{i1:1} मूसा इस्राईलियों से मुख़ातिब होता है {1:1} इस किताब में वह बातें दर्ज हैं जो मूसा ने तमाम इस्राईलियों से कहीं जब वह दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ी किनारे पर बयाबान में थे। वह यर्दन की वादी में सूफ़ के क़रीब थे। एक तरफ़ फ़ारान शहर था और दूसरी तरफ़ तोफ़ल, लाबन, हसीरात और दीज़हब के शहर थे। {1:2} अगर अदोम के पहाड़ी इलाक़े से हो कर जाएँ तो होरिब यानी सीना पहाड़ से क़ादिस-बर्नीअ तक का सफ़र 11 दिन में तै किया जा सकता है। {1:3} इस्राईलियों को मिस्र से निकले 40 साल हो गए थे। इस साल के ग्यारवें माह के पहले दिन मूसा ने उन्हें सब कुछ बताया जो रब ने उसे उन्हें बताने को कहा था। {1:4} उस वक़्त वह अमोरियों के बादशाह सीहोन को शिकस्त दे चुका था जिस का दार-उल-हकूमत हस्बोन था। बसन के बादशाह ओज पर भी फ़त्ह हासिल हो चुकी थी जिस की हुकूमत के मर्कज़ अस्तारात और इद्रई थे। {1:5} वहाँ, दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ी किनारे पर जो मोआब के इलाक़े में था मूसा अल्लाह की शरीअत की तश्रीह करने लगा। उस ने कहा, {1:6} जब तुम होरिब यानी सीना पहाड़ के पास थे तो रब हमारे ख़ुदा ने हम से कहा, “तुम काफ़ी देर से यहाँ ठहरे हुए हो। {1:7} अब इस जगह को छोड़ कर आगे मुल्क-ए-कनआन की तरफ़ बढ़ो। अमोरियों के पहाड़ी इलाक़े और उन के पड़ोस की क़ौमों के पास जाओ जो यर्दन के मैदानी इलाक़े में आबाद हैं। पहाड़ी इलाक़े में, मग़रिब के नशेबी पहाड़ी इलाक़े में, जुनूब के दश्त-ए-नजब में, साहिली इलाक़े में, मुल्क-ए-कनआन में और लुबनान में दरया-ए-फ़ुरात तक चले जाओ। {1:8} मैं ने तुम्हें यह मुल्क दे दिया है। अब जा कर उस पर क़ब्ज़ा कर लो। क्यूँकि रब ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से वादा किया था कि मैं यह मुल्क तुम्हें और तुम्हारी औलाद को दूँगा।” {i1:9} राहनुमा मुक़र्रर किए गए {1:9} उस वक़्त मैं ने तुम से कहा, “मैं अकेला तुम्हारी राहनुमाई करने की ज़िम्मादारी नहीं उठा सकता। {1:10} रब तुम्हारे ख़ुदा ने तुम्हारी तादाद इतनी बढ़ा दी है कि आज तुम आसमान के सितारों की मानिन्द बेशुमार हो। {1:11} और रब तुम्हारे बापदादा का ख़ुदा करे कि तुम्हारी तादाद मज़ीद हज़ार गुना बढ़ जाए। वह तुम्हें वह बरकत दे जिस का वादा उस ने किया है। {1:12} लेकिन मैं अकेला ही तुम्हारा बोझ उठाने और झगड़ों को निपटाने की ज़िम्मादारी नहीं उठा सकता। {1:13} इस लिए अपने हर क़बीले में से कुछ ऐसे दानिशमन्द और समझदार आदमी चुन लो जिन की लियाक़त को लोग मानते हैं। फिर मैं उन्हें तुम पर मुक़र्रर करूँगा।” {1:14} यह बात तुम्हें पसन्द आई। {1:15} तुम ने अपने में से ऐसे राहनुमा चुन लिए जो दानिशमन्द थे और जिन की लियाक़त को लोग मानते थे। फिर मैं ने उन्हें हज़ार हज़ार, सौ सौ और पचास पचास मर्दों पर मुक़र्रर किया। यूँ वह क़बीलों के निगहबान बन गए। {1:16} उस वक़्त मैं ने उन क़ाज़ियों से कहा, “अदालत करते वक़्त हर एक की बात ग़ौर से सुन कर ग़ैरजानिबदार फ़ैसले करना, चाहे दो इस्राईली फ़रीक़ एक दूसरे से झगड़ा कर रहे हों या मुआमला किसी इस्राईली और परदेसी के दरमियान हो। {1:17} अदालत करते वक़्त जानिबदारी न करना। छोटे और बड़े की बात सुन कर दोनों के साथ एक जैसा सुलूक करना। किसी से मत डरना, क्यूँकि अल्लाह ही ने तुम्हें अदालत करने की ज़िम्मादारी दी है। अगर किसी मुआमले में फ़ैसला करना तुम्हारे लिए मुश्किल हो तो उसे मुझे पेश करो। फिर मैं ही उस का फ़ैसला करूँगा।” {1:18} उस वक़्त मैं ने तुम्हें सब कुछ बताया जो तुम्हें करना था। {i1:19} मुल्क-ए-कनआन में जासूस {1:19} हम ने वैसा ही किया जैसा रब ने हमें कहा था। हम होरिब से रवाना हो कर अमोरियों के पहाड़ी इलाक़े की तरफ़ बढ़े। सफ़र करते करते हम उस वसी और हौलनाक रेगिस्तान में से गुज़र गए जिसे तुम ने देख लिया है। आख़िरकार हम क़ादिस-बर्नीअ पहुँच गए। {1:20} वहाँ मैं ने तुम से कहा, “तुम अमोरियों के पहाड़ी इलाक़े तक पहुँच गए हो जो रब हमारा ख़ुदा हमें देने वाला है। {1:21} देख, रब तेरे ख़ुदा ने तुझे यह मुल्क दे दिया है। अब जा कर उस पर क़ब्ज़ा कर ले जिस तरह रब तेरे बापदादा के ख़ुदा ने तुझे बताया है। मत डरना और बेदिल न हो जाना!” {1:22} लेकिन तुम सब मेरे पास आए और कहा, “क्यूँ न हम जाने से पहले कुछ आदमी भेजें जो मुल्क के हालात दरयाफ़्त करें और वापस आ कर हमें उस रास्ते के बारे में बताएँ जिस पर हमें जाना है और उन शहरों के बारे में इत्तिला दें जिन के पास हम पहुँचेंगे।” {1:23} यह बात मुझे पसन्द आई। मैं ने इस काम के लिए हर क़बीले के एक आदमी को चुन कर भेज दिया। {1:24} जब यह बारह आदमी पहाड़ी इलाक़े में जा कर वादी-ए-इस्काल में पहुँचे तो उस की तफ़्तीश की। {1:25} फिर वह मुल्क का कुछ फल ले कर लौट आए और हमें मुल्क के बारे में इत्तिला दे कर कहा, “जो मुल्क रब हमारा ख़ुदा हमें देने वाला है वह अच्छा है।” {1:26} लेकिन तुम जाना नहीं चाहते थे बल्कि सरकशी करके रब अपने ख़ुदा का हुक्म न माना। {1:27} तुम ने अपने ख़ैमों में बुड़बुड़ाते हुए कहा, “रब हम से नफ़रत रखता है। वह हमें मिस्र से निकाल लाया है ताकि हमें अमोरियों के हाथों हलाक करवाए। {1:28} हम कहाँ जाएँ? हमारे भाइयों ने हमें बेदिल कर दिया है। वह कहते हैं, ‘वहाँ के लोग हम से ताक़तवर और दराज़क़द हैं। उन के बड़े बड़े शहरों की फ़सीलें आसमान से बातें करती हैं। वहाँ हम ने अनाक़ की औलाद भी देखी जो देओक़ामत हैं’।” {1:29} मैं ने कहा, “न घबराओ और न उन से ख़ौफ़ खाओ। {1:30} रब तुम्हारा ख़ुदा तुम्हारे आगे आगे चलता हुआ तुम्हारे लिए लड़ेगा। तुम ख़ुद देख चुके हो कि वह किस तरह मिस्र {1:31} और रेगिस्तान में तुम्हारे लिए लड़ा। यहाँ भी वह ऐसा ही करेगा। तू ख़ुद गवाह है कि बयाबान में पूरे सफ़र के दौरान रब तुझे यूँ उठाए फिरा जिस तरह बाप अपने बेटे को उठाए फिरता है। इस तरह चलते चलते तुम यहाँ तक पहुँच गए।” {1:32} इस के बावुजूद तुम ने रब अपने ख़ुदा पर भरोसा न रखा। {1:33} तुम ने यह बात नज़रअन्दाज़ की कि वह सफ़र के दौरान रात के वक़्त आग और दिन के वक़्त बादल की सूरत में तुम्हारे आगे आगे चलता रहा ताकि तुम्हारे लिए ख़ैमे लगाने की जगहें मालूम करे और तुम्हें रास्ता दिखाए। {1:34} जब रब ने तुम्हारी यह बातें सुनीं तो उसे ग़ुस्सा आया और उस ने क़सम खा कर कहा, {1:35} “इस शरीर नस्ल का एक मर्द भी उस अच्छे मुल्क को नहीं देखेगा अगरचे मैं ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा से वादा किया था कि मैं उसे उन्हें दूँगा। {1:36} सिर्फ़ कालिब बिन यफ़ुन्ना उसे देखेगा। मैं उसे और उस की औलाद को वह मुल्क दूँगा जिस में उस ने सफ़र किया है, क्यूँकि उस ने पूरे तौर पर रब की पैरवी की।” {1:37} तुम्हारी वजह से रब मुझ से भी नाराज़ हुआ और कहा, “तू भी उस में दाख़िल नहीं होगा। {1:38} लेकिन तेरा मददगार यशूअ बिन नून दाख़िल होगा। उस की हौसलाअफ़्ज़ाई कर, क्यूँकि वह मुल्क पर क़ब्ज़ा करने में इस्राईल की राहनुमाई करेगा।” {1:39} तुम से रब ने कहा, “तुम्हारे बच्चे जो अभी अच्छे और बुरे में इम्तियाज़ नहीं कर सकते, वही मुल्क में दाख़िल होंगे, वही बच्चे जिन के बारे में तुम ने कहा कि दुश्मन उन्हें मुल्क-ए-कनआन में छीन लेंगे। उन्हें मैं मुल्क दूँगा, और वह उस पर क़ब्ज़ा करेंगे। {1:40} लेकिन तुम ख़ुद आगे न बढ़ो। पीछे मुड़ कर दुबारा रेगिस्तान में बहर-ए-क़ुल्ज़ुम की तरफ़ सफ़र करो।” {1:41} तब तुम ने कहा, “हम ने रब का गुनाह किया है। अब हम मुल्क में जा कर लड़ेंगे, जिस तरह रब हमारे ख़ुदा ने हमें हुक्म दिया है।” चुनाँचे यह सोचते हुए कि उस पहाड़ी इलाक़े पर हम्ला करना आसान होगा, हर एक मुसल्लह हुआ। {1:42} लेकिन रब ने मुझ से कहा, “उन्हें बताना कि वहाँ जंग करने के लिए न जाओ, क्यूँकि मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँगा। तुम अपने दुश्मनों के हाथों शिकस्त खाओगे।” {1:43} मैं ने तुम्हें यह बताया, लेकिन तुम ने मेरी न सुनी। तुम ने सरकशी करके रब का हुक्म न माना बल्कि मग़रूर हो कर पहाड़ी इलाक़े में दाख़िल हुए। {1:44} वहाँ के अमोरी बाशिन्दे तुम्हारा सामना करने निकले। वह शहद की मक्खियों के ग़ोल की तरह तुम पर टूट पड़े और तुम्हारा ताक़्क़ुब करके तुम्हें सईर से हुर्मा तक मारते गए। {1:45} तब तुम वापस आ कर रब के सामने ज़ार-ओ-क़तार रोने लगे। लेकिन उस ने तवज्जुह न दी बल्कि तुम्हें नज़रअन्दाज़ किया। {1:46} इस के बाद तुम बहुत दिनों तक क़ादिस-बर्नीअ में रहे। {i2:1} रेगिस्तान में दुबारा सफ़र {2:1} फिर जिस तरह रब ने मुझे हुक्म दिया था हम पीछे मुड़ कर रेगिस्तान में बहर-ए-क़ुल्ज़ुम की तरफ़ सफ़र करने लगे। काफ़ी देर तक हम सईर यानी अदोम के पहाड़ी इलाक़े के किनारे किनारे फिरते रहे। {2:2} एक दिन रब ने मुझ से कहा, {2:3} “तुम बहुत देर से इस पहाड़ी इलाक़े के किनारे किनारे फिर रहे हो। अब शिमाल की तरफ़ सफ़र करो। {2:4} क़ौम को बताना, अगले दिनों में तुम सईर के मुल्क में से गुज़रोगे जहाँ तुम्हारे भाई एसौ की औलाद आबाद है। वह तुम से डरेंगे। तो भी बड़ी एहतियात से गुज़रना। {2:5} उन के साथ जंग न छेड़ना, क्यूँकि मैं तुम्हें उन के मुल्क का एक मुरब्बा फ़ुट भी नहीं दूँगा। मैं ने सईर का पहाड़ी इलाक़ा एसौ और उस की औलाद को दिया है। {2:6} लाज़िम है कि तुम खाने और पीने की तमाम ज़रूरियात पैसे दे कर ख़रीदो।” {2:7} जो भी काम तू ने किया है रब ने उस पर बरकत दी है। इस वसी रेगिस्तान में पूरे सफ़र के दौरान उस ने तेरी निगहबानी की। इन 40 सालों के दौरान रब तेरा ख़ुदा तेरे साथ था, और तेरी तमाम ज़रूरियात पूरी होती रहीं। {2:8} चुनाँचे हम सईर को छोड़ कर जहाँ हमारे भाई एसौ की औलाद आबाद थी दूसरे रास्ते से आगे निकले। हम ने वह रास्ता छोड़ दिया जो ऐलात और अस्यून-जाबर के शहरों से बहीरा-ए-मुर्दार तक पहुँचाता है और मोआब के बयाबान की तरफ़ बढ़ने लगे। {2:9} वहाँ रब ने मुझ से कहा, “मोआब के बाशिन्दों की मुख़ालफ़त न करना और न उन के साथ जंग छेड़ना, क्यूँकि मैं उन के मुल्क का कोई भी हिस्सा तुझे नहीं दूँगा। मैं ने आर शहर को लूत की औलाद को दिया है।” {2:10} पहले ऐमी वहाँ रहते थे जो अनाक़ की औलाद की तरह ताक़तवर, दराज़क़द और तादाद में ज़्यादा थे। {2:11} अनाक़ की औलाद की तरह वह रफ़ाइयों में शुमार किए जाते थे, लेकिन मोआबी उन्हें ऐमी कहते थे। {2:12} इसी तरह क़दीम ज़माने में होरी सईर में आबाद थे, लेकिन एसौ की औलाद ने उन्हें वहाँ से निकाल दिया था। जिस तरह इस्राईलियों ने बाद में उस मुल्क में किया जो रब ने उन्हें दिया था उसी तरह एसौ की औलाद बढ़ते बढ़ते होरियों को तबाह करके उन की जगह आबाद हुए थे। {2:13} रब ने कहा, “अब जा कर वादी-ए-ज़िरद को उबूर करो।” हम ने ऐसा ही किया। {2:14} हमें क़ादिस-बर्नीअ से रवाना हुए 38 साल हो गए थे। अब वह तमाम आदमी मर चुके थे जो उस वक़्त जंग करने के क़ाबिल थे। वैसा ही हुआ था जैसा रब ने क़सम खा कर कहा था। {2:15} रब की मुख़ालफ़त के बाइस आख़िरकार ख़ैमागाह में उस नस्ल का एक मर्द भी न रहा। {2:16} जब वह सब मर गए थे {2:17} तब रब ने मुझ से कहा, {2:18} “आज तुम्हें आर शहर से हो कर मोआब के इलाक़े में से गुज़रना है। {2:19} फिर तुम अम्मोनियों के इलाक़े तक पहुँचोगे। उन की भी मुख़ालफ़त न करना, और न उन के साथ जंग छेड़ना, क्यूँकि मैं उन के मुल्क का कोई भी हिस्सा तुम्हें नहीं दूँगा। मैं ने यह मुल्क लूत की औलाद को दिया है।” {2:20} हक़ीक़त में अम्मोनियों का मुल्क भी रफ़ाइयों का मुल्क समझा जाता था जो क़दीम ज़माने में वहाँ आबाद थे। अम्मोनी उन्हें ज़मज़ुमी कहते थे, {2:21} और वह देओक़ामत थे, ताक़तवर और तादाद में ज़्यादा। वह अनाक़ की औलाद जैसे दराज़क़द थे। जब अम्मोनी मुल्क में आए तो रब ने रफ़ाइयों को उन के आगे आगे तबाह कर दिया। चुनाँचे अम्मोनी बढ़ते बढ़ते उन्हें निकालते गए और उन की जगह आबाद हुए, {2:22} बिलकुल उसी तरह जिस तरह रब ने एसौ की औलाद के आगे आगे होरियों को तबाह कर दिया था जब वह सईर के मुल्क में आए थे। वहाँ भी वह बढ़ते बढ़ते होरियों को निकालते गए और उन की जगह आबाद हुए। {2:23} इसी तरह एक और क़दीम क़ौम बनाम अव्वी को भी उस के मुल्क से निकाला गया। अव्वी ग़ज़्ज़ा तक आबाद थे, लेकिन जब कफ़्तूरी कफ़्तूर यानी क्रेते से आए तो उन्हों ने उन्हें तबाह कर दिया और उन की जगह आबाद हो गए। {i2:24} सीहोन बादशाह से जंग {2:24} रब ने मूसा से कहा, “अब जा कर वादी-ए-अर्नोन को उबूर करो। यूँ समझो कि मैं हस्बोन के अमोरी बादशाह सीहोन को उस के मुल्क समेत तुम्हारे हवाले कर चुका हूँ। उस पर क़ब्ज़ा करना शुरू करो और उस के साथ जंग करने का मौक़ा ढूँडो। {2:25} इसी दिन से मैं तमाम क़ौमों में तुम्हारे बारे में दह्शत और ख़ौफ़ पैदा करूँगा। वह तुम्हारी ख़बर सुन कर ख़ौफ़ के मारे थरथराएँगी और काँपेंगी।” {2:26} मैं ने दश्त-ए-क़दीमात से हस्बोन के बादशाह सीहोन के पास क़ासिद भेजे। मेरा पैग़ाम नफ़रत और मुख़ालफ़त से ख़ाली था। वह यह था, {2:27} “हमें अपने मुल्क में से गुज़रने दें। हम शाहराह पर ही रहेंगे और उस से न बाईं, न दाईं तरफ़ हटेंगे। {2:28} हम खाने और पीने की तमाम ज़रूरियात के लिए मुनासिब पैसे देंगे। हमें पैदल अपने मुल्क में से गुज़रने दें, {2:29} जिस तरह सईर के बाशिन्दों एसौ की औलाद और आर के रहने वाले मोआबियों ने हमें गुज़रने दिया। क्यूँकि हमारी मन्ज़िल दरया-ए-यर्दन के मग़रिब में है, वह मुल्क जो रब हमारा ख़ुदा हमें देने वाला है।” {2:30} लेकिन हस्बोन के बादशाह सीहोन ने हमें गुज़रने न दिया, क्यूँकि रब तुम्हारे ख़ुदा ने उसे बेलचक और हमारी बात से इन्कार करने पर आमादा कर दिया था ताकि सीहोन हमारे क़ाबू में आ जाए। और बाद में ऐसा ही हुआ। {2:31} रब ने मुझ से कहा, “यूँ समझ ले कि मैं सीहोन और उस के मुल्क को तेरे हवाले करने लगा हूँ। अब निकल कर उस पर क़ब्ज़ा करना शुरू करो।” {2:32} जब सीहोन अपनी सारी फ़ौज ले कर हमारा मुक़ाबला करने के लिए यहज़ आया {2:33} तो रब हमारे ख़ुदा ने हमें पूरी फ़त्ह बख़्शी। हम ने सीहोन, उस के बेटों और पूरी क़ौम को शिकस्त दी। {2:34} उस वक़्त हम ने उस के तमाम शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया और उन के तमाम मर्दों, औरतों और बच्चों को मार डाला। कोई भी न बचा। {2:35} हम ने सिर्फ़ मवेशी और शहरों का लूटा हुआ माल अपने लिए बचाए रखा। {2:36} वादी-ए-अर्नोन के किनारे पर वाक़े अरोईर से ले कर जिलिआद तक हर शहर को शिकस्त माननी पड़ी। इस में वह शहर भी शामिल था जो वादी-ए-अर्नोन में था। रब हमारे ख़ुदा ने उन सब को हमारे हवाले कर दिया। {2:37} लेकिन तुम ने अम्मोनियों का मुल्क छोड़ दिया और न दरया-ए-यब्बोक़ के इर्दगिर्द के इलाक़े, न उस के पहाड़ी इलाक़े के शहरों को छेड़ा, क्यूँकि रब हमारे ख़ुदा ने ऐसा करने से तुम्हें मना किया था। {i3:1} बसन के बादशाह ओज की शिकस्त {3:1} इस के बाद हम शिमाल में बसन की तरफ़ बढ़ गए। बसन का बादशाह ओज अपनी तमाम फ़ौज के साथ निकल कर हमारा मुक़ाबला करने के लिए इद्रई आया। {3:2} रब ने मुझ से कहा, “उस से मत डर। मैं उसे, उस की पूरी फ़ौज और उस का मुल्क तेरे हवाले कर चुका हूँ। उस के साथ वह कुछ कर जो तू ने अमोरी बादशाह सीहोन के साथ किया जो हस्बोन में हुकूमत करता था।” {3:3} ऐसा ही हुआ। रब हमारे ख़ुदा की मदद से हम ने बसन के बादशाह ओज और उस की तमाम क़ौम को शिकस्त दी। हम ने सब को हलाक कर दिया। कोई भी न बचा। {3:4} उसी वक़्त हम ने उस के तमाम शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया। हम ने कुल 60 शहरों पर यानी अर्जूब के सारे इलाक़े पर क़ब्ज़ा किया जिस पर ओज की हुकूमत थी। {3:5} इन तमाम शहरों की हिफ़ाज़त ऊँची ऊँची फ़सीलों और कुंडे वाले दरवाज़ों से की गई थी। दीहात में बहुत सी ऐसी आबादियाँ भी मिल गईं जिन की फ़सीलें नहीं थीं। {3:6} हम ने उन के साथ वह कुछ किया जो हम ने हस्बोन के बादशाह सीहोन के इलाक़े के साथ किया था। हम ने सब कुछ रब के हवाले करके हर शहर को और तमाम मर्दों, औरतों और बच्चों को हलाक कर डाला। {3:7} हम ने सिर्फ़ तमाम मवेशी और शहरों का लूटा हुआ माल अपने लिए बचाए रखा। {3:8} यूँ हम ने उस वक़्त अमोरियों के इन दो बादशाहों से दरया-ए-यर्दन का मशरिक़ी इलाक़ा वादी-ए-अर्नोन से ले कर हर्मून पहाड़ तक छीन लिया। {3:9} (सैदा के बाशिन्दे हर्मून को सिर्यून कहते हैं जबकि अमोरियों ने उस का नाम सनीर रखा)। {3:10} हम ने ओज बादशाह के पूरे इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया। इस में मैदान-ए-मुर्तफ़ा के तमाम शहर शामिल थे, नीज़ सल्का और इद्रई तक जिलिआद और बसन के पूरे इलाक़े। {3:11} बादशाह ओज देओक़ामत क़बीले रफ़ाई का आख़िरी मर्द था। उस का लोहे का ताबूत 13 से ज़ाइद फ़ुट लम्बा और छः फ़ुट चौड़ा था और आज तक अम्मोनियों के शहर रब्बा में देखा जा सकता है। {i3:12} यर्दन के मशरिक़ में मुल्क की तक़्सीम {3:12} जब हम ने दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ी इलाक़े पर क़ब्ज़ा किया तो मैं ने रूबिन और जद के क़बीलों को उस का जुनूबी हिस्सा शहरों समेत दिया। इस इलाक़े की जुनूबी सरहद दरया-ए-अर्नोन पर वाक़े शहर अरोईर है जबकि शिमाल में इस में जिलिआद के पहाड़ी इलाक़े का आधा हिस्सा भी शामिल है। {3:13} जिलिआद का शिमाली हिस्सा और बसन का मुल्क मैं ने मनस्सी के आधे क़बीले को दिया। (बसन में अर्जूब का इलाक़ा है जहाँ पहले ओज बादशाह की हुकूमत थी और जो रफ़ाइयों यानी देओक़ामत अफ़राद का मुल्क कहलाता था। {3:14} मनस्सी के क़बीले के एक आदमी बनाम याईर ने अर्जूब पर जसूरियों और माकातियों की सरहद तक क़ब्ज़ा कर लिया था। उस ने इस इलाक़े की बस्तियों को अपना नाम दिया। आज तक यही नाम हव्वोत-याईर यानी याईर की बस्तियाँ चलता है।) {3:15} मैं ने जिलिआद का शिमाली हिस्सा मनस्सी के कुंबे मकीर को दिया {3:16} लेकिन जिलिआद का जुनूबी हिस्सा रूबिन और जद के क़बीलों को दिया। इस हिस्से की एक सरहद जुनूब में वादी-ए-अर्नोन के बीच में से गुज़रती है जबकि दूसरी सरहद दरया-ए-यब्बोक़ है जिस के पार अम्मोनियों की हुकूमत है। {3:17} उस की मग़रिबी सरहद दरया-ए-यर्दन है यानी किन्नरत (गलील) की झील से ले कर बहीरा-ए-मुर्दार तक जो पिसगा के पहाड़ी सिलसिले के दामन में है। {3:18} उस वक़्त मैं ने रूबिन, जद और मनस्सी के क़बीलों से कहा, “रब तुम्हारे ख़ुदा ने तुम्हें मीरास में यह मुल्क दे दिया है। लेकिन शर्त यह है कि तुम्हारे तमाम जंग करने के क़ाबिल मर्द मुसल्लह हो कर तुम्हारे इस्राईली भाइयों के आगे आगे दरया-ए-यर्दन को पार करें। {3:19} सिर्फ़ तुम्हारी औरतें और बच्चे पीछे रह कर उन शहरों में इन्तिज़ार कर सकते हैं जो मैं ने तुम्हारे लिए मुक़र्रर किए हैं। तुम अपने मवेशियों को भी पीछे छोड़ सकते हो, क्यूँकि मुझे पता है कि तुम्हारे बहुत ज़्यादा जानवर हैं। {3:20} अपने भाइयों के साथ चलते हुए उन की मदद करते रहो। जब रब तुम्हारा ख़ुदा उन्हें दरया-ए-यर्दन के मग़रिब में वाक़े मुल्क देगा और वह तुम्हारी तरह आराम और सुकून से वहाँ आबाद हो जाएंगे तब तुम अपने मुल्क में वापस जा सकते हो।” {i3:21} मूसा को यर्दन पार करने की इजाज़त नहीं मिलती {3:21} साथ साथ मैं ने यशूअ से कहा, “तू ने अपनी आँखों से सब कुछ देख लिया है जो रब तुम्हारे ख़ुदा ने इन दोनों बादशाहों सीहोन और ओज से किया। वह यही कुछ हर उस बादशाह के साथ करेगा जिस के मुल्क पर तू दरया को पार करके हम्ला करेगा। {3:22} उन से न डरो। तुम्हारा ख़ुदा ख़ुद तुम्हारे लिए जंग करेगा।” {3:23} उस वक़्त मैं ने रब से इल्तिजा करके कहा, {3:24} “ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, तू अपने ख़ादिम को अपनी अज़मत और क़ुदरत दिखाने लगा है। क्या आसमान या ज़मीन पर कोई और ख़ुदा है जो तेरी तरह के अज़ीम काम कर सकता है? हरगिज़ नहीं! {3:25} मेहरबानी करके मुझे भी दरया-ए-यर्दन को पार करके उस अच्छे मुल्क यानी उस बेहतरीन पहाड़ी इलाक़े को लुबनान तक देखने की इजाज़त दे।” {3:26} लेकिन तुम्हारे सबब से रब मुझ से नाराज़ था। उस ने मेरी न सुनी बल्कि कहा, “बस कर! आइन्दा मेरे साथ इस का ज़िक्र न करना। {3:27} पिसगा की चोटी पर चढ़ कर चारों तरफ़ नज़र दौड़ा। वहाँ से ग़ौर से देख, क्यूँकि तू ख़ुद दरया-ए-यर्दन को उबूर नहीं करेगा। {3:28} अपनी जगह यशूअ को मुक़र्रर कर। उस की हौसलाअफ़्ज़ाई कर और उसे मज़बूत कर, क्यूँकि वही इस क़ौम को दरया-ए-यर्दन के मग़रिब में ले जाएगा और क़बीलों में उस मुल्क को तक़्सीम करेगा जिसे तू पहाड़ से देखेगा।” {3:29} चुनाँचे हम बैत-फ़ग़ूर के क़रीब वादी में ठहरे। {i4:1} फ़रमाँबरदारी की अशद्द ज़रूरत {4:1} ऐ इस्राईल, अब वह तमाम अह्काम ध्यान से सुन ले जो मैं तुम्हें सिखाता हूँ। उन पर अमल करो ताकि तुम ज़िन्दा रहो और जा कर उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करो जो रब तुम्हारे बापदादा का ख़ुदा तुम्हें देने वाला है। {4:2} जो अह्काम मैं तुम्हें सिखाता हूँ उन में न किसी बात का इज़ाफ़ा करो और न उन से कोई बात निकालो। रब अपने ख़ुदा के तमाम अह्काम पर अमल करो जो मैं ने तुम्हें दिए हैं। {4:3} तुम ने ख़ुद देखा है कि रब ने बाल-फ़ग़ूर से क्या कुछ किया। वहाँ रब तेरे ख़ुदा ने हर एक को हलाक कर डाला जिस ने फ़ग़ूर के बाल देवता की पूजा की। {4:4} लेकिन तुम में से जितने रब अपने ख़ुदा के साथ लिपटे रहे वह सब आज तक ज़िन्दा हैं। {4:5} मैं ने तुम्हें तमाम अह्काम यूँ सिखा दिए हैं जिस तरह रब मेरे ख़ुदा ने मुझे बताया। क्यूँकि लाज़िम है कि तुम उस मुल्क में इन के ताबे रहो जिस पर तुम क़ब्ज़ा करने वाले हो। {4:6} इन्हें मानो और इन पर अमल करो तो दूसरी क़ौमों को तुम्हारी दानिशमन्दी और समझ नज़र आएगी। फिर वह इन तमाम अह्काम के बारे में सुन कर कहेंगी, “वाह, यह अज़ीम क़ौम कैसी दानिशमन्द और समझदार है!” {4:7} कौन सी अज़ीम क़ौम के माबूद इतने क़रीब हैं जितना हमारा ख़ुदा हमारे क़रीब है? जब भी हम मदद के लिए पुकारते हैं तो रब हमारा ख़ुदा मौजूद होता है। {4:8} कौन सी अज़ीम क़ौम के पास ऐसे मुन्सिफ़ाना अह्काम और हिदायात हैं जैसे मैं आज तुम्हें पूरी शरीअत सुना कर पेश कर रहा हूँ? {4:9} लेकिन ख़बरदार, एहतियात करना और वह तमाम बातें न भूलना जो तेरी आँखों ने देखी हैं। वह उम्र भर तेरे दिल में से मिट न जाएँ बल्कि उन्हें अपने बच्चों और पोते-पोतियों को भी बताते रहना। {4:10} वह दिन याद कर जब तू होरिब यानी सीना पहाड़ पर रब अपने ख़ुदा के सामने हाज़िर था और उस ने मुझे बताया, “क़ौम को यहाँ मेरे पास जमा कर ताकि मैं उन से बात करूँ और वह उम्र भर मेरा ख़ौफ़ मानें और अपने बच्चों को मेरी बातें सिखाते रहें।” {4:11} उस वक़्त तुम क़रीब आ कर पहाड़ के दामन में खड़े हुए। वह जल रहा था, और उस की आग आसमान तक भड़क रही थी जबकि काले बादलों और गहरे अंधेरे ने उसे नज़रों से छुपा दिया। {4:12} फिर रब आग में से तुम से हमकलाम हुआ। तुम ने उस की बातें सुनीं लेकिन उस की कोई शक्ल न देखी। सिर्फ़ उस की आवाज़ सुनाई दी। {4:13} उस ने तुम्हारे लिए अपने अह्द यानी उन 10 अह्काम का एलान किया और हुक्म दिया कि इन पर अमल करो। फिर उस ने उन्हें पत्थर की दो तख़्तियों पर लिख दिया। {4:14} रब ने मुझे हिदायत की, “उन्हें वह तमाम अह्काम सिखा जिन के मुताबिक़ उन्हें चलना होगा जब वह दरया-ए-यर्दन को पार करके कनआन पर क़ब्ज़ा करेंगे।” {i4:15} बुतपरस्ती के बारे में आगाही {4:15} जब रब होरिब यानी सीना पहाड़ पर तुम से हमकलाम हुआ तो तुम ने उस की कोई शक्ल न देखी। चुनाँचे ख़बरदार रहो {4:16} कि तुम ग़लत काम करके अपने लिए किसी भी शक्ल का बुत न बनाओ। न मर्द, औरत, {4:17} ज़मीन पर चलने वाले जानवर, परिन्दे, {4:18} रेंगने वाले जानवर या मछली का बुत बनाओ। {4:19} जब तू आसमान की तरफ़ नज़र उठा कर आसमान का पूरा लश्कर देखे तो सूरज, चाँद और सितारों की परस्तिश और ख़िदमत करने की आज़माइश में न पड़ना। रब तेरे ख़ुदा ने इन चीज़ों को बाक़ी तमाम क़ौमों को अता किया है, {4:20} लेकिन तुम्हें उस ने मिस्र के भड़कते भट्टे से निकाला है ताकि तुम उस की अपनी क़ौम और उस की मीरास बन जाओ। और आज ऐसा ही हुआ है। {4:21} तुम्हारे सबब से रब ने मुझ से नाराज़ हो कर क़सम खाई कि तू दरया-ए-यर्दन को पार करके उस अच्छे मुल्क में दाख़िल नहीं होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में देने वाला है। {4:22} मैं यहीं इसी मुल्क में मर जाऊँगा और दरया-ए-यर्दन को पार नहीं करूँगा। लेकिन तुम दरया को पार करके उस बेहतरीन मुल्क पर क़ब्ज़ा करोगे। {4:23} हर सूरत में वह अह्द याद रखना जो रब तुम्हारे ख़ुदा ने तुम्हारे साथ बांधा है। अपने लिए किसी भी चीज़ की मूरत न बनाना। यह रब का हुक्म है, {4:24} क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा भस्म कर देने वाली आग है, वह ग़यूर ख़ुदा है। {4:25} तुम मुल्क में जा कर वहाँ रहोगे। तुम्हारे बच्चे और पोते-नवासे उस में पैदा हो जाएंगे। जब इस तरह बहुत वक़्त गुज़र जाएगा तो ख़तरा है कि तुम ग़लत काम करके किसी चीज़ की मूरत बनाओ। ऐसा कभी न करना। यह रब तुम्हारे ख़ुदा की नज़र में बुरा है और उसे ग़ुस्सा दिलाएगा। {4:26} आज आसमान और ज़मीन मेरे गवाह हैं कि अगर तुम ऐसा करो तो जल्दी से उस मुल्क में से मिट जाओगे जिस पर तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके क़ब्ज़ा करोगे। तुम देर तक वहाँ जीते नहीं रहोगे बल्कि पूरे तौर पर हलाक हो जाओगे। {4:27} रब तुम्हें मुल्क से निकाल कर मुख़्तलिफ़ क़ौमों में मुन्तशिर कर देगा, और वहाँ सिर्फ़ थोड़े ही अफ़राद बचे रहेंगे। {4:28} वहाँ तुम इन्सान के हाथों से बने हुए लकड़ी और पत्थर के बुतों की ख़िदमत करोगे, जो न देख सकते, न सुन सकते, न खा सकते और न सूँघ सकते हैं। {4:29} वहीं तू रब अपने ख़ुदा को तलाश करेगा, और अगर उसे पूरे दिल-ओ-जान से ढूँडे तो वह तुझे मिल भी जाएगा। {4:30} जब तू इस तक्लीफ़ में मुब्तला होगा और यह सारा कुछ तुझ पर से गुज़रेगा फिर आख़िरकार रब अपने ख़ुदा की तरफ़ रुजू करके उस की सुनेगा। {4:31} क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा रहीम ख़ुदा है। वह तुझे न तर्क करेगा और न बर्बाद करेगा। वह उस अह्द को नहीं भूलेगा जो उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से बांधा था। {i4:32} रब ही हमारा ख़ुदा है {4:32} दुनिया में इन्सान की तख़्लीक़ से ले कर आज तक माज़ी की तफ़्तीश कर। आसमान के एक सिरे से दूसरे सिरे तक खोज लगा। क्या इस से पहले कभी इस तरह का मोजिज़ाना काम हुआ है? क्या किसी ने इस से पहले इस क़िस्म के अज़ीम काम की ख़बर सुनी है? {4:33} तू ने आग में से बोलती हुई अल्लाह की आवाज़ सुनी तो भी जीता बचा! क्या किसी और क़ौम के साथ ऐसा हुआ है? {4:34} क्या किसी और माबूद ने कभी जुरअत की है कि रब की तरह पूरी क़ौम को एक मुल्क से निकाल कर अपनी मिलकियत बनाया हो? उस ने ऐसा ही तुम्हारे साथ किया। उस ने तुम्हारे देखते देखते मिस्रियों को आज़माया, उन्हें बड़े मोजिज़े दिखाए, उन के साथ जंग की, अपनी बड़ी क़ुदरत और इख़तियार का इज़हार किया और हौलनाक कामों से उन पर ग़ालिब आ गया। {4:35} तुझे यह सब कुछ दिखाया गया ताकि तू जान ले कि रब ख़ुदा है। उस के सिवा कोई और नहीं है। {4:36} उस ने तुझे नसीहत देने के लिए आसमान से अपनी आवाज़ सुनाई। ज़मीन पर उस ने तुझे अपनी अज़ीम आग दिखाई जिस में से तू ने उस की बातें सुनीं। {4:37} उसे तेरे बापदादा से प्यार था, और उस ने तुझे जो उन की औलाद हैं चुन लिया। इस लिए वह ख़ुद हाज़िर हो कर अपनी अज़ीम क़ुदरत से तुझे मिस्र से निकाल लाया। {4:38} उस ने तेरे आगे से तुझ से ज़्यादा बड़ी और ताक़तवर क़ौमें निकाल दीं ताकि तुझे उन का मुल्क मीरास में मिल जाए। आज ऐसा ही हो रहा है। {4:39} चुनाँचे आज जान ले और ज़हन में रख कि रब आसमान और ज़मीन का ख़ुदा है। कोई और माबूद नहीं है। {4:40} उस के अह्काम पर अमल कर जो मैं तुझे आज सुना रहा हूँ। फिर तू और तेरी औलाद कामयाब होंगे, और तू देर तक उस मुल्क में जीता रहेगा जो रब तुझे हमेशा के लिए दे रहा है। {i4:41} यर्दन के मशरिक़ में पनाह के शहर {4:41} यह कह कर मूसा ने दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ में पनाह के तीन शहर चुन लिए। {4:42} उन में वह शख़्स पनाह ले सकता था जिस ने दुश्मनी की बिना पर नहीं बल्कि ग़ैरइरादी तौर पर किसी को जान से मार दिया था। ऐसे शहर में पनाह लेने के सबब से उसे बदले में क़त्ल नहीं किया जा सकता था। {4:43} इस के लिए रूबिन के क़बीले के लिए मैदान-ए-मुर्तफ़ा का शहर बसर, जद के क़बीले के लिए जिलिआद का शहर रामात और मनस्सी के क़बीले के लिए बसन का शहर जौलान चुना गया। {i4:44} शरीअत का पेशलफ़्ज़ {4:44} दर्ज-ए-ज़ैल वह शरीअत है जो मूसा ने इस्राईलियों को पेश की। {4:45} मूसा ने यह अह्काम और हिदायात उस वक़्त पेश कीं जब वह मिस्र से निकल कर {4:46} दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ी किनारे पर थे। बैत-फ़ग़ूर उन के मुक़ाबिल था, और वह अमोरी बादशाह सीहोन के मुल्क में ख़ैमाज़न थे। सीहोन की रिहाइश हस्बोन में थी और उसे इस्राईलियों से शिकस्त हुई थी जब वह मूसा की राहनुमाई में मिस्र से निकल आए थे। {4:47} उस के मुल्क पर क़ब्ज़ा करके उन्हों ने बसन के मुल्क पर भी फ़त्ह पाई थी जिस का बादशाह ओज था। इन दोनों अमोरी बादशाहों का यह पूरा इलाक़ा उन के हाथ में आ गया था। यह इलाक़ा दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ में था। {4:48} उस की जुनूबी सरहद दरया-ए-अर्नोन के किनारे पर वाक़े शहर अरोईर थी जबकि उस की शिमाली सरहद सिर्यून यानी हर्मून पहाड़ थी। {4:49} दरया-ए-यर्दन का पूरा मशरिक़ी किनारा पिसगा के पहाड़ी सिलसिले के दामन में वाक़े बहीरा-ए-मुर्दार तक उस में शामिल था। {i5:1} दस अह्काम {5:1} मूसा ने तमाम इस्राईलियों को जमा करके कहा, ए इस्राईल, ध्यान से वह हिदायात और अह्काम सुन जो मैं तुम्हें आज पेश कर रहा हूँ। उन्हें सीखो और बड़ी एहतियात से उन पर अमल करो। {5:2} रब हमारे ख़ुदा ने होरिब यानी सीना पहाड़ पर हमारे साथ अह्द बांधा। {5:3} उस ने यह अह्द हमारे बापदादा के साथ नहीं बल्कि हमारे ही साथ बांधा है, जो आज इस जगह पर ज़िन्दा हैं। {5:4} रब पहाड़ पर आग में से रू-ब-रू हो कर तुम से हमकलाम हुआ। {5:5} उस वक़्त मैं तुम्हारे और रब के दरमियान खड़ा हुआ ताकि तुम्हें रब की बातें सुनाऊँ। क्यूँकि तुम आग से डरते थे और इस लिए पहाड़ पर न चढ़े। उस वक़्त रब ने कहा, {5:6} “मैं रब तेरा ख़ुदा हूँ जो तुझे मुल्क-ए-मिस्र की ग़ुलामी से निकाल लाया। {5:7} मेरे सिवा किसी और माबूद की परस्तिश न करना। {5:8} अपने लिए बुत न बनाना। किसी भी चीज़ की मूरत न बनाना, चाहे वह आसमान में, ज़मीन पर या समुन्दर में हो। {5:9} न बुतों की परस्तिश, न उन की ख़िदमत करना, क्यूँकि मैं तेरा रब ग़यूर ख़ुदा हूँ। जो मुझ से नफ़रत करते हैं उन्हें मैं तीसरी और चौथी पुश्त तक सज़ा दूँगा। {5:10} लेकिन जो मुझ से मुहब्बत रखते और मेरे अह्काम पूरे करते हैं उन पर मैं हज़ार पुश्तों तक मेहरबानी करूँगा। {5:11} रब अपने ख़ुदा का नाम बेमक़्सद या ग़लत मक़्सद के लिए इस्तेमाल न करना। जो भी ऐसा करता है उसे रब सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ेगा। {5:12} सबत के दिन का ख़याल रखना। उसे इस तरह मनाना कि वह मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हो, उसी तरह जिस तरह रब तेरे ख़ुदा ने तुझे हुक्म दिया है। {5:13} हफ़्ते के पहले छः दिन अपना काम-काज कर, {5:14} लेकिन सातवाँ दिन रब तेरे ख़ुदा का आराम का दिन है। उस दिन किसी तरह का काम न करना। न तू, न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा नौकर, न तेरी नौकरानी, न तेरा बैल, न तेरा गधा, न तेरा कोई और मवेशी। जो परदेसी तेरे दरमियान रहता है वह भी काम न करे। तेरे नौकर और तेरी नौकरानी को तेरी तरह आराम का मौक़ा मिलना है। {5:15} याद रखना कि तू मिस्र में ग़ुलाम था और कि रब तेरा ख़ुदा ही तुझे बड़ी क़ुदरत और इख़तियार से वहाँ से निकाल लाया। इस लिए उस ने तुझे हुक्म दिया है कि सबत का दिन मनाना। {5:16} अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना जिस तरह रब तेरे ख़ुदा ने तुझे हुक्म दिया है। फिर तू उस मुल्क में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देने वाला है ख़ुशहाल होगा और देर तक जीता रहेगा। {5:17} क़त्ल न करना। {5:18} ज़िना न करना। {5:19} चोरी न करना। {5:20} अपने पड़ोसी के बारे में झूटी गवाही न देना। {5:21} अपने पड़ोसी की बीवी का लालच न करना। न उस के घर का, न उस की ज़मीन का, न उस के नौकर का, न उस की नौकरानी का, न उस के बैल और न उस के गधे का बल्कि उस की किसी भी चीज़ का लालच न करना।” {5:22} रब ने तुम सब को यह अह्काम दिए जब तुम सीना पहाड़ के दामन में जमा थे। वहाँ तुम ने आग, बादल और गहरे अंधेरे में से उस की ज़ोरदार आवाज़ सुनी। यही कुछ उस ने कहा और बस। फिर उस ने उन्हें पत्थर की दो तख़्तियों पर लिख कर मुझे दे दिया। {i5:23} लोग रब से डरते हैं {5:23} जब तुम ने तारीकी से यह आवाज़ सुनी और पहाड़ की जलती हुई हालत देखी तो तुम्हारे क़बीलों के राहनुमा और बुज़ुर्ग मेरे पास आए। {5:24} उन्हों ने कहा, “रब हमारे ख़ुदा ने हम पर अपना जलाल और अज़मत ज़ाहिर की है। आज हम ने आग में से उस की आवाज़ सुनी है। हम ने देख लिया है कि जब अल्लाह इन्सान से हमकलाम होता है तो ज़रूरी नहीं कि वह मर जाए। {5:25} लेकिन अब हम क्यूँ अपनी जान ख़तरे में डालें? अगर हम मज़ीद रब अपने ख़ुदा की आवाज़ सुनें तो यह बड़ी आग हमें भस्म कर देगी और हम अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे। {5:26} क्यूँकि फ़ानी इन्सानों में से कौन हमारी तरह ज़िन्दा ख़ुदा को आग में से बातें करते हुए सुन कर ज़िन्दा रहा है? कोई भी नहीं! {5:27} आप ही क़रीब जा कर उन तमाम बातों को सुनें जो रब हमारा ख़ुदा हमें बताना चाहता है। फिर लौट कर हमें वह बातें सुनाएँ। हम उन्हें सुनेंगे और उन पर अमल करेंगे।” {5:28} जब रब ने यह सुना तो उस ने मुझ से कहा, “मैं ने इन लोगों की यह बातें सुन ली हैं। वह ठीक कहते हैं। {5:29} काश उन की सोच हमेशा ऐसी ही हो! काश वह हमेशा इसी तरह मेरा ख़ौफ़ मानें और मेरे अह्काम पर अमल करें! अगर वह ऐसा करेंगे तो वह और उन की औलाद हमेशा कामयाब रहेंगे। {5:30} जा, उन्हें बता दे कि अपने ख़ैमों में लौट जाओ। {5:31} लेकिन तू यहाँ मेरे पास रह ताकि मैं तुझे तमाम क़वानीन और अह्काम दे दूँ। उन को लोगों को सिखाना ताकि वह उस मुल्क में उन के मुताबिक़ चलें जो मैं उन्हें दूँगा।” {5:32} चुनाँचे एहतियात से उन अह्काम पर अमल करो जो रब तुम्हारे ख़ुदा ने तुम्हें दिए हैं। उन से न दाईं तरफ़ हटो न बाईं तरफ़। {5:33} हमेशा उस राह पर चलते रहो जो रब तुम्हारे ख़ुदा ने तुम्हें बताई है। फिर तुम कामयाब होगे और उस मुल्क में देर तक जीते रहोगे जिस पर तुम क़ब्ज़ा करोगे। {i6:1} सब से बड़ा हुक्म {6:1} यह वह तमाम अह्काम हैं जो रब तुम्हारे ख़ुदा ने मुझे तुम्हें सिखाने के लिए कहा। उस मुल्क में इन पर अमल करना जिस में तुम जाने वाले हो ताकि उस पर क़ब्ज़ा करो। {6:2} उम्र भर तू, तेरे बच्चे और पोते-नवासे रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानें और उस के उन तमाम अह्काम पर चलें जो मैं तुझे दे रहा हूँ। तब तू देर तक जीता रहेगा। {6:3} ऐ इस्राईल, यह मेरी बातें सुन और बड़ी एहतियात से इन पर अमल कर! फिर रब तेरे ख़ुदा का वादा पूरा हो जाएगा कि तू कामयाब रहेगा और तेरी तादाद उस मुल्क में ख़ूब बढ़ती जाएगी जिस में दूध और शहद की कस्रत है। {6:4} सुन ऐ इस्राईल! रब हमारा ख़ुदा एक ही रब है। {6:5} रब अपने ख़ुदा से अपने पूरे दिल, अपनी पूरी जान और अपनी पूरी ताक़त से प्यार करना। {6:6} जो अह्काम मैं तुझे आज बता रहा हूँ उन्हें अपने दिल पर नक़्श कर। {6:7} उन्हें अपने बच्चों के ज़हननशीन करा। यही बातें हर वक़्त और हर जगह तेरे लबों पर हों ख़्वाह तू घर में बैठा या रास्ते पर चलता हो, लेटा हो या खड़ा हो। {6:8} उन्हें निशान के तौर पर और याददहानी के लिए अपने बाज़ूओं और माथे पर लगा। {6:9} उन्हें अपने घरों की चौखटों और अपने शहरों के दरवाज़ों पर लिख। {6:10} रब तेरे ख़ुदा का वादा पूरा होगा जो उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब के साथ किया कि मैं तुझे कनआन में ले जाऊँगा। जो बड़े और शानदार शहर उस में हैं वह तू ने ख़ुद नहीं बनाए। {6:11} जो मकान उस में हैं वह ऐसी अच्छी चीज़ों से भरे हुए हैं जो तू ने उन में नहीं रखीं। जो कुएँ उस में हैं उन को तू ने नहीं खोदा। जो अंगूर और ज़ैतून के बाग़ उस में हैं उन्हें तू ने नहीं लगाया। यह हक़ीक़त याद रख। जब तू उस मुल्क में कस्रत का खाना खा कर सेर हो जाएगा {6:12} तो ख़बरदार! रब को न भूलना जो तुझे मिस्र की ग़ुलामी से निकाल लाया। {6:13} रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानना। सिर्फ़ उसी की इबादत करना और उसी का नाम ले कर क़सम खाना। {6:14} दीगर माबूदों की पैरवी न करना। इस में तमाम पड़ोसी अक़्वाम के देवता भी शामिल हैं। {6:15} वर्ना रब तेरे ख़ुदा का ग़ज़ब तुझ पर नाज़िल हो कर तुझे मुल्क में से मिटा डालेगा। क्यूँकि वह ग़यूर ख़ुदा है और तेरे दरमियान ही रहता है। {6:16} रब अपने ख़ुदा को उस तरह न आज़माना जिस तरह तुम ने मस्सा में किया था। {6:17} ध्यान से रब अपने ख़ुदा के अह्काम के मुताबिक़ चलो, उन तमाम हिदायात और क़वानीन पर जो उस ने तुझे दिए हैं। {6:18} जो कुछ रब की नज़र में दुरुस्त और अच्छा है वह कर। फिर तू कामयाब रहेगा, तू जा कर उस अच्छे मुल्क पर क़ब्ज़ा करेगा जिस का वादा रब ने तेरे बापदादा से क़सम खा कर किया था। {6:19} तब रब की बात पूरी हो जाएगी कि तू अपने दुश्मनों को अपने आगे आगे निकाल देगा। {6:20} आने वाले दिनों में तेरे बच्चे पूछेंगे, “रब हमारे ख़ुदा ने आप को इन तमाम अह्काम पर अमल करने को क्यूँ कहा?” {6:21} फिर उन्हें जवाब देना, “हम मिस्र के बादशाह फ़िरऔन के ग़ुलाम थे, लेकिन रब हमें बड़ी क़ुदरत का इज़हार करके मिस्र से निकाल लाया। {6:22} हमारे देखते देखते उस ने बड़े बड़े निशान और मोजिज़े किए और मिस्र, फ़िरऔन और उस के पूरे घराने पर हौलनाक मुसीबतें भेजीं। {6:23} उस वक़्त वह हमें वहाँ से निकाल लाया ताकि हमें ले कर वह मुल्क दे जिस का वादा उस ने क़सम खा कर हमारे बापदादा के साथ किया था। {6:24} रब हमारे ख़ुदा ही ने हमें कहा कि इन तमाम अह्काम के मुताबिक़ चलो और रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानो। क्यूँकि अगर हम ऐसा करें तो फिर हम हमेशा कामयाब और ज़िन्दा रहेंगे। और आज तक ऐसा ही रहा है। {6:25} अगर हम रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर रह कर एहतियात से उन तमाम बातों पर अमल करेंगे जो उस ने हमें करने को कही हैं तो वह हमें रास्तबाज़ क़रार देगा।” {i7:1} दूसरी कनआनी क़ौमों को निकालना है {7:1} रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में ले जाएगा जिस पर तू जा कर क़ब्ज़ा करेगा। वह तेरे सामने से बहुत सी क़ौमें भगा देगा। गो यह सात क़ौमें यानी हित्ती, जिर्जासी, अमोरी, कनआनी, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी तादाद और ताक़त के लिहाज़ से तुझ से बड़ी होंगी {7:2} तो भी रब तेरा ख़ुदा उन्हें तेरे हवाले करेगा। जब तू उन्हें शिकस्त देगा तो उन सब को उस के लिए मख़्सूस करके हलाक कर देना है। न उन के साथ अह्द बांधना और न उन पर रहम करना। {7:3} उन में से किसी से शादी न करना। न अपनी बेटियों का रिश्ता उन के बेटों को देना, न अपने बेटों का रिश्ता उन की बेटियों से करना। {7:4} वर्ना वह तुम्हारे बच्चों को मेरी पैरवी से दूर करेंगे और वह मेरी नहीं बल्कि उन के देवताओं की ख़िदमत करेंगे। तब रब का ग़ज़ब तुम पर नाज़िल हो कर जल्दी से तुम्हें हलाक कर देगा। {7:5} इस लिए उन की क़ुर्बानगाहें ढा देना। जिन पत्थरों की वह पूजा करते हैं उन्हें चकनाचूर कर देना, उन के यसीरत देवी के खम्बे काट डालना और उन के बुत जला देना। {7:6} क्यूँकि तू रब अपने ख़ुदा के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस है। उस ने दुनिया की तमाम क़ौमों में से तुझे चुन कर अपनी क़ौम और ख़ास मिलकियत बनाया। {7:7} रब ने क्यूँ तुम्हारे साथ ताल्लुक़ क़ाइम किया और तुम्हें चुन लिया? क्या इस वजह से कि तुम तादाद में दीगर क़ौमों की निस्बत ज़्यादा थे? हरगिज़ नहीं! तुम तो बहुत कम थे। {7:8} बल्कि वजह यह थी कि रब ने तुम्हें प्यार किया और वह वादा पूरा किया जो उस ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा के साथ किया था। इसी लिए वह फ़िद्या दे कर तुम्हें बड़ी क़ुदरत से मिस्र की ग़ुलामी और उस मुल्क के बादशाह के हाथ से बचा लाया। {7:9} चुनाँचे जान ले कि सिर्फ़ रब तेरा ख़ुदा ही ख़ुदा है। वह वफ़ादार ख़ुदा है। जो उस से मुहब्बत रखते और उस के अह्काम पर अमल करते हैं उन के साथ वह अपना अह्द क़ाइम रखेगा और उन पर हज़ार पुश्तों तक मेहरबानी करेगा। {7:10} लेकिन उस से नफ़रत करने वालों को वह उन के रू-ब-रू मुनासिब सज़ा दे कर बर्बाद करेगा। हाँ, जो उस से नफ़रत करते हैं, उन के रू-ब-रू वह मुनासिब सज़ा देगा और झिजकेगा नहीं। {7:11} चुनाँचे ध्यान से उन तमाम अह्काम पर अमल कर जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ ताकि तू उन के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारे। {7:12} अगर तू उन पर तवज्जुह दे और एहतियात से उन पर चले तो फिर रब तेरा ख़ुदा तेरे साथ अपना अह्द क़ाइम रखेगा और तुझ पर मेहरबानी करेगा, बिलकुल उस वादे के मुताबिक़ जो उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से किया था। {7:13} वह तुझे प्यार करेगा और तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जो तुझे देने का वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से किया था। तुझे बहुत औलाद बख़्शने के इलावा वह तेरे खेतों को बरकत देगा, और तुझे कस्रत का अनाज, अंगूर और ज़ैतून हासिल होगा। वह तेरे रेवड़ों को भी बरकत देगा, और तेरे गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की तादाद बढ़ती जाएगी। {7:14} तुझे दीगर तमाम क़ौमों की निस्बत कहीं ज़्यादा बरकत मिलेगी। न तुझ में और न तेरे मवेशियों में बाँझपन पाया जाएगा। {7:15} रब हर बीमारी को तुझ से दूर रखेगा। वह तुझ में वह ख़तरनाक वबाएँ फैलने नहीं देगा जिन से तू मिस्र में वाक़िफ़ हुआ बल्कि उन्हें उन में फैलाएगा जो तुझ से नफ़रत रखते हैं। {7:16} जो भी क़ौमें रब तेरा ख़ुदा तेरे हाथ में कर देगा उन्हें तबाह करना लाज़िम है। उन पर रहम की निगाह से न देखना, न उन के देवताओं की ख़िदमत करना, वर्ना तू फंस जाएगा। {7:17} गो तेरा दिल कहे, “यह क़ौमें हम से ताक़तवर हैं। हम किस तरह इन्हें निकाल सकते हैं?” {7:18} तो भी उन से न डर। वही कुछ ज़हन में रख जो रब तेरे ख़ुदा ने फ़िरऔन और पूरे मिस्र के साथ किया। {7:19} क्यूँकि तू ने अपनी आँखों से रब अपने ख़ुदा की वह बड़ी आज़माने वाली मुसीबतें और मोजिज़े, उस का वह अज़ीम इख़तियार और क़ुदरत देखी जिस से वह तुझे वहाँ से निकाल लाया। वही कुछ रब तेरा ख़ुदा उन क़ौमों के साथ भी करेगा जिन से तू इस वक़्त डरता है। {7:20} न सिर्फ़ यह बल्कि रब तेरा ख़ुदा उन के दरमियान ज़म्बूर भी भेजेगा ताकि वह भी तबाह हो जाएँ जो पहले हम्लों से बच कर छुप गए हैं। {7:21} उन से दह्शत न खा, क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा तेरे दरमियान है। वह अज़ीम ख़ुदा है जिस से सब ख़ौफ़ खाते हैं। {7:22} वह रफ़्ता रफ़्ता उन क़ौमों को तेरे आगे से भगा देगा। तू उन्हें एक दम ख़त्म नहीं कर सकेगा, वर्ना जंगली जानवर तेज़ी से बढ़ कर तुझे नुक़्सान पहुचाएँगे। {7:23} रब तेरा ख़ुदा उन्हें तेरे हवाले कर देगा। वह उन में इतनी सख़्त अफ़्रा-तफ़्री पैदा करेगा कि वह बर्बाद हो जाएंगे। {7:24} वह उन के बादशाहों को भी तेरे क़ाबू में कर देगा, और तू उन का नाम-ओ-निशान मिटा देगा। कोई भी तेरा सामना नहीं कर सकेगा बल्कि तू उन सब को बर्बाद कर देगा। {7:25} उन के देवताओं के मुजस्समे जला देना। जो चाँदी और सोना उन पर चढ़ाया हुआ है उस का लालच न करना। उसे न लेना वर्ना तू फंस जाएगा। क्यूँकि इन चीज़ों से रब तेरे ख़ुदा को घिन आती है। {7:26} इस तरह की मकरूह चीज़ अपने घर में न लाना, वर्ना तुझे भी उस के साथ अलग करके बर्बाद किया जाएगा। तेरे दिल में उस से शदीद नफ़रत और घिन हो, क्यूँकि उसे पूरे तौर पर बर्बाद करने के लिए मख़्सूस किया गया है। {i8:1} रब को न भूलना {8:1} एहतियात से उन तमाम अह्काम पर अमल करो जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ। क्यूँकि ऐसा करने से तुम जीते रहोगे, तादाद में बढ़ोगे और जा कर उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करोगे जिस का वादा रब ने तुम्हारे बापदादा से क़सम खा कर किया था। {8:2} वह पूरा वक़्त याद रख जब रब तेरा ख़ुदा रेगिस्तान में 40 साल तक तेरी राहनुमाई करता रहा ताकि तुझे आजिज़ करके आज़माए और मालूम करे कि क्या तू उस के अह्काम पर चलेगा कि नहीं। {8:3} उस ने तुझे आजिज़ करके भूके होने दिया, फिर तुझे मन खिलाया जिस से न तू और न तेरे बापदादा वाक़िफ़ थे। क्यूँकि वह तुझे सिखाना चाहता था कि इन्सान की ज़िन्दगी सिर्फ़ रोटी पर मुन्हसिर नहीं होती बल्कि हर उस बात पर जो रब के मुँह से निकलती है। {8:4} इन 40 सालों के दौरान तेरे कपड़े न घिसे न फटे, न तेरे पाँओ सूजे। {8:5} चुनाँचे दिल में जान ले कि जिस तरह बाप अपने बेटे की तर्बीयत करता है उसी तरह रब हमारा ख़ुदा हमारी तर्बियत करता है। {8:6} रब अपने ख़ुदा के अह्काम पर अमल करके उस की राहों पर चल और उस का ख़ौफ़ मान। {8:7} क्यूँकि वह तुझे एक बेहतरीन मुल्क में ले जा रहा है जिस में नहरें और ऐसे चश्मे हैं जो पहाड़ियों और वादियों की ज़मीन से फूट निकलते हैं। {8:8} उस की पैदावार अनाज, जौ, अंगूर, अन्जीर, अनार, ज़ैतून और शहद है। {8:9} उस में रोटी की कमी नहीं होगी, और तू किसी चीज़ से महरूम नहीं रहेगा। उस के पत्थरों में लोहा पाया जाता है, और खुदाई से तू उस की पहाड़ियों से ताँबा हासिल कर सकेगा। {8:10} जब तू कस्रत का खाना खा कर सेर हो जाएगा तो फिर रब अपने ख़ुदा की तम्जीद करना जिस ने तुझे यह शानदार मुल्क दिया है। {8:11} ख़बरदार, रब अपने ख़ुदा को न भूल और उस के उन अह्काम पर अमल करने से गुरेज़ न कर जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ। {8:12} क्यूँकि जब तू कस्रत का खाना खा कर सेर हो जाएगा, तू शानदार घर बना कर उन में रहेगा {8:13} और तेरे रेवड़, सोने-चाँदी और बाक़ी तमाम माल में इज़ाफ़ा होगा {8:14} तो कहीं तू मग़रूर हो कर रब अपने ख़ुदा को भूल न जाए जो तुझे मिस्र की ग़ुलामी से निकाल लाया। {8:15} जब तू उस वसी और हौलनाक रेगिस्तान में सफ़र कर रहा था जिस में ज़हरीले साँप और बिच्छू थे तो वही तेरी राहनुमाई करता रहा। पानी से महरूम उस इलाक़े में वही सख़्त पत्थर में से पानी निकाल लाया। {8:16} रेगिस्तान में वही तुझे मन खिलाता रहा, जिस से तेरे बापदादा वाक़िफ़ न थे। इन मुश्किलात से वह तुझे आजिज़ करके आज़माता रहा ताकि आख़िरकार तू कामयाब हो जाए। {8:17} जब तुझे कामयाबी हासिल होगी तो यह न कहना कि मैं ने अपनी ही क़ुव्वत और ताक़त से यह सब कुछ हासिल किया है। {8:18} बल्कि रब अपने ख़ुदा को याद करना जिस ने तुझे दौलत हासिल करने की क़ाबिलियत दी है। क्यूँकि वह आज भी उसी अह्द पर क़ाइम है जो उस ने तेरे बापदादा से किया था। {8:19} रब अपने ख़ुदा को न भूलना, और न दीगर माबूदों के पीछे पड़ कर उन्हें सिज्दा और उन की ख़िदमत करना। वर्ना मैं ख़ुद गवाह हूँ कि तुम यक़ीनन हलाक हो जाओगे। {8:20} अगर तुम रब अपने ख़ुदा की इताअत नहीं करोगे तो फिर वह तुम्हें उन क़ौमों की तरह तबाह कर देगा जो तुम से पहले इस मुल्क में रहती थीं। {i9:1} मुल्क मिलने का सबब इस्राईल की रास्ती नहीं है {9:1} सुन ऐ इस्राईल! आज तू दरया-ए-यर्दन को पार करने वाला है। दूसरी तरफ़ तू ऐसी क़ौमों को भगा देगा जो तुझ से बड़ी और ताक़तवर हैं और जिन के शानदार शहरों की फ़सीलें आसमान से बातें करती हैं। {9:2} वहाँ अनाक़ी बसते हैं जो ताक़तवर और दराज़क़द हैं। तू ख़ुद जानता है कि उन के बारे में कहा जाता है, “कौन अनाक़ियों का सामना कर सकता है?” {9:3} लेकिन आज जान ले कि रब तेरा ख़ुदा तेरे आगे आगे चलते हुए उन्हें भस्म कर देने वाली आग की तरह हलाक करेगा। वह तेरे आगे आगे उन पर क़ाबू पाएगा, और तू उन्हें निकाल कर जल्दी मिटा देगा, जिस तरह रब ने वादा किया है। {9:4} जब रब तेरा ख़ुदा उन्हें तेरे सामने से निकाल देगा तो तू यह न कहना, “मैं रास्तबाज़ हूँ, इसी लिए रब मुझे लाइक़ समझ कर यहाँ लाया और यह मुल्क मीरास में दे दिया है।” यह बात हरगिज़ दुरुस्त नहीं है। रब उन क़ौमों को उन की ग़लत हरकतों की वजह से तेरे सामने से निकाल देगा। {9:5} तू अपनी रास्तबाज़ी और दयानतदारी की बिना पर उस मुल्क पर क़ब्ज़ा नहीं करेगा बल्कि रब उन्हें उन की शरीर हरकतों के बाइस तेरे सामने से निकाल देगा। दूसरे, जो वादा उस ने तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब के साथ क़सम खा कर किया था उसे पूरा होना है। {9:6} चुनाँचे जान ले कि रब तेरा ख़ुदा तुझे तेरी रास्ती के बाइस यह अच्छा मुल्क नहीं दे रहा। हक़ीक़त तो यह है कि तू हटधर्म क़ौम है। {i9:7} सोने का बछड़ा {9:7} याद रख और कभी न भूल कि तू ने रेगिस्तान में रब अपने ख़ुदा को किस तरह नाराज़ किया। मिस्र से निकलते वक़्त से ले कर यहाँ पहुँचने तक तुम रब से सरकश रहे हो। {9:8} ख़ासकर होरिब यानी सीना के दामन में तुम ने रब को इतना ग़ुस्सा दिलाया कि वह तुम्हें हलाक करने को था। {9:9} उस वक़्त मैं पहाड़ पर चढ़ गया था ताकि पत्थर की तख़्तियाँ यानी उस अह्द की तख़्तियाँ मिल जाएँ जो रब ने तुम्हारे साथ बांधा था। कुछ खाए पिए बग़ैर मैं 40 दिन और रात वहाँ रहा। {9:10} जो कुछ रब ने आग में से कहा था जब तुम पहाड़ के दामन में {9:11} जमा थे वही कुछ उस ने अपनी उंगली से दोनों तख़्तियों पर लिख कर मुझे दिया। {9:12} उस ने मुझ से कहा, “फ़ौरन यहाँ से उतर जा। तेरी क़ौम जिसे तू मिस्र से निकाल लाया बिगड़ गई है। वह कितनी जल्दी से मेरे अह्काम से हट गए हैं। उन्हों ने अपने लिए बुत ढाल लिया है। {9:13} मैं ने जान लिया है कि यह क़ौम कितनी ज़िद्दी है। {9:14} अब मुझे छोड़ दे ताकि मैं उन्हें तबाह करके उन का नाम-ओ-निशान दुनिया में से मिटा डालूँ। उन की जगह मैं तुझ से एक क़ौम बना लूँगा जो उन से बड़ी और ताक़तवर होगी।” {9:15} मैं मुड़ कर पहाड़ से उतरा जो अब तक भड़क रहा था। मेरे हाथों में अह्द की दोनों तख़्तियाँ थीं। {9:16} तुम्हें देखते ही मुझे मालूम हुआ कि तुम ने रब अपने ख़ुदा का गुनाह किया है। तुम ने अपने लिए बछड़े का बुत ढाल लिया था। तुम कितनी जल्दी से रब की मुक़र्ररा राह से हट गए थे। {9:17} तब मैं ने तुम्हारे देखते देखते दोनों तख़्तियों को ज़मीन पर पटख़ कर टुकड़े टुकड़े कर दिया। {9:18} एक और बार मैं रब के सामने मुँह के बल गिरा। मैं ने न कुछ खाया, न कुछ पिया। 40 दिन और रात मैं तुम्हारे तमाम गुनाहों के बाइस इसी हालत में रहा। क्यूँकि जो कुछ तुम ने किया था वह रब को निहायत बुरा लगा, इस लिए वह ग़ज़बनाक हो गया था। {9:19} वह तुम से इतना नाराज़ था कि मैं बहुत डर गया। यूँ लग रहा था कि वह तुम्हें हलाक कर देगा। लेकिन इस बार भी उस ने मेरी सुन ली। {9:20} मैं ने हारून के लिए भी दुआ की, क्यूँकि रब उस से भी निहायत नाराज़ था और उसे हलाक कर देना चाहता था। {9:21} जो बछड़ा तुम ने गुनाह करके बनाया था उसे मैं ने जला दिया, फिर जो कुछ बाक़ी रह गया उसे कुचल दिया और पीस पीस कर पाउडर बना दिया। यह पाउडर मैं ने उस चश्मे में फैंक दिया जो पहाड़ पर से बह रहा था। {9:22} तुम ने रब को तबएरा, मस्सा और क़ब्रोत-हत्तावा में भी ग़ुस्सा दिलाया। {9:23} क़ादिस-बर्नीअ में भी ऐसा ही हुआ। वहाँ से रब ने तुम्हें भेज कर कहा था, “जाओ, उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करो जो मैं ने तुम्हें दे दिया है।” लेकिन तुम ने सरकश हो कर रब अपने ख़ुदा के हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी की। तुम ने उस पर एतिमाद न किया, न उस की सुनी। {9:24} जब से मैं तुम्हें जानता हूँ तुम्हारा रब के साथ रवय्या बाग़ियाना ही रहा है। {9:25} मैं 40 दिन और रात रब के सामने ज़मीन पर मुँह के बल रहा, क्यूँकि रब ने कहा था कि वह तुम्हें हलाक कर देगा। {9:26} मैं ने उस से मिन्नत करके कहा, “ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, अपनी क़ौम को तबाह न कर। वह तो तेरी ही मिलकियत है जिसे तू ने फ़िद्या दे कर अपनी अज़ीम क़ुदरत से बचाया और बड़े इख़तियार के साथ मिस्र से निकाल लाया। {9:27} अपने ख़ादिमों इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब को याद कर, और इस क़ौम की ज़िद, शरीर हरकतों और गुनाह पर तवज्जुह न दे। {9:28} वर्ना मिस्री कहेंगे, ‘रब उन्हें उस मुल्क में लाने के क़ाबिल नहीं था जिस का वादा उस ने किया था, बल्कि वह उन से नफ़रत करता था। हाँ, वह उन्हें हलाक करने के लिए रेगिस्तान में ले आया।’ {9:29} वह तो तेरी क़ौम हैं, तेरी मिलकियत जिसे तू अपनी अज़ीम क़ुदरत और इख़तियार से मिस्र से निकाल लाया।” {i10:1} मूसा को नई तख़्तियाँ मिलती हैं {10:1} उस वक़्त रब ने मुझ से कहा, “पत्थर की दो और तख़्तियाँ तराशना जो पहली तख़्तियों की मानिन्द हों। उन्हें ले कर मेरे पास पहाड़ पर चढ़ आ। लकड़ी का सन्दूक़ भी बनाना। {10:2} फिर मैं इन तख़्तियों पर दुबारा वही बातें लिखूँगा जो मैं उन तख़्तियों पर लिख चुका था जो तू ने तोड़ डालीं। तुम्हें उन्हें सन्दूक़ में मह्फ़ूज़ रखना है।” {10:3} मैं ने कीकर की लकड़ी का सन्दूक़ बनवाया और दो तख़्तियाँ तराशीं जो पहली तख़्तियों की मानिन्द थीं। फिर मैं दोनों तख़्तियाँ ले कर पहाड़ पर चढ़ गया। {10:4} रब ने उन तख़्तियों पर दुबारा वह दस अह्काम लिख दिए जो वह पहली तख़्तियों पर लिख चुका था। (उन ही अह्काम का एलान उस ने पहाड़ पर आग में से किया था जब तुम उस के दामन में जमा थे।) फिर उस ने यह तख़्तियाँ मेरे सपुर्द कीं। {10:5} मैं लौट कर उतरा और तख़्तियों को उस सन्दूक़ में रखा जो मैं ने बनाया था। वहाँ वह अब तक हैं। सब कुछ वैसा ही हुआ जैसा रब ने हुक्म दिया था। {i10:6} इमामों और लावियों की ख़िदमत {10:6} (इस के बाद इस्राईली बनी-याक़ान के कुओं से रवाना हो कर मौसीरा पहुँचे। वहाँ हारून फ़ौत हुआ। उसे दफ़न करने के बाद उस का बेटा इलीअज़र उस की जगह इमाम बना। {10:7} फिर वह आगे सफ़र करते करते जुदजूदा, फिर युत्बाता पहुँचे जहाँ नहरें हैं। {10:8} उन दिनों में रब ने लावी के क़बीले को अलग करके उसे रब के अह्द के सन्दूक़ को उठा कर ले जाने, रब के हुज़ूर ख़िदमत करने और उस के नाम से बरकत देने की ज़िम्मादारी दी। आज तक यह उन की ज़िम्मादारी रही है। {10:9} इस वजह से लावियों को दीगर क़बीलों की तरह न हिस्सा न मीरास मिली। रब तेरा ख़ुदा ख़ुद उन की मीरास है। उस ने ख़ुद उन्हें यह फ़रमाया है।) {10:10} जब मैं ने दूसरी मर्तबा 40 दिन और रात पहाड़ पर गुज़ारे तो रब ने इस दफ़ा भी मेरी सुनी और तुझे हलाक न करने पर आमादा हुआ। {10:11} उस ने कहा, “जा, क़ौम की राहनुमाई कर ताकि वह जा कर उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करें जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर उन के बापदादा से किया था।” {i10:12} रब का ख़ौफ़ {10:12} ऐ इस्राईल, अब मेरी बात सुन! रब तेरा ख़ुदा तुझ से क्या तक़ाज़ा करता है? सिर्फ़ यह कि तू उस का ख़ौफ़ माने, उस की तमाम राहों पर चले, उसे प्यार करे, अपने पूरे दिल-ओ-जान से उस की ख़िदमत करे {10:13} और उस के तमाम अह्काम पर अमल करे। आज मैं उन्हें तुझे तेरी बेहतरी के लिए दे रहा हूँ। {10:14} पूरा आसमान, ज़मीन और जो कुछ उस पर है, सब का मालिक रब तेरा ख़ुदा है। {10:15} तो भी उस ने तेरे बापदादा पर ही अपनी ख़ास शफ़्क़त का इज़हार करके उन से मुहब्बत की। और उस ने तुम्हें चुन कर दूसरी तमाम क़ौमों पर तर्जीह दी जैसा कि आज ज़ाहिर है। {10:16} ख़तना उस की क़ौम का निशान है, लेकिन ध्यान रखो कि वह न सिर्फ़ ज़ाहिरी बल्कि बातिनी भी हो। आइन्दा अड़ न जाओ। {10:17} क्यूँकि रब तुम्हारा ख़ुदा ख़ुदाओं का ख़ुदा और रबों का रब है। वह अज़ीम और ज़ोरावर ख़ुदा है जिस से सब ख़ौफ़ खाते हैं। वह जानिबदारी नहीं करता और रिश्वत नहीं लेता। {10:18} वह यतीमों और बेवाओं का इन्साफ़ करता है। वह परदेसी से प्यार करता और उसे ख़ुराक और पोशाक मुहय्या करता है। {10:19} तुम भी उन के साथ मुहब्बत से पेश आओ, क्यूँकि तुम भी मिस्र में परदेसी थे। {10:20} रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मान और उस की ख़िदमत कर। उस से लिपटा रह और उसी के नाम की क़सम खा। {10:21} वही तेरा फ़ख़र है। वह तेरा ख़ुदा है जिस ने वह तमाम अज़ीम और डराउने काम किए जो तू ने ख़ुद देखे। {10:22} जब तेरे बापदादा मिस्र गए थे तो 70 अफ़राद थे। और अब रब तेरे ख़ुदा ने तुझे सितारों की मानिन्द बेशुमार बना दिया है। {i11:1} रब से मुहब्बत रख और उस की सुन {11:1} रब अपने ख़ुदा से प्यार कर और हमेशा उस के अह्काम के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ार। {11:2} आज जान लो कि तुम्हारे बच्चों ने नहीं बल्कि तुम ही ने रब अपने ख़ुदा से तर्बियत पाई। तुम ने उस की अज़मत, बड़े इख़तियार और क़ुदरत को देखा, {11:3} और तुम उन मोजिज़ों के गवाह हो जो उस ने मिस्र के बादशाह फ़िरऔन और उस के पूरे मुल्क के सामने किए। {11:4} तुम ने देखा कि रब ने किस तरह मिस्री फ़ौज को उस के घोड़ों और रथों समेत बहर-ए-क़ुल्ज़ुम में ग़र्क़ कर दिया जब वह तुम्हारा ताक़्क़ुब कर रहे थे। उस ने उन्हें यूँ तबाह किया कि वह आज तक बहाल नहीं हुए। {11:5} तुम्हारे बच्चे नहीं बल्कि तुम ही गवाह हो कि यहाँ पहुँचने से पहले रब ने रेगिस्तान में तुम्हारी किस तरह देख-भाल की। {11:6} तुम ने उस का इलियाब के बेटों दातन और अबीराम के साथ सुलूक देखा जो रूबिन के क़बीले के थे। उस दिन ज़मीन ने ख़ैमागाह के अन्दर मुँह खोल कर उन्हें उन के घरानों, डेरों और तमाम जानदारों समेत हड़प कर लिया। {11:7} तुम ने अपनी ही आँखों से रब के यह तमाम अज़ीम काम देखे हैं। {11:8} चुनाँचे उन तमाम अह्काम पर अमल करते रहो जो मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ ताकि तुम्हें वह ताक़त हासिल हो जो दरकार होगी जब तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके मुल्क पर क़ब्ज़ा करोगे। {11:9} अगर तुम फ़रमाँबरदार रहो तो देर तक उस मुल्क में जीते रहोगे जिस का वादा रब ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा से किया था और जिस में दूध और शहद की कस्रत है। {11:10} क्यूँकि यह मुल्क मिस्र की मानिन्द नहीं है जहाँ से तुम निकल आए हो। वहाँ के खेतों में तुझे बीज बो कर बड़ी मेहनत से उस की आबपाशी करनी पड़ती थी {11:11} जबकि जिस मुल्क पर तुम क़ब्ज़ा करोगे उस में पहाड़ और वादियाँ हैं जिन्हें सिर्फ़ बारिश का पानी सेराब करता है। {11:12} रब तेरा ख़ुदा ख़ुद उस मुल्क का ख़याल रखता है। रब तेरे ख़ुदा की आँखें साल के पहले दिन से ले कर आख़िर तक मुतवातिर उस पर लगी रहती हैं। {11:13} चुनाँचे उन अह्काम के ताबे रहो जो मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। रब अपने ख़ुदा से प्यार करो और अपने पूरे दिल-ओ-जान से उस की ख़िदमत करो। {11:14} फिर वह ख़रीफ़ और बहार की सालाना बारिश वक़्त पर भेजेगा। अनाज, अंगूर और ज़ैतून की फ़सलें पकेंगी, और तू उन्हें जमा कर लेगा। {11:15} नीज़, अल्लाह तेरी चरागाहों में तेरे रेवड़ों के लिए घास मुहय्या करेगा, और तू खा कर सेर हो जाएगा। {11:16} लेकिन ख़बरदार, कहीं तुम्हें वरग़लाया न जाए। ऐसा न हो कि तुम रब की राह से हट जाओ और दीगर माबूदों को सिज्दा करके उन की ख़िदमत करो। {11:17} वर्ना रब का ग़ज़ब तुम पर आन पड़ेगा, और वह मुल्क में बारिश होने नहीं देगा। तुम्हारी फ़सलें नहीं पकेंगी, और तुम्हें जल्द ही उस अच्छे मुल्क में से मिटा दिया जाएगा जो रब तुम्हें दे रहा है। {11:18} चुनाँचे मेरी यह बातें अपने दिलों पर नक़्श कर लो। उन्हें निशान के तौर पर और याददहानी के लिए अपने हाथों और माथों पर लगाओ। {11:19} उन्हें अपने बच्चों को सिखाओ। हर जगह और हमेशा उन के बारे में बात करो, ख़्वाह तू घर में बैठा या रास्ते पर चलता हो, लेटा हो या खड़ा हो। {11:20} उन्हें अपने घरों की चौखटों और अपने शहरों के दरवाज़ों पर लिख {11:21} ताकि जब तक ज़मीन पर आसमान क़ाइम है तुम और तुम्हारी औलाद उस मुल्क में जीते रहें जिस का वादा रब ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा से किया था। {11:22} एहतियात से उन अह्काम की पैरवी करो जो मैं तुम्हें दे रहा हूँ। रब अपने ख़ुदा से प्यार करो, उस के तमाम अह्काम पर अमल करो और उस के साथ लिपटे रहो। {11:23} फिर वह तुम्हारे आगे आगे यह तमाम क़ौमें निकाल देगा और तुम ऐसी क़ौमों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करोगे जो तुम से बड़ी और ताक़तवर हैं। {11:24} तुम जहाँ भी क़दम रखोगे वह तुम्हारा ही होगा, जुनूबी रेगिस्तान से ले कर लुबनान तक, दरया-ए-फ़ुरात से बहीरा-ए-रूम तक। {11:25} कोई भी तुम्हारा सामना नहीं कर सकेगा। तुम उस मुल्क में जहाँ भी जाओगे वहाँ रब तुम्हारा ख़ुदा अपने वादे के मुताबिक़ तुम्हारी दह्शत और ख़ौफ़ पैदा कर देगा। {11:26} आज तुम ख़ुद फ़ैसला करो। क्या तुम रब की बरकत या उस की लानत पाना चाहते हो? {11:27} अगर तुम रब अपने ख़ुदा के उन अह्काम पर अमल करो जो मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ तो वह तुम्हें बरकत देगा। {11:28} लेकिन अगर तुम उन के ताबे न रहो बल्कि मेरी पेशकरदा राह से हट कर दीगर माबूदों की पैरवी करो तो वह तुम पर लानत भेजेगा। {11:29} जब रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में ले जाएगा जिस पर तू क़ब्ज़ा करेगा तो लाज़िम है कि गरिज़ीम पहाड़ पर चढ़ कर बरकत का एलान करे और ऐबाल पहाड़ पर लानत का। {11:30} यह दो पहाड़ दरया-ए-यर्दन के मग़रिब में उन कनआनियों के इलाक़े में वाक़े हैं जो वादी-ए-यर्दन में आबाद हैं। वह मग़रिब की तरफ़ जिल्जाल शहर के सामने मोरिह के बलूत के दरख़्तों के नज़्दीक हैं। {11:31} अब तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करने वाले हो जो रब तुम्हारा ख़ुदा तुम्हें दे रहा है। जब तुम उसे अपना कर उस में आबाद हो जाओगे {11:32} तो एहतियात से उन तमाम अह्काम पर अमल करते रहो जो मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ। {i12:1} मुल्क में रब के अह्काम {12:1} ज़ैल में वह अह्काम और क़वानीन हैं जिन पर तुम्हें ध्यान से अमल करना होगा जब तुम उस मुल्क में आबाद होगे जो रब तेरे बापदादा का ख़ुदा तुझे दे रहा है ताकि तू उस पर क़ब्ज़ा करे। मुल्क में रहते हुए उम्र भर उन के ताबे रहो। {i12:2} मुल्क में एक ही जगह पर मक़्दिस हो {12:2} उन तमाम जगहों को बर्बाद करो जहाँ वह क़ौमें जिन्हें तुम्हें निकालना है अपने देवताओं की पूजा करती हैं, ख़्वाह वह ऊँचे पहाड़ों, पहाड़ियों या घने दरख़्तों के साय में क्यूँ न हों। {12:3} उन की क़ुर्बानगाहों को ढा देना। जिन पत्थरों की पूजा वह करते हैं उन्हें चकनाचूर कर देना। यसीरत देवी के खम्बे जला देना। उन के देवताओं के मुजस्समे काट डालना। ग़रज़ इन जगहों से उन का नाम-ओ-निशान मिट जाए। {12:4} रब अपने ख़ुदा की परस्तिश करने के लिए उन के तरीक़े न अपनाना। {12:5} रब तुम्हारा ख़ुदा क़बीलों में से अपने नाम की सुकूनत के लिए एक जगह चुन लेगा। इबादत के लिए वहाँ जाया करो, {12:6} और वहाँ अपनी तमाम क़ुर्बानियाँ ला कर पेश करो, ख़्वाह वह भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ, ज़बह की क़ुर्बानियाँ, पैदावार का दसवाँ हिस्सा, उठाने वाली क़ुर्बानियाँ, मन्नत के हदिए, ख़ुशी से पेश की गई क़ुर्बानियाँ या मवेशियों के पहलौठे क्यूँ न हों। {12:7} वहाँ रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर अपने घरानों समेत खाना खा कर उन कामयाबियों की ख़ुशी मनाओ जो तुझे रब तेरे ख़ुदा की बरकत के बाइस हासिल हुई हैं। {12:8} उस वक़्त तुम्हें वह नहीं करना जो हम करते आए हैं। आज तक हर कोई अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ इबादत करता है, {12:9} क्यूँकि अब तक तुम आराम की उस जगह नहीं पहुँचे जो तुझे रब तेरे ख़ुदा से मीरास में मिलनी है। {12:10} लेकिन जल्द ही तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके उस मुल्क में आबाद हो जाओगे जो रब तुम्हारा ख़ुदा तुम्हें मीरास में दे रहा है। उस वक़्त वह तुम्हें इर्दगिर्द के दुश्मनों से बचाए रखेगा, और तुम आराम और सुकून से ज़िन्दगी गुज़ार सकोगे। {12:11} तब रब तुम्हारा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए एक जगह चुन लेगा, और तुम्हें सब कुछ जो मैं बताऊँगा वहाँ ला कर पेश करना है, ख़्वाह वह भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ, ज़बह की क़ुर्बानियाँ, पैदावार का दसवाँ हिस्सा, उठाने वाली क़ुर्बानियाँ या मन्नत के ख़ास हदिए क्यूँ न हों। {12:12} वहाँ रब के सामने तुम, तुम्हारे बेटे-बेटियाँ, तुम्हारे ग़ुलाम और लौंडियाँ ख़ुशी मनाएँ। अपने शहरों में आबाद लावियों को भी अपनी ख़ुशी में शरीक करो, क्यूँकि उन के पास मौरूसी ज़मीन नहीं होगी। {12:13} ख़बरदार, अपनी भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ हर जगह पर पेश न करना {12:14} बल्कि सिर्फ़ उस जगह पर जो रब क़बीलों में से चुनेगा। वहीं सब कुछ यूँ मना जिस तरह मैं तुझे बताता हूँ। {12:15} लेकिन वह जानवर इस में शामिल नहीं हैं जो तू क़ुर्बानी के तौर पर पेश नहीं करना चाहता बल्कि सिर्फ़ खाना चाहता है। ऐसे जानवर तू आज़ादी से अपने तमाम शहरों में ज़बह करके उस बरकत के मुताबिक़ खा सकता है जो रब तेरे ख़ुदा ने तुझे दी है। ऐसा गोश्त हिरन और ग़ज़ाल के गोश्त की मानिन्द है यानी पाक और नापाक दोनों ही उसे खा सकते हैं। {12:16} लेकिन ख़ून न खाना। उसे पानी की तरह ज़मीन पर उंडेल कर ज़ाए कर देना। {12:17} जो भी चीज़ें रब के लिए मख़्सूस की गई हैं उन्हें अपने शहरों में न खाना मसलन अनाज, अंगूर के रस और ज़ैतून के तेल का दसवाँ हिस्सा, मवेशियों के पहलौठे, मन्नत के हदिए, ख़ुशी से पेश की गई क़ुर्बानियाँ और उठाने वाली क़ुर्बानियाँ। {12:18} यह चीज़ें सिर्फ़ रब के हुज़ूर खाना यानी उस जगह पर जिसे वह मक़्दिस के लिए चुनेगा। वहीं तू अपने बेटे-बेटियों, ग़ुलामों, लौंडियों और अपने क़बाइली इलाक़े के लावियों के साथ जमा हो कर ख़ुशी मना कि रब ने हमारी मेहनत को बरकत दी है। {12:19} अपने मुल्क में लावियों की ज़रूरियात उम्र भर पूरी करने की फ़िक्र रख। {12:20} जब रब तेरा ख़ुदा अपने वादे के मुताबिक़ तेरी सरहद्दें बढ़ा देगा और तू गोश्त खाने की ख़्वाहिश रखेगा तो जिस तरह जी चाहे गोश्त खा सकेगा। {12:21} अगर तेरा घर उस मक़्दिस से दूर हो जिसे रब तेरा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा तो तू जिस तरह जी चाहे अपने शहरों में रब से मिले हुए मवेशियों को ज़बह करके खा सकता है। लेकिन ऐसा ही करना जैसा मैं ने हुक्म दिया है। {12:22} ऐसा गोश्त हिरन और ग़ज़ाल के गोश्त की मानिन्द है यानी पाक और नापाक दोनों ही उसे खा सकते हैं। {12:23} अलबत्ता गोश्त के साथ ख़ून न खाना, क्यूँकि ख़ून जानदार की जान है। उस की जान गोश्त के साथ न खाना। {12:24} ख़ून न खाना बल्कि उसे ज़मीन पर उंडेल कर ज़ाए कर देना। {12:25} उसे न खाना ताकि तुझे और तेरी औलाद को कामयाबी हासिल हो, क्यूँकि ऐसा करने से तू रब की नज़र में सहीह काम करेगा। {12:26} लेकिन जो चीज़ें रब के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हैं या जो तू ने मन्नत मान कर उस के लिए मख़्सूस की हैं लाज़िम है कि तू उन्हें उस जगह ले जाए जिसे रब मक़्दिस के लिए चुनेगा। {12:27} वहीं, रब अपने ख़ुदा की क़ुर्बानगाह पर अपनी भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ गोश्त और ख़ून समेत चढ़ा। ज़बह की क़ुर्बानियों का ख़ून क़ुर्बानगाह पर उंडेल देना, लेकिन उन का गोश्त तू खा सकता है। {12:28} जो भी हिदायात मैं तुझे दे रहा हूँ उन्हें एहतियात से पूरा कर। फिर तू और तेरी औलाद ख़ुशहाल रहेंगे, क्यूँकि तू वह कुछ करेगा जो रब तेरे ख़ुदा की नज़र में अच्छा और दुरुस्त है। {12:29} रब तेरा ख़ुदा उन क़ौमों को मिटा देगा जिन की तरफ़ तू बढ़ रहा है। तू उन्हें उन के मुल्क से निकालता जाएगा और ख़ुद उस में आबाद हो जाएगा। {12:30} लेकिन ख़बरदार, उन के ख़त्म होने के बाद भी उन के देवताओं के बारे में मालूमात हासिल न कर, वर्ना तू फंस जाएगा। मत कहना कि यह क़ौमें किस तरीक़े से अपने देवताओं की पूजा करती हैं? हम भी ऐसा ही करें। {12:31} ऐसा मत कर! यह क़ौमें ऐसे घिनौने तरीक़े से पूजा करती हैं जिन से रब नफ़रत करता है। वह अपने बच्चों को भी जला कर अपने देवताओं को पेश करते हैं। {12:32} कलाम की जो भी बात मैं तुम्हें पेश करता हूँ उस के ताबे रह कर उस पर अमल करो। न किसी बात का इज़ाफ़ा करना, न कोई बात निकालना। {i13:1} देवताओं की तरफ़ लेजाने वालों से सुलूक {13:1} तेरे दरमियान ऐसे लोग उठ खड़े होंगे जो अपने आप को नबी या ख़्वाब देखने वाले कहेंगे। हो सकता है कि वह किसी इलाही निशान या मोजिज़े का एलान करें {13:2} जो वाक़ई वुजूद में आए। साथ साथ वह कहें, “आ, हम दीगर माबूदों की पूजा करें, हम उन की ख़िदमत करें जिन से तू अब तक वाक़िफ़ नहीं है।” {13:3} ऐसे लोगों की न सुन। इस से रब तुम्हारा ख़ुदा तुम्हें आज़मा कर मालूम कर रहा है कि क्या तुम वाक़ई अपने पूरे दिल-ओ-जान से उस से प्यार करते हो। {13:4} तुम्हें रब अपने ख़ुदा की पैरवी करना और उसी का ख़ौफ़ मानना है। उस के अह्काम के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारो, उस की सुनो, उस की ख़िदमत करो, उस के साथ लिपटे रहो। {13:5} ऐसे नबियों या ख़्वाब देखने वालों को सज़ा-ए-मौत देना, क्यूँकि वह तुझे रब तुम्हारे ख़ुदा से बग़ावत करने पर उकसाना चाहते हैं, उसी से जिस ने फ़िद्या दे कर तुम्हें मिस्र की ग़ुलामी से बचाया और वहाँ से निकाल लाया। चूँकि वह तुझे उस राह से हटाना चाहते हैं जिसे रब तेरे ख़ुदा ने तेरे लिए मुक़र्रर किया है इस लिए लाज़िम है कि उन्हें सज़ा-ए-मौत दी जाए। ऐसी बुराई अपने दरमियान से मिटा देना। {13:6} हो सकता है कि तेरा सगा भाई, तेरा बेटा या बेटी, तेरी बीवी या तेरा क़रीबी दोस्त तुझे चुपके से वरग़लाने की कोशिश करे कि आ, हम जा कर दीगर माबूदों की पूजा करें, ऐसे देवताओं की जिन से न तू और न तेरे बापदादा वाक़िफ़ थे। {13:7} ख़्वाह इर्दगिर्द की या दूरदराज़ की क़ौमों के देवता हों, ख़्वाह दुनिया के एक सिरे के या दूसरे सिरे के माबूद हों, {13:8} किसी सूरत में अपनी रज़ामन्दी का इज़हार न कर, न उस की सुन। उस पर रहम न कर। न उसे बचाए रख, न उसे पनाह दे {13:9} बल्कि उसे सज़ा-ए-मौत दे। और उसे संगसार करते वक़्त पहले तेरा हाथ उस पर पत्थर फैंके, फिर ही बाक़ी तमाम लोग हिस्सा लें। {13:10} उसे ज़रूर पत्थरों से सज़ा-ए-मौत देना, क्यूँकि उस ने तुझे रब तेरे ख़ुदा से दूर करने की कोशिश की, उसी से जो तुझे मिस्र की ग़ुलामी से निकाल लाया। {13:11} फिर तमाम इस्राईल यह सुन कर डर जाएगा और आइन्दा तेरे दरमियान ऐसी शरीर हरकत करने की जुरअत नहीं करेगा। {13:12} जब तू उन शहरों में रहने लगेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे दे रहा है तो शायद तुझे ख़बर मिल जाए {13:13} कि शरीर लोग तेरे दरमियान से उभर आए हैं जो अपने शहर के बाशिन्दों को यह कह कर ग़लत राह पर लाए हैं कि आओ, हम दीगर माबूदों की पूजा करें, ऐसे माबूदों की जिन से तुम वाक़िफ़ नहीं हो। {13:14} लाज़िम है कि तू दरयाफ़्त करके इस की तफ़्तीश करे और ख़ूब मालूम करे कि क्या हुआ है। अगर साबित हो जाए कि यह घिनौनी बात वाक़ई हुई है {13:15} तो फिर लाज़िम है कि तू शहर के तमाम बाशिन्दों को हलाक करे। उसे रब के सपुर्द करके सरासर तबाह करना, न सिर्फ़ उस के लोग बल्कि उस के मवेशी भी। {13:16} शहर का पूरा माल-ए-ग़नीमत चौक में इकट्ठा कर। फिर पूरे शहर को उस के माल समेत रब के लिए मख़्सूस करके जला देना। उसे दुबारा कभी न तामीर किया जाए बल्कि उस के खंडरात हमेशा तक रहें। {13:17} पूरा शहर रब के लिए मख़्सूस किया गया है, इस लिए उस की कोई भी चीज़ तेरे पास न पाई जाए। सिर्फ़ इस सूरत में रब का ग़ज़ब ठंडा हो जाएगा, और वह तुझ पर रहम करके अपनी मेहरबानी का इज़हार करेगा और तेरी तादाद बढ़ाएगा, जिस तरह उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से वादा किया है। {13:18} लेकिन यह सब कुछ इस पर मब्नी है कि तू रब अपने ख़ुदा की सुने और उस के उन तमाम अह्काम पर अमल करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। वही कुछ कर जो उस की नज़र में दुरुस्त है। {i14:1} पाक और नापाक जानवर {14:1} तुम रब अपने ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हो। अपने आप को मुर्दों के सबब से न ज़ख़्मी करो, न अपने सर के सामने वाले बाल मुंडवाओ। {14:2} क्यूँकि तू रब अपने ख़ुदा के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस क़ौम है। दुनिया की तमाम क़ौमों में से रब ने तुझे ही चुन कर अपनी मिलकियत बना लिया है। {14:3} कोई भी मकरूह चीज़ न खाना। {14:4} तुम बैल, भेड़-बकरी, {14:5} हिरन, ग़ज़ाल, मृग, पहाड़ी बकरी, महात, ग़ज़ाल-ए-अफ़्रीक़ा और पहाड़ी बकरी खा सकते हो। {14:6} जिन के खुर या पाँओ बिलकुल चिरे हुए हैं और जो जुगाली करते हैं उन्हें खाने की इजाज़त है। {14:7} ऊँट, बिज्जू या ख़रगोश खाना मना है। वह तुम्हारे लिए नापाक हैं, क्यूँकि वह जुगाली तो करते हैं लेकिन उन के खुर या पाँओ चिरे हुए नहीं हैं। {14:8} सूअर न खाना। वह तुम्हारे लिए नापाक है, क्यूँकि उस के खुर तो चिरे हुए हैं लेकिन वह जुगाली नहीं करता। न उन का गोश्त खाना, न उन की लाशों को छूना। {14:9} पानी में रहने वाले जानवर खाने के लिए जाइज़ हैं अगर उन के पर और छिलके हों। {14:10} लेकिन जिन के पर या छिलके नहीं हैं वह तुम्हारे लिए नापाक हैं। {14:11} तुम हर पाक परिन्दा खा सकते हो। {14:12} लेकिन ज़ैल के परिन्दे खाना मना है: उक़ाब, दढ़ियल गिद्ध, काला गिद्ध, {14:13} लाल चील, काली चील, हर क़िस्म का गिद्ध, {14:14} हर क़िस्म का कव्वा, {14:15} उक़ाबी उल्लू, छोटे कान वाला उल्लू, बड़े कान वाला उल्लू, हर क़िस्म का बाज़, {14:16} छोटा उल्लू, चिंघाड़ने वाला उल्लू, सफ़ेद उल्लू, {14:17} दश्ती उल्लू, मिस्री गिद्ध, क़ूक़, {14:18} लक़्लक़, हर क़िस्म का बूतीमार, हुदहुद और चमगादड़। {14:19} तमाम पर रखने वाले कीड़े तुम्हारे लिए नापाक हैं। उन्हें खाना मना है। {14:20} लेकिन तुम हर पाक परिन्दा खा सकते हो। {14:21} जो जानवर ख़ुद-ब-ख़ुद मर जाए उसे न खाना। तू उसे अपनी आबादी में रहने वाले किसी परदेसी को दे या किसी अजनबी को बेच सकता है और वह उसे खा सकता है। लेकिन तू उसे मत खाना, क्यूँकि तू रब अपने ख़ुदा के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस क़ौम है। बकरी के बच्चे को उस की माँ के दूध में पकाना मना है। {i14:22} अपनी पैदावार का दसवाँ हिस्सा मख़्सूस करना {14:22} लाज़िम है कि तू हर साल अपने खेतों की पैदावार का दसवाँ हिस्सा रब के लिए अलग करे। {14:23} इस के लिए अपना अनाज, अंगूर का रस, ज़ैतून का तेल और मवेशी के पहलौठे रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर ले आना यानी उस जगह जो वह अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। वहाँ यह चीज़ें क़ुर्बान करके खा ताकि तू उम्र भर रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानना सीखे। {14:24} लेकिन हो सकता है कि जो जगह रब तेरा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा वह तेरे घर से हद से ज़्यादा दूर हो और रब तेरे ख़ुदा की बरकत के बाइस मज़कूरा दसवाँ हिस्सा इतना ज़्यादा हो कि तू उसे मक़्दिस तक नहीं पहुँचा सकता। {14:25} इस सूरत में उसे बेच कर उस के पैसे उस जगह ले जा जो रब तेरा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। {14:26} वहाँ पहुँच कर उन पैसों से जो जी चाहे ख़रीदना, ख़्वाह गाय-बैल, भेड़-बकरी, मै या मै जैसी कोई और चीज़ क्यूँ न हो। फिर अपने घराने के साथ मिल कर रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर यह चीज़ें खाना और ख़ुशी मनाना। {14:27} ऐसे मौक़ों पर उन लावियों का ख़याल रखना जो तेरे क़बाइली इलाक़े में रहते हैं, क्यूँकि उन्हें मीरास में ज़मीन नहीं मिलेगी। {14:28} हर तीसरे साल अपनी पैदावार का दसवाँ हिस्सा अपने शहरों में जमा करना। {14:29} उसे लावियों को देना जिन के पास मौरूसी ज़मीन नहीं है, नीज़ अपने शहरों में आबाद परदेसियों, यतीमों और बेवाओं को देना। वह आएँ और खाना खा कर सेर हो जाएँ ताकि रब तेरा ख़ुदा तेरे हर काम में बरकत दे। {i15:1} क़र्ज़दारों की बहाली का साल {15:1} हर सात साल के बाद एक दूसरे के कर्ज़े मुआफ़ कर देना। {15:2} उस वक़्त जिस ने भी किसी इस्राईली भाई को क़र्ज़ दिया है वह उसे मन्सूख़ करे। वह अपने पड़ोसी या भाई को पैसे वापस करने पर मज्बूर न करे, क्यूँकि रब की ताज़ीम में क़र्ज़ मुआफ़ करने के साल का एलान किया गया है। {15:3} इस साल में तू सिर्फ़ ग़ैरमुल्की क़र्ज़दारों को पैसे वापस करने पर मज्बूर कर सकता है। अपने इस्राईली भाई के तमाम क़र्ज़ मुआफ़ कर देना। {15:4} तेरे दरमियान कोई भी ग़रीब नहीं होना चाहिए, क्यूँकि जब तू उस मुल्क में रहेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में देने वाला है तो वह तुझे बहुत बरकत देगा। {15:5} लेकिन शर्त यह है कि तू पूरे तौर पर उस की सुने और एहतियात से उस के उन तमाम अह्काम पर अमल करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। {15:6} फिर रब तुम्हारा ख़ुदा तुझे अपने वादे के मुताबिक़ बरकत देगा। तू किसी भी क़ौम से उधार नहीं लेगा बल्कि बहुत सी क़ौमों को उधार देगा। कोई भी क़ौम तुझ पर हुकूमत नहीं करेगी बल्कि तू बहुत सी क़ौमों पर हुकूमत करेगा। {15:7} जब तू उस मुल्क में आबाद होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देने वाला है तो अपने दरमियान रहने वाले ग़रीब भाई से सख़्त सुलूक न करना, न कंजूस होना। {15:8} खुले दिल से उस की मदद कर। जितनी उसे ज़रूरत है उसे उधार के तौर पर दे। {15:9} ख़बरदार, ऐसा मत सोच कि क़र्ज़ मुआफ़ करने का साल क़रीब है, इस लिए मैं उसे कुछ नहीं दूँगा। अगर तू ऐसी शरीर बात अपने दिल में सोचते हुए ज़रूरतमन्द भाई को क़र्ज़ देने से इन्कार करे और वह रब के सामने तेरी शिकायत करे तो तू क़ुसूरवार ठहरेगा। {15:10} उसे ज़रूर कुछ दे बल्कि ख़ुशी से दे। फिर रब तेरा ख़ुदा तेरे हर काम में बरकत देगा। {15:11} मुल्क में हमेशा ग़रीब और ज़रूरतमन्द लोग पाए जाएंगे, इस लिए मैं तुझे हुक्म देता हूँ कि खुले दिल से अपने ग़रीब और ज़रूरतमन्द भाइयों की मदद कर। {i15:12} ग़ुलामों को आज़ाद करने का फ़र्ज़ {15:12} अगर कोई इस्राईली भाई या बहन अपने आप को बेच कर तेरा ग़ुलाम बन जाए तो वह छः साल तेरी ख़िदमत करे। लेकिन लाज़िम है कि सातवें साल उसे आज़ाद कर दिया जाए। {15:13} आज़ाद करते वक़्त उसे ख़ाली हाथ फ़ारिग़ न करना {15:14} बल्कि अपनी भेड़-बकरियों, अनाज, तेल और मै से उसे फ़य्याज़ी से कुछ दे, यानी उन चीज़ों में से जिन से रब तेरे ख़ुदा ने तुझे बरकत दी है। {15:15} याद रख कि तू भी मिस्र में ग़ुलाम था और कि रब तेरे ख़ुदा ने फ़िद्या दे कर तुझे छुड़ाया। इसी लिए मैं आज तुझे यह हुक्म देता हूँ। {15:16} लेकिन मुमकिन है कि तेरा ग़ुलाम तुझे छोड़ना न चाहे, क्यूँकि वह तुझ से और तेरे ख़ानदान से मुहब्बत रखता है, और वह तेरे पास रह कर ख़ुशहाल है। {15:17} इस सूरत में उसे दरवाज़े के पास ले जा और उस के कान की लौ चौखट के साथ लगा कर उसे सुताली यानी तेज़ औज़ार से छेद दे। तब वह ज़िन्दगी भर तेरा ग़ुलाम बना रहेगा। अपनी लौंडी के साथ भी ऐसा ही करना। {15:18} अगर ग़ुलाम तुझे छः साल के बाद छोड़ना चाहे तो बुरा न मानना। आख़िर अगर उस की जगह कोई और वही काम तनख़्वाह के लिए करता तो तेरे अख़्राजात दुगने होते। उसे आज़ाद करना तो रब तेरा ख़ुदा तेरे हर काम में बरकत देगा। {i15:19} जानवरों के पहलौठे मख़्सूस हैं {15:19} अपनी गायों और भेड़-बकरियों के नर पहलौठे रब अपने ख़ुदा के लिए मख़्सूस करना। न गाय के पहलौठे को काम के लिए इस्तेमाल करना, न भेड़ के पहलौठे के बाल कतरना। {15:20} हर साल ऐसे बच्चे उस जगह ले जा जो रब अपने मक़्दिस के लिए चुनेगा। वहाँ उन्हें रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर अपने पूरे ख़ानदान समेत खाना। {15:21} अगर ऐसे जानवर में कोई ख़राबी हो, वह अंधा या लंगड़ा हो या उस में कोई और नुक़्स हो तो उसे रब अपने ख़ुदा के लिए क़ुर्बान न करना। {15:22} ऐसे जानवर तू घर में ज़बह करके खा सकता है। वह हिरन और ग़ज़ाल की मानिन्द हैं जिन्हें तू खा तो सकता है लेकिन क़ुर्बानी के तौर पर पेश नहीं कर सकता। पाक और नापाक शख़्स दोनों उसे खा सकते हैं। {15:23} लेकिन ख़ून न खाना। उसे पानी की तरह ज़मीन पर उंडेल कर ज़ाए कर देना। {i16:1} फ़सह की ईद {16:1} अबीब के महीने में रब अपने ख़ुदा की ताज़ीम में फ़सह की ईद मनाना, क्यूँकि इस महीने में वह तुझे रात के वक़्त मिस्र से निकाल लाया। {16:2} उस जगह जमा हो जा जो रब अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। उसे क़ुर्बानी के लिए भेड़-बकरियाँ या गाय-बैल पेश करना। {16:3} गोश्त के साथ बेख़मीरी रोटी खाना। सात दिन तक यही रोटी खा, बिलकुल उसी तरह जिस तरह तू ने किया जब जल्दी जल्दी मिस्र से निकला। मुसीबत की यह रोटी इस लिए खा ताकि वह दिन तेरे जीते जी याद रहे जब तू मिस्र से रवाना हुआ। {16:4} लाज़िम है कि ईद के हफ़्ते के दौरान तेरे पूरे मुल्क में ख़मीर न पाया जाए। जो क़ुर्बानी तू ईद के पहले दिन की शाम को पेश करे उस का गोश्त उसी वक़्त खा ले। अगली सुब्ह तक कुछ बाक़ी न रह जाए। {16:5} फ़सह की क़ुर्बानी किसी भी शहर में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा न चढ़ाना {16:6} बल्कि सिर्फ़ उस जगह जो वह अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। मिस्र से निकलते वक़्त की तरह क़ुर्बानी के जानवर को सूरज डूबते वक़्त ज़बह कर। {16:7} फिर उसे भून कर उस जगह खाना जो रब तेरा ख़ुदा चुनेगा। अगली सुब्ह अपने घर वापस चला जा। {16:8} ईद के पहले छः दिन बेख़मीरी रोटी खाता रह। सातवें दिन काम न करना बल्कि रब अपने ख़ुदा की इबादत के लिए जमा हो जाना। {i16:9} फ़सल की कटाई की ईद {16:9} जब अनाज की फ़सल की कटाई शुरू होगी तो पहले दिन के सात हफ़्ते बाद {16:10} फ़सल की कटाई की ईद मनाना। रब अपने ख़ुदा को उतना पेश कर जितना जी चाहे। वह उस बरकत के मुताबिक़ हो जो उस ने तुझे दी है। {16:11} इस के लिए भी उस जगह जमा हो जा जो रब अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। वहाँ उस के हुज़ूर ख़ुशी मना। तेरे बाल-बच्चे, तेरे ग़ुलाम और लौंडियाँ और तेरे शहरों में रहने वाले लावी, परदेसी, यतीम और बेवाएँ सब तेरी ख़ुशी में शरीक हों। {16:12} इन अह्काम पर ज़रूर अमल करना और मत भूलना कि तू मिस्र में ग़ुलाम था। {i16:13} झोंपड़ियों की ईद {16:13} अनाज गाहने और अंगूर का रस निकालने के बाद झोंपड़ियों की ईद मनाना जिस का दौरानिया सात दिन हो। {16:14} ईद के मौक़े पर ख़ुशी मनाना। तेरे बाल-बच्चे, तेरे ग़ुलाम और लौंडियाँ और तेरे शहरों में बसने वाले लावी, परदेसी, यतीम और बेवाएँ सब तेरी ख़ुशी में शरीक हों। {16:15} जो जगह रब तेरा ख़ुदा मक़्दिस के लिए चुनेगा वहाँ उस की ताज़ीम में सात दिन तक यह ईद मनाना। क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा तेरी तमाम फ़सलों और मेहनत को बरकत देगा, इस लिए ख़ूब ख़ुशी मनाना। {16:16} इस्राईल के तमाम मर्द साल में तीन मर्तबा उस मक़्दिस पर हाज़िर हो जाएँ जो रब तेरा ख़ुदा चुनेगा यानी बेख़मीरी रोटी की ईद, फ़सल की कटाई की ईद और झोंपड़ियों की ईद पर। कोई भी रब के हुज़ूर ख़ाली हाथ न आए। {16:17} हर कोई उस बरकत के मुताबिक़ दे जो रब तेरे ख़ुदा ने उसे दी है। {i16:18} क़ाज़ी मुक़र्रर करना {16:18} अपने अपने क़बाइली इलाक़े में क़ाज़ी और निगहबान मुक़र्रर कर। वह हर उस शहर में हों जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा। वह इन्साफ़ से लोगों की अदालत करें। {16:19} न किसी के हुक़ूक़ मारना, न जानिबदारी दिखाना। रिश्वत क़बूल न करना, क्यूँकि रिश्वत दानिशमन्दों को अंधा कर देती और रास्तबाज़ की बातें पलट देती है। {16:20} सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्साफ़ के मुताबिक़ चल ताकि तू जीता रहे और उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करे जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा। {i16:21} बुतपरस्ती की सज़ा {16:21} जहाँ तू रब अपने ख़ुदा के लिए क़ुर्बानगाह बनाएगा वहाँ न यसीरत देवी की पूजा के लिए लकड़ी का खम्बा {16:22} और न कोई ऐसा पत्थर खड़ा करना जिस की पूजा लोग करते हैं। रब तेरा ख़ुदा इन चीज़ों से नफ़रत रखता है। {17:1} रब अपने ख़ुदा को नाक़िस गाय-बैल या भेड़-बकरी पेश न करना, क्यूँकि वह ऐसी क़ुर्बानी से नफ़रत रखता है। {17:2} जब तू उन शहरों में आबाद हो जाएगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा तो हो सकता है कि तेरे दरमियान कोई मर्द या औरत रब तेरे ख़ुदा का अह्द तोड़ कर वह कुछ करे जो उसे बुरा लगे। {17:3} मसलन वह दीगर माबूदों को या सूरज, चाँद या सितारों के पूरे लश्कर को सिज्दा करे, हालाँकि मैं ने यह मना किया है। {17:4} जब भी तुझे इस क़िस्म की ख़बर मिले तो इस का पूरा खोज लगा। अगर बात दुरुस्त निकले और ऐसी घिनौनी हरकत वाक़ई इस्राईल में की गई हो {17:5} तो क़ुसूरवार को शहर के बाहर ले जा कर संगसार कर देना। {17:6} लेकिन लाज़िम है कि पहले कम अज़ कम दो या तीन लोग गवाही दें कि उस ने ऐसा ही किया है। उसे सज़ा-ए-मौत देने के लिए एक गवाह काफ़ी नहीं। {17:7} पहले गवाह उस पर पत्थर फैंकें, इस के बाद बाक़ी तमाम लोग उसे संगसार करें। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। {i17:8} मक़्दिस में आलातरीन अदालत {17:8} अगर तेरे शहर के क़ाज़ियों के लिए किसी मुक़द्दमे का फ़ैसला करना मुश्किल हो तो उस मक़्दिस में आ कर अपना मुआमला पेश कर जो रब तेरा ख़ुदा चुनेगा, ख़्वाह किसी को क़त्ल किया गया हो, उसे ज़ख़्मी कर दिया गया हो या कोई और मसला हो। {17:9} लावी के क़बीले के इमामों और मक़्दिस में ख़िदमत करने वाले क़ाज़ी को अपना मुक़द्दमा पेश कर, और वह फ़ैसला करें। {17:10} जो फ़ैसला वह उस मक़्दिस में करेंगे जो रब चुनेगा उसे मानना पड़ेगा। जो भी हिदायत वह दें उस पर एहतियात से अमल कर। {17:11} शरीअत की जो भी बात वह तुझे सिखाएँ और जो भी फ़ैसला वह दें उस पर अमल कर। जो कुछ भी वह तुझे बताएँ उस से न दाईं और न बाईं तरफ़ मुड़ना। {17:12} जो मक़्दिस में रब तेरे ख़ुदा की ख़िदमत करने वाले क़ाज़ी या इमाम को हक़ीर जान कर उन की नहीं सुनता उसे सज़ा-ए-मौत दी जाए। यूँ तू इस्राईल से बुराई मिटा देगा। {17:13} फिर तमाम लोग यह सुन कर डर जाएंगे और आइन्दा ऐसी गुस्ताख़ी करने की जुरअत नहीं करेंगे। {i17:14} बादशाह के बारे में उसूल {17:14} तू जल्द ही उस मुल्क में दाख़िल होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देने वाला है। जब तू उस पर क़ब्ज़ा करके उस में आबाद हो जाएगा तो हो सकता है कि तू एक दिन कहे, “आओ हम इर्दगिर्द की तमाम क़ौमों की तरह बादशाह मुक़र्रर करें जो हम पर हुकूमत करे।” {17:15} अगर तू ऐसा करे तो सिर्फ़ वह शख़्स मुक़र्रर कर जिसे रब तेरा ख़ुदा चुनेगा। वह परदेसी न हो बल्कि तेरा अपना इस्राईली भाई हो। {17:16} बादशाह बहुत ज़्यादा घोड़े न रखे, न अपने लोगों को उन्हें ख़रीदने के लिए मिस्र भेजे। क्यूँकि रब ने तुझ से कहा है कि कभी वहाँ वापस न जाना। {17:17} तेरा बादशाह ज़्यादा बीवियाँ भी न रखे, वर्ना उस का दिल रब से दूर हो जाएगा। और वह हद से ज़्यादा सोना-चाँदी जमा न करे। {17:18} तख़्तनशीन होते वक़्त वह लावी के क़बीले के इमामों के पास पड़ी इस शरीअत की नक़ल लिखवाए। {17:19} यह किताब उस के पास मह्फ़ूज़ रहे, और वह उम्र भर रोज़ाना इसे पढ़ता रहे ताकि रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानना सीखे। तब वह शरीअत की तमाम बातों की पैरवी करेगा, {17:20} अपने आप को अपने इस्राईली भाइयों से ज़्यादा अहम नहीं समझेगा और किसी तरह भी शरीअत से हट कर काम नहीं करेगा। नतीजे में वह और उस की औलाद बहुत अर्से तक इस्राईल पर हुकूमत करेंगे। {i18:1} इमामों और लावियों का हिस्सा {18:1} इस्राईल के हर क़बीले को मीरास में उस का अपना इलाक़ा मिलेगा सिवाए लावी के क़बीले के जिस में इमाम भी शामिल हैं। वह जलने वाली और दीगर क़ुर्बानियों में से अपना हिस्सा ले कर गुज़ारा करें। {18:2} उन के पास दूसरों की तरह मौरूसी ज़मीन नहीं होगी बल्कि रब ख़ुद उन का मौरूसी हिस्सा होगा। यह उस ने वादा करके कहा है। {18:3} जब भी किसी बैल या भेड़ को क़ुर्बान किया जाए तो इमामों को उस का शाना, जबड़े और ओझड़ी मिलने का हक़ है। {18:4} अपनी फ़सलों का पहला फल भी उन्हें देना यानी अनाज, मै, ज़ैतून का तेल और भेड़ों की पहली कतरी हुई ऊन। {18:5} क्यूँकि रब ने तेरे तमाम क़बीलों में से लावी के क़बीले को ही मक़्दिस में रब के नाम में ख़िदमत करने के लिए चुना है। यह हमेशा के लिए उन की और उन की औलाद की ज़िम्मादारी रहेगी। {18:6} कुछ लावी मक़्दिस के पास नहीं बल्कि इस्राईल के मुख़्तलिफ़ शहरों में रहेंगे। अगर उन में से कोई उस जगह आना चाहे जो रब मक़्दिस के लिए चुनेगा {18:7} तो वह वहाँ के ख़िदमत करने वाले लावियों की तरह मक़्दिस में रब अपने ख़ुदा के नाम में ख़िदमत कर सकता है। {18:8} उसे क़ुर्बानियों में से दूसरों के बराबर लावियों का हिस्सा मिलना है, ख़्वाह उसे ख़ानदानी मिलकियत बेचने से पैसे मिल गए हों या नहीं। {i18:9} जादूगरी मना है {18:9} जब तू उस मुल्क में दाख़िल होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे दे रहा है तो वहाँ की रहने वाली क़ौमों के घिनौने दस्तूर न अपनाना। {18:10} तेरे दरमियान कोई भी अपने बेटे या बेटी को क़ुर्बानी के तौर पर न जलाए। न कोई ग़ैबदानी करे, न फ़ाल या शुगून निकाले या जादूगरी करे। {18:11} इसी तरह मंत्र पढ़ना, हाज़िरात करना, क़िस्मत का हाल बताना या मुर्दों की रूहों से राबिता करना सख़्त मना है। {18:12} जो भी ऐसा करे वह रब की नज़र में क़ाबिल-ए-घिन है। इन ही मकरूह दस्तूरों की वजह से रब तेरा ख़ुदा तेरे आगे से उन क़ौमों को निकाल देगा। {18:13} इस लिए लाज़िम है कि तू रब अपने ख़ुदा के सामने बेक़ुसूर रहे। {i18:14} नबी का वादा {18:14} जिन क़ौमों को तू निकालने वाला है वह उन की सुनती हैं जो फ़ाल निकालते और ग़ैबदानी करते हैं। लेकिन रब तेरे ख़ुदा ने तुझे ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी। {18:15} रब तेरा ख़ुदा तेरे वास्ते तेरे भाइयों में से मुझ जैसे नबी को बरपा करेगा। उस की सुनना। {18:16} क्यूँकि होरिब यानी सीना पहाड़ पर जमा होते वक़्त तू ने ख़ुद रब अपने ख़ुदा से दरख़्वास्त की, “न मैं मज़ीद रब अपने ख़ुदा की आवाज़ सुनना चाहता, न यह भड़कती हुई आग देखना चाहता हूँ, वर्ना मर जाऊँगा।” {18:17} तब रब ने मुझ से कहा, “जो कुछ वह कहते हैं वह ठीक है। {18:18} आइन्दा मैं उन में से तुझ जैसा नबी खड़ा करूँगा। मैं अपने अल्फ़ाज़ उस के मुँह में डाल दूँगा, और वह मेरी हर बात उन तक पहुँचाएगा। {18:19} जब वह नबी मेरे नाम में कुछ कहे तो लाज़िम है कि तू उस की सुन। जो नहीं सुनेगा उस से मैं ख़ुद जवाब तलब करूँगा। {18:20} लेकिन अगर कोई नबी गुस्ताख़ हो कर मेरे नाम में कोई बात कहे जो मैं ने उसे बताने को नहीं कहा था तो उसे सज़ा-ए-मौत देनी है। इसी तरह उस नबी को भी हलाक कर देना है जो दीगर माबूदों के नाम में बात करे।” {18:21} शायद तेरे ज़हन में सवाल उभर आए कि हम किस तरह मालूम कर सकते हैं कि कोई कलाम वाक़ई रब की तरफ़ से है या नहीं। {18:22} जवाब यह है कि अगर नबी रब के नाम में कुछ कहे और वह पूरा न हो जाए तो मतलब है कि नबी की बात रब की तरफ़ से नहीं है बल्कि उस ने गुस्ताख़ी करके बात की है। इस सूरत में उस से मत डरना। {i19:1} पनाह के शहर {19:1} रब तेरा ख़ुदा उस मुल्क में आबाद क़ौमों को तबाह करेगा जो वह तुझे दे रहा है। जब तू उन्हें भगा कर उन के शहरों और घरों में आबाद हो जाएगा {19:2} तो पूरे मुल्क को तीन हिस्सों में तक़्सीम कर। हर हिस्से में एक मर्कज़ी शहर मुक़र्रर कर। उन तक पहुँचाने वाले रास्ते {19:3} साफ़-सुथरे रखना। इन शहरों में हर वह शख़्स पनाह ले सकता है जिस के हाथ से कोई ग़ैरइरादी तौर पर हलाक हुआ है। {19:4} वह ऐसे शहर में जा कर इन्तिक़ाम लेने वालों से मह्फ़ूज़ रहेगा। शर्त यह है कि उस ने न क़सदन और न दुश्मनी के बाइस किसी को मार दिया हो। {19:5} मसलन दो आदमी जंगल में दरख़्त काट रहे हैं। कुल्हाड़ी चलाते वक़्त एक की कुल्हाड़ी दस्ते से निकल कर उस के साथी को लग जाए और वह मर जाए। ऐसा शख़्स फ़रार हो कर ऐसे शहर में पनाह ले सकता है ताकि बचा रहे। {19:6} इस लिए ज़रूरी है कि ऐसे शहरों का फ़ासिला ज़्यादा न हो। क्यूँकि जब इन्तिक़ाम लेने वाला उस का ताक़्क़ुब करेगा तो ख़तरा है कि वह तैश में उसे पकड़ कर मार डाले, अगरचे भागने वाला बेक़ुसूर है। जो कुछ उस ने किया वह दुश्मनी के सबब से नहीं बल्कि ग़ैरइरादी तौर पर हुआ। {19:7} इस लिए लाज़िम है कि तू पनाह के तीन शहर अलग कर ले। {19:8} बाद में रब तेरा ख़ुदा तेरी सरहद्दें मज़ीद बढ़ा देगा, क्यूँकि यही वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से किया है। अपने वादे के मुताबिक़ वह तुझे पूरा मुल्क देगा, {19:9} अलबत्ता शर्त यह है कि तू एहतियात से उन तमाम अह्काम की पैरवी करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। दूसरे अल्फ़ाज़ में शर्त यह है कि तू रब अपने ख़ुदा को प्यार करे और हमेशा उस की राहों में चलता रहे। अगर तू ऐसा ही करे और नतीजतन रब का वादा पूरा हो जाए तो लाज़िम है कि तू पनाह के तीन और शहर अलग कर ले। {19:10} वर्ना तेरे मुल्क में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है बेक़ुसूर लोगों को जान से मारा जाएगा और तू ख़ुद ज़िम्मादार ठहरेगा। {19:11} लेकिन हो सकता है कोई दुश्मनी के बाइस किसी की ताक में बैठ जाए और उस पर हम्ला करके उसे मार डाले। अगर क़ातिल पनाह के किसी शहर में भाग कर पनाह ले {19:12} तो उस के शहर के बुज़ुर्ग इत्तिला दें कि उसे वापस लाया जाए। उसे इन्तिक़ाम लेने वाले के हवाले किया जाए ताकि उसे सज़ा-ए-मौत मिले। {19:13} उस पर रहम मत करना। लाज़िम है कि तू इस्राईल में से बेक़ुसूर की मौत का दाग़ मिटाए ताकि तू ख़ुशहाल रहे। {i19:14} ज़मीनों की हद्दें {19:14} जब तू उस मुल्क में रहेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में देगा ताकि तू उस पर क़ब्ज़ा करे तो ज़मीन की वह हद्दें आगे पीछे न करना जो तेरे बापदादा ने मुक़र्रर कीं। {i19:15} अदालत में गवाह {19:15} तू किसी को एक ही गवाह के कहने पर क़ुसूरवार नहीं ठहरा सकता। जो भी जुर्म सरज़द हुआ है, कम अज़ कम दो या तीन गवाहों की ज़रूरत है। वर्ना तू उसे क़ुसूरवार नहीं ठहरा सकता। {19:16} अगर जिस पर इल्ज़ाम लगाया गया है इन्कार करके दावा करे कि गवाह झूट बोल रहा है {19:17} तो दोनों मक़्दिस में रब के हुज़ूर आ कर ख़िदमत करने वाले इमामों और क़ाज़ियों को अपना मुआमला पेश करें। {19:18} क़ाज़ी इस का ख़ूब खोज लगाएँ। अगर बात दुरुस्त निकले कि गवाह ने झूट बोल कर अपने भाई पर ग़लत इल्ज़ाम लगाया है {19:19} तो उस के साथ वह कुछ किया जाए जो वह अपने भाई के लिए चाह रहा था। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। {19:20} फिर तमाम बाक़ी लोग यह सुन कर डर जाएंगे और आइन्दा तेरे दरमियान ऐसी ग़लत हरकत करने की जुरअत नहीं करेंगे। {19:21} क़ुसूरवार पर रहम न करना। उसूल यह हो कि जान के बदले जान, आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत, हाथ के बदले हाथ, पाँओ के बदले पाँओ। {i20:1} जंग के उसूल {20:1} जब तू जंग के लिए निकल कर देखता है कि दुश्मन तादाद में ज़्यादा हैं और उन के पास घोड़े और रथ भी हैं तो मत डरना। रब तेरा ख़ुदा जो तुझे मिस्र से निकाल लाया अब भी तेरे साथ है। {20:2} जंग के लिए निकलने से पहले इमाम सामने आए और फ़ौज से मुख़ातिब हो कर {20:3} कहे, “सुन ऐ इस्राईल! आज तुम अपने दुश्मन से लड़ने जा रहे हो। उन के सबब से परेशान न हो। उन से न ख़ौफ़ खाओ, न घबराओ, {20:4} क्यूँकि रब तुम्हारा ख़ुदा ख़ुद तुम्हारे साथ जा कर दुश्मन से लड़ेगा। वही तुम्हें फ़त्ह बख़्शेगा।” {20:5} फिर निगहबान फ़ौज से मुख़ातिब हों, “क्या यहाँ कोई है जिस ने हाल में अपना नया घर मुकम्मल किया लेकिन उसे मख़्सूस करने का मौक़ा न मिला? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग के दौरान मारा जाए और कोई और घर को मख़्सूस करके उस में बसने लगे। {20:6} क्या कोई है जिस ने अंगूर का बाग़ लगा कर इस वक़्त उस की पहली फ़सल के इन्तिज़ार में है? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग में मारा जाए और कोई और बाग़ का फ़ाइदा उठाए। {20:7} क्या कोई है जिस की मंगनी हुई है और जो इस वक़्त शादी के इन्तिज़ार में है? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग में मारा जाए और कोई और उस की मंगेतर से शादी करे।” {20:8} निगहबान कहें, “क्या कोई ख़ौफ़ज़दा या परेशान है? वह अपने घर वापस चला जाए ताकि अपने साथियों को परेशान न करे।” {20:9} इस के बाद फ़ौजियों पर अफ़्सर मुक़र्रर किए जाएँ। {20:10} किसी शहर पर हम्ला करने से पहले उस के बाशिन्दों को हथियार डाल देने का मौक़ा देना। {20:11} अगर वह मान जाएँ और अपने दरवाज़े खोल दें तो वह तेरे लिए बेगार में काम करके तेरी ख़िदमत करें। {20:12} लेकिन अगर वह हथियार डालने से इन्कार करें और जंग छिड़ जाए तो शहर का मुहासरा कर। {20:13} जब रब तेरा ख़ुदा तुझे शहर पर फ़त्ह देगा तो उस के तमाम मर्दों को हलाक कर देना। {20:14} तू तमाम माल-ए-ग़नीमत औरतों, बच्चों और मवेशियों समेत रख सकता है। दुश्मन की जो चीज़ें रब ने तेरे हवाले कर दी हैं उन सब को तू इस्तेमाल कर सकता है। {20:15} यूँ उन शहरों से निपटना जो तेरे अपने मुल्क से बाहर हैं। {20:16} लेकिन जो शहर उस मुल्क में वाक़े हैं जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है, उन के तमाम जानदारों को हलाक कर देना। {20:17} उन्हें रब के सपुर्द करके मुकम्मल तौर पर हलाक करना, जिस तरह रब तेरे ख़ुदा ने तुझे हुक्म दिया है। इस में हित्ती, अमोरी, कनआनी, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी शामिल हैं। {20:18} अगर तू ऐसा न करे तो वह तुम्हें रब तुम्हारे ख़ुदा का गुनाह करने पर उकसाएँगे। जो घिनौनी हरकतें वह अपने देवताओं की पूजा करते वक़्त करते हैं उन्हें वह तुम्हें भी सिखाएँगे। {20:19} शहर का मुहासरा करते वक़्त इर्दगिर्द के फलदार दरख़्तों को काट कर तबाह न कर देना ख़्वाह बड़ी देर भी हो जाए, वर्ना तू उन का फल नहीं खा सकेगा। उन्हें न काटना। क्या दरख़्त तेरे दुश्मन हैं जिन का मुहासरा करना है? हरगिज़ नहीं! {20:20} उन दरख़्तों की और बात है जो फल नहीं लाते। उन्हें तू काट कर मुहासरे के लिए इस्तेमाल कर सकता है जब तक शहर शिकस्त न खाए। {i21:1} नामालूम क़त्ल का कफ़्फ़ारा {21:1} जब तू उस मुल्क में आबाद होगा जो रब तुझे मीरास में दे रहा है ताकि तू उस पर क़ब्ज़ा करे तो हो सकता है कि कोई लाश खुले मैदान में कहीं पड़ी पाई जाए। अगर मालूम न हो कि किस ने उसे क़त्ल किया है {21:2} तो पहले इर्दगिर्द के शहरों के बुज़ुर्ग और क़ाज़ी आ कर पता करें कि कौन सा शहर लाश के ज़्यादा क़रीब है। {21:3} फिर उस शहर के बुज़ुर्ग एक जवान गाय चुन लें जो कभी काम के लिए इस्तेमाल नहीं हुई। {21:4} वह उसे एक ऐसी वादी में ले जाएँ जिस में न कभी हल चलाया गया, न पौदे लगाए गए हों। वादी में ऐसी नहर हो जो पूरा साल बहती रहे। वहीं बुज़ुर्ग जवान गाय की गर्दन तोड़ डालें। {21:5} फिर लावी के क़बीले के इमाम क़रीब आएँ। क्यूँकि रब तुम्हारे ख़ुदा ने उन्हें चुन लिया है ताकि वह ख़िदमत करें, रब के नाम से बरकत दें और तमाम झगड़ों और हम्लों का फ़ैसला करें। {21:6} उन के देखते देखते शहर के बुज़ुर्ग अपने हाथ गाय की लाश के ऊपर धो लें। {21:7} साथ साथ वह कहें, “हम ने इस शख़्स को क़त्ल नहीं किया, न हम ने देखा कि किस ने यह किया। {21:8} ऐ रब, अपनी क़ौम इस्राईल का यह कफ़्फ़ारा क़बूल फ़रमा जिसे तू ने फ़िद्या दे कर छुड़ाया है। अपनी क़ौम इस्राईल को इस बेक़ुसूर के क़त्ल का क़ुसूरवार न ठहरा।” तब मक़्तूल का कफ़्फ़ारा दिया जाएगा। {21:9} यूँ तू ऐसे बेक़ुसूर शख़्स के क़त्ल का दाग़ अपने दरमियान से मिटा देगा। क्यूँकि तू ने वही कुछ किया होगा जो रब की नज़र में दुरुस्त है। {i21:10} जंगी क़ैदी औरत से शादी {21:10} हो सकता है कि तू अपने दुश्मन से जंग करे और रब तुम्हारा ख़ुदा तुझे फ़त्ह बख़्शे। जंगी क़ैदियों को जमा करते वक़्त {21:11} तुझे उन में से एक ख़ूबसूरत औरत नज़र आती है जिस के साथ तेरा दिल लग जाता है। तू उस से शादी कर सकता है। {21:12} उसे अपने घर में ले आ। वहाँ वह अपने सर के बालों को मुंडवाए, अपने नाख़ुन तराशे {21:13} और अपने वह कपड़े उतारे जो वह पहने हुए थी जब उसे क़ैद किया गया। वह पूरे एक महीने तक अपने वालिदैन के लिए मातम करे। फिर तू उस के पास जा कर उस के साथ शादी कर सकता है। {21:14} अगर वह तुझे किसी वक़्त पसन्द न आए तो उसे जाने दे। वह वहाँ जाए जहाँ उस का जी चाहे। तुझे उसे बेचने या उस से लौंडी का सा सुलूक करने की इजाज़त नहीं है, क्यूँकि तू ने उसे मज्बूर करके उस से शादी की है। {i21:15} पहलौठे के हुक़ूक़ {21:15} हो सकता है किसी मर्द की दो बीवियाँ हों। एक को वह प्यार करता है, दूसरी को नहीं। दोनों बीवियों के बेटे पैदा हुए हैं, लेकिन जिस बीवी से शौहर मुहब्बत नहीं करता उस का बेटा सब से पहले पैदा हुआ। {21:16} जब बाप अपनी मिलकियत वसियत में तक़्सीम करता है तो लाज़िम है कि वह अपने सब से बड़े बेटे का मौरूसी हक़ पूरा करे। उसे पहलौठे का यह हक़ उस बीवी के बेटे को मुन्तक़िल करने की इजाज़त नहीं जिसे वह प्यार करता है। {21:17} उसे तस्लीम करना है कि उस बीवी का बेटा सब से बड़ा है, जिस से वह मुहब्बत नहीं करता। नतीजतन उसे उस बेटे को दूसरे बेटों की निस्बत दुगना हिस्सा देना पड़ेगा, क्यूँकि वह अपने बाप की ताक़त का पहला इज़हार है। उसे पहलौठे का हक़ हासिल है। {i21:18} सरकश बेटा {21:18} हो सकता है कि किसी का बेटा हटधर्म और सरकश हो। वह अपने वालिदैन की इताअत नहीं करता और उन के तम्बीह करने और सज़ा देने पर भी उन की नहीं सुनता। {21:19} इस सूरत में वालिदैन उसे पकड़ कर शहर के दरवाज़े पर ले जाएँ जहाँ बुज़ुर्ग जमा होते हैं। {21:20} वह बुज़ुर्गों से कहें, “हमारा बेटा हटधर्म और सरकश है। वह हमारी इताअत नहीं करता बल्कि अय्याश और शराबी है।” {21:21} यह सुन कर शहर के तमाम मर्द उसे संगसार करें। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। तमाम इस्राईल यह सुन कर डर जाएगा। {i21:22} सज़ा-ए-मौत पाने वाले को उसी दिन दफ़नाना है {21:22} जब तू किसी को सज़ा-ए-मौत दे कर उस की लाश किसी लकड़ी या दरख़्त से लटकाता है {21:23} तो उसे अगली सुब्ह तक वहाँ न छोड़ना। हर सूरत में उसे उसी दिन दफ़ना देना, क्यूँकि जिसे भी दरख़्त से लटकाया गया है उस पर अल्लाह की लानत है। अगर उसे उसी दिन दफ़नाया न जाए तो तू उस मुल्क को नापाक कर देगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है। {i22:1} मदद करने के लिए तय्यार रहना {22:1} अगर तुझे किसी हमवतन भाई का बैल या भेड़-बकरी भटकी हुई नज़र आए तो उसे नज़रअन्दाज़ न करना बल्कि मालिक के पास वापस ले जाना। {22:2} अगर मालिक का घर क़रीब न हो या तुझे मालूम न हो कि मालिक कौन है तो जानवर को अपने घर ला कर उस वक़्त तक सँभाले रखना जब तक कि मालिक उसे ढूँडने न आए। फिर जानवर को उसे वापस कर देना। {22:3} यही कुछ कर अगर तेरे हमवतन भाई का गधा भटका हुआ नज़र आए या उस का गुमशुदा कोट या कोई और चीज़ कहीं नज़र आए। उसे नज़रअन्दाज़ न करना। {22:4} अगर तू देखे कि किसी हमवतन का गधा या बैल रास्ते में गिर गया है तो उसे नज़रअन्दाज़ न करना। जानवर को खड़ा करने में अपने भाई की मदद कर। {i22:5} क़ुदरती इन्तिज़ाम के तहत रहना {22:5} औरत के लिए मर्दों के कपड़े पहनना मना है। इसी तरह मर्द के लिए औरतों के कपड़े पहनना भी मना है। जो ऐसा करता है उस से रब तेरे ख़ुदा को घिन आती है। {22:6} अगर तुझे कहीं रास्ते में, किसी दरख़्त में या ज़मीन पर घोंसला नज़र आए और परिन्दा अपने बच्चों या अंडों पर बैठा हुआ हो तो माँ को बच्चों समेत न पकड़ना। {22:7} तुझे बच्चे ले जाने की इजाज़त है लेकिन माँ को छोड़ देना ताकि तू ख़ुशहाल और देर तक जीता रहे। {22:8} नया मकान तामीर करते वक़्त छत पर चारों तरफ़ दीवार बनाना। वर्ना तू उस शख़्स की मौत का ज़िम्मादार ठहरेगा जो तेरी छत पर से गिर जाए। {22:9} अपने अंगूर के बाग़ में दो क़िस्म के बीज न बोना। वर्ना सब कुछ मक़्दिस के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस होगा, न सिर्फ़ वह फ़सल जो तुम ने अंगूर के इलावा लगाई बल्कि अंगूर भी। {22:10} बैल और गधे को जोड़ कर हल न चलाना। {22:11} ऐसे कपड़े न पहनना जिन में बनते वक़्त ऊन और कतान मिलाए गए हैं। {22:12} अपनी चादर के चारों कोनों पर फुन्दने लगाना। {i22:13} इज़्दिवाजी ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त {22:13} अगर कोई आदमी शादी करने के थोड़ी देर बाद अपनी बीवी को पसन्द न करे {22:14} और फिर उस की बदनामी करके कहे, “इस औरत से शादी करने के बाद मुझे पता चला कि वह कुंवारी नहीं है” {22:15} तो जवाब में बीवी के वालिदैन शहर के दरवाज़े पर जमा होने वाले बुज़ुर्गों के पास सबूत ले आएँ कि बेटी शादी से पहले कुंवारी थी। {22:16} बीवी का बाप बुज़ुर्गों से कहे, “मैं ने अपनी बेटी की शादी इस आदमी से की है, लेकिन यह उस से नफ़रत करता है। {22:17} अब इस ने उस की बदनामी करके कहा है, ‘मुझे पता चला कि तुम्हारी बेटी कुंवारी नहीं है।’ लेकिन यहाँ सबूत है कि मेरी बेटी कुंवारी थी।” फिर वालिदैन शहर के बुज़ुर्गों को मज़कूरा कपड़ा दिखाएँ। {22:18} तब बुज़ुर्ग उस आदमी को पकड़ कर सज़ा दें, {22:19} क्यूँकि उस ने एक इस्राईली कुंवारी की बदनामी की है। इस के इलावा उसे जुर्माने के तौर पर बीवी के बाप को चाँदी के 100 सिक्के देने पड़ेंगे। लाज़िम है कि वह शौहर के फ़राइज़ अदा करता रहे। वह उम्र भर उसे तलाक़ नहीं दे सकेगा। {22:20} लेकिन अगर आदमी की बात दुरुस्त निकले और साबित न हो सके कि बीवी शादी से पहले कुंवारी थी {22:21} तो उसे बाप के घर लाया जाए। वहाँ शहर के आदमी उसे संगसार कर दें। क्यूँकि अपने बाप के घर में रहते हुए बदकारी करने से उस ने इस्राईल में एक अहमक़ाना और बेदीन हरकत की है। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। {22:22} अगर कोई आदमी किसी की बीवी के साथ ज़िना करे और वह पकड़े जाएँ तो दोनों को सज़ा-ए-मौत देनी है। यूँ तू इस्राईल से बुराई मिटा देगा। {22:23} अगर आबादी में किसी मर्द की मुलाक़ात किसी ऐसी कुंवारी से हो जिस की किसी और के साथ मंगनी हुई है और वह उस के साथ हमबिसतर हो जाए {22:24} तो लाज़िम है कि तुम दोनों को शहर के दरवाज़े के पास ला कर संगसार करो। वजह यह है कि लड़की ने मदद के लिए न पुकारा अगरचे उस जगह लोग आबाद थे। मर्द का जुर्म यह था कि उस ने किसी और की मंगेतर की इस्मतदरी की है। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। {22:25} लेकिन अगर मर्द ग़ैरआबाद जगह में किसी और की मंगेतर की इस्मतदरी करे तो सिर्फ़ उसी को सज़ा-ए-मौत दी जाए। {22:26} लड़की को कोई सज़ा न देना, क्यूँकि उस ने कुछ नहीं किया जो मौत के लाइक़ हो। ज़ियादती करने वाले की हरकत उस शख़्स के बराबर है जिस ने किसी पर हम्ला करके उसे क़त्ल कर दिया है। {22:27} चूँकि उस ने लड़की को वहाँ पाया जहाँ लोग नहीं रहते, इस लिए अगरचे लड़की ने मदद के लिए पुकारा तो भी उसे कोई न बचा सका। {22:28} हो सकता है कोई आदमी किसी लड़की की इस्मतदरी करे जिस की मंगनी नहीं हुई है। अगर उन्हें पकड़ा जाए {22:29} तो वह लड़की के बाप को चाँदी के 50 सिक्के दे। लाज़िम है कि वह उसी लड़की से शादी करे, क्यूँकि उस ने उस की इस्मतदरी की है। न सिर्फ़ यह बल्कि वह उम्र भर उसे तलाक़ नहीं दे सकता। {22:30} अपने बाप की बीवी से शादी करना मना है। जो कोई यह करे वह अपने बाप की बेहुरमती करता है। {i23:1} मुक़द्दस इजतिमा में शरीक होने की शराइत {23:1} जब इस्राईली रब के मक़्दिस के पास जमा होते हैं तो उसे हाज़िर होने की इजाज़त नहीं जो काटने या कुचलने से ख़ोजा बन गया है। {23:2} इसी तरह वह भी मुक़द्दस इजतिमा से दूर रहे जो नाजाइज़ ताल्लुक़ात के नतीजे में पैदा हुआ है। उस की औलाद भी दसवीं पुश्त तक उस में नहीं आ सकती। {23:3} कोई भी अम्मोनी या मोआबी मुक़द्दस इजतिमा में शरीक नहीं हो सकता। इन क़ौमों की औलाद दसवीं पुश्त तक भी इस जमाअत में हाज़िर नहीं हो सकती, {23:4} क्यूँकि जब तुम मिस्र से निकल आए तो वह रोटी और पानी ले कर तुम से मिलने न आए। न सिर्फ़ यह बल्कि उन्हों ने मसोपुतामिया के शहर फ़तोर में जा कर बलआम बिन बओर को पैसे दिए ताकि वह तुझ पर लानत भेजे। {23:5} लेकिन रब तेरे ख़ुदा ने बलआम की न सुनी बल्कि उस की लानत बरकत में बदल दी। क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा तुझ से प्यार करता है। {23:6} उम्र भर कुछ न करना जिस से इन क़ौमों की सलामती और ख़ुशहाली बढ़ जाए। {23:7} लेकिन अदोमियों को मकरूह न समझना, क्यूँकि वह तुम्हारे भाई हैं। इसी तरह मिस्रियों को भी मकरूह न समझना, क्यूँकि तू उन के मुल्क में परदेसी मेहमान था। {23:8} उन की तीसरी नस्ल के लोग रब के मुक़द्दस इजतिमा में शरीक हो सकते हैं। {i23:9} ख़ैमागाह में नापाकी {23:9} अपने दुश्मनों से जंग करते वक़्त अपनी लश्करगाह में हर नापाक चीज़ से दूर रहना। {23:10} मसलन अगर कोई आदमी रात के वक़्त एहतिलाम के बाइस नापाक हो जाए तो वह लश्करगाह के बाहर जा कर शाम तक वहाँ ठहरे। {23:11} दिन ढलते वक़्त वह नहा ले तो सूरज डूबने पर लश्करगाह में वापस आ सकता है। {23:12} अपनी हाजत रफ़ा करने के लिए लश्करगाह से बाहर कोई जगह मुक़र्रर कर। {23:13} जब किसी को हाजत के लिए बैठना हो तो वह इस के लिए गढ़ा खोदे और बाद में उसे मिट्टी से भर दे। इस लिए अपने सामान में खुदाई का कोई आला रखना ज़रूरी है। {23:14} रब तेरा ख़ुदा तेरी लश्करगाह में तेरे दरमियान ही घूमता फिरता है ताकि तू मह्फ़ूज़ रहे और दुश्मन तेरे सामने शिकस्त खाए। इस लिए लाज़िम है कि तेरी लश्करगाह उस के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हो। ऐसा न हो कि अल्लाह वहाँ कोई शर्मनाक बात देख कर तुझ से दूर हो जाए। {i23:15} फ़रार हुए ग़ुलामों की मदद करना {23:15} अगर कोई ग़ुलाम तेरे पास पनाह ले तो उसे मालिक को वापस न करना। {23:16} वह तेरे साथ और तेरे दरमियान ही रहे, वहाँ जहाँ वह बसना चाहे, उस शहर में जो उसे पसन्द आए। उसे न दबाना। {i23:17} मन्दिर में इस्मतफ़रोशी मना है {23:17} किसी देवता की ख़िदमत में इस्मतफ़रोशी करना हर इस्राईली औरत और मर्द के लिए मना है। {23:18} मन्नत मानते वक़्त न कस्बी का अज्र, न कुत्ते के पैसे रब के मक़्दिस में लाना, क्यूँकि रब तेरे ख़ुदा को दोनों चीज़ों से घिन है। {i23:19} अपने हमवतनों से सूद न लेना {23:19} अगर कोई इस्राईली भाई तुझ से क़र्ज़ ले तो उस से सूद न लेना, ख़्वाह तू ने उसे पैसे, खाना या कोई और चीज़ दी हो। {23:20} अपने इस्राईली भाई से सूद न ले बल्कि सिर्फ़ परदेसी से। फिर जब तू मुल्क पर क़ब्ज़ा करके उस में रहेगा तो रब तेरा ख़ुदा तेरे हर काम में बरकत देगा। {i23:21} अपनी मन्नत पूरी करना {23:21} जब तू रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर मन्नत माने तो उसे पूरा करने में देर न करना। रब तेरा ख़ुदा यक़ीनन तुझ से इस का मुतालबा करेगा। अगर तू उसे पूरा न करे तो क़ुसूरवार ठहरेगा। {23:22} अगर तू मन्नत मानने से बाज़ रहे तो क़ुसूरवार नहीं ठहरेगा, {23:23} लेकिन अगर तू अपनी दिली ख़ुशी से रब के हुज़ूर मन्नत माने तो हर सूरत में उसे पूरा कर। {i23:24} दूसरे के बाग़ में से गुज़रने का रवय्या {23:24} किसी हमवतन के अंगूर के बाग़ में से गुज़रते वक़्त तुझे जितना जी चाहे उस के अंगूर खाने की इजाज़त है। लेकिन अपने किसी बर्तन में फल जमा न करना। {23:25} इसी तरह किसी हमवतन के अनाज के खेत में से गुज़रते वक़्त तुझे अपने हाथों से अनाज की बालियाँ तोड़ने की इजाज़त है। लेकिन दरान्ती इस्तेमाल न करना। {i24:1} तलाक़ और दुबारा शादी {24:1} हो सकता है कोई आदमी किसी औरत से शादी करे लेकिन बाद में उसे पसन्द न करे, क्यूँकि उसे बीवी के बारे में किसी शर्मनाक बात का पता चल गया है। वह तलाक़नामा लिख कर उसे औरत को देता और फिर उसे घर से वापस भेज देता है। {24:2} इस के बाद उस औरत की शादी किसी और मर्द से हो जाती है, {24:3} और वह भी बाद में उसे पसन्द नहीं करता। वह भी तलाक़नामा लिख कर उसे औरत को देता और फिर उसे घर से वापस भेज देता है। ख़्वाह दूसरा शौहर उसे वापस भेज दे या शौहर मर जाए, {24:4} औरत के पहले शौहर को उस से दुबारा शादी करने की इजाज़त नहीं है, क्यूँकि वह औरत उस के लिए नापाक है। ऐसी हरकत रब की नज़र में क़ाबिल-ए-घिन है। उस मुल्क को यूँ गुनाहआलूदा न करना जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है। {i24:5} मज़ीद हिदायात {24:5} अगर किसी आदमी ने अभी अभी शादी की हो तो तू उसे भर्ती करके जंग करने के लिए नहीं भेज सकता। तू उसे कोई भी ऐसी ज़िम्मादारी नहीं दे सकता, जिस से वह घर से दूर रहने पर मज्बूर हो जाए। एक साल तक वह ऐसी ज़िम्मादारियों से बरी रहे ताकि घर में रह कर अपनी बीवी को ख़ुश कर सके। {24:6} अगर कोई तुझ से उधार ले तो ज़मानत के तौर पर उस से न उस की छोटी चक्की, न उस की बड़ी चक्की का पाट लेना, क्यूँकि ऐसा करने से तू उस की जान लेगा यानी तू वह चीज़ लेगा जिस से उस का गुज़ारा होता है। {24:7} अगर किसी आदमी को पकड़ा जाए जिस ने अपने हमवतन को अग़वा करके ग़ुलाम बना लिया या बेच दिया है तो उसे सज़ा-ए-मौत देना है। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा। {24:8} अगर कोई वबाई जिल्दी बीमारी तुझे लग जाए तो बड़ी एहतियात से लावी के क़बीले के इमामों की तमाम हिदायात पर अमल करना। जो भी हुक्म मैं ने उन्हें दिया उसे पूरा करना। {24:9} याद कर कि रब तेरे ख़ुदा ने मरियम के साथ क्या किया जब तुम मिस्र से निकल कर सफ़र कर रहे थे। {i24:10} ग़रीबों के हुक़ूक़ {24:10} अपने हमवतन को उधार देते वक़्त उस के घर में न जाना ताकि ज़मानत की कोई चीज़ मिले {24:11} बल्कि बाहर ठहर कर इन्तिज़ार कर कि वह ख़ुद घर से ज़मानत की चीज़ निकाल कर तुझे दे। {24:12} अगर वह इतना ज़रूरतमन्द हो कि सिर्फ़ अपनी चादर दे सके तो रात के वक़्त ज़मानत तेरे पास न रहे। {24:13} उसे सूरज डूबने तक वापस करना ताकि क़र्ज़दार उस में लिपट कर सो सके। फिर वह तुझे बरकत देगा और रब तेरा ख़ुदा तेरा यह क़दम रास्त क़रार देगा। {24:14} ज़रूरतमन्द मज़दूर से ग़लत फ़ाइदा न उठाना, चाहे वह इस्राईली हो या परदेसी। {24:15} उसे रोज़ाना सूरज डूबने से पहले पहले उस की मज़दूरी दे देना, क्यूँकि इस से उस का गुज़ारा होता है। कहीं वह रब के हुज़ूर तेरी शिकायत न करे और तू क़ुसूरवार ठहरे। {24:16} वालिदैन को उन के बच्चों के जराइम के सबब से सज़ा-ए-मौत न दी जाए, न बच्चों को उन के वालिदैन के जराइम के सबब से। अगर किसी को सज़ा-ए-मौत देनी हो तो उस गुनाह के सबब से जो उस ने ख़ुद किया है। {24:17} परदेसियों और यतीमों के हुक़ूक़ क़ाइम रखना। उधार देते वक़्त ज़मानत के तौर पर बेवा की चादर न लेना। {24:18} याद रख कि तू भी मिस्र में ग़ुलाम था और कि रब तेरे ख़ुदा ने फ़िद्या दे कर तुझे वहाँ से छुड़ाया। इसी वजह से मैं तुझे यह हुक्म देता हूँ। {24:19} अगर तू फ़सल की कटाई के वक़्त एक पूला भूल कर खेत में छोड़ आए तो उसे लाने के लिए वापस न जाना। उसे परदेसियों, यतीमों और बेवाओं के लिए वहीं छोड़ देना ताकि रब तेरा ख़ुदा तेरे हर काम में बरकत दे। {24:20} जब ज़ैतून की फ़सल पक गई हो तो दरख़्तों को मार मार कर एक ही बार उन में से फल उतार। इस के बाद उन्हें न छेड़ना। बचा हुआ फल परदेसियों, यतीमों और बेवाओं के लिए छोड़ देना। {24:21} इसी तरह अपने अंगूर तोड़ने के लिए एक ही बार बाग़ में से गुज़रना। इस के बाद उसे न छेड़ना। बचा हुआ फल परदेसियों, यतीमों और बेवाओं के लिए छोड़ देना। {24:22} याद रख कि तू ख़ुद मिस्र में ग़ुलाम था। इसी वजह से मैं तुझे यह हुक्म देता हूँ। {i25:1} कोड़े लगाने की मुनासिब सज़ा {25:1} अगर लोग अपना एक दूसरे के साथ झगड़ा ख़ुद निपटा न सकें तो वह अपना मुआमला अदालत में पेश करें। क़ाज़ी फ़ैसला करे कि कौन बेक़ुसूर है और कौन मुजरिम। {25:2} अगर मुजरिम को कोड़े लगाने की सज़ा देनी है तो उसे क़ाज़ी के सामने ही मुँह के बल ज़मीन पर लिटाना। फिर उसे इतने कोड़े लगाए जाएँ जितनों के वह लाइक़ है। {25:3} लेकिन उस को ज़्यादा से ज़्यादा 40 कोड़े लगाने हैं, वर्ना तेरे इस्राईली भाई की सर-ए-आम बेइज़्ज़ती हो जाएगी। {i25:4} बैल का मुँह न बांधना {25:4} जब तू फ़सल गाहने के लिए उस पर बैल चलने देता है तो उस का मुँह बांध कर न रखना। {i25:5} मरहूम भाई की बीवी से शादी करने का हुक्म {25:5} अगर कोई शादीशुदा मर्द बेऔलाद मर जाए और उस का सगा भाई साथ रहे तो उस का फ़र्ज़ है कि बेवा से शादी करे। बेवा शौहर के ख़ानदान से हट कर किसी और से शादी न करे बल्कि सिर्फ़ अपने देवर से। {25:6} पहला बेटा जो इस रिश्ते से पैदा होगा पहले शौहर के बेटे की हैसियत रखेगा। यूँ उस का नाम क़ाइम रहेगा। {25:7} लेकिन अगर देवर भाबी से शादी करना न चाहे तो भाबी शहर के दरवाज़े पर जमा होने वाले बुज़ुर्गों के पास जाए और उन से कहे, “मेरा देवर मुझ से शादी करने से इन्कार करता है। वह अपना फ़र्ज़ अदा करने को तय्यार नहीं कि अपने भाई का नाम क़ाइम रखे।” {25:8} फिर शहर के बुज़ुर्ग देवर को बुला कर उसे समझाएँ। अगर वह इस के बावुजूद भी उस से शादी करने से इन्कार करे {25:9} तो उस की भाबी बुज़ुर्गों की मौजूदगी में उस के पास जा कर उस की एक चप्पल उतार ले। फिर वह उस के मुँह पर थूक कर कहे, “उस आदमी से ऐसा सुलूक किया जाता है जो अपने भाई की नस्ल क़ाइम रखने को तय्यार नहीं।” {25:10} आइन्दा इस्राईल में देवर की नस्ल “नंगे पाँओ वाले की नस्ल” कहलाएगी। {i25:11} झगड़े में नाज़ेबा हरकतें {25:11} अगर दो आदमी लड़ रहे हों और एक की बीवी अपने शौहर को बचाने की ख़ातिर मुख़ालिफ़ के अज़ु-ए-तनासुल को पकड़ ले {25:12} तो लाज़िम है कि तू औरत का हाथ काट डाले। उस पर रहम न करना। {i25:13} धोका न देना {25:13} तोलते वक़्त अपने थैले में सहीह वज़न के बाट रख, और धोका देने के लिए हल्के बाट साथ न रखना। {25:14} इसी तरह अपने घर में अनाज की पैमाइश करने का सहीह बर्तन रख, और धोका देने के लिए छोटा बर्तन साथ न रखना। {25:15} सहीह वज़न के बाट और पैमाइश करने के सहीह बर्तन इस्तेमाल करना ताकि तू देर तक उस मुल्क में जीता रहे जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा। {25:16} क्यूँकि उसे हर धोकेबाज़ से घिन है। {i25:17} अमालीक़ियों को सज़ा देना {25:17} याद रहे कि अमालीक़ियों ने तुझ से क्या कुछ किया जब तुम मिस्र से निकल कर सफ़र कर रहे थे। {25:18} जब तू थकाहारा था तो वह तुझ पर हम्ला करके पीछे पीछे चलने वाले तमाम कमज़ोरों को जान से मारते रहे। वह अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं मानते थे। {25:19} चुनाँचे जब रब तेरा ख़ुदा तुझे इर्दगिर्द के तमाम दुश्मनों से सुकून देगा और तू उस मुल्क में आबाद होगा जो वह तुझे मीरास में दे रहा है ताकि तू उस पर क़ब्ज़ा करे तो अमालीक़ियों को यूँ हलाक कर कि दुनिया में उन का नाम-ओ-निशान न रहे। यह बात मत भूलना। {i26:1} ज़मीन की पहली पैदावार रब को पेश करना {26:1} जब तू उस मुल्क में दाख़िल होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है और तू उस पर क़ब्ज़ा करके उस में आबाद हो जाएगा {26:2} तो जो भी फ़सल तू काटेगा उस के पहले फल में से कुछ टोकरे में रख कर उस जगह ले जा जो रब तेरा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। {26:3} वहाँ ख़िदमत करने वाले इमाम से कह, “आज मैं रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर एलान करता हूँ कि उस मुल्क में पहुँच गया हूँ जिस का हमें देने का वादा रब ने क़सम खा कर हमारे बापदादा से किया था।” {26:4} तब इमाम तेरा टोकरा ले कर उसे रब तेरे ख़ुदा की क़ुर्बानगाह के सामने रख दे। {26:5} फिर रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर कह, “मेरा बाप आवारा फिरने वाला अरामी था जो अपने लोगों को ले कर मिस्र में आबाद हुआ। वहाँ पहुँचते वक़्त उन की तादाद कम थी, लेकिन होते होते वह बड़ी और ताक़तवर क़ौम बन गए। {26:6} लेकिन मिस्रियों ने हमारे साथ बुरा सुलूक किया और हमें दबा कर सख़्त ग़ुलामी में फंसा दिया। {26:7} फिर हम ने चिल्ला कर रब अपने बापदादा के ख़ुदा से फ़र्याद की, और रब ने हमारी सुनी। उस ने हमारा दुख, हमारी मुसीबत और दबी हुई हालत देखी {26:8} और बड़े इख़तियार और क़ुदरत का इज़हार करके हमें मिस्र से निकाल लाया। उस वक़्त उस ने मिस्रियों में दह्शत फैला कर बड़े मोजिज़े दिखाए। {26:9} वह हमें यहाँ ले आया और यह मुल्क दिया जिस में दूध और शहद की कस्रत है। {26:10} ऐ रब, अब मैं तुझे उस ज़मीन का पहला फल पेश करता हूँ जो तू ने हमें बख़्शी है।” अपनी पैदावार का टोकरा रब अपने ख़ुदा के सामने रख कर उसे सिज्दा करना। {26:11} ख़ुशी मनाना कि रब मेरे ख़ुदा ने मुझे और मेरे घराने को इतनी अच्छी चीज़ों से नवाज़ा है। इस ख़ुशी में अपने दरमियान रहने वाले लावियों और परदेसियों को भी शामिल करना। {i26:12} फ़सल का ज़रूरतमन्दों के लिए हिस्सा {26:12} हर तीसरे साल अपनी तमाम फ़सलों का दसवाँ हिस्सा लावियों, परदेसियों, यतीमों और बेवाओं को देना ताकि वह तेरे शहरों में खाना खा कर सेर हो जाएँ। {26:13} फिर रब अपने ख़ुदा से कह, “मैं ने वैसा ही किया है जैसा तू ने मुझे हुक्म दिया। मैं ने अपने घर से तेरे लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हिस्सा निकाल कर उसे लावियों, परदेसियों, यतीमों और बेवाओं को दिया है। मैं ने सब कुछ तेरी हिदायात के ऐन मुताबिक़ किया है और कुछ नहीं भूला। {26:14} मातम करते वक़्त मैं ने इस मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हिस्से से कुछ नहीं खाया। मैं इसे उठा कर घर से बाहर लाते वक़्त नापाक नहीं था। मैं ने इस में से मुर्दों को भी कुछ पेश नहीं किया। मैं ने रब अपने ख़ुदा की इताअत करके वह सब कुछ किया है जो तू ने मुझे करने को फ़रमाया था। {26:15} चुनाँचे आसमान पर अपने मक़्दिस से निगाह करके अपनी क़ौम इस्राईल को बरकत दे। उस मुल्क को भी बरकत दे जिस का वादा तू ने क़सम खा कर हमारे बापदादा से किया और जो तू ने हमें बख़्श भी दिया है, उस मुल्क को जिस में दूध और शहद की कस्रत है।” {i26:16} तुम रब की क़ौम हो {26:16} आज रब तेरा ख़ुदा फ़रमाता है कि इन अह्काम और हिदायात की पैरवी कर। पूरे दिल-ओ-जान से और बड़ी एहतियात से इन पर अमल कर। {26:17} आज तू ने एलान किया है, “रब मेरा ख़ुदा है। मैं उस की राहों पर चलता रहूँगा, उस के अह्काम के ताबे रहूँगा और उस की सुनूँगा।” {26:18} और आज रब ने एलान किया है, “तू मेरी क़ौम और मेरी अपनी मिलकियत है जिस तरह मैं ने तुझ से वादा किया है। अब मेरे तमाम अह्काम के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ार। {26:19} जितनी भी क़ौमें मैं ने ख़ल्क़ की हैं उन सब पर मैं तुझे सरफ़राज़ करूँगा और तुझे तारीफ़, शोहरत और इज़्ज़त अता करूँगा। तू रब अपने ख़ुदा के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस क़ौम होगा जिस तरह मैं ने वादा किया है।” {i27:1} ऐबाल पहाड़ पर क़ुर्बानगाह बनाना है {27:1} फिर मूसा ने बुज़ुर्गों से मिल कर क़ौम से कहा, “तमाम हिदायात के ताबे रहो जो मैं तुम्हें आज दे रहा हूँ। {27:2} जब तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके उस मुल्क में दाख़िल होगे जो रब तेरा ख़ुदा तुझे दे रहा है तो वहाँ बड़े पत्थर खड़े करके उन पर सफेदी कर। {27:3} उन पर लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ पूरी शरीअत लिख। दरया को पार करने के बाद यही कुछ कर ताकि तू उस मुल्क में दाख़िल हो जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा और जिस में दूध और शहद की कस्रत है। क्यूँकि रब तेरे बापदादा के ख़ुदा ने यह देने का तुझ से वादा किया है। {27:4} चुनाँचे यर्दन को पार करके पत्थरों को ऐबाल पहाड़ पर खड़ा करो और उन पर सफेदी कर। {27:5} वहाँ रब अपने ख़ुदा के लिए क़ुर्बानगाह बनाना। जो पत्थर तू उस के लिए इस्तेमाल करे उन्हें लोहे के किसी औज़ार से न तराशना। {27:6} सिर्फ़ सालिम पत्थर इस्तेमाल कर। क़ुर्बानगाह पर रब अपने ख़ुदा को भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ पेश कर। {27:7} सलामती की क़ुर्बानियाँ भी उस पर चढ़ा। उन्हें वहाँ रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर खा कर ख़ुशी मना। {27:8} वहाँ खड़े किए गए पत्थरों पर शरीअत के तमाम अल्फ़ाज़ साफ़ साफ़ लिखे जाएँ।” {i27:9} ऐबाल पहाड़ पर से लानत {27:9} फिर मूसा ने लावी के क़बीले के इमामों से मिल कर तमाम इस्राईलियों से कहा, “ऐ इस्राईल, ख़ामोशी से सुन। अब तू रब अपने ख़ुदा की क़ौम बन गया है, {27:10} इस लिए उस का फ़रमाँबरदार रह और उस के उन अह्काम पर अमल कर जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ।” {27:11} उसी दिन मूसा ने इस्राईलियों को हुक्म दे कर कहा, {27:12} “दरया-ए-यर्दन को पार करने के बाद शमाऊन, लावी, यहूदाह, इश्कार, यूसुफ़ और बिनयमीन के क़बीले गरिज़ीम पहाड़ पर खड़े हो जाएँ। वहाँ वह बरकत के अल्फ़ाज़ बोलें। {27:13} बाक़ी क़बीले यानी रूबिन, जद, आशर, ज़बूलून, दान और नफ़्ताली ऐबाल पहाड़ पर खड़े हो कर लानत के अल्फ़ाज़ बोलें। {27:14} फिर लावी तमाम लोगों से मुख़ातिब हो कर ऊँची आवाज़ से कहें, {27:15} ‘उस पर लानत जो बुत तराश कर या ढाल कर चुपके से खड़ा करे। रब को कारीगर के हाथों से बनी हुई ऐसी चीज़ से घिन है।’ जवाब में सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:16} फिर लावी कहें, ‘उस पर लानत जो अपने बाप या माँ की तह्क़ीर करे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:17} ‘उस पर लानत जो अपने पड़ोसी की ज़मीन की हुदूद आगे पीछे करे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:18} ‘उस पर लानत जो किसी अंधे की राहनुमाई करके उसे ग़लत रास्ते पर ले जाए।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:19} ‘उस पर लानत जो परदेसियों, यतीमों या बेवाओं के हुक़ूक़ क़ाइम न रखे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:20} ‘उस पर लानत जो अपने बाप की बीवी से हमबिसतर हो जाए, क्यूँकि वह अपने बाप की बेहुरमती करता है।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:21} ‘उस पर लानत जो जानवर से जिन्सी ताल्लुक़ रखे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:22} ‘उस पर लानत जो अपनी सगी बहन, अपने बाप की बेटी या अपनी माँ की बेटी से हमबिसतर हो जाए।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:23} ‘उस पर लानत जो अपनी सास से हमबिसतर हो जाए।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:24} ‘उस पर लानत जो चुपके से अपने हमवतन को क़त्ल कर दे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:25} ‘उस पर लानत जो पैसे ले कर किसी बेक़ुसूर शख़्स को क़त्ल करे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {27:26} ‘उस पर लानत जो इस शरीअत की बातें क़ाइम न रखे, न इन पर अमल करे।’ सब लोग कहें, ‘आमीन!’ {i28:1} फ़रमाँबरदारी की बरकतें {28:1} रब तेरा ख़ुदा तुझे दुनिया की तमाम क़ौमों पर सरफ़राज़ करेगा। शर्त यह है कि तू उस की सुने और एहतियात से उस के उन तमाम अह्काम पर अमल करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। {28:2} रब अपने ख़ुदा का फ़रमाँबरदार रह तो तुझे हर तरह की बरकत हासिल होगी। {28:3} रब तुझे शहर और दीहात में बरकत देगा। {28:4} तेरी औलाद फले फूलेगी, तेरी अच्छी-ख़ासी फ़सलें पकेंगी, तेरे गाय-बैलों और भेड़-बकरियों के बच्चे तरक़्क़ी करेंगे। {28:5} तेरा टोकरा फल से भरा रहेगा, और आटा गूँधने का तेरा बर्तन आटे से ख़ाली नहीं होगा। {28:6} रब तुझे घर में आते और वहाँ से निकलते वक़्त बरकत देगा। {28:7} जब तेरे दुश्मन तुझ पर हम्ला करेंगे तो वह रब की मदद से शिकस्त खाएँगे। गो वह मिल कर तुझ पर हम्ला करें तो भी तू उन्हें चारों तरफ़ मुन्तशिर कर देगा। {28:8} अल्लाह तेरे हर काम में बरकत देगा। अनाज की कस्रत के सबब से तेरे गोदाम भरे रहेंगे। रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जो वह तुझे देने वाला है। {28:9} रब अपनी क़सम के मुताबिक़ तुझे अपनी मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस क़ौम बनाएगा अगर तू उस के अह्काम पर अमल करे और उस की राहों पर चले। {28:10} फिर दुनिया की तमाम क़ौमें तुझ से ख़ौफ़ खाएँगी, क्यूँकि वह देखेंगी कि तू रब की क़ौम है और उस के नाम से कहलाता है। {28:11} रब तुझे बहुत औलाद देगा, तेरे रेवड़ बढ़ाएगा और तुझे कस्रत की फ़सलें देगा। यूँ वह तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जिस का वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से किया। {28:12} रब आसमान के ख़ज़ानों को खोल कर वक़्त पर तेरी ज़मीन पर बारिश बरसाएगा। वह तेरे हर काम में बरकत देगा। तू बहुत सी क़ौमों को उधार देगा लेकिन किसी का भी क़र्ज़दार नहीं होगा। {28:13} रब तुझे क़ौमों की दुम नहीं बल्कि उन का सर बनाएगा। तू तरक़्क़ी करता जाएगा और ज़वाल का शिकार नहीं होगा। लेकिन शर्त यह है कि तू रब अपने ख़ुदा के वह अह्काम मान कर उन पर अमल करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। {28:14} जो कुछ भी मैं ने तुझे करने को कहा है उस से किसी तरह भी हट कर ज़िन्दगी न गुज़ारना। न दीगर माबूदों की पैरवी करना, न उन की ख़िदमत करना। {i28:15} नाफ़रमानी की लानतें {28:15} लेकिन अगर तू रब अपने ख़ुदा की न सुने और उस के उन तमाम अह्काम पर अमल न करे जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ तो हर तरह की लानत तुझ पर आएगी। {28:16} शहर और दीहात में तुझ पर लानत होगी। {28:17} तेरे टोकरे और आटा गूँधने के तेरे बर्तन पर लानत होगी। {28:18} तेरी औलाद पर, तेरे गाय-बैलों और भेड़-बकरियों के बच्चों पर और तेरे खेतों पर लानत होगी। {28:19} घर में आते और वहाँ से निकलते वक़्त तुझ पर लानत होगी। {28:20} अगर तू ग़लत काम करके रब को छोड़े तो जो कुछ भी तू करे वह तुझ पर लानतें, परेशानियाँ और मुसीबतें आने देगा। तब तेरा जल्दी से सत्यानास होगा, और तू हलाक हो जाएगा। {28:21} रब तुझ में वबाई बीमारियाँ फैलाएगा जिन के सबब से तुझ में से कोई उस मुल्क में ज़िन्दा नहीं रहेगा जिस पर तू अभी क़ब्ज़ा करने वाला है। {28:22} रब तुझे मोहलक बीमारियों, बुख़ार और सूजन से मारेगा। झुलसाने वाली गर्मी, काल, पतरोग और फफूँदी तेरी फ़सलें ख़त्म करेगी। ऐसी मुसीबतों के बाइस तू तबाह हो जाएगा। {28:23} तेरे ऊपर आसमान पीतल जैसा सख़्त होगा जबकि तेरे नीचे ज़मीन लोहे की मानिन्द होगी। {28:24} बारिश की जगह रब तेरे मुल्क पर गर्द और रेत बरसाएगा जो आसमान से तेरे मुल्क पर छा कर तुझे बर्बाद कर देगी। {28:25} जब तू अपने दुश्मनों का सामना करे तो रब तुझे शिकस्त दिलाएगा। गो तू मिल कर उन की तरफ़ बढ़ेगा तो भी उन से भाग कर चारों तरफ़ मुन्तशिर हो जाएगा। दुनिया के तमाम ममालिक में लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे जब वह तेरी मुसीबतें देखेंगे। {28:26} परिन्दे और जंगली जानवर तेरी लाशों को खा जाएंगे, और उन्हें भगाने वाला कोई नहीं होगा। {28:27} रब तुझे उन ही फोड़ों से मारेगा जो मिस्रियों को निकले थे। ऐसे जिल्दी अमराज़ फैलेंगे जिन का इलाज नहीं है। {28:28} तू पागलपन का शिकार हो जाएगा, रब तुझे अंधेपन और ज़हनी अब्तरी में मुब्तला कर देगा। {28:29} दोपहर के वक़्त भी तू अंधे की तरह टटोल टटोल कर फिरेगा। जो कुछ भी तू करे उस में नाकाम रहेगा। रोज़-ब-रोज़ लोग तुझे दबाते और लूटते रहेंगे, और तुझे बचाने वाला कोई नहीं होगा। {28:30} तेरी मंगनी किसी औरत से होगी तो कोई और आ कर उस की इस्मतदरी करेगा। तू अपने लिए घर बनाएगा लेकिन उस में नहीं रहेगा। तू अपने लिए अंगूर का बाग़ लगाएगा लेकिन उस का फल नहीं खाएगा। {28:31} तेरे देखते देखते तेरा बैल ज़बह किया जाएगा, लेकिन तू उस का गोश्त नहीं खाएगा। तेरा गधा तुझ से छीन लिया जाएगा और वापस नहीं किया जाएगा। तेरी भेड़-बकरियाँ दुश्मन को दी जाएँगी, और उन्हें छुड़ाने वाला कोई नहीं होगा। {28:32} तेरे बेटे-बेटियों को किसी दूसरी क़ौम को दिया जाएगा, और तू कुछ नहीं कर सकेगा। रोज़-ब-रोज़ तू अपने बच्चों के इन्तिज़ार में उफ़क़ को तकता रहेगा, लेकिन देखते देखते तेरी आँखें धुन्दला जाएँगी। {28:33} एक अजनबी क़ौम तेरी ज़मीन की पैदावार और तेरी मेहनत-ओ-मशक़्क़त की कमाई ले जाएगी। तुझे उम्र भर ज़ुल्म और दबाओ बर्दाश्त करना पड़ेगा। {28:34} जो हौलनाक बातें तेरी आँखें देखेंगी उन से तू पागल हो जाएगा। {28:35} रब तुझे तक्लीफ़दिह और लाइलाज फोड़ों से मारेगा जो तल्वे से ले कर चाँदी तक पूरे जिस्म पर फैल कर तेरे घुटनों और टाँगों को मुतअस्सिर करेंगे। {28:36} रब तुझे और तेरे मुक़र्रर किए हुए बादशाह को एक ऐसे मुल्क में ले जाएगा जिस से न तू और न तेरे बापदादा वाक़िफ़ थे। वहाँ तू दीगर माबूदों यानी लकड़ी और पत्थर के बुतों की ख़िदमत करेगा। {28:37} जिस जिस क़ौम में रब तुझे हाँक देगा वहाँ तुझे देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे और वह तेरा मज़ाक़ उड़ाएँगे। तू उन के लिए इब्रतअंगेज़ मिसाल होगा। {28:38} तू अपने खेतों में बहुत बीज बोने के बावुजूद कम ही फ़सल काटेगा, क्यूँकि टिड्डे उसे खा जाएंगे। {28:39} तू अंगूर के बाग़ लगा कर उन पर ख़ूब मेहनत करेगा लेकिन न उन के अंगूर तोड़ेगा, न उन की मै पिएगा, क्यूँकि कीड़े उन्हें खा जाएंगे। {28:40} गो तेरे पूरे मुल्क में ज़ैतून के दरख़्त होंगे तो भी तू उन का तेल इस्तेमाल नहीं कर सकेगा, क्यूँकि ज़ैतून ख़राब हो कर ज़मीन पर गिर जाएंगे। {28:41} तेरे बेटे-बेटियाँ तो होंगे, लेकिन तू उन से महरूम हो जाएगा। क्यूँकि उन्हें गिरिफ़्तार करके किसी अजनबी मुल्क में ले जाया जाएगा। {28:42} टिड्डियों के ग़ोल तेरे मुल्क के तमाम दरख़्तों और फ़सलों पर क़ब्ज़ा कर लेंगे। {28:43} तेरे दरमियान रहने वाला परदेसी तुझ से बढ़ कर तरक़्क़ी करता जाएगा जबकि तुझ पर ज़वाल आ जाएगा। {28:44} उस के पास तुझे उधार देने के लिए पैसे होंगे जबकि तेरे पास उसे उधार देने को कुछ नहीं होगा। आख़िर में वह सर और तू दुम होगा। {28:45} यह तमाम लानतें तुझ पर आन पड़ेंगी। जब तक तू तबाह न हो जाए वह तेरा ताक़्क़ुब करती रहेंगी, क्यूँकि तू ने रब अपने ख़ुदा की न सुनी और उस के अह्काम पर अमल न किया। {28:46} यूँ यह हमेशा तक तेरे और तेरी औलाद के लिए एक मोजिज़ाना और इब्रतअंगेज़ इलाही निशान रहेंगी। {28:47} चूँकि तू ने दिली ख़ुशी से उस वक़्त रब अपने ख़ुदा की ख़िदमत न की जब तेरे पास सब कुछ था {28:48} इस लिए तू उन दुश्मनों की ख़िदमत करेगा जिन्हें रब तेरे ख़िलाफ़ भेजेगा। तू भूका, प्यासा, नंगा और हर चीज़ का हाजतमन्द होगा, और रब तेरी गर्दन पर लोहे का जूआ रख कर तुझे मुकम्मल तबाही तक ले जाएगा। {28:49} रब तेरे ख़िलाफ़ एक क़ौम खड़ी करेगा जो दूर से बल्कि दुनिया की इन्तिहा से आ कर उक़ाब की तरह तुझ पर झपट्टा मारेगी। वह ऐसी ज़बान बोलेगी जिस से तू वाक़िफ़ नहीं होगा। {28:50} वह सख़्त क़ौम होगी जो न बुज़ुर्गों का लिहाज़ करेगी और न बच्चों पर रहम करेगी। {28:51} वह तेरे मवेशी और फ़सलें खा जाएगी और तू भूके मर जाएगा। तू हलाक हो जाएगा, क्यूँकि तेरे लिए कुछ नहीं बचेगा, न अनाज, न मै, न तेल, न गाय-बैलों या भेड़-बकरियों के बच्चे। {28:52} दुश्मन तेरे मुल्क के तमाम शहरों का मुहासरा करेगा। आख़िरकार जिन ऊँची और मज़बूत फ़सीलों पर तू एतिमाद करेगा वह भी सब गिर पड़ेंगी। दुश्मन उस मुल्क का कोई भी शहर नहीं छोड़ेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देने वाला है। {28:53} जब दुश्मन तेरे शहरों का मुहासरा करेगा तो तू उन में इतना शदीद भूका हो जाएगा कि अपने बच्चों को खा लेगा जो रब तेरे ख़ुदा ने तुझे दिए हैं। {28:54} मुहासरे के दौरान तुम में से सब से शरीफ़ और शाइस्ता आदमी भी अपने बच्चे को ज़बह करके खाएगा, क्यूँकि उस के पास कोई और ख़ुराक {28:55} नहीं होगी। उस की हालत इतनी बुरी होगी कि वह उसे अपने सगे भाई, बीवी या बाक़ी बच्चों के साथ तक़्सीम करने के लिए तय्यार नहीं होगा। {28:56} तुम में से सब से शरीफ़ और शाइस्ता औरत भी ऐसा ही करेगी, अगरचे पहले वह इतनी नाज़ुक थी कि फ़र्श को अपने तल्वे से छूने की जुरअत नहीं करती थी। मुहासरे के दौरान उसे इतनी शदीद भूक होगी कि जब उस के बच्चा पैदा होगा {28:57} तो वह छुप छुप कर उसे खाएगी। न सिर्फ़ यह बल्कि वह पैदाइश के वक़्त बच्चे के साथ ख़ारिज हुई आलाईश भी खाएगी और उसे अपने शौहर या अपने बाक़ी बच्चों में बाँटने के लिए तय्यार नहीं होगी। इतनी मुसीबत तुझ पर मुहासरे के दौरान आएगी। {28:58} ग़रज़ एहतियात से शरीअत की उन तमाम बातों की पैरवी कर जो इस किताब में दर्ज हैं, और रब अपने ख़ुदा के पुरजलाल और बारोब नाम का ख़ौफ़ मानना। {28:59} वर्ना वह तुझ और तेरी औलाद में सख़्त और लाइलाज अमराज़ और ऐसी दह्शतनाक वबाएँ फैलाएगा जो रोकी नहीं जा सकेंगी। {28:60} जिन तमाम वबाओं से तू मिस्र में दह्शत खाता था वह अब तेरे दरमियान फैल कर तेरे साथ चिमटी रहेंगी। {28:61} न सिर्फ़ शरीअत की इस किताब में बयान की हुई बीमारियाँ और मुसीबतें तुझ पर आएँगी बल्कि रब और भी तुझ पर भेजेगा, जब तक कि तू हलाक न हो जाए। {28:62} अगर तू रब अपने ख़ुदा की न सुने तो आख़िरकार तुम में से बहुत कम बचे रहेंगे, गो तुम पहले सितारों जैसे बेशुमार थे। {28:63} जिस तरह पहले रब ख़ुशी से तुम्हें कामयाबी देता और तुम्हारी तादाद बढ़ाता था उसी तरह अब वह तुम्हें बर्बाद और तबाह करने में ख़ुशी मह्सूस करेगा। तुम्हें ज़बरदस्ती उस मुल्क से निकाला जाएगा जिस पर तू इस वक़्त दाख़िल हो कर क़ब्ज़ा करने वाला है। {28:64} तब रब तुझे दुनिया के एक सिरे से ले कर दूसरे सिरे तक तमाम क़ौमों में मुन्तशिर कर देगा। वहाँ तू दीगर माबूदों की पूजा करेगा, ऐसे देवताओं की जिन से न तू और न तेरे बापदादा वाक़िफ़ थे। {28:65} उन ममालिक में भी न तू आराम-ओ-सुकून पाएगा, न तेरे पाँओ जम जाएंगे। रब होने देगा कि तेरा दिल थरथराता रहेगा, तेरी आँखें परेशानी के बाइस धुन्दला जाएँगी और तेरी जान से उम्मीद की हर किरन जाती रहेगी। {28:66} तेरी जान हर वक़्त ख़तरे में होगी और तू दिन रात दह्शत खाते हुए मरने की तवक़्क़ो करेगा। {28:67} सुब्ह उठ कर तू कहेगा, “काश शाम हो!” और शाम के वक़्त, “काश सुब्ह हो!” क्यूँकि जो कुछ तू देखेगा उस से तेरे दिल को दह्शत घेर लेगी। {28:68} रब तुझे जहाज़ों में बिठा कर मिस्र वापस ले जाएगा अगरचे मैं ने कहा था कि तू उसे दुबारा कभी नहीं देखेगा। वहाँ पहुँच कर तुम अपने दुश्मनों से बात करके अपने आप को ग़ुलाम के तौर पर बेचने की कोशिश करोगे, लेकिन कोई भी तुम्हें ख़रीदना नहीं चाहेगा।” {i29:1} मोआब में रब के साथ नया अह्द {29:1} जब इस्राईली मोआब में थे तो रब ने मूसा को हुक्म दिया कि इस्राईलियों के साथ एक और अह्द बांधे। यह उस अह्द के इलावा था जो रब होरिब यानी सीना पर उन के साथ बांध चुका था। {29:2} इस सिलसिले में मूसा ने तमाम इस्राईलियों को बुला कर कहा, “तुम ने ख़ुद देखा कि रब ने मिस्र के बादशाह फ़िरऔन, उस के मुलाज़िमों और पूरे मुल्क के साथ क्या कुछ किया। {29:3} तुम ने अपनी आँखों से वह बड़ी आज़माइशें, इलाही निशान और मोजिज़े देखे जिन के ज़रीए रब ने अपनी क़ुदरत का इज़हार किया। {29:4} मगर अफ़्सोस, आज तक रब ने तुम्हें न समझदार दिल अता किया, न आँखें जो देख सकें या कान जो सुन सकें। {29:5} रेगिस्तान में मैं ने 40 साल तक तुम्हारी राहनुमाई की। इस दौरान न तुम्हारे कपड़े फटे और न तुम्हारे जूते घिसे। {29:6} न तुम्हारे पास रोटी थी, न मै या मै जैसी कोई और चीज़। तो भी रब ने तुम्हारी ज़रूरियात पूरी कीं ताकि तुम सीख लो कि वही रब तुम्हारा ख़ुदा है। {29:7} फिर हम यहाँ आए तो हस्बोन का बादशाह सीहोन और बसन का बादशाह ओज निकल कर हम से लड़ने आए। लेकिन हम ने उन्हें शिकस्त दी। {29:8} उन के मुल्क पर क़ब्ज़ा करके हम ने उसे रूबिन, जद और मनस्सी के आधे क़बीले को मीरास में दिया। {29:9} अब एहतियात से इस अह्द की तमाम शराइत पूरी करो ताकि तुम हर बात में कामयाब हो। {29:10} इस वक़्त तुम सब रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर खड़े हो, तुम्हारे क़बीलों के सरदार, तुम्हारे बुज़ुर्ग, निगहबान, मर्द, {29:11} औरतें और बच्चे। तेरे दरमियान रहने वाले परदेसी भी लक्कड़हारों से ले कर पानी भरने वालों तक तेरे साथ यहाँ हाज़िर हैं। {29:12} तू इस लिए यहाँ जमा हुआ है कि रब अपने ख़ुदा का वह अह्द तस्लीम करे जो वह आज क़सम खा कर तेरे साथ बांध रहा है। {29:13} इस से वह आज इस की तस्दीक़ कर रहा है कि तू उस की क़ौम और वह तेरा ख़ुदा है यानी वही बात जिस का वादा उस ने तुझ से और तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से किया था। {29:14} लेकिन मैं यह अह्द क़सम खा कर न सिर्फ़ तुम्हारे साथ जो {29:15} हाज़िर हो बांध रहा हूँ बल्कि तुम्हारी आने वाली नस्लों के साथ भी। {i29:16} बुतपरस्ती की सज़ा {29:16} तुम ख़ुद जानते हो कि हम मिस्र में किस तरह ज़िन्दगी गुज़ारते थे। यह भी तुम्हें याद है कि हम किस तरह मुख़्तलिफ़ ममालिक में से गुज़रते हुए यहाँ तक पहुँचे। {29:17} तुम ने उन के नफ़रतअंगेज़ बुत देखे जो लकड़ी, पत्थर, चाँदी और सोने के थे। {29:18} ध्यान दो कि यहाँ मौजूद कोई भी मर्द, औरत, कुम्बा या क़बीला रब अपने ख़ुदा से हट कर दूसरी क़ौमों के देवताओं की पूजा न करे। ऐसा न हो कि तुम्हारे दरमियान कोई जड़ फूट कर ज़हरीला और कड़वा फल लाए। {29:19} तुम सब ने वह लानतें सुनी हैं जो रब नाफ़रमानों पर भेजेगा। तो भी हो सकता है कि कोई अपने आप को रब की बरकत का वारिस समझ कर कहे, “बेशक मैं अपनी ग़लत राहों से हटने के लिए तय्यार नहीं हूँ, लेकिन कोई बात नहीं। मैं मह्फ़ूज़ रहूँगा।” ख़बरदार, ऐसी हरकत से वह न सिर्फ़ अपने ऊपर बल्कि पूरे मुल्क पर तबाही लाएगा। {29:20} रब कभी भी उसे मुआफ़ करने पर आमादा नहीं होगा बल्कि वह उसे अपने ग़ज़ब और ग़ैरत का निशाना बनाएगा। इस किताब में दर्ज तमाम लानतें उस पर आएँगी, और रब दुनिया से उस का नाम-ओ-निशान मिटा देगा। {29:21} वह उसे पूरी जमाअत से अलग करके उस पर अह्द की वह तमाम लानतें लाएगा जो शरीअत की इस किताब में लिखी हुई हैं। {29:22} मुस्तक़बिल में तुम्हारी औलाद और दूरदराज़ ममालिक से आने वाले मुसाफ़िर उन मुसीबतों और अमराज़ का असर देखेंगे जिन से रब ने मुल्क को तबाह किया होगा। {29:23} चारों तरफ़ ज़मीन झुलसी हुई और गंधक और नमक से ढकी हुई नज़र आएगी। बीज उस में बोया नहीं जाएगा, क्यूँकि ख़ुदरौ पौदों तक कुछ नहीं उगेगा। तुम्हारा मुल्क सदूम, अमूरा, अदमा और ज़बोईम की मानिन्द होगा जिन को रब ने अपने ग़ज़ब में तबाह किया। {29:24} तमाम क़ौमें पूछेंगी, ‘रब ने इस मुल्क के साथ ऐसा क्यूँ किया? उस के सख़्त ग़ज़ब की क्या वजह थी?’ {29:25} उन्हें जवाब मिलेगा, ‘वजह यह है कि इस मुल्क के बाशिन्दों ने रब अपने बापदादा के ख़ुदा का अह्द तोड़ दिया जो उस ने उन्हें मिस्र से निकालते वक़्त उन से बांधा था। {29:26} उन्हों ने जा कर दीगर माबूदों की ख़िदमत की और उन्हें सिज्दा किया जिन से वह पहले वाक़िफ़ नहीं थे और जो रब ने उन्हें नहीं दिए थे। {29:27} इसी लिए उस का ग़ज़ब इस मुल्क पर नाज़िल हुआ और वह उस पर वह तमाम लानतें लाया जिन का ज़िक्र इस किताब में है। {29:28} वह इतना ग़ुस्से हुआ कि उस ने उन्हें जड़ से उखाड़ कर एक अजनबी मुल्क में फैंक दिया जहाँ वह आज तक आबाद हैं।’ {29:29} बहुत कुछ पोशीदा है, और सिर्फ़ रब हमारा ख़ुदा उस का इल्म रखता है। लेकिन उस ने हम पर अपनी शरीअत का इन्किशाफ़ कर दिया है। लाज़िम है कि हम और हमारी औलाद उस के फ़रमाँबरदार रहें। {i30:1} तौबा के मुसबत नतीजे {30:1} मैं ने तुझे बताया है कि तेरे लिए क्या कुछ बरकत का और क्या कुछ लानत का बाइस है। जब रब तेरा ख़ुदा तुझे तेरी ग़लत हरकतों के सबब से मुख़्तलिफ़ क़ौमों में मुन्तशिर कर देगा तो तू मेरी बातें मान जाएगा। {30:2} तब तू और तेरी औलाद रब अपने ख़ुदा के पास वापस आएँगे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की सुन कर उन तमाम अह्काम पर अमल करेंगे जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ। {30:3} फिर रब तेरा ख़ुदा तुझे बहाल करेगा और तुझ पर रहम करके तुझे उन तमाम क़ौमों से निकाल कर जमा करेगा जिन में उस ने तुझे मुन्तशिर कर दिया था। {30:4} हाँ, रब तेरा ख़ुदा तुझे हर जगह से जमा करके वापस लाएगा, चाहे तू सब से दूर मुल्क में क्यूँ न पड़ा हो। {30:5} वह तुझे तेरे बापदादा के मुल्क में लाएगा, और तू उस पर क़ब्ज़ा करेगा। फिर वह तुझे तेरे बापदादा से ज़्यादा कामयाबी बख़्शेगा, और तेरी तादाद ज़्यादा बढ़ाएगा। {30:6} ख़तना रब की क़ौम का ज़ाहिरी निशान है। लेकिन उस वक़्त रब तेरा ख़ुदा तेरे और तेरी औलाद का बातिनी ख़तना करेगा ताकि तू उसे पूरे दिल-ओ-जान से प्यार करे और जीता रहे। {30:7} जो लानतें रब तेरा ख़ुदा तुझ पर लाया था उन्हें वह अब तेरे दुश्मनों पर आने देगा, उन पर जो तुझ से नफ़रत रखते और तुझे ईज़ा पहुँचाते हैं। {30:8} क्यूँकि तू दुबारा रब की सुनेगा और उस के तमाम अह्काम की पैरवी करेगा जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। {30:9} जो कुछ भी तू करेगा उस में रब तुझे बड़ी कामयाबी बख़्शेगा, और तुझे कस्रत की औलाद, मवेशी और फ़सलें हासिल होंगी। क्यूँकि जिस तरह वह तेरे बापदादा को कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करता था उसी तरह वह तुझे भी कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करेगा। {30:10} शर्त सिर्फ़ यह है कि तू रब अपने ख़ुदा की सुने, शरीअत में दर्ज उस के अह्काम पर अमल करे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की तरफ़ रुजू लाए। {30:11} जो अह्काम मैं आज तुझे दे रहा हूँ न वह हद से ज़्यादा मुश्किल हैं, न तेरी पहुँच से बाहर। {30:12} वह आसमान पर नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन आसमान पर चढ़ कर हमारे लिए यह अह्काम नीचे ले आए ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’ {30:13} वह समुन्दर के पार भी नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन समुन्दर को पार करके हमारे लिए यह अह्काम लाएगा ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’ {30:14} क्यूँकि यह कलाम तेरे निहायत क़रीब बल्कि तेरे मुँह और दिल में मौजूद है। चुनाँचे उस पर अमल करने में कोई भी रुकावट नहीं है। {i30:15} ज़िन्दगी या मौत का चुनाओ {30:15} देख, आज मैं तुझे दो रास्ते पेश करता हूँ। एक ज़िन्दगी और ख़ुशहाली की तरफ़ ले जाता है जबकि दूसरा मौत और हलाकत की तरफ़। {30:16} आज मैं तुझे हुक्म देता हूँ कि रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की राहों पर चल और उस के अह्काम के ताबे रह। फिर तू ज़िन्दा रह कर तरक़्क़ी करेगा, और रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जिस में तू दाख़िल होने वाला है। {30:17} लेकिन अगर तेरा दिल इस रास्ते से हट कर नाफ़रमानी करे तो बरकत की तवक़्क़ो न कर। अगर तू आज़माइश में पड़ कर दीगर माबूदों को सिज्दा और उन की ख़िदमत करे {30:18} तो तुम ज़रूर तबाह हो जाओगे। आज मैं एलान करता हूँ कि इस सूरत में तुम ज़्यादा देर तक उस मुल्क में आबाद नहीं रहोगे जिस में तू दरया-ए-यर्दन को पार करके दाख़िल होगा ताकि उस पर क़ब्ज़ा करे। {30:19} आज आसमान और ज़मीन तुम्हारे ख़िलाफ़ मेरे गवाह हैं कि मैं ने तुम्हें ज़िन्दगी और बरकतों का रास्ता और मौत और लानतों का रास्ता पेश किया है। अब ज़िन्दगी का रास्ता इख़तियार कर ताकि तू और तेरी औलाद ज़िन्दा रहे। {30:20} रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की सुन और उस से लिपटा रह। क्यूँकि वही तेरी ज़िन्दगी है और वही करेगा कि तू देर तक उस मुल्क में जीता रहेगा जिस का वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से किया था।” {i31:1} यशूअ को मूसा की जगह मुक़र्रर किया जाता है {31:1} मूसा ने जा कर तमाम इस्राईलियों से मज़ीद कहा, {31:2} “अब मैं 120 साल का हो चुका हूँ। मेरा चलना फिरना मुश्किल हो गया है। और वैसे भी रब ने मुझे बताया है, ‘तू दरया-ए-यर्दन को पार नहीं करेगा।’ {31:3} रब तेरा ख़ुदा ख़ुद तेरे आगे आगे जा कर यर्दन को पार करेगा। वही तेरे आगे आगे इन क़ौमों को तबाह करेगा ताकि तू उन के मुल्क पर क़ब्ज़ा कर सके। दरया को पार करते वक़्त यशूअ तेरे आगे चलेगा जिस तरह रब ने फ़रमाया है। {31:4} रब वहाँ के लोगों को बिलकुल उसी तरह तबाह करेगा जिस तरह वह अमोरियों को उन के बादशाहों सीहोन और ओज समेत तबाह कर चुका है। {31:5} रब तुम्हें उन पर ग़ालिब आने देगा। उस वक़्त तुम्हें उन के साथ वैसा सुलूक करना है जैसा मैं ने तुम्हें बताया है। {31:6} मज़बूत और दिलेर हो। उन से ख़ौफ़ न खाओ, क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा तेरे साथ चलता है। वह तुझे कभी नहीं छोड़ेगा, तुझे कभी तर्क नहीं करेगा।” {31:7} इस के बाद मूसा ने तमाम इस्राईलियों के सामने यशूअ को बुलाया और उस से कहा, “मज़बूत और दिलेर हो, क्यूँकि तू इस क़ौम को उस मुल्क में ले जाएगा जिस का वादा रब ने क़सम खा कर उन के बापदादा से किया था। लाज़िम है कि तू ही उसे तक़्सीम करके हर क़बीले को उस का मौरूसी इलाक़ा दे। {31:8} रब ख़ुद तेरे आगे आगे चलते हुए तेरे साथ होगा। वह तुझे कभी नहीं छोड़ेगा, तुझे कभी नहीं तर्क करेगा। ख़ौफ़ न खाना, न घबराना।” {i31:9} हर सात साल के बाद शरीअत की तिलावत {31:9} मूसा ने यह पूरी शरीअत लिख कर इस्राईल के तमाम बुज़ुर्गों और लावी के क़बीले के उन इमामों के सपुर्द की जो सफ़र करते वक़्त अह्द का सन्दूक़ उठा कर ले चलते थे। उस ने उन से कहा, {31:10} “हर सात साल के बाद इस शरीअत की तिलावत करना, यानी बहाली के साल में जब तमाम क़र्ज़ मन्सूख़ किए जाते हैं। तिलावत उस {31:11} वक़्त करना है जब इस्राईली झोंपड़ियों की ईद के लिए रब अपने ख़ुदा के सामने उस जगह हाज़िर होंगे जो वह मक़्दिस के लिए चुनेगा। {31:12} तमाम लोगों को मर्दों, औरतों, बच्चों और परदेसियों समेत वहाँ जमा करना ताकि वह सुन कर सीखें, रब तुम्हारे ख़ुदा का ख़ौफ़ मानें और एहतियात से इस शरीअत की बातों पर अमल करें। {31:13} लाज़िम है कि उन की औलाद जो इस शरीअत से नावाक़िफ़ है इसे सुने और सीखे ताकि उम्र भर उस मुल्क में रब तुम्हारे ख़ुदा का ख़ौफ़ माने जिस पर तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके क़ब्ज़ा करोगे।” {i31:14} रब मूसा को आख़िरी हिदायात देता है {31:14} रब ने मूसा से कहा, “अब तेरी मौत क़रीब है। यशूअ को बुला कर उस के साथ मुलाक़ात के ख़ैमे में हाज़िर हो जा। वहाँ मैं उसे उस की ज़िम्मादारियाँ सौंपूँगा।” मूसा और यशूअ आ कर ख़ैमे में हाज़िर हुए {31:15} तो रब ख़ैमे के दरवाज़े पर बादल के सतून में ज़ाहिर हुआ। {31:16} उस ने मूसा से कहा, “तू जल्द ही मर कर अपने बापदादा से जा मिलेगा। लेकिन यह क़ौम मुल्क में दाख़िल होने पर ज़िना करके उस के अजनबी देवताओं की पैरवी करने लग जाएगी। वह मुझे तर्क करके वह अह्द तोड़ देगी जो मैं ने उन के साथ बांधा है। {31:17} फिर मेरा ग़ज़ब उन पर भड़केगा। मैं उन्हें छोड़ कर अपना चिहरा उन से छुपा लूँगा। तब उन्हें कच्चा चबा लिया जाएगा और बहुत सारी हैबतनाक मुसीबतें उन पर आएँगी । उस वक़्त वह कहेंगे, ‘क्या यह मुसीबतें इस वजह से हम पर नहीं आईं कि रब हमारे साथ नहीं है?’ {31:18} और ऐसा ही होगा। मैं ज़रूर अपना चिहरा उन से छुपाए रखूँगा, क्यूँकि दीगर माबूदों के पीछे चलने से उन्हों ने एक निहायत शरीर क़दम उठाया होगा। {31:19} अब ज़ैल का गीत लिख कर इस्राईलियों को यूँ सिखाओ कि वह ज़बानी याद रहे और मेरे लिए उन के ख़िलाफ़ गवाही दिया करे। {31:20} क्यूँकि मैं उन्हें उस मुल्क में ले जा रहा हूँ जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर उन के बापदादा से किया था, उस मुल्क में जिस में दूध और शहद की कस्रत है। वहाँ इतनी ख़ुराक होगी कि उन की भूक जाती रहेगी और वह मोटे हो जाएंगे। लेकिन फिर वह दीगर माबूदों के पीछे लग जाएंगे और उन की ख़िदमत करेंगे। वह मुझे रद्द करेंगे और मेरा अह्द तोड़ेंगे। {31:21} नतीजे में उन पर बहुत सारी हैबतनाक मुसीबतें आएँगी । फिर यह गीत जो उन की औलाद को याद रहेगा उन के ख़िलाफ़ गवाही देगा। क्यूँकि गो मैं उन्हें उस मुल्क में ले जा रहा हूँ जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर उन से किया था तो भी मैं जानता हूँ कि वह अब तक किस तरह की सोच रखते हैं।” {31:22} मूसा ने उसी दिन यह गीत लिख कर इस्राईलियों को सिखाया। {31:23} फिर रब ने यशूअ बिन नून से कहा, “मज़बूत और दिलेर हो, क्यूँकि तू इस्राईलियों को उस मुल्क में ले जाएगा जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर उन से किया था। मैं ख़ुद तेरे साथ हूँगा।” {31:24} जब मूसा ने पूरी शरीअत को किताब में लिख लिया {31:25} तो वह उन लावियों से मुख़ातिब हुआ जो सफ़र करते वक़्त अह्द का सन्दूक़ उठा कर ले जाते थे। {31:26} “शरीअत की यह किताब ले कर रब अपने ख़ुदा के अह्द के सन्दूक़ के पास रखना। वहाँ वह पड़ी रहे और तेरे ख़िलाफ़ गवाही देती रहे। {31:27} क्यूँकि मैं ख़ूब जानता हूँ कि तू कितना सरकश और हटधर्म है। मेरी मौजूदगी में भी तुम ने कितनी दफ़ा रब से सरकशी की। तो फिर मेरे मरने के बाद तुम क्या कुछ नहीं करोगे! {31:28} अब मेरे सामने अपने क़बीलों के तमाम बुज़ुर्गों और निगहबानों को जमा करो ताकि वह ख़ुद मेरी यह बातें सुनें और आसमान और ज़मीन उन के ख़िलाफ़ गवाह हों। {31:29} क्यूँकि मुझे मालूम है कि मेरी मौत के बाद तुम ज़रूर बिगड़ जाओगे और उस रास्ते से हट जाओगे जिस पर चलने की मैं ने तुम्हें ताकीद की है। आख़िरकार तुम पर मुसीबत आएगी, क्यूँकि तुम वह कुछ करोगे जो रब को बुरा लगता है, तुम अपने हाथों के काम से उसे ग़ुस्सा दिलाओगे।” {31:30} फिर मूसा ने इस्राईल की तमाम जमाअत के सामने यह गीत शुरू से ले कर आख़िर तक पेश किया, {i32:1} मूसा का गीत {32:1} ऐ आसमान, मेरी बात पर ग़ौर कर! ऐ ज़मीन, मेरा गीत सुन! {32:2} मेरी तालीम बूँदा-बाँदी जैसी हो, मेरी बात शबनम की तरह ज़मीन पर पड़ जाए। वह बारिश की मानिन्द हो जो हरियाली पर बरसती है। {32:3} मैं रब का नाम पुकारूँगा। हमारे ख़ुदा की अज़मत की तम्जीद करो! {32:4} वह चटान है, और उस का काम कामिल है। उस की तमाम राहें रास्त हैं। वह वफ़ादार ख़ुदा है जिस में फ़रेब नहीं है बल्कि जो आदिल और दियानतदार है। {32:5} एक टेढ़ी और कजरौ नस्ल ने उस का गुनाह किया। वह उस के फ़र्ज़न्द नहीं बल्कि दाग़ साबित हुए हैं। {32:6} ऐ मेरी अहमक़ और बेसमझ क़ौम, क्या तुम्हारा रब से ऐसा रवय्या ठीक है? वह तो तुम्हारा बाप और ख़ालिक़ है, जिस ने तुम्हें बनाया और क़ाइम किया। {32:7} क़दीम ज़माने को याद करना, माज़ी की नस्लों पर तवज्जुह देना। अपने बाप से पूछना तो वह तुझे बता देगा, अपने बुज़ुर्गों से पता करना तो वह तुझे इत्तिला देंगे। {32:8} जब अल्लाह तआला ने हर क़ौम को उस का अपना अपना मौरूसी इलाक़ा दे कर तमाम इन्सानों को मुख़्तलिफ़ गुरोहों में अलग कर दिया तो उस ने क़ौमों की सरहद्दें इस्राईलियों की तादाद के मुताबिक़ मुक़र्रर कीं। {32:9} क्यूँकि रब का हिस्सा उस की क़ौम है, याक़ूब को उस ने मीरास में पाया है। {32:10} यह क़ौम उसे रेगिस्तान में मिल गई, वीरान-ओ-सुन्सान बयाबान में जहाँ चारों तरफ़ हौलनाक आवाज़ें गूँजती थीं। उस ने उसे घेर कर उस की देख-भाल की, उसे अपनी आँख की पुतली की तरह बचाए रखा। {32:11} जब उक़ाब अपने बच्चों को उड़ना सिखाता है तो वह उन्हें घोंसले से निकाल कर उन के साथ उड़ता है। अगर वह गिर भी जाएँ तो वह हाज़िर है और उन के नीचे अपने परों को फैला कर उन्हें ज़मीन से टकरा जाने से बचाता है। रब का इस्राईल के साथ यही सुलूक था। {32:12} रब ने अकेले ही उस की राहनुमाई की। किसी अजनबी माबूद ने शिर्कत न की। {32:13} उस ने उसे रथ पर सवार करके मुल्क की बुलन्दियों पर से गुज़रने दिया और उसे खेत का फल खिला कर उसे चटान से शहद और सख़्त पत्थर से ज़ैतून का तेल मुहय्या किया। {32:14} उस ने उसे गाय की लस्सी और भेड़-बकरी का दूध चीदा भेड़ के बच्चों समेत खिलाया और उसे बसन के मोटे-ताज़े मेंढे, बकरे और बेहतरीन अनाज अता किया। उस वक़्त तू आला अंगूर की उम्दा मै से लुत्फ़अन्दोज़ हुआ। {32:15} लेकिन जब यसूरून मोटा हो गया तो वह दोलत्तियाँ झाड़ने लगा। जब वह हलक़ तक भर कर तनोमन्द और फ़र्बा हुआ तो उस ने अपने ख़ुदा और ख़ालिक़ को रद्द किया, उस ने अपनी नजात की चटान को हक़ीर जाना। {32:16} अपने अजनबी माबूदों से उन्हों ने उस की ग़ैरत को जोश दिलाया, अपने घिनौने बुतों से उसे ग़ुस्सा दिलाया। {32:17} उन्हों ने बदरूहों को क़ुर्बानियाँ पेश कीं जो ख़ुदा नहीं हैं, ऐसे माबूदों को जिन से न वह और न उन के बापदादा वाक़िफ़ थे, क्यूँकि वह थोड़ी देर पहले वुजूद में आए थे। {32:18} तू वह चटान भूल गया जिस ने तुझे पैदा किया, वही ख़ुदा जिस ने तुझे जन्म दिया। {32:19} रब ने यह देख कर उन्हें रद्द किया, क्यूँकि वह अपने बेटे-बेटियों से नाराज़ था। {32:20} उस ने कहा, “मैं अपना चिहरा उन से छुपा लूँगा। फिर पता लगेगा कि मेरे बग़ैर उन का क्या अन्जाम होता है। क्यूँकि वह सरासर बिगड़ गए हैं, उन में वफ़ादारी पाई नहीं जाती। {32:21} उन्हों ने उस की परस्तिश से जो ख़ुदा नहीं है मेरी ग़ैरत को जोश दिलाया, अपने बेकार बुतों से मुझे ग़ुस्सा दिलाया है। चुनाँचे मैं ख़ुद ही उन्हें ग़ैरत दिलाऊँगा, एक ऐसी क़ौम के ज़रीए जो हक़ीक़त में क़ौम नहीं है। एक नादान क़ौम के ज़रीए मैं उन्हें ग़ुस्सा दिलाऊँगा। {32:22} क्यूँकि मेरे ग़ुस्से से आग भड़क उठी है जो पाताल की तह तक पहुँचेगी और ज़मीन और उस की पैदावार हड़प करके पहाड़ों की बुन्यादों को जला देगी। {32:23} मैं उन पर मुसीबत पर मुसीबत आने दूँगा और अपने तमाम तीर उन पर चलाऊँगा। {32:24} भूक के मारे उन की ताक़त जाती रहेगी, और वह बुख़ार और वबाई अमराज़ का लुक़्मा बनेंगे। मैं उन के ख़िलाफ़ फाड़ने वाले जानवर और ज़हरीले साँप भेज दूँगा। {32:25} बाहर तलवार उन्हें बेऔलाद कर देगी, और घर में दह्शत फैल जाएगी। शीरख़्वार बच्चे, नौजवान लड़के-लड़कियाँ और बुज़ुर्ग सब उस की गिरिफ़्त में आ जाएंगे। {32:26} मुझे कहना चाहिए था कि मैं उन्हें चकनाचूर करके इन्सानों में से उन का नाम-ओ-निशान मिटा दूँगा। {32:27} लेकिन अन्देशा था कि दुश्मन ग़लत मतलब निकाल कर कहे, ‘हम ख़ुद उन पर ग़ालिब आए, इस में रब का हाथ नहीं है’।” {32:28} क्यूँकि यह क़ौम बेसमझ और हिक्मत से ख़ाली है। {32:29} काश वह दानिशमन्द हो कर यह बात समझें! काश वह जान लें कि उन का क्या अन्जाम है। {32:30} क्यूँकि दुश्मन का एक आदमी किस तरह हज़ार इस्राईलियों का ताक़्क़ुब कर सकता है? उस के दो मर्द किस तरह दस हज़ार इस्राईलियों को भगा सकते हैं? वजह सिर्फ़ यह है कि उन की चटान ने उन्हें दुश्मन के हाथ बेच दिया। रब ने ख़ुद उन्हें दुश्मन के क़ब्ज़े में कर दिया। {32:31} हमारे दुश्मन ख़ुद मानते हैं कि इस्राईल की चटान हमारी चटान जैसी नहीं है। {32:32} उन की बेल तो सदूम की बेल और अमूरा के बाग़ से है, उन के अंगूर ज़हरीले और उन के गुच्छे कड़वे हैं। {32:33} उन की मै साँपों का मोहलक ज़हर है। {32:34} रब फ़रमाता है, “क्या मैं ने इन बातों पर मुहर लगा कर उन्हें अपने ख़ज़ाने में मह्फ़ूज़ नहीं रखा? {32:35} इन्तिक़ाम लेना मेरा ही काम है, मैं ही बदला लूँगा। एक वक़्त आएगा कि उन का पाँओ फिसलेगा। क्यूँकि उन की तबाही का दिन क़रीब है, उन का अन्जाम जल्द ही आने वाला है।” {32:36} यक़ीनन रब अपनी क़ौम का इन्साफ़ करेगा। वह अपने ख़ादिमों पर तरस खाएगा जब देखेगा कि उन की ताक़त जाती रही है और कोई नहीं बचा। {32:37} उस वक़्त वह पूछेगा, “अब उन के देवता कहाँ हैं, वह चटान जिस की पनाह उन्हों ने ली? {32:38} वह देवता कहाँ हैं जिन्हों ने उन के बेहतरीन जानवर खाए और उन की मै की नज़रें पी लीं। वह तुम्हारी मदद के लिए उठें और तुम्हें पनाह दें। {32:39} अब जान लो कि मैं और सिर्फ़ मैं ख़ुदा हूँ। मेरे सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है। मैं ही हलाक करता और मैं ही ज़िन्दा कर देता हूँ। मैं ही ज़ख़्मी करता और मैं ही शिफ़ा देता हूँ। कोई मेरे हाथ से नहीं बचा सकता। {32:40} मैं अपना हाथ आसमान की तरफ़ उठा कर एलान करता हूँ कि मेरी अबदी हयात की क़सम, {32:41} जब मैं अपनी चमकती हुई तलवार को तेज़ करके अदालत के लिए पकड़ लूँगा तो अपने मुख़ालिफ़ों से इन्तिक़ाम और अपने नफ़रत करने वालों से बदला लूँगा। {32:42} मेरे तीर ख़ून पी पी कर नशे में धुत हो जाएंगे, मेरी तलवार मक़्तूलों और क़ैदियों के ख़ून और दुश्मन के सरदारों के सरों से सेर हो जाएगी।” {32:43} ऐ दीगर क़ौमो, उस की उम्मत के साथ ख़ुशी मनाओ! क्यूँकि वह अपने ख़ादिमों के ख़ून का इन्तिक़ाम लेगा। वह अपने मुख़ालिफ़ों से बदला ले कर अपने मुल्क और क़ौम का कफ़्फ़ारा देगा। {32:44} मूसा और यशूअ बिन नून ने आ कर इस्राईलियों को यह पूरा गीत सुनाया। {32:45} फिर मूसा ने उन से कहा, “आज मैं ने तुम्हें इन तमाम बातों से आगाह किया है। लाज़िम है कि वह {32:46} तुम्हारे दिलों में बैठ जाएँ। अपनी औलाद को भी हुक्म दो कि एहतियात से इस शरीअत की तमाम बातों पर अमल करे। {32:47} यह ख़ाली बातें नहीं बल्कि तुम्हारी ज़िन्दगी का सरचश्मा हैं। इन के मुताबिक़ चलने के बाइस तुम देर तक उस मुल्क में जीते रहोगे जिस पर तुम दरया-ए-यर्दन को पार करके क़ब्ज़ा करने वाले हो।” {i32:48} मूसा का नबू पहाड़ पर इन्तिक़ाल {32:48} उसी दिन रब ने मूसा से कहा, {32:49} “पहाड़ी सिलसिले अबारीम के पहाड़ नबू पर चढ़ जा जो यरीहू के सामने लेकिन यर्दन के मशरिक़ी किनारे पर यानी मोआब के मुल्क में है। वहाँ से कनआन पर नज़र डाल, उस मुल्क पर जो मैं इस्राईलियों को दे रहा हूँ। {32:50} इस के बाद तू वहाँ मर कर अपने बापदादा से जा मिलेगा, बिलकुल उसी तरह जिस तरह तेरा भाई हारून होर पहाड़ पर मर कर अपने बापदादा से जा मिला है। {32:51} क्यूँकि तुम दोनों इस्राईलियों के रू-ब-रू बेवफ़ा हुए। जब तुम दश्त-ए-सीन में क़ादिस के क़रीब थे और मरीबा के चश्मे पर इस्राईलियों के सामने खड़े थे तो तुम ने मेरी क़ुद्दूसियत क़ाइम न रखी। {32:52} इस सबब से तू वह मुल्क सिर्फ़ दूर से देखेगा जो मैं इस्राईलियों को दे रहा हूँ। तू ख़ुद उस में दाख़िल नहीं होगा।” {i33:1} मूसा क़बीलों को बरकत देता है {33:1} मरने से पेशतर मर्द-ए-ख़ुदा मूसा ने इस्राईलियों को बरकत दे कर {33:2} कहा, “रब सीना से आया, सईर से उस का नूर उन पर तुलू हुआ। वह कोह-ए-फ़ारान से रौशनी फैला कर रिबबोत-क़ादिस से आया, वह अपने जुनूबी इलाक़े से रवाना हो कर उन की ख़ातिर पहाड़ी ढलानों के पास आया। {33:3} यक़ीनन वह क़ौमों से मुहब्बत करता है, तमाम मुक़द्दसीन तेरे हाथ में हैं। वह तेरे पाँओ के सामने झुक कर तुझ से हिदायत पाते हैं। {33:4} मूसा ने हमें शरीअत दी यानी वह चीज़ जो याक़ूब की जमाअत की मौरूसी मिलकियत है। {33:5} इस्राईल के राहनुमा अपने क़बीलों समेत जमा हुए तो रब यसूरून का बादशाह बन गया। {33:6} रूबिन की बरकत: रूबिन मर न जाए बल्कि जीता रहे। वह तादाद में बढ़ जाए। {33:7} यहूदाह की बरकत: ऐ रब, यहूदाह की पुकार सुन कर उसे दुबारा उस की क़ौम में शामिल कर। उस के हाथ उस के लिए लड़ें। मुख़ालिफ़ों का सामना करते वक़्त उस की मदद कर। {33:8} लावी की बरकत: तेरी मर्ज़ी मालूम करने के क़ुरए बनाम ऊरीम और तुम्मीम तेरे वफ़ादार ख़ादिम लावी के पास होते हैं। तू ने उसे मस्सा में आज़माया और मरीबा में उस से लड़ा। {33:9} उस ने तेरा कलाम सँभाल कर तेरा अह्द क़ाइम रखा, यहाँ तक कि उस ने न अपने माँ-बाप का, न अपने सगे भाइयों या बच्चों का लिहाज़ किया। {33:10} वह याक़ूब को तेरी हिदायात और इस्राईल को तेरी शरीअत सिखा कर तेरे सामने बख़ूर और तेरी क़ुर्बानगाह पर भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ चढ़ाता है। {33:11} ऐ रब, उस की ताक़त को बढ़ा कर उस के हाथों का काम पसन्द कर। उस के मुख़ालिफ़ों की कमर तोड़ और उस से नफ़रत रखने वालों को ऐसा मार कि आइन्दा कभी न उठें। {33:12} बिनयमीन की बरकत: बिनयमीन रब को प्यारा है। वह सलामती से उस के पास रहता है, क्यूँकि रब दिन रात उसे पनाह देता है। बिनयमीन उस की पहाड़ी ढलानों के दरमियान मह्फ़ूज़ रहता है। {33:13} यूसुफ़ की बरकत: रब उस की ज़मीन को बरकत दे। आसमान से क़ीमती ओस टपके और ज़मीन के नीचे से चश्मे फूट निकलें। {33:14} यूसुफ़ को सूरज की बेहतरीन पैदावार और हर महीने का लज़ीज़तरीन फल हासिल हो। {33:15} उसे क़दीम पहाड़ों और अबदी वादियों की बेहतरीन चीज़ों से नवाज़ा जाए। {33:16} ज़मीन के तमाम ज़ख़ीरे उस के लिए खुल जाएँ। वह उस को पसन्द हो जो जलती हुई झाड़ी में सुकूनत करता था। यह तमाम बरकतें यूसुफ़ के सर पर ठहरें, उस के सर पर जो अपने भाइयों में शहज़ादा है। {33:17} यूसुफ़ साँड के पहलौठे जैसा अज़ीम है, और उस के सींग जंगली बैल के सींग हैं जिन से वह दुनिया की इन्तिहा तक सब क़ौमों को मारेगा। इफ़्राईम के बेशुमार अफ़राद ऐसे ही हैं, मनस्सी के हज़ारों अफ़राद ऐसे ही हैं। {33:18} ज़बूलून और इश्कार की बरकत: ऐ ज़बूलून, घर से निकलते वक़्त ख़ुशी मना। ऐ इश्कार, अपने ख़ैमों में रहते हुए ख़ुश हो। {33:19} वह दीगर क़ौमों को अपने पहाड़ पर आने की दावत देंगे और वहाँ रास्ती की क़ुर्बानियाँ पेश करेंगे। वह समुन्दर की कस्रत और समुन्दर की रेत में छुपे हुए ख़ज़ानों को जज़ब कर लेंगे। {33:20} जद की बरकत: मुबारक है वह जो जद का इलाक़ा वसी कर दे। जद शेरबबर की तरह दबक कर किसी का बाज़ू या सर फाड़ डालने के लिए तय्यार रहता है। {33:21} उस ने अपने लिए सब से अच्छी ज़मीन चुन ली, राहनुमा का हिस्सा उसी के लिए मह्फ़ूज़ रखा गया। जब क़ौम के राहनुमा जमा हुए तो उस ने रब की रास्त मर्ज़ी पूरी की और इस्राईल के बारे में उस के फ़ैसले अमल में लाया। {33:22} दान की बरकत: दान शेरबबर का बच्चा है जो बसन से निकल कर छलाँग लगाता है। {33:23} नफ़्ताली की बरकत: नफ़्ताली रब की मन्ज़ूरी से सेर है, उसे उस की पूरी बरकत हासिल है। वह गलील की झील और उस के जुनूब का इलाक़ा मीरास में पाएगा। {33:24} आशर की बरकत: आशर बेटों में सब से मुबारक है। वह अपने भाइयों को पसन्द हो। उस के पास ज़ैतून का इतना तेल हो कि वह अपने पाँओ उस में डुबो सके। {33:25} तेरे शहरों के दरवाज़ों के कुंडे लोहे और पीतल के हों, तेरी ताक़त उम्र भर क़ाइम रहे। {33:26} यसूरून के ख़ुदा की मानिन्द कोई नहीं है, जो आसमान पर सवार हो कर, हाँ अपने जलाल में बादलों पर बैठ कर तेरी मदद करने के लिए आता है। {33:27} अज़ली ख़ुदा तेरी पनाहगाह है, वह अपने अज़ली बाज़ू तेरे नीचे फैलाए रखता है। वह दुश्मन को तेरे सामने से भगा कर उसे हलाक करने को कहता है। {33:28} चुनाँचे इस्राईल सलामती से ज़िन्दगी गुज़ारेगा, याक़ूब का चश्मा अलग और मह्फ़ूज़ रहेगा। उस की ज़मीन अनाज और अंगूर की कस्रत पैदा करेगी, और उस के ऊपर आसमान ज़मीन पर ओस पड़ने देगा। {33:29} ऐ इस्राईल, तू कितना मुबारक है। कौन तेरी मानिन्द है, जिसे रब ने बचाया है। वह तेरी मदद की ढाल और तेरी शान की तलवार है। तेरे दुश्मन शिकस्त खा कर तेरी ख़ुशामद करेंगे, और तू उन की कमरें पाँओ तले कुचलेगा।” {i34:1} मूसा की वफ़ात {34:1} यह बरकत दे कर मूसा मोआब का मैदानी इलाक़ा छोड़ कर यरीहू के मुक़ाबिल नबू पहाड़ पर चढ़ गया। नबू पिसगा के पहाड़ी सिलसिले की एक चोटी था। वहाँ से रब ने उसे वह पूरा मुल्क दिखाया जो वह इस्राईल को देने वाला था यानी जिलिआद के इलाक़े से ले कर दान के इलाक़े तक, {34:2} नफ़्ताली का पूरा इलाक़ा, इफ़्राईम और मनस्सी का इलाक़ा, यहूदाह का इलाक़ा बहीरा-ए-रूम तक, {34:3} जुनूब में दश्त-ए-नजब और खजूर के शहर यरीहू की वादी से ले कर ज़ुग़र तक। {34:4} रब ने उस से कहा, “यह वह मुल्क है जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से किया। मैं ने उन से कहा था कि उन की औलाद को यह मुल्क मिलेगा। तू उस में दाख़िल नहीं होगा, लेकिन मैं तुझे यहाँ ले आया हूँ ताकि तू उसे अपनी आँखों से देख सके।” {34:5} इस के बाद रब का ख़ादिम मूसा वहीं मोआब के मुल्क में फ़ौत हुआ, बिलकुल उसी तरह जिस तरह रब ने कहा था। {34:6} रब ने उसे बैत-फ़ग़ूर की किसी वादी में दफ़न किया, लेकिन आज तक किसी को भी मालूम नहीं कि उस की क़ब्र कहाँ है। {34:7} अपनी वफ़ात के वक़्त मूसा 120 साल का था। आख़िर तक न उस की आँखें धुन्दलाईं, न उस की ताक़त कम हुई। {34:8} इस्राईलियों ने मोआब के मैदानी इलाक़े में 30 दिन तक उस का मातम किया। {34:9} फिर यशूअ बिन नून मूसा की जगह खड़ा हुआ। वह हिक्मत की रूह से मामूर था, क्यूँकि मूसा ने अपने हाथ उस पर रख दिए थे। इस्राईलियों ने उस की सुनी और वह कुछ किया जो रब ने उन्हें मूसा की मारिफ़त बताया था। {34:10} इस के बाद इस्राईल में मूसा जैसा नबी कभी न उठा जिस से रब रू-ब-रू बात करता था। {34:11} किसी और नबी ने ऐसे इलाही निशान और मोजिज़े नहीं किए जैसे मूसा ने फ़िरऔन बादशाह, उस के मुलाज़िमों और पूरे मुल्क के सामने किए जब रब ने उसे मिस्र भेजा। {34:12} किसी और नबी ने इस क़िस्म का बड़ा इख़तियार न दिखाया, न ऐसे अज़ीम और हैबतनाक काम किए जैसे मूसा ने इस्राईलियों के सामने किए।