{i1:1} रब का नबी यरमियाह {1:1} ज़ैल में यरमियाह बिन ख़िलक़ियाह के पैग़ामात क़लमबन्द किए गए हैं। (बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े के शहर अनतोत में कुछ इमाम रहते थे, और यरमियाह का वालिद उन में से था)। {1:2} रब का फ़रमान पहली बार यहूदाह के बादशाह यूसियाह बिन अमून की हुकूमत के 13वें साल में यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {1:3} और यरमियाह को यह पैग़ामात यहूयक़ीम बिन यूसियाह के दौर-ए-हुकूमत से ले कर सिदक़ियाह बिन यूसियाह की हुकूमत के 11वें साल के पाँचवें महीने तक मिलते रहे। उस वक़्त यरूशलम के बाशिन्दों को जिलावतन कर दिया गया। {i1:4} यरमियाह की बुलाहट {1:4} एक दिन रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ, {1:5} “मैं तुझे माँ के पेट में तश्कील देने से पहले ही जानता था, तेरी पैदाइश से पहले ही मैं ने तुझे मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस करके अक़्वाम के लिए नबी मुक़र्रर किया।” {1:6} मैं ने एतिराज़ किया, “ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, अफ़्सोस! मैं तेरा कलाम सुनाने का सहीह इल्म नहीं रखता, मैं तो बच्चा ही हूँ।” {1:7} लेकिन रब ने मुझ से फ़रमाया, “मत कह ‘मैं बच्चा ही हूँ।’ क्यूँकि जिन के पास भी मैं तुझे भेजूँगा उन के पास तू जाएगा, और जो कुछ भी मैं तुझे सुनाने को कहूँगा उसे तू सुनाएगा। {1:8} लोगों से मत डरना, क्यूँकि मैं तेरे साथ हूँ, मैं तुझे बचाए रखूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {1:9} फिर रब ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे होंटों को छू दिया और फ़रमाया, “देख, मैं ने अपने अल्फ़ाज़ को तेरे मुँह में डाल दिया है। {1:10} आज मैं तुझे क़ौमों और सल्तनतों पर मुक़र्रर कर देता हूँ। कहीं तुझे उन्हें जड़ से उखाड़ कर गिरा देना, कहीं बर्बाद करके ढा देना और कहीं तामीर करके पौदे की तरह लगा देना है।” {i1:11} बादाम की शाख़ और उबलती देग की रोया {1:11} रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ, “ऐ यरमियाह, तुझे क्या नज़र आ रहा है?” मैं ने जवाब दिया, “बादाम की एक शाख़, उस दरख़्त की जो ‘देखने वाला’ कहलाता है।” {1:12} रब ने फ़रमाया, “तू ने सहीह देखा है। इस का मतलब है कि मैं अपने कलाम की देख-भाल कर रहा हूँ, मैं ध्यान दे रहा हूँ कि वह पूरा हो जाए।” {1:13} फिर रब का कलाम दुबारा मुझ पर नाज़िल हुआ, “तुझे क्या नज़र आ रहा है?” मैं ने जवाब दिया, “शिमाल में देग दिखाई दे रही है। जो कुछ उस में है वह उबल रहा है, और उस का मुँह हमारी तरफ़ झुका हुआ है।” {1:14} तब रब ने मुझ से कहा, “इसी तरह शिमाल से मुल्क के तमाम बाशिन्दों पर आफ़त टूट पड़ेगी।” {1:15} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “मैं शिमाली ममालिक के तमाम घरानों को बुला लूँगा, और हर एक आ कर अपना तख़्त यरूशलम के दरवाज़ों के सामने ही खड़ा करेगा। हाँ, वह उस की पूरी फ़सील को घेर कर उस पर बल्कि यहूदाह के तमाम शहरों पर छापा मारेंगे। {1:16} यूँ मैं अपनी क़ौम पर फ़ैसले सादिर करके उन के ग़लत कामों की सज़ा दूँगा। क्यूँकि उन्हों ने मुझे तर्क करके अजनबी माबूदों के लिए बख़ूर जलाया और अपने हाथों से बने हुए बुतों को सिज्दा किया है। {1:17} चुनाँचे कमरबस्ता हो जा! उठ कर उन्हें सब कुछ सुना दे जो मैं फ़रमाऊँगा। उन से दह्शत मत खाना, वर्ना मैं तुझे उन के सामने ही दह्शतज़दा कर दूँगा। {1:18} देख, आज मैं ने तुझे क़िलाबन्द शहर, लोहे के सतून और पीतल की चारदीवारी जैसा मज़बूत बना दिया है ताकि तू पूरे मुल्क का सामना कर सके, ख़्वाह यहूदाह के बादशाह, अफ़्सर, इमाम या अवाम तुझ पर हम्ला क्यूँ न करें। {1:19} तुझ से लड़ने के बावुजूद वह तुझ पर ग़ालिब नहीं आएँगे, क्यूँकि मैं तेरे साथ हूँ, मैं ही तुझे बचाए रखूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {i2:1} अल्लाह की जवान इस्राईल के लिए फ़िक्र {2:1} रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ, {2:2} “जा, ज़ोर से यरूशलम के कान में पुकार कि रब फ़रमाता है, ‘मुझे तेरी जवानी की वफ़ादारी ख़ूब याद है। जब तेरी शादी क़रीब आई तो तू मुझे कितना प्यार करती थी, यहाँ तक कि तू रेगिस्तान में भी जहाँ खेतीबाड़ी नामुमकिन थी मेरे पीछे पीछे चलती रही। {2:3} उस वक़्त इस्राईल रब के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस था, वह उस की फ़सल का पहला फल था। जिस ने भी उस में से कुछ खाया वह मुजरिम ठहरा, और उस पर आफ़त नाज़िल हुई। यह रब का फ़रमान है’।” {i2:4} इस्राईल के बापदादा के गुनाह {2:4} ऐ याक़ूब की औलाद, रब का कलाम सुनो! ऐ इस्राईल के तमाम घरानो, ध्यान दो! {2:5} रब फ़रमाता है, “तुम्हारे बापदादा ने मुझ में कौन सी नाइन्साफ़ी पाई कि मुझ से इतने दूर हो गए? हेच बुतों के पीछे हो कर वह ख़ुद हेच हो गए। {2:6} उन्हों ने पूछा तक नहीं कि रब कहाँ है जो हमें मिस्र से निकाल लाया और रेगिस्तान में सहीह राह दिखाई, गो वह इलाक़ा वीरान-ओ-सुन्सान था। हर तरफ़ घाटियों, पानी की सख़्त कमी और तारीकी का सामना करना पड़ा। न कोई उस में से गुज़रता, न कोई वहाँ रहता है। {2:7} मैं तो तुम्हें बाग़ों से भरे मुल्क में लाया ताकि तुम उस के फल और अच्छी पैदावार से लुत्फ़अन्दोज़ हो सको। लेकिन तुम ने क्या किया? मेरे मुल्क में दाख़िल होते ही तुम ने उसे नापाक कर दिया, और मैं अपनी मौरूसी मिलकियत से घिन खाने लगा। {2:8} न इमामों ने पूछा कि रब कहाँ है, न शरीअत को अमल में लाने वाले मुझे जानते थे। क़ौम के गल्लाबान मुझ से बेवफ़ा हुए, और नबी बेफ़ाइदा बुतों के पीछे लग कर बाल देवता के पैग़ामात सुनाने लगे।” {i2:9} रब का अपनी क़ौम के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा {2:9} रब फ़रमाता है, “इसी वजह से मैं आइन्दा भी अदालत में तुम्हारे साथ लड़ूँगा। हाँ, न सिर्फ़ तुम्हारे साथ बल्कि तुम्हारी आने वाली नस्लों के साथ भी। {2:10} जाओ, समुन्दर को पार करके जज़ीरा-ए-क़ुब्रुस की तफ़्तीश करो! अपने क़ासिदों को मुल्क-ए-क़ीदार में भेज कर ग़ौर से दरयाफ़्त करो कि क्या वहाँ कभी यहाँ का सा काम हुआ है? {2:11} क्या किसी क़ौम ने कभी अपने देवताओं को तब्दील किया, गो वह हक़ीक़त में ख़ुदा नहीं हैं? हरगिज़ नहीं! लेकिन मेरी क़ौम अपनी शान-ओ-शौकत के ख़ुदा को छोड़ कर बेफ़ाइदा बुतों की पूजा करने लगी है।” {2:12} रब फ़रमाता है, “ऐ आसमान, यह देख कर हैबतज़दा हो जा, तेरे रोंगटे खड़े हो जाएँ, हक्का-बक्का रह जा! {2:13} क्यूँकि मेरी क़ौम से दो संगीन जुर्म सरज़द हुए हैं। एक, उन्हों ने मुझे तर्क किया, गो मैं ज़िन्दगी के पानी का सरचश्मा हूँ। दूसरे, उन्हों ने अपने ज़ाती हौज़ बनाए हैं जो दराड़ों की वजह से भर ही नहीं सकते। {i2:14} इस्राईल की बेवफ़ाई के नताइज {2:14} क्या इस्राईल इब्तिदा से ही ग़ुलाम है? क्या उस के वालिदैन ग़ुलाम थे कि वह अब तक ग़ुलाम है? हरगिज़ नहीं! तो फिर वह क्यूँ दूसरों का लूटा हुआ माल बन गया है? {2:15} जवान शेरबबर दहाड़ते हुए उस पर टूट पड़े हैं, गरजते गरजते उन्हों ने मुल्क-ए-इस्राईल को बर्बाद कर दिया है। उस के शहर नज़र-ए-आतिश हो कर वीरान-ओ-सुन्सान हो गए हैं। {2:16} साथ साथ मेम्फ़िस और तह्फ़न्हीस के लोग भी तेरे सर को मुंडवा रहे हैं। {2:17} ऐ इस्राईली क़ौम, क्या यह तेरे ग़लत काम का नतीजा नहीं? क्यूँकि तू ने रब अपने ख़ुदा को उस वक़्त तर्क किया जब वह तेरी राहनुमाई कर रहा था। {2:18} अब मुझे बता कि मिस्र को जा कर दरया-ए-नील का पानी पीने का क्या फ़ाइदा? मुल्क-ए-असूर में जा कर दरया-ए-फ़ुरात का पानी पीने से क्या हासिल? {2:19} तेरा ग़लत काम तुझे सज़ा दे रहा है, तेरी बेवफ़ा हरकतें ही तेरी सरज़निश कर रही हैं। चुनाँचे जान ले और ध्यान दे कि रब अपने ख़ुदा को छोड़ कर उस का ख़ौफ़ न मानने का फल कितना बुरा और कड़वा है।” यह क़ादिर-ए-मुतलक़ रब्ब-उल-अफ़्वाज का फ़रमान है। {2:20} “क्यूँकि शुरू से ही तू अपने जूए और रस्सों को तोड़ कर कहती रही, ‘मैं तेरी ख़िदमत नहीं करूँगी!’ तू हर बुलन्दी पर और हर घने दरख़्त के साय में लेट कर इस्मतफ़रोशी करती रही। {2:21} पहले तू अंगूर की मख़्सूस और क़ाबिल-ए-एतिमाद नस्ल की पनीरी थी जिसे मैं ने ख़ुद ज़मीन में लगाया। तो यह क्या हुआ कि तू बिगड़ कर जंगली बेल बन गई? {2:22} अब तेरे क़ुसूर का दाग़ उतर नहीं सकता, ख़्वाह तू कितना खारी सोडा और साबुन क्यूँ न इस्तेमाल करे।” यह रब क़ादिर-ए-मुतलक़ का फ़रमान है। {2:23} “तू किस तरह यह कहने की जुरअत कर सकती है कि मैं ने अपने आप को आलूदा नहीं किया, मैं बाल देवताओं के पीछे नहीं गई। वादी में अपनी हरकतों पर तो ग़ौर कर! जान ले कि तुझ से क्या कुछ सरज़द हुआ है। तू बेमक़्सद इधर उधर भागने वाली ऊँटनी है। {2:24} बल्कि तू रेगिस्तान में रहने की आदी गधी ही है जो शहवत के मारे हाँपती है। मस्ती के इस आलम में कौन उस पर क़ाबू पा सकता है? जो भी उस से मिलना चाहे उसे ज़्यादा जिद्द-ओ-जह्द की ज़रूरत नहीं, क्यूँकि मस्ती के मौसम में वह हर एक के लिए हाज़िर है। {2:25} ऐ इस्राईल, इतना न दौड़ कि तेरे जूते घिस कर फट जाएँ और तेरा गला ख़ुश्क हो जाए। लेकिन अफ़्सोस, तू बज़िद है, ‘नहीं, मुझे छोड़ दे! मैं अजनबी माबूदों को प्यार करती हूँ, और लाज़िम है कि मैं उन के पीछे भागती जाऊँ।’ {2:26} सुनो! इस्राईली क़ौम के तमाम अफ़राद उन के बादशाहों, अफ़्सरों, इमामों और नबियों समेत शर्मिन्दा हो जाएंगे। वह पकड़े हुए चोर की सी शर्म मह्सूस करेंगे। {2:27} यह लोग लकड़ी के बुत से कहते हैं, ‘तू मेरा बाप है’ और पत्थर के देवता से, ‘तू ने मुझे जन्म दिया।’ लेकिन गो यह मेरी तरफ़ रुजू नहीं करते बल्कि अपना मुँह मुझ से फेर कर चलते हैं तो भी जूँ ही कोई आफ़त उन पर आ जाए तो यह मुझ से इल्तिजा करने लगते हैं कि आ कर हमें बचा! {2:28} अब यह बुत कहाँ हैं जो तू ने अपने लिए बनाए? वही खड़े हो कर दिखाएँ कि तुझे मुसीबत से बचा सकते हैं। ऐ यहूदाह, आख़िर जितने तेरे शहर हैं उतने तेरे देवता भी हैं।” {2:29} रब फ़रमाता है, “तुम मुझ पर क्यूँ इल्ज़ाम लगाते हो? तुम तो सब मुझ से बेवफ़ा हो गए हो। {2:30} मैं ने तुम्हारे बच्चों को सज़ा दी, लेकिन बेफ़ाइदा। वह मेरी तर्बियत क़बूल नहीं करते। बल्कि तुम ने फाड़ने वाले शेरबबर की तरह अपने नबियों पर टूट कर उन्हें तलवार से क़त्ल किया। {2:31} ऐ मौजूदा नस्ल, रब के कलाम पर ध्यान दो! क्या मैं इस्राईल के लिए रेगिस्तान या तारीकतरीन इलाक़े की मानिन्द था? मेरी क़ौम क्यूँ कहती है, ‘अब हम आज़ादी से इधर उधर फिर सकते हैं, आइन्दा हम तेरे हुज़ूर नहीं आएँगे?’ {2:32} क्या कुंवारी कभी अपने ज़ेवरात को भूल सकती है, या दुल्हन अपना उरूसी लिबास? हरगिज़ नहीं! लेकिन मेरी क़ौम बेशुमार दिनों से मुझे भूल गई है। {2:33} तू इश्क़ ढूँडने में कितनी माहिर है! बदकार औरतें भी तुझ से बहुत कुछ सीख लेती हैं। {2:34} तेरे लिबास का दामन बेगुनाह ग़रीबों के ख़ून से आलूदा है, गो तू ने उन्हें नक़बज़नी जैसा ग़लत काम करते वक़्त न पकड़ा। इस सब कुछ के बावुजूद भी {2:35} तू बज़िद है कि मैं बेक़ुसूर हूँ, अल्लाह का मुझ पर ग़ुस्सा ठंडा हो गया है। लेकिन मैं तेरी अदालत करूँगा, इस लिए कि तू कहती है, ‘मुझ से गुनाह सरज़द नहीं हुआ।’ {2:36} तू कभी इधर, कभी इधर जा कर इतनी आसानी से अपना रुख़ क्यूँ बदलती है? यक़ीन कर कि जिस तरह तू अपने इत्तिहादी असूर से मायूस हो कर शर्मिन्दा हुई है उसी तरह तू नए इत्तिहादी मिस्र से भी नादिम हो जाएगी। {2:37} तू उस जगह से भी अपने हाथों को सर पर रख कर निकलेगी। क्यूँकि रब ने उन्हें रद्द किया है जिन पर तू भरोसा रखती है। उन से तुझे मदद हासिल नहीं होगी।” {i3:1} इस्राईल की रब से बेवफ़ाई {3:1} रब फ़रमाता है, “अगर कोई अपनी बीवी को तलाक़ दे और अलग होने के बाद बीवी की किसी और से शादी हो जाए तो क्या पहले शौहर को उस से दुबारा शादी करने की इजाज़त है? हरगिज़ नहीं, बल्कि ऐसी हरकत से पूरे मुल्क की बेहुरमती हो जाती है। देख, यही तेरी हालत है। तू ने मुतअद्दिद आशिक़ों से ज़िना किया है, और अब तू मेरे पास वापस आना चाहती है। यह कैसी बात है? {3:2} अपनी नज़र बंजर पहाड़ियों की तरफ़ उठा कर देख! क्या कोई जगह है जहाँ ज़िना करने से तेरी बेहुरमती नहीं हुई? रेगिस्तान में तन्हा बैठने वाले बद्दू की तरह तू रास्तों के किनारे पर अपने आशिक़ों की ताक में बैठी रही है। अपनी इस्मतफ़रोशी और बदकारी से तू ने मुल्क की बेहुरमती की है। {3:3} इसी वजह से बहार में बरसात का मौसम रोका गया और बारिश नहीं पड़ी। लेकिन अफ़्सोस, तू कस्बी की सी पेशानी रखती है, तू शर्म खाने के लिए तय्यार ही नहीं। {3:4} इस वक़्त भी तू चीख़ती चिल्लाती आवाज़ देती है, ‘ऐ मेरे बाप, जो मेरी जवानी से मेरा दोस्त है, {3:5} क्या तू हमेशा तक मेरे साथ नाराज़ रहेगा? क्या तेरा क़हर कभी ठंडा नहीं होगा?’ यही तेरे अपने अल्फ़ाज़ हैं, लेकिन साथ साथ तू ग़लत काम करने की हर मुमकिन कोशिश करती रहती है।” {3:6} यूसियाह बादशाह की हुकूमत के दौरान रब मुझ से हमकलाम हुआ, “क्या तू ने वह कुछ देखा जो बेवफ़ा इस्राईल ने किया है? उस ने हर बुलन्दी पर और हर घने दरख़्त के साय में ज़िना किया है। {3:7} मैं ने सोचा कि यह सब कुछ करने के बाद वह मेरे पास वापस आएगी। लेकिन अफ़्सोस, ऐसा न हुआ। उस की ग़द्दार बहन यहूदाह भी इन तमाम वाक़िआत की गवाह थी। {3:8} बेवफ़ा इस्राईल की ज़िनाकारी नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त थी, इस लिए मैं ने उसे घर से निकाल कर तलाक़नामा दे दिया। फिर भी मैं ने देखा कि उस की ग़द्दार बहन यहूदाह ने ख़ौफ़ न खाया बल्कि ख़ुद निकल कर ज़िना करने लगी। {3:9} इस्राईल को इस जुर्म की सन्जीदगी मह्सूस न हुई बल्कि उस ने पत्थर और लकड़ी के बुतों के साथ ज़िना करके मुल्क की बेहुरमती की। {3:10} इस के बावुजूद उस की बेवफ़ा बहन यहूदाह पूरे दिल से नहीं बल्कि सिर्फ़ ज़ाहिरी तौर पर मेरे पास वापस आई।” यह रब का फ़रमान है। {i3:11} मेरे पास लौट आ {3:11} रब मुझ से हमकलाम हुआ, “बेवफ़ा इस्राईल ग़द्दार यहूदाह की निस्बत ज़्यादा रास्तबाज़ है। {3:12} जा, शिमाल की तरफ़ देख कर बुलन्द आवाज़ से एलान कर, ‘ऐ बेवफ़ा इस्राईल, रब फ़रमाता है कि वापस आ! आइन्दा मैं ग़ुस्से से तेरी तरफ़ नहीं देखूँगा, क्यूँकि मैं मेहरबान हूँ। मैं हमेशा तक नाराज़ नहीं रहूँगा। यह रब का फ़रमान है। {3:13} लेकिन लाज़िम है कि तू अपना क़ुसूर तस्लीम करे। इक़्रार कर कि मैं रब अपने ख़ुदा से सरकश हुई। मैं इधर उधर घूम कर हर घने दरख़्त के साय में अजनबी माबूदों की पूजा करती रही, मैं ने रब की न सुनी’।” यह रब का फ़रमान है। {3:14} रब फ़रमाता है, “ऐ बेवफ़ा बच्चो, वापस आओ, क्यूँकि मैं तुम्हारा मालिक हूँ। मैं तुम्हें हर जगह से निकाल कर सिय्यून में वापस लाऊँगा। किसी शहर से मैं एक को निकाल लाऊँगा, और किसी ख़ानदान से दो अफ़राद को। {3:15} तब मैं तुम्हें ऐसे गल्लाबानों से नवाज़ूँगा जो मेरी सोच रखेंगे और जो समझ और अक़ल के साथ तुम्हारी गल्लाबानी करेंगे। {3:16} फिर तुम्हारी तादाद बहुत बढ़ेगी और तुम चारों तरफ़ फैल जाओगे।” रब फ़रमाता है, “उन दिनों में रब के अह्द के सन्दूक़ का ज़िक्र नहीं किया जाएगा। न उस का ख़याल आएगा, न उसे याद किया जाएगा। न उस की कमी मह्सूस होगी, न उसे दुबारा बनाया जाएगा। {3:17} क्यूँकि उस वक़्त यरूशलम ‘रब का तख़्त’ कहलाएगा, और उस में तमाम अक़्वाम रब के नाम की ताज़ीम में जमा हो जाएँगी। तब वह अपने शरीर और ज़िद्दी दिलों के मुताबिक़ ज़िन्दगी नहीं गुज़ारेंगी। {3:18} तब यहूदाह का घराना इस्राईल के घराने के पास आएगा, और वह मिल कर शिमाली मुल्क से उस मुल्क में वापस आएँगे जो मैं ने तुम्हारे बापदादा को मीरास में दिया था। {3:19} मैं ने सोचा, काश मैं तेरे साथ बेटों का सा सुलूक करके तुझे एक ख़ुशगवार मुल्क दे सकूँ, एक ऐसी मीरास जो दीगर अक़्वाम की निस्बत कहीं शानदार हो। मैं समझा कि तुम मुझे अपना बाप ठहरा कर अपना मुँह मुझ से नहीं फेरोगे। {3:20} लेकिन ऐ इस्राईली क़ौम, तू मुझ से बेवफ़ा रही है, बिलकुल उस औरत की तरह जो अपने शौहर से बेवफ़ा हो गई है।” यह रब का फ़रमान है। {3:21} “सुनो! बंजर बुलन्दियों पर चीख़ें और इल्तिजाएँ सुनाई दे रही हैं। इस्राईली रो रहे हैं, इस लिए कि वह ग़लत राह इख़तियार करके रब अपने ख़ुदा को भूल गए हैं। {3:22} ऐ बेवफ़ा बच्चो, वापस आओ ताकि मैं तुम्हारे बेवफ़ा दिलों को शिफ़ा दे सकूँ।” “ऐ रब, हम हाज़िर हैं। हम तेरे पास आते हैं, क्यूँकि तू ही रब हमारा ख़ुदा है। {3:23} वाक़ई, पहाड़ियों और पहाड़ों पर बुतपरस्ती का तमाशा फ़रेब ही है। यक़ीनन रब हमारा ख़ुदा इस्राईल की नजात है। {3:24} हमारी जवानी से ले कर आज तक शर्मनाक देवता हमारे बापदादा की मेहनत का फल खाते आए हैं, ख़्वाह उन की भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल थे, ख़्वाह उन के बेटे-बेटियाँ। {3:25} आओ, हम अपनी शर्म के बिस्तर पर लेट जाएँ और अपनी बेइज़्ज़ती की रज़ाई में छुप जाएँ। क्यूँकि हम ने अपने बापदादा समेत रब अपने ख़ुदा का गुनाह किया है। अपनी जवानी से ले कर आज तक हम ने रब अपने ख़ुदा की नहीं सुनी।” {i4:1} तौबा करो {4:1} रब फ़रमाता है, “ऐ इस्राईल, अगर तू वापस आना चाहे तो मेरे पास वापस आ! अगर तू अपने घिनौने बुतों को मेरे हुज़ूर से दूर करके आवारा न फिरे {4:2} और रब की हयात की क़सम खाते वक़्त दयानतदारी, इन्साफ़ और सदाक़त से अपना वादा पूरा करे तो ग़ैरअक़्वाम मुझ से बरकत पा कर मुझ पर फ़ख़र करेंगी।” {4:3} रब यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों से फ़रमाता है, “अपने दिलों की ग़ैरमुस्तामल ज़मीन पर हल चला कर उसे क़ाबिल-ए-काश्त बनाओ! अपने बीज काँटेदार झाड़ियों में बो कर ज़ाए मत करना। {4:4} ऐ यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दो, अपने आप को रब के लिए मख़्सूस करके अपना ख़तना कराओ यानी अपने दिलों का ख़तना कराओ, वर्ना मेरा क़हर तुम्हारे ग़लत कामों के बाइस कभी न बुझने वाली आग की तरह तुझ पर नाज़िल होगा। {i4:5} शिमाल से आफ़त का एलान {4:5} यहूदाह में एलान करो और यरूशलम को इत्तिला दो, ‘मुल्क भर में नरसिंगा बजाओ!’ गला फाड़ कर चिल्लाओ, ‘इकट्ठे हो जाओ! आओ, हम क़िलाबन्द शहरों में पनाह लें!’ {4:6} झंडा गाड़ दो ताकि लोग उसे देख कर सिय्यून में पनाह लें। मह्फ़ूज़ मक़ाम में भाग जाओ और कहीं न रुको, क्यूँकि मैं शिमाल की तरफ़ से आफ़त ला रहा हूँ, सब कुछ धड़ाम से गिर जाएगा। {4:7} शेरबबर जंगल में अपनी छुपने की जगह से निकल आया, क़ौमों को हलाक करने वाला अपने मक़ाम से रवाना हो चुका है ताकि तेरे मुल्क को तबाह करे। तेरे शहर बर्बाद हो जाएंगे, और उन में कोई नहीं रहेगा। {4:8} चुनाँचे टाट का लिबास पहन कर आह-ओ-ज़ारी करो, क्यूँकि रब का सख़्त ग़ज़ब अब तक हम पर नाज़िल हो रहा है।” {4:9} रब फ़रमाता है, “उस दिन बादशाह और उस के अफ़्सर हिम्मत हारेंगे, इमामों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे और नबी ख़ौफ़ से सुन हो कर रह जाएंगे।” {4:10} तब मैं बोल उठा, “हाय, हाय! ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, तू ने इस क़ौम और यरूशलम को कितना सख़्त फ़रेब दिया जब तू ने फ़रमाया, तुम्हें अम्न-ओ-अमान हासिल होगा हालाँकि हमारे गलों पर तलवार फिरने को है।” {4:11} उस वक़्त इस क़ौम और यरूशलम को इत्तिला दी जाएगी, “रेगिस्तान के बंजर टीलों से सब कुछ झुलसाने वाली लू मेरी क़ौम के पास आ रही है। और यह गन्दुम को फटक कर भूसे से अलग करने वाली मुफ़ीद हवा नहीं होगी {4:12} बल्कि आँधी जैसी तेज़ हवा मेरी तरफ़ से आएगी। क्यूँकि अब मैं उन पर अपने फ़ैसले सादिर करूँगा।” {4:13} देखो, दुश्मन तूफ़ानी बादलों की तरह आगे बढ़ रहा है! उस के रथ आँधी जैसे, और उस के घोड़े उक़ाब से तेज़ हैं। हाय, हम पर अफ़्सोस! हमारा अन्जाम आ गया है। {4:14} ऐ यरूशलम, अपने दिल को धो कर बुराई से साफ़ कर ताकि तुझे छुटकारा मिले। तू अन्दर ही अन्दर कब तक अपने शरीर मन्सूबे बांधती रहेगी? {4:15} सुनो! दान से बुरी ख़बरें आ रही हैं, इफ़्राईम के पहाड़ी इलाक़े से आफ़त का पैग़ाम पहुँच रहा है। {4:16} ग़ैरअक़्वाम को इत्तिला दो और यरूशलम के बारे में एलान करो, “मुहासरा करने वाले फ़ौजी दूरदराज़ मुल्क से आ रहे हैं! वह जंग के नारे लगा लगा कर यहूदाह के शहरों पर टूट पड़ेंगे। {4:17} तब वह खेतों की चौकीदारी करने वालों की तरह यरूशलम को घेर लेंगे। क्यूँकि यह शहर मुझ से सरकश हो गया है।” यह रब का फ़रमान है। {4:18} “यह तेरे अपने ही चाल-चलन और हरकतों का नतीजा है। हाय, तेरी बेदीनी का अन्जाम कितना तल्ख़ और दिलख़राश है!” {i4:19} यरमियाह का अपनी क़ौम के लिए दुख {4:19} हाय, मेरी तड़पती जान, मेरी तड़पती जान! मैं दर्द के मारे पेच-ओ-ताब खा रहा हूँ। हाय, मेरा दिल! वह बेकाबू हो कर धड़क रहा है। मैं ख़ामोश नहीं रह सकता, क्यूँकि नरसिंगे की आवाज़ और जंग के नारे मेरे कान तक पहुँच गए हैं। {4:20} यके बाद दीगरे शिकस्तों की ख़बरें मिल रही हैं, चारों तरफ़ मुल्क की तबाही हुई है। अचानक ही मेरे तम्बू बर्बाद हैं, एक ही लम्हे में मेरे ख़ैमे ख़त्म हो गए हैं। {4:21} मुझे कब तक जंग का झंडा देखना पड़ेगा, कब तक नरसिंगे की आवाज़ सुननी पड़ेगी? {4:22} “मेरी क़ौम अहमक़ है और मुझे नहीं जानती। वह बेवुक़ूफ़ और नासमझ बच्चे हैं। गो वह ग़लत काम करने में बहुत तेज़ हैं, लेकिन भलाई करना उन की समझ से बाहर है।” {4:23} मैं ने मुल्क पर नज़र डाली तो वीरान-ओ-सुन्सान था। जब आसमान की तरफ़ देखा तो अंधेरा था। {4:24} मेरी निगाह पहाड़ों पर पड़ी तो थरथरा रहे थे, तमाम पहाड़ियाँ हिच्कोले खा रही थीं। {4:25} कहीं कोई शख़्स नज़र न आया, तमाम परिन्दे भी उड़ कर जा चुके थे। {4:26} मैं ने मुल्क पर नज़र दौड़ाई तो क्या देखता हूँ कि ज़रख़ेज़ ज़मीन रेगिस्तान बन गई है। रब और उस के शदीद ग़ज़ब के सामने उस के तमाम शहर नेस्त-ओ-नाबूद हो गए हैं। {4:27} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “पूरा मुल्क बर्बाद हो जाएगा, अगरचे मैं उसे पूरे तौर पर ख़त्म नहीं करूँगा। {4:28} ज़मीन मातम करेगी और आसमान तारीक हो जाएगा, क्यूँकि मैं यह फ़रमा चुका हूँ, और मेरा इरादा अटल है। न मैं यह करने से पछताऊँगा, न इस से बाज़ आऊँगा।” {4:29} घुड़सवारों और तीर चलाने वालों का शोर-शराबा सुन कर लोग तमाम शहरों से निकल कर जंगलों और चटानों में खिसक जाएंगे। तमाम शहर वीरान-ओ-सुन्सान होंगे, किसी में भी लोग नहीं बसेंगे। {4:30} तो फिर तू क्या कर रही है, तू जिसे ख़ाक में मिला दिया गया है? अब क़िर्मिज़ी लिबास और सोने के ज़ेवरात पहनने की क्या ज़रूरत है? इस वक़्त अपनी आँखों को सुरमे से सजाने और अपने आप को आरास्ता करने का कोई फ़ाइदा नहीं। तेरे आशिक़ तो तुझे हक़ीर जानते बल्कि तुझे जान से मारने के दरपै हैं। {4:31} क्यूँकि मुझे दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की आवाज़, पहली बार जन्म देने वाली की आह-ओ-ज़ारी सुनाई दे रही है। सिय्यून बेटी कराह रही है, वह अपने हाथ फैलाए हुए कह रही है, “हाय, मुझ पर अफ़्सोस! मेरी जान क़ातिलों के हाथ में आ कर निकल रही है।” {i5:1} अब मुआफ़ी नामुमकिन है {5:1} “यरूशलम की गलियों में घूमो फिरो! हर जगह का मुलाहज़ा करके पता करो कि क्या हो रहा है। उस के चौकों की तफ़्तीश भी करो। अगर तुम्हें एक भी शख़्स मिल जाए जो इन्साफ़ करे और दयानतदारी का तालिब रहे तो मैं शहर को मुआफ़ कर दूँगा। {5:2} वह रब की हयात की क़सम खाते वक़्त भी झूट बोलते हैं।” {5:3} ऐ रब, तेरी आँखें दयानतदारी देखना चाहती हैं। तू ने उन्हें मारा, लेकिन उन्हें दुख न हुआ। तू ने उन्हें कुचल डाला, लेकिन वह तर्बियत पाने के लिए तय्यार नहीं। उन्हों ने अपने चिहरे को पत्थर से कहीं ज़्यादा सख़्त बना कर तौबा करने से इन्कार किया है। {5:4} मैं ने सोचा, “सिर्फ़ ग़रीब लोग ऐसे हैं। यह इस लिए अहमक़ाना हरकतें कर रहे हैं कि रब की राह और अपने ख़ुदा की शरीअत से वाक़िफ़ नहीं हैं। {5:5} आओ, मैं बुज़ुर्गों के पास जा कर उन से बात करता हूँ। वह तो ज़रूर रब की राह और अल्लाह की शरीअत को जानते होंगे।” लेकिन अफ़्सोस, सब के सब ने अपने जूए और रस्से तोड़ डाले हैं। {5:6} इस लिए शेरबबर जंगल से निकल कर उन पर हम्ला करेगा, भेड़िया बयाबान से आ कर उन्हें बर्बाद करेगा, चीता उन के शहरों के क़रीब ताक में बैठ कर हर निकलने वाले को फाड़ डालेगा। क्यूँकि वह बार बार सरकश हुए हैं, मुतअद्दिद दफ़ा उन्हों ने अपनी बेवफ़ाई का इज़हार किया है। {5:7} “मैं तुझे कैसे मुआफ़ करूँ? तेरी औलाद ने मुझे तर्क करके उन की क़सम खाई है जो ख़ुदा नहीं हैं। गो मैं ने उन की हर ज़रूरत पूरी की तो भी उन्हों ने ज़िना किया, चक्ले के सामने उन की लम्बी क़तारें लगी रहीं। {5:8} यह लोग मोटे-ताज़े घोड़े हैं जो मस्ती में आ गए हैं। हर एक हिनहिनाता हुआ अपने पड़ोसी की बीवी को आँख मारता है।” {5:9} रब फ़रमाता है, “क्या मैं जवाब में उन्हें सज़ा न दूँ? क्या मैं ऐसी क़ौम से इन्तिक़ाम न लूँ? {5:10} जाओ, उस के अंगूर के बाग़ों पर टूट पड़ो और सब कुछ बर्बाद कर दो। लेकिन उन्हें मुकम्मल तौर पर ख़त्म मत करना। बेलों की शाख़ों को दूर करो, क्यूँकि वह रब के लोग नहीं हैं।” {i5:11} रब अपनी क़ौम से जवाब तलब करेगा {5:11} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “इस्राईल और यहूदाह के बाशिन्दे हर तरह से मुझ से बेवफ़ा रहे हैं। {5:12} उन्हों ने रब का इन्कार करके कहा है, वह कुछ नहीं करेगा। हम पर मुसीबत नहीं आएगी। हमें न तलवार, न काल से नुक़्सान पहुँचेगा। {5:13} नबियों की क्या हैसियत है? वह तो बकवास ही करते हैं, और रब का कलाम उन में नहीं है। बल्कि उन ही के साथ ऐसा किया जाएगा।” {5:14} इस लिए रब लश्करों का ख़ुदा फ़रमाता है, “ऐ यरमियाह, चूँकि लोग ऐसी बातें कर रहे हैं इस लिए तेरे मुँह में मेरे अल्फ़ाज़ आग बन कर इस क़ौम को लकड़ी की तरह भस्म कर देंगे।” {5:15} रब फ़रमाता है, “ऐ इस्राईल, मैं दूर की क़ौम को तेरे ख़िलाफ़ भेजूँगा, ऐसी पुख़्ता और क़दीम क़ौम जिस की ज़बान तू नहीं जानता और जिस की बातें तू नहीं समझता। {5:16} उन के तर्कश खुली क़ब्रें हैं, सब के सब ज़बरदस्त सूरमे हैं। {5:17} वह सब कुछ हड़प कर लेंगे: तेरी फ़सलें, तेरी ख़ुराक, तेरे बेटे-बेटियाँ, तेरी भेड़-बकरियाँ, तेरे गाय-बैल, तेरी अंगूर की बेलें और तेरे अन्जीर के दरख़्त। जिन क़िलाबन्द शहरों पर तुम भरोसा रखते हो उन्हें वह तलवार से ख़ाक में मिला देंगे। {5:18} फिर भी मैं उस वक़्त तुम्हें मुकम्मल तौर पर बर्बाद नहीं करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {5:19} “ऐ यरमियाह, अगर लोग तुझ से पूछें, रब हमारे ख़ुदा ने यह सब कुछ हमारे साथ क्यूँ किया? तो उन्हें बता, तुम मुझे तर्क करके अपने वतन में अजनबी माबूदों की ख़िदमत करते रहे हो, इस लिए तुम वतन से दूर मुल्क में अजनबियों की ख़िदमत करोगे। {5:20} इस्राईल में एलान करो और यहूदाह को इत्तिला दो {5:21} कि ऐ बेवुक़ूफ़ और नासमझ क़ौम, सुनो! लेकिन अफ़्सोस, उन की आँखें तो हैं लेकिन वह देख नहीं सकते, उन के कान तो हैं लेकिन वह सुन नहीं सकते।” {5:22} रब फ़रमाता है, “क्या तुम्हें मेरा ख़ौफ़ नहीं मानना चाहिए, मेरे हुज़ूर नहीं काँपना चाहिए? सोच लो! मैं ही ने रेत से समुन्दर की सरहद मुक़र्रर की, एक ऐसी बाड़ बनाई जिस पर से वह कभी नहीं गुज़र सकता। गो वह ज़ोर से लहरें मारे तो भी नाकाम रहता है, गो उस की मौजें ख़ूब गरजें तो भी मुक़र्ररा हद से आगे नहीं बढ़ सकतीं। {5:23} लेकिन अफ़्सोस, इस क़ौम का दिल ज़िद्दी और सरकश है। यह लोग सहीह राह से हट कर अपनी ही राहों पर चल पड़े हैं। {5:24} वह दिल में कभी नहीं कहते, आओ, हम रब अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ मानें। क्यूँकि वही हमें वक़्त पर ख़िज़ाँ और बहार के मौसम में बारिश मुहय्या करता है, वही इस की ज़मानत देता है कि हमारी फ़सलें बाक़ाइदगी से पक जाएँ। {5:25} अब तुम्हारे ग़लत कामों ने तुम्हें इन नेमतों से महरूम कर दिया, तुम्हारे गुनाहों ने तुम्हें इन अच्छी चीज़ों से रोक रखा है। {5:26} क्यूँकि मेरी क़ौम में ऐसे बेदीन अफ़राद पाए जाते हैं जो दूसरों की ताक लगाए रहते हैं। जिस तरह शिकारी परिन्दे पकड़ने के लिए झुक कर छुप जाता है, उसी तरह वह दूसरों की घात में बैठ जाते हैं। वह फंदे लगा कर लोगों को उन में फंसाते हैं। {5:27} और जिस तरह शिकारी अपने पिंजरे को चिड़ियों से भर देता है उसी तरह इन शरीर लोगों के घर फ़रेब से भरे रहते हैं। अपनी चालों से वह अमीर, ताक़तवर {5:28} और मोटे-ताज़े हो गए हैं। उन के ग़लत कामों की हद नहीं रहती। वह इन्साफ़ करते ही नहीं। न वह यतीमों की मदद करते हैं ताकि उन्हें वह कुछ मिल जाए जो उन का हक़ है, न ग़रीबों के हुक़ूक़ क़ाइम रखते हैं।” {5:29} रब फ़रमाता है, “अब मुझे बताओ, क्या मुझे उन्हें इस की सज़ा नहीं देनी चाहिए? क्या मुझे इस क़िस्म की हरकतें करने वाली क़ौम से बदला नहीं लेना चाहिए? {5:30} जो कुछ मुल्क में हुआ है वह हौलनाक और क़ाबिल-ए-घिन है। {5:31} क्यूँकि नबी झूटी पेशगोइयाँ सुनाते और इमाम अपनी ही मर्ज़ी से हुकूमत करते हैं। और मेरी क़ौम उन का यह रवय्या अज़ीज़ रखती है। लेकिन मुझे बताओ, जब यह सब कुछ ख़त्म हो जाएगा तो फिर तुम क्या करोगे? {i6:1} यरूशलम दुश्मनों से घिरा हुआ है {6:1} ऐ बिनयमीन की औलाद, यरूशलम से निकल कर कहीं और पनाह लो! तक़ूअ में नरसिंगा फूँको! बैत-करम में भागने का ऐसा इशारा खड़ा कर जो सब को नज़र आए! क्यूँकि शिमाल से आफ़त नाज़िल हो रही है, सब कुछ धड़ाम से गिर जाएगा। {6:2} सिय्यून बेटी कितनी मनमोहन और नाज़ुक है। लेकिन मैं उसे हलाक कर दूँगा, {6:3} और चरवाहे अपने रेवड़ों को ले कर उस पर टूट पड़ेंगे। वह अपने ख़ैमों को उस के इर्दगिर्द लगा लेंगे, और हर एक का रेवड़ चर चर कर अपना हिस्सा खा जाएगा। {6:4} वह कहेंगे, ‘आओ, हम उस से लड़ने के लिए तय्यार हो जाएँ। आओ, हम दोपहर के वक़्त हम्ला करें! लेकिन अफ़्सोस, दिन ढल रहा है, और शाम के साय लम्बे होते जा रहे हैं। {6:5} कोई बात नहीं, रात के वक़्त ही हम उस पर छापा मारेंगे, उसी वक़्त हम उस के बुर्जों को गिरा देंगे’।” {6:6} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “दरख़्तों को काटो, मिट्टी के ढेरों से यरूशलम का घेराऊ करो! शहर को सज़ा देनी है, क्यूँकि उस में ज़ुल्म ही ज़ुल्म पाया जाता है। {6:7} जिस तरह कुएँ से ताज़ा पानी निकलता रहता है उसी तरह यरूशलम की बदी भी ताज़ा ताज़ा उस से निकलती रहती है। ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद की आवाज़ें उस में गूँजती रहती हैं, उस की बीमार हालत और ज़ख़्म लगातार मेरे सामने रहते हैं। {6:8} ऐ यरूशलम, मेरी तर्बियत को क़बूल कर, वर्ना मैं तंग आ कर तुझ से अपना मुँह फेर लूँगा, मैं तुझे तबाह कर दूँगा और तू ग़ैरआबाद हो जाएगी।” {6:9} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “जिस तरह अंगूर चुनने के बाद ग़रीब लोग तमाम बचा-खुचा फल तोड़ लेते हैं उसी तरह इस्राईल का बचा-खुचा हिस्सा भी एहतियात से तोड़ लिया जाएगा। चुनने वाले की तरह दुबारा अपने हाथ को अंगूर की शाख़ों पर से गुज़रने दे।” {6:10} ऐ रब, मैं किस से बात करूँ, किस को आगाह करूँ? कौन सुनेगा? देख, उन के कान नामख़्तून हैं, इस लिए वह सुन ही नहीं सकते। रब का कलाम उन्हें मज़्हकाख़ेज़ लगता है, वह उन्हें नापसन्द है। {6:11} इस लिए मैं रब के ग़ज़ब से भरा हुआ हूँ, मैं उसे बर्दाश्त करते करते इतना थक गया हूँ कि उसे मज़ीद नहीं रोक सकता। “उसे गलियों में खेलने वाले बच्चों और जमाशुदा नौजवानों पर नाज़िल कर, क्यूँकि सब को गिरिफ़्तार किया जाएगा, ख़्वाह आदमी हो या औरत, बुज़ुर्ग हो या उम्ररसीदा। {6:12} उन के घरों को खेतों और बीवियों समेत दूसरों के हवाले किया जाएगा, क्यूँकि मैं अपना हाथ मुल्क के बाशिन्दों के ख़िलाफ़ बढ़ाऊँगा।” यह रब का फ़रमान है। {6:13} “छोटे से ले कर बड़े तक सब ग़लत नफ़ा के पीछे पड़े हैं, नबी से ले कर इमाम तक सब धोकेबाज़ हैं। {6:14} वह मेरी क़ौम के ज़ख़्म पर आरिज़ी मर्हम-पट्टी लगा कर कहते हैं, अब सब कुछ ठीक हो गया है, अब सलामती का दौर आ गया है हालाँकि सलामती है ही नहीं। {6:15} ऐसा घिनौना रवय्या उन के लिए शर्म का बाइस होना चाहिए, लेकिन वह शर्म नहीं करते बल्कि सरासर बेशर्म हैं। इस लिए जब सब कुछ गिर जाएगा तो यह लोग भी गिर जाएंगे। जब मैं इन पर सज़ा नाज़िल करूँगा तो यह ठोकर खा कर ख़ाक में मिल जाएंगे।” यह रब का फ़रमान है। {i6:16} सहीह रास्ते की तलाश में रहो {6:16} रब फ़रमाता है, “रास्तों के पास खड़े हो कर उन का मुआइना करो! क़दीम राहों की तफ़्तीश करके पता करो कि उन में से कौन सी अच्छी है, फिर उस पर चलो। तब तुम्हारी जान को सुकून मिलेगा। लेकिन अफ़्सोस, तुम इन्कार करके कहते हो, नहीं, हम यह राह इख़तियार नहीं करेंगे! {6:17} देखो, मैं ने तुम पर पहरेदार मुक़र्रर किए और कहा, ‘जब नरसिंगा फूँका जाएगा तो ध्यान दो!’ लेकिन तुम ने इन्कार किया, ‘नहीं, हम तवज्जुह नहीं देंगे।’ {6:18} चुनाँचे ऐ क़ौमो, सुनो! ऐ जमाअत, जान ले कि उन के साथ क्या कुछ किया जाएगा। {6:19} ऐ ज़मीन, ध्यान दे कि मैं इस क़ौम पर क्या आफ़त नाज़िल करूँगा। और यह उन के अपने मन्सूबों का फल होगा, क्यूँकि उन्हों ने मेरी बातों पर तवज्जुह न दी बल्कि मेरी शरीअत को रद्द कर दिया। {6:20} मुझे सबा के बख़ूर या दूरदराज़ ममालिक के क़ीमती मसालों की क्या परवा! तुम्हारी भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ मुझे पसन्द नहीं, तुम्हारी ज़बह की क़ुर्बानियों से मैं लुत्फ़अन्दोज़ नहीं होता।” {6:21} रब फ़रमाता है, “मैं इस क़ौम के रास्ते में ऐसी रुकावटें खड़ी कर दूँगा जिन से बाप और बेटा ठोकर खा कर गिर जाएंगे। पड़ोसी और दोस्त मिल कर हलाक हो जाएंगे।” {i6:22} शिमाल से दुश्मन का हम्ला {6:22} रब फ़रमाता है, “शिमाली मुल्क से फ़ौज आ रही है, दुनिया की इन्तिहा से एक अज़ीम क़ौम को जगाया जा रहा है। {6:23} उस के ज़ालिम और बेरहम फ़ौजी कमान और शम्शीर से लेस हैं। सुनो उन का शोर! मुतलातिम समुन्दर की सी आवाज़ सुनाई दे रही है। ऐ सिय्यून बेटी, वह घोड़ों पर सफ़आरा हो कर तुझ पर हम्ला करने आ रहे हैं।” {6:24} उन के बारे में इत्तिला पा कर हमारे हाथ हिम्मत हार गए हैं। हम पर ख़ौफ़ तारी हो गया है, हमें दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत का सा दर्द हो रहा है। {6:25} शहर से निकल कर खेत में या सड़क पर मत चलना, क्यूँकि वहाँ दुश्मन तलवार थामे खड़ा है, चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत फैल गई है। {6:26} ऐ मेरी क़ौम, टाट का लिबास पहन कर राख में लोट-पोट हो जा। यूँ मातम कर जिस तरह इक्लौता बेटा मर गया हो। ज़ोर से वावैला कर, क्यूँकि अचानक ही हलाकू हम पर छापा मारेगा। {i6:27} यरमियाह क़ौम को आज़माता है {6:27} रब मुझ से हमकलाम हुआ, “मैं ने तुझे धातों को जाँचने की ज़िम्मादारी दी है, और मेरी क़ौम वह धात है जिस का चाल-चलन तुझे मालूम करके परखना है।” {6:28} ऐ रब, यह तमाम लोग बदतरीन क़िस्म के सरकश हैं। तोहमत लगाना इन की रोज़ी बन गया है। यह पीतल और लोहा ही हैं, सब के सब तबाही का बाइस हैं। {6:29} धौंकनी ख़ूब हवा दे रही है ताकि सीसा आग में पिघल कर चाँदी से अलग हो जाए। लेकिन अफ़्सोस, सारी मेहनत रायगाँ है। सीसा यानी बेदीनों को अलग नहीं किया जा सकता, ख़ालिस चाँदी बाक़ी नहीं रहती। {6:30} चुनाँचे उन्हें ‘रद्दी चाँदी’ क़रार दिया जाता है, क्यूँकि रब ने उन्हें रद्द कर दिया है। {i7:1} रब के घर के बारे में पैग़ाम {7:1} रब यरमियाह से हमकलाम हुआ, {7:2} “रब के घर के सहन के दरवाज़े पर खड़ा हो कर एलान कर कि ऐ यहूदाह के तमाम बाशिन्दो, रब का कलाम सुनो! जितने भी रब की परस्तिश करने के लिए इन दरवाज़ों में दाख़िल होते हैं वह सब तवज्जुह दें! {7:3} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि अपनी ज़िन्दगी और चाल-चलन दुरुस्त करो तो मैं आइन्दा भी तुम्हें इस मक़ाम पर बसने दूँगा। {7:4} उन के फ़रेबदिह अल्फ़ाज़ पर एतिमाद मत करो जो कहते हैं, ‘यहाँ हम मह्फ़ूज़ हैं क्यूँकि यह रब का घर, रब का घर, रब का घर है।’ {7:5} सुनो, शर्त तो यह है कि तुम अपनी ज़िन्दगी और चाल-चलन दुरुस्त करो और एक दूसरे के साथ इन्साफ़ का सुलूक करो, {7:6} कि तुम परदेसी, यतीम और बेवा पर ज़ुल्म न करो, इस जगह बेक़ुसूर का ख़ून न बहाओ और अजनबी माबूदों के पीछे लग कर अपने आप को नुक़्सान न पहुँचाओ। {7:7} अगर तुम ऐसा करो तो मैं आइन्दा भी तुम्हें इस जगह बसने दूँगा, उस मुल्क में जो मैं ने तुम्हारे बापदादा को हमेशा के लिए बख़्श दिया था। {7:8} लेकिन अफ़्सोस, तुम फ़रेबदिह अल्फ़ाज़ पर भरोसा रखते हो जो फ़ुज़ूल ही हैं। {7:9} तुम चोर, क़ातिल और ज़िनाकार हो। नीज़ तुम झूटी क़सम खाते, बाल देवता के हुज़ूर बख़ूर जलाते और अजनबी माबूदों के पीछे लग जाते हो, ऐसे देवताओं के पीछे जिन से तुम पहले वाक़िफ़ नहीं थे। {7:10} लेकिन साथ साथ तुम यहाँ मेरे हुज़ूर भी आते हो। जिस मकान पर मेरे ही नाम का ठप्पा लगा है उसी में तुम खड़े हो कर कहते हो, ‘हम मह्फ़ूज़ हैं।’ तुम रब के घर में इबादत करने के साथ साथ किस तरह यह तमाम घिनौनी हरकतें जारी रख सकते हो?” {7:11} रब फ़रमाता है, “क्या तुम्हारे नज़्दीक यह मकान जिस पर मेरे ही नाम का ठप्पा लगा है डाकुओं का अड्डा बन गया है? ख़बरदार! यह सब कुछ मुझे भी नज़र आता है। {7:12} सैला शहर का चक्कर लगाओ जहाँ मैं ने पहले अपना नाम बसाया था। मालूम करो कि मैं ने अपनी क़ौम इस्राईल की बेदीनी के सबब से उस शहर के साथ क्या किया।” {7:13} रब फ़रमाता है, “तुम यह शरीर हरकतें करते रहे, और मैं बार बार तुम से हमकलाम होता रहा, लेकिन तुम ने मेरी न सुनी। मैं तुम्हें बुलाता रहा, लेकिन तुम जवाब देने के लिए तय्यार न हुए। {7:14} इस लिए अब मैं इस घर के साथ वह कुछ करूँगा जो मैं ने सैला के साथ किया था, गो इस पर मेरे ही नाम का ठप्पा लगा है, यह वह मकान है जिस पर तुम एतिमाद रखते हो और जिसे मैं ने तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को अता किया था। {7:15} मैं तुम्हें अपने हुज़ूर से निकाल दूँगा, बिलकुल उसी तरह जिस तरह मैं ने तुम्हारे तमाम भाइयों यानी इस्राईल की औलाद को निकाल दिया था। {i7:16} लोगों की नाफ़रमानी {7:16} ऐ यरमियाह, इस क़ौम के लिए दुआ मत कर। इस के लिए न इल्तिजा कर, न मिन्नत। इन लोगों की ख़ातिर मुझे तंग न कर, क्यूँकि मैं तेरी नहीं सुनूँगा। {7:17} क्या तुझे वह कुछ नज़र नहीं आ रहा जो यह यहूदाह के शहरों और यरूशलम की गलियों में कर रहे हैं? {7:18} और सब इस में मुलव्वस हैं। बच्चे लकड़ी चुन कर ढेर बनाते हैं, फिर बाप उसे आग लगाते हैं जबकि औरतें आटा गूँध गूँध कर आग पर आसमान की मलिका नामी देवी के लिए टिक्कियाँ पकाती हैं। मुझे तंग करने के लिए वह अजनबी माबूदों को मै की नज़रें भी पेश करते हैं। {7:19} लेकिन हक़ीक़त में यह मुझे उतना तंग नहीं कर रहे जितना अपने आप को। ऐसी हरकतों से वह अपनी ही रुस्वाई कर रहे हैं।” {7:20} रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है, “मेरा क़हर और ग़ज़ब इस मक़ाम पर, इन्सान-ओ-हैवान पर, खुले मैदान के दरख़्तों पर और ज़मीन की पैदावार पर नाज़िल होगा। सब कुछ नज़र-ए-आतिश हो जाएगा, और कोई उसे बुझा नहीं सकेगा।” {7:21} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “भस्म होने वाली क़ुर्बानियों को मुझे पेश न करो, बल्कि उन का गोश्त दीगर क़ुर्बानियों समेत ख़ुद खा लो। {7:22} क्यूँकि जिस दिन मैं तुम्हारे बापदादा को मिस्र से निकाल लाया उस दिन मैं ने उन्हें भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ और दीगर क़ुर्बानियाँ चढ़ाने का हुक्म न दिया। {7:23} मैं ने उन्हें सिर्फ़ यह हुक्म दिया कि मेरी सुनो! तब ही मैं तुम्हारा ख़ुदा हूँगा और तुम मेरी क़ौम होगे। पूरे तौर पर उस राह पर चलते रहो जो मैं तुम्हें दिखाता हूँ। तब ही तुम्हारी ख़ैर होगी। {7:24} लेकिन उन्हों ने मेरी न सुनी, न ध्यान दिया बल्कि अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने लगे। उन्हों ने मेरी तरफ़ रुजू न किया बल्कि अपना मुँह मुझ से फेर लिया। {7:25} जब से तुम्हारे बापदादा मिस्र से निकल आए आज तक मैं रोज़-ब-रोज़ और बार बार अपने ख़ादिमों यानी नबियों को तुम्हारे पास भेजता रहा। {7:26} तो भी उन्हों ने न मेरी सुनी, न तवज्जुह दी। वह बज़िद रहे बल्कि अपने बापदादा की निस्बत ज़्यादा बुरे थे। {7:27} ऐ यरमियाह, तू उन्हें यह तमाम बातें बताएगा, लेकिन वह तेरी नहीं सुनेंगे। तू उन्हें बुलाएगा, लेकिन वह जवाब नहीं देंगे। {7:28} तब तू उन्हें बताएगा, ‘इस क़ौम ने न रब अपने ख़ुदा की आवाज़ सुनी, न उस की तर्बियत क़बूल की। दयानतदारी ख़त्म हो कर उन के मुँह से मिट गई है।’ {i7:29} वादी-ए-बिन-हिन्नूम में क़ाबिल-ए-घिन रुसूम {7:29} अपने बालों को काट कर फैंक दे! जा, बंजर टीलों पर मातम का गीत गा, क्यूँकि यह नस्ल रब के ग़ज़ब का निशाना बन गई है, और उस ने इसे रद्द करके छोड़ दिया है।” {7:30} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “जो कुछ यहूदाह के बाशिन्दों ने किया वह मुझे बहुत बुरा लगता है। उन्हों ने अपने घिनौने बुतों को मेरे नाम के लिए मख़्सूस घर में रख कर उस की बेहुरमती की है। {7:31} साथ साथ उन्हों ने वादी-ए-बिन-हिन्नूम में वाक़े तूफ़त की ऊँची जगहें तामीर कीं ताकि अपने बेटे-बेटियों को जला कर क़ुर्बान करें। मैं ने कभी भी ऐसी रस्म अदा करने का हुक्म नहीं दिया बल्कि इस का ख़याल मेरे ज़हन में आया तक नहीं। {7:32} चुनाँचे रब का कलाम सुनो! वह दिन आने वाले हैं जब यह मक़ाम ‘तूफ़त’ या ‘वादी-ए-बिन-हिन्नूम’ नहीं कहलाएगा बल्कि ‘क़त्ल-ओ-ग़ारत की वादी।’ उस वक़्त लोग तूफ़त में इतनी लाशें दफ़नाएँगे कि आख़िरकार ख़ाली जगह नहीं रहेगी। {7:33} तब इस क़ौम की लाशें परिन्दों और जंगली जानवरों की ख़ुराक बन जाएँगी, और कोई नहीं होगा जो उन्हें भगा दे। {7:34} मैं यहूदाह के शहरों और यरूशलम की गलियों में ख़ुशी-ओ-शादमानी की आवाज़ें ख़त्म कर दूँगा, दूल्हा दुल्हन की आवाज़ें बन्द हो जाएँगी। क्यूँकि मुल्क वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएगा।” {8:1} रब फ़रमाता है, “उस वक़्त दुश्मन क़ब्रों को खोल कर यहूदाह के बादशाहों, अफ़्सरों, इमामों, नबियों और यरूशलम के आम बाशिन्दों की हड्डियों को निकालेगा {8:2} और ज़मीन पर बिखेर देगा। वहाँ वह उन के सामने पड़ी रहेंगी जो उन्हें प्यारे थे यानी सूरज, चाँद और सितारों के तमाम लश्कर के सामने। क्यूँकि वह उन ही की ख़िदमत करते, उन ही के पीछे चलते, उन ही के तालिब रहते, और उन ही को सिज्दा करते थे। उन की हड्डियाँ दुबारा न इकट्ठी की जाएँगी, न दफ़न की जाएँगी बल्कि खेत में गोबर की तरह बिखरी पड़ी रहेंगी। {8:3} और जहाँ भी मैं इस शरीर क़ौम के बचे हुओं को मुन्तशिर करूँगा वहाँ वह सब कहेंगे कि काश हम भी ज़िन्दा न रहें बल्कि मर जाएँ।” यह रब्ब-उल-अफ़्वाज का फ़रमान है। {i8:4} क़ौम तबाहकुन राह से हटने के लिए तय्यार नहीं {8:4} “उन्हें बता, रब फ़रमाता है कि जब कोई गिर जाता है तो क्या दुबारा उठने की कोशिश नहीं करता? ज़रूर। और जब कोई सहीह रास्ते से दूर हो जाता है तो क्या वह दुबारा वापस आ जाने की कोशिश नहीं करता? बेशक। {8:5} तो फिर यरूशलम के यह लोग सहीह राह से बार बार क्यूँ भटक जाते हैं? यह फ़रेब के साथ लिपटे रहते और वापस आने से इन्कार ही करते हैं। {8:6} मैं ने ध्यान दे कर देखा है कि यह झूट ही बोलते हैं। कोई भी पछता कर नहीं कहता, ‘यह कैसा ग़लत काम है जो मैं ने किया!’ जिस तरह जंग में घोड़े दुश्मन पर टूट पड़ते हैं उसी तरह हर एक सीधा अपनी ग़लत राह पर दौड़ता रहता है। {8:7} फ़िज़ा में उड़ने वाले लक़्लक़ पर ग़ौर करो जिसे आने जाने के मुक़र्ररा औक़ात ख़ूब मालूम होते हैं। फ़ाख़ता, अबाबील और बुल्बुल पर भी ध्यान दो जो सर्दियों के मौसम में कहीं और होते हैं, गर्मियों के मौसम में कहीं और। वह मुक़र्ररा औक़ात से कभी नहीं हटते। लेकिन अफ़्सोस, मेरी क़ौम रब की शरीअत नहीं जानती। {8:8} तुम किस तरह कह सकते हो, ‘हम दानिशमन्द हैं, क्यूँकि हमारे पास रब की शरीअत है’? हक़ीक़त में क़ातिबों के फ़रेबदिह क़लम ने इसे तोड़-मरोड़ कर बयान किया है। {8:9} सुनो, दानिशमन्दों की रुस्वाई हो जाएगी, वह दह्शतज़दा हो कर पकड़े जाएंगे। देखो, रब का कलाम रद्द करने के बाद उन की अपनी हिक्मत कहाँ रही? {8:10} इस लिए मैं उन की बीवियों को परदेसियों के हवाले कर दूँगा और उन के खेतों को ऐसे लोगों के सपुर्द जो उन्हें निकाल देंगे। क्यूँकि छोटे से ले कर बड़े तक सब के सब नाजाइज़ नफ़ा के पीछे पड़े हैं, नबियों से ले कर इमामों तक सब धोकेबाज़ हैं। {8:11} वह मेरी क़ौम के ज़ख़्म पर आरिज़ी मर्हम-पट्टी लगा कर कहते हैं, ‘अब सब कुछ ठीक हो गया है, अब सलामती का दौर आ गया है’ हालाँकि सलामती है ही नहीं। {8:12} गो ऐसा घिनौना रवय्या उन के लिए शर्म का बाइस होना चाहिए, लेकिन वह शर्म नहीं करते बल्कि सरासर बेशर्म हैं। इस लिए जब सब कुछ गिर जाएगा तो यह लोग भी गिर जाएंगे। जब मैं इन पर सज़ा नाज़िल करूँगा तो यह ठोकर खा कर ख़ाक में मिल जाएंगे।” यह रब का फ़रमान है। {8:13} रब फ़रमाता है, “मैं उन की पूरी फ़सल छीन लूँगा। अंगूर की बेल पर एक दाना भी नहीं रहेगा, अन्जीर के तमाम दरख़्त फल से महरूम हो जाएंगे बल्कि तमाम पत्ते भी झड़ जाएंगे। जो कुछ भी मैं ने उन्हें अता किया था वह उन से छीन लिया जाएगा। {8:14} तब तुम कहोगे, ‘हम यहाँ क्यूँ बैठे रहें? आओ, हम क़िलाबन्द शहरों में पनाह ले कर वहीं हलाक हो जाएँ। हम ने रब अपने ख़ुदा का गुनाह किया है, और अब हम इस का नतीजा भुगत रहे हैं। क्यूँकि उसी ने हमें हलाकत के हवाले करके हमें ज़हरीला पानी पिला दिया है। {8:15} हम सलामती के इन्तिज़ार में रहे, लेकिन हालात ठीक न हुए। हम शिफ़ा पाने की उम्मीद रखते थे, लेकिन इस के बजाए हम पर दह्शत छा गई। {8:16} सुनो! दुश्मन के घोड़े नथने फुला रहे हैं। दान से उन का शोर हम तक पहुँच रहा है। उन के हिनहिनाने से पूरा मुल्क थरथरा रहा है, क्यूँकि आते वक़्त यह पूरे मुल्क को उस के शहरों और बाशिन्दों समेत हड़प कर लेंगे’।” {i8:17} अपनी क़ौम पर यरमियाह का नोहा {8:17} रब फ़रमाता है, “मैं तुम्हारे ख़िलाफ़ अफ़ई भेज दूँगा, ऐसे ज़हरीले साँप जिन के ख़िलाफ़ हर जादूमंत्र बेअसर रहेगा। यह तुम्हें काटेंगे।” {8:18} लाइलाज ग़म मुझ पर हावी हो गया, मेरा दिल निढाल हो गया है। {8:19} सुनो! मेरी क़ौम दूरदराज़ मुल्क से चीख़ चीख़ कर मदद के लिए आवाज़ दे रही है। लोग पूछते हैं, “क्या रब सिय्यून में नहीं है, क्या यरूशलम का बादशाह अब से वहाँ सुकूनत नहीं करता?” “सुनो, उन्हों ने अपने मुजस्समों और बेकार अजनबी बुतों की पूजा करके मुझे क्यूँ तैश दिलाया?” {8:20} लोग आहें भर भर कर कहते हैं, “फ़सल कट गई है, फल चुना गया है, लेकिन अब तक हमें नजात हासिल नहीं हुई।” {8:21} मेरी क़ौम की मुकम्मल तबाही देख कर मेरा दिल टूट गया है। मैं मातम कर रहा हूँ, क्यूँकि उस की हालत इतनी बुरी है कि मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं। {8:22} क्या जिलिआद में मर्हम नहीं? क्या वहाँ डाक्टर नहीं मिलता? मुझे बताओ, मेरी क़ौम का ज़ख़्म क्यूँ नहीं भरता? {9:1} काश मेरा सर पानी का मम्बा और मेरी आँखें आँसूओं का चश्मा हों ताकि मैं दिन रात अपनी क़ौम के मक़्तूलों पर आह-ओ-ज़ारी कर सकूँ। {i9:2} धोकेबाज़ों की क़ौम {9:2} काश रेगिस्तान में कहीं मुसाफ़िरों के लिए सराय हो ताकि मैं अपनी क़ौम को छोड़ कर वहाँ चला जाऊँ। क्यूँकि सब ज़िनाकार, सब ग़द्दारों का जथ्था हैं। {9:3} रब फ़रमाता है, “वह अपनी ज़बान से झूट के तीर चलाते हैं, और मुल्क में उन की ताक़त दयानतदारी पर मब्नी नहीं होती। नीज़, वह बदतर होते जा रहे हैं। मुझे तो वह जानते ही नहीं। {9:4} हर एक अपने पड़ोसी से ख़बरदार रहे, और अपने किसी भी भाई पर भरोसा मत रखना। क्यूँकि हर भाई चालाकी करने में माहिर है, और हर पड़ोसी तोहमत लगाने पर तुला रहता है। {9:5} हर एक अपने पड़ोसी को धोका देता है, कोई भी सच नहीं बोलता। उन्हों ने अपनी ज़बान को झूट बोलना सिखाया है, और अब वह ग़लत काम करते करते थक गए हैं। {9:6} ऐ यरमियाह, तू फ़रेब से घिरा रहता है, और यह लोग फ़रेब के बाइस ही मुझे जानने से इन्कार करते हैं।” {9:7} इस लिए रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “देखो, मैं उन्हें ख़ाम चाँदी की तरह पिघला कर आज़माऊँगा, क्यूँकि मैं अपनी क़ौम, अपनी बेटी के साथ और क्या कर सकता हूँ? {9:8} उन की ज़बानें मोहलक तीर हैं। उन के मुँह पड़ोसी से सुलह-सलामती की बातें करते हैं जबकि अन्दर ही अन्दर वह उस की ताक में बैठे हैं।” {9:9} रब फ़रमाता है, “क्या मुझे उन्हें इस की सज़ा नहीं देनी चाहिए? क्या मुझे ऐसी क़ौम से बदला नहीं लेना चाहिए?” {i9:10} नोहा करो! {9:10} मैं पहाड़ों के बारे में आह-ओ-ज़ारी करूँगा, बयाबान की चरागाहों पर मातम का गीत गाऊँगा। क्यूँकि वह यूँ तबाह हो गए हैं कि न कोई उन में से गुज़रता, न रेवड़ों की आवाज़ें उन में सुनाई देती हैं। परिन्दे और जानवर सब भाग कर चले गए हैं। {9:11} “यरूशलम को मैं मल्बे का ढेर बना दूँगा, और आइन्दा गीदड़ उस में जा बसेंगे। यहूदाह के शहरों को मैं वीरान-ओ-सुन्सान कर दूँगा। एक भी उन में नहीं बसेगा।” {9:12} कौन इतना दानिशमन्द है कि यह समझ सके? किस को रब से इतनी हिदायत मिली है कि वह बयान कर सके कि मुल्क क्यूँ बर्बाद हो गया है? वह क्यूँ रेगिस्तान जैसा बन गया है, इतना वीरान कि उस में से कोई नहीं गुज़रता? {9:13} रब ने फ़रमाया, “वजह यह है कि उन्हों ने मेरी शरीअत को तर्क किया, वह हिदायत जो मैं ने ख़ुद उन्हें दी थी। न उन्हों ने मेरी सुनी, न मेरी शरीअत की पैरवी की। {9:14} इस के बजाए वह अपने ज़िद्दी दिलों की पैरवी करके बाल देवताओं के पीछे लग गए हैं। उन्हों ने वही कुछ किया जो उन के बापदादा ने उन्हें सिखाया था।” {9:15} इस लिए रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “देखो, मैं इस क़ौम को कड़वा खाना खिला कर ज़हरीला पानी पिला दूँगा। {9:16} मैं उन्हें ऐसी क़ौमों में मुन्तशिर कर दूँगा जिन से न वह और न उन के बापदादा वाक़िफ़ थे। मेरी तलवार उस वक़्त तक उन के पीछे पड़ी रहेगी जब तक हलाक न हो जाएँ।” {9:17} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “ध्यान दे कर गिर्या करने वाली औरतों को बुलाओ। जो जनाज़ों पर वावैला करती हैं उन में से सब से माहिर औरतों को बुलाओ। {9:18} वह जल्द आ कर हम पर आह-ओ-ज़ारी करें ताकि हमारी आँखों से आँसू बह निकलें, हमारी पलकों से पानी ख़ूब टपकने लगे। {9:19} क्यूँकि सिय्यून से गिर्या की आवाज़ें बुलन्द हो रही हैं, ‘हाय, हमारे साथ कैसी ज़ियादती हुई है, हमारी कैसी रुस्वाई हुई है! हम मुल्क को छोड़ने पर मज्बूर हैं, क्यूँकि दुश्मन ने हमारे घरों को ढा दिया है’।” {9:20} ऐ औरतो, रब का पैग़ाम सुनो। अपने कानों को उस की हर बात पर धरो! अपनी बेटियों को नोहा करने की तालीम दो, एक दूसरी को मातम का यह गीत सिखाओ, {9:21} “मौत फलाँग कर हमारी खिड़कियों में से घुस आई और हमारे क़िलों में दाख़िल हुई है। अब वह बच्चों को गलियों में से और नौजवानों को चौकों में से मिटा डालने जा रही है।” {9:22} रब फ़रमाता है, “नाशें खेतों में गोबर की तरह इधर उधर बिखरी पड़ी रहेंगी। जिस तरह कटा हुआ गन्दुम फ़सल काटने वाले के पीछे इधर उधर पड़ा रहता है उसी तरह लाशें इधर उधर पड़ी रहेंगी। लेकिन उन्हें इकट्ठा करने वाला कोई नहीं होगा।” {9:23} रब फ़रमाता है, “न दानिशमन्द अपनी हिक्मत पर फ़ख़र करे, न ज़ोरावर अपने ज़ोर पर या अमीर अपनी दौलत पर। {9:24} फ़ख़र करने वाला फ़ख़र करे कि उसे समझ हासिल है, कि वह रब को जानता है और कि मैं रब हूँ जो दुनिया में मेहरबानी, इन्साफ़ और रास्ती को अमल में लाता हूँ। क्यूँकि यही चीज़ें मुझे पसन्द हैं।” {9:25} रब फ़रमाता है, “ऐसा वक़्त आ रहा है जब मैं उन सब को सज़ा दूँगा जिन का सिर्फ़ जिस्मानी ख़तना हुआ है। {9:26} इन में मिस्र, यहूदाह, अदोम, अम्मोन, मोआब और वह शामिल हैं जो रेगिस्तान के किनारे किनारे रहते हैं। क्यूँकि गो यह तमाम अक़्वाम ज़ाहिरी तौर पर ख़तना की रस्म अदा करती हैं, लेकिन उन का ख़तना बातिनी तौर पर नहीं हुआ। ध्यान दो कि इस्राईल की भी यही हालत है।” {i10:1} बुत बेफ़ाइदा हैं {10:1} ऐ इस्राईल के घराने, रब का पैग़ाम सुन! {10:2} रब फ़रमाता है, “दीगर अक़्वाम की बुतपरस्ती मत अपनाना। यह लोग इल्म-ए-नुजूम से मुस्तक़बिल जान लेने की कोशिश करते करते परेशान हो जाते हैं, लेकिन तुम उन की बातों से परेशान न हो जाओ। {10:3} क्यूँकि दीगर क़ौमों के रस्म-ओ-रिवाज फ़ुज़ूल ही हैं। जंगल में दरख़्त कट जाता है, फिर कारीगर उसे अपने औज़ार से तश्कील देता है। {10:4} लोग उसे अपनी सोना-चाँदी से सजा कर कीलों से कहीं लगा देते हैं ताकि हिले न। {10:5} बुत उन पुतलों की मानिन्द हैं जो खीरे के खेत में खड़े किए जाते हैं ताकि परिन्दों को भगा दें। न वह बोल सकते, न चल सकते हैं, इस लिए लोग उन्हें उठा कर अपने साथ ले जाते हैं। उन से मत डरना, क्यूँकि न वह नुक़्सान का बाइस हैं, न भलाई का।” {10:6} ऐ रब, तुझ जैसा कोई नहीं है, तू अज़ीम है, तेरे नाम की अज़मत ज़ोरदार तरीक़े से ज़ाहिर हुई है। {10:7} ऐ अक़्वाम के बादशाह, कौन तेरा ख़ौफ़ नहीं मानेगा? क्यूँकि तू इस लाइक़ है। अक़्वाम के तमाम दानिशमन्दों और उन के तमाम ममालिक में तुझ जैसा कोई नहीं है। {10:8} सब अहमक़ और बेवुक़ूफ़ साबित हुए हैं, क्यूँकि उन की तर्बियत लकड़ी के बेकार बुतों से हासिल हुई है। {10:9} तरसीस से चाँदी की चादरें और ऊफ़ाज़ से सोना लाया जाता है। उन से कारीगर और सुनार बुत बना देते हैं जिसे क़िर्मिज़ी और अर्ग़वानी रंग के कपड़े पहनाए जाते हैं। सब कुछ माहिर उस्तादों के हाथ से बनाया जाता है। {10:10} लेकिन रब ही हक़ीक़ी ख़ुदा है। वही ज़िन्दा ख़ुदा और अबदी बादशाह है। जब वह नाराज़ हो जाता है तो ज़मीन लरज़ने लगती है। अक़्वाम उस का क़हर बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। {10:11} बुतपरस्तों को बताओ कि देवताओं ने न आसमान को बनाया और न ज़मीन को, उन का नाम-ओ-निशान तो आसमान-ओ-ज़मीन से मिट जाएगा। {10:12} देखो, अल्लाह ही ने अपनी क़ुदरत से ज़मीन को ख़ल्क़ किया, उसी ने अपनी हिक्मत से दुनिया की बुन्याद रखी, और उसी ने अपनी समझ के मुताबिक़ आसमान को ख़ैमे की तरह तान लिया। {10:13} उस के हुक्म पर आसमान पर पानी के ज़ख़ीरे गरजने लगते हैं। वह दुनिया की इन्तिहा से बादल चढ़ने देता, बारिश के साथ बिजली कड़कने देता और अपने गोदामों से हवा निकलने देता है। {10:14} तमाम इन्सान अहमक़ और समझ से ख़ाली हैं। हर सुनार अपने बुतों के बाइस शर्मिन्दा हुआ है। उस के बुत धोका ही हैं, उन में दम नहीं। {10:15} वह फ़ुज़ूल और मज़्हकाख़ेज़ हैं। अदालत के वक़्त वह नेस्त हो जाएंगे। {10:16} अल्लाह जो याक़ूब का मौरूसी हिस्सा है इन की मानिन्द नहीं है। वह सब का ख़ालिक़ है, और इस्राईली क़ौम उस का मौरूसी हिस्सा है। रब्ब-उल-अफ़्वाज ही उस का नाम है। {i10:17} आने वाली जिलावतनी {10:17} ऐ मुहासराशुदा शहर, अपना सामान समेट कर मुल्क से निकलने की तय्यारियाँ कर ले। {10:18} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “इस बार मैं मुल्क के बाशिन्दों को बाहर फैंक दूँगा। मैं उन्हें तंग करूँगा ताकि उन्हें पकड़ा जाए।” {10:19} हाय, मेरा बेड़ा ग़र्क़ हो गया है! हाय, मेरा ज़ख़्म भर नहीं सकता। पहले मैं ने सोचा कि यह ऐसी बीमारी है जिसे मुझे बर्दाश्त ही करना है। {10:20} लेकिन अब मेरा ख़ैमा तबाह हो गया है, उस के तमाम रस्से टूट गए हैं। मेरे बेटे मेरे पास से चले गए हैं, एक भी नहीं रहा। कोई नहीं है जो मेरा ख़ैमा दुबारा लगाए, जो उस के पर्दे नए सिरे से लटकाए। {10:21} क्यूँकि क़ौम के गल्लाबान अहमक़ हो गए हैं, उन्हों ने रब को तलाश नहीं किया। इस लिए वह कामयाब नहीं रहे, और उन का पूरा रेवड़ तित्तर-बित्तर हो गया है। {10:22} सुनो! एक ख़बर पहुँच रही है, शिमाली मुल्क से शोर-ओ-ग़ौग़ा सुनाई दे रहा है। यहूदाह के शहर उस की ज़द में आ कर बर्बाद हो जाएंगे। आइन्दा गीदड़ ही उन में बसेंगे। {10:23} ऐ रब, मैं ने जान लिया है कि इन्सान की राह उस के अपने हाथ में नहीं होती। अपनी मर्ज़ी से न वह चलता, न क़दम उठाता है। {10:24} ऐ रब, मेरी तम्बीह कर, लेकिन मुनासिब हद तक। तैश में आ कर मेरी तम्बीह न कर, वर्ना मैं भस्म हो जाऊँगा। {10:25} अपना ग़ज़ब उन अक़्वाम पर नाज़िल कर जो तुझे नहीं जानतीं, उन उम्मतों पर जो तेरा नाम ले कर तुझे नहीं पुकारतीं। क्यूँकि उन्हों ने याक़ूब को हड़प कर लिया है। उन्हों ने उसे मुकम्मल तौर पर निगल कर उस की चरागाह को तबाह कर दिया है। {i11:1} क़ौम की अह्दशिकनी {11:1} रब यरमियाह से हमकलाम हुआ, {11:2} “यरूशलम और यहूदाह के बाशिन्दों से कह कि उस अह्द की शराइत पर ध्यान दो जो मैं ने तुम्हारे साथ बांधा था। {11:3} रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि उस पर लानत जो उस अह्द की शराइत पूरी न करे {11:4} जो मैं ने तुम्हारे बापदादा से बांधा था जब उन्हें मिस्र से निकाल लाया, उस मक़ाम से जो लोहा पिघलाने वाली भट्टी की मानिन्द था। उस वक़्त मैं बोला, ‘मेरी सुनो और मेरे हर हुक्म पर अमल करो तो तुम मेरी क़ौम होगे और मैं तुम्हारा ख़ुदा हूँगा। {11:5} फिर मैं वह वादा पूरा करूँगा जो मैं ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा से किया था, मैं तुम्हें वह मुल्क दूँगा जिस में दूध और शहद की कस्रत है।’ आज तुम उसी मुल्क में रह रहे हो।” मैं, यरमियाह ने जवाब दिया, “ऐ रब, आमीन, ऐसा ही हो!” {11:6} तब रब ने मुझे हुक्म दिया कि यहूदाह के शहरों और यरूशलम की गलियों में फिर कर यह तमाम बातें सुना दे। एलान कर, “अह्द की शराइत पर ध्यान दे कर उन पर अमल करो। {11:7} तुम्हारे बापदादा को मिस्र से निकालते वक़्त मैं ने उन्हें आगाह किया कि मेरी सुनो। आज तक मैं बार बार यही बात दोहराता रहा, {11:8} लेकिन उन्हों ने न मेरी सुनी, न ध्यान दिया बल्कि हर एक अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारता रहा। अह्द की जिन बातों पर मैं ने उन्हें अमल करने का हुक्म दिया था उन पर उन्हों ने अमल न किया। नतीजे में मैं उन पर वह तमाम लानतें लाया जो अह्द में बयान की गई हैं।” {11:9} रब मज़ीद मुझ से हमकलाम हुआ, “यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों ने मेरे ख़िलाफ़ साज़िश की है। {11:10} उन से वही गुनाह सरज़द हुए हैं जो उन के बापदादा ने किए थे। क्यूँकि यह भी मेरी बातें सुनने के लिए तय्यार नहीं हैं, यह भी अजनबी माबूदों के पीछे हो लिए हैं ताकि उन की ख़िदमत करें। इस्राईल और यहूदाह ने मिल कर वह अह्द तोड़ा है जो मैं ने उन के बापदादा से बांधा था। {11:11} इस लिए रब फ़रमाता है कि मैं उन पर ऐसी आफ़त नाज़िल करूँगा जिस से वह बच नहीं सकेंगे। तब वह मदद के लिए मुझ से फ़र्याद करेंगे, लेकिन मैं उन की नहीं सुनूँगा। {11:12} फिर यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दे अपने शहरों से निकल कर चीख़ते चिल्लाते उन देवताओं से मिन्नत करेंगे जिन के सामने बख़ूर जलाते रहे हैं। लेकिन अब जब वह मुसीबत में मुब्तला होंगे तो यह उन्हें नहीं बचाएँगे। {11:13} ऐ यहूदाह, तेरे देवता तेरे शहरों जैसे बेशुमार हो गए हैं। शर्मनाक देवता बाल के लिए बख़ूर जलाने की इतनी क़ुर्बानगाहें खड़ी की गई हैं जितनी यरूशलम में गलियाँ होती हैं। {11:14} ऐ यरमियाह, इस क़ौम के लिए दुआ मत करना! इस के लिए न मिन्नत कर, न समाजत। क्यूँकि जब आफ़त उन पर आएगी और वह चिल्ला कर मुझ से फ़र्याद करेंगे तो मैं उन की नहीं सुनूँगा। {11:15} मेरी प्यारी क़ौम मेरे घर में क्यूँ हाज़िर होती है? वह तो अपनी बेशुमार साज़िशों से बाज़ ही नहीं आती। क्या आने वाली आफ़त क़ुर्बानी का मुक़द्दस गोश्त पेश करने से रुक जाएगी? अगर ऐसा होता तो तू ख़ुशी मना सकती। {11:16} रब ने तेरा नाम ‘ज़ैतून का फलता फूलता दरख़्त जिस का ख़ूबसूरत फल है’ रखा, लेकिन अब वह ज़बरदस्त आँधी का शोर मचा कर दरख़्त को आग लगाएगा। तब उस की तमाम डालियाँ भस्म हो जाएँगी। {11:17} ऐ इस्राईल और यहूदाह, रब्ब-उल-अफ़्वाज ने ख़ुद तुम्हें ज़मीन में लगाया। लेकिन अब उस ने तुम पर आफ़त लाने का फ़ैसला किया है। क्यूँ? तुम्हारे ग़लत काम की वजह से, और इस लिए कि तुम ने बाल देवता को बख़ूर की क़ुर्बानियाँ पेश करके मुझे तैश दिलाया है।” {i11:18} यरमियाह के लिए जान का ख़तरा {11:18} रब ने मुझे इत्तिला दी तो मुझे मालूम हुआ। हाँ, उस वक़्त तू ही ने मुझे उन के मन्सूबों से आगाह किया। {11:19} पहले मैं उस भूले-भाले भेड़ के बच्चे की मानिन्द था जिसे क़साई के पास लाया जा रहा हो। मुझे क्या पता था कि यह मेरे ख़िलाफ़ साज़िशें कर रहे हैं। आपस में वह कह रहे थे, “आओ, हम दरख़्त को फल समेत ख़त्म करें, आओ हम उसे ज़िन्दों के मुल्क में से मिटाएँ ताकि उस का नाम-ओ-निशान तक याद न रहे।” {11:20} ऐ रब्ब-उल-अफ़्वाज, तू आदिल मुन्सिफ़ है जो लोगों के सब से गहरे ख़यालात और राज़ जाँच लेता है। अब बख़्श दे कि मैं अपनी आँखों से वह इन्तिक़ाम देखूँ जो तू मेरे मुख़ालिफ़ों से लेगा। क्यूँकि मैं ने अपना मुआमला तेरे ही सपुर्द कर दिया है। {11:21} रब फ़रमाता है, “अनतोत के आदमी तुझे क़त्ल करना चाहते हैं। वह कहते हैं, ‘रब का नाम ले कर नबुव्वत मत करना, वर्ना तू हमारे हाथों मार दिया जाएगा’।” {11:22} चूँकि यह लोग ऐसी बातें करते हैं इस लिए रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “मैं उन्हें सज़ा दूँगा! उन के जवान आदमी तलवार से और उन के बेटे-बेटियाँ काल से हलाक हो जाएंगे। {11:23} उन में से एक भी नहीं बचेगा। क्यूँकि जिस साल उन की सज़ा नाज़िल होगी, उस वक़्त मैं अनतोत के आदमियों पर सख़्त आफ़त लाऊँगा।” {i12:1} बेदीनों को इतनी कामयाबी क्यूँ हासिल होती है? {12:1} ऐ रब, तू हमेशा हक़ पर है, लिहाज़ा अदालत में तुझ से शिकायत करने का क्या फ़ाइदा? ताहम मैं अपना मुआमला तुझे पेश करना चाहता हूँ। बेदीनों को इतनी कामयाबी क्यूँ हासिल होती है? ग़द्दार इतने सुकून से ज़िन्दगी क्यूँ गुज़ारते हैं? {12:2} तू ने उन्हें ज़मीन में लगा दिया, और अब वह जड़ पकड़ कर ख़ूब उगने लगे बल्कि फल भी ला रहे हैं। गो तेरा नाम उन की ज़बान पर रहता है, लेकिन उन का दिल तुझ से दूर है। {12:3} लेकिन ऐ रब, तू मुझे जानता है। तू मेरा मुलाहज़ा करके मेरे दिल को परखता रहता है। गुज़ारिश है कि तू उन्हें भेड़ों की तरह घसीट कर ज़बह करने के लिए ले जा। उन्हें क़त्ल-ओ-ग़ारत के दिन के लिए मख़्सूस कर! {12:4} मुल्क कब तक काल की गिरिफ़्त में रहेगा? खेतों में हरियाली कब तक मुरझाई हुई नज़र आएगी? बाशिन्दों की बुराई के बाइस जानवर और परिन्दे ग़ाइब हो गए हैं। क्यूँकि लोग कहते हैं, “अल्लाह को नहीं मालूम कि हमारे साथ क्या हो जाएगा।” {12:5} रब मुझ से हमकलाम हुआ, “पैदल चलने वालों से दौड़ का मुक़ाबला करना तुझे थका देता है, तो फिर तू किस तरह घोड़ों का मुक़ाबला करेगा? तू अपने आप को सिर्फ़ वहाँ मह्फ़ूज़ समझता है जहाँ चारों तरफ़ अम्न-ओ-अमान फैला हुआ है, तो फिर तू दरया-ए-यर्दन के गुंजान जंगल से किस तरह निपटेगा? {12:6} क्यूँकि तेरे सगे भाई, हाँ तेरे बाप का घर भी तुझ से बेवफ़ा हो गया है। यह भी बुलन्द आवाज़ से तेरे पीछे तुझे गालियाँ देते हैं। उन पर एतिमाद मत करना, ख़्वाह वह तेरे साथ अच्छी बातें क्यूँ न करें। {i12:7} अल्लाह अपने मुल्क पर मातम करता है {12:7} मैं ने अपने घर इस्राईल को तर्क कर दिया है। जो मेरी मौरूसी मिलकियत थी उसे मैं ने रद्द किया है। मैं ने अपने लख़्त-ए-जिगर को उस के दुश्मनों के हवाले कर दिया है। {12:8} क्यूँकि मेरी क़ौम जो मेरी मौरूसी मिलकियत है मेरे साथ बुरा सुलूक करती है। जंगल में शेरबबर की तरह वह मेरे ख़िलाफ़ दहाड़ती है, इस लिए मैं उस से नफ़रत करता हूँ। {12:9} अब मेरी मौरूसी मिलकियत उस रंगीन शिकारी परिन्दे की मानिन्द है जिसे दीगर शिकारी परिन्दों ने घेर रखा है। जाओ, तमाम दरिन्दों को इकट्ठा करो ताकि वह आ कर उसे खा जाएँ। {12:10} मुतअद्दिद गल्लाबानों ने मेरे अंगूर के बाग़ को ख़राब कर दिया है। मेरे प्यारे खेत को उन्हों ने पाँओ तले रौंद कर रेगिस्तान में बदल दिया है। {12:11} अब वह बंजर ज़मीन बन कर उजाड़ हालत में मेरे सामने मातम करता है। पूरा मुल्क वीरान-ओ-सुन्सान है, लेकिन कोई परवा नहीं करता। {12:12} तबाहकुन फ़ौजी बयाबान की बंजर बुलन्दियों पर से उतर कर क़रीब पहुँच रहे हैं। क्यूँकि रब की तलवार मुल्क के एक सिरे से दूसरे सिरे तक सब कुछ खा जाएगी। कोई भी नहीं बचेगा। {12:13} इस क़ौम ने गन्दुम का बीज बोया, लेकिन काँटों की फ़सल पक गई। ख़ूब मेहनत-मशक़्क़त करने के बावुजूद भी कुछ हासिल न हुआ, क्यूँकि रब का सख़्त ग़ज़ब क़ौम पर नाज़िल हो रहा है। चुनाँचे अब रुस्वाई की फ़सल काटो!” {i12:14} अल्लाह का पड़ोसी ममालिक के लिए पैग़ाम {12:14} रब फ़रमाता है, “मैं उन तमाम शरीर पड़ोसी ममालिक को जड़ से उखाड़ दूँगा जो मेरी क़ौम इस्राईल की मिलकियत को छीनने की कोशिश कर रहे हैं, वह मिलकियत जो मैं ने ख़ुद उन्हें मीरास में दी थी। साथ साथ मैं यहूदाह को भी जड़ से उन के दरमियान से निकाल दूँगा। {12:15} लेकिन बाद में मैं उन पर तरस खा कर हर एक को फिर उस की अपनी मौरूसी ज़मीन और अपने मुल्क में पहुँचा दूँगा। {12:16} पहले उन दीगर क़ौमों ने मेरी क़ौम को बाल देवता की क़सम खाने का तर्ज़ सिखाया। लेकिन अब अगर वह मेरी क़ौम की राहें अच्छी तरह सीख कर मेरे ही नाम और मेरी ही हयात की क़सम खाएँ तो मेरी क़ौम के दरमियान रह कर अज़ सर-ए-नौ क़ाइम हो जाएँगी। {12:17} लेकिन जो क़ौम मेरी नहीं सुनेगी उसे मैं हत्मी तौर पर जड़ से उखाड़ कर नेस्त कर दूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {i13:1} गली सड़ी लँगोटी {13:1} रब मुझ से हमकलाम हुआ, “जा, कतान की लँगोटी ख़रीद कर उसे बांध ले। लेकिन वह भीग न जाए।” {13:2} मैं ने ऐसा ही किया। लँगोटी ख़रीद कर मैं ने उसे बांध लिया। {13:3} तब रब का कलाम दुबारा मुझ पर नाज़िल हुआ, {13:4} “अब वह लँगोटी ले जो तू ने ख़रीद कर बांध ली है। दरया-ए-फ़ुरात के पास जा कर उसे किसी चटान की दराड़ में छुपा दे।” {13:5} चुनाँचे मैं रवाना हो कर दरया-ए-फ़ुरात के किनारे पहुँच गया। वहाँ मैं ने लँगोटी को कहीं छुपा दिया जिस तरह रब ने हुक्म दिया था। {13:6} बहुत दिन गुज़र गए। फिर रब मुझ से एक बार फिर हमकलाम हुआ, “उठ, दरया-ए-फ़ुरात के पास जा कर वह लँगोटी निकाल ला जो मैं ने तुझे वहाँ छुपाने को कहा था।” {13:7} चुनाँचे मैं रवाना हो कर दरया-ए-फ़ुरात के पास पहुँच गया। वहाँ मैं ने खोद कर लँगोटी को उस जगह से निकाल लिया जहाँ मैं ने उसे छुपा दिया था। लेकिन अफ़्सोस, वह गल सड़ गई थी, बिलकुल बेकार हो गई थी। {13:8} तब रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ, {13:9} “जिस तरह यह कपड़ा ज़मीन में दब कर गल सड़ गया उसी तरह मैं यहूदाह और यरूशलम का बड़ा घमंड ख़ाक में मिला दूँगा। {13:10} यह ख़राब लोग मेरी बातें सुनने के लिए तय्यार नहीं बल्कि अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं। अजनबी माबूदों के पीछे लग कर यह उन ही की ख़िदमत और पूजा करते हैं। लेकिन इन का अन्जाम लँगोटी की मानिन्द ही होगा। यह बेकार हो जाएंगे। {13:11} क्यूँकि जिस तरह लँगोटी आदमी की कमर के साथ लिपटी रहती है उसी तरह मैं ने पूरे इस्राईल और पूरे यहूदाह को अपने साथ लिपटने का मौक़ा फ़राहम किया ताकि वह मेरी क़ौम और मेरी शोहरत, तारीफ़ और इज़्ज़त का बाइस बन जाएँ। लेकिन अफ़्सोस, वह सुनने के लिए तय्यार नहीं थे।” यह रब का फ़रमान है। {i13:12} मै के घड़े भरे हुए हैं {13:12} “उन्हें बता दे कि रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है, ‘हर घड़े को मै से भरना है।’ वह जवाब में कहेंगे, ‘हम तो ख़ुद जानते हैं कि हर घड़े को मै से भरना है।’ {13:13} तब उन्हें इस का मतलब बता। ‘रब फ़रमाता है कि इस मुल्क के तमाम बाशिन्दे घड़े हैं जिन्हें मैं मै से भर दूँगा। दाऊद के तख़्त पर बैठने वाले बादशाह, इमाम, नबी और यरूशलम के तमाम रहने वाले सब के सब भर भर कर नशे में धुत हो जाएंगे। {13:14} तब मैं उन्हें एक दूसरे के साथ टकरा दूँगा, और बाप बेटों के साथ मिल कर टुकड़े टुकड़े हो जाएंगे। न मैं तरस खाऊँगा, न उन पर रहम करूँगा बल्कि हमदर्दी दिखाए बग़ैर उन्हें तबाह करूँगा’।” यह रब का फ़रमान है। {i13:15} क़ैद की हैबतनाक हालत {13:15} ध्यान से सुनो! मग़रूर न हो, क्यूँकि रब ने ख़ुद फ़रमाया है। {13:16} इस से पहले कि तारीकी फैल जाए और तुम्हारे पाँओ धुन्दलेपन में पहाड़ों के साथ ठोकर खाएँ, रब अपने ख़ुदा को जलाल दो! क्यूँकि उस वक़्त गो तुम रौशनी के इन्तिज़ार में रहोगे, लेकिन अल्लाह अंधेरे को मज़ीद बढ़ाएगा, गहरी तारीकी तुम पर छा जाएगी। {13:17} लेकिन अगर तुम न सुनो तो मैं तुम्हारे तकब्बुर को देख कर पोशीदगी में गिर्या-ओ-ज़ारी करूँगा। मैं ज़ार ज़ार रोऊँगा, मेरी आँखों से आँसू ज़ोर से टपकेंगे, क्यूँकि दुश्मन रब के रेवड़ को पकड़ कर जिलावतन कर देगा। {13:18} बादशाह और उस की माँ को इत्तिला दे, “अपने तख़्तों से उतर कर ज़मीन पर बैठ जाओ, क्यूँकि तुम्हारी शान का ताज तुम्हारे सरों से गिर गया है।” {13:19} दश्त-ए-नजब के शहर बन्द किए जाएंगे, और उन्हें खोलने वाला कोई नहीं होगा। पूरे यहूदाह को जिलावतन कर दिया जाएगा, एक भी नहीं बचेगा। {13:20} ऐ यरूशलम, अपनी नज़र उठा कर उन्हें देख जो शिमाल से आ रहे हैं। अब वह रेवड़ कहाँ रहा जो तेरे सपुर्द किया गया, तेरी शानदार भेड़-बकरियाँ किधर हैं? {13:21} तू उस दिन क्या कहेगी जब रब उन्हें तुझ पर मुक़र्रर करेगा जिन्हें तू ने अपने क़रीबी दोस्त बनाया था? जन्म देने वाली औरत का सा दर्द तुझ पर ग़ालिब आएगा। {13:22} और अगर तेरे दिल में सवाल उभर आए कि मेरे साथ यह क्यूँ हो रहा है तो सुन! यह तेरे संगीन गुनाहों की वजह से हो रहा है। इन ही की वजह से तेरे कपड़े उतारे गए हैं और तेरी इस्मतदरी हुई है। {13:23} क्या काला आदमी अपनी जिल्द का रंग या चीता अपनी खाल के धब्बे बदल सकता है? हरगिज़ नहीं! तुम भी बदल नहीं सकते। तुम ग़लत काम के इतने आदी हो गए हो कि सहीह काम कर ही नहीं सकते। {13:24} “जिस तरह भूसा रेगिस्तान की तेज़ हवा में उड़ कर तित्तर-बित्तर हो जाता है उसी तरह मैं तेरे बाशिन्दों को मुन्तशिर कर दूँगा।” {13:25} रब फ़रमाता है, “यही तेरा अन्जाम होगा, मैं ने ख़ुद मुक़र्रर किया है कि तुझे यह अज्र मिलना है। क्यूँकि तू ने मुझे भूल कर झूट पर भरोसा रखा है। {13:26} मैं ख़ुद तेरे कपड़े उतारूँगा ताकि तेरी बरहनगी सब को नज़र आए। {13:27} मैं ने पहाड़ी और मैदानी इलाक़ों में तेरी घिनौनी हरकतों पर ख़ूब ध्यान दिया है। तेरी ज़िनाकारी, तेरा मस्ताना हिनहिनाना, तेरी बेशर्म इस्मतफ़रोशी, सब कुछ मुझे नज़र आता है। ऐ यरूशलम, तुझ पर अफ़्सोस! तू पाक-साफ़ हो जाने के लिए तय्यार नहीं। मज़ीद कितनी देर लगेगी?” {i14:1} काल के दौरान रब का पैग़ाम {14:1} काल के दौरान रब यरमियाह से हमकलाम हुआ, {14:2} “यहूदाह मातम कर रहा है, उस के दरवाज़ों की हालत क़ाबिल-ए-रहम है। लोग सोगवार हालत में फ़र्श पर बैठे हैं, और यरूशलम की चीख़ें आसमान तक बुलन्द हो रही हैं। {14:3} अमीर अपने नौकरों को पानी भरने भेजते हैं, लेकिन हौज़ों के पास पहुँच कर पता चलता है कि पानी नहीं है, इस लिए वह ख़ाली हाथ वापस आ जाते हैं। शर्मिन्दगी और नदामत के मारे वह अपने सरों को ढाँप लेते हैं। {14:4} बारिश न होने की वजह से ज़मीन में दराड़ें पड़ गई हैं। खेतों में काम करने वाले भी शर्म के मारे अपने सरों को ढाँप लेते हैं। {14:5} घास नहीं है, इस लिए हिरनी अपने नौमौलूद बच्चे को छोड़ देती है। {14:6} जंगली गधे बंजर टीलों पर खड़े गीदड़ों की तरह हाँपते हैं। हरियाली न मिलने की वजह से वह बेजान हो रहे हैं।” {14:7} ऐ रब, हमारे गुनाह हमारे ख़िलाफ़ गवाही दे रहे हैं। तो भी अपने नाम की ख़ातिर हम पर रहम कर। हम मानते हैं कि बुरी तरह बेवफ़ा हो गए हैं, हम ने तेरा ही गुनाह किया है। {14:8} ऐ अल्लाह, तू इस्राईल की उम्मीद है, तू ही मुसीबत के वक़्त उसे छुटकारा देता है। तो फिर हमारे साथ तेरा सुलूक मुल्क में अजनबी का सा क्यूँ है? तू रात को कभी इधर कभी इधर ठहरने वाले मुसाफ़िर जैसा क्यूँ है? {14:9} तू क्यूँ उस आदमी की मानिन्द है जो अचानक दम-ब-ख़ुद हो जाता है, उस सूरमे की मानिन्द जो बेबस हो कर बचा नहीं सकता। ऐ रब, तू तो हमारे दरमियान ही रहता है, और हम पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है। हमें तर्क न कर! {i14:10} इस क़ौम के लिए दुआ मत करना {14:10} लेकिन रब इस क़ौम के बारे में फ़रमाता है, “यह लोग आवारा फिरने के शौक़ीन हैं, यह अपने पाँओ को रोक ही नहीं सकते। मैं उन से नाख़ुश हूँ। अब मुझे उन के ग़लत काम याद रहेंगे, अब मैं उन के गुनाहों की सज़ा दूँगा।” {14:11} रब मज़ीद मुझ से हमकलाम हुआ, “इस क़ौम की बहबूदी के लिए दुआ मत करना। {14:12} गो यह रोज़ा भी रखें तो भी मैं इन की इल्तिजाओं पर ध्यान नहीं दूँगा। गो यह भस्म होने वाली और ग़ल्ला की क़ुर्बानियाँ पेश भी करें तो भी मैं इन से ख़ुश नहीं हूँगा बल्कि इन्हें काल, तलवार और बीमारियों से नेस्त-ओ-नाबूद कर दूँगा।” {14:13} यह सुन कर मैं ने एतिराज़ किया, “ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, नबी इन्हें बताते आए हैं, ‘न क़त्ल-ओ-ग़ारत का ख़तरा होगा, न काल पड़ेगा बल्कि मैं यहीं तुम्हारे लिए अम्न-ओ-अमान का पक्का बन्द-ओ-बस्त कर लूँगा’।” {14:14} रब ने जवाब दिया, “नबी मेरा नाम ले कर झूटी पेशगोइयाँ बयान कर रहे हैं। मैं ने न उन्हें भेजा, न उन्हें कोई ज़िम्मादारी दी और न उन से हमकलाम हुआ। यह तुम्हें झूटी रोयाएँ, फ़ुज़ूल पेशगोइयाँ और अपने दिल के वहम सुनाते रहे हैं।” {14:15} चुनाँचे रब फ़रमाता है, “यह नबी तलवार और काल की ज़द में आ कर मर जाएंगे। क्यूँकि गो मैं ने उन्हें नहीं भेजा तो भी यह मेरे नाम में नबुव्वत करके कहते हैं कि मुल्क में न क़त्ल-ओ-ग़ारत का ख़तरा होगा, न काल पड़ेगा। {14:16} और जिन लोगों को वह अपनी नबुव्वतें सुनाते रहे हैं वह तलवार और काल का शिकार बन जाएंगे, उन की लाशें यरूशलम की गलियों में फैंक दी जाएँगी। उन्हें दफ़नाने वाला कोई नहीं होगा, न उन को, न उन की बीवियों को और न उन के बेटे-बेटियों को। यूँ मैं उन पर उन की अपनी बदकारी नाज़िल करूँगा। {i14:17} ऐ रब, हमें मुआफ़ कर! {14:17} ऐ यरमियाह, उन्हें यह कलाम सुना, ‘दिन रात मेरे आँसू बह रहे हैं। वह रुक नहीं सकते, क्यूँकि मेरी क़ौम, मेरी कुंवारी बेटी को गहरी चोट लग गई है, ऐसा ज़ख़्म जो भर नहीं सकता। {14:18} दीहात में जा कर मुझे वह सब नज़र आते हैं जो तलवार से क़त्ल किए गए हैं। जब मैं शहर में वापस आता हूँ तो चारों तरफ़ काल के बुरे असरात दिखाई देते हैं। नबी और इमाम मुल्क में मारे मारे फिर रहे हैं, और उन्हें मालूम नहीं कि क्या करें’।” {14:19} ऐ रब, क्या तू ने यहूदाह को सरासर रद्द किया है? क्या तुझे सिय्यून से इतनी घिन आती है? तू ने हमें इतनी बार क्यूँ मारा कि हमारा इलाज नामुमकिन हो गया है? हम अम्न-ओ-अमान के इन्तिज़ार में रहे, लेकिन हालात ठीक न हुए। हम शिफ़ा पाने की उम्मीद रखते थे, लेकिन इस के बजाए हम पर दह्शत छा गई। {14:20} ऐ रब, हम अपनी बेदीनी और अपने बापदादा का क़ुसूर तस्लीम करते हैं। हम ने तेरा ही गुनाह किया है। {14:21} अपने नाम की ख़ातिर हमें हक़ीर न जान, अपने जलाली तख़्त की बेहुरमती होने न दे! हमारे साथ अपना अह्द याद कर, उसे मन्सूख़ न कर। {14:22} क्या दीगर अक़्वाम के देवताओं में से कोई है जो बारिश बरसा सके? या क्या आसमान ख़ुद ही बारिशें ज़मीन पर भेज देता है? हरगिज़ नहीं, बल्कि तू ही यह सब कुछ करता है, ऐ रब हमारे ख़ुदा। इसी लिए हम तुझ पर उम्मीद रखते हैं। तू ही ने यह सारा इन्तिज़ाम क़ाइम किया है। {i15:1} सज़ा ज़रूर आएगी, क्यूँकि देर हो गई है {15:1} फिर रब मुझ से हमकलाम हुआ, “अब से मेरा दिल इस क़ौम की तरफ़ माइल नहीं होगा, ख़्वाह मूसा और समूएल मेरे सामने आ कर उन की शफ़ाअत क्यूँ न करें। उन्हें मेरे हुज़ूर से निकाल दे, वह चले जाएँ! {15:2} अगर वह तुझ से पूछें, ‘हम किधर जाएँ?’ तो उन्हें जवाब दे, ‘रब फ़रमाता है कि जिसे मरना है वह मरे, जिसे तलवार की ज़द में आना है वह तलवार का लुक़्मा बने, जिसे भूके मरना है वह भूके मरे, जिसे क़ैद में जाना है वह क़ैद हो जाए’।” {15:3} रब फ़रमाता है, “मैं उन्हें चार क़िस्म की सज़ा दूँगा। एक, तलवार उन्हें क़त्ल करेगी। दूसरे, कुत्ते उन की लाशें घसीट कर ले जाएंगे। तीसरे और चौथे, परिन्दे और दरिन्दे उन्हें खा खा कर ख़त्म कर देंगे। {15:4} जब मैं अपनी क़ौम से निपट लूँगा तो दुनिया के तमाम ममालिक उस की हालत देख कर काँप उठेंगे। उन के रोंगटे खड़े हो जाएंगे जब वह यहूदाह के बादशाह मनस्सी बिन हिज़क़ियाह की उन शरीर हरकतों का अन्जाम देखेंगे जो उस ने यरूशलम में की हैं। {15:5} ऐ यरूशलम, कौन तुझ पर तरस खाएगा, कौन हमदर्दी का इज़हार करेगा? कौन तेरे घर आ कर तेरा हाल पूछेगा?” {15:6} रब फ़रमाता है, “तू ने मुझे रद्द किया, अपना मुँह मुझ से फेर लिया है। अब मैं अपना हाथ तेरे ख़िलाफ़ बढ़ा कर तुझे तबाह कर दूँगा। क्यूँकि मैं हमदर्दी दिखाते दिखाते तंग आ गया हूँ। {15:7} जिस तरह गन्दुम को हवा में उछाल कर भूसे से अलग किया जाता है उसी तरह मैं उन्हें मुल्क के दरवाज़ों के सामने फटकूँगा। चूँकि मेरी क़ौम ने अपने ग़लत रास्तों को तर्क न किया इस लिए मैं उसे बेऔलाद बना कर बर्बाद कर दूँगा। {15:8} उस की बेवाएँ समुन्दर की रेत जैसी बेशुमार होंगी। दोपहर के वक़्त ही मैं नौजवानों की माओं पर तबाही नाज़िल करूँगा, अचानक ही उन पर पेच-ओ-ताब और दह्शत छा जाएगी। {15:9} सात बच्चों की माँ निढाल हो कर जान से हाथ धो बैठेगी। दिन के वक़्त ही उस का सूरज डूब जाएगा, उस का फ़ख़र और इज़्ज़त जाती रहेगी। जो लोग बच जाएंगे उन्हें मैं दुश्मन के आगे आगे तलवार से मार डालूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {i15:10} यरमियाह रब से शिकायत करता है {15:10} ऐ मेरी माँ, मुझ पर अफ़्सोस! अफ़्सोस कि तू ने मुझ जैसे शख़्स को जन्म दिया जिस के साथ पूरा मुल्क झगड़ता और लड़ता है। गो मैं ने न उधार दिया न लिया तो भी सब मुझ पर लानत करते हैं। {15:11} रब ने जवाब दिया, “यक़ीनन मैं तुझे मज़बूत करके अपना अच्छा मक़्सद पूरा करूँगा। यक़ीनन मैं होने दूँगा कि मुसीबत के वक़्त दुश्मन तुझ से मिन्नत करे। {15:12} क्यूँकि कोई उस लोहे को तोड़ नहीं सकेगा जो शिमाल से आएगा, हाँ लोहे और पीतल का वह सरिया तोड़ा नहीं जाएगा। {15:13} मैं तेरे ख़ज़ाने दुश्मन को मुफ़्त में दूँगा। तुझे तमाम गुनाहों का अज्र मिलेगा जब वह पूरे मुल्क में तेरी दौलत लूटने आएगा। {15:14} तब मैं तुझे दुश्मन के ज़रीए एक मुल्क में पहुँचा दूँगा जिस से तू नावाक़िफ़ है। क्यूँकि मेरे ग़ज़ब की भड़कती आग तुझे भस्म कर देगी।” {15:15} ऐ रब, तू सब कुछ जानता है। मुझे याद कर, मेरा ख़याल कर, ताक़्क़ुब करने वालों से मेरा इन्तिक़ाम ले! उन्हें यहाँ तक बर्दाश्त न कर कि आख़िरकार मेरा सफ़ाया हो जाए। इसे ध्यान में रख कि मेरी रुस्वाई तेरी ही ख़ातिर हो रही है। {15:16} ऐ रब, लश्करों के ख़ुदा, जब भी तेरा कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ तो मैं ने उसे हज़म किया, और मेरा दिल उस से ख़ुश-ओ-ख़ुर्रम हुआ। क्यूँकि मुझ पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है। {15:17} जब दीगर लोग रंगरलियों में अपने दिल बहलाते थे तो मैं कभी उन के साथ न बैठा, कभी उन की बातों से लुत्फ़अन्दोज़ न हुआ। नहीं, तेरा हाथ मुझ पर था, इस लिए मैं दूसरों से दूर ही बैठा रहा। क्यूँकि तू ने मेरे दिल को क़ौम पर क़हर से भर दिया था। {15:18} क्या वजह है कि मेरा दर्द कभी ख़त्म नहीं होता, कि मेरा ज़ख़्म लाइलाज है और कभी नहीं भरता? तू मेरे लिए फ़रेबदिह चश्मा बन गया है, ऐसी नदी जिस के पानी पर एतिमाद नहीं किया जा सकता। {15:19} रब जवाब में फ़रमाता है, “अगर तू मेरे पास वापस आए तो मैं तुझे वापस आने दूँगा, और तू दुबारा मेरे सामने हाज़िर हो सकेगा। और अगर तू फ़ुज़ूल बातें न करे बल्कि मेरे लाइक़ अल्फ़ाज़ बोले तो मेरा तर्जुमान होगा। लाज़िम है कि लोग तेरी तरफ़ रुजू करें, लेकिन ख़बरदार, कभी उन की तरफ़ रुजू न कर!” {15:20} रब फ़रमाता है, “मैं तुझे पीतल की मज़बूत दीवार बना दूँगा ताकि तू इस क़ौम का सामना कर सके। यह तुझ से लड़ेंगे लेकिन तुझ पर ग़ालिब नहीं आएँगे, क्यूँकि मैं तेरे साथ हूँ, मैं तेरी मदद करके तुझे बचाए रखूँगा। {15:21} मैं तुझे बेदीनों के हाथ से बचाऊँगा और फ़िद्या दे कर ज़ालिमों की गिरिफ़्त से छुड़ाऊँगा।” {i16:1} यरमियाह को शादी करने की इजाज़त नहीं {16:1} रब मुझ से हमकलाम हुआ, {16:2} “इस मक़ाम में न तेरी शादी हो, न तेरे बेटे-बेटियाँ पैदा हो जाएँ।” {16:3} क्यूँकि रब यहाँ पैदा होने वाले बेटे-बेटियों और उन के माँ-बाप के बारे में फ़रमाता है, {16:4} “वह मोहलक बीमारियों से मर कर खेतों में गोबर की तरह पड़े रहेंगे। न कोई उन पर मातम करेगा, न उन्हें दफ़नाएगा, क्यूँकि वह तलवार और काल से हलाक हो जाएंगे, और उन की लाशें परिन्दों और दरिन्दों की ख़ुराक बन जाएँगी।” {16:5} रब फ़रमाता है, “ऐसे घर में मत जाना जिस में कोई फ़ौत हो गया है। उस में न मातम करने के लिए, न अफ़्सोस करने के लिए दाख़िल होना। क्यूँकि अब से मैं इस क़ौम पर अपनी सलामती, मेहरबानी और रहम का इज़हार नहीं करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {16:6} “इस मुल्क के बाशिन्दे मर जाएंगे, ख़्वाह बड़े हों या छोटे। और न कोई उन्हें दफ़नाएगा, न मातम करेगा। कोई नहीं होगा जो ग़म के मारे अपनी जिल्द को काटे या अपने सर को मुंडवाए। {16:7} किसी का बाप या माँ भी इन्तिक़ाल कर जाए तो भी लोग मातम करने वाले घर में नहीं जाएंगे, न तसल्ली देने के लिए जनाज़े के खाने-पीने में शरीक होंगे। {16:8} ऐसे घर में भी दाख़िल न होना जहाँ लोग ज़ियाफ़त कर रहे हैं। उन के साथ खाने-पीने के लिए मत बैठना।” {16:9} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “तुम्हारे जीते जी, हाँ तुम्हारे देखते देखते मैं यहाँ ख़ुशी-ओ-शादमानी की आवाज़ें बन्द कर दूँगा। अब से दूल्हा दुल्हन की आवाज़ें ख़ामोश हो जाएँगी। {16:10} जब तू इस क़ौम को यह सब कुछ बताएगा तो लोग पूछेंगे, ‘रब इतनी बड़ी आफ़त हम पर लाने पर क्यूँ तुला हुआ है? हम से क्या जुर्म हुआ है? हम ने रब अपने ख़ुदा का क्या गुनाह किया है?’ {16:11} उन्हें जवाब दे, ‘वजह यह है कि तुम्हारे बापदादा ने मुझे तर्क कर दिया। वह मेरी शरीअत के ताबे न रहे बल्कि मुझे छोड़ कर अजनबी माबूदों के पीछे लग गए और उन ही की ख़िदमत और पूजा करने लगे। {16:12} लेकिन तुम अपने बापदादा की निस्बत कहीं ज़्यादा ग़लत काम करते हो। देखो, मेरी कोई नहीं सुनता बल्कि हर एक अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारता है। {16:13} इस लिए मैं तुम्हें इस मुल्क से निकाल कर एक ऐसे मुल्क में फैंक दूँगा जिस से न तुम और न तुम्हारे बापदादा वाक़िफ़ थे। वहाँ तुम दिन रात अजनबी माबूदों की ख़िदमत करोगे, क्यूँकि उस वक़्त मैं तुम पर रहम नहीं करूँगा’।” {i16:14} जिलावतनी से वापसी {16:14} लेकिन रब यह भी फ़रमाता है, “ऐसा वक़्त आने वाला है कि लोग क़सम खाते वक़्त नहीं कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इस्राईलियों को मिस्र से निकाल लाया।’ {16:15} इस के बजाए वह कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इस्राईलियों को शिमाली मुल्क और उन दीगर ममालिक से निकाल लाया जिन में उस ने उन्हें मुन्तशिर कर दिया था।’ क्यूँकि मैं उन्हें उस मुल्क में वापस लाऊँगा जो मैं ने उन के बापदादा को दिया था।” {i16:16} आने वाली सज़ा {16:16} लेकिन मौजूदा हाल के बारे में रब फ़रमाता है, “मैं बहुत से माहीगीर भेज दूँगा जो जाल डाल कर उन्हें पकड़ेंगे। इस के बाद मैं मुतअद्दिद शिकारी भेज दूँगा जो उन का ताक़्क़ुब करके उन्हें हर जगह पकड़ेंगे, ख़्वाह वह किसी पहाड़ या टीले पर छुप गए हों, ख़्वाह चटानों की किसी दराड़ में। {16:17} क्यूँकि उन की तमाम हरकतें मुझे नज़र आती हैं। मेरे सामने वह छुप नहीं सकते, और उन का क़ुसूर मेरे सामने पोशीदा नहीं है। {16:18} अब मैं उन्हें उन के गुनाहों की दुगनी सज़ा दूँगा, क्यूँकि उन्हों ने अपने बेजान बुतों और घिनौनी चीज़ों से मेरी मौरूसी ज़मीन को भर कर मेरे मुल्क की बेहुरमती की है।” {i16:19} यरमियाह का रब पर एतिमाद {16:19} ऐ रब, तू मेरी क़ुव्वत और मेरा क़िला है, मुसीबत के दिन मैं तुझ में पनाह लेता हूँ। दुनिया की इन्तिहा से अक़्वाम तेरे पास आ कर कहेंगी, “हमारे बापदादा को मीरास में झूट ही मिला, ऐसे बेकार बुत जो उन की मदद न कर सके। {16:20} इन्सान किस तरह अपने लिए ख़ुदा बना सकता है? उस के बुत तो ख़ुदा नहीं हैं।” {16:21} रब फ़रमाता है, “चुनाँचे इस बार मैं उन्हें सहीह पहचान अता करूँगा। वह मेरी क़ुव्वत और ताक़त को पहचान लेंगे, और वह जान लेंगे कि मेरा नाम रब है। {i17:1} यहूदाह का गुनाह और उस की सज़ा {17:1} ऐ यहूदाह के लोगो, तुम्हारा गुनाह तुम्हारी ज़िन्दगियों का अनमिट हिस्सा बन गया है। उसे हीरे की नोक रखने वाले लोहे के आले से तुम्हारे दिलों की तख़्तियों और तुम्हारी क़ुर्बानगाहों के सींगों पर कन्दा किया गया है। {17:2} न सिर्फ़ तुम बल्कि तुम्हारे बच्चे भी अपनी क़ुर्बानगाहों और असीरत देवी के खम्बों को याद करते हैं, ख़्वाह वह घने दरख़्तों के साय में या ऊँची जगहों पर क्यूँ न हों। {17:3} ऐ मेरे पहाड़ जो दीहात से घिरा हुआ है, तेरे पूरे मुल्क पर गुनाह का असर है, इस लिए मैं होने दूँगा कि सब कुछ लूट लिया जाएगा। तेरा माल, तेरे ख़ज़ाने और तेरी ऊँची जगहों की क़ुर्बानगाहें सब छीन ली जाएँगी। {17:4} अपने क़ुसूर के सबब से तुझे अपनी मौरूसी मिलकियत छोड़नी पड़ेगी, वह मिलकियत जो तुझे मेरी तरफ़ से मिली थी। मैं तुझे तेरे दुश्मनों का ग़ुलाम बना दूँगा, और तू एक नामालूम मुल्क में बसेगा। क्यूँकि तुम लोगों ने मुझे तैश दिलाया है, और अब तुम पर मेरा ग़ज़ब कभी न बुझने वाली आग की तरह भड़कता रहेगा।” {i17:5} मुख़्तलिफ़ फ़रमान {17:5} रब फ़रमाता है, “उस पर लानत जिस का दिल रब से दूर हो कर सिर्फ़ इन्सान और उसी की ताक़त पर भरोसा रखता है। {17:6} वह रेगिस्तान में झाड़ी की मानिन्द होगा, उसे किसी भी अच्छी चीज़ का तजरिबा नहीं होगा बल्कि वह बयाबान के ऐसे पथरीले और कल्लर वाले इलाक़ों में बसेगा जहाँ कोई और नहीं रहता। {17:7} लेकिन मुबारक है वह जो रब पर भरोसा रखता है, जिस का एतिमाद उसी पर है। {17:8} वह पानी के किनारे पर लगे उस दरख़्त की मानिन्द है जिस की जड़ें नहर तक फैली हुई हैं। झुलसाने वाली गर्मी भी आए तो उसे डर नहीं, बल्कि उस के पत्ते हरे-भरे रहते हैं। काल भी पड़े तो वह परेशान नहीं होता बल्कि वक़्त पर फल लाता रहता है। {17:9} दिल हद से ज़्यादा फ़रेबदिह है, और उस का इलाज नामुमकिन है। कौन उस का सहीह इल्म रखता है? {17:10} मैं, रब ही दिल की तफ़्तीश करता हूँ। मैं हर एक की बातिनी हालत जाँच कर उसे उस के चाल-चलन और अमल का मुनासिब अज्र देता हूँ। {17:11} जिस शख़्स ने ग़लत तरीक़े से दौलत जमा की है वह उस तीतर की मानिन्द है जो किसी दूसरे के अंडों पर बैठ जाता है। क्यूँकि ज़िन्दगी के उरूज पर उसे सब कुछ छोड़ना पड़ेगा, और आख़िरकार उस की हमाक़त सब पर ज़ाहिर हो जाएगी।” {17:12} हमारा मक़्दिस अल्लाह का जलाली तख़्त है जो अज़ल से अज़ीम है। {17:13} ऐ रब, तू ही इस्राईल की उम्मीद है। तुझे तर्क करने वाले सब शर्मिन्दा हो जाएंगे। तुझ से दूर होने वाले ख़ाक में मिलाए जाएंगे, क्यूँकि उन्हों ने रब को छोड़ दिया है जो ज़िन्दगी के पानी का सरचश्मा है। {i17:14} मदद के लिए यरमियाह की दरख़्वास्त {17:14} ऐ रब, तू ही मुझे शिफ़ा दे तो मुझे शिफ़ा मिलेगी। तू ही मुझे बचा तो मैं बचूँगा। क्यूँकि तू ही मेरा फ़ख़र है। {17:15} लोग मुझ से पूछते रहते हैं, “रब का जो कलाम तू ने पेश किया वह कहाँ है? उसे पूरा होने दे!” {17:16} ऐ अल्लाह, तू ने मुझे अपनी क़ौम का गल्लाबान बनाया है, और मैं ने यह ज़िम्मादारी कभी नहीं छोड़ी। मैं ने कभी ख़्वाहिश नहीं रखी कि मुसीबत का दिन आए। तू यह सब कुछ जानता है, जो भी बात मेरे मुँह से निकली है वह तेरे सामने है। {17:17} अब मेरे लिए दह्शत का बाइस न बन! मुसीबत के दिन मैं तुझ में ही पनाह लेता हूँ। {17:18} मेरा ताक़्क़ुब करने वाले शर्मिन्दा हो जाएँ, लेकिन मेरी रुस्वाई न हो। उन पर दह्शत छा जाए, लेकिन मैं इस से बचा रहूँ। उन पर मुसीबत का दिन नाज़िल कर, उन को दो बार कुचल कर ख़ाक में मिला दे। {i17:19} सबत का दिन मनाओ {17:19} रब मुझ से हमकलाम हुआ, “शहर के अवामी दरवाज़े में खड़ा हो जा, जिसे यहूदाह के बादशाह इस्तेमाल करते हैं जब शहर में आते और उस से निकलते हैं। इसी तरह यरूशलम के दीगर दरवाज़ों में भी खड़ा हो जा। {17:20} वहाँ लोगों से कह, ‘ऐ दरवाज़ों में से गुज़रने वालो, रब का कलाम सुनो! ऐ यहूदाह के बादशाहो और यहूदाह और यरूशलम के तमाम बाशिन्दो, मेरी तरफ़ कान लगाओ! {17:21} रब फ़रमाता है कि अपनी जान ख़तरे में न डालो बल्कि ध्यान दो कि तुम सबत के दिन माल-ओ-अस्बाब शहर में न लाओ और उसे उठा कर शहर के दरवाज़ों में दाख़िल न हो। {17:22} न सबत के दिन बोझ उठा कर अपने घर से कहीं और ले जाओ, न कोई और काम करो, बल्कि उसे इस तरह मनाना कि मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस हो। मैं ने तुम्हारे बापदादा को यह करने का हुक्म दिया था, {17:23} लेकिन उन्हों ने मेरी न सुनी, न तवज्जुह दी बल्कि अपने मौक़िफ़ पर अड़े रहे और न मेरी सुनी, न मेरी तर्बियत क़बूल की। {17:24} रब फ़रमाता है कि अगर तुम वाक़ई मेरी सुनो और सबत के दिन अपना माल-ओ-अस्बाब इस शहर में न लाओ बल्कि आराम करने से यह दिन मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस मानो {17:25} तो फिर आइन्दा भी दाऊद की नस्ल के बादशाह और सरदार इस शहर के दरवाज़ों में से गुज़रेंगे। तब वह घोड़ों और रथों पर सवार हो कर अपने अफ़्सरों और यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों के साथ शहर में आते जाते रहेंगे। अगर तुम सबत को मानो तो यह शहर हमेशा तक आबाद रहेगा। {17:26} फिर पूरे मुल्क से लोग यहाँ आएँगे। यहूदाह के शहरों और यरूशलम के गिर्द-ओ-नवाह के दीहात से, बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े से, मग़रिब के नशेबी पहाड़ी इलाक़े से, पहाड़ी इलाक़े से और दश्त-ए-नजब से सब अपनी क़ुर्बानियाँ ला कर रब के घर में पेश करेंगे। उन की तमाम भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ, ज़बह, ग़ल्ला, बख़ूर और सलामती की क़ुर्बानियाँ रब के घर में चढ़ाई जाएँगी। {17:27} लेकिन अगर तुम मेरी न सुनो और सबत का दिन मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस न मानो तो फिर तुम्हें सख़्त सज़ा मिलेगी। अगर तुम सबत के दिन अपना माल-ओ-अस्बाब शहर में लाओ तो मैं इन ही दरवाज़ों में एक न बुझने वाली आग लगा दूँगा जो जलती जलती यरूशलम के महलों को भस्म कर देगी’।” {i18:1} अल्लाह अज़ीम कुम्हार है {18:1} रब यरमियाह से हमकलाम हुआ, {18:2} “उठ और कुम्हार के घर में जा! वहाँ मैं तुझ से हमकलाम हूँगा।” {18:3} चुनाँचे मैं कुम्हार के घर में पहुँच गया। उस वक़्त वह चाक पर काम कर रहा था। {18:4} लेकिन मिट्टी का जो बर्तन वह अपने हाथों से तश्कील दे रहा था वह ख़राब हो गया। यह देख कर कुम्हार ने उसी मिट्टी से नया बर्तन बना दिया जो उसे ज़्यादा पसन्द था। {18:5} तब रब मुझ से हमकलाम हुआ, {18:6} “ऐ इस्राईल, क्या मैं तुम्हारे साथ वैसा सुलूक नहीं कर सकता जैसा कुम्हार अपने बर्तन से करता है? जिस तरह मिट्टी कुम्हार के हाथ में तश्कील पाती है उसी तरह तुम मेरे हाथ में तश्कील पाते हो।” यह रब का फ़रमान है। {18:7} “कभी मैं एलान करता हूँ कि किसी क़ौम या सल्तनत को जड़ से उखाड़ दूँगा, उसे गिरा कर तबाह कर दूँगा। {18:8} लेकिन कई बार यह क़ौम अपनी ग़लत राह को तर्क कर देती है। इस सूरत में मैं पछता कर उस पर वह आफ़त नहीं लाता जो मैं ने लाने को कहा था। {18:9} कभी मैं किसी क़ौम या सल्तनत को पनीरी की तरह लगाने और तामीर करने का एलान भी करता हूँ। {18:10} लेकिन अफ़्सोस, कई दफ़ा यह क़ौम मेरी नहीं सुनती बल्कि ऐसा काम करने लगती है जो मुझे नापसन्द है। इस सूरत में मैं पछता कर उस पर वह मेहरबानी नहीं करता जिस का एलान मैं ने किया था। {18:11} अब यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों से मुख़ातिब हो कर कह, ‘रब फ़रमाता है कि मैं तुम पर आफ़त लाने की तय्यारियाँ कर रहा हूँ, मैं ने तुम्हारे ख़िलाफ़ मन्सूबा बांध लिया है। चुनाँचे हर एक अपनी ग़लत राह से हट कर वापस आए, हर एक अपना चाल-चलन और अपना रवय्या दुरुस्त करे।’ {18:12} लेकिन अफ़्सोस, यह एतिराज़ करेंगे, ‘दफ़ा करो! हम अपने ही मन्सूबे जारी रखेंगे। हर एक अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ही ज़िन्दगी गुज़ारेगा’।” {i18:13} क़ौम रब को भूल गई है {18:13} इस लिए रब फ़रमाता है, “दीगर अक़्वाम से दरयाफ़्त करो कि उन में कभी ऐसी बात सुनने में आई है। कुंवारी इस्राईल से निहायत घिनौना जुर्म हुआ है! {18:14} क्या लुबनान की पथरीली चोटियों की बर्फ़ कभी पिघल कर ख़त्म हो जाती है? क्या दूरदराज़ चश्मों से बहने वाला बर्फ़ीला पानी कभी थम जाता है? {18:15} लेकिन मेरी क़ौम मुझे भूल गई है। यह लोग बातिल बुतों के सामने बख़ूर जलाते हैं, उन चीज़ों के सामने जिन के बाइस वह ठोकर खा कर क़दीम राहों से हट गए हैं और अब कच्चे रास्तों पर चल रहे हैं। {18:16} इस लिए उन का मुल्क वीरान हो जाएगा, एक ऐसी जगह जिसे दूसरे अपने मज़ाक़ का निशाना बनाएँगे। जो भी गुज़रे उस के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, वह अफ़्सोस से अपना सर हिलाएगा। {18:17} दुश्मन आएगा तो मैं अपनी क़ौम को उस के आगे आगे मुन्तशिर करूँगा। जिस तरह गर्द मशरिक़ी हवा के तेज़ झोंकों से उड़ कर बिखर जाती है उसी तरह वह तित्तर-बित्तर हो जाएंगे। जब आफ़त उन पर नाज़िल होगी तो मैं उन की तरफ़ रुजू नहीं करूँगा बल्कि अपना मुँह उन से फेर लूँगा।” यरमियाह के ख़िलाफ़ साज़िश {18:18} यह सुन कर लोग आपस में कहने लगे, “आओ, हम यरमियाह के ख़िलाफ़ मन्सूबे बांधें, क्यूँकि उस की बातें सहीह नहीं हैं। न इमाम शरीअत की हिदायत से, न दानिशमन्द अच्छे मश्वरों से, और न नबी अल्लाह के कलाम से महरूम हो जाएगा। आओ, हम ज़बानी उस पर हम्ला करें और उस की बातों पर ध्यान न दें, ख़्वाह वह कुछ भी क्यूँ न कहे।” {18:19} ऐ रब, मुझ पर तवज्जुह दे और उस पर ग़ौर कर जो मेरे मुख़ालिफ़ कह रहे हैं। {18:20} क्या इन्सान को नेक काम के बदले में बुरा काम करना चाहिए? क्यूँकि उन्हों ने मुझे फंसाने के लिए गढ़ा खोद कर तय्यार कर रखा है। याद कर कि मैं ने तेरे हुज़ूर खड़े हो कर उन के लिए शफ़ाअत की ताकि तेरा ग़ज़ब उन पर नाज़िल न हो। {18:21} अब होने दे कि उन के बच्चे भूके मर जाएँ और वह ख़ुद तलवार की ज़द में आएँ। उन की बीवियाँ बेऔलाद और शौहरों से महरूम हो जाएँ। उन के आदमियों को मौत के घाट उतारा जाए, उन के नौजवान जंग में लड़ते लड़ते हलाक हो जाएँ। {18:22} अचानक उन पर जंगी दस्ते ला ताकि उन के घरों से चीख़ों की आवाज़ें बुलन्द हों। क्यूँकि उन्हों ने मुझे पकड़ने के लिए गढ़ा खोदा है, उन्हों ने मेरे पाँओ को फंसाने के लिए मेरे रास्ते में फंदे छुपा रखे हैं। {18:23} ऐ रब, तू उन की मुझे क़त्ल करने की तमाम साज़िशें जानता है। उन का क़ुसूर मुआफ़ न कर, और उन के गुनाहों को न मिटा बल्कि उन्हें हमेशा याद कर। होने दे कि वह ठोकर खा कर तेरे सामने गिर जाएँ। जब तेरा ग़ज़ब नाज़िल होगा तो उन से भी निपट ले। {i19:1} क़ौम मिट्टी के टूटे हुए बर्तन की मानिन्द होगी {19:1} रब ने हुक्म दिया, “कुम्हार के पास जा कर मिट्टी का बर्तन ख़रीद ले। फिर अवाम के कुछ बुज़ुर्गों और चन्द एक बुज़ुर्ग इमामों को अपने साथ ले कर {19:2} शहर से निकल जा। वादी-ए-बिन-हिन्नूम में चला जा जो शहर के दरवाज़े बनाम ‘ठीकरे का दरवाज़ा’ के सामने है। वहाँ वह कलाम सुना जो मैं तुझे सुनाने को कहूँगा। {19:3} उन्हें बता, ‘ऐ यहूदाह के बादशाहो और यरूशलम के बाशिन्दो, रब का कलाम सुनो! रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं इस मक़ाम पर ऐसी आफ़त नाज़िल करूँगा कि जिसे भी इस की ख़बर मिलेगी उस के कान बजेंगे। {19:4} क्यूँकि उन्हों ने मुझे तर्क करके इस मक़ाम को अजनबी माबूदों के हवाले कर दिया है। जिन बुतों से न उन के बापदादा और न यहूदाह के बादशाह कभी वाक़िफ़ थे उन के हुज़ूर उन्हों ने क़ुर्बानियाँ पेश कीं। नीज़, उन्हों ने इस जगह को बेक़ुसूरों के ख़ून से भर दिया है। {19:5} उन्हों ने ऊँची जगहों पर बाल देवता के लिए क़ुर्बानगाहें तामीर कीं ताकि अपने बेटों को उन पर जला कर उसे पेश करें। मैं ने यह करने का कभी हुक्म नहीं दिया था। न मैं ने कभी इस का ज़िक्र किया, न कभी मेरे ज़हन में इस का ख़याल तक आया। {19:6} चुनाँचे ख़बरदार! रब फ़रमाता है कि ऐसा वक़्त आने वाला है जब यह वादी “तूफ़त” या “बिन-हिन्नूम” नहीं कहलाएगी बल्कि “वादी-ए-क़त्ल-ओ-ग़ारत।” {19:7} इस जगह मैं यहूदाह और यरूशलम के मन्सूबे ख़ाक में मिला दूँगा। मैं होने दूँगा कि उन के दुश्मन उन्हें मौत के घाट उतारें, कि जो उन्हें जान से मारना चाहें वह इस में कामयाब हो जाएँ। तब मैं उन की लाशों को परिन्दों और दरिन्दों को खिला दूँगा। {19:8} मैं इस शहर को हौलनाक तरीक़े से तबाह करूँगा। तब दूसरे उसे अपने मज़ाक़ का निशाना बनाएँगे। जो भी गुज़रे उस के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। उस की तबाहशुदा हालत देख कर वह “तौबा तौबा” कहेगा। {19:9} जब उन का जानी दुश्मन शहर का मुहासरा करेगा तो इतना सख़्त काल पड़ेगा कि बाशिन्दे अपने बच्चों और एक दूसरे को खा जाएंगे।’ {19:10} फिर साथ वालों की मौजूदगी में मिट्टी के बर्तन को ज़मीन पर पटख़ दे। {19:11} साथ साथ उन्हें बता, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है कि जिस तरह मिट्टी का बर्तन पाश पाश हो गया है और उस की मरम्मत नामुमकिन है उसी तरह मैं इस क़ौम और शहर को भी पाश पाश कर दूँगा। उस वक़्त लाशों को तूफ़त में दफ़नाया जाएगा, क्यूँकि कहीं और जगह नहीं मिलेगी। {19:12} इस शहर और इस के बाशिन्दों के साथ मैं यही सुलूक करूँगा। मैं इस शहर को तूफ़त की मानिन्द बना दूँगा। यह रब का फ़रमान है। {19:13} यरूशलम के घर यहूदाह के शाही महलों समेत तूफ़त की तरह नापाक हो जाएंगे। हाँ, वह तमाम घर नापाक हो जाएंगे जिन की छतों पर तमाम आसमानी लश्कर के लिए बख़ूर जलाया जाता और अजनबी माबूदों को मै की नज़रें पेश की जाती थीं’।” {19:14} इस के बाद यरमियाह वादी-ए-तूफ़त से वापस आया जहाँ रब ने उसे नबुव्वत करने के लिए भेजा था। फिर वह रब के घर के सहन में खड़े हो कर तमाम लोगों से मुख़ातिब हुआ, {19:15} “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि सुनो! मैं इस शहर और यहूदाह के दीगर शहरों पर वह तमाम मुसीबत लाने को हूँ जिस का एलान मैं ने किया है। क्यूँकि तुम अड़ गए हो और मेरी बातें सुनने के लिए तय्यार ही नहीं।” {i20:1} यरमियाह फ़श्हूर इमाम से टकरा जाता है {20:1} उस वक़्त एक इमाम रब के घर में था जिस का नाम फ़श्हूर बिन इम्मेर था। वह रब के घर का आला अफ़्सर था। जब यरमियाह की यह पेशगोइयाँ उस के कानों तक पहुँच गईं {20:2} तो उस ने यरमियाह नबी की पिटाई करवा कर उस के पाँओ काठ में ठोंक दिए। यह काठ रब के घर से मुल्हिक़ शहर के ऊपर वाले दरवाज़े बनाम बिनयमीन में था। {20:3} अगले दिन फ़श्हूर ने उसे आज़ाद कर दिया। तब यरमियाह ने उस से कहा, “रब ने आप का एक नया नाम रखा है। अब से आप का नाम फ़श्हूर नहीं है बल्कि ‘चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत।’ {20:4} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘मैं होने दूँगा कि तू अपने लिए और अपने तमाम दोस्तों के लिए दह्शत की अलामत बनेगा। क्यूँकि तू अपनी आँखों से अपने दोस्तों की क़त्ल-ओ-ग़ारत देखेगा। मैं यहूदाह के तमाम बाशिन्दों को बाबल के बादशाह के क़ब्ज़े में कर दूँगा जो बाज़ को मुल्क-ए-बाबल में ले जाएगा और बाज़ को मौत के घाट उतार देगा। {20:5} मैं इस शहर की सारी दौलत दुश्मन के हवाले कर दूँगा, और वह इस की तमाम पैदावार, क़ीमती चीज़ें और शाही ख़ज़ाने लूट कर मुल्क-ए-बाबल ले जाएगा। {20:6} ऐ फ़श्हूर, तू भी अपने घर वालों समेत मुल्क-ए-बाबल में जिलावतन होगा। वहाँ तू मर कर दफ़नाया जाएगा। और न सिर्फ़ तू बल्कि तेरे वह सारे दोस्त भी जिन्हें तू ने झूटी पेशगोइयाँ सुनाई हैं’।” {i20:7} यरमियाह की रब से शिकायत {20:7} ऐ रब, तू ने मुझे मनवाया, और मैं मान गया। तू मुझे अपने क़ाबू में ला कर मुझ पर ग़ालिब आया। अब मैं पूरा दिन मज़ाक़ का निशाना बना रहता हूँ। हर एक मेरी हंसी उड़ाता रहता है। {20:8} क्यूँकि जब भी मैं अपना मुँह खोलता हूँ तो मुझे चिल्ला कर ‘ज़ुल्म-ओ-तबाही’ का नारा लगाना पड़ता है। चुनाँचे मैं रब के कलाम के बाइस पूरा दिन गालियों और मज़ाक़ का निशाना बना रहता हूँ। {20:9} लेकिन अगर मैं कहूँ, “आइन्दा मैं न रब का ज़िक्र करूँगा, न उस का नाम ले कर बोलूँगा” तो फिर उस का कलाम आग की तरह मेरे दिल में भड़कने लगता है। और यह आग मेरी हड्डियों में बन्द रहती और कभी नहीं निकलती। मैं इसे बर्दाश्त करते करते थक गया हूँ, यह मेरे बस की बात नहीं रही। {20:10} मुतअद्दिद लोगों की सरगोशियाँ मेरे कानों तक पहुँचती हैं। वह कहते हैं, “चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत? यह क्या कह रहा है? उस की रपट लिखवाओ! आओ, हम उस की रिपोर्ट करें।” मेरे तमाम नाम-निहाद दोस्त इस इन्तिज़ार में हैं कि मैं फिसल जाऊँ। वह कहते हैं, “शायद वह धोका खा कर फंस जाए और हम उस पर ग़ालिब आ कर उस से इन्तिक़ाम ले सकें।” {20:11} लेकिन रब ज़बरदस्त सूरमे की तरह मेरे साथ है, इस लिए मेरा ताक़्क़ुब करने वाले मुझ पर ग़ालिब नहीं आएँगे बल्कि ख़ुद ठोकर खा कर गिर जाएंगे। उन के मुँह काले हो जाएंगे, क्यूँकि वह नाकाम हो जाएंगे। उन की रुस्वाई हमेशा ही याद रहेगी और कभी नहीं मिटेगी। {20:12} ऐ रब्ब-उल-अफ़्वाज, तू रास्तबाज़ का मुआइना करके दिल और ज़हन को परखता है। अब बख़्श दे कि मैं अपनी आँखों से वह इन्तिक़ाम देखूँ जो तू मेरे मुख़ालिफ़ों से लेगा। क्यूँकि मैं ने अपना मुआमला तेरे ही सपुर्द कर दिया है। {20:13} रब की मद्हसराई करो! रब की तम्जीद करो! क्यूँकि उस ने ज़रूरतमन्द की जान को शरीरों के हाथ से बचा लिया है। {i20:14} मैं क्यूँ पैदा हुआ? {20:14} उस दिन पर लानत जब मैं पैदा हुआ! वह दिन मुबारक न हो जब मेरी माँ ने मुझे जन्म दिया। {20:15} उस आदमी पर लानत जिस ने मेरे बाप को बड़ी ख़ुशी दिला कर इत्तिला दी कि तेरे बेटा पैदा हुआ है! {20:16} वह उन शहरों की मानिन्द हो जिन को रब ने बेरहमी से ख़ाक में मिला दिया। अल्लाह करे कि सुब्ह के वक़्त उसे चीख़ें सुनाई दें और दोपहर के वक़्त जंग के नारे। {20:17} क्यूँकि उसे मुझे उसी वक़्त मार डालना चाहिए था जब मैं अभी माँ के पेट में था। फिर मेरी माँ मेरी क़ब्र बन जाती, उस का पाँओ हमेशा तक भारी रहता। {20:18} मैं क्यूँ माँ के पेट में से निकला? क्या सिर्फ़ इस लिए कि मुसीबत और ग़म देखूँ और ज़िन्दगी के इख़तिताम तक रुस्वाई की ज़िन्दगी गुज़ारूँ? {i21:1} बाबल की फ़ौज यरूशलम पर फ़त्ह पाएगी {21:1} एक दिन सिदक़ियाह बादशाह ने फ़श्हूर बिन मल्कियाह और मासियाह के बेटे सफ़नियाह इमाम को यरमियाह के पास भेज दिया। उस के पास पहुँच कर उन्हों ने कहा, {21:2} “बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र हम पर हम्ला कर रहा है। शायद जिस तरह रब ने माज़ी में कई बार किया इस दफ़ा भी हमारी मदद करके नबूकदनज़्ज़र को मोजिज़ाना तौर पर यरूशलम को छोड़ने पर मज्बूर करे। रब से इस के बारे में दरयाफ़्त करें।” तब रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {21:3} और उस ने दोनों आदमियों से कहा, “सिदक़ियाह को बताओ कि {21:4} रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘बेशक शहर से निकल कर बाबल की मुहासरा करने वाली फ़ौज और उस के बादशाह से लड़ो। लेकिन मैं तुम्हें पीछे धकेल कर शहर में पनाह लेने पर मज्बूर करूँगा। वहाँ उस के बीच में ही तुम अपने हथियारों समेत जमा हो जाओगे। {21:5} मैं ख़ुद अपना हाथ बढ़ा कर बड़ी क़ुदरत से तुम्हारे साथ लड़ूँगा, मैं अपने ग़ुस्से और तैश का पूरा इज़हार करूँगा, मेरा सख़्त ग़ज़ब तुम पर नाज़िल होगा। {21:6} शहर के बाशिन्दे मेरे हाथ से हलाक हो जाएंगे, ख़्वाह इन्सान हों या हैवान। मोहलक वबा उन्हें मौत के घाट उतार देगी।’ {21:7} रब फ़रमाता है, ‘इस के बाद मैं यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह को उस के अफ़्सरों और बाक़ी बाशिन्दों समेत बाबल के बादशाह नबूकदनज़्ज़र के हवाले कर दूँगा। वबा, तलवार और काल से बचने वाले सब अपने जानी दुश्मन के क़ाबू में आ जाएंगे। तब नबूकदनज़्ज़र बेरहमी से उन्हें तलवार से मार देगा। न उसे उन पर तरस आएगा, न वह हमदर्दी का इज़हार करेगा।’ {21:8} इस क़ौम को बता कि रब फ़रमाता है, ‘मैं तुम्हें अपनी जान को बचाने का मौक़ा फ़राहम करता हूँ। इस से फ़ाइदा उठाओ, वर्ना तुम मरोगे। {21:9} अगर तुम तलवार, काल या वबा से मरना चाहो तो इस शहर में रहो। लेकिन अगर तुम अपनी जान को बचाना चाहो तो शहर से निकल कर अपने आप को बाबल की मुहासरा करने वाली फ़ौज के हवाले करो। जो कोई यह करे उस की जान छूट जाएगी।’ {21:10} रब फ़रमाता है, ‘मैं ने अटल फ़ैसला किया है कि इस शहर पर मेहरबानी नहीं करूँगा बल्कि इसे नुक़्सान पहुँचाऊँगा। इसे शाह-ए-बाबल के हवाले कर दिया जाएगा जो इसे आग लगा कर तबाह करेगा।’ {21:11} यहूदाह के शाही ख़ानदान से कह, ‘रब का कलाम सुनो! {21:12} ऐ दाऊद के घराने, रब फ़रमाता है कि हर सुब्ह लोगों का इन्साफ़ करो। जिसे लूट लिया गया हो उसे ज़ालिम के हाथ से बचाओ! ऐसा न हो कि मेरा ग़ज़ब तुम्हारी शरीर हरकतों की वजह से तुम पर नाज़िल हो कर आग की तरह भड़क उठे और कोई न हो जो उसे बुझा सके। {21:13} रब फ़रमाता है कि ऐ यरूशलम, तू वादी के ऊपर ऊँची चटान पर रह कर फ़ख़र करती है कि कौन हम पर हम्ला करेगा, कौन हमारे घरों में घुस सकता है? लेकिन अब मैं ख़ुद तुझ से निपट लूँगा। {21:14} रब फ़रमाता है कि मैं तुम्हारी हरकतों का पूरा अज्र दूँगा। मैं यरूशलम के जंगल में ऐसी आग लगा दूँगा जो इर्दगिर्द सब कुछ भस्म कर देगी’।” {i22:1} शाही महल नज़र-ए-आतिश हो जाएगा {22:1} रब ने फ़रमाया, “शाह-ए-यहूदाह के महल के पास जा कर मेरा यह कलाम सुना, {22:2} ‘ऐ यहूदाह के बादशाह, रब का फ़रमान सुन! ऐ तू जो दाऊद के तख़्त पर बैठा है, अपने मुलाज़िमों और महल के दरवाज़ों में आने वाले लोगों समेत मेरी बात पर ग़ौर कर! {22:3} रब फ़रमाता है कि इन्साफ़ और रास्ती क़ाइम रखो। जिसे लूट लिया गया है उसे ज़ालिम के हाथ से छुड़ाओ। परदेसी, यतीम और बेवा को मत दबाना, न उन से ज़ियादती करना, और इस जगह बेक़ुसूर लोगों की ख़ूँरेज़ी मत करना। {22:4} अगर तुम एहतियात से इस पर अमल करो तो आइन्दा भी दाऊद की नस्ल के बादशाह अपने अफ़्सरों और रिआया के साथ रथों और घोड़ों पर सवार हो कर इस महल में दाख़िल होंगे। {22:5} लेकिन अगर तुम मेरी इन बातों की न सुनो तो मेरे नाम की क़सम! यह महल मल्बे का ढेर बन जाएगा। यह रब का फ़रमान है। {22:6} क्यूँकि रब शाह-ए-यहूदाह के महल के बारे में फ़रमाता है कि तू जिलिआद जैसा ख़ुशगवार और लुबनान की चोटी जैसा ख़ूबसूरत था। लेकिन अब मैं तुझे बयाबान में बदल दूँगा, तू ग़ैरआबाद शहर की मानिन्द हो जाएगा। {22:7} मैं आदमियों को तुझे तबाह करने के लिए मख़्सूस करके हर एक को हथियार से लेस करूँगा, और वह देवदार के तेरे उम्दा शहतीरों को काट कर आग में झोंक देंगे। {22:8} तब मुतअद्दिद क़ौमों के अफ़राद यहाँ से गुज़र कर पूछेंगे कि रब ने इस जैसे बड़े शहर के साथ ऐसा सुलूक क्यूँ किया? {22:9} उन्हें जवाब दिया जाएगा, वजह यह है कि इन्हों ने रब अपने ख़ुदा का अह्द तर्क करके अजनबी माबूदों की पूजा और ख़िदमत की है’।” {i22:10} यहूआख़ज़ बादशाह वापस नहीं आएगा {22:10} इस लिए गिर्या-ओ-ज़ारी न करो कि यूसियाह बादशाह कूच कर गया है बल्कि उस पर मातम करो जिसे जिलावतन किया गया है, क्यूँकि वह कभी वापस नहीं आएगा, कभी अपना वतन दुबारा नहीं देखेगा। {22:11} क्यूँकि रब यूसियाह के बेटे और जानशीन सल्लूम यानी यहूआख़ज़ के बारे में फ़रमाता है, “यहूआख़ज़ यहाँ से चला गया है और कभी वापस नहीं आएगा। {22:12} जहाँ उसे गिरिफ़्तार करके पहुँचाया गया है वहीं वह वफ़ात पाएगा। वह यह मुल्क दुबारा कभी नहीं देखेगा। {i22:13} यहूयक़ीम पर इल्ज़ाम {22:13} यहूयक़ीम बादशाह पर अफ़्सोस जो नाजाइज़ तरीक़े से अपना घर तामीर कर रहा है, जो नाइन्साफ़ी से उस की दूसरी मन्ज़िल बना रहा है। क्यूँकि वह अपने हमवतनों को मुफ़्त में काम करने पर मज्बूर कर रहा है और उन्हें उन की मेहनत का मुआवज़ा नहीं दे रहा। {22:14} वह कहता है, ‘मैं अपने लिए कुशादा महल बनवा लूँगा जिस की दूसरी मन्ज़िल पर बड़े बड़े कमरे होंगे। मैं घर में बड़ी खिड़कियाँ बनवा कर दीवारों को देवदार की लकड़ी से ढाँप दूँगा। इस के बाद मैं उसे सुर्ख़ रंग से आरास्ता करूँगा।’ {22:15} क्या देवदार की शानदार इमारतें बनवाने से यह साबित होता है कि तू बादशाह है? हरगिज़ नहीं! तेरे बाप को भी खाने-पीने की हर चीज़ मुयस्सर थी, लेकिन उस ने इस का ख़याल किया कि इन्साफ़ और रास्ती क़ाइम रहे। नतीजे में उसे बरकत मिली। {22:16} उस ने तवज्जुह दी कि ग़रीबों और ज़रूरतमन्दों का हक़ मारा न जाए, इसी लिए उसे कामयाबी हासिल हुई।” रब फ़रमाता है, “जो इसी तरह ज़िन्दगी गुज़ारे वही मुझे सहीह तौर पर जानता है। {22:17} लेकिन तू फ़र्क़ है। तेरी आँखें और दिल नाजाइज़ नफ़ा कमाने पर तुले रहते हैं। न तू बेक़ुसूर को क़त्ल करने से, न ज़ुल्म करने या जबरन कुछ लेने से झिजकता है।” {22:18} चुनाँचे रब यहूदाह के बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह के बारे में फ़रमाता है, “लोग उस पर मातम नहीं करेंगे कि ‘हाय मेरे भाई, हाए मेरी बहन,’ न वह रो कर कहेंगे, ‘हाय, मेरे आक़ा! हाय, उस की शान जाती रही है।’ {22:19} इस के बजाए उसे गधे की तरह दफ़नाया जाएगा। लोग उसे घसीट कर बाहर यरूशलम के दरवाज़ों से कहीं दूर फैंक देंगे। {i22:20} यहूयाकीन बादशाह को दुश्मन के हवाले किया जाएगा {22:20} ऐ यरूशलम, लुबनान पर चढ़ कर ज़ार-ओ-क़तार रो! बसन की बुलन्दियों पर जा कर चीख़ें मार! अबारीम के पहाड़ों की चोटियों पर आह-ओ-ज़ारी कर! क्यूँकि तेरे तमाम आशिक़ पाश पाश हो गए हैं। {22:21} मैं ने तुझे उस वक़्त आगाह किया था जब तू सुकून से ज़िन्दगी गुज़ार रही थी, लेकिन तू ने कहा, ‘मैं नहीं सुनूँगी।’ तेरी जवानी से ही तेरा यही रवय्या रहा। उस वक़्त से ले कर आज तक तू ने मेरी नहीं सुनी। {22:22} तेरे तमाम गल्लाबानों को आँधी उड़ा ले जाएगी, और तेरे आशिक़ जिलावतन हो जाएंगे। तब तू अपनी बुरी हरकतों के बाइस शर्मिन्दा हो जाएगी, क्यूँकि तेरी ख़ूब रुस्वाई हो जाएगी। {22:23} बेशक इस वक़्त तू लुबनान में रहती है और तेरा बसेरा देवदार के दरख़्तों में है। लेकिन जल्द ही तू आहें भर भर कर दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला हो जाएगी, तू जन्म देने वाली औरत की तरह पेच-ओ-ताब खाएगी।” {22:24} रब फ़रमाता है, “ऐ यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम, मेरी हयात की क़सम! ख़्वाह तू मेरे दहने हाथ की मुहरदार अंगूठी क्यूँ न होता तो भी मैं तुझे उतार कर फैंक देता। {22:25} मैं तुझे उस जानी दुश्मन के हवाले करूँगा जिस से तू डरता है यानी बाबल के बादशाह नबूकदनज़्ज़र और उस की क़ौम के हवाले। {22:26} मैं तुझे तेरी माँ समेत एक अजनबी मुल्क में फैंक दूँगा। जहाँ तुम पैदा नहीं हुए वहीं वफ़ात पाओगे। {22:27} तुम वतन में वापस आने के शदीद आरज़ूमन्द होगे लेकिन उस में कभी नहीं लौटोगे।” {22:28} लोग एतिराज़ करते हैं, “क्या यह आदमी यहूयाकीन वाक़ई ऐसा हक़ीर और टूटा-फूटा बर्तन है जो किसी को भी पसन्द नहीं आता? उसे अपने बच्चों समेत क्यूँ ज़ोर से निकाल कर किसी नामालूम मुल्क में फैंक दिया जाएगा?” {22:29} ऐ मुल्क, ऐ मुल्क, ऐ मुल्क! रब का पैग़ाम सुन! {22:30} रब फ़रमाता है, “रजिस्टर में दर्ज करो कि यह आदमी बेऔलाद है, कि यह उम्र भर नाकाम रहेगा। क्यूँकि उस के बच्चों में से कोई दाऊद के तख़्त पर बैठ कर यहूदाह की हुकूमत करने में कामयाब नहीं होगा।” {i23:1} रब क़ौम के सहीह गल्लाबान मुक़र्रर करेगा {23:1} रब फ़रमाता है, “उन गल्लाबानों पर अफ़्सोस जो मेरी चरागाह की भेड़ों को तबाह करके मुन्तशिर कर रहे हैं।” {23:2} इस लिए रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “ऐ मेरी क़ौम को चराने वाले गल्लाबानो, मैं तुम्हारी शरीर हरकतों की मुनासिब सज़ा दूँगा, क्यूँकि तुम ने मेरी भेड़ों की फ़िक्र नहीं की बल्कि उन्हें मुन्तशिर करके तित्तर-बित्तर कर दिया है।” रब फ़रमाता है, “सुनो, मैं तुम्हारी शरीर हरकतों से निपट लूँगा। {23:3} मैं ख़ुद अपने रेवड़ की बची हुई भेड़ों को जमा करूँगा। जहाँ भी मैं ने उन्हें मुन्तशिर कर दिया था, उन तमाम ममालिक से मैं उन्हें उन की अपनी चरागाह में वापस लाऊँगा। वहाँ वह फलें फूलेंगे, और उन की तादाद बढ़ती जाएगी। {23:4} मैं ऐसे गल्लाबानों को उन पर मुक़र्रर करूँगा जो उन की सहीह गल्लाबानी करेंगे। आइन्दा न वह ख़ौफ़ खाएँगे, न घबरा जाएंगे। एक भी गुम नहीं हो जाएगा।” यह रब का फ़रमान है। {i23:5} रब सहीह बादशाह मुक़र्रर करेगा {23:5} रब फ़रमाता है, “वह वक़्त आने वाला है कि मैं दाऊद के लिए एक रास्तबाज़ कोंपल फूटने दूँगा, एक ऐसा बादशाह जो हिक्मत से हुकूमत करेगा, जो मुल्क में इन्साफ़ और रास्ती क़ाइम रखेगा। {23:6} उस के दौर-ए-हुकूमत में यहूदाह को छुटकारा मिलेगा और इस्राईल मह्फ़ूज़ ज़िन्दगी गुज़ारेगा। वह ‘रब हमारी रास्तबाज़ी’ कहलाएगा। {23:7} चुनाँचे वह वक़्त आने वाला है जब लोग क़सम खाते वक़्त नहीं कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इस्राईलियों को मिस्र से निकाल लाया।’ {23:8} इस के बजाए वह कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इस्राईलियों को शिमाली मुल्क और दीगर उन तमाम ममालिक से निकाल लाया जिन में उस ने उन्हें मुन्तशिर कर दिया था।’ उस वक़्त वह दुबारा अपने ही मुल्क में बसेंगे।” यह रब का फ़रमान है। {i23:9} झूटे नबियों पर यक़ीन मत करना {23:9} झूटे नबियों को देख कर मेरा दिल टूट गया है, मेरी तमाम हड्डियाँ लरज़ रही हैं। मैं नशे में धुत आदमी की मानिन्द हूँ। मै से मग़लूब शख़्स की तरह मैं रब और उस के मुक़द्दस अल्फ़ाज़ के सबब से डगमगा रहा हूँ। {23:10} यह मुल्क ज़िनाकारों से भरा हुआ है, इस लिए उस पर अल्लाह की लानत है। ज़मीन झुलस गई है, बयाबान की चरागाहों की हरियाली मुरझा गई है। नबी ग़लत राह पर दौड़ रहे हैं, और जिस में वह ताक़तवर हैं वह ठीक नहीं। {23:11} रब फ़रमाता है, “नबी और इमाम दोनों ही बेदीन हैं। मैं ने अपने घर में भी उन का बुरा काम पाया है। {23:12} इस लिए जहाँ भी चलें वह फिसल जाएंगे, वह अंधेरे में ठोकर खा कर गिर जाएंगे। क्यूँकि मैं मुक़र्ररा वक़्त पर उन पर आफ़त लाऊँगा।” यह रब का फ़रमान है। {23:13} “मैं ने देखा कि सामरिया के नबी बाल के नाम में नबुव्वत करके मेरी क़ौम इस्राईल को ग़लत राह पर लाए। यह क़ाबिल-ए-घिन है, {23:14} लेकिन जो कुछ मुझे यरूशलम के नबियों में नज़र आता है वह उतना ही घिनौना है। वह ज़िना करते और झूट के पैरोकार हैं। साथ साथ वह बदकारों की हौसलाअफ़्ज़ाई भी करते हैं, और नतीजे में कोई भी अपनी बदी से बाज़ नहीं आता। मेरी नज़र में वह सब सदूम की मानिन्द हैं। हाँ, यरूशलम के बाशिन्दे अमूरा के बराबर हैं।” {23:15} इस लिए रब इन नबियों के बारे में फ़रमाता है, “मैं उन्हें कड़वा खाना खिलाऊँगा और ज़हरीला पानी पिलाऊँगा, क्यूँकि यरूशलम के नबियों ने पूरे मुल्क में बेदीनी फैलाई है।” {23:16} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “नबियों की पेशगोइयों पर ध्यान मत देना। वह तुम्हें फ़रेब दे रहे हैं। क्यूँकि वह रब का कलाम नहीं सुनाते बल्कि महज़ अपने दिल में से उभरने वाली रोया पेश करते हैं। {23:17} जो मुझे हक़ीर जानते हैं उन्हें वह बताते रहते हैं, ‘रब फ़रमाता है कि हालात सहीह-सलामत रहेंगे।’ जो अपने दिलों की ज़िद के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं, उन सब को वह तसल्ली दे कर कहते हैं, ‘तुम पर आफ़त नहीं आएगी।’ {23:18} लेकिन उन में से किस ने रब की मजलिस में शरीक हो कर वह कुछ देखा और सुना है जो रब बयान कर रहा है? किसी ने नहीं! किस ने तवज्जुह दे कर उस का कलाम सुना है? किसी ने नहीं! {23:19} देखो, रब की ग़ज़बनाक आँधी चलने लगी है, उस का तेज़ी से घूमता हुआ बगूला बेदीनों के सरों पर मंडला रहा है। {23:20} और रब का यह ग़ज़ब उस वक़्त तक ठंडा नहीं होगा जब तक उस के दिल का इरादा तक्मील तक न पहुँच जाए। आने वाले दिनों में तुम्हें इस की पूरी समझ आएगी। {23:21} यह नबी दौड़ कर अपनी बातें सुनाते रहते हैं अगरचे मैं ने उन्हें नहीं भेजा। गो मैं उन से हमकलाम नहीं हुआ तो भी यह पेशगोइयाँ करते हैं। {23:22} अगर यह मेरी मजलिस में शरीक होते तो मेरी क़ौम को मेरे अल्फ़ाज़ सुना कर उसे उस के बुरे चाल-चलन और ग़लत हरकतों से हटाने की कोशिश करते।” {23:23} रब फ़रमाता है, “क्या मैं सिर्फ़ क़रीब का ख़ुदा हूँ? हरगिज़ नहीं! मैं दूर का ख़ुदा भी हूँ। {23:24} क्या कोई मेरी नज़र से ग़ाइब हो सकता है? नहीं, ऐसी जगह है नहीं जहाँ वह मुझ से छुप सके। आसमान-ओ-ज़मीन मुझ से मामूर रहते हैं।” यह रब का फ़रमान है। {23:25} “इन नबियों की बातें मुझ तक पहुँच गई हैं। यह मेरा नाम ले कर झूट बोलते हैं कि मैं ने ख़्वाब देखा है, ख़्वाब देखा है! {23:26} यह नबी झूटी पेशगोइयाँ और अपने दिलों के वस्वसे सुनाने से कब बाज़ आएँगे? {23:27} जो ख़्वाब वह एक दूसरे को बताते हैं उन से वह चाहते हैं कि मेरी क़ौम मेरा नाम यूँ भूल जाए जिस तरह उन के बापदादा बाल की पूजा करने से मेरा नाम भूल गए थे।” {23:28} रब फ़रमाता है, “जिस नबी ने ख़्वाब देखा हो वह बेशक अपना ख़्वाब बयान करे, लेकिन जिस पर मेरा कलाम नाज़िल हुआ हो वह वफ़ादारी से मेरा कलाम सुनाए। भूसे का गन्दुम से क्या वास्ता है?” {23:29} रब फ़रमाता है, “क्या मेरा कलाम आग की मानिन्द नहीं? क्या वह हथौड़े की तरह चटान को टुकड़े टुकड़े नहीं करता?” {23:30} चुनाँचे रब फ़रमाता है, “अब मैं उन नबियों से निपट लूँगा जो एक दूसरे के पैग़ामात चुरा कर दावा करते हैं कि वह मेरी तरफ़ से हैं।” {23:31} रब फ़रमाता है, “मैं उन से निपट लूँगा जो अपने शख़्सी ख़यालात सुना कर दावा करते हैं, ‘यह रब का फ़रमान है’।” {23:32} रब फ़रमाता है, “मैं उन से निपट लूँगा जो झूटे ख़्वाब सुना कर मेरी क़ौम को अपनी धोकेबाज़ी और शेख़ी की बातों से ग़लत राह पर लाते हैं, हालाँकि मैं ने उन्हें न भेजा, न कुछ कहने को कहा था। उन लोगों का इस क़ौम के लिए कोई भी फ़ाइदा नहीं।” यह रब का फ़रमान है। {i23:33} रब के लिए तुम बोझ का बाइस हो {23:33} “ऐ यरमियाह, अगर इस क़ौम के आम लोग या इमाम या नबी तुझ से पूछें, ‘आज रब ने तुझ पर कलाम का क्या बोझ नाज़िल किया है?’ तो जवाब दे, ‘रब फ़रमाता है कि तुम ही मुझ पर बोझ हो! लेकिन मैं तुम्हें उतार फैंकूँगा।’ {23:34} और अगर कोई नबी, इमाम या आम शख़्स दावा करे, ‘रब ने मुझ पर कलाम का बोझ नाज़िल किया है’ तो मैं उसे उस के घराने समेत सज़ा दूँगा। {23:35} इस के बजाए एक दूसरे से सवाल करो कि ‘रब ने क्या जवाब दिया?’ या ‘रब ने क्या फ़रमाया?’ {23:36} आइन्दा रब के पैग़ाम के लिए लफ़्ज़ ‘बोझ’ इस्तेमाल न करो, क्यूँकि जो भी बात तुम करो वह तुम्हारा अपना बोझ होगी। क्यूँकि तुम ज़िन्दा ख़ुदा के अल्फ़ाज़ को तोड़-मरोड़ कर बयान करते हो, उस कलाम को जो रब्ब-उल-अफ़्वाज हमारे ख़ुदा ने नाज़िल किया है। {23:37} चुनाँचे आइन्दा नबी से सिर्फ़ इतना ही पूछो कि ‘रब ने तुझे क्या जवाब दिया?’ या ‘रब ने क्या फ़रमाया?’ {23:38} लेकिन अगर तुम ‘रब का बोझ’ कहने पर इसरार करो तो रब का जवाब सुनो! चूँकि तुम कहते हो कि ‘मुझ पर रब का बोझ नाज़िल हुआ है’ गो मैं ने यह मना किया था, {23:39} इस लिए मैं तुम्हें अपनी याद से मिटा कर यरूशलम समेत अपने हुज़ूर से दूर फैंक दूँगा, गो मैं ने ख़ुद यह शहर तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को फ़राहम किया था। {23:40} मैं तुम्हारी अबदी रुस्वाई कराऊँगा, और तुम्हारी शर्मिन्दगी हमेशा तक याद रहेगी।” {i24:1} अन्जीर की दो टोकरियाँ {24:1} एक दिन रब ने मुझे रोया दिखाई। उस वक़्त बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम को यहूदाह के बुज़ुर्गों, कारीगरों और लोहारों समेत बाबल में जिलावतन कर चुका था। रोया में मैं ने देखा कि अन्जीरों से भरी दो टोकरियाँ रब के घर के सामने पड़ी हैं। {24:2} एक टोकरी में मौसम के शुरू में पकने वाले बेहतरीन अन्जीर थे जबकि दूसरी में ख़राब अन्जीर थे जो खाए भी नहीं जा सकते थे। {24:3} रब ने मुझ से सवाल किया, “ऐ यरमियाह, तुझे क्या नज़र आता है?” मैं ने जवाब दिया, “मुझे अन्जीर नज़र आते हैं। कुछ बेहतरीन हैं जबकि दूसरे इतने ख़राब हैं कि उन्हें खाया भी नहीं जा सकता।” {24:4} तब रब मुझ से हमकलाम हुआ, {24:5} “रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि अच्छे अन्जीर यहूदाह के वह लोग हैं जिन्हें मैं ने जिलावतन करके मुल्क-ए-बाबल में भेजा है। उन्हें मैं मेहरबानी की निगाह से देखता हूँ। {24:6} क्यूँकि उन पर मैं अपने करम का इज़हार करके उन्हें इस मुल्क में वापस लाऊँगा। मैं उन्हें गिराऊँगा नहीं बल्कि तामीर करूँगा, उन्हें जड़ से उखाड़ूँगा नहीं बल्कि पनीरी की तरह लगाऊँगा। {24:7} मैं उन्हें समझदार दिल अता करूँगा ताकि वह मुझे जान लें, वह पहचान लें कि मैं रब हूँ। तब वह मेरी क़ौम होंगे और मैं उन का ख़ुदा हूँगा, क्यूँकि वह पूरे दिल से मेरे पास वापस आएँगे। {24:8} लेकिन बाक़ी लोग उन ख़राब अन्जीरों की मानिन्द हैं जो खाए नहीं जाते। उन के साथ मैं वह सुलूक करूँगा जो ख़राब अन्जीरों के साथ किया जाता है। उन में यहूदाह का बादशाह सिदक़ियाह, उस के अफ़्सर, यरूशलम और यहूदाह में बचे हुए लोग और मिस्र में पनाह लेने वाले सब शामिल हैं। {24:9} मैं होने दूँगा कि वह दुनिया के तमाम ममालिक के लिए दह्शत और आफ़त की अलामत बन जाएंगे। जहाँ भी मैं उन्हें मुन्तशिर करूँगा वहाँ वह इब्रतअंगेज़ मिसाल बन जाएंगे। हर जगह लोग उन की बेइज़्ज़ती, उन्हें लान-तान और उन पर लानत करेंगे। {24:10} जब तक वह उस मुल्क में से मिट न जाएँ जो मैं ने उन के बापदादा को दे दिया था उस वक़्त तक मैं उन के दरमियान तलवार, काल और मोहलक बीमारियाँ भेजता रहूँगा।” {i25:1} मुल्क-ए-बाबल में 70 साल रहने की पेशगोई {25:1} यहूयक़ीम बिन यूसियाह की हुकूमत के चौथे साल में अल्लाह का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। उसी साल बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र तख़्तनशीन हुआ था। यह कलाम यहूदाह के तमाम बाशिन्दों के बारे में था। {25:2} चुनाँचे यरमियाह नबी ने यरूशलम के तमाम बाशिन्दों और यहूदाह की पूरी क़ौम से मुख़ातिब हो कर कहा, {25:3} “23 साल से रब का कलाम मुझ पर नाज़िल होता रहा है यानी यूसियाह बिन अमून की हुकूमत के तेरहवें साल से ले कर आज तक। बार बार मैं तुम्हें पैग़ामात सुनाता रहा हूँ, लेकिन तुम ने ध्यान नहीं दिया। {25:4} मेरे इलावा रब दीगर तमाम नबियों को भी बार बार तुम्हारे पास भेजता रहा, लेकिन तुम ने न सुना, न तवज्जुह दी, {25:5} गो मेरे ख़ादिम तुम्हें बार बार आगाह करते रहे, ‘तौबा करो! हर एक अपनी ग़लत राहों और बुरी हरकतों से बाज़ आ कर वापस आए। फिर तुम हमेशा तक उस मुल्क में रहोगे जो रब ने तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को अता किया था। {25:6} अजनबी माबूदों की पैरवी करके उन की ख़िदमत और पूजा मत करना! अपने हाथों के बनाए हुए बुतों से मुझे तैश न दिलाना, वर्ना मैं तुम्हें नुक़्सान पहुँचाऊँगा’।” {25:7} रब फ़रमाता है, “अफ़्सोस! तुम ने मेरी न सुनी बल्कि मुझे अपने हाथों के बनाए हुए बुतों से ग़ुस्सा दिला कर अपने आप को नुक़्सान पहुँचाया।” {25:8} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “चूँकि तुम ने मेरे पैग़ामात पर ध्यान न दिया, {25:9} इस लिए मैं शिमाल की तमाम क़ौमों और अपने ख़ादिम बाबल के बादशाह नबूकदनज़्ज़र को बुला लूँगा ताकि वह इस मुल्क, इस के बाशिन्दों और गिर्द-ओ-नवाह के ममालिक पर हम्ला करें। तब यह सफ़्हा-ए-हस्ती से यूँ मिट जाएंगे कि लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे और वह उन का मज़ाक़ उड़ाएँगे। यह इलाक़े दाइमी खंडरात बन जाएंगे। {25:10} मैं उन के दरमियान ख़ुशी-ओ-शादमानी और दूल्हे दुल्हन की आवाज़ें बन्द कर दूँगा। चक्कियाँ ख़ामोश पड़ जाएँगी और चराग़ बुझ जाएंगे। {25:11} पूरा मुल्क वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएगा, चारों तरफ़ मल्बे के ढेर नज़र आएँगे। तब तुम और इर्दगिर्द की क़ौमें 70 साल तक शाह-ए-बाबल की ख़िदमत करोगे। {25:12} लेकिन 70 साल के बाद मैं शाह-ए-बाबल और उस की क़ौम को मुनासिब सज़ा दूँगा। मैं मुल्क-ए-बाबल को यूँ बर्बाद करूँगा कि वह हमेशा तक वीरान-ओ-सुन्सान रहेगा। {25:13} उस वक़्त मैं उस मुल्क पर सब कुछ नाज़िल करूँगा जो मैं ने उस के बारे में फ़रमाया है, सब कुछ पूरा हो जाएगा जो इस किताब में दर्ज है और जिस की पेशगोई यरमियाह ने तमाम अक़्वाम के बारे में की है। {25:14} उस वक़्त उन्हें भी मुतअद्दिद क़ौमों और बड़े बड़े बादशाहों की ख़िदमत करनी पड़ेगी। यूँ मैं उन्हें उन की हरकतों और आमाल का मुनासिब अज्र दूँगा।” {i25:15} रब के ग़ज़ब का प्याला {25:15} रब जो इस्राईल का ख़ुदा है मुझ से हमकलाम हुआ, “देख, मेरे हाथ में मेरे ग़ज़ब से भरा हुआ प्याला है। इसे ले कर उन तमाम क़ौमों को पिला दे जिन के पास मैं तुझे भेजता हूँ। {25:16} जो भी क़ौम यह पिए वह मेरी तलवार के आगे डगमगाती हुई दीवाना हो जाएगी।” {25:17} चुनाँचे मैं ने रब के हाथ से प्याला ले कर उसे उन तमाम अक़्वाम को पिला दिया जिन के पास रब ने मुझे भेजा। {25:18} पहले यरूशलम और यहूदाह के शहरों को उन के बादशाहों और बुज़ुर्गों समेत ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। तब मुल्क मल्बे का ढेर बन गया जिसे देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। आज तक वह मज़ाक़ और लानत का निशाना है। {25:19} फिर यके बाद दीगरे मुतअद्दिद क़ौमों को ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। ज़ैल में उन की फ़हरिस्त है: मिस्र का बादशाह फ़िरऔन, उस के दरबारी, अफ़्सर, पूरी मिस्री क़ौम {25:20} और मुल्क में बसने वाले ग़ैरमुल्की, मुल्क-ए-ऊज़ के तमाम बादशाह, फ़िलिस्ती बादशाह और उन के शहर अस्क़लून, ग़ज़्ज़ा और अक़्रून, नीज़ फ़िलिस्ती शहर अश्दूद का बचा-खुचा हिस्सा, {25:21} अदोम, मोआब और अम्मोन, {25:22} सूर और सैदा के तमाम बादशाह, बहीरा-ए-रूम के साहिली इलाक़े, {25:23} ददान, तैमा और बूज़ के शहर, वह क़ौमें जो रेगिस्तान के किनारे किनारे रहती हैं, {25:24} मुल्क-ए-अरब के तमाम बादशाह, रेगिस्तान में मिल कर बसने वाले ग़ैरमुल्कियों के बादशाह, {25:25} ज़िम्री, ऐलाम और मादी के तमाम बादशाह, {25:26} शिमाल के दूर-ओ-नज़्दीक के तमाम बादशाह। यके बाद दीगरे दुनिया के तमाम ममालिक को ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। आख़िर में शेशक के बादशाह को भी यह प्याला पीना पड़ा। {25:27} फिर रब ने कहा, “उन्हें बता, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि ग़ज़ब का प्याला ख़ूब पियो! इतना पियो कि नशे में आ कर क़ै आने लगे। उस वक़्त तक पीते जाओ जब तक तुम मेरी तलवार के आगे गिर कर पड़े न रहो।’ {25:28} अगर वह तेरे हाथ से प्याला न लें बल्कि उसे पीने से इन्कार करें तो उन्हें बता, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज ख़ुद फ़रमाता है कि पियो! {25:29} देखो, जिस शहर पर मेरे नाम का ठप्पा लगा है उसी पर मैं आफ़त लाने लगा हूँ। अगर मैं ने उसी से शुरू किया तो फिर तुम किस तरह बचे रहोगे? यक़ीनन तुम्हें सज़ा मिलेगी, क्यूँकि मैं ने तै कर लिया है कि दुनिया के तमाम बाशिन्दे तलवार की ज़द में आ जाएँ’।” यह रब्ब-उल-अफ़्वाज का फ़रमान है। {i25:30} तमाम अक़्वाम की अदालत {25:30} “ऐ यरमियाह, उन्हें यह तमाम पेशगोइयाँ सुना कर बता कि रब बुलन्दियों से दहाड़ेगा। उस की मुक़द्दस सुकूनतगाह से उस की कड़कती आवाज़ निकलेगी, वह ज़ोर से अपनी चरागाह के ख़िलाफ़ गरजेगा। जिस तरह अंगूर का रस निकालने वाले अंगूर को रौंदते वक़्त ज़ोर से नारे लगाते हैं उसी तरह वह नारे लगाएगा, अलबत्ता जंग के नारे। क्यूँकि वह दुनिया के तमाम बाशिन्दों के ख़िलाफ़ जंग के नारे लगाएगा। {25:31} उस का शोर दुनिया की इन्तिहा तक गूँजेगा, क्यूँकि रब अदालत में अक़्वाम से मुक़द्दमा लड़ेगा, वह तमाम इन्सानों का इन्साफ़ करके शरीरों को तलवार के हवाले कर देगा।” यह रब का फ़रमान है। {25:32} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “देखो, यके बाद दीगरे तमाम क़ौमों पर आफ़त नाज़िल हो रही है, ज़मीन की इन्तिहा से ज़बरदस्त तूफ़ान आ रहा है। {25:33} उस वक़्त रब के मारे हुए लोगों की लाशें दुनिया के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पड़ी रहेंगी। न कोई उन पर मातम करेगा, न उन्हें उठा कर दफ़न करेगा। वह खेत में बिखरे गोबर की तरह ज़मीन पर पड़ी रहेंगी। {25:34} ऐ गल्लाबानो, वावैला करो! ऐ रेवड़ के राहनुमाओ, राख में लोट-पोट हो जाओ! क्यूँकि वक़्त आ गया है कि तुम्हें ज़बह किया जाए। तुम गिर कर नाज़ुक बर्तन की तरह पाश पाश हो जाओगे। {25:35} गल्लाबान कहीं भी भाग कर पनाह नहीं ले सकेंगे, रेवड़ के राहनुमा बच ही नहीं सकेंगे। {25:36} सुनो! गल्लाबानों की चीख़ें और रेवड़ के राहनुमाओं की आहें! क्यूँकि रब उन की चरागाह को तबाह कर रहा है। {25:37} पुरसुकून मुर्ग़ज़ारों का सत्यानास होगा जब रब का सख़्त ग़ज़ब नाज़िल होगा, {25:38} जब रब जवान शेरबबर की तरह अपनी छुपने की जगह से निकल कर लोगों पर टूट पड़ेगा। तब ज़ालिम की तेज़ तलवार और रब का शदीद क़हर उन का मुल्क तबाह करेगा।” {i26:1} रब के घर में यरमियाह का पैग़ाम {26:1} जब यहूयक़ीम बिन यूसियाह यहूदाह के तख़्त पर बैठ गया तो थोड़ी देर के बाद रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। {26:2} रब ने फ़रमाया, “ऐ यरमियाह, रब के घर के सहन में खड़ा हो कर उन तमाम लोगों से मुख़ातिब हो जो रब के घर में सिज्दा करने के लिए यहूदाह के दीगर शहरों से आए हैं। उन्हें मेरा पूरा पैग़ाम सुना दे, एक बात भी न छोड़! {26:3} शायद वह सुनें और हर एक अपनी बुरी राह से बाज़ आ जाए। इस सूरत में मैं पछता कर उन पर वह सज़ा नाज़िल नहीं करूँगा जिस का मन्सूबा मैं ने उन के बुरे आमाल देख कर बांध लिया है। {26:4} उन्हें बता, ‘रब फ़रमाता है कि मेरी सुनो और मेरी उस शरीअत पर अमल करो जो मैं ने तुम्हें दी है। {26:5} नीज़, नबियों के पैग़ामात पर ध्यान दो। अफ़्सोस, गो मैं अपने ख़ादिमों को बार बार तुम्हारे पास भेजता रहा तो भी तुम ने उन की न सुनी। {26:6} अगर तुम आइन्दा भी न सुनो तो मैं इस घर को यूँ तबाह करूँगा जिस तरह मैं ने सैला का मक़्दिस तबाह किया था। मैं इस शहर को भी यूँ ख़ाक में मिला दूँगा कि इब्रतअंगेज़ मिसाल बन जाएगा। दुनिया की तमाम क़ौमों में जब कोई अपने दुश्मन पर लानत भेजना चाहे तो वह कहेगा कि उस का यरूशलम का सा अन्जाम हो’।” {i26:7} यरमियाह की अदालत {26:7} जब यरमियाह ने रब के घर में रब के यह अल्फ़ाज़ सुनाए तो इमामों, नबियों और तमाम बाक़ी लोगों ने ग़ौर से सुना। {26:8} यरमियाह ने उन्हें सब कुछ पेश किया जो रब ने उसे सुनाने को कहा था। लेकिन जूँ ही वह इख़तिताम पर पहुँच गया तो इमाम, नबी और बाक़ी तमाम लोग उसे पकड़ कर चीख़ने लगे, “तुझे मरना ही है! {26:9} तू रब का नाम ले कर क्यूँ कह रहा है कि रब का घर सैला की तरह तबाह हो जाएगा, और यरूशलम मल्बे का ढेर बन कर ग़ैरआबाद हो जाएगा?” ऐसी बातें कह कर तमाम लोगों ने रब के घर में यरमियाह को घेरे रखा। {26:10} जब यहूदाह के बुज़ुर्गों को इस की ख़बर मिली तो वह शाही महल से निकल कर रब के घर के पास पहुँचे। वहाँ वह रब के घर के सहन के नए दरवाज़े में बैठ गए ताकि यरमियाह की अदालत करें। {26:11} तब इमामों और नबियों ने बुज़ुर्गों और तमाम लोगों के सामने यरमियाह पर इल्ज़ाम लगाया, “लाज़िम है कि इस आदमी को सज़ा-ए-मौत दी जाए! क्यूँकि इस ने इस शहर यरूशलम के ख़िलाफ़ नबुव्वत की है। आप ने अपने कानों से यह बात सुनी है।” {26:12} तब यरमियाह ने बुज़ुर्गों और बाक़ी तमाम लोगों से कहा, “रब ने ख़ुद मुझे यहाँ भेजा ताकि मैं रब के घर और यरूशलम के ख़िलाफ़ उन तमाम बातों की पेशगोई करूँ जो आप ने सुनी हैं। {26:13} चुनाँचे अपनी राहों और आमाल को दुरुस्त करें! रब अपने ख़ुदा की सुनें ताकि वह पछता कर आप पर वह सज़ा नाज़िल न करे जिस का एलान उस ने किया है। {26:14} जहाँ तक मेरा ताल्लुक़ है, मैं तो आप के हाथ में हूँ। मेरे साथ वह सुलूक करें जो आप को अच्छा और मुनासिब लगे। {26:15} लेकिन एक बात जान लें। अगर आप मुझे सज़ा-ए-मौत दें तो आप बेक़ुसूर के क़ातिल ठहरेंगे। आप और यह शहर उस के तमाम बाशिन्दों समेत क़ुसूरवार ठहरेंगे। क्यूँकि रब ही ने मुझे आप के पास भेजा ताकि आप के सामने ही यह बातें करूँ।” {26:16} यह सुन कर बुज़ुर्गों और अवाम के तमाम लोगों ने इमामों और नबियों से कहा, “यह आदमी सज़ा-ए-मौत के लाइक़ नहीं है! क्यूँकि उस ने रब हमारे ख़ुदा का नाम ले कर हम से बात की है।” {26:17} फिर मुल्क के कुछ बुज़ुर्ग खड़े हो कर पूरी जमाअत से मुख़ातिब हुए, {26:18} “जब हिज़क़ियाह यहूदाह का बादशाह था तो मोरशत के रहने वाले नबी मीकाह ने नबुव्वत करके यहूदाह के तमाम बाशिन्दों से कहा, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है कि सिय्यून पर खेत की तरह हल चलाया जाएगा, और यरूशलम मल्बे का ढेर बन जाएगा। रब के घर की पहाड़ी पर गुंजान जंगल उगेगा।’ {26:19} क्या यहूदाह के बादशाह हिज़क़ियाह या यहूदाह के किसी और शख़्स ने मीकाह को सज़ा-ए-मौत दी? हरगिज़ नहीं, बल्कि हिज़क़ियाह ने रब का ख़ौफ़ मान कर उस का ग़ुस्सा ठंडा करने की कोशिश की। नतीजे में रब ने पछता कर वह सज़ा उन पर नाज़िल न की जिस का एलान वह कर चुका था। सुनें, अगर हम यरमियाह को सज़ा-ए-मौत दें तो अपने आप पर सख़्त सज़ा लाएँगे।” {i26:20} ऊरियाह नबी का क़त्ल {26:20} उन दिनों में एक और नबी भी यरमियाह की तरह रब का नाम ले कर नबुव्वत करता था। उस का नाम ऊरियाह बिन समायाह था, और वह क़िर्यत-यारीम का रहने वाला था। उस ने भी यरूशलम और यहूदाह के ख़िलाफ़ वही पेशगोइयाँ सुनाईं जो यरमियाह सुनाता था। {26:21} जब यहूयक़ीम बादशाह और उस के तमाम फ़ौजी और सरकारी अफ़्सरों ने उस की बातें सुनीं तो बादशाह ने उसे मार डालने की कोशिश की। लेकिन ऊरियाह को इस की ख़बर मिली, और वह डर कर भाग गया। चलते चलते वह मिस्र पहुँच गया। {26:22} तब यहूयक़ीम ने इल्नातन बिन अक्बोर और चन्द एक आदमियों को वहाँ भेज दिया। {26:23} वहाँ पहुँच कर वह ऊरियाह को पकड़ कर यहूयक़ीम के पास वापस लाए। बादशाह के हुक्म पर उस का सर क़लम कर दिया गया और उस की नाश को निचले तब्क़े के लोगों के क़ब्रिस्तान में दफ़नाया गया। {26:24} लेकिन यरमियाह की जान छूट गई। उसे अवाम के हवाले न किया गया, गो वह उसे मार डालना चाहते थे, क्यूँकि अख़ीक़ाम बिन साफ़न उस के हक़ में था। {i27:1} जूए की अलामत {27:1} जब सिदक़ियाह बिन यूसियाह यहूदाह के तख़्त पर बैठ गया तो रब यरमियाह से हमकलाम हुआ। {27:2} रब ने मुझे फ़रमाया, “अपने लिए जूआ और उस के रस्से बना कर उसे अपनी गर्दन पर रख ले! {27:3} फिर अदोम, मोआब, अम्मोन, सूर और सैदा के शाही सफ़ीरों के पास जा जो इस वक़्त यरूशलम में सिदक़ियाह बादशाह के पास जमा हैं। {27:4} उन के हाथ उन के बादशाहों को पैग़ाम भेज, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि {27:5} मैं ने अपना हाथ बढ़ा कर बड़ी क़ुदरत से दुनिया को इन्सान-ओ-हैवान समेत ख़ल्क़ किया है, और मैं ही यह चीज़ें उसे अता करता हूँ जो मेरी नज़र में लाइक़ है। {27:6} इस वक़्त मैं तुम्हारे तमाम ममालिक को अपने ख़ादिम शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र के हवाले करूँगा। जंगली जानवर तक सब उस के ताबे हो जाएंगे। {27:7} तमाम अक़्वाम उस की और उस के बेटे और पोते की ख़िदमत करेंगी। फिर एक वक़्त आएगा कि बाबल की हुकूमत ख़त्म हो जाएगी। तब मुतअद्दिद क़ौमें और बड़े बड़े बादशाह उसे अपने ही ताबे कर लेंगे। {27:8} लेकिन इस वक़्त लाज़िम है कि हर क़ौम और सल्तनत शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र की ख़िदमत करके उस का जूआ क़बूल करे। जो इन्कार करे उसे मैं तलवार, काल और मोहलक बीमारियों से उस वक़्त तक सज़ा दूँगा जब तक वह पूरे तौर पर नबूकदनज़्ज़र के हाथ से तबाह न हो जाए। यह रब का फ़रमान है। {27:9} चुनाँचे अपने नबियों, फ़ालगीरों, ख़्वाब देखने वालों, क़िस्मत का हाल बताने वालों और जादूगरों पर ध्यान न दो जब वह तुम्हें बताते हैं कि तुम शाह-ए-बाबल की ख़िदमत नहीं करोगे। {27:10} क्यूँकि वह तुम्हें झूटी पेशगोइयाँ पेश कर रहे हैं जिन का सिर्फ़ यह नतीजा निकलेगा कि मैं तुम्हें वतन से निकाल कर मुन्तशिर करूँगा और तुम हलाक हो जाओगे। {27:11} लेकिन जो क़ौम शाह-ए-बाबल का जूआ क़बूल करके उस की ख़िदमत करे उसे मैं उस के अपने मुल्क में रहने दूँगा, और वह उस की खेतीबाड़ी करके उस में बसेगी। यह रब का फ़रमान है’।” {27:12} मैं ने यही पैग़ाम यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह को भी सुनाया। मैं बोला, “शाह-ए-बाबल के जूए को क़बूल करके उस की और उस की क़ौम की ख़िदमत करो तो तुम ज़िन्दा रहोगे। {27:13} क्या ज़रूरत है कि तू अपनी क़ौम समेत तलवार, काल और मोहलक बीमारियों की ज़द में आ कर हलाक हो जाए? क्यूँकि रब ने फ़रमाया है कि हर क़ौम जो शाह-ए-बाबल की ख़िदमत करने से इन्कार करे उस का यही अन्जाम होगा। {27:14} उन नबियों पर तवज्जुह मत देना जो तुम से कहते हैं, ‘तुम शाह-ए-बाबल की ख़िदमत नहीं करोगे।’ उन की यह पेशगोई झूट ही है। {27:15} रब फ़रमाता है, ‘मैं ने उन्हें नहीं भेजा बल्कि वह मेरा नाम ले कर झूटी पेशगोइयाँ सुना रहे हैं। अगर तुम उन की सुनो तो मैं तुम्हें मुन्तशिर कर दूँगा, और तुम नबुव्वत करने वाले उन नबियों समेत हलाक हो जाओगे’।” {27:16} फिर मैं इमामों और पूरी क़ौम से मुख़ातिब हुआ, “रब फ़रमाता है, ‘उन नबियों की न सुनो जो नबुव्वत करके कहते हैं कि अब रब के घर का सामान जल्द ही मुल्क-ए-बाबल से वापस लाया जाएगा। वह तुम्हें झूटी पेशगोइयाँ बयान कर रहे हैं। {27:17} उन पर तवज्जुह मत देना। बाबल के बादशाह की ख़िदमत करो तो तुम ज़िन्दा रहोगे। यह शहर क्यूँ मल्बे का ढेर बन जाए? {27:18} अगर यह लोग वाक़ई नबी हों और इन्हें रब का कलाम मिला हो तो इन्हें रब के घर, शाही महल और यरूशलम में अब तक बचे हुए सामान के लिए दुआ करनी चाहिए। वह रब्ब-उल-अफ़्वाज से शफ़ाअत करें कि यह चीज़ें मुल्क-ए-बाबल न ले जाई जाएँ बल्कि यहीं रहें। {27:19} अब तक पीतल के सतून, पीतल का हौज़ बनाम समुन्दर, पानी के बासन उठाने वाली हथगाड़ियाँ और इस शहर का बाक़ी बचा हुआ सामान यहीं मौजूद है। नबूकदनज़्ज़र ने इन्हें उस {27:20} वक़्त अपने साथ नहीं लिया था जब वह यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम को यरूशलम और यहूदाह के तमाम शुरफ़ा समेत जिलावतन करके मुल्क-ए-बाबल ले गया था। लेकिन रब्ब-उल-अफ़्वाज जो {27:21} इस्राईल का ख़ुदा है इन चीज़ों के बारे में फ़रमाता है कि जितनी भी क़ीमती चीज़ें अब तक रब के घर, शाही महल या यरूशलम में कहीं और बच गई हैं {27:22} वह भी मुल्क-ए-बाबल में पहुँचाई जाएँगी। वहीं वह उस वक़्त तक रहेंगी जब तक मैं उन पर नज़र डाल कर उन्हें इस जगह वापस न लाऊँ।’ यह रब का फ़रमान है।” {i28:1} हननियाह नबी की मुख़ालफ़त {28:1} उसी साल के पाँचवें महीने में जिबऊन का रहने वाला नबी हननियाह बिन अज़्ज़ूर रब के घर में आया। उस वक़्त यानी सिदक़ियाह की हुकूमत के चौथे साल में वह इमामों और क़ौम की मौजूदगी में मुझ से मुख़ातिब हुआ, {28:2} “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं शाह-ए-बाबल का जूआ तोड़ डालूँगा। {28:3} दो साल के अन्दर अन्दर मैं रब के घर का वह सारा सामान इस जगह वापस पहुँचाऊँगा जो शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र यहाँ से निकाल कर बाबल ले गया था। {28:4} उस वक़्त मैं यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम और यहूदाह के दीगर तमाम जिलावतनों को भी बाबल से वापस लाऊँगा। क्यूँकि मैं यक़ीनन शाह-ए-बाबल का जूआ तोड़ डालूँगा। यह रब का फ़रमान है।” {28:5} यह सुन कर यरमियाह ने इमामों और रब के घर में खड़े बाक़ी परस्तारों की मौजूदगी में हननियाह नबी से कहा, {28:6} “आमीन! रब ऐसा ही करे, वह तेरी पेशगोई पूरी करके रब के घर का सामान और तमाम जिलावतनों को बाबल से इस जगह वापस लाए। {28:7} लेकिन उस पर तवज्जुह दे जो मैं तेरी और पूरी क़ौम की मौजूदगी में बयान करता हूँ! {28:8} क़दीम ज़माने से ले कर आज तक जितने नबी मुझ से और तुझ से पहले ख़िदमत करते आए हैं उन्हों ने मुतअद्दिद मुल्कों और बड़ी बड़ी सल्तनतों के बारे में नबुव्वत की थी कि उन पर जंग, आफ़त और मोहलक बीमारियाँ नाज़िल होंगी। {28:9} चुनाँचे ख़बरदार! जो नबी सलामती की पेशगोई करे उस की तस्दीक़ उस वक़्त होगी जब उस की पेशगोई पूरी हो जाएगी। उसी वक़्त लोग जान लेंगे कि उसे वाक़ई रब की तरफ़ से भेजा गया है।” {28:10} तब हननियाह ने लकड़ी के जूए को यरमियाह की गर्दन पर से उतार कर उसे तोड़ दिया। {28:11} तमाम लोगों के सामने उस ने कहा, “रब फ़रमाता है कि दो साल के अन्दर अन्दर मैं इसी तरह शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र का जूआ तमाम क़ौमों की गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूँगा।” तब यरमियाह वहाँ से चला गया। {28:12} इस वाकिए के थोड़ी देर बाद रब यरमियाह से हमकलाम हुआ, {28:13} “जा, हननियाह को बता, ‘रब फ़रमाता है कि तू ने लकड़ी का जूआ तो तोड़ दिया है, लेकिन उस की जगह तू ने अपनी गर्दन पर लोहे का जूआ रख लिया है।’ {28:14} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं ने लोहे का जूआ इन तमाम क़ौमों पर रख दिया है ताकि वह नबूकदनज़्ज़र की ख़िदमत करें। और न सिर्फ़ यह उस की ख़िदमत करेंगे बल्कि मैं जंगली जानवरों को भी उस के हाथ में कर दूँगा।” {28:15} फिर यरमियाह ने हननियाह से कहा, “ऐ हननियाह, सुन! गो रब ने तुझे नहीं भेजा तो भी तू ने इस क़ौम को झूट पर भरोसा रखने पर आमादा किया है। {28:16} इस लिए रब फ़रमाता है, ‘मैं तुझे रू-ए-ज़मीन पर से मिटाने को हूँ। इसी साल तू मर जाएगा, इस लिए कि तू ने रब से सरकश होने का मश्वरा दिया है’।” {28:17} और ऐसा ही हुआ। उसी साल के सातवें महीने यानी दो महीने के बाद हननियाह नबी कूच कर गया। {i29:1} यरमियाह जिलावतनों को ख़त भेजता है {29:1} एक दिन यरमियाह नबी ने यरूशलम से एक ख़त मुल्क-ए-बाबल भेजा। यह ख़त उन बचे हुए बुज़ुर्गों, इमामों, नबियों और बाक़ी इस्राईलियों के नाम लिखा था जिन्हें नबूकदनज़्ज़र बादशाह जिलावतन करके बाबल ले गया था। {29:2} उन में यहूयाकीन बादशाह, उस की माँ और दरबारी, और यहूदाह और यरूशलम के बुज़ुर्ग, कारीगर और लोहार शामिल थे। {29:3} यह ख़त इलिआसा बिन साफ़न और जमरियाह बिन ख़िलक़ियाह के हाथ बाबल पहुँचा जिन्हें यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह ने बाबल में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र के पास भेजा था। ख़त में लिखा था, {29:4} “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘ऐ तमाम जिलावतनो जिन्हें मैं यरूशलम से निकाल कर बाबल ले गया हूँ, ध्यान से सुनो! {29:5} बाबल में घर बना कर उन में बसने लगो। बाग़ लगा कर उन का फल खाओ। {29:6} शादी करके बेटे-बेटियाँ पैदा करो। अपने बेटे-बेटियों की शादी कराओ ताकि उन के भी बच्चे पैदा हो जाएँ। ध्यान दो कि मुल्क-ए-बाबल में तुम्हारी तादाद कम न हो जाए बल्कि बढ़ जाए। {29:7} उस शहर की सलामती के तालिब रहो जिस में मैं तुम्हें जिलावतन करके ले गया हूँ। रब से उस के लिए दुआ करो! क्यूँकि तुम्हारी सलामती उसी की सलामती पर मुन्हसिर है।’ {29:8} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘ख़बरदार! तुम्हारे दरमियान रहने वाले नबी और क़िस्मत का हाल बताने वाले तुम्हें फ़रेब न दें। उन ख़्वाबों पर तवज्जुह मत देना जो यह देखते हैं।’ {29:9} रब फ़रमाता है, ‘यह मेरा नाम ले कर तुम्हें झूटी पेशगोइयाँ सुनाते हैं, गो मैं ने उन्हें नहीं भेजा।’ {29:10} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘तुम्हें बाबल में रहते हुए कुल 70 साल गुज़र जाएंगे। लेकिन इस के बाद मैं तुम्हारी तरफ़ रुजू करूँगा, मैं अपना पुरफ़ज़्ल वादा पूरा करके तुम्हें वापस लाऊँगा।’ {29:11} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘मैं उन मन्सूबों से ख़ूब वाक़िफ़ हूँ जो मैं ने तुम्हारे लिए बांधे हैं। यह मन्सूबे तुम्हें नुक़्सान नहीं पहुँचाएँगे बल्कि तुम्हारी सलामती का बाइस होंगे, तुम्हें उम्मीद दिला कर एक अच्छा मुस्तक़बिल फ़राहम करेंगे। {29:12} उस वक़्त तुम मुझे पुकारोगे, तुम आ कर मुझ से दुआ करोगे तो मैं तुम्हारी सुनूँगा। {29:13} तुम मुझे तलाश करके पा लोगे। क्यूँकि अगर तुम पूरे दिल से मुझे ढूँडो {29:14} तो मैं होने दूँगा कि तुम मुझे पाओ।’ यह रब का फ़रमान है। ‘फिर मैं तुम्हें बहाल करके उन तमाम क़ौमों और मक़ामों से जमा करूँगा जहाँ मैं ने तुम्हें मुन्तशिर कर दिया था। और मैं तुम्हें उस मुल्क में वापस लाऊँगा जिस से मैं ने तुम्हें निकाल कर जिलावतन कर दिया था।’ यह रब का फ़रमान है। {29:15} तुम्हारा दावा है कि रब ने यहाँ बाबल में भी हमारे लिए नबी बरपा किए हैं। {29:16} लेकिन रब का जवाब सुनो! दाऊद के तख़्त पर बैठने वाले बादशाह और यरूशलम में बचे हुए तमाम बाशिन्दों के बारे में रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, ‘तुम्हारे जितने भाई जिलावतनी से बच {29:17} गए हैं उन के ख़िलाफ़ मैं तलवार, काल और मोहलक बीमारियाँ भेज दूँगा। मैं उन्हें गले हुए अन्जीरों की मानिन्द बना दूँगा, जो ख़राब होने की वजह से खाए नहीं जाएंगे। {29:18} मैं तलवार, काल और मोहलक बीमारियों से उन का यूँ ताक़्क़ुब करूँगा कि दुनिया के तमाम ममालिक उन की हालत देख कर घबरा जाएंगे। जिस क़ौम में भी मैं उन्हें मुन्तशिर करूँगा वहाँ लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। किसी पर लानत भेजते वक़्त लोग कहेंगे कि उसे यहूदाह के बाशिन्दों का सा अन्जाम नसीब हो। हर जगह वह मज़ाक़ और रुस्वाई का निशाना बन जाएंगे। {29:19} क्यूँ? इस लिए कि उन्हों ने मेरी न सुनी, गो मैं अपने ख़ादिमों यानी नबियों के ज़रीए बार बार उन्हें पैग़ामात भेजता रहा। लेकिन तुम ने भी मेरी न सुनी।’ यह रब का फ़रमान है। {29:20} अब रब का फ़रमान सुनो, तुम सब जो जिलावतन हो चुके हो, जिन्हें मैं यरूशलम से निकाल कर बाबल भेज चुका हूँ। {29:21} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘अख़ियब बिन क़ौलायाह और सिदक़ियाह बिन मासियाह मेरा नाम ले कर तुम्हें झूटी पेशगोइयाँ सुनाते हैं। इस लिए मैं उन्हें शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र के हाथ में दूँगा जो उन्हें तेरे देखते देखते सज़ा-ए-मौत देगा। {29:22} उन का अन्जाम इब्रतअंगेज़ मिसाल बन जाएगा। किसी पर लानत भेजते वक़्त यहूदाह के जिलावतन कहेंगे, “रब तेरे साथ सिदक़ियाह और अख़ियब का सा सुलूक करे जिन्हें शाह-ए-बाबल ने आग में भून लिया!” {29:23} क्यूँकि उन्हों ने इस्राईल में बेदीन हरकतें की हैं। अपने पड़ोसियों की बीवियों के साथ ज़िना करने के साथ साथ उन्हों ने मेरा नाम ले कर ऐसे झूटे पैग़ाम सुनाए हैं जो मैं ने उन्हें सुनाने को नहीं कहा था। मुझे इस का पूरा इल्म है, और मैं इस का गवाह हूँ।’ यह रब का फ़रमान है।” {i29:24} समायाह के लिए रब का पैग़ाम {29:24} रब ने फ़रमाया, “बाबल के रहने वाले समायाह नख़लामी को इत्तिला दे, {29:25} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि तू ने अपनी ही तरफ़ से इमाम सफ़नियाह बिन मासियाह को ख़त भेजा। दीगर इमामों और यरूशलम के बाक़ी तमाम बाशिन्दों को भी इस की कापियाँ मिल गईं। ख़त में लिखा था, {29:26} ‘रब ने आप को यहोयदा की जगह अपने घर की देख-भाल करने की ज़िम्मादारी दी है। आप की ज़िम्मादारियों में यह भी शामिल है कि हर दीवाने और नबुव्वत करने वाले को काठ में डाल कर उस की गर्दन में लोहे की ज़न्जीरें डालें। {29:27} तो फिर आप ने अनतोत के रहने वाले यरमियाह के ख़िलाफ़ क़दम क्यूँ नहीं उठाया जो आप के दरमियान नबुव्वत करता रहता है? {29:28} क्यूँकि उस ने हमें जो बाबल में हैं ख़त भेज कर मश्वरा दिया है कि देर लगेगी, इस लिए घर बना कर उन में बसने लगो, बाग़ लगा कर उन का फल खाओ’।” {29:29} जब सफ़नियाह को समायाह का ख़त मिल गया तो उस ने यरमियाह को सब कुछ सुनाया। {29:30} तब यरमियाह पर रब का कलाम नाज़िल हुआ, {29:31} “तमाम जिलावतनों को ख़त भेज कर लिख दे, ‘रब समायाह नख़लामी के बारे में फ़रमाता है कि गो मैं ने समायाह को नहीं भेजा तो भी उस ने तुम्हें पेशगोइयाँ सुना कर झूट पर भरोसा रखने पर आमादा किया है। {29:32} चुनाँचे रब फ़रमाता है कि मैं समायाह नख़लामी को उस की औलाद समेत सज़ा दूँगा। इस क़ौम में उस की नस्ल ख़त्म हो जाएगी, और वह ख़ुद उन अच्छी चीज़ों से लुत्फ़अन्दोज़ नहीं होगा जो मैं अपनी क़ौम को फ़राहम करूँगा। क्यूँकि उस ने रब से सरकश होने का मश्वरा दिया है’।” {i30:1} इस्राईल और यहूदाह बहाल हो जाएंगे {30:1} रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {30:2} “रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि जो भी पैग़ाम मैं ने तुझ पर नाज़िल किए उन्हें किताब की सूरत में क़लमबन्द कर! {30:3} क्यूँकि रब फ़रमाता है कि वह वक़्त आने वाला है जब मैं अपनी क़ौम इस्राईल और यहूदाह को बहाल करके उस मुल्क में वापस लाऊँगा जो मैं ने उन के बापदादा को मीरास में दिया था।” {30:4} यह इस्राईल और यहूदाह के बारे में रब के फ़रमान हैं। {30:5} “रब फ़रमाता है, ‘ख़ौफ़ज़दा चीख़ें सुनाई दे रही हैं। अम्न का नाम-ओ-निशान तक नहीं बल्कि चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत फैली हुई है। {30:6} क्या मर्द बच्चे जन्म दे सकता है? तो फिर तमाम मर्द क्यूँ अपने हाथ कमर पर रख कर दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरतों की तरह तड़प रहे हैं? हर एक का रंग फ़क़ पड़ गया है। {30:7} अफ़्सोस! वह दिन कितना हौलनाक होगा! उस जैसा कोई नहीं होगा। याक़ूब की औलाद को बड़ी मुसीबत पेश आएगी, लेकिन आख़िरकार उसे रिहाई मिलेगी।’ {30:8} रब फ़रमाता है, ‘उस दिन मैं उन की गर्दन पर रखे जूए और उन की ज़न्जीरों को तोड़ डालूँगा। तब वह ग़ैरमुल्कियों के ग़ुलाम नहीं रहेंगे {30:9} बल्कि रब अपने ख़ुदा और दाऊद की नस्ल के उस बादशाह की ख़िदमत करेंगे जिसे मैं बरपा करके उन पर मुक़र्रर करूँगा।’ {30:10} चुनाँचे रब फ़रमाता है, ‘ऐ याक़ूब मेरे ख़ादिम, मत डर! ऐ इस्राईल, दह्शत मत खा! देख, मैं तुझे दूरदराज़ इलाक़ों से और तेरी औलाद को जिलावतनी से छुड़ा कर वापस ले आऊँगा। याक़ूब वापस आ कर सुकून से ज़िन्दगी गुज़ारेगा, और उसे परेशान करने वाला कोई नहीं होगा।’ {30:11} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘मैं तेरे साथ हूँ, मैं ही तुझे बचाऊँगा। मैं उन तमाम क़ौमों को नेस्त-ओ-नाबूद कर दूँगा जिन में मैं ने तुझे मुन्तशिर कर दिया है, लेकिन तुझे मैं इस तरह सफ़्हा-ए-हस्ती से नहीं मिटाऊँगा। अलबत्ता मैं मुनासिब हद तक तेरी तम्बीह करूँगा, क्यूँकि मैं तुझे सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ सकता।’ {30:12} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘तेरा ज़ख़्म लाइलाज है, तेरी चोट भर ही नहीं सकती। {30:13} कोई नहीं है जो तेरे हक़ में बात करे, तेरे फोड़ों का मुआलजा और तेरी शिफ़ा मुमकिन ही नहीं! {30:14} तेरे तमाम आशिक़ तुझे भूल गए हैं और तेरी परवा ही नहीं करते। तेरा क़ुसूर बहुत संगीन है, तुझ से बेशुमार गुनाह सरज़द हुए हैं। इसी लिए मैं ने तुझे दुश्मन की तरह मारा, ज़ालिम की तरह तम्बीह दी है। {30:15} अब जब चोट लग गई है और लाइलाज दर्द मह्सूस हो रहा है तो तू मदद के लिए क्यूँ चीख़ता है? यह मैं ही ने तेरे संगीन क़ुसूर और मुतअद्दिद गुनाहों की वजह से तेरे साथ किया है। {30:16} लेकिन जो तुझे हड़प करें उन्हें भी हड़प किया जाएगा। तेरे तमाम दुश्मन जिलावतन हो जाएंगे। जिन्हों ने तुझे लूट लिया उन्हें भी लूटा जाएगा, जिन्हों ने तुझे ग़ारत किया उन्हें भी ग़ारत किया जाएगा।’ {30:17} क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘मैं तेरे ज़ख़्मों को भर कर तुझे शिफ़ा दूँगा, क्यूँकि लोगों ने तुझे मर्दूद क़रार दे कर कहा है कि सिय्यून को देखो जिस की फ़िक्र कोई नहीं करता।’ {30:18} रब फ़रमाता है, ‘देखो, मैं याक़ूब के ख़ैमों की बदनसीबी ख़त्म करूँगा, मैं इस्राईल के घरों पर तरस खाऊँगा। तब यरूशलम को खंडरात पर नए सिरे से तामीर किया जाएगा, और महल को दुबारा उस की पुरानी जगह पर खड़ा किया जाएगा। {30:19} उस वक़्त वहाँ शुक्रगुज़ारी के गीत और ख़ुशी मनाने वालों की आवाज़ें बुलन्द हो जाएँगी। और मैं ध्यान दूँगा कि उन की तादाद कम न हो जाए बल्कि मज़ीद बढ़ जाए। उन्हें हक़ीर नहीं समझा जाएगा बल्कि मैं उन की इज़्ज़त बहुत बढ़ा दूँगा। {30:20} उन के बच्चे क़दीम ज़माने की तरह मह्फ़ूज़ ज़िन्दगी गुज़ारेंगे, और उन की जमाअत मज़बूती से मेरे हुज़ूर क़ाइम रहेगी। लेकिन जितनों ने उन पर ज़ुल्म किया है उन्हें मैं सज़ा दूँगा। {30:21} उन का हुक्मरान उन का अपना हमवतन होगा, वह दुबारा उन में से उठ कर तख़्तनशीन हो जाएगा। मैं ख़ुद उसे अपने क़रीब लाऊँगा तो वह मेरे क़रीब आएगा।’ क्यूँकि रब फ़रमाता है, ‘सिर्फ़ वही अपनी जान ख़तरे में डाल कर मेरे क़रीब आने की जुरअत कर सकता है जिसे मैं ख़ुद अपने क़रीब लाया हूँ। {30:22} उस वक़्त तुम मेरी क़ौम होगे और मैं तुम्हारा ख़ुदा हूँगा’।” {30:23} देखो, रब का ग़ज़ब ज़बरदस्त आँधी की तरह नाज़िल हो रहा है। तेज़ बगूले के झोंके बेदीनों के सरों पर उतर रहे हैं। {30:24} और रब का शदीद क़हर उस वक़्त तक ठंडा नहीं होगा जब तक उस ने अपने दिल के मन्सूबों को तक्मील तक नहीं पहुँचाया। आने वाले दिनों में तुम्हें इस की साफ़ समझ आएगी। {i31:1} जिलावतनों की वापसी {31:1} रब फ़रमाता है, “उस वक़्त मैं तमाम इस्राईली घरानों का ख़ुदा हूँगा, और वह मेरी क़ौम होंगे।” {31:2} रब फ़रमाता है, “तलवार से बचे हुए लोगों को रेगिस्तान में ही मेरा फ़ज़्ल हासिल हुआ है, और इस्राईल अपनी आरामगाह के पास पहुँच रहा है।” {31:3} रब ने दूर से इस्राईल पर ज़ाहिर हो कर फ़रमाया, “मैं ने तुझे हमेशा ही प्यार किया है, इस लिए मैं तुझे बड़ी शफ़्क़त से अपने पास खैंच लाया हूँ। {31:4} ऐ कुंवारी इस्राईल, तेरी नए सिरे से तामीर हो जाएगी, क्यूँकि मैं ख़ुद तुझे तामीर करूँगा। तू दुबारा अपने दफ़ों से आरास्ता हो कर ख़ुशी मनाने वालों के लोकनाच के लिए निकलेगी। {31:5} तू दुबारा सामरिया की पहाड़ियों पर अंगूर के बाग़ लगाएगी। और जो पौदों को लगाएँगे वह ख़ुद उन के फल से लुत्फ़अन्दोज़ होंगे। {31:6} क्यूँकि वह दिन आने वाला है जब इफ़्राईम के पहाड़ी इलाक़े के पहरेदार आवाज़ दे कर कहेंगे, ‘आओ हम सिय्यून के पास जाएँ ताकि रब अपने ख़ुदा को सिज्दा करें’।” {31:7} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “याक़ूब को देख कर ख़ुशी मनाओ! क़ौमों के सरबराह को देख कर शादमानी का नारा मारो! बुलन्द आवाज़ से अल्लाह की हम्द-ओ-सना करके कहो, ‘ऐ रब, अपनी क़ौम को बचा, इस्राईल के बचे हुए हिस्से को छुटकारा दे।’ {31:8} क्यूँकि मैं उन्हें शिमाली मुल्क से वापस लाऊँगा, उन्हें दुनिया की इन्तिहा से जमा करूँगा। अंधे और लंगड़े उन में शामिल होंगे, हामिला और जन्म देने वाली औरतें भी साथ चलेंगी। उन का बड़ा हुजूम वापस आएगा। {31:9} और जब मैं उन्हें वापस लाऊँगा तो वह रोते हुए और इल्तिजाएँ करते हुए मेरे पीछे चलेंगे। मैं उन्हें नदियों के किनारे किनारे और ऐसे हमवार रास्तों पर वापस ले चलूँगा, जहाँ ठोकर खाने का ख़तरा नहीं होगा। क्यूँकि मैं इस्राईल का बाप हूँ, और इफ़्राईम मेरा पहलौठा है। {31:10} ऐ क़ौमो, रब का कलाम सुनो! दूरदराज़ जज़ीरों तक एलान करो, ‘जिस ने इस्राईल को मुन्तशिर कर दिया है वह उसे दुबारा जमा करेगा और चरवाहे की सी फ़िक्र रख कर उस की गल्लाबानी करेगा।’ {31:11} क्यूँकि रब ने फ़िद्या दे कर याक़ूब को बचाया है, उस ने इवज़ाना दे कर उसे ज़ोरावर के हाथ से छुड़ाया है। {31:12} तब वह आ कर सिय्यून की बुलन्दी पर ख़ुशी के नारे लगाएँगे, उन के चिहरे रब की बरकतों को देख कर चमक उठेंगे। क्यूँकि उस वक़्त वह उन्हें अनाज, नई मै, ज़ैतून के तेल और जवान भेड़-बकरियों और गाय-बैलों की कस्रत से नवाज़ेगा। उन की जान सेराब बाग़ की तरह सरसब्ज़ होगी, और उन की निढाल हालत सँभल जाएगी। {31:13} फिर कुंवारियाँ ख़ुशी के मारे लोकनाच नाचेंगी, जवान और बुज़ुर्ग आदमी भी उस में हिस्सा लेंगे। यूँ मैं उन का मातम ख़ुशी में बदल दूँगा, मैं उन के दिलों से ग़म निकाल कर उन्हें अपनी तसल्ली और शादमानी से भर दूँगा।” {31:14} रब फ़रमाता है, “मैं इमामों की जान को तर-ओ-ताज़ा करूँगा, और मेरी क़ौम मेरी बरकतों से सेर हो जाएगी।” {31:15} रब फ़रमाता है, “रामा में शोर मच गया है, रोने पीटने और शदीद मातम की आवाज़ें। राख़िल अपने बच्चों के लिए रो रही है और तसल्ली क़बूल नहीं कर रही, क्यूँकि वह हलाक हो गए हैं।” {31:16} लेकिन रब फ़रमाता है, “रोने और आँसू बहाने से बाज़ आ, क्यूँकि तुझे अपनी मेहनत का अज्र मिलेगा। यह रब का वादा है कि वह दुश्मन के मुल्क से लौट आएँगे। {31:17} तेरा मुस्तक़बिल पुरउम्मीद होगा, क्यूँकि तेरे बच्चे अपने वतन में वापस आएँगे।” यह रब का फ़रमान है। {31:18} “इस्राईल की गिर्या-ओ-ज़ारी मुझ तक पहुँच गई है। क्यूँकि वह कहता है, ‘हाय, तू ने मेरी सख़्त तादीब की है। मेरी यूँ तर्बियत हुई है जिस तरह बछड़े की होती है जब उस की गर्दन पर पहली बार जूआ रखा जाता है। ऐ रब, मुझे वापस ला ताकि मैं वापस आऊँ, क्यूँकि तू ही रब मेरा ख़ुदा है। {31:19} मेरे वापस आने पर मुझे नदामत मह्सूस हुई, और समझ आने पर मैं अपना सीना पीटने लगा। मुझे शर्मिन्दगी और रुस्वाई का शदीद एहसास हो रहा है, क्यूँकि अब मैं अपनी जवानी के शर्मनाक फल की फ़सल काट रहा हूँ।’ {31:20} लेकिन रब फ़रमाता है कि इस्राईल मेरा क़ीमती बेटा, मेरा लाडला है। गो मैं बार बार उस के ख़िलाफ़ बातें करता हूँ तो भी उसे याद करता रहता हूँ। इस लिए मेरा दिल उस के लिए तड़पता है, और लाज़िम है कि मैं उस पर तरस खाऊँ। {31:21} ऐ मेरी क़ौम, ऐसे निशान खड़े कर जिन से लोगों को सहीह रास्ते का पता चले! उस पक्की सड़क पर ध्यान दे जिस पर तू ने सफ़र किया है। ऐ कुंवारी इस्राईल, वापस आ, अपने इन शहरों में लौट आ! {31:22} ऐ बेवफ़ा बेटी, तू कब तक भटकती फिरेगी? रब ने मुल्क में एक नई चीज़ पैदा की है, यह कि आइन्दा औरत आदमी के गिर्द रहेगी।” {i31:23} इस्राईल और यहूदाह दुबारा आबाद हो जाएंगे {31:23} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “जब मैं इस्राईलियों को बहाल करूँगा तो मुल्क-ए-यहूदाह और उस के शहरों के बाशिन्दे दुबारा कहेंगे, ‘ऐ रास्ती के घर, ऐ मुक़द्दस पहाड़, रब तुझे बरकत दे!’ {31:24} तब यहूदाह और उस के शहर दुबारा आबाद होंगे। किसान भी मुल्क में बसेंगे, और वह भी जो अपने रेवड़ों के साथ इधर उधर फिरते हैं। {31:25} क्यूँकि मैं थकेमान्दों को नई ताक़त दूँगा और ग़श खाने वालों को तर-ओ-ताज़ा करूँगा।” {31:26} तब मैं जाग उठा और चारों तरफ़ देखा। मेरी नींद कितनी मीठी रही थी! {31:27} रब फ़रमाता है, “वह वक़्त आने वाला है जब मैं इस्राईल के घराने और यहूदाह के घराने का बीज बो कर इन्सान-ओ-हैवान की तादाद बढ़ा दूँगा। {31:28} पहले मैं ने बड़े ध्यान से उन्हें जड़ से उखाड़ दिया, गिरा दिया, ढा दिया, हाँ तबाह करके ख़ाक में मिला दिया। लेकिन आइन्दा मैं उतने ही ध्यान से उन्हें तामीर करूँगा, उन्हें पनीरी की तरह लगा दूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {31:29} “उस वक़्त लोग यह कहने से बाज़ आएँगे कि वालिदैन ने खट्टे अंगूर खाए, लेकिन दाँत उन के बच्चों के खट्टे हो गए हैं। {31:30} क्यूँकि अब से खट्टे अंगूर खाने वाले के अपने ही दाँत खट्टे होंगे। अब से उसी को सज़ा-ए-मौत दी जाएगी जो क़ुसूरवार है।” {i31:31} नया अह्द {31:31} रब फ़रमाता है, “ऐसे दिन आ रहे हैं जब मैं इस्राईल के घराने और यहूदाह के घराने के साथ एक नया अह्द बांधूँगा। {31:32} यह उस अह्द की मानिन्द नहीं होगा जो मैं ने उन के बापदादा के साथ उस दिन बांधा था जब मैं उन का हाथ पकड़ कर उन्हें मिस्र से निकाल लाया। क्यूँकि उन्हों ने वह अह्द तोड़ दिया, गो मैं उन का मालिक था।” यह रब का फ़रमान है। {31:33} “जो नया अह्द मैं उन दिनों के बाद इस्राईल के घराने के साथ बांधूँगा उस के तहत मैं अपनी शरीअत उन के अन्दर डाल कर उन के दिलों पर कन्दा करूँगा। तब मैं ही उन का ख़ुदा हूँगा, और वह मेरी क़ौम होंगे। {31:34} उस वक़्त से इस की ज़रूरत नहीं रहेगी कि कोई अपने पड़ोसी या भाई को तालीम दे कर कहे, ‘रब को जान लो।’ क्यूँकि छोटे से ले कर बड़े तक सब मुझे जानेंगे। क्यूँकि मैं उन का क़ुसूर मुआफ़ करूँगा और आइन्दा उन के गुनाहों को याद नहीं करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {31:35} रब फ़रमाता है, “मैं ही ने मुक़र्रर किया है कि दिन के वक़्त सूरज चमके और रात के वक़्त चाँद सितारों समेत रौशनी दे। मैं ही समुन्दर को यूँ उछाल देता हूँ कि उस की मौजें गरजने लगती हैं। रब्ब-उल-अफ़्वाज ही मेरा नाम है।” {31:36} रब फ़रमाता है, “जब तक यह क़ुदरती उसूल मेरे सामने क़ाइम रहेंगे उस वक़्त तक इस्राईल क़ौम मेरे सामने क़ाइम रहेगी। {31:37} क्या इन्सान आसमान की पैमाइश कर सकता है? या क्या वह ज़मीन की बुन्यादों की तफ़्तीश कर सकता है? हरगिज़ नहीं! इसी तरह यह मुमकिन ही नहीं कि मैं इस्राईल की पूरी क़ौम को उस के गुनाहों के सबब से रद्द करूँ।” यह रब का फ़रमान है। {i31:38} यरूशलम को नए सिरे से तामीर किया जाएगा {31:38} रब फ़रमाता है, “वह वक़्त आने वाला है जब यरूशलम को रब के लिए नए सिरे से तामीर किया जाएगा। तब उस की फ़सील हनन-एल के बुर्ज से ले कर कोने के दरवाज़े तक तय्यार हो जाएगी। {31:39} वहाँ से शहर की सरहद सीधी जरीब पहाड़ी तक पहुँचेगी, फिर जोआ की तरफ़ मुड़ेगी। {31:40} उस वक़्त जो वादी लाशों और भस्म हुई चर्बी की राख से नापाक हुई है वह पूरे तौर पर रब के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस होगी। उस की ढलानों पर के तमाम खेत भी वादी-ए-क़िद्रोन तक शामिल होंगे, बल्कि मशरिक़ में घोड़े के दरवाज़े के कोने तक सब कुछ मुक़द्दस होगा। आइन्दा शहर को न कभी दुबारा जड़ से उखाड़ा जाएगा, न तबाह किया जाएगा।” {i32:1} यरमियाह मुहासरे के दौरान खेत ख़रीदता है {32:1} यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह की हुकूमत के दसवें साल में रब यरमियाह से हमकलाम हुआ। उस वक़्त नबूकदनज़्ज़र जो 18 साल से बाबल का बादशाह था {32:2} अपनी फ़ौज के साथ यरूशलम का मुहासरा कर रहा था। यरमियाह उन दिनों में शाही महल के मुहाफ़िज़ों के सहन में क़ैद था। {32:3} सिदक़ियाह ने यह कह कर उसे गिरिफ़्तार किया था, “तू क्यूँ इस क़िस्म की पेशगोई सुनाता है? तू कहता है, ‘रब फ़रमाता है कि मैं इस शहर को शाह-ए-बाबल के हाथ में देने वाला हूँ। जब वह उस पर क़ब्ज़ा करेगा {32:4} तो सिदक़ियाह बाबल की फ़ौज से नहीं बचेगा। उसे शाह-ए-बाबल के हवाले कर दिया जाएगा, और वह उस के रू-ब-रू उस से बात करेगा, अपनी आँखों से उसे देखेगा। {32:5} शाह-ए-बाबल सिदक़ियाह को बाबल ले जाएगा, और वहाँ वह उस वक़्त तक रहेगा जब तक मैं उसे दुबारा क़बूल न करूँ। रब फ़रमाता है कि अगर तुम बाबल की फ़ौज से लड़ो तो नाकाम रहोगे’।” {32:6} जब रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ तो यरमियाह ने कहा, “रब मुझ से हमकलाम हुआ, {32:7} ‘तेरा चचाज़ाद भाई हनम-एल बिन सल्लूम तेरे पास आ कर कहेगा कि अनतोत में मेरा खेत ख़रीद लें। आप सब से क़रीबी रिश्तेदार हैं, इस लिए उसे ख़रीदना आप का हक़ बल्कि फ़र्ज़ भी है ताकि ज़मीन हमारे ख़ानदान की मिलकियत रहे।’ {32:8} ऐसा ही हुआ जिस तरह रब ने फ़रमाया था। मेरा चचाज़ाद भाई हनम-एल शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में आया और मुझ से कहा, ‘बिनयमीन के क़बीले के शहर अनतोत में मेरा खेत ख़रीद लें। यह खेत ख़रीदना आप का मौरूसी हक़ बल्कि फ़र्ज़ भी है ताकि ज़मीन हमारे ख़ानदान की मिलकियत रहे। आएँ, उसे ख़रीद लें!’ तब मैं ने जान लिया कि यह वही बात है जो रब ने फ़रमाई थी। {32:9} चुनाँचे मैं ने अपने चचाज़ाद भाई हनम-एल से अनतोत का खेत ख़रीद कर उसे चाँदी के 17 सिक्के दे दिए। {32:10} मैं ने इन्तिक़ालनामा लिख कर उस पर मुहर लगाई, फिर चाँदी के सिक्के तोल कर अपने भाई को दे दिए। मैं ने गवाह भी बुलाए थे ताकि वह पूरी कार-रवाई की तस्दीक़ करें। {32:11} इस के बाद मैं ने मुहरशुदा इन्तिक़ालनामा तमाम शराइत और क़वाइद समेत बारूक बिन नैरियाह बिन मह्सियाह के सपुर्द कर दिया। साथ साथ मैं ने उसे एक {32:12} नक़ल भी दी जिस पर मुहर नहीं लगी थी। हनम-एल, इन्तिक़ालनामे पर दस्तख़त करने वाले गवाह और सहन में हाज़िर बाक़ी हमवतन सब इस के गवाह थे। {32:13} उन के देखते देखते मैं ने बारूक को हिदायत दी, {32:14} ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मुहरशुदा इन्तिक़ालनामा और उस की नक़ल ले कर मिट्टी के बर्तन में डाल दे ताकि लम्बे अर्से तक मह्फ़ूज़ रहें। {32:15} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि एक वक़्त आएगा जब इस मुल्क में दुबारा घर, खेत और अंगूर के बाग़ ख़रीदे जाएंगे।’ {i32:16} यरमियाह अल्लाह की तम्जीद करता है {32:16} बारूक बिन नैरियाह को इन्तिक़ालनामा देने के बाद मैं ने रब से दुआ की, {32:17} ‘ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, तू ने अपना हाथ बढ़ा कर बड़ी क़ुदरत से आसमान-ओ-ज़मीन को बनाया, तेरे लिए कोई भी काम नामुमकिन नहीं। {32:18} तू हज़ारों पर शफ़्क़त करता और साथ साथ बच्चों को उन के वालिदैन के गुनाहों की सज़ा देता है। ऐ अज़ीम और क़ादिर ख़ुदा जिस का नाम रब्ब-उल-अफ़्वाज है, {32:19} तेरे मक़ासिद अज़ीम और तेरे काम ज़बरदस्त हैं, तेरी आँखें इन्सान की तमाम राहों को देखती रहती हैं। तू हर एक को उस के चाल-चलन और आमाल का मुनासिब अज्र देता है। {32:20} मिस्र में तू ने इलाही निशान और मोजिज़े दिखाए, और तेरा यह सिलसिला आज तक जारी रहा है, इस्राईल में भी और बाक़ी क़ौमों में भी। यूँ तेरे नाम को वह इज़्ज़त-ओ-जलाल मिला जो तुझे आज तक हासिल है। {32:21} तू इलाही निशान और मोजिज़े दिखा कर अपनी क़ौम इस्राईल को मिस्र से निकाल लाया। तू ने अपना हाथ बढ़ा कर अपनी अज़ीम क़ुदरत मिस्रियों पर ज़ाहिर की तो उन पर शदीद दह्शत तारी हुई। {32:22} तब तू ने अपनी क़ौम को यह मुल्क बख़्श दिया जिस में दूध और शहद की कस्रत थी और जिस का वादा तू ने क़सम खा कर उन के बापदादा से किया था। {32:23} लेकिन जब हमारे बापदादा ने मुल्क में दाख़िल हो कर उस पर क़ब्ज़ा किया तो उन्हों ने न तेरी सुनी, न तेरी शरीअत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारी। जो कुछ भी तू ने उन्हें करने को कहा था उस पर उन्हों ने अमल न किया। नतीजे में तू उन पर यह आफ़त लाया। {32:24} दुश्मन मिट्टी के पुश्ते बना कर फ़सील के क़रीब पहुँच चुका है। हम तलवार, काल और मोहलक बीमारियों से इतने कमज़ोर हो गए हैं कि जब बाबल की फ़ौज शहर पर हम्ला करेगी तो वह उस के क़ब्ज़े में आएगा। जो कुछ भी तू ने फ़रमाया था वह पेश आया है। तू ख़ुद इस का गवाह है। {32:25} लेकिन ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, कमाल है कि गो शहर को बाबल की फ़ौज के हवाले किया जाएगा तो भी तू मुझ से हमकलाम हुआ है कि चाँदी दे कर खेत ख़रीद ले और गवाहों से कार-रवाई की तस्दीक़ करवा’।” {i32:26} रब का जवाब {32:26} तब रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {32:27} “देख, मैं रब और तमाम इन्सानों का ख़ुदा हूँ। तो फिर क्या कोई काम है जो मुझ से नहीं हो सकता?” {32:28} चुनाँचे रब फ़रमाता है, “मैं इस शहर को बाबल और उस के बादशाह नबूकदनज़्ज़र के हवाले कर दूँगा। वह ज़रूर उस पर क़ब्ज़ा करेगा। {32:29} बाबल के जो फ़ौजी इस शहर पर हम्ला कर रहे हैं इस में घुस कर सब कुछ जला देंगे, सब कुछ नज़र-ए-आतिश करेंगे। तब वह तमाम घर राख हो जाएंगे जिन की छतों पर लोगों ने बाल देवता के लिए बख़ूर जला कर और अजनबी माबूदों को मै की नज़रें पेश करके मुझे तैश दिलाया।” {32:30} रब फ़रमाता है, “इस्राईल और यहूदाह के क़बीले जवानी से ले कर आज तक वही कुछ करते आए हैं जो मुझे नापसन्द है। अपने हाथों के काम से वह मुझे बार बार ग़ुस्सा दिलाते रहे हैं। {32:31} यरूशलम की बुन्यादें डालने से ले कर आज तक इस शहर ने मुझे हद से ज़्यादा मुश्तइल कर दिया है। अब लाज़िम है कि मैं उसे नज़रों से दूर कर दूँ। {32:32} क्यूँकि इस्राईल और यहूदाह के बाशिन्दों ने अपनी बुरी हरकतों से मुझे तैश दिलाया है, ख़्वाह बादशाह हो या मुलाज़िम, ख़्वाह इमाम हो या नबी, ख़्वाह यहूदाह हो या यरूशलम। {32:33} उन्हों ने अपना मुँह मुझ से फेर कर मेरी तरफ़ रुजू करने से इन्कार किया है। गो मैं उन्हें बार बार तालीम देता रहा तो भी वह सुनने या मेरी तर्बियत क़बूल करने के लिए तय्यार नहीं थे। {32:34} न सिर्फ़ यह बल्कि जिस घर पर मेरे नाम का ठप्पा लगा है उस में उन्हों ने अपने घिनौने बुतों को रख कर उस की बेहुरमती की है। {32:35} वादी-ए-बिन-हिन्नूम की ऊँची जगहों पर उन्हों ने बाल देवता की क़ुर्बानगाहें तामीर कीं ताकि वहाँ अपने बेटे-बेटियों को मलिक देवता के लिए क़ुर्बान करें। मैं ने उन्हें ऐसी क़ाबिल-ए-घिन हरकतें करने का हुक्म नहीं दिया था, बल्कि मुझे इस का ख़याल तक नहीं आया। यूँ उन्हों ने यहूदाह को गुनाह करने पर उकसाया है। {32:36} इस वक़्त तुम कह रहे हो, ‘यह शहर ज़रूर शाह-ए-बाबल के क़ब्ज़े में आ जाएगा, क्यूँकि तलवार, काल और मोहलक बीमारियों ने हमें कमज़ोर कर दिया है।’ लेकिन अब शहर के बारे में रब का फ़रमान सुनो, जो इस्राईल का ख़ुदा है! {32:37} बेशक मैं बड़े तैश में आ कर शहर के बाशिन्दों को मुख़्तलिफ़ ममालिक में मुन्तशिर कर दूँगा, लेकिन मैं उन्हें उन जगहों से फिर जमा करके वापस भी लाऊँगा ताकि वह दुबारा यहाँ सुकून के साथ रह सकें। {32:38} तब वह मेरी क़ौम होंगे, और मैं उन का ख़ुदा हूँगा। {32:39} मैं होने दूँगा कि वह सोच और चाल-चलन में एक हो कर हर वक़्त मेरा ख़ौफ़ मानेंगे। क्यूँकि उन्हें मालूम होगा कि ऐसा करने से हमें और हमारी औलाद को बरकत मिलेगी। {32:40} मैं उन के साथ अबदी अह्द बांध कर वादा करूँगा कि उन पर शफ़्क़त करने से बाज़ नहीं आऊँगा। साथ साथ मैं अपना ख़ौफ़ उन के दिलों में डाल दूँगा ताकि वह मुझ से दूर न हो जाएँ। {32:41} उन्हें बरकत देना मेरे लिए ख़ुशी का बाइस होगा, और मैं वफ़ादारी और पूरे दिल-ओ-जान से उन्हें पनीरी की तरह इस मुल्क में दुबारा लगा दूँगा।” {32:42} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “मैं ही ने यह बड़ी आफ़त इस क़ौम पर नाज़िल की, और मैं ही उन्हें उन तमाम बरकतों से नवाज़ूँगा जिन का वादा मैं ने किया है। {32:43} बेशक तुम इस वक़्त कहते हो, ‘हाय, हमारा मुल्क वीरान-ओ-सुन्सान है, उस में न इन्सान और न हैवान रह गया है, क्यूँकि सब कुछ बाबल के हवाले कर दिया गया है।’ लेकिन मैं फ़रमाता हूँ कि पूरे मुल्क में दुबारा खेत ख़रीदे {32:44} और फ़रोख़्त किए जाएंगे। लोग मामूल के मुताबिक़ इन्तिक़ालनामे लिख कर उन पर मुहर लगाएँगे और कार-रवाई की तस्दीक़ के लिए गवाह बुलाएँगे। तमाम इलाक़े यानी बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े में, यरूशलम के दीहात में, यहूदाह और पहाड़ी इलाक़े के शहरों में, मग़रिब के नशेबी पहाड़ी इलाक़े के शहरों में और दश्त-ए-नजब के शहरों में ऐसा ही किया जाएगा। मैं ख़ुद उन की बदनसीबी ख़त्म करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {i33:1} यरूशलम में दुबारा ख़ुशी होगी {33:1} यरमियाह अब तक शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में गिरिफ़्तार था कि रब एक बार फिर उस से हमकलाम हुआ, {33:2} “जो सब कुछ ख़ल्क़ करता, तश्कील देता और क़ाइम रखता है उस का नाम रब है। यही रब फ़रमाता है, {33:3} मुझे पुकार तो मैं तुझे जवाब में ऐसी अज़ीम और नाक़ाबिल-ए-फ़हम बातें बयान करूँगा जो तू नहीं जानता। {33:4} क्यूँकि रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि तुम ने इस शहर के मकानों बल्कि चन्द एक शाही मकानों को भी ढा दिया है ताकि उन के पत्थरों और लकड़ी से फ़सील को मज़बूत करो और शहर को दुश्मन के पुश्तों और तलवार से बचाए रखो। {33:5} गो तुम बाबल की फ़ौज से लड़ना चाहते हो, लेकिन शहर के घर इस्राईलियों की लाशों से भर जाएंगे। क्यूँकि उन ही पर मैं अपना ग़ज़ब नाज़िल करूँगा। यरूशलम की तमाम बेदीनी के बाइस मैं ने अपना मुँह उस से छुपा लिया है। {33:6} लेकिन बाद में मैं उसे शिफ़ा दे कर तन्दुरुस्ती बख़्शूँगा, मैं उस के बाशिन्दों को सेहत अता करूँगा और उन पर देरपा सलामती और वफ़ादारी का इज़हार करूँगा। {33:7} क्यूँकि मैं यहूदाह और इस्राईल को बहाल करके उन्हें वैसे तामीर करूँगा जैसे पहले थे। {33:8} मैं उन्हें उन की तमाम बेदीनी से पाक-साफ़ करके उन की तमाम सरकशी और तमाम गुनाहों को मुआफ़ कर दूँगा। {33:9} तब यरूशलम पूरी दुनिया में मेरे लिए मुसर्रत, शोहरत, तारीफ़ और जलाल का बाइस बनेगा। दुनिया के तमाम ममालिक मेरी उस पर मेहरबानी देख कर मुतअस्सिर हो जाएंगे। वह घबरा कर काँप उठेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि मैं ने यरूशलम को कितनी बरकत और सुकून मुहय्या किया है। {33:10} तुम कहते हो, ‘हमारा शहर वीरान-ओ-सुन्सान है। उस में न इन्सान, न हैवान रहते हैं।’ लेकिन रब फ़रमाता है कि यरूशलम और यहूदाह के दीगर शहरों की जो गलियाँ इस वक़्त वीरान और इन्सान-ओ-हैवान से ख़ाली हैं, {33:11} उन में दुबारा ख़ुशी-ओ-शादमानी, दूल्हे दुल्हन की आवाज़ और रब के घर में शुक्रगुज़ारी की क़ुर्बानियाँ पहुँचाने वालों के गीत सुनाई देंगे। उस वक़्त वह गाएँगे, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज का शुक्र करो, क्यूँकि रब भला है, और उस की शफ़्क़त अबदी है।’ क्यूँकि मैं इस मुल्क को पहले की तरह बहाल कर दूँगा। यह रब का फ़रमान है। {33:12} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है कि फ़िलहाल यह मक़ाम वीरान और इन्सान-ओ-हैवान से ख़ाली है। लेकिन आइन्दा यहाँ और बाक़ी तमाम शहरों में दुबारा ऐसी चरागाहें होंगी जहाँ गल्लाबान अपने रेवड़ों को चराएँगे। {33:13} तब पूरे मुल्क में चरवाहे अपने रेवड़ों को गिनते और सँभालते हुए नज़र आएँगे, ख़्वाह पहाड़ी इलाक़े के शहरों या मग़रिब के नशेबी पहाड़ी इलाक़े में देखो, ख़्वाह दश्त-ए-नजब या बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े में मालूम करो, ख़्वाह यरूशलम के दीहात या यहूदाह के बाक़ी शहरों में दरयाफ़्त करो। यह रब का फ़रमान है। {i33:14} अबदी अह्द का वादा {33:14} रब फ़रमाता है कि ऐसा वक़्त आने वाला है जब मैं वह अच्छा वादा पूरा करूँगा जो मैं ने इस्राईल के घराने और यहूदाह के घराने से किया है। {33:15} उस वक़्त मैं दाऊद की नस्ल से एक रास्तबाज़ कोंपल फूटने दूँगा, और वही मुल्क में इन्साफ़ और रास्ती क़ाइम करेगा। {33:16} उन दिनों में यहूदाह को छुटकारा मिलेगा और यरूशलम पुरअम्न ज़िन्दगी गुज़ारेगा। तब यरूशलम ‘रब हमारी रास्ती’ कहलाएगा। {33:17} क्यूँकि रब फ़रमाता है कि इस्राईल के तख़्त पर बैठने वाला हमेशा ही दाऊद की नस्ल का होगा। {33:18} इसी तरह रब के घर में ख़िदमतगुज़ार इमाम हमेशा ही लावी के क़बीले के होंगे। वही मुतवातिर मेरे हुज़ूर भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ और ग़ल्ला और ज़बह की क़ुर्बानियाँ पेश करेंगे।” {33:19} रब एक बार फिर यरमियाह से हमकलाम हुआ, {33:20} “रब फ़रमाता है कि मैं ने दिन और रात से अह्द बांधा है कि वह मुक़र्ररा वक़्त पर और तरतीबवार गुज़रें। कोई इस अह्द को तोड़ नहीं सकता। {33:21} इसी तरह मैं ने अपने ख़ादिम दाऊद से भी अह्द बांध कर वादा किया कि इस्राईल का बादशाह हमेशा उसी की नस्ल का होगा। नीज़, मैं ने लावी के इमामों से भी अह्द बांध कर वादा किया कि रब के घर में ख़िदमतगुज़ार इमाम हमेशा लावी के क़बीले के ही होंगे। रात और दिन से बंधे हुए अह्द की तरह इन अह्दों को भी तोड़ा नहीं जा सकता। {33:22} मैं अपने ख़ादिम दाऊद की औलाद और अपने ख़िदमतगुज़ार लावियों को सितारों और समुन्दर की रेत जैसा बेशुमार बना दूँगा।” {33:23} रब यरमियाह से एक बार फिर हमकलाम हुआ, {33:24} “क्या तुझे लोगों की बातें मालूम नहीं हुईं? यह कह रहे हैं, ‘गो रब ने इस्राईल और यहूदाह को चुन कर अपनी क़ौम बना लिया था, लेकिन अब उस ने दोनों को रद्द कर दिया है।’ यूँ वह मेरी क़ौम को हक़ीर जानते हैं बल्कि इसे अब से क़ौम ही नहीं समझते।” {33:25} लेकिन रब फ़रमाता है, “जो अह्द मैं ने दिन और रात से बांधा है वह मैं नहीं तोड़ूँगा, न कभी आसमान-ओ-ज़मीन के मुक़र्ररा उसूल मन्सूख़ करूँगा। {33:26} इसी तरह यह मुमकिन ही नहीं कि मैं याक़ूब और अपने ख़ादिम दाऊद की औलाद को कभी रद्द करूँ। नहीं, मैं हमेशा ही दाऊद की नस्ल में से किसी को तख़्त पर बिठाऊँगा ताकि वह इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब की औलाद पर हुकूमत करे, क्यूँकि मैं उन्हें बहाल करके उन पर तरस खाऊँगा।” {i34:1} सिदक़ियाह बाबल की क़ैद में मर जाएगा {34:1} रब उस वक़्त यरमियाह से हमकलाम हुआ जब शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र अपनी पूरी फ़ौज ले कर यरूशलम और यहूदाह के तमाम शहरों पर हम्ला कर रहा था। उस के साथ दुनिया के उन तमाम ममालिक और क़ौमों की फ़ौजें थीं जिन्हें उस ने अपने ताबे कर लिया था। {34:2} “रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह के पास जा कर उसे बता, रब फ़रमाता है कि मैं इस शहर यरूशलम को शाह-ए-बाबल के हवाले करने को हूँ, और वह इसे नज़र-ए-आतिश कर देगा। {34:3} तू भी उस के हाथ से नहीं बचेगा बल्कि ज़रूर पकड़ा जाएगा। तुझे उस के हवाले किया जाएगा, और तू शाह-ए-बाबल को अपनी आँखों से देखेगा, वह तेरे रू-ब-रू तुझ से बात करेगा। फिर तुझे बाबल जाना पड़ेगा। {34:4} लेकिन ऐ सिदक़ियाह बादशाह, रब का यह फ़रमान भी सुन! रब तेरे बारे में फ़रमाता है कि तू तलवार से नहीं {34:5} बल्कि तबई मौत मरेगा, और लोग उसी तरह तेरी ताज़ीम में लकड़ी का बड़ा ढेर बना कर आग लगाएँगे जिस तरह तेरे बापदादा के लिए करते आए हैं। वह तुझ पर भी मातम करेंगे और कहेंगे, ‘हाय, मेरे आक़ा’!” यह रब का फ़रमान है। {34:6} यरमियाह नबी ने सिदक़ियाह बादशाह को यरूशलम में यह पैग़ाम सुनाया। {34:7} उस वक़्त बाबल की फ़ौज यरूशलम, लकीस और अज़ीक़ा से लड़ रही थी। यहूदाह के तमाम क़िलाबन्द शहरों में से यही तीन अब तक क़ाइम रहे थे। {i34:8} ग़ुलामों के साथ बेवफ़ाई {34:8} रब का कलाम एक बार फिर यरमियाह पर नाज़िल हुआ। उस वक़्त सिदक़ियाह बादशाह ने यरूशलम के बाशिन्दों के साथ अह्द बांधा था कि हम अपने हमवतन ग़ुलामों को आज़ाद कर देंगे। {34:9} हर एक ने अपने हमवतन ग़ुलामों और लौंडियों को आज़ाद करने का वादा किया था, क्यूँकि सब मुत्तफ़िक़ हुए थे कि हम अपने हमवतनों को ग़ुलामी में नहीं रखेंगे। {34:10} तमाम बुज़ुर्ग और बाक़ी तमाम लोग यह करने पर राज़ी हुए थे। यह अह्द करने पर उन्हों ने अपने ग़ुलामों को वाक़ई आज़ाद कर दिया था। {34:11} लेकिन बाद में वह अपना इरादा बदल कर अपने आज़ाद किए हुए ग़ुलामों को वापस लाए और उन्हें दुबारा अपने ग़ुलाम बना लिया था। {34:12} तब रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। {34:13} “रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘जब मैं तुम्हारे बापदादा को मिस्र की ग़ुलामी से निकाल लाया तो मैं ने उन से अह्द बांधा। उस की एक शर्त यह थी {34:14} कि जब किसी हमवतन ने अपने आप को बेच कर छः साल तक तेरी ख़िदमत की है तो लाज़िम है कि सातवें साल तू उसे आज़ाद कर दे। यह शर्त तुम सब पर सादिक़ आती है। लेकिन अफ़्सोस, तुम्हारे बापदादा ने न मेरी सुनी, न मेरी बात पर ध्यान दिया। {34:15} अब तुम ने पछता कर वह कुछ किया जो मुझे पसन्द था। हर एक ने एलान किया कि हम अपने हमवतन ग़ुलामों को आज़ाद कर देंगे। तुम उस घर में आए जिस पर मेरे नाम का ठप्पा लगा है और अह्द बांध कर मेरे हुज़ूर उस वादे की तस्दीक़ की। {34:16} लेकिन अब तुम ने अपना इरादा बदल कर मेरे नाम की बेहुरमती की है। अपने ग़ुलामों और लौंडियों को आज़ाद कर देने के बाद हर एक उन्हें अपने पास वापस लाया है। पहले तुम ने उन्हें बताया कि जहाँ जी चाहो चले जाओ, और अब तुम ने उन्हें दुबारा ग़ुलाम बनने पर मज्बूर किया है।’ {34:17} चुनाँचे सुनो जो कुछ रब फ़रमाता है! ‘तुम ने मेरी नहीं सुनी, क्यूँकि तुम ने अपने हमवतन ग़ुलामों को आज़ाद नहीं छोड़ा। इस लिए अब रब तुम्हें तलवार, मोहलक बीमारियों और काल के लिए आज़ाद छोड़ देगा। तुम्हें देख कर दुनिया के तमाम ममालिक के रोंगटे खड़े हो जाएंगे।’ यह रब का फ़रमान है। {34:18} ‘देखो, यहूदाह और यरूशलम के बुज़ुर्गों, दरबारियों, इमामों और अवाम ने मेरे साथ अह्द बांधा। इस की तस्दीक़ करने के लिए वह एक बछड़े को दो हिस्सों में तक़्सीम करके उन के दरमियान से गुज़र {34:19} गए। तो भी उन्हों ने अह्द तोड़ कर उस की शराइत पूरी न कीं। चुनाँचे मैं होने दूँगा कि वह उस बछड़े की मानिन्द हो जाएँ जिस के दो हिस्सों में से वह गुज़र गए हैं। {34:20} मैं उन्हें उन के दुश्मनों के हवाले कर दूँगा, उन ही के हवाले जो उन्हें जान से मारने के दरपै हैं। उन की लाशें परिन्दों और जंगली जानवरों की ख़ुराक बन जाएँगी। {34:21} मैं यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह और उस के अफ़्सरों को उन के दुश्मन के हवाले कर दूँगा, उन ही के हवाले जो उन्हें जान से मारने पर तुले हुए हैं। वह यक़ीनन शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र की फ़ौज के क़ब्ज़े में आ जाएंगे। क्यूँकि गो फ़ौजी इस वक़्त पीछे हट गए हैं, {34:22} लेकिन मेरे हुक्म पर वह वापस आ कर यरूशलम पर हम्ला करेंगे। और इस मर्तबा वह उस पर क़ब्ज़ा करके उसे नज़र-ए-आतिश कर देंगे। मैं यहूदाह के शहरों को भी यूँ ख़ाक में मिला दूँगा कि कोई उन में नहीं रह सकेगा’।” यह रब का फ़रमान है। {i35:1} यरमियाह रैकाबियों को आज़माता है {35:1} जब यहूयक़ीम बिन यूसियाह अभी यहूदाह का बादशाह था तो रब मुझ से हमकलाम हुआ, {35:2} “रैकाबी ख़ानदान के पास जा कर उन्हें रब के घर के सहन के किसी कमरे में आने की दावत दे। जब वह आएँ तो उन्हें मै पिला दे।” {35:3} चुनाँचे मैं याज़नियाह बिन यरमियाह बिन हबस्सिनियाह के पास गया और उसे उस के भाइयों और तमाम बेटों यानी रैकाबियों के पूरे घराने समेत {35:4} रब के घर में लाया। हम हनान के बेटों के कमरे में बैठ गए। हनान मर्द-ए-ख़ुदा यिज्दलियाह का बेटा था। यह कमरा बुज़ुर्गों के कमरे से मुल्हिक़ और रब के घर के दरबान मासियाह बिन सल्लूम के कमरे के ऊपर था। {35:5} वहाँ मैं ने मै के जाम और प्याले रैकाबी आदमियों को पेश करके उन से कहा, “आएँ, कुछ मै पी लें।” {35:6} लेकिन उन्हों ने इन्कार करके कहा, “हम मै नहीं पीते, क्यूँकि हमारे बाप यूनदब बिन रैकाब ने हमें और हमारी औलाद को मै पीने से मना किया है। {35:7} उस ने हमें यह हिदायत भी दी, ‘न मकान तामीर करना, न बीज बोना और न अंगूर का बाग़ लगाना। यह चीज़ें कभी भी तुम्हारी मिलकियत में शामिल न हों, क्यूँकि लाज़िम है कि तुम हमेशा ख़ैमों में ज़िन्दगी गुज़ारो। फिर तुम लम्बे अर्से तक उस मुल्क में रहोगे जिस में तुम मेहमान हो।’ {35:8} चुनाँचे हम अपने बाप यूनदब बिन रैकाब की इन तमाम हिदायात के ताबे रहते हैं। न हम और न हमारी बीवियाँ या बच्चे कभी मै पीते हैं। {35:9} हम अपनी रिहाइश के लिए मकान नहीं बनाते, और न अंगूर के बाग़, न खेत या फ़सलें हमारी मिलकियत में होती हैं। {35:10} इस के बजाए हम आज तक ख़ैमों में रहते हैं। जो भी हिदायत हमारे बाप यूनदब ने हमें दी उस पर हम पूरे उतरे हैं। {35:11} हम सिर्फ़ आरिज़ी तौर पर शहर में ठहरे हुए हैं। क्यूँकि जब शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र इस मुल्क में घुस आया तो हम बोले, ‘आएँ, हम यरूशलम शहर में जाएँ ताकि बाबल और शाम की फ़ौजों से बच जाएँ।’ हम सिर्फ़ इसी लिए यरूशलम में ठहरे हुए हैं।” {35:12} तब रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ, {35:13} “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों के पास जा कर कह, ‘तुम मेरी तर्बियत क्यूँ क़बूल नहीं करते? तुम मेरी क्यूँ नहीं सुनते? {35:14} यूनदब बिन रैकाब पर ग़ौर करो। उस ने अपनी औलाद को मै पीने से मना किया, इस लिए उस का घराना आज तक मै नहीं पीता। यह लोग अपने बाप की हिदायात के ताबे रहते हैं। इस के मुक़ाबले में तुम लोग क्या कर रहे हो? गो मैं बार बार तुम से हमकलाम हुआ तो भी तुम ने मेरी नहीं सुनी। {35:15} बार बार मैं अपने नबियों को तुम्हारे पास भेजता रहा ताकि मेरे ख़ादिम तुम्हें आगाह करते रहें कि हर एक अपनी बुरी राह तर्क करके वापस आए! अपना चाल-चलन दुरुस्त करो और अजनबी माबूदों की पैरवी करके उन की ख़िदमत मत करो! फिर तुम उस मुल्क में रहोगे जो मैं ने तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को बख़्श दिया था। लेकिन तुम ने न तवज्जुह दी, न मेरी सुनी। {35:16} यूनदब बिन रैकाब की औलाद अपने बाप की हिदायात पर पूरी उतरी है, लेकिन इस क़ौम ने मेरी नहीं सुनी।’ {35:17} इस लिए रब जो लश्करों का और इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘सुनो! मैं यहूदाह पर और यरूशलम के हर बाशिन्दे पर वह तमाम आफ़त नाज़िल करूँगा जिस का एलान मैं ने किया है। गो मैं उन से हमकलाम हुआ तो भी उन्हों ने न सुनी। मैं ने उन्हें बुलाया, लेकिन उन्हों ने जवाब न दिया’।” {35:18} लेकिन रैकाबियों से यरमियाह ने कहा, “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘तुम अपने बाप यूनदब के हुक्म पर पूरे उतर कर उस की हर हिदायत और हर हुक्म पर अमल करते हो।’ {35:19} इस लिए रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘यूनदब बिन रैकाब की औलाद में से हमेशा कोई न कोई होगा जो मेरे हुज़ूर ख़िदमत करेगा’।” {i36:1} रब के घर में यरमियाह की किताब की तिलावत {36:1} यहूदाह के बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह की हुकूमत के चौथे साल में रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {36:2} “तूमार ले कर उस में इस्राईल, यहूदाह और बाक़ी तमाम क़ौमों के बारे में वह तमाम पैग़ामात क़लमबन्द कर जो मैं ने यूसियाह की हुकूमत से ले कर आज तक तुझ पर नाज़िल किए हैं। {36:3} शायद यहूदाह के घराने में हर एक अपनी बुरी राह से बाज़ आ कर वापस आए अगर उस आफ़त की पूरी ख़बर उन तक पहुँचे जो मैं इस क़ौम पर नाज़िल करने को हूँ। फिर मैं उन की बेदीनी और गुनाह को मुआफ़ करूँगा।” {36:4} चुनाँचे यरमियाह ने बारूक बिन नैरियाह को बुला कर उस से वह तमाम पैग़ामात तूमार में लिखवाए जो रब ने उस पर नाज़िल किए थे। {36:5} फिर यरमियाह ने बारूक से कहा, “मुझे नज़रबन्द किया गया है, इस लिए मैं रब के घर में नहीं जा सकता। {36:6} लेकिन आप तो जा सकते हैं। रोज़े के दिन यह तूमार अपने साथ ले कर रब के घर में जाएँ। हाज़िरीन के सामने रब की उन तमाम बातों को पढ़ कर सुनाएँ जो मैं ने आप से लिखवाई हैं। सब को तूमार की बातें सुनाएँ, उन्हें भी जो यहूदाह की दीगर आबादियों से यहाँ पहुँचे हैं। {36:7} शायद वह इल्तिजा करें कि रब उन पर रहम करे। शायद हर एक अपनी बुरी राह से बाज़ आ कर वापस आए। क्यूँकि जो ग़ज़ब इस क़ौम पर नाज़िल होने वाला है और जिस का एलान रब कर चुका है वह बहुत सख़्त है।” {36:8} बारूक बिन नैरियाह ने ऐसा ही किया। यरमियाह नबी की हिदायत के मुताबिक़ उस ने रब के घर में तूमार में दर्ज रब के कलाम की तिलावत की। {36:9} उस वक़्त लोग रोज़ा रखे हुए थे, क्यूँकि बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह की हुकूमत के पाँचवें साल और नवें महीने में एलान किया गया था कि यरूशलम के बाशिन्दे और यहूदाह के दीगर शहरों से आए हुए तमाम लोग रब के हुज़ूर रोज़ा रखें। {36:10} जब बारूक ने तूमार की तिलावत की तो तमाम लोग हाज़िर थे। उस वक़्त वह रब के घर में शाही मुहर्रिर जमरियाह बिन साफ़न के कमरे में बैठा था। यह कमरा रब के घर के ऊपर वाले सहन में था, और सहन का नया दरवाज़ा वहाँ से दूर नहीं था। {36:11} तूमार में दर्ज रब के तमाम पैग़ामात सुन कर जमरियाह बिन साफ़न का बेटा मीकायाह {36:12} शाही महल में मीरमुन्शी के दफ़्तर में चला गया। वहाँ तमाम सरकारी अफ़्सर बैठे थे यानी इलीसमा मीरमुन्शी, दिलायाह बिन समायाह, इल्नातन बिन अक्बोर, जमरियाह बिन साफ़न, सिदक़ियाह बिन हननियाह और बाक़ी तमाम मुलाज़िम। {36:13} मीकायाह ने उन्हें सब कुछ सुनाया जो बारूक ने तूमार की तिलावत करके पेश किया था। {36:14} तब तमाम बुज़ुर्गों ने यहूदी बिन नतनियाह बिन सलमियाह बिन कूशी को बारूक के पास भेज कर उसे इत्तिला दी, “जिस तूमार की तिलावत आप ने लोगों के सामने की उसे ले कर हमारे पास आएँ।” चुनाँचे बारूक बिन नैरियाह हाथ में तूमार को थामे हुए उन के पास आया। {36:15} अफ़्सरों ने कहा, “ज़रा बैठ कर हमारे लिए भी तूमार की तिलावत करें।” चुनाँचे बारूक ने उन्हें सब कुछ पढ़ कर सुना दिया। {36:16} यरमियाह की तमाम पेशगोइयाँ सुनते ही वह घबरा गए और डर के मारे एक दूसरे को देखने लगे। फिर उन्हों ने बारूक से कहा, “लाज़िम है कि हम बादशाह को इन तमाम बातों से आगाह करें। {36:17} हमें ज़रा बताएँ, आप ने यह तमाम बातें किस तरह क़लमबन्द कीं? क्या यरमियाह ने सब कुछ ज़बानी आप को पेश किया?” {36:18} बारूक ने जवाब दिया, “जी, वह मुझे यह तमाम बातें सुनाता गया, और मैं सब कुछ सियाही से इस तूमार में दर्ज करता गया।” {36:19} यह सुन कर अफ़्सरों ने बारूक से कहा, “अब चले जाएँ, आप और यरमियाह दोनों छुप जाएँ! किसी को भी पता न चले कि आप कहाँ हैं।” {i36:20} यहूयक़ीम तूमार को जला देता है {36:20} अफ़्सरों ने तूमार को शाही मीरमुन्शी इलीसमा के दफ़्तर में मह्फ़ूज़ रख दिया, फिर दरबार में दाख़िल हो कर बादशाह को सब कुछ बता दिया। {36:21} बादशाह ने यहूदी को तूमार ले आने का हुक्म दिया। यहूदी, इलीसमा मीरमुन्शी के दफ़्तर से तूमार को ले कर बादशाह और तमाम अफ़्सरों की मौजूदगी में उस की तिलावत करने लगा। {36:22} चूँकि नवाँ महीना था इस लिए बादशाह महल के उस हिस्से में बैठा था जो सर्दियों के मौसम के लिए बनाया गया था। उस के सामने पड़ी अंगीठी में आग जल रही थी। {36:23} जब भी यहूदी तीन या चार कालम पढ़ने से फ़ारिग़ हुआ तो बादशाह ने मुन्शी की छुरी ले कर उन्हें तूमार से काट लिया और आग में फैंक दिया। यहूदी पढ़ता और बादशाह काटता गया। आख़िरकार पूरा तूमार राख हो गया था। {36:24} गो बादशाह और उस के तमाम मुलाज़िमों ने यह तमाम बातें सुनीं तो भी न वह घबराए, न उन्हों ने परेशान हो कर अपने कपड़े फाड़े। {36:25} और गो इल्नातन, दिलायाह और जमरियाह ने बादशाह से मिन्नत की कि वह तूमार को न जलाए तो भी उस ने उन की न मानी {36:26} बल्कि बाद में यरहमिएल शाहज़ादा, सिरायाह बिन अज़्रीएल और सलमियाह बिन अब्दिएल को भेजा ताकि वह बारूक मुन्शी और यरमियाह नबी को गिरिफ़्तार करें। लेकिन रब ने उन्हें छुपाए रखा था। {i36:27} अल्लाह का कलाम दुबारा क़लमबन्द किया जाता है {36:27} बादशाह के तूमार को जलाने के बाद रब यरमियाह से दुबारा हमकलाम हुआ, {36:28} “नया तूमार ले कर उस में वही तमाम पैग़ामात क़लमबन्द कर जो उस तूमार में दर्ज थे जिसे शाह-ए-यहूदाह ने जला दिया था। {36:29} साथ साथ यहूयक़ीम के बारे में एलान कर कि रब फ़रमाता है, ‘तू ने तूमार को जला कर यरमियाह से शिकायत की कि तू ने इस किताब में क्यूँ लिखा है कि शाह-ए-बाबल ज़रूर आ कर इस मुल्क को तबाह करेगा, और इस में न इन्सान, न हैवान रहेगा?’ {36:30} चुनाँचे यहूदाह के बादशाह के बारे में रब का फ़ैसला सुन! आइन्दा उस के ख़ानदान का कोई भी फ़र्द दाऊद के तख़्त पर नहीं बैठेगा। यहूयक़ीम की लाश बाहर फैंकी जाएगी, और वहाँ वह खुले मैदान में पड़ी रहेगी। कोई भी उसे दिन की तपती गर्मी या रात की शदीद सर्दी से बचाए नहीं रखेगा। {36:31} मैं उसे उस के बच्चों और मुलाज़िमों समेत उन की बेदीनी का मुनासिब अज्र दूँगा। क्यूँकि मैं उन पर और यरूशलम और यहूदाह के बाशिन्दों पर वह तमाम आफ़त नाज़िल करूँगा जिस का एलान मैं कर चुका हूँ। अफ़्सोस, उन्हों ने मेरी नहीं सुनी।” {36:32} चुनाँचे यरमियाह ने नया तूमार ले कर उसे बारूक बिन नैरियाह को दे दिया। फिर उस ने बारूक मुन्शी से वह तमाम पैग़ामात दुबारा लिखवाए जो उस तूमार में दर्ज थे जिसे शाह-ए-यहूदाह यहूयक़ीम ने जला दिया था। उन के इलावा मज़ीद बहुत से पैग़ामात का इज़ाफ़ा हुआ। {i37:1} मिस्र सिदक़ियाह की मदद नहीं कर सकता {37:1} यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम को तख़्त से उतारने के बाद शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने सिदक़ियाह बिन यूसियाह को तख़्त पर बिठा दिया। {37:2} लेकिन न सिदक़ियाह, न उस के अफ़्सरों या अवाम ने उन पैग़ामात पर ध्यान दिया जो रब ने यरमियाह नबी की मारिफ़त फ़रमाए थे। {37:3} एक दिन सिदक़ियाह बादशाह ने यहूकल बिन सलमियाह और इमाम सफ़नियाह बिन मासियाह को यरमियाह के पास भेजा ताकि वह गुज़ारिश करें, “मेहरबानी करके रब हमारे ख़ुदा से हमारी शफ़ाअत करें।” {37:4} यरमियाह को अब तक क़ैद में डाला नहीं गया था, इस लिए वह आज़ादी से लोगों में चल फिर सकता था। {37:5} उस वक़्त फ़िरऔन की फ़ौज मिस्र से निकल कर इस्राईल की तरफ़ बढ़ रही थी। जब यरूशलम का मुहासरा करने वाली बाबल की फ़ौज को यह ख़बर मिली तो वह वहाँ से पीछे हट गई। {37:6} तब रब यरमियाह नबी से हमकलाम हुआ, {37:7} “रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि शाह-ए-यहूदाह ने तुम्हें मेरी मर्ज़ी दरयाफ़्त करने भेजा है। उसे जवाब दो कि फ़िरऔन की जो फ़ौज तुम्हारी मदद करने के लिए निकल आई है वह अपने मुल्क वापस लौटने को है। {37:8} फिर बाबल के फ़ौजी वापस आ कर यरूशलम पर हम्ला करेंगे। वह इसे अपने क़ब्ज़े में ले कर नज़र-ए-आतिश कर देंगे। {37:9} क्यूँकि रब फ़रमाता है कि यह सोच कर धोका मत खाओ कि बाबल की फ़ौज ज़रूर हमें छोड़ कर चली जाएगी। ऐसा कभी नहीं होगा! {37:10} ख़्वाह तुम हम्लाआवर पूरी बाबली फ़ौज को शिकस्त क्यूँ न देते और सिर्फ़ ज़ख़्मी आदमी बचे रहते तो भी तुम नाकाम रहते, तो भी यह बाज़ एक आदमी अपने ख़ैमों में से निकल कर यरूशलम को नज़र-ए-आतिश करते।” {i37:11} यरमियाह को क़ैद में डाला जाता है {37:11} जब फ़िरऔन की फ़ौज इस्राईल की तरफ़ बढ़ने लगी तो बाबल के फ़ौजी यरूशलम को छोड़ कर पीछे हट गए। {37:12} उन दिनों में यरमियाह बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े के लिए रवाना हुआ, क्यूँकि वह अपने रिश्तेदारों के साथ कोई मौरूसी मिलकियत तक़्सीम करना चाहता था। लेकिन जब वह शहर से निकलते हुए {37:13} बिनयमीन के दरवाज़े तक पहुँच गया तो पहरेदारों का एक अफ़्सर उसे पकड़ कर कहने लगा, “तुम भगोड़े हो! तुम बाबल की फ़ौज के पास जाना चाहते हो!” अफ़्सर का नाम इरियाह बिन सलमियाह बिन हननियाह था। {37:14} यरमियाह ने एतिराज़ किया, “यह झूट है, मैं भगोड़ा नहीं हूँ! मैं बाबल की फ़ौज के पास नहीं जा रहा।” लेकिन इरियाह न माना बल्कि उसे गिरिफ़्तार करके सरकारी अफ़्सरों के पास ले गया। {37:15} उसे देख कर उन्हें यरमियाह पर ग़ुस्सा आया, और वह उस की पिटाई करा कर उसे शाही मुहर्रिर यूनतन के घर में लाए जिसे उन्हों ने क़ैदख़ाना बनाया था। {37:16} वहाँ उसे एक ज़मीनदोज़ कमरे में डाल दिया गया जो पहले हौज़ था और जिस की छत मेहराबदार थी। वह मुतअद्दिद दिन उस में बन्द रहा। {37:17} एक दिन सिदक़ियाह ने उसे महल में बुलाया। वहाँ अलाहिदगी में उस से पूछा, “क्या रब की तरफ़ से मेरे लिए कोई पैग़ाम है?” यरमियाह ने जवाब दिया, “जी हाँ। आप को शाह-ए-बाबल के हवाले किया जाएगा।” {37:18} तब यरमियाह ने सिदक़ियाह बादशाह से अपनी बात जारी रख कर कहा, “मुझ से क्या जुर्म हुआ है? मैं ने आप के अफ़्सरों और अवाम का क्या क़ुसूर किया है कि मुझे जेल में डलवा दिया? {37:19} आप के वह नबी कहाँ हैं जिन्हों ने आप को पेशगोई सुनाई कि शाह-ए-बाबल न आप पर, न इस मुल्क पर हम्ला करेगा? {37:20} ऐ मेरे मालिक और बादशाह, मेहरबानी करके मेरी बात सुनें, मेरी गुज़ारिश पूरी करें! मुझे यूनतन मुहर्रिर के घर में वापस न भेजें, वर्ना मैं मर जाऊँगा।” {37:21} तब सिदक़ियाह बादशाह ने हुक्म दिया कि यरमियाह को शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में रखा जाए। उस ने यह हिदायत भी दी कि जब तक शहर में रोटी दस्तयाब हो यरमियाह को नानबाई-गली से हर रोज़ एक रोटी मिलती रहे। चुनाँचे यरमियाह मुहाफ़िज़ों के सहन में रहने लगा। {i38:1} यरमियाह को सज़ा-ए-मौत देने का इरादा {38:1} सफ़तियाह बिन मत्तान, जिदलियाह बिन फ़श्हूर, यूकल बिन सलमियाह और फ़श्हूर बिन मल्कियाह को मालूम हुआ कि यरमियाह तमाम लोगों को बता रहा है {38:2} कि रब फ़रमाता है, “अगर तुम तलवार, काल या वबा से मरना चाहो तो इस शहर में रहो। लेकिन अगर तुम अपनी जान को बचाना चाहो तो शहर से निकल कर अपने आप को बाबल की फ़ौज के हवाले करो। जो कोई यह करे उस की जान छूट जाएगी। {38:3} क्यूँकि रब फ़रमाता है कि यरूशलम को ज़रूर शाह-ए-बाबल की फ़ौज के हवाले किया जाएगा। वह यक़ीनन उस पर क़ब्ज़ा करेगा।” {38:4} तब मज़कूरा अफ़्सरों ने बादशाह से कहा, “इस आदमी को सज़ा-ए-मौत दीनी चाहिए, क्यूँकि यह शहर में बचे हुए फ़ौजियों और बाक़ी तमाम लोगों को ऐसी बातें बता रहा है जिन से वह हिम्मत हार गए हैं। यह आदमी क़ौम की बहबूदी नहीं चाहता बल्कि उसे मुसीबत में डालने पर तुला रहता है।” {38:5} सिदक़ियाह बादशाह ने जवाब दिया, “ठीक है, वह आप के हाथ में है। मैं आप को रोक नहीं सकता।” {38:6} तब उन्हों ने यरमियाह को पकड़ कर मल्कियाह शाहज़ादा के हौज़ में डाल दिया। यह हौज़ शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में था। रस्सों के ज़रीए उन्हों ने यरमियाह को उतार दिया। हौज़ में पानी नहीं था बल्कि सिर्फ़ कीचड़, और यरमियाह कीचड़ में धँस गया। {38:7} लेकिन एथोपिया के एक दरबारी बनाम अबद-मलिक को पता चला कि यरमियाह के साथ क्या कुछ किया जा रहा है। जब बादशाह शहर के दरवाज़े बनाम बिनयमीन में कचहरी लगाए बैठा था {38:8} तो अबद-मलिक शाही महल से निकल कर उस के पास गया और कहा, {38:9} “मेरे आक़ा और बादशाह, जो सुलूक इन आदमियों ने यरमियाह के साथ किया है वह निहायत बुरा है। उन्हों ने उसे एक हौज़ में फैंक दिया है जहाँ वह भूका मरेगा। क्यूँकि शहर में रोटी ख़त्म हो गई है।” {38:10} यह सुन कर बादशाह ने अबद-मलिक को हुक्म दिया, “इस से पहले कि यरमियाह मर जाए यहाँ से 30 आदमियों को ले कर नबी को हौज़ से निकाल दें।” {38:11} अबद-मलिक आदमियों को अपने साथ ले कर शाही महल के गोदाम के नीचे के एक कमरे में गया। वहाँ से उस ने कुछ पुराने चीथड़े और घिसे फटे कपड़े चुन कर उन्हें रस्सों के ज़रीए हौज़ में यरमियाह तक उतार दिया। {38:12} अबद-मलिक बोला, “रस्से बांधने से पहले यह पुराने चीथड़े और घिसे फटे कपड़े बग़ल में रखें।” यरमियाह ने ऐसा ही किया, {38:13} तो वह उसे रस्सों से खैंच कर हौज़ से निकाल लाए। इस के बाद यरमियाह शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में रहा। {i38:14} सिदक़ियाह को आख़िरी मर्तबा आगाह किया जाता है {38:14} एक दिन सिदक़ियाह बादशाह ने यरमियाह को रब के घर के तीसरे दरवाज़े के पास बुला कर उस से कहा, “मैं आप से एक बात दरयाफ़्त करना चाहता हूँ। मुझे इस का साफ़ जवाब दें, कोई भी बात मुझ से मत छुपाएँ।” {38:15} यरमियाह ने एतिराज़ किया, “अगर मैं आप को साफ़ जवाब दूँ तो आप मुझे मार डालेंगे। और अगर मैं आप को मश्वरा दूँ भी तो आप उसे क़बूल नहीं करेंगे।” {38:16} तब सिदक़ियाह बादशाह ने अलाहिदगी में क़सम खा कर यरमियाह से वादा किया, “रब की हयात की क़सम जिस ने हमें जान दी है, न मैं आप को मार डालूँगा, न आप के जानी दुश्मनों के हवाले करूँगा।” {38:17} तब यरमियाह बोला, “रब जो लश्करों का और इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘अपने आप को शाह-ए-बाबल के अफ़्सरान के हवाले कर। फिर तेरी जान छूट जाएगी और यह शहर नज़र-ए-आतिश नहीं हो जाएगा। तू और तेरा ख़ानदान जीता रहेगा। {38:18} दूसरी सूरत में इस शहर को बाबल के हवाले किया जाएगा और फ़ौजी इसे नज़र-ए-आतिश करेंगे। तू भी उन के हाथ से नहीं बचेगा’।” {38:19} लेकिन सिदक़ियाह बादशाह ने एतिराज़ किया, “मुझे उन हमवतनों से डर लगता है जो ग़द्दारी करके बाबल की फ़ौज के पास भाग गए हैं। हो सकता है कि बाबल के फ़ौजी मुझे उन के हवाले करें और वह मेरे साथ बदसुलूकी करें।” {38:20} यरमियाह ने जवाब दिया, “वह आप को उन के हवाले नहीं करेंगे। रब की सुन कर वह कुछ करें जो मैं ने आप को बताया है। फिर आप की सलामती होगी और आप की जान छूट जाएगी। {38:21} लेकिन अगर आप शहर से निकल कर हथियार डालने के लिए तय्यार नहीं हैं तो फिर यह पैग़ाम सुनें जो रब ने मुझ पर ज़ाहिर किया है! {38:22} शाही महल में जितनी ख़वातीन बच गई हैं उन सब को शाह-ए-बाबल के अफ़्सरों के पास पहुँचाया जाएगा। तब यह ख़वातीन आप के बारे में कहेंगी, ‘हाय, जिन आदमियों पर तू पूरा एतिमाद रखता था वह फ़रेब दे कर तुझ पर ग़ालिब आ गए हैं। तेरे पाँओ दलदल में धँस गए हैं, लेकिन यह लोग ग़ाइब हो गए हैं।’ {38:23} हाँ, तेरे तमाम बाल-बच्चों को बाहर बाबल की फ़ौज के पास लाया जाएगा। तू ख़ुद भी उन के हाथ से नहीं बचेगा बल्कि शाह-ए-बाबल तुझे पकड़ लेगा। यह शहर नज़र-ए-आतिश हो जाएगा।” {38:24} फिर सिदक़ियाह ने यरमियाह से कहा, “ख़बरदार! किसी को भी यह मालूम न हो कि हम ने क्या क्या बातें की हैं, वर्ना आप मर जाएंगे। {38:25} जब मेरे अफ़्सरों को पता चले कि मेरी आप से गुफ़्तगु हुई है तो वह आप के पास आ कर पूछेंगे, ‘तुम ने बादशाह से क्या बात की, और बादशाह ने तुम से क्या कहा? हमें साफ़ जवाब दो और झूट न बोलो, वर्ना हम तुम्हें मार डालेंगे।’ {38:26} जब वह इस तरह की बातें करेंगे तो उन्हें सिर्फ़ इतना सा बताएँ, ‘मैं बादशाह से मिन्नत कर रहा था कि वह मुझे यूनतन के घर में वापस न भेजें, वर्ना मैं मर जाऊँगा’।” {38:27} ऐसा ही हुआ। तमाम सरकारी अफ़्सर यरमियाह के पास आए और उस से सवाल करने लगे। लेकिन उस ने उन्हें सिर्फ़ वह कुछ बताया जो बादशाह ने उसे कहने को कहा था। तब वह ख़ामोश हो गए, क्यूँकि किसी ने भी उस की बादशाह से गुफ़्तगु नहीं सुनी थी। {38:28} इस के बाद यरमियाह यरूशलम की शिकस्त तक शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में क़ैदी रहा। {i39:1} यरूशलम की शिकस्त {39:1} यरूशलम यूँ दुश्मन के हाथ में आया: यहूदाह के बादशाह के नवें साल और 10वें महीने में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र अपनी तमाम फ़ौज ले कर यरूशलम पहुँचा और शहर का मुहासरा करने लगा। {39:2} सिदक़ियाह के 11वें साल के चौथे महीने और नवें दिन दुश्मन ने फ़सील में रख़ना डाल दिया। {39:3} तब नबूकदनज़्ज़र के तमाम आला अफ़्सर शहर में आ कर उस के दरमियानी दरवाज़े में बैठ गए। उन में नैर्गल-सराज़र जो रब-माग था, सम्गर-नबू, सर-सकीम जो रब-सारीस था और शाह-ए-बाबल के बाक़ी बुज़ुर्ग शामिल थे। {39:4} उन्हें देख कर यहूदाह का बादशाह सिदक़ियाह और उस के तमाम फ़ौजी भाग गए। रात के वक़्त वह फ़सील के उस दरवाज़े से निकले जो शाही बाग़ के साथ मुल्हिक़ दो दीवारों के बीच में था। वह वादी-ए-यर्दन की तरफ़ दौड़ने लगे, {39:5} लेकिन बाबल के फ़ौजियों ने उन का ताक़्क़ुब करके सिदक़ियाह को यरीहू के मैदानी इलाक़े में पकड़ लिया। फिर उसे मुल्क-ए-हमात के शहर रिब्ला में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र के पास लाया गया, और वहीं उस ने सिदक़ियाह पर फ़ैसला सादिर किया। {39:6} सिदक़ियाह के देखते देखते शाह-ए-बाबल ने रिब्ला में उस के बेटों को क़त्ल किया। साथ साथ उस ने यहूदाह के तमाम बुज़ुर्गों को भी मौत के घाट उतार दिया। {39:7} फिर उस ने सिदक़ियाह की आँखें निकलवा कर उसे पीतल की ज़न्जीरों में जकड़ लिया और बाबल को ले जाने के लिए मह्फ़ूज़ रखा। {39:8} बाबल के फ़ौजियों ने शाही महल और दीगर लोगों के घरों को जला कर यरूशलम की फ़सील को गिरा दिया। {39:9} शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान ने सब को जिलावतन कर दिया जो यरूशलम और यहूदाह में पीछे रह गए थे। वह भी उन में शामिल थे जो जंग के दौरान ग़द्दारी करके शाह-ए-बाबल के पीछे लग गए थे। {39:10} लेकिन नबूज़रादान ने सब से निचले तब्क़े के बाज़ लोगों को मुल्क-ए-यहूदाह में छोड़ दिया, ऐसे लोग जिन के पास कुछ नहीं था। उन्हें उस ने उस वक़्त अंगूर के बाग़ और खेत दिए। {39:11} नबूकदनज़्ज़र बादशाह ने शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान को हुक्म दिया, “यरमियाह को अपने पास रखें। {39:12} उस का ख़याल रखें। उसे नुक़्सान न पहुँचाएँ बल्कि जो भी दरख़्वास्त वह करे उसे पूरा करें।” {39:13} चुनाँचे शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान ने किसी को यरमियाह के पास भेजा। उस वक़्त नबूशज़्बान जो रब-सारीस था, नैर्गल-सराज़र जो रब-माग था और शाह-ए-बाबल के बाक़ी अफ़्सर नबूज़रादान के पास थे। {39:14} यरमियाह अब तक शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में गिरिफ़्तार था। उन्हों ने हुक्म दिया कि उसे वहाँ से निकाल कर जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम बिन साफ़न के हवाले कर दिया जाए ताकि वह उसे उस के अपने घर पहुँचा दे। यूँ यरमियाह अपने लोगों के दरमियान बसने लगा। {i39:15} अबद-मलिक के लिए ख़ुशख़बरी {39:15} जब यरमियाह अभी शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में गिरिफ़्तार था तो रब उस से हमकलाम हुआ, {39:16} “जा कर एथोपिया के अबद-मलिक को बता, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि देख, मैं इस शहर के साथ वह सब कुछ करने को हूँ जिस का एलान मैं ने किया था। मैं उस पर मेहरबानी नहीं करूँगा बल्कि उसे नुक़्सान पहुँचाऊँगा। तू अपनी आँखों से यह देखेगा। {39:17} लेकिन रब फ़रमाता है कि तुझे मैं उस दिन छुटकारा दूँगा, तुझे उन के हवाले नहीं किया जाएगा जिन से तू डरता है। {39:18} मैं ख़ुद तुझे बचाऊँगा। चूँकि तू ने मुझ पर भरोसा किया इस लिए तू तलवार की ज़द में नहीं आएगा बल्कि तेरी जान छूट जाएगी। यह रब का फ़रमान है’।” {i40:1} यरमियाह को आज़ाद किया जाता है {40:1} आज़ाद होने के बाद भी रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान ने उसे रामा में रिहा किया था। क्यूँकि जब यरूशलम और बाक़ी यहूदाह के क़ैदियों को मुल्क-ए-बाबल में ले जाने के लिए जमा किया गया तो मालूम हुआ कि यरमियाह भी ज़न्जीरों में जकड़ा हुआ उन में शामिल है। {40:2} तब नबूज़रादान ने यरमियाह को बुला कर उस से कहा, “रब आप के ख़ुदा ने एलान किया था कि इस जगह पर आफ़त आएगी। {40:3} और अब वह यह आफ़त उसी तरह ही लाया जिस तरह उस ने फ़रमाया था। सब कुछ इस लिए हुआ कि आप की क़ौम रब का गुनाह करती रही और उस की न सुनी। {40:4} लेकिन आज मैं वह ज़न्जीरें खोल देता हूँ जिन से आप के हाथ जकड़े हुए हैं। आप आज़ाद हैं। अगर चाहें तो मेरे साथ बाबल जाएँ। तब मैं ही आप की निगरानी करूँगा। बाक़ी आप की मर्ज़ी। अगर यहीं रहना पसन्द करेंगे तो यहीं रहें। पूरे मुल्क में जहाँ भी जाना चाहें जाएँ। कोई आप को नहीं रोकेगा।” {40:5} यरमियाह अब तक झिजक रहा था, इस लिए नबूज़रादान ने कहा, “फिर जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम बिन साफ़न के पास चले जाएँ! शाह-ए-बाबल ने उसे सूबा यहूदाह के शहरों पर मुक़र्रर किया है। उस के साथ रहें। या फिर जहाँ भी रहना पसन्द करें वहीं रहें।” नबूज़रादान ने यरमियाह को कुछ ख़ुराक और एक तोह्फ़ा दे कर उसे रुख़्सत कर दिया। {40:6} जिदलियाह मिस्फ़ाह में ठहरा हुआ था। यरमियाह उस के पास जा कर मुल्क के बचे हुए लोगों के बीच में बसने लगा। {i40:7} जिदलियाह को क़त्ल करने की साज़िशें {40:7} दीहात में अब तक यहूदाह के कुछ फ़ौजी अफ़्सर अपने दस्तों समेत छुपे रहते थे। जब उन्हें ख़बर मिली कि शाह-ए-बाबल ने जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम को यहूदाह का गवर्नर बना कर उन ग़रीब आदमियों और बाल-बच्चों पर मुक़र्रर किया है जो जिलावतन नहीं हुए हैं {40:8} तो वह मिस्फ़ाह में जिदलियाह के पास आए। अफ़्सरों के नाम इस्माईल बिन नतनियाह, क़रीह के बेटे यूहनान और यूनतन, सिरायाह बिन तन्हूमत, ईफी नतूफ़ाती के बेटे और याज़नियाह बिन माकाती थे। उन के फ़ौजी भी साथ आए। {40:9} जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम बिन साफ़न ने क़सम खा कर उन से वादा किया, “बाबल के ताबे हो जाने से मत डरना! मुल्क में आबाद हो कर शाह-ए-बाबल की ख़िदमत करें तो आप की सलामती होगी। {40:10} मैं ख़ुद मिस्फ़ाह में ठहर कर आप की सिफ़ारिश करूँगा जब बाबल के नुमाइन्दे आएँगे। इतने में अंगूर, मौसम-ए-गर्मा का फल और ज़ैतून की फ़सलें जमा करके अपने बर्तनों में मह्फ़ूज़ रखें। उन शहरों में आबाद रहें जिन पर आप ने क़ब्ज़ा कर लिया है।” {40:11} यहूदाह के मुतअद्दिद बाशिन्दे मोआब, अम्मोन, अदोम और दीगर पड़ोसी ममालिक में हिज्रत कर गए थे। अब जब उन्हें इत्तिला मिली कि शाह-ए-बाबल ने कुछ बचे हुए लोगों को यहूदाह में छोड़ कर जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम बिन साफ़न को गवर्नर बना दिया है {40:12} तो वह सब यहूदाह में वापस आए। जिन ममालिक में भी वह मुन्तशिर हुए थे वहाँ से वह मिस्फ़ाह आए ताकि जिदलियाह से मिलें। उस मौसम-ए-गर्मा में वह अंगूर और बाक़ी फल की बड़ी फ़सल जमा कर सके। {40:13} एक दिन यूहनान बिन क़रीह और वह तमाम फ़ौजी अफ़्सर जो अब तक दीहात में ठहरे हुए थे जिदलियाह से मिलने आए। {40:14} मिस्फ़ाह में पहुँच कर वह जिदलियाह से कहने लगे, “क्या आप को नहीं मालूम कि अम्मोन के बादशाह बालीस ने इस्माईल बिन नतनियाह को आप को क़त्ल करने के लिए भेजा है?” लेकिन जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम ने उन की बात का यक़ीन न किया। {40:15} तब यूहनान बिन क़रीह मिस्फ़ाह आया और अलाहिदगी में जिदलियाह से मिला। वह बोला, “मुझे इस्माईल बिन नतनियाह के पास जा कर उसे मार देने की इजाज़त दें। किसी को भी पता नहीं चलेगा। क्या ज़रूरत है कि वह आप को क़त्ल करे? अगर वह इस में कामयाब हो जाए तो आप के पास जमाशुदा हमवतन सब के सब मुन्तशिर हो जाएंगे और यहूदाह का बचा हुआ हिस्सा हलाक हो जाएगा।” {40:16} जिदलियाह ने यूहनान को डाँट कर कहा, “ऐसा मत करना! जो कुछ आप इस्माईल के बारे में बता रहे हैं वह झूट है।” {i41:1} इस्माईल जिदलियाह गवर्नर को क़त्ल करता है {41:1} इस्माईल बिन नतनियाह बिन इलीसमा शाही नस्ल का था और पहले शाह-ए-यहूदाह का आला अफ़्सर था। सातवें महीने में वह दस आदमियों को अपने साथ ले कर मिस्फ़ाह में जिदलियाह से मिलने आया। जब वह मिल कर खाना खा रहे थे {41:2} तो इस्माईल और उस के दस आदमी अचानक उठे और अपनी तलवारों को खैंच कर जिदलियाह को मार डाला। यूँ इस्माईल ने उस आदमी को क़त्ल किया जिसे बाबल के बादशाह ने सूबा यहूदाह पर मुक़र्रर किया था। {41:3} उस ने मिस्फ़ाह में जिदलियाह के साथ रहने वाले तमाम हमवतनों को भी क़त्ल किया और वहाँ ठहरने वाले बाबल के फ़ौजियों को भी। {41:4} अगले दिन जब किसी को मालूम नहीं था कि जिदलियाह को क़त्ल किया गया है {41:5} तो 80 आदमी वहाँ पहुँचे जो सिकम, सैला और सामरिया से आ कर रब के तबाहशुदा घर में उस की परस्तिश करने जा रहे थे। उन के पास ग़ल्ला और बख़ूर की क़ुर्बानियाँ थीं, और उन्हों ने ग़म के मारे अपनी दाढ़ियाँ मुंडवा कर अपने कपड़े फाड़ लिए और अपनी जिल्द को ज़ख़्मी कर दिया था। {41:6} इस्माईल रोते रोते मिस्फ़ाह से निकल कर उन से मिलने आया। जब वह उन के पास पहुँचा तो कहने लगा, “जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम के पास आओ और देखो कि क्या हुआ है!” {41:7} जूँ ही वह शहर में दाख़िल हुए तो इस्माईल और उस के साथियों ने उन्हें क़त्ल करके एक हौज़ में फैंक दिया। {41:8} सिर्फ़ दस आदमी बच गए जब उन्हों ने इस्माईल से कहा, “हमें मत क़त्ल करना, क्यूँकि हमारे पास गन्दुम, जौ और शहद के ज़ख़ीरे हैं जो हम ने खुले मैदान में कहीं छुपा रखे हैं।” यह सुन कर उस ने उन्हें दूसरों की तरह न मारा बल्कि ज़िन्दा छोड़ा। {41:9} जिस हौज़ में इस्माईल ने मज़कूरा आदमियों की लाशें फैंक दीं वह बहुत बड़ा था। यहूदाह के बादशाह आसा ने उसे उस वक़्त बनवाया था जब इस्राईली बादशाह बाशा से जंग थी और वह मिस्फ़ाह को मज़बूत बना रहा था। इस्माईल ने इसी हौज़ को मक़्तूलों से भर दिया था। {41:10} मिस्फ़ाह के बाक़ी लोगों को उस ने क़ैदी बना लिया। उन में यहूदाह के बादशाह की बेटियाँ और बाक़ी वह तमाम लोग शामिल थे जिन पर शाही मुहाफ़िज़ों के सरदार नबूज़रादान ने जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम को मुक़र्रर किया था। फिर इस्माईल उन सब को अपने साथ ले कर मुल्क-ए-अम्मोन के लिए रवाना हुआ। {41:11} लेकिन यूहनान बिन क़रीह और उस के साथी अफ़्सरों को इत्तिला दी गई कि इस्माईल से क्या जुर्म हुआ है। {41:12} तब वह अपने तमाम फ़ौजियों को जमा करके इस्माईल से लड़ने के लिए निकले और उस का ताक़्क़ुब करते करते उसे जिबऊन के जोहड़ के पास जा लिया। {41:13} जूँ ही इस्माईल के क़ैदियों ने यूहनान और उस के अफ़्सरों को देखा तो वह ख़ुश हुए। {41:14} सब ने इस्माईल को छोड़ दिया और मुड़ कर यूहनान के पास भाग आए। {41:15} इस्माईल आठ साथियों समेत फ़रार हुआ और यूहनान के हाथ से बच कर मुल्क-ए-अम्मोन में चला गया। {41:16} यूँ मिस्फ़ाह के बचे हुए तमाम लोग जिबऊन में यूहनान और उस के साथी अफ़्सरों के ज़ेर-ए-निगरानी आए। उन में वह तमाम फ़ौजी, ख़वातीन, बच्चे और दरबारी शामिल थे जिन्हें इस्माईल ने जिदलियाह को क़त्ल करने के बाद क़ैदी बनाया था। {41:17} लेकिन वह मिस्फ़ाह वापस न गए बल्कि आगे चलते चलते बैत-लहम के क़रीब के गाँव बनाम सराय-किम्हाम में रुक गए। वहाँ वह मिस्र के लिए रवाना होने की तय्यारियाँ करने लगे, {41:18} क्यूँकि वह बाबल के इन्तिक़ाम से डरते थे, इस लिए कि जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम को क़त्ल करने से इस्माईल बिन नतनियाह ने उस आदमी को मौत के घाट उतारा था जिसे शाह-ए-बाबल ने यहूदाह का गवर्नर मुक़र्रर किया था। {i42:1} यरमियाह मिस्र न जाने का मश्वरा देता है {42:1} यूहनान बिन क़रीह, यज़नियाह बिन हूसायाह और दीगर फ़ौजी अफ़्सर बाक़ी तमाम लोगों के साथ छोटे से ले कर बड़े तक {42:2} यरमियाह नबी के पास आए और कहने लगे, “हमारी मिन्नत क़बूल करें और रब अपने ख़ुदा से हमारे लिए दुआ करें। आप ख़ुद देख सकते हैं कि गो हम पहले मुतअद्दिद लोग थे, लेकिन अब थोड़े ही रह गए हैं। {42:3} दुआ करें कि रब आप का ख़ुदा हमें दिखाए कि हम कहाँ जाएँ और क्या कुछ करें।” {42:4} यरमियाह ने जवाब दिया, “ठीक है, मैं दुआ में ज़रूर रब आप के ख़ुदा को आप की गुज़ारिश पेश करूँगा। और जो भी जवाब रब दे वह मैं लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ आप को बता दूँगा। मैं आप को किसी भी बात से महरूम नहीं रखूँगा।” {42:5} उन्हों ने कहा, “रब हमारा वफ़ादार और क़ाबिल-ए-एतिमाद गवाह है। अगर हम हर बात पर अमल न करें जो रब आप का ख़ुदा आप की मारिफ़त हम पर नाज़िल करेगा तो वही हमारे ख़िलाफ़ गवाही दे। {42:6} ख़्वाह उस की हिदायत हमें अच्छी लगे या बुरी, हम रब अपने ख़ुदा की सुनेंगे। क्यूँकि हम जानते हैं कि जब हम रब अपने ख़ुदा की सुनें तब ही हमारी सलामती होगी। इसी लिए हम आप को उस के पास भेज रहे हैं।” {42:7} दस दिन गुज़रने के बाद रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। {42:8} उस ने यूहनान, उस के साथी अफ़्सरों और बाक़ी तमाम लोगों को छोटे से ले कर बड़े तक अपने पास बुला कर {42:9} कहा, “आप ने मुझे रब इस्राईल के ख़ुदा के पास भेजा ताकि मैं आप की गुज़ारिश उस के सामने लाऊँ। अब उस का फ़रमान सुनें! {42:10} ‘अगर तुम इस मुल्क में रहो तो मैं तुम्हें नहीं गिराऊँगा बल्कि तामीर करूँगा, तुम्हें जड़ से नहीं उखाड़ूँगा बल्कि पनीरी की तरह लगा दूँगा। क्यूँकि मुझे उस मुसीबत पर अफ़्सोस है जिस में मैं ने तुम्हें मुब्तला किया है। {42:11} इस वक़्त तुम शाह-ए-बाबल से डरते हो, लेकिन उस से ख़ौफ़ मत खाना!’ रब फ़रमाता है, ‘उस से दह्शत न खाओ, क्यूँकि मैं तुम्हारे साथ हूँ और तुम्हारी मदद करके उस के हाथ से छुटकारा दूँगा। {42:12} मैं तुम पर रहम करूँगा, इस लिए वह भी तुम पर रहम करके तुम्हें तुम्हारे मुल्क में वापस आने देगा। {42:13} लेकिन अगर तुम रब अपने ख़ुदा की सुनने के लिए तय्यार न हो बल्कि कहो कि हम इस मुल्क में नहीं रहेंगे {42:14} बल्कि मिस्र जाएंगे जहाँ न जंग देखेंगे, न जंगी नरसिंगे की आवाज़ सुनेंगे और न भूके रहेंगे {42:15} तो रब का जवाब सुनो! ऐ यहूदाह के बचे हुए लोगो, रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि अगर तुम मिस्र में जा कर वहाँ पनाह लेने पर तुले हुए हो {42:16} तो यक़ीन जानो कि जिस तलवार और काल से तुम डरते हो वह वहीं मिस्र में तुम्हारा पीछा करता रहेगा। वहाँ जा कर तुम यक़ीनन मरोगे। {42:17} जितने भी मिस्र जा कर वहाँ रहने पर तुले हुए हों वह सब तलवार, काल और मोहलक बीमारियों की ज़द में आ कर मर जाएंगे। जिस मुसीबत में मैं उन्हें डाल दूँगा उस से कोई नहीं बचेगा।’ {42:18} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘पहले मेरा सख़्त ग़ज़ब यरूशलम के बाशिन्दों पर नाज़िल हुआ। अगर तुम मिस्र जाओ तो मेरा ग़ज़ब तुम पर भी नाज़िल होगा। तुम्हें देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और तुम उन की लान-तान और हिक़ारत का निशाना बनोगे। लानत करने वाला अपने दुश्मनों के लिए तुम्हारे जैसा अन्जाम चाहेगा। जहाँ तक तुम्हारे वतन का ताल्लुक़ है, तुम उसे आइन्दा कभी नहीं देखोगे।’ {42:19} ऐ यहूदाह के बचे हुए लोगो, अब रब आप से हमकलाम हुआ है। उस का जवाब साफ़ है। मिस्र को मत जाना! यह बात ख़ूब जान लें कि आज मैं ने आप को आगाह कर दिया है। {42:20} आप ने ख़ुद अपनी जान को ख़तरे में डाल दिया जब आप ने मुझे रब अपने ख़ुदा के पास भेज कर कहा, ‘रब हमारे ख़ुदा से हमारे लिए दुआ करें। उस का पूरा जवाब हमें सुनाएँ, क्यूँकि हम उस की तमाम बातों पर अमल करेंगे।’ {42:21} आज मैं ने यह किया है, लेकिन आप रब अपने ख़ुदा की सुनने के लिए तय्यार नहीं हैं। जो कुछ भी उस ने मुझे आप को सुनाने को कहा है उस पर आप अमल नहीं करना चाहते। {42:22} चुनाँचे अब जान लें कि जहाँ आप जा कर पनाह लेना चाहते हैं वहाँ आप तलवार, काल और मोहलक बीमारियों की ज़द में आ कर हलाक हो जाएंगे।” {i43:1} यरमियाह की आगाही को नज़रअन्दाज़ किया जाता है {43:1} यरमियाह ख़ामोश हुआ। जो कुछ भी रब उन के ख़ुदा ने यरमियाह को उन्हें सुनाने को कहा था उसे उस ने उन सब तक पहुँचाया था। {43:2} फिर अज़रियाह बिन हूसायाह, यूहनान बिन अख़ीक़ाम और तमाम बदतमीज़ आदमी बोल उठे, “तुम झूट बोल रहे हो! रब हमारे ख़ुदा ने तुम्हें यह सुनाने को नहीं भेजा कि मिस्र को न जाओ, न वहाँ आबाद हो जाओ। {43:3} इस के पीछे बारूक बिन नैरियाह का हाथ है। वही तुम्हें हमारे ख़िलाफ़ उकसा रहा है, क्यूँकि वह चाहता है कि हम बाबलियों के हाथ में आ जाएँ ताकि वह हमें क़त्ल करें या जिलावतन करके मुल्क-ए-बाबल ले जाएँ।” {43:4} ऐसी बातें करते करते यूहनान बिन क़रीह, दीगर फ़ौजी अफ़्सरों और बाक़ी तमाम लोगों ने रब का हुक्म रद्द किया। वह मुल्क-ए-यहूदाह में न रहे {43:5} बल्कि सब यूहनान और बाक़ी तमाम फ़ौजी अफ़्सरों की राहनुमाई में मिस्र चले गए। उन में यहूदाह के वह बचे हुए सब लोग शामिल थे जो पहले मुख़्तलिफ़ ममालिक में मुन्तशिर हुए थे, लेकिन अब यहूदाह में दुबारा आबाद होने के लिए वापस आए थे। {43:6} वह तमाम मर्द, औरतें और बच्चे बादशाह की बेटियों समेत भी उन में शामिल थे जिन्हें शाही मुहाफ़िज़ों के सरदार नबूज़रादान ने जिदलियाह बिन अख़ीक़ाम के सपुर्द किया था। यरमियाह नबी और बारूक बिन नैरियाह को भी साथ जाना पड़ा। {43:7} यूँ वह रब की हिदायत रद्द करके रवाना हुए और चलते चलते मिस्री सरहद के शहर तह्फ़न्हीस तक पहुँचे। {i43:8} शाह-ए-बाबल के मिस्र में घुस आने की पेशगोई {43:8} तह्फ़न्हीस में रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ, {43:9} “अपने हमवतनों की मौजूदगी में चन्द एक बड़े पत्थर फ़िरऔन के महल के दरवाज़े के क़रीब ले जा कर फ़र्श की कच्ची ईंटों के नीचे दबा दे। {43:10} फिर उन्हें बता दे, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं अपने ख़ादिम शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र को बुला कर यहाँ लाऊँगा और उस का तख़्त उन पत्थरों के ऊपर खड़ा करूँगा जो मैं ने यरमियाह के ज़रीए दबाए हैं। नबूकदनज़्ज़र उन ही के ऊपर अपना शाही तम्बू लगाएगा। {43:11} क्यूँकि वह आएगा और मिस्र पर हम्ला करके हर एक के साथ वह कुछ करेगा जो उस के नसीब में है। एक मर जाएगा, दूसरा क़ैद में जाएगा और तीसरा तलवार की ज़द में आएगा। {43:12} नबूकदनज़्ज़र मिस्री देवताओं के मन्दिरों को जला कर राख कर देगा और उन के बुतों पर क़ब्ज़ा करके उन्हें अपने साथ ले जाएगा। जिस तरह चरवाहा अपने कपड़े से जूएँ निकाल निकाल कर उसे साफ़ कर लेता है उसी तरह {43:13} शाह-ए-बाबल मिस्र को माल-ओ-मता से साफ़ करेगा। मिस्र आते वक़्त वह सूरज देवता के मन्दिर में जा कर उस के सतूनों को ढा देगा और बाक़ी मिस्री देवताओं के मन्दिर भी नज़र-ए-आतिश करेगा। फिर शाह-ए-बाबल सहीह-सलामत वहाँ से वापस चला जाएगा’।” {i44:1} तुम बुतपरस्ती से बाज़ क्यूँ नहीं आते? {44:1} रब का कलाम एक बार फिर यरमियाह पर नाज़िल हुआ। उस में वह उन तमाम हमवतनों से हमकलाम हुआ जो शिमाली मिस्र के शहरों मिज्दाल, तह्फ़न्हीस और मेम्फ़िस और जुनूबी मिस्र बनाम पत्रूस में रहते थे। {44:2} “रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘तुम ने ख़ुद वह बड़ी आफ़त देखी जो मैं यरूशलम और यहूदाह के दीगर तमाम शहरों पर लाया। आज वह वीरान-ओ-सुन्सान हैं, और उन में कोई नहीं बसता। {44:3} यूँ उन्हें उन की बुरी हरकतों का अज्र मिला। क्यूँकि अजनबी माबूदों के लिए बख़ूर जला कर उन की ख़िदमत करने से उन्हों ने मुझे तैश दिलाया। और यह ऐसे देवता थे जिन से पहले न वह, न तुम और न तुम्हारे बापदादा वाक़िफ़ थे। {44:4} बार बार मैं नबियों को उन के पास भेजता रहा, और बार बार मेरे ख़ादिम कहते रहे कि ऐसी घिनौनी हरकतें मत करना, क्यूँकि मुझे इन से नफ़रत है! {44:5} लेकिन उन्हों ने न सुनी, न ध्यान दिया। न वह अपनी बेदीनी से बाज़ आए, न अजनबी माबूदों को बख़ूर जलाने का सिलसिला बन्द किया। {44:6} तब मेरा शदीद ग़ज़ब उन पर नाज़िल हुआ। मेरे क़हर की ज़बरदस्त आग ने यहूदाह के शहरों और यरूशलम की गलियों में फैलते फैलते उन्हें वीरान-ओ-सुन्सान कर दिया। आज तक उन का यही हाल है।’ {44:7} अब रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘तुम अपना सत्यानास क्यूँ कर रहे हो? ऐसे क़दम उठाने से तुम यहूदाह से आए हुए मर्दों और औरतों को बच्चों और शीरख़्वारों समेत हलाकत की तरफ़ ला रहे हो। इस सूरत में एक भी नहीं बचेगा। {44:8} मुझे अपने हाथों के काम से तैश क्यूँ दिलाते हो? यहाँ मिस्र में पनाह ले कर तुम अजनबी माबूदों के लिए बख़ूर क्यूँ जलाते हो? इस से तुम अपने आप को नेस्त-ओ-नाबूद कर रहे हो, तुम दुनिया की तमाम क़ौमों के लिए लानत और मज़ाक़ का निशाना बनोगे। {44:9} क्या तुम अपनी क़ौम के संगीन गुनाहों को भूल गए हो? क्या तुम्हें वह कुछ याद नहीं जो तुम्हारे बापदादा, यहूदाह के राजे रानियों और तुम से तुम्हारी बीवियों समेत मुल्क-ए-यहूदाह और यरूशलम की गलियों में सरज़द हुआ है? {44:10} आज तक तुम ने न इनकिसारी का इज़हार किया, न मेरा ख़ौफ़ माना, और न मेरी शरीअत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारी। तुम उन हिदायात के ताबे न रहे जो मैं ने तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को अता की थीं।’ {44:11} चुनाँचे रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘मैं तुम पर आफ़त लाने का अटल इरादा रखता हूँ। तमाम यहूदाह ख़त्म हो जाएगा। {44:12} मैं यहूदाह के उस बचे हुए हिस्से को सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दूँगा जो मिस्र में जा कर पनाह लेने पर तुला हुआ था। सब मिस्र में हलाक हो जाएंगे, ख़्वाह तलवार से, ख़्वाह काल से। छोटे से ले कर बड़े तक सब के सब तलवार या काल की ज़द में आ कर मर जाएंगे। उन्हें देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और वह दूसरों की लान-तान और हिक़ारत का निशाना बनेंगे। लानत करने वाला अपने दुश्मनों के लिए उन ही का सा अन्जाम चाहेगा। {44:13} जिस तरह मैं ने यरूशलम को सज़ा दी ऐन उसी तरह मैं मिस्र में आने वाले हमवतनों को तलवार, काल और मोहलक बीमारियों से सज़ा दूँगा। {44:14} यहूदाह के जितने बचे हुए लोग यहाँ मिस्र में पनाह लेने के लिए आए हैं वह सब यहीं हलाक हो जाएंगे। कोई भी बच कर मुल्क-ए-यहूदाह में नहीं लौटेगा, गो तुम सब वहाँ दुबारा आबाद होने की शदीद आर्ज़ू रखते हो। सिर्फ़ चन्द एक इस में कामयाब हो जाएंगे’।” {i44:15} आसमानी मलिका की पूजा पर ज़िद {44:15} उस वक़्त शिमाली और जुनूबी मिस्र में रहने वाले यहूदाह के तमाम मर्द और औरतें एक बड़े इजतिमा के लिए जमा हुए थे। मर्दों को ख़ूब मालूम था कि हमारी बीवियाँ अजनबी माबूदों को बख़ूर की क़ुर्बानियाँ पेश करती हैं। अब उन्हों ने यरमियाह से कहा, {44:16} “जो बात आप ने रब का नाम ले कर हम से की है वह हम नहीं मानते। {44:17} हम उन तमाम बातों पर ज़रूर अमल करेंगे जो हम ने कही हैं। हम आसमानी मलिका देवी के लिए बख़ूर जलाएँगे और उसे मै की नज़रें पेश करेंगे। हम वही कुछ करेंगे जो हम, हमारे बापदादा, हमारे बादशाह और हमारे बुज़ुर्ग मुल्क-ए-यहूदाह और यरूशलम की गलियों में किया करते थे। क्यूँकि उस वक़्त रोटी की कस्रत थी और हमारा अच्छा हाल था। उस वक़्त हम किसी भी मुसीबत से दोचार न हुए। {44:18} लेकिन जब से हम आसमानी मलिका को बख़ूर और मै की नज़रें पेश करने से बाज़ आए हैं उस वक़्त से हर लिहाज़ से हाजतमन्द रहे हैं। उसी वक़्त से हम तलवार और काल की ज़द में आ कर नेस्त हो रहे हैं।” {44:19} औरतों ने बात जारी रख कर कहा, “क्या आप समझते हैं कि हमारे शौहरों को इस का इल्म नहीं था कि हम आसमानी मलिका को बख़ूर और मै की नज़रें पेश करती हैं, कि हम उस की शक्ल की टिक्कियाँ बना कर उस की पूजा करती हैं?” {i44:20} चन्द एक के बचने की पेशगोई {44:20} यरमियाह एतिराज़ करने वाले तमाम मर्दों और औरतों से दुबारा मुख़ातिब हुआ, {44:21} “देखो, रब ने उस बख़ूर पर ध्यान दिया जो तुम और तुम्हारे बापदादा ने बादशाहों, बुज़ुर्गों और अवाम समेत यहूदाह के शहरों और यरूशलम की गलियों में जलाया है। यह बात उसे ख़ूब याद है। {44:22} आख़िरकार एक वक़्त आया जब तुम्हारी शरीर और घिनौनी हरकतें क़ाबिल-ए-बर्दाश्त न रहीं, और रब को तुम्हें सज़ा देनी पड़ी। यही वजह है कि आज तुम्हारा मुल्क वीरान-ओ-सुन्सान है, कि उसे देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लानत करने वाला अपने दुश्मन के लिए ऐसा ही अन्जाम चाहता है। {44:23} आफ़त इसी लिए तुम पर आई कि तुम ने बुतों के लिए बख़ूर जला कर रब की न सुनी। न तुम ने उस की शरीअत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारी, न उस की हिदायात और अह्काम पर अमल किया। आज तक मुल्क का यही हाल रहा है।” {44:24} फिर यरमियाह ने तमाम लोगों से औरतों समेत कहा, “ऐ मिस्र में रहने वाले यहूदाह के तमाम हमवतनो, रब का कलाम सुनो! {44:25} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि तुम और तुम्हारी बीवियों ने इसरार किया है, ‘हम ज़रूर अपनी उन मन्नतों को पूरा करेंगे जो हम ने मानी हैं, हम ज़रूर आसमानी मलिका को बख़ूर और मै की नज़रें पेश करेंगे।’ और तुम ने अपने अल्फ़ाज़ और अपनी हरकतों से साबित कर दिया है कि तुम सन्जीदगी से अपने इस एलान पर अमल करना चाहते हो। तो ठीक है, अपना वादा और अपनी मन्नतें पूरी करो! {44:26} लेकिन ऐ मिस्र में रहने वाले तमाम हमवतनो, रब के कलाम पर ध्यान दो! रब फ़रमाता है कि मेरे अज़ीम नाम की क़सम, आइन्दा मिस्र में तुम में से कोई मेरा नाम ले कर क़सम नहीं खाएगा, कोई नहीं कहेगा, ‘रब क़ादिर-ए-मुतलक़ की हयात की क़सम!’ {44:27} क्यूँकि मैं तुम्हारी निगरानी कर रहा हूँ, लेकिन तुम पर मेहरबानी करने के लिए नहीं बल्कि तुम्हें नुक़्सान पहुँचाने के लिए। मिस्र में रहने वाले यहूदाह के तमाम लोग तलवार और काल की ज़द में आ जाएंगे और पिसते पिसते हलाक हो जाएंगे। {44:28} सिर्फ़ चन्द एक दुश्मन की तलवार से बच कर मुल्क-ए-यहूदाह वापस आएँगे। तब यहूदाह के जितने बचे हुए लोग मिस्र में पनाह लेने के लिए आए हैं वह सब जान लेंगे कि किस की बात दुरुस्त निकली है, मेरी या उन की। {44:29} रब फ़रमाता है कि मैं तुम्हें निशान भी देता हूँ ताकि तुम्हें यक़ीन हो जाए कि मैं तुम्हारे ख़िलाफ़ ख़ाली बातें नहीं कर रहा बल्कि तुम्हें यक़ीनन मिस्र में सज़ा दूँगा। {44:30} निशान यह होगा कि जिस तरह मैं ने यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह को उस के जानी दुश्मन नबूकदनज़्ज़र के हवाले कर दिया उसी तरह मैं हुफ़्रा फ़िरऔन को भी उस के जानी दुश्मनों के हवाले कर दूँगा। यह रब का फ़रमान है।” {i45:1} बारूक के लिए तसल्ली का पैग़ाम {45:1} यहूदाह के बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह की हुकूमत के चौथे साल में यरमियाह नबी को बारूक बिन नैरियाह के लिए रब का पैग़ाम मिला। उस वक़्त यरमियाह बारूक से वह तमाम बातें लिखवा रहा था जो उस पर नाज़िल हुई थीं। यरमियाह ने कहा, {45:2} “ऐ बारूक, रब इस्राईल का ख़ुदा तेरे बारे में फ़रमाता है {45:3} कि तू कहता है, ‘हाय, मुझ पर अफ़्सोस! रब ने मेरे दर्द में इज़ाफ़ा कर दिया है, अब मुझे रंज-ओ-अलम भी सहना पड़ता है। मैं कराहते कराहते थक गया हूँ। कहीं भी आराम-ओ-सुकून नहीं मिलता।’ {45:4} ऐ बारूक, रब जवाब में फ़रमाता है कि जो कुछ मैं ने ख़ुद तामीर किया उसे मैं गिरा दूँगा, जो पौदा मैं ने ख़ुद लगाया उसे जड़ से उखाड़ दूँगा। पूरे मुल्क के साथ ऐसा ही सुलूक करूँगा। {45:5} तो फिर तू अपने लिए क्यूँ बड़ी कामयाबी हासिल करने का आरज़ूमन्द है? ऐसा ख़याल छोड़ दे, क्यूँकि मैं तमाम इन्सानों पर आफ़त ला रहा हूँ। यह रब का फ़रमान है। लेकिन जहाँ भी तू जाए वहाँ मैं होने दूँगा कि तेरी जान छूट जाए।” {i46:1} मिस्र की शिकस्त की पेशगोई {46:1} यरमियाह पर मुख़्तलिफ़ क़ौमों के बारे में भी पैग़ामात नाज़िल हुए। यह ज़ैल में दर्ज हैं। {46:2} पहला पैग़ाम मिस्र के बारे में है। यहूदाह के बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह के चौथे साल में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने दरया-ए-फ़ुरात पर वाक़े शहर कर्किमीस के पास मिस्री फ़ौज को शिकस्त दी थी। उन दिनों में मिस्री बादशाह निकोह फ़िरऔन की फ़ौज के बारे में रब का कलाम नाज़िल हुआ, {46:3} “अपनी बड़ी और छोटी ढालें तय्यार करके जंग के लिए निकलो! {46:4} घोड़ों को रथों में जोतो! दीगर घोड़ों पर सवार हो जाओ! ख़ोद पहन कर खड़े हो जाओ! अपने नेज़ों को रौग़न से चमका कर ज़िराबक्तर पहन लो! {46:5} लेकिन मुझे क्या नज़र आ रहा है? मिस्री फ़ौजियों पर दह्शत तारी हुई है। वह पीछे हट रहे हैं, उन के सूरमाओं ने हथियार डाल दिए हैं। वह भाग भाग कर फ़रार हो रहे हैं और पीछे भी नहीं देखते। रब फ़रमाता है कि चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत फैल गई है। {46:6} किसी को भी बचने न दो, ख़्वाह वह कितनी तेज़ी से क्यूँ न भाग रहा हो या कितना ज़बरदस्त फ़ौजी क्यूँ न हो। शिमाल में दरया-ए-फ़ुरात के किनारे ही वह ठोकर खा कर गिर गए हैं। {46:7} यह क्या है जो दरया-ए-नील की तरह चढ़ रहा है, जो सैलाब बन कर सब कुछ ग़र्क़ कर रहा है? {46:8} मिस्र दरया-ए-नील की तरह चढ़ रहा है, वही सैलाब बन कर सब कुछ ग़र्क़ कर रहा है। वह कहता है, ‘मैं चढ़ कर पूरी ज़मीन को ग़र्क़ कर दूँगा। मैं शहरों को उन के बाशिन्दों समेत तबाह करूँगा।’ {46:9} ऐ घोड़ो, दुश्मन पर टूट पड़ो! ऐ रथो, दीवानों की तरह दौड़ो! ऐ फ़ौजियो, लड़ने के लिए निकलो! ऐ एथोपिया और लिबिया के सिपाहियो, अपनी ढालें पकड़ कर चलो, ऐ लुदिया के तीर चलाने वालो, अपने कमान तान कर आगे बढ़ो! {46:10} लेकिन आज क़ादिर-ए-मुतलक़, रब्ब-उल-अफ़्वाज का ही दिन है। इन्तिक़ाम के इस दिन वह अपने दुश्मनों से बदला लेगा। उस की तलवार उन्हें खा खा कर सेर हो जाएगी, और उन का ख़ून पी पी कर उस की प्यास बुझेगी। क्यूँकि शिमाल में दरया-ए-फ़ुरात के किनारे उन्हें क़ादिर-ए-मुतलक़, रब्ब-उल-अफ़्वाज को क़ुर्बान किया जाएगा। {46:11} ऐ कुंवारी मिस्र बेटी, मुल्क-ए-जिलिआद में जा कर अपने ज़ख़्मों के लिए बल्सान ख़रीद ले। लेकिन क्या फ़ाइदा? ख़्वाह तू कितनी दवाई क्यूँ न इस्तेमाल करे तेरी चोटें भर ही नहीं सकतीं! {46:12} तेरी शर्मिन्दगी की ख़बर दीगर अक़्वाम में फैल गई है, तेरी चीख़ें पूरी दुनिया में गूँज रही हैं। क्यूँकि तेरे सूरमे एक दूसरे से ठोकर खा कर गिर गए हैं।” {i46:13} शाह-ए-बाबल के मिस्र में घुस आने की पेशगोई {46:13} जब शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र मिस्र पर हम्ला करने आया तो रब इस के बारे में यरमियाह से हमकलाम हुआ, {46:14} “मिस्री शहरों मिज्दाल, मेम्फ़िस और तह्फ़न्हीस में एलान करो, ‘जंग की तय्यारियाँ करके लड़ने के लिए खड़े हो जाओ! क्यूँकि तलवार तुम्हारे आस-पास सब कुछ खा रही है।’ {46:15} ऐ मिस्र, तेरे सूरमाओं को ख़ाक में क्यूँ मिलाया गया है? वह खड़े नहीं रह सकते, क्यूँकि रब ने उन्हें दबा दिया है। {46:16} उस ने मुतअद्दिद अफ़राद को ठोकर खाने दिया, और वह एक दूसरे पर गिर गए। उन्हों ने कहा, ‘आओ, हम अपनी ही क़ौम और अपने वतन में वापस चले जाएँ जहाँ ज़ालिम की तलवार हम तक नहीं पहुँच सकती।’ {46:17} वहाँ वह पुकार उठे, ‘मिस्र का बादशाह शोर तो बहुत मचाता है लेकिन इस के पीछे कुछ भी नहीं। जो सुनहरा मौक़ा उसे मिला वह जाता रहा है’।” {46:18} दुनिया का बादशाह जिस का नाम रब्ब-उल-अफ़्वाज है फ़रमाता है, “मेरी हयात की क़सम, जो तुम पर हम्ला करने आ रहा है वह दूसरों से उतना बड़ा है जितना तबूर दीगर पहाड़ों से और कर्मिल समुन्दर से ऊँचा है। {46:19} ऐ मिस्र के बाशिन्दो, अपना माल-ओ-अस्बाब बांध कर जिलावतन होने की तय्यारियाँ करो। क्यूँकि मेम्फ़िस मिस्मार हो कर नज़र-ए-आतिश हो जाएगा। उस में कोई नहीं रहेगा। {46:20} मिस्र ख़ूबसूरत सी जवान गाय है, लेकिन शिमाल से मोहलक मक्खी आ कर उस पर धावा बोल रही है। हाँ, वह आ रही है। {46:21} मिस्री फ़ौज के भाड़े के फ़ौजी मोटे-ताज़े बछड़े हैं, लेकिन वह भी मुड़ कर फ़रार हो जाएंगे। एक भी क़ाइम नहीं रहेगा। क्यूँकि आफ़त का दिन उन पर आने वाला है, वह वक़्त जब उन्हें पूरी सज़ा मिलेगी। {46:22} मिस्र साँप की तरह फुंकारते हुए पीछे हट जाएगा जब दुश्मन के फ़ौजी पूरे ज़ोर से उस पर हम्ला करेंगे, जब वह लक्कड़हारों की तरह अपनी कुल्हाड़ियाँ पकड़े हुए उस पर टूट पड़ेंगे।” {46:23} रब फ़रमाता है, “तब वह मिस्र का जंगल काट डालेंगे, गो वह कितना घना क्यूँ न हो। क्यूँकि उन की तादाद टिड्डियों से ज़्यादा होगी बल्कि वह अनगिनत होंगे। {46:24} मिस्र बेटी की बेइज़्ज़ती की जाएगी, उसे शिमाली क़ौम के हवाले किया जाएगा।” {46:25} रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “मैं थीबस शहर के देवता आमून, फ़िरऔन और तमाम मिस्र को उस के देवताओं और बादशाहों समेत सज़ा दूँगा। हाँ, मैं फ़िरऔन और उस पर एतिमाद रखने वाले तमाम लोगों की अदालत करूँगा।” {46:26} रब फ़रमाता है, “मैं उन्हें उन के जानी दुश्मनों के हवाले कर दूँगा, और वह शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र और उस के अफ़्सरों के क़ाबू में आ जाएंगे। लेकिन बाद में मिस्र पहले की तरह दुबारा आबाद हो जाएगा। {46:27} जहाँ तक तेरा ताल्लुक़ है, ऐ याक़ूब मेरे ख़ादिम, ख़ौफ़ मत खा! ऐ इस्राईल, हौसला मत हार! देख, मैं तुझे दूरदराज़ मुल्क से छुटकारा दूँगा। तेरी औलाद को मैं उस मुल्क से नजात दूँगा जहाँ उसे जिलावतन किया गया है। फिर याक़ूब वापस आ कर आराम-ओ-सुकून की ज़िन्दगी गुज़ारेगा। कोई नहीं होगा जो उसे हैबतज़दा करे।” {46:28} रब फ़रमाता है, “ऐ याक़ूब मेरे ख़ादिम, ख़ौफ़ न खा, क्यूँकि मैं तेरे साथ हूँ। मैं उन तमाम क़ौमों को नेस्त-ओ-नाबूद कर दूँगा जिन में मैं ने तुझे मुन्तशिर कर दिया है, लेकिन तुझे मैं इस तरह सफ़्हा-ए-हस्ती से नहीं मिटाऊँगा। अलबत्ता मैं मुनासिब हद तक तेरी तम्बीह करूँगा, क्यूँकि मैं तुझे सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ सकता।” {i47:1} फ़िलिस्तियों को सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटाया जाएगा {47:1} फ़िरऔन के ग़ज़्ज़ा शहर पर हम्ला करने से पहले यरमियाह नबी पर फ़िलिस्तियों के बारे में रब का कलाम नाज़िल हुआ, {47:2} “रब फ़रमाता है कि शिमाल से पानी आ रहा है जो सैलाब बन कर पूरे मुल्क को ग़र्क़ कर देगा। पूरा मुल्क शहरों और बाशिन्दों समेत उस में डूब जाएगा। लोग चीख़ उठेंगे, और मुल्क के तमाम बाशिन्दे आह-ओ-ज़ारी करेंगे। {47:3} क्यूँकि सरपट दौड़ते हुए घोड़ों की टापें सुनाई देंगी, दुश्मन के रथों का शोर और पहियों की गड़गड़ाहट उन के कानों तक पहुँचेगी। बाप ख़ौफ़ज़दा हो कर यूँ साकित हो जाएंगे कि वह अपने बच्चों की मदद करने के लिए पीछे भी देख नहीं सकेंगे। {47:4} क्यूँकि वह दिन आने वाला है जब तमाम फ़िलिस्तियों को नेस्त-ओ-नाबूद किया जाएगा ताकि सूर और सैदा के आख़िरी मदद करने वाले भी ख़त्म हो जाएँ। क्यूँकि रब फ़िलिस्तियों को सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटाने वाला है, जज़ीरा-ए-क्रेते के उन बचे हुओं को जो यहाँ आ कर आबाद हुए हैं। {47:5} ग़ज़्ज़ा बेटी मातम के आलम में अपना सर मुंडवाएगी, अस्क़लून शहर मिस्मार हो जाएगा। ऐ मैदानी इलाक़े के बचे हुए लोगो, तुम कब तक अपनी जिल्द को ज़ख़्मी करते रहोगे? {47:6} ‘हाय, ऐ रब की तलवार, क्या तू कभी नहीं आराम करेगी? दुबारा अपने मियान में छुप जा! ख़ामोश हो कर आराम कर!’ {47:7} लेकिन वह किस तरह आराम कर सकती है जब रब ने ख़ुद उसे चलाया है, जब उसी ने उसे अस्क़लून और साहिली इलाक़े पर धावा बोलने का हुक्म दिया है?” {i48:1} मोआब के अन्जाम की पेशगोई {48:1} मोआब के बारे में रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “नबू शहर पर अफ़्सोस, क्यूँकि वह तबाह हो गया है। दुश्मन ने क़िर्यताइम की बेहुरमती करके उस पर क़ब्ज़ा कर लिया है। चटान के क़िले की रुस्वाई हो गई, वह पाश पाश हो गया है। {48:2} अब से कोई मोआब की तारीफ़ नहीं करेगा। हस्बोन में आदमी उस की शिकस्त की साज़िशें करके कह रहे हैं, आओ, हम मोआबी क़ौम को नेस्त-ओ-नाबूद करें। ‘ऐ मदमीन, तू भी तबाह हो जाएगा, तलवार तेरे भी पीछे पड़ जाएगी।’ {48:3} सुनो! होरोनाइम से चीख़ें बुलन्द हो रही हैं। तबाही और बड़ी शिकस्त का शोर मच रहा है। {48:4} मोआब चूर चूर हो गया है, उस के बच्चे ज़ोर से चिल्ला रहे हैं। {48:5} लोग रोते रोते लूहीत की तरफ़ चढ़ रहे हैं। होरोनाइम की तरफ़ उतरते रास्ते पर शिकस्त की आह-ओ-ज़ारी सुनाई दे रही है। {48:6} भाग कर अपनी जान बचाओ! रेगिस्तान में झाड़ी की मानिन्द बन जाओ। {48:7} चूँकि तुम मोआबियों ने अपनी कामयाबियों और दौलत पर भरोसा रखा, इस लिए तुम भी क़ैद में जाओगे। तुम्हारा देवता कमोस भी अपने पुजारियों और बुज़ुर्गों समेत जिलावतन हो जाएगा। {48:8} तबाह करने वाला हर शहर पर हम्ला करेगा, एक भी नहीं बचेगा। जिस तरह रब ने फ़रमाया है, वादी भी तबाह हो जाएगी और मैदान-ए-मुर्तफ़ा भी। {48:9} मोआब पर नमक डाल दो, क्यूँकि वह मिस्मार हो जाएगा। उस के शहर वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएंगे, और उन में कोई नहीं बसेगा। {48:10} उस पर लानत जो सुस्ती से रब का काम करे! उस पर लानत जो अपनी तलवार को ख़ून बहाने से रोक ले! {48:11} अपनी जवानी से ले कर आज तक मोआब आराम-ओ-सुकून की ज़िन्दगी गुज़ारता आया है, उस मै की मानिन्द जो कभी नहीं छेड़ी गई और कभी एक बर्तन से दूसरे में उंडेली नहीं गई। इस लिए उस का मज़ा क़ाइम और ज़ाइक़ा बेहतरीन रहा है।” {48:12} लेकिन रब फ़रमाता है, “वह दिन आने वाला है जब मैं ऐसे आदमियों को उस के पास भेजूँगा जो मै को बर्तनों से निकाल कर ज़ाए कर देंगे, और बर्तनों को ख़ाली करने के बाद पाश पाश कर देंगे। {48:13} तब मोआब को अपने देवता कमोस पर यूँ शर्म आएगी जिस तरह इस्राईल को बैत-एल के उस बुत पर शर्म आई जिस पर वह भरोसा रखता था। {48:14} हाय, तुम अपने आप पर कितना फ़ख़र करते हो कि हम सूरमे और ज़बरदस्त जंगजू हैं। {48:15} लेकिन दुनिया का बादशाह जिस का नाम रब्ब-उल-अफ़्वाज है फ़रमाता है कि मोआब तबाह हो जाएगा, और दुश्मन उस के शहरों में घुस आएगा। उस के बेहतरीन जवान क़त्ल-ओ-ग़ारत की ज़द में आ कर हलाक हो जाएंगे। {i48:16} मोआब की ताक़त टूट गई है {48:16} मोआब का अन्जाम क़रीब ही है, आफ़त उस पर नाज़िल होने वाली है। {48:17} ऐ पड़ोस में बसने वालो, उस पर मातम करो! जितने उस की शोहरत जानते हो आह-ओ-ज़ारी करो। बोलो, ‘हाय, मोआब का ज़ोरदार असा-ए-शाही टूट गया है, उस की शान-ओ-शौकत की अलामत ख़ाक में मिलाई गई है।’ {48:18} ऐ दीबोन बेटी, अपने शानदार तख़्त पर से उतर कर प्यासी ज़मीन पर बैठ जा। क्यूँकि मोआब को तबाह करने वाला तेरे ख़िलाफ़ भी चढ़ आएगा, वह तेरे क़िलाबन्द शहरों को भी मिस्मार करेगा। {48:19} ऐ अरोईर की रहने वाली, सड़क के किनारे खड़ी हो कर गुज़रने वालों पर ग़ौर कर! अपनी जान बचाने वालों से पूछ ले कि क्या हुआ है। {48:20} तब तुझे जवाब मिलेगा, ‘मोआब रुसवा हुआ है, वह पाश पाश हो गया है। बुलन्द आवाज़ से वावैला करो! दरया-ए-अर्नोन के किनारे एलान करो कि मोआब ख़त्म है।’ {48:21} मैदान-ए-मुर्तफ़ा पर अल्लाह की अदालत नाज़िल हुई है। हौलून, यहज़, मिफ़ात, {48:22} दीबोन, नबू, बैत-दिब्लाताइम, {48:23} क़िर्यताइम, बैत-जमूल, बैत-मऊन, {48:24} क़रियोत और बुस्रा, ग़रज़ मोआब के तमाम शहरों की अदालत हुई है, ख़्वाह वह दूर हों या क़रीब।” {48:25} रब फ़रमाता है, “मोआब की ताक़त टूट गई है, उस का बाज़ू पाश पाश हो गया है। {48:26} उसे मै पिला पिला कर मत्वाला करो, वह अपनी क़ै में लोट-पोट हो कर सब के लिए मज़ाक़ का निशाना बन जाए। क्यूँकि वह मग़रूर हो कर रब के ख़िलाफ़ खड़ा हो गया है। {48:27} तुम मोआबियों ने इस्राईल को अपने मज़ाक़ का निशाना बनाया था। तुम यूँ उसे गालियाँ देते रहे जैसे उसे चोरी करते वक़्त पकड़ा गया हो। {48:28} लेकिन अब तुम्हारी बारी आ गई है। अपने शहरों को छोड़ कर चटानों में जा बसो! कबूतर बन कर चटानों की दराड़ों में अपने घोंसले बनाओ। {48:29} हम ने मोआब के तकब्बुर के बारे में सुना है, क्यूँकि वह हद से ज़्यादा मुतकब्बिर, मग़रूर, घमंडी, ख़ुदपसन्द और अनापरस्त है।” {48:30} रब फ़रमाता है, “मैं उस के तकब्बुर से वाक़िफ़ हूँ। लेकिन उस की डींगें अबस हैं, उन के पीछे कुछ नहीं है। {48:31} इस लिए मैं मोआब पर आह-ओ-ज़ारी कर रहा, तमाम मोआब के सबब से चिल्ला रहा हूँ। क़ीर-हरासत के बाशिन्दों का अन्जाम देख कर मैं आहें भर रहा हूँ। {48:32} ऐ सिब्माह की अंगूर की बेल, याज़ेर की निस्बत मैं कहीं ज़्यादा तुझ पर मातम कर रहा हूँ। तेरी कोंपलें याज़ेर तक फैली हुई थीं बल्कि समुन्दर को पार भी करती थीं। लेकिन अब तबाह करने वाला दुश्मन तेरे पके हुए अंगूरों और मौसम-ए-गर्मा के फल पर टूट पड़ा है। {48:33} अब ख़ुशी-ओ-शादमानी मोआब के बाग़ों और खेतों से जाती रही है। मैं ने अंगूर का रस निकालने का काम रोक दिया है। कोई ख़ुशी के नारे लगा लगा कर अंगूर को पाँओ तले नहीं रौंदता। शोर तो मच रहा है, लेकिन ख़ुशी के नारे बुलन्द नहीं हो रहे बल्कि जंग के। {48:34} हस्बोन में लोग मदद के लिए पुकार रहे हैं, उन की आवाज़ इलीआली और यहज़ तक सुनाई दे रही है। इसी तरह ज़ुग़र की चीख़ें होरोनाइम और इज्लत-शलीशियाह तक पहुँच गई हैं। क्यूँकि निम्रीम का पानी भी ख़ुश्क हो जाएगा।” {48:35} रब फ़रमाता है, “मोआब में जो ऊँची जगहों पर चढ़ कर अपने देवताओं को बख़ूर और बाक़ी क़ुर्बानियाँ पेश करते हैं उन का मैं ख़ातमा कर दूँगा। {48:36} इस लिए मेरा दिल बाँसरी के मातमी सुर निकाल कर मोआब और क़ीर-हरासत के लिए नोहा कर रहा है। क्यूँकि उन की हासिलशुदा दौलत जाती रही है। {48:37} हर सर गंजा, हर दाढ़ी मुंडवाई गई है। हर हाथ की जिल्द को ज़ख़्मी कर दिया गया है, हर कमर टाट से मुलब्बस है। {48:38} मोआब की तमाम छतों पर और उस के चौकों में आह-ओ-ज़ारी बुलन्द हो रही है।” क्यूँकि रब फ़रमाता है, “मैं ने मोआब को बेकार मिट्टी के बर्तन की तरह तोड़ डाला है। {48:39} हाय, मोआब पाश पाश हो गया है! लोग ज़ार-ओ-क़तार रो रहे हैं, और मोआब ने शर्म के मारे अपना मुँह ढाँप लिया है। वह मज़ाक़ का निशाना बन गया है, उसे देख कर तमाम पड़ोसियों के रोंगटे खड़े हो गए हैं।” {i48:40} मोआब रब के ख़िलाफ़ उठ खड़ा हुआ है {48:40} रब फ़रमाता है, “वह देखो! दुश्मन उक़ाब की तरह मोआब पर झपट्टा मारता है। अपने परों को फैला कर वह पूरे मुल्क पर साया डालता है। {48:41} क़रियोत क़िलों समेत उस के क़ब्ज़े में आ गया है। उस दिन मोआबी सूरमाओं का दिल दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की तरह पेच-ओ-ताब खाएगा। {48:42} क्यूँकि मोआबी क़ौम सफ़्हा-ए-हस्ती से मिट जाएगी, इस लिए कि वह मग़रूर हो कर रब के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है। {48:43} ऐ मोआबी क़ौम, दह्शत, गढ़ा और फंदा तेरे नसीब में हैं।” {48:44} क्यूँकि रब फ़रमाता है, “जो दह्शत से भाग कर बच जाए वह गढ़े में गिर जाएगा, और जो गढ़े से निकल जाए वह फंदे में फंस जाएगा। क्यूँकि मैं मोआब पर उस की अदालत का साल लाऊँगा। {48:45} पनाहगुज़ीन थकेहारे हस्बोन के साय में रुक जाते हैं। लेकिन अफ़्सोस, हस्बोन से आग निकल आई है और सीहोन बादशाह के शहर में से शोला भड़क उठा है जो मोआब की पेशानी को और शोर मचाने वालों के चाँदों को नज़र-ए-आतिश करेगा। {48:46} ऐ मोआब, तुझ पर अफ़्सोस! कमोस देवता के परस्तार नेस्त-ओ-नाबूद हैं, तेरे बेटे-बेटियाँ क़ैदी बन कर जिलावतन हो गए हैं। {48:47} लेकिन आने वाले दिनों में मैं मोआब को बहाल करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। यहाँ मोआब पर अदालत का फ़ैसला इख़तिताम पर पहुँच गया है। {i49:1} अम्मोनियों की अदालत {49:1} अम्मोनियों के बारे में रब फ़रमाता है, “क्या इस्राईल की कोई औलाद नहीं, कोई वारिस नहीं जो जद के क़बाइली इलाक़े में रह सके? मलिक देवता के परस्तारों ने उस पर क्यूँ क़ब्ज़ा किया है? क्या वजह है कि यह लोग जद के शहरों में आबाद हो गए हैं?” {49:2} चुनाँचे रब फ़रमाता है, “वह वक़्त आने वाला है कि मेरे हुक्म पर अम्मोनी दार-उल-हकूमत रब्बा के ख़िलाफ़ जंग के नारे लगाए जाएंगे। तब वह मल्बे का ढेर बन जाएगा, और गिर्द-ओ-नवाह की आबादियाँ नज़र-ए-आतिश हो जाएँगी। तब इस्राईल उन्हें मुल्क-ब-दर करेगा जिन्हों ने उसे मुल्क-ब-दर किया था।” यह रब का फ़रमान है। {49:3} “ऐ हस्बोन, वावैला कर, क्यूँकि अई शहर बर्बाद हुआ है। ऐ रब्बा की बेटियो, मदद के लिए चिल्लाओ! टाट ओढ़ कर मातम करो! फ़सील के अन्दर बेचैनी से इधर उधर फिरो! क्यूँकि मलिक देवता अपने पुजारियों और बुज़ुर्गों समेत जिलावतन हो जाएगा। {49:4} ऐ बेवफ़ा बेटी, तू अपनी ज़रख़ेज़ वादियों पर इतना फ़ख़र क्यूँ करती है? तू अपने माल-ओ-दौलत पर भरोसा करके शेख़ी मारती है कि अब मुझ पर कोई हम्ला नहीं करेगा।” {49:5} क़ादिर-ए-मुतलक़ रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “मैं तमाम पड़ोसियों की तरफ़ से तुझ पर दह्शत छा जाने दूँगा। तुम सब को चारों तरफ़ मुन्तशिर कर दिया जाएगा, और तेरे पनाहगुज़ीनों को कोई जमा नहीं करेगा। {49:6} लेकिन बाद में मैं अम्मोनियों को बहाल करूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {i49:7} अदोम की अदालत {49:7} रब्ब-उल-अफ़्वाज अदोम के बारे में फ़रमाता है, “क्या तेमान में हिक्मत का नाम-ओ-निशान नहीं रहा? क्या दानिशमन्द सहीह मश्वरा नहीं दे सकते? क्या उन की दानाई बेकार हो गई है? {49:8} ऐ ददान के बाशिन्दो, भाग कर हिज्रत करो, ज़मीन के अन्दर छुप जाओ। क्यूँकि मैं एसौ की औलाद पर आफ़त नाज़िल करता हूँ, मेरी सज़ा का दिन क़रीब आ गया है। {49:9} ऐ अदोम, अगर तू अंगूर का बाग़ होता और मज़दूर फ़सल चुनने के लिए आते तो थोड़ा बहुत उन के पीछे रह जाता। अगर डाकू रात के वक़्त तुझे लूट लेते तो वह सिर्फ़ उतना ही छीन लेते जितना उठा कर ले जा सकते हैं। लेकिन तेरा अन्जाम इस से कहीं ज़्यादा बुरा होगा। {49:10} क्यूँकि मैं ने एसौ को नंगा करके उस की तमाम छुपने की जगहें ढूँड निकाली हैं। वह कहीं भी छुप नहीं सकेगा। उस की औलाद, भाई और हमसाय हलाक हो जाएंगे, एक भी बाक़ी नहीं रहेगा। {49:11} अपने यतीमों को पीछे छोड़ दे, क्यूँकि मैं उन की जान को बचाए रखूँगा। तुम्हारी बेवाएँ भी मुझ पर भरोसा रखें।” {49:12} रब फ़रमाता है, “जिन्हें मेरे ग़ज़ब का प्याला पीने का फ़ैसला नहीं सुनाया गया था उन्हें भी पीना पड़ा। तो फिर तेरी जान किस तरह बचेगी? नहीं, तू यक़ीनन सज़ा का प्याला पी लेगा।” {49:13} रब फ़रमाता है, “मेरे नाम की क़सम, बुस्रा शहर गिर्द-ओ-नवाह के तमाम शहरों समेत अबदी खंडरात बन जाएगा। उसे देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और वह उसे लान-तान करेंगे। लानत करने वाला अपने दुश्मन के लिए बुस्रा ही का सा अन्जाम चाहेगा।” {49:14} मैं ने रब की तरफ़ से पैग़ाम सुना है, “एक क़ासिद को अक़्वाम के पास भेजा गया है जो उन्हें हुक्म दे, ‘जमा हो कर अदोम पर हम्ला करने के लिए निकलो! उस से लड़ने के लिए उठो!’ {49:15} अब मैं तुझे छोटा बना दूँगा, एक ऐसी क़ौम जिसे दीगर लोग हक़ीर जानेंगे। {49:16} माज़ी में दूसरे तुझ से दह्शत खाते थे, लेकिन इस बात ने और तेरे ग़ुरूर ने तुझे फ़रेब दिया है। बेशक तू चटानों की दराड़ों में बसेरा करता है, और पहाड़ी बुलन्दियाँ तेरे क़ब्ज़े में हैं। लेकिन ख़्वाह तू अपना घोंसला उक़ाब की सी ऊँची जगहों पर क्यूँ न बनाए तो भी मैं तुझे वहाँ से उतार कर ख़ाक में मिला दूँगा।” यह रब का फ़रमान है। {49:17} “मुल्क-ए-अदोम यूँ बर्बाद हो जाएगा कि वहाँ से गुज़रने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। उस के ज़ख़्मों को देख कर वह ‘तौबा तौबा’ कहेंगे।” {49:18} रब फ़रमाता है, “उस का अन्जाम सदूम, अमूरा और उन के पड़ोसी शहरों की मानिन्द होगा जिन्हें अल्लाह ने उलटा कर नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया। वहाँ कोई नहीं बसेगा। {49:19} जिस तरह शेरबबर यर्दन के जंगल से निकल कर शादाब चरागाहों में चरने वाली भेड़-बकरियों पर टूट पड़ता है उसी तरह मैं अचानक अदोम पर हम्ला करके उसे उस के अपने मुल्क से भगा दूँगा। तब वह जिसे मैं ने मुक़र्रर किया है अदोम पर हुकूमत करेगा। क्यूँकि कौन मेरी मानिन्द है? कौन मुझ से जवाब तलब कर सकता है? कौन सा गल्लाबान मेरा मुक़ाबला कर सकता है?” {49:20} चुनाँचे अदोम पर रब का फ़ैसला सुनो! तेमान के बाशिन्दों के लिए उस के मन्सूबे पर ध्यान दो! दुश्मन पूरे रेवड़ को सब से नन्हे बच्चों से ले कर बड़ों तक घसीट कर ले जाएगा। उस की चरागाह वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएगी। {49:21} अदोम इतने धड़ाम से गिर जाएगा कि ज़मीन थरथरा उठेगी। लोगों की चीख़ें बहर-ए-क़ुल्ज़ुम तक सुनाई देंगी। {49:22} वह देखो! दुश्मन उक़ाब की तरह उड़ कर अदोम पर झपट्टा मारता है। वह अपने परों को फैला कर बुस्रा पर साया डालता है। उस दिन अदोमी सूरमाओं का दिल दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की तरह पेच-ओ-ताब खाएगा। {i49:23} दमिश्क़ की अदालत {49:23} रब दमिश्क़ के बारे में फ़रमाता है, “हमात और अर्फ़ाद शर्मिन्दा हो गए हैं। बुरी ख़बरें सुन कर वह हिम्मत हार गए हैं। परेशानी ने उन्हें उस मुतलातिम समुन्दर जैसा बेचैन कर दिया है जो थम नहीं सकता। {49:24} दमिश्क़ हिम्मत हार कर भागने के लिए मुड़ गया है। दह्शत उस पर छा गई है, और वह दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की तरह तड़प रहा है। {49:25} हाय, दमिश्क़ को तर्क किया गया है! जिस मश्हूर शहर से मेरा दिल लुत्फ़अन्दोज़ होता था वह वीरान-ओ-सुन्सान है।” {49:26} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “उस दिन उस के जवान आदमी गलियों में गिर कर रह जाएंगे, उस के तमाम फ़ौजी हलाक हो जाएंगे। {49:27} मैं दमिश्क़ की फ़सील को आग लगा दूँगा जो फैलते फैलते बिन-हदद बादशाह के महलों को भी अपनी लपेट में ले लेगी।” {i49:28} बद्दू क़बीलों की अदालत {49:28} ज़ैल में क़ीदार और हसूर के बद्दू क़बीलों के बारे में कलाम दर्ज है। बाद में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने उन्हें शिकस्त दी। रब फ़रमाता है, “उठो! क़ीदार पर हम्ला करो! मशरिक़ में बसने वाले बद्दू क़बीलों को तबाह करो! {49:29} तुम उन के ख़ैमों, भेड़-बकरियों और ऊँटों को छीन लोगे, उन के ख़ैमों के पर्दों और बाक़ी सामान को लूट लोगे। चीख़ें सुनाई देंगी, ‘हाय, चारों तरफ़ दह्शत ही दह्शत’!” {49:30} रब फ़रमाता है, “ऐ हसूर में बसने वाले क़बीलो, जल्दी से भाग जाओ, ज़मीन की दराड़ों में छुप जाओ! क्यूँकि शाह-ए-बाबल ने तुम पर हम्ला करने का फ़ैसला करके तुम्हारे ख़िलाफ़ मन्सूबा बांध लिया है।” {49:31} रब फ़रमाता है, “ऐ बाबल के फ़ौजियो, उठ कर उस क़ौम पर हम्ला करो जो अलाहिदगी में पुरसुकून और मह्फ़ूज़ ज़िन्दगी गुज़ारती है, जिस के न दरवाज़े, न कुंडे हैं। {49:32} उन के ऊँट और बड़े बड़े रेवड़ लूट का माल बन जाएंगे। क्यूँकि मैं रेगिस्तान के किनारे पर रहने वाले इन क़बीलों को चारों तरफ़ मुन्तशिर कर दूँगा। उन पर चारों तरफ़ से आफ़त आएगी।” यह रब का फ़रमान है। {49:33} “हसूर हमेशा तक वीरान-ओ-सुन्सान रहेगा, उस में कोई नहीं बसेगा। गीदड़ ही उस में अपने घर बना लेंगे।” {i49:34} मुल्क-ए-ऐलाम की अदालत {49:34} शाह-ए-यहूदाह सिदक़ियाह की हुकूमत के इब्तिदाई दिनों में रब यरमियाह नबी से हमकलाम हुआ। पैग़ाम ऐलाम के मुताल्लिक़ था। {49:35} “रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, ‘मैं ऐलाम की कमान को तोड़ डालता हूँ, उस हथियार को जिस पर ऐलाम की ताक़त मब्नी है। {49:36} आसमान की चारों सिम्तों से मैं ऐलामियों के ख़िलाफ़ तेज़ हवाएँ चलाऊँगा जो उन्हें उड़ा कर चारों तरफ़ मुन्तशिर कर देंगी। कोई ऐसा मुल्क नहीं होगा जिस तक ऐलामी जिलावतन नहीं पहुँचेंगे।’ {49:37} रब फ़रमाता है, ‘मैं ऐलाम को उस के जानी दुश्मनों के सामने पाश पाश कर दूँगा। मैं उन पर आफ़त लाऊँगा, मेरा सख़्त क़हर उन पर नाज़िल होगा। जब तक वह नेस्त न हों मैं तलवार को उन के पीछे चलाता रहूँगा। {49:38} तब मैं ऐलाम में अपना तख़्त खड़ा करके उस के बादशाह और बुज़ुर्गों को तबाह कर दूँगा।’ यह रब का फ़रमान है। {49:39} लेकिन रब यह भी फ़रमाता है, ‘आने वाले दिनों में मैं ऐलाम को बहाल करूँगा’।” {i50:1} बाबल की अदालत {50:1} मुल्क-ए-बाबल और उस के दार-उल-हकूमत बाबल के बारे में रब का कलाम यरमियाह नबी पर नाज़िल हुआ, {50:2} “अक़्वाम के सामने एलान करो, हर जगह इत्तिला दो! झंडा गाड़ कर कुछ न छुपाओ बल्कि सब को साफ़ बताओ, ‘बाबल शहर दुश्मन के क़ब्ज़े में आ गया है! बेल देवता की बेहुरमती हुई है, मर्दुक देवता पाश पाश हो गया है। बाबल के तमाम देवताओं की बेहुरमती हुई है, तमाम बुत चकनाचूर हो गए हैं!’ {50:3} क्यूँकि शिमाल से एक क़ौम बाबल पर चढ़ आई है जो पूरे मुल्क को बर्बाद कर देगी। इन्सान और हैवान सब हिज्रत कर जाएंगे, मुल्क में कोई नहीं रहेगा।” {50:4} रब फ़रमाता है, “जब यह वक़्त आएगा तो इस्राईल और यहूदाह के लोग मिल कर अपने वतन में वापस आएँगे। तब वह रोते हुए रब अपने ख़ुदा को तलाश करने आएँगे। {50:5} वह सिय्यून का रास्ता पूछ पूछ कर अपना रुख़ उस तरफ़ कर लेंगे और कहेंगे, ‘आओ, हम रब के साथ लिपट जाएँ, हम उस के साथ अबदी अह्द बांध लें जो कभी न भुलाया जाए।’ {50:6} मेरी क़ौम की हालत गुमशुदा भेड़-बकरियों की मानिन्द थी। क्यूँकि उन के गल्लाबानों ने उन्हें ग़लत राह पर ला कर फ़रेबदिह पहाड़ों पर आवारा फिरने दिया था। यूँ पहाड़ों पर इधर उधर घूमते घूमते वह अपनी आरामगाह भूल गए थे। {50:7} जो भी उन को पाते वह उन्हें पकड़ कर खा जाते थे। उन के मुख़ालिफ़ कहते थे, ‘इस में हमारा क्या क़ुसूर है? उन्हों ने तो रब का गुनाह किया है, गो वह उन की हक़ीक़ी चरागाह है और उन के बापदादा उस पर उम्मीद रखते थे।’ {i50:8} बाबल से हिज्रत करो! {50:8} ऐ मेरी क़ौम, मुल्क-ए-बाबल और उस के दार-उल-हकूमत से भाग निकलो! उन बकरों की मानिन्द बन जाओ जो रेवड़ की राहनुमाई करते हैं। {50:9} क्यूँकि मैं शिमाली मुल्क में बड़ी क़ौमों के इत्तिहाद को बाबल पर हम्ला करने पर उभारूँगा, जो उस के ख़िलाफ़ सफ़आरा हो कर उस पर क़ब्ज़ा करेगा। दुश्मन के तीरअन्दाज़ इतने माहिर होंगे कि हर तीर निशाने पर लग जाएगा।” {50:10} रब फ़रमाता है, “बाबल को यूँ लूट लिया जाएगा कि तमाम लूटने वाले सेर हो जाएंगे। {50:11} ऐ मेरे मौरूसी हिस्से को लूटने वालो, बेशक तुम इस वक़्त शादियाना बजा कर ख़ुशी मनाते हो। बेशक तुम गाहते हुए बछड़ों की तरह उछलते कूदते और घोड़ों की तरह हिनहिनाते हो। {50:12} लेकिन आइन्दा तुम्हारी माँ बेहद शर्मिन्दा हो जाएगी, जिस ने तुम्हें जन्म दिया वह रुसवा हो जाएगी। आइन्दा बाबल सब से ज़लील क़ौम होगी, वह ख़ुश्क और वीरान रेगिस्तान ही होगी। {50:13} जब रब का ग़ज़ब उन पर नाज़िल होगा तो वहाँ कोई आबाद नहीं रहेगा बल्कि मुल्क सरासर वीरान-ओ-सुन्सान रहेगा। बाबल से गुज़रने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, उस के ज़ख़्मों को देख कर सब ‘तौबा तौबा’ कहेंगे। {50:14} ऐ तीरअन्दाज़ो, बाबल शहर को घेर कर उस पर तीर बरसाओ! तमाम तीर इस्तेमाल करो, एक भी बाक़ी न रहे, क्यूँकि उस ने रब का गुनाह किया है। {50:15} चारों तरफ़ उस के ख़िलाफ़ जंग के नारे लगाओ! देखो, उस ने हथियार डाल दिए हैं। उस के बुर्ज गिर गए, उस की दीवारें मिस्मार हो गई हैं। रब इन्तिक़ाम ले रहा है, चुनाँचे बाबल से ख़ूब बदला लो। जो सुलूक उस ने दूसरों के साथ किया, वही उस के साथ करो। {50:16} बाबल में जो बीज बोते और फ़सल के वक़्त दरान्ती चलाते हैं उन्हें रू-ए-ज़मीन पर से मिटा दो। उस वक़्त शहर के परदेसी मोहलक तलवार से भाग कर अपने अपने वतन में वापस चले जाएंगे। {50:17} इस्राईली क़ौम शेरबबरों के हमले से बिखरे हुए रेवड़ की मानिन्द है। क्यूँकि पहले शाह-ए-असूर ने आ कर उसे हड़प कर लिया, फिर शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने उस की हड्डियों को चबा लिया।” {50:18} इस लिए रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “पहले मैं ने शाह-ए-असूर को सज़ा दी, और अब मैं शाह-ए-बाबल को उस के मुल्क समेत वही सज़ा दूँगा। {50:19} लेकिन इस्राईल को मैं उस की अपनी चरागाह में वापस लाऊँगा, और वह दुबारा कर्मिल और बसन की ढलानों पर चरेगा, वह दुबारा इफ़्राईम और जिलिआद के पहाड़ी इलाक़ों में सेर हो जाएगा।” {50:20} रब फ़रमाता है, “उन दिनों में जो इस्राईल का क़ुसूर ढूँड निकालने की कोशिश करे उसे कुछ नहीं मिलेगा। यही यहूदाह की हालत भी होगी। उस के गुनाह पाए नहीं जाएंगे, क्यूँकि जिन लोगों को मैं ज़िन्दा छोड़ूँगा उन्हें मैं मुआफ़ कर दूँगा।” {i50:21} अल्लाह अपने घर का बदला लेता है {50:21} रब फ़रमाता है, “मुल्क-ए-मराताइम और फ़िक़ोद के बाशिन्दों पर हम्ला करो! उन्हें मारते मारते सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दो! जो भी हुक्म मैं ने दिया उस पर अमल करो। {50:22} मुल्क-ए-बाबल में जंग का शोर-शराबा सुनो! बाबल की हौलनाक शिकस्त देखो! {50:23} जो पहले तमाम दुनिया का हथोड़ा था उसे तोड़ कर टुकड़े टुकड़े कर दिया गया है। बाबल को देख कर लोगों को सख़्त धच्का लगता है। {50:24} ऐ बाबल, मैं ने तेरे लिए फंदा लगा दिया, और तुझे पता न चला बल्कि तू उस में फंस गया। चूँकि तू ने रब का मुक़ाबला किया इसी लिए तेरा खोज लगाया गया और तुझे पकड़ा गया।” {50:25} क़ादिर-ए-मुतलक़ जो रब्ब-उल-अफ़्वाज है फ़रमाता है, “मैं अपना अस्लिहाख़ाना खोल कर अपना ग़ज़ब नाज़िल करने के हथियार निकाल लाया हूँ, क्यूँकि मुल्क-ए-बाबल में उन की अशद्द ज़रूरत है। {50:26} चारों तरफ़ से बाबल पर चढ़ आओ! उस के अनाज के गोदामों को खोल कर सारे माल का ढेर लगाओ! फिर सब कुछ नेस्त-ओ-नाबूद करो, कुछ बचा न रहे। {50:27} उस के तमाम बैलों को ज़बह करो! सब क़साई की ज़द में आएँ! उन पर अफ़्सोस, क्यूँकि उन का मुक़र्ररा दिन, उन की सज़ा का वक़्त आ गया है। {50:28} सुनो! मुल्क-ए-बाबल से बचे हुए पनाहगुज़ीन सिय्यून में बता रहे हैं कि रब हमारे ख़ुदा ने किस तरह इन्तिक़ाम लिया। क्यूँकि अब उस ने अपने घर का बदला लिया है! {50:29} तमाम तीरअन्दाज़ों को बुलाओ ताकि बाबल पर हम्ला करें! उसे घेर लो ताकि कोई न बचे। उसे उस की हरकतों का मुनासिब अज्र दो! जो बुरा सुलूक उस ने दूसरों के साथ किया वही उस के साथ करो। क्यूँकि उस का रवय्या रब, इस्राईल के क़ुद्दूस के साथ गुस्ताखाना था। {50:30} इस लिए उस के नौजवान गलियों में गिर कर मर जाएंगे, उस के तमाम फ़ौजी उस दिन हलाक हो जाएंगे।” यह रब का फ़रमान है। {50:31} क़ादिर-ए-मुतलक़ रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “ऐ गुस्ताख़ शहर, मैं तुझ से निपटने वाला हूँ। क्यूँकि वह दिन आ गया है जब तुझे सज़ा मिलनी है। {50:32} तब गुस्ताख़ शहर ठोकर खा कर गिर जाएगा, और कोई उसे दुबारा खड़ा नहीं करेगा। मैं उस के तमाम शहरों में आग लगा दूँगा जो गिर्द-ओ-नवाह में सब कुछ राख कर देगी।” {i50:33} रब अपनी क़ौम को रिहा करवाता है {50:33} रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है, “इस्राईल और यहूदाह के लोगों पर ज़ुल्म हुआ है। जिन्हों ने उन्हें असीर करके जिलावतन किया है वह उन्हें रिहा नहीं करना चाहते, उन्हें जाने नहीं देते। {50:34} लेकिन उन का छुड़ाने वाला क़वी है, उस का नाम रब्ब-उल-अफ़्वाज है। वह ख़ूब लड़ कर उन का मुआमला दुरुस्त करेगा ताकि मुल्क को आराम-ओ-सुकून मिल जाए। लेकिन बाबल के बाशिन्दों को वह थरथराने देगा।” {50:35} रब फ़रमाता है, “तलवार बाबल की क़ौम पर टूट पड़े! वह बाबल के बाशिन्दों, उस के बुज़ुर्गों और दानिशमन्दों पर टूट पड़े! {50:36} तलवार उस के झूटे नबियों पर टूट पड़े ताकि बेवुक़ूफ़ साबित हों। तलवार उस के सूरमाओं पर टूट पड़े ताकि उन पर दह्शत छा जाए। {50:37} तलवार बाबल के घोड़ों, रथों और परदेसी फ़ौजियों पर टूट पड़े ताकि वह औरतों की मानिन्द बन जाएँ। तलवार उस के ख़ज़ानों पर टूट पड़े ताकि वह छीन लिए जाएँ। {50:38} तलवार उस के पानी के ज़ख़ीरों पर टूट पड़े ताकि वह ख़ुश्क हो जाएँ। क्यूँकि मुल्क-ए-बाबल बुतों से भरा हुआ है, ऐसे बुतों से जिन के बाइस लोग दीवानों की तरह फिरते हैं। {50:39} आख़िर में गलियों में सिर्फ़ रेगिस्तान के जानवर और जंगली कुत्ते फिरेंगे, वहाँ उक़ाबी उल्लू बसेंगे। वह हमेशा तक इन्सान की बस्तियों से महरूम और नस्ल-दर-नस्ल ग़ैरआबाद रहेगा।” {50:40} रब फ़रमाता है, “उस की हालत सदूम और अमूरा की सी होगी जिन्हें मैं ने पड़ोस के शहरों समेत उलटा कर सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दिया। आइन्दा वहाँ कोई नहीं बसेगा, कोई नहीं आबाद होगा।” यह रब का फ़रमान है। {i50:41} शिमाल से दुश्मन आ रहा है {50:41} “देखो, शिमाल से फ़ौज आ रही है, एक बड़ी क़ौम और मुतअद्दिद बादशाह दुनिया की इन्तिहा से रवाना हुए हैं। {50:42} उस के ज़ालिम और बेरहम फ़ौजी कमान और शम्शीर से लेस हैं। जब वह अपने घोड़ों पर सवार हो कर चलते हैं तो गरजते समुन्दर का सा शोर बरपा होता है। ऐ बाबल बेटी, वह सब जंग के लिए तय्यार हो कर तुझ से लड़ने आ रहे हैं। {50:43} उन की ख़बर सुनते ही शाह-ए-बाबल हिम्मत हार गया है। ख़ौफ़ज़दा हो कर वह दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की तरह तड़पने लगा है। {50:44} जिस तरह शेरबबर यर्दन के जंगलों से निकल कर शादाब चरागाहों में चरने वाली भेड़ों पर टूट पड़ता है उसी तरह मैं बाबल को एक दम उस के मुल्क से भगा दूँगा। फिर मैं अपने चुने हुए आदमी को बाबल पर मुक़र्रर करूँगा। क्यूँकि कौन मेरे बराबर है? कौन मुझ से जवाब तलब कर सकता है? वह गल्लाबान कहाँ है जो मेरा मुक़ाबला कर सके?” {50:45} चुनाँचे बाबल पर रब का फ़ैसला सुनो, मुल्क-ए-बाबल के लिए उस के मन्सूबे पर ध्यान दो! “दुश्मन पूरे रेवड़ को सब से नन्हे बच्चों से ले कर बड़ों तक घसीट कर ले जाएगा। उस की चरागाह वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएगी। {50:46} जूँ ही नारा बुलन्द होगा कि बाबल दुश्मन के क़ब्ज़े में आ गया है तो ज़मीन लरज़ उठेगी। तब मदद के लिए बाबल की चीख़ें दीगर ममालिक तक गूँजेंगी।” {i51:1} बाबल का ज़माना ख़त्म है {51:1} रब फ़रमाता है, “मैं बाबल और उस के बाशिन्दों के ख़िलाफ़ मोहलक आँधी चलाऊँगा। {51:2} मैं मुल्क-ए-बाबल में ग़ैरमुल्की भेजूँगा ताकि वह उसे अनाज की तरह फटक कर तबाह करें। आफ़त के दिन वह पूरे मुल्क को घेरे रखेंगे। {51:3} तीरअन्दाज़ को तीर चलाने से रोको! फ़ौजी को ज़िराबक्तर पहन कर लड़ने के लिए खड़े होने न दो! उन के नौजवानों को ज़िन्दा मत छोड़ना बल्कि फ़ौज को सरासर नेस्त-ओ-नाबूद कर देना! {51:4} तब मुल्क-ए-बाबल में हर तरफ़ लाशें नज़र आएँगी, तलवार के चिरे हुए उस की गलियों में पड़े रहेंगे। {51:5} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज ने इस्राईल और यहूदाह को अकेला नहीं छोड़ा, उन के ख़ुदा ने उन्हें तर्क नहीं किया। मुल्क-ए-बाबल का क़ुसूर निहायत संगीन है, उस ने इस्राईल के क़ुद्दूस का गुनाह किया है। {51:6} बाबल से भाग निकलो! दौड़ कर अपनी जान बचाओ, वर्ना तुम्हें भी बाबल के क़ुसूर का अज्र मिलेगा। क्यूँकि रब के इन्तिक़ाम का वक़्त आ पहुँचा है, अब बाबल को मुनासिब सज़ा मिलेगी। {51:7} बाबल रब के हाथ में सोने का प्याला था जिसे उस ने पूरी दुनिया को पिला दिया। अक़्वाम उस की मै पी पी कर मत्वाली हो गईं, इस लिए वह दीवानी हो गई हैं। {51:8} लेकिन अब यह प्याला अचानक गिर कर टूट गया है। चुनाँचे बाबल पर आह-ओ-ज़ारी करो! उस के दर्द और तक्लीफ़ को दूर करने के लिए बल्सान ले आओ, शायद उसे शिफ़ा मिले। {51:9} लेकिन लोग कहेंगे, ‘हम बाबल की मदद करना चाहते थे, लेकिन उस के ज़ख़्म भर नहीं सकते। इस लिए आओ, हम उसे छोड़ दें और हर एक अपने अपने मुल्क में जा बसे। क्यूँकि उस की सख़्त अदालत हो रही है, जितना आसमान और बादल बुलन्द हैं उतनी ही सख़्त उस की सज़ा है।’ {51:10} रब की क़ौम बोले, ‘रब हमारी रास्ती रौशनी में लाया है। आओ, हम सिय्यून में वह कुछ सुनाएँ जो रब हमारे ख़ुदा ने किया है।’ {51:11} तीरों को तेज़ करो! अपना तर्कश उन से भर लो! रब मादी बादशाहों को हरकत में लाया है, क्यूँकि वह बाबल को तबाह करने का इरादा रखता है। रब इन्तिक़ाम लेगा, अपने घर की तबाही का बदला लेगा। {51:12} बाबल की फ़सील के ख़िलाफ़ जंग का झंडा गाड़ दो! शहर के इर्दगिर्द पहरादारी का बन्द-ओ-बस्त मज़बूत करो, हाँ मज़ीद संतरी खड़े करो। क्यूँकि रब ने बाबल के बाशिन्दों के ख़िलाफ़ मन्सूबा बांध कर उस का एलान किया है, और अब वह उसे पूरा करेगा। {51:13} ऐ बाबल बेटी, तू गहरे पानी के पास बसती और निहायत दौलतमन्द हो गई है। लेकिन ख़बरदार! तेरा अन्जाम क़रीब ही है, तेरी ज़िन्दगी का धागा कट गया है। {51:14} रब्ब-उल-अफ़्वाज ने अपने नाम की क़सम खा कर फ़रमाया है कि मैं तुझे दुश्मनों से भर दूँगा, और वह टिड्डियों के ग़ोल की तरह पूरे शहर को ढाँप लेंगे। हर जगह वह तुझ पर फ़त्ह के नारे लगाएँगे। {51:15} देखो, अल्लाह ही ने अपनी क़ुदरत से ज़मीन को ख़ल्क़ किया, उसी ने अपनी हिक्मत से दुनिया की बुन्याद रखी, और उसी ने अपनी समझ के मुताबिक़ आसमान को ख़ैमे की तरह तान लिया। {51:16} उस के हुक्म पर आसमान पर पानी के ज़ख़ीरे गरजने लगते हैं। वह दुनिया की इन्तिहा से बादल चढ़ने देता, बारिश के साथ बिजली कड़कने देता और अपने गोदामों से हवा निकलने देता है। {51:17} तमाम इन्सान अहमक़ और समझ से ख़ाली हैं। हर सुनार अपने बुतों के बाइस शर्मिन्दा हुआ है। उस के बुत धोका ही हैं, उन में दम नहीं। {51:18} वह फ़ुज़ूल और मज़्हकाख़ेज़ हैं। अदालत के वक़्त वह नेस्त हो जाएंगे। {51:19} अल्लाह जो याक़ूब का मौरूसी हिस्सा है इन की मानिन्द नहीं है। वह सब का ख़ालिक़ है, और इस्राईली क़ौम उस का मौरूसी हिस्सा है। रब्ब-उल-अफ़्वाज ही उस का नाम है। {i51:20} अब रब बाबल पर हम्ला करेगा {51:20} ऐ बाबल, तू मेरा हथोड़ा, मेरा जंगी हथियार था। तेरे ही ज़रीए मैं ने क़ौमों को पाश पाश कर दिया, सल्तनतों को ख़ाक में मिला दिया। {51:21} तेरे ही ज़रीए मैं ने घोड़ों को सवारों समेत और रथों को रथबानों समेत पाश पाश कर दिया। {51:22} तेरे ही ज़रीए मैं ने मर्दों और औरतों, बुज़ुर्गों और बच्चों, नौजवानों और कुंवारियों को पारा पारा कर दिया। {51:23} तेरे ही ज़रीए मैं ने गल्लाबान और उस के रेवड़, किसान और उस के बैलों, गवर्नरों और सरकारी मुलाज़िमों को रेज़ा रेज़ा कर दिया। {51:24} लेकिन अब मैं बाबल और उस के तमाम बाशिन्दों को उन की सिय्यून के साथ बदसुलूकी का पूरा अज्र दूँगा। तुम अपनी आँखों से इस के गवाह होगे।” यह रब का फ़रमान है। {51:25} रब फ़रमाता है, “ऐ बाबल, पहले तू मोहलक पहाड़ था जिस ने तमाम दुनिया का सत्यानास कर दिया। लेकिन अब मैं तुझ से निपट लेता हूँ। मैं अपना हाथ तेरे ख़िलाफ़ बढ़ा कर तुझे ऊँची ऊँची चटानों से पटख़ दूँगा। आख़िरकार मल्बे का झुलसा हुआ ढेर ही बाक़ी रहेगा। {51:26} तू इतना तबाह हो जाएगा कि तेरे पत्थर न किसी मकान के कोनों के लिए, न किसी बुन्याद के लिए इस्तेमाल हो सकेंगे।” यह रब का फ़रमान है। {51:27} “आओ, मुल्क में जंग का झंडा गाड़ दो! अक़्वाम में नरसिंगा फूँक फूँक कर उन्हें बाबल के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए मख़्सूस करो! उस से लड़ने के लिए अरारात, मिन्नी और अश्कनाज़ की सल्तनतों को बुलाओ! बाबल से लड़ने के लिए कमाँडर मुक़र्रर करो। घोड़े भेज दो जो टिड्डियों के हौलनाक ग़ोल की तरह उस पर टूट पड़ें। {51:28} अक़्वाम को बाबल से लड़ने के लिए मख़्सूस करो! मादी बादशाह अपने गवर्नरों, अफ़्सरों और तमाम मुती ममालिक समेत तय्यार हो जाएँ। {51:29} ज़मीन लरज़ती और थरथराती है, क्यूँकि रब का मन्सूबा अटल है, वह मुल्क-ए-बाबल को यूँ तबाह करना चाहता है कि आइन्दा उस में कोई न रहे। {51:30} बाबल के जंगआज़मूदा फ़ौजी लड़ने से बाज़ आ कर अपने क़िलों में छुप गए हैं। उन की ताक़त जाती रही है, वह औरतों की मानिन्द हो गए हैं। अब बाबल के घरों को आग लग गई है, फ़सील के दरवाज़ों के कुंडे टूट गए हैं। {51:31} यके बाद दीगरे क़ासिद दौड़ कर शाह-ए-बाबल को इत्तिला देते हैं, ‘शहर चारों तरफ़ से दुश्मन के क़ब्ज़े में है! {51:32} दरया को पार करने के तमाम रास्ते उस के हाथ में हैं, सरकंडे का दलदली इलाक़ा जल रहा है, और फ़ौजी ख़ौफ़ के मारे बेहिस्स-ओ-हरकत हो गए हैं’।” {51:33} क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “फ़सल की कटाई से पहले पहले गाहने की जगह के फ़र्श को दबा दबा कर मज़बूत किया जाता है। यही बाबल बेटी की हालत है। फ़सल की कटाई क़रीब आ गई है, और थोड़ी देर के बाद बाबल को पाँओ तले ख़ूब दबाया जाएगा। {i51:34} रब बाबल से यरूशलम का इन्तिक़ाम लेगा {51:34} सिय्यून बेटी रोती है, ‘शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने मुझे हड़प कर लिया, चूस लिया, ख़ाली बर्तन की तरह एक तरफ़ रख दिया है। उस ने अज़दहे की तरह मुझे निगल लिया, अपने पेट को मेरी लज़ीज़ चीज़ों से भर लिया है। फिर उस ने मुझे वतन से निकाल दिया।’ {51:35} लेकिन अब सिय्यून की रहने वाली कहे, ‘जो ज़ियादती मेरे साथ हुई वह बाबल के साथ की जाए। जो क़त्ल-ओ-ग़ारत मुझ में हुई वह बाबल के बाशिन्दों में मच जाए’!” {51:36} रब यरूशलम से फ़रमाता है, “देख, मैं ख़ुद तेरे हक़ में लड़ूँगा, मैं ख़ुद तेरा बदला लूँगा। तब उस का समुन्दर ख़ुश्क हो जाएगा, उस के चश्मे बन्द हो जाएंगे। {51:37} बाबल मल्बे का ढेर बन जाएगा। गीदड़ ही उस में अपना घर बना लेंगे। उसे देख कर गुज़रने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और वह ‘तौबा तौबा’ कह कर आगे निकलेंगे। कोई भी वहाँ नहीं बसेगा। {51:38} इस वक़्त बाबल के बाशिन्दे शेरबबर की तरह दहाड़ रहे हैं, वह शेर के बच्चों की तरह ग़ुर्रा रहे हैं। {51:39} लेकिन रब फ़रमाता है कि वह अभी मस्त होंगे कि मैं उन के लिए ज़ियाफ़त तय्यार करूँगा, एक ऐसी ज़ियाफ़त जिस में वह मत्वाले हो कर ख़ुशी के नारे मारेंगे, फिर अबदी नींद सो जाएंगे। उस नींद से वह कभी नहीं उठेंगे। {51:40} मैं उन्हें भेड़ के बच्चों, मेंढों और बकरों की तरह क़साई के पास ले जाऊँगा। {51:41} हाय, बाबल दुश्मन के क़ब्ज़े में आ गया है! जिस की तारीफ़ पूरी दुनिया करती थी वह छीन लिया गया है! अब उसे देख कर क़ौमों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। {51:42} समुन्दर बाबल पर चढ़ आया है, उस की गरजती लहरों ने उसे ढाँप लिया है। {51:43} उस के शहर रेगिस्तान बन गए हैं, अब चारों तरफ़ ख़ुश्क और वीरान बयाबान ही नज़र आता है। न कोई उस में रहता, न उस में से गुज़रता है। {51:44} मैं बाबल के देवता बेल को सज़ा दे कर उस के मुँह से वह कुछ निकाल दूँगा जो उस ने हड़प कर लिया था। अब से दीगर अक़्वाम जौक़-दर-जौक़ उस के पास नहीं आएँगी, क्यूँकि बाबल की फ़सील भी गिर गई है। {51:45} ऐ मेरी क़ौम, बाबल से निकल आ! हर एक अपनी जान बचाने के लिए वहाँ से भाग जाए, क्यूँकि रब का शदीद ग़ज़ब उस पर नाज़िल होने को है। {51:46} जब अफ़्वाहें मुल्क में फैल जाएँ तो हिम्मत मत हारना, न ख़ौफ़ खाना। क्यूँकि हर साल कोई और अफ़्वाह फैलेगी, ज़ुल्म पर ज़ुल्म और हुक्मरान पर हुक्मरान आता रहेगा। {51:47} क्यूँकि वह वक़्त क़रीब ही है जब मैं बाबल के बुतों को सज़ा दूँगा। तब पूरे मुल्क की बेहुरमती हो जाएगी, और उस के मक़्तूल उस के बीच में गिर कर पड़े रहेंगे। {51:48} तब आसमान-ओ-ज़मीन और जो कुछ उन में है बाबल पर शादियाना बजाएंगे। क्यूँकि तबाहकुन दुश्मन शिमाल से उस पर हम्ला करने आ रहा है।” यह रब का फ़रमान है। {51:49} “बाबल ने पूरी दुनिया में बेशुमार लोगों को क़त्ल किया है, लेकिन अब वह ख़ुद हलाक हो जाएगा, इस लिए कि उस ने इतने इस्राईलियों को क़त्ल किया है। {51:50} ऐ तलवार से बचे हुए इस्राईलियो, रुके न रहो बल्कि रवाना हो जाओ! दूरदराज़ मुल्क में रब को याद करो, यरूशलम का भी ख़याल करो! {51:51} बेशक तुम कहते हो, ‘हम शर्मिन्दा हैं, हमारी सख़्त रुस्वाई हुई है, शर्म के मारे हम ने अपने मुँह को ढाँप लिया है। क्यूँकि परदेसी रब के घर की मुक़द्दसतरीन जगहों में घुस आए हैं।’ {51:52} लेकिन रब फ़रमाता है कि वह वक़्त आने वाला है जब मैं बाबल के बुतों को सज़ा दूँगा। तब उस के पूरे मुल्क में मौत के घाट उतरने वालों की आहें सुनाई देंगी। {51:53} ख़्वाह बाबल की ताक़त आसमान तक ऊँची क्यूँ न हो, ख़्वाह वह अपने बुलन्द क़िले को कितना मज़बूत क्यूँ न करे तो भी वह गिर जाएगा। मैं तबाह करने वाले फ़ौजी उस पर चढ़ा लाऊँगा।” यह रब का फ़रमान है। {51:54} “सुनो! बाबल में चीख़ें बुलन्द हो रही हैं, मुल्क-ए-बाबल धड़ाम से गिर पड़ा है। {51:55} क्यूँकि रब बाबल को बर्बाद कर रहा, वह उस का शोर-शराबा बन्द कर रहा है। दुश्मन की लहरें मुतलातिम समुन्दर की तरह उस पर चढ़ रही हैं, उन की गरजती आवाज़ फ़िज़ा में गूँज रही है। {51:56} क्यूँकि तबाहकुन दुश्मन बाबल पर हम्ला करने आ रहा है। तब उस के सूरमाओं को पकड़ा जाएगा और उन की कमानें टूट जाएँगी। क्यूँकि रब इन्तिक़ाम का ख़ुदा है, वह हर इन्सान को उस का मुनासिब अज्र देगा।” {51:57} दुनिया का बादशाह जिस का नाम रब्ब-उल-अफ़्वाज है फ़रमाता है, “मैं बाबल के बड़ों को मत्वाला करूँगा, ख़्वाह वह बुज़ुर्ग, दानिशमन्द, गवर्नर, सरकारी अफ़्सर या फ़ौजी क्यूँ न हों। तब वह अबदी नींद सो जाएंगे और दुबारा कभी नहीं उठेंगे।” {51:58} रब फ़रमाता है, “बाबल की मोटी मोटी फ़सील को ख़ाक में मिलाया जाएगा, और उस के ऊँचे ऊँचे दरवाज़े राख हो जाएंगे। तब यह कहावत बाबल पर सादिक़ आएगी, ‘अक़्वाम की मेहनत-मशक़्क़त बेफ़ाइदा रही, जो कुछ उन्हों ने बड़ी मुश्किल से बनाया वह नज़र-ए-आतिश हो गया है’।” {i51:59} यरमियाह अपना पैग़ाम बाबल भेजता है {51:59} यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह के चौथे साल में यरमियाह नबी ने यह कलाम सिरायाह बिन नैरियाह बिन मह्सियाह के सपुर्द कर दिया जो उस वक़्त बादशाह के साथ बाबल के लिए रवाना हुआ। सफ़र का पूरा बन्द-ओ-बस्त सिरायाह के हाथ में था। {51:60} यरमियाह ने तूमार में बाबल पर नाज़िल होने वाली आफ़त की पूरी तफ़्सील लिख दी थी। उस के बाबल के बारे में तमाम पैग़ामात उस में क़लमबन्द थे। {51:61} उस ने सिरायाह से कहा, “बाबल पहुँच कर ध्यान से तूमार की तमाम बातों की तिलावत करें। {51:62} तब दुआ करें, ‘ऐ रब, तू ने एलान किया है कि मैं बाबल को यूँ तबाह करूँगा कि आइन्दा न इन्सान, न हैवान उस में बसेगा। शहर अबद तक वीरान-ओ-सुन्सान रहेगा।’ {51:63} पूरी किताब की तिलावत के इख़तिताम पर उसे पत्थर के साथ बांध लें, फिर दरया-ए-फ़ुरात में फैंक कर {51:64} बोलें, ‘बाबल का बेड़ा इस पत्थर की तरह ग़र्क़ हो जाएगा। जो आफ़त मैं उस पर नाज़िल करूँगा उस से उसे यूँ ख़ाक में मिलाया जाएगा कि दुबारा कभी नहीं उठेगा। वह सरासर ख़त्म हो जाएगा’।” यरमियाह के पैग़ामात यहाँ इख़तिताम पर पहुँच गए हैं। {i52:1} शाह-ए-यहूदाह सिदक़ियाह की हुकूमत {52:1} सिदक़ियाह 21 साल की उम्र में बादशाह बना, और यरूशलम में उस की हुकूमत का दौरानिया 11 साल था। उस की माँ हमूतल बिन्त यरमियाह लिब्ना शहर की रहने वाली थी। {52:2} यहूयक़ीम की तरह सिदक़ियाह ऐसा काम करता रहा जो रब को नापसन्द था। {52:3} रब यरूशलम और यहूदाह के बाशिन्दों से इतना नाराज़ हुआ कि आख़िर में उस ने उन्हें अपने हुज़ूर से ख़ारिज कर दिया। एक दिन सिदक़ियाह बाबल के बादशाह से सरकश हुआ, {i52:4} सिदक़ियाह का फ़रार और गिरिफ़्तारी {52:4} इस लिए शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र तमाम फ़ौज अपने साथ ले कर दुबारा यरूशलम पहुँचा ताकि उस पर हम्ला करे। सिदक़ियाह की हुकूमत के नवें साल में बाबल की फ़ौज यरूशलम का मुहासरा करने लगी। यह काम दसवें महीने के दसवें दिन शुरू हुआ। पूरे शहर के इर्दगिर्द बादशाह ने पुश्ते बनवाए। {52:5} सिदक़ियाह की हुकूमत के 11वें साल तक यरूशलम क़ाइम रहा। {52:6} लेकिन फिर काल ने शहर में ज़ोर पकड़ा, और अवाम के लिए खाने की चीज़ें न रहीं। चौथे महीने के नवें दिन {52:7} बाबल के फ़ौजियों ने फ़सील में रख़ना डाल दिया। उसी रात सिदक़ियाह अपने तमाम फ़ौजियों समेत फ़रार होने में कामयाब हुआ, अगरचे शहर दुश्मन से घिरा हुआ था। वह फ़सील के उस दरवाज़े से निकले जो शाही बाग़ के साथ मुल्हिक़ दो दीवारों के बीच में था। वह वादी-ए-यर्दन की तरफ़ भागने लगे, {52:8} लेकिन बाबल की फ़ौज ने बादशाह का ताक़्क़ुब करके उसे यरीहू के मैदान में पकड़ लिया। उस के फ़ौजी उस से अलग हो कर चारों तरफ़ मुन्तशिर हो गए, {52:9} और वह ख़ुद गिरिफ़्तार हो गया। फिर उसे मुल्क-ए-हमात के शहर रिब्ला में शाह-ए-बाबल के पास लाया गया, और वहीं उस ने सिदक़ियाह पर फ़ैसला सादिर किया। {52:10} सिदक़ियाह के देखते देखते शाह-ए-बाबल ने रिब्ला में उस के बेटों को क़त्ल किया। साथ साथ उस ने यहूदाह के तमाम बुज़ुर्गों को भी मौत के घाट उतार दिया। {52:11} फिर उस ने सिदक़ियाह की आँखें निकलवा कर उसे पीतल की ज़न्जीरों में जकड़ लिया और बाबल ले गया जहाँ वह जीते जी रहा। {i52:12} यरूशलम और रब के घर की तबाही {52:12} शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र की हुकूमत के 19वें साल में बादशाह का ख़ास अफ़्सर नबूज़रादान यरूशलम पहुँचा। वह शाही मुहाफ़िज़ों पर मुक़र्रर था। पाँचवें महीने के सातवें दिन उस ने आ कर {52:13} रब के घर, शाही महल और यरूशलम के तमाम मकानों को जला दिया। हर बड़ी इमारत भस्म हो गई। {52:14} उस ने अपने तमाम फ़ौजियों से शहर की पूरी फ़सील को भी गिरा दिया। {52:15} फिर नबूज़रादान ने सब को जिलावतन कर दिया जो यरूशलम में पीछे रह गए थे। वह भी उन में शामिल थे जो जंग के दौरान ग़द्दारी करके शाह-ए-बाबल के पीछे लग गए थे। नबूज़रादान बाक़ीमान्दा कारीगर और ग़रीबों में से भी कुछ बाबल ले गया। {52:16} लेकिन उस ने सब से निचले तब्क़े के बाज़ लोगों को मुल्क-ए-यहूदाह में छोड़ दिया ताकि वह अंगूर के बाग़ों और खेतों को सँभालें। {52:17} बाबल के फ़ौजियों ने रब के घर में जा कर पीतल के दोनों सतूनों, पानी के बासनों को उठाने वाली हथगाड़ियों और समुन्दर नामी पीतल के हौज़ को तोड़ दिया और सारा पीतल उठा कर बाबल ले गए। {52:18} वह रब के घर की ख़िदमत सरअन्जाम देने के लिए दरकार सामान भी ले गए यानी बालटियाँ, बेलचे, बत्ती कतरने के औज़ार, छिड़काओ के कटोरे, प्याले और पीतल का बाक़ी सारा सामान। {52:19} ख़ालिस सोने और चाँदी के बर्तन भी इस में शामिल थे यानी बासन, जलते हुए कोएले के बर्तन, छिड़काओ के कटोरे, बालटियाँ, शमादान, प्याले और मै की नज़रें पेश करने के बर्तन। शाही मुहाफ़िज़ों का यह अफ़्सर सारा सामान उठा कर बाबल ले गया। {52:20} जब दोनों सतूनों, समुन्दर नामी हौज़, हौज़ को उठाने वाले पीतल के बैलों और बासनों को उठाने वाली हथगाड़ियों का पीतल तुड़वाया गया तो वह इतना वज़नी था कि उसे तोला न जा सका। सुलेमान बादशाह ने यह चीज़ें रब के घर के लिए बनवाई थीं। {52:21} हर सतून की ऊँचाई 27 फ़ुट और घेरा 18 फ़ुट था। दोनों खोखले थे, और उन की दीवारों की मोटाई 3 इंच थी। {52:22} उन के बालाई हिस्सों की ऊँचाई साढ़े सात फ़ुट थी, और वह पीतल की जाली और अनारों से सजे हुए थे। {52:23} 96 अनार लगे हुए थे। जाली के इर्दगिर्द कुल 100 अनार लगे थे। {52:24} शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान ने ज़ैल के क़ैदियों को अलग कर दिया: इमाम-ए-आज़म सिरायाह, उस के बाद आने वाले इमाम सफ़नियाह, रब के घर के तीन दरबानों, {52:25} शहर के बचे हुओं में से उस अफ़्सर को जो शहर के फ़ौजियों पर मुक़र्रर था, सिदक़ियाह बादशाह के सात मुशीरों, उम्मत की भर्ती करने वाले अफ़्सर और शहर में मौजूद उस के 60 मर्दों को। {52:26} नबूज़रादान इन सब को अलग करके सूबा हमात के शहर रिब्ला ले गया जहाँ शाह-ए-बाबल था। {52:27} वहाँ नबूकदनज़्ज़र ने उन्हें सज़ा-ए-मौत दी। यूँ यहूदाह के बाशिन्दों को जिलावतन कर दिया गया। {52:28} नबूकदनज़्ज़र ने अपनी हुकूमत के 7वें साल में यहूदाह के 3,023 अफ़राद, {52:29} 18वें साल में यरूशलम के 832 अफ़राद, {52:30} और 23वें साल में 745 अफ़राद को जिलावतन कर दिया। यह आख़िरी लोग शाही मुहाफ़िज़ों के अफ़्सर नबूज़रादान के ज़रीए बाबल लाए गए। कुल 4,600 अफ़राद जिलावतन हुए। {i52:31} यहूयाकीन को आज़ाद किया जाता है {52:31} यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन की जिलावतनी के 37वें साल में अवील-मरूदक बाबल का बादशाह बना। उसी साल के 12वें महीने के 25वें दिन उस ने यहूयाकीन को क़ैदख़ाने से आज़ाद कर दिया। {52:32} उस ने उस के साथ नर्म बातें करके उसे इज़्ज़त की ऐसी कुर्सी पर बिठाया जो बाबल में जिलावतन किए गए बाक़ी बादशाहों की निस्बत ज़्यादा अहम थी। {52:33} यहूयाकीन को क़ैदी के कपड़े उतारने की इजाज़त मिली, और उसे ज़िन्दगी भर बादशाह की मेज़ पर बाक़ाइदगी से खाना खाने का शरफ़ हासिल रहा। {52:34} बादशाह ने मुक़र्रर किया कि यहूयाकीन को उम्र भर इतना वज़ीफ़ा मिलता रहे कि उस की रोज़मर्रा ज़रूरियात पूरी होती रहें।