था। जब वह उसका गरजना सुनता था। {19:8} तब उसके चारों ओर रहने वाले लोगों ने उसके लिये जाल बिछाया और उन्होंने उसे अपने जाल में फँसा लिया। {19:9} उन्होंने उस पर नकेल लगाई और उसे बन्द कर दिया। उन्होंने उसे अपने जाल में बन्द रखा। इस प्रकार उसे वे बाबुल के राजा के पास ले गए। अब, तुम इस्राएल के पर्वतों पर उसकी गर्जना सुन नहीं सकते। {19:10} “‘तुम्हारी माँ एक अँगूर की बेल जैसी थी, जिसे पानी के पास बोया गया था। उसके पास काफी जल था, इसलिये उसने अनेक शक्तिशाली बेलें उत्पन्न कीं। {19:11} तब उसने एक बड़ी शाखा उत्पन्न की, वह शाखा टहलने की छड़ी जैसी थी। वह शाखा राजा के राजदण्ड जैसी थी। बेल ऊँची, और ऊँची होती गई। इसकी अनेक शाखायें थीं और वह बादलों को छूने लगी। {19:12} किन्तु बेल को जड़ से उखाड़ दिया गया, और उसे भूमि पर फेंक दिया गया। गर्म पुरवाई हवा चली और उसके फलों को सुखा दिया शक्तिशाली शाखायें टूट गईं, और उन्हें आग में फेंक दिया गया। {19:13} “‘किन्तु वह अंगूर की बेल अब मरूभूमि में बोयी गई है। यह बहुत सूखी और प्यासी धरती है। {19:14} विशाल शाखा से आग फैली। आग ने उसकी सारी टहनियों और फलों को जला दिया। अत: कोई सहारे की शक्तिशाली छड़ी नहीं रही। कोई राजा का राजदण्ड न रहा।’ यह मृत्यु के बारे में करुण — गीत था और यह मृत्यु के बारे में करुणगीत के रूप में गाया गया था।” {20:1} एक दिन इस्राएल के अग्रजों (प्रमुखों) में से कुछ मेरे पास यहोवा की राय पूछने आए। यह पाँचवें महीने (अगस्त) का दसवाँ दिन और देश — निकाले का सातवाँ वर्ष था। अग्रज (प्रमुख) मेरे सामने बैठे। {20:2} तब यहोवा का वचन मेरे पास आया। उसने कहा, {20:3} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के अग्रजों (प्रमुखों) से बात करो। उनसे कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा, ये बातें बताता है: क्या तुम लोग मेरी सलाह मांगने आये हो यदि तुम लोग आए हो तो मैं तुम्हें यह नहीं दूँगा। मेरे स्वामी यहोवा ने यह बात कही।’ {20:4} क्या तुम्हें उनका निर्णय करना चाहिए मनुष्य के पुत्र क्या तुम उनका निर्णय करोगे तुम्हें उन्हें उन भयंकर पापों के बारे में बताना चाहिए जो उनके पूर्वजों ने किये थे। {20:5} तुम्हें उनसे कहना चाहिए, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: जिस दिन मैंने इस्राएल को चुना, मैंने अपना हाथ याकूब के परिवार के ऊपर उठाया और मैंने मिस्र देश में उनसे एक प्रतिज्ञा की। मैंने अपना हाथ उठाया और कहा: “मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।” {20:6} उस दिन मैंने तुम्हें मिस्र से बाहर लाने का वचन दिया था और मैं तुमको उस प्रदेश में लाया जिसे मैं तुम्हें दे रहा था। वह एक अच्छा देश था जो अनेक अच्छी चीजों से भरा था। यह सभी देशों से अधिक सुन्दर था! {20:7} “‘मैंने इस्राएल के परिवार से उनकी भयंकर देवमूर्तियों को फेंकने के लिये कहा। मैंने, उन मिस्र की गन्दी देवमूर्तियों के साथ उन्हें गन्दा न होने के लिये कहा। “मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।” {20:8} किन्तु वे मेरे विरुद्ध हो गये और उन्होंने मेरी एक न सुनी। उन्होंने अपनी भयंकर देवमूर्तियों को नहीं फेंका। उन्होंने अपनी गन्दी देवमूर्तियों को मिस्र में नहीं छोड़ा। इसलिये मैंने (परमेश्वर ने) उन्हें मिस्र में नष्ट करने का निर्णय किया अर्थात् अपने क्रोध की पूरी शक्ति का अनुभव कराना चाहा। {20:9} किन्तु मैंने उन्हें नष्ट नहीं किया। मैं लोगों से जहाँ वे रह रहे थे पहले ही कह चुका था कि मैं अपने लोगों को मिस्र से बाहर ले जाऊँगा। मैं अपने अच्छे नाम को समाप्त नहीं करना चाहता, इसलिये मैंने उन लोगों के सामने इस्राएलियों को नष्ट नहीं किया। {20:10} मैं इस्राएल के परिवार को मिस्र से बाहर लाया। मैं उन्हें मरूभूमि में ले गया। {20:11} तब मैंने उनको अपने नियम दिये। मैंने उनको सारे नियम बताये। यदि कोई व्यक्ति उन नियमों का पालन करेगा तो वह जीवित रहेगा। {20:12} मैंने उनको विश्राम के सभी विशेष दिनों के बारे में भी बताया। वे पवित्र दिन उनके और मेरे बीच विशेष प्रतीक थे। वे यह संकेत करते थे कि मैं यहोवा हूँ और मैं उन्हें अपने विशेष लोग बना रहा हूँ। {20:13} “‘किन्तु इस्राएल का परिवार मरूभूमि में मेरे विरुद्ध उठ खड़ा हुआ। उन्होंने मेरे नियमों का अनुसरण नहीं किया। उन्होंने मेरे नियमों का पालन करने से इन्कार किया और वे नियम अच्छे हैं। यदि कोई व्यक्ति उनका पालन करेगा तो वह जीवित रहेगा। उन्होंने मेरे विशेष विश्राम के दिनों के प्रति ऐसा व्यवहार किया मानो उनका कोई महत्व न हो। वे उन दिनों में अनेकों बार काम करते रहे। मैंने मरूभूमि में उन्हें नष्ट करने का निश्चय किया अर्थात् अपने क्रोध की पूरी शक्ति का अनुभव उन्हें कराना चाहा। {20:14} किन्तु मैंने उन्हें नष्ट नहीं किया। अन्य राष्ट्रों ने मुझे इस्राएल को मिस्र से बाहर लाते देखा। मैं अपने अच्छे नाम को समाप्त नहीं करना चाहता था, इसलिए मैंने उन राष्ट्रों के सामने इस्राएल को नष्ट नहीं किया। {20:15} मैंने मरूभूमि में उन लोगों को एक और वचन दिया। मैंने वचन दिया कि मैं उन्हें उस प्रदेश में नहीं लाऊँगा जिसे मैं उन्हें दे रहा हूँ। वह अनेक चीजों से भरा एक अच्छा प्रदेश था। यह सभी देशों से अधिक सुन्दर था। {20:16} “‘इस्राएल के लोगों ने मेरे नियमों का पालन करने से इन्कार किया। उन्होंने मेरे नियमों का अनुसरण नहीं किया। उन्होंने मेरे विश्राम के दिनों को ऐसे लिया मानो वे महत्व नहीं रखते। उन्होंने ये सभी काम इसलिये किये कि उनका हृदय उन गन्दी देवमूर्तियों का हो चुका था। {20:17} किन्तु मुझे उन पर करूणा आई, अत: मैंने उन्हें नष्ट नहीं किया। मैंने उन्हें मरुभूमि में पूरी तरह नष्ट नहीं किया। {20:18} मैंने उनके बच्चों से बाते कीं। मैंने उनसे कहा, “अपने माता — पिता जैसे न बनो। उनकी गन्दी देवमूर्तियों से अपने को गन्दा न बनाओ। उनके नियमों का अनुसरण न करो। उनके आदेशों का पालन न करो। {20:19} मैं यहोवा हूँ। मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मेरे नियमों का पालन करो। मेरे आदेशों को मानो। वह काम करो जो मैं कहूँ। {20:20} यह प्रदर्शित करो कि मेरे विश्राम के दिन तुम्हारे लिये महत्वपूर्ण हैं। याद रखो कि वे तुम्हारे और हमारे बीच विशेष प्रतीक हैं। मैं यहोवा हूँ और वे पवित्र दिन यह संकेत करते हैं कि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ।” {20:21} “‘किन्तु वे बच्चे मेरे विरुद्ध हो गये। उन्होंने मेरे नियमों का पालन नहीं किया। उन्होंने मेरे आदेश नहीं माने। उन्होंने वे काम नहीं किये जो मैंने उनसे कहा वे अच्छे नियम थे। यदि कोई उनका पालन करेगा तो वह जीवित रहेगा। उन्होंने मेरे विश्राम के दिनों को ऐसे लिया मानों वे महत्व न रखते हों। इसलिये मैंने उन्हें मरूभूमि में पूरी तरह नष्ट करने का निश्चय किया जिससे वे मेरे क्रोध की पूरी शक्ति का अनुभव कर सकें। {20:22} लेकिन मैंने अपने को रोक लिया। अन्य राष्ट्रों ने मुझे इस्राएल को मिस्र से बाहर लाते देखा। जिससे मेरा नाम अपवित्र न हो। इसलिये मैंने उन अन्य देशों के सामने इस्राएल को नष्ट नहीं किया। {20:23} इसलिये मैंने मरुभूमि में उन्हें एक और वचन दिया। मैंने उन्हें विभिन्न राष्ट्रों में बिखेरने और दूसरे अनेकों देशों में भेजने की प्रतीज्ञा की। {20:24} “‘इस्राएल के लोगों ने मेरे आदेश का पालन नहीं किया। उन्होंने मेरे नियमों को मानने से इन्कार कर दिया। उन्होंने मेरे विशेष विश्राम के दिनों को ऐसे लिया मानो वे महत्व न रखते हों। उन्होंने अपने पूर्वजों की गन्दी देवमूर्तियों को पूजा। {20:25} इसलिये मैंने उन्हें वे नियम दिये जो अच्छे नहीं थे। मैंने उन्हें वे आदेश दिये जो उन्हें सजीव नहीं कर सकते थे। {20:26} मैंने उन्हें अपनी भेंटों से अपने आप को गन्दा बनाने दिया। उन्होंने अपने प्रथम उत्पन्न बच्चों तक की बलि चढ़ानी आरम्भ कर दी। इस प्रकार मैंने उन लोगों को नष्ट करना चाहा। तब वे समझे कि मैं यहोवा हूँ।’ {20:27} अत: मनुष्य के पुत्र, अब इस्राएल के परिवार से कहो। उनसे कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा ये बातें कहता है: इस्राएल के लोगों ने मेरे विरुद्ध बुरी बातें कहीं और मेरे विरुद्ध बुरी योजनायें बनाई। {20:28} किन्तु मैं इसके होते हुए भी, उन्हें उस प्रदेश में लाया जिसे देने का वचन मैंने दिया था। उन्होंने उन पहाड़ियों और हरे वृक्षों को देखा अत: वे उन सभी स्थानों पर पूजा करने गये। वे अपनी बलियाँ तथा क्रोध — भेंटें उन सभी स्थानों को ले गए। उन्होंने अपनी वे बलियाँ चढ़ाई जो मधुर गन्ध वाली थी और उन्होंने अपनी पेय — भेंटे उन स्थानों पर चढ़ाई। {20:29} मैंने इस्राएल के लोगों से पूछा कि वे उन ऊँचे स्थान पर क्यों जा रहे हैं। लेकिन वे ऊँचे स्थान आज भी वहाँ हैं।’ {20:30} परमेश्वर ने कहा, “इस्राएल के लोगों ने उन सभी बुरे कामों को किया। अत: इस्राएल के लोगों से बात करो। उनसे कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: तुम लोगों ने उन कामों को करके अपने को गन्दा बना लिया है जिन्हें तुम्हारे पूर्वजों ने किया। तुमने एक वेश्या की तरह काम किया है। तुमने उन भयंकर देवताओं के साथ मुझे छोड़ दिया है जिनकी पूजा तुम्हारे पूर्वज करते थे। {20:31} तुम उसी प्रकार की भेंट चढ़ा रहे हो। तुम अपने बच्चों को आग में (असत्य देवताओं की भेंट के रूप में) डाल रहे हो। तुम अपने को आज भी गन्दी देवमूर्तियों से गन्दा बना रहे हो! क्या तुम सचमुच सोचते हो कि मैं तुम्हें अपने पास आने दूँगा और अपनी सलाह मांगने दूँगा मैं यहोवा और स्वामी हूँ। मैं अपने जीवन की शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर नहीं दूँगा और तुम्हें सलाह नहीं दूँगा! {20:32} तुम कहते रहते हो कि तुम अन्य राष्ट्रों की तरह होओगे। तुन उन राष्ट्रों के लोगों की तरह रहते हो। तुम लकड़ी और पत्थर के खण्डों (देवमूर्तियों) की पूजा करते हो!’” {20:33} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “अपने जीवन की शपथ खाकर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं तुम्हारे ऊपर राजा की तरह शासन करुँगा। मैं अपनी शक्तिशाली भुजाओं को उठाऊँगा और तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध अपना क्रोध प्रकट करुँगा! {20:34} मैं तुम्हें इन अन्य राष्ट्रों से बाहर लाऊँगा। मैंने तुम लोगों को उन राष्ट्रों में बिखेरा। किन्तु मैं तुम लोगों को एक साथ इकट्ठा करुँगा और इन राष्ट्रों से वापस लौटाऊँगा। किन्तु मैं अपनी शक्तिशाली भुजाएं उठाऊँगा और तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध अपना क्रोध प्रकट करुँगा। {20:35} मैं पहले की तरह तुम्हें मरुभूमि में ले चलूँगा। किन्तु यह वह स्थान होगा जहाँ अन्य राष्ट्र रहते हैं। हम आमने — सामने खड़े होंगे और मैं तुम्हारे साथ न्याय करुँगा। {20:36} मैं तुम्हारे साथ वैसा ही न्याय करुँगा जैसा मैंने तुम्हारे पूर्वजों के साथ मिस्र की मरुभूमि में किया था।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {20:37} “मैं तुम्हें अपराधी प्रमाणित करुँगा और साक्षीपत्र के अनुसार तुम्हें दण्ड दूँगा। {20:38} मैं उन सभी लोगों को दूर करुँगा जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए और जिन्होंने मेरे विरुद्ध पाप किये। मैं उन लोगों को तुम्हारी जन्मभूमि से दूर करुँगा। वे इस्राएल देश में फिर कभी नहीं लौटेंगे। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ।” {20:39} इस्राएल के परिवार, अब सुनो, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “यदि कोई व्यक्ति अपनी गन्दी देवमूर्तियों की पूजा करना चाहता है तो उसे जाने दो और पूजा करने दो। किन्तु बाद में यह न सोचना कि तुम मुझसे कोई सलाह पाओगे! तुम मेरे नाम को भविष्य में और अधिक अपवित्र नहीं कर सकोगे! उस समय नहीं, जब तुम अपने गन्दी देवमूर्तियों को भेंट देना जारी रखते हो।” {20:40} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “लोगों को मेरी सेवा के लिये मेरे पवित्र — इस्राएल के ऊँचे पर्वत पर आना चाहिए! इस्राएल का सारा परिवार अपनी भूमि पर होगा वे वहाँ अपने देश में होंगे। यह वह ही स्थान है जहाँ तुम आ सकते हो और मेरी सलाह मांग सकते हो और तुम्हें उस स्थान पर मुझे अपनी भेंट चढ़ाने आना चाहिये। तुम्हें अपनी फसल का पहला भाग वहाँ उस स्थान पर लाना चाहिये। तुम्हें अपनी सभी पवित्र भेंटें वहीं लानी चाहिये। {20:41} तब तुम्हारी भेंट की मधुर गन्ध से प्रसन्न होऊँगा। यह सब होगा जब मैं तुम्हें वापस लाऊँगा। मैंने तुम्हें विभिन्न राष्ट्रों में बिखेरा था। किन्तु मैं तुम्हें एक साथ इकट्ठा करुँगा और तुम्हें फिर से अपने विशेष लोग बनाऊँगा और सभी राष्ट्र यह देखेंगे। {20:42} तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ। तुम यह तब जानोगे जब मैं तुम्हें इस्राएल देश में वापस लाऊँगा। यह वही देश है जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों को दने का वचन दिया था। {20:43} उस देश में तुम उन बुरे पापों को याद करोगे जिन्होंने तुम्हें दोषी बनाया और तुम लज्जित होगे। {20:44} इस्राएल के परिवार! तुमने बहुत बुरे काम किये और तुम लोगों को उन बुरे कामों के कारण नष्ट कर दिया जाना चाहिए। किन्तु अपने नाम की रक्षा के लिये मैं वह दण्ड तुम लोगों को नहीं दूँगा जिसके पात्र तुम लोग हो। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {20:45} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {20:46} “मनुष्य के पुत्र, यहूदा के दक्षिण भाग नेगव की ओर ध्यान दो। नेगव — वन के विरुद्ध कुछ कहो। {20:47} नेगव — वन से कहो, ‘यहोवा के सन्देश को सुनो। मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं: ध्यान दो, मैं तुम्हारे वन में आग लगाने वाला हूँ। आग हर एक हरे वृक्ष और हर एक सूखे वृक्ष को नष्ट करेगी। जो लपटें जलेंगी उन्हें बुझाया नहीं जा सकेगा। दक्षिण से उत्तर तक सारा देश अग्नि से जला दिया जाएगा। {20:48} तब लोग जानेंगे कि मैंने अर्थात यहोवा ने आग लगाई है। आग बुझाई नहीं जा सकेंगी!’” {20:49} तब मैंने (यहेजकेल) ने कहा, “हे मेरे स्वामी यहोवा! यदि मैं इन बातों को कहता हूँ तो लोग कहेंगे कि मैं उन्हें केवल कहानियाँ सुना रहा हूँ। वे नहीं सोचेंगे कि यह सचमुच घटित होगा!” {21:1} इसलिये यहोवा का वचन मुझे फिर मिला। उसने कहा, {21:2} “मनुष्य के पुत्र, यरूशलेम की ओर ध्यान दो और उसके पवित्र स्थानों के विरुद्ध कुछ कहो। मेरे लिये इस्राएल देश के विरुद्ध कुछ कहो। {21:3} इस्राएल देश से कहो, ‘यहोवा ने ये बातें कहीं हैं: मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ! मैं अपनी तलवार म्यान से बाहर निकालूँगा! मैं सभी लोगों को तुमसे दूर करुँगा, अच्छे और बुरे दोनों को! {21:4} मैं अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के व्यक्तियों को तुमसे अलग करुँगा। मैं अपनी तलवार म्यान से निकालूँगा और दक्षिण से उत्तर तक के सभी लोगों के विरुद्ध उसका उपयोग करुँगा। {21:5} तब सभी लोग जानें कि मैं यहोवा हूँ और वे जान जाएंगे कि मैंने अपनी तलवार म्यान से निकाल ली है। मेरी तलवार म्यान में फिर तब तक नहीं लौटेगी जब तक यह खत्म नहीं कर लेती।’ {21:6} परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, टूटे हृदय वाले व्यक्ति की तरह सिसको। लोगों के सामने कराहो। {21:7} तब वे तुमसे पूछेंगे, ‘तुम कराह क्यों रहे हो’ तब तुम्हें कहना चाहिये, ‘कष्टदायक समाचार मिलने वाला है, इसलिये। हर एक हृदय भय से पिघल जाएगा। सभी हाथ कमजोर हो जाएंगे। हर एक अन्तरात्मा कमज़ोर हो जाएगी। हर एक घुटने पानी जैसे हो जाएंगे।’ ध्यान दो, वह बुरा समाचार आ रहा है! ये घटनायें घटित होंगी।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {i21:8} तलवार तैयार है {21:8} परमेश्वर का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {21:9} “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये लोगों से बातें करो। ये बातें कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘ध्यान दो, एक तलवार, एक तेज तलवार है, और तलवार झलकाई गई है। {21:10} तलवार को जान लेने के लिये तेज किया गया था। बिजली के समान चकाचौंध करने के लिये इसको झलकाया गया था। मेरे पुत्र, तुम उस छड़ी से दूर भाग गये जिससे मैं तुम्हें दण्ड देता था। तुमने उस लकड़ी की छड़ी से दण्डित होने से इन्कार किया। {21:11} इसलिये तलवार को झलकाया गया है। अब यह प्रयोग की जा सकेगी। तलवार तेज़ की गई और झलकाई गई थी। अब यह मारने वाले के हाथों में दी जा सकेगी। {21:12} “‘मनुष्य के पुत्र, चिल्लाओ और चीखो। क्यों क्योंकि तलवार का उपयोग मेरे लोगों और इस्राएल के सभी शासकों के विरुद्ध होगा! वे शासक युद्ध चाहते थे, इसलिये वे हमारे लोगों के साथ तब होंगे जब तलवार आएगी! इसलिये अपनी जांघे पीटो और अपना दुःख प्रकट करने के लिये शोर मचाओ! {21:13} क्यों क्योंकि यह परीक्षा मात्र नहीं है! तुमने लकड़ी की छड़ी से दण्डित होने से इन्कार किया अत: उसके अतिरिक्त तुम्हें दण्डित करने के लिये मैं क्या उपयोग में लाऊँ हाँ, तलवार ही।’” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {21:14} परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, तालियाँ बजाओ और मेरे लिये लोगों से ये बातें करो: “दो बार तलवार को वार करने दो, हाँ, तीन बार! यह तलवार लोगों को मारने के लिये है! यह तलवार है, बड़े नर — संहार के लिये! यह तलवार लोगों को धार पर रखेगी। {21:15} उनके हृदय भय से पिघल जाएंगे और बहुत से लोग गिरेंगे। बहुत से लोग अपने नगर — द्वार पर मरेंगे। हाँ, तलवार बिजली की तरह चमकेगी। ये लोगों को मारने के लिये झलकाई गई है! {21:16} तलवार, धारदार बनो! तलवार दायें काटो, सीधे सामने काटो, बायें काटो, जाओ हर एक स्थान में जहाँ तुम्हारी धार, जाने के लिये चुनी गई! {21:17} “तब मैं भी ताली बजाऊँगा और मैं अपना क्रोध प्रकट करना बन्द कर दूँगा। मैं यहोवा, कह चुका हूँ!” {i21:18} यरूशलेम तक के मार्ग को चुनना {21:18} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {21:19} “मनुष्य के पुत्र, दो सड़कों के नक्शे बनाओ। जिन में से बाबुल के राजा की तलवार इस्राएल आने के लिये एक को चुन सके। दोनों सड़कें उसी बाबुल देश से निकलेंगी। तब नगर को पहुँचने वाली सड़क के सिरे पर एक चिन्ह बनाओ। {21:20} चिन्ह का उपयोग यह दिखाने के लिये करो कि कौन — सी सड़क का उपयोग तलवार करेगी। एक सड़क अम्मोनी नगर रब्बा को पहुँचाती है। दूसरी सड़क यहूदा, सुरक्षित नगर, यरूशलेम को पहुँचाती है! {21:21} यह स्पष्ट करता है कि बाबुल का राजा उस सड़क की योजना बना रहा है जिससे वह उस क्षेत्र पर आक्रमण करे। बाबुल का राजा उस बिन्दु पर आ चुका है जहाँ दोनों सड़कें अलग होती हैं। बाबुल के राजा ने जादू के संकेतों का उपयोग भविष्य को जानने के लिये किया है। उसने कुछ बाण हिलाये, उसने परिवार की देवमूर्तियों से प्रश्न पूछे, उसने गुर्दे को देखा जो उस जानवर का था जिसे उसने मारा था। {21:22} “संकेत उसे बताते हैं कि वह उस दायीं सड़क को पकड़े जो यरूशलेम पहुँचाती है! उसने अपने साथ विध्वंसक लट्ठों को लाने की योजना बनाई है। वह आदेश देगा और उसके सैनिक जान से मारना आरम्भ करेंगे। वे युद्ध — घोष करेंगे। तब वे एक मिट्टी की दीवार नगर के चारों ओर बनायेंगे। वे एक मिट्टी की सड़क दीवार तक पहुँचाने वाली बनाएंगे। वे नगर पर आक्रमण के लिये लकड़ी की मीनार बनाएंगे। {21:23} वे जादूई चिन्ह इस्राएल के लोगों के लिये कोई अर्थ नहीं रखते। वे उन वचनों का पालन करते हैं जो उन्होंने दिये। किन्तु यहोवा उनके पाप याद रखेगा! तब इस्राएली लोग बन्दी बनाए जाएंगे।” {21:24} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “तुमने बहुत से बुरे काम किये हैं। तुम्हारे पाप पूरी तरह स्पष्ट हैं। तुमने मुझे यह याद रखने को विवश किया कि तुम दोषी हो। अत: शत्रु तुम्हें अपने हाथों में कर लेगा {21:25} और इस्राएल के पापी प्रमुखों, तुम मारे जाओगे। तुम्हारे दण्ड का समय आ पहुँचा है! अब अन्त निकट है!” {21:26} मेरा स्वामी यहोवा यह सन्देश देता है, “पगड़ी उतारो! मुकुट उतारो! परिवर्तन का समय आ पहुँचा है! महत्वपूर्ण प्रमुख नीचे लाए जाएंगे और जो लोग महत्वपूर्ण नहीं है, वे महत्वपूर्ण बनेंगे। {21:27} मैं उस नगर को पूरी तरह नष्ट करुँगा! किन्तु यह तब तक नहीं होगा जब तक उपयुक्त व्यक्ति नया राजा नहीं होता। तब मैं उसे (बाबुल के राजा को) नगर पर अधिकार करने दूँगा।” {i21:28} अम्मोन के विरुद्ध भविष्यवाणी {21:28} परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये लोगों से कहो। वे बातें कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा ये बातें अम्मोन के लोगों और उनके लज्जाजनक देवता से कहता है: “‘ध्यान दो, एक तलवार! एक तलवार अपनी म्यान से बाहर है। तलवार झलकाई गई है! तलवार मारने के लिये तैयार है। बिजली की तरह चमकने के लिये इसको झलकाया गया था! {21:29} “‘तुम्हारे दर्शन व्यर्थ हैं। तुम्हारे जादू तुम्हारी सहायता नहीं करेंगे। यह केवल झूठ का गुच्छा है। अब तलवार पापियों की गर्दन पर है। वे शीघ्र ही मुर्दा हो जाएंगे। उनका अन्त समय आ पहुँचा है। उनके पाप की समाप्ति का समय आ गया है। {i21:30} बाबुल के विरुद्ध भविष्यवाणी {21:30} “‘अब तुम तलवार (बाबुल) को म्यान में वापस रखो। बाबेल मैं तुम्हारे साथ न्याय, तुम जहाँ बने हो उसी स्थान पर करुँगा अर्थात् उसी देश में जहाँ तुम उत्पन्न हुए हो। {21:31} मैं तुम्हारे विरुद्ध अपने क्रोध की वर्षा करुँगा। मेरा क्रोध तुम्हें तप्त पवन की तरह जलाएगा। मैं तुम्हें क्रूर व्यक्तियों के हाथों में दूँगा। वे व्यक्ति मनुष्यों को मार डालने में कुशल हैं। {21:32} तुम आग के लिये ईंधन बनोगे। तुम्हारा खून भूमि में गहरा वह जाएगा अर्थात् लोग तुम्हें फिर याद नहीं करेंगे। मैंने अर्थात् यहोवा ने यह कह दिया है!’” {i22:1} यहेजकेल यरूशलेम के विरुद्ध बोलता है {22:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {22:2} “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम न्याय करोगे क्या तुम हत्यारों के नगर (यरूशलेम) के साथ न्याय करोगे क्या तुम उससे उन सब भयंकर बातों के बारे में कहोगे जो उसने की हैं {22:3} तुम्हें कहना चाहिये, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: नगर हत्यारों से भरा है। अत: उसके लिये दण्ड का समय आएगा। उसने अपने लिये गन्दी देवमूर्तियों को बनाया और इन देवमूर्तियों ने उसे गन्दा बनाया! {22:4} “‘यरूशलेम के लोगों, तुमने बहुत लोगों को मार डाला। तुमने गन्दी देवमूर्तियाँ बनाई। तुम दोषी हो और तुम्हें दण्ड देने का समय आ गया है। तुम्हारा अन्त आ गया है। अन्य राष्ट्र तुम्हारा मजाक उड़ाएंगे। वे देश तुम पर हँसेंगे। {22:5} दूर और निकट के लोग तुम्हारा मजाक उड़ाएंगे। तुमने अपना नाम बदनाम किया है। तुम अट्टहास सुन सकते हो। {22:6} “‘ध्यान दो! यरूशलेम में हर एक शासक ने अपने को शक्तिशाली बनाया जिससे वह अन्य लोगों को मार सके। {22:7} यरूशलेम के लोग अपने माता — पिता का सम्मान नहीं करते। वे उस नगर में विदेशियों को सताते हैं। वे अनाथों और विधवाओं को उस स्थान पर ठगते हैं। {22:8} तुम लोग मेरी पवित्र चीजों से घृणा करते हो। तुम मेरे विश्राम के दिनों को ऐसे लेते हो मानों वे महत्वपूर्ण न हों। {22:9} रूशलेम के लोग अन्य लोगों के बारें में झूठ बोलते हैं। वे यह उन भोले लोगों को मार डालने के लिये करते हैं। लोग पर्वतों पर असत्य देवताओं की पूजा करने जाते हैं और तब वे यरूशलेम में उनके मैत्री — भोजन को खाने आते हैं। “‘यरूशलेम में लोग अनेक यौन — सम्बन्धी पाप करते हैं। {22:10} यरूशलेम में लोग अपने पिता की पत्नी के साथ व्यभिचार करते हैं। यरूशलेम में लोग मासिक धर्म के समय में भी नारियों से बलात्कार करते हैं। {22:11} कोई अपने पड़ोसी की पत्नी के विरुद्ध भी ऐसा भयंकर पाप करता है। कोई अपनी पुत्रवधू के साथ शारीरिक सम्बन्ध करता है और उसे अपवित्र करता है और कोई अपने पिता की पुत्री अर्थात अपनी बहन के साथ शारीरिक सम्बन्ध करता है। {22:12} यरूशलेम में, तुम लोग, लोगों को मार डालने के लिये धन लेते हो। तुम लोग ऋण देते हो और उस ऋण पर ब्याज लेते हो। तुम लोग थोड़े धन को पाने के लिये अपने पड़ोसी को ठगते हो और तुम लोग मुझे भूल गए हो।’ मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {22:13} “परमेश्वर ने कहा, ‘अब ध्यान दो! मैं अपनी भुजा को नीचे टिकाकर, तुम्हें रोक दूँगा! मैं तुम्हें लोगों को धोखा देने और मार डालने के लिये दण्ड दूँगा। {22:14} क्या तब भी तुम वीर बने रहोगे क्या तुम पर्याप्त बलवान रहोगे जब मैं तुम्हें दण्ड देने आऊँगा नहीं! मैं यहोवा हूँ। मैंने यह कह दिया है और मैं वह करुँगा जो मैंने करने को कहा है! {22:15} मैं तुम्हें राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। मैं तुम्हें बहुत से देशों में जाने को विवश करूँगा। मैं नगर की गन्दी चीजों को पूरी तरह नष्ट करूँगा। {22:16} किन्तु यरूशलेम तुम अपवित्र हो जाओगे और अन्य राष्ट्र इन घटनाओं को होता देखेंगे। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ।’” {i22:17} इस्राएल बेकार कचरे की तरह है {22:17} यहोवा का वचन मुझ तक आया। उसने कहा, {22:18} “मनुष्य के पुत्र, काँसा, लोहा, सीसा और टीन चाँदी की तुलना में बेकार हैं। कारीगर चाँदी को शुद्ध करने के लिये आग में डालते हैं। चाँदी गल जाती है और कारीगर इसे कचरे से अलग करता है। इस्राएल राष्ट्र उस बेकार कचरे की तरह हो गया है। {22:19} इसलिये यहोवा तथा स्वामी यह कहता है, ‘तुम सभी लोग बेकार कचरे की तरह हो गए हो। इसलिये मैं तुम्हें इस्राएल में इकट्ठा करूँगा। {22:20} कारीगर चाँदी, काँसा, लोहा, सीसा और टीन को आग में डालते हैं। वे आग को अधिक गर्म करने के लिये फूँकते हैं। तब धातुओं का गलना आरम्भ हो जाता है। इसी प्रकार मैं तुम्हें अपनी आग में डालूँगा और तुम्हें पिघलाऊँगा। वह आग मेरा गरम क्रोध है। {22:21} मैं तुम्हें उस आग में डालूँगा और मैं अपने क्रोध की आग को फूँके मारूँगा और तुम्हारा पिघलना आरम्भ हो जाएगा। {22:22} चाँदी आग में पिघलती है और कारीगर चाँदी को ढालते हैं तथा बचाते हैं। इसी प्रकार तुम नगर में पिघलोगे। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और तुम समझोगे कि मैंने तुम्हारे विरुद्ध अपने क्रोध को उंड़ेला है।’” {i22:23} यहेजकेल यरूशलेम के विरुद्ध बोलता है {22:23} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {22:24} “मनुष्य के पुत्र, यरूशलेम से बातें करो। उससे कहो कि वह पवित्र नहीं है। मैं उस देश पर क्रोधित हूँ इसलिये उस देश ने अपनी वर्षा नहीं पाई है। {22:25} यरूशलेम में नबी बुरे कार्यक्रम बना रहे हैं। वे उस सिंह की तरह है जो उस समय गरजता है जब वह अपने पकड़े हुए जानवर को खाता है। उन नबियों ने बहुत से जीवन नष्ट किये हैं। उन्होंने अनेक कीमती चीजें ली हैं। उन्होंने यरूशलेम में अनेक स्त्रियों को विधवा बनाया। {22:26} “याजकों ने सचमुच मेरे उपदेशों को हानि पहुँचाई है। वे मेरी पवित्र चीजों को ठीक — ठीक नहीं बरतते अर्थात् वे यह प्रकट नहीं करते कि वे महत्वपूर्ण हैं। वे पवित्र चीज़ों को अपवित्र चीज़ों की तरह बरतते हैं। वे शुद्ध चीज़ो को अशुद्ध चीज़ों की तरह बरतते हैं। वे लोगों को इनके विषय में शिक्षा नहीं देते। वे मेरे विशेष विश्राम के दिनों का सम्मान करने से इन्कार करते हैं। वे मुझे इस तरह लेते हैं मानों मैं महत्वपूर्ण नहीं हूँ। {22:27} “यरूशलेम में प्रमुख उन भेड़िये के समान हैं जो अपने पकड़े जानवर को खा रहा है। वे प्रमुख केवल सम्पन्न बनने के लिये आक्रमण करते हैं और लोगों को मार डालते हैं। {22:28} “नबी, लोगों को चेतावनी नहीं देते, वे सत्य को ढक देते हैं। वे उन कारीगरों के समान हैं जो दीवार को ठीक — ठीक दृढ़ नहीं बनाते वे केवल छेदों पर लेप कर देते हैं। उनका ध्यान केवल झूठ पर होता है। वे अपने जादू का उपयोग भविष्य जानने के लिये करते हैं, किन्तु वे केवल झूठ बोलते हैं। वे कहते हैं, ‘मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। किन्तु वे केवल झूठ बोल रहे हैं — यहोवा ने उनसे बातें नहीं की!’ {22:29} “सामान्य जनता एक दूसरे का लाभ उठाते हैं। वे एक दूसरे को धोखा देते और चोरी करते हैं। वे गरीब और असहाय व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं। वे विदेशियों को भी धोखा देते थे, मानों उनके विरुद्ध कोई नियम न हो! {22:30} “मैंने लोगों से कहा कि तुम लोग अपना जीवन बदलो और अपने देशों की रक्षा करो। मैंने लोगों को दीवारों को दृढ़ करने के लिये कहा। मैं चाहता था कि वे दीवारों के छेदों पर खड़े रहें और अपने नगर की रक्षा करें। किन्तु कोई व्यक्ति सहायता के लिये नहीं आया! {22:31} अत: मैं अपना क्रोध प्रकट करुँगा, मैंउन्हें पूरी तरह नष्ट करूँगा! मैं उन्हें उन बुरे कामों के लिये दण्डित करुँगा जिन्हें उन्होंने किये हैं। यह सब उनका दोष है!” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {23:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {23:2} “मनुष्य के पुत्र, शोमरोन और यरूशलेम के बारें में इस कहानी को सुनो। दो बहनें थीं। वे एक ही माँ की पुत्रियाँ थीं। {23:3} वे मिस्र में तब वेश्यायें हो गई जब छोटी लड़कियाँ हीं थीं। मिस्र में उन्होंने प्रथम प्रेम किया और लोगों को अपने चुचुक और अपने नवोदित स्तनों को पकड़ने दिया। {23:4} बड़ी लड़की ओहोला नाम की थी और उसकी बहन का नाम ओहोलीबा था। वे मेरी हो गयीं ओर उनके पुत्र — पुत्रियाँ उत्पन्न हुयीं। (ओहोला वस्तुत: शोमरोन है और ओहोलीबा वस्तुत: यरूशलेम है।) {23:5} “तब ओहोला मेरे प्रति पतिव्रता नहीं रह गई। वह एक वेश्या की तरह रहने लगी। वह अपने प्रेमियों की चाह रखने लगी। उसने अश्शूर के सैनिकों को उनकी {23:6} नीली वर्दियों में देखा। वे सभी मन चाहे युवक घुड़सवार थे। वे प्रमुख और अधिकारी थे {23:7} और ओहोला ने अपने को उन सभी लोगों को अर्पित किया। वे सभी अश्शूर की सेना में विशिष्ट चुने सैनिक थे और उसने सभी को चाहा! वह उनकी गन्दी देवमूर्तियों के साथ गन्दी हो गई। {23:8} इसके अतिरिक्त उसने मिस्र से अपने प्रेम — व्यापार को भी बन्द नहीं किया। मिस्र ने उससे तब प्रेम किया जब वह किशोरी थी। मिस्र पहला प्रेमी था जिसने उसके नवजात स्तनों का स्पर्श किया। मिस्र ने उस पर अपने झूठे प्रेम की वर्षा की। {23:9} इसलिये मैंने उसके प्रेमियों को उसे भोगने दिया। वह अश्शूर को चाहती थी, इसलिये मैंने उसे उन्हें दे दिया! {23:10} उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने उसके बच्चों को लिया और उन्होंने तलवार चलाई और उसे मार डाला। उन्होंने उसे दण्ड दिया और स्त्रियाँ अब तक उसकी बातें करती हैं। {23:11} “उसकी छोटी बहन ओहोलीबा ने इन सभी घटनाओं को घटित होते देखा। किन्तु ओहोलीबा ने अपनी बहन से भी अधिक पाप किये! वह ओहोला की तुलना में अधिक धोखेबाज़ थी। {23:12} यह अश्शूर के प्रमुखों और अधिकारियों को चाहती थी। वह नीली वर्दी में घोड़े पर सवार उन सैनिकों को चाहती थी। वे सभी चाहने योग्य युवक थे। {23:13} मैंने देखा कि वे दोनों स्त्रियाँ एक ही गलती से अपने जीवन नष्ट करने जा रही थीं। {23:14} “ओहोलीबा मेरे प्रति धोखेबाज बनी रही। बाबुल में उसने मनुष्यों की तस्वीरों को दीवारों पर खुदे देखा। वे कसदी लोगों की तस्वीरें उनकी लाल पोशाकों में थीं। {23:15} उन्होंने कमर में पेटियाँ बांध रखी थीं और उनके सिर पर लम्बी पगड़ियाँ थीं। वे सभी रथ के अधिकारियों की तरह दिखते थे। वे सभी बाबुल की जन्मभूमि में उत्पन्न पुरुष ज्ञात होते थे। {23:16} ओहोलीबा ने उन्हें चाहा। उसने उनको आमंत्रित करने कि लिये दूत भेजे। {23:17} इसलिये वे बाबुल के लोग उसकी प्रेम — शैया पर उसके साथ शारीरिक सम्बंध करने आये। उन्होंने उसका उपयोग किया और उसे इतना गन्दा कर दिया कि वह उनसे घृणा करने लगी! {23:18} “ओहोलीबा ने सबको दिखा दिया कि वह धोखेबाज है। उसने इतने अधिक व्यक्तियों को अपने नंगे शरीर का उपभोग करने दिया कि मुझे उससे वैसी ही घृणा हो गई जैसी उसकी बहन के प्रति हो गई थी। {23:19} ओहोलीबा, बार — बार मुझसे धोखेबाज करती रही और तब उसने अपने उस प्रेम — व्यापार को याद किया जो उसने किशोरावस्था में मिस्र में किया था। {23:20} उसने अपने प्रेमी के गधे जैसे लिंग और घोड़े के सदृश वीर्य — प्रवाह को याद किया। {23:21} “ओहोलीबा, तुमने अपने उन दिनों को याद किया जब तुम युवती थीं, जब तुम्हारे प्रेमी तुम्हारे चुचुक को छूते थे और तुम्हारे नवजात स्तनों को पकड़ते थे। {23:22} अत: ओहोलीबा, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: तुम अपने प्रेमियों से घृणा करने लगीं। किन्तु मैं तुम्हारे प्रेमियों को यहाँ लाऊँगा। वे तुम्हें घेर लेंगे। {23:23} मैं उन सभी लोगों को बाबुल से, विशेषकर कसदी लोगों को, लाऊँगा। मैं पकोद, शो और कोआ से लोगों को लाऊँगा और मैं उन सभी लोगों को अश्शूर से लाऊँगा। इस प्रकार मैं सभी प्रमुखों, और अधिकारियों को लाऊँगा। वे सभी चाहने योग्य, रथपति विशेष योग्यता के लिये चुने घुड़सवार थे। {23:24} उन लोगों की भीड़ तुम्हारे पास आएगी। वे अपने घोड़ों पर सवार और अपने रथों पर आएंगे। लोग बड़ी संख्या में होंगे। उनके पास उनके भाले, उनकी ढालें और उनके सिर के सुरक्षा कवच होंगे। वे तुम्हारे चारों ओर इकट्ठे होंगे। मैं उन्हें बताऊँगा कि तुमने मेरे साथ क्या किया और वे अपनी तरह से तुम्हें दण्ड देंगे। {23:25} मैं तुम्हें दिखाऊँगा कि मैं कितना ईष्यालु हूँ। वे बहुत क्रोधित होंगे और तुम्हें चोट पहुँचायेंगे। वे तुम्हारी नाक और तुम्हारे कान काट लेंगे। वे तलवार चलाएंगे और तुम्हें मार डालेंगे। तब वे तुम्हारे बच्चों को ले जाएंगे और तुम्हारा जो कुछ बचा होगा उसे जला देंगे। {23:26} वे तुम्हारे अच्छे वस्त्र — आभूषण ले लेंगे {23:27} और मिस्र के साथ हुए तुम्हारे प्रेम — व्यापार के सपने को मैं रोक दूँगा। तुम उनकी प्रतीक्षा कभी नहीं करोगी। तुम फिर कभी मिस्र को याद नहीं करोगी!’” {23:28} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं तुमको उन लोगों को दे रहा हूँ, जिससे तुम घृणा करती हो। मैं तुमको उन लोगों को दे रहा हूँ जिनसे तुम घृणा करने लगी थी {23:29} और वे दिखायेंगे कि वे तुमसे कितनी घृणा करते हैं! वे तुम्हारी हर एक चीज़ ले लेंगे जो तुमने कमाई है। वे तुम्हें रिक्त और नंगा छोड़ देंगे! लोग तुम्हारे पापों को स्पष्ट देखेंगे। वे समझेंगे कि तुमने एक वेश्या की तरह व्यवहार किया और बुरे सपने देखे। {23:30} तुमने वे बुरे काम तब किये जब तुमने मुझे उन अन्य राष्ट्रों का पीछा करने के लिये छोड़ा था। तुमने वे बुरे काम तब किये जब तुमने उनकी गन्दी देवमूर्तियों की पूजा करनी आरम्भ की। {23:31} तुमने अपनी बहन का अनुसरण किया और उसी की तरह रहीं। तुमने अपने आप विष का प्याला लिया और उसे अपने हाथों मे उठाये रखा। तुमने अपना दण्ड स्वयं कमाया।” {23:32} मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, “तुम अपनी बहन के विष के प्याले को पीओगी। यह विष का प्याला लम्बा — चौड़ा है। उस प्याले में बहुत विष (दण्ड) आता है। लोग तुम पर हँसेंगे और व्यंग्य करेंगे। {23:33} तुम मदमत व्यक्ति की तरह लड़खड़ाओगी। तुम बहुत अस्थिर हो जाओगी। वह प्याला विनाश और विध्वंस का है। यह उसी प्याले (दण्ड) की तरह है जिसे तुम्हारी बहन ने पीया। {23:34} तुम उसी प्याले में विष पीओगी। तुम उसकी अन्तिम बूंद तक उसे पीओगी। तुम गिलास को फेंकोगी और उसके टुकड़े कर डालोगी और तुम पीड़ा से अपनी छाती विदीर्ण करोगी। यह होगा क्योंकि मैं यहोवा और स्वामी हूँ और मैंने वे बातें कहीं। {23:35} “इस प्रकार, मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं, ‘यरूशलेम, तुम मुझे भूल गए। तुमने मुझे दूर फेंका और मुझे पीछे छोड़ दिया। इसलिये तुम्हें मुझे छोड़ने और वेश्या की तरह रहने का दण्ड भोगना चाहिए। तुम्हें अपने दुष्ट सपनों के लिये कष्ट अवश्य पाना चाहिए।’” {i23:36} ओहोला और ओहोलीबा के विरुद्ध निर्णय {23:36} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम ओहोला और ओहोलीबा का न्याय करोगे तब उनको उन भयंकर बातों को बताओ जो उन्होंने किये। {23:37} उन्होंने व्यभिचार का पाप किया है। वे हत्या करने के अपराधी हैं। उन्होंने वेश्या की तरह काम किया, उन्होंने अपनी गन्दी देवमूर्तियों के साथ रहने के लिये मुझको छोड़ा। मेरे बच्चे उनके पास थे, किन्तु उन्होंने उन्हें आग से गुजरने के लिये विवश किया। उन्होंने अपनी गन्दी देवमूर्तियों को भोजन देने के लिये यह किया। {23:38} उन्होंने मेरे विश्राम के दिनों और पवित्र स्थानों को ऐसे लिया मानों वे महत्वपूर्ण न हों। {23:39} उन्होंने अपनी देवमूर्तियों के लिये अपने बच्चों को मार डाला और तब वे मेरे पवित्र स्थान पर गए और उसे भी गन्दा बनाया। उन्होंने यह मेरे मन्दिर के भीतर किया! {23:40} “उन्होंने बहुत दूर के स्थानों से मनुष्यों को बुलाया है। इन व्यक्तियों को तुमने एक दूत भेजा और वे लोग तुम्हें देखने आए। तुम उनके लिये नहाई, अपनी आँखों को सजाया और अपने आभूषणों को पहना। {23:41} तुम सुन्दर बिस्तर पर बैठी, जिसके सामने मेज रखा था। तुमने मेरी सुगन्ध और मेरे तेल को इस मेज पर रखा। {23:42} “यरूशलेम में शोर ऐसा सुनाई पड़ता था मानों दावत उड़ाने वाले लोगों का हो। दावत में बहुत लोग आये। लोग जब मरुभूमि से आते थे तो पहले से पी रहे होते थे। वे स्त्रियों को बाजूबन्द और सुन्दर मुकुट देते थे। {23:43} तब मैंने एक स्त्री से बातें कीं, जो व्यभिचार से शिथिल हो गई थी। मैंने उससे कहा, ‘क्या वे उसके साथ व्यभिचार करते रह सकते हैं, और वह उनके साथ करती रह सकती है’ {23:44} किन्तु वे उसके पास वैसे ही जाते रहे जैसे वे किसी वेश्या के पास जा रहे हों। हाँ, वे उन दुष्ट स्त्रियाँ ओहोला और ओहोलीबा के पास बार — बार गए। {23:45} “किन्तु अच्छे लोग उनका न्याय अपराधी के रूप में करेंगे। वे उन स्त्रियों का न्याय व्यभिचार का पाप करने वालियों और हत्यारिनों के रूप में करेंगे। क्यों क्योंकि ओहोला और ओहोलीबा ने व्यभिचार का पाप किया है और उस रक्त से उनके हाथ अब भी रंगे हैं जिन्हें उन्होंने मार डाला था।” {23:46} मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही, “लोगों को एक साथ इकट्ठा करो। तब उन लोगों को ओहोला और ओहोलीबा को दण्ड देने दो। लोगों का यह समूह उन दोनों स्त्रियों को दण्डित करेगा तथा इनका मज़ाक उड़ाएगा। {23:47} तब वह समूह उन्हें पत्थर मारेगा और उन्हें मार डालेगा। तब वह समूह अपनी तलवारों से स्त्रियों के टुकड़े करेगा। वे स्त्रियों के बच्चों को मार डालेंगे और उनके घर जला डालेंगे। {23:48} इस प्रकार मैं इस देश की लज्जा को धोऊँगा और सभी स्त्रियों को चेतावनी दी जाएगी कि वे वह लज्जाजनक काम न करें जो तुमने किया है। {23:49} वे तुम्हें उन दुष्ट कामों के लिये दण्डित करेंगे जो तुमने किया और तुम्हें अपनी गन्दी देवमूर्तियों की पूजा के लिये दण्ड मिलेगा। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा और स्वामी हूँ।” {i24:1} पात्र और माँस {24:1} मेरे स्वामी यहोवा का वचन मुझे मिला। यह देश — निकाले के नवें वर्ष के दसवें महीने का दसवाँ दिन था। उसने कहा, {24:2} “मनुष्य के पुत्र, आज की तिथि और इस टिप्पणी को लिखो: ‘आज बाबुल के राजा की सेना ने यरूशलेम को घेरा।’ {24:3} यह कहानी उस परिवार से कहो जो (इस्राएल) आज्ञा मानने से इन्कार करे। उनसे ये बातें कहो। ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘पात्र को आग पर रखो, पात्र को रखो और उसमें जल डालो। {24:4} उसमें माँस के टुकड़े डालो, हर अच्छे टुकड़े डालो, जाँघे और कंधे। पात्र को सर्वोत्तम हड्डियों से भरो। {24:5} झुण्ड के सर्वोत्तम जानवर का उपयोग करो, पात्र के नीचे ईधन का ढेर लगाओ, और माँस के टुकड़ों को पकाओ। शोरवे को तब तक पकाओ जब तक हड्डियाँ भी न पक जाय! {24:6} “‘इस प्रकार मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “यह यरूशलेम के लिये बुरा होगा। यह हत्यारों से भरे नगर के लिये बुरा होगा। यरूशलेम उस पात्र की तरह है जिस पर जंख के दाग हों, और वे दाग दूर न किये जा सकें! वह पात्र शुद्ध नहीं है, इसलिये माँस का हर एक टुकड़ा पात्र से बाहर निकालो! उस माँस को मत खाओ! याजकों को उस बेकार माँस में से कोई टुकड़ा मत चुनने दो! {24:7} यरूशलेम एक जंख लगे पात्र की तरह है, क्यों क्योंकि हत्याओं का रक्त वहाँ अब तक है! उसने रक्त को खुली चट्टानों पर डाला है! उसने रक्त को भूमि पर नहीं डाला और इसे मिट्टी से नहीं ढका। {24:8} मैंने उसका रक्त को खुली चट्टान पर डाला। अत: यह ढका नहीं जाएगा। मैंने यह किया, जिससे लोग क्रोधित हो, और उसे निरपराध लोगों की हत्या का दण्ड दें।” {24:9} अत:, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: हत्यारों से भरे इस नगर के लिये यह बुरा होगा! मैं आग के लिए बहुत सी लकड़ी का ढेर बनाऊँगा। {24:10} पात्र के नीचे बहुत सा ईधन डालो। आग जलाओ। अच्छी प्रकार माँस को पकाओ! मसाले मिलाओ और हड्डियों को जल जाने दो। {24:11} तब पात्र को अंगारों पर खाली छोड़ दो। इसे इतना तप्त होने दो कि इसका दाग चमकने लगे। वे दाग पिघल जाएंगे। जंख नष्ट होगा। {24:12} यरूशलेम अपने दागों को धोने का कठोर प्रयत्न कर सकती है। किन्तु वह जंख दूर नहीं होगा! केवल आग (दण्ड) उस जंख को दूर करेगी! {24:13} तुमने मेरे विरुद्ध पाप किया और पाप से कलंकित हुई। मैंने तुम्हें नहलाना चाहा और तुम्हें स्वच्छ करना चाहा! किन्तु दाग छूटे नहीं। मैं तुमको फिर नहलाना नहीं चाहूँगा। जब तक मेरा तप्त क्रोध तुम्हारे प्रति समाप्त नहीं होता। {24:14} “‘मैं यहोवा हूँ। मैंने कहा, तुम्हें दण्ड मिलेगा, और मैं इसे दिलाऊँगा। मैं दण्ड को रोकूँगा नहीं। मैं तुम्हारे लिये दु: ख का अनुभव नहीं करूँगा। मैं तुम्हें उन बुरे पापों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये।’ मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।” {i24:15} यहेजकेल की पत्नी की मृत्यु {24:15} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {24:16} “मनुष्य के पुत्र, तुम अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते हो किन्तु मैं उसे तुमसे दूर कर रहा हूँ। तुम्हारी पत्नी अचानक मरेगी। किन्तु तुम्हें अपना शोक प्रकट नहीं करना चाहिए। तुम्हें जोर से रोना नहीं चाहिए। तुम रोओगे और तुम्हारे आँसू गिरेंगे। {24:17} किन्तु तुम्हें अपना शोक — रूदन बहुत मन्द रखना चाहिए। अपनी मृत पत्नी के लिये जोर से न रोओ। तुम्हें सामान्य नित्य के वस्त्र पहनने चाहिए। अपनी पगड़ी और अपने जूते पहनो। अपने शोक को प्रकट करने के लिये अपनी मूँछे न ढको और वह भोजन न करो जो प्राय: किसी के मरने पर लोग करते हैं।” {24:18} अगली सुबह मैंने लोगों को बताया कि परमेश्वर ने क्या कहा है। उसी शाम मेरी पत्नी मरी। अगली प्रात: मैंने वही किया जो परमेश्वर ने आदेश दिया था। {24:19} तब लोगों ने मुझसे कहा, “तुम यह काम क्यों कर रहे हो इसका मतलब क्या है” {24:20} मैंने उनसे कहा, “यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने मुझसे, {24:21} इस्राएल के परिवार से कहने को कहा। मेरे स्वामी यहोवा ने कहा, ‘ध्यान दो, मैंअपने पवित्र स्थान को नष्ट करूँगा। तुम लोगों को उस पर गर्व है और तुम लोग उसकी प्रशंसा के गीत गाते हो। तुम्हें उस स्थान को देखने का प्रेम है। तुम सचमुच उस स्थान से प्रेम करते हो। किन्तु मैं उस स्थान को नष्ट करूँगा और तुम्हारे पीछे छूटे हुए तुम्हारे बच्चे युद्ध में मारे जाएंगे। {24:22} किन्तु तुम वही करोगे जो मैंने अपनी मृत पत्नी के बारे में किया है। तुम अपना शोक प्रकट करने के लिये अपनी मूँछे नहीं ढकोगे। तुम वह भोजन नहीं करोगे जो लोग प्राय: किसी के मरने पर खाते हैं। {24:23} तुम अपनी पगड़ियाँ और अपने जूते पहनोगे। तुम अपना शोक नहीं प्रकट करोगे। तुम रोओगे नहीं। किन्तु तुम अपने पाप के कारण बरबाद होते रहोगे। तुम चुपचाप अपनी आहें एक दूसरे के सामने भरोगे। {24:24} अत: यहेजकेल तुम्हारे लिये एक उदाहरण है। तुम वही सब करोगे जो इसने किया। दण्ड का यह समय आयेगा और तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ।’” {24:25} “मनुष्य के पुत्र, मैं उस सुरक्षित स्थान यरूशलेम को लोगों से ले लूँगा। वह सुन्दर स्थान उनको आनन्दित करता है। उन्हें उस स्थान को देखने का प्रेम है। वे सचमुच उस स्थान {24:26} से प्रेम करते हैं। किन्तु उस समय मैं नगर और उनके बच्चों को उन लोगों से ले लूँगा। बचने वालों में से एक यरूशलेम के बारे में बुरा सन्देश लेकर तुम्हारे पास आएगा। {24:27} उस समय तुम उस व्यक्ति से बातें कर सकोगे। तुम और अधिक चुप नहीं रह सकोगे। इस प्रकार तुम उनके लिये उदाहरण बनोगे। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i25:1} अम्मोन के विरुद्ध भविष्यवाणी {25:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {25:2} “मनुष्य के पुत्र, अम्मोन के लोगों पर ध्यान दो और मेरे लिये उनके विरुद्ध कुछ कहो। {25:3} अम्मोन के लोगो से कहो: ‘मेरे स्वामी यहोवा का कथन सुनो! मेरा स्वामी यहोवा कहता है: तुम तब प्रसन्न थे जब मेरा पवित्र स्थान नष्ट हुआ था। तुम लोग तब इस्राएल देश के विरुद्ध थे जब यह दूषित हुआ था। तुम यहूदा के परिवार के विरुद्ध थे जब वे लोग बन्दी बनाकर ले जाए गए। {25:4} इसलिये मैं तुम्हें, पूर्व के लोगों को दूँगा। वे तुम्हारी भूमि लेंगे। उनकी सेनायें तुम्हारे देश में अपना डेरा डालेंगी। वे तुम्हारे बीच रहेंगे। वे तुम्हारे फल खाएंगे और तुम्हारा दूध पीएंगे। {25:5} “‘मैं रब्बा नगर को ऊँटों की चरागाह और अम्मोन देश को भेड़ों का बाड़ा बना दूँगा। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ। {25:6} यहोवा यह कहता है: तुम प्रसन्न थे कि यरूशलेम नष्ट हुआ। तुमने तालियाँ बजाई और पैरों पर थिरके। तुमने इस्राएल प्रदेश को अपमानित करने वाले मज़ाक किये। {25:7} अत: मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। तुम वैसी कीमती चीजों की तरह होगे जिन्हें सैनिक युद्ध में पाते हैं। तुम अपना उत्तराधिकार खो दोगे। तुम दूर देशों में मरोगे। मैं तुम्हारे देश को नष्ट करूँगा! तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ।’” {i25:8} मोआब और सेईर के विरुद्ध भविष्यवाणी {25:8} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “मोआब और सेईर (एदोम) कहते है, ‘यहूदा का परिवार ठीक किसी अन्य राष्ट्र की तरह है।’ {25:9} मैं मोआब के कन्धे पर प्रहार करूँगा, मैं इसके उन नगरों को लूँगा जो इसकी सीमा पर प्रदेश के गौरव, बेत्यशीमोत, बालमोन और किर्यातैम हैं। {25:10} तब मैं इन नगरों को पूर्व के लोगों को दूँगा। वे तुम्हारा प्रदेश लेंगे और मैं पूर्व के लोगों को अम्मोन को नष्ट करने दूँगा। तब हर एक व्यक्ति भूल जाएगा कि अम्मोन के लोग एक राष्ट्र थे। {25:11} इस प्रकार मैं मोआब को दण्ड दूँगा। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i25:12} एदोम के विरुद्ध भविष्यवाणी {25:12} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “एदोम के लोग यहूदा के परिवार के विरुद्ध उठ खड़े हुए और उससे बदला लेना चाहा। एदोम के लोग दोषी है।” {25:13} इसलिये मेरा स्वामी यहोवा कहता है: “मैं एदोम को दण्ड दूँगा। मैं एदोम के लोगों और जानवरों को नष्ट करूँगा। मैं एदोम के पूरे देश को तेमान से ददान तक नष्ट करूँगा। एदोमी युद्ध में मारे जाएंगे। {25:14} मैं अपने लोगों, इस्राएल का उपयोग करूँगा और एदोम के विरुद्ध भी होऊँगा। इस प्रकार इस्राएल के लोग मेरे क्रोध को एदोम के विरुद्ध प्रकट करेंगे। तब एदोम के लोग समझेंगे कि मैंने उनको दण्ड दिया।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {i25:15} पलिश्तियों के विरुद्ध भविष्यवाणी {25:15} मेरे स्वामी यहोवा ने यहा कहा, “पलिश्तियों ने भी बदला लेने का प्रयत्न किया। वे बहुत क्रूर थे। उन्होंने अपने क्रोध को अपने भीतर अत्याधिक समय तक जलते रखा।” {25:16} इसलिये मेरे स्वामी यहोवा ने कहा, “मैं पलिश्तियों को दण्ड दूँगा। हाँ, मैं करेत से उन लोगों को नष्ट करूँगा। मैं समुद्र — तट पर रहने वाले उन लोगों को पूरी तरह नष्ट करुँगा। {25:17} मैं उन लोगों को दण्ड दूँगा, मैं उनसे बदला लूँगा। मैं अपने क्रोध द्वारा उन्हें एक सबक सिखाऊँगा तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!” {i26:1} सोर के बारे में दु:खद समाचार {26:1} देश निकाले के ग्यारहवें वर्ष में, महीने के पहले दिन, यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {26:2} “मनुष्य के पुत्र, सोर ने यरूशलेम के विरुद्ध बुरी बातें कहीं: आहा! लोगों की रक्षा करने वाला नगर — द्वार नष्ट हो गया है! नगर — द्वार मेरे लिये खुला है। नगर (यरूशलेम) नष्ट हो गया है, अत: मैं इससे बहुत सी बहुमूल्य चीज़ें ले सकता हूँ!” {26:3} इसलिये मेरा स्वामी यहोवा कहता है: “सोर, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ! मैं तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये कई राष्ट्रों को लाऊँगा। वे समुद्र — तट की लहरों की तरह बार — बार आएंगे।” {26:4} परमेश्वर ने कहा, “शत्रु के वे सैनिक सोर की दीवारों को नष्ट करेंगे और उनके स्तम्भों को गिरा देंगे। मैं भी उसकी भूमि से ऊपर की मिट्टी को खुरच दूँगा। मैं सोर को चट्टान मात्र बना डालूँगा। {26:5} सोर समुद्र के किनारे मछलियोंके जालों के फैलाने का स्थान मात्र रह जाएगा। मैंने यह कह दिया है!” मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “सोर उन बहुमूल्य वस्तुओं की तरह होगा जिन्हें सैनिक युद्ध में पाते हैं। {26:6} मूल प्रदेश में उसकी पुत्रियाँ (छोटे नगर) युद्ध में मारी जाएंगी। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i26:7} नबूकदनेस्सर सोर पर आक्रमण करेगा {26:7} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं सोर के विरुद्ध उत्तर से एक शत्रु लाऊँगा। बाबुल का महान राजा नबूकदनेस्सर शत्रु है! वह एक विशाल सेना लाएगा। उसमें घोड़े, रथ, घुड़सवार सैनिक और अत्याधिक संख्या में अन्य सैनिक होंगे। वे सैनिक विभिन्न राष्ट्रों से होंगे। {26:8} नबूकदनेस्सर मूल प्रदेश में तुम्हारी पुत्रियों (छोटे नगर) को मार डालेगा। वह तुम्हारे नगरों पर आक्रमण करने के लिये मीनारें बनाएगा! वह तुम्हारे नगर के चारों ओर कच्ची सड़क बनाएगा! वह एक कच्ची सड़क दीवार तक पहुँचाने वाली बनाएगा। {26:9} वह तुम्हारी दीवारों को तोड़ने के लिये लट्ठे लाएगा। वह कुदालियों का उपयोग करेगा और तुम्हारी मीनारों को तोड़ गिराएगा। {26:10} उसके घोड़े इतनी बड़ी संख्या में होंगे कि उनकी टापों से उठी धूलि तुम्हें ढक लेगी। तुम्हारी दीवारें घुड़सवार सैनिकों, बन्द गाड़ियों और रथों की आवाज़ से काँप उठेगी। जब बाबुल का राजा नगर — द्वार से नगर में प्रवेश करेगा। हाँ, वे तुम्हारे नगर में आएंगे क्योंकि इसकी दीवारें गिराई जाएंगी। {26:11} बाबुल का राजा तुम्हारे नगर से घोड़े पर सवार होकर निकलेगा। उसके घोड़ों की टाप तुम्हारी सड़कों को कुचलती हुई आएगी। वह तुम्हारे लोगों को तलवार से मार डालेगा। तुम्हारे नगर की दृढ़ स्तम्भ — पंक्तियाँ धराशायी होंगी। {26:12} नबूकदनेस्सर के सैनिक तुम्हारी सम्पत्ति ले जाएंगे। वे उन चीज़ों को ले जाएंगे जिन्हें तुम बेचना चाहते हो। वे तुम्हारी दीवारों को ध्वस्त करेंगे और तुम्हारे सुन्दर भवनों को नष्ट करेंगे। वे तुम्हारे पत्थरों और लकड़ियों के घरों को कूड़े की तरह समुद्र में फेंक देंगे। {26:13} इस प्रकार मैं तुम्हारे आनन्द गीतों के स्वर को बन्द कर दूँगा। लोग तुम्हारी वीणा को भविष्य में नहीं सुनेंगे। {26:14} मैं तुमको नंगी चट्टान मात्र कर दूँगा। तुम समुद्र के किनारे मछलियों के जालों को फैलाने के स्थान रह जाओगे। तुम्हारा निर्माण फिर नहीं होगा। क्यों क्योंकि मैं, यहोवा ने यह कहा है!” मेरे स्वामी यहोवा ने वे बातें कहीं। {i26:15} अन्य राष्ट्र सोर के लिये रोयेंगे {26:15} मेरा स्वामी यहोवा सोर से यह कहता है: “भूमध्य सागर के तट से लगे देश तुम्हारे पतन की ध्वनि से काँप उठेंगे। यह तब होगा जब तुम्हारे लोग चोट खाएंगे और मारे जाएंगे। {26:16} तब समुद्र तट के देशों के सभी प्रमुख अपने सिंहासनों से उतरेंगे और अपना दु: ख प्रकट करेंगे। वे अपनी विशेष पोशाक उतारेंगे। वे अपने सुन्दर वस्त्रों को उतारेंगे। तब वे अपने काँपने के वस्त्र (भय) पहनेंगे। वे भूमि पर बैठेंगे और भय से काँपेंगे। वे इस पर शोकग्रस्त होंगे कि तुम इतने शीघ्र कैसे नष्ट हो गए। {26:17} वे तुम्हारे विषय में यह करुण गीत गायेंगे: “‘हे सोर, तुम प्रसिद्ध नगर थे समुद्र पार से लोग तुम पर बसने आए। तुम प्रसिद्ध थे, किन्तु अब तुम कुछ नहीं हो। तुम सागर पर शक्तिशाली थे, और वैसे ही तुम में निवास करने वाले व्यक्ति थे! तुमने विशाल भू — पर रहने वाले सभी लोगों को भयभीत किया। {26:18} अब जिस दिन तुम्हारा पतन होता है, समुद्र तट से लगे देश भय के कंपित होंगे। तुमने समुद्र तट के सहारे कई उपनिवेश बनाए, अब वे लोग भयभीत होंगे, जब तुम नहीं रहोगे!’” {26:19} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “सोर, मैं तुम्हें नष्ट करूँगा और तुम एक प्राचीन खाली नगर हो जाओगे। वहाँ कोई नहीं रहेगा। मैं समुद्र को तुम्हारे ऊपर बहाऊँगा। विशाल समुद्र तुम्हें ढक लेगा। {26:20} मैं तुम्हें नीचे उस गहरे अधोगर्त में भेजूँगा, जिस स्थान पर मरे हुए लोग हैं। तुम उन लोगों से मिलोगे जो बहुत पहले मर चुके। मैं तुम्हें उन सभी प्राचीन और खाली नगरों की तरह पाताल लोक में भेजूँगा। तुम उन सभी अन्य लोगों के साथ होगे जो कब्र में जाते हैं। तुम्हारे साथ तब कोई नहीं रहेगा। तुम फिर कभी जीवितों के प्रदेश में नहीं रहोगे! {26:21} अन्य लोग उससे डरेंगे जो तुम्हारे साथ हुआ। तुम समाप्त हो जाओगे! लोग तुम्हारी खोज करेंगे, किन्तु तुमको फिर कभी पाएंगे नहीं!” मेरा स्वामी यहोवा यही कहता है। {i27:1} सोर समुद्र पर व्यापार का महान केन्द्र {27:1} यहोवा का वचन मुझे फिर मिला। उसने कहा, {27:2} “मनुष्य के पुत्र, सोर के बारे में यह करुण — गीत गाओ। {27:3} सोर के बारे में यह कहो: ‘सोर, तुम समुद्र के द्वार हो। तुम अनेक राष्ट्रों के लिये व्यापारी हो, तुम समुद्र तट के सहारे के अनेक देशों की यात्रा करते हो। मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘सोर तुम सोचते हो कि तुम इतने अधिक सुन्दर हो! तुम सोचते हो कि तुम पूर्णत: सुन्दर हो! {27:4} भूमध्य सागर तुम्हारे नगर के चारों ओर सीमा बनाता है। तुम्हारे निर्माताओं ने तुम्हें पूर्णत: सुन्दर बनाया। तुम उन जहाज़ों की तरह हो जो तुम्हारे यहाँ से यात्रा पर जाती हैं। {27:5} तुम्हारे निर्माताओं ने, सनीर पर्वत से सनौवर के पेड़ों का उपयोग, तुम्हारे सभी तख्तों को बनाने के लिये किया। उन्होंने लबानोन से देवदार वन का उपयोग, तुम्हारे मस्तूल को बनाने के लिये किया। {27:6} उन्होंने बाशान से बांज वृक्ष का उपयोग, तुम्हारे पतवारों को बनाने के लिये किया। उन्होंने सनौवर से चीड़ वृक्ष का उपयोग, तुम्हारे जहाज़ी फर्श के कमरे के लिये किया, और उन्होंने इस निवास को हाथी — दाँत से सजाया। {27:7} तुम्हारे पाल के लिये उन्होंने मिस्र में बने रंगीन सूती वस्त्र का उपयोग किया। पाल तुम्हारा झंड़ा था। कमरे के लिये तुम्हारे पर्दे नीले और बैंगनी थे। वे सनौवर के समुद्र तट से आते थे। {27:8} सीदोन और अर्वद के निवासियों ने तुम्हारे लिये तुम्हारी नावों को खेया। सोर तुम्हारे बुद्धिमान व्यक्ति तुम्हारे जहाज़ों के चालक थे। {27:9} गबल के अग्रज प्रमुख और बुद्धिमान व्यक्ति जहाज़ के तख्तों के बीच कल्किन लगाने में सहायता के लिये जहाज़ पर थे। समुद्र के सारे जहाज और उनके चालक तुम्हारे साथ व्यापार और वाणिज्य करने आते थे। {27:10} “‘फारस, लूद और पूत के लोग तुम्हारी सेना में थे। वे तुम्हारे युद्ध के सैनिक थे। उन्होंने अपनी ढालें और सिर के कवच तुम्हारी दीवारों पर लटकाये थे। उन्होंने तुम्हारे नगर के लिये सम्मान और यश कमाया। {27:11} अर्वद के व्यक्ति तुम्हारे नगर के चारों ओर की दीवार पर रक्षक के रूप में खड़े थे। गम्मत के व्यक्ति तुम्हारी मीनारों में थे। उन्होंने तुम्हारे नगर के चारों ओर की दीवारों पर अपनी ढाले टाँगी। उन्होंने तुम्हारी सुन्दरता को पूर्ण किया। {27:12} “‘तर्शीश तुम्हारे सर्वोत्तम ग्राहकों में से एक था। वे तुम्हारी सभी अद्भुत विक्रय वस्तुओं के बदले चाँदी, लोहा, टीन और सीसा देते थे। {27:13} यावान, तूबल, मेशेक और काले सागर के चारों ओर के क्षेत्र के लोग तुम्हारे साथ व्यापार करते थे। वे तुम्हारी विक्रय चीज़ों के बदले गुलाम और काँसा देते थे। {27:14} तोगर्मा राष्ट्र के लोग घोड़े, युद्ध अश्व और खच्चर उन चीज़ों के बदले में देते थे जिन्हें तुम बेचते थे। {27:15} ददान के लोग तुम्हारे साथ व्यापार करते थे। तुम अपनी चीज़ों को अनेक स्थानों पर बेचते थे। लोग तुमको भुगतान करने के लिये हाथी दाँत और आबनूस की लकड़ी लाते थे। {27:16} एदोम तुम्हारे साथ व्यापार करता था क्योंकि तुम्हारे पास बहुत सी अच्छी चीज़ें थीं। एदोम के लोग नीलमणि, बैंगनी वस्त्र, बारीक कढ़ाई के काम, बारीक सूती, मूंगा और लाल तुम्हारी विक्रय चीज़ों के बदले देते थे। {27:17} “‘यहूदा और इस्राएल के लोगों ने तुम्हारे साथ व्यापार किया। उन्होंने तुम्हारी विक्रय चीजों के लिये भुगतान में गेहूँ, जैतून, अगाती, अंजीर, शहद, तेल और मलहम दिये। {27:18} दमिश्क एक अच्छा ग्राहक था। वे तुम्हारे पास की अद्भुत चीजों के लिये व्यापार करते थे। वे हेलबोन से दाखमधु का व्यापार करते थे और उन चीजों के लिये सफेद ऊन लेते थे। {27:19} जो चीजें तुम बेचते थे उनसे दमिश्क उजला से दाखमधु मंगाने का व्यापार करता था। वे उन चीजों के भुगतान में तैयार लोहा, कस्सिय और गन्ना देते थे। {27:20} ददान अच्छा धन्धा प्रदान करता था। वे तुम्हारे साथ काठी के वस्त्र और सवारी के घोड़ों का व्यापार करते थे। {27:21} अरब और केदार के सभी प्रमुख मेमने, भेड़ और बकरियाँ तुम्हारी विक्रय की गई वस्तुओं के लिये देते थे। {27:22} शबा और रामा के व्यापारी तुम्हारे साथ व्यापार करते थे। वे सर्वोत्तम मसाले, हर प्रकार के रत्न और सोना तुम्हारी विक्रय की गई चीजों के लिये देते थे। {27:23} हारान, कन्ने, एदेन तथा शबा, अश्शूर, कलमद के व्यापारी तुम्हारे साथ व्यापार करते थे। {27:24} उन्होंने सर्वोत्तम कपड़ों, बारीक कढ़े हुए और नीले वस्त्र, रंग — बिरंगे कालीन, अच्छी बटी रस्सियाँ और देवदार की लकड़ी से बने सामान भुगतान में दिये। ये वे चीजें थीं जिनसे उन्होंने तुम्हारे साथ व्यापार किया। {27:25} तर्शीश के जहाज उन चीजों को ले जाते थे जिन्हें तुम बेचते थे। “‘सोर, तुम उन व्यापारी बेड़ों में से एक की तरह हो, तुम समुद्र पर बहुमूल्य वस्तुओं से लदे हुए हो। {27:26} वे व्यक्ति जो तुम्हारी नावों को खेते थे। तुम्हें विशाल और शक्तिशाली समुद्रों के पार ले गए। किन्तु शक्तिशाली पुरवाई तुम्हारे जहाजों को समुद्र में नष्ट करेगी। {27:27} और तुम्हारी सारी सम्पत्ति समुद्र में डूब जाएगी। तुम्हारी सम्पत्ति, तुम्हारा व्यापार और विक्रय चीजें, तुम्हारे मल्लाह और तुम्हारे चालक, तुम्हारे व्यक्ति जो, तुम्हारे जहाज पर तख्तों के बीच में कल्किन लगाते हैं, तुम्हारे मल्लाह और तुम्हारे नगर के सभी सैनिक और तुम्हारे नाविक सारे समुद्र में डूब जाएंगे। यह उसी दिन होगा जिस दिन तुम नष्ट होगे! {27:28} “‘तुमने अपने व्यापारियों को बहुत दूर से स्थानों में भेजा। वे स्थान भय से काँप उठेंगे, जब वे तुम्हारे चालकों का चिल्लाना सुनेंगे!’ {27:29} तुम्हारे सारे नाविक जहाज से कूदेंगे। मल्लाह और चालक जहाज से कूदेंगे, और तट पर तैर आएंगे। {27:30} वे तुम्हारे बारे में बहुत दु: खी होंगे। वे रो पड़ेंगे। वे अपने सिरों पर धूली डालेंगे। वे राख में लोटेंगे। {27:31} वे तुम्हारे लिए सिर पर उस्तरा फिरायेंगे। वे शोक — वस्त्र पहनेंगे। वे तुम्हारे लिये रोये — चिल्लायेंगे। वे किसी ऐसे रोते हुए के समान होंगे, जो किसी के मरने पर रोता है। {27:32} “‘वे अपने फूट — फूट कर रोने के समय तुम्हारे बारे में यह शोक गीत गायेंगे और रोयेंगे: “‘कोई सोर की तरह नहीं है! सोर नष्ट कर दिया गया समुद्र के बीच में! {27:33} तुम्हारे व्यापारी समुद्रों के पार गए। तुमने अनेक लोगों को, अपनी विशाल सम्पत्ति और विक्रय वस्तुओं से सन्तुष्ट किया। तुमने भूमि के राजाओं को सम्पन्न बनाया! {27:34} किन्तु अब तुम समुद्रों द्वारा टूटे हो और गहरे जल द्वारा भी। सभी चीजें जो तुम बेचते हो, और तुम्हारे सभी व्यक्ति नष्ट हो चुके हैं! {27:35} समुद्र तट के निवासी सभी व्यक्ति तुम्हारे लिये शोकग्रस्त हैं। उनके राजा भयानक रूप से डरे हैं। उनके चेहरे से शोक झांकता है। {27:36} अन्य राष्ट्रों के व्यापारी तुम पर छींटा कसते हैं। जो घटनायें तुम्हारे साथ घटीं, लोगों को भयभीत करेगी। क्यों क्योंकि तुम अब समाप्त हो। तुम भविष्य में नहीं रहोगे।” {i28:1} सोर अपने को परमेश्वर समझता है {28:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {28:2} “मनुष्य के पुत्र, सोर के राजा से कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘तुम बहुत घमण्डी हो! और तुम कहते हो, “मैं परमेश्वर हूँ! मैं समुद्रों के मध्य में देवताओं के आसन पर बैठता हूँ।” “‘किन्तु तुम व्यक्ति हो, परमेश्वर नहीं! तुम केवल सोचते हो कि तुम परमेश्वर हो। {28:3} तुम सोचते हो तुम दानिय्येल से बुद्धिमान हो! तुम समझते हो कि तुम सारे रहस्यों को जान लोगे! {28:4} अपनी बुद्धि और अपनी समझ से। तुमने सम्पत्ति स्वयं कमाई है और तुमने कोषागार में सोना — चाँदी रखा है। {28:5} अपनी तीव्र बुद्धि और व्यापार से तुमने अपनी सम्पत्ति बढ़ाई है, और अब तुम उस सम्पत्ति के कारण गर्वीले हो। {28:6} “‘अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: सोर, तुमने सोचा तुम परमेश्वर की तरह हो। {28:7} मैं अजनबियों को तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये लाऊँगा। वे राष्ट्रों में बड़े भयंकर हैं! वे अपनी तलवारें बाहर खीचेंगे और उन सुन्दर चीजों के विरुद्ध चलाएंगे जिन्हें तुम्हारी बुद्धि ने कमाया। वे तुम्हारे गौरव को ध्वस्त करेंगे। {28:8} वे तुम्हें गिराकर कब्र में पहुँचाएंगे। तुम उस मल्लाह की तरह होगे जो समुद्र में मरा। {28:9} वह व्यक्ति तुमको मार डालेगा। क्या अब भी तुम कहोगे, “मैं परमेश्वर हूँ”? उस समय वह तुम्हें अपने अधिकार में करेगा। तुम समझ जाओगे कि तुम मनुष्य हो, परमेश्वर नहीं! {28:10} अजनबी तुम्हारे साथ विदेशी जैसा व्यवहार करेंगे, और तुमको मार डालेंगे। ये घटनाएँ होंगी क्योंकि मेरे पास आदेश शक्ति है!’” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {28:11} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {28:12} “मनुष्य के पुत्र, सोर के राजा के बारे में करुण गीत गाओ। उससे कहो, ‘मेरे स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘तुम आदर्श पुरुष थे, तुम बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण थे, तुम पूर्णत: सुन्दर थे, {28:13} तुम एदेन में थे परमेश्वर के उद्यान में तुम्हारे पास हर एक बहुमूल्य रत्न थे — लाल, पुखराज, हीरे, फिरोजा, गोमेद और जस्पर नीलम, हरितमणि और नीलमणि और ये हर एक रत्न सोने में जड़े थे। तुमको यह सौन्दर्य प्रदान किया गया था जिस दिन तुम्हारा जन्म हुआ था। परमेश्वर ने तुम्हें शक्तिशाली बनाया। {28:14} तुम चुने गए करुब (स्वर्गदूत) थे। तुम्हारे पंख मेरे सिंहासन पर फैले थे और मैंने तुमको परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर रखा। तुम उन रत्नों के बीच चले जो अग्नि की तरह कौंधते थे। {28:15} तुम अच्छे और ईमानदार थे जब मैंने तुम्हें बनाया। किन्तु इसके बाद तुम बुरे बन गए। {28:16} तुम्हारा व्यापार तुम्हारे पास बहुत सम्पत्ति लाता था। किन्तु उसने भी तुम्हारे भीतर क्रूरता उत्पन्न की और तुमने पाप किया। अत: मैंने तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार किया मानों तुम गन्दी चीज हो। मैंने तुम्हें परमेश्वर के पर्वत से फेंक दिया। तुम विशेष करुब (स्वर्गदूतों) में से एक थे, तुम्हारे पंख फैले थे मेरे सिंहासन पर किन्तु मैंने तुम्हें आग की तरह कौंधने वाले रत्नों को छोड़ने को विवश किया। {28:17} तुम अपने सौन्दर्य के कारण घमण्डी हो गए, तुम्हारे गौरव ने तुम्हारी बुद्धिमत्ता को नष्ट किया, इसलिये मैंने तुम्हें धरती पर ला फेंका, और अब अन्य राजा तुम्हें आँख फाड़ कर देखते हैं। {28:18} तुमने अनेक गलत काम किये, तुम बहुत कपटी व्यापारी थे। इस प्रकार तुमने पवित्र स्थानों को अपवित्र किया, इसलिए मैं तुम्हारे ही भीतर से अग्नि लाया, इसने तुमको जला दिया, तुम भूमि पर राख हो गए। अब हर कोई तुम्हारी लज्जा देख सकता है। {28:19} “‘अन्य राष्ट्रों मे सभी लोग, जो तुम पर घटित हुआ, उसके बारे में शोकग्रस्त थे। जो तुम्हें हुआ, वह लोगों को भयभीत करेगा। तुम समाप्त हो गये हो!’” {i28:20} सीदोन के विरुद्ध सन्देश {28:20} यहोवा वचन मुझे मिला। उसने कहा, {28:21} “मनुष्य के पुत्र, सीदोन पर ध्यान दो और मेरे लिये उस स्थान के विरुद्ध कुछ कहो। {28:22} कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘सीदोन, मैं तेरे विरुद्ध हूँ! तुम्हारे लोग मेरा सम्मान करना सीखेंगे, मैं सीदोन को दण्ड दूँगा, तब लोग समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ। तब वे समझेंगे कि मैं पवित्र हूँ और वे मुझको उस रूप में लेंगे। {28:23} मैं सीदोन में रोग और मृत्यु भेजूँगा, नगर के बाहर तलवार (शत्रु सैनिक) उस मृत्यु को लायेगी। तब वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ! {i28:24} राष्ट्र इस्राएल का मजाक उड़ाना बन्द करेंगे। {28:24} “‘अतीत काल में इस्राएल के चारों ओर के देश उससे घृणा करते थे। किन्तु उन अन्य देशों के लिये बुरी घटनायें घटेंगी। कोई भी तेज काँटे या कंटीली झाड़ी इस्राएल के परिवार को घायल करने वाली नहीं रह जाएगी। तब वे जानेंगे कि मैं उनका स्वामी यहोवा हूँ।’” {28:25} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैंने इस्राएल के लोगों को अन्य राष्ट्रों में बिखेर दिया। किन्तु मैं फिर इस्राएल के परिवार को एक साथ इकट्ठा करूँगा। तब वे राष्ट्र समझेंगे कि मैं पवित्र हूँ और वे मुझे उसी रूप में लेंगे। उस समय इस्राएल के लोग अपने देश में रहेंगे अर्थात जिस देश को मैंने अपने सेवक याकूब को दिया। {28:26} वे उस देश में सुरक्षित रहेंगे। वे घर बनायेंगे तथा अंगूर की बेलें लगाएंगे। मैं उसके चारों ओर के राष्ट्रों को दण्ड दूँगा जिन्होंने उससे घृणा की। तब इस्राएल के लोग सुरक्षित रहेंगे। तब वे समझेंगे कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ।” {i29:1} मिस्र के विरुद्ध सन्देश {29:1} देश निकाले के दसवें वर्ष के दसवें महीने (जनवरी) के बारहवें दिन मेरे स्वामी यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {29:2} “मनुष्य के पुत्र, मिस्र के राजा फिरौन की ओर ध्यान दो, मेरे लिये उसके तथा मिस्र के विरुद्ध कुछ कहो। {29:3} कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘मिस्र के राजा फिरौन, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ। तुम नील नदी के किनारे विश्राम करते हुए विशाल दैत्य हो। तुम कहते थे, “यह मेरी नदी है! मैंने यह नदी बनाई है!” {29:4} “‘किन्तु मैं तुम्हारे जबड़े में आँकड़े दूँगा। नील नदी की मछलियाँ तुम्हारी चमड़ी से चिपक जाएंगी। मैं तुमको और तुम्हारी मछलियाँ को तुम्हारी नदियों से बाहर कर सूखी {29:5} भूमि पर फेंक दूँगा, तुम धरती पर गिरोगे, और कोई न तुम्हें उठायेगा, न ही दफनायेगा। मैं तुम्हें जंगली जानवरों और पक्षियों को दूँगा, तुम उनके भोजन बनोगे। {29:6} तब मिस्र में रहने वाले सभी लोग जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ! “‘मैं इन कामों को क्यों करूँगा? क्योंकि इस्राएल के लोग सहारे के लिये मिस्र पर झुके, किन्तु मिस्र केवल दुर्बल घास का तिनका निकला। {29:7} इस्राएल के लोग सहारे के लिये मिस्र पर झुके और मिस्र ने केवल उनके हाथों और कन्धों को विदीर्ण किया। वे सहारे के लिये तुम पर झुके किन्तु तुमने उनकी पीठ को तोड़ा और मरोड़ दिया।” {29:8} इसलिये मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “मैं तुम्हारे विरुद्ध तलवार लाऊँगा। मैं तुम्हारे सभी लोगों और जानवरों को नष्ट करूँगा। {29:9} मिस्र खाली और नष्ट हो जाएगा। तब वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” परमेश्वर ने कहा, “मैं वे काम क्यों करूँगा क्योंकि तुमने कहा, “यह मेरी नदी है। मैंने इस नदी को बनाया।” {29:10} अत: मैं (परमेश्वर) तुम्हारे विरुद्ध हूँ। मैं तुम्हारी नील नदी की कई शाखाओं के विरुद्ध हूँ। मैं मिस्र को पूरी तरह नष्ट करूँगा। मिग्दोल से सवेन तक तथा जहाँ तक कूश की सीमा है, वहाँ तक नगर खाली होंगे। {29:11} कोई व्यक्ति या जानवर मिस्र से नहीं गुजरेगा। कोई व्यक्ति या जानवर मिस्र में चालीस वर्ष तक नहीं रहेगा। {29:12} मैं मिस्र देश को उजाड़ कर दूँगा और उसके नगर चालीस वर्ष तक उजाड़ रहेंगे। मैं मिस्रियों को राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। मैं उन्हें विदेशों में बसा दूँगा।” {29:13} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं मिस्र के लोगों को कई राष्ट्रों में बिखेरूँगा। किन्तु चालीस वर्ष के अन्त में फिर मैं उन लोगों को एक साथ इकट्ठा करूँगा। {29:14} मैं मिस्र के बंदियों को वापस लाऊँगा। मैं मिस्रियों को पत्रास के प्रदेश में, जहाँ वे उत्पन्न हुए थे, वापस लाऊँगा। किन्तु उनका राज्य महत्वपूर्ण नहीं होगा। {29:15} यह सबसे कम महत्वपूर्ण राज्य होगा। मैं इसे फिर अन्य राष्ट्रों से ऊपर कभी नहीं उठाऊँगा। मैं उन्हें इतना छोटा कर दूँगा कि वे राष्ट्रों पर शासन नहीं कर सकेंगे {29:16} और इस्राएल का परिवार फिर कभी मिस्र पर आश्रित नहीं रहेगा। इस्राएली अपने पाप को याद रखेंगे। वे याद रखेंगे कि वे सहायता के लिये मिस्र की ओर मुड़े, परमेश्वर की ओर नहीं और वे समझेंगे कि मैं यहोवा और स्वामी हूँ।” {i29:17} बाबुल मिस्र को लेगा {29:17} देश निकाले के सत्ताईसवें वर्ष के पहले महीने (अप्रैल) के पहले दिन यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {29:18} “मनुष्य के पुत्र, बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने सोर के विरुद्ध अपनी सेना को भीषण युद्ध में लगाया। उन्होंनेहर एक सैनिक के बाल कटवा दिये। भारी वजन ढोने के कारण हर एक कंधा रगड़ से नंगा हो गया। नबूकदनेस्सर और उसकी सेना ने सोर को हराने के लिये कठिन प्रयत्न किया। किन्तु वे उन कठिन प्रयत्नों से कुछ पा न सके।” {29:19} अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर को मिस्र देश दूँगा और नबूकदनेस्सर मिस्र के लोगों को ले जाएगा। नबूकदनेस्सर मिस्र की कीमती चीज़ों को ले जाएगा। यह नबूकदनेस्सर की सेना का वेतन होगा। {29:20} मैंने नबूकदनेस्सर को मिस्र देश उसके कठिन प्रयत्न के पुरस्कार के रूप में दिया है। क्यों क्योंकि उन्होंने मेरे लिये काम किया!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {29:21} “उस दिन मैं इस्राएल के परिवार को शक्तिशाली बनाऊँगा और तुम्हारे लोग मिस्रियों का मजाक उड़ाएंगे। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i30:1} बाबुल की सेना मिस्र पर आक्रमण करेगी {30:1} यहोवा का वचन मुझे फिर मिला। उसने कहा, {30:2} “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये कुछ कहो। कहो, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘रोओ और कहो, “वह भयंकर दिन आ रहा है।” {30:3} वह दिन समीप है! हाँ, न्याय करने का यहोवा का दिन समीप है। यह एक दुर्दिन होगा। यह राष्ट्रों के साथ न्याय करने का समय होगा! {30:4} मिस्र के विरुद्ध तलवार आएगी! कूश के लोग भय से काँप उठेंगे, जिस समय मिस्र का पतन होगा। बाबुल की सेना मिस्र के लोगों को बन्दी बना कर ले जाएगी। मिस्र की नींव उखड़ जाएगी! {30:5} “‘अनेक लोगों ने मिस्र से शान्ति — सन्धि की। किन्तु कूश, पूत, लूद, समस्त अरब, कूब और इस्राएल के सभी लोग नष्ट होंगे! {30:6} “‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: हाँ, जो मिस्र की सहायता करते हैं उनका पतन होगा! उसकी शक्ति का गर्व नीचा होगा। मिस्र के लोग युद्ध में मारे जाएंगे मिग्दोल से लेकर सवेन तक के। मेरे स्वामी यहोवा ने वे बातें कहीं! {30:7} मिस्र उन देशों में मिल जाएगा जो नष्ट कर दिए गए। मिस्र उन खाली देशों में से एक होगा। {30:8} मैं मिस्र में आग लगाऊँगा और उसके सभी सहायक नष्ट हो जायेंगे। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ! {30:9} “‘उस समय मैं दूतों को भेजूँगा। वे जहाजों में कूश को बुरी खबरें पहुँचाने के लिये जाएंगे। कूश अब अपने को सुरक्षित समझता है। किन्तु कूश के लोग भय से तब काँप उठेंगे जब मिस्र दण्डित होगा। वह समय आ रहा है!’” {30:10} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर का उपयोग करूँगा और मैं मिस्र के लोगों को नष्ट करूँगा। {30:11} नबूकदनेस्सर और उसके लोग राष्ट्रों में सर्वाधिक भयंकर हैं। मैं उन्हें मिस्र को नष्ट करने के लिये लाऊँगा। वे मिस्र के विरुद्ध अपनी तलवारें निकालेंगे। वे प्रदेश को शवों से पाट देंगे। {30:12} मैं नील नदी को सूखी भूमि बना दूँगा। तब मैं सूखी भूमि को बुरे लोगों को बेच दूँगा। मैं अजनबियों का उपयोग उस देश को खाली करने के लिये करूँगा। मैं यहोवा ने, यह कहा है!” {i30:13} मिस्र की देवमूर्तियाँ नष्ट की जाएंगी {30:13} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “मैं मिस्र में देवमूर्तियों को नष्ट करुँगा। मैं मूर्तियों को नोप से बाहर करूँगा। मिस्र देश में कोई भी प्रमुख भविष्य के लिये नहीं होगा, और मैं मिस्र में भय भर दूँगा। {30:14} मैं पत्रोस को खाली करा दूँगा। मैं सोअन में आग लगा दूँगा। मैं नो को दण्ड दूँगा {30:15} और मैं सीन नामक मिस्र के किले के विरुद्ध अपने क्रोध की वर्षा करूँगा! मैं नो के लोगों को नष्ट करूँगा। {30:16} मैं मिस्र में आग लगाऊँगा। सीन नामक स्थान भय से पीड़ित होगा, नो नगर में सैनिक टूट पड़ेंगे और नो को प्रतिदिन नयी परेशानियाँ होंगी। {30:17} आवेन और पीवेसेत के युवक युद्ध में मारे जाएंगे और स्त्रियाँ पकड़ी जाएंगी और ले जाई जाएँगी। {30:18} तहपन्हेस का यह काला दिन होगा, जब मैं मिस्र के अधिकार को समाप्त करूँगा मिस्र की गर्वीली शक्ति समाप्त होगी! मिस्र को दुर्दिन ढक लेगा और उसकी पुत्रियाँ पकड़ी और ले जायी जाएँगी। {30:19} इस प्रकार मैं मिस्र को दण्ड दूँगा। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!” {i30:20} मिस्र सदा के लिये दुर्बल होगा {30:20} देश निकाले के ग्यारहवें वर्ष में प्रथम महीने (अप्रैल) के सातवें दिन यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {30:21} “मनुष्य के पुत्र, मैंने मिस्र के राजा फिरौन की भुजा (शक्ति) तोड़ डाली है। कोई भी उसकी भुजा पर पट्टी नहीं लपेटेगा। उसका घाव नहीं भरेगा। अत: उसकी भुजा तलवार पकड़ने योग्य शक्ति वाली नहीं होगी।” {30:22} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं मिस्र के राजा फिरौन के विरुद्ध हूँ। मैं उसकी दोनों भुजाओं शक्तिशाली भुजा और पहले से टूटी भुजा को तोड़ डालूँगा। मैं उसके हाथ से तलवार को गिरा दूँगा। {30:23} मैं मिस्रियों को राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। {30:24} मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को शक्तिशाली बनाऊँगा। मैं अपनी तलवार उसके हाथ में दूँगा। किन्तु मैं फिरौन की भुजा को तोड़ दूँगा। तब फिरौन पीड़ा से चीखेगा, राजा की चीख एक मरते हुए व्यक्ति की चीख सी होगी। {30:25} अत: मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को शक्तिशाली बनाऊँगा, किन्तु फिरौन की भुजायें कट गिरेंगी। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। “मैं बाबुल के राजा के हाथों अपनी तलवार दूँगा। तब वह मिस्र देश के विरुद्ध अपनी तलवार को आगे बढ़ायेगा। {30:26} मैं मिस्रियों को राष्ट्रों में बिखेर दूँगा। तब वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ!” {i31:1} अश्शूर एक देवदार वृक्ष की तरह है {31:1} देश निकाले के ग्यारहवें वर्ष में तीसरे महीने (जून) के प्रथम दिन यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, {31:2} “मनुष्य के पुत्र, मिस्र के राजा फिरौन और उसके लोगों से यह कहो: “‘तुम्हारी महानता में कौन तुम्हारे समान है {31:3} अश्शूर, लबानोन में, सुन्दर शाखाओं सहित एक देवदार का वृक्ष था। वन की छाया — युक्त और अति ऊँचा एक देवदार का वृक्ष था। इसके शिखर जलद भेदी थे! {31:4} जल वृक्ष को उगाता था। गहरी नदियाँ वृक्ष को ऊँचा करती थीं। नदियाँ उन स्थान के चारों ओर बहती थीं, जहाँ वृक्ष लगे थे। केवल इसकी धारायें ही खेत के अन्य वृक्षों तक बहती थीं। {31:5} इसलिये खेत के सभी वृक्षों से ऊँचा वृक्ष वही था और इसने कई शाखायें फैला रखी थीं। वहाँ काफी जल था। अत: वृक्ष — शाखायें बाहर फैली थीं। {31:6} वृक्ष की शाखाओं में संसार के सभी पक्षियों ने घोंसले बनाए थे। वृक्ष की शाखाओं के नीचे, खेत के सभी जानवर बच्चों को जन्म देते थे। सभी बड़े राष्ट्र उस वृक्ष की छाया में रहते थे। {31:7} अत: वृक्ष अपनी महानता और अपनी लम्बी शाखाओं में सुन्दर था। क्यों? क्योंकि इसकी जड़ें यथेष्ट जल तक पहुँची थीं! {31:8} परमेश्वर के उद्यान के देवदारु वृक्ष भी, उतने बड़े नहीं थे जितना यह वृक्ष। सनौवर के वृक्ष इतनी अधिक शाखायें नहीं रखते, चिनार — वृक्ष भी ऐसी शाखायें नहीं रखते, परमेश्वर के उद्यान का कोई भी वृक्ष, इतना सुन्दर नहीं था जितना यह वृक्ष। {31:9} मैंने अनेक शाखाओं सहित इस वृक्ष को सुन्दर बनाया और परमेश्वर के उद्यान अदन, के सभी वृक्ष इससे ईर्ष्या करते थे!’” {31:10} अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “वृक्ष ऊँचा हो गया है। इसने अपने शिखरों को बादलों में पहुँचा दिया है। वृक्ष गर्वीला है क्योंकि यह ऊँचा है! {31:11} इसलिये मैंने एक शक्तिशाली राजा को इस वृक्ष को लेने दिया। उस शासक ने वृक्ष को उसके बुरे कामों के लिये दण्ड दिया। मैंने उस वृक्ष को अपने उद्यान से बाहर किया है। {31:12} अजनबी अत्याधिक भयंकर राष्ट्रों ने इसे काट डाला और छोड़ दिया। वृक्ष की शाखायें पर्वतों पर और सारी घाटी में गिरीं। उस प्रदेश में बहने वाली नदियों में वे टूटे अंग बह गए। वृक्ष के नीचे कोई छाया नहीं रह गई, अत: सभी लोगों ने उसे छोड़ दिया। {31:13} अब उस गिरे वृक्ष में पक्षी रहते हैं और इसकी गिरी शाखाओं पर जंगली जानवर चलते हैं। {31:14} “अब कोई भी, उस जल का वृक्ष गर्वीला नहीं होगा। वे बादलों तक पहुँचना नहीं चाहेंगे। कोई भी शक्तिशाली वृक्ष, जो उस जल को पीता है, ऊँचा होने की अपनी प्रशंसा नहीं करेगा। क्यों क्योंकि उन सभी की मृत्यु निश्चित हो चुकी है। वे सभी मृत्यु के स्थान शेओल नामक पाताल लोक में चले जाएंगे। वे उन अन्य लोगों के साथ हो जाएंगे जो मरे और नीचे नरक में चले गए।” {31:15} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “उस दिन जब तक वृक्ष शेओल को गया मैंने लोगों से शोक मनवाया। मैंने गहरे जल को, उसके लिये शोक से ढक दिया। मैंने वृक्ष की नदियों को रोक दिया और वृक्ष के लिये जल का बहना रूक गया। मैंने लबानोन से इसके लिये शोक मनवाया। खेत के सभी वृक्ष इस बड़े वृक्ष के शोक से रोगी हो गए। {31:16} मैंने वृक्ष को गिराया और वृक्ष के गिरने की ध्वनि के भय से राष्ट्र काँप उठे। मैंने वृक्ष को मृत्यु के स्थान पर पहुँचाया। यह नीचे उन लोगों के साथ रहने गया जो उस नरक में नीचे गिरे हुए थे। अतीत में एदेन के सभी वृक्ष अर्थात् लबानोन के सर्वोत्तम वृक्ष उस पानी को पीते थे। उन सभी वृक्षों ने पाताल लोक में शान्ति प्राप्त की। {31:17} हाँ, वे वृक्ष भी बड़े वृक्ष के साथ मृत्यु के स्थान पर गए। उन्होंने उन व्यक्तियों का साथ पकड़ा जो युद्ध में मर गए थे। उस बड़े वृक्ष ने अन्य वृक्षों को शक्तिशाली बनाया। वे वृक्ष, राष्ट्रों में उस बड़े वृक्ष की छाया में रहते थे। {31:18} “अत: मिस्र, एदेन में बहुत से विशाल और शक्तिशाली वृक्ष है। उनमें से किस वृक्ष के साथ मैं तुम्हारी तुलना करूँगा! तुम एदेन के वृक्षों के साथ पाताल लोक को जाओगे! मृत्यु के स्थान में तुम उन विदेशियों और युद्ध में मारे गए व्यक्तियों के साथ में लेटोगे। “हाँ, यह फिरौन और उसके सभी लोगों के साथ होगा!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {i32:1} फिरौन: एक सिंह या दैत्य {32:1} देश — निकाले के बारहवें वर्ष के बारहवें महीने (मार्च) के प्रथम दिन यहोवा का वचन मेरे पास आया। उसने कहा, {32:2} “मनुष्य के पुत्र, मिस्र के राजा के विषय में यह करुणगीत गाओ। उससे कहो: “‘तुमने सोचा था तुम शक्तिशाली युवा सिंह हो, राष्ट्रों में गर्व सहित टहलते हुए। किन्तु सचमुच समुद्र के दैत्य जैसे हो। तुम प्रवाह को धकेल कर रास्ता बनाते हो, और अपने पैरों से जल को मटमैला करते हो। तुम मिस्र की नदियों को उद्वेलित करते हो।’” {32:3} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “मैंने बहुत से लोगों को एक साथ इकट्ठा किया है। अब मैं तुम्हारे ऊपर अपना जाल फेंकूँगा। तब वे लोग तुम्हें खींच लेंगे। {32:4} तब मैं तुम्हें सूखी जमीन पर गिरा दूँगा। मैं तुम्हें खेत में फेंकूँगा। मैं सभी पक्षियों को तुम्हें खाने के लिये बुलवाऊँगा। मैं हर जगह से जंगली जानवरों को तुम्हें खाने और पेट भरने के लिये बुलवाऊँगा। {32:5} मैं तुम्हारे शरीर को पर्वतों पर बिखेरूँगा। मैं तुम्हारे शव से घाटियों को भर दूँगा। {32:6} मैं तुम्हारा रक्त पर्वतों पर डालूँगा और धरती इसे सोखेगी। नदियाँ तुमसे भर जाएंगी। {32:7} मैं तुमको लुप्त कर दूँगा। मैं नभ को ढक दूँगा और नक्षत्रों को काला कर दूँगा। मैं सूर्य को बादल से ढक दूँगा और चन्द्र नहीं चमकेगा। {32:8} मैं सभी चमकती ज्योतियों को नभ में तुम्हारे ऊपर काला बनाऊँगा। मैं तुम्हारे सारे देश में अंधेरा कर दूँगा। {32:9} “बहुत से लोग शोकग्रस्त और व्यग्र होंगे, जब वे सुनेंगे कि तुमको नष्ट करने के लिये मैं एक शत्रु को लाया। राष्ट्र जिन्हें तुम जानते भी नहीं, तिलमिला जायेंगे। {32:10} मैं बहुत से लोगों को तुम्हारे बारे में आघात पहुँचाऊँगा उनके राजा तुम्हारे बारे में उस समय बुरी तरह से भयभीत होंगे जब मैं उनके सामने अपनी तलवार चलाऊँगा। जिस दिन तुम्हारा पतन होगा उसी दिन, हर एक क्षण, राजा लोग भयभीत होंगे। हर एक राजा अपने जीवन के लिये भयभीत होगा।” {32:11} क्यों क्योंकि मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “बाबुल के राजा की तलवार तुम्हारे विरुद्ध युद्ध करने आयेगी। {32:12} मैं उन सैनिकों का उपयोग तुम्हारे लोगों को युद्ध में मार डालने में करुँगा। वे सैनिक राष्ट्रों में सबसे भयंकर राष्ट्र से आते हैं। वे उन चीजों को नष्ट कर देंगे जिनका गर्व मिस्र को है। मिस्र के लोग नष्ट कर दिये जायेंगे। {32:13} मिस्र में नदियों के सहारे बहुत से जानवर हैं। मैं इन जानवरों को भी नष्ट करूँगा! लोग भविष्य में, अपने पैरों से पानी को गंदा नहीं करेंगे। गायों के खुर भविष्य में पानी को मैला नहीं करेंगे। {32:14} इस प्रकार मैं मिस्र में पानी को शान्त बनाऊँगा। मैं उनकी नदियों को मन्द बहाऊँगा वे तेल की तरह बहेंगी।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, {32:15} “मैं मिस्र देश को खाली कर दूँगा। वह हर चीज से रहित होगा। मैं मिस्र में रहने वाले सभी लोगों को दण्ड दूँगा। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा और स्वामी हूँ! {32:16} “यह एक करुणगीत है जिसे लोग मिस्र के लिये गायेंगे। दूसरे राष्ट्रों में पुत्रियाँ (नगर) मिस्र के बारे में इस करुण गीत को गायेंगी। वे इसे, मिस्र और उसके सभी लोगों के बारे में करुण गीत के रूप में गायेंगी।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था! {i32:17} मिस्र का नष्ट किया जाना {32:17} देश निकाले के बारहवें वर्ष में, उस महीने के पन्द्रहवें दिन, यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, {32:18} “मनुष्य के पुत्र, मिस्र के लोगों के लिये रोओ। मिस्र और उन पुत्रियों को शक्तिशाली राष्ट्र से कब्र तक पहुँचाओ। उन्हें उस पाताल लोक में पहुँचाओ जहाँ वे उन अन्य व्यक्तियों के साथ होंगे जो उस नरक में गए। {32:19} “मिस्र, तुम किसी अन्य से अच्छे नहीं हो। मृत्यु के स्थान पर चले जाओ। जाओ और उन विदेशियों के साथ लेटो। {32:20} “मिस्र को उन सभी अन्य लोगों के साथ रहने जाना पड़ेगा जो युद्ध में मारे गए थे। शत्रु ने उसे और उसके लोगों को उठा फेंका है। {32:21} “मजबूत और शक्तिशाली व्यक्ति युद्ध में मारे गए। वे विदेशी मृत्यु के स्थान पर गए। उस स्थान से वे लोग मिस्र और उसके सहायकों से बातें करेंगे। वे जो युद्ध में मारे गये थे। {32:22} “अश्शूर और उसकी सारी सेना वहाँ मृत्यु के स्थान पर हैं। उनकी कब्रें नीचे गहरे नरक में हैं। वे सभी अश्शूर के सैनिक युद्ध में मारे गए। उनकी कब्रे उसकी {32:23} कब्र के चारों ओर हैं। जब वे जीवित थे तब वे लोगों को भयभीत करते थे। किन्तु अब वे सभी पूर्ण शान्त हैं वे सभी युद्ध में मारे गए थे। {32:24} “एलाम वहाँ है और इसकी सारी सेना उसकी कब्र के चारों ओर हैं। वे सभी युद्ध में मारे गए। वे विदेशी गहरे नीचे धरती में गए। जब वे जीवित थे, वे लोगों को भयभीत करते थे। किन्तु वे अपनी लज्जा को अपने साथ उस गहरे नरक में ले गए। {32:25} उन्होंने एलाम और उसके सैनिकों के लिए, जो युद्ध में मारे गए हैं, बिस्तर लगा दिया है। एलाम की सारी सेना उसकी कब्र के चारों ओर हैं। ये सभी विदेशी युद्ध में मारे गए थे। जब वे जीवित थे, वे लोगों को डराते थे। किन्तु वे अपनी लज्जा को अपने साथ उस गहरे नरक में ले गए। वे उन सभी लोगों के साथ रखे गये, जो मारे गए थे। {32:26} “मेशेक, तूबल और उनकी सारी सेनायें वहाँ है। उनकी कब्रें इनके चारों ओर हैं। वे सभी विदेशी युद्ध में मारे गए थे। जब वे जीवित थे तब वे लोगों को भयभीत करते थे। {32:27} किन्तु अब वे शक्तिशाली व्यक्तियों के साथ लेटे हैं जो बहुत पहले मर चुके थे। वे अपने युद्ध के अस्त्र — शस्त्रों के साथ दफनाए गए। उनकी तलवारें उनके सिर के नीचे रखी जाएंगी। किन्तु उनके पाप उनकी हड्डियों पर हैं। क्यों क्योंकि जब वे जीवित थे, उन्होंने लोगों को डराया था। {32:28} “मिस्र, तुम भी नष्ट होगे। तुम उन विदेशियों के साथ लेटोगे। तुम उन अन्य सैनिकों के साथ लेटोगे जो युद्ध में मारे जा चुके हैं। {32:29} “एदोम भी वहीं है। उससे राजा और अन्य प्रमुख उसके साथ वहाँ हैं। वे शक्तिशाली सैनिक भी थे। किन्तु अब वे उन अन्य लोगों के साथ लेटे हैं। जो युद्ध में मारे गए थे। वे उन विदेशियों के साथ लेटे हैं। वे उन व्यक्तियों के साथ नीचे नरक में चले गए। {32:30} “उत्तर के सभी शासक वहाँ हैं। वहाँ सीदोन के सभी सैनिक हैं। उनकी शक्ति लोगों को डराती थी। किन्तु वे हक्के — बक्के हैं। वे विदेशी उन अन्य व्यक्तियों के साथ लेटे हैं जो युद्ध में मारे गए थे। वे अपनी लज्जा अपने साथ उस गहरे नरक में ले गए। {32:31} “फिरौन उन लोगों को देखेगा जो मृत्यु के स्थान पर गए। वह और उसके साथ सभी लोगों को पूर्ण शान्ति मिलेगी। हाँ, फिरौन और उसकी सेना युद्ध में मारी जाएगी।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {32:32} “जब फिरौन जीवित था तब मैंने लोगों को उससे भयभीत कराया। किन्तु अब वह उन विदेशियों के साथ लेटेगा। फिरौन और उसकी सेना उन अन्य सैनिकों के साथ लेटेगी जो युद्ध में मारे गए थे।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {i33:1} परमेश्वर यहेजकेल को इस्राएल का पहरेदार चुनता है {33:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {33:2} “मनुष्य के पुत्र, अपने लोगों से बातें करो। उनसे कहो, ‘मैं शत्रु के सैनिकों को उस देश के विरुद्ध युद्ध के लिये ला सकता हूँ। जब ऐसा होगा तो लोग एक व्यक्ति को पहरेदार के रूप में चुनेंगे। {33:3} यदि पहरेदार शत्रु के सैनिकों को आते देखता है, तो वह तुरही बजाता है और लोगों को सावधान करता है। {33:4} यदि लोग उस चेतावनी को सुनें किन्तु अनसुनी करें तो शत्रु उन्हें पकड़ेगा और उन्हें बन्दी के रूप में ले जायेगा। यह व्यक्ति अपनी मृत्यु के लिये स्वयं उत्तरदायी होगा। {33:5} उसने तुरही सुनी, पर चेतावनी अनसुनी की। इसलिये अपनी मृत्यु के लिये वह स्वयं दोषी है। यदि उसने चेतावनी पर ध्यान दिया होता तो उसने अपना जीवन बचा लिया होता। {33:6} “‘किन्तु यह हो सकता है कि पहरेदार शत्रु के सैनिकों को आता देखता है, किन्तु तुरही नहीं बजाता। उस पहरेदार ने लोगों को चेतावनी नहीं दी। शत्रु उन्हें पकड़ेगा और उन्हें बन्दी बनाकर ले जाएगा। वह व्यक्ति ले जाया जाएगा क्योंकि उसने पाप किया। किन्तु पहरेदार भी उस आदमी की मृत्यु का उत्तरदायी होगा।’ {33:7} “अब, मनुष्य के पुत्र, मैं तुमको इस्राएल के परिवार का पहरेदार चुन रहा हूँ। यदि तुम मेरे मुख से कोई सन्देश सुनो तो तुम्हें मेरे लिये लोगों को चेतावनी देनी चाहिए। {33:8} मैं तुमसे कह सकता हूँ, ‘यह पापी व्यक्ति मरेगा।’ तब तुम्हें उस व्यक्ति के पास जाकर मेरे लिये उसे चेतावनी देनी चाहिए। यदि तुम उस पापी व्यक्ति को चेतावनी नहीं देते और उसे अपना जीवन बदलने को नहीं कहते, तो वह पापी व्यक्ति मरेगा, क्योंकि उसने पाप किया। किन्तु मैं तुम्हें उसकी मृत्यु का उत्तरदायी बनाऊँगा। {33:9} किन्तु यदि तुम उस बुरे व्यक्ति को अपना जीवन बदलने के लिये और पाप करना छोड़ने के लिये चेतावनी देते हो और यदि वह पाप करना छोड़ने से इन्कार करता है तो वह मरेगा क्योंकि उसने पाप किया, किन्तु तुमने अपना जीवन बचा लिया।” {i33:10} परमेश्वर लोगों को नष्ट करना नहीं चाहता {33:10} “अत: मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के परिवार से मेरे लिये कहो। वे लोग कह सकते हैं, ‘हम लोगों ने पाप किया है और नियमों को तोड़ा है। हमारे पाप हमारी सहनशक्ति के बाहर हैं। हम उन पापों के कारण नाश हो रहे हैं। हम जीवित रहने के लिये क्या कर सकते हैं।’ {33:11} “तुम्हें उनसे कहना चाहिए, ‘मेरा स्वामी यहोवा कहता है: मैं अपनी जीवन की शपथ खाकर विश्वास दिलाता हूँ कि मैं लोगों को मरता देख कर आनन्दित नहीं होता, पापी व्यक्तियों को भी नहीं। मैं नहीं चाहता कि वे मरें। मैं उन पापी व्यक्तियों को अपने पास लौटाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि वे अपने जीवन को बदलें जिससे वे जीवित रह सकें। अत: मेरे पास लौटो! बुरे काम करना छोड़ो! इस्राएल के परिवार, तुम्हें मरना ही क्यों चाहिए?’ {33:12} “मनुष्य के पुत्र, अपने लोगों से कहो: ‘यदि किसी व्यक्ति ने अतीत में पुण्य किया है तो उससे उसका जीवन नहीं बचेगा। यदि वह बच जाये और पाप करना शुरु करे। यदि किसी व्यक्ति ने अतीत में पाप किया, तो वह नष्ट नहीं किया जाएगा, यदि वह पाप से दूर हट जाता है। अत: याद रखो, एक व्यक्ति द्वारा अतीत में किये गए पुण्य कर्म उसकी रक्षा नहीं करेंगे, यदि वह पाप करना आरम्भ करता है।’ {33:13} “यह हो सकता है कि मैं किसी अच्छे व्यक्ति के लिये कहूँ कि वह जीवित रहेगा। किन्तु यह हो सकता है कि वह अच्छा व्यक्ति यह सोचना आरम्भ करे कि अतीत में उसके द्वारा किये गए अच्छे कर्म उसकी रक्षा करेंगे। अत: वह बुरे काम करना आरम्भ कर सकता है। किन्तु मैं उसके अतीत के पुण्यों को याद नहीं रखूँगा! नहीं, वह उन पापों के कारण मरेगा जिन्हें वह करना आरम्भ करता है। {33:14} “या यह हो सकता है कि मैं किसी पापी व्यक्ति के लिये कहूँगा कि वह मरेगा। किन्तु वह अपने जीवन को बदल सकता है। वह पाप करना छोड़ सकता है और ठीक — ठीक रहना आरम्भ कर सकता है। वह अच्छा और उचित हो सकता है। {33:15} वह उस गिरवीं की चीज़ को लौटा सकता है जिसे उसने ऋण में मुद्रा देते समय रखा था। वह उन चीज़ों के लिये भुगतान कर सकता है जिन्हें उसने चुराया था। वह उन नियमों का पालन कर सकता है जो जीवन देते हैं। वह बुरे काम करना छोड़ देता है। तब वह व्यक्ति निश्चय ही जीवित रहेगा। वह मरेगा नहीं। {33:16} मैं उसके अतीत के पापों को याद नहीं करूँगा। क्यों क्योंकि वह अब ठीक — ठीक रहता है और उचित व्यवहार रखता है। अत: वह जीवित रहेगा! {33:17} “किन्तु तुम्हारे लोग कहते हैं, ‘यह उचित नहीं है! यहोवा मेरा स्वामी वैसा नहीं हो सकता!’ “परन्तु वे ही लोग हैं जो उचित नहीं है! वे ही लोग है, जिन्हें बदलना चाहिए! {33:18} यदि अच्छा व्यक्ति पुण्य करना बन्द कर देता है और पाप करना आरम्भ करता है तो वह अपने पापों के कारण मरेगा। {33:19} और यदि कोई पापी पाप करना छोड़ देता है और ठीक — ठीक तथा उचित रहना आरम्भ करता है तो वह जीवित रहेगा! {33:20} किन्तु तुम लोग अब भी कहते हो कि मैं उचित नहीं हूँ। किन्तु मैं सत्य कह रहा हूँ। इस्राएल के परिवार, हर एक व्यक्ति के साथ न्याय, वह जो करता है, उसके अनुसार होगा!” {i33:21} यरूशलेम पर अधिकार कर लिया गया {33:21} देश — निकाले के बारहवें वर्ष में, दसवें महीने (जनवरी) के पाँचवें दिन एक व्यक्ति मेरे पास यरूशलेम से आया। वह वहाँ के युद्ध से बच निकला था। उसने कहा, “नगर (यरूशलेम) पर अधिकार हो गया!” {33:22} ऐसा हुआ कि जिस दिन वह व्यक्ति मेरे पास आया उसकी पूर्व संध्या को, मेरे स्वामी यहोवा की शक्ति मुझ पर उतरी। परमेश्वर ने मुझे बोलने योग्य नहीं बनाया। जिस समय वह व्यक्ति मेरे पास आया, यहोवा ने मेरा मुख खोल दिया था और फिर से मुझे बोलने दिया। {33:23} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {33:24} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के ध्वस्त नगर में इस्राएली लोग रह रहे हैं। वे लोग कह रहे हैं, ‘इब्राहीम केवल एक व्यक्ति था और परमेश्वर ने उसे यह सारी भूमि दे दी। अब हम अनेक लोग हैं अत: निश्चय ही यह भूमि हम लोगों की है! यह हमारी भूमि है!’ {33:25} “तुम्हें उनसे कहना चाहिये कि मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘तुम लोग रक्त — युक्त माँस खाते हो। तुम लोग अपनी देवमूर्तियों से सहायता की आशा करते हो। तुम लोगों को मार डालते हो। अत: मैं तुम लोगों को यह भूमि क्यों दूँ {33:26} तुम अपनी तलवार पर भरोसा करते हो। तुममें से हर एक भयंकर पाप करता है। तुममें से हर एक अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ व्यभिचार करता है। अत: तुम भूमि नहीं पा सकते।’ {33:27} “तुम्हें कहना चाहिए कि स्वामी यहोवा यह कहता है, मैं अपने जीवन की शपथ खा कर प्रतिज्ञा करता हूँ, कि जो लोग उन ध्वस्त नगरों में रहते हैं, वे तलवार के घाट उतारे जाएंगे। यदि कोई उस देश से बाहर होगा तो मैं उसे जानवरों से मरवाऊँगा और खिलाऊँगा। यदि लोग किले और गुफाओं में छिपे होंगे तो वे रोग से मरेंगे। {33:28} मैं भूमि को खाली और बरबाद करूँगा। वह देश उन सभी चीजों को खो देगा जिन पर उसे गर्व था। इस्राएल के पर्वत खाली हो जाएंगे। उस स्थान से कोई गुजरेगा नहीं। {33:29} उन लोगों ने अनेक भयंकर पाप किये हैं। अत: मैं उस देश को खाली और बरबाद करूँगा। तब वे लोग जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {33:30} “अब तुम्हारे विषय में, मनुष्य के पुत्र, तुम्हारे लोग दीवारों के सहारे झुके हुए और अपने दरवाजों में खड़े हैं और वे तुम्हारे बारे में बात करते हैं। वे एक दूसरे से कहते हैं, ‘आओ, हम जाकर सुनें जो यहोवा कहता है।’ {33:31} अत: वे तुम्हारे पास वैसे ही आते हैं जैसे वे मेरे लोग हों। वे तुम्हारे सामने मेरे लोगों की तरह बैठेंगे। वे तुम्हारा सन्देश सुनेंगे। किन्तु वे वह नहीं करेंगे जो तुम कहोगे। वे केवल वह करना चाहते हैं जो अनुभव करने में अच्छा हो। वे लोगों को धोखा देना चाहते हैं और अधिक धन कमाना चाहते हैं। {33:32} “तुम इन लोगों की दृष्टि में प्रेमगीत गाने वाले गायक से अधिक नहीं हो। तुम्हारा स्वर अच्छा है। तुम अपना वाद्य अच्छा बजाते हो। वे तुम्हारा सन्देश सुनेंगे किन्तु वे वह नहीं करेंगे जो तुम कहते हो। {33:33} किन्तु जिन चीजों के बारे में तुम गाते हो, वे सचमुच घटित होंगी और तब लोग समझेंगे कि उनके बीच सचमुच एक नबी रहता था!” {i34:1} इस्राएल भेड़ों की एक रेवड़ की तरह है {34:1} यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {34:2} “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिए इस्राएल के गड़ेरियों (प्रमुखों) के विरुद्ध बातें करो। उनसे मेरे लिये बातें करो। उनसे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है: ‘इस्राएल के गड़ेरियों (प्रमुखों) तुम केवल अपना पेट भर रहे हो। यह तुम्हारे लिये बहुत बुरा होगा। तुम गड़ेरियों, रेवड़ों का पेट क्यों नहीं भरते {34:3} तुम मोटी भेड़ों को खाते हो और अपने वस्त्र बनाने के लिये उनकी ऊन का उपयोग करते हो। तुम मोटी भेड़ को मारते हो, किन्तु तुम रेवड़ का पेट नहीं भरते। {34:4} तुमने दुर्बल को बलवान नहीं बनाया। तुमने रोगी भेड़ की परवाह नहीं की है। तुमने चोट खाई हुई भेड़ों को पट्टी नहीं बाँधी। कुछ भेड़ें भटक कर दूर चली गई और तुम उन्हें खोजने और उन्हें वापस लेने नहीं गए। तुम उन खोई भेड़ों को खोजने नहीं गए। नहीं, तुम क्रूर और कठोर रहे, यही मार्ग था जिस पर तुमने भेड़ों को ले जाना चाहा! {34:5} “‘और अब, भेड़ें बिखर गई हैं क्योंकि कोई गड़ेरिया नहीं था। वे हर एक जंगली जानवर का भोजन बनी। अत: वे बिखर गई। {34:6} मेरी रेवड़ सभी पर्वतों और ऊँची पहाड़ियों पर भटकी। मेरी रेवड़ धरती की सारी सतह पर बिखर गई। कोई भी उनकी खोज और देखभाल करने वाला नहीं था।’” {34:7} अत: तुम गड़ेरियों, यहोवा का वचन सुनो! मेरा स्वामी यहोवा कहता है, {34:8} “मैं अपनी जीवन की शपथ खाकर तुम्हें यह विश्वास दिलाता हूँ। जंगली जानवरों ने मेरी भेड़ों को पकड़ा। हाँ, मेरी रेवड़ सभी जंगली जानवरों का भोजन बन गई। क्यों क्योंकि उनका कोई ठीक गड़ेरिया नहीं था। मेरे गड़ेरियों ने मेरे रेवड़ की खोज नहीं की। उन गड़ेरियों ने भेड़ों को केवल मारा और स्वयं खाया। उन्होंने मेरी रेवड़ का पेट नहीं भरा।” {34:9} अत: तुम गड़ेरियों, यहोवा के सन्देश को सुनो! {34:10} यहोवा कहता है, “मैं उन गड़ेरियों के विरुद्ध हूँ! मैं उनसे अपनी भेड़ें मागूँगा! मैं उन पर आक्रमण करूँगा! वे भविष्य में मेरे गड़ेरिये नहीं रहेंगे! तब गड़ेरिये अपना पेट भी नहीं भर पाएंगे। मैं उनके मुख से अपनी रेवड़ को बचाऊँगा। तब मेरी भेड़ें उनका भोजन नहीं होंगी।” {34:11} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं स्वयं उनका गड़ेरिया बनूँगा। मैं अपनी भेड़ों की खोज करूँगा। मैं उनको ढूँढूंगा। {34:12} यदि कोई गड़ेरिया अपनी भेड़ों के साथ उस समय है जब उसकी भेड़ें दूर भटकने लगी हों तो वह उनको खोजने जाएगा। उसी प्रकार मैं अपनी भेड़ों की खोज करूँगा। मैं अपनी भेड़ों को बचाऊँगा। मैं उन्हें उन स्थानों से लौटाऊँगा जहाँ वे उस बदली तथा अंधेरे में भटक गई थीं। {34:13} मैं उन्हें उन राष्ट्रों से वापस लाऊँगा। मैं उन देशों से उन्हें इकट्ठा करूँगा। मैं उन्हें उनके अपने देश में लाऊँगा। मैं उन्हें इस्राएल के पर्वतों पर, जलस्रोतों के सहारे, उन सभी स्थानों में, जहाँ लोग रहते है, खिलाऊँगा। {34:14} मैं उन्हें घास वाले खेतों में ले जाऊँगा। वे इस्राएल के पर्वतों के ऊँचे स्थानों पर जाएंगी। वहाँ वे अच्छी धरती पर सोएँगी और घास खाएंगी। वे इस्राएल के पर्वत पर भरी — पूरी घास वाली भूमि में चरेंगी। {34:15} हाँ, मैं अपने रेवड़ को खिलाऊँगा और उन्हें विश्राम के स्थान पर ले जाऊँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {34:16} “मैं खोई भेड़ की खोज करूँगा। मैं उन भेड़ों को वापस लाऊँगा जो बिखर गई थीं। मैं उन भेड़ों की पट्टी करूँगा जिन्हें चोट लगी थी। मैं कमजोर भेड़ को मजबूत बनाऊँगा। किन्तु मैं उन मोटे और शक्तिशाली गड़ेरियों को नष्ट कर दूँगा। मैं उन्हें वह दण्ड दूँगा जिसके वे पात्र हैं।” {34:17} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “और तुम, मेरी रेवड़, मैं प्रत्येक भेड़ के साथ न्याय करूँगा। मैं मेढ़ों और बकरों के बीच न्याय करूँगा। {34:18} तुम अच्छी भूमि पर उगी घास खा सकते हो। अत: तुम उस घास को क्यों कुचलते हो जिसे दूसरी भेड़ें खाना चाहती हैं। तुम पर्याप्त स्वच्छ जल पी सकते हो। अत: तुम उस जल को हिलाकर गन्दा क्यों करते हो, जिसे अन्य भेड़ें पीना चाहती हैं। {34:19} मेरी रेवड़ उस घास को खाएंगी जिसे तुमने अपने पैरों से कुचला और वह पानी पीएंगी जिसे तुमने अपने पैरों से हिलाकर गन्दा कर दिया!” {34:20} अत: मेरा स्वामी यहोवा उनसे कहता है: “मैं स्वयं मोटी और पतली भेड़ों के साथ न्याय करूँगा! {34:21} तुम अपनी बगल से और अपने कन्धों से धक्का देकर और अपनी सींगों से सभी कमजोर भेड़ों को तब तक मार गिरोते हो, जब तक तुम उनको दूर चले जाने के लिये विवश नहीं करते। {34:22} अत: मैं अपनी रेवड़ को बचाऊँगा। वे भविष्य में जंगली जानवरों से नहीं पकड़ी जाएंगीं। मैं प्रत्येक भेड़ के साथ न्याय करूँगा। {34:23} तब मैं उनके उपर एक गड़ेरिया अपने सेवक दाऊद को रखूँगा। वह उन्हें अपने आप खिलाएगा और उनका गड़ेरिया होगा। {34:24} तब मैं यहोवा और स्वामी, उनका परमेश्वर होऊँगा और मेरा सेवक दाऊद उनके बीच रहने वाला शासक होगा। मैं (यहोवा) ने यह कहा है। {34:25} “मैं अपनी भेड़ों के साथ एक शान्ति — सन्धि करूँगा। मैं हानिकर जानवरों को देश से बाहर कर दूँगा। तब भेड़ें मरुभूमि में सुरक्षित रहेंगी और जंगल में सोएंगी। {34:26} मैं भेड़ों को और अपनी पहाड़ी (यरूशलेम) के चारों ओर के स्थानों को आशीर्वाद दूँगा। मैं ठीक समय पर वर्षा करूँगा। वे आशीर्वाद सहित वर्षा करेंगे। {34:27} खेतों में उगने वाले वृक्ष अपने फल देंगे। भूमि अपनी फसल देगी। अत: भेड़ें अपने प्रदेश में सुरक्षित रहेंगी। मैं उनके ऊपर रखे जूवों को तोड़ दूँगा। मैं उन्हें उन लोगों की शक्ति से बचाऊँगा जिन्होंने उन्हें दास बनाया। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। {34:28} वे जानवरों की तरह भविष्य में अन्य राष्ट्रों द्वारा बन्दी नहीं बनाये जाएंगे। वे जानवर उन्हें भविष्य में नहीं खाएंगे। अपितु अब वे सुरक्षित रहेंगे। कोई उन्हें आतंकित नहीं करेगा। {34:29} मैं उन्हें कुछ ऐसी भूमि दूँगा जो एक अच्छा उद्यान बनेगी। तब वे उस देश में भूख से पीड़ित नहीं होंगे। वे भविष्य में राष्ट्रों से अपमानित होने का कष्ट न पाएंगे। {34:30} तब वे समझेंगे कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ। तब वे समझेंगे कि मैं उनके साथ हूँ। इस्राएल का परिवार समझेगा कि वे मेरे लोग हैं! मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था! {34:31} “तुम मेरी भेड़ों, मेरी चरागाह की भेड़ों, तुम केवल मनुष्य हो और मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {i35:1} एदोम के विरुद्ध सन्देश {35:1} मुझे यहोवा का वचन मिला। उसने कहा, {35:2} “मनुष्य के पुत्र, सेईर पर्वत की ओर ध्यान दो और मेरे लिये इसके विरुद्ध कुछ कहो। {35:3} इससे कहो, ‘मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “‘सेईर पर्वत, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ! मैं तुम्हें दण्ड दूँगा, मैं तुम्हें खाली बरबाद क्षेत्र कर दूँगा। {35:4} मैं तुम्हारे नगरों को नष्ट करूँगा, और तुम खाली हो जाओगे। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ। {35:5} “‘क्यों क्योंकि तुम सदा मेरे लोगों के विरुद्ध रहे। तुमने इस्राएल के विरुद्ध अपनी तलवारों का उपयोग उनकी विपत्ति के समय में किया, उनके अन्तिम दण्ड के समय में।’” {35:6} अत: मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम्हें मैं मृत्यु के मुँह में भेजूँगा। मृत्यु तुम्हारा पीछा करेगी। तुम्हें व्यक्तियों के मारने से घृणा नहीं है, अत: मृत्यु तुम्हारा पीछा करेगी। {35:7} मैं सेईर पर्वत को खाली बरबाद कर दूँगा। मैं उस हर एक व्यक्ति को मार डालूँगा जो उस नगर से आएगा और मैं उस हर व्यक्ति को मार डालूँगा जो उस नगर में जाने का प्रयत्न करेगा। {35:8} मैं उसके पर्वतों को शवों से ढक दूँगा। वे शव तुम्हारी सारी पहाड़ियों, तुम्हारी घाटी और तुम्हारे सारे विषम जंगलों में फैले होंगे। {35:9} मैं तुझे सदा के लिये खाली कर दूँगा। तुम्हारे नगरों में कोई नहीं रहेगा। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ।” {35:10} तुमने कहा, “ये दोनों राष्ट्र और देश (इस्राएल और यहूदा) मेरे होंगे। हम उन्हें अपना बना लेंगे।” किन्तु यहोवा वहाँ है! {35:11} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “तुम मेरे लोगों के प्रति ईर्ष्यालु थे। तुम उन पर क्रोधित थे और तुम मुझसे घृणा करते थे। अत: अपने जीवन की शपथ खाकर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं तुम्हें वैसे ही दण्डित करूँगा जैसे तुमने उन्हें चोट पहुँचाई। मैं तुझे दण्ड दूँगा और अपने लोगों को समझने दूँगा कि मैं उनके साथ हूँ। {35:12} तब तुम भी समझोगे कि मैंने तुम्हारे लिये सभी अपमानों को सुना है। “तुमने इस्राएल पर्वत के विरुद्ध बहुत सी बुरी बातें की हैं। तुमने कहा, ‘इस्राएल नष्ट कर दिया गया! हम लोग उसे भोजन की तरह चबा जाएंगे!’ {35:13} तुम गर्वीले थे तथा मेरे विरुद्ध तुमने बातें कीं। तुमने अनेक बार कहा और जो तुमने कहा, उसका हर एक शब्द मैंने सुना! हाँ, मैंने तुम्हें सुना।” {35:14} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “उस समय सारी धरती प्रसन्न होगी जब मैं तुम्हें नष्ट करूँगा। {35:15} तुम तब प्रसन्न थे जब इस्राएल देश नष्ट हुआ था। मैं तुम्हारे साथ वैसा ही व्यवहार करुँगा। सेईर पर्वत और एदोम का पूरा देश नष्ट कर दिया जाएगा। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i36:1} इस्राएल देश का फिर निर्माण किया जाएगा {36:1} “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिए इस्राएल के पर्वतों से कहो। इस्राएल के पर्वतों को यहोवा का वचन सुनने को कहो! {36:2} उनसे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘शत्रु ने हमें छला है। उन्होंने कहा: अहा! अब प्राचीन पर्वत हमारा होगा!’ {36:3} “अत: मेरे लिये इस्राएल के पर्वतों से कहो। कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘शत्रु ने तुम्हें खाली किया। उन्होंने तुम्हें चारों ओर से कुचल डाला है। उन्होंने ऐसा किया अत: तुम अन्य राष्ट्रों के अधिकार में गए। तब तुम्हारे बारे मे लोगों ने बातें और कानाफूसी की।’” {36:4} अत: इस्राएल के पर्वतों, मेरे स्वामी यहोवा के वचन को सुनो। मेरा स्वामी यहोवा पर्वतों, पहाड़ियों, धाराओं, घाटियों, खाली खण्डहरों और छोड़े गए नगरों से, जो चारों ओर के अन्य राष्ट्रों द्वारा लूटे और मजाक उड़ाए गए कहता है। {36:5} मेरा स्वामी यहोवा कहता है: “मैं शपथ खाता हूँ कि मैं अपनी तीव्र अनुभूतियों को अपने लिये बोलने दूँगा। मैं एदोम और अन्य राष्ट्रों को अपने क्रोध का अनुभव कराऊँगा। उन राष्ट्रों ने मेरा देश अपना बना लिया! वे उस देश को लेकर बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने देश को अपना बना लिया!” {36:6} “इसलिये इस्राएल देश के बारे में ये कहो। पर्वतों, पहाड़ियों, धाराओं और घाटियों से कहो। यह कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘मैं अपनी तीव्र अनुभूतियों और क्रोध को अपने लिये बोलने दूँगा। क्यों क्योंकि इन राष्ट्रों से तुम्हें अपमान की पीड़ा मिली है।’” {36:7} अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम्हारे चारों ओर के राष्ट्र अपमान का कष्ट भोगेंगे।” {36:8} “किन्तु इस्राएल के पर्वतों, तुम मेरे इस्राएल के लोगों के लिये नये पेड़ उगाओगे और फल पैदा करोगे। मेरे लोग शीघ्र लौटेंगे। {36:9} मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। लोग तुम्हारी भूमि जोतेंगे। लोग बीज बोएंगे। {36:10} तुम्हारे ऊपर असंख्य लोग रहेंगे। इस्राएल का सारा परिवार और सभी लोग वहाँ रहेंगे। नगरों में, लोग रहने लगेंगे। नष्ट स्थान नये स्थानों की तरह बनेंगे। {36:11} मैं तुम्हें बहुत से लोग और जानवर दूँगा। वे बढ़ेंगे और उनके बहुत बच्चे होंगे। मैं तुम्हारे ऊपर रहने वाले लोगों को वैसे ही तुम्हें प्राप्त कराऊँगा, जैसे तुमने पहले किया था। मैं तुम्हें तुम्हारे आरम्भ से भी अच्छा बनाऊँगा। तुम फिर कभी उनको, उनके सन्तानों से वंचित नही करोगे। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। {36:12} हाँ, मैं अपने लोग, इस्राएल को तुम्हारी भूमि पर चलाऊँगा। वे तुम पर अधिकार करेंगे और तुम उनके होगे। तुम उन्हें बिना बच्चों के फिर कभी नहीं बनाओगे।” {36:13} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “हे इस्राएल देश लोग तुमसे बुरी बातें कहते हैं। वे कहते हैं कि तुमने अपने लोगों को नष्ट किया। वे कहते हैं कि तुम बच्चों को दूर ले गए। {36:14} अब भविष्य में तुम लोगों को नष्ट नहीं करोगे। तुम भविष्य में बच्चों को दूर नहीं ले जाओगे।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं थीं। {36:15} “मैं उन अन्य राष्ट्रों को तुम्हें और अधिक अपमानित नहीं करने दूँगा। तुम उन लोगों से और अधिक चोट नहीं खाओगे। तुम उनको बच्चों से रहित फिर कभी नहीं करोगे।” मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। {i36:16} यहोवा अपने अच्छे नाम की रक्षा करेगा {36:16} तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा, {36:17} “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल का परिवार अपने देश में रहता था। किन्तु उन्होंने उस देश को उन कामों से गन्दा बना दिया जो उन्होंने किया। मेरे लिये वे ऐसी स्त्री के समान थे जो अपने मासिक धर्म से अशुद्ध हो गई हो। {36:18} उन्होंने जब उस देश में लोगों की हत्या की तो उन्होंने धरती पर खून फैलाया। उन्होंने अपनी देवमूर्तियों से देश को गन्दा किया। अत: मैंने उन्हें दिखाया कि मैं कितना क्रोधित था। {36:19} मैंने उन्हें राष्ट्रों में बिखेरा और सभी देशों में फैलाया। मैंने उन्हें वही दण्ड उस बुरे काम के लिये दिया जो उन्होंने किया। {36:20} वे उन अन्य राष्ट्रों को गये और उन देशों में भी उन्होंने मेरे अच्छे नाम को बदनाम किया। कैसे वहाँ राष्ट्रों ने उनके बारे में बातें कीं। उन्होंने कहा, ये यहोवा के लोग हैं किन्तु इन्होंने उसका देश छोड़ दिया तो जरुर यहोवा में कुछ खराबी होगी! {36:21} “इस्राएल के लोगों ने मेरे पवित्र नाम को जहाँ कहीं वे गये, बदनाम किया। मैंने अपने नाम के लिये दु: ख अनुभव किया। {36:22} अत: इस्राएल के परिवार से कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘इस्राएल के परिवार, तुम जहाँ गए वहाँ तुमने मेरे पवित्र नाम को बदनाम किया। इसे रोकने के लिये मैं कुछ करने जा रहा हूँ। मैं यह तुम्हारे लिये नहीं करूँगा। इस्राएल, मैं इसे अपने पवित्र नाम के लिये करूँगा। {36:23} मैं उन राष्ट्रों को दिखाऊँगा कि मेरा महान नाम सच में पवित्र है। तब वे राष्ट्र जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {36:24} परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम्हें उन राष्ट्रों से बाहर निकालूँगा, एक साथ इकट्ठा करूँगा और तुम्हें तुम्हारे अपने देश में लाऊँगा। {36:25} तब मैं तुम्हारे ऊपर शुद्ध जल छिड़कूँगा और तुम्हें शुद्ध करुँगा। मैं तुम्हारी सारी गन्दगियों को धो डालूँगा और उन घृणित देवमूर्तियों से उत्पन्न गन्दगी को धो डालूँगा।” {36:26} परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम में नयी आत्मा भी भरूँगा और तुम्हारे सोचने के ढंग को बदलूँगा। मैं तुम्हारे शरीर से कठोर हृदय को बाहर करुंगा और तुम्हें एक कोमल मानवी हृदय दूँगा। {36:27} मैं तुम्हारे भीतर अपनी आत्मा प्रतिष्ठित करूँगा। मैं तुम्हें बदलूँगा जिससे तुम मेरे नियमों का पालन करोगे। तुम सावधानी से मेरे आदेशों का पालन करोगे। {36:28} तब तुम उस देश में रहोगे जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों को दिया था। तुम मेरे लोग रहोगे और मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूँगा।” {36:29} परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम्हें बचाऊँगा भी और तुम्हें अशुद्ध होने से रोकूँगा। मैं अन्न को उगने के लिये आदेश दूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध भूखमरी का समय नहीं लाऊँगा। {36:30} मैं तुम्हारे वृक्षों से फलों की बड़ी फसलें और खेतों से अन्न की फसलें दूँगा। तब तुम अन्य देशों में भूखे रहने की लज्जा फिर कभी अनुभव नहीं करोगे। {36:31} तुम उन बुरे कामों को याद करोगे जो तुमने किये। तुम याद करोगे कि वे काम अच्छे नहीं थे। तब तुम अपने पापों और जो भयंकर काम किये उनके लिये तुम स्वयं अपने से घृणा करोगे।” {36:32} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं चाहता हूँ कि तुम यह याद रखो: मैं तुम्हारी भलाई के लिये ये काम नहीं कर रहा हूँ! मैं उन्हें अपने अच्छे नाम के लिये कर रहा हूँ। इस्राएल के परिवार, तुम्हें अपने रहने के ढंग पर लज्जित और व्याकुल होना चाहिये!” {36:33} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “जिस दिन मैं तुम्हारे पापों को धोऊँगा, मैं लोगों को वापस तुम्हारे नगरों में लाऊँगा। वे नष्ट नगर फिर बनाए जाएंगे। {36:34} खाली पड़ी भूमि फिर जोती जाएगी। यहाँ से गुजरने वाले हर एक को यह बरबादियों के ढेर के रूप में नहीं दिखेगा। {36:35} वे कहेंगे, ‘अतीत में यह देश नष्ट हो गए थे। लेकिन अब ये अदन के उद्यान जैसे हैं। नगर नष्ट हो गये थे। वे बरबाद और खाली थे। किन्तु अब वे सुरक्षित हैं और उनमें लोग रहते हैं।’” {36:36} परमेश्वर ने कहा, “तब तुम्हारे चारों ओर के राष्ट्र समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ और मैंने उन नष्ट स्थानों को फिर बसाया। मैंने इस प्रदेश में, जो खाली पड़ा था पेड़ों को रोपा। मैं यहोवा हूँ। मैंने यह कहा और मैं इसे घटित कराऊँगा!” {36:37} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “मैं इस्राएल के परिवार से उनके लिये यह करने की याचना कराऊँगा। मैं उनको असंख्य लोग बनाऊँगा। वे भेड़ों की रेवड़ों की तरह होंगे। {36:38} यरूशलेम में विशेष त्योहार के अवसर के समय (बकरियों — भेड़ों की रेवड़ों की तरह, लोग होंगे) नगर और बरबाद स्थान, लोगों के झुण्ड से भर जाएंगे। तब वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” {i37:1} सूखी हड्डियों का दर्शन {37:1} यहोवा की शक्ति मुझ पर उतरी। यहोवा की आत्मा मुझे नगर के बाहर ले गई और नीचे एक घाटी के बीच में रखा। घाटी मरे लोगों की हड्डियों से भरी थी। {37:2} घाटी में असंख्य हड्डियाँ भूमि पर पड़ी थी। यहोवा ने मुझे हड्डियों के चारों ओर घुमाया। मैंने देखा कि हड्डियाँ बहुत सूखी हैं। {37:3} तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या यह हड्डियाँ जीवित हो सकती हैं” मैंने उत्तर दिया, “मेरे स्वामी यहोवा, उस प्रश्न का उत्तर केवल तू जानता है।” {37:4} मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “उन हड्डियों से मेरे लिये बातें करो। उन हड्डियों से कहो, ‘सूखी हड्डियों, यहोवा का वचन सुनों! {37:5} मेरा स्वामी यहोवा तुम से यह कहता है: मैं तुममें आत्मा को आने दूँगा और तुम जीवित हो जाओगे! {37:6} मैं तुम्हारे ऊपर नसें और माँस पेशियाँ चढ़ाऊँगा और मैं तुम्हें चमड़ी से ढक दूँगा। तब मैं तुम में प्राण का संचार करुँगा और तुम फिर जीवित हो उठोगे। तब तुम समझोगे कि मैं स्वामी यहोवा हूँ।’” {37:7} अत: मैंने यहोवा के लिये उन हड्डियों से वैसे ही बातें कीं जैसा उसने कहा। मैं जब कुछ कह ही रहा था तभी मैंने प्रचण्ड ध्वनि सुनी। हड्डियाँ खड़खड़ाने लगीं और हड्डियाँ हड्डियों से एक साथ जुड़ीं! {37:8} वहाँ मेरी आँखों के सामने नसों, माँस पेशियों और त्वचा ने हड्डियों को ढकना आरम्भ किया। किन्तु शरीर हिले नहीं, उनमें प्राण नहीं था। {37:9} तब तेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “सांस से मेरे लिये कहो। मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये सांस से बातों करो। सांस से कहो कि स्वामी यहोवा यह कह रहा है: ‘सांस, हर दिशा से आओ और इन शवों में प्राण संचार करो। उनमें प्राण संचार करो और वे फिर जीवित हो जाएंगे!’” {37:10} इस प्रकार मैंने यहोवा के लिये सांस से बातें कीं जैसा उसने कहा और शवों में सांस आई। वे जीवित हुए और खड़े हो गये। वहाँ बहुत से पुरुष थे, वे एक बड़ी विशाल सेना थे! {37:11} तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, ये हड्डियाँ इस्राएल के पूरे परिवार की तरह हैं! इस्राएल के लोग कहते है, हमारी हड्‌डियाँ सूख गई है, ‘हमारी आशा समाप्त है। हम पूरी तरह नष्ट किये जा चुके हैं।’ {37:12} इसलिये उनसे मेरे लिये बातें करो। उनसे कहो, ‘स्वामी यहोवा यह कहता है: मेरे लोगों, मैं तुम्हारी कब्रें खोलूँगा और तुम्हें कब्रों के बाहर लाऊँगा! तब मैं तुम्हें इस्राएल की भूमि पर लाऊँगा। {37:13} मेरे लोगों, मैं तुम्हारी कब्रें खोलूँगा और तुम्हारी कब्रों से तुम्हें बाहर लाऊँगा। तब तुम समझोगे कि मैं यहोवा हूँ। {37:14} मैं अपनी आत्मा तुममे डालूँगा और तुम फिर से जीवित हो जाओगे। तब तुमको मैं तुम्हारे देश में वापस लाऊँगा। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। तुम जानोगे कि मैंने ये बातें कहीं और उन्हें घटित कराया।’” यहोवा ने यह कहा था। {i37:15} यहूदा और इस्राएल का फिर एक होना {37:15} मुझे यहोवा का वचन फिर मिला। उसने कहा, {37:16} “मनुष्य के पुत्र, एक छड़ी लो और उस पर यह सन्देश लिखो: ‘यह छड़ी यहूदा और उसके मित्र इस्राएल के लोगों की है।’ तब दूसरी छड़ी लो और इस पर लिखो, ‘एप्रैम की यह छड़ी, यूसुफ और उसके मित्र इस्राएल के लोगों की है।’ {37:17} तब दोनों छड़ियों को एक साथ जोड़ दो। तुम्हारे हाथ में वे एक छड़ी होंगी। {37:18} “तुम्हारे लोग यह स्पष्ट करने को कहेंगे कि इसका अर्थ क्या है। {37:19} उनसे कहो कि स्वामी यहोवा कहता है, ‘मैं यूसुफ की छड़ी लूँगा जो इस्राएल के लोगों, जो एप्रैम और उसके मित्रों के हाथ में है। तब मैं उस छड़ी को यहूदा की छड़ी के साथ रखूँगा और इन्हें एक छड़ी बनाऊँगा। मेरे हाथ में वह एक छड़ी होगी!’ {37:20} “उनके आँखों के सामने उन छड़ियों को अपने हाथों में पकड़ो। तुमने वे नाम उन छड़ियों पर लिखे थे। {37:21} लोगों से कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है: ‘मैं इस्राएल के लोगों को उन राष्ट्रों से लाऊँगा, जहाँ वे गए हैं। मैं उन्हें चारों ओर से एकत्रित करूँगा और उनके अपने देश में लाऊँगा। {37:22} मैं उन्हें इस्राएल के पर्वतों के प्रदेश में एक राष्ट्र बनाऊँगा। उन सभी का केवल एक राजा होगा। वे दो राष्ट्र नहीं बने रहेंगे। वे भविष्य में राज्यों में नहीं बाँटे जा सकते। {37:23} वे अपनी देवमूर्तियों और भयंकर मूर्तियों या अपने अन्य किसी अपराध से अपने आपको गन्दा बनाते नहीं रहेंगे। किन्तु मैं उन्हें सभी पापों से बचाता रहूँगा, चाहे वे जहाँ कहीं भी हों। मैं उन्हें नहलाऊँगा और शुद्ध करूँगा। वे मेरे लोग होंगे और मैं उनका परमेश्वर रहूँगा। {37:24} “‘मेरा सेवक दाऊद उनके ऊपर राजा होगा। उन सभी का केवल एक गड़ेरिया होगा। वे मेरे नियमों के सहारे रहेंगे और मेरे विधियों का पालन करेंगे। वे वह काम करेंगे जो मैं कहूँगा। {37:25} वे उस भूमि पर रहेंगे जो मैंने अपने सेवक याकूब को दी। तुम्हारे पूर्वज उस स्थान पर रहते थे और मेरे लोग वहाँ रहेंगे। वे, उनके बच्चे और उनके पौत्र — पौत्रियाँ वहाँ सर्वदा रहेंगी और मेरा सेवक दाऊद उनका प्रमुख सदा रहेगा। {37:26} मैं उनके साथ एक शान्ति — सन्धि करूँगा। यह सन्धि सदा बनी रहेगी। मैं उनको उनका देश देना स्वीकार करता हूँ। मैं उन्हें बहुसंख्यक लोग बनाना स्वीकार करता हूँ। मैं अपना पवित्र स्थान वहाँ उनके साथ सदा के लिये रखना स्वीकार करता हूँ। {37:27} मेरा पवित्र तम्बू वहाँ उनके बीच रहेगा। हाँ, मैं उनका परमेश्वर और वे मेरे लोग होंगे। {37:28} तब अन्य राष्ट्र समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ और वे जानेंगे कि मैं इस्राएल को, उनके बीच सदा के लिये अपना पवित्र स्थान रखकर, अपने विशेष लोग बना रहा हूँ।’” {i38:1} गोग के विरुद्ध सन्देश {38:1} यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, {38:2} “मनुष्य के पुत्र, मागोग प्रदेश में गोग पर ध्यान दो। वह मेशेक और तूबल राष्ट्रों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख है। गोग के विरुद्ध मेरे लिये कुछ कहो। {38:3} उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, गोग तुम मेशेक और तूबल राष्ट्रों के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख हो! किन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ। {38:4} मैं तुम्हें पकड़ूँगा और तुम्हारी पूरी सेना के साथ वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारी सेना के सभी पुरुषों को वापस लाऊँगा। मैं सभी घोड़ों और घुड़सवारों को वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारे मुँह में नकेल डालूँगा और तुम सभी को वापस लाऊँगा। सभी सैनिक अपनी सभी तलवारों और ढालों के साथ अपनी सैनिक पोशाक में होंगे। {38:5} फारस, कूश और पूत के सैनिक उनके साथ होंगे। वे सभी अपनी ढालें तथा सिर के कवच धारण किये होंगे। {38:6} वहाँ अपने सैनिकों के सभी समूहों के साथ गोमेर भी होगा। वहाँ दूर उत्तर से अपने सैनिकों के सभी समूहों के साथ तोगर्मा का राष्ट्र भी होगा। उस बन्दियों को पंक्ति में वहाँ बहु संख्यक लोग होंगे। {38:7} “‘तैयार हो जाओ। हाँ, अपने को तैयार करो और अपने साथ मिलने वाली सेना को भी। तुम्हें निगरानी रखनी चाहिए और तैयार रहना चाहिए। {38:8} बहुत लम्बे समय के बाद तुम काम पर बुलाये जाओगे। आगे आने वाले वर्षों में तुम उस प्रदेश में आओगे जो युद्ध के बाद पुन: निर्मित होगा। उस देश में लोग इस्राएल के पर्वत पर आने के लिये बहुत से राष्ट्रों से इकट्ठे किये जाएंगे। अतीत में इस्राएल का पर्वत बार — बार नष्ट किया गया था। किन्तु ये लोग उन दूसरे राष्ट्रों से वापस लौटे होंगे। वे सभी सुरक्षित रहेंगे। {38:9} किन्तु तुम उन पर आक्रमण करने आओगे। तुम तूफान की तरह आओगे। तुम देश को ढकते हुए गरजते मेघ की तरह आओगे। तुम और बहुत से राष्ट्रों के तुम्हारे सैनिकों के समूह, इन लोगों पर आक्रमण करने आएंगे।’” {38:10} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “उस समय तुम्हारे मस्तिष्क में एक विचार उठेगा। तुम एक बुरी योजना बनाना आरम्भ करोगे। {38:11} तुम कहोगे, ‘मैं उस देश पर आक्रमण करने जाऊँगा जिसके नगर बिना दीवार के हैं (इस्राएल) वे लोग शान्तिपूर्वक रहते हैं। वे समझते हैं कि वे सुरक्षित हैं। उनकी रक्षा के लिये उनके नगरों के चारों ओर कोई दीवार नहीं है। उनके दरवाजों में ताले नहीं है, उनके दरवाजे भी नहीं हैं! {38:12} मैं इन लोगों को हराऊँगा और उनकी सभी कीमती चीजें उनसे ले लूँगा। मैं उन स्थानों के विरुद्ध लड़ूँगा जो नष्ट हो चुके थे, किन्तु अब लोग उनमें रहने लगे हैं। मैं उन लोगों (इस्राएल) के विरुद्ध लड़ूँगा जो दूसरे राष्ट्रों से इकट्ठे हुए थे। अब वे लोग मवेशी और सम्पत्ति वाले हैं। वे संसार के चौराहे पर रहते हैं जिस स्थान में से शक्तिशाली देशों को अन्य शक्तिशाली सभी देशों तक जाने के लिये यात्रा करनी पड़ती है।’ {38:13} “शबा, ददान और तर्शीश के व्यापारी और सभी नगर जिनके साथ वे व्यापार करते हैं, तुमसे पूछेंगे, ‘क्या तुम कीमती चीजों पर अधिकार करने आये हो क्या तुम अपने सैनिकों के समूहों के साथ, उन अच्छी चीजों को हड़पने और चाँदी, सोना मवेशी तथा सम्पत्ति ले जाने आए थे? क्या तुम उन सभी कीमती चीजों को लेने आये थे?’ {38:14} परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये गोग से कहो। उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘तुम हमारे लोगों पर तब आक्रमण करने आओगे जब वे शान्तिपूर्वक और सुरक्षित रह रहे हैं। {38:15} तुम दूर उत्तर के अपने स्थान से आओगे और तुम बहुसंख्यक लोगों को साथ लाओगे। वे सभी घुड़सवार होंगे। तुम एक विशाल और शक्तिशाली सेना होगे। {38:16} तुम मेरे लोग इस्राएल के विरुद्ध लड़ने आओगे। तुम देश को गरजते मेघ की तरह ढकने वाले होगे। मैं बाद में, अपने देश के विरुद्ध लड़ने के लिये तुम्हें लाऊँगा। तब गोग, राष्ट्र जानेंगे कि मैं कितना शक्तिशाली हूँ। वे मेरा सम्मान करेंगे और समझेंगे कि मैं पवित्र हूँ। वे देखेंगे कि मैं तुम्हारे विरुद्ध क्या करूँगा!’” {38:17} यहोवा यह कहता है, “उस समय लोग याद करेंगे कि मैंने अतीत में तुम्हारे बारे में जो कहा। वे याद करेंगे कि मैंने अपने सेवकों इस्राएल के नबियों का उपयोग किया। वे याद करेंगे कि इस्राएल के नबियों ने मेरे लिये अतीत में बातें कीं और कहा कि मैं तुमको उनके विरुद्ध लड़ने के लिये लाऊँगा।” {38:18} मेरे स्वामी यहोवा ने कहा, “उस समय, गोग इस्राएल देश के विरुद्ध लड़ने आएगा। मैं अपना क्रोध प्रकट करूँगा। {38:19} क्रोध और उत्तेजना में मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ, मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि इस्राएल में एक प्रबल भूकम्प आएगा। {38:20} उस समय सभी सजीव प्राणी भय से काँप उठेंगे। समुद्र में मछलियाँ, आकाश में पक्षी, खेतों में जंगली जानवर और वे सभी छोटे प्राणी जो धरती पर रेंगते हैं, भय से काँप उठेंगे। पर्वत गिर पड़ेंगे और शिखर ध्वस्त होंगी। हर एक दीवार धरती पर आ गिरेगी!” {38:21} मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “इस्राएल के पर्वतों पर, मैं गोग के विरुद्ध हर प्रकार का भय उत्पन्न करुँगा। उसके सैनिक इतने भयभीत होंगे कि वे एक दूसरे पर आक्रमण करेंगे और अपनी तलवार से एक दूसरे को मार डालेंगे। {38:22} मैं गोग को रोग और मृत्यु का दण्ड दूँगा। मैं गोग और बुहत से राष्ट्रों के सैनिकों के ऊपर ओले, आग और गंधक की वर्षा करूँगा। {38:23} तब मैं दिखाऊँगा कि मैं कितना महान हूँ, मैं प्रमाणित करूँगा कि मैं पवित्र हूँ। बहुत से राष्ट्र मुझे ये काम करते देखेंगे और वे जानेंगे कि मैं कौन हूँ। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। {i39:1} गोग और उसकी सेना की मृत्यु {39:1} “मनुष्य के पुत्र, गोग के विरुद्ध मेरे लिये कहो। उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘गोग, तुम मेशेक और तूबल देशों के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख हो! किन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ। {39:2} मैं तुम्हें पकड़ूँगा और वापस लाऊँगा। मैं तुम्हें सुदूर उत्तर से लाऊँगा। मैं तुम्हें इस्राएल के पर्वतों के विरुद्ध युद्ध करने के लिये लाऊँगा। {39:3} किन्तु मैं तुम्हारा धनुष तुम्हारे बायें हाथ से झटक कर गिरा दूँगा। मैं तुम्हारे दायें हाथ से तुम्हारे बाण झटक कर गिरा दूँगा। {39:4} तुम इस्राएल के पर्वतों पर मारे जाओगे। तुम, तुम्हारे सैनिक समूह और तुम्हारे साथ के अन्य सभी राष्ट्र युद्ध में मारे जाएंगे। मैं तुमको हर एक प्रकार के पक्षियों, जो माँसभक्षी हैं तथा सभी जंगली जानवरों को भोजन के रूप में दूँगा। {39:5} तुम नगर में प्रवेश नहीं करोगे। तुम खुले मैंदानों में मारे जाओगे। मैंने यह कह दिया है!’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {39:6} परमेश्वर ने कहा, “मैं मागोग और उन व्यक्तियों के, जो समुद्र — तट पर सुरक्षित रहते हैं, विरुद्ध आग भेजूँगा। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। {39:7} मैं अपना पवित्र नाम अपने इस्राएल लोगों में विदित करूँगा। भविष्य में, मैं अपने पवित्र नाम को, लोगों द्वारा और अधिक बदनाम नहीं करने दूँगा। राष्ट्र जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। वे समझेंगे कि मैं इस्राएल में परम पवित्र हूँ। {39:8} वह समय आ रहा है! यह घटित होगा!” यहोवा ने ये बातें कहीं! “यह वही दिन है जिसके बारे में मैं कह रहा हूँ। {39:9} “उस समय, इस्राएल के नगरों में रहने वाले लोग उन खेतों में जाएंगे। वे शत्रु के अस्त्र — शस्त्रों को इकट्ठा करेंगे और उन्हें जला देंगे। वे सभी ढालों, धनुषों और बाणों, गदाओं और भालों को जलाएंगे। वे उन अस्त्र — शस्त्रों का उपयोग सात वर्ष तक ईंधन के रूप में करेंगे। {39:10} उन्हें मैंदानों से लकड़ी इकट्ठी नहीं करनी पड़ेगी या जंगलों से ईंधन नहीं काटना पड़ेगा, क्योंकि वे अस्त्र — शस्त्रों का उपयोग ईंधन के रूप में करेंगे। वे कीमती चीजों को सैनिकों से छीनेंगे जिसे वे उनसे चुराना चाहते थे। वे सैनिकों से अच्छी चीजें लेंगे जिन्होंने उनसे अच्छी चीजें ली थीं।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {39:11} परमेश्वर ने कहा, “उस समय में गोग को दफनाने के लिये इस्राएल में एक स्थान चुनूँगा। वह मृत सागर के पूर्व में यात्रियों की घाटी में दफनाया जाएगा। यह यात्रियों के मार्ग को रोकेगा। क्यों क्योंकि गोग और उसकी सारी सेना उस स्थान में दफनायी जाएगी। लोग इसे ‘गोग की सेना की घाटी’ कहेंगे। {39:12} इस्राएल का परिवार देश को शुद्ध करने के लिये सात महीने तक उन्हें दफनाएगा। {39:13} देश के साधारण लोग शत्रु के सैनिकों को दफनाएंगे। इस्राएल के लोग उस दिन प्रसिद्ध होंगे जिस दिन मैं अपने लिए सम्मान पाऊँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {39:14} परमेश्वर ने कहा, “लोग मजदूरों को, उन मरे सैनिकों को दफनाने के लिये पूरे समय की नौकरी देंगे। इस प्रकार वे देश को पवित्र करेंगे। वे मजदूर सात महीने तक कार्य करेंगे। वे शवों को ढूँढते हुए चारों ओर जाएंगे। {39:15} वे मजदूर चारों ओर ढूँढते फिरेंगे। यदि उनमें कोई एक हड्डी देखेगा तो वह उसके पास एक चिन्ह बना देगा। चिन्ह वहाँ तब तक रहेगा जब तक कब्र खोदने वाला आता नहीं और गोग की सेना की घाटी में उस हड्डी को दफनाता नहीं। {39:16} वह मृतक लोगों का नगर (कब्रिस्तान) हमोना कहलाएगा। इस प्रकार वे देश को शुद्ध करेंगे।” {39:17} मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये पक्षियों और जंगली जानवरों से कुछ कहो। उनसे कहो, ‘यहाँ आओ! यहाँ आओ! एक स्थान पर इकट्ठे हो। यह बलि जो मैं तुम्हारे लिये तैयार कर रहा हूँ उसके लिए आओ, उसे खाओ। इस्राएल के पर्वतों पर एक विशाल बलिदान होगा। आओ, माँस खाओ और खून पिओ। {39:18} तुम शक्तिशाली सैनिकों के शरीर का माँस खाओगे। तुम संसार के प्रमुखों का खून पीओगे। वे बाशान के मेढ़ों, मेमनों, बकरों और मोटे बैलों के समान होंगे। {39:19} तुम जितनी चाहो, उतनी चर्बी खा सकते हो और तुम खून तब तक पी सकते हो जब तक तुम्हारे पेट न भरे। तुम मेरी बलि से खाओगे और पीओगे जिसे मैंने तुम्हारे लिये मारा। {39:20} मेरी मेज पर खाने को तुम बहुत सा माँस पा सकते हो। वहाँ घोड़े और रथ सारथी, शक्तिशाली सैनिक और अन्य सभी लड़ने वाले व्यक्ति होंगे।’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {39:21} परमेश्वर ने कहा, “मैं अन्य राष्ट्रों को दिखाऊँगा कि मैंने क्या किया है। वे राष्ट्र मेरा सम्मान करना आरम्भ करेंगे! वे मेरी वह शक्ति देखेंगे जो मैंने शत्रु के विरुद्ध उपयोग की। {39:22} तब, उस दिन के बाद, इस्राएल का परिवार जानेगा कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ। {39:23} राष्ट्र यह जान जाएंगे कि इस्राएल का परिवार क्यों दूसरे देशों में बन्दी बनाकर ले जाया गया था। वे जानेंगे कि मेरे लोग मेरे विरुद्ध हो उठे थे। इसलिए मैं उनसे दूर हट गया था। मैंने उनके शत्रुओं को उन्हें हराने दिया। अत: मेरे लोग युद्ध में मारे गए। {39:24} उन्होंने पाप किया और अपने को गन्दा बनाया। अत: मैंने उन्हें उन कामों के लिये दण्ड दिया जो उन्होंने किये। अत: मैंने उनसे अपना मुँह छिपाया है और उनको सहायता देने से इन्कार किया।” {39:25} अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “अब मैं याकूब के परिवार को बन्धुवाई से निकालूँगा। मैंने पूरे इस्राएल के परिवार पर दया की है। मैं अपने पवित्र नाम के लिये विशेष भावना प्रकट करूँगा। {39:26} लोग अपनी लज्जा और मेरे विरुद्ध विद्रोह के सारे समय को भूल जायेंगे। वे अपने देश में सुरक्षा के साथ रहेंगे। कोई भी उन्हें भयभीत नहीं करेगा। {39:27} मैं अपने लोगों को अन्य देशों से वापस लाऊँगा। मैं उन्हें उनके शत्रुओं के देशों से इकट्ठा करुँगा। तब बहुत से राष्ट्र समझेंगे कि मैं कितना पवित्र हूँ। {39:28} वे समझेंगे कि मैं यहोवा उनका परमेश्वर हूँ। क्यों क्योंकि मैंने उनसे उनका घर छुड़वाया और अन्य देशों में बन्दी के रूप में भिजवाया और तब मैंने उन्हें एक साथ इकट्ठा किया और उनके अपने देश में वापस लाया। {39:29} मैं इस्राएल के परिवार में अपनी आत्मा उतारूँगा और उसके बाद, मैं फिर अपने लोगों से दूर नहीं हटूँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था। {i40:1} नया मन्दिर {40:1} हम लोगों को बन्दी के रूप में ले जाए जाने के पच्चीसवें वर्ष में, वर्ष के आरम्भ में (अकटूबर) महीने के दसवें दिन, यहोवा की शक्ति मुझमें आई। बाबुल वासियों द्वारा इस्राएल पर अधिकार करने के चौदहवें वर्ष का यह वही दिन था। दर्शन में यहोवा मुझे वहाँ ले गया। {40:2} दर्शन में परमेश्वर मुझे इस्राएल देश ले गया। उसने मुझे एक बहुत ऊँचे पर्वत के समीप उतारा। पर्वत पर एक भवन था जो नगर के समान दिखता था। {40:3} यहोवा मुझे वहाँ ले आया। वहाँ एक व्यक्ति था जो झलकाये गये काँसे की तरह चमकता हुआ दिखता था। वह व्यक्ति एक कपड़े नापने का फीता और नापने की एक छड़ अपने हाथ में लिये था। वह फाटक से लगा खड़ा था। {40:4} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, अपनी आँख और अपने कान का उपयोग करो। इन चीजों पर ध्यान दो और मेरी सुनों। जो मैं तुम्हें दिखाता हूँ उस पर ध्यान दो। क्यों क्योंकि तुम यहाँ लाए गए हो, अत: मैं तुम्हें इन चीजों को दिखा सकता हूँ। तुम इस्राएल के परिवार से वह सब बताना जो तुम यहाँ देखो।” {40:5} मैंने एक दीवार देखी जो मन्दिर के बाहर चारों ओर से घेरती थी। उस व्यक्ति के हाथ में चीजों को नापने की एक छड़ थी। यह एक बालिश्त और एक हाथ लम्बी थी। अत: उस व्यक्ति ने दीवार की मोटाई नापी। वह एक छड़ मोटी थी। उस व्यक्ति ने दीवार की ऊँचाई नापी। यह एक छड़ ऊँची थी। {40:6} तब व्यक्ति पूर्वी द्वार को गया। वह व्यक्ति उसकी पैड़ियों पर चढ़ा और फाटक की देहली को नापा। यह एक छड़ चौड़ी थी। {40:7} रक्षकों के कमरे एक छड़ लम्बे और एक छड़ चौड़े थे। कमरों के बीच के दीवारों की मोटाई पाँच हाथ थी। भीतर की ओर फाटक के प्रवेश कक्ष के बगल में फाटक की देहली एक छड़ चौड़ी थी। {40:8} तब उस व्यक्ति ने मन्दिर से लगे फाटक के प्रवेश कक्ष को नापा। {40:9} यह एक छड़ चौड़ा था। तब उस व्यक्ति ने फाटक के प्रवेश कक्ष को नापा। यह आठ हाथ था। उस व्यक्ति ने फाटक के द्वार — स्तम्भों को नापा। हर एक द्वार स्तम्भ दो हाथ चौड़ा था। प्रवेश कक्ष का दरवाजा भीतर को था। {40:10} फाटक के हर ओर तीन छोटे कमरे थे। ये तीनों छोटे कमरे हर ओर से एक नाप के थे। दोनों ओर के द्वार स्तम्भ एक नाप के थे। {40:11} उस व्यक्ति ने फाटक के दरवाजें की चौड़ाई नापी। यह दस हाथ चौड़ी और तेरह हाथ चौड़ी थी। {40:12} हर एक कमरे के सामने एक नीची दीवार थी। यह दीवार एक हाथ ऊँची और एक हाथ मोटी थी। कमरे वर्गाकार थे और हर ओर से छ: हाथ लम्बे थे। {40:13} उस व्यक्ति ने फाटक को एक कमरे की छत से दूसरे कमरे की छत तक नापा। यह पच्चीस हाथ था। एक द्वार दूसरे द्वार के ठीक विपरीत था। {40:14} उस व्यक्ति ने प्रवेश कक्ष को भी नापा। यह बीस हाथ चौड़ा था। प्रवेश कक्ष के चारों ओर आँगन था। {40:15} प्रवेश कक्ष का फाटक पूरे बाहर की ओर से, फाटक के भीतर तक नाप से पचास हाथ था। {40:16} रक्षकों के कमरों में चारों ओर छोटी खिड़कियाँ थी। छोटे कमरों में द्वार — स्तम्भों की ओर भीतर को खिड़कियाँ अधिक पतली हो गई थीं। प्रवेश कक्ष में भी भीतर के चारों ओर खिड़कियाँ थीं। हर एक द्वार स्तम्भ पर खजूर के वृक्ष खुदे थे। {i40:17} बाहर का आँगन {40:17} तब वह व्यक्ति मुझे बाहरी आँगन में लाया। मैंने कमरे और पक्के रास्ते को देखा। वे आँगन के चारों ओर थे। पक्के रास्ते पर सामने तीस कमरे थे। {40:18} पक्का रास्ता फाटक की बगल से गया था। पक्का रास्ता उतना ही लम्बा था जितने फाटक थे। यह नीचे का रास्ता था। {40:19} तब उस व्यक्ति ने नीचे फाटक के सामने भीतर की ओर से लेकर आँगन की दीवार के सामने भीतर की ओर तक नापा। यह सौ हाथ पूर्व और उत्तर में था। {40:20} उस व्यक्ति ने बाहरी आँगन, जिसका सामना उत्तर की ओर है, के फाटक की लम्बाई और चौड़ाई को नापा। {40:21} इसके हर एक ओर तीन कमरे हैं। इसके द्वार स्तम्भों और प्रवेश कक्ष की नाप वही थी जो पहले फाटक की थी। फाटक पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था। {40:22} इसकी खिड़कियाँ इसके प्रवेश कक्ष और इसकी खजूर के वृक्षों की नक्काशी की नाप वही थी जो पूर्व की ओर मुखवाले फाटक की थी। फाटक तक सात पैड़ियाँ थी। फाटक का प्रवेश कक्ष भीतर था। {40:23} भीतरी आँगन में उत्तर के फाटक तक पहुँचने वाला एक फाटक था। यह पूर्व के फाटक के समान था। उस व्यक्ति ने एक फाटक से दूसरे तक नापा। यह एक फाटक से दूसरे तक सौ हाथ था। {40:24} तब वह व्यक्ति मुझे दक्षिण की ओर ले गया। मैंने दक्षिण में एक द्वार देखा। उस व्यक्ति ने द्वार — स्तम्भों और प्रवेश कक्ष को नापा। {40:25} वे नाप में उतने ही थे जितने अन्य फाटक। मुख्य द्वार पचास हाथ लम्बे और पच्चीस हाथ चौड़े थे। {40:26} सात पैड़ियाँ इस फाटक तक पहुँचाती थीं। इसका प्रवेश कक्ष भीतर को था। हर एक ओर एक — एक द्वार — स्तम्भ पर खजूर की नक्काशी थी। {40:27} भीतरी आँगन की दक्षिण की ओर एक फाटक था। उस व्यक्ति ने दक्षिण की ओर एक फाटक से दूसरे फाटक तक नापा। यह सौ हाथ चौड़ा था। {i40:28} भीतरी आँगन {40:28} तब वह व्यक्ति मुझे दक्षिण फाटक से होकर भीतरी आँगन में ले गया। दक्षिण के फाटक की नाप उतनी ही थी जितनी अन्य फाटकों की। {40:29} दक्षिण फाटक के कमरे, द्वार — स्तम्भ और प्रवेश कक्ष की नाप उतनी ही थी जितनी अन्य फाटकों की थी। खिड़कियाँ, फाटक और प्रवेश कक्ष के चारों ओर थी। फाटक पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था। उसके चारों ओर प्रवेश कक्ष थे। {40:30} प्रवेश कक्ष पच्चीस हाथ लम्बा और पाँच हाथ चौड़ा था। {40:31} दक्षिण फाटक के प्रवेश कक्ष का सामना बाहरी आँगन की ओर था। इसके द्वार — स्तम्भों पर खजूर के पेड़ों की नक्काशी थी। इसकी सीढ़ी की आठ पैड़ियाँ थीं। {40:32} वह व्यक्ति मुझे पूर्व की ओर के भीतरी आँगन में लाया। उसने फाटक को नापा। उसकी नाप वही थी जो अन्य फाटकों की। {40:33} पूर्वी द्वार के कमरे, द्वार — स्तम्भ और प्रवेश कक्ष के नाप वही थे जो अन्य फाटकों के। फाटक और प्रवेश कक्ष के चारों ओर खिड़कियाँ थीं। पूर्वी फाटक पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था। {40:34} इसके प्रवेश कक्ष का सामना बाहरी आँगन की ओर था। हर एक ओर के द्वार — स्तम्भों पर खजूर के पेड़ों की नक्काशी थी। इसकी सीढ़ी में आठ पैड़ियाँ थीं। {40:35} तब वह व्यक्ति मुझे उत्तरी द्वार पर लाया। उसने इसे नापा। इसकी नाप वह थी जो अन्य फाटकों की अर्थात {40:36} इसके कमरों, द्वार — स्तम्भों और प्रवेश कक्ष की। फाटक के चारों ओर खिड़कियाँ थीं। यह पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था। {40:37} द्वार — स्तम्भों का सामना बाहरी आँगन की ओर था। हर एक ओर के द्वार — स्तम्भों पर खजूर के पेड़ों की नक्काशी थी और इसकी सीढ़ी की आठ पैड़ियाँ थीं। {i40:38} बलियाँ तैयार करने के कमरें {40:38} एक कमरा था जिसका दरवाजा फाटक के प्रवेश कक्ष के पास था। यह वहाँ था जहाँ याजक होमबलि के लिये जानवरों को नहलाते हैं। {40:39} फाटक के प्रवेश कक्ष के दोनों ओर दो मेजें थीं। होमबलि पाप के लिये भेंट और अपराध के लिये भेंट के जानवर उन्हीं मेजों पर मारे जाते थे। {40:40} प्रवेश कक्ष के बाहर, जहाँ उत्तरी फाटक खुलता है, दो मेजें थीं और फाटक के प्रवेश कक्ष के दूसरी ओर दो मेजें थीं {40:41} फाटक के भीतर चार मेजें थीं। चार मेजें फाटक के बाहर थीं। सब मिलाकर आठ मेजें थीं। याजक इन मेजों पर बलि के लिए जानवरों को मारते थे। {40:42} होमबलि के लिये कटी शिला की चार मेजें थीं। ये मेजें डेढ़ हाथ लम्बी, डेढ़ हाथ चौड़ी और एक हाथ ऊँची थीं। याजक होमबलि और बलिदानों के लिये जिन जानवरों को मारा करते थे, उनको मारने के औजारों को इन मेजों पर रखते थे। {40:43} एक हाथ की चौड़ाई के कुन्दें पूरे मन्दिर में लगाए गए थे। भेंट के लिये माँस मेजों पर रहता था। {i40:44} याजकों के कमरे {40:44} भीतरी आँगन के फाटक के बाहर दो कमरे थे। एक उत्तरी फाटक के साथ था। इसका सामना दक्षिण को था। दूसरा कमरा दक्षिण फाटक के साथ था। इसका सामना उत्तर को था। {40:45} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “यह कमरा, जिसका सामना दक्षिण को है, उन याजक के लिये है जो अपने काम पर हैं और मन्दिर में सेवा कर रहे हैं। {40:46} किन्तु वह कमरा जिसका सामना उत्तर को है, उन याजकों के लिये है जो अपने काम पर हैं और वेदी पर सेवा कर रहे हैं। ये सभी याजक सादोक के वंशज हैं। सादोक के वंशज ही लेवीवंश के एकमात्र व्यक्ति है जो यहोवा की सेवा उनके पास बलि लाकर कर सकते हैं।” {40:47} उस व्यक्ति ने आँगन को नापा। आँगन पूर्ण वर्गाकार था। यह सौ हाथ लम्बा और सौ हाथ चौड़ा था। वेदी मन्दिर के सामने थी। {i40:48} मन्दिर का प्रवेश कक्ष {40:48} वह व्यक्ति मुझे मन्दिर के प्रवेश कक्ष में लाया और उनके हर एक द्वार — स्तम्भ को नापा। यह पाँच हाथ प्रत्येक ओर था। फाटक चौदह हाथ चौड़ा था। फाटक की बगल की दीवारें तीन हाथ हर ओर थीं। {40:49} प्रवेश कक्ष बीस हाथ लम्बा और बारह हाथ चौड़ा था। प्रवेश कक्ष तक दस सीढ़ियाँ पहुँचाती थीं। द्वार — स्तम्भ के सहारे दोनों ओर स्तम्भ थे। {i41:1} मन्दिर का पवित्र स्थान {41:1} वह व्यक्ति मुझे मन्दिर के बीच के कमरे पवित्र स्थान में लाया। उसने इसके प्रत्येक द्वार — स्तम्भों को नापा। वे छ: हाथ मोटे हर ओर थे। {41:2} दरवाजा दस हाथ चौड़ा था। द्वार की बगलें पाँच हाथ हर ओर थीं। उस व्यक्ति ने बाहरी पवित्र स्थान को नापा। यह चालीस हाथ लम्बा और बीस हाथ चौड़ा था। {i41:3} मन्दिर का परम पवित्र स्थान {41:3} तब वह व्यक्ति अन्दर गया और हर एक द्वार — स्तम्भ को नापा। हर एक द्वार — स्तम्भ दो हाथ मोटा था। यह छ: हाथ ऊँचा था। द्वार सात हाथ चौड़ा था। {41:4} तब उस व्यक्ति ने कमरे की लम्बाई नापी। यह बीस हाथ लम्बा और बीस हाथ चौड़ा था। बीच के कमरे के प्रवेश के पहले था। उस व्यक्ति ने कहा, “यह परम पवित्र स्थान है।” {i41:5} मन्दिर के चारों ओर के बाकी कमरें {41:5} तब उस व्यक्ति ने मन्दिर के दीवार नापी। यह छ: हाथ चौड़ी थी। बगल के कमरे चार हाथ चौड़े मन्दिर के चारों ओर थे। {41:6} बगल के कमरे तीन विभिन्न मंजिलों पर थे। वे एक दूसरे के ऊपर थे। हर एक मंजिल पर तीस कमरे थे। बगल के कमरे चारों ओर की दीवार पर टिके हुए थे। अत: मन्दिर की दीवार स्वयं कमरों को टिकाये हुए नहीं थी। {41:7} मन्दिर के चारों ओर बगल के कमरों की मंजिल नीचे की मंजिल से अधिक चौड़ी थी। मन्दिर के चारों ओर ऊँचा चबूतरा हर मंजिल पर मन्दिर की हर एक ओर फैला हुआ था। इसलिए सबसे ऊपर के मंजिल पर कमरे अधिक चौड़े थे। दूसरी मंजिल से होकर एक सीढ़ी सबसे नीचे के मंजिल से सबसे उँचे मंजिल तक गई थी। {41:8} मैंने यह भी देखा कि मन्दिर के चारों ओर की नींव सर्वत्र पक्की थी। बगल के कमरों की नींव एक पूरे मापदण्ड (10. 6 इंच) ऊँची थी। {41:9} बगल के कमरों की बाहरी दीवार पाँच हाथ मोटी थी। मन्दिर के बगल के कमरो {41:10} और याजक के कमरों के बीच खुला क्षेत्र बीस हाथ मन्दिर के चारों ओर था। {41:11} बगल के कमरों के दरवाजें पक्की फर्श की उस नींव पर खुलते थे जो दीवार का हिस्सा नहीं था। एक दरवाजें का मुख उत्तर की ओर था और दूसरे का दक्षिण की ओर। पक्की फर्श चारों ओर पाँच हाथ चौड़ी थी। {41:12} पश्चिमी ओर मन्दिर के आँगन के सामने का भवन सत्तर हाथ चौड़ा था। भवन की दीवार चारों ओर पाँच हाथ मोटी थी। यह नब्बे हाथ लम्बी थी। {41:13} तब उस व्यक्ति ने मन्दिर को नापा। मन्दिर सौ हाथ लम्बा था। भवन और इसकी दीवार के साथ आँगन भी सौ हाथ लम्बे थे। {41:14} मन्दिर का पूर्वी मुख और आँगन सौ हाथ चौड़ा था। {41:15} उस व्यक्ति ने उस भवन की लम्बाई को नापा जिसका सामना मन्दिर के पीछे के आँगन की ओर था तथा जिसकी दीवारें दोनों ओर थीं। यह सौ हाथ लम्बा था। बीच के कमरे के भीतरी कमरे (पवित्र स्थान) और आँगन के प्रवेश कक्ष पर चौखटें लगीं थीं। {41:16} तीनों पर ही चारों ओर जालीदार खिड़कियाँ थीं। मन्दिर के चारों ओर देहली से लगे, फर्श से खिड़कियों तक लकड़ी की चौखटें जड़ी हुई थीं। खिड़कियाँ ढकी हुई थीं। {41:17} द्वार के ऊपर की दीवार। भीतरी कमरे और बाहर तक, सारी लकड़ी की चौखटों से मढ़ी गई थीं। मन्दिर के भीतरी कमरे तथा बाहरी कमरे की सभी दीवारों पर {41:18} करुब (स्वर्गदूतों) और खजूर के वृक्षों की नक्काशी की गई थी। करुब (स्वर्गदूतों) के बीच एक खजूर का वृक्ष था। हर एक करुब (स्वर्गदूतों) के दो मुख थे। {41:19} एक मुख मनुष्य का था जो एक ओर खजूर के पेड़ को देख रहा था। दूसरा मुख सिंह का था जो दूसरी ओर खजूर के वृक्ष को देखता था। वे मन्दिर के चारों ओर उकेरे गये थे। {41:20} बीच के कमरे पवित्र स्थान की सभी दीवारों पर करुब (स्वर्गदूत) तथा खजूर के वृक्ष उकेरे गए थे। {41:21} बीच के कमरे (पवित्र स्थान) के द्वार — स्तम्भ वर्गाकार थे। सर्वाधिक पवित्र स्थान के सामने ऐसा कुछ था जो {41:22} वेदी के समान लकड़ी का बना दिखता था। यह तीन हाथ ऊँचा और दो हाथ लम्बा था। इसके कोने, नींव और पक्ष लकड़ी के थे। उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “यह मेज है जो यहोवा के सामने है।” {41:23} बीच का कमरा (पवित्र स्थान) और सर्वाधिक पवित्र स्थान दो दरवाजों वाले थे। {41:24} एक दरवाजा दो छोटे दरवाजों से बना था। हर एक दरवाजा सचमुच दो हिलते हुए दरवाजों सा था। {41:25} बीच के कमरे (पवित्र स्थान) के दरवाजों पर करुब (स्वर्गदूत) और खजूर के वृक्ष उकेरे गए थे। वे वैसे ही थे जैसे दीवारों पर उकेरे गए थे। बाहर की ओर प्रवेश कक्ष के बाहरी हिस्से पर लकड़ी की नक्काशी थी {41:26} और प्रवेश कक्ष के दोनों ओर खिड़कियों के दीवारों पर और प्रवेश कक्ष के ऊपरी छत में तथा मन्दिर के चारों ओर के कमरों खजूर के वृक्ष अंकित थे। {i42:1} याजकों के कमरे {42:1} तब वह व्यक्ति मुझे बाहरी आँगन में ले गया जिसका सामना उत्तर को था। वह उन कमरों में ले गया जो मन्दिर से आँगन के आर — पार और उत्तर के भवनों के आर — पार थे। {42:2} उत्तर की ओर का भवन सौ हाथ लम्बा और पचास हाथ चौड़ा था। {42:3} वहाँ छज्जों के तीन मंजिल इन भवनों की दीवारों पर थे। वे एक दूसरे के सामने थे। भीतरी आँगन और बाहरी आँगन के पक्के रास्ते के बीच बीस हाथ खुला क्षेत्र था। {42:4} कमरों के सामने एक विशाल कक्ष था। वह भीतर पहुँचाता था। यह दस हाथ चौड़ा, सौ हाथ लम्बा था। उनके दरवाजे उत्तर को थे। {42:5} ऊपर के कमरे अधिक पतले थे क्योंकि छज्जे मध्य और निचली मंजिल से अधिक स्थान घेरे थे। {42:6} कमरे तीन मंजिलों पर थे। बाहरी आँगन की तरह के उनके स्तम्भ नहीं थे। इसलिये ऊपर के कमरे मध्य और नीचे की मंजिल के कमरों से अधिक पीछे थे। {42:7} बाहर एक दीवार थी। यह कमरों के समान्तर थी। {42:8} यह बाहरी आँगन को ले जाती थी। यह कमरों के आर — पार थी। यह पचास हाथ लम्बी थी। {42:9} इन कमरों के नीचे एक द्वार था जो बाहरी आँगन से पूर्व को ले जाता था। {42:10} बाहरी दीवार के आरम्भ में, दक्षिण की ओर मन्दिर के आँगन के सामने और मन्दिर के भवन की दीवार के बाहर, कमरे थे। इन कमरों के सामने {42:11} एक विशाल कक्ष था। वे उत्तर के कमरों के समान थे। दक्षिण के द्वार लम्बाई — चौड़ाई में उतने ही माप वाले थे जितने उत्तर के। दक्षिण के द्वार नाप, रूपाकृति और प्रवेश कक्ष की दृष्टि से उत्तर के द्वारों के सामने थे। {42:12} दक्षिण के कमरों के नीचे एक द्वार था जो पूर्व की ओर जाता था। यह विशाल — कक्ष में पहुँचाता था। दक्षिण के कमरों के आर — पार एक विभाजक दीवार थी। {42:13} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “आँगन के आर — पार वाले दक्षिण के कमरे और उत्तर के कमरे पवित्र कमरे हैं। ये उन याजकों के कमरे हैं जो यहोवा को बलि — भेंट चढ़ाते हैं। वे याजक इन कमरों में अति पवित्र भेंट को खाएंगे। वे सर्वाधिक पवित्र भेंट को वहाँ रखेंगे। क्यों क्योंकि यह स्थान पवित्र है। सर्वाधिक पवित्र भेंट ये हैं: अन्न भेंट, पाप के लिये भेंट और अपराध के लिये भेंट। {42:14} याजक पवित्र — क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। किन्तु बाहरी आँगन में जाने के पहले वे अपने सेवा वस्त्र पवित्र स्थान में रख देंगे। क्यों क्योंकि ये वस्त्र पवित्र है। यदि याजक चाहता है कि वह मन्दिर के उस भाग में जाए जहाँ अन्य लोग हैं तो उसे उन कमरों में जाना चाहिए और अन्य वस्त्र पहन लेना चाहिए।” {i42:15} मन्दिर का बाहरी भाग {42:15} वह व्यक्ति जब मन्दिर के भीतर की नाप लेना समाप्त कर चुका, तब वह मुझे उस फाटक से बाहर लाया जो पूर्व को था। उसने मन्दिर के बाहर चारों ओर नापा। {42:16} उस व्यक्ति ने मापदण्ड से, पूर्व के सिरे को नापा। यह पाँच सौ हाथ लम्बा था। {42:17} उसने उत्तर के सिरे को नापा। यह पाँच सौ हाथ लम्बा था। {42:18} उसने दक्षिण के सिरे को नापा। यह पाँच सौ हाथ लम्बा था। {42:19} वह पश्चिम की तरफ चारों ओर गया और इसे नापा। यह पाँच सौ हाथ लम्बा था। {42:20} उसने मन्दिर को चारों ओर से नापा। दीवार मन्दिर के चारों ओर गई थी। दीवार पाँच सौ हाथ लम्बी और पाँच सौ हाथ चौड़ी थी। यह पवित्र क्षेत्र को अपवित्र क्षेत्र से अलग करती थी। {i43:1} यहोवा अपने लोगों के बीच रहेगा {43:1} वह व्यक्ति मुझे फाटक तक ले गया, उस फाटक तक जो पूर्व को खुलता था। {43:2} वहाँ पूर्व से इस्राएल के परमेश्वर की महिमा उतरी। परमेश्वर का आवाज समुद्र के गर्जन के समान ऊँचा था। परमेश्वर की महिमा से भूमि प्रकाश से चमक उठी थी। {43:3} दर्शन वैसा ही था जैसा दर्शन मैंने कबार नदी के किनारे देखा था। मैंने धरती पर अपना माथा टेकते हुए प्रणाम किया। {43:4} यहोवा की महिमा, मन्दिर में उस फाटक से आई जो पूर्व को खुलता है। {43:5} तब आत्मा ने मुझे ऊपर उठाया और भीतरी आँगन में ले गई। यहोवा की महिमा ने मन्दिर को भर दिया। {43:6} मैंने मन्दिर के भीतर से किसी को बातें करते सुना। व्यक्ति मेरी बगल में खड़ा था। {43:7} मन्दिर में एक आवाज ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, यही स्थान मेरे सिंहासन और पदपीठ का है। मैं इस स्थान पर इस्राएल के लोगों में सदा रहूँगा। इस्राएल का परिवार मेरे पवित्र नाम को फिर बदनाम नहीं करेगा। राजा और उनके लोग मेरे नाम को अपवित्र करके या इस स्थान पर अपने राजाओं का शव दफनाकर लज्जित नहीं करेंगे। {43:8} वे मेरे नाम को, अपनी देहली को मेरी देहली के साथ बनाकर तथा अपने द्वार — स्तम्भ को मेरे द्वार — स्तम्भ के साथ बनाकर लज्जित नहीं करेंगे। अतीत में केवल एक दीवार उन्हें मुझसे अलग करती थी। अत: उन्होंने हर समय जब पाप और उन भयंकर कामों को किया तब मेरे नाम को लज्जित किया। यही कारण था कि मैं क्रोधित हुआ और उन्हें नष्ट किया। {43:9} अब उन्हें व्यभिचार को दूर करने दो और अपने राजाओं के शव को मुझसे बहुत दूर ले जाने दो। तब मैं उनके बीच सदा रहूँगा। {43:10} “अब मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के परिवार से उपासना के बारे में कहो। तब वे अपने पापों पर लज्जित होंगे। वे मन्दिर की योजना के बारे में सीखेंगे। {43:11} वे उन बुरे कामों के लिये लज्जित होंगे जो उन्होंने किये हैं। उन्हें मन्दिर की आकृति समझने दो। उन्हें यह सीखने दो कि वह कैसे बनेगा, उसका प्रवेश — द्वार, निकास — द्वार और इस पर की सारी रूपाकृतियाँ कहाँ होंगी। उन्हें इसके सभी नियमों और विधियों के बारे में सिखाओं और इन्हें लिखो जिससे वे सभी इन्हें देख सकें। तब वे मन्दिर के सभी नियमों और विधियों का पालन करेंगे। तब वे यह सब कुछ कर सकते हैं। {43:12} मन्दिर का नियम यह है: पर्वत की चोटी पर सारा क्षेत्र सर्वाधिक पवित्र है। यह मन्दिर का नियम है। {i43:13} वेदी {43:13} “वेदी की माप, हाथों और इससे लम्बी माप का उपयोग करके, यह है। वेदी की नींव के चारों ओर एक गन्दा नाला था। यह एक हाथ गहरा और हर ओर एक हाथ चौड़ा था। इसके सिरे के चारों ओर एक बालिश्त नौ इंच ऊँची किनारी थी। वेदी कितनी ऊँची थी, वह यह थी। {43:14} भूमि से निचली किनारी तक, नींव की नाप दो हाथ है। यह एक हाथ चौड़ी थी। छोटी किनारी से बड़ी किनारी तक इसकी नाप चार हाथ होगी। यह दो हाथ चौड़ी थी। {43:15} वेदी पर आग का स्थान चार हाथ ऊँचा था। वेदी के चारों कोने सींगों के आकार के थे। {43:16} वेदी पर आग का स्थान बारह हाथ लम्बा और बारह हाथ चौड़ा था। यह पूरी तरह वर्गाकार था। {43:17} किनारी भी वर्गाकार थी, चौदह हाथ लम्बी और चौदह हाथ चौड़ी। इसके चारों ओर पट्टी आधा हाथ चौड़ी थी। (नींव के चारों ओर की गन्दी नाली दो हाथ चौड़ी थी।) वेदी तक जाने वाली पैड़ियाँ पूर्व दिशा में थीं।” {43:18} तब उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, स्वामी यहोवा यह कहता है: ‘वेदी के लिये ये नियम हैं। जिस दिन होमबलि दी जानी होती है और इस पर खून छिड़कना होता है, {43:19} उस दिन तुम सादोक के परिवार के लोगों को एक नया बैल पाप बलि के रूप में दोगे। ये व्यक्ति लेवी परिवार समूह के हैं। वे याजक होते हैं। वे भेंट उन पुरुषों के पास लाएंगे और इस प्रकार मेरी सेवा करेंगे।’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {43:20} “तुम बैल का कुछ खून लोगे और वेदी के चारों सींगों पर, किनारे के चारों कोनों पर और पट्टी के चारों ओर डालोगे। इस प्रकार तुम वेदी को पवित्र करोगे। {43:21} तुम बैल को पाप बलि के रूप में लोगे। बैल, पवित्र क्षेत्र के बाहर, मन्दिर के विशेष स्थान पर जलाया जाएगा। {43:22} “दूसरे दिन तुम बकरा भेंट करोगे जिसमें कोई दोष नहीं होगा। यह पाप बलि होगी। याजक वेदी को उसी प्रकार शुद्ध करेगा जिस प्रकार उसने बैल से उसे शुद्ध किया। {43:23} जब तुम वेदी को शुद्ध करना समाप्त कर चुको तब तुम्हें चाहिए कि तुम एक दोष रहित नया बैल और रेवड़ में से एक दोष रहित मेढ़ा बलि चढ़ाओ। {43:24} तब याजक उन पर नमक छिड़केंगे। तब याजक बैल और मेढ़े को यहोवा को होमबलि के रूप में बलि चढ़ाएगे। {43:25} तुम एक बकरा प्रतिदिन सात दिन तक, पाप बलि के लिये तैयार करोगे। तुम एक नया बैल और रेवड़ से एक मेढ़ा भी तैयार करोगे। बैल और मेढ़े में कोई दोष नहीं होना चाहिए। {43:26} सात दिन तक याजक वेदी को पवित्र करते रहेंगे। तब याजक वेदी को समर्पित करेंगे। {43:27} इसके साथ ही वेदी को तैयार करने और इसे परमेश्वर को समर्पित करने के, वे सात दिन पूरे हो जाएंगे। आठवें दिन और उसके आगे याजक तुम्हारी होमबलि और मेल बलि वेदी पर चढ़ा सकते हैं। तब मैं तुम्हें स्वीकार करुँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {i44:1} बाहरी द्वार {44:1} तब वह व्यक्ति मुझे मन्दिर के बाहरी फाटक जिसका सामना पूर्व को है, वापस लाया। हम लोग द्वार के बाहर थे और बाहरी द्वार बन्द था। {44:2} यहोवा ने मुझसे कहा, “यह फाटक बन्द रहेगा। यह खोला नहीं जाएगा। कोई भी इससे होकर प्रवेश नहीं करेगा। क्यों क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इससे प्रवेश कर चुका है। अत: यह बन्द रहना चाहिए। {44:3} लोगों का शासक इस स्थान पर तब बैठेगा जब वह मेल बलि को यहोवा के साथ खाएगा। वह फाटक के साथ के प्रवेश — कक्ष के द्वार से प्रवेश करेगा तथा उसी रास्ते से बाहर जाएगा।” {i44:4} मन्दिर का पवित्रता {44:4} तब वह व्यक्ति मुझे उत्तरी द्वार से मन्दिर के सामने लाया। मैंने दृष्टि डाली और यहोवा की महिमा को यहोवा के मन्दिर में भरता देखा। मैंने अपने माथे को धरती पर टेकते हुए प्रणाम किया। {44:5} यहोवा ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, बहुत सावधानी से देखो! अपनी आँखों और कानों का उपयोग करो। इन चीजों को देखो। मैं तुम्हें मन्दिर के बारे में सभी नियम — विधि बताता हूँ। सावधानीपूर्वक मन्दिर के प्रवेश — द्वार और पवित्र स्थान से सभी निकासों को देखो। {44:6} तब इस्राएल के उन लोगों को यह सन्देश दो जिन्होंने मेरी आज्ञा पालन करने से इन्कार कर दिया था। उनसे कहो, मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘इस्राएल के परिवार, मैंने तुम्हारे द्वारा की गई भयंकर चीजों को आवश्यकता से अधिक सहन किया है! {44:7} तुम विदेशियों को मेरे मन्दिर में लाये और उन लोगों का सचमुच खतना नहीं हुआ था। वे पूरी तरह से मेरे प्रति समर्पित नहीं थे। इस प्रकार तुमने मेरे मन्दिर को अपवित्र किया था। तुमने हमारी वाचा को तोड़ा, भयंकर काम किये और तब तुमने मुझे रोटी की भेंट, चर्बी और खून दिया। किन्तु इसने मेरे मन्दिर को गन्दा बनाया। {44:8} तुमने मेरी पवित्र चीजों की देखभाल नहीं की। नहीं, तुम विदेशियों को मेरे मन्दिर के लिये उत्तरदायी बनाया!’” {44:9} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “एक विदेशी को जिसका खतना न हुआ हो, मेरे मन्दिर में नहीं आना चाहिए, उन विदेशियों को भी नहीं, जो इस्राएल के लोगों के बीच स्थायी रूप से रहते हैं। उसका खतना अवश्य होना चाहिए और उसे मेरे प्रति पूरी तरह समर्पित होना चाहिए, इसके पूर्व कि वह मेरे मन्दिर में आए। {44:10} अतीत में, लेवीवंशियों ने मुझे तब छोड़ दिया, जब इस्राएल मेरे विरुद्ध गया। इस्राएल ने मुझे अपनी देवमूर्तियों का अनुसरण करने के लिये छोड़ा। लेवीवंशी अपने पाप के लिये दण्डित होंगे। {44:11} लेवीवंशी मेरे पवित्र स्थान में सेवा करने के लिये चुने गये थे। उन्होंने मन्दिर के फाटक की चौकीदारी की। हन्होंने मन्दिर में सेवा की। उन्होंने बलियों तथा होमबलियों के जानवरों को लोगों के लिये मारा। वे लोगों की सहायता करने और उनकी सेवा के लिये चुने गए थे। {44:12} किन्तु उन लेवीवंशियों ने मेरे विरुद्ध पाप करने में लोगों की सहायता की! उन्होंने लोगों को अपनी देवमूर्तियों की पूजा करने में सहायता की। अत: मैं उनके विरुद्ध प्रतिज्ञा कर रहा हूँ, ‘वे अपने पाप के लिये दण्डित होंगे।’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह बात कही है। {44:13} “अत: लेवीवंशी बलि को मेरे पास याजकों की तरह नहीं लाएंगे। वे मेरी किसी पवित्र चीज के पास या सर्वाधिक पवित्र वस्तु के पास नहीं जाएंगे। वे अपनी लज्जा को, जो बुरे काम उन्होंने किये, उसके कारण, ढोएंगे। {44:14} किन्तु मैं उन्हें मन्दिर की देखभाल करने दूँगा। वे मन्दिर में काम करेंगे और वे सब काम करेंगे जो इसमें किये जाते हैं। {44:15} “सभी याजक लेवी के परिवार समूह से हैं। किन्तु जब इस्राएल के लोग मेरे विरुद्ध मुझसे दूर गए तब केवल सादोक परिवार के याजकों ने मेरे पवित्र स्थान की देखभाल की। अत: केवल सादोक के वंशज ही मुझे भेंट लाएंगे। वे मेरे सामने खड़े होंगे और अपने बलि चढ़ाए गए जानवरों की चर्बी और खून मुझे भेंट करेंगे।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा! {44:16} “वे मेरे पवित्र स्थान में प्रवेश करेंगे। वे मेरी मेज के पास मेरी सेवा करने आएंगे। वे उन चीजों की देखमाल करेंगे जिन्हें मैंने उन्हें दीं। {44:17} जब वे भीतरी आँगन के फाटकों में प्रवेश करेंगे तब वे बहुमूल्य सन के वस्त्र पहनेंगे। जब वे भीतरी आँगन के फाटक और मन्दिर में सेवा करेंगे तब वे ऊनी वस्त्र पहनेंगे। {44:18} वे सन की पगड़ी अपने सिर पर धारण करेंगे और वे सन की जांघिया पहनेंगे। वे ऐसा कुछ नहीं पहनेंगे जिससे पसीना आये। {44:19} वे मेरी सेवा करते समय के वस्त्र को, बाहरी आँगन में लोगों के पास जाने के पहले, उतारेंगे। तब वे इन वस्त्रों को पवित्र कमरों में रखेंगे। तब वे दूसरे वस्त्र पहनेंगे। इस प्रकार वे लोगों को उन पवित्र वस्त्रों को छूने नहीं देंगे। {44:20} “वे याजक अपने सिर के बाल न ही मुड़वायेंगे, न ही अपने बालों को बहुत बढ़ने देंगे। यह इस बात को प्रकट करेगा कि वे शोकग्रस्त हैं और याजकों को यहोवा की सेवा के विषय में प्रसन्न रहना चाहिये। याजक अपने सिर के बालों की केवल छंटाई कर सकते हैं। {44:21} कोई भी याजक उस समय दाखमधु नहीं पी सकता जब वे भीतरी आँगन में जाता है। {44:22} याजक को विधवा से या तलाक प्राप्त स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए। नहीं, वे इस्राएल के परिवार की कन्यायों से विवाह करेंगे, या वे उस स्त्री से विवाह कर सकते हैं, जिसका पति याजक रहा हो।” {44:23} “याजक मेरे लोगों को, पवित्र चीजों और जो चीजें पवित्र नहीं है, के बीच अन्तर के विषय में भी शिक्षा देंगे। वे मेरे लोगों को, जो शुद्ध और जो शुद्ध नहीं है, की जानकारी करने में सहायता देंगे। {44:24} याजक न्यायालय में न्यायाधीश होगा। वे लोगों के साथ न्याय करते समय मेरे नियम का अनुसरण करेंगे। वे मेरी विशेष दावतों के समय मेरे नियम — विधियों का पालन करेंगे। वे मेरे विशेष विश्राम के दिनों का सम्मान करेंगे और उन्हें पवित्र रखेंगे। {44:25} वे व्यक्ति के शव के पास जाकर अपने को अपवित्र करने नहीं जाएंगे। किन्तु वे तब अपने को अपवित्र कर सकते हैं यदि मरने वाला व्यक्ति पिता, माता, पुत्र, पुत्री, भाई या अविवाहित बहन हो। ये याजक को अपवित्र बनायेगा। {44:26} शुद्ध किये जाने के बाद याजक को सात दिन तक प्रतीक्षा करनी चाहिए। {44:27} तब यह पवित्र स्थान को लौट सकता है। किन्तु जिस दिन वह भीतरी आँगन के पवित्र स्थान में सेवा करने जाये उसे पापबलि अपने लिये चढ़ानी चाहिये।” मेरा स्वामी यहोवा ने यह कहा। {44:28} “लेवीवंशियों की अपनी भूमि के विषय में: मैं उनकी सम्पत्ति हूँ। तुम लेवीवंशियों को कोई सम्पत्ति (भूमि) इस्राएल में नहीं दोगे। मैं इस्राएल में उनके हिस्से में हूँ। {44:29} वे अन्नबलि, पापबलि, दोषबलि खाने के लिये पाएंगे। जो कुछ इस्राएल के लोग यहोवा को देंगे, वह उनका होगा। {44:30} हर प्रकार की तैयार फसल का प्रथम भाग याजकों के लिये होगा। तुम अपने गूंधे आटे का प्रथम भाग भी याजक को दोगे। यह तुम्हारे परिवार पर आशीर्वाद की वर्षा करेगा। {44:31} याजक को उस पक्षी या जानवर नहीं खाना चाहिये जिसकी स्वाभाविक मृत्यु हो या जो जंगली जानवर द्वारा टुकड़े — टुकड़े कर दिया गया हो। {i45:1} पवित्र काम के उपयोग के लिये भूमि का बँटवारा {45:1} “तुम इस्राएल के परिवार के लिये भूमि का विभाजन गोट डालकर करोगे। उस समय तुम भूमि का एक भाग अलग करोगे। वह यहोवा के लिये पवित्र हिस्सा होगा। भूमि पच्चीस हजार हाथ लम्बी और बीस हजार हाथ चौड़ी होगी। यह पूरी भूमि पवित्र होगी। {45:2} एक वर्गाकार पाँच सौ निनानवे हाथ क्षेत्र मन्दिर के लिये होगा। मन्दिर के चारों ओर एक खुला क्षेत्र पचास हाथ चौड़ा होगा। {45:3} अति पवित्र स्थान में तुम पच्चीस हजार हाथ लम्बा और दस हाजार चौड़ा नापोगे। मन्दिर इस क्षेत्र में होगा। मन्दिर का क्षेत्र सर्वाधिक पवित्र स्थान होगा। {45:4} “यह भूमि का पवित्र भाग मन्दिर के सेवक याजकों के लिये होगा जहाँ वे परमेश्वर के समीप सेवा करने आते हैं। यह याजकों के घरों और मन्दिर के लिये होगा। {45:5} दूसरा क्षेत्र पच्चीस हजार हाथ लम्बा और दस हजार हाथ चौड़ा उन लेविवंशियों के लिये होगा जो मन्दिर में सेवा करते हैं। यह भूमि भी लेविवंशियों की, उनके रहने के नगरों के लिये होगी। {45:6} “तुम नगर को पाँच हजार हाथ चौड़ा और पच्चीस हजार हाथ लम्बा क्षेत्र दोगे। यह पवित्र क्षेत्र के सहारे होगा। यह इस्राएल के पूरे परिवार के लिये होगा। {45:7} शासक पवित्र स्थान और नगर की अपनी भूमि के दोनों ओर की भूमि अपने पास रखेगा। यह पवित्र क्षेत्र और नगर के क्षेत्र के बीच में होगा। यह उसी चौड़ाई का होगा जो चौड़ाई परिवार समूह की भूमि की है। यह लगातार पश्चिमी सीमा से पूर्वी सीमा तक जाएगा। {45:8} यह भूमि इस्राएल में शासक की सम्पत्ति होगी। इस प्रकार शासक को मेरे लोगों के जीवन को भविष्य में कष्टकर बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। किन्तु वे भूमि को इस्राएलियों के लिये उनके परिवार समूहों को देंगे।” {45:9} मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, “इस्राएल के शासकों बहुत हो चुका! क्रूर होना और लोगों से चीजें चुराना, छोड़ो! न्यायी बनो और अच्छे काम करो। हमारे लोगों को अपने घरों से बाहर जाने के लिये बलपूर्वक विवश न करो!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {45:10} “लोगों को ठगना बन्द करो। सही बाटों और मापों का उपयोग करो। {45:11} एपा (सूखी चीजों का बाट) और बथ (द्रव का मापक) एक ही समान होने चाहिएं। एक बथ और एपा दोनों 1/10 होमर के बराबर होने चाहिए। वे मापक होमर पर आधारित होंगे। {45:12} एक शेकेल बीस गेरा के बराबर होना चाहिए। एक मिना साठ शेकेल के बराबर होना चाहिए। यह बीस शेकेल जमा पच्चीस शेकेल जमा पन्द्रह शेकेल के बराबर होना चाहिए। {45:13} “यह विशेष भेंट है जिसे तुम्हें देना चाहिए: 1/6 एपा गेहूँ के हर एक होमर छ: बुशल गेहूँ के लिये। 1/6 एपा जौ के हर एक होमर छ: बुशल जौ के लिये। {45:14} 1/10 बथ जैतून का तेल, हर एक कोर जैतून के तेल के लिये। (याद रखें: दस बथ का एक होमर दस बथ का एक कोर) {45:15} एक भेड़, दो सौ भेड़ों के लिये — इस्राएल में सिंचाई के लिये बने हर कुँए से। “ये विशेष भेंटे अन्नबलि, होमबलि और मेलबलि के लिये हैं। ये भेंटे लोगों को पवित्र बनाने के लिये हैं।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा। {45:16} “देश का हर एक व्यक्ति इस्राएल के शासक के लिये यह भेंट देगा। {45:17} किन्तु शासक को विशेष पवित्र दिनों के लिये आवश्यक चीजें देनी चाहिए। शासक को होमबलि, अन्नबलि और पेय भेंट की व्यवस्था दावत के दिन, नवचन्द्र, सब्त और इस्राएल के परिवार के सभी विशेष दावतों के लिये करनी चाहिए। शासकों को सभी पापबलि, अन्नबलि, होमबलि, मेलबलि जो इस्राएल के परिवार को पवित्र करने के लिये उपयोग की जाती हैं, देना चाहिए।” {45:18} मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें बताई, “पहले महीने में, महीने के प्रथम दिन तुम एक दोष रहित नया बैल लोगे। तुम्हें उस बैल का उपयोग मन्दिर को पवित्र करने के लिये करना चाहिए। {45:19} याजक कुछ खून पाप के लिये भेंट से लेगा और इसे मन्दिर के द्वार — स्तम्भो और वेदी के किनारी के चारों कोनों और भीतरी आँगन के फाटक के स्तम्भों पर डालेगा। {45:20} तुम यही काम महीने के सातवें दिन उस व्यक्ति के लिये करोगे जिसने गलती से पाप कर दिया हो, या अनजाने में किया हो। इस प्रकार तुम मन्दिर को शुद्ध करोगे।” {i45:21} फसह पर्व की दावत से समय भेंट {45:21} “पहले महीने के चौदहवें दिन तुम्हें फसह पर्व मनाना चाहिए। अखमीरी रोटी का यह उत्सव इस समय आरम्भ होता है। उत्सव सात दिन तक चलता है। {45:22} उस समय शासक एक बैल अपने लिए तथा इस्राएल के लोगों के लिए भेंट करेगा। बैल पापबलि के लिये होगा। {45:23} दावत के सात दिन तक शासक दोष रहित सात बैल और सात मेढ़े भेंट करेगा। वे यहोवा को होमबलि होंगे। शासक उत्सव के सात दिन हर रोज एक बैल भेंट करेगा और वह पाप बलि के लिये हर एक दिन एक बकरा भेंट करेगा। {45:24} शासक एक एपा जौ हर एक बैल के साथ अन्नबलि के रूप में, और एक एपा जौ हर एक मेढ़े के साथ भेंट करेगा। शासक को एक गैलन तेल हर एफा अन्न के लिये देना चाहिए। {45:25} शासक को यही काम उत्सव (शरण) के सात दिन तक करना चाहिए। यह उत्सव सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन आरम्भ होता है। ये भेंटे पापबलि, होमबलि, अन्नबलियाँ और तेल — भेंट होंगी।” {i46:1} शासक और त्यौहार {46:1} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “भीतरी आँगन का पूर्वी फाटक काम के छ: दिनों में बन्द रहेगा। किन्तु यही सब्त के दिन और नवचन्द्र के दिन खुलेगा। {46:2} शासक फाटक के प्रवेश कक्ष से अन्दर आएगा और उस फाटक के स्तम्भ के सहारे खड़ा होगा। तब याजक शासक की होमबलि और मेलबलि चढ़ाएगा। शासक फाटक की देहली पर उपासना करेगा। तब वह बाहर जाएगा। किन्तु फाटक संध्या होने तक बन्द नहीं होगा। {46:3} देश के लोग भी यहोवा के सम्मुख जहाँ फाटक सब्त के दिन और नवचन्द्र के दिन खुलता है, वहीं उपासना करेंगे। {46:4} “शासक सब्त के दिन होमबलि चढ़ाएगा। उसे दोष रहित छ: मेमने और दोष रहित एक मेढ़ा देना चाहिए। {46:5} उसे एक एपा अन्नबलि मेढ़े के साथ देनी चाहिए। शासक उतनी अन्नबलि मेमनों के साथ देगा, जितनी वह दे सकता है। उसे एक हिन जैतून का तेल हर एक एपा अन्न के साथ देना चाहिए। {46:6} “नवचन्द्र के दिन उसे एक बैल भेंट करना चाहिए, जिसमें कोई दोष न हो। वह छ: मेमने और एक मेढ़ा, जिसमें कोई दोष न हो, भी भेंट करेगा। {46:7} शासक को बैल के साथ एक एपा अन्नबलि और एक एपा अन्नबलि मेढ़े के साथ देनी चाहिए। शासक को मेमनों के साथ तथा हर एक एपा अन्न के लिये एक हिन तेल के साथ, जितना हो सके देना चाहिए। {46:8} “शासक को पूर्वी फाटक के प्रवेश कक्ष से होकर मन्दिर के क्षेत्र में आना जाना चाहिए। {46:9} “जब देश के निवासी यहोवा से मिलने विशेष त्यौहार पर आएंगे तो जो व्यक्ति उत्तर फाटक से उपासना करने को प्रवेश करेगा, वह दक्षिण फाटक से जाएगा। जो व्यक्ति फाटक से प्रवेश करेगा वह उत्तर फाटक से जाएगा। कोई भी उसी मार्ग से नहीं लौटेगा जिससे उसने प्रवेश किया। हर एक व्यक्ति को सीधे आगे बढ़ना चाहिए। {46:10} जब लोग अन्दर जाएंगे तो शासक अन्दर जाएगा। जब वे बाहर आएंगे तब शासक बाहर जाएगा। {46:11} “दावतों, और विशेष बैठकों के अवसर पर एक एपा अन्नबलि हर नये बैल के साथ चढ़ाई जानी चाहिए। एक एपा अन्नबलि हर मेढ़े के साथ चढ़ाई जानी चाहिए और हर एक मेमने के साथ उसे जितना अधिक वह दे सके देना चाहिए। उसे एक दिन हिन तेल हर अन्न के एक एपा के लिये देना चाहिए। {46:12} “जब शासक यहोवा को स्वेच्छा भेंट देता है, यह होमबलि, मेलबलि या स्वेच्छा भेंट हो सकती है, चढ़ायेगा तो उसके लिये पूर्व का फाटक खुलेगा। तब वह अपनी होमबलि और अपनी मेलबलि को सब्त के दिन की तरह चढ़ाएगा। जब वह जाएगा उसके बाद फाटक बन्द होगा। {i46:13} नित्य भेंट {46:13} “तुम दोष रहित एक वर्ष का एक मेमना दोगे। यह प्रतिदिन यहोवा को होमबलि के लिये होगा। प्रत्येक प्रात: तुम इसे दोगे। {46:14} तुम प्रत्येक प्रात: मेमने के साथ अन्नबलि भी चढ़ाओगे। तुम 1/6 एपा आटा और 1/3 हिन तेल अच्छे आटे को चिकना करने के लिये, दोगे। यह यहोवा को नित्य अन्नबलि होगी। {46:15} इस प्रकार वे सदैव मेमना, अन्नबलि और तेल, होम बलि के लिये हर प्रात: देते रहेंगे।” {i46:16} अपनी सन्तान को शासक द्वारा भूमि देने के नियम {46:16} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “यदि शासक अपनी भूमि के किसी हिस्से को अपने पुत्रों को पुरस्कार के रूप में देगा तो वह पुत्रों की होगी। यह उनकी सम्पत्ति है। {46:17} किन्तु यदि कोई शासक अपनी भूमि के किसी भाग को अपने दास को पुरस्कार के रूप में देता है तो वह पुरस्कार उसके स्वतन्त्र होने की तिथि तक ही उसका रहेगा। तब पुरस्कार शासक को वापस हो जाएगा। केवल राजा के पुत्र ही उसकी भूमि के पुरस्कार को अपने पास रख सकते हैं {46:18} और शासक लोगों की भूमि का कोई भी हिस्सा नहीं लेगा और न ही उन्हें अपनी भूमि छोड़ने को विवश करेगा। उसे अपनी भूमि का कुछ भाग अपने पुत्रों को देना चाहिए। इस तरह से हमारे लोग अपनी भूमि से वंचित होने के लिये विवश नहीं किये जाएंगे।” {i46:19} विशेष रसोईघर {46:19} वह व्यक्ति मुझे द्वार से फाटक की बगल में ले गया। वह मुझे याजकों के उत्तर में पवित्र कमरों की ओर ले गया। मैंने वहाँ बहुत दूर पश्चिम में एक स्थान देखा। {46:20} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “यही वह स्थान है जहाँ याजक दोष बलि और पाप बलि को पकायेंगे। यहीं पर याजक अन्नबलि को पकायेंगे। क्यों क्योंकि जिससे उन्हें उन भेंटों को बाहरी आँगन में ले जाने की आवश्यकता न रहे। इस प्रकार वे उन पवित्र चीजों को बाहर नहीं लाएंगे जहाँ साधारण लोग होंगे।” {46:21} तब वह व्यक्ति मुझे बाहरी आँगन में लाया। वह मुझे आँगन के चारों कोनों में ले गया। आँगन के हर एक कोने में एक छोटा आँगन था। {46:22} आँगन के कोनों में छोटे आँगन थे। हर एक छोटा आँगन चालीस हाथ लम्बा और तीस हाथ चौड़ा था। चारों कोनों की नाप समान थी। {46:23} भीतर इन छोटे आँगनों के चारों ओर ईंटे की एक दीवार थी। हर एक दीवार में भोजन पकाने के स्थान बने थे। {46:24} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “ये रसोईयाँ हैं जहाँ वे लोग जो मन्दिर की सेवा करते हैं, लोगों के लिये बलि पकायेंगे।” {i47:1} मन्दिर से बहता जल {47:1} वह व्यक्ति मन्दिर के द्वार पर मुझे वापस ले गया। मैंने मन्दिर की पूर्वी देहली के नीचे से पानी आते देखा। (मन्दिर का सामना मन्दिर की पूर्वी ओर है।) पानी मन्दिर के दक्षिणी छोर के नीचे से वेदी के दक्षिण में बहता था। {47:2} वह व्यक्ति मुझे उत्तर फाटक से बाहर लाया और बाहरी फाटक के पूर्व की तरफ चारों ओर ले गया। फाटक के दक्षिण की ओर पानी बह रहा था। {47:3} वह व्यक्ति पूर्व की ओर हाथ में नापने का फीता लेकर बढ़ा। उसने एक हजार हाथ नापा। तब उसने मुझे उस स्थान से पानी से होकर चलने को कहा। वहाँ पानी केवल मेरे टखने तक गहरा था। उस व्यक्ति ने अन्य एक हजार हाथ नापा। तब उसने उस स्थान पर पानी से होकर चलने को कहा। वहाँ पानी मेरे घुटनों तक आया। {47:4} तब उसने अन्य एक हजार हाथ नापा और उस स्थान पर पानी से होकर चलने को कहा। वहाँ पानी कमर तक गहरा था। {47:5} उस व्यक्ति ने अन्य एक हजार हाथ नापा। किन्तु वहाँ पानी इतना गहरा था कि पार न किया जा सके। यह एक नदी बन गया था। पानी तैरने के लिये पर्याप्त गहरा था। यह नदी इतनी गहरी थी कि पार नहीं कर सकते थे। {47:6} तब उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुमने जिन चीजों को देखा, उन पर गहराई से ध्यान दिया?” तब वह व्यक्ति नदी के किनारे के साथ मुझे वापस ले गया। {47:7} जैसे मैं नदी के किनारे से वापस चला, मैंने पानी के दोनों ओर बहुत अधिक पेड़ देखे। {47:8} उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “यह पानी पूर्व को अरबा घाटी की तरफ नीचे बहता है। पानी मृत सागर में पहुँचता है। उस सागर में पानी स्वच्छ और ताजा हो जाता है। {47:9} इस पानी में बहुत मछलियाँ हैं और जहाँ यह नदी जाती है वहाँ बहुत प्रकार के जानवर रहते हैं। {47:10} तुम मछुआरों को लगातार एनगदी से ऐनेग्लैम तक खड़े देख सकते हो। तुम उनको अपना मछली का जाल फेंकते और कई प्रकार की मछलियाँ पकड़ते देख सकते हो। मृत सागर में उतनी ही प्रकार की मछलियाँ है जितनी प्रकार की भूमध्य सागर में। {47:11} किन्तु दलदल और गकों के प्रदेश के छोटे क्षेत्र अनुकूल नहीं बनाये जा सकते। वे नमक के लिये छोड़े जाएंगे। {47:12} हर प्रकार के फलदार वृक्ष नदी के दोनों ओर उगते हैं। इनके पत्ते कभी सूखते और मरते नहीं। इन वृक्षों पर फल लगना कभी रूकता नहीं। वृक्ष हर महीने फल पैदा करते हैं। क्यों क्योंकि पेड़ों के लिये पानी मन्दिर से आता है। पेड़ों का फल भोजन बनेगा, और उनकी पत्तियाँ औषधियाँ होंगी।” {i47:13} परिवार समूहों के लिए भूमि का बँटवारा {47:13} मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “ये सीमायें इस्राएल के बारह परिवार समूहों में भूमि के बाँटने के लिये हैं। यूसुफ को दो भाग मिलेंगे। {47:14} तुम भूमि को बराबर बाँटोगे। मैंने इस भूमि को तुम्हारे पूर्वजों को देने का वचन दिया था। अत: मैं यह भूमि तुम्हें दे रहा हूँ। {47:15} “यहाँ भूमि की ये सीमायें हैं। उत्तर की ओर यह सीमा भूमध्य़ सागर से हेतलोन होकर जाती है जहाँ सड़क हमात और सदाद तक {47:16} बेरोता, सिब्रैम (जो दमिश्क और हमात की सीमा के बीच है) और हसर्हतीकोन जो हौरान की सीमा पर है, की ओर मुड़ती है। {47:17} अत: सीमा समुद्र से हसरेनोन तक जायेगी जो दमिश्क और हमात की उत्तरी सीमा पर है। यह उत्तर की ओर होगी। {47:18} “पूर्व की ओर, सीमा हसरेनोन से हौरान और दमिश्क के बीच जाएगी और यरदन नदी के सहारे गिलाद और इस्राएल की भूमि के बीच पूर्वी समुद्र तक लगातार, तामार तक जायेगी। यह पूर्वी सीमा होगी। {47:19} “दक्षिण ओर, सीमा तामार से लगातार मरीबोत कादेश के नखलिस्तान तक जाएगी। तब यह मिस्र के नाले के सहारे भूमध्य सागर तक जाएगी। यह दक्षिणी सीमा होगी। {47:20} “पश्चिमी ओर, भूमध्य सागर लगातार हमात के सामने के क्षेत्र तक सीमा बनेगा। यह तुम्हारी पश्चिमी सीमा होगी। {47:21} “इस प्रकार तुम इस भूमि को इस्राएल के परिवार समूहों में बाँटोगे। {47:22} तुम इसे अपनी सम्पत्ति और अपने बीच रहने वाले विदेशियों की सम्पत्ति के रूप में जिनके बच्चे तुम्हारे बीच रहते हैं, बाँटोगे। ये विदेशी निवासी होंगे, ये स्वाभाविक जन्म से इस्राएली होंगे। तुम कुछ भूमि इस्राएल के परिवार समूहों में से उनको बाँटोगे। {47:23} वह परिवार समूह जिसके बीच वह निवासी रहता है, उसे कुछ भूमि देगा।” मेरा स्वामी यहोवा ने यह कहा है! {i48:1} इस्राएल के परिवार समूह के लिये भूमि भूमि का विशेष भाग {48:1} उत्तरी सीमा भूमध्य सागर से पूर्व हेतलोन से हमात दरर् और तब, लगातार हसेरनोन तक जाती है। यह दमिश्क और हमात की सीमाओं के मध्य है। परिवार समूहों में से इस समूह की भूमि इन सीमाओं के पूर्व से पश्चिम को जाएगी। उत्तर से दक्षिण, इस क्षेत्र के परिवार समूह है, दान, आशेर, नप्ताली, मनश्शे, एप्रैम, रूबेन, यहूदा। {48:2} -- {48:3} -- {48:4} -- {48:5} -- {48:6} -- {48:7} -- {48:8} “भूमि का अगला क्षेत्र विशेष उपयोग के लिये होगा। यह भूमि यहूदा की भूमि के दक्षिण में है। यह क्षेत्र पच्चीस हजार हाथ उत्तर से दक्षिण तक लम्बा है और पूर्व से पश्चिम तक, यह उतना चौड़ा होगा जितना अन्य परिवार समूहों का होगा। मन्दिर भूमि के इस विभाग के बीच होगा। {48:9} तुम इस भूमि को यहोवा को समर्पित करोगे। यह पच्चीस हजार हाथ लम्बा और बीस हजार हाथ चौड़ा होगा। {48:10} भूमि का यह विशेष क्षेत्र याजकों और लेवीवंशियों में बँटेगा। “याजक इस क्षेत्र का एक भाग पाएंगे। यह भूमि उत्तर की ओर पच्चीस हजार हाथ लम्बी, पश्चिम की ओर दस हजार हाथ चौड़ी, पूर्व की ओर दस हजार हाथ चौड़ी और दक्षिण की ओर पच्चीस हजार हाथ लम्बी होगी। भूमि के इस क्षेत्र के बीच में यहोवा का मन्दिर होगा। {48:11} यह भूमि सादोक के वंशजों के लिये है। ये व्यक्ति मेरे पवित्र याजक होने के लिये चुने गए थे। क्यों क्योंकि इन्होंने तब भी मेरा सेवा करना जारी रखा जब इस्राएल के अन्य लोगों ने मुझे छोड़ दिया। सादोक के परिवार ने मुझे लेवी परिवार समूह के अन्य लोगों की तरह नहीं छोड़ा। {48:12} इस पवित्र भू — भाग का विशेष हिस्सा विशेष रूप से इन याजकों का होगा। यह लेवीवंशियों की भूमि से लगा हुआ होगा। {48:13} “याजकों की भूमि से लगी भूमि को लेवीवंशी अपने हिस्से के रूप में पाएंगे। यह पच्चीस हजार हाथ लम्बी, दस हजार हाथ चौड़ी होगी। वे इस भूमि की पूरी लम्बाई और चौड़ाई पच्चीस हजार हाथ लम्बी और बीस हजार हाथ चौड़ी पाएंगे। {48:14} लेवीवंशी इस भूमि का कोई भाग न तो बेचेंगे, न ही व्यापार करेंगे। वे इस भूमि का कोई भी भाग बेचने का अधिकार नहीं रखते। वे देश के इस भाग के टुकड़े नहीं कर सकते। क्यों क्योंकि यह भूमि यहोवा की है। यह अति विशेष है। यह भूमि का सर्वोत्तम भाग है। {i48:15} नगर सम्पत्ति के लिये हिस्से {48:15} “भूमि का एक क्षेत्र पाँच हजार हाथ चौड़ा और पच्चीस हजार हाथ लम्बा होगा जो याजकों और लेवीवंशियों को दी गई भूमि से अतिरिक्त होगा। यह भूमि नगर, पशुओं की चरागाह और घर बनाने के लिये हो सकती है। साधारण लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। नगर इसके बीच में होगा। {48:16} नगर की नाप यह है: उत्तर की ओर यह साढ़े चार हजार हाथ होगा। पूर्व की ओर यह साढ़े चार हजार हाथ होगा। दक्षिण की ओर यह साढ़े चार हजार हाथ होगा। पश्चिम की ओर यह साढ़े चार हजार हाथ होगा। {48:17} नगर की चरागाह होगी। ये चरागाहें ढाई सौ हाथ उत्तर की ओर, ढाई सौ हाथ दक्षिण की ओर होगी। वे ढाई सौ हाथ पूर्व की ओर तथा ढाई सौ हाथ पश्चिम की ओर होगी। {48:18} पवित्र क्षेत्र के सहारे जो लम्बाई बचेगी, वह दस हजार हाथ पूर्व में ओर दस हजार हाथ पश्चिम में होगी। यह भूमि पवित्र क्षेत्र के बगल में होगी। यह भूमि नगर के मजदूरों के लिये अन्न पैदा करेगी। {48:19} नगर के मजदूर इसमें खेती करेंगे। मजदूर इस्राएल के सभी परिवार समूहों में से होंगे। {48:20} “यह भूमि का विशेष क्षेत्र वर्गाकार होगा। यह पच्चीस हजार हाथ लम्बा औरप् पच्चीस हजार हाथ चौड़ा होगा। तुम इस क्षेत्र को विशेष कामों के लिये अलग रखोगे। एक भाग याजकों के लिये है। एक भाग लेवीवंशियों के लिये है और एक भाग नगर के लिये है। {48:21} “इस विशेष भूमि का एक भाग देश के शासक के लिये होगा। यह विशेष भूमि का क्षेत्र वर्गाकार है। यह पच्चीस हजार हाथ लम्बा और पच्चीस हजार हाथचौड़ा है। इसका एक भाग याजकों के लिये, एक {48:22} भाग लेवीवंशियों के लिये और एक भाग मन्दिर के लिये है। मन्दिर इस भूमि क्षेत्र के बीच में है। शेष भूमि देश के शासक की है। शासक बिन्यामीन और यहूदा की भूमि के बीच की भूमि पाएगा। {48:23} “विशेष क्षेत्र के दक्षिण में उस परिवार समूह की भूमि {48:24} होगी जो यरदन नदी के पूर्व रहता था। हर परिवार {48:25} समूह उस भूमि का एक हिस्सा पाएगा जो पूर्वी सीमा {48:26} से भूमध्य सागर तक गई है। उत्तर से दक्षिण के {48:27} ये परिवार समूह है: बिन्यामीन, शिमोन, इस्साकार, जबूलून और गाद। {48:28} “गाद की भूमि की दक्षिणी सीमा तामार से मरीबोत — कादेश के नखलिस्तान तक जाएगी। तब मिस्र के नाले से भूमध्य़ सागर तक पहुँचेगी {48:29} और यही वह भूमि है जिसे तुम इस्राएल के परिवार समूह में बाँटोगे। वही हर एक परिवार समूह पाएगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा! {i48:30} नगर के फाटक {48:30} “नगर के ये फाटक हैं। फाटकों का नाम इस्राएल के परिवार समूह के नामों पर होंगे। “उत्तर की ओर नगर साढ़े चार हजार हाथ लम्बा होगा। {48:31} उसमें तीन फाटक होंगे। रुबेन का फाटक, यहूदा का फाटक और लेवी का फाटक। {48:32} “पूर्व की ओर नगर साढ़े चार हजार हाथ लम्बा होगा। उसमें तीन फाटक होंगे: यूसुफ का फाटक, बिन्यामीन का फाटक और दान का फाटक। {48:33} “दक्षिण की ओर नगर साढ़े चार हजार हाथ लम्बा होगा। उसमें तीन फाटक होंगे: शिमोन का फाटक, इस्साकार का फाटक और जबूलून का फाटक। {48:34} “पश्चिम की ओर नगर साढ़े चार हजार हाथ लम्बा होगा। इसमें तीन फाटक होंगे: गाद का फाटक, आशेर का फाटक और नप्ताली का फाटक। {48:35} “नगर के चारों ओर की दूरी अट्ठारह हजार हाथ होगी। अब से आगे नगर का नाम होगा: यहोवा यहाँ है।”