{i1:1} दान्याल और उस के दोस्त शाह-ए-बाबल के दरबार में {1:1} शाह-ए-यहूदाह यहूयक़ीम की सल्तनत के तीसरे साल में शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने यरूशलम आ कर उस का मुहासरा किया। {1:2} उस वक़्त रब ने यहूयक़ीम और अल्लाह के घर का काफ़ी सामान नबूकदनज़्ज़र के हवाले कर दिया। नबूकदनज़्ज़र ने यह चीज़ें मुल्क-ए-बाबल में ले जा कर अपने देवता के मन्दिर के ख़ज़ाने में मह्फ़ूज़ कर दीं। {1:3} फिर उस ने अपने दरबार के आला अफ़्सर अश्पनाज़ को हुक्म दिया, “यहूदाह के शाही ख़ानदान और ऊँचे तब्क़े के ख़ानदानों की तफ़्तीश करो। उन में से कुछ ऐसे नौजवानों को चुन कर ले आओ {1:4} जो बेऐब, ख़ूबसूरत, हिक्मत के हर लिहाज़ से समझदार, तालीमयाफ़्ता और समझने में तेज़ हों। ग़रज़ यह आदमी शाही महल में ख़िदमत करने के क़ाबिल हों। उन्हें बाबल की ज़बान लिखने और बोलने की तालीम दो।” {1:5} बादशाह ने मुक़र्रर किया कि रोज़ाना उन्हें शाही बावर्चीख़ाने से कितना खाना और मै मिलनी है। तीन साल की तर्बियत के बाद उन्हें बादशाह की ख़िदमत के लिए हाज़िर होना था। {1:6} जब इन नौजवानों को चुना गया तो चार आदमी उन में शामिल थे जिन के नाम दान्याल, हननियाह, मीसाएल और अज़रियाह थे। {1:7} दरबार के आला अफ़्सर ने उन के नए नाम रखे। दान्याल बेल्तशज़्ज़र में बदल गया, हननियाह सद्रक में, मीसाएल मीसक में और अज़रियाह अबद्नजू में। {1:8} लेकिन दान्याल ने मुसम्मम इरादा कर लिया कि मैं अपने आप को शाही खाना खाने और शाही मै पीने से नापाक नहीं करूँगा। उस ने दरबार के आला अफ़्सर से इन चीज़ों से पर्हेज़ करने की इजाज़त माँगी। {1:9} अल्लाह ने पहले से इस अफ़्सर का दिल नर्म कर दिया था, इस लिए वह दान्याल का ख़ास लिहाज़ करता और उस पर मेहरबानी करता था। {1:10} लेकिन दान्याल की दरख़्वास्त सुन कर उस ने जवाब दिया, “मुझे अपने आक़ा बादशाह से डर है। उन ही ने मुतअय्यिन किया कि तुम्हें क्या क्या खाना और पीना है। अगर उन्हें पता चले कि तुम दूसरे नौजवानों की निस्बत दुबले-पतले और कमज़ोर लगे तो वह मेरा सर क़लम करेंगे।” {1:11} तब दान्याल ने उस निगरान से बात की जिसे दरबार के आला अफ़्सर ने दान्याल, हननियाह, मीसाएल और अज़रियाह पर मुक़र्रर किया था। वह बोला, {1:12} “ज़रा दस दिन तक अपने ख़ादिमों को आज़माएँ। इतने में हमें खाने के लिए सिर्फ़ साग-पात और पीने के लिए पानी दीजिए। {1:13} इस के बाद हमारी सूरत का मुक़ाबला उन दीगर नौजवानों के साथ करें जो शाही खाना खाते हैं। फिर ही फ़ैसला करें कि आइन्दा अपने ख़ादिमों के साथ कैसा सुलूक करेंगे।” {1:14} निगरान मान गया। दस दिन तक वह उन्हें साग-पात खिला कर और पानी पिला कर आज़माता रहा। {1:15} दस दिन के बाद क्या देखता है कि दान्याल और उस के तीन दोस्त शाही खाना खाने वाले दीगर नौजवानों की निस्बत कहीं ज़्यादा सेहतमन्द और मोटे-ताज़े लग रहे हैं। {1:16} तब निगरान उन के लिए मुक़र्ररा शाही खाने और मै का इन्तिज़ाम बन्द करके उन्हें सिर्फ़ साग-पात खिलाने लगा। {1:17} अल्लाह ने इन चार आदमियों को अदब और हिक्मत के हर शोबे में इल्म और समझ अता की। नीज़, दान्याल हर क़िस्म की रोया और ख़्वाब की ताबीर कर सकता था। {1:18} मुक़र्ररा तीन साल के बाद दरबार के आला अफ़्सर ने तमाम नौजवानों को नबूकदनज़्ज़र के सामने पेश किया। {1:19} जब बादशाह ने उन से गुफ़्तगु की तो मालूम हुआ कि दान्याल, हननियाह, मीसाएल और अज़रियाह दूसरों पर सब्क़त रखते हैं। चुनाँचे चारों बादशाह के मुलाज़िम बन गए। {1:20} जब भी किसी मुआमले में ख़ास हिक्मत और समझ दरकार होती तो बादशाह ने देखा कि यह चार नौजवान मश्वरा देने में पूरी सल्तनत के तमाम क़िस्मत का हाल बताने वालों और जादूगरों से दस गुना ज़्यादा क़ाबिल हैं। {1:21} दान्याल ख़ोरस की हुकूमत के पहले साल तक शाही दरबार में ख़िदमत करता रहा। {i2:1} नबूकदनज़्ज़र का ख़्वाब {2:1} अपनी हुकूमत के दूसरे साल में नबूकदनज़्ज़र ने ख़्वाब देखा। ख़्वाब इतना हौलनाक था कि वह घबरा कर जाग उठा। {2:2} उस ने हुक्म दिया कि तमाम क़िस्मत का हाल बताने वाले, जादूगर, अफ़्सूँगर और नजूमी मेरे पास आ कर ख़्वाब का मतलब बताएँ। जब वह हाज़िर हुए {2:3} तो बादशाह बोला, “मैं ने एक ख़्वाब देखा है जो मुझे बहुत परेशान कर रहा है। अब मैं उस का मतलब जानना चाहता हूँ।” {2:4} नुजूमियों ने अरामी ज़बान में जवाब दिया, “बादशाह सलामत अपने ख़ादिमों के सामने यह ख़्वाब बयान करें तो हम उस की ताबीर करेंगे।” {2:5} लेकिन बादशाह बोला, “नहीं, तुम ही मुझे वह कुछ बताओ और उस की ताबीर करो जो मैं ने ख़्वाब में देखा। अगर तुम यह न कर सको तो मैं हुक्म दूँगा कि तुम्हें टुकड़े टुकड़े कर दिया जाए और तुम्हारे घर कचरे के ढेर हो जाएँ। यह मेरा मुसम्मम इरादा है। {2:6} लेकिन अगर तुम मुझे वह कुछ बता कर उस की ताबीर करो जो मैं ने ख़्वाब में देखा तो मैं तुम्हें अच्छे तोह्फ़े और इनआम दूँगा, नीज़ तुम्हारी ख़ास इज़्ज़त करूँगा। अब शुरू करो! मुझे वह कुछ बताओ और उस की ताबीर करो जो मैं ने ख़्वाब में देखा।” {2:7} एक बार फिर उन्हों ने मिन्नत की, “बादशाह अपने ख़ादिमों के सामने अपना ख़्वाब बताएँ तो हम ज़रूर उस की ताबीर करेंगे।” {2:8} बादशाह ने जवाब दिया, “मुझे साफ़ पता है कि तुम क्या कर रहे हो! तुम सिर्फ़ टाल-मटोल कर रहे हो, क्यूँकि तुम समझ गए हो कि मेरा इरादा पक्का है। {2:9} अगर तुम मुझे ख़्वाब न बताओ तो तुम सब को एक ही सज़ा दी जाएगी। क्यूँकि तुम सब झूट और ग़लत बातें पेश करने पर मुत्तफ़िक़ हो गए हो, यह उम्मीद रखते हुए कि हालात किसी वक़्त बदल जाएंगे। मुझे ख़्वाब बताओ तो मुझे पता चल जाएगा कि तुम मुझे उस की सहीह ताबीर पेश कर सकते हो।” {2:10} नुजूमियों ने एतिराज़ किया, “दुनिया में कोई भी इन्सान वह कुछ नहीं कर पाता जो बादशाह माँगते हैं। यह कभी हुआ भी नहीं कि किसी बादशाह ने ऐसी बात किसी क़िस्मत का हाल बताने वाले, जादूगर या नजूमी से तलब की, ख़्वाह बादशाह कितना अज़ीम क्यूँ न था। {2:11} जिस चीज़ का तक़ाज़ा बादशाह करते हैं वह हद से ज़्यादा मुश्किल है। सिर्फ़ देवता ही यह बात बादशाह पर ज़ाहिर कर सकते हैं, लेकिन वह तो इन्सान के दरमियान रहते नहीं।” {2:12} यह सुन कर बादशाह आग-बगूला हो गया। बड़े ग़ुस्से में उस ने हुक्म दिया कि बाबल के तमाम दानिशमन्दों को सज़ा-ए-मौत दी जाए। {2:13} फ़रमान सादिर हुआ कि दानिशमन्दों को मार डालना है। चुनाँचे दान्याल और उस के दोस्तों को भी तलाश किया गया ताकि उन्हें सज़ा-ए-मौत दें। {2:14} शाही मुहाफ़िज़ों का अफ़्सर बनाम अर्यूक अभी दानिशमन्दों को मार डालने के लिए रवाना हुआ कि दान्याल बड़ी हिक्मत और मौक़ाशनासी से उस से मुख़ातिब हुआ। {2:15} उस ने अफ़्सर से पूछा, “बादशाह ने इतना सख़्त फ़रमान क्यूँ जारी किया?” अर्यूक ने दान्याल को सारा मुआमला बयान किया। {2:16} दान्याल फ़ौरन बादशाह के पास गया और उस से दरख़्वास्त की, “ज़रा मुझे कुछ मुहलत दीजिए ताकि मैं बादशाह के ख़्वाब की ताबीर कर सकूँ।” {2:17} फिर वह अपने घर वापस गया और अपने दोस्तों हननियाह, मीसाएल और अज़रियाह को तमाम सूरत-ए-हाल सुनाई। {2:18} वह बोला, “आसमान के ख़ुदा से इल्तिजा करें कि वह मुझ पर रहम करे। मिन्नत करें कि वह मेरे लिए भेद खोले ताकि हम दीगर दानिशमन्दों के साथ हलाक न हो जाएँ।” {2:19} रात के वक़्त दान्याल ने रोया देखी जिस में उस के लिए भेद खोला गया। तब उस ने आसमान के ख़ुदा की हम्द-ओ-सना की, {2:20} “अल्लाह के नाम की तम्जीद अज़ल से अबद तक हो। वही हिक्मत और क़ुव्वत का मालिक है। {2:21} वही औक़ात और ज़माने बदलने देता है। वही बादशाहों को तख़्त पर बिठा देता और उन्हें तख़्त पर से उतार देता है। वही दानिशमन्दों को दानाई और समझदारों को समझ अता करता है। {2:22} वही गहरी और पोशीदा बातें ज़ाहिर करता है। जो कुछ अंधेरे में छुपा रहता है उस का इल्म वह रखता है, क्यूँकि वह रौशनी से घिरा रहता है। {2:23} ऐ मेरे बापदादा के ख़ुदा, मैं तेरी हम्द-ओ-सना करता हूँ! तू ने मुझे हिक्मत और ताक़त अता की है। जो बात हम ने तुझ से माँगी वह तू ने हम पर ज़ाहिर की, क्यूँकि तू ने हम पर बादशाह का ख़्वाब ज़ाहिर किया है।” {2:24} फिर दान्याल अर्यूक के पास गया जिसे बादशाह ने बाबल के दानिशमन्दों को सज़ा-ए-मौत देने की ज़िम्मादारी दी थी। उस ने उस से दरख़्वास्त की, “बाबल के दानिशमन्दों को मौत के घाट न उतारें, क्यूँकि मैं बादशाह के ख़्वाब की ताबीर कर सकता हूँ। मुझे बादशाह के हुज़ूर पहुँचा दें तो मैं उन्हें सब कुछ बता दूँगा।” {2:25} यह सुन कर अर्यूक भाग कर दान्याल को बादशाह के हुज़ूर ले गया। वह बोला, “मुझे यहूदाह के जिलावतनों में से एक आदमी मिल गया जो बादशाह को ख़्वाब का मतलब बता सकता है।” {2:26} तब नबूकदनज़्ज़र ने दान्याल से जो बेल्तशज़्ज़र कहलाता था पूछा, “क्या तुम मुझे वह कुछ बता सकते हो जो मैं ने ख़्वाब में देखा? क्या तुम उस की ताबीर कर सकते हो?” {2:27} दान्याल ने जवाब दिया, “जो भेद बादशाह जानना चाहते हैं उसे खोलने की कुंजी किसी भी दानिशमन्द, जादूगर, क़िस्मत का हाल बताने वाले या ग़ैबदान के पास नहीं होती। {2:28} लेकिन आसमान पर एक ख़ुदा है जो भेदों का मतलब इन्सान पर ज़ाहिर कर देता है। उसी ने नबूकदनज़्ज़र बादशाह को दिखाया कि आने वाले दिनों में क्या कुछ पेश आएगा। सोते वक़्त आप ने ख़्वाब में रोया देखी। {2:29} ऐ बादशाह, जब आप पलंग पर लेटे हुए थे तो आप के ज़हन में आने वाले दिनों के बारे में ख़यालात उभर आए। तब भेदों को खोलने वाले ख़ुदा ने आप पर ज़ाहिर किया कि आने वाले दिनों में क्या कुछ पेश आएगा। {2:30} इस भेद का मतलब मुझ पर ज़ाहिर हुआ है, लेकिन इस लिए नहीं कि मुझे दीगर तमाम दानिशमन्दों से ज़्यादा हिक्मत हासिल है बल्कि इस लिए कि आप को भेद का मतलब मालूम हो जाए और आप समझ सकें कि आप के ज़हन में क्या कुछ उभर आया है। {2:31} ऐ बादशाह, रोया में आप ने अपने सामने एक बड़ा और लम्बा-तड़ंगा मुजस्समा देखा जो तेज़ी से चमक रहा था। शक्ल-ओ-सूरत ऐसी थी कि इन्सान के रोंगटे खड़े हो जाते थे। {2:32} सर ख़ालिस सोने का था जबकि सीना और बाज़ू चाँदी के, पेट और रान पीतल की {2:33} और पिंडलियाँ लोहे की थीं। उस के पाँओ का आधा हिस्सा लोहा और आधा हिस्सा पकी हुई मिट्टी था। {2:34} आप इस मन्ज़र पर ग़ौर ही कर रहे थे कि अचानक किसी पहाड़ी ढलान से पत्थर का बड़ा टुकड़ा अलग हुआ। यह बग़ैर किसी इन्सानी हाथ के हुआ। पत्थर ने धड़ाम से मुजस्समे के लोहे और मिट्टी के पाँओ पर गिर कर दोनों को चूर चूर कर दिया। {2:35} नतीजे में पूरा मुजस्समा पाश पाश हो गया। जितना भी लोहा, मिट्टी, पीतल, चाँदी और सोना था वह उस भूसे की मानिन्द बन गया जो गाहते वक़्त बाक़ी रह जाता है। हवा ने सब कुछ यूँ उड़ा दिया कि इन चीज़ों का नाम-ओ-निशान तक न रहा। लेकिन जिस पत्थर ने मुजस्समे को गिरा दिया वह ज़बरदस्त पहाड़ बन कर इतना बढ़ गया कि पूरी दुनिया उस से भर गई। {2:36} यही बादशाह का ख़्वाब था। अब हम बादशाह को ख़्वाब का मतलब बताते हैं। {2:37} ऐ बादशाह, आप शहन्शाह हैं। आसमान के ख़ुदा ने आप को सल्तनत, क़ुव्वत, ताक़त और इज़्ज़त से नवाज़ा है। {2:38} उस ने इन्सान को जंगली जानवरों और परिन्दों समेत आप ही के हवाले कर दिया है। जहाँ भी वह बसते हैं उस ने आप को ही उन पर मुक़र्रर किया है। आप ही मज़कूरा सोने का सर हैं। {2:39} आप के बाद एक और सल्तनत क़ाइम हो जाएगी, लेकिन उस की ताक़त आप की सल्तनत से कम होगी। फिर पीतल की एक तीसरी सल्तनत वुजूद में आएगी जो पूरी दुनिया पर हुकूमत करेगी। {2:40} आख़िर में एक चौथी सल्तनत आएगी जो लोहे जैसी ताक़तवर होगी। जिस तरह लोहा सब कुछ तोड़ कर पाश पाश कर देता है उसी तरह वह दीगर सब को तोड़ कर पाश पाश करेगी। {2:41} आप ने देखा कि मुजस्समे के पाँओ और उंगलियों में कुछ लोहा और कुछ पकी हुई मिट्टी थी। इस का मतलब है, इस सल्तनत के दो अलग हिस्से होंगे। लेकिन जिस तरह ख़्वाब में मिट्टी के साथ लोहा मिलाया गया था उसी तरह चौथी सल्तनत में लोहे की कुछ न कुछ ताक़त होगी। {2:42} ख़्वाब में पाँओ की उंगलियों में कुछ लोहा भी था और कुछ मिट्टी भी। इस का मतलब है, चौथी सल्तनत का एक हिस्सा ताक़तवर और दूसरा नाज़ुक होगा। {2:43} लोहे और मिट्टी की मिलावट का मतलब है कि गो लोग आपस में शादी करने से एक दूसरे के साथ मुत्तहिद होने की कोशिश करेंगे तो भी वह एक दूसरे से पैवस्त नहीं रहेंगे, बिलकुल उसी तरह जिस तरह लोहा मिट्टी के साथ पैवस्त नहीं रह सकता। {2:44} जब यह बादशाह हुकूमत करेंगे, उन ही दिनों में आसमान का ख़ुदा एक बादशाही क़ाइम करेगा जो न कभी तबाह होगी, न किसी दूसरी क़ौम के हाथ में आएगी। यह बादशाही इन दीगर तमाम सल्तनतों को पाश पाश करके ख़त्म करेगी, लेकिन ख़ुद अबद तक क़ाइम रहेगी। {2:45} यही ख़्वाब में उस पत्थर का मतलब है जिस ने बग़ैर किसी इन्सानी हाथ के पहाड़ी ढलान से अलग हो कर मुजस्समे के लोहे, पीतल, मिट्टी, चाँदी और सोने को पाश पाश कर दिया। इस तरीक़े से अज़ीम ख़ुदा ने बादशाह पर ज़ाहिर किया है कि मुस्तक़बिल में क्या कुछ पेश आएगा। यह ख़्वाब क़ाबिल-ए-एतिमाद और उस की ताबीर सहीह है।” {2:46} यह सुन कर नबूकदनज़्ज़र बादशाह ने औंधे मुँह हो कर दान्याल को सिज्दा किया और हुक्म दिया कि दान्याल को ग़ल्ला और बख़ूर की क़ुर्बानियाँ पेश की जाएँ। {2:47} दान्याल से उस ने कहा, “यक़ीनन, तुम्हारा ख़ुदा ख़ुदाओं का ख़ुदा और बादशाहों का मालिक है। वह वाक़ई भेदों को खोलता है, वर्ना तुम यह भेद मेरे लिए खोल न पाते।” {2:48} नबूकदनज़्ज़र ने दान्याल को बड़ा उह्दा और मुतअद्दिद बेशक़ीमत तोह्फ़े दिए। उस ने उसे पूरे सूबा बाबल का गवर्नर बना दिया। साथ साथ दान्याल बाबल के तमाम दानिशमन्दों पर मुक़र्रर हुआ। {2:49} उस की गुज़ारिश पर बादशाह ने सद्रक, मीसक और अबद्नजू को सूबा बाबल की इन्तिज़ामिया पर मुक़र्रर किया। दान्याल ख़ुद शाही दरबार में हाज़िर रहता था। {i3:1} सोने के बुत की पूजा करने का हुक्म {3:1} एक दिन नबूकदनज़्ज़र ने सोने का मुजस्समा बनवाया। उस की ऊँचाई 90 फ़ुट और चौड़ाई 9 फ़ुट थी। उस ने हुक्म दिया कि बुत को सूबा बाबल के मैदान बनाम दूरा में खड़ा किया जाए। {3:2} फिर उस ने तमाम सूबेदारों, गवर्नरों, मुन्तज़िमों, मुशीरों, ख़ज़ानचियों, जजों, मजिस्ट्रेटों, और सूबों के दीगर तमाम बड़े बड़े सरकारी मुलाज़िमों को पैग़ाम भेजा कि मुजस्समे की मख़्सूसियत के लिए आ कर जमा हो जाओ। {3:3} चुनाँचे सब बुत की मख़्सूसियत के लिए जमा हो गए। जब सब उस के सामने खड़े थे {3:4} तो शाही नक़ीब ने बुलन्द आवाज़ से एलान किया, “ऐ मुख़्तलिफ़ क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के लोगो, सुनो! बादशाह फ़रमाता है, {3:5} ‘जूँ ही नरसिंगा, शहनाई, सन्तूर, सरोद, ऊद, बीन और दीगर तमाम साज़ बजेंगे तो लाज़िम है कि सब औंधे मुँह हो कर बादशाह के खड़े किए गए सोने के बुत को सिज्दा करें। {3:6} जो भी सिज्दा न करे उसे फ़ौरन भड़कती भट्टी में फैंका जाएगा’।” {3:7} चुनाँचे जूँ ही साज़ बजने लगे तो मुख़्तलिफ़ क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के तमाम लोग मुँह के बल हो कर नबूकदनज़्ज़र के खड़े किए गए बुत को सिज्दा करने लगे। {3:8} उस वक़्त कुछ नजूमी बादशाह के पास आ कर यहूदियों पर इल्ज़ाम लगाने लगे। {3:9} वह बोले, “बादशाह सलामत अबद तक जीते रहें! {3:10} ऐ बादशाह, आप ने फ़रमाया, ‘जूँ ही नरसिंगा, शहनाई, सन्तूर, सरोद, ऊद, बीन और दीगर तमाम साज़ बजेंगे तो लाज़िम है कि सब औंधे मुँह हो कर बादशाह के खड़े किए गए इस सोने के बुत को सिज्दा करें। {3:11} जो भी सिज्दा न करे उसे भड़कती भट्टी में फैंका जाएगा’ {3:12} लेकिन कुछ यहूदी आदमी हैं जो आप की परवा ही नहीं करते, हालाँकि आप ने उन्हें सूबा बाबल की इन्तिज़ामिया पर मुक़र्रर किया था। यह आदमी बनाम सद्रक, मीसक और अबद्नजू न आप के देवताओं की पूजा करते, न सोने के उस बुत की परस्तिश करते हैं जो आप ने खड़ा किया है।” {3:13} यह सुन कर नबूकदनज़्ज़र आपे से बाहर हो गया। उस ने सीधा सद्रक, मीसक और अबद्नजू को बुलाया। जब पहुँचे {3:14} तो बोला, “ऐ सद्रक, मीसक और अबद्नजू, क्या यह सहीह है कि न तुम मेरे देवताओं की पूजा करते, न मेरे खड़े किए गए मुजस्समे की परस्तिश करते हो? {3:15} मैं तुम्हें एक आख़िरी मौक़ा देता हूँ। साज़ दुबारा बजेंगे तो तुम्हें मुँह के बल हो कर मेरे बनवाए हुए मुजस्समे को सिज्दा करना है। अगर तुम ऐसा न करो तो तुम्हें सीधा भड़कती भट्टी में फैंका जाएगा। तब कौन सा ख़ुदा तुम्हें मेरे हाथ से बचा सकेगा?” {3:16} सद्रक, मीसक और अबद्नजू ने जवाब दिया, “ऐ नबूकदनज़्ज़र, इस मुआमले में हमें अपना दिफ़ा करने की ज़रूरत नहीं है। {3:17} जिस ख़ुदा की ख़िदमत हम करते हैं वह हमें बचा सकता है, ख़्वाह हमें भड़कती भट्टी में क्यूँ न फैंका जाए। ऐ बादशाह, वह हमें ज़रूर आप के हाथ से बचाएगा। {3:18} लेकिन अगर वह हमें न भी बचाए तो भी आप को मालूम हो कि न हम आप के देवताओं की पूजा करेंगे, न आप के खड़े किए गए सोने के मुजस्समे की परस्तिश करेंगे।” {3:19} यह सुन कर नबूकदनज़्ज़र आग-बगूला हो गया। सद्रक, मीसक और अबद्नजू के सामने उस का चिहरा बिगड़ गया और उस ने हुक्म दिया कि भट्टी को मामूल की निस्बत सात गुना ज़्यादा गर्म किया जाए। {3:20} फिर उस ने कहा कि बेहतरीन फ़ौजियों में से चन्द एक सद्रक, मीसक और अबद्नजू को बांध कर भड़कती भट्टी में फैंक दें। {3:21} तीनों को बांध कर भड़कती भट्टी में फैंका गया। उन के चोग़े, पाजामे और टोपियाँ उतारी न गईं। {3:22} चूँकि बादशाह ने भट्टी को गर्म करने पर ख़ास ज़ोर दिया था इस लिए आग इतनी तेज़ हुई कि जो फ़ौजी सद्रक, मीसक और अबद्नजू को ले कर भट्टी के मुँह तक चढ़ गए वह फ़ौरन नज़र-ए-आतिश हो गए। {3:23} उन के क़ैदी बंधी हुई हालत में शोलाज़न आग में गिर गए। {3:24} अचानक नबूकदनज़्ज़र बादशाह चौंक उठा। उस ने उछल कर अपने मुशीरों से पूछा, “हम ने तो तीन आदमियों को बांध कर भट्टी में फैंकवाया कि नहीं?” उन्हों ने जवाब दिया, “जी, ऐ बादशाह।” {3:25} वह बोला, “तो फिर यह क्या है? मुझे चार आदमी आग में इधर उधर फिरते हुए नज़र आ रहे हैं। न वह बंधे हुए हैं, न उन्हें नुक़्सान पहुँच रहा है। चौथा आदमी देवताओं का बेटा सा लग रहा है।” {3:26} नबूकदनज़्ज़र जलती हुई भट्टी के मुँह के क़रीब गया और पुकारा, “ऐ सद्रक, मीसक और अबद्नजू, ऐ अल्लाह तआला के बन्दो, निकल आओ! इधर आओ।” तब सद्रक, मीसक और अबद्नजू आग से निकल आए। {3:27} सूबेदार, गवर्नर, मुन्तज़िम और शाही मुशीर उन के गिर्द जमा हुए तो देखा कि आग ने उन के जिस्मों को नुक़्सान नहीं पहुँचाया। बालों में से एक भी झुलस नहीं गया था, न उन के लिबास आग से मुतअस्सिर हुए थे। आग और धुएँ की बू तक नहीं थी। {3:28} तब नबूकदनज़्ज़र बोला, “सद्रक, मीसक और अबद्नजू के ख़ुदा की तम्जीद हो जिस ने अपने फ़रिश्ते को भेज कर अपने बन्दों को बचाया। उन्हों ने उस पर भरोसा रख कर बादशाह के हुक्म की नाफ़रमानी की। अपने ख़ुदा के सिवा किसी और की ख़िदमत या परस्तिश करने से पहले वह अपनी जान को देने के लिए तय्यार थे। {3:29} चुनाँचे मेरा हुक्म सुनो! सद्रक, मीसक और अबद्नजू के ख़ुदा के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकना तमाम क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के अफ़राद के लिए सख़्त मना है। जो भी ऐसा करे उसे टुकड़े टुकड़े कर दिया जाएगा और उस के घर को कचरे का ढेर बनाया जाएगा। क्यूँकि कोई भी देवता इस तरह नहीं बचा सकता।” {3:30} फिर बादशाह ने तीनों आदमियों को सूबा बाबल में सरफ़राज़ किया। {i4:1} नबूकदनज़्ज़र के दूसरे ख़्वाब की ताबीर {4:1} नबूकदनज़्ज़र दुनिया की तमाम क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के अफ़राद को ज़ैल का पैग़ाम भेजता है, सब की सलामती हो! {4:2} मैं ने सब को उन इलाही निशानात और मोजिज़ात से आगाह करने का फ़ैसला किया है जो अल्लाह तआला ने मेरे लिए किए हैं। {4:3} उस के निशान कितने अज़ीम, उस के मोजिज़ात कितने ज़बरदस्त हैं! उस की बादशाही अबदी है, उस की सल्तनत नस्ल-दर-नस्ल क़ाइम रहती है। {4:4} मैं, नबूकदनज़्ज़र ख़ुशी और सुकून से अपने महल में रहता था। {4:5} लेकिन एक दिन मैं एक ख़्वाब देख कर बहुत घबरा गया। मैं पलंग पर लेटा हुआ था कि इतनी हौलनाक बातें और रोयाएँ मेरे सामने से गुज़रीं कि मैं डर गया। {4:6} तब मैं ने हुक्म दिया कि बाबल के तमाम दानिशमन्द मेरे पास आएँ ताकि मेरे लिए ख़्वाब की ताबीर करें। {4:7} क़िस्मत का हाल बताने वाले, जादूगर, नजूमी और ग़ैबदान पहुँचे तो मैं ने उन्हें अपना ख़्वाब बयान किया, लेकिन वह उस की ताबीर करने में नाकाम रहे। {4:8} आख़िरकार दान्याल मेरे हुज़ूर आया जिस का नाम बेल्तशज़्ज़र रखा गया है (मेरे देवता का नाम बेल है)। दान्याल में मुक़द्दस देवताओं की रूह है। उसे भी मैं ने अपना ख़्वाब सुनाया। {4:9} मैं बोला, “ऐ बेल्तशज़्ज़र, तुम जादूगरों के सरदार हो, और मैं जानता हूँ कि मुक़द्दस देवताओं की रूह तुम में है। कोई भी भेद तुम्हारे लिए इतना मुश्किल नहीं है कि तुम उसे खोल न सको। अब मेरा ख़्वाब सुन कर उस की ताबीर करो! {4:10} पलंग पर लेटे हुए मैं ने रोया में देखा कि दुनिया के बीच में निहायत लम्बा सा दरख़्त लगा है। {4:11} यह दरख़्त इतना ऊँचा और तनावर होता गया कि आख़िरकार उस की चोटी आसमान तक पहुँच गई और वह दुनिया की इन्तिहा तक नज़र आया। {4:12} उस के पत्ते ख़ूबसूरत थे, और वह बहुत फल लाता था। उस के साय में जंगली जानवर पनाह लेते, उस की शाख़ों में परिन्दे बसेरा करते थे। हर इन्सान-ओ-हैवान को उस से ख़ुराक मिलती थी। {4:13} मैं अभी दरख़्त को देख रहा था कि एक मुक़द्दस फ़रिश्ता आसमान से उतर आया। {4:14} उस ने बड़े ज़ोर से आवाज़ दी, ‘दरख़्त को काट डालो! उस की शाख़ें तोड़ दो, उस के पत्ते झाड़ दो, उस का फल बिखेर दो! जानवर उस के साय में से निकल कर भाग जाएँ, परिन्दे उस की शाख़ों से उड़ जाएँ। {4:15} लेकिन उस का मुढ जड़ों समेत ज़मीन में रहने दो। उसे लोहे और पीतल की ज़न्जीरों में जकड़ कर खुले मैदान की घास में छोड़ दो। वहाँ उसे आसमान की ओस तर करे, और जानवरों के साथ ज़मीन की घास ही उस को नसीब हो। {4:16} सात साल तक उस का इन्सानी दिल जानवर के दिल में बदल जाए। {4:17} क्यूँकि मुक़द्दस फ़रिश्तों ने फ़त्वा दिया है कि ऐसा ही हो ताकि इन्सान जान ले कि अल्लाह तआला का इख़तियार इन्सानी सल्तनतों पर है। वह अपनी ही मर्ज़ी से लोगों को उन पर मुक़र्रर करता है, ख़्वाह वह कितने ज़लील क्यूँ न हों।’ {4:18} मैं, नबूकदनज़्ज़र ने ख़्वाब में यह कुछ देखा। ऐ बेल्तशज़्ज़र, अब मुझे इस की ताबीर पेश करो। मेरी सल्तनत के तमाम दानिशमन्द इस में नाकाम रहे हैं। लेकिन तुम यह कर पाओगे, क्यूँकि तुम में मुक़द्दस देवताओं की रूह है।” {4:19} तब बेल्तशज़्ज़र यानी दान्याल के रोंगटे खड़े हो गए, और जो ख़यालात उभर आए उन से उस पर काफ़ी देर तक सख़्त दह्शत तारी रही। आख़िरकार बादशाह बोला, “ऐ बेल्तशज़्ज़र, ख़्वाब और उस का मतलब तुझे इतना दह्शतज़दा न करे।” बीलतशज़र ने जवाब दिया, “मेरे आक़ा, काश ख़्वाब की बातें आप के दुश्मनों और मुख़ालिफ़ों को पेश आएँ! {4:20} आप ने एक दरख़्त देखा जो इतना ऊँचा और तनावर हो गया कि उस की चोटी आसमान तक पहुँची और वह पूरी दुनिया को नज़र आया। {4:21} उस के पत्ते ख़ूबसूरत थे, और वह बहुत सा फल लाता था। उस के साय में जंगली जानवर पनाह लेते, उस की शाख़ों में परिन्दे बसेरा करते थे। हर इन्सान-ओ-हैवान को उस से ख़ुराक मिलती थी। {4:22} ऐ बादशाह, आप ही यह दरख़्त हैं! आप ही बड़े और ताक़तवर हो गए हैं बल्कि आप की अज़मत बढ़ते बढ़ते आसमान से बातें करने लगी, आप की सल्तनत दुनिया की इन्तिहा तक फैल गई है। {4:23} ऐ बादशाह, इस के बाद आप ने एक मुक़द्दस फ़रिश्ते को देखा जो आसमान से उतर कर बोला, दरख़्त को काट डालो! उसे तबाह करो, लेकिन उस का मुढ जड़ों समेत ज़मीन में रहने दो। उसे लोहे और पीतल की ज़न्जीरों में जकड़ कर खुले मैदान की घास में छोड़ दो। वहाँ उसे आसमान की ओस तर करे, और जानवरों के साथ ज़मीन की घास ही उस को नसीब हो। सात साल यूँ ही गुज़र जाएँ। {4:24} ऐ बादशाह, इस का मतलब यह है, अल्लाह तआला ने मेरे आक़ा बादशाह के बारे में फ़ैसला किया है {4:25} कि आप को इन्सानी संगत से निकाल कर भगाया जाएगा। तब आप जंगली जानवरों के साथ रह कर बैलों की तरह घास चरेंगे और आसमान की ओस से तर हो जाएंगे। सात साल यूँ ही गुज़रेंगे। फिर आख़िरकार आप इक़्रार करेंगे कि अल्लाह तआला का इन्सानी सल्तनतों पर इख़तियार है, वह अपनी ही मर्ज़ी से लोगों को उन पर मुक़र्रर करता है। {4:26} लेकिन ख़्वाब में यह भी कहा गया कि दरख़्त के मुढ को जड़ों समेत ज़मीन में छोड़ा जाए। इस का मतलब है कि आप की सल्तनत ताहम क़ाइम रहेगी। जब आप एतिराफ़ करेंगे कि तमाम इख़तियार आसमान के हाथ में है तो आप को सल्तनत वापस मिलेगी। {4:27} ऐ बादशाह, अब मेहरबानी से मेरा मश्वरा क़बूल फ़रमाएँ। इन्साफ़ करके और मज़्लूमों पर करम फ़रमा कर अपने गुनाहों को दूर करें। शायद ऐसा करने से आप की ख़ुशहाली क़ाइम रहे।” {4:28} दान्याल की हर बात नबूकदनज़्ज़र को पेश आई। {4:29} बारह महीने के बाद बादशाह बाबल में अपने शाही महल की छत पर टहल रहा था। {4:30} तब वह कहने लगा, “लो, यह अज़ीम शहर देखो जो मैं ने अपनी रिहाइश के लिए तामीर किया है! यह सब कुछ मैं ने अपनी ही ज़बरदस्त क़ुव्वत से बना लिया है ताकि मेरी शान-ओ-शौकत मज़ीद बढ़ती जाए।” {4:31} बादशाह यह बात बोल ही रहा था कि आसमान से आवाज़ सुनाई दी, “ऐ नबूकदनज़्ज़र बादशाह, सुन! सल्तनत तुझ से छीन ली गई है। {4:32} तुझे इन्सानी संगत से निकाल कर भगाया जाएगा, और तू जंगली जानवरों के साथ रह कर बैल की तरह घास चरेगा। सात साल यूँ ही गुज़र जाएंगे। फिर आख़िरकार तू इक़्रार करेगा कि अल्लाह तआला का इन्सानी सल्तनतों पर इख़तियार है, वह अपनी ही मर्ज़ी से लोगों को उन पर मुक़र्रर करता है।” {4:33} जूँ ही आवाज़ बन्द हुई तो ऐसा ही हुआ। नबूकदनज़्ज़र को इन्सानी संगत से निकाल कर भगाया गया, और वह बैलों की तरह घास चरने लगा। उस का जिस्म आसमान की ओस से तर होता रहा। होते होते उस के बाल उक़ाब के परों जितने लम्बे और उस के नाख़ुन परिन्दे के चंगुल की मानिन्द हुए। {4:34} लेकिन सात साल गुज़रने के बाद मैं, नबूकदनज़्ज़र अपनी आँखों को आसमान की तरफ़ उठा कर दुबारा होश में आया। तब मैं ने अल्लाह तआला की तम्जीद की, मैं ने उस की हम्द-ओ-सना की जो हमेशा तक ज़िन्दा है। उस की हुकूमत अबदी है, उस की सल्तनत नस्ल-दर-नस्ल क़ाइम रहती है। {4:35} उस की निस्बत दुनिया के तमाम बाशिन्दे सिफ़र के बराबर हैं। वह आसमानी फ़ौज और दुनिया के बाशिन्दों के साथ जो जी चाहे करता है। उसे कुछ करने से कोई नहीं रोक सकता, कोई उस से जवाब तलब करके पूछ नहीं सकता, “तू ने क्या किया?” {4:36} जूँ ही मैं दुबारा होश में आया तो मुझे पहली शाही इज़्ज़त और शान-ओ-शौकत भी अज़ सर-ए-नौ हासिल हुई। मेरे मुशीर और शुरफ़ा दुबारा मेरे सामने हाज़िर हुए, और मुझे दुबारा तख़्त पर बिठाया गया। पहले की निस्बत मेरी अज़मत में इज़ाफ़ा हुआ। {4:37} अब मैं, नबूकदनज़्ज़र आसमान के बादशाह की हम्द-ओ-सना करता हूँ। मैं उसी को जलाल देता हूँ, क्यूँकि जो कुछ भी वह करे वह सहीह है। उस की तमाम राहें मुन्सिफ़ाना हैं। जो मग़रूर हो कर ज़िन्दगी गुज़ारते हैं उन्हें वह पस्त करने के क़ाबिल है। {i5:1} बेल्शज़्ज़र की ज़ियाफ़त {5:1} एक दिन बेल्शज़्ज़र बादशाह अपने बड़ों के हज़ार अफ़राद के लिए ज़बरदस्त ज़ियाफ़त करके उन के साथ मै पीने लगा। {5:2} नशे में उस ने हुक्म दिया, “सोने-चाँदी के जो प्याले मेरे बाप नबूकदनज़्ज़र ने यरूशलम में वाक़े अल्लाह के घर से छीन लिए थे वह मेरे पास ले आओ ताकि मैं अपने बड़ों, बीवियों और दाश्ताओं के साथ उन से मै पी लूँ।” {5:3} चुनाँचे यरूशलम में वाक़े अल्लाह के घर से लूटे हुए प्याले उस के पास लाए गए, और सब उन से मै पी कर {5:4} सोने, चाँदी, पीतल, लोहे, लकड़ी और पत्थर के अपने बुतों की तम्जीद करने लगे। {5:5} उसी लम्हे शाही महल के हाल में इन्सानी हाथ की उंगलियाँ नज़र आईं जो शमादान के मुक़ाबिल दीवार के पलस्तर पर कुछ लिखने लगीं। जब बादशाह ने हाथ को लिखते हुए देखा {5:6} तो उस का चिहरा डर के मारे फ़क़ हो गया। उस की कमर के जोड़ ढीले पड़ गए, और उस के घुटने एक दूसरे से टकराने लगे। {5:7} वह ज़ोर से चीख़ा, “जादूगरों, नुजूमियों और ग़ैबदानों को बुलाओ!” बाबल के दानिशमन्द पहुँचे तो वह बोला, “जो भी लिखे हुए अल्फ़ाज़ पढ़ कर मुझे उन का मतलब बता सके उसे अर्ग़वानी रंग का लिबास पहनाया जाएगा। उस के गले में सोने की ज़न्जीर पहनाई जाएगी, और हुकूमत में सिर्फ़ दो लोग उस से बड़े होंगे।” {5:8} बादशाह के दानिशमन्द क़रीब आए, लेकिन न वह लिखे हुए अल्फ़ाज़ पढ़ सके, न उन का मतलब बादशाह को बता सके। {5:9} तब बेल्शज़्ज़र बादशाह निहायत परेशान हुआ, और उस का चिहरा मज़ीद माँद पड़ गया। उस के शुरफ़ा भी सख़्त परेशान हो गए। {5:10} बादशाह और शुरफ़ा की बातें मलिका तक पहुँच गईं तो वह ज़ियाफ़त के हाल में दाख़िल हुई। कहने लगी, “बादशाह अबद तक जीते रहें! घबराने या माँद पड़ने की क्या ज़रूरत है? {5:11} आप की बादशाही में एक आदमी है जिस में मुक़द्दस देवताओं की रूह है। आप के बाप के दौर-ए-हुकूमत में साबित हुआ कि वह देवताओं की सी बसीरत, फ़हम और हिक्मत का मालिक है। आप के बाप नबूकदनज़्ज़र बादशाह ने उसे क़िस्मत का हाल बताने वालों, जादूगरों, नुजूमियों और ग़ैबदानों पर मुक़र्रर किया था, {5:12} क्यूँकि उस में ग़ैरमामूली ज़िहानत, इल्म और समझ पाई जाती है। वह ख़्वाबों की ताबीर करने और पहेलियाँ और पेचीदा मसले हल करने में माहिर साबित हुआ है। आदमी का नाम दान्याल है, गो बादशाह ने उस का नाम बेल्तशज़्ज़र रखा था। मेरा मश्वरा है कि आप उसे बुलाएँ, क्यूँकि वह आप को ज़रूर लिखे हुए अल्फ़ाज़ का मतलब बताएगा।” {5:13} यह सुन कर बादशाह ने दान्याल को फ़ौरन बुला लिया। जब पहुँचा तो बादशाह उस से मुख़ातिब हुआ, “क्या तुम वह दान्याल हो जिसे मेरे बाप नबूकदनज़्ज़र बादशाह यहूदाह के जिलावतनों के साथ यहूदाह से यहाँ लाए थे? {5:14} सुना है कि देवताओं की रूह तुम में है, कि तुम बसीरत, फ़हम और ग़ैरमामूली हिक्मत के मालिक हो। {5:15} दानिशमन्दों और नुजूमियों को मेरे सामने लाया गया है ताकि दीवार पर लिखे हुए अल्फ़ाज़ पढ़ कर मुझे उन का मतलब बताएँ, लेकिन वह नाकाम रहे हैं। {5:16} अब मुझे बताया गया कि तुम ख़्वाबों की ताबीर और पेचीदा मसलों को हल करने में माहिर हो। अगर तुम यह अल्फ़ाज़ पढ़ कर मुझे इन का मतलब बता सको तो तुम्हें अर्ग़वानी रंग का लिबास पहनाया जाएगा। तुम्हारे गले में सोने की ज़न्जीर पहनाई जाएगी, और हुकूमत में सिर्फ़ दो लोग तुम से बड़े होंगे।” {5:17} दान्याल ने जवाब दिया, “मुझे अज्र न दें, अपने तोह्फ़े किसी और को दीजिए। मैं बादशाह को यह अल्फ़ाज़ और इन का मतलब वैसे ही बता दूँगा। {5:18} ऐ बादशाह, जो सल्तनत, अज़मत और शान-ओ-शौकत आप के बाप नबूकदनज़्ज़र को हासिल थी वह अल्लाह तआला से मिली थी। {5:19} उसी ने उन्हें वह अज़मत अता की थी जिस के बाइस तमाम क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के अफ़राद उन से डरते और उन के सामने काँपते थे। जिसे वह मार डालना चाहते थे उसे मारा गया, जिसे वह ज़िन्दा छोड़ना चाहते थे वह ज़िन्दा रहा। जिसे वह सरफ़राज़ करना चाहते थे वह सरफ़राज़ हुआ और जिसे पस्त करना चाहते थे वह पस्त हुआ। {5:20} लेकिन वह फूल कर हद से ज़्यादा मग़रूर हो गए, इस लिए उन्हें तख़्त से उतारा गया, और वह अपनी क़दर-ओ-मन्जिलत खो बैठे। {5:21} उन्हें इन्सानी संगत से निकाल कर भगाया गया, और उन का दिल जानवर के दिल की मानिन्द बन गया। उन का रहन-सहन जंगली गधों के साथ था, और वह बैलों की तरह घास चरने लगे। उन का जिस्म आसमान की ओस से तर रहता था। यह हालत उस वक़्त तक रही जब तक कि उन्हों ने इक़्रार न किया कि अल्लाह तआला का इन्सानी सल्तनतों पर इख़तियार है, वह अपनी ही मर्ज़ी से लोगों को उन पर मुक़र्रर करता है। {5:22} ऐ बेल्शज़्ज़र बादशाह, गो आप उन के बेटे हैं और इस बात का इल्म रखते हैं तो भी आप फ़रोतन न रहे {5:23} बल्कि आसमान के मालिक के ख़िलाफ़ उठ खड़े हो गए हैं। आप ने हुक्म दिया कि उस के घर के प्याले आप के हुज़ूर लाए जाएँ, और आप ने अपने बड़ों, बीवियों और दाश्ताओं के साथ उन्हें मै पीने के लिए इस्तेमाल किया। साथ साथ आप ने अपने देवताओं की तम्जीद की गो वह चाँदी, सोने, पीतल, लोहे, लकड़ी और पत्थर के बुत ही हैं। न वह देख सकते, न सुन या समझ सकते हैं। लेकिन जिस ख़ुदा के हाथ में आप की जान और आप की तमाम राहें हैं उस का एहतिराम आप ने नहीं किया। {5:24} इसी लिए उस ने हाथ भेज कर दीवार पर यह अल्फ़ाज़ लिखवा दिए। {5:25} और लिखा यह है, ‘मिने मिने तक़ेल-ओ-फ़र्सीन।’ {5:26} ‘मिने’ का मतलब ‘गिना हुआ’ है। यानी आप की सल्तनत के दिन गिने हुए हैं, अल्लाह ने उन्हें इख़तिताम तक पहुँचाया है। {5:27} ‘तक़ेल’ का मतलब ‘तोला हुआ’ है। यानी अल्लाह ने आप को तोल कर मालूम किया है कि आप का वज़न कम है। {5:28} ‘फ़र्सीन’ का मतलब ‘तक़्सीम हुआ’ है। यानी आप की बादशाही को मादियों और फ़ार्सियों में तक़्सीम किया जाएगा।” {5:29} दान्याल ख़ामोश हुआ तो बेल्शज़्ज़र ने हुक्म दिया कि उसे अर्ग़वानी रंग का लिबास पहनाया जाए और उस के गले में सोने की ज़न्जीर पहनाई जाए। साथ साथ एलान किया गया कि अब से हुकूमत में सिर्फ़ दो आदमी दान्याल से बड़े हैं। {5:30} उसी रात शाह-ए-बाबल बेल्शज़्ज़र को क़त्ल किया गया, {5:31} और दारा मादी तख़्त पर बैठ गया। उस की उम्र 62 साल थी। {i6:1} दान्याल शेरबबर की मान्द में {6:1} दारा ने सल्तनत के तमाम सूबों पर 120 सूबेदार मुतअय्यिन करने का फ़ैसला किया। {6:2} उन पर तीन वज़ीर मुक़र्रर थे जिन में से एक दान्याल था। गवर्नर उन के सामने जवाबदिह थे ताकि बादशाह को नुक़्सान न पहुँचे। {6:3} जल्द ही पता चला कि दान्याल दूसरे वज़ीरों और सूबेदारों पर सब्क़त रखता था, क्यूँकि वह ग़ैरमामूली ज़िहानत का मालिक था। नतीजतन बादशाह ने उसे पूरी सल्तनत पर मुक़र्रर करने का इरादा किया। {6:4} जब दीगर वज़ीरों और सूबेदारों को यह बात मालूम हुई तो वह दान्याल पर इल्ज़ाम लगाने का बहाना ढूँडने लगे। लेकिन वह अपनी ज़िम्मादारियों को निभाने में इतना क़ाबिल-ए-एतिमाद था कि वह नाकाम रहे। क्यूँकि न वह रिश्वतखोर था, न किसी काम में सुस्त। {6:5} आख़िरकार वह आदमी आपस में कहने लगे, “इस तरीक़े से हमें दान्याल पर इल्ज़ाम लगाने का मौक़ा नहीं मिलेगा। लेकिन एक बात है जो इल्ज़ाम का बाइस बन सकती है यानी उस के ख़ुदा की शरीअत।” {6:6} तब वह गुरोह की सूरत में बादशाह के सामने हाज़िर हुए और कहने लगे, “दारा बादशाह अबद तक जीते रहें! {6:7} सल्तनत के तमाम वज़ीर, गवर्नर, सूबेदार, मुशीर और मुन्तज़िम आपस में मश्वरा करके मुत्तफ़िक़ हुए हैं कि अगले 30 दिन के दौरान सब को सिर्फ़ बादशाह से दुआ करनी चाहिए। बादशाह एक फ़रमान सादिर करें कि जो भी किसी और माबूद या इन्सान से इल्तिजा करे उसे शेरों की मान्द में फैंका जाएगा। ध्यान देना चाहिए कि सब ही इस पर अमल करें। {6:8} ऐ बादशाह, गुज़ारिश है कि आप यह फ़रमान ज़रूर सादिर करें बल्कि लिख कर उस की तस्दीक़ भी करें ताकि उसे तब्दील न किया जा सके। तब वह मादियों और फ़ार्सियों के क़वानीन का हिस्सा बन कर मन्सूख़ नहीं किया जा सकेगा।” {6:9} दारा बादशाह मान गया। उस ने फ़रमान लिखवा कर उस की तस्दीक़ की। {6:10} जब दान्याल को मालूम हुआ कि फ़रमान सादिर हुआ है तो वह सीधा अपने घर में चला गया। छत पर एक कमरा था जिस की खुली खिड़कियों का रुख़ यरूशलम की तरफ़ था। इस कमरे में दान्याल रोज़ाना तीन बार अपने घुटने टेक कर दुआ और अपने ख़ुदा की सताइश करता था। अब भी उस ने यह सिलसिला जारी रखा। {6:11} जूँ ही दान्याल अपने ख़ुदा से दुआ और इल्तिजा कर रहा था तो उस के दुश्मनों ने गुरोह की सूरत में घर में घुस कर उसे यह करते हुए पाया। {6:12} तब वह बादशाह के पास गए और उसे शाही फ़रमान की याद दिलाई, “क्या आप ने फ़रमान सादिर नहीं किया था कि अगले 30 दिन के दौरान सब को सिर्फ़ बादशाह से दुआ करनी है, और जो किसी और माबूद या इन्सान से इल्तिजा करे उसे शेरों की मान्द में फैंका जाएगा?” बादशाह ने जवाब दिया, “जी, यह फ़रमान क़ाइम है बल्कि मादियों और फ़ार्सियों के क़वानीन का हिस्सा है जो मन्सूख़ नहीं किया जा सकता।” {6:13} उन्हों ने कहा, “ऐ बादशाह, दान्याल जो यहूदाह के जिलावतनों में से है न आप की परवा करता, न उस फ़रमान की जिस की आप ने लिख कर तस्दीक़ की। अभी तक वह रोज़ाना तीन बार अपने ख़ुदा से दुआ करता है।” {6:14} यह सुन कर बादशाह को बड़ी दिक़्क़त मह्सूस हुई। पूरा दिन वह सोचता रहा कि मैं दान्याल को किस तरह बचाऊँ। सूरज के ग़ुरूब होने तक वह उसे छुड़ाने के लिए कोशाँ रहा। {6:15} लेकिन आख़िरकार वह आदमी गुरोह की सूरत में दुबारा बादशाह के हुज़ूर आए और कहने लगे, “बादशाह को याद रहे कि मादियों और फ़ार्सियों के क़वानीन के मुताबिक़ जो भी फ़रमान बादशाह सादिर करे उसे तब्दील नहीं किया जा सकता।” {6:16} चुनाँचे बादशाह ने हुक्म दिया कि दान्याल को पकड़ कर शेरों की मान्द में फैंका जाए। ऐसा ही हुआ। बादशाह बोला, “ऐ दान्याल, जिस ख़ुदा की इबादत तुम बिलानाग़ा करते आए हो वह तुम्हें बचाए।” {6:17} फिर मान्द के मुँह पर पत्थर रखा गया, और बादशाह ने अपनी मुहर और अपने बड़ों की मुहरें उस पर लगाईं ताकि कोई भी उसे खोल कर दान्याल की मदद न करे। {6:18} इस के बाद बादशाह शाही महल में वापस चला गया और पूरी रात रोज़ा रखे हुए गुज़ारी। न कुछ उस का दिल बहलाने के लिए उस के पास लाया गया, न उसे नींद आई। {6:19} जब पौ फटने लगी तो वह उठ कर शेरों की मान्द के पास गया। {6:20} उस के क़रीब पहुँच कर बादशाह ने ग़मगीन आवाज़ से पुकारा, “ऐ ज़िन्दा ख़ुदा के बन्दे दान्याल, क्या तुम्हारे ख़ुदा जिस की तुम बिलानाग़ा इबादत करते रहे हो तुम्हें शेरों से बचा सका?” {6:21} दान्याल ने जवाब दिया, “बादशाह अबद तक जीते रहें! {6:22} मेरे ख़ुदा ने अपने फ़रिश्ते को भेज दिया जिस ने शेरों के मुँह को बन्द किए रखा। उन्हों ने मुझे कोई भी नुक़्सान न पहुँचाया, क्यूँकि अल्लाह के सामने मैं बेक़ुसूर हूँ। बादशाह सलामत के ख़िलाफ़ भी मुझ से जुर्म नहीं हुआ।” {6:23} यह सुन कर बादशाह आपे में न समाया। उस ने दान्याल को मान्द से निकालने का हुक्म दिया। जब उसे खैंच कर निकाला गया तो मालूम हुआ कि उसे कोई भी नुक़्सान नहीं पहुँचा। यूँ उसे अल्लाह पर भरोसा रखने का अज्र मिला। {6:24} लेकिन जिन आदमियों ने दान्याल पर इल्ज़ाम लगाया था उन का बुरा अन्जाम हुआ। बादशाह के हुक्म पर उन्हें उन के बाल-बच्चों समेत शेरों की मान्द में फैंका गया। मान्द के फ़र्श पर गिरने से पहले ही शेर उन पर झपट पड़े और उन्हें फाड़ कर उन की हड्डियों को चबा लिया। {6:25} फिर दारा बादशाह ने सल्तनत की तमाम क़ौमों, उम्मतों और अहल-ए-ज़बान को ज़ैल का पैग़ाम भेजा, “सब की सलामती हो! {6:26} मेरा फ़रमान सुनो! लाज़िम है कि मेरी सल्तनत की हर जगह लोग दान्याल के ख़ुदा के सामने थरथराएँ और उस का ख़ौफ़ मानें। क्यूँकि वह ज़िन्दा ख़ुदा और अबद तक क़ाइम है। न कभी उस की बादशाही तबाह, न उस की हुकूमत ख़त्म होगी। {6:27} वही बचाता और नजात देता है, वही आसमान-ओ-ज़मीन पर इलाही निशान और मोजिज़े दिखाता है। उसी ने दान्याल को शेरों के क़ब्ज़े से बचाया।” {6:28} चुनाँचे दान्याल को दारा बादशाह और फ़ारस के बादशाह ख़ोरस के दौर-ए-हुकूमत में बहुत कामयाबी हासिल हुई। {i7:1} दान्याल की पहली रोया : चार जानवर {7:1} शाह-ए-बाबल बेल्शज़्ज़र की हुकूमत के पहले साल में दान्याल ने ख़्वाब में रोया देखी। जाग उठने पर उस ने वह कुछ क़लमबन्द कर लिया जो ख़्वाब में देखा था। ज़ैल में इस का बयान है, {7:2} रात के वक़्त मैं, दान्याल ने रोया में देखा कि आसमान की चारों हवाएँ ज़ोर से बड़े समुन्दर को मुतलातिम कर रही हैं। {7:3} फिर चार बड़े जानवर समुन्दर से निकल आए जो एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ थे। {7:4} पहला जानवर शेरबबर जैसा था, लेकिन उस के उक़ाब के पर थे। मेरे देखते ही उस के परों को नोच लिया गया और उसे उठा कर इन्सान की तरह पिछले दो पैरों पर खड़ा किया गया। उसे इन्सान का दिल भी मिल गया। {7:5} दूसरा जानवर रीछ जैसा था। उस का एक पहलू खड़ा किया गया था, और वह अपने दाँतों में तीन पसलियाँ पकड़े हुए था। उसे बताया गया, “उठ, जी भर कर गोश्त खा ले!” {7:6} फिर मैं ने तीसरे जानवर को देखा। वह चीते जैसा था, लेकिन उस के चार सर थे। उसे हुकूमत करने का इख़तियार दिया गया। {7:7} इस के बाद रात की रोया में एक चौथा जानवर नज़र आया जो डराउना, हौलनाक और निहायत ही ताक़तवर था। अपने लोहे के बड़े बड़े दाँतों से वह सब कुछ खाता और चूर चूर करता था। जो कुछ बच जाता उसे वह पाँओ तले रौंद देता था। यह जानवर दीगर जानवरों से मुख़्तलिफ़ था। उस के दस सींग थे। {7:8} मैं सींगों पर ग़ौर ही कर रहा था कि एक और छोटा सा सींग उन के दरमियान से निकल आया। पहले दस सींगों में से तीन को नोच लिया गया ताकि उसे जगह मिल जाए। छोटे सींग पर इन्सानी आँखें थीं, और उस का मुँह बड़ी बड़ी बातें करता था। {7:9} मैं देख ही रहा था कि तख़्त लगाए गए और क़दीम-उल-अय्याम बैठ गया। उस का लिबास बर्फ़ जैसा सफ़ेद और उस के बाल ख़ालिस ऊन की मानिन्द थे। जिस तख़्त पर वह बैठा था वह आग की तरह भड़क रहा था, और उस पर शोलाज़न पहिए लगे थे। {7:10} उस के सामने से आग की नहर बह कर निकल रही थी। बेशुमार हस्तियाँ उस की ख़िदमत के लिए खड़ी थीं। लोग अदालत के लिए बैठ गए, और किताबें खोली गईं। {7:11} मैं ने ग़ौर किया कि छोटा सींग बड़ी बड़ी बातें कर रहा है। मैं देखता रहा तो चौथे जानवर को क़त्ल किया गया। उस का जिस्म तबाह हुआ और भड़कती आग में फैंका गया। {7:12} दीगर तीन जानवरों की हुकूमत उन से छीन ली गई, लेकिन उन्हें कुछ देर के लिए ज़िन्दा रहने की इजाज़त दी गई। {7:13} रात की रोया में मैं ने यह भी देखा कि आसमान के बादलों के साथ साथ कोई आ रहा है जो इब्न-ए-आदम सा लग रहा है। जब क़दीम-उल-अय्याम के क़रीब पहुँचा तो उस के हुज़ूर लाया गया। {7:14} उसे सल्तनत, इज़्ज़त और बादशाही दी गई, और हर क़ौम, उम्मत और ज़बान के अफ़राद ने उस की परस्तिश की। उस की हुकूमत अबदी है और कभी ख़त्म नहीं होगी। उस की बादशाही कभी तबाह नहीं होगी। {7:15} मैं, दान्याल सख़्त परेशान हुआ, क्यूँकि रोया से मुझ पर दह्शत छा गई थी। {7:16} इस लिए मैं ने वहाँ खड़े किसी के पास जा कर उस से गुज़ारिश की कि वह मुझे इन तमाम बातों का मतलब बताए। उस ने मुझे इन का मतलब बताया, {7:17} “चार बड़े जानवर चार सल्तनतें हैं जो ज़मीन से निकल कर क़ाइम हो जाएँगी। {7:18} लेकिन अल्लाह तआला के मुक़द्दसीन को हक़ीक़ी बादशाही मिलेगी, वह बादशाही जो अबद तक हासिल रहेगी।” {7:19} मैं चौथे जानवर के बारे में मज़ीद जानना चाहता था, उस जानवर के बारे में जो दीगर जानवरों से इतना मुख़्तलिफ़ और इतना हौलनाक था। क्यूँकि उस के दाँत लोहे और पंजे पीतल के थे, और वह सब कुछ खाता और चूर चूर करता था। जो बच जाता उसे वह पाँओ तले रौंद देता था। {7:20} मैं उस के सर के दस सींगों और उन में से निकले हुए छोटे सींग के बारे में भी मज़ीद जानना चाहता था। क्यूँकि छोटे सींग के निकलने पर दस सींगों में से तीन निकल कर गिर गए, और यह सींग बढ़ कर साथ वाले सींगों से कहीं बड़ा नज़र आया। उस की आँखें थीं, और उस का मुँह बड़ी बड़ी बातें करता था। {7:21} रोया में मैं ने देखा कि छोटे सींग ने मुक़द्दसीन से जंग करके उन्हें शिकस्त दी। {7:22} लेकिन फिर क़दीम-उल-अय्याम आ पहुँचा और अल्लाह तआला के मुक़द्दसीन के लिए इन्साफ़ क़ाइम किया। फिर वह वक़्त आया जब मुक़द्दसीन को बादशाही हासिल हुई। {7:23} जिस से मैं ने रोया का मतलब पूछा था उस ने कहा, “चौथे जानवर से मुराद ज़मीन पर एक चौथी बादशाही है जो दीगर तमाम बादशाहियों से मुख़्तलिफ़ होगी। वह तमाम दुनिया को खा जाएगी, उसे रौंद कर चूर चूर कर देगी। {7:24} दस सींगों से मुराद दस बादशाह हैं जो इस बादशाही से निकल आएँगे। उन के बाद एक और बादशाह आएगा जो गुज़रे बादशाहों से मुख़्तलिफ़ होगा और तीन बादशाहों को ख़ाक में मिला देगा। {7:25} वह अल्लाह तआला के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकेगा, और मुक़द्दसीन उस के तहत पिसते रहेंगे, यहाँ तक कि वह ईदों के मुक़र्ररा औक़ात और शरीअत को तब्दील करने की कोशिश करेगा। मुक़द्दसीन को एक अर्से, दो उर्सों और आधे अर्से के लिए उस के हवाले किया जाएगा। {7:26} लेकिन फिर लोग उस की अदालत के लिए बैठ जाएंगे। उस की हुकूमत उस से छीन ली जाएगी, और वह मुकम्मल तौर पर तबाह हो जाएगी। {7:27} तब आसमान तले की तमाम सल्तनतों की बादशाहत, सल्तनत और अज़मत अल्लाह तआला की मुक़द्दस क़ौम के हवाले कर दी जाएगी। अल्लाह तआला की बादशाही अबदी होगी, और तमाम हुक्मरान उस की ख़िदमत करके उस के ताबे रहेंगे।” {7:28} मुझे मज़ीद कुछ नहीं बताया गया। मैं, दान्याल इन बातों से बहुत परेशान हुआ, और मेरा चिहरा माँद पड़ गया, लेकिन मैं ने मुआमला अपने दिल में मह्फ़ूज़ रखा। {i8:1} दान्याल की दूसरी रोया : मेंढा और बकरा {8:1} बेल्शज़्ज़र बादशाह के दौर-ए-हुकूमत के तीसरे साल में मैं, दान्याल ने एक और रोया देखी। {8:2} रोया में मैं सूबा ऐलाम के क़िलाबन्द शहर सोसन की नहर ऊलाई के किनारे पर खड़ा था। {8:3} जब मैं ने अपनी निगाह उठाई तो किनारे पर मेरे सामने ही एक मेंढा खड़ा था। उस के दो बड़े सींग थे जिन में से एक ज़्यादा बड़ा था। लेकिन वह दूसरे के बाद ही बड़ा हो गया था। {8:4} मेरी नज़रों के सामने मेंढा मग़रिब, शिमाल और जुनूब की तरफ़ सींग मारने लगा। न कोई जानवर उस का मुक़ाबला कर सका, न कोई उस के क़ाबू से बचा सका। जो जी चाहे करता था और होते होते बहुत बड़ा हो गया। {8:5} मैं उस पर ग़ौर ही कर रहा था कि अचानक मग़रिब से आते हुए एक बकरा दिखाई दिया। उस की आँखों के दरमियान ज़बरदस्त सींग था, और वह ज़मीन को छुए बग़ैर चल रहा था। पूरी दुनिया को उबूर करके {8:6} वह दो सींगों वाले उस मेंढे के पास पहुँच गया जो मैं ने नहर के किनारे खड़ा देखा था। बड़े तैश में आ कर वह उस पर टूट पड़ा। {8:7} मैं ने देखा कि वह मेंढे के पहलू से टकरा गया। बड़े ग़ुस्से में उस ने उसे यूँ मारा कि मेंढे के दोनों सींग टुकड़े टुकड़े हो गए। इस बेबस हालत में मेंढा उस का मुक़ाबला न कर सका। बकरे ने उसे ज़मीन पर पटख़ कर पाँओ तले कुचल दिया। कोई नहीं था जो मेंढे को बकरे के क़ाबू से बचाए। {8:8} बकरा निहायत ताक़तवर हो गया। लेकिन ताक़त के उरूज पर ही उस का बड़ा सींग टूट गया, और उस की जगह मज़ीद चार ज़बरदस्त सींग निकल आए जिन का रुख़ आसमान की चार सिम्तों की तरफ़ था। {8:9} उन के एक सींग में से एक और सींग निकल आया जो इब्तिदा में छोटा था। लेकिन वह जुनूब, मशरिक़ और ख़ूबसूरत मुल्क इस्राईल की तरफ़ बढ़ते बढ़ते बहुत ताक़तवर हो गया। {8:10} फिर वह आसमानी फ़ौज तक बढ़ गया। वहाँ उस ने कुछ फ़ौजियों और सितारों को ज़मीन पर फैंक कर पाँओ तले कुचल दिया। {8:11} वह बढ़ते बढ़ते आसमानी फ़ौज के कमाँडर तक भी पहुँच गया और उसे उन क़ुर्बानियों से महरूम कर दिया जो उसे रोज़ाना पेश की जाती थीं। साथ साथ सींग ने उस के मक़्दिस के मक़ाम को तबाह कर दिया। {8:12} उस की फ़ौज से रोज़ाना की क़ुर्बानियों की बेहुरमती हुई, और सींग ने सच्चाई को ज़मीन पर पटख़ दिया। जो कुछ भी उस ने किया उस में वह कामयाब रहा। {8:13} फिर मैं ने दो मुक़द्दस हस्तियों को आपस में बात करते हुए सुना। एक ने पूछा, “इस रोया में पेश किए गए हालात कब तक क़ाइम रहेंगे, यानी जो कुछ रोज़ाना की क़ुर्बानियों के साथ हो रहा है, यह तबाहकुन बेहुरमती और यह बात कि मक़्दिस को पामाल किया जा रहा है?” {8:14} दूसरे ने जवाब में मुझे बताया, “हालात 2,300 शामों और सुब्हों तक यूँ ही रहेंगे। इस के बाद मक़्दिस को नए सिरे से मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस किया जाएगा।” {8:15} मैं देखे हुए वाक़िआत को समझने की कोशिश कर ही रहा था कि कोई मेरे सामने खड़ा हुआ जो मर्द जैसा लग रहा था। {8:16} साथ साथ मैं ने नहर ऊलाई की तरफ़ से किसी शख़्स की आवाज़ सुनी जिस ने कहा, “ऐ जिब्राईल, इस आदमी को रोया का मतलब बता दे।” {8:17} फ़रिश्ता मेरे क़रीब आया तो मैं सख़्त घबरा कर मुँह के बल गिर गया। लेकिन वह बोला, “ऐ आदमज़ाद, जान ले कि इस रोया का ताल्लुक़ आख़िरी ज़माने से है।” {8:18} जब वह मुझ से बात कर रहा था तो मैं मदहोश हालत में मुँह के बल पड़ा रहा। अब फ़रिश्ते ने मुझे छू कर पाँओ पर खड़ा किया। {8:19} वह बोला, “मैं तुझे समझा देता हूँ कि उस आख़िरी ज़माने में क्या कुछ पेश आएगा जब अल्लाह का ग़ज़ब नाज़िल होगा। क्यूँकि रोया का ताल्लुक़ आख़िरी ज़माने से है। {8:20} दो सींगों के जिस मेंढे को तू ने देखा वह मादी और फ़ारस के बादशाहों की नुमाइन्दगी करता है। {8:21} लम्बे बालों का बकरा यूनान का बादशाह है। उस की आँखों के दरमियान लगा बड़ा सींग यूनानी शहन्शाही का पहला बादशाह है। {8:22} तू ने देखा कि यह सींग टूट गया और उस की जगह चार सींग निकल आए। इस का मतलब है कि पहली बादशाही से चार और निकल आएँगी । लेकिन चारों की ताक़त पहली की निस्बत कम होगी। {8:23} उन की हुकूमत के आख़िरी अय्याम में बेवफ़ाओं की बदकिर्दारी उरूज तक पहुँच गई होगी। उस वक़्त एक गुस्ताख़ और साज़िश का माहिर बादशाह तख़्त पर बैठेगा। {8:24} वह बहुत ताक़तवर हो जाएगा, लेकिन यह उस की अपनी ताक़त नहीं होगी। वह हैरतअंगेज़ बर्बादी का बाइस बनेगा, और जो कुछ भी करेगा उस में कामयाब होगा। वह ज़ोरावरों और मुक़द्दस क़ौम को तबाह करेगा। {8:25} अपनी समझ और फ़रेब के ज़रीए वह कामयाब रहेगा। तब वह मुतकब्बिर हो जाएगा। जब लोग अपने आप को मह्फ़ूज़ समझेंगे तो वह उन्हें मौत के घाट उतारेगा। आख़िरकार वह हुक्मरानों के हुक्मरान के ख़िलाफ़ भी उठेगा। लेकिन वह पाश पाश हो जाएगा, अलबत्ता इन्सानी हाथ से नहीं। {8:26} ऐ दान्याल, शामों और सुब्हों के बारे में जो रोया तुझ पर ज़ाहिर हुई वह सच्ची है। लेकिन फ़िलहाल उसे पोशीदा रख, क्यूँकि यह वाक़िआत अभी पेश नहीं आएँगे बल्कि बहुत दिनों के गुज़र जाने के बाद ही।” {8:27} इस के बाद मैं, दान्याल निढाल हो कर कई दिनों तक बीमार रहा। फिर मैं उठा और बादशाह की ख़िदमत में दुबारा अपने फ़राइज़ अदा करने लगा। मैं रोया से सख़्त परेशान था, और कोई नहीं था जो मुझे उस का मतलब बता सके। {i9:1} दान्याल अपनी क़ौम की शफ़ाअत करता है {9:1} दारा बिन अख़स्वेरुस बाबल के तख़्त पर बैठ गया था। इस मादी बादशाह {9:2} की हुकूमत के पहले साल में मैं, दान्याल ने पाक नविश्तों की तहक़ीक़ की। मैं ने ख़ासकर उस पर ग़ौर किया जो रब ने यरमियाह नबी की मारिफ़त फ़रमाया था। उस के मुताबिक़ यरूशलम की तबाहशुदा हालत 70 साल तक क़ाइम रहेगी। {9:3} चुनाँचे मैं ने रब अपने ख़ुदा की तरफ़ रुजू किया ताकि अपनी दुआ और इल्तिजाओं से उस की मर्ज़ी दरयाफ़्त करूँ। साथ साथ मैं ने रोज़ा रखा, टाट का लिबास ओढ़ लिया और अपने सर पर राख डाल ली। {9:4} मैं ने रब अपने ख़ुदा से दुआ करके इक़्रार किया, “ऐ रब, तू कितना अज़ीम और महीब ख़ुदा है! जो भी तुझे प्यार करता और तेरे अह्काम के ताबे रहता है उस के साथ तू अपना अह्द क़ाइम रखता और उस पर मेहरबानी करता है। {9:5} लेकिन हम ने गुनाह और बदी की है। हम बेदीन और बाग़ी हो कर तेरे अह्काम और हिदायात से भटक गए हैं। {9:6} हम ने नबियों की नहीं सुनी, हालाँकि तेरे ख़ादिम तेरा नाम ले कर हमारे बादशाहों, बुज़ुर्गों, बापदादा बल्कि मुल्क के तमाम बाशिन्दों से मुख़ातिब हुए। {9:7} ऐ रब, तू हक़-ब-जानिब है जबकि इस दिन हम सब शर्मसार हैं, ख़्वाह यहूदाह, यरूशलम या इस्राईल के हों, ख़्वाह क़रीब या उन तमाम दूरदराज़ ममालिक में रहते हों जहाँ तू ने हमें हमारी बेवफ़ाई के सबब से मुन्तशिर कर दिया है। क्यूँकि हम तेरे ही साथ बेवफ़ा रहे हैं। {9:8} ऐ रब, हम अपने बादशाहों, बुज़ुर्गों और बापदादा समेत बहुत शर्मसार हैं, क्यूँकि हम ने तेरा ही गुनाह किया है। {9:9} लेकिन रब हमारा ख़ुदा रहीम है और ख़ुशी से मुआफ़ करता है, गो हम उस से सरकश हुए हैं। {9:10} न हम रब अपने ख़ुदा के ताबे रहे, न उस के उन अह्काम के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारी जो उस ने हमें अपने ख़ादिमों यानी नबियों की मारिफ़त दिए थे। {9:11} तमाम इस्राईल तेरी शरीअत की ख़िलाफ़वरज़ी करके सहीह राह से भटक गया है, कोई तेरी सुनने के लिए तय्यार नहीं था। अल्लाह के ख़ादिम मूसा ने शरीअत में क़सम खा कर लानतें भेजी थीं, और अब यह लानतें हम पर नाज़िल हुई हैं, इस लिए कि हम ने तेरा गुनाह किया। {9:12} जो कुछ तू ने हमारे और हमारे हुक्मरानों के ख़िलाफ़ फ़रमाया था वह पूरा हुआ, और हम पर बड़ी आफ़त आई। आसमान तले कहीं भी ऐसी मुसीबत नहीं आई जिस तरह यरूशलम को पेश आई है। {9:13} मूसा की शरीअत में मज़कूर हर वह लानत हम पर नाज़िल हुई जो नाफ़रमानों पर भेजी गई है। तो भी न हम ने अपने गुनाहों को छोड़ा, न तेरी सच्चाई पर ध्यान दिया, हालाँकि इस से हम रब अपने ख़ुदा का ग़ज़ब ठंडा कर सकते थे। {9:14} इसी लिए रब हम पर आफ़त लाने से न झिजका। क्यूँकि जो कुछ भी रब हमारा ख़ुदा करता है उस में वह हक़-ब-जानिब होता है। लेकिन हम ने उस की न सुनी। {9:15} ऐ रब हमारे ख़ुदा, तू बड़ी क़ुदरत का इज़हार करके अपनी क़ौम को मिस्र से निकाल लाया। यूँ तेरे नाम को वह इज़्ज़त-ओ-जलाल मिला जो आज तक क़ाइम रहा है। इस के बावुजूद हम ने गुनाह किया, हम से बेदीन हरकतें सरज़द हुई हैं। {9:16} ऐ रब, तू अपने मुन्सिफ़ाना कामों में वफ़ादार रहा है! अब भी इस का लिहाज़ कर और अपने सख़्त ग़ज़ब को अपने शहर और मुक़द्दस पहाड़ यरूशलम से दूर कर! यरूशलम और तेरी क़ौम गिर्द-ओ-नवाह की क़ौमों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गई है, गो हम मानते हैं कि यह हमारे गुनाहों और हमारे बापदादा की ख़ताओं की वजह से हो रहा है। {9:17} ऐ हमारे ख़ुदा, अब अपने ख़ादिम की दुआओं और इल्तिजाओं को सुन! ऐ रब, अपनी ही ख़ातिर अपने तबाहशुदा मक़्दिस पर अपने चिहरे का मेहरबान नूर चमका। {9:18} ऐ मेरे ख़ुदा, कान लगा कर मेरी सुन! अपनी आँखें खोल! उस शहर के खंडरात पर नज़र कर जिस पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है। हम इस लिए तुझ से इल्तिजाएँ नहीं कर रहे कि हम रास्तबाज़ हैं बल्कि इस लिए कि तू निहायत मेहरबान है। {9:19} ऐ रब, हमारी सुन! ऐ रब, हमें मुआफ़ कर! ऐ मेरे ख़ुदा, अपनी ख़ातिर देर न कर, क्यूँकि तेरे शहर और क़ौम पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है।” {i9:20} 70 हफ़्तों का भेद {9:20} यूँ मैं दुआ करता और अपने और अपनी क़ौम इस्राईल के गुनाहों का इक़्रार करता गया। मैं ख़ासकर अपने ख़ुदा के मुक़द्दस पहाड़ यरूशलम के लिए रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर फ़र्याद कर रहा था। {9:21} मैं दुआ कर ही रहा था कि जिब्राईल जिसे मैं ने दूसरी रोया में देखा था मेरे पास आ पहुँचा। रब के घर में शाम की क़ुर्बानी पेश करने का वक़्त था। मैं बहुत ही थक गया था। {9:22} उस ने मुझे समझा कर कहा, “ऐ दान्याल, अब मैं तुझे समझ और बसीरत देने के लिए आया हूँ। {9:23} जूँ ही तू दुआ करने लगा तो अल्लाह ने जवाब दिया, क्यूँकि तू उस की नज़र में गिराँक़दर है। मैं तुझे यह जवाब सुनाने आया हूँ। अब ध्यान से रोया को समझ ले! {9:24} तेरी क़ौम और तेरे मुक़द्दस शहर के लिए 70 हफ़्ते मुक़र्रर किए गए हैं ताकि उतने में जराइम और गुनाहों का सिलसिला ख़त्म किया जाए, क़ुसूर का कफ़्फ़ारा दिया जाए, अबदी रास्ती क़ाइम की जाए, रोया और पेशगोई की तस्दीक़ की जाए और मुक़द्दसतरीन जगह को मसह करके मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस किया जाए। {9:25} अब जान ले और समझ ले कि यरूशलम को दुबारा तामीर करने का हुक्म दिया जाएगा, लेकिन मज़ीद सात हफ़्ते गुज़रेंगे, फिर ही अल्लाह एक हुक्मरान को इस काम के लिए चुन कर मसह करेगा। तब शहर को 62 हफ़्तों के अन्दर चौकों और ख़न्दक़ों समेत नए सिरे से तामीर किया जाएगा, गो इस दौरान वह काफ़ी मुसीबत से दोचार होगा। {9:26} इन 62 हफ़्तों के बाद अल्लाह के मसह किए गए बन्दे को क़त्ल किया जाएगा, और उस के पास कुछ भी नहीं होगा। उस वक़्त एक और हुक्मरान की क़ौम आ कर शहर और मक़्दिस को तबाह करेगी। इख़तिताम सैलाब की सूरत में आएगा, और आख़िर तक जंग जारी रहेगी, ऐसी तबाही होगी जिस का फ़ैसला हो चुका है। {9:27} एक हफ़्ते तक यह हुक्मरान मुतअद्दिद लोगों को एक अह्द के तहत रहने पर मज्बूर करेगा। इस हफ़्ते के बीच में वह ज़बह और ग़ल्ला की क़ुर्बानियों का इन्तिज़ाम बन्द करेगा और मक़्दिस के एक तरफ़ वह कुछ खड़ा करेगा जो बेहुरमती और तबाही का बाइस है। लेकिन तबाह करने वाले का ख़ातमा भी मुक़र्रर किया गया है, और आख़िरकार वह भी तबाह हो जाएगा।” {i10:1} दान्याल की आख़िरी रोया {10:1} फ़ारस के बादशाह ख़ोरस की हुकूमत के तीसरे साल में बेल्तशज़्ज़र यानी दान्याल पर एक बात ज़ाहिर हुई जो यक़ीनी है और जिस का ताल्लुक़ एक बड़ी मुसीबत से है। उसे रोया में इस पैग़ाम की समझ हासिल हुई। {10:2} उन दिनों में मैं, दान्याल तीन पूरे हफ़्ते मातम कर रहा था। {10:3} न मैं ने उम्दा खाना खाया, न गोश्त या मै मेरे होंटों तक पहुँची। तीन पूरे हफ़्ते मैं ने हर ख़ुश्बूदार तेल से पर्हेज़ किया। {10:4} पहले महीने के 24वें दिन मैं बड़े दरया दिजला के किनारे पर खड़ा था। {10:5} मैं ने निगाह उठाई तो क्या देखता हूँ कि मेरे सामने कतान से मुलब्बस आदमी खड़ा है जिस की कमर में ख़ालिस सोने का पटका बंधा हुआ है। {10:6} उस का जिस्म पुखराज जैसा था, उस का चिहरा आसमानी बिजली की तरह चमक रहा था, और उस की आँखें भड़कती मशअलों की मानिन्द थीं। उस के बाज़ू और पाँओ पालिश किए हुए पीतल की तरह दमक रहे थे। बोलते वक़्त यूँ लग रहा था कि बड़ा हुजूम शोर मचा रहा है। {10:7} सिर्फ़ मैं, दान्याल ने यह रोया देखी। मेरे साथियों ने उसे न देखा। तो भी अचानक उन पर इतनी दह्शत तारी हुई कि वह भाग कर छुप गए। {10:8} चुनाँचे मैं अकेला ही रह गया। लेकिन यह अज़ीम रोया देख कर मेरी सारी ताक़त जाती रही। मेरे चिहरे का रंग माँद पड़ गया और मैं बेबस हुआ। {10:9} फिर वह बोलने लगा। उसे सुनते ही मैं मुँह के बल गिर कर मदहोश हालत में ज़मीन पर पड़ा रहा। {10:10} तब एक हाथ ने मुझे छू कर हिलाया। उस की मदद से मैं अपने हाथों और घुटनों के बल हो सका। {10:11} वह आदमी बोला, “ऐ दान्याल, तू अल्लाह के नज़्दीक बहुत गिराँक़दर है! जो बातें मैं तुझ से करूँगा उन पर ग़ौर कर। खड़ा हो जा, क्यूँकि इस वक़्त मुझे तेरे ही पास भेजा गया है।” तब मैं थरथराते हुए खड़ा हो गया। {10:12} उस ने अपनी बात जारी रखी, “ऐ दान्याल, मत डरना! जब से तू ने समझ हासिल करने और अपने ख़ुदा के सामने झुकने का पूरा इरादा कर रखा है, उसी दिन से तेरी सुनी गई है। मैं तेरी दुआओं के जवाब में आ गया हूँ। {10:13} लेकिन फ़ार्सी बादशाही का सरदार 21 दिन तक मेरे रास्ते में खड़ा रहा। फिर मीकाएल जो अल्लाह के सरदार फ़रिश्तों में से एक है मेरी मदद करने आया, और मेरी जान फ़ार्सी बादशाही के उस सरदार के साथ लड़ने से छूट गई। {10:14} मैं तुझे वह कुछ सुनाने को आया हूँ जो आख़िरी दिनों में तेरी क़ौम को पेश आएगा। क्यूँकि रोया का ताल्लुक़ आने वाले वक़्त से है।” {10:15} जब वह मेरे साथ यह बातें कर रहा था तो मैं ख़ामोशी से नीचे ज़मीन की तरफ़ देखता रहा। {10:16} फिर जो आदमी सा लग रहा था उस ने मेरे होंटों को छू दिया, और मैं मुँह खोल कर बोलने लगा। मैं ने अपने सामने खड़े फ़रिश्ते से कहा, “ऐ मेरे आक़ा, यह रोया देख कर मैं दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला औरत की तरह पेच-ओ-ताब खाने लगा हूँ। मेरी ताक़त जाती रही है। {10:17} ऐ मेरे आक़ा, आप का ख़ादिम किस तरह आप से बात कर सकता है? मेरी ताक़त तो जवाब दे गई है, साँस लेना भी मुश्किल हो गया है।” {10:18} जो आदमी सा लग रहा था उस ने मुझे एक बार फिर छू कर तक़वियत दी {10:19} और बोला, “ऐ तू जो अल्लाह की नज़र में गिराँक़दर है, मत डरना! तेरी सलामती हो। हौसला रख, मज़बूत हो जा!” जूँ ही उस ने मुझ से बात की मुझे तक़वियत मिली, और मैं बोला, “अब मेरे आक़ा बात करें, क्यूँकि आप ने मुझे तक़वियत दी है।” {10:20} उस ने कहा, “क्या तू मेरे आने का मक़्सद जानता है? जल्द ही मैं दुबारा फ़ारस के सरदार से लड़ने चला जाऊँगा। और उस से निपटने के बाद यूनान का सरदार आएगा। {10:21} लेकिन पहले मैं तेरे सामने वह कुछ बयान करता हूँ जो ‘सच्चाई की किताब’ में लिखा है। (इन सरदारों से लड़ने में मेरी मदद कोई नहीं करता सिवाए तुम्हारे सरदार फ़रिश्ते मीकाएल के। {11:1} मादी बादशाह दारा की हुकूमत के पहले साल से ही मैं मीकाएल के साथ खड़ा रहा हूँ ताकि उस को सहारा दूँ और उस की हिफ़ाज़त करूँ।) {i11:2} शिमाली और जुनूबी सल्तनतों की जंगें {11:2} अब मैं तुझे वह कुछ बताता हूँ जो यक़ीनन पेश आएगा। फ़ारस में मज़ीद तीन बादशाह तख़्त पर बैठेंगे। इस के बाद एक चौथा आदमी बादशाह बनेगा जो तमाम दूसरों से कहीं ज़्यादा दौलतमन्द होगा। जब वह दौलत के बाइस ताक़तवर हो जाएगा तो वह यूनानी मम्लकत से लड़ने के लिए सब कुछ जमा करेगा। {11:3} फिर एक ज़ोरावर बादशाह बरपा हो जाएगा जो बड़ी क़ुव्वत से हुकूमत करेगा और जो जी चाहे करेगा। {11:4} लेकिन जूँ ही वह बरपा हो जाए उस की सल्तनत टुकड़े टुकड़े हो कर एक शिमाली, एक जुनूबी, एक मग़रिबी और एक मशरिक़ी हिस्से में तक़्सीम हो जाएगी। न यह चार हिस्से पहली सल्तनत जितने ताक़तवर होंगे, न बादशाह की औलाद तख़्त पर बैठेगी, क्यूँकि उस की सल्तनत जड़ से उखाड़ कर दूसरों को दी जाएगी। {11:5} जुनूबी मुल्क का बादशाह तक़वियत पाएगा, लेकिन उस का एक अफ़्सर कहीं ज़्यादा ताक़तवर हो जाएगा, उस की हुकूमत कहीं ज़्यादा मज़बूत होगी। {11:6} चन्द साल के बाद दोनों सल्तनतें मुत्तहिद हो जाएँगी। अह्द को मज़बूत करने के लिए जुनूबी बादशाह की बेटी की शादी शिमाली बादशाह से कराई जाएगी। लेकिन न बेटी कामयाब होगी, न उस का शौहर और न उस की ताक़त क़ाइम रहेगी। उन दिनों में उसे उस के साथियों, बाप और शौहर समेत दुश्मन के हवाले किया जाएगा। {11:7} बेटी की जगह उस का एक रिश्तेदार खड़ा हो जाएगा जो शिमाली बादशाह की फ़ौज पर हम्ला करके उस के क़िले में घुस आएगा। वह उन से निपट कर फ़त्ह पाएगा {11:8} और उन के ढाले हुए बुतों को सोने-चाँदी की क़ीमती चीज़ों समेत छीन कर मिस्र ले जाएगा। वह कुछ साल तक शिमाली बादशाह को नहीं छेड़ेगा। {11:9} फिर शिमाली बादशाह जुनूबी बादशाह के मुल्क में घुस आएगा, लेकिन उसे अपने मुल्क में वापस जाना पड़ेगा। {11:10} इस के बाद उस के बेटे जंग की तय्यारियाँ करके बड़ी बड़ी फ़ौजें जमा करेंगे। उन में से एक जुनूबी बादशाह की तरफ़ बढ़ कर सैलाब की तरह जुनूबी मुल्क पर आएगी और लड़ते लड़ते उस के क़िले तक पहुँचेगी। {11:11} फिर जुनूबी बादशाह तैश में आ कर शिमाली बादशाह से लड़ने के लिए निकलेगा। शिमाली बादशाह जवाब में बड़ी फ़ौज खड़ी करेगा, लेकिन वह शिकस्त खा कर {11:12} तबाह हो जाएगी। तब जुनूबी बादशाह का दिल ग़ुरूर से भर जाएगा, और वह बेशुमार अफ़राद को मौत के घाट उतारेगा। तो भी वह ताक़तवर नहीं रहेगा। {11:13} क्यूँकि शिमाली बादशाह एक और फ़ौज जमा करेगा जो पहली की निस्बत कहीं ज़्यादा बड़ी होगी। चन्द साल के बाद वह इस बड़ी और हथियारों से लेस फ़ौज के साथ जुनूबी बादशाह से लड़ने आएगा। {11:14} उस वक़्त बहुत से लोग जुनूबी बादशाह के ख़िलाफ़ उठ खड़े होंगे। तेरी क़ौम के बेदीन लोग भी उस के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएंगे और यूँ रोया को पूरा करेंगे। लेकिन वह ठोकर खा कर गिर जाएंगे। {11:15} फिर शिमाली बादशाह आ कर एक क़िलाबन्द शहर का मुहासरा करेगा। वह पुश्ता बना कर शहर पर क़ब्ज़ा कर लेगा। जुनूब की फ़ौजें उसे रोक नहीं सकेंगी, उन के बेहतरीन दस्ते भी बेबस हो कर उस का सामना नहीं कर सकेंगे। {11:16} हम्लाआवर बादशाह जो जी चाहे करेगा, और कोई उस का सामना नहीं कर सकेगा। उस वक़्त वह ख़ूबसूरत मुल्क इस्राईल में टिक जाएगा और उसे तबाह करने का इख़तियार रखेगा। {11:17} तब वह अपनी पूरी सल्तनत पर क़ाबू पाने का मन्सूबा बांधेगा। इस ज़िम्न में वह जुनूबी बादशाह के साथ अह्द बांध कर उस से अपनी बेटी की शादी कराएगा ताकि जुनूबी मुल्क को तबाह करे, लेकिन बेफ़ाइदा। मन्सूबा नाकाम हो जाएगा। {11:18} इस के बाद वह साहिली इलाक़ों की तरफ़ रुख़ करेगा। उन में से वह बहुतों पर क़ब्ज़ा भी करेगा, लेकिन आख़िरकार एक हुक्मरान उस के गुस्ताखाना रवय्ये का ख़ातमा करेगा, और उसे शर्मिन्दा हो कर पीछे हटना पड़ेगा। {11:19} फिर शिमाली बादशाह अपने मुल्क के क़िलों के पास वापस आएगा, लेकिन इतने में ठोकर खा कर गिर जाएगा। तब उस का नाम-ओ-निशान तक नहीं रहेगा। {11:20} उस की जगह एक बादशाह बरपा हो जाएगा जो अपने अफ़्सर को शानदार मुल्क इस्राईल में भेजेगा ताकि वहाँ से गुज़र कर लोगों से टैक्स ले। लेकिन थोड़े दिनों के बाद वह तबाह हो जाएगा। न वह किसी झगड़े के सबब से हलाक होगा, न किसी जंग में। {i11:21} इस्राईली क़ौम का बड़ा दुश्मन {11:21} उस की जगह एक क़ाबिल-ए-मज़म्मत आदमी खड़ा हो जाएगा। वह तख़्त के लिए मुक़र्रर नहीं हुआ होगा बल्कि ग़ैरमुतवक़्क़े तौर पर आ कर साज़िशों के वसीले से बादशाह बनेगा। {11:22} मुख़ालिफ़ फ़ौजें उस पर टूट पड़ेंगी, लेकिन वह सैलाब की तरह उन पर आ कर उन्हें बहा ले जाएगा। वह और अह्द का एक रईस तबाह हो जाएंगे। {11:23} क्यूँकि उस के साथ अह्द बांधने के बाद वह उसे फ़रेब देगा और सिर्फ़ थोड़े ही अफ़राद के ज़रीए इक़तिदार हासिल कर लेगा। {11:24} वह ग़ैरमुतवक़्क़े तौर पर दौलतमन्द सूबों में घुस कर वह कुछ करेगा जो न उस के बाप और न उस के बापदादा से कभी सरज़द हुआ होगा। लूटा हुआ माल और मिलकियत वह अपने लोगों में तक़्सीम करेगा। वह क़िलाबन्द शहरों पर क़ब्ज़ा करने के मन्सूबे भी बांधेगा, लेकिन सिर्फ़ मह्दूद अर्से के लिए। {11:25} फिर वह हिम्मत बांध कर और पूरा ज़ोर लगा कर बड़ी फ़ौज के साथ जुनूबी बादशाह से लड़ने जाएगा। जवाब में जुनूबी बादशाह एक बड़ी और निहायत ही ताक़तवर फ़ौज को लड़ने के लिए तय्यार करेगा। तो भी वह शिमाली बादशाह का सामना नहीं कर पाएगा, इस लिए कि उस के ख़िलाफ़ साज़िशें कामयाब हो जाएँगी। {11:26} उस की रोटी खाने वाले ही उसे तबाह करेंगे। तब उस की फ़ौज मुन्तशिर हो जाएगी, और बहुत से अफ़राद मैदान-ए-जंग में खेत आएँगे। {11:27} दोनों बादशाह मुज़ाकरात के लिए एक ही मेज़ पर बैठ जाएंगे। वहाँ दोनों झूट बोलते हुए एक दूसरे को नुक़्सान पहुँचाने के लिए कोशाँ रहेंगे। लेकिन किसी को कामयाबी हासिल नहीं होगी, क्यूँकि मुक़र्ररा आख़िरी वक़्त अभी नहीं आना है। {11:28} शिमाली बादशाह बड़ी दौलत के साथ अपने मुल्क में वापस चला जाएगा। रास्ते में वह मुक़द्दस अह्द की क़ौम इस्राईल पर ध्यान दे कर उसे नुक़्सान पहुँचाएगा, फिर अपने वतन वापस जाएगा। {11:29} मुक़र्ररा वक़्त पर वह दुबारा जुनूबी मुल्क में घुस आएगा, लेकिन पहले की निस्बत इस बार नतीजा फ़र्क़ होगा। {11:30} क्यूँकि कित्तीम के बहरी जहाज़ उस की मुख़ालफ़त करेंगे, और वह हौसला हारेगा। तब वह मुड़ कर मुक़द्दस अह्द की क़ौम पर अपना पूरा ग़ुस्सा उतारेगा। जो मुक़द्दस अह्द को तर्क करेंगे उन पर वह मेहरबानी करेगा। {11:31} उस के फ़ौजी आ कर क़िलाबन्द मक़्दिस की बेहुरमती करेंगे। वह रोज़ाना की क़ुर्बानियों का इन्तिज़ाम बन्द करके तबाही का मकरूह बुत खड़ा करेंगे। {11:32} जो यहूदी पहले से अह्द की ख़िलाफ़वरज़ी कर रहे होंगे उन्हें वह चिकनी-चुपड़ी बातों से मुर्तद हो जाने पर आमादा करेगा। लेकिन जो लोग अपने ख़ुदा को जानते हैं वह मज़बूत रह कर उस की मुख़ालफ़त करेंगे। {11:33} क़ौम के समझदार बहुतों को सहीह राह की तालीम देंगे। लेकिन कुछ अर्से के लिए वह तलवार, आग, क़ैद और लूट-मार के बाइस डाँवाँडोल रहेंगे। {11:34} उस वक़्त उन्हें थोड़ी बहुत मदद हासिल तो होगी, लेकिन बहुत से ऐसे लोग उन के साथ मिल जाएंगे जो मुख़लिस नहीं होंगे। {11:35} समझदारों में से कुछ डाँवाँडोल हो जाएंगे ताकि लोगों को आज़मा कर आख़िरी वक़्त तक ख़ालिस और पाक-साफ़ किया जाए। क्यूँकि मुक़र्ररा वक़्त कुछ देर के बाद आएगा। {11:36} बादशाह जो जी चाहे करेगा। वह सरफ़राज़ हो कर अपने आप को तमाम माबूदों से अज़ीम क़रार देगा। ख़ुदाओं के ख़ुदा के ख़िलाफ़ वह नाक़ाबिल-ए-बयान कुफ़्र बकेगा। उसे कामयाबी भी हासिल होगी, लेकिन सिर्फ़ उस वक़्त तक जब तक इलाही ग़ज़ब ठंडा न हो जाए। क्यूँकि जो कुछ मुक़र्रर हुआ है उसे पूरा होना है। {11:37} बादशाह न अपने बापदादा के देवताओं की परवा करेगा, न औरतों के अज़ीज़ देवता की, न किसी और की। क्यूँकि वह अपने आप को सब पर सरफ़राज़ करेगा। {11:38} इन देवताओं के बजाए वह क़िलों के देवता की पूजा करेगा जिस से उस के बापदादा वाक़िफ़ ही नहीं थे। वह सोने-चाँदी, जवाहिरात और क़ीमती तोह्फ़ों से देवता का एहतिराम करेगा। {11:39} चुनाँचे वह अजनबी माबूद की मदद से मज़बूत क़िलों पर हम्ला करेगा। जो उस की हुकूमत मानें उन की वह बड़ी इज़्ज़त करेगा, इऩ्हें बहुतों पर मुक़र्रर करेगा और उन में अज्र के तौर पर ज़मीन तक़्सीम करेगा। {11:40} लेकिन फिर आख़िरी वक़्त आएगा। जुनूबी बादशाह जंग में उस से टकराएगा, तो जवाब में शिमाली बादशाह रथ, घुड़सवार और मुतअद्दिद बहरी जहाज़ ले कर उस पर टूट पड़ेगा। तब वह बहुत से मुल्कों में घुस आएगा और सैलाब की तरह सब कुछ ग़र्क़ करके आगे बढ़ेगा। {11:41} इस दौरान वह ख़ूबसूरत मुल्क इस्राईल में भी घुस आएगा। बहुत से ममालिक शिकस्त खाएँगे, लेकिन अदोम और मोआब अम्मोन के मर्कज़ी हिस्से समेत बच जाएंगे। {11:42} उस वक़्त उस का इक़तिदार बहुत से ममालिक पर छा जाएगा, मिस्र भी नहीं बचेगा। {11:43} शिमाली बादशाह मिस्र की सोने-चाँदी और बाक़ी दौलत पर क़ब्ज़ा करेगा, और लिबिया और एथोपिया भी उस के नक़्श-ए-क़दम पर चलेंगे। {11:44} लेकिन फिर मशरिक़ और शिमाल की तरफ़ से अफ़्वाहें उसे सदमा पहुँचाएँगी, और वह बड़े तैश में आ कर बहुतों को तबाह और हलाक करने के लिए निकलेगा। {11:45} रास्ते में वह समुन्दर और ख़ूबसूरत मुक़द्दस पहाड़ के दरमियान अपने शाही ख़ैमे लगा लेगा। लेकिन फिर उस का अन्जाम आएगा, और कोई उस की मदद नहीं करेगा। {i12:1} मुर्दे जी उठते हैं {12:1} उस वक़्त फ़रिश्तों का अज़ीम सरदार मीकाएल उठ खड़ा होगा, वह जो तेरी क़ौम की शफ़ाअत करता है। मुसीबत का ऐसा वक़्त होगा कि क़ौमों के पैदा होने से ले कर उस वक़्त तक नहीं हुआ होगा। लेकिन साथ साथ तेरी क़ौम को नजात मिलेगी। जिस का भी नाम अल्लाह की किताब में दर्ज है वह नजात पाएगा। {12:2} तब ख़ाक में सोए हुए मुतअद्दिद लोग जाग उठेंगे, कुछ अबदी ज़िन्दगी पाने के लिए और कुछ अबदी रुस्वाई और घिन का निशाना बनने के लिए। {12:3} जो समझदार हैं वह आसमान की आब-ओ-ताब की मानिन्द चमकेंगे, और जो बहुतों को रास्त राह पर लाए हैं वह हमेशा तक सितारों की तरह जगमगाएँगे। {12:4} लेकिन तू, ऐ दान्याल, इन बातों को छुपाए रख! इस किताब पर आख़िरी वक़्त तक मुहर लगा दे! बहुत लोग इधर उधर घूमते फिरेंगे, और इल्म में इज़ाफ़ा होता जाएगा।” {i12:5} आख़िरी वक़्त {12:5} फिर मैं, दान्याल ने दरया के पास दो आदमियों को देखा। एक इस किनारे पर खड़ा था जबकि दूसरा दूसरे किनारे पर। {12:6} कतान से मुलब्बस आदमी बहते हुए पानी के ऊपर था। किनारों पर खड़े आदमियों में से एक ने उस से पूछा, “इन हैरतअंगेज़ बातों की तक्मील तक मज़ीद कितनी देर लगेगी?” {12:7} कतान से मुलब्बस आदमी ने दोनों हाथ आसमान की तरफ़ उठाए और अबद तक ज़िन्दा ख़ुदा की क़सम खा कर बोला, “पहले एक अर्सा, फिर दो अर्से, फिर आधा अर्सा गुज़रेगा। पहले मुक़द्दस क़ौम की ताक़त को पाश पाश करने का सिलसिला इख़तिताम पर पहुँचना है। इस के बाद ही यह तमाम बातें तक्मील तक पहुँचेंगी।” {12:8} गो मैं ने उस की यह बात सुनी, लेकिन वह मेरी समझ में न आई। चुनाँचे मैं ने पूछा, “मेरे आक़ा, इन तमाम बातों का क्या अन्जाम होगा?” {12:9} वह बोला, “ऐ दान्याल, अब चला जा! क्यूँकि इन बातों को आख़िरी वक़्त तक छुपाए रखना है। उस वक़्त तक इन पर मुहर लगी रहेगी। {12:10} बहुतों को आज़मा कर पाक-साफ़ और ख़ालिस किया जाएगा। लेकिन बेदीन बेदीन ही रहेंगे। कोई भी बेदीन यह नहीं समझेगा, लेकिन समझदारों को समझ आएगी। {12:11} जिस वक़्त से रोज़ाना की क़ुर्बानी का इन्तिज़ाम बन्द किया जाएगा और तबाही के मकरूह बुत को मक़्दिस में खड़ा किया जाएगा उस वक़्त से 1,290 दिन गुज़रेंगे। {12:12} जो सब्र करके 1,335 दिनों के इख़तिताम तक क़ाइम रहे वह मुबारक है! {12:13} जहाँ तक तेरा ताल्लुक़ है, आख़िरी वक़्त की तरफ़ बढ़ता चला जा! तू आराम करेगा और फिर दिनों के इख़तिताम पर जी उठ कर अपनी मीरास पाएगा।”