{i1:1} मंदिर बनाने का समय {1:1} परमेश्वर यहोवा का सन्देश नबी हाग्गै के द्वारा शालतीएल के पुत्र यहूदा के शासक जरुब्बाबेल और यहोसादाक के पुत्र महायाजक यहोशू को मिला। यह सन्देश फारस के राजा दारा के दूसरे वर्ष के छठें महीने के प्रथम दिन मिला था। इस सन्देश में कहा गया: {1:2} सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है, “लोग कहते हैं कि यहोवा का मंदिर बनाने के लिये समय नहीं आया है।” {1:3} तब यहोवा का संदेश नबी हाग्गै के द्वारा आया, जिसमें कहा गया था: {1:4} “क्या यह तुम्हारे स्वयं के लिये लकड़ी मढ़े मकानों में रहने का समय है जबकि यह मंदिर अभी खाली पड़ा है {1:5} यही कारण है कि सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है: जो कुछ तुम्हारे साथ घट रहा हैं उस के बारे में सोचो! {1:6} तुमने बोया बहुत है, पर तुम काटते हो नहीं के बराबर। तुम खाते हो, पर तुम्हारा पेट नहीं भरता। तुम पीते हो, पर तुम्हें नशा नहीं होता। तुम वस्त्र पहनते हो, किन्तु तुम्हें पर्याप्त गरमाहट नहीं मिलती। तुम जो थोड़ा बहुत कमाते हो पता नहीं कहां चला जाता है; लगता है जैसे जेबों में छेद हो गए हैं!” {1:7} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “जो कुछ तुम्हारे साथ घट रहा है उसके बारे में सोचो! {1:8} पर्वत पर चढ़ो। लकड़ी लाओ और मंदिर को बनाओ। तब मैं मंदिर से प्रसन्न होऊँगा, और सम्मानित होऊँगा।” यहोवा यह सब कहता है। {1:9} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “तुम बहुत अधिक पाने की चाह में रहते हो, किन्तु तुम्हें नहीं के बराबर मिलता हैं। तुम जो कुछ भी घर पर लाते हो, मैं इसे उड़ा ले जाता हूँ! क्यों क्योंकि मेरा मंदिर खंडहर पड़ा है। किन्तु तुम लोगों में हर एक को अपने अपने घरों की पड़ी है। {1:10} यही कारण है कि आकाश अपनी ओस तक रोक लेता है, और इसी कारण भूमि अपनी फसल नहीं देती। ऐसा तुम्हारे कारण हो रहा हैं।” {1:11} यहोवा कहता है, “मैंने धरती और पर्वतों पर सूखा पड़ने का आदेश दिया है। अनाज, नया दाखमधु, जैतून का तेल, या वह सभी कुछ जिसे यह धरती पैदा करती है, नष्ट हो जायेगा! तथा सभी लोग और सभी मवेशी कमजोर पड़ जायेंगे।” {i1:12} नये मंदिर के कार्य का आरम्भ {1:12} तब शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल और यहोसादाक के पुत्र महायाजक यहोशू ने सब बचे हुये लोगों के साथ अपने परमेश्वर यहोवा का सन्देश और उसके भेजे हुये नबी हाग्गै के वचनो को स्वीकार किया और लोग अपने परमेश्वर यहोवा से भयभीत हो उठे। {1:13} परमेश्वर यहोवा के सन्देशवाहक हाग्गै ने लोगों को यहोवा का सन्देश दिया। उसने यह कहा, “मैं तुम्हारे साथ हूँ।” {1:14} तब परमेश्वर यहोवा ने शालतीएल के पुत्र यहूदा के शासक जरूब्बाबेल को प्रेरित किया और परमेश्वर यहोवा ने यहोसादाक के पुत्र महायाजक यहोशू को भी प्रेरित किया और परमेश्वर यहोवा ने बाकी के सभी लोगों को भी प्रेरित किया। तब वे आये और अपने सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा के मंदिर के निर्माण में काम करने लगे। {1:15} उन्होंने यह राजा दारा के दूसरे वर्ष के छठें महीने के चौबीसवें दिन किया। {i2:1} यहोवा का लोगों को प्रेरित करना {2:1} यहोवा का सन्देश सातवें महीने के इक्कीसवें दिन हाग्गै को मिला। सन्देश में कहा गया, {2:2} “अब यहूदा के शासक शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल, यहोसादाक के पुत्र महायाजक यहोशू और जो लोग बचे हैं उनसे बातें करो और कहो: {2:3} ‘क्या तुममे कोई ऐसा बचा हैं जिसने उस मंदिर को अपने पहले के वैभव में देखा है। अब तुमको यह कैसा लग रहा है क्या खण्डहर हुआ यह मन्दिर उस पहले वैभवशाली मन्दिर की तुलना में कहीं भी ठहर पाता हैं {2:4} किन्तु जरुब्बाबेल, अब तुम साहसी बनों! यहोवा यह कहता है, “यहोसादाक के पुत्र महायाजक यहोशू, तुम भी साहसी बनो और देश के सभी लोगों तुम भी साहसी बनो!” यहोवा यह कहता है, “काम करो, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ!” सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है! {2:5} “‘यहोवा कहता है, ‘जहाँ तक मेरी प्रतिज्ञा की बात है, जो मैंने तुम्होरे मिस्र से बाहर निकलने के समय तुमसे की है, वह मेरी आत्मा तुममें हैं। डरो नहीं!’ {2:6} क्यों क्योकि सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है: ‘एक बार फिर मैं शीघ्र ही पृथ्वी और आकाश एवं समुद्र और सूखी भूमि को कम्पित करूँगा! {2:7} मैं सभी राष्ट्रों को कंपा दूंगा और वे सभी राष्ट्र अपनी सम्पत्ति के साथ तुम्हारे पास आएंगे। तब मैं इस मंदिर को गौरव से भर दूंगा!’ सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है। {2:8} ‘उनकी चाँदी मेरी हैं और उनका सोना मेरा है।’ सर्वशक्तिमान यहोवा यही कहता है। {2:9} ‘इस मंदिर का पर्वर्ती गौरव प्रथम मंदिर के गौरव से बढ़कर होगा।’ सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है, ‘और इस स्थान पर मैं शान्ति स्थापित करूँगा।’” सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है!’ {i2:10} कार्य आरंभ हो चुका है वरदान प्राप्त होगा {2:10} यहोवा का सन्देश दारा के दूसरे वर्ष के नौवें महीने के चौबीसवें दिन नबी हाग्गै को मिला। सन्देश में कहा गया था, {2:11} “सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है, ‘अब याजक से पूछो कि व्यवस्था क्या है?’ {2:12} ‘संभव है कोई व्यक्ति अपने कपड़ों की तहों में पवित्र मांस ले चले। संभव है कि उस कपड़े की तह से जिसमें वह पवित्र मांस ले जा रहा हो, रोटी, या पका भोजन, दाखमधु, तेल या किसी अन्य भोजन का स्पर्श हो जाये। क्या वह चीज जिसका स्पर्श तह से होता है पवित्र हो जायेगी?’” याजक ने उत्तर दिया, “नहीं।” {2:13} तब हाग्गै ने कहा, “संभव है कोई व्यक्ति किसी शव को छूले। तब वह अपवित्र हो जाएगा। किन्तु यदि वह किसी चीज को छूएगा तो क्या वह अपवित्र हो जायेगी” तब याजक ने उत्तर दिया, “हाँ, वह अपवित्र हो जाएगी।” {2:14} तब हाग्गै ने उत्तर दिया, “परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘मेरे सामने इन लोगों के प्रति वही नियम है, और वही नियम इस राष्ट्र के प्रति है! उसके हाथो ने जो कुछ किया वही नियम उसके लिए भी है। जो कुछ वे अपने हाथों भेंट करेंगे वह भी अपवित्र होगा। {2:15} “‘किन्तु अब कृपया सोचें, आज के पहले क्या हुआ, इसके पूर्व कि यहोवा, परमेश्वर के मंदिर में एक पत्थर पर दूसरा पत्थर रखा गया था {2:16} एक व्यक्ति बीस माप अनाज की ढेर के पास आता है, किन्तु वहाँ उसे केवल दस ही मिलते हैं और जब एक व्यक्ति दाखमधु के पीपे के पास पचास माप निकालने आता है तो वहाँ वह केवल बीस ही पाता है! {2:17} मैंने, तुम्हें और तुम्हारे हाथों ने जो कुछ किया उसे दण्ड दिया। मैंने तुमको उन बीमारियों से, जो पौधों को मारती है, और फफूंदी एवं ओलो से, दण्डित किया। किन्तु तुम फिर भी मेरे पास नहीं आए।’ यहोवा यह कहता है।” {2:18} यहोवा कहता है, “इस दिन से आगे सोचो अर्थात नौवें महीने के चौबीसवें दिन से जिस दिन यहोवा, के मंदिर की नींव तैयार की गई। सोचो। {2:19} क्या बीज अब भी भण्डार — गृह में है क्या अंगूर की बेलें, अंजीर के वृक्ष, अनार और जैतून के वृक्ष अब तक फल नहीं दे रहे हैं नहीं! किन्तु आज के दिन से, आगे के लिये मैं तुम्हें आशीर्वाद दूँगा।” {2:20} तब महीने के चौबीसवें दिन हाग्गै को दूसरी बार यहोवा का सन्देश मिला। सन्देश में कहा गया, {2:21} “यहूदा के प्रशासक जरुब्बाबेल से कहो, ‘मैं आकाश और पृथ्वी को कंपाने जा रहा हूँ {2:22} और मैं राज्यों के सिंहासनों को उठा फेंकूंगा और राष्ट्रों के राज्यों की शक्ति को नष्ट कर दूंगा और मैं रथों और उनके सवारों को नीचे फेंक दूंगा। तब घोड़े और उनके घुड़सवार गिरेंगे। भाई, भाई का दुश्मन हो जाएगा।’ {2:23} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, ‘मैं उस दिन शालतीएल के पुत्र, अपने सेवक, जरुब्बाबेल को लूंगा।’ यहोवा परमेश्वर यह कहता है, ‘और मैं तुम्हें मुद्रा अंकित करने की अंगूठी बनाऊँगा। क्यों? क्योंकि मैंने तुम्हें चुना है!’” सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह सब कहा है।