{1:1} यह ख़त पौलुस की तरफ़ से है, जो अल्लाह की मर्ज़ी से मसीह ईसा का रसूल है। मैं इफ़िसुस शहर के मुक़द्दसीन को लिख रहा हूँ, उन्हें जो मसीह ईसा में ईमानदार हैं। {1:2} ख़ुदा हमारा बाप और ख़ुदावन्द ईसा मसीह आप को फ़ज़्ल और सलामती बख़्शें। {i1:3} मसीह में रुहानी बरकतें {1:3} ख़ुदा हमारे ख़ुदावन्द ईसा मसीह के बाप की हम्द-ओ-सना हो! क्यूँकि मसीह में उस ने हमें आसमान पर हर रुहानी बरकत से नवाज़ा है। {1:4} दुनिया की तख़्लीक़ से पेशतर ही उस ने मसीह में हमें चुन लिया ताकि हम मुक़द्दस और बेऐब हालत में उस के सामने ज़िन्दगी गुज़ारें। यह कितनी अज़ीम मुहब्बत थी! {1:5} पहले ही से उस ने फ़ैसला कर लिया कि वह हमें मसीह में अपने बेटे-बेटियाँ बना लेगा। यही उस की मर्ज़ी और ख़ुशी थी {1:6} ताकि हम उस के जलाली फ़ज़्ल की तम्जीद करें, उस मुफ़्त नेमत के लिए जो उस ने हमें अपने प्यारे फ़र्ज़न्द में दे दी। {1:7} क्यूँकि उस ने मसीह के ख़ून से हमारा फ़िद्या दे कर हमें आज़ाद और हमारे गुनाहों को मुआफ़ कर दिया है। अल्लाह का यह फ़ज़्ल कितना वसी है {1:8} जो उस ने कस्रत से हमें अता किया है। अपनी पूरी हिक्मत और दानाई का इज़हार करके {1:9} अल्लाह ने हम पर अपनी पोशीदा मर्ज़ी ज़ाहिर कर दी, यानी वह मन्सूबा जो उसे पसन्द था और जो उस ने मसीह में पहले से बना रखा था। {1:10} मन्सूबा यह है कि जब मुक़र्ररा वक़्त आएगा तो अल्लाह मसीह में तमाम काइनात को जमा कर देगा। उस वक़्त सब कुछ मिल कर मसीह के तहत हो जाएगा, ख़्वाह वह आसमान पर हो या ज़मीन पर। {1:11} मसीह में हम आसमानी बादशाही के वारिस भी बन गए हैं। अल्लाह ने पहले से हमें इस के लिए मुक़र्रर किया, क्यूँकि वह सब कुछ यूँ सरअन्जाम देता है कि उस की मर्ज़ी का इरादा पूरा हो जाए। {1:12} और वह चाहता है कि हम उस के जलाल की सताइश का बाइस बनें, हम जिन्हों ने पहले से मसीह पर उम्मीद रखी। {1:13} आप भी मसीह में हैं, क्यूँकि आप सच्चाई का कलाम और अपनी नजात की ख़ुशख़बरी सुन कर ईमान लाए। और अल्लाह ने आप पर भी रूह-उल-क़ुद्स की मुहर लगा दी जिस का वादा उस ने किया था। {1:14} रूह-उल-क़ुद्स हमारी मीरास का बयाना है। वह हमें यह ज़मानत देता है कि अल्लाह हमारा जो उस की मिलकियत हैं फ़िद्या दे कर हमें पूरी मख़्लसी तक पहुँचाएगा। क्यूँकि हमारी ज़िन्दगी का मक़्सद यह है कि उस के जलाल की सताइश की जाए। {i1:15} पौलुस की दुआ {1:15} भाइयो, मैं ख़ुदावन्द ईसा पर आप के ईमान और आप की तमाम मुक़द्दसीन से मुहब्बत के बारे में सुन कर {1:16} आप के लिए ख़ुदा का शुक्र करने से बाज़ नहीं आता बल्कि आप को अपनी दुआओं में याद करता रहता हूँ। {1:17} मेरी ख़ास दुआ यह है कि हमारे ख़ुदावन्द ईसा मसीह का ख़ुदा और जलाली बाप आप को दानाई और मुकाशफ़ा की रूह दे ताकि आप उसे बेहतर तौर पर जान सकें। {1:18} वह करे कि आप के दिलों की आँखें रौशन हो जाएँ। क्यूँकि फिर ही आप जान लेंगे कि यह कैसी उम्मीद है जिस के लिए उस ने आप को बुलाया है, कि यह जलाली मीरास कैसी दौलत है जो मुक़द्दसीन को हासिल है, {1:19} और कि हम ईमान रखने वालों पर उस की क़ुदरत का इज़हार कितना ज़बरदस्त है। यह वही बेहद क़ुदरत है {1:20} जिस से उस ने मसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा करके आसमान पर अपने दहने हाथ बिठाया। {1:21} वहाँ मसीह हर हुक्मरान, इख़तियार, क़ुव्वत, हुकूमत, हाँ हर नाम से कहीं सरफ़राज़ है, ख़्वाह इस दुनिया में हो या आने वाली दुनिया में। {1:22} अल्लाह ने सब कुछ उस के पाँओ के नीचे करके उसे सब का सर बना दिया। यह उस ने अपनी जमाअत की ख़ातिर किया {1:23} जो मसीह का बदन है और जिसे मसीह से पूरी मामूरी हासिल होती है यानी उस से जो हर तरह से सब कुछ मामूर कर देता है। {i2:1} मौत से ज़िन्दगी तक {2:1} आप भी अपनी ख़ताओं और गुनाहों की वजह से रुहानी तौर पर मुर्दा थे। {2:2} क्यूँकि पहले आप इन में फंसे हुए इस दुनिया के तौर-तरीक़ों के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते थे। आप हवा की कुव्वतों के सरदार के ताबे थे, उस रूह के जो इस वक़्त उन में सरगर्म-ए-अमल है जो अल्लाह के नाफ़रमान हैं। {2:3} पहले तो हम भी सब उन में ज़िन्दगी गुज़ारते थे। हम भी अपनी पुरानी फ़ितरत की शहवतें, मर्ज़ी और सोच पूरी करने की कोशिश करते रहे। दूसरों की तरह हम पर भी फ़ित्री तौर पर अल्लाह का ग़ज़ब नाज़िल होना था। {2:4} लेकिन अल्लाह का रहम इतना वसी है और वह इतनी शिद्दत से हम से मुहब्बत रखता है {2:5} कि अगरचे हम अपने गुनाहों में मुर्दा थे तो भी उस ने हमें मसीह के साथ ज़िन्दा कर दिया। हाँ, आप को अल्लाह के फ़ज़्ल ही से नजात मिली है। {2:6} जब हम मसीह ईसा पर ईमान लाए तो उस ने हमें मसीह के साथ ज़िन्दा करके आसमान पर बिठा दिया। {2:7} ईसा मसीह में हम पर मेहरबानी करने से अल्लाह आने वाले ज़मानों में अपने फ़ज़्ल की ला-मह्दूद दौलत दिखाना चाहता था। {2:8} क्यूँकि यह उस का फ़ज़्ल ही है कि आप को ईमान लाने पर नजात मिली है। यह आप की तरफ़ से नहीं है बल्कि अल्लाह की बख़्शिश है। {2:9} और यह नजात हमें अपने किसी काम के नतीजे में नहीं मिली, इस लिए कोई अपने आप पर फ़ख़र नहीं कर सकता। {2:10} हाँ, हम उसी की मख़्लूक़ हैं जिन्हें उस ने मसीह में नेक काम करने के लिए ख़ल्क़ किया है। और यह काम उस ने पहले से हमारे लिए तय्यार कर रखे हैं, क्यूँकि वह चाहता है कि हम उन्हें सरअन्जाम देते हुए ज़िन्दगी गुज़ारें। {i2:11} मसीह में एक {2:11} यह बात ज़हन में रखें कि माज़ी में आप क्या थे। यहूदी सिर्फ़ अपने लिए लफ़्ज़ मख़्तून इस्तेमाल करते थे अगरचे वह अपना ख़तना सिर्फ़ इन्सानी हाथों से करवाते हैं। आप को जो ग़ैरयहूदी हैं वह नामख़्तून क़रार देते थे। {2:12} उस वक़्त आप मसीह के बग़ैर ही चलते थे। आप इस्राईल क़ौम के शहरी न बन सके और जो वादे अल्लाह ने अह्दों के ज़रीए अपनी क़ौम से किए थे वह आप के लिए नहीं थे। इस दुनिया में आप की कोई उम्मीद नहीं थी, आप अल्लाह के बग़ैर ही ज़िन्दगी गुज़ारते थे। {2:13} लेकिन अब आप मसीह में हैं। पहले आप दूर थे, लेकिन अब आप को मसीह के ख़ून के वसीले से क़रीब लाया गया है। {2:14} क्यूँकि मसीह हमारी सुलह है और उसी ने यहूदियों और ग़ैरयहूदियों को मिला कर एक क़ौम बना दिया है। अपने जिस्म को क़ुर्बान करके उस ने वह दीवार गिरा दी जिस ने उन्हें अलग करके एक दूसरे के दुश्मन बना रखा था। {2:15} उस ने शरीअत को उस के अह्काम और ज़वाबित समेत मन्सूख़ कर दिया ताकि दोनों गुरोहों को मिला कर एक नया इन्सान ख़ल्क़ करे, ऐसा इन्सान जो उस में एक हो और सुलह-सलामती के साथ ज़िन्दगी गुज़ारे। {2:16} अपनी सलीबी मौत से उस ने दोनों गुरोहों को एक बदन में मिला कर उन की अल्लाह के साथ सुलह कराई। हाँ, उस ने अपने आप में यह दुश्मनी ख़त्म कर दी। {2:17} उस ने आ कर दोनों गुरोहों को सुलह-सलामती की ख़ुशख़बरी सुनाई, आप ग़ैरयहूदियों को जो अल्लाह से दूर थे और आप यहूदियों को भी जो उस के क़रीब थे। {2:18} अब हम दोनों मसीह के ज़रीए एक ही रूह में बाप के हुज़ूर आ सकते हैं। {2:19} नतीजे में अब आप परदेसी और अजनबी नहीं रहे बल्कि मुक़द्दसीन के हमवतन और अल्लाह के घराने के हैं। {2:20} आप को रसूलों और नबियों की बुन्याद पर तामीर किया गया है जिस के कोने का बुन्यादी पत्थर मसीह ईसा ख़ुद है। {2:21} उस में पूरी इमारत जुड़ जाती और बढ़ती बढ़ती ख़ुदावन्द में अल्लाह का मुक़द्दस घर बन जाती है। {2:22} दूसरों के साथ साथ उस में आप की भी तामीर हो रही है ताकि आप रूह में अल्लाह की सुकूनतगाह बन जाएँ। {i3:1} पौलुस की ग़ैरयहूदियों में ख़िदमत {3:1} इस वजह से मैं पौलुस जो आप ग़ैरयहूदियों की ख़ातिर मसीह ईसा का क़ैदी हूँ अल्लाह से दुआ करता हूँ। {3:2} आप ने तो सुन लिया है कि मुझे आप में अल्लाह के फ़ज़्ल का इन्तिज़ाम चलाने की ख़ास ज़िम्मादारी दी गई है। {3:3} जिस तरह मैं ने पहले ही मुख़्तसर तौर पर लिखा है, अल्लाह ने ख़ुद मुझ पर यह राज़ ज़ाहिर कर दिया। {3:4} जब आप वह पढ़ेंगे जो मैं ने लिखा तो आप जान लेंगे कि मुझे मसीह के राज़ के बारे में क्या क्या समझ आई है। {3:5} गुज़रे ज़मानों में अल्लाह ने यह बात ज़ाहिर नहीं की, लेकिन अब उस ने इसे रूह-उल-क़ुद्स के ज़रीए अपने मुक़द्दस रसूलों और नबियों पर ज़ाहिर कर दिया। {3:6} और अल्लाह का राज़ यह है कि उस की ख़ुशख़बरी के ज़रीए ग़ैरयहूदी इस्राईल के साथ आसमानी बादशाही के वारिस, एक ही बदन के आज़ा और उसी वादे में शरीक हैं जो अल्लाह ने मसीह ईसा में किया है। {3:7} मैं अल्लाह के मुफ़्त फ़ज़्ल और उस की क़ुदरत के इज़हार से ख़ुशख़बरी का ख़ादिम बन गया। {3:8} अगरचे मैं अल्लाह के तमाम मुक़द्दसीन से कमतर हूँ तो भी उस ने मुझे यह फ़ज़्ल बख़्शा कि मैं ग़ैरयहूदियों को उस ला-मह्दूद दौलत की ख़ुशख़बरी सुनाऊँ जो मसीह में दस्तयाब है। {3:9} यही मेरी ज़िम्मादारी बन गई कि मैं सब पर उस राज़ का इन्तिज़ाम ज़ाहिर करूँ जो गुज़रे ज़मानों में सब चीज़ों के ख़ालिक़ ख़ुदा में पोशीदा रहा। {3:10} क्यूँकि अल्लाह चाहता था कि अब मसीह की जमाअत ही आसमानी हुक्मरानों और कुव्वतों को अल्लाह की वसी हिक्मत के बारे में इल्म पहुँचाए। {3:11} यही उस का अज़ली मन्सूबा था जो उस ने हमारे ख़ुदावन्द मसीह ईसा के वसीले से तक्मील तक पहुँचाया। {3:12} उस में और उस पर ईमान रख कर हम पूरी आज़ादी और एतिमाद के साथ अल्लाह के हुज़ूर आ सकते हैं। {3:13} इस लिए मेरी आप से गुज़ारिश है कि आप मेरी मुसीबतें देख कर बेदिल न हो जाएँ। यह मैं आप की ख़ातिर बर्दाश्त कर रहा हूँ, और यह आप की इज़्ज़त का बाइस हैं। {i3:14} मसीह की मुहब्बत {3:14} इस वजह से मैं बाप के हुज़ूर अपने घुटने टेकता हूँ, {3:15} उस बाप के सामने जिस से आसमान-ओ-ज़मीन का हर ख़ानदान नामज़द है। {3:16} मेरी दुआ है कि वह अपने जलाल की दौलत के मुवाफ़िक़ यह बख़्शे कि आप उस के रूह के वसीले से बातिनी तौर पर ज़बरदस्त तक़वियत पाएँ, {3:17} कि मसीह ईमान के ज़रीए आप के दिलों में सुकूनत करे। हाँ, मेरी दुआ है कि आप मुहब्बत में जड़ पकड़ें और इस बुन्याद पर ज़िन्दगी यूँ गुज़ारें {3:18} कि आप बाक़ी तमाम मुक़द्दसीन के साथ यह समझने के क़ाबिल बन जाएँ कि मसीह की मुहब्बत कितनी चौड़ी, कितनी लम्बी, कितनी ऊँची और कितनी गहरी है। {3:19} ख़ुदा करे कि आप मसीह की यह मुहब्बत जान लें जो हर इल्म से कहीं अफ़्ज़ल है और यूँ अल्लाह की पूरी मामूरी से भर जाएँ। {3:20} अल्लाह की तम्जीद हो जो अपनी उस क़ुदरत के मुवाफ़िक़ जो हम में काम कर रही है ऐसा ज़बरदस्त काम कर सकता है जो हमारी हर सोच और दुआ से कहीं बाहर है। {3:21} हाँ, मसीह ईसा और उस की जमाअत में अल्लाह की तम्जीद पुश्त-दर-पुश्त और अज़ल से अबद तक होती रहे। आमीन। {i4:1} बदन की यगान्गत {4:1} चुनाँचे मैं जो ख़ुदावन्द में क़ैदी हूँ आप को ताकीद करता हूँ कि उस ज़िन्दगी के मुताबिक़ चलें जिस के लिए ख़ुदा ने आप को बुलाया है। {4:2} हर वक़्त हलीम और नर्मदिल रहें, सब्र से काम लें और एक दूसरे से मुहब्बत रख कर उसे बर्दाश्त करें। {4:3} सुलह-सलामती के बंधन में रह कर रूह की यगान्गत क़ाइम रखने की पूरी कोशिश करें। {4:4} एक ही बदन और एक ही रूह है। यूँ आप को भी एक ही उम्मीद के लिए बुलाया गया। {4:5} एक ख़ुदावन्द, एक ईमान, एक बपतिस्मा है। {4:6} एक ख़ुदा है, जो सब का वाहिद बाप है। वह सब का मालिक है, सब के ज़रीए काम करता है और सब में मौजूद है। {4:7} अब हम सब को अल्लाह का फ़ज़्ल बख़्शा गया। लेकिन मसीह हर एक को मुख़्तलिफ़ पैमाने से यह फ़ज़्ल अता करता है। {4:8} इस लिए कलाम-ए-मुक़द्दस फ़रमाता है, “उस ने बुलन्दी पर चढ़ कर क़ैदियों का हुजूम गिरिफ़्तार कर लिया और आदमियों को तोह्फ़े दिए।” {4:9} अब ग़ौर करें कि चढ़ने का ज़िक्र किया गया है। इस का मतलब है कि पहले वह ज़मीन की गहराइयों में उतरा। {4:10} जो उतरा वह वही है जो तमाम आसमानों से ऊँचा चढ़ गया ताकि तमाम काइनात को अपने आप से मामूर करे। {4:11} उसी ने अपनी जमाअत को तरह तरह के ख़ादिमों से नवाज़ा। बाज़ रसूल, बाज़ नबी, बाज़ मुबश्शिर, बाज़ चरवाहे और बाज़ उस्ताद हैं। {4:12} इन का मक़्सद यह है कि मुक़द्दसीन को ख़िदमत करने के लिए तय्यार किया जाए और यूँ मसीह के बदन की तामीर-ओ-तरक़्क़ी हो जाए। {4:13} इस तरीक़े से हम सब ईमान और अल्लाह के फ़र्ज़न्द की पहचान में एक हो कर बालिग़ हो जाएंगे, और हम मिल कर मसीह की मामूरी और बलूग़त को मुनअकिस करेंगे। {4:14} फिर हम बच्चे नहीं रहेंगे, और तालीम के हर एक झोंके से उछलते फिरते नहीं रहेंगे जब लोग अपनी चालाकी और धोकेबाज़ी से हमें अपने जालों में फंसाने की कोशिश करेंगे। {4:15} इस के बजाए हम मुहब्बत की रूह में सच्ची बात करके हर लिहाज़ से मसीह की तरफ़ बढ़ते जाएंगे जो हमारा सर है। {4:16} वही नसों के ज़रीए पूरे बदन के मुख़्तलिफ़ हिस्सों को एक दूसरे के साथ जोड़ कर मुत्तहिद कर देता है। हर हिस्सा अपनी ताक़त के मुवाफ़िक़ काम करता है, और यूँ पूरा बदन मुहब्बत की रूह में बढ़ता और अपनी तामीर करता रहता है। {i4:17} मसीह में नई ज़िन्दगी {4:17} पस मैं ख़ुदावन्द के नाम में आप को आगाह करता हूँ कि अब से ग़ैरईमानदारों की तरह ज़िन्दगी न गुज़ारें जिन की सोच बेकार है {4:18} और जिन की समझ अंधेरे की गिरिफ़्त में है। उन का उस ज़िन्दगी में कोई हिस्सा नहीं जो अल्लाह देता है, क्यूँकि वह जाहिल हैं और उन के दिल सख़्त हो गए हैं। {4:19} बेहिस्स हो कर उन्हों ने अपने आप को अय्याशी के हवाले कर दिया। यूँ वह न बुझने वाली प्यास के साथ हर क़िस्म की नापाक हरकतें करते हैं। {4:20} लेकिन आप ने मसीह को यूँ नहीं जाना। {4:21} आप ने तो उस के बारे में सुन लिया है, और उस में हो कर आप को वह सच्चाई सिखाई गई जो ईसा में है। {4:22} चुनाँचे अपने पुराने इन्सान को उस के पुराने चाल-चलन समेत उतार देना, क्यूँकि वह अपनी धोकेबाज़ शहवतों से बिगड़ता जा रहा है। {4:23} अल्लाह को आप की सोच की तज्दीद करने दें {4:24} और नए इन्सान को पहन लें जो यूँ बनाया गया है कि वह हक़ीक़ी रास्तबाज़ी और क़ुद्दूसियत में अल्लाह के मुशाबेह है। {4:25} इस लिए हर शख़्स झूट से बाज़ रह कर दूसरों से सच बात करे, क्यूँकि हम सब एक ही बदन के आज़ा हैं। {4:26} ग़ुस्से में आते वक़्त गुनाह मत करना। आप का ग़ुस्सा सूरज के ग़ुरूब होने तक ठंडा हो जाए, {4:27} वर्ना आप इब्लीस को अपनी ज़िन्दगी में काम करने का मौक़ा देंगे। {4:28} चोर अब से चोरी न करे बल्कि ख़ूब मेहनत-मशक़्क़त करके अपने हाथों से अच्छा काम करे। हाँ, वह इतना कमाए कि ज़रूरतमन्दों को भी कुछ दे सके। {4:29} कोई भी बुरी बात आप के मुँह से न निकले बल्कि सिर्फ़ ऐसी बातें जो दूसरों की ज़रूरियात के मुताबिक़ उन की तामीर करें। यूँ सुनने वालों को बरकत मिलेगी। {4:30} अल्लाह के मुक़द्दस रूह को दुख न पहुँचाना, क्यूँकि उसी से अल्लाह ने आप पर मुहर लगा कर यह ज़मानत दे दी है कि आप उसी के हैं और नजात के दिन बच जाएंगे। {4:31} तमाम तरह की तल्ख़ी, तैश, ग़ुस्से, शोर-शराबा, गाली-गलोच बल्कि हर क़िस्म के बुरे रवय्ये से बाज़ आएँ। {4:32} एक दूसरे पर मेहरबान और रहमदिल हों और एक दूसरे को यूँ मुआफ़ करें जिस तरह अल्लाह ने आप को भी मसीह में मुआफ़ कर दिया है। {i5:1} रौशनी में ज़िन्दगी गुज़ारना {5:1} चूँकि आप अल्लाह के प्यारे बच्चे हैं इस लिए उस के नमूने पर चलें। {5:2} मुहब्बत की रूह में ज़िन्दगी यूँ गुज़ारें जैसे मसीह ने गुज़ारी। क्यूँकि उस ने हम से मुहब्बत रख कर अपने आप को हमारे लिए अल्लाह के हुज़ूर क़ुर्बान कर दिया और यूँ ऐसी क़ुर्बानी बन गया जिस की ख़ुश्बू अल्लाह को पसन्द आई। {5:3} आप के दरमियान ज़िनाकारी, हर तरह की नापाकी या लालच का ज़िक्र तक न हो, क्यूँकि यह अल्लाह के मुक़द्दसीन के लिए मुनासिब नहीं है। {5:4} इसी तरह शर्मनाक, अहमक़ाना या गन्दी बातें भी ठीक नहीं। इन की जगह शुक्रगुज़ारी होनी चाहिए। {5:5} क्यूँकि यक़ीन जानें कि ज़िनाकार, नापाक या लालची मसीह और अल्लाह की बादशाही में मीरास नहीं पाएँगे (लालच तो एक क़िस्म की बुतपरस्ती है)। {5:6} कोई आप को बेमानी अल्फ़ाज़ से धोका न दे। ऐसी ही बातों की वजह से अल्लाह का ग़ज़ब उन पर जो नाफ़रमान हैं नाज़िल होता है। {5:7} चुनाँचे उन में शरीक न हो जाएँ जो यह करते हैं। {5:8} क्यूँकि पहले आप तारीकी थे, लेकिन अब आप ख़ुदावन्द में रौशनी हैं। रौशनी के फ़र्ज़न्द की तरह ज़िन्दगी गुज़ारें, {5:9} क्यूँकि रौशनी का फल हर तरह की भलाई, रास्तबाज़ी और सच्चाई है। {5:10} और मालूम करते रहें कि ख़ुदावन्द को क्या कुछ पसन्द है। {5:11} तारीकी के बेफल कामों में हिस्सा न लें बल्कि उन्हें रौशनी में लाएँ। {5:12} क्यूँकि जो कुछ यह लोग पोशीदगी में करते हैं उस का ज़िक्र करना भी शर्म की बात है। {5:13} लेकिन सब कुछ बेनिक़ाब हो जाता है जब उसे रौशनी में लाया जाता है। {5:14} क्यूँकि जो रौशनी में लाया जाता है वह रौशन हो जाता है। इस लिए कहा जाता है, “ऐ सोने वाले, जाग उठ! मुर्दों में से जी उठ, तो मसीह तुझ पर चमकेगा।” {5:15} चुनाँचे बड़ी एहतियात से इस पर ध्यान दें कि आप ज़िन्दगी किस तरह गुज़ारते हैं - बेसमझ या समझदार लोगों की तरह। {5:16} हर मौक़े से पूरा फ़ाइदा उठाएँ, क्यूँकि दिन बुरे हैं। {5:17} इस लिए अहमक़ न बनें बल्कि ख़ुदावन्द की मर्ज़ी को समझें। {5:18} शराब में मत्वाले न हो जाएँ, क्यूँकि इस का अन्जाम अय्याशी है। इस के बजाए रूह-उल-क़ुद्स से मामूर होते जाएँ। {5:19} ज़बूरों, हम्द-ओ-सना और रुहानी गीतों से एक दूसरे की हौसलाअफ़्ज़ाई करें। अपने दिलों में ख़ुदावन्द के लिए गीत गाएँ और नग़मासराई करें। {5:20} हाँ, हर वक़्त हमारे ख़ुदावन्द ईसा मसीह के नाम में हर चीज़ के लिए शुक्र करें। {i5:21} मियाँ-बीवी का ताल्लुक़ {5:21} मसीह के ख़ौफ़ में एक दूसरे के ताबे रहें। {5:22} बीवियो, जिस तरह आप ख़ुदावन्द के ताबे हैं उसी तरह अपने शौहर के ताबे भी रहें। {5:23} क्यूँकि शौहर वैसे ही अपनी बीवी का सर है जैसे मसीह अपनी जमाअत का। हाँ, जमाअत मसीह का बदन है जिसे उस ने नजात दी है। {5:24} अब जिस तरह जमाअत मसीह के ताबे है उसी तरह बीवियाँ भी अपने शौहरों के ताबे रहें। {5:25} शौहरो, अपनी बीवियों से मुहब्बत रखें, बिलकुल उसी तरह जिस तरह मसीह ने अपनी जमाअत से मुहब्बत रख कर अपने आप को उस के लिए क़ुर्बान किया {5:26} ताकि उसे अल्लाह के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस करे। उस ने उसे कलाम-ए-पाक से धो कर पाक-साफ़ कर दिया {5:27} ताकि अपने आप को एक ऐसी जमाअत पेश करे जो जलाली, मुक़द्दस और बेइल्ज़ाम हो, जिस में न कोई दाग़ हो, न कोई झुर्री, न किसी और क़िस्म का नुक़्स। {5:28} शौहरों का फ़र्ज़ है कि वह अपनी बीवियों से ऐसी ही मुहब्बत रखें। हाँ, वह उन से वैसी मुहब्बत रखें जैसी अपने जिस्म से रखते हैं। क्यूँकि जो अपनी बीवी से मुहब्बत रखता है वह अपने आप से ही मुहब्बत रखता है। {5:29} आख़िर कोई भी अपने जिस्म से नफ़रत नहीं करता बल्कि उसे ख़ुराक मुहय्या करता और पालता है। मसीह भी अपनी जमाअत के लिए यही कुछ करता है। {5:30} क्यूँकि हम उस के बदन के आज़ा हैं। {5:31} कलाम-ए-मुक़द्दस में भी लिखा है, “इस लिए मर्द अपने माँ-बाप को छोड़ कर अपनी बीवी के साथ पैवस्त हो जाता है। वह दोनों एक हो जाते हैं।” {5:32} यह राज़ बहुत गहरा है। मैं तो उस का इत्लाक़ मसीह और उस की जमाअत पर करता हूँ। {5:33} लेकिन इस का इत्लाक़ आप पर भी है। हर शौहर अपनी बीवी से इस तरह मुहब्बत रखे जिस तरह वह अपने आप से रखता है। और हर बीवी अपने शौहर की इज़्ज़त करे। {i6:1} बच्चों और वालिदैन का ताल्लुक़ {6:1} बच्चो, ख़ुदावन्द में अपने माँ-बाप के ताबे रहें, क्यूँकि यही रास्तबाज़ी का तक़ाज़ा है। {6:2} कलाम-ए-मुक़द्दस में लिखा है, “अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना।” यह पहला हुक्म है जिस के साथ एक वादा भी किया गया है, {6:3} “फिर तू ख़ुशहाल और ज़मीन पर देर तक जीता रहेगा।” {6:4} ऐ वालिदो, अपने बच्चों से ऐसा सुलूक मत करें कि वह ग़ुस्से हो जाएँ बल्कि उन्हें ख़ुदावन्द की तरफ़ से तर्बियत और हिदायत दे कर पालें। {i6:5} ग़ुलाम और मालिक {6:5} ग़ुलामो, डरते और काँपते हुए अपने इन्सानी मालिकों के ताबे रहें। ख़ुलूसदिली से उन की ख़िदमत यूँ करें जैसे मसीह की। {6:6} न सिर्फ़ उन के सामने ही और उन्हें ख़ुश रखने के लिए ख़िदमत करें बल्कि मसीह के ग़ुलामों की हैसियत से जो पूरी लगन से अल्लाह की मर्ज़ी पूरी करना चाहते हैं। {6:7} ख़ुशी से ख़िदमत करें, इस तरह जैसा कि आप न सिर्फ़ इन्सानों की बल्कि ख़ुदावन्द की ख़िदमत कर रहे हों। {6:8} आप तो जानते हैं कि जो भी अच्छा काम हम ने किया उस का अज्र ख़ुदावन्द देगा, ख़्वाह हम ग़ुलाम हों या आज़ाद। {6:9} और मालिको, आप भी अपने ग़ुलामों से ऐसा ही सुलूक करें। उन्हें धमकियाँ न दें। आप को तो मालूम है कि आसमान पर आप का भी मालिक है और कि वह जानिबदार नहीं होता। {i6:10} रुहानी ज़िराबक्तर {6:10} एक आख़िरी बात, ख़ुदावन्द और उस की ज़बरदस्त क़ुव्वत में ताक़तवर बन जाएँ। {6:11} अल्लाह का पूरा ज़िराबक्तर पहन लें ताकि इब्लीस की चालों का सामना कर सकें। {6:12} क्यूँकि हमारी जंग इन्सान के साथ नहीं है बल्कि हुक्मरानों और इख़तियार वालों के साथ, इस तारीक दुनिया के हाकिमों के साथ और आसमानी दुनिया की शैतानी कुव्वतों के साथ है। {6:13} चुनाँचे अल्लाह का पूरा ज़िराबक्तर पहन लें ताकि आप मुसीबत के दिन इब्लीस के हम्लों का सामना कर सकें बल्कि सब कुछ सरअन्जाम देने के बाद क़ाइम रह सकें। {6:14} अब यूँ खड़े हो जाएँ कि आप की कमर में सच्चाई का पटका बंधा हुआ हो, आप के सीने पर रास्तबाज़ी का सीनाबन्द लगा हो {6:15} और आप के पाँओ में ऐसे जूते हों जो सुलह-सलामती की ख़ुशख़बरी सुनाने के लिए तय्यार रहें। {6:16} इस के इलावा ईमान की ढाल भी उठाए रखें, क्यूँकि इस से आप इब्लीस के जलते हुए तीर बुझा सकते हैं। {6:17} अपने सर पर नजात का ख़ोद पहन कर हाथ में रूह की तलवार जो अल्लाह का कलाम है थामे रखें। {6:18} और हर मौक़े पर रूह में हर तरह की दुआ और मिन्नत करते रहें। जागते और साबितक़दमी से तमाम मुक़द्दसीन के लिए दुआ करते रहें। {6:19} मेरे लिए भी दुआ करें कि जब भी मैं अपना मुँह खोलूँ अल्लाह मुझे ऐसे अल्फ़ाज़ अता करे कि पूरी दिलेरी से उस की ख़ुशख़बरी का राज़ सुना सकूँ। {6:20} क्यूँकि मैं इसी पैग़ाम की ख़ातिर क़ैदी, हाँ ज़न्जीरों में जकड़ा हुआ मसीह का एलची हूँ। दुआ करें कि मैं मसीह में उतनी दिलेरी से यह पैग़ाम सुनाऊँ जितना मुझे करना चाहिए। {i6:21} आख़िरी सलाम {6:21} आप मेरे हाल और काम के बारे में भी जानना चाहेंगे। ख़ुदावन्द में हमारा अज़ीज़ भाई और वफ़ादार ख़ादिम तुख़िकुस आप को यह सब कुछ बता देगा। {6:22} मैं ने उसे इसी लिए आप के पास भेज दिया कि आप को हमारे हाल का पता चले और आप को तसल्ली मिले। {6:23} ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा मसीह आप भाइयों को सलामती और ईमान के साथ मुहब्बत अता करें। {6:24} अल्लाह का फ़ज़्ल उन सब के साथ हो जो अनमिट मुहब्बत के साथ हमारे ख़ुदावन्द ईसा मसीह को प्यार करते हैं।