{i1:1} सलाम {1:1} यह ख़त मसीह ईसा के ग़ुलामों पौलुस और तीमुथियुस की तरफ़ से है। मैं फ़िलिप्पी में मौजूद उन तमाम लोगों को लिख रहा हूँ जिन्हें अल्लाह ने मसीह ईसा के ज़रीए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस किया है। मैं उन के बुज़ुर्गों और ख़ादिमों को भी लिख रहा हूँ। {1:2} ख़ुदा हमारा बाप और ख़ुदावन्द ईसा मसीह आप को फ़ज़्ल और सलामती अता करें। {i1:3} जमाअत के लिए शुक्र-ओ-दुआ {1:3} जब भी मैं आप को याद करता हूँ तो अपने ख़ुदा का शुक्र करता हूँ। {1:4} आप के लिए तमाम दुआओं में मैं हमेशा ख़ुशी से दुआ करता हूँ, {1:5} इस लिए कि आप पहले दिन से ले कर आज तक अल्लाह की ख़ुशख़बरी फैलाने में मेरे शरीक रहे हैं। {1:6} और मुझे यक़ीन है कि अल्लाह जिस ने आप में यह अच्छा काम शुरू किया है इसे उस दिन तक्मील तक पहुँचाएगा जब मसीह ईसा वापस आएगा। {1:7} और मुनासिब है कि आप सब के बारे में मेरा यही ख़याल हो, क्यूँकि आप मुझे अज़ीज़ रखते हैं। हाँ, जब मुझे जेल में डाला गया या मैं अल्लाह की ख़ुशख़बरी का दिफ़ा या उस की तस्दीक़ कर रहा था तो आप भी मेरे इस ख़ास फ़ज़्ल में शरीक हुए। {1:8} अल्लाह मेरा गवाह है कि मैं कितनी शिद्दत से आप सब का आरज़ूमन्द हूँ। हाँ, मैं मसीह की सी दिली शफ़्क़त के साथ आप का ख़्वाहिशमन्द हूँ। {1:9} और मेरी दुआ है कि आप की मुहब्बत में इल्म-ओ-इर्फ़ान और हर तरह की रुहानी बसीरत का यहाँ तक इज़ाफ़ा हो जाए कि वह बढ़ती बढ़ती दिल से छलक उठे। {1:10} क्यूँकि यह ज़रूरी है ताकि आप वह बातें क़बूल करें जो बुन्यादी अहमियत की हामिल हैं और आप मसीह की आमद तक बेलौस और बेइल्ज़ाम ज़िन्दगी गुज़ारें। {1:11} और यूँ आप उस रास्तबाज़ी के फल से भरे रहेंगे जो आप को ईसा मसीह के वसीले से हासिल होती है। फिर आप अपनी ज़िन्दगी से अल्लाह को जलाल देंगे और उस की तम्जीद करेंगे। {i1:12} हर एक को मालूम हो जाए कि मसीह कौन है {1:12} भाइयो, मैं चाहता हूँ कि यह बात आप के इल्म में हो कि जो कुछ भी मुझ पर गुज़रा है वह हक़ीक़त में अल्लाह की ख़ुशख़बरी के फैलाओ का बाइस बन गया है। {1:13} क्यूँकि प्रैटोरियुम के तमाम अफ़राद और बाक़ी सब को मालूम हो गया है कि मैं मसीह की ख़ातिर क़ैदी हूँ। {1:14} और मेरे क़ैद में होने की वजह से ख़ुदावन्द में ज़्यादातर भाइयों का एतिमाद इतना बढ़ गया है कि वह मज़ीद दिलेरी के साथ बिलाख़ौफ़ अल्लाह का कलाम सुनाते हैं। {1:15} बेशक बाज़ तो हसद और मुख़ालफ़त के बाइस मसीह की मुनादी कर रहे हैं, लेकिन बाक़ियों की नीयत अच्छी है, {1:16} क्यूँकि वह जानते हैं कि मैं अल्लाह की ख़ुशख़बरी के दिफ़ा की वजह से यहाँ पड़ा हूँ। इस लिए वह मुहब्बत की रूह में तब्लीग़ करते हैं। {1:17} इस के मुक़ाबले में दूसरे ख़ुलूसदिली से मसीह के बारे में पैग़ाम नहीं सुनाते बल्कि ख़ुदग़रज़ी से। यह समझते हैं कि हम इस तरह पौलुस की गिरिफ़्तारी को मज़ीद तक्लीफ़दिह बना सकते हैं। {1:18} लेकिन इस से क्या फ़र्क़ पड़ता है! अहम बात तो यह है कि मसीह की मुनादी हर तरह से की जा रही है, ख़्वाह मुनाद की नीयत पुरख़ुलूस हो या न। और इस वजह से मैं ख़ुश हूँ। और ख़ुश रहूँगा भी, {1:19} क्यूँकि मैं जानता हूँ कि यह मेरे लिए रिहाई का बाइस बनेगा, इस लिए कि आप मेरे लिए दुआ कर रहे हैं और ईसा मसीह का रूह मेरी हिमायत कर रहा है। {1:20} हाँ, यह मेरी पूरी तवक़्क़ो और उम्मीद है। मैं यह भी जानता हूँ कि मुझे किसी भी बात में शर्मिन्दा नहीं किया जाएगा बल्कि जैसा माज़ी में हमेशा हुआ अब भी मुझे बड़ी दिलेरी से मसीह को जलाल देने का फ़ज़्ल मिलेगा, ख़्वाह मैं ज़िन्दा रहूँ या मर जाऊँ। {1:21} क्यूँकि मेरे लिए मसीह ज़िन्दगी है और मौत नफ़ा का बाइस। {1:22} अगर मैं ज़िन्दा रहूँ तो इस का फ़ाइदा यह होगा कि मैं मेहनत करके मज़ीद फल ला सकूँगा। चुनाँचे मैं नहीं कह सकता कि क्या बेहतर है। {1:23} मैं बड़ी कश-म-कश में रहता हूँ। एक तरफ़ मैं कूच करके मसीह के पास होने की आर्ज़ू रखता हूँ, क्यूँकि यह मेरे लिए सब से बेहतर होता। {1:24} लेकिन दूसरी तरफ़ ज़्यादा ज़रूरी यह है कि मैं आप की ख़ातिर ज़िन्दा रहूँ। {1:25} और चूँकि मुझे इस ज़रूरत का यक़ीन है, इस लिए मैं जानता हूँ कि मैं ज़िन्दा रह कर दुबारा आप सब के साथ रहूँगा ताकि आप तरक़्क़ी करें और ईमान में ख़ुश रहें। {1:26} हाँ, मेरे आप के पास वापस आने से आप मेरे सबब से मसीह ईसा पर हद से ज़्यादा फ़ख़र करेंगे। {1:27} लेकिन आप हर सूरत में मसीह की ख़ुशख़बरी और आसमान के शहरियों के लाइक़ ज़िन्दगी गुज़ारें। फिर ख़्वाह मैं आ कर आप को देखूँ, ख़्वाह ग़ैरमौजूदगी में आप के बारे में सुनूँ, मुझे मालूम होगा कि आप एक रूह में क़ाइम हैं, आप मिल कर यकदिली से उस ईमान के लिए जाँफ़िशानी कर रहे हैं जो अल्लाह की ख़ुशख़बरी से पैदा हुआ है, {1:28} और आप किसी सूरत में अपने मुख़ालिफ़ों से दह्शत नहीं खाते। यह उन के लिए एक निशान होगा कि वह हलाक हो जाएंगे जबकि आप को नजात हासिल होगी, और वह भी अल्लाह से। {1:29} क्यूँकि आप को न सिर्फ़ मसीह पर ईमान लाने का फ़ज़्ल हासिल हुआ है बल्कि उस की ख़ातिर दुख उठाने का भी। {1:30} आप भी उस मुक़ाबले में जाँफ़िशानी कर रहे हैं जिस में आप ने मुझे देखा है और जिस के बारे में आप ने अब सुन लिया है कि मैं अब तक उस में मसरूफ़ हूँ। {i2:1} यगान्गत की ज़रूरत {2:1} क्या आप के दरमियान मसीह में हौसलाअफ़्ज़ाई, मुहब्बत की तसल्ली, रूह-उल-क़ुद्स की रिफ़ाक़त, नर्मदिली और रहमत पाई जाती है? {2:2} अगर ऐसा है तो मेरी ख़ुशी इस में पूरी करें कि आप एक जैसी सोच रखें और एक जैसी मुहब्बत रखें, एक जान और एक ज़हन हो जाएँ। {2:3} ख़ुदग़रज़ न हों, न बातिल इज़्ज़त के पीछे पड़ें बल्कि फ़रोतनी से दूसरों को अपने से बेहतर समझें। {2:4} हर एक न सिर्फ़ अपना फ़ाइदा सोचे बल्कि दूसरों का भी। {i2:5} मसीह की राह-ए-सलीब {2:5} वही सोच रखें जो मसीह ईसा की भी थी। {2:6} वह जो अल्लाह की सूरत पर था नहीं समझता था कि मेरा अल्लाह के बराबर होना कोई ऐसी चीज़ है जिस के साथ ज़बरदस्ती चिमटे रहने की ज़रूरत है। {2:7} नहीं, उस ने अपने आप को इस से महरूम करके ग़ुलाम की सूरत अपनाई और इन्सानों की मानिन्द बन गया। शक्ल-ओ-सूरत में वह इन्सान पाया गया। {2:8} उस ने अपने आप को पस्त कर दिया और मौत तक ताबे रहा, बल्कि सलीबी मौत तक। {2:9} इस लिए अल्लाह ने उसे सब से आला मक़ाम पर सरफ़राज़ कर दिया और उसे वह नाम बख़्शा जो हर नाम से आला है, {2:10} ताकि ईसा के इस नाम के सामने हर घुटना झुके, ख़्वाह वह घुटना आसमान पर, ज़मीन पर या इस के नीचे हो, {2:11} और हर ज़बान तस्लीम करे कि ईसा मसीह ख़ुदावन्द है। यूँ ख़ुदा बाप को जलाल दिया जाएगा। {i2:12} रुहानी तरक़्क़ी का राज़ {2:12} मेरे अज़ीज़ो, जब मैं आप के पास था तो आप हमेशा फ़रमाँबरदार रहे। अब जब मैं गैरहाज़िर हूँ तो इस की कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। चुनाँचे डरते और काँपते हुए जाँफ़िशानी करते रहें ताकि आप की नजात तक्मील तक पहुँचे। {2:13} क्यूँकि ख़ुदा ही आप में वह कुछ करने की ख़्वाहिश पैदा करता है जो उसे पसन्द है, और वही आप को यह पूरा करने की ताक़त देता है। {2:14} सब कुछ बुड़बुड़ाए और बह्स-मुबाहसा किए बग़ैर करें {2:15} ताकि आप बेइल्ज़ाम और पाक हो कर अल्लाह के बेदाग़ फ़र्ज़न्द साबित हो जाएँ, ऐसे लोग जो एक टेढ़ी और उलटी नस्ल के दरमियान ही आसमान के सितारों की तरह चमकते दमकते {2:16} और ज़िन्दगी का कलाम थामे रखते हैं। फिर मैं मसीह की आमद के दिन फ़ख़र कर सकूँगा कि न मैं रायगाँ दौड़ा, न बेफ़ाइदा जिद्द-ओ-जह्द की। {2:17} देखें, जो ख़िदमत आप ईमान से सरअन्जाम दे रहे हैं वह एक ऐसी क़ुर्बानी है जो अल्लाह को पसन्द है। ख़ुदा करे कि जो दुख मैं उठा रहा हूँ वह मै की उस नज़र की मानिन्द हो जो बैत-उल-मुक़द्दस में क़ुर्बानी पर उंडेली जाती है। अगर मेरी नज़र वाक़ई आप की क़ुर्बानी यूँ मुकम्मल करे तो मैं ख़ुश हूँ और आप के साथ ख़ुशी मनाता हूँ। {2:18} आप भी इसी वजह से ख़ुश हों और मेरे साथ ख़ुशी मनाएँ। {i2:19} तीमुथियुस और इपफ़्रुदितुस को फ़िलिप्पियों के पास भेजा जाएगा {2:19} मुझे उम्मीद है कि अगर ख़ुदावन्द ईसा ने चाहा तो मैं जल्द ही तीमुथियुस को आप के पास भेज दूँगा ताकि आप के बारे में ख़बर पा कर मेरा हौसला भी बढ़ जाए। {2:20} क्यूँकि मेरे पास कोई और नहीं जिस की सोच बिलकुल मेरी जैसी है और जो इतनी ख़ुलूसदिली से आप की फ़िक्र करे। {2:21} दूसरे सब अपने मफ़ाद की तलाश में रहते हैं और वह कुछ नज़रअन्दाज़ करते हैं जो ईसा मसीह का काम बढ़ाता है। {2:22} लेकिन आप को तो मालूम है कि तीमुथियुस क़ाबिल-ए-एतिमाद साबित हुआ, कि उस ने मेरा बेटा बन कर मेरे साथ अल्लाह की ख़ुशख़बरी फैलाने की ख़िदमत सरअन्जाम दी। {2:23} चुनाँचे उम्मीद है कि जूँ ही मुझे पता चले कि मेरा क्या बनेगा मैं उसे आप के पास भेज दूँगा। {2:24} और मेरा ख़ुदावन्द में ईमान है कि मैं भी जल्द ही आप के पास आऊँगा। {2:25} लेकिन मैं ने ज़रूरी समझा कि इतने में इपफ़्रुदितुस को आप के पास वापस भेज दूँ जिसे आप ने क़ासिद के तौर पर मेरी ज़रूरियात पूरी करने के लिए मेरे पास भेज दिया था। वह मेरा सच्चा भाई, हमख़िदमत और साथी सिपाही साबित हुआ। {2:26} मैं उसे इस लिए भेज रहा हूँ क्यूँकि वह आप सब का निहायत आरज़ूमन्द है और इस लिए बेचैन है कि आप को उस के बीमार होने की ख़बर मिल गई थी। {2:27} और वह था भी बीमार बल्कि मरने को था। लेकिन अल्लाह ने उस पर रहम किया, और न सिर्फ़ उस पर बल्कि मुझ पर भी ताकि मेरे दुख में इज़ाफ़ा न हो जाए। {2:28} इस लिए मैं उसे और जल्दी से आप के पास भेजूँगा ताकि आप उसे देख कर ख़ुश हो जाएँ और मेरी परेशानी भी दूर हो जाए। {2:29} चुनाँचे ख़ुदावन्द में बड़ी ख़ुशी से उस का इस्तिक़्बाल करें। उस जैसे लोगों की इज़्ज़त करें, {2:30} क्यूँकि वह मसीह के काम के बाइस मरने की नौबत तक पहुँच गया था। उस ने अपनी जान ख़तरे में डाल दी ताकि आप की जगह मेरी वह ख़िदमत करे जो आप न कर सके। {i3:1} अल्लाह में ख़ुशी {3:1} मेरे भाइयो, जो कुछ भी हो, ख़ुदावन्द में ख़ुश रहें। मैं आप को यह बात बताते रहने से कभी थकता नहीं, क्यूँकि ऐसा करने से आप मह्फ़ूज़ रहते हैं। {i3:2} यहूदियों से ख़बरदार {3:2} कुत्तों से ख़बरदार! उन शरीर मज़दूरों से होश्यार रहना जो जिस्म की काँट-छाँट यानी ख़तना करवाते हैं। {3:3} क्यूँकि हम ही हक़ीक़ी ख़तना के पैरोकार हैं, हम ही हैं जो अल्लाह के रूह में परस्तिश करते, मसीह ईसा पर फ़ख़र करते और इन्सानी ख़ूबियों पर भरोसा नहीं करते। {i3:4} पौलुस की शख़्सी गवाही {3:4} बात यह नहीं कि मेरा अपनी इन्सानी ख़ूबियों पर भरोसा करने का कोई जवाज़ न होता। जब दूसरे अपनी इन्सानी ख़ूबियों पर फ़ख़र करते हैं तो मैं उन की निस्बत ज़्यादा कर सकता हूँ। {3:5} मेरा ख़तना हुआ जब मैं अभी आठ दिन का बच्चा था। मैं इस्राईल क़ौम के क़बीले बिनयमीन का हूँ, ऐसा इब्रानी जिस के वालिदैन भी इब्रानी थे। मैं फ़रीसियों का मैम्बर था जो यहूदी शरीअत के कट्टर पैरोकार हैं। {3:6} मैं इतना सरगर्म था कि मसीह की जमाअतों को ईज़ा पहुँचाई। हाँ, मैं शरीअत पर अमल करने में रास्तबाज़ और बेइल्ज़ाम था। {i3:7} हक़ीक़ी फ़ाइदा {3:7} उस वक़्त यह सब कुछ मेरे नज़्दीक नफ़ा का बाइस था, लेकिन अब मैं इसे मसीह में होने के बाइस नुक़्सान ही समझता हूँ। {3:8} हाँ, बल्कि मैं सब कुछ इस अज़ीमतरीन बात के सबब से नुक़्सान समझता हूँ कि मैं अपने ख़ुदावन्द मसीह ईसा को जानता हूँ। उसी की ख़ातिर मुझे तमाम चीज़ों का नुक़्सान पहुँचा है। मैं उन्हें कूड़ा ही समझता हूँ ताकि मसीह को हासिल करूँ {3:9} और उस में पाया जाऊँ। लेकिन मैं इस नौबत तक अपनी उस रास्तबाज़ी के ज़रीए नहीं पहुँच सकता जो शरीअत के ताबे रहने से हासिल होती है। इस के लिए वह रास्तबाज़ी ज़रूरी है जो मसीह पर ईमान लाने से मिलती है, जो अल्लाह की तरफ़ से है और जो ईमान पर मब्नी होती है। {3:10} हाँ, मैं सब कुछ कूड़ा ही समझता हूँ ताकि मसीह को, उस के जी उठने की क़ुदरत और उस के दुखों में शरीक होने का फ़ज़्ल जान लूँ। यूँ मैं उस की मौत का हमशक्ल बनता जा रहा हूँ, {3:11} इस उम्मीद में कि मैं किसी न किसी तरह मुर्दों में से जी उठने की नौबत तक पहुँचूँगा। {i3:12} इनआम हासिल करने के लिए दौड़ें {3:12} मतलब यह नहीं कि मैं यह सब कुछ हासिल कर चुका या कामिल हो चुका हूँ। लेकिन मैं मन्ज़िल-ए-मक़सूद की तरफ़ दौड़ा हुआ जाता हूँ ताकि वह कुछ पकड़ लूँ जिस के लिए मसीह ईसा ने मुझे पकड़ लिया है। {3:13} भाइयो, में अपने बारे में यह ख़याल नहीं करता कि मैं इसे हासिल कर चुका हूँ। लेकिन मैं इस एक ही बात पर ध्यान देता हूँ, जो कुछ मेरे पीछे है वह मैं भूल कर सख़्त तग-ओ-दौ के साथ उस तरफ़ बढ़ता हूँ जो आगे पड़ा है। {3:14} मैं सीधा मन्ज़िल-ए-मक़सूद की तरफ़ दौड़ा हुआ जाता हूँ ताकि वह इनआम हासिल करूँ जिस के लिए अल्लाह ने मुझे मसीह ईसा में आसमान पर बुलाया है। {i3:15} मसीह में पुख़्ता होना {3:15} चुनाँचे हम में से जितने कामिल हैं आएँ, हम ऐसी सोच रखें। और अगर आप किसी बात में फ़र्क़ सोचते हैं तो अल्लाह आप पर यह भी ज़ाहिर करेगा। {3:16} जो भी हो, जिस मरहले तक हम पहुँच गए हैं आएँ, हम उस के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारें। {3:17} भाइयो, मिल कर मेरे नक़्श-ए-क़दम पर चलें। और उन पर ख़ूब ध्यान दें जो हमारे नमूने पर चलते हैं। {3:18} क्यूँकि जिस तरह मैं ने आप को कई बार बताया है और अब रो रो कर बता रहा हूँ, बहुत से लोग अपने चाल-चलन से ज़ाहिर करते हैं कि वह मसीह की सलीब के दुश्मन हैं। {3:19} ऐसे लोगों का अन्जाम हलाकत है। खाने-पीने की पाबन्दियाँ और ख़तने पर फ़ख़र उन का ख़ुदा बन गया है। हाँ, वह सिर्फ़ दुनियावी सोच रखते हैं। {3:20} लेकिन हम आसमान के शहरी हैं, और हम शिद्दत से इस इन्तिज़ार में हैं कि हमारा नजातदहिन्दा और ख़ुदावन्द ईसा मसीह वहीं से आए। {3:21} उस वक़्त वह हमारे पस्तहाल बदनों को बदल कर अपने जलाली बदन के हमशक्ल बना देगा। और यह वह उस क़ुव्वत के ज़रीए करेगा जिस से वह तमाम चीज़ें अपने ताबे कर सकता है। {i4:1} हिदायात {4:1} चुनाँचे मेरे प्यारे भाइयो, जिन का आरज़ूमन्द मैं हूँ और जो मेरी मुसर्रत का बाइस और मेरा ताज हैं, ख़ुदावन्द में साबितक़दम रहें। अज़ीज़ो, {4:2} मैं युवदिया और सुन्तुख़े से अपील करता हूँ कि वह ख़ुदावन्द में एक जैसी सोच रखें। {4:3} हाँ मेरे हमख़िदमत भाई, मेरी आप से गुज़ारिश है कि आप उन की मदद करें। क्यूँकि वह अल्लाह की ख़ुशख़बरी फैलाने की जिद्द-ओ-जह्द में मेरे साथ ख़िदमत करती रही हैं, उस मुक़ाबले में जिस में क्लेमेंस और मेरे वह बाक़ी मददगार भी शरीक थे जिन के नाम किताब-ए-हयात में दर्ज हैं। {4:4} हर वक़्त ख़ुदावन्द में ख़ुशी मनाएँ। एक बार फिर कहता हूँ, ख़ुशी मनाएँ। {4:5} आप की नर्मदिली तमाम लोगों पर ज़ाहिर हो। याद रखें कि ख़ुदावन्द आने को है। {4:6} अपनी किसी भी फ़िक्र में उलझ कर परेशान न हो जाएँ बल्कि हर हालत में दुआ और इल्तिजा करके अपनी दरख़्वास्तें अल्लाह के सामने पेश करें। ध्यान रखें कि आप यह शुक्रगुज़ारी की रूह में करें। {4:7} फिर अल्लाह की सलामती जो समझ से बाहर है आप के दिलों और ख़यालात को मसीह ईसा में मह्फ़ूज़ रखेगी। {4:8} भाइयो, एक आख़िरी बात, जो कुछ सच्चा है, जो कुछ शरीफ़ है, जो कुछ रास्त है, जो कुछ मुक़द्दस है, जो कुछ पसन्दीदा है, जो कुछ उम्दा है, ग़रज़, अगर कोई अख़्लाक़ी या क़ाबिल-ए-तारीफ़ बात हो तो उस का ख़याल रखें। {4:9} जो कुछ आप ने मेरे वसीले से सीख लिया, हासिल कर लिया, सुन लिया या देख लिया है उस पर अमल करें। फिर सलामती का ख़ुदा आप के साथ होगा। {i4:10} जमाअत की माली इम्दाद के लिए शुक्रिया {4:10} मैं ख़ुदावन्द में निहायत ही ख़ुश हुआ कि अब आख़िरकार आप की मेरे लिए फ़िक्रमन्दी दुबारा जाग उठी है। हाँ, मुझे पता है कि आप पहले भी फ़िक्रमन्द थे, लेकिन आप को इस का इज़हार करने का मौक़ा नहीं मिला था। {4:11} मैं यह अपनी किसी ज़रूरत की वजह से नहीं कह रहा, क्यूँकि मैं ने हर हालत में ख़ुश रहने का राज़ सीख लिया है। {4:12} मुझे दबाए जाने का तजरिबा हुआ है और हर चीज़ कस्रत से मुयस्सर होने का भी। मुझे हर हालत से ख़ूब वाक़िफ़ किया गया है, सेर होने से और भूका रहने से भी, हर चीज़ कस्रत से मुयस्सर होने से और ज़रूरतमन्द होने से भी। {4:13} मसीह में मैं सब कुछ करने के क़ाबिल हूँ, क्यूँकि वही मुझे तक़वियत देता रहता है। {4:14} तो भी अच्छा था कि आप मेरी मुसीबत में शरीक हुए। {4:15} आप जो फ़िलिप्पी के रहने वाले हैं ख़ुद जानते हैं कि उस वक़्त जब मसीह की मुनादी का काम आप के इलाक़े में शुरू हुआ था और मैं सूबा मकिदुनिया से निकल आया था तो सिर्फ़ आप की जमाअत पूरे हिसाब-किताब के साथ पैसे दे कर मेरी ख़िदमत में शरीक हुई। {4:16} उस वक़्त भी जब मैं थिस्सलुनीके शहर में था आप ने कई बार मेरी ज़रूरियात पूरी करने के लिए कुछ भेज दिया। {4:17} कहने का मतलब यह नहीं कि मैं आप से कुछ पाना चाहता हूँ, बल्कि मेरी शदीद ख़्वाहिश यह है कि आप के देने से आप ही को अल्लाह से कस्रत का सूद मिल जाए। {4:18} यही मेरी रसीद है। मैं ने पूरी रक़म वसूल पाई है बल्कि अब मेरे पास ज़रूरत से ज़्यादा है। जब से मुझे इपफ़्रुदितुस के हाथ आप का हदिया मिल गया है मेरे पास बहुत कुछ है। यह ख़ुश्बूदार और क़ाबिल-ए-क़बूल क़ुर्बानी अल्लाह को पसन्दीदा है। {4:19} जवाब में मेरा ख़ुदा अपनी उस जलाली दौलत के मुवाफ़िक़ जो मसीह ईसा में है आप की तमाम ज़रूरियात पूरी करे। {4:20} अल्लाह हमारे बाप का जलाल अज़ल से अबद तक हो। आमीन। {i4:21} सलाम और बरकत {4:21} तमाम मक़ामी मुक़द्दसीन को मसीह ईसा में मेरा सलाम देना। जो भाई मेरे साथ हैं वह आप को सलाम कहते हैं। {4:22} यहाँ के तमाम मुक़द्दसीन आप को सलाम कहते हैं, ख़ासकर शहन्शाह के घराने के भाई और बहनें। {4:23} ख़ुदावन्द ईसा मसीह का फ़ज़्ल आप की रूह के साथ रहे। आमीन।