{i1:1} यहोवा अपने लोगों की वापसी चाहता है {1:1} बेरेक्याह के पुत्र जकर्याह ने यहोवा का सन्देश पाया। फारस में दारा के राज्यकाल के दूसरे वर्ष के आठवें महीने में यह हुआ। (जकर्याह बेरेक्याह का पुत्र था। बेरेक्याह इद्दो नबी का पुत्र था।) सन्देश यह है: {1:2} यहोवा तुम्हारे पूर्वजों पर बहुत क्राधित हुआ है। {1:3} अत: तुम्हें लोगों से यह सब कहना चाहिये। यहोवा कहता हैं, “मेरे पास वापस आओ तो मैं तम्हारे पास वापस लौटूंगा।” यह सब सर्वशक्तिमान यहोवा ने कहा। {1:4} यहोवा ने कहा, “अपने पूर्वजों के समान न बनो। बीते समय में, नबी ने उनसे बातें कीं।उन्होंने कहा, ‘सर्वशक्तिमान यहोवा चाहता है कि तुम अपने बुरे रहन सहन को छोङ दो। बुरे काम बन्द कर दो!’ किन्तु तुम्हारे पूर्वजों ने मेरी एक न सुनी।” यहोवा ने यह बातें कही। {1:5} परमेश्वर ने कहा, “तुम्हारे पूर्वज जा चुके और वे नबी सदैव जीवित न रहे। {1:6} नबी मेरे सेवक थे। मैंने उनका उपयोग तुम्हारे पूर्वजों को अपने व्यवस्था और अपनी शिक्षा देने के लिये किया और तम्हारे पूर्वजों ने अन्त में शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा, ‘सर्वशक्तिमान यहोवा ने वह किया जिसे करने को उसने कहा था। उसने हमारे बुरे रहन — सहन और सभी बुरे किये गए कामों के लिये दण्ड दिया।’ इस प्रकार वे परमेश्वर के पास वापस लौटे।” {i1:7} घोड़ों का दर्शन {1:7} जकर्याह ने फारस में दारा के राज्यकाल के दूसरे वर्ष के ग्यारहवें महीने के चौबीसवें दिन (अर्थात् शबात) यहोवा का दूसरा सन्देश पाया। (जकर्याह बेरेक्याह का पुत्र था और बेरेक्याह इद्दो नबी का पुत्र था।) सन्देश यह है: {1:8} रात को, मैंने एक व्यक्ति को लाल घोड़े पर बैठे देखा। वह घाटी में कुछ मालती की झाड़ियों के बीच खड़ा था। उसके पीछे लाल, भूरे और श्वेत रंग के घोड़े थे। {1:9} मैंने पूछा, “महोदय, ये घोड़े किसलिये हैं” तब मुझसे बात करते हुए, स्वर्गदूत ने कहा, “मैं तुम्हें दिखाऊँगा कि ये घोड़े किसलिये हैं।” {1:10} तब मालती की झाड़ियों के बीच स्थित उस व्यक्ति ने कहा, “यहोवा ने इन घोड़ों को पृथ्वी पर इधर — उधर घूमने के लिये भेजे हैं।” {1:11} तब घोड़ों ने मालती की झाड़ियों में स्थित यहोवा के दूत से बातें कीं। उन्होंने कहा, “हम लोग पृथ्वी पर इधर — उधर घूम चुके हैं, और सब कुछ शान्त और व्यवस्थित हैं।” {1:12} तब यहोवा के दूत ने कहा, “यहोवा, आप यरूशलेम और यहूदा के नगर को कब तक आराम दिलायेंगे अब तो आप इन नगरों पर सत्तर वर्ष तक अपना क्रोध प्रकट कर चुके हैं।” {1:13} तब यहोवा ने उस दूत को उत्तर दिया जो मुझसे बातें कर रहा था। यहोवा ने अच्छे शान्तिदायक शब्द कहे। {1:14} तब यहोवा के दूत ने मुझे लोगों से यह सब कहने को कहा: सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है: “मैं यरूशलेम और सिय्योन से विशेष प्रेम रखता हूँ {1:15} और मैं उन राष्ट्रों पर बहुत क्रोधित हूँ जो अपने को इतना सुरक्षित अनुभव करते हैं। मैं कुछ क्रोधित हो गया था और मैंने उन राष्ट्रों का उपयोग अपने लोगों को दण्ड देने के लिये किया। किन्तु उन राष्ट्रों ने बहुत अधिक विनाश किया।” {1:16} अत: यहोवा कहता है, “मैं यरूशलेम लौटूँगा और उसे आराम दूँगा।” सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “यरूशलम का निर्माण पुन: होगा। और वहां मेरा मंदिर बनेगा।” {1:17} स्वर्गदूत ने कहा, “लोगों से यह भी कहो: ‘सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, ‘मेरे नगर फिर सम्पन्न होंगे, मैं सिय्योन को आराम दूँगा। मैं यरूशलेम को अपना विशेष नगर चुनूँगा।’” {i1:18} सींगों का दर्शन {1:18} तब मैंने ऊपर नजर उठाई और चार सींगों को देखा। {1:19} तब मैंने उस दूत से जो मुझसे बातें कर रहा था, पूछा, “इन सींगों का अर्थ क्या हैं” उसने कहा, “ये वे सींगे है, जिन्होंने इस्राइल, यहूदा और यरूशलेम के लोगों को विदेशों में जाने को विवश किया।” {1:20} तब यहोवा ने मुझे चार कारीगर दिखाये। {1:21} मैंने उनसे पूछा, “ये चार कारीगर क्या करने आ रहे हैं” उसने कहा, “ये लोग उन सींगों को नष्ट करने आए हैं। उन सींगों ने यहूदा के लोगों को विदेशों में जाने को विवश किया। उन सींगों ने किसी पर दया नहीं दिखाई। ये सींगे उन राष्ट्रों का प्रतीक है जिन्होंने यहूदा के लोगों पर आक्रमण किया था और उन्हें विदेशों में जाने को विवश किया था।” {i2:1} यरूशलेम को मापने का दर्शन {2:1} तब मैंने ऊपर निगाह उठाई और मैंने एक व्यक्ति को नापने की रस्सी को लिये हुए देखा। {2:2} मैंने उससे पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो” उसन मुझे उत्तर दिया, “यरूशलेम को नापने जा रहा हूँ, कि वह कितना लम्बा तथा कितना चौङा है।” {2:3} तब वह दूत, जो मुझसे बातें कर रहा था, चला गया और उससे बातें करने को दूसरा दूत बाहर गया। {2:4} उसने उससे कहा, “दौड़कर जाओ और उस युवक से कहो कि यरूशलम इतना विशाल है कि उसे नापा नहीं जा सकता। उससे यह कहो, ‘यरूशलेम बिना चहारदीवारी का नगर होगा। क्यों क्योंकि वहाँ असंख्य लोग और जानवर रहेंगे।’ {2:5} यहोवा कहता है, ‘मैं उसकी चारों ओर उसकी रक्षा के लिये आग की दीवार बनूँगा, और उस नगर को गौरव देने के लिये वहीं रहूँगा।’” यहोवा कहता है, {i2:6} परमेश्वर अपने लोगों को घर बुलाता है {2:6} “जल्दी करो! उत्तर देश से भाग निकलो! हाँ यह सत्य है कि मैंने तुम्हारे लोगों को चारों ओर बिखेरा। {2:7} सिय्योन के लोगों, तुम बाबुल में बन्दी हो। किन्तु अब भाग निकलो! उस नगर से भाग जाओ!” {2:8} सर्वशक्तिमान यहोवा ने मेरे बारे में यह कहा, “उसने मुझे भेजा है, जिन्होंने उन राष्ट्रों में युद्ध में तुमसे चीज़ें छीनीं! उसने तुझे प्रतिष्ठा देने को मुझे भेजा है।” किन्तु उसके बाद, यहोवा मुझे उनके विरूद्ध भेजेगा। क्यों? क्योंकि यदि वे तुम्हें चोट पहुँचायेंगे तो वह यहोवा की आँख की पुतली को चोट पहुँचाना होगा। {2:9} और मैं उन लोगों के विरूद्ध अपना हाथ उठाऊँगा और उनके दास उनकी सम्पत्ति लेंगे। तब तुम समझोगे कि सर्वशक्तिमान यहोवा ने मुझे भेजा है। {2:10} यहोवा कहता है, “सिय्योन, प्रसन्न हो! क्यों? क्योंकि मैं आ रहा हूँ, और मैं तुम्हारे नगर में रहूँगा। {2:11} उस समय अनेक राष्ट्रों के लोग मेरे पास आएंगे और वे मेरे लोग हो जायेंगे। मैं तुम्हारे नगर में रहूँगा और तुम जानोगे कि सर्वशक्तिमान यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भजा है।” {2:12} यहोवा यरूशलेम को फिर से अपना विशेष नगर चुनेगा और यहूदा, पवित्र — भूमि का उनका हिस्सा होगा। {2:13} सभी व्यक्ति, शान्त हो जाओ! यहोवा अपने पवित्र घर से बाहर आ रहा है। {i3:1} महायाजक के बारे में दर्शन {3:1} तब दूत ने मुझे महायाजक यहोशू को दिखाया। यहोशू यहोवा के दूत के सामने खङा था और शैतान यहोशू की दायीं ओर खड़ा था। शैतान वहाँ यहोशू द्वारा किये गए बुरे कामों के लिये दोष देने को था। {3:2} तब यहोवा के दूत ने कहा, “शैतान, यहोवा तुम्हें फटकारे। यहोवा तुम्हें अपराधी घोषित करे! यहोवा ने यरूशलेम को अपना विषेश नगर चुना हैं। उन्होंने उस नगर को बचाया — जैसे जलती लकङी को आग से बाहर निकाल दिया जाये।” {3:3} यहोशू दूत के सामने खङा था और यहोशू गन्दे वस्त्र पहने था। {3:4} तब अपने समीप खङे अन्य दूतों से दूत ने कहा, “यहोशू के गन्दे वस्त्रों को उतार लो।” तब दूत ने यहोशू से बातें कीं।उसने कहा, “मैंने तुम्हारे अपराधों को हर लिया है और मैं तुम्हें नये वस्त्र बदलने को देता हूँ।” {3:5} तब मैंने कहा, “उसके सिर पर एक नयी पगड़ी बाँधो।” अत: उन्होंने एक नयी पगड़ी उसे बांधी। यहोवा के दूत के खड़े रहते ही उन्होंने उसे नये वस्त्र पहनाये। {3:6} तब यहोवा के दूत ने यहोशू से यह कहा: {3:7} सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह सब कहा, “वैसे ही रहो जैसा मैं कहूँ, और मैं जो कहूँ वह सब करो और तुम मेरे मंदिर के उच्चाधिकारी होगे। तुम इसके आँगन की देखभाल करोगे और मैं अनुमति दूँगा कि तुम यहाँ खड़े स्वर्गदूतों के बीच स्वतन्त्रता से घूमो। {3:8} अत: यहोशू, तुम्हें और तुम्हारे साथ के लोगों को मेरी बातें सुननी होंगी। तुम महायाजक हो, और तम्हारे साथ के लोग दूसरों के समक्ष एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं और मैं सच ही, अपने विशेष सेवक को लाऊँगा, उसे शाख कहते हैं। {3:9} देखो, मैं एक विशेष पत्थर यहोशू के सामने रखता हूँ। उस पत्थर के सात पहलू है और मैं उस पत्थर पर विशेष सन्देश खोदूँगा। वह इस तथ्य को प्रकट करेगा कि मैं एक दिन में इस देश के सभी पापों को दूर कर दूँगा।” {3:10} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “उस समय, लोग बैठेंगे और अपने मित्रों एवं पड़ोसियों को अपने उद्यानों में आमंन्त्रित करेंगे। हर व्यक्ति अपने अंजीर के पेड़ तथा अंगूर की बेल के नीचे अमन — चैन से रहेगा।” {i4:1} दीपाधार और दो जैतून के पेड़ {4:1} तब जो दूत मझसे बातें कर रहा था, मेरे पास आया और उसने मुझे जगाया। मैं नींद से जागे व्यक्ति की तरह लग रहा था। {4:2} तब दूत ने पूछा, “तुम क्या देखते हो?” मैंने कहा, “मैं एक ठोस सोने का दीवाधार देखता हूँ। उस दीपाधार पर सात दीप हैं और दीपाधार के ऊपरी सिरे पर एक प्याला है। प्याले में से सात नल निकल रहे हैं। हर एक नल हर एक दीप तक जा रहा है। वे नल तेल को हर एक दीप के प्याले तक लाते हैं। {4:3} और दो जैथ्द्यन के पेड़, एक दायी और दूसरा बायीं ओर प्याले के सहारे हैं।” {4:4} और तब मैंने, उस दूत से जो मुझसे बातें कर रहा था, पूछा, “महोदय, इन सब का अर्थ क्या है?” {4:5} मुझसे बातें करने वाले दूत ने कहा, “क्या तुम नहीं जानते कि ये सब चीज़ें क्या हैं” मैंने कहा, “नहीं महोदय।” {4:6} तब उसने मुझसे कहा, “यह सन्देश यहोवा की ओर से जरुब्बाबेल को है: ‘तुम्हारी शक्ति और प्रभुत्ता से सहायता नहीं मिलेगी। वरन, तुम्हें सहायता मेरी आत्मा से मिलेगी।’ सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह सब कहा! {4:7} वह ऊँचा पर्वत जरूब्बाबेल के लिये समतल भूमि — सा होगा। वह मंदिर को बनायेगा और जब अन्तिम पत्थर उस स्थान पर रखा जाएगा तब लोग चिल्ला उठेंगे — ‘सुन्दर! अति सुन्दर।’” {4:8} मुझे यहोवा से मिले सन्देश में भी कहा गया, {4:9} “जरूब्बाबेल मेरे मंदिर की नींव रखेगा और जरूब्बाबेल मंदिर को बनाना पूरा करेगा। लोगों तब तुम समझोगे कि सर्वशक्तिमान यहोवा ने मुझे तुम लोगों के पास भेजा है। {4:10} लोग उस सामान्य आरम्भ से लज्जित नहीं होंगे और वे सचमुच तब प्रसन्न होंगे, जब वे जरूब्बाबेल को पूरी की गई भवन को साहुल से नापते और जांच करते देखेंगे। अत: पत्थर के सात पहलू जिन्हें तुमने देखा वे यहोवा की आँखों के प्रतीक हैं जो हर दिशा में देख रहीं हैं। वे पृथ्वी पर सब कुछ देखती हैं।” {4:11} तब मैंने (जकर्याह) उससे कहा, “मैंने एक जैतून का पेड़ दीपाधार की दायी ओर एक बायीं ओर देखा। उन दोनों जैतून के पेड़ों का तात्पर्य क्या है?” {4:12} मैंने उससे यह भी कहा, “मैंने जैतून की दो शाखायें सोने के रंग के तेल को ले जाते, सोने के नलों के सहारे देखीं। इन चीजो का तात्पर्य क्या है?” {4:13} तब दूत ने मुझ से कहा, “क्या तुम नहीं जानते कि इन चीजों का तात्पर्य क्या है?” मैंने कहा, “नहीं महोदय।” {4:14} अत: उसने कहा, “वे उन दो व्यक्तियों के प्रतीक है, जो सारे संसार में यहोवा की सेवा के लिये चुने गए थे।” {i5:1} उड़ता हुआ गोल लिपटा पत्रक {5:1} मैंने फिर निगाह ऊची की और मैंने एक उङता हुआ गोल पत्रक देखा। {5:2} दूत ने मुझसे पूछा, “तुम क्या देखते हो?” मैंने कहा, “मैं एक उङता हुआ गोल लिपटा पत्रक देख रहा हूँ।” “यह गोल लिपटा पत्रक तींस फुट लम्बा और पन्द्रह फूट चौङा है।” {5:3} तब दुत ने मुझ से कहा, “उस गोल लिपटे पत्रक पर एक शाप लिखा हैं। और दुसरी ओर उन लोगों को शाप है, जो प्रतिज्ञा करके झुट बोलते हैं। {5:4} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, ‘मैं इस गोल लिपटे पत्रक को चोरों के घर और उन लोगों के घर भेजूँगा जा गलत प्रतिज्ञा करते समय मेरे नाम का उपयाग करते हैं । वह गोल लिपटा पत्रक वहीं रहेगा। यहाँ तक कि पत्थर और लकङी के खम्भे भी नष्ट हो जाएंगे।’” {i5:5} स्त्री और टोकरी {5:5} तब मेरे साथ बात करने वाला दूत गया। उसने मुझ से कहा, “देखो! तुम क्या होता हुआ देख रहे हो?” {5:6} मैंने कहा, “मैं नही जानता, कि यह क्या हैं?” उसने कहा, “वह मापक टोकरी हैं।” उसने यह भी कहा, “यह टोकरी इस देश के लोगों के पापों को नापने के लिये हैं।” {5:7} टोकरी का ढक्कन सीसे का था जब वह खोला गया, तब उसके भीतर बैठी स्त्री मिली। {5:8} दूत ने कहा स्त्री बुराई का प्रतीक है। “तब दुत ने स्त्री को टोकरी में धक्का दे डाला और सीसे के ढक्कन को उसके मुख में रख दिया।” इससे यह प्रकट होता था, कि पाप बहुत भरी (बुरा) है। {5:9} तब मैंने नजर उठाई और दो स्त्रियों को सारस के समान पंख सहित देखा। वे उङी और अपने पंखों में हवा के साथ उन्होंने टोकरी को उठा लि या। वे टोकरी लिये हवा में उङती रहीं। {5:10} तब मैंने बातें करने वाले उस दूत से पूछा, “वे टोकरी को कहाँ ले जा रही हैं?” {5:11} दुत ने मुझ से कहा, “वे शिनार में इसके लिये एक मंदिर बनाने जा रही हैं जब वे मंदिर बना लेंगी तो वे उस टोकरी को वहाँ रखेंगी।” {i6:1} चार रथ {6:1} तब मैं चारों ओर घुम गया। मैंने निगाह उठाई और मैंने चार रथों को चार कांसे के पर्वतों के बीच के जाते देखा। {6:2} प्रथम रथ को लाल घोङे खींच रहे थे। दुसरे रथ को काले घोङे खींच रहे थे। {6:3} तीसरे रथ को श्वेत घोङे खींच रहे थे और चौथे रथ को लाल धब्बे वाले घोङे खींच रहे थे। {6:4} तब मैंने बात करने वाले उस दुत से पुछा, “महोदय, इन चीजों का तात्पर्य क्या है?” {6:5} दुत ने कहा, “ये चारों दिशाओं की हवाओं के प्रतीक हैं। वे अभी सारे संसार के स्वामी के यहाँ से आये {6:6} हैं।काले घोङे उत्तर को जाएंगे। लाल घोङे पूर्व को जाएंगे। श्वेत घोङे पश्चिम को जाएंगे और लाल धब्बेदार घोङे दक्षिण को जाएंगे।” {6:7} लाल धब्बेदार घोङे अपने हिस्से की पृथ्वी को देखते हुए जाने को उत्सुक थे अत: दुत ने उनसे कहा, “जाओ पृथ्वी का चक्कर लगाओ।” अत: वह अपने हिस्से की पृथ्वी पर टहलते हुए गए। {6:8} तब यहोवा ने मुझे जोर से पुकारा। उन्होंने कहा, “देखो, वे घोङे, जो उत्तर को जा रहे थे, अपना काम बाबुल में पुरा कर चुके। उन्होंने मेरी आत्मा को शान्त कर दिया — अब मैं क्ररोधित नहीं हूँ।” {i6:9} याजक यहोशू एक मुकुट पाता है {6:9} तब मैंने यहावा का एक अन्य सन्देश प्राप्त किया। उसने कहा, {6:10} “हेल्दै, तोबिय्याह और यदायाह बाबुल के बन्दियों में से आ गए हैं। उन लोगों से चाँदी और सोना लो और तब सपन्याह के पुत्र योशियाह के घर जाओ। {6:11} उस सोने — चाँदी का उपयोग एक मुकुट बनाने में करो। उस मुकुट को यहोश के सिर पर रखो। (यहोशू महायाजक था। यहोशू यहोसादाक पुत्र था।) तब यहोशु से ये बातें कहो: {6:12} सर्वशक्तिमान यहोवा यह सब कहता है, ‘शाख नामक एक व्यक्ति है। वह शक्तिशाली हो जाएगा। {6:13} वह यहोवा का मंदिर बनाएगा, और वह सम्मान पाएगा। वह अपने राजसिंहासन पर बैठेगा, और शासक होगा। उसके सिंहासन के बगल में एक याजक खङा होगा। और ये दोनों व्यक्ति शान्तिपूर्वक एक साथ काम करेंगे।’ {6:14} वे मुकुट को मंदिर में रखेंगे जिससे लोगों को याद रखने में सहायता मिलेगी। वह मुकुट हेल्दै, तोबिय्याह, यदायाह और सपन्याह के पुत्र योशियाह को सम्मान प्रदान करेगा।” {6:15} दूर के निवासी लोग आएंगे और मंदिर को बनाएंगे। लोगों, समझोगे कि यहोवा ने मुझे तुम लोगों के पास है।यह सब घटित होगा, यदि तुम वह करोगे, जिसे करने को यहोवा कहता है। {i7:1} यहोवा दया और करूणा चाहता है {7:1} फारस में दारा के राज्याकाल के चौथे वर्ष, जकर्याह को यहोवा का एक संदेश मिला । यह नौवे महीने का चौथा दिन था। (अर्थात् किस्लव।) {7:2} बेतेल के लोगों ने शेरसेर, रेगेम्मेलेक और अपने साथियों को यहोवा से एक प्रश्न पूछने को भेजा। {7:3} वे सर्वशक्तिमान यहोवा के मंदिर में नबियों और याजकों के पास गए। उन लोगों ने ने उनसे यह प्रश्न पूछा: “हम ने कई वर्ष तक मंदिर के ध्वस्त होने का शोक मनाया है। हर वर्ष के पाँचवें महीने में, रोने और उपवास रखने का हम लोगों का विशेष समय रहा हैं। क्या हमें इसे करते रहना चाहिये?” {7:4} मैंने सर्वशक्तिमान यहोवा का यह सन्देश पाया है: {7:5} “याजकों और इस देश के अन्य लोगों से यह कहो: जो उपवास और शोक पिछले सत्तर वर्ष से वर्ष के पाँचवें और सातवें महीने में तुम करते आ रहे हो, क्या वह उपवास, सच ही, मेरे लिये थानहीं! {7:6} और जब तुमने खाया और दाखमधु पिया तब क्या वह मेरे लिये था। नहीं यह तुम्हारी अपनी भलाई के लिये था। {7:7} परमेश्वर ने प्रथम नबियों का उपयोग बहुत पहले यही बात तब कही थी, जब यरूशलेम मनुष्यों से भरा — पूरा सम्पत्तिशाली था। परमेश्वर ने यह बातें तब कहीं थीं, जब यरूशलेम के चारों ओर के नगरों में तथा नेगव एवं पश्चिंमी पहाङियों की तराईयों में लोग शान्तिपूर्वक रहते थे।” {7:8} जकर्याह को यहोवा का यह सन्दोशहै: {7:9} “सर्वशक्तिमान यहोवा ने ये बातें कहीं, ‘तुम्हें जो सत्य और उचित हो, करना चाहिये। तम्हें हर एक को एक दुसरे के प्रति दयालु और करूणापूर्ण होना चाहिये। {7:10} विधवाओ, अनाथों, अजनबियों या दीन लोगों को चोट न पहुँचाओ। एक दुसरे का बुरा करने का विचार भी मन में न आने दो!’” {7:11} किन्तु उनलोगों ने अन सुनी की। उन्होंने उसे करने से इन्कार किया जिसे वे चाहते थे। उन्होंने अपने कान बन्द कर लिये, जिससे वे, परमेश्वर जो कहे, उसे न सुन सकें। {7:12} वे बङे हठी थे। उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था का पालन करना अस्वीकार कर दिया। अपनी आत्मशक्ति से सर्वशक्तिमान यहावा ने नबियों द्धारा अपने लोगों को सन्देश भेजे। किन्तु लोगों ने उसे नहीं सुना, अत: सर्वशक्तिमान यहोवा बहुत क्रारोधित हुआ। {7:13} अत: सर्वशक्तिमान यहावा ने कहा, “मैं ने उन्हें पुकारा और उन्होंने उत्तर नहीं दिया। इसलिये अब यदि वे मुझे पुकारेंगे, तो मैं उत्तर नहीं दूँगा। {7:14} मैं अन्य राष्ट्रों को तुफान की तरह उनके विरूद्ध लाऊँगा। वे उन्हें नहीं जानते, किन्तु जब वे देश से गुजरेंगे, तो उजङ जाएगा।” {i8:1} यहोवा यरूशलेम को आशीर्वाद देने की प्रतिज्ञा करता है {8:1} यह सन्देश सर्वशक्तिमान यहावा का है {8:2} सर्वशक्तिमान यहावा कहता है, “मैं सच ही, सिय्योन से प्रेम करता हूँ। मैं उससे इतना प्रेम करता हूँ कि जब वह मेरी विशवासपात्र न रही, तब मैं उस पर क्रोधित हो गया।” {8:3} यहोवा कहता है, “मैं सिय्योन के पास वापस आ गया हूँ। मैं यरूशलेम में रहने लगा हूँ। यरूशलेम विशवास नगर कहलाएगा। मेरा पर्वत, पवित्र पर्वत कहलाएगा।” {8:4} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “यरूशलेम में फिर बुढे स्त्री — पुरूष समाजिक स्थलों में दिखाई पङेंगे। लोग इतनी लम्बी आयु तक जीवीत रहेंगेकि उन्हें सहरे की छङी की आवश्यकता होगी {8:5} और नगर सङकों पर खेलने वाले बच्चों से भरा होगा। {8:6} बचे हुये लोग इसे आश्चर्यजनक मानेंगे और मैं भी इसे आश्चर्यजनक मानूँगा!” {8:7} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “देखो, मैं पूर्व और पश्चिम के देशो से अपने लोगों को बचा ले चल रहा हूँ। {8:8} मैं उन्हें यहाँ वापस लाऊँगा और वे यरूशलेम में रहेंगे। वे मेरे लोग होंगे और मैं उनका अच्छा और विश्वसनीय परमेश्वर होऊँगा!” {8:9} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “शक्तिशाली बनो! लोगों, तुम आज वही सन्देश सुन रहे हो, जिसे नबियों ने तब दिया था जब सर्वशक्तिमान यहोवा ने अपने मंदिर को फिर से बनाने के लिये नींव डाली। {8:10} उस समय के पहले लोगों के पास श्रमिकों को मजदुरी पर रखने या जानवर को किराये पर रखने के लिये धन नहीं था और मनुष्यों का आवागमन सुरक्षित नही था। सारी आपत्तियों से किसी प्रकार की मुक्ति नही थी। मैंने हर एक को पङोसी के विरूद्ध कर दिया था। {8:11} किन्तु अब वैसा नही है। बचे हुओं के लिए अब वैसा नही होगा।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह बाते कहीं। {8:12} “ये लोग शान्ति के साथ फसल लगाऐगे। उनके अंगुर के बाग अंगूर देंगे। भुमि अच्छी फसल देगी तथा आकाश वर्षा देगा। मैं यह सभी चीजें अपने इन लोगों को दूँगा। {8:13} लाग अपने शापों में यरूशलेम और यहुदा का नाम लेने लगे हैं। किन्तु मैं इस्राइल और यहुदा को बचाऊँगा और उनके नाम वरदान के रूप मैं प्रमाणित होने लगेंगे। अत: डरो नही।शक्तिशाली बनो!” {8:14} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “तुम्हारे पूर्वजों ने मुझे क्रोधित किया था। अत: मैंने उन्हें नष्ट करने का निर्णय लिया। मैंने अपने इरादे को न बदलने का निश्यच किया।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह सब कहा। {8:15} “किन्तु अब मैने अपना इरादा बदल दिया है और उसी तरह मैंने यरूशलेम और यहूदा के लोगों के प्रति अच्छा बने रहने का निशच्य किया है। अत: डरो नहीं! {8:16} किन्तु तुम्हें यह करना चाहिए: अपने पङोसीयों से सत्य बोलो। जब तुम अपने नगरों में निर्णय लो, तो वह करो जो सत्य और शान्ति लाने वाला हो। {8:17} अपने पङोसियों को चाट पहुँचाने के लिये गुप्त योजनायें न बनाओ! झुठी प्रतिज्ञायें न करो! ऐसा करने में तुम्हें आन्नद नही लेना चाहिये। क्यों क्योंकि मैं उन बातों से घृणा करता हूँ।” यहोवा ने यह सब कहा। {8:18} मैंने सर्वशक्तिमान यहोवा का यह सन्देश पाया। {8:19} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “शोक मनाने और उपवास के विशेष दिन चौथे महीने, पाँचवें महीने, सातवें महीने और दसवें महीने में हैं। वे शोक के दिन प्रसन्नता के दिन में बदल जाने चाहिये। वे अच्छे और प्रसन्ननता के दिन में बदल जाने चाहिये। वो अच्छे और प्रसन्ननता के पवित्र दिन होंगे और तम्हें सत्य और शान्ति से प्रेम करना चाहिये!” {8:20} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “भविष्य में, अनेक नगरों से लोग यरूशलेम आएंगे। {8:21} एक नगर के लोग दुसरे नगर के मोलने वाले लोगों से कहेंगे, ‘हम सर्वशक्तिमान यहोवा की उपासना करने जा रहे हैं,’ ‘हमारे साथ आओ!’” {8:22} अनेक लोग और अनेक शक्तिशाली राष्ट्र सर्वशक्तिमान यहोवा की खाज में यरूशलेम आएंगे। वे वहाँ उपासना करने आएंगे। {8:23} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “उस समय विभन्न राष्ट्रों से विभन्न भाषाओ को बदलने वाले दस व्यक्ति एक यहुदी के चादर का पल्ला पकङेंगे और कहेंगे हमने सुना है कि परमेश्वर तुम्हारे साथ है। क्या हम उसकी उपासना करने तम्हारे साथ आ सकते हैं।” {i9:1} अन्य राष्ट्रों के विरूद्ध न्याय {9:1} एक दु: ख पूर्ण सन्देश। यह यहोवा का सन्देश हद्राक के देश और उसकी राजधानी दमिश्क के बारे में है: “इस्राइल के परिवार समूह के लोग ही एक मात्र वे लोग नहीं है जो परमेश्वर के बारे में जानते हैं। हर एक व्यक्ति सहायता के लिये उनकी ओर दख सकता है। {9:2} हद्राक के देश की सीमा हमात है और सोर तथा सीदोन भी यही करते हैं। वे लोग बहुत बुद्धिमान हैं। {9:3} सोर एक किले की तरह बना है। वहाँ के लोगों ने चाँदी इतना इकट्ठा की है, कि वह धूलि के समान सुलभ है और सोना इतना सामान्य है जितनी मिट्टी। {9:4} किन्तु हमारे स्वामी यहोवा यह सब ले लेगा। वे उसकी शक्तिशाली नौसेना को नष्ट करेगा और वह नगर आग से नष्ट होजाएगा! {9:5} अश्कलोन में रहने वाले लोग इन घटनाओं को देखेंगे और वे डरेंगे। अज्जा के लोग भय से काँप उठेगे और एक्रोन के लोग सारी आशएँ छोङ देंगे, जब वे उन घटनाओं को घटित होते देखेंगे। अज्जा में कोई राजा बचा नहीं रहेगा। कोई भी व्यक्ति अब अश्कलोन में नहीं रहेगा। {9:6} अश्दाद में लोग यह भी नही जानेंगे कि उनके अपने पिता कौन हैं मैं गर्वीले पलिश्ती लोगों को पूरी तरह नष्ट कर दूँगा। {9:7} वे रक्त सहित माँस को या कोई भी वर्जीत भोजन नहीं खायेंगे। कोई भी बचा पलिश्ती हमारे राष्ट्र का अंग बनेगा। वे यहूदा में एक नया परिवार समूह होंगे। एक्रोन के लोग हमारे लोगों के एक भाग होंगे जैसा कि यबूसी लोग बन गए। मैं अपने देश की रक्षा करूँगा। {9:8} मैं शत्रु की सेनाओ को यहा से होकर नहीं निकल ने दूँग।मैं उन्हें अपने लोगों को और अधिक चाट नहीं पहुचाने दूँगा। मैंने अपनी आँखों से देखा कि अतित में मेरे लोगों ने कितना कष्ट उठाया।” {i9:9} भविष्य का राजा {9:9} सिय्योन, आनन्दित हो! यरूशलेम के लोगों आनन्दघोष करो! देखो तुम्हारा राजा तम्हारे पास आ रहा है! वह विजय पानेवाला एक अच्छा राजा है। किन्तु वह विनम्र है। वह गधे के बच्चे पर सवार है, एक गधे के बच्चे पर सवार है। {9:10} राजा कहता है, “मैंने एप्रैम में रथों को और यरूशलेम में घुङसवारों को नष्ट किया। मैंने युद्ध में प्रयोग किये गये धनुषों को नष्ट किया।” अन्य राष्ट्रों ने शान्ति — संधि की बातें सुनीं। वह राजा सागर से सागर तक राज्य करेगा। वह नदी से लेकर पृथ्वी के दूरतम सेथानों पर राज्यकरेगा। {i9:11} यहोवा अपने लोगों की रक्षा करेगा {9:11} यरूशलेम हमने अपनी वाचा को खून से मुहरबन्द किया अत: मैने तम्हारे बन्दियों को स्वतन्त्र कर दिया, तम्हारे लोग उस सूने बन्दिगृह में अब नहीं रह गए हैं। {9:12} बन्दियों, अपने घर जाओ! अब तुम्हारे लिये कुछ आशा का अवसर है। अब मैं तुमसे कह रहा हूँ, मैं तुम्हारे पास लौट रहा हूँ! {9:13} यहुदा, मैं तम्हारा उपयोग एक धनुष — जैसा करूँगा। एप्रैम, मैं तम्हारा उपयाग बाणों जैसा करूँगा। इस्राइल, मैं तुम्हारा उपयोग यूनान से लङने के लिए दृढ तलवार जैसा करूँगा। {9:14} यहोवा उसके सामने प्रकट होगा और वह अपने बाण बिजली की तरह चलायेगा। यहोवा, मेरे स्वामी तरही बजाएगा और सेना मरूभूमि के तूफान के समान आगे बढ़ेगी। {9:15} सर्वशक्तिमान यहोवा उनकी रक्षा करेगा। सैनिक पत्थर और गुलेल का उपयोग शत्रु को पराजित करने में करेंगे। वे अपने शत्रुओं का खुन बहायेंगे, यह दाखमधु जैसा बहेगा। यह वेदी के कानों पर फेंके गए खून जैसा होगा! {9:16} उस समय, उनके परमेश्वर यहोवा अपने लोगों को वैसे ही बचाएगा, जैसे गङेरिया भेङों को बचाता है। वे उनके लिये बहुत मूल्यावान होंगे। वे उनके हाथो में जगमगाते रत्न — से होंगे। {9:17} हर एक चीज अच्छी और सुन्दर होगी! वहाँ अदभुत फसल होगी, किन्तु वहाँ केवल अन्न और दाखधु नहीं होगी। वहाँ युवक युवतीयाँ होंगी! {i10:1} यहोवा की प्रतिज्ञायें {10:1} बसन्त ऋतु में यहोवा से वर्षा के लिये प्रार्थना करो। यहोवा बिजली भेजेगा और वर्षा होगी। और परमेश्वर हर एक व्यक्ति के खेत में उगायेगा। {10:2} ये जादुगर अपनी छोटी मूर्तियों और जादू का उपयोग भविष्य की घटनाओं को जानने के लिए करते हैं, किन्तु यह सब व्यर्थ है। वे लोग दर्शन करते हैं और अपने स्वपनों के बारे में कुछ कहते हैं, किन्तु यह सब व्यर्थ झुठ के अलावा कुछ नहीं हैं। अत: लोग भेङों की तरह इधर — उधर सहायता के लिये पुकारते हुए भटक रहे हैं। किन्तु उनको रास्ता दिखाने वाला कोई गङेरया नहीं। {10:3} यहोवा कहता है, “मैं गङेरियों (प्रमुखों) पर बहुत क्रोधित हूँ। मैंने उन प्रमुखों को अपनी भेङो(लोगों) की दखभाल का उत्तरदायित्व सौंपा था।” (यहुदा के लोग परमेश्वर की रेवङ है और सर्वशक्तिमान यहुवा, सचमुच, अपने रेवङ की दखभाल करता है। वह उनकी ऐसा दखभाल करता है, जैसा कोई सैनिक अपने घोङे की रखता है।) {10:4} “कोने का पत्थर, डेरे की खूँटी, यद्ध का धनुष और आग बढते सैनिक सभी यहुदा के साथ आएंगे। वे अपने शत्रुओ को पराजित करेंगे, यह कीचङ मैं आगे बढ़ते सैनिकों जैसा होंगे। {10:5} वे युद्ध करेंगे, और यहोवा उनके साथ है। अत: वे शत्रु के घुङसवारों को भी हरायेंगे। {10:6} मैं यहुदा के परिवार को शक्तिशाली बनाऊँगा।मैं युसुफ को परिवार को युद्ध में विजयी बनाऊँगा। मैं उन्हें स्वस्थ और सुरक्षित वापस लाऊँगा। मैं उन्हें आराम दूँगा। यह ऐसा होगा, मानों मैंने उन्हें कभी नही छोङा। मैं यहोवा, उनका परमेश्वर हूँ और मैं उनकी सहायता करूँगा। {10:7} एप्रैम के लोग शक्तिशाली पुरूष होंगे और ऐसे प्रसन्न होंगे, जैसे वे सैनीक जिन्हें पीने के लिये बहुत अधिक मिल गया हो। उनकी सन्तानें आन्नद मनायेंगी और वे सभी प्रसन्न रहेंगे। वे सभी यहोवा के साथ आन्नद का अवसर पाएंगे। {10:8} “मैं उनको सीटी दे कर सभी को एक साथ बुलाऊँगा। मै, सच ही, उन्हें बचााऊँगा। ये लोग असंख्य हो जाएंगे। {10:9} हाँ, मैं सभी राष्ट्रों में अपंने लोगों को बिखेर रहा हुँ। किन्तु मुझे उन देशो में याद करेंगे वे और उनकी सन्तानें बचीं रहेंगी।और वे वापस आएंगे। {10:10} मैं उन्हें मिस्र और अश्शूर से वापस लाऊँगा मैं उन्हें गिलाद क्षेत्र में लाऊँगा और क्योंकि वहा काफी जगह नहीं होगी। अत: मैं उन्हें समीप के लबानोन में भी रहने दुँगा। {10:11} (यह वैसा ही होगा, जैसा यह पहले तब था, जब परमेश्वर उन्हें मिस्र से निकाल लाया था।उसने समुद्र की तरंगों पर चोट की थी। समुद्र फट गया था और लोग विपत्ति के समुद्र को पैदल पार कर गए थे। यहोवा नदियों की धाराओंको सुखा दगा। वे अश्शूर के गर्व और मिस्र की शक्ति को नष्ट कर देगा) {10:12} यहोवा अपने लोगों को शक्तिशाली बनाएगा और वे उनके और उनके नाम के लिये जीवीत रहेंगे।” यहोवा ने यह सब कहा। {i11:1} परमेश्वर यहूदा के चारों ओर के राष्ट्रों को दण्ड दागा {11:1} लबानोन, अपने द्वार खोलो, क्योंकि आग भीतर लबानोन “और वह तम्हारे दवदारू के पेङों को जला देगी। {11:2} साइप्रस के पेड़ रोएंगे क्योंकि देवदारू के पेड़ गिर गए। वे विशाल पड़ उठा लिये गए। बाशान के आक — वृक्षों, उस वन के लिये रोओ, जो काट डाला गया। {11:3} रोते गड़ेरियों की सुनो। उनके शक्तिशाली प्रमुख दुर कर दिये गेए। जवान सिंहों की दहाड़ को सुनो। यरदन नदी के किनारे की उनकी घनी झाड़ियां ले ली गई। {11:4} मेरा परमेश्वर यहोवा कहता है, “उन भेड़ों की रक्षा करो, जिन्हें मारने के लिये पाला गया हैं। {11:5} उनके प्रमुख, स्वामी और व्यापारी के समान हैं। स्वामी अपने भड़ो को मानता है और उन्हें दण्ड नहीं मिलता। व्यापारी भेड़ों को बेचता है और कहता है, ‘यहोवा की महिमा से मैं सम्पन्न हूँ।’ गड़ेरिये अपने भड़ो के लिये दु: खी नहीं होते {11:6} और मैं इस दश में रहने वालों के लिये दुःखी नहीं होता।” यहोवा ने यह सब कहा, “देखो, मैं हर एक को उसके पड़ोसी और राजा के साथ सौप दूँगा।मैं उन्हें उनका देश नष्ट करने दूँगा, मै उन्हें रोकूँगा नहीं!” {11:7} अत: मैंने उन दिन भड़ों की दखभाल की, जिन्हें मारने के लिये पाला गया था। मुझे दो छड़ियाँ मिलीं।मैंने एक छड़ी का नाम अनुग्रह रखा और दुसरी छड़ी को एकता कहा और तब मैंने भेड़ो की देखभाल आरम्भ की। {11:8} मैंने सभी तीन गड़ेरीयों एक महीने मैं नष्ट कर दिया। मैं भेड़ों पर क्रोधित हुआ और वे मुझसे घृणा करने लगीं। {11:9} तब मैंने कहा, “मैं तम्हें छोड़ता हूँ! मैं तम्हारी दखभाल नहीं करूँगा! मैं उन्हें मर जाने दूँगा, जो मर जाना चाहते हैं। मैं उन्हें नष्ट हो जाने दूँगा, जो नष्ट किया जाना चाहते हैं।और जो बचेंगे वे एक दुसरे को नष्ट करेंगे।” {11:10} तब मैंने अनुग्रह नामक छड़ी ली और उसे तोड़ दी। मैंने यह इस बात को प्रकट करने के लिये किया कि सभी राष्ट्रों के साथ परमेश्वर की वाचा टूट गई। {11:11} अत: उस दिन वाचा समाप्त हो गई और उन दीन भेड़ों ने जा मेरी ओर दख रही थीं, समझ लिया कि यह सन्देश यहोवा का है। {11:12} तब मैंने कहा, “यदि तुम मुझे भगतान करना चाहते हो, तो भुगतान करो, यदि नहीं चाहते हो तो मत करो!”अत: उन्होंने चांदी के तीस टुकड़े दिये। {11:13} तब यहोवा ने मुझ से कहा, “इसका अर्थ है कि वे मेरी कीमत कितनी आंकते हैं। उन अधिक धन को मंदिर के खजाने में डाल दो।”इसलिये मैंने चांदी के तीस टुकड़ों को लिया और उन्हें यहोवा के मंदिर के खजाने में डाल {11:14} दिया।तब मैंने एकता नामक छड़ी को दो टुकड़ों में काट डाला। यह, मैंने यह बात प्रकट करने के लिये किया कि इस्राइल और यहूदा के बीच की एकता टूट गई। {11:15} तब यहोवा ने मुझ से कहा, “अब, एक ऐसी छड़ी की खोज करो, जिसका उपयाग वास्तव में भेड़ों हाँकने के लिये न हो सके। {11:16} यह इस बात को प्रकट करेगा कि मैं इस देश के लिये एक नया गड़ेरिया लाऊँगा। किन्तु यह युवक उन भेड़ो की दखभाल करने में सक्षम नहीं होगा, जो नष्ट की जा चुकी है। वह चाट खाई भेड़ों को स्वस्थ नहीं कर सकेगा। वह उन्हें खिला नहीं पाएगा जो अभी जीवीत बची हैं। और स्वस्थ भेड़ें सारी खा ली जाएंगी, केवल उन्की खुरें बची रहेंगी।” {11:17} हे मेरे नालायक गड़ेरिये। तुमने मेरी भेड़ों को त्याग दिया। उसे दण्ड दो! तलवार से उसकी दायी भुजा और दायीं आंख पर प्रहार करो। उनकी दायीं भुजा व्यर्थ होगी और और उसकी दायीं आंख अंधी होगी। {i12:1} यहूदा के चारो ओर के राष्ट्रों के बारे में दर्शन {12:1} इस्राइल के बारे में यहोवा का दु: ख सन्देश।यहोवा ने पृथ्वी और आकाश को बनाया। उसने मनुष्य की आत्मा को रचा और यहोवा ने ये बातें कहीं, {12:2} “देखो, मैं यरूशलेम को उसकी चारों ओर के राष्ट्रों के लिये जहर का प्याला जैसा बनाऊँगा।राष्ट्र आएंगे और उस नगर पर प्रहार करेंगे और सारा यहुदा जाल में जा फंसेगा। {12:3} किन्तु मैं यरूशलेम को भारी चट्टान बनाऊँगा और जो कोई उसे उठाने की कोशिश करेगा स्वयं घायल होगा। वे लोग, सचमुच, कटेंगे और जख्मी हो जाएंगे। किन्तु पृथ्वी के सारे राष्ट्र एक साथ आएंगे और यरूशलेम के विरूद्ध लड़ेंगे। {12:4} किन्तु उस समय, मैं घोड़ों को भयभीत कर दुँगा और घुड़सवार घबरा जाएंगे।मैं शत्रु के सभी घोड़ो को अन्धा कर दुँगा, किन्तु मेरी आंखें खुली होंगी और मैं यहूदा के परिवार की रक्षा करता {12:5} रहूँगा। यहूदा के परिवार प्रमुख लोगों को उत्साहित करेंगे। वे कहेंगे, ‘सर्वशक्तिमान यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हैं।वह हमें शक्तिशाली बना रहा है।’ {12:6} उस समय, मैं यहूदा परिवार के प्रमुखों को जंगल में जलती हुई आग जैसा बनाऊँगा। वह अपने शत्रुओ को तिनके को भस्म करने वाली आग जैसा भस्म कर देगा। वह अपने चारों ओर के शत्रुओं कर देगा और यरूशलेम के निवासी फिर बैठने और आराम करने की स्थिति में होंगे।” {12:7} पहले यहोवा यहूदा के लोगों को बचायेगा, अत: यरूशलेम के निवासी बहुत अधिक डींग नहीं हांकेंगे। दाऊद के परिवार और यरूशलेम में रहने वाले अन्य लोग यह डींग नहीं हांक सकेंगे कि वह यहूदा में रहने वाले अन्य लोग से अच्छे हैं। {12:8} किन्तु यहोवा यरूशलेम के लोगों की रक्षा करेंगे।यहां तक कि कमजोर से कमजोर दीऊद के सामन बड़ा यद्धा बनेगा और दाऊद के परिवार के लोग यहोवा के अपने दूतों की तरह मार्गदर्शक होंगे। {12:9} यहोवा कहता है, “उस समय मैं उन राष्ट्रों को नष्ट करूँगा जो यरूशलेम के विरूद्ध युद्ध करने आएंगे। {12:10} मैं दाऊद के घर और यरूशलेम के निवासियों के हृदय में दया और करूणा की भावनाबरूंगा। वे मेरी ओर देखेंगे, जिसे उन्होंने छेद डाला था और वे बहुत दुखी होंगे वे इतने ही दुखी होंगे। वे इतने ही दुखी होंगे, जितना अपने इकलौते पुत्र की मृत्यु पर रोने वाला व्यक्ति, या अपने पहलौठे पुत्र की मृत्यु पर रोनेवाला व्यक्ति। {12:11} यरूशलेम में एक बड़े शोक और रूदन का समय आएगा।यह उस समय की तरह होगी, जब मगिद्दो घाटी में हदद्रिम्मोन की मृत्यु पर लोग रोए थे। {12:12} हर एक परिवार अकेले रोएंगे। दाऊद के परिवार के लोग अकेले रोएंगे और उनकी पत्नियाँ अकेली रोएंगी। नथन के परिवार के पुरूष अकेले रोएंगे, और उनकी पत्नियाँ अकेली {12:13} रोएंगी।लेवी के परिवार के पुरूष अकेले रोएंगे और उनकी पत्नियाँ अकेली रोएंगी। शिमई के परिवार के पुरूष अकेले रोएंगे और उनकी पत्नीयाँ अकेली रोएंगी। {12:14} और यही बात सभी परिवार समूहों में होंगी।पुरूष अकेले रोएंगे और स्त्रियाँ अकेली रोएंगी।” {i13:1} झूटे नबी भविष्य में नहीं {13:1} किन्तु उस समय, पानी का एक नया स्रोत दाऊद के परिवार तथा यरूशलेम रहने वाले लागों के लिय फूट पड़ेगा। वह स्रोता उनके पापों को धो देगा और लोगों को शुद्ध कर देगा। {13:2} सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “उस समय, मैं पृथ्वी से सभी मूर्तियों को हटा दूँगा। लोग उनका नाम भी याद नहीं रखेंगे और मैं झूटे नबियों और अशुद्ध आत्माओं को भी पृथ्वी से हटा दूँगा। {13:3} यदि कोई व्यक्ति भविष्यवाणी करता है तो उसे दण्ड मिलेगा। यहाँ तक कि उसके माता — पिता, उसकी अपनी माँ और अपने पिता उससे कहेंगे, ‘तुमने यहोवा के नाम पर झूट बाला है। अत: तुम्हें मर जाना चाहिए!’ उसकी अपनी माँ और उसके अपन पिता भविष्यवाणी करने के कारण उसे छूरा घोंप देंगे । {13:4} उस समय, नबी अपनी भविष्यवाणी और अपने दर्शन के लिये लज्जित होंगे। वे तरह का माटा वस्त्र नहीं पहनेंगे, जो यह प्रकट करे कि व्यक्ति नबी है। वे उन वस्त्रों को, भविष्यवाणी कहे जाने वाले झुट से, लोगों को धोखा देने के लिये नहीं पहनेंगे। {13:5} वे लोग कहेंगे, ‘मैं नबी नहीं हूँ मैं एक किसान हूँ। मैंने बच्चपन से किसान के रूप में काम किया है।’ {13:6} अन्य लोग कहेंगे, ‘किन्तु तुम्हारे हाथों में ये घाव कैसे हैं?’ वह कहेगा, ‘यह चाट मुझे अपने मित्र के घर लगी।’” {13:7} सर्वशक्तिमान यहावा कहता है, “तलवार, गड़ेरिये पर चाट कर! मेरे मित्र को मार! गड़ेरिये पर प्रहार करो और भेड़ें भाग खड़ी होंगी और मैं उन छोटों को दण्ड दूँगा। {13:8} देश के दो तिहीई लोग चाट खाएंगे और मरेंगे। किन्तु एक तिहाई बचे रहेंगे। {13:9} तब मैं उन बचे हुए लोगों की जाँच करूँगा। मैं उन्हें बहुत से कष्ट दूँगा। वे कष्ट उस आग की तरह होंगे, जिसे एक व्यक्ति चाँदी की शुद्धता की परख के लिये उपयोग करता है।मैं उनकी जाँच वैसे ही करूँगा, जैसे व्यक्ति सोने की जाँच करता है। तब वे सहायता के लिये मेरी पुकार करेंगे, और मैं उनकी सहायता करूँगा। मैं कहूँगा, ‘तुम मेरे लोग हो।’ और वे कहेंगे, ‘यहोवा मेरा परमेश्वर है।’” {i14:1} निर्णय का दिन {14:1} देखो, यहोवा निर्णय का विशेष दिन रखता है और जो धन तुमने लिया है वह तुम्हारे नगर में बँटेगा। {14:2} मैं सभी राष्ट्रों को यरूशलेम के विरूद्ध लड़ने के लिये एक साथ लाऊँगा। वे नगर पर अधिकार करेंगे तथा घरों को नष्ट करेंगे। स्त्रियों के साथ कुकर्म होगा, और लोगों में से आधे बन्दी बनाए जाएंगे। किन्तु बाकी लोग नगर से नहीं ले जाएंगे। {14:3} तब यहोवा उन राष्ट्रों के विरूद्ध युद्ध करेगा। यह एक सच्चा युद्ध होगा। {14:4} उस समय, वह जैतुन के पर्वत पर खड़े होंगा। वह पहाड़ी जो यरूशलेम के पूर्व है। अंजीर का पर्वत फट पड़ेगा। पर्वत एक भाग उत्तर को जाएगा दसरा भाग दक्षिण को। एक गहरी घाटी पूर्व से पश्चिम तक उभर आएगी। {14:5} जैसे — जैसे वह पर्वतीय घाटी तुम्हारे समीप आती जाएगी, तुम भाग जाना चाहोगे। तुम उसी समय की तरह भागोगे, जैसे तुम यहूदा के राजा उज्जिय्याह के समय में भुक्मप से भागे थे। किन्तु यहोवा, मेरा परमेश्वर आएगा और उनके सभी पवित्र लोग उनके साथ होंगे। {14:6} वह एक बहुत अधिक विशेष दिन होगा। उस दिन प्रकाश, शीत और तुषार कुछ नहीं होगा। केवल यहोवा ही जानता हैं कि {14:7} यह कैसे होगा, किन्तु कोई दिन — रात नहीं होंगे। तब जब सामान्य रूप से अंधेरा आएगा, तो उस समय उजाला भी होगा। {14:8} उस समय, यरूशलेम से लगातार पानी बहेगा। वह धारा बट जाएंगी और एक भाग पूर्व को बहेगा और एक भाग पश्चिम को भूमध्य सागर तक जाएगा और यह पूरे वर्ष ग्रीष्म और शीत ऋतु दोनों में बहेगा {14:9} और यहोवा उस समय, पूरे संसार के राजा होगा। यहोवा एक है। उसका नाम एक है। {14:10} उस समय यरूशलेम के चारों ओर का क्षेत्र अराबा मरूभूमि की तरह सूना हो जाएगा। गेब से लेकर नेगब में रिम्मोन तक देश मरूभूमि सा हो जाएगा। किन्तु यरूशलेम का पूरा नगर फिर से, बिन्यामीन द्वार से प्रथम द्वार (अर्थात् कोने का द्वार) और हननेल की मीनार से राजा के दाखमधु निष्कासक तक बनेगा। {14:11} प्रतिबन्ध उठ जाएगा और लोग वहाँ अपने घर बनायेंगे। यरूशलेम सुरक्षित होगा। {14:12} किन्तु यहोवा उन राष्ट्रों को दण्ड देगा जो यरूशलेम के विरूद्ध लड़े । वह उन्हें भयन्कर बीमारी लगा देगा। खड़े खड़े उनका शरीर गल जयेगा।उनकी आँखें उनके कोटर में गलेंगी।तथा उनकी जीभ उनके मुखों में गलेगी। {14:13} वह भयंकर बीमारी शत्रुओं के डेरे में होगा और उनके घोड़ों, खच्चरों, ऊँटों और गधों को वह भयंकर बीमारी लग जाएगी। उस समय वे {14:14} लोग, सचमुच, यहोवा से डरेंगे। वे एक दुसरे का गला दबायेंगे। वे एक दुसरे पर प्रहार करने के लिये हाथ उठाएंगे। यहूदा के लोग {14:15} यरूशलेम में युद्ध करेंगे, किन्तु वे नगर के चारों ओर के राष्ट्रों से धन प्राप्त करेंगे। वे बहुत अधिक सोना, चाँदी, और वस्त्र प्राप्त करेंगे। {14:16} कुछ लोग जो यरूशलेम में युद्ध करने आएंगे। वे बच जाएंगे और हर वर्ष वे राजा, सर्वशक्तिमान यहोवा की उपासना को आएंगे। वे झोंपड़ीयों का पर्व मनाने आएंगे {14:17} औक यदि पृथ्वी के किसी परिवार के लाग राजा, सर्वशक्तिमान यहोवा की उपासना करने यरूशलेम नहीं जाएंगे तो यहोवा उन्हें वर्षा से वंचित कर देगा। {14:18} यदि मिस्र का कोई परिवार बटोरने का पर्व मनाने नहीं आएगा, ता उसे वही भयंकर बीमारी होगी, जो यहोवा ने अन्य शत्रु राष्ट्रों को लगा दी थी। {14:19} वह मिस्र के लिये तथा किसी भी राष्ट्र के लिये दण्ड होगा, जो बटोरने का पर्व मनाने नहीं आएगा। {14:20} उस समय, हर एक चीज परमेश्वर का होगा। यहाँ तक कि घोड़े के कक्षबन्ध पर भी यहोवा का पवित्र नामक सूचक होगा और यहोवा के मंदिर उपयोग में आने वाली सभी बर्तन वैसे ही महत्वपूर्ण होंगे, जैसे वेदी पर उपयोग में आने वाला प्याला। {14:21} वस्तुत:, यहूदा और यरूश्लेम की हर एक तशतरी पर सर्वशक्तिमान यहोवा को पवित्र नामक सुचक होगा। और हर एक व्यक्ति जो यहोवा की उपासना करेगा, उन तश्तरियों में भोजन पकाने और भोजन करने का अधिकारी होगा। और उस समय, सर्वशक्तिमान यहोवा के मंदिर में वस्तुएं क्रय — विक्रय करने वाला कोई व्यापारी नहीं होगा।