{1:1} आदम, शेत, एनोश; {1:2} केनान, महललेल, येरेद; {1:3} हनोक, मतूशेलह, लेमेक; {1:4} नूह, शेम, हाम और येपेत। {1:5} येपेत के पुत्र: गोमेर, मागोग, मादै, यावान, तूबल, मेशेक और तीरास हैं। {1:6} और गोमेर के पुत्र: अशकनज, दीपत और तोगर्मा हैं। {1:7} और यावान के पुत्र: एलीशा, तशींश, और कित्ती और रोदानी लोग हैं। {1:8} हाम के पुत्र: कुश, मिस्र, पूत और कनान हैं। {1:9} और कूश के पुत्र: सबा, हबीला, सबाता, रामा और सब्तका हैं; और रामा के पुत्र: शबा और ददान हैं। {1:10} और कूश से निम्रोद उत्पन्न हुआ; पृय्वी पर पहिला वीर वही हुआ। {1:11} और मिस्र से लूदी, अनामी, लहावी, नप्तही। {1:12} पत्रूसी, कसलूही ( वहां से पलिश्ती निकले ) और कप्तोरी उत्पन्न हुए। {1:13} कनान से उसका जेठा सीदोन और हित्त। {1:14} और यबूसी, एमोरी, गिर्गाशी। {1:15} हिव्वी, अर्की, सीनी। {1:16} अर्वदी, समारी और हमाती उत्पन्न हुए। {1:17} शेम के पुत्र: एलाम, अश्शूर, अर्पक्षद, लूद, अराम, ऊस, हूल, गेतेर और मेशेक हैं। {1:18} और अर्पक्षद से शेलह और शेलह से एबेर उत्पन्न हुआ। {1:19} और एबेर के दो पुत्र उत्पन्न हुए: एक का नाम पेलेग इस कारण रखा गया कि उसके दिनों में पृथ्वी बांटी गई; और उसके भाई का नाम योक्तान था। {1:20} और योक्तान से अल्मोदाद, शुलेप, हसर्मावेत, येरह। {1:21} हदोराम, ऊजाल, दिक्ला। {1:22} एबाल, अबीमाएल, शबा, {1:23} ओपीर, हवीला और सोबाब उत्पन्न हुए; ये ही सब योक्तान के पुत्र हैं। {1:24} शेम, अर्पक्षद, शेलह। {1:25} एबेर, पेलेग, रू। {1:26} सरूग, नाहोर, तेरह, {1:27} अब्राम, वही इब्राहीम भी कहलाता है। {1:28} इब्राहीम के पुत्र इसहाक और इश्माएल हैं। {1:29} इनकी वंशावलियां ये हैं। इश्माएल का जेठा नवायोत, फिर केदार, अदवेल, मिबसाम। {1:30} मिश्मा, दूमा, मस्सा, हदद, तेमा। {1:31} यतूर, नापीश, केदमा। ये इश्माएल के पुत्र हुए। {1:32} फिर कतूरा जो इब्राहीम की रखेली थी, उसके ये पुत्र उत्पन्न हुए, अर्थात उस से जिम्रान, योक्षान, मदान, मिद्यान, यिशबाक और शूह उत्पन्न हुए। योक्षान के पुत्र: शबा और ददान। {1:33} और मिद्यान के पुत्र: एपा, एपेर, हनोक, अबीदा और एलदा, ये सब कतूरा के पुत्र हैं। {1:34} इब्राहीम से इसहाक उत्पन्न हुआ। इसहाक के पुत्र: ऐसाव और इस्राएल। {1:35} ऐसाव के पुत्र: एलीपज, रूएल, यूश, यालाम और कोरह हैं। {1:36} एलीपज के ये पुत्र हैं: तेमान, ओमार, सपी, गाताम, कनज, तिम्ना और अमालेक। {1:37} रूएल के पुत्र: नहत, जेरह, शम्मा और मिज्जा। {1:38} फिर सेईर के पुत्र: लोतान, शोबाल, सिबोन, अना, दीशोन, एसेर और दीशान हैं। {1:39} और लोतान के पुत्र: होरी और होमाम, और लोतान की बहिन तिम्ना थी। {1:40} शोबाल के पुत्र: अल्यान, मानहत, एबाल, शपी और ओनाम। {1:41} और सिबोन के पुत्र: अय्या, और अना। अना का पुत्र: दीशोन। और दीशोन के पुत्र: हम्रान, एशबान, यित्रान और करान। {1:42} एसेर के पुत्र बिल्हान, जाचान और याकान। और दीशान के पुत्र: ऊस और अरान हैं। {1:43} जब किसी राजा ने इस्राएलियों पर राज्य न किया था, तब एदोम के देश में ये राजा हुए: अर्थात बोर का पुत्र बेला और उसकी राजधानी का नाम दिन्हाबा था। {1:44} बेला के मरने पर, बोस्राई जेरह का पुत्र योबाब, उसके स्थान पर राजा हुआ। {1:45} और योबाब के मरने पर, तेमानियों के देश का हूशाम उसके स्थान पर राजा हुआ। {1:46} फिर हूशाम के मरने पर, बदद का पुत्र हदद, उसके स्थान पर राजा हुआ: यह वही है, जिसने मिद्यानियों को मोआब के देश में मार लिया; और उसकी राजधानी का नाम अबीत था। {1:47} और हदद के मरने पर, मस्रेकाई सम्ला उसके स्थान पर राजा हुआ। {1:48} फिर सम्ला के मरने पर शाऊल, जो महानद के तट पर के रहोबोत नगर का था, वह उसके स्थान पर राजा हुआ। {1:49} और शाऊल के मरने पर अकबोर का पुत्र बाल्हानान उसके स्थान पर राजा हुआ। {1:50} और बल्हानान के मरने पर, हदद उसके स्थान पर राजा हुआ; और उसकी राजधानी का नाम पाई था। और उसकी पत्नी का नाम महेतबेल था जो मेज़ाहाब की नातिनी और मत्रेद की बेटी थी। और हदद मर गया। {1:51} फिर एदोम के अधिपति ये थे: अर्थात अधिपति तिम्ना, अधिपति अल्या, अधिपति यतेत, अधिपति ओहोलीवामा, {1:52} अधिपति एला, अधिपति पीनोन, अधिपति कनज, {1:53} अधिपति तेमान, अधिपति मिबसार, अधिपति मग्दीएल, अधिपति ईराम। {1:54} एदोम के ये अधिपति हुए। {2:1} इस्राएल के ये पुत्र हुए; रूबेन, शिमोन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, जबूलून, दान। {2:2} यूसुफ, बिन्यामीन, नप्ताली, गाद और आशेर। {2:3} यहूदा के ये पुत्र हुए: एर, ओनान और शेला, उसके ये तीनों पुत्र, बतशू नाम एक कनानी स्त्री से उत्पन्न हुए। और यहूदा का जेठा एर, यहोवा की दृष्टि में बुरा था, इस कारण उसने उसको मार डाला। {2:4} यहूदा की बहू तामार से पेरेस और जेरह उत्पन्न हुए। यहूदा के सब पुत्र पांच हुए। {2:5} पेरेस के पुत्र: हेस्रोन और हामूल। {2:6} और जेरेह के पुत्र: जिम्री, एतान, हेमान, कलकोल और दारा सब मिल कर पांच। {2:7} फिर कमीं का पुत्र: आकान जो अर्पण की हुई पस्तु के विषय में विश्वासघात कर के इस्राएलियों का कष्ट देने वाला हुआ। {2:8} और एतान का पुत्र: अजर्याह। {2:9} हेस्रोन के जो पुत्र उत्पन्न हुए: यरह्मेल, राम और कलूबै। {2:10} और राम से अम्मीनादाब और अम्मीनादाब से नहशोन उत्पन्न हुआ जो यहूदियों का प्रधान बना। {2:11} और नहशोन से सल्मा और सल्मा से बोअज, {2:12} और बोअज से ओबेद और ओबेद से यिशै उत्पन्न हुआ। {2:13} और यिशै से उसका जेठा एलीआब और दूसरा अबीनादाब तीसरा शिमा। {2:14} चौथा नतनेल और पांचवां रद्दैं। छठा ओसेम और सातवां दाऊद उत्पन्न हुआ। {2:15} इनकी बहिनें सरूयाह ओर अबीगैल थीं। {2:16} और सरूयाह के पुत्र अबीशै, योआब और असाहेल थे तीन थे। {2:17} और अबीगैल से अमासा उत्पन्न हुआ, और अमासा का पिता इश्माएली येतेर था। {2:18} हेस्रोन के पुत्र कालेब के अजूबा नाम एक स्त्री से, और यरीओत से, बेटे उत्पन्न हुए; और इसके पुत्र ये हुए अर्थात येशेर, शेबाब और अर्दोन। {2:19} जब अजूबा मर गई, सब कालेब ने एप्रात को ब्याह लिया; और जिससे हूर उत्पन्न हुआ। {2:20} और हूर से ऊरी और ऊरी से बसलेल उत्पन्न हुआ। {2:21} इसके बाद हेस्रोन गिलाद के पिता माकीर की बेटी के पास गया, जिसे उसने तब ब्याह लिया, जब वह साठ वर्ष का था; और उस से सगूब उत्पन्न हुआ। {2:22} और सगूब से याईर जन्मा, जिसके गिलाद देश में तेईस नगर थे। {2:23} और गशूर और अराम ने याईर की बस्तियों को और गांवों समेत कनत को, उन से ले लिया; ये सब नगर मिलकर साठ थे। ये सब गिलाद के पिता माकीर के पुत्र हुए। {2:24} और जब हेस्रोन कालेबेप्राता में मर गया, तब उसकी अबिय्याह नाम स्त्री से अशहूर उत्पन्न हुआ जो तको का पिता हुआ। {2:25} और हेस्रोन के जेठे यरह्मेल के थे पुत्र हुए: अर्थात राम जो उसका जेठा था; और बूना, ओरेन, ओसेम और यहिय्याह। {2:26} और यरह्मेल की एक और पत्नी थी, जिसका नाम अतारा था; वह ओनाम की माता थी। {2:27} और यरह्मेल के जेठे राम के ये पुत्र हुए, अर्थात मास, यामीन और एकेर। {2:28} और ओनाम के पुत्र शम्मै और यादा हुए। और शम्मै के पुत्र नादाब और अबीशूर हुए। {2:29} और अबीशूर की पत्नी का नाम अबीहैल था, और उस से अहबान और मोलीद उत्पन्न हुए। {2:30} और नादाब के पुत्र सेलेद और अत्पैम हुए; सेलेद तो नि: सन्तान मर गया। और अप्पैम का पुत्र यिशी। {2:31} और यिशी का पुत्र शेशान और शेशान का पुत्र: अहलै। {2:32} फिर शम्मै के भाई यादा के पुत्र: येतेर और योनातान हुए; येतेर तो नि: सन्तान मर गया। {2:33} योनातान के पुत्र पेलेत और जाजा; यरह्मेल के पुत्र ये हुए। {2:34} शेशान के तो बेटा न हुआ, केवल बेटियां हुई। शेशान के पास यर्हा नाम एक मिस्री दास था। {2:35} और शेशान ने उसको अपनी बेटी ब्याह दी, और उस से अत्तै उत्पन्न हुआ। {2:36} और अत्तै से नातान, नातान से जाबाद। {2:37} जाबाद से एपलाल, एपलाल से ओबेद। {2:38} ओबेद से येहू, येहू से अजर्याह। {2:39} अजर्याह से हेलैस, हेलैस से एलासा। {2:40} एलासा से सिस्मै, सिस्मै से शल्लूम। {2:41} शल्लूम से यकम्याह और यकम्याह से एलीशामा उत्पन्न हुए। {2:42} फिर यरह्मेल के भाई कालेब के ये पुत्र हुए: अर्थात उसका जेठा मेशा जो जीप का पिता हुआ। और मारेशा का पुत्र हेब्रोन भी उसी के वंश में हुआ। {2:43} और हेब्रोन के पुत्र कोरह, तप्पूह, रेकेम और शेमा। {2:44} और शेमा से योर्काम का पिता रहम और रेकेम से शम्मै उत्पन्न हुआ था। {2:45} और शम्मै का पुत्र माओन हुआ; और माओन बेत्सूर का पिता हुआ। {2:46} फिर एपा जो कालेब की रखेली थी, उस से हारान, मोसा और गाजेज उत्पन्न हुए; और हारान से गाजेज उत्पन्न हुआ। {2:47} फिर याहदै के पुत्र रेगेम, योताम, गेशान, पेलेत, एपा और शाप। {2:48} और माका जो कालेब की रखेली थी, उस से शेबेर और तिर्हाना उत्पन्न हुए। {2:49} फिर उस से मदमन्ना का पिता शाप और मकबेना और गिबा का पिता शबा उत्पन्न हुए। और कालेब की बेटी अकसा थी। कालेब के पुत्र ये हुए। {2:50} एप्राता के जेठे हूर का पुत्र किर्यत्यारीम का पिता शोबाल। {2:51} बेतलेहेम का पिता सल्मा और बेतगादेर का पिता हारेप। {2:52} और किर्यत्यारीम के पिता शोबाल के वंश में हारोए आधे मनुहोतवासी, {2:53} और किर्यत्यारीम के कुल अर्थात यित्री, पूती, शूमाती और मिश्राई और इन से सोराई और एश्ताओली निकले। {2:54} फिर सल्मा के वंश में बेतलेहेम और नतोपाई, अत्रोतबेत्योआब और आधे मानहती, सोरी। {2:55} फिर याबेस में रहने वाले लेखकों के कुल अर्थात तिराती, शिमाती और सूकाती हुए। ये रेकाब के घराने के मूलपुरुष हम्मन के वंश वाले केनी हैं। {3:1} दाऊद के पुत्र जो हेब्रोन में उस से उत्पन्न हुए वे ये हैं: जेठा अम्नोन जो यिज्रेली अहीनोआम से, दूसरा दानिय्येल जो कर्मेली अबीगैल से उत्पन्न हुआ। {3:2} तीसरा अबशालोम जो गशूर के राजा तल्मै की बेटी माका का पुत्र था, चौथा ओदानिय्याह जो हरगीत का पुत्र था। {3:3} पांचवां शपत्याह जो अबीतल से, और छठवां यित्राम जो उसकी स्त्री एग्ला से उत्पन्न हुआ। {3:4} दाऊद से हेब्रोन में छ: पुत्र उत्पन्न हुए, और वहां उसने साढ़े सात वर्ष राज्य किया; और यरूशलेम में तैंतीस वर्ष राज्य किया। {3:5} और यरूशलेम में उसके ये पुत्र उत्पन्न हुए अर्थात शिमा, शोबाब, नातान और सुलैमान, ये चारों अम्मीएल की बेटी बतशू से उत्पन्न हुए। {3:6} और यिभार, एलीशामा एलीपेलेत। {3:7} नेगाह, नेपेग, यापी। {3:8} एलीशामा, एल्यादा और एलीमेलेत, ये नौ पुत्र थे, ये सब दाऊद के पुत्र थे। {3:9} और इन को छोड़ रखेलियों के भी पुत्र थे, और इनकी बहिन तामार थी। {3:10} फिर सुलैमान का पुत्र रहबाम उत्पन्न हुआ; रहबाम का अबिय्याह का आसा, आसा का यहोशापात। {3:11} यहोशपात का योराम, योराम का अहज्याह, अहज्याह का योआश। {3:12} योआश का अमस्याह, अमस्याह का अजर्याह, अजर्याह का योताम। {3:13} योताम का आहाज, आहाज का हिजकिय्याह, हिजकिय्याह का मनश्शे। {3:14} मनश्शे का आमोन, और आमोन का योशिय्याह पुत्र हुआ। {3:15} और योशिय्याह के पुत्र उसका जेठा योहानान, दूसरा यहोयाकीम; तीसरा सिदकिय्याह, चौथा शल्लूम। {3:16} और यहोयाकीम का पुत्र यकोन्याह, इसका पुत्र सिदकिय्याह। {3:17} ओर यकोन्याह का पुत्र अस्सीर, उसका पुत्र शालतीएल। {3:18} और मल्कीराम, पदायाह, शेनस्सर, यकम्याह, होशामा और नदब्याह। {3:19} और पदायाह के पुत्र जरुब्बाबेल और शिमी हुए; और जरुब्बाबेल के पुत्र मशुल्लाम और हनन्याह, जिनकी बहीन शलोमीत थी। {3:20} और हशूबा, ओहेल, बेरेक्याह, हसद्याह और यूशमेसेद, पांच। {3:21} और हनन्याह के पुत्र पलत्याह और यशायाह। और रपायाह के पुत्र अर्नान के पुत्र ओबद्याह के पुत्र और शकन्याह के पुत्र। {3:22} और तकन्याह का पुत्र शमायाह। और शमायाह के पुत्र हत्तूश और यिगाल, बारीह, नार्याह और शपात, छ:। {3:23} और नार्याह के पुत्र एल्योएनै, हिजकिय्याह और अज्रीकाम, तीन। {3:24} और एल्योएनै के पुत्र होदब्याह, एल्याशीब, पलायाह, अककूब, योहानान, दलायाह और अनानी, सात। {4:1} यहूदा के पुत्र: पेरेस, हेस्रोन, कमीं, हूर और शोबाल। {4:2} और शोबाल के पुत्र: रायाह से यहत और यहत से अहूमै और लहद उत्पन्न हुए, ये सोराई कुल हैं। {4:3} और एताम के पिता के ये पुत्र हुए: अर्थात यिज्रेल, यिश्मा और यिद्वाश, जिनकी बहिन का नाम हस्सलेलपोनी था। {4:4} और गदोर का पिता पनूएल, और रूशा का पिता एजेर। ये एप्राता के जेठे हूर के सन्तान हैं, जो बेतलेहेम का पिता हुआ। {4:5} और तको के पिता अशहूर के हेबा और नारा नाम दो स्त्रियां थीं। {4:6} और नारा से अहुज्जाम, हेपेर, तेमनी और हाहशतारी उत्पन्न हुए, नारा के ये ही पुत्र, हुए। {4:7} और हेला के पुत्र, सेरेत, यिसहर और एम्नान। {4:8} फिर कोस से आनूब और सोबेबा उत्पन्न हुए और उसके वंश में हारून के पुत्र अहर्हेल के कुल भी उत्पन्न हुए। {4:9} और याबेस अपने भाइयों से अधिक प्रतिष्ठित हुआ, और उसकी माता ने यह कहकर उसका नाम याबेस रखा, कि मैं ने इसे पीड़ित हो कर उत्पन्न किया। {4:10} और याबेस ने इस्राएल के परमेश्वर को यह कह कर पुकारा, कि भला होता, कि तू मुझे सचमुच आशीष देता, और मेरा देश बढाता, और तेरा हाथ मेरे साथ रहता, और तू मुझे बुराई से ऐसा बचा रखता कि मैं उस से पीड़ित न होता! और जो कुछ उसने मांगा, वह परमेश्वर ने उसे दिया। {4:11} फिर शूहा के भाई कलूब से एशतोन का पिता महीर उत्पन्न हुआ। {4:12} और एशतोन के वंश में रामा का घराना, और पासेह और ईर्नाहाश का पिता तहिन्ना उत्पन्न हुए, रेका के लोग ये ही हैं। {4:13} और कनज के पुत्र, ओत्नीएल और सरायाह, और ओत्नीएल का पुत्र हतत। {4:14} मोनोतै से ओप्रा और सरायाह से योआब जो गेहराशीम का पिता हुआ; वे कारीगर थे। {4:15} और यपुन्ने के पुत्र कालेब के पुत्र एला और नाम, और एला के पुत्र कनज। {4:16} और यहल्लेल के पुत्र, जीप, जीपा, तीरया और असरेल। {4:17} और एज्रा के पुत्र येतेर, मेरेद, एपेर और यालोन, और उसकी स्त्री से मिर्य्याम, शम्मै और एशतमो का पिता यिशबह उत्पन्न हुए। {4:18} और उसकी यहूदिन स्त्री से गदोर का पिता येरेद, सोको के पिता हेबेर और जानोह के पिता यकूतीएल उत्पन्न हुए, ये फ़िरौन की बेटी बित्या के पुत्र थे जिसे मेरेद ने ब्याह लिया था। {4:19} और होदिय्याह की स्त्री जो नहम की बहिन थी, उसके पुत्र कीला का पिता एक गेरेमी और एशतमो का पिता एक माकाई। {4:20} और शीमोन के पुत्र अम्नोन, रिन्ना, बेन्हानान और तोलोन और यिशी के पुत्र जोहेत और बेनजोहेत। {4:21} यहूदा के पुत्र शेला के पुत्र लेका का पिता एर, मारेशा का पिता लादा और अशबे के घराने के कुल जिस में सन के कपड़े का काम होता था। {4:22} और योकीम और कोर्जबा के मनुष्य और योआश और साराप जो मोआब में प्रभुता करते थे और याशूब, लेहेम इनका वृत्तान्त प्राचीन है। {4:23} ये कुम्हार थे, और नताईम और गदेरा में रहते थे जहां वे राजा का कामकाज करते हुए उसके पास रहते थे। {4:24} शिमोन के पुत्र नमूएल, यामीन, यारीब, जेरह और शाऊल। {4:25} और शाऊल का पुत्र शल्लूम, शल्लूम का पुत्र मिबसाम और मिबसाम का मिश्मा हुआ। {4:26} और मिश्मा का पुत्र हम्मूएल, उसका पुत्र जक्कूर, और उसका पुत्र शिमी। {4:27} शिमी के सोलह बेटे और छ: बेटियां हुई परन्तु उसके भाइयों के बहुत बेटे न हुए; और उनका सारा कुल यहूदियों के बराबर न बढ़ा। {4:28} वे बेर्शबा, मोलादा, हसर्शूआल। {4:29} बिल्हा, एसेम, तोलाद। {4:30} बतूएल, होर्मा, सिल्कग, {4:31} बेतमर्काबोत, हसर्सूसीम, बेतबिरी और शारैम में बस गए; दाऊद के राजय के समय तक उनके ये ही नगर रहे। {4:32} और उनके गांव एताम, ऐन, रिम्मोन, तोकेन और आशान नाम पांच नगर। {4:33} और बाल तक जितने गांव इन नगरों के आसपास थे, उनके बसने के स्थान ये ही थे, और यह उनकी वंशावली हैं। {4:34} फिर मशोबाब और यम्लेक और अपस्याह का पुत्र योशा। {4:35} और योएल और योशिब्याह का पुत्र येहू, जो सरायाह का पोता, और असीएल का परपोता था। {4:36} और एल्योएनै और याकोबा, यशोहायाह और असायाह और अदीएल और यसीमीएल और बनायाह। {4:37} और शिपी का पुत्र ज़ीज़ा जो अल्लोन का पुत्र, यह यदायाह का पुत्र, यह शिम्री का पुत्र, यह शमायाह का पुत्र था। {4:38} ये जिनके नाम लिखे हुए हैं, अपने अपने कुल में प्रधान थे; और उनके पितरों के घराने बहुत बढ़ गए। {4:39} ये अपनी भेड़-बकरियों के लिये चराई ढूंढ़ने को गदोर की घाटी की तराई की पूर्व ओर तक गए। {4:40} और उन को उत्तम से उत्तम चराई मिली, और देश लम्बा-चौड़ा, चैन और शांति का था; क्योंकि वहां के पहिले रहने वाले हाम के वंश के थे। {4:41} और जिनके नाम ऊपर लिखे हैं, उन्होंने यहूदा के राजा हिजकिय्याह के दिनों में वहां आकर जो मूनी वहां मिले, उन को डेरों समेत मार कर ऐसा सत्यानाश कर डाला कि आज तक उनका पता नहीं है, और वे उनके स्थान में रहने लगे, क्योंकि वहां उनकी भेड़-बकरियों के लिये चराई थी। {4:42} और उन में से अर्थात शिमोनियों में से पांच सौ पुरुष अपने ऊपर पलत्याह, नार्याह, रपायाह और उज्जीएल नाम यिशी के पुत्रों को अपने प्रधान ठहराया; {4:43} तब वे सेईद पहाड़ को गए, और जो अमेलेकी बच कर रह गए थे उन को मारा, और आज के दिन तब वहां रहते हैं। {5:1} इस्राएल का जेठा तो रूबेन था, परन्तु उसने जो अपने पिता के बिछौने को अशुद्ध किया, इस कारण जेठे का अधिकार इस्राएल के पुत्र यूसुफ के पुत्रों को दिया गया। वंशावली जेठे के अधिकार के अनुसार नहीं ठहरी। {5:2} क्योकि यहूदा अपने भाइयों पर प्रबल हो गया, और प्रधान उसके वंश से हुआ परन्तु जेठे का अधिकार यूसुफ का था। {5:3} इस्राएल के जेठे पुत्र रूबेन के पुत्र ये हुए, अर्थात हनोक, पल्लू, हेस्रोन और कमीं। {5:4} और योएल के पुत्र शमायाह, शमायाह का गोग, गोग का शिमी। {5:5} शिमी का मीका, मीका का रायाह, रायाह का बाल। {5:6} और बाल का पुत्र बेरा, इस को अश्शूर का राजा तिलगतपिलनेसेर बन्धुआई में ले गया; और वह रूबेनियो का प्रधान था। {5:7} और उसके भाइयों की वंशवली के लिखते समय वे अपने अपने कुल के अनुसार ये ठहरे, अर्थात मुख्य तो यीएल, फिर जकर्याह। {5:8} और अजाज का पुत्र बेला जो शेमा का पोता और योएल का परपोता था, वह अरोएर में और नबो और बाल्मोन तक रहता था। {5:9} और पूर्व ओर वह उस जंगल के सिवाने तक रहा जो परात महानद तक महुंचाता है, क्योंकि उनके पशु गिलाद देश में बढ़ गए थे। {5:10} और शऊल के दिनों में उन्होंने हग्रियों से युद्ध किया, और हग्री उनके हाथ से मारे गए; तब वे गिलाद की सारी पूरबी अलंग में अपने डेरों में रहने लगे। {5:11} गादी उनके साम्हने सल्का तक बाशान देश में रहते थे। {5:12} अर्थात मुख्य तो योएल और दूसरा शापाम फिर यानै और शापात, ये बाशान में रहते थे। {5:13} और उनके भाई अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार मीकाएल, मशुल्लाम, शेबा, योरै, याकान, जी और एबेर, सात थे। {5:14} ये अबीहैल के पुत्र थे, जो हूरी का पुत्र था, यह योराह का पुत्र, यह गिलाद का पुत्र, यह मिकाएल का पुत्र, यह यशीशै का पुत्र, यह यहदो का पुत्र, यह बूज का पुत्र था। {5:15} इनके पितरों के घरानों का मुख्य पूरुष अब्दीएल का पुत्र, और गूनी का पोता अही था। {5:16} ये लोग बाशान में, गिलाद और उसके गांवों में, और शारोन की सब चराइयों में उसकी परली ओर तक रहते थे। {5:17} इन सभों की वंशावली यहूदा के राजा योनातन के दिनों और इस्राएल के राजा यारोबाम के दिनों में लिखी गई। {5:18} रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र के योद्धा जो ढाल बान्धने, तलवार चलाने, और धनुष के तीर छोड़ने के योग्य और युद्ध करना सीखे हुए थे, वे चौवालीस हजार सात सौ साठ थे, जो युद्ध में जाने के योग्य थे। {5:19} इन्होंने हग्रियों और यतूर नापीश और नोदाब से युद्ध किया था। {5:20} उनके विरुद्ध इन को सहायता मिली, और अग्री उन सब समेत जो उनके साथ थे उनके हाथ में कर दिए गए, क्योंकि युद्ध में इन्होंने परमेश्वर की दोहाई दी थी और उसने उनकी बिनती इस कारण सुनी, कि इन्होंने उस पर भरोसा रखा था। {5:21} और इन्होंने उनके पशु हर लिए, अर्थात ऊंट तो पचास हजार, भेड़-बकरी अढ़ाई लाख, गदहे दो हजार, और मनुष्य एक लाख बन्धुए कर के ले गए। {5:22} और बहुत से मरे पड़े थे क्योंकि वह लड़ाई परमेश्वर की ओर से हुई। और ये उनके स्थान में बन्धुआई के समय तक बसे रहे। {5:23} फिर मनश्शे के आधे गोत्र की सन्तान उस देश में बसे, और वे बाशान से ले बाल्हेर्मोन, और सनीर और हेर्मोन पर्वत तक फैल गए। {5:24} और उनके पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष ये थे, अर्थात एपेर, यिशी, एलीएल, अज्रीएल, यिर्मयाह, होदय्याह और यहदीएल, ये बड़े वीर और नामी और अपने पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष थे। {5:25} और उन्होंने अपने पितरों के परमेश्वर से विश्वासघात किया, और उस देश के लोग जिन को परमेश्वर ने उनके साम्हने से विनाश किया था, उनके देवताओं के पीछे व्यभिचारिन की नाईं हो लिए। {5:26} इसलिये इस्राएल के परमेश्वर ने अश्शूर के राजा पूल और अश्शूर के राजा तिलगत्पिलनेसेर का मन उभारा, और इन्होंने उन्हें अर्थात रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगों को बन्धुआ कर के हलह, हाबोर और हारा और गोजान नदी के पास पहुंचा दिया; और वे आज के दिन तक वहीं रहते हैं। {6:1} लेवी के पुत्र गेर्शोन, कहात और मरारी। {6:2} और कहात के पुत्र, अम्राम, यिसहार, हेब्रोन और उज्जीएल। {6:3} और अम्राम की सन्तान हारून, मूसा और मरियम, और हारून के पुत्र, नादाब, अबीहू, एलीआज़र और ईतामार। {6:4} एलीआज़र से पीनहास, पीनहास से अबीशू। {6:5} अबीशू से बुक्की, बुक्की से उज्जी। {6:6} उज्जी से जरह्याह, जरह्याह से मरायोत। {6:7} मरायोत से अमर्याह, अमर्याह से अहीतूब। {6:8} अहीतूब से सादोक, सादोक से अहीमास। {6:9} अहीमास से अजर्याह, अजर्याह से योहानान। {6:10} और योहानान से अजर्याह, उत्पन्न हुआ ( जो सुलैमान के यरूशलेम में बनाए हुए भवन में याजक का काम करता था ) {6:11} फिर अजर्याह से अमर्याह, अमर्याह से यहीतूब। {6:12} यहीतूब से सादोक, सादोक से शल्लूम। {6:13} शल्लूम से हिलकिय्याह, हिलकिय्याह से अजर्याह। {6:14} अजर्याह से सरायाह, और सरायाह से यहोसादाक उत्पन्न हुआ। {6:15} और जब यहोवा, यहूदा और यरूशलेम को नबूकदनेस्सर के द्वारा बन्धुआ कर के ले गया, तब यहोसादाक भी बन्धुआ हो कर गया। {6:16} लेवी के पुत्र गेर्शोम, कहात और मरारी। {6:17} और गेर्शोम के पुत्रों के नाम ये थे, अर्थात लिब्नी और शिमी। {6:18} और कहात के पुत्र अम्राम, यिसहार, हेब्रोन और उज्जीएल। {6:19} और मरारी के पुत्र महली और मूशी और अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार लेवियों के कुल ये हुए। {6:20} अर्थात, गेर्शोन का पुत्र लिब्नी हुआ, लिब्नी का यहत, यहत का जिम्मा। {6:21} जिम्मा का योआह, योआह का इद्दो, इद्दो का जेरह, और जेरह का पुत्र यातरै हुआ। {6:22} फिर कहात का पुत्र अम्मीनादाब हुआ, अम्मीनादाब का कोरह, कोरह का अस्सीर। {6:23} अस्सीर का एल्काना, एल्काना का एब्यासाप, एब्यासाप का अस्सीर। {6:24} अस्सीर का तहत, तहत का ऊरीएल, ऊरीएल का उज्जिय्याह और उज्जिय्याह का पुत्र शाऊल हुआ। {6:25} फिर एल्काना के पुत्र अमासै और अहीमोत। {6:26} एल्काना का पुत्र सोपै, सोपै का नहत। {6:27} नहत का एलीआब, एलीआब का यरोहाम, और यरोहाम का पुत्र एल्काना हुआ। {6:28} और शमूएल के पुत्र, उसका जेठा योएल और दूसरा अबिय्याह हुआ। {6:29} फिर मरारी का पुत्र महली, महली का लिब्नी, लिब्नी का शिमी, शिमी का उज्जा। {6:30} उज्जा का शिमा; शिमा का हग्गिय्याह और हग्गिय्याह का पुत्र असायाह हुआ। {6:31} फिर जिन को दाऊद ने सन्दूक के ठिकाना पाने के बाद यहोवा के भवन में गाने के अधिकारी ठहरा दिया वे ये हैं। {6:32} जब तक सुलैमान यरूशलेम में यहोवा के भवन को बनवा न चुका, तब तक वे मिलापवाले तम्बू के निवास के साम्हने गाने के द्वारा सेवा करते थे; और इस सेवा में नियम के अनुसार उपस्थित हुआ करते थे। {6:33} जो अपने अपने पुत्रों समेत उपस्थित हुआ करते थे वे ये हैं, अर्थात कहातियों में से हेमान गवैया जो योएल का पुत्र था, और योएल शमुएल का। {6:34} शमूएल एल्काना का, एल्काना यरोहाम का, यरोहाम एलीएल का, एलीएल तोह का। {6:35} तोह सूप का, सूप एल्काना का, एल्काना महत का, महत अमासै का। {6:36} अमासै एल्काना का, एल्काना योएल का, योएल अजर्याह का, अजर्याह सपन्याह का। {6:37} सपन्याह तहत का, तहत अस्सीर का, अस्सीर एब्यासाप का, एबयासाप कोरह का। {6:38} कोरह यिसहार का, यिसहार कहात का, कहात लेवी का और लेवी इस्राएल का पुत्र था। {6:39} और उसका भाई असाप जो उसके दाहिने खड़ा हुआ करता था वह बेरेक्याह का पुत्र था, और बेरेक्याह शिमा का। {6:40} शिमा मीकाएल का, मीकाएल बासेयाह का, बासेयाह मल्मिय्याह का। {6:41} मल्किय्याह एत्नी का, एत्नी जेरह का, जेरह अदायाह का। {6:42} अदायाह एतान का, एतान जिम्मा का, जिम्मा शिमी का। {6:43} शिमी यहत का, यहत गेर्शोम का, गेर्शोम लेवी का पुत्र था। {6:44} और बाईं ओर उनके भाई मरारी खड़े होते थे, अर्थात एताव जो कीशी का पुत्र था, और कीशी अब्दी का, अब्दी मल्लूक का। {6:45} मल्लूक हशब्याह का, हशब्याह अमस्याह का, अमस्याह हिलकिय्याह का। {6:46} हिलकिय्याह अमसी का, अमसी बानी का, बानी शेमेर का। {6:47} शेमेर महली का, महली मूशी का, मूशी मरारी का, और मरारी लेवी का पुत्र था। {6:48} और इनके भाई जो लेवीय थे वह परमेश्वर के भवन के निवास की सब प्रकार की सेवा के लिये अर्पण किए हुए थे। {6:49} परन्तु हारून और उसके पुत्र होमबलि की वेदी, और धूप की वेदी दोनों पर बलिदान चढ़ाते, और परम पवित्रस्थान का सब काम करते, और इस्राएलियों के लिये प्रायश्चित करते थे, जैसे कि परमेश्वर के दास मूसा ने आज्ञाएं दी थीं। {6:50} और हारून के वंश में ये हुए, अर्थात उसका पुत्र एलीआजर हुआ, और एलीआजर का पीनहास, पीनहास का अबीशू। {6:51} अबीशू का बुक्की, बुक्की का उज्जी, उज्जी का जरह्याह। {6:52} जरह्याह का मरायोत, मरायोत का अमर्याह, अमर्याह का अहीतूब। {6:53} अहीतूब का सादोक और सादोक का अहीमास पुत्र हुआ। {6:54} और उनके भागों में उनकी छावनियों के अनुसार उनकी बस्तियां ये हैं, अर्थात कहात के कुलों में से पहिली चिट्ठी जो हारून की सन्तान के नाम पर निकली। {6:55} अर्थात चारों ओर की चराइयों समेत यहूदा देश का हेब्रोन उन्हें मिला। {6:56} परन्तु उस नगर के खेत और गांव यपुन्ने के पुत्र कालेब को दिए गए। {6:57} और हारून की सन्तान को शरणनगर हेब्रोन, और चराइयों समेत लिब्ना, {6:58} और यत्तीर और अपनी अपनी चराइयों समेत एशतमो। हीलेन, दबीर। {6:59} आशान और बेतशेमेश। {6:60} और बिन्यामीन के गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत गेबा, अल्लेमेत और अनातोत दिए गए। उनके घरानों के सब नगर तेरह थे। {6:61} और शेष कहातियों के गोत्र के कुल, अर्थात मनश्शे के आधे गोत्र में से चिट्ठी डाल कर दस नगर दिए गए। {6:62} और गेर्शोमियों के कुलों के अनुसार उन्हें इस्साकार, आशेर और नप्ताली के गोत्र, और बाशान में रहने वाले मनश्शे के गोत्र में से तेरह नगर मिले। {6:63} मरारियों के कुलों के अनुसार उन्हें रूबेन, गाद और जबूलून के गोत्रें में से चिट्ठी डाल कर बारह नगर दिए गए। {6:64} और इस्राएलियों ने लेवियों को ये नगर चराइयों समेत दिए। {6:65} और उन्होंने यहूदियों, शिमोनियों और बिन्यामीनियों के गोत्रों में से वे नगर दिए, जिनके नाम ऊपर दिए गए हैं। {6:66} और कहातियों के कई कुलों को उनके भाग के नगर एप्रैम के गोत्र में से मिले। {6:67} सो उन को अपनी अपनी चराइयों समेत एप्रैम के पहाड़ी देश का शकेम जो शरण नगर था, फिर गेजेर। {6:68} योकमाम, बेथेरोन। {6:69} अय्यालोन और गत्रिम्मोन। {6:70} और मनश्शे के आधे गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत आनेर और बिलाम शेष कहातियों के कुल को मिले। {6:71} फिर गेर्शोमियों को मनश्शे के आधे गोत्र के कुल में से तो अपनी अपनी चराइयों समेत बाशान का गोलान और अशतारोत। {6:72} और इस्साकार के गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत केदेश, दाबरात। {6:73} रामोत और आनेम, {6:74} और आशेर के गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत माशाल, अब्दोन। {6:75} हूकोक और रहोब। {6:76} और नप्ताली के गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत गालील का केदेश हम्मोन और किर्यातैम मिले। {6:77} फिर शेष लेवियों अर्थात मरारियों को जबूलून के गोत्र में से तो अपनी अपनी चराइयों समेत शिम्मोन और ताबोर। {6:78} और यरीहो के पास की यरदन नदी की पूर्व और रूबेन के गोत्र में से तो अपनी अपनी चराइयों समेत जंगल का बेसेर, यहसा। {6:79} कदेमोत और मेपाता। {6:80} और गाद के गोत्र में से अपनी अपनी चराइयों समेत गिलाद का रामोत महनैम, {6:81} हेशोबोन और याजेर दिए गए। {7:1} इस्साकार के पुत्र तोला, पूआ, याशूब और शिम्रोन, चार थे। {7:2} और तोला के पुत्र उज्जी, रपायाह, यरीएल, यहमै, यिबसाम और शमूएल, ये अपने अपने पितरों के घरानों अर्थात तोला की सन्तान के मुख्य पुरुष और बड़े वीर थे, और दाऊद के दिनों में उनके वंश की गिनती बाईस हजार छ: सौ थी। {7:3} और उज्जी का पुत्र यिज्रह्याह, और यिज्रह्याह के पुत्र मीकाएल, ओबद्याह, योएल और यिश्शिय्यह पांच थे; ये सब मुख्य पुरुष थे। {7:4} और उनके साथ उनकी वंशावलियों और पितरों के घरानों के अनुसार सेना के दलों के छत्तीस हजार योद्धा थे; क्योंकि उनके बहुत स्त्रियां और पुत्र थे। {7:5} और उनके भाई जो इस्साकार के सब कुलों में से थे, वे सत्तासी हजार बड़े वीर थे, जो अपनी अपनी वंशावली के अनुसार गिने गए। {7:6} बिन्यामीन के पुत्र बेला, बेकेर और यदीएल ये तीन थे। {7:7} बेला के पुत्र: एसबोन, उज्जी, उज्जीएल, यरीमोत और ईरी ये पांच थे। ये अपने अपने पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष और बड़े वीर थे, और अपनी अपनी वंशावली के अनुसार उनकी गिनती बाईस हजार चौंतीस थी। {7:8} और बेकेर के पुत्र: जमीरा, योआश, बलीएजेर, एल्योएनै, ओम्री, यरेमोत, अबिय्याह, अनातोत और आलेमेत ये सब बेकेर के पुत्र थे। {7:9} ये जो अपने अपने पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष और बड़े वीर थे, इनके वंश की गिनती अपनी अपनी वंशावली के अनुसार बीस हजार दो सौ थी। {7:10} और यदीएल का पुत्र बिल्हान, और बिल्हान के पुत्र, यूश, बिन्यामीन, एहूद, कनाना, जेतान, तशींश और अहीशहर थे। {7:11} ये सब जो यदीएल की सन्तान और अपने अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष और बड़े वीर थे, इनके वंश से सेना में युद्ध करने के योग्य सत्रह हजार दो सौ पुरुष थे। {7:12} और ईर के पुत्र शुप्पीम और हुप्पीम और अहेर के पुत्र हूशी थे। {7:13} नप्ताली के पुत्र, एहसीएल, गूनी, येसेर और शल्लूम थे, ये बिल्हा के पोते थे। {7:14} मनश्शे के पुत्र, अस्रीएल जो उसकी अरामी रखेली स्त्री से उत्पन्न हुआ था; और उस अरामी स्त्री ने गिलाद के पिता माकीर को भी जन्म दिया। {7:15} और माकीर ( जिसकी बहिन का नाम माका था ) उसने हुप्पीम और शुप्पीम के लिये स्त्रियां ब्याह लीं, और दूसरे का नाम सलोफाद था, और सलोफाद के बेटियां हुईं। {7:16} फिर माकीर की स्त्री माका के एक पुत्र उत्पन्न हुआ और उसका नाम पेरेश रखा; और उसके भाई का नाम शेरेश था; और इसके पुत्र ऊलाम और राकेम थे। {7:17} और ऊलाम का पुत्र बदान। ये गिलाद की सन्तान थे जो माकीर का पुत्र और मनश्शे का पोता था। {7:18} फिर उसकी बहिन हम्मोलेकेत ने ईशहोद, अबीएजेर और महला को जन्म दिया। {7:19} और शमीदा के पुत्र अह्यान, शेकेम, लिखी और अनीआम थे। {7:20} और एप्रैम के पुत्र शूतेलह और शूतेलह का बेरेद, बेरेद का तहत, तहत का एलादा, एलादा का तहत। {7:21} तहत का जाबाद और जाबाद का पुत्र शूतेलह हुआ, और येजेर और एलाद भी जिन्हें गत के मनुष्यों ने जो उस देश में उत्पन्न हुए थे इसलिये घात किया, कि वे उनके पशु हर लेने को उतर आए थे। {7:22} सो उनका पिता एप्रैम उनके लिये बहुत दिन शोक करता रहा, और उसके भाई उसे शांति देने को आए। {7:23} और वह अपनी पत्नी के पास गया, और उसने गर्भवती हो कर एक पुत्र को जन्म दिया और एप्रैम ने उसका नाम इस कारण बरीआ रखा, कि उसके घराने में विपत्ति पड़ी थी। {7:24} (और उसकी पुत्री शेरा थी, जिसने निचले और ऊपर वाले दोनों बेथोरान नाम नगरों को और उज्जेनशेरा को दृढ कराया। ) {7:25} उौर उसका पुत्र रेपा था, और रेशेप भी, और उसका पुत्र तेलह, तेलह का तहन, तहन का लादान, {7:26} लादान का अम्मीहूद, अम्मीहूद का एलीशामा। {7:27} एलीशमा का नून, और नून का पुत्र यहोशू था। {7:28} और उनकी निज भूमि और बस्तियां गांवों समेत बेतेल और पूर्व की ओर नारान और पश्चिम की ओर गांवों समेत गेजेर, फिर गांवों समेत शकेम, और गांवों समेत अज्जा थीं। {7:29} और मनश्शेइयों के सिवाने के पास अपने अपने गांवों समेत बेतशान, तानाक, मगिद्दो और दोर। इन में इस्राएल के पुत्र युसुफ की सन्तान के लोग रहते थे। {7:30} आशेर के पुत्र, यिम्ना, यिश्वा, यिश्वी और बरीआ, और उनकी बहिन सेरह हुई। {7:31} और बरीआ के पुत्र, हेबेर और मल्कीएल और यह बिर्जोत का पिता हुआ। {7:32} और हेबेर ने यपलेत, शोमेर, होताम और उनकी बहिन शूआ को जन्म दिया। {7:33} और यपलेत के पुत्र पासक बिम्हाल और अश्वात। यपलेत के ये ही पुत्र थे। {7:34} और शेमेर के पुत्र, अही, रोहगा, यहुब्बा और अराम थे। {7:35} और उसके भाई हेलेम के पुत्र सोपह, यिम्ना, शेलेश और आमाल थे। {7:36} और सोपह के पुत्र, सूह, हर्नेपेर, शूआल, वेरी, इम्रा। {7:37} बेसेर, होद, शम्मा, शिलसा, यित्रान और बेरा थे॥ {7:38} और येतेर के पुत्र, यपुन्ने, पिस्पा और अरा। {7:39} और उल्ला के पुत्र, आरह, हन्नीएल और रिस्या। {7:40} ये सब आशेर के वंश में हुए, और अपने अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष और बड़े से बड़े वीर थे और प्रधानों में मुख्य थे। और थे जो अपनी अपनी वंशावली के अनुसार सेना में युद्ध करने के लिये गिने गए, इनकी गिनती छब्बीस हजार थी। {8:1} बिन्यामीन से उसका जेठा बेला, दूसरा अशबेल, तीसरा अहृह, {8:2} चौथा नोहा और पांचवां रापा उत्पन्न हुआ। {8:3} और बेला के पुत्र, अद्दार, गेरा, अबीहूद। {8:4} अबीशू, नामान, अहोह, {8:5} गेरा, शपूपान और हूराम थे। {8:6} और एहूद के पुत्र ये हुए ( गेबा के निवासियों के पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष ये थे, जिन्हें बन्धुआई में मानहत को ले गए थे )। {8:7} और नामान, अहिय्याह और गेरा ( इन्हें भी बन्धुआ कर के मानहत को ले गए थे ), और उसने उज्जा और अहिलूद को जन्म दिया। {8:8} और शहरैम से हशीम और बारा नाम अपनी स्त्रियों को छोड़ देने के बाद मोआब देश में लड़के उत्पन्न हुए। {8:9} और उसकी अपनी स्त्री होदेश से योआब, सिब्या, मेशा, मल्काम, यूस, सोक्या, {8:10} और मिर्मा उत्पन्न हुए उसके ये पुत्र अपने अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष थे। {8:11} और हूशीम से अबीतूब और एल्पाल का जन्म हुआ। {8:12} एल्पाल के पुत्र एबेर, मिशाम और शेमेर, इसी ने ओनो और गांवों समेत लोद को बसाया। {8:13} फिर बरीआ और शेमा जो अय्यालोन के निवासियों के पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष थे, और जिन्होंने गत के निवासियों भगा दिया। {8:14} और अह्यो, शासक, यरमोत। {8:15} जबद्याह, अराद, एदेर। {8:16} मीकाएल, यिस्पा, योहा, जो बरीआ के पुत्र थे। {8:17} जबद्याह, मशुल्लाम, हिजकी, हेबर। {8:18} यिशमरै, यिजलीआ, योबाब, जो एल्पाल के पुत्र थे। {8:19} और याकीम, जिक्री, जब्दी। {8:20} एलीएनै, सिल्लतै, एलीएल। {8:21} अदायाह, बरायाह और शिम्रात जो शिमी के पुत्र थे। {8:22} और यिशपान, यबेर, एलीएल। {8:23} अब्दोन, जिक्री, हानान। {8:24} हनन्याह, एलाम, अन्तोतिय्याह। {8:25} यिपदयाह और पनूएल जो शाशक के पुत्र थे। {8:26} और शमशरै, शहर्याह, अतल्याह। {8:27} योरेश्याह, एलिय्याह और जिक्र जो यरोहाम के पुत्र थे। {8:28} ये अपनी अपनी पीढ़ी में अपने अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष और प्रधान थे, ये यरूशलेम में रहते थे। {8:29} और गिबोन में गिबोन का पिता रहता था, जिसकी पत्नी का ताम माका था। {8:30} और उसका जेठा पुत्र अब्दोन था, फिर शूर, कीश, बाल, नादाब। {8:31} गदोर; अह्यो और जेकेर हुए। {8:32} और मिकोत से शिमा उत्पन्न हुआ। और ये भी अपने भाइयों के साम्हने यरूशलेम में रहते थे, अपने भाइयों ही के साथ। {8:33} और नेर से कीश उत्पन्न हुआ, कीश से शाऊल, और शाऊल से योनातान, मलकीश, अबीनादाब, और एशबाल उत्पन्न हुआ। {8:34} और योनातन का पुत्र मरीब्बाल हुआ, और मरीब्बाल से मीका उत्पन्न हुआ। {8:35} और मीका के पुत्र पीतोन, मेलेक, तारे और आहाज। {8:36} और आहाज से यहोअद्दा उत्पन्न हुआ। और यहोअद्दा से आलेमेत, अजमावेत और जिम्री; और जिम्री से मोसा। {8:37} मोसा से बिना उत्पन्न हुआ। और इसका पुत्र रापा हुआ, रापा का एलासा और एलासा का पुत्र आसेल हुआ। {8:38} और आसेल के छ: पुत्र हुए जिनके ये नाम थे, अर्थात अज्रीकाम, बोकरू, यिश्माएल, शार्याह, ओबद्याह, और हानान। ये ही सब आसेल के पुत्र थे। {8:39} ओर उसके भाई एशेक के ये पुत्र हुए, अर्थात उसका जेठा ऊलाम, दूसरा यूशा, तीसरा एलीपेलेत। {8:40} और ऊलाम के पुत्र शूरवीर और धनुर्धारी हुए, और उनके बहुत बेटे-पोते अर्थात डेढ़ सौ हुए। ये ही सब बिन्यामीन के वंश के थे। {9:1} इस प्रकार सब इस्राएली अपनी अपनी वंशावली के अनुसार, जो इस्राएल के राजाओं के वृत्तान्त की पुस्तक में लिखी हैं, गिने गए। और यहूदी अपने विश्वासघात के कारण बन्धुआई में बाबुल को पहुंचाए गए। {9:2} जो लोग अपनी अपनी निज भूमि अर्थात अपने नगरों में रहते थे, वह इस्राएली, याजक, लेवीय और नतीन थे। {9:3} और यरूशलेम में कुछ यहूदी; कुछ बिन्यामीन, और कुछ एप्रैमी, और मनश्शेई, रहते थे: {9:4} अर्थात यहूदा के पुत्र पेरेस के वंश में से अम्मीहूद का पुत्र ऊतै, जो ओम्री का पुत्र, और इम्री का पोता, और बानी का परपोता था। {9:5} और शीलोइयों में से उसका जेठा पुत्र असायाह और उसके पुत्र। {9:6} और जेरह के वंश में से यूएल, और इनके भाई, ये छ: सौ नब्बे हुए। {9:7} फिर बिन्यामीन के वंश में से सल्लू जो मशुल्लाम का पुत्र, होदय्याह का पोता, और हस्सनूआ का परपोता था। {9:8} और यिब्रिय्याह जो यरोहाम का पुत्र था, एला जो उज्जी का पुत्र, और मिक्री का पोता था, और मशुल्लाम जो शपत्याह का पुत्र, रूएल का पोता, और यिब्निय्याह का परपोता था; {9:9} और इनके भाई जो अपनी अपनी वंशावली के अनुसार मिलकर नौ सौ छप्पन। ये सब पुरुष अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार पितरों के घरानों में मुख्य थे। {9:10} और याजकों में से यदायाह, यहोयारीब और याकीन, {9:11} और अजर्याह जो परमेश्वर के भवन का प्रधान और हिलकिय्याह का पुत्र था, यह पशुल्लाम का पुत्र, यह सादोक का पुत्र, यह मरायोत का पुत्र, यह अहीतूब का पुत्र था। {9:12} और अदायाह जो यरोहाम का पुत्र था, यह पशहूर का पुत्र, यह मल्कियाह का पुत्र, यह मासै का पुत्र, यह अदोएल का पुत्र, यह जेरा का पुत्र, यह पशुल्लाम का पुत्र, यह मशिल्लीत का पुत्र, यह इम्मेर का पुत्र था। {9:13} और उनके भाई थे, जो अपने अपने पितरों के घरानों में सत्रह सौ साठ मुख्य पुरुष थे, वे परमेश्वर के भवन की सेवा के काम में बहुत निपुण पुरुष थे। {9:14} फिर लेवियों में से मरारी के वंश में से शमायाह जो हश्शूव का पुत्र, अज्रीकाम का पोता, और हशय्याह का परपोता था। {9:15} और बकबक्कर, हेरेश और गालाल और आसाप के वंश में से मत्तन्याह जो मीका का पुत्र, और जिक्री का पोता था। {9:16} और ओबद्याह जो शमायाह का पुत्र, गालाल का पोता और यदूतून का परपोता था, और बेरेक्याह जो आसा का पुत्र, और एल्काना का पोता था, जो नतोपाइयों के गांवों में रहता था। {9:17} ओर द्वारपालों में से अपने अपने भाइयों सहित शल्लूम, अक्कूब, तल्मोन और अहीमान, उन में से मुख्य तो शल्लूम था। {9:18} और वह अब तक पूर्व ओर राजा के फाटक के पास द्वारपाली करता था। लेवियों की छावनी के द्वारपाल ये ही थे। {9:19} और शल्लूम जो कोरे का पुत्र, एब्यासाप का पोता, और कोरह का परपोता था, और उसके भाई जो उसके मूलपुरुष के घराने के अर्थात कोरही थे, वह इस काम के अधिकारी थे, कि वे तम्बू के द्वारपाल हों। उनके पुरखा तो यहोवा की छावनी के अधिकारी, और पैठाव के रखवाले थे। {9:20} और अगले समय में एलीआज़र का पुत्र पीनहास जिसके संग यहोवा रहता था वह उनका प्रधान था। {9:21} मेशेलेम्याह का पुत्र जकर्याह मिलापवाले तम्बू का द्वारपाल था। {9:22} ये सब जो द्वारपाल होने को चुने गए, वह दो सौ बारह थे। ये जिनके पुरखाओं को दाऊद और शमूएल दशीं ने विश्वासयोग्य जान कर ठहराया था, वह अपने अपने गांव में अपनी अपनी वंशावली के अनुसार गिने गए। {9:23} सो वे और उनकी सन्तान यहोवा के भवन अर्थात तम्बू के भवन के फाटकों का अधिकार बारी बारी रखते थे। {9:24} द्वारपाल पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्खिन, चारों दिशा की ओर चौकी देते थे। {9:25} ओर उनके भाई जो गांवों में रहते थे, उन को सात सात दिन के बाद बारी बारी से उनके संग रहने के लिये आना पड़ता था। {9:26} क्योंकि चारों प्रधान द्वारपाल जो लेवीय थे, वे विश्वासयोग्य जान कर परमेश्वर के भवन की कोठरियों और भण्डारों के अधिकारी ठहराए गए थे। {9:27} और वे परमेश्वर के भवन के आसपास इसलिये रात बिताते थे, कि उसकी रक्षा उन्हें सौंपी गई थी, और भोर-भोर को उसे खोलना उन्हीं का काम था। {9:28} और उन में से कुछ उपासना के पात्रों के अधिकारी थे, क्योंकि ये गिन कर भीतर पहुंचाए, और गिन कर बाहर निकाले भी जाते थे। {9:29} और उन में से कुछ सामान के, और पवित्रस्थान के पात्रों के, और मैदे, दाखमधु, तेल, लोबान और सुगन्धद्रव्यों के अधिकारी ठहराए गए थे। {9:30} और याजकों के पुत्रों में से कुछ सुगन्धद्रव्यों में गंधी का काम करते थे। {9:31} और मतित्याह नाम एक लेवीय जो कोरही शल्लूम का जेठा था उसे विश्वासयोग्य जानकर तवों पर बनाईं हुई वस्तुओं का अधिकारी नियुक्त किया था। {9:32} और उसके भाइयों अर्थात कहातियों में से कुछ तो भेंटवाली रोटी के अधिकारी थे, कि हर एक विश्रामदिन को उसे तैयार किया करें। {9:33} और ये गवैथे थे जो लेवीय पितरों के घरानों में मुख्य थे, और कोठरियों में रहते, और और काम से छूटे थे; क्योंकि वे रात-दिन अपने काम में लगे रहते थे। {9:34} ये ही अपनी अपनी पीढ़ी में लेवियों के पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष थे, ये यरूशलेम में रहते थे। {9:35} और गिबोन में गिबोन का पिता यीएल रहता था, जिसकी पत्नी का नाम माका था। {9:36} उसका जेठा पुत्र अब्दोन हुआ, फिर सुर, कीश, बाल, नेर, नादाब। {9:37} गदोर, अह्यो, जकर्याह और मिल्कोत। {9:38} और मिल्कोत से शिमाम उत्पन्न हुआ और ये भी अपने भाइयों के साम्हने अपने भाइयों के संग यरूशलेम में रहते थे। {9:39} और नेर से कीश, कीश से शाऊल, और शाऊल से योनातान, मल्कीश, अबीनादाब और एशबाल उत्पन्न हुए। {9:40} और योनातान का पुत्र मरीब्बाल हुआ, और मरीब्बाल से मीका उत्पन्न हुआ। {9:41} और मीका के पुत्र पीतोन, मेलेक, तह्रे और अहाज थे। {9:42} और अहाज से यारा और यारा से आलेमेत, अजमावेत और जिम्री, और जिम्री से मोसा। {9:43} और मोसा से बिना उत्पन्न हुआ और बिना का पुत्र रपायाह हुआ, रपायाह का एलासा, और एलासा का पुत्र आसेल हुआ। {9:44} और आसेल के छ: पुत्र हुए जिनके ये नाम थे, अर्थात अज्रीकाम, बोकरू, यिश्माएल, शार्याह, ओबद्याह और हतान; आसेल के ये ही पुत्र हुए। {10:1} पलिश्ती इस्राएलियों से लड़े; और इस्राएली पलिश्तियों के साम्हने से भागे, और गिलबो नाम पहाड़ पर मारे गए। {10:2} और पलिश्ती शाऊल और उसके पुत्रों के पीछे लगे रहे, और पलिश्तियों ने शाऊल के पुत्र योनातान, अबीनादाब और मल्कीशू को मार डाला। {10:3} और शाऊल के साथ घमासान युद्ध होता रहा और धनुर्धारियों ने उसे जा लिया, और वह उनके कारण व्याकुल हो गया। {10:4} तब शाऊल ने अपने हथियार ढोने वाले से कहा, अपनी तलवार खींचकर मुझे भोंक दे, कहीं ऐसा न हो कि वे खतनारहित लोग आकर मेरी ठट्ठा करें, परन्तु उसके हथियार ढोने वाले ने भयभीत हो कर ऐसा करने से इनकार किया, तब शाऊल अपनी तलवार खड़ी कर के उस पर गिर पड़ा। {10:5} यह देखकर कि शाऊल मर गया है उसका हथियार ढोने वाला भी अपनी तलवार पर आप गिरकर मर गया। {10:6} यों शाऊल और उसके तीनों पुत्र, और उसके घराने के सब लोग एक संग मर गए। {10:7} यह देखकर कि वे भाग गए, और शाऊल और उसके पुत्र मर गए, उस तराई में रहने वाले सब इस्राएली मनुष्य अपने अपने नगर को छोड़कर भाग गए; और पलिश्ती आकर उन में रहने लगे। {10:8} दूसरे दिन जब पलिश्ती मारे हुओं के माल को लूटने आए, तब उन को शाऊल और उसके पुत्र गिलबो पहाड़ पर पड़े हुए मिले। {10:9} तब उन्होंने उसके वस्त्रें को उतार उसका सिर और हथियार ले लिया और पलिश्तियों के देश के सब स्थानों में दूतों को इसलिये भेजा कि उनके देवताओं और साधारण लोगों में यह शुभ समाचार देते जाएं। {10:10} तब उन्होंने उसके हथियार अपने देवालय में रखे, और उसकी खोपड़ी को दागोन के मन्दिर में लटका दिया। {10:11} जब गिलाद के याबेश के सब लोगों ने सुना कि पलिश्तियों ने शाऊल से क्या क्या किया है। {10:12} तब सब शूरवीर चले और शाऊल और उसके पुत्रों की लोथें उठा कर याबेश में ले आए, और उनकी हड्डियों को याबेश में एक बांज वृक्ष के तले गाड़ दिया और सात दिन तक अनशन किया। {10:13} यों शाऊल उस विश्वासघात के कारण मर गया, जो उसने यहोवा से किया था; क्योंकि उसने यहोवा का वचन टाल दिया था, फिर उसने भूतसिद्धि करने वाली से पूछकर सम्मति ली थी। {10:14} उसने यहोवा से न पूछा था, इसलिये यहोवा ने उसे मार कर राज्य को यिशै के पुत्र दाऊद को दे दिया। {11:1} तब सब इस्राएली दाऊद के पास हेब्रोन में इकट्ठे हो कर कहने लगे, सुन, हम लोग और तू एक ही हड्डी और मांस हैं। {11:2} अगले दिनों में जब शाऊल राजा था, तब भी इस्राएलियों का अगुआ तू ही था, और तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझ से कहा, कि मेरी प्रजा इस्राएल का चरवाहा, और मेरी प्रजा इस्राएल का प्रधान, तू ही होगा। {11:3} इसलिये सब इस्राएली पुरनिये हेब्रोन में राजा के पास आए, और दाऊद ने उनके साथ हेब्रोन में यहोवा के साम्हने वाचा बान्धी; और उन्होंने यहोवा के वचन के अनुसार, जो उसने शमूएल से कहा था, इस्राएल का राजा होने के लिये दाऊद का अभिषेक किया। {11:4} तब सब इस्राएलियों समेत दाऊद यरूशलेम गया, जो यबूस भी कहलाता था, और वहां यबूसी नाम उस देश के निवासी रहते थे। {11:5} तब यबूस के निवासियों ने दाऊद से कहा, तू यहां आने नहीं पाएगा। तौभी दाऊद ने सिय्योन नाम गढ़ को ले लिया, वही दाऊदपुर भी कहलाता है। {11:6} और दाऊद ने कहा, जो कोई यबूसियों को सब से पहिले मारेगा, वह मुख्य सेनापति होगा, तब सरूयाह का पुत्र योआब सब से पहिले चढ़ गया, और सेनापति बन गया। {11:7} और दाऊद उस गढ़ में रहने लगा, इसलिये उसका नाम दाऊदपुर पड़ा। {11:8} और उसने नगर के चारों ओर, अर्थात मिल्लो से ले कर चारों ओर शहरपनाह बनवाई, और योआब ने शेष नगर के खष्डहरों को फिर बसाया। {11:9} और दाऊद की प्रतिष्ठा अधिक बढ़ती गई और सेनाओं का यहोवा उसके संग था। {11:10} यहोवा ने इस्राएल के विष्य जो वचन कहा था, उसके अनुसार दाऊद के जिन शूरवीरों ने सब इस्राएलियों समेत उसके राज्य में उसके पक्ष में हो कर, उसे राजा बनाने को ज़ोर दिया, उन में से मुख्य पुरुष थे हैं। {11:11} दाऊद के शूरवीरों की नामावली यह है, अर्थात किसी हक्मोनी का पुत्र याशोबाम जो तीसों में मुखय था, उसने तीन सौ पुरुषों पर भाला चला कर, उन्हें एक ही समय में मार डाला। {11:12} उसके बाद अहोही दोदो का पुत्र एलीआज़र जो तीनों महान वीरों में से एक था। {11:13} वह पसदम्मीम में जहां जव का एक खेत था, दाऊद के संग रहा जब पलिश्ती वहां युद्ध करने को इकट्ठे हुए थे, और लोग पलिश्तियों के साम्हने से भाग गए। {11:14} तब उन्होंने उस खेत के बीच में खड़े हो कर उसकी रक्षा की, और पलिश्तियों को मारा, और यहोवा ने उनका बड़ा उद्धार किया। {11:15} और तीसों मुख्य पुरुषों में से तीन दाऊद के पास चट्टान को, अर्थात अदुल्लाम नाम गुफा में गए, और पलिश्तियों की छावनी रपाईम नाम तराई में पड़ी हुई थी। {11:16} उस समय दाऊद गढ़ में था, और उस समय पलिश्तियों की एक चौकी बेतलेहेम में थी। {11:17} तब दाऊद ने बड़ी अभिलाषा के साथ कहा, कौन मुझे बेतलेहेम के फाटक के पास के कुएं का पानी पिलाएगा। {11:18} तब वे तीनोंजन पलिश्तियों की छावनी में टूट पड़े और बेतलेहेम के फाटक के कुएं से पानी भर कर दाऊद के पास ले आए; परन्तु दाऊद ने पीने से इनकार किया और यहोवा के साम्हने अर्घ कर के उण्डेला। {11:19} और उसने कहा, मेरा परमेश्वर मुझ से ऐसा करना दूर रखे; क्या मैं इन मनुष्यों का लोहू पीऊं जिन्होंने अपने प्राणों पर खेला है? ये तो अपने प्राण पर खेल कर उसे ले आए हैं। इसलिये उसने वह पानी पीने से इनकार किया। इन तीन वीरों ने ये ही काम किए। {11:20} और अबीशै जो योआब का भाई था, वह तीनों में मुख्य था। और उसने अपना भाला चला कर तीन सौ को मार डाला और तीनों में नामी हो गया। {11:21} दूसरी श्रेणी के तीनों में वह अधिक प्रतिष्ठित था, और उनका प्रधान हो गया, परन्तु मुख्य तीनों का पद को न पहुंचा। {11:22} यहोयादा का पुत्र बनायाह था, जो कबजेल के एक वीर का पुत्र था, जिसने बड़े बड़े काम किए थे, उसने सिंह समान दो मोआबियों को मार डाला, और हिमऋतु में उसने एक गड़हे में उतर के एक सिंह को मार डाला। {11:23} फिर उसने एक डील वाले अर्थात पांच हाथ लम्बे मिस्री पुरुष को मार डाला, वह मिस्री हाथ में जुलाहों का ढेका का एक भाला लिए हुए था, परन्तु बनायाह एक लाठी ही लिए हुए उसके पास गया, और मिस्री के हाथ से भाले को छीन कर उसी के भाले से उसे घात किया। {11:24} ऐसे ऐसे काम कर के यहोयादा का पुत्र बनायाह उन तीनों वीरों में नामी हो गया। {11:25} वह तो तीसों से अधिक प्रतिष्ठित था, परन्तु मुख्य तीनों के पद को न पहुंचा। उसको दाऊद ने अपनी निज सभा में सभासद किया। {11:26} फिर दलों के वीर ये थे, अर्थात योआब का भाई असाहेल, बेतलेहेमी दोदो का पुत्र एल्हानान। {11:27} हरोरी शम्मोत, पलोनी हेलेस। {11:28} तकोई इक्केश का पुत्र ईरा, अनातोती अबीएजेर। {11:29} सिब्बके होसाती, अहोही ईलै। {11:30} महरै नतोपाई, एक और नतोपाई बाना का पुत्र हेलेद। {11:31} बिन्यामीनियों के गिबा नगरवासी रीबै का पुत्र इतै, पिरातोनी बनायाह। {11:32} गाश के नालों के पास रहने वाला हूरै, अराबावासी अबीएल। {11:33} बहूरीमी अजमावेत, शल्बोनी एल्यहबा। {11:34} गीजोई हाशेम के पुत्र, फिर हरारी शागे का पुत्र योनातान। {11:35} हरारी सकार का पुत्र अहीआम, ऊर का पुत्र एलीपाल। {11:36} मकेराई हेपेर, पलोनी अहिय्याह। {11:37} कर्मेली हेस्रो, एज्बै का पुत्र नारै। {11:38} नातान का भाई योएल, हग्री का पुत्र मिभार। {11:39} अम्मोनी सेलेक, बेरोती नहरै जो सरूयाह के पुत्र योआब का हथियार ढोने वाला था। {11:40} येतेरी ईरा और गारेब। {11:41} हित्ती ऊरिय्याह, अहलै का पुत्र जाबाद। {11:42} तीस पुरुषों समेत रूबेनी शीजा का पुत्र अदीना जो रूबेनियों का मुखिया था। {11:43} माका का पुत्र हानान, मेतेनी योशापात। {11:44} अशतारोती उज्जिय्याह, अरोएरी होताम के पुत्र शामा और यीएल। {11:45} शिम्री का पुत्र यदीएल और उसका भाई तीसी, योहा। {11:46} महवीमी एलीएल, एलनाम के पुत्र यरीबै और योशय्याह, {11:47} मोआबी यित्मा, एलीएल, ओबेद और मसोबाई यासीएल। {12:1} जब दाऊद सिकलग में कीश के पुत्र शाऊल के डर के मारे छिपा रहता था, तब ये उसके पास वहां आए, और ये उन वीरोंमें से थे जो युद्ध में उसके सहायक थे। {12:2} ये धनुर्धारी थे, जो दाहिने-बायें, दोनों हाथों से गोफन के पत्थर और धनुष के तीर चला सकते थे; और ये शाऊल के भाइयों में से बिन्यामीनी थे। {12:3} मुख्य तो अहीएजेर और दूसरा योआश था जो गिबावासी शमाआ का पुत्र था; फिर अजमावेत के पुत्र यजीएल और पेलेत, फिर बराका और अनातोती येहू। {12:4} और गिबोनी यिशमायाह जो तीसों में से एक वीर और उनके ऊपर भी था; फिर यिर्मयाह, यहजीएल, योहानान, गदेरावासी योजाबाद। {12:5} एलूजै, यरीमोत, बाल्याह, शमर्याह, हारूपी शपत्याह। {12:6} एल्काना, यिशिय्याह, अजरेल, योएजेर, याशोबाम, जो सब कोरहवंशी थे। {12:7} और गदोरवासी यरोहाम के पुत्र योएला और जबद्याह। {12:8} फिर जब दाऊद जंगल के गढ़ में रहता था, तब ये गादी जो शूरवीर थे, और युद्ध विद्या सीखे हुए और ढाल और भाला काम में लाने वाले थे, और उनके मुह सिंह के से और वे पहाड़ी मृग के समान वेग से दौड़ने वाले थे, ये और गादियों से अलग हो कर उसके पास आए। {12:9} अर्थात मुख्य तो एजेर, दूसरा ओबद्याह, तीसरा एलीआब। {12:10} चौथा मिश्मन्ना, पांचवां यिर्मयाह। {12:11} छठा अत्तै, सातवां एलीएल। {12:12} आठवां योहानान, नौवां एलजाबाद। {12:13} दसवां यिर्मयाह और ग्यारहवां मकबन्नै था। {12:14} ये गादी मुख्य योद्धा थे, उन में से जो सब से छोटा था वह तो एक सौ के ऊपर, और जो सब से बड़ा था, वह हजार के ऊपर था। {12:15} ये ही वे हैं, जो पहिले महीने में जब यरदन नदी सब कड़ाड़ों के ऊपर ऊपर बहती थी, तब उसके पार उतरे; और पूर्व और पश्चिम दानों ओर के सब तराई के रहने वालों को भगा दिया। {12:16} और कई एक बिन्यामीनी और यहूदी भी दाऊद के पास गढ़ में आए। {12:17} उन से मिलने को दाऊद निकला और उन से कहा, यदि तुम मेरे पास मित्रभाव से मेरी सहायता करने को आए हो, तब तो मेरा मन तुम से लगा रहेगा; परन्तु जो तुम मुझे धोखा देकर मेरे शत्रुओं के हाथ पकड़वाने आए हो, तो हमारे पितरों का परमेश्वर इस पर दृष्टि कर के डांटे, क्योंकि मेरे हाथ से कोई उपद्रव नहीं हुआ। {12:18} अब आत्मा अमासै में समाया, जो तीसों वीरों में मुख्य था, और उसने कहा, हे दाऊद! हम तेरे हैं; हे यिशै के पुत्र! हम तेरी ओर के हैं, तेरा कुशल ही कुशल हो और तेरे सहायकों का कुशल हो, क्योंकि तेरा परमेश्वर तेरी सहायता किया करता है। इसलिये दाऊद ने उन को रख लिया, और अपने दल के मुखिये ठहरा दिए। {12:19} फिर कुछ मनश्शेई भी उस समय दाऊद के पास भाग गए, जब वह पलिश्तियों के साथ हो कर शाऊल से लड़ने को गया, परन्तु उसकी कुछ सहायता न की, क्योंकि पलिश्तियों के सरदारों ने सम्मति लेने पर यह कह कर उसे बिदा किया, कि वह हमारे सिर कटवा कर अपने स्वामी शाऊल से फिर मिल जाएगा। {12:20} जब वह सिक्लग को जा रहा था, तब ये मनश्शेई उसके पास भाग गए; अर्थात अदना, योजाबाद, यदीएल, मीकाएल, योजाबाद, एलीहू और सिल्लतै जो मनश्शे के हजारों के मुखिये थे। {12:21} इन्होंने लुटेरों के दल के विरुद्ध दाऊद की सहायता की, क्योंकि ये सब शूरवीर थे, और सेना के प्रधान भी बन गए। {12:22} वरन प्रतिदिन लोग दाऊद की सहायता करने को उसके पास आते रहे, यहां तक कि परमेश्वर की सेना के समान एक बड़ी सेना बन गई। {12:23} फिर लोग लड़ने के लिये हथियार बान्धे हुए होब्रोन में दाऊद के पास इसलिये आए कि यहोवा के वचन के अनुसार शाऊल का राज्य उसके हाथ में कर दें: उनके मुखियों की गिनती यह है। {12:24} यहूदा के ढाल और भाला लिए हुए छ: हजार आठ सौ हथियार बन्ध लड़ने को आए। {12:25} शिमोनी सात हजार एक सौ तैयार शूरवीर लड़ने को आए। {12:26} लेवीय चार हजार छ: सौ आए। {12:27} और हारून के घराने का प्रधान यहोयादा था, और उसके साथ तीन हजार सात सौ आए। {12:28} और सादोक नाम एक जवान वीर भी आया, और उसके पिता के घराने के बाईस प्रधान आए। {12:29} और शाऊल के भाई बिन्यामीनियों में से तीन हजार आए, क्योंकि उस समय तक आधे बिन्यामीनियों से अधिक शाऊल के घराने का पक्ष करते रहे। {12:30} फिर एप्रैमियों में से बड़े वीर और अपने अपने पितरों के घरानों में नामी पुरुष बीस हजार आठ सौ आए। {12:31} और मनश्शे के आधे गोत्र में से दाऊद को राजा बनाने के लिये अठारह हजार आए, जिनके नाम बताए गए थे। {12:32} और इस्साकारियों में से जो समय को पहचानते थे, कि इस्राएल को क्या करना उचित है, उनके प्रधान दो सौ थे; और उनके सब भाई उनकी आज्ञा में रहते थे। {12:33} फिर जबूलून में से युद्ध के सब प्रकार के हथियार लिए हुए लड़ने को पांति बान्धने वाले योद्धा पचास हजार आए, वे पांति बान्ध्ने वाले थे: और चंचल न थे। {12:34} फिर नप्ताली में से प्रधान तो एक हजार, और उनके संग ढाल और भाला लिए सैंतीस हजार आए। {12:35} और दानियों में से लड़ने के लिये पांति बान्धने वाले अठाईस हजार छ: सौ आए। {12:36} और आशेर में से लड़ने को पांति बान्धने वाले चालीस हजार योद्धा आए। {12:37} और यरदन पार रहने वाले रूबेनी, गादी और मनश्शे के आधे गोत्रियों में से युद्ध के सब प्रकार के हथियार लिए हुए एक लाख बीस हजार आए। {12:38} ये सब युद्ध के लिये पांति बान्धने वाले दाऊद को सारे इस्राएल का राजा बनाने के लिये हेब्रोन में सच्चे मन से आए, और और सब इस्राएली भी दाऊद को राजा बनाने के लिये सहमत थे। {12:39} और वे वहां तीन दिन दाऊद के संग खाते पीते रहे, क्योंकि उनके भाइयों ने उनके लिये तैयारी की थी। {12:40} और जो उनके निकट वरन इस्साकार, जबूलून और नप्ताली तक रहते थे, वे भी गदहों, ऊंटों, खच्चरों और बैलों पर मैदा, अंजीरों और किशमिश की टिकियां, दाखमधु और तेल आदि भोजनवस्तु लादकर लाए, और बैल और भेड़-बकरियां बहुतायत से लाए; क्योंकि इस्राएल में आनन्द मनाया जा रहा था। {13:1} और दाऊद ने सहस्त्रपतियों, शतपतियों और सब प्रधानों से सम्मति ली। {13:2} तब दाऊद ने इस्राएल की सारी मण्डली से कहा, यदि यह तुम को अच्छा लगे और हमारे परमेश्वर की इच्छा हो, तो इस्राएल के सब देशों में जो हमारे भाई रह गए हैं और उनके साथ जो याजक और लेवीय अपने अपने चराई वाले नगरों में रहते हैं, उनके पास भी यह कहला भेजें कि हमारे पास इकट्ठे हो जाओ। {13:3} और हम अपने परमेश्वर के सन्दूक को अपने यहां ले आएं; क्योंकि शाऊल के दिनों में हम उसके समीप नहीं जाते थे। {13:4} और समस्त मण्डली ने कहा, हम ऐसा ही करेंगे, क्योंकि यह बात उन सब लोगों की दृष्टि में उचित मालूम हुई। {13:5} तब दाऊद ने मिस्र के शीहोर से ले हमात की घाटी तब के सब इस्राएलियों को इसलिये इकट्ठा किया, कि परमेश्वर के सन्दूक को किर्यत्यारीम से ले आए। {13:6} तब दाऊद सब इस्राएलियों को संग ले कर बाला को गया, जो किर्यत्यारीम भी कहलाता और यहूदा के भाग में था, कि परमेश्वर यहोवा का सन्दूक वहां से ले आए; वह तो करूबों पर विराजने वाला है, और उसका नाम भी यही लिया जाता है। {13:7} तब उन्होंने परमेश्वर का सन्दूक एक नई गाड़ी पर चढ़ा कर, अबीनादाब के घर से निकाला, और उज्जा और अह्यो उस गाड़ी को हांकने लगे। {13:8} और दाऊद और सारे इस्राएली परमेश्वर के साम्हने तन मन से गीत गाते और वीणा, सारंगी, डफ, झांझ और तुरहियां बजाते थे। {13:9} जब वे कीदोन के खलिहान तक आए, तब उज्जा ने अपना हाथ सन्दूक थामने को बढ़ाया, क्योंकि बैलों ने ठोकर खाई थी। {13:10} तब यहोवा का कोप उज्जा पर भड़क उठा; और उसने उसको मारा क्योंकि उसने सन्दूक पर हाथ लगाया था; वह वहीं परमेश्वर के साम्हने मर गया। {13:11} तब दाऊद अप्रसन्न हुआ, इसलिये कि यहोवा उज्जा पर टूट पड़ा था; और उसने उस स्थान का नाम पेरेसुज्जा रखा, यह नाम आज तक बना है। {13:12} और उस दिन दाऊद परमेश्वर से डर कर कहने लगा, मैं परमेश्वर के सन्दूक को अपने यहां कैसे ले आऊं? {13:13} तब दाऊद ने सन्दूक को अपने यहां दाऊदपुर में न लाया, परन्तु ओबेदेदोम नाम गती के यहां ले गया। {13:14} और परमेश्वर का सन्दूक ओबेदेदोम के यहां उसके घराने के पास तीन महीने तक रहा, और यहोवा ने ओबेदेदोम के घराने पर और जो कुछ उसका था उस पर भी आशीष दी। {14:1} और सोर के राजा हीराम ने दाऊद के पास दूत भेजे, और उसका भवन बनाने को देवदारु की लकड़ी और राज और बढ़ई भेजे। {14:2} और दाऊद को निश्चय हो गया कि यहोवा ने मुझे इस्राएल का राजा कर के स्थिर किया, क्योंकि उसकी प्रजा इस्राएल के निमित्त उसका राज्य अत्यन्त बढ़ गया था। {14:3} और यरूशलेम में दाऊद ने और स्त्रियां ब्याह लीं, और उन से और बेटे-बेटियां उत्पन्न हुईं। {14:4} उसके जो सन्तान यरूशलेम में उत्पन्न हुए, उनके नाम ये हैं: अर्थात शम्मू, शोबाब, नातान, सुलैमान; {14:5} यिभार, एलीशू, एलपेलेत; {14:6} नोगह, नेपेग, यापी, एलीशामा, {14:7} बेल्यादा और एलीपेलेद। {14:8} जब पलिश्तियों ने सुना कि पूरे इस्राएल का राजा होने के लिये दाऊद का अभिषेक हुआ, तब सब पलिश्तियों ने दाऊद की खोज में चढ़ाई की; यह सुन कर दाऊद उनका साम्हना करने को निकल गया। {14:9} और पलिश्ती आए और रपाईम नाम तराई में धावा मारा। {14:10} तब दाऊद ने परमेश्वर से पूछा, क्या मैं पलिश्तियों पर चढ़ाई करूं? और कया तू उन्हें मेरे हाथ में कर देगा? यहोवा ने उस से कहा, चढ़ाई कर, क्योंकि मैं उन्हें तेरे हाथ में कर दूंगा। {14:11} इसलिये जब वे बालपरासीम को आए, तब दाऊद ने उन को वहीं मार लिया; तब दाऊद ने कहा, परमेश्वर मेरे द्वारा मेरे शत्रुओं पर जल की धारा की नाईं टूट पड़ा है। इस कारण उस स्थान का नाम बालपरासीम रखा गया। {14:12} वहां वे अपने देवताओं को छोड़ गए, और दाऊद की आज्ञा से वे आग लगाकर फूंक दिए गए। {14:13} फिर दूसरी बार पलिश्तियों ने उसी तराई में धावा मारा। {14:14} तब दाऊद ने परमेश्वर से फिर पूछा, और परमेश्वर ने उस से कहा, उनका पीछा मत कर; उन से मुड़कर तूत के वृक्षों के साम्हने से उन पर छापा मार। {14:15} और जब तूत के वृक्षों की फुनगियों में से सेना के चलने की सी आहट तुझे सुन पड़े, तब यह जान कर युद्ध करने को निकल जाना कि परमेश्वर पलिश्तियों की सेना को मारने के लिये तेरे आगे जा रहा है। {14:16} परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार दाऊद ने किया, और इस्राएलियों ने पलिश्तियों की सेना को गिबोन से ले कर गेजेर तक मार लिया। {14:17} तब दाऊद की कीर्ति सब देशों में फैल गई, और यहोवा ने सब जातियों के मन में उसका भय भर दिया। {15:1} तब दाऊद ने दाऊदपुर में भवन बनवाए, और परमेश्वर के सन्दूक के लिये एक स्थान तैयार कर के एक तम्बू खड़ा किया। {15:2} तब दाऊद ने कहा, लेवियों को छोड़ और किसी को परमेश्वर का सन्दूक उठाना नहीं चाहिये, क्योंकि यहोवा ने उन को इसी लिये चुना है कि वे परमेश्वर का सन्दूक उठाएं और उसकी सेवा टहल सदा किया करें। {15:3} तब दाऊद ने सब इस्राएलियों को यरूशलेम में इसलिये इकट्ठा किया कि यहोवा का सन्दूक उस स्थान पर पहुंचाएं, जिसे उसने उसके लिये तैयार किया था। {15:4} इसलिये दाऊद ने हारून के सन्तानों और लेवियों को इकट्ठा किया: {15:5} अर्थात कहातियों में से ऊरीएल नाम प्रधान को और उसके एक सौ बीस भाइयों को; {15:6} मरारियों में से असायाह नाम प्रधान को और उसके दो सौ बीस भाइयों को; {15:7} गेर्शोमियों में से योएल नाम प्रधान को और उसके एक सौ तीस भाइयों को; {15:8} एलीसापानियों में से शमायाह नाम प्रधान को और उसके दो सौ भाइयों को; {15:9} हेब्रोनियों में से एलीएल नाम प्रधान को और उसके अस्सी भाइयों को; {15:10} और उज्जीएलियों में से अम्मीनादाब नाम प्रधान को और उसके एक सौ बारह भाइयों को। {15:11} तब दाऊद ने सादोक और एब्यातार नाम याजकों को, और ऊरीएल, असायाह, योएल, शमायाह, एलीएल और अम्मीनादाब नाम लेवियों को बुलवा कर उन से कहा, {15:12} तुम तो लेवीय पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष हो; इसलिये अपने भाइयों समेत अपने अपने को पवित्र करो, कि तुम इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का सन्दूक उस स्थान पर पहुंचा सको जिस को मैं ने उसके लिये तैयार किया है। {15:13} क्योंकि पहिली बार तुम ने उसको न उठाया इस कारण हमारा परमेश्वर यहोवा हम पर टूट पड़ा, क्योंकि हम उसकी खोज में नियम के अनुसार न लगे थे। {15:14} तब याजकों और लेवियों ने अपने अपने को पवित्र किया, कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का सन्दूक ले जा सकें। {15:15} तब उस आज्ञा के अनुसार जो मूसा ने यहोवा का वचन सुन कर दी थी, लेवियों ने सन्दूक को डंडों के बल अपने कंधों पर उठा लिया। {15:16} और दाऊद ने प्रधान लेवियों को आज्ञा दी, कि अपने भाई गवैयों को बाजे अर्थात सारंगी, वीणा और झांझ देकर बजाने और आनन्द के साथ ऊंचे स्वर से गाने के लिये नियुक्त करें। {15:17} तब लेवियों ने योएल के पुत्र हेमान को, और उसके भाइयों में से बेरेक्याह के पुत्र आसाप को, और अपने भाई मरारियों में से कूशायाह के पुत्र एतान को ठहराया। {15:18} और उनके साथ उन्होंने दूसरे पद के अपने भाइयों को अर्थात जकर्याह, बेन, याजीएल, शमीरामोत, यहीएल, उन्नी, एलीआब, बनायाह, मासेयाह, मत्तित्याह, एलीपकेह, मिकनेयाह, और ओबेदेदोम और पीएल को जो द्वारपाल थे ठहराया। {15:19} यों हेमान, आसाप और एतान नाम के गवैये तो पीतल की झांझ बजा बजाकर राग चलाने को; {15:20} और जकर्याह, अजीएल, शमीरामोत, यहीएल, उन्नी, एलीआब, मासेयाह, और बनायाह, अलामोत, नाम राग में सारंगी बजाने को; {15:21} और मत्तित्याह, एलीपकेह, मिकनेयाह ओबेदेदोम, यीएल और अजज्याह वीणा खर्ज में छेड़ने को ठहराए गए। {15:22} और राग उठाने का अधिकारी कनन्याह नाम लेवियों का प्रधान था, वह राग उठाने के विषय शिक्षा देता था, क्योंकि वह निपुण था। {15:23} और बेरेक्याह और एलकाना सन्दूक के द्वारपाल थे। {15:24} और शबन्याह, योशापात, नतनेल, अमासै, जकर्याह, बनायाह और एलीएजेर नाम याजक परमेश्वर के सन्दूक के आगे आगे तुरहियां बजाते हुए चले, और ओबेदेदोम और यहिय्याह उसके द्वारपाल थे। {15:25} और दाऊद और इस्राएलियों के पुरनिये और सहस्त्रपति सब मिल कर यहोवा की वाचा का सन्दूक ओबेदेदोम के घर से आनन्द के साथ ले आने के लिए गए। {15:26} जब परमेश्वर ने लेवियों की सहायता की जो यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाने वाले थे, तब उन्होंने सात बैल और सात मेढ़े बलि किए। {15:27} दाऊद, और यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाने वाले सब लेवीय और गाने वाले और गाने वालों के साथ राग उठाने वाले का प्रधान कनन्याह, ये सब तो सन के कपड़े के बागे पहिने थे, और दाऊद सन के कपड़े का एपोद पहिने था। {15:28} इस प्रकार सब इस्राएली यहोवा की वाचा के सन्दूक को जयजयकार करते, और नरसिंगे, तुरहियां और झांझ बजाते और सारंगियां और वीणा बजाते हुए ले चले। {15:29} जब यहोवा की वाचा का सन्दूक दाऊदपुर में पहुंचा तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झांक कर दाऊद राजा को कूदते और खेलते हुए देखा, और उसे मन ही मन तूच्छ जाना। {16:1} तब परमेश्वर का सन्दूक ले आकर उस तम्बू में रखा गया जो दाऊद ने उसके लिये खड़ा कराया था; और परमेश्वर के साम्हने होमबलि और मेलबलि चढ़ाए गए। {16:2} जब दाऊद होमबलि और मेलबलि चढ़ा जूका, तब उसने यहोवा के नाम से प्रजा को आशीर्वाद दिया। {16:3} और उसने क्या पुरुष, क्या स्त्री, सब इस्राएलियों को एक एक रोटी और एक एक टुकड़ा मांस और किशमिश की एक एक टिकिया बंटवा दी। {16:4} तब उसने कई लेवियों को इसलिये ठहरा दिया, कि यहोवा के सन्दूक के साम्हने सेवा टहल किया करें, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की चर्चा और उसका धन्यवाद और स्तुति किया करें। {16:5} उनका मुखिया तो आसाप था, और उसके नीचे जकर्याह था, फिर यीएल, शमीरामोत, यहीएल, मत्तित्याह, एलीआब बनायाह, ओबेदेदोम और यीएल थे; ये तो सारंगियां और वीणाएं लिये हुए थे, और आसाप झांझ पर राग बजाता था। {16:6} और बनायाह और यहजीएल नाम याजक परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के साम्हने नित्य तुरहियां बजाने के लिए नियुक्त किए गए। {16:7} तब उसी दिन दाऊद ने यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया। {16:8} यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो। {16:9} उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो। {16:10} उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो। {16:11} यहोवा और उसकी सामर्थ की खोज करो; उसके दर्शन के लिए लगातार खोज करो। {16:12} उसके किए हुए आश्चर्यकर्म, उसके चमत्कार और न्यायवचन स्मरण करो। {16:13} हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान तुम जो उसके चुने हुए हो! {16:14} वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, उसके न्याय के काम पृथ्वी भर में होते हैं। {16:15} उसकी वाचा को सदा स्मरण रखो, यह वही वचन है जो उसने हजार पीढिय़ों के लिये ठहरा दिया। {16:16} वह वाचा उसने इब्राहीम के साथ बान्धी, उौर उसी के विषय उसने इसहाक से शपथ खाई, {16:17} और उसी को उसने याकूब के लिये विधि कर के और इस्राएल के लिये सदा की वाचा बान्ध कर यह कह कर दृढ़ किया, कि {16:18} मैं कनान देश तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा। {16:19} उस समय तो तुम गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े और उस देश में परदेशी थे। {16:20} और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे में फिरते तो रहे, {16:21} परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया; और वह राजाओं को उनके निमित्त यह धमकी देता था, कि {16:22} मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो। {16:23} हे समस्त पृथ्वी के लोगो यहोवा का गीत गाओ। प्रतिदिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो। {16:24} अन्यजातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्य-कर्मों का वर्णन करो। {16:25} क्योंकि यहोवा महान और स्तुति के अति योग्य है, वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है। {16:26} क्योंकि देश देश के सब देवता मूतिर्यां ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है। {16:27} उसके चारों ओर वैभव और ऐश्वर्य है; उसके स्थान में सामर्थ और आनन्द है। {16:28} हे देश देश के कुलो, यहोवा का गुणानुवाद करो, । {16:29} यहोवा की महिमा और सामर्थ को मानो। यहोवा के नाम की महिमा ऐसी मानो जो उसके नाम के योग्य है। भेंट ले कर उसके सम्मुख आाओ, पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो। {16:30} हे सारी पृथ्वी के लोगो उसके साम्हने थरथराओ! जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं। {16:31} आकाश आनन्द करे और पृथ्वी मगन हो, और जाति जाति में लोग कहें, कि यहोवा राजा हुआ है। {16:32} समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें, मैदान और जो कुछ उस में है सो प्रफुल्लित हों। {16:33} उसी समय वन के वृक्ष यहोवा के साम्हने जयजयकार करें, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है। {16:34} यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है। {16:35} और यह कहो, कि हे हमारे उद्धार करने वाले परमेश्वर हमारा उद्धार कर, और हम को इकट्ठा कर के अन्यजातियों से छुड़ा, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय बड़ाई करें। {16:36} अनादिकाल से अनन्तकाल तक इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है। तब सब प्रजा ने आमीन कहा: और यहोवा की स्तुति की। {16:37} तब उसने वहां अर्थात यहोवा की वाचा के सन्दूक के साम्हने आसाप और उसके भाइयों को छोड़ दिया, कि प्रतिदिन के प्रयोजन के अनुसार वे सन्दूक के साम्हने नित्य सेवा टहल किया करें! {16:38} और अड़सठ भाइयों समेत ओबेदेदोम को, और द्वारपालों के लिये यदूतून के पुत्र ओबेदेदोम और होसा को छोड़ दिया। {16:39} फिर उसने सादोक याजक और उसके भाई याजकों को यहोवा के निवास के साम्हने, जो गिबोन के ऊंचे स्थान में था, ठहरा दिया, {16:40} कि वे नित्य सवेरे और सांझ को होमबलि की वेदी पर यहोवा को होमबलि चढ़ाया करें, और उन सब के अनुसार किया करें, जो यहोवा की व्यवस्था में लिखा है, जिसे उसने इस्राएल को दिया था। {16:41} और उनके संग उसने हेमान और यदूतून और दूसरों को भी जो नाम ले कर चुने गए थे ठहरा दिया, कि यहोवा की सदा की करुणा के कारण उसका धन्यवाद करें। {16:42} और उनके संग उसने हेमान और यदूतून को बजाने वालों के लिये तुरहियां और झांझें और परमेश्वर के गीत गाने के लिये बाजे दिए, और यदूतून के बेटों को फाटक की रखवाली करने को ठहरा दिया। {16:43} निदान प्रजा के सब लोग अपने अपने घर चले गए, और दाऊद अपने घराने को आशीर्वाद देने लौट गया। {17:1} जब दाऊद अपने भवन में रहने लगा, तब दाऊद ने नातान नबी से कहा, देख, मैं तो देवदारु के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक तम्बू में रहता है। {17:2} नातान ने दाऊद से कहा, जो कुछ तेरे मन में हो उसे कर, क्योंकि परमेश्वर तेरे संग है। {17:3} उसी दिन रात को परमेश्वर का यह वचन नातान के पास पहुंचा, जा कर मेरे दास दाऊद से कह, {17:4} यहोवा यों कहता है, कि मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा। {17:5} क्योंकि जिस दिन से मैं इस्राएलियों को मिस्र से ले आया, आज के दिन तक मैं कभी घर में नहीं रहा; परन्तु एक तम्बू से दूसरे तम्बू को ओर एक निवास से दूसरे निवास को आया जाया करता हूँ। {17:6} जहां जहां मैं ने सब इस्राएलियों के बीच आना जाना किया, क्या मैं ने इस्राएल के न्यायियों में से जिन को मैं ने अपनी प्रजा की चरवाही करने को ठहराया था, किसी से ऐसी बात कभी कही, कि तुम लोगों ने मेरे लिये देवदारु का घर क्यों नहीं बनवाया? {17:7} सो अब तू मेरे दास दाऊद से ऐसा कह, कि सेनाओं का यहोवा यों कहता है, कि मैं ने तो तुझ को भेड़शाला से और भेड़-बकरियों के पीछे पीछे फिरने से इस मनसा से बुला लिया, कि तू मेरी प्रजा इस्राएल का प्रधान हो जाए; {17:8} और जहां कहीं तू आया और गया, वहां मैं तेरे संग रहा, और तेरे सब शत्रुओं को तेरे साम्हने से नष्ट किया है। अब मैं तेरे नाम को पृथ्वी के बड़े बड़े लोगों के नामों के समान बड़ा कर दूंगा। {17:9} और मैं अपनी प्रजा इस्राएल के लिये एक स्थान ठहराऊंगा, और उसको स्थिर करूंगा कि वह अपने ही स्थान में बसी रहे और कभी चलायमान न हो; और कुटिल लोग उन को नाश न करने पाएंगे, जैसे कि पहिले दिनों में करते थे; {17:10} उस समय भी जब मैं अपनी प्रजा इस्राएल के ऊपर न्यायी ठहराता था; सो मैं तेरे सब शत्रुओं को दबा दूंगा। फिर मैं तुझे यह भी बताता हूँ, कि यहोवा तेरा घर बनाये रखेगा। {17:11} जब तेरी आयु पूरी हो जायेगी और तुझे अपने पितरों के संग जाना पड़ेगा, तब मैं तेरे बाद तेरे वंश को जो तेरे पुत्रों में से होगा, खड़ा कर के उसके राज्य को स्थिर करूंगा। {17:12} मेरे लिए एक घर वही बनाएगा, और मैं उसकी राजगद्दी को सदैव स्थिर रखूंगा। {17:13} मैं उसका पिता ठहरूंगा और वह मेरा पुत्र ठहरेगा; और जैसे मैं ने अपनी करुणा उस पर से जो तुझ से पहिले था हटाई, वैसे मैं उस पर से न हटाऊंगा, {17:14} वरन मैं उसको अपने घर और अपने राज्य में सदैव स्थिर रखूंगा और उसकी राजगद्दी सदैव अटल रहेगी। {17:15} इन सब बातों और इस दर्शन के अनुसार नातान ने दाऊद को समझा दिया। {17:16} तब दाऊद राजा भीतर जा कर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है? {17:17} और हे परमेश्वर! यह तेरी दृष्टि में छोटी सी बात हुई, क्योंकि तू ने अपने दास के घराने के विषय भविष्य के बहुत दिनों तक की चर्चा की है, और हे यहोवा परमेश्वर! तू ने मुझे ऊंचे पद का मनुष्य सा जाना है। {17:18} जो महिमा तेरे दास पर दिखाई गई है, उसके विषय दाऊद तुझ से और क्या कह सकता है? तू तो अपने दास को जानता है। {17:19} हे यहोवा! तू ने अपने दास के निमित्त और अपने मन के अनुसार यह बड़ा काम किया है, कि तेरा दास उसको जान ले। {17:20} हे यहोवा! जो कुछ हम ने अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार तेरे तुल्य कोई नहीं, और न तुझे छोड़ और कोई परमेश्वर है। {17:21} फिर तेरी प्रजा इस्राएल के भी तुल्य कौन है? वह तो पृथ्वी भर में एक ही जाति है, उसे परमेश्वर ने जा कर अपनी निज प्रजा करने को छुड़ाया, इसलिये कि तू बड़े और डरावने काम कर के अपना नाम करे, और अपनी प्रजा के साम्हने से जो तू ने मिस्र से छुड़ा ली थी, जाति जाति के लोगों को निकाल दे। {17:22} क्योंकि तू ने अपनी प्रजा इस्राएल को अपनी सदा की प्रजा होने के लिये ठहराया, और हे यहोवा! तू आप उसका परमेश्वर ठहरा। {17:23} इसलिये, अब हे यहोवा, तू ने जो वचन अपने दास के और उसके घराने के विषय दिया है, वह सदैव अटल रहे, और अपने वचन के अनुसार ही कर। {17:24} और तेरा नाम सदैव अटल रहे, और यह कह कर तेरी बड़ाई सदा की जाए, कि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर है, वरन वह इस्राएल ही के लिये परमेश्वर है, और तेरा दास दाऊद का घराना तेरे साम्हने स्थिर रहे। {17:25} क्योंकि हे मेरे परमेश्वर, तू ने यह कह कर अपने दास पर प्रगट किया है कि मैं तेरा घर बनाए रखूंगा, इस कारण तेरे दास को तेरे सम्मुख प्रार्थना करने का हियाव हुआ है। {17:26} और अब हे यहोवा तू ही परमेश्वर है, और तू ने अपने दास को यह भलाई करने का वचन दिया है। {17:27} और अब तू ने प्रसन्न हो कर, अपने दास के घराने पर ऐसी आशीष दी है, कि वह तेरे सम्मुख सदैव बना रहे, क्योंकि हे यहोवा, तू आशीष दे चुका है, इसलिये वह सदैव आशीषित बना रहे। {18:1} इसके बाद दाऊद ने पलिश्तियों को जीतकर अपने आधीन कर लिया, और गांवों समेत गत नगर को पलिश्तियों के हाथ से छीन लिया। {18:2} फिर उसने मोआबियों को भी जीत लिया, और मोआबी दाऊद के आधीन हो कर भेंट लाने लगे। {18:3} फिर जब सोबा का राजा हदरेजेर परात महानद के पास अपने राज्य स्थिर करने को जा रहा था, तब दाऊद ने उसको हमात के पास जीत लिया। {18:4} और दाऊद ने उस से एक हजार रथ, सात हजार सवार, और बीस हजार पियादे हर लिए, और दाऊद ने सब रथ वाले घोड़ों के सुम की नस कटवाई, परन्तु एक सौ रथ वाले घोड़े बचा रखे। {18:5} और जब दमिश्क के अरामी, सोबा के राजा हदरेजेर की सहायता करने को आए, तब दाऊद ने अरामियों में से बाईस हजार पुरुष मारे। {18:6} तब दाऊद ने दमिष्क के अराम में सिपाहियों की चौकियां बैठाईं; सो अरामी दाऊद के आधीन हो कर भेंट ले आने लगे। और जहां जहां दाऊद जाता, वहां वहां यहोवा उसको जय दिलाता था। {18:7} और हदरेजेर के कर्मचारियों के पास सोने की जो ढालें थीं, उन्हें दाऊद ले कर यरूशलेम को आया। {18:8} और हदरेजेर के तिभत और कून नाम नगरों से दाऊद बहुत सा पीतल ले आया; और उसी से सुलेमान ने पीतल के हौद और खम्भों और पीतल के पात्रों को बनवाया। {18:9} जब हमात के राजा तोऊ ने सुना, कि दाऊद ने सोबा के राजा हदरेजेर की समस्त सेना को जीत लिया है, {18:10} तब उसने हदोराम नाम अपने पुत्र को दाऊद राजा के पास उसका कुशल क्षेम पूछने और उसे बधाई देने को भेजा, इसलिये कि उसने हदरेजेर से लड़ कर उसे जीत लिया था; ( क्योंकि हदरेजेर तोऊ से लड़ा करता था ) और हदोराम सोने चांदी और पीतल के सब प्रकार के पात्र लिये हुए आया। {18:11} इन को दाऊद राजा ने यहोवा के लिये पवित्र कर के रखा, और वैसा ही उस सोने-चांदी से भी किया जिसे सब जातियो से, अर्थात एदोमियों मोआबियों, अम्मोनियों, पलिश्तियों, और अमालेकियों से प्राप्त किया था। {18:12} फिर सरूयाह के पुत्र अबीशै ने लोन की तराई में अठारह हजार एदोमियों को मार लिया। {18:13} तब उसने एदोम में सिपाहियों की चौकियां बैठाईं; और सब एदोमी दाऊद के आधीन हो गए। और दाऊद जहां जहां जाता था वहां वहां यहोवा उसको जय दिलाता था। {18:14} दाऊद तो सारे इस्राएल पर राज्य करता था, और वह अपनी सब प्रजा के साथ न्याय और धर्म के काम करता था। {18:15} और प्रधान सेनापति सरूयाह का पुत्र योआब था; इतिहास का लिखने वाला अहीलूद का पुत्र यहोशापात था। {18:16} प्रधान याजक, अहीतूब का पुत्र सादोक और एब्यातार का पुत्र अबीमेलेक थे; मंत्री शबशा था। {18:17} करेतियों और पकेतियों का प्रधान यहोयादा का पुत्र बनायाह था; और दाऊद के पुत्र राजा के पास मुखिये हो कर रहते थे। {19:1} इसके बाद अम्मोनियों का राजा नाहाश मर गया, और उसका पुत्र उसके स्थान पर राजा हुआ। {19:2} तब दाऊद ने यह सोचा, कि हानून के पिता नाहाश ने जो मुझ पर प्रीति दिखाई थी, इसलिये मैं भी उस पर प्रीति दिखाऊंगा। तब दाऊद ने उसके पिता के विषय शांति देने के लिये दूत भेजे। और दाऊद के कर्मचारी अम्मोनियों के देश में हानून के पास उसे शांति देने को आए। {19:3} परन्तु अम्मोनियों के हाकिम हानून से कहने लगे, दाऊद ने जो तेरे पास शांति देने वाले भेजे हैं, वह क्या तेरी समझ में तेरे पिता का आदर करने की मनसा से भेजे हैं? क्या उसके कर्मचारी इसी मनसा से तेरे पास नहीं आए, कि ढूंढ़-ढांढ़ करें और नष्ट करें, और देश का भेद लें? {19:4} तब हानून ने दाऊद के कर्मचारियों को पकड़ा, और उनके बाल मुड़वाए, और आधे वस्त्र अर्थात नितम्ब तक कटवा कर उन को जाने दिया। {19:5} तब कितनों ने जा कर दाऊद को बता दिया, कि उन पुरुषों के साथ कैसा बर्ताव किया गया, सो उसने लोगों को उन से मिलने के लिये भेजा क्योंकि वे पुरुष बहुत लजाते थे। और राजा ने कहा, जब तक तुम्हारी दाढिय़ां बढ़ न जाएं, तब तक यरीहो में ठहरे रहो, और बाद को लौट आना। {19:6} जब अम्मोनियों ने देखा, कि हम दाऊद को घिनौने लगते हैं, तब हानून और अम्मोनियों ने एक हजार किक्कार चांदी, अरम्नहरैम और अरम्माका और सोबा को भेजी, कि रथ और सवार किराये पर बुलाएं। {19:7} सो उन्होंने बत्तीस हजार रथ, और माका के राजा और उसकी सेना को किराये पर बुलाया, और इन्होंने आकर मेदबा के साम्हने, अपने डेरे खड़े किए। और अम्मोनी अपने अपने नगर में से इकट्ठे हो कर लड़ने को आए। {19:8} यह सुन कर दाऊद ने योआब और शूरवीरों की पूरी सेना को भेजा। {19:9} तब अम्मोनी निकले और नगर के फाटक के पास पांति बान्धी, और जो राजा आए थे, वे उन से अलग मैदान में थे। {19:10} यह देख कर कि आगे पीछे दोनों ओर हमारे विरुद्ध पांति बन्धी हैं, योआब ने सब बड़े बड़े इस्राएली वीरों में से कितनों को छांटकर अरामियों के साम्हने उनकी पांति बन्धाई; {19:11} और शेष लोगों को अपने भाई अबीशै के हाथ सौंप दिया, और उन्होंने अम्मोनियों के साम्हने पांति बान्धी। {19:12} और उसने कहा, यदि अरामी मुझ पर प्रबल होने लगें, तो तू मेरी सहायता करना; और यदि अम्मोनी तुझ पर प्रबल होने लगें, तो मैं तेरी सहायता करूंगा। {19:13} तू हियाव बान्ध और हम सब अपने लोगों और अपने परमेश्वर के नगरों के निमित्त पुरुषार्थ करें; और यहोवा जैसा उसको अच्छा लगे, वैसा ही करेगा। {19:14} तब योआब और जो लोग उसके साथ थे, अरामियों से युद्ध करने को उनके साम्हने गए, और वे उसके साम्हने से भागे। {19:15} यह देख कर कि अरामी भाग गए हैं, अम्मोनी भी उसके भाई अबीशै के साम्हने से भाग कर नगर के भीतर घुसे। तब योआब यरूशलेम को लौट आया। {19:16} फिर यह देख कर कि वे इस्राएलियों से हार गए हैं अरामियों ने दूत भेज कर महानद के पार के अरामियों को बुलवाया, और हदरेजेर के सेनापति शोपक को अपना प्रधान बनाया। {19:17} इसका समाचार पाकर दाऊद ने सब इस्राएलियों को इकट्ठा किया, और यरदन पार हो कर उन पर चढ़ाई की और उनके विरुद्ध पांति बन्धाई, तब वे उस से लड़ने लगे। {19:18} परन्तु अरामी इस्राएलियों से भागे, और दाऊद ने उन में से सात हजार रथियों और चालीस हजार प्यादों को मार डाला, और शोपक सेनापति को भी मार डाला। {19:19} यह देखकर कि वे इस्राएलियों से हार गए हैं, हदरेजेर के कर्मचारियों ने दाऊद से संधि की और उसके आधीन हो गए; और अरामियों ने अम्मोनियों की सहायता फिर करनी न चाही। {20:1} फिर नये वर्ष के आरम्भ में जब राजा लोग युद्ध करने को निकला करते हैं, तब योआब ने भारी सेना संग ले जा कर अम्मोनियों का देश उजाड़ दिया और आकर रब्बा को घेर लिया; परन्तु दाऊद यरूशलेम में रह गया; और योआब ने रब्बा को जीत कर ढा दिया। {20:2} तब दाऊद ने उनके राजा का मुकुट उसके सिर से उतारकर क्या देखा, कि उसका तौल किक्कार भर सोने का है, और उस में मणि भी जड़े थे; और वह दाऊद के सिर पर रखा गया। फिर उसने उस नगर से बहुत सामान लूट में पाया। {20:3} और उसने उसके रहने वालों को निकाल कर आरों और लोहे के हेंगों और कुल्हाडिय़ों से कटवाया; और अम्मोनियों के सब नगरों के साथ भी दाऊद ने वैसा ही किया। तब दाऊद सब लोगों समेत यरूशलेम को लौट गया। {20:4} इसके बाद गेजेर में पलिश्तियों के साथ युद्ध हुआ; उस समय हूशाई सिब्बकै ने सिप्पै को, जो रापा की सन्तान था, मार डाला; और वे दब गए। {20:5} और पलिश्तियों के साथ फिर युद्ध हुआ; उस में याईर के पुत्र एल्हानान ने गती गोल्यत के भाई लहमी को मार डाला, जिसके बर्छे की छड़, जुलाहे की डोंगी के समान थी। {20:6} फिर गत में भी युद्ध हुआ, और वहां एक बड़े डील का पुरुष था, जो रापा की सन्तान था, और उसके एक एक हाथ पांव में छ: छ: उंगलियां अर्थात सब मिला कर चौबीस उंगलियां थीं। {20:7} जब उसने इस्राएलियों को ललकारा, तब दाऊद के भाई शिमा के पुत्र योनातान ने उसको मारा। {20:8} ये ही गत में रापा से उत्पन्न हुए थे, और वे दाऊद और उसके सेवकों के हाथ से मार डाले गए। > {21:1} और शैतान ने इस्राएल के विरुद्ध उठ कर, दाऊद को उकसाया कि इस्राएलियों की गिनती ले। {21:2} तब दाऊद ने योआब और प्रजा के हाकिमों से कहा, तुम जा कर बर्शेबा से ले दान तक के इस्राएल की गिनती ले कर मुझे बताओ, कि मैं जान लूं कि वे कितने हैं। {21:3} योआब ने कहा, यहोवा की प्रजा के कितने ही क्यों न हों, वह उन को सौ गुना बढ़ा दे; परन्तु हे मेरे प्रभु! हे राजा! क्या वे सब राजा के आधीन नहीं हैं? मेरा प्रभु ऐसी बात क्यों चाहता है? वह इस्राएल पर दोष लगने का कारण क्यों बने? {21:4} तौभी राजा की आज्ञा योआब पर प्रबल हुई। तब योआब विदा हो कर सारे इस्राएल में घूम कर यरूशलेम को लौट आया। {21:5} तब योआब ने प्रजा की गिनती का जोड़, दाऊद को सुनाया और सब तलवारिये पुरुष इस्राएल के तो ग्यारह लाख, और यहूदा के चार लाख सत्तर हजार ठहरे। {21:6} परन्तु उन में योआब ने लेवी और बिन्यामीन को न गिना, क्योंकि वह राजा की आज्ञा से घृणा करता था {21:7} और यह बात परमेश्वर को बुरी लगी, इसलिये उसने इस्राएल को मारा। {21:8} और दाऊद ने परमेश्वर से कहा, यह काम जो मैं ने किया, वह महापाप है। परन्तु अब अपने दास का अधर्म दूर कर; मुझ से तो बड़ी मूर्खता हुई है। {21:9} तब यहोवा ने दाऊद के दशीं गाद से कहा, {21:10} जा कर दाऊद से कह, कि यहोवा यों कहता है, कि मैं तुझ को तीन विपत्तियां दिखाता हूँ, उन में से एक को चुन ले, कि मैं उसे तुझ पर डालूं। {21:11} तब गाद ने दाऊद के पास जा कर उस से कहा, यहोवा यों कहता है, कि जिस को तू चाहे उसे चुन ले: {21:12} या तो तीन वर्ष का काल पड़े; वा तीन महीने तक तेरे विरोधी तुझे नाश करते रहें, और तेरे शत्रुओं की तलवार तुझ पर चलती रहे; वा तीन दिन तक यहोवा की तलवार चले, अर्थात मरी देश में फैले और यहोवा का दूत इस्राएली देश में चारों ओर विनाश करता रहे। अब सोच, कि मैं अपने भेजने वाले को क्या उत्तर दूं। {21:13} दाऊद ने गाद से कहा, मैं बड़े संकट में पड़ा हूँ; मैं यहोवा के हाथ में पड़ूं, क्योंकि उसकी दया बहुत बड़ी है; परन्तु मनुष्य के हाथ में मुझे पड़ना न पड़े। {21:14} तब यहोवा ने इस्राएल में मरी फैलाई, और इस्राएल में सत्तर हजार पुरुष मर मिटे। {21:15} फिर परमेश्वर ने एक दूत यरूशलेम को भी उसे नाश करने को भेजा; और वह नाश करने ही पर था, कि यहोवा दु: ख देने से खेदित हुआ, और नाश करने वाले दूत से कहा, बस कर; अब अपना हाथ खींच ले। और यहोवा का दूत यबूसी ओर्नान के खलिहान के पास खड़ा था। {21:16} और दाऊद ने आंखें उठा कर देखा, कि यहोवा का दूत हाथ में खींची हुई और यरूशलेम के ऊपर बढ़ाई हुई एक तलवार लिये हुए आकाश के बीच खड़ा है, तब दाऊद और पुरनिये टाट पहिने हुए मुंह के बल गिरे। {21:17} तब दाऊद ने परमेश्वर से कहा, जिसने प्रजा की गिनती लेने की आज्ञा दी थी, वह क्या मैं नहीं हूँ? हां, जिसने पाप किया और बहुत बुराई की है, वह तो मैं ही हूँ। परन्तु इन भेड़-बकरियों ने क्या किया है? इसलिये हे मेरे परमेश्वर यहोवा! तेरा हाथ मेरे पिता के घराने के विरुद्ध हो, परन्तु तेरी प्रजा के विरुद्ध न हो, कि वे मारे जाएं। {21:18} तब यहोवा के दूत ने गाद को दाऊद से यह कहने की आज्ञा दी, कि दाऊद चढ़ कर यबूसी ओर्नान के खलिहान में यहोवा की एक वेदी बनाए। {21:19} गाद के इस वचन के अनुसार जो उसने यहोवा के नाम से कहा था, दाऊद चढ़ गया। {21:20} तब ओर्नान ने पीछे फिर के दूत को देखा, और उसके चारों बेटे जो उसके संग थे छिप गए, ओर्नान तो गेहूं दांवता था। {21:21} जब दाऊद ओर्नान के पास आया, तब ओर्नान ने दृष्टि कर के दाऊद को देखा और खलिहान से बाहर जा कर भूमि तक झुक कर दाऊद को दण्डवत किया। {21:22} तब दाऊद ने ओर्नान से कहा, उस खलिहान का स्थान मुझे दे दे, कि मैं उस पर यहोवा को एक वेदी बनाऊं, उसका पूरा दाम ले कर उसे मुझ को दे, कि यह विपित्त प्रजा पर से दूर की जाए। {21:23} ओर्नान ने दाऊद से कहा, इसे ले ले, और मेरे प्रभु राजा को जो कुछ भाए वह वही करे; सुन, मैं तुझे होमबलि के लिये बैल और ईधन के लिये दांवने के हथियार और अन्नबलि के लिये गेहूं, यह सब मैं देता हूँ। {21:24} राजा दाऊद ने ओर्नान से कहा, सो नहीं, मैं अवश्य इसका पूरा दाम ही देकर इसे मोल लूंगा; जो तेरा है, उसे मैं यहोवा के लिये नहीं लूंगा, और न सेंतमेंत का होमबलि चढ़ाऊंगा। {21:25} तब दाऊद ने उस स्थान के लिये ओर्नान को छ: सौ शेकेल सोना तौल कर दिया। {21:26} तब दाऊद ने वहां यहोवा की एक वेदी बनाईं और होमबलि और मेलबलि चढ़ा कर यहोवा से प्रार्थना की, और उसने होमबलि की वेदी पर स्वर्ग से आग गिरा कर उसकी सुन ली। {21:27} तब यहोवा ने दूत को आज्ञा दी; और उसने अपनी तलवार फिर म्यान में कर ली। {21:28} यह देख कर कि यहोवा ने यबूसी ओर्नान के खलिहान में मेरी सुन ली है, दाऊद ने उसी समय वहां बलिदान किया। {21:29} यहोवा का निवास जो मूसा ने जंगल में बनाया था, और होमबलि की वेदी, थे दोनों उस समय गिबोन के ऊंचे स्थान पर थे। {21:30} परन्तु दाऊद परमेश्वर के पास उसके साम्हने न जा सका, क्योंकि वह यहोवा के दूत की तलवार से डर गया था। {22:1} तब दाऊद कहने लगा, यहोवा परमेश्वर का भवन यही है, और इस्राएल के लिये होमबलि की वेदी यही है। {22:2} तब दाऊद ने इस्राएल के देश में जो परदेशी थे उन को इकट्ठा करने की आज्ञा दी, और परमेश्वर का भवन बनाने को पत्थर गढ़ने के लिये राज ठहरा दिए। {22:3} फिर दाऊद ने फाटकों के किवाड़ों की कीलों और जोड़ों के लिये बहुत सा लोहा, और तौल से बाहर बहुत पीतल, {22:4} और गिनती से बाहर देवदार के पेड़ इकट्ठे किए; क्योंकि सीदोन और सोर के लोग दाऊद के पास बहुत से देवदार के पेड़ लाए थे। {22:5} और दाऊद ने कहा, मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार और लड़का है, और जो भवन यहोवा के लिये बनाना है, उसे अत्यन्त तेजोमय और सब देशों में प्रसिद्ध और शोभायमान होना चाहिये; इसलिये मैं उसके लिये तैयारी करूंगा। सो दाऊद ने मरने से पहिले बहुत तैयारी की। {22:6} फिर उसने अपने पुत्र सुलैमान को बुला कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिये भवन बनाने की आज्ञा दी। {22:7} दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, मेरी मनसा तो थी, कि अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाऊं। {22:8} परन्तु यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि तू ने लोहू बहुत बहाया और बड़े बड़े युद्ध किए हैं, सो तू मेरे नाम का भवन न बनाने पाएगा, क्योंकि तू ने भूमि पर मेरी दृष्टि में बहुत लोहू बहाया है। {22:9} देख, तुझ से एक पुत्र उत्पन्न होगा, जो शान्त पुरुष होगा; और मैं उसको चारों ओर के शत्रुओं से शान्ति दूंगा; उसका नाम तो सुलैमान होगा, और उसके दिनों में मैं इस्राएल को शान्ति और चैन दूंगा। {22:10} वही मेरे नाम का भवन बनाएगा। और वही मेरा पुत्र ठहरेगा और मैं उसका पिता ठहरूंगा, और उसकी राजगद्दी को मैं इस्राएल के ऊपर सदा के लिये स्थिर रखूंगा। {22:11} अब हे मेरे पुत्र, यहोवा तेरे संग रहे, और तू कृतार्थ हो कर उस वचन के अनुसार जो तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरे विषय कहा है, उसका भवन बनाना। {22:12} अब यहोवा तुझे बुद्धि और समझ दे और इस्राएल का अधिकारी ठहरा दे, और तू अपने परमेश्वर यहोवा की व्यवस्था को मानता रहे। {22:13} तू तब ही कृतार्थ होगा जब उन विधियों और नियमों पर चलने की चौकसी करेगा, जिनकी आज्ञा यहोवा ने इस्राएल के लिये मूसा को दी थी। हियाव बान्ध और दृढ़ हो। मत डर; और तेरा मन कच्चा न हो। {22:14} सुन, मैं ने अपने क्लेश के समय यहोवा के भवन के लिये एक लाख किक्कार सोना, और दस लाख किक्कार चान्दी, और पीतल और लोहा इतना इकट्ठा किया है, कि बहुतायत के कारण तौल से बाहर है; और लकड़ी और पत्थर मैं ने इकट्ठे किए हैं, और तू उन को बढ़ा सकेगा। {22:15} और तेरे पास बहुत कारीगर हैं, अर्थात पत्थर और लकड़ी के काटने और गढ़ने वाले वरन सब भांति के काम के लिये सब प्रकार के प्रवीण पुरुष हैं। {22:16} सोना, चान्दी, पीतल और लोहे की तो कुछ गिनती नहीं है, सो तू उस काम में लग जा! यहोवा तेरे संग नित रहे। {22:17} फिर दाऊद ने इस्राएल के सब हाकिमों को अपने पुत्र सुलैमान की सहायता करने की आज्ञा यह कह कर दी, {22:18} कि क्या तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग नहीं है? क्या उसने तुम्हें चारों ओर से विश्राम नहीं दिया? उसने तो देश के निवासियों मेरे वश में कर दिया है; और देश यहोवा और उसकी प्रजा के साम्हने दबा हुआ है। {22:19} अब तन मन से अपने परमेश्वर यहोवा के पास जाया करो, और जी लगा कर यहोवा परमेश्वर का पवित्रस्थान बनाना, कि तुम यहोवा की वाचा का सन्दूक और परमेश्वर के पवित्र पात्र उस भवन में लाओ जो यहोवा के नाम का बनने वाला है। {23:1} दाऊद तो बूढ़ा वरन बहुत बूढा हो गया था, इसलिये उसने अपने पुत्र सुलैमान को इस्त्राएल पर राजा नियुक्त कर दिया। {23:2} तब उसने इस्राएल के सब हाकिमों और याजकों और लेवियों को इकट्ठा किया। {23:3} और जितने लेवीय तीस वर्ष के और उस से अधिक अवस्था के थे, वे गिने एए, और एक एक पुरुष के गिनने से उनकी गिनती अड़तीस हजार हुई। {23:4} इन में से चौबीस हजार तो यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त हुए, और छ: हजार सरदार और न्यायी। {23:5} और चार हजार द्वारपाल नियुक्त हुए, और चार हजार उन बाजों से यहोवा की स्तुति करने के लिये ठहराए गए जो दाऊद ने स्तुति करने के लिये बनाए थे। {23:6} फिर दाऊद ने उन को गेर्शोन, कहात और मरारी नाम लेवी के पुत्रों के अनुसार दलों में अलग अलग कर दिया। {23:7} गेर्शोनियों में से तो लादान और शिमी थे। {23:8} और लादान के पुत्र: सरदार यहीएल, फिर जेताम और योएल ये तीन थे। {23:9} और शिमी के पुत्र: शलेमीत, हजीएल और हारान से तीन थे। लादान के कुल के पूर्वजों के घरानों के मुख्य पुरुष ये ही थे। {23:10} फिर शिमी के पुत्र: यहत, जीना, यूश, और वरीआ के पुत्र शिमी यही चार थे। {23:11} यहत मुख्य था, और जीजा दूसरा; यूश और बरीआ के बहुत बेटे न हुए, इस कारण वे सब मिलकर पितरों का एक ही घराना ठहरे। {23:12} कहात के पुत्र: अम्राम, यिसहार, हेब्रोन और उज्जीएल चार। अम्राम के पुत्र: हारून और मूसा। {23:13} हारून तो इसलिये अलग किया गया, कि वह और उसके सन्तान सदा परमपवित्र वस्तुओं को पवित्र ठहराएं, और सदा यहोवा के सम्मुख धूप जलाया करें और उसकी सेवा टहल करें, और उसके नाम से आशीर्वाद दिया करें। {23:14} परन्तु परमेश्वर के भक्त मूसा के पुत्रों के नाम लेवी के गोत्र के बीच गिने गए। {23:15} मूसा के पुत्र, गेर्शोम और एलीएजेर। {23:16} और गेर्शोम का पुत्र शबूएल मुख्य था। {23:17} और एलीएजेर के पुत्र: रहब्याह मुख्य; और एलीएजेर के और कोई पुत्र न हुआ, परन्तु रहब्याह के बहुत से बेटे हुए। {23:18} यिसहार के पुत्रें में से शलोमीत मुख्य ठहरा। {23:19} हेब्रोन के पुत्र: यरीय्याह मुख्य, दूसरा अमर्याह, तीसरा यहजीएल, और चौथा यकमाम था। {23:20} उज्जीएल के पुत्रें में से मुख्य तो मीका और दूसरा यिश्शिय्याह था। {23:21} मरारी के पुत्र: महली और मूशी। महली के पुत्र: एलीआजर और कीश थे। {23:22} एलीआजर पुत्रहीन मर गया, उसके केवल बेटियां हुई; सो कीश के पुत्रों ने जो उनके भाई थे उन्हें ब्याह लिया। {23:23} मूशी के पुत्र: महली; एदोर और यरेमोत यह तीन थे। {23:24} लेवीय पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष ये ही थे, ये नाम ले ले कर, एक एक पुरुष कर के गिने गए, और बीस वर्ष की वा उस से अधिक अवस्था के थे और यहोवा के भवन में सेवा टहल करते थे। {23:25} क्योंकि दाऊद ने कहा, इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने अपनी प्रजा को विश्राम दिया है, और वह तो यरूशलेम में सदा के लिये बस गया है। {23:26} और लेवियों को निवास और उस की उपासना का सामान फिर उठाना न पड़ेगा। {23:27} क्योंकि दाऊद की पिछली आज्ञाओं के अनुसार बीस वर्ष वा उस से अधिक अवस्था के लेवीय गिने गए। {23:28} क्योंकि उनका काम तो हारून की सन्तान की सेवा टहल करना था, अर्थात यह कि वे आंगनों और कोठरियों में, और सब पवित्र वस्तुओं के शुद्ध करने में और परमेश्वर के भवन की उपासना के सब कामों में सेवा टहल करें। {23:29} और भेंट की रोटी का, अन्नबलियों के मैदे का, और अखमीरी पपडिय़ों का, और तवे पर बनाए हुए और सने हुए का, और मापने और तौलने के सब प्रकार का काम करें। {23:30} और प्रति भोर और प्रति सांझ को यहोवा का धन्यवाद और उसकी स्तुति करने के लिये खड़े रहा करें। {23:31} और विश्राम दिनोंऔर नये चान्द के दिनों, और नियत पर्व्वों में गिनती के नियम के अनुसार नित्य यहोवा के सब होमबलियों को चढ़ाएं। {23:32} और यहोवा के भवन की उपासना के विषय मिलापवाले नम्बू और पवित्रस्थान की रक्षा करें, और अपने भाई हारूनियोंके सौंपे हुए काम को चौकसी से करें। {24:1} फिर हारून की सन्तान के दल ये थे। हारून के पुत्र तो नादाब, अबीहू, एलीआजर और ईतामार थे। {24:2} परन्तु नादाब और अबीहू अपने पिता के साम्हने पुत्रहीन मर गए, इस लिये याजक का काम एलीआजर और ईतामार करते थे। {24:3} और दाऊद ने एलीआजर के वंश के सादोक और ईतामार के वंश के अहांमेलेक की सहायता से उन को अपनी अपनी सेवा के अनुसार दल दल कर के बांट दिया। {24:4} और एलीआजर के वंश के मुख्य पुरुष, ईतामार के वंश के मुख्य पुरुषों से अधिक थे, और वे यों बांटे गए अर्थात एलीआजर के वंश के पितरों के घरानों के सोलह, और ईतामार के वंश के पितरों के घरानों के आठ मुख्य पुरुष थे। {24:5} तब वे चिट्ठी डाल कर बराबर बराबर बांटे गए, क्योंकि एलीआजर और ईतामार दोनों के वंशों में पवित्रस्थान के हाकिम और परमेश्वर के हाकिम नियुक्त हुए थे। {24:6} और नतनेल के पुत्र शमायाह ने जो लेवीय था, उनके नाम राजा और हाकिमों और सादोक याजक, और एब्यातार के पुत्र अहीमेलेक और याजकों और लेवियों के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों के साम्हने लिखे; अर्थात पितरों का एक घराना तो एलीआजर के वंश में से और एक ईतामार के वंश में से लिया गया। {24:7} पहिली चिट्ठी तो यहोयारीब के, और दूसरी यदायाह, {24:8} तीसरी हारीम के, चौथी सोरीम के, {24:9} पांचवीं मल्किय्याह के, छठवीं मिय्यामीन के, {24:10} सातवीं हक्कोस के, आठवीं अबिय्याह के, {24:11} नौवीं येशू के, दसवीं शकन्याह के, {24:12} ग्यारहवीं एल्याशीब के, बारहवीं याकीम के, {24:13} तेरहवीं हुप्पा के, चौदहवीं येसेबाब के, {24:14} पन्द्रहवीं बिल्गा के, सोलहवीं इम्मेर के, {24:15} सतरहवीं हेजीर के, अठारहवीं हप्पित्सेस के, {24:16} उन्नीसवीं पतह्याह के, बीसवीं यहेजकेल के, {24:17} इक्कीसवीं याकीन के, बाईसवीं गामूल के, {24:18} तेईसवीं दलायाह के, और चौबीसवीं साज्याह के नाम पर निकलीं। {24:19} उनकी सेवकाई के लिये उनका यही नियम ठहराया गया कि वे अपने उस नियम के अनुसार जो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार उनके मूलपुरुष हारून ने चलाया था, यहोवा के भवन में जाया करें। {24:20} बचे हुए लेवियों में से अम्राम के वंश में से शूबाएल, शूबाएल के वंश में से येहदयाह। {24:21} बचा रहब्याह, सोरहब्याह, के वंश में से यिश्शिय्याह मुख्य था। {24:22} इसहारियों में से शलोमोत और हालोमोत के वंश में से यहत। {24:23} और हेब्रोन के वंश में से मुख्य तो यरिय्याह, दूसरा अमर्याह, तीसरा यहजीएल, और चौथा यकमाम। {24:24} उज्जीएल के वंश में से मीका और मीका के वंश में से शामीर। {24:25} मीका का भाई यिश्शिय्याह, यिश्शिय्याह के वंश में से जकर्याह। {24:26} मरारी के पुत्र महली और मूशी और याजिय्याह का पुत्र बिनो था। {24:27} मरारी के पुत्र: याजिय्याह से बिनो और शोहम, जक्कू और इब्री थे। {24:28} महली से, एलीआजर जिसके कोई पुत्र न था। {24:29} कीश से कीश के वंश में यरह्योल। {24:30} और मूशी के पुत्र, महली, एदेर और यरीमोत। अपने अपने पितरो के घरानों के अनुसार ये ही लेवीय सन्तान के थे। {24:31} इन्होंने भी अपने भाई हारून की सन्तानों की नाईं दाऊद राजा और सादोक और अहीमेलेक और याजकों और लेवियों के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों के साम्हने चिट्ठियां डालीं, अर्थात मुख्य पुरुष के पितरों का घराना उसके छोटे भाई के पितरों के घराने के बराबर ठहरा। {25:1} फिर दाऊद और सेनापतियोंने आसाप, हेमान और यदूतून के कितने पुत्रोंको सेवकाई के लिथे अलग किया कि वे वीणा, सारंगी और फांफ बजा बजाकर नबूवत करें। और इस सेवकाई के काम करनेवाले मनुष्योंकी गिनती यह यी: {25:2} अर्यात्‌ आसाप के पुत्रोंमें से तो जक्कूर, योसेप, नतन्याह और अशरेला, आसाप के थे पुत्र आसाप ही की आज्ञा में थे, जो राजा की आज्ञा के अनुसार नबूवत करता या। {25:3} फिर यदूतून के पुत्रोंमें से गदल्याह, सरीयशायाह, हसब्याह, मत्तित्याह, थे ही छ: अपके पिता यदूतून की आज्ञा में होकर जो यहोवा का धन्यवाद और स्तुति कर करके नबूवत करता या, वीणा बजाते थे। {25:4} और हेमान के पुत्रोंमें से, मुक्किय्याह, मत्तन्याह, लज्जीएल, शबूएल, यरीमोत, हनन्याह, हनानी, एलीआता, गिद्दलती, रोममतीएजेर, योशबकाशा, मल्लोती, होतीर और महजीओत। {25:5} परमेश्वर की प्रतिज्ञानुकूल जो उसका नाम बढ़ाने की यी, थे सब हेमान के पुत्र थे जो राजा का दशीं या; क्योंकि परमेश्वर ने हेमान को चौदह बेटे और तीन बेटियां दीं यीं। {25:6} थे सब यहोवा के भवन में गाने के लिथे अपके अपके पिता के अधीन रहकर, परमेश्वर के भवन, की सेवकाई में फांफ, सारंगी और वीणा बजाते थे। और आसाप, यदूतून और हेमान राजा के अधीन रहते थे। {25:7} इन सभोंकी गिनती भाइयोंसमेत जो यहोवा के गीत सीखे हुए और सब प्रकार से निपुण थे, दो सौ अठासी यी। {25:8} और उन्होंने क्या बड़ा, क्या छोटा, क्या गुरू, क्या चेला, अपक्की अपक्की बारी के लिथे चिट्ठी डाली। {25:9} और पहिली चिट्ठी आसाप के बेटोंमें से योसेप के नाम पर निकली, दूसरी गदल्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:10} तीसरी जक्कूर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:11} चौयी यिस्री के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:12} पांचक्कीं नतन्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:13} छठीं बुक्किय्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:14} सातवीं यसरेला के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:15} आठवीं यशायाह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:16} नौवीं मतन्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई समेत बारह थे। {25:17} दसवीं शिमी के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:18} ग्यारहवीं अजरेल के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:19} बारहवीं हशब्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:20} तेरहवी शूबाएल के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:21} चौदहवीं मत्तिय्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:22} पन्द्रहवीं यरेमोत के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:23} सोलहवीं हनन्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:24} सत्रहवीं योशबकाशा के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:25} अठारहवीं हरानी के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:26} उन्नीसवीं मल्लोती के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:27} बीसवीं इलिय्याता के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:28} इक्कीसवीं होतीर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:29} बाईसवीं गिद्दलती के नाम पर तिकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:30} तेईसवीं महजीओत के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {25:31} और चौबीसवीं चिट्ठी रोममतीएजेर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे। {26:1} फिर द्वारपालों के दल ये थे: कोरहियों में से तो मशेलेम्याह, जो कोरे का पुत्र और आसाप के सन्तानों में से था। {26:2} और मशेलेम्याह के पुत्र हुए, अर्थात उसका जेठा जकर्याह दूसरा यदीएल, तीसरा जवद्याह, {26:3} चौथा यतीएल, पांचवां एलाम, छठवां यहोहानान और सातवां एल्यहोएनै। {26:4} फिर ओबेदेदोम के भी पुत्र हुए, उसका जेठा शमायाह, दूसरा यहोजाबाद, तीसरा योआह, चौथा साकार, पांचवां नतनेल, {26:5} छठवां अम्मीएल, सातवां इस्साकार और आठवां पुल्लतै, क्योंकि परमेश्वर ने उसे आशीष दी थी। {26:6} और उसके पुत्र शमायाह के भी पुत्र उत्पन्न हुए, जो शूरवीर होने के कारण अपने पिता के घराने पर प्रभुता करते थे। {26:7} शमायाह के पुत्र ये थे, अर्थात ओती, रपाएल, ओबेद, एलजाबाद और उनके भाई एलीहू और समक्याह बलवान पुरुष थे। {26:8} ये सब आबेदेदोम की सन्तान में से थे, वे और उनके पुत्र और भाई इस सेवकाई के लिये बलवान और शक्तिमान थे; ये ओबेदेदोमी बासठ थे। {26:9} और मशेलेम्याह के पुत्र और भाई अठारह थे, जो बलवान थे। {26:10} फिर मरारी के वंश में से होसा के भी पुत्र थे, अर्थात मुख्य तो शिम्री ( जिस को जेठा न होने पर भी उसके पिता ने मुख्य ठहराया ), {26:11} दूसरा हिल्किय्याह, तीसरा तबल्याह और चौथा जकर्याह था; होसा के सब पुत्र और भाई मिलकर तेरह थे। {26:12} द्वारपालों के दल इन मुख्य पुरुषों के थे, ये अपने भाइयों के बराबर ही यहोवा के भवन में सेवा टहल करते थे। {26:13} इन्होंने क्या छोटे, क्या बड़े, अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार एक एक फाटक के लिये चिट्ठी डाली। {26:14} पूर्व की ओर की चिट्ठी शेलेम्याह के नाम पर निकली। तब उन्होंने उसके पुत्र जकर्याह के नाम की चिट्ठी डाली ( वह बुद्धिमान मंत्री था ) और चिट्ठी उत्तर की ओर के लिये निकली। {26:15} दक्खिन की ओर के लिये ओबोदेदोम के नाम पर चिट्ठी निकली, और उसके बेटों के नाम पर खजाने की कोठरी के लिये। {26:16} फिर शुप्पीम और होसा के नामों की चिट्ठी पश्चिम की ओर के लिये निकली, कि वे शल्लेकेत नाम फाटक के पास चढ़ाई की सड़क पर आम्हने साम्हने चौकीदारी किया करें। {26:17} पूर्व ओर जो छ: लेवीय थे, उत्तर की ओर प्रतिदिन चार, दक्खिन की ओर प्रतिदिन चार, और खजाने की कोठरी के पास दो ठहरे। {26:18} पश्चिम ओर के पर्बार नाम स्थान पर ऊंची सड़क के पास तो चार और पर्बार के पास दो रहे। {26:19} ये द्वारपालों के दल थे, जिन में से कितने तो कोरह के थे और कितने मरारी के वंश के थे। {26:20} फिर लेवियों में से अहिय्याह परमेश्वर के भवन और पवित्र की हुई वस्तुओं, दोनों के भण्डारों का अधिकारी नियुक्त हुआ। {26:21} ये लादान की सन्तान के थे, अर्थात गेर्शेनियोंकी सन्तान जो लादान के कुल के थे, अर्थात लादान और गेर्शेनी के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष थे, अर्थात यहोएली। {26:22} यहोएली के पुत्र ये थे, अर्थात जेताम और उसका भाई योएल जो यहोवा के भवन के खजाने के अधिकारी थे। {26:23} अम्रामियों, यिसहारियों, हेब्रोनियों और उज्जीएलियों में से। {26:24} और शबूएल जो मूसा के पुत्र गेर्शेम के वंश का था, वह खजानों का मुख्य अधिकारी था। {26:25} और उसके भाइयों का वृत्तान्त यह है: एलीआजर के कुल में उसका पुत्र रहब्याह, रहब्याह का पुत्र यशायाह, यशायाह का पुत्र योराम, योराम का पुत्र जिक्री, और जिक्री का पुत्र शलोमोत था। {26:26} यही शलोमोत अपने भाइयों समेत उन सब पवित्र की हुई पस्तुओं के भण्डारों का अधिकारी था, जो राजा दाऊद और पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुषों और सहस्रपतियों और शतपतियों और मुख्य सेनापतियों ने पवित्र की थीं। {26:27} जो लूट लड़ाइयों में मिलती थी, उस में से उन्होंने यहोवा का भवन दृढ़ करने के लिये कुछ पवित्र किया। {26:28} वरन जितना शमूएल दशीं, कीश के पुत्र शाऊल, नेर के पुत्र अब्नेर, और सरूयाह के पुत्र योआब ने पवित्र किया था, और जो कुछ जिस किसी ने पवित्र कर रखा था, वह सब शलोमोत और उसके भाइयों के अधिकार में था। {26:29} यिसहारियों में से कनन्याह और उसके पुत्र, इस्राएल के देश का काम अर्थात सरदार और न्यायी का काम करने के लिये नियुक्त हुए। {26:30} और हेब्रोनियों में से हशय्याह और उसके भाई जो सत्रह सौ बलवान पुरुष थे, वे यहोवा के सब काम और राजा की सेवा के विषय यरदन की पश्चिम ओर रहने वाले इस्राएलियों के अधिकारी ठहरे। {26:31} हेब्रोनियों में से यरिय्याह मुख्य था, अर्थात हेब्रोनियों की पीढ़ी पीढ़ी के पितरों के घरानों के अनुसार दाऊद के राज्य के चालीसवें वर्ष में वे ढूंढ़े गए, और उन में से कई शूरवीर गिलाद के याजेर में मिले। {26:32} और उसके भाई जो वीर थे, पितरों के घरानों के दो हाजार सात सौ मुख्य पुरुष थे, इन को दाऊद राजा ने परमेश्वर के सब विषयों और राजा के विषय में रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र का अधिकारी ठहराया। {27:1} इस्राएलियो की गिनती, अर्थात पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुषों और यहस्रपतियों और शतपतियों और उनके सरदारों की गिनती जो वर्ष भर के महीने महीने उपस्थित होने और छुट्टी पाने वाले दलों के सब विषयों में राजा की सेवा टहल करते थे, एक एक दल में चौबीस हजार थे। {27:2} पहिले महीने के लिये पहिले दल का अधिकारी जब्दीएल का पुत्र याशोबाम नियुक्त हुआ; और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:3} वह पेरेस के वंश का था और पहिले महीने में सब सेनापतियों का अधिकारी था। {27:4} और दूसरे महीने के दल का अधिकारी दोदै नाम एक अहोही था, और उसके दल का प्रधान मिक्लोत था, और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:5} तीसरे महीने के लिये तीसरा सेनापति यहोयादा याजक का पुत्र बनायाह था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:6} यह वही बनायाह है, जो तीसों शूरों में वीर, और तीसों में श्रेष्ट भी था; और उसके दल में उसका पुत्र अम्मीजाबाद था। {27:7} चौथे महीने के लिये चौथा सेनापति योआब का भाई असाहेल था, और उसके बाद उसका पुत्र जबद्याह था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:8} पांचवें महीने के लिये पांचवां सेनापति यिज्राही शम्हूत था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:9} छठवें महीने के लिये छठवां सेनापति तकोई इक्केश का पुत्र ईरा था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:10} सातवें महीने के लिये सातवां सेनापति एप्रैम के वंश का हेलेस पलोनी था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:11} आठवें महीने के लिये आठवां सेनापति जेरह के वंश में से हूशाई सिब्बकै था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:12} नौवें महीने के लिये नौवां सेनापति बिन्यामीनी अबीएजेर अनातोतवासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:13} दसवें महीने के लिये दसवां सेनापति जेरही महरै नतोपावासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:14} ग्यारहवें महीने के लिये ग्यारहवां सेनापति एप्रैम के वंश का बनायाह पिरातोनवासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:15} बारहवें महीने के लिये बारहवां सेनापति ओत्नीएल के वंश का हेल्दै नतोपावासी था और उसके दल में चौबीस हजार थे। {27:16} फिर इस्राएली गोत्रें के ये अधिकारी थे: अर्थात रूबेनियों का प्रधान जिक्री का पुत्र एलीआज़र; शिमोनियों से माका का पुत्र शपत्याह। {27:17} लेवी से कमूएल का पुत्र हशब्याह; हारून की सन्तान का सादोक। {27:18} यहूदा का एलीहू नाम दाऊद का एक भाई, इस्साकार से मीकाएल का पुत्र ओम्नी। {27:19} जबूलून से ओबद्याह का पुत्र यिशमायाह, नप्ताली से अज्रीएल का पुत्र यरीमोत। {27:20} एप्रैम से अजज्याह का पुत्र होशे, मनश्शे से आधे गोत्र का, फ़दायाह का पुत्र योएल। {27:21} गिलाद में आधे गोत्र मनश्शे से जकर्याह का पुत्र इद्दो, बिन्यामीन से अब्नेर का पुत्र यासीएल, {27:22} और दान से यारोहाम का पुत्र अजरेल, ठहरा। ये ही इस्राएल के गोत्रों के हाकिम थे। {27:23} परन्तु दाऊद ने उनकी गिनती बीस वर्ष की अवस्था के नीचे न की, क्योंकि यहोवा ने इस्राएल की गिनती आकाश के तारों के बराबर बढ़ाने के लिये कहा था। {27:24} सरूयाह का पुत्र योआब गिनती लेने लगा, पर निपटा न सका क्योंकि ईश्वर का क्रोध इस्राएल पर भड़का, और यह गिनती राजा दाऊद के इतिहास में नहीं लिखी गई। {27:25} फिर अदीएल का पुत्र अजमावेत राज भण्डारों का अधिकारी था, और देहात और नगरों और गांवों और गढ़ों के भण्डारों का अधिकारी उज्जिय्याह का पुत्र यहोनातान था। {27:26} और जो भूमि को जोतकर बोकर खेती करते थे, उनका अधिकारी कलूब का पुत्र एज्री था। {27:27} और दाख की बारियों का अधिकारी रामाई शिमी और दाख की बारियों की उपज जो दाखमधु के भण्डारों में रखने के लिये थी, उसका अधिकारी शापामी जब्दी था। {27:28} ओर नीचे के देश के जलपाई और गूलर के वृक्षों का अधिकारी गदेरी बाल्हानान था और तेल के भण्डारों का अधिकारी योआश था। {27:29} और शारोन में चरने वाले गाय-बैलों का अधिकारी शारोनी शित्रै था और तराइयों के गाय-बैलों का अधिकारी अदलै का पुत्र शापात था। {27:30} और ऊंटों का अधिकारी इश्माएली ओबील और गदहियों का अधिकारी मेरोनोतवासी येहदयाह। {27:31} और भैड़-बकरियों का अधिकारी हग्री याजीज था। ये ही सब राजा दाऊद के धन सम्पत्ति के अधिकारी थे। {27:32} और दाऊद का भतीजा योनातान एक समझदार मंत्री और शास्त्री था, और किसी हक्मोनी का पुत्र एहीएल राजपुत्रों के संग रहा करता था। {27:33} और अहीतोपेल राजा का मंत्री था, और एरेकी हूशै राजा का मित्र था। {27:34} और यहीतोपेल के बाद बनायाह का पुत्र यहोयादा और एब्यातार मंत्री ठहराए गए। और राजा का प्रधान सेनापति योआब था। {28:1} और दाऊद ने इस्राएल के सब हाकिमों को अर्थात गोत्रों के हाकिमों और राजा की सेवा टहल करने वाले दलों के हाकिमों को और सहस्रपतियों और शतपतियों और राजा और उसके पुत्रों के पशु आदि सब धन सम्पत्ति के अधिकारियों, सरदारों और वीरों और सब शूरवीरों को यरूशलेम में बुलवाया। {28:2} तब दाऊद राजा खड़ा हो कर कहने लगा, हे मेरे भाइयों! और हे मेरी प्रजा के लोगो! मेरी सुनो, मेरी मनसा तो थी कि यहोवा की वाचा के सन्दूक के लिये और हम लोगों के परमेश्वर के चरणों की पीढ़ी के लिये विश्राम का एक भवन बनाऊं, और मैं ने उसके बनाने की तैयारी की थी। {28:3} परन्तु परमेश्वर ने मुझ से कहा, तू मेरे नाम का भवन बनाने न पाएगा, क्योंकि तू युद्ध करने वाला है और तू ने लोहू बहाया है। {28:4} तौभी इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने मेरे पिता के सारे घराने में से मुझी को चुन लिया, कि इस्राएल का राजा सदा बना रहूं: अर्थात उसने यहूदा को प्रधान होने के लिये और यहूदा के घराने में से मेरे पिता के घराने को चुन लिया और मेरे पिता के पुत्रों में से वह मुझी को सारे इस्राएल का राजा बनाने के लिये प्रसन्न हुआ। {28:5} और मेरे सब पुत्रों में से ( यहोवा ने तो मुझे बहुत पुत्र दिए हैं ) उसने मेरे पुत्र सुलैमान को चुन लिया है, कि वह इस्राएल के ऊपर यहोवा के राज्य की गद्दी पर विराजे। {28:6} और उसने मुझ से कहा, कि तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे भवन और आंगनों को बनाएगा, क्योंकि मैं ने उसको चुन लिया है कि मेरा पुत्र ठहरे, और मैं उसका पिता ठहरूंगा। {28:7} और यदि वह मेरी आज्ञाओं और नियमों के मानने में आज कल की नाईं दृढ़ रहे, तो मैं उसका राज्य सदा स्थिर रखूंगा। {28:8} इसलिये अब इस्राएल के देखते अर्थात यहोवा की मण्डली के देखते, और अपने परमेश्वर के साम्हने, अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाओं को मानो और उन पर ध्यान करते रहो; ताकि तुम इस अच्छे देश के अधिकारी बने रहो, और इसे अपने बाद अपने वंश का सदा का भाग होने के लिये छोड़ जाओ। {28:9} और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। {28:10} अब चौकस रह, यहोवा ने तुझे एक ऐसा भवन बनाने को चुन लिया है, जो पवित्रस्थान ठहरेगा, हियाव बान्धकर इस काम में लग जा। {28:11} तब दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान को मन्दिर के ओसारे, कोठरियों, भण्डारों अटारियों, भीतरी कोठरियों, और प्रायश्चित के ढकने से स्थान का नमूना, {28:12} और यहोवा के भवन के आंगनों और चारों ओर की कोठरियों, और परमेश्वर के भवन के भण्डारों और पवित्र की हुई वस्तुओं के भण्डारों के, जो जो नमूने ईश्वर के आत्मा की प्रेरणा से उसको मिले थे, वे सब दे दिए। {28:13} फिर याजकों और लेवियों के दलों, और यहोवा के भवन की सेवा के सब कामों, और यहोवा के भवन की सेवा के सब सामान, {28:14} अर्थात सब प्रकार की सेवा के लिये सोने के पात्रों के निमित्त सोना तौलकर, और सब प्रकार की सेवा के लिये चान्दी के पात्रें के निमित्त चान्दी तौलकर, {28:15} और सोने की दीवटों के लिये, और उनके दीपकों के लिये प्रति एक एक दीवट, और उसके दीपकों का सोना तौलकर और चान्दी के दीवटों के लिये एक एक दीवट, और उसके दीपक की चान्दी, प्रति एक एक दीवट के काम के अनुसार तौलकर, {28:16} ओर भेंट की रोटी की मेजों के लिये एक एक मेज का सोना तौलकर, और चान्दी की मेजों के लिये चान्दी, {28:17} और चोखे सोने के कांटों, कटोरों और प्यालों और सोने की कटोरियों के लिये एक एक कटोरी का सोना तौलकर, और चान्दी की कटोरियों के लिये एक एक कटोरी की चान्दी तौलकर, {28:18} और धूप की वेदी के लिये तपाया हुआ सोना तौलकर, और रथ अर्थात यहोवा की वाचा का सन्दूक ढांकने वाले और पंख फैलाए हुए करूबों के नमूने के लिये सोना दे दिया। {28:19} मैं ने यहोवा की शक्ति से जो मुझ को मिली, यह सब कुछ बूझ कर लिख दिया है। {28:20} फिर दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, हियाव बान्ध और दृढ़ हो कर इस काम में लग जा। मत डर, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि यहोवा परमेश्वर जो मेरा परमेश्वर है, वह तेरे संग है; और जब तक यहोवा के भवन में जितना काम करना हो वह न हो चुके, तब तक वह न तो तुझे धोखा देगा और न तुझे त्यागेगा। {28:21} और देख परमेश्वर के भवन के सब काम के लिये याजकों और लेवियों के दल ठहराए गए हैं, और सब प्रकार की सेवा के लिये सब प्रकार के काम प्रसन्नता से करने वाले बुद्धिमान पुरुष भी तेरा साथ देंगे; और हाकिम और सारी प्रजा के लोग भी जो कुछ तू कहेगा वही करेंगे। {29:1} फिर राजा दाऊद ने सारी सभा से कहा, मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार लड़का है, और केवल उसी को परमेश्वर ने चुना है; काम तो भारी है, क्योंकि यह भवन मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा परमेश्वर के लिये बनेगा। {29:2} मैं ने तो अपनी शक्ति भर, अपने परमेश्वर के भवन के निमित्त सोने की वस्तुओं के लिये सोना, चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, पीतल की वस्तुओं के लिये पीतल, लोहे की वस्तुओं के लिये लोहा, और लकड़ी की वस्तुओं के लिये लकड़ी, और सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के योग्य मणि, और पच्ची के काम के लिये रंग रंग के नग, और सब भांति के मणि और बहुत संगमर्मर इकट्ठा किया है। {29:3} फिर मेरा मन अपने परमेश्वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैं ने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सब से अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चान्दी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्वर के भवन के लिये दे देता हूँ। {29:4} अर्थात तीन हजार किक्कार ओपीर का सोना, और सात हजार किक्कार तपाई हुई चान्दी, जिस से कोठरियों की भीतें मढ़ी जाएं। {29:5} और सोने की वस्तुओं के लिये सोना, और चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, और कारीगरों से बनाने वाले सब प्रकार के काम के लिये मैं उसे देता हूँ। और कौन अपनी इच्छा से यहोवा के लिये अपने को अर्पण कर देता है? {29:6} तब पितरों के घरानों के प्रधानों और इस्राएल के गोत्रों के हाकिमों और सहस्रपतियों और शतपतियों और राजा के काम के अधिकारियों ने अपनी अपनी इच्छा से, {29:7} परमेश्वर के भवन के काम के लिये पांच हजार किक्कार और दस हजार दर्कनोन सोना, दस हजार किक्कार चान्दी, अठारह हजार किक्कार पीतल, और एक लाख किक्कार लोहा दे दिया। {29:8} और जिनके पास मणि थे, उन्होंने उन्हें यहोवा के भवन के खजाने के लिये गेर्शोनी यहीएल के हाथ में दे दिया। {29:9} तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ। {29:10} तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है। {29:11} हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। {29:12} धन और महिमा तेरी ओर से मिलती हैं, और तू सभों के ऊपर प्रभुता करता है। सामर्थ्य और पराक्रम तेरे ही हाथ में हैं, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना तेरे हाथ में है। {29:13} इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर! हम तेरा ध्न्यवाद और तेरे महिमायुक्त नाम की स्तुति करते हैं। {29:14} मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है। {29:15} तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं की नाईं पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया की नाईं बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं। {29:16} हे हमारे परमेश्वर यहोवा! वह जो बड़ा संचय हम ने तेरे पवित्र नाम का एक भवन बनाने के लिये किया है, वह तेरे ही हाथ से हमे मिला था, और सब तेरा ही है। {29:17} और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैं ने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैं ने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहां उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं। {29:18} हे यहोवा! हे हमारे पुरखा इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर! अपनी प्रजा के मन के विचारों में यह बात बनाए रख और उनके मन अपनी ओर लगाए रख। {29:19} और मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं चितौनियों और विधियों को मानता रहे और यह सब कुछ करे, और उस भवन को बनाए, जिसकी तैयारी मैं ने की है। {29:20} तब दाऊद ने सारी सभा से कहा, तुम अपने परमेश्वर यहोवा का धन्यवाद करो। तब सभा के सब लोगों ने अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का धन्यवाद किया, और अपना अपना सिर झुका कर यहोवा को और राजा को दण्डवत किया। {29:21} और दूसरे दिन उन्होंने यहोवा के लिये बलिदान किए, अर्थात अर्घों समेत एक हजार बैल, एक हजार मेढ़े और एक हजार भेड़ के बच्चे होमबलि कर के चढ़ाए, और सब इस्राएल के लिये बहुत से मेलबलि चढ़ाए। उसी दिन यहोवा के साम्हने उन्होंने बड़े आनन्द से खाया और पिया। {29:22} फिर उन्होंने दाऊद के पुत्र सुलैमान को दूसरी बार राजा ठहरा कर यहोवा की ओर से प्रधान होने के लिये उसका और याजक होने के लिये सादोक का अभिषेक किया। {29:23} तब सुलैमान अपने पिता दाऊद के स्थान पर राजा हो कर यहोवा के सिंहासन पर विराजने लगा और भाग्यवान हुआ, और इस्राएल उसके आधीन हुआ। {29:24} और सब हाकिमों और शूरवीरों और राजा दाऊद के सब पुत्रों ने सुलैमान राजा की आधीनता अंगीकार की। {29:25} और यहोवा ने सुलैमान को सब इस्राएल के देखते बहुत बढ़ाया, और उसे ऐसा राजकीय ऐश्वर्य दिया, जैसा उस से पहिले इस्राएल के किसी राजा का न हुआ था। {29:26} इस प्रकार यिशै के पुत्र दाऊद ने सारे इस्राएल के ऊपर राज्य किया। {29:27} और उसके इस्राएल पर राज्य करने का समय चालीस वर्ष का था; उसने सात वर्ष तो हेब्रोन में और तैंतीस वर्ष यरूशलेम में राज्य किया। {29:28} और वह पूरे बूढ़ापे की अवस्था में दीर्घायु हो कर और धन और वैभव, मनमाना भोग कर मर गया; और उसका पुत्र सुलैमान उसके स्थान पर राजा हुआ। {29:29} आादि से अन्त तक राजा दाऊद के सब कामों का वृत्तान्त, {29:30} और उसके सब राज्य और पराक्रम का, और उस पर और इस्राएल पर, वरन देश देश के सब राज्यों पर जो कुछ बीता, इसका भी वृत्तान्त शमूएल दशीं और नातान नबी और गाद दशीं की पुस्तकों में लिखा हुआ है।